educratsweb logo


जय माँ श्री हरसिद्धि देवी शक्तिपीठ 




उज्जैन के निकट शिप्रा नदी के तट पर स्थित भैरवपर्वत पर प्राचीन शक्तिपीठ की मान्यता है।

स्थिति

हिन्दू धर्म के पुराणों के अनुसार जहां-जहां सती के अंग के टुकड़े, धारण किए वस्त्र या आभूषण गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठ अस्तित्व में आये। ये अत्यंत पावन तीर्थस्थान कहलाये। ये तीर्थ पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर फैले हुए हैं। देवीपुराण में 51 शक्तिपीठों का वर्णन है। भूत-भावना महाकालेश्वर की क्रीड़ा-स्थली 'अवंतिका' (उज्जैन) पावन शिप्रा के दोनों तटों पर स्थित है। यहीं पार्वती हरसिद्धि देवी का मंदिर शक्तिपीठ, रुद्रसागर या रुद्र सरोवर नाम से तालाब के निकट है।

पौराणिक उल्लेख

शिव पुराण की मान्यता के अनुसार जब सती बिन बुलाए अपने पिता के घर गईं और वहां पर दक्ष के द्वारा अपने पति का अपमान सहन न कर सकने पर उन्होंने अपनी काया को अपने ही तेज से भस्म कर दिया। भगवान शंकर यह शोक सह नहीं पाए और उनका तीसरा नेत्र खुल गया, जिससे चारों ओर प्रलय मच गई। भगवान शंकर ने माता सती के पार्थिव शरीर को कंधे पर उठा लिया और जब शिव अपनी पत्नी सती की जलती पार्थिव देह को दक्ष प्रजापति की यज्ञ वेदी से उठाकर ले जा रहे थे, तब विष्णु ने सती के अंगों को अपने चक्र से 52 भागों में बांट दिया। उज्जैन के इस स्थान पर सती की कोहनी का पतन हुआ था। अतः यहाँ कोहनी की पूजा होती है। यहाँ की शक्ति ‘मंगल चण्डिका’ तथा भैरव ‘मांगल्य कपिलांबर’ हैं -

उज्जयिन्यां कूर्परं व मांगल्य कपिलाम्बरः।

भैरवः सिद्धिदः साक्षात् देवी मंगल चण्डिका।

तीर्थस्थल

कहते हैं कि प्राचीन मंदिर रुद्र सरोवर के तट पर स्थित था तथा सरोवर सदैव कमलपुष्पों से परिपूर्ण रहता था। इसके पश्चिमी तट पर 'देवी हरसिद्धि' का तथा पूर्वी तट पर 'महाकालेश्वर' का मंदिर था। 18वीं शताब्दी में इन मंदिरों का पुनर्निर्माण हुआ। वर्तमान हरसिद्धि मंदिर चहार दीवारी से घिरा है।

देवी प्रतिमा

मंदिर के मुख्य पीठ पर प्रतिमा के स्थान पर 'श्रीयंत्र' है। इस पर सिंदूर चढ़ाया जाता है, अन्य प्रतिमाओं पर नहीं और उसके पीछे भगवती अन्नपूर्णा की प्रतिमा है। गर्भगृह में हरसिद्धि देवी की प्रतिमा की पूजा होती है। मंदिर में महालक्ष्मी, महाकाली, महासरस्वती की प्रतिमाएँ हैं। मंदिर के पूर्वी द्वार पर बावड़ी है, जिसके बीच में एक स्तंभ है, जिस पर संवत 1447 अंकित है तथा पास ही में सप्तसागर सरोवर है। मंदिर के जगमोहन के सामने दो बड़े दीप स्तंभ हैं।

श्रीयंत्र की पूजा

शिवपुराण के अनुसार यहाँ श्रीयंत्र की पूजा होती है। इन्हें विक्रमादित्य की आराध्या माना जाता है। स्कंद पुराण[2] में देवी हरसिद्धि का उल्लेख है। मंदिर परिसर में आदिशक्ति महामाया का भी मंदिर है, जहाँ सदैव ज्योति प्रज्जवलित होती रहती है तथा दोनों नवरात्रों में यहाँ उनकी महापूजा होती है-

नवम्यां पूजिता देवी हरसिद्धि हरप्रिया

दीप स्तंभ

मंदिर की सीढ़ियाँ चढ़ते ही वाहन सिंह की प्रतिमा है। द्वार के दाईं ओर दो बड़े नगाड़े रखे हैं, जो प्रातः सायं आरती के समय बजाए जाते हैं। मंदिर के सामने दो बड़े दीप स्तंभ हैं। इनमें से एक 'शिव' है, जिसमें 501 दीपमालाएँ हैं, दूसरा 'पार्वती' है, जिसमें 500 दीपमालाएँ हैं तथा दोनों दीप स्तंभों पर दीपक जलाए जाते हैं। कुल मिलाकर इन 1001 दीपकों को जलाने में एक समय में तीन टिन रिफाइंड तेल यानी की कुल 45 लीटर तेल लग जाता है और सब मिलाकर इस काम पर एक समय का खर्च 7000 रुपये का है, जिसमें लेबर भी शामिल रहती है। यह सब कुछ दानी सज्जनों द्वारा प्रायोजित होता है। लोग पहले से ही इसकी बुकिंग करवा देते हैं।

विशेष तथ्य

प्रसंगवश हरसिद्धि देवी का एक मंदिर द्वारका (सौराष्ट्र) में भी है। दोनों स्थानों (उज्जयिनी तथा द्वारका) पर देवी की मूर्तियाँ एक जैसी हैं। इंदौर से 80 किलोमीटर दूर पुणे मार्ग पर स्थित उज्जैन प्राचीन काल से ही तीर्थस्थल रहा है। यहाँ का महाकालेश्वर मंदिर (ज्योतिर्लिंग) तथा बड़ा गणेश मंदिर, चिंतामणि गणेश मंदिर आदि दर्शनीय हैं।

educratsweb.com

Posted by: educratsweb.com

I am owner of this website and bharatpages.in . I Love blogging and Enjoy to listening old song. ....
Enjoy this Author Blog/Website visit http://twitter.com/bharatpages

if you have any information regarding Job, Study Material or any other information related to career. you can Post your article on our website. Click here to Register & Share your contents.
For Advertisment or any query email us at