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    July 12, 2020 12 Jyotirlingas, Baidyanath, Bhimashankar, Grishneshwar, Kedarnath, Mahakaleswar, Mallikarjuna, Nageshvara, Omkareshwar, Photo, Ramanathaswamy, Shiva, Somnath, Temples of Lord Shiva, Trimbakeshwar, Vishwanath

    12 ज्योतिर्लिंग और क्या है उनके महत्व 


    भारत में प्रमुख शिवस्थान अर्थात ज्योतिर्लिंग बारह हैं । ये तेजस्वी रूप में प्रकट हुए । तेरहवें पिंड को कालपिंड कहते हैं । काल-मर्यादा के परे पहुंचे पिंड को (देहको) कालपिंड कहते हैं । ये बारह ज्योतिर्लिंग निम्नानुसार हैं ।

    ज्योतिर्लिंग स्थान
    १. सोमनाथ प्रभासपट्टण, वेरावल के पास, सौराष्ट्र, गुजरात.
    २. मल्लिकार्जुन श्रीशैल, आंध्रप्रदेश
    ३. महाकाल उज्जैन, मध्यप्रदेश
    ४. ओंकार / अमलेश्वर ओंकार, मांधाता, मध्यप्रदेश
    ५. केदारनाथ उत्तराखंड
    ६. भीमाशंकर डाकिनी क्षेत्र, तालुका खेड, जनपद पुणे, महाराष्ट्र.
    ७. विश्वेश्वर वाराणसी, उत्तरप्रदेश
    ८. त्र्यंबकेश्वर नासिक के पास, महाराष्ट्र
    ९. वैद्यनाथ (वैजनाथ)(टिप्पणी १) परळी, जनपद बीड, महाराष्ट्र
    १०. नागेश (नागनाथ)(टिप्पणी २) दारुकावन, द्वारका, गुजरात
    ११. रामेश्वर सेतुबंध, कन्याकुमारी के पास, तमिलनाडु.
    १२. घृष्णेश्वर (घृष्णेश) वेरूळ, जनपद औरंगाबाद, महाराष्ट्र.

    टिप्पणी १ – पाठभेद : वैद्यनाथधाम, झारखंड.
    टिप्पणी २ – पाठभेद १ : अलमोडा, उत्तर प्रदेश
    पाठभेद २ : औंढा, जनपद हिंगोली, महाराष्ट्र.
    ये बारह ज्योतिर्लिंग प्रतीकात्मक रूप में शरीर है; काठमंडू का पशुपतिनाथ ज्योतिर्लिंगों का शीश है ।

    १. ज्योतिर्लिंग एवं संतों की समाधिस्थल का महत्त्व

    संतोंद्वारा समाधि लेने के उपरांत उनका कार्य सूक्ष्म से अधिक मात्रा में होता है । संतों के देहत्याग करने पर उनकी देह से प्रक्षेपित चैतन्यतरंगों तथा सात्त्विक तरंगों की मात्रा अधिक होती है । जिस प्रकार संतों की समाधि भूमि के नीचे होती है, उसी प्रकार ज्योतिर्लिंग एवं स्वयंभू लिंग भूमि के नीचे हैं । अन्य शिवलिंगों की तुलना में इन शिवलिंगों में निर्गुण तत्त्व की मात्रा अधिक होती है, इसलिए उनसे अधिक मात्रा में निर्गुण चैतन्य एवं सात्त्विकता का प्रक्षेपण निरंतर होता है । इससे पृथ्वी का वातावरण निरंतर शुद्ध होते रहता है । ज्योतिर्लिंग एवं संतों के समाधिस्थल से पाताल की दिशा में निरंतर चैतन्य तथा सात्त्विकता का प्रक्षेपण होता है । पाताल की अनिष्ट शक्तियों से इनका युद्ध निरंतर जारी रहता है । इस प्रकार भूलोक की अनिष्ट शक्तियों के आक्रमणों से रक्षा होती है ।

    २. विशेषताएं

    रुद्राक्ष मंत्रसिद्धि हेतु आवश्यक गुण एवं शक्ति अनुसार उचित ज्योतिर्लिंग का चयन कर उसका अभिषेक करें, उदा. महांकाल तामसी शक्ति से युक्त हैं (सभी ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र दक्षिणामुखी ज्योतिर्लिंग उज्जैन के महांकाल को ही माना जाता है । तांत्रिक उपासना में इसका महत्त्व अधिक है; परंतु इसकी अरघा का स्रोत पूर्व दिशा की ओर है ।), नागनाथ हरिहरस्वरूप हैं तथा सत्त्व एवं तमोगुणप्रधान हैं, त्र्यंबकेश्वर त्रिगुणात्मक (अवधूत) हैं तथा सोमनाथ रोगमुक्ति हेतु उचित हैं ।

    ३. ज्योतिर्लिंग का अर्थ

    अ. व्यापक ब्रह्मात्मलिंग अथवा व्यापक प्रकाश
    आ. तैत्तिरीय उपनिषद् में ब्रह्म, माया, जीव, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार एवं पंचमहाभूत, इन बारह तत्त्वों को बारह ज्योतिर्लिंग माना गया है ।
    इ. शिवलिंग के बारह खंड
    ई. अरघा यज्ञवेदी का दर्शक है एवं लिंग यज्ञप्रतीक ज्योति का अर्थात यज्ञशिखा का द्योतक है ।
    उ. द्वादश आदित्यों के प्रतीक
    ऊ. प्रसुप्त ज्वालामुखियों के उद्भेदस्थान
    दक्षिण दिशा के स्वामी यमराज शिवजी के आधिपत्य में हैं, इसलिए दक्षिण दिशा शिवजी की ही हुई । अरघा का स्रोत दक्षिण की ओर हो, तो वह ज्योतिर्लिंग दक्षिणाभिमुखी होता है एवं ऐसी पिंडी अधिक शक्तिशाली होती है । (पाठभेद – उज्जैन स्थित ज्योतिर्लिंग का श्रृंगार करते समय शिवलिंग पर शिवजी का मुख दक्षिण दिशा की ओर दिखाया जाता है ।) स्रोत यदि उत्तर की ओर हो, तो पिंडी अल्प शक्तिशाली होती है । अधिकांश मंदिर दक्षिणाभिमुखी नहीं होते ।

    यह माना जाता है कि जो व्यक्ति 12 ज्योतिर्लिंग का दर्शन करता है वह सबसे भाग्यशाली होता है। ये 12 स्थान वे हैं जहां भगवान शिव स्वयं ज्योति रूप में विद्यमान हैं। या हमारे देश के विभिन्न भागों में स्थित है। इन्हें द्वादश ज्योतिर्लिंग के नाम से भी जाना जाता है। देव के देव महादेव कि आराधना श्रवण मास में करने से भक्तों के कष्ट शीघ्र ही दूर होते हैं।

    1. श्री सोमनाथ
    सभी 12 ज्योतिर्लिंग में प्रथम स्थान पर श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग आता है। यह गुजरात के वेरावल में स्थित है। इस मंदिर का निर्माण चंद्रदेव ने किया था। इस मंदिर का उल्लेख हम ऋग्वेद में भी पाते हैं। अब तक इस मंदिर को 17 बार नष्ट किया गया परंतु हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया। यहाँ रेल और बस से पहुंचा जा सकता है। इस मंदिर के दर्शन के लिए आप वेरावल तक रेल से यात्रा कर सकते हैं। वर्तमान श्री सोमनाथ मंदिर का उदघाटन देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद द्वारा किया गया था।
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    2. श्री मल्लिकार्जुन
    यह ज्योतिर्लिंग आंध्रप्रदेश के कृष्ण जिले में श्रीशैल पर्वत पर स्थित है। इस पर्वत को दक्षिण भारत का कैलास भी कहा जाता है। यहाँ आकर शिवलिंग का दर्शन एवं पुजा-अर्चना करने वाले भक्तों कि सभी सात्विक मनोकामनाएँ पूर्ण हो जाती है। दैहिक, दैविक, भौतिक सभी प्रकार कि बाधाओं से मुक्ति मिलता है। यहाँ जाने के लिए आप बिनूगोडा - मकरपुर रोड तक रेल से जा सकते हैं।
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    3. श्री महकलेश्वर
    यह ज्योतिर्लिंग मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित है। स्वयंभू, भव्य और दक्षिणमुखी होने के कारण श्री महाकालेश्वर महादेव कि अत्यंत पुण्यदायी है। इस ज्योतिर्लिंग का अपना एक अलग महत्व है। कहा जाता है कि जो महाकाल का भक्त है उसका काल भी कुछ नहीं बिगड़ सकता है। शिप्रा नदी के तट पर स्थित इस मंदिर के दर्शन के लिए आप रेल मार्ग द्वारा पहुँच सकते हैं।

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    4. श्री ओंकारेश्वर
    यह ज्योतिर्लिंग मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी के तट पर स्थित है। इस जगह भगवान शिव ओमकार स्वरूप में प्रकट हुए थे तथा यह भी माना जाता है कि भोलेनाथ प्रतिदिन तीनों लोकों के भ्रमण के उपरांत यहाँ आकर विश्राम करते हैं। यहाँ प्रतिदिन भगवान शिव कि शयन आरती कि जाती है। इंदौर-खंडवा रेलमार्ग पर ओंकारेश्वर रोड स्टेशन है। जहां से यह मंदिर 12 किमी कि दूरी पर स्थित है।
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    5. श्री केदारनाथ
    भगवान शिव का यह अवतार उत्तराखंड के हिमालय में लगभग 12 हजार फुट कि ऊंचाई पर स्थित है। पुराणों और शास्त्रों में केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग कि महिमा का वर्णन कई बार आता है। यह मंदिर वास्तुकला का अद्भुत व आकर्षक नमूना प्रस्तुत करता है। यहाँ पहुँचने के लिए ऋषिकेश तक रेल मार्ग द्वारा तथा इसके बाद गौरीकुंड तक बस के द्वारा पहुंचा जा सकता है। इसके आगे कि यात्रा पैदल अथवा टट्टू के द्वारा तय किया जा सकता है।
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    6. श्री भीमाशंकर
    महाराष्ट्र के सह्याद्रि पर्वतमाला में भीमा नदी के तट पर यह ज्योतिर्लिंग स्थित है। 3250 फीट कि ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर का शिवलिंग काफी मोटा है। अतः इसे मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। पुराणों में यह मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धापूर्वक इस मंदिर का प्रतिदिन सुबह सूर्य निकलने के बाद 12 ज्योतिर्लिंगों का नाम जपते हुए दर्शन करता है, उनके सात जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं तथा उनके लिए स्वर्ग का मार्ग खुल जाता है।
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    7. श्री विश्वनाथ
    यह ज्योतिर्लिंग उत्तरप्रदेश के काशी में गंगा तट पर स्थित है। अगस्त्य मुनि ने इसी स्थान पर अपनी तपस्या द्वारा भगवान शिव को संतुष्ट किया था। यह मान्यता है कि यहाँ जो भी प्राणी अपना प्राण त्यागता है उसे मोक्ष कि प्राप्ति होती है, क्योंकि भगवान विश्वनाथ स्वयं उसे मरते वक्त तारक मंत्र सुनाते हैं। इस ज्योर्तिलिंग के दर्शन एवं पूजन करने से भगवान शिव कि कृपा भक्त जनों पर सदेव बनी रहती है।
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    8. श्री त्रयम्बकेश्वर
    यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के नासिक से 25 किमी दूर गोदावरी नदी के तट पर है। इस मंदिर का संबंध गौतम ऋषि और उनके द्वारा लाई गयी गोदावरी से है। त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जिसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों विराजमान है। इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन से तीनों देवताओं के दर्शन का सुख प्राप्त होता है।
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    9. श्री वैद्यनाथ
    यह ज्योर्तिलिंग झारखंड के देवघर में स्थित है। कहा जाता है कि रावण ने घोर तपस्या कर शिव से एक शिवलिंग प्राप्त किया जिसे वह लंका में स्थापित करना चाहता था। हिमालय से लंका जाने के क्रम में उन्हें लघुशंका कि आवश्यकता महसूस हुई। रावण ने शिवलिंग एक अहीर के हाथ देकर लघुशंका के लिए चले गए। वह अहीर शिवलिंग का भर उठा नहीं पाया और शिवलिंग भूमि पर रख दिया। भूमि में रखते ही शिवलिंग वहाँ स्थापित हो गया। इस तरह यह ज्योतिर्लिंग "श्री वैद्यनाथ" के नाम से जाना जाने लगा। रोग मुक्ति के लिए इस ज्योतिर्लिंग कि महिमा प्रसिद्ध है।
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    10. श्री नागेश्वर
    गुजरात के दारुकावन क्षेत्र में हिंगोली नामक स्थान से 27 किमी कि दूरी पर यह ज्योतिर्लिंग स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग कि स्थापना उस जगह हुई थी जहां सुप्रिय नामक वैश्य ने भगवान शिव से प्राप्त पाशुपतास्त्र से दारुक राक्षस का नाश किया था। रुद्र संहिता में इन्हें 'दारुकावने नागेशम' कहा जाता है। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग परिसर में भगवान शिव की पद्मासन मुद्रा में 125 फीट ऊंची तथा 25 फीट चौड़ी एक विशालकाय मूर्ति स्थापित है।
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    11. श्री रामेश्वर
    इस ज्योतिर्लिंग का संबंध भगवान राम से है। राम वानर सेना सहित लंका आक्रमण हेतु देश के दक्षिण छोर आ पहुंचे। यहाँ पर श्रीराम ने बालू का शिवलिंग बनाकर शिव कि आराधना किया और रावण पर विजय हेतु शिव से वरदान मांगा। यह ज्योतिर्लिंग तमिलनाडू में स्थित है। यहाँ सड़क मार्ग एवं रेल मार्ग दोनों से पहुंचा जा सकता है।
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    12. श्री घृष्णेश्वर
    रुद्रकोटीसंहिता, शिव महापुराण स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंगस्तोत्रां के अनुसार यह ज्योतिर्लिंग बारहवें तथा अंतिम क्रम में आता है। यह मंदिर महाराष्ट्र राज्य के औरंगाबाद शहर के नजदीक दौलतबाद से 11 किमी कि दूरी पर वेलूर नामक गाँव में स्थित है। संतान प्राप्ति के इस ज्योतिर्लिंग कि महिमा प्रसिद्ध है। इस मंदिर के दर्शन के लिए आप औरंगाबाद तक रेल मार्ग द्वारा जा सकते हैं। इसके बाद सड़क मार्ग द्वारा इस मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
    12 ज्योतिर्लिंग और क्या है उनके महत्व

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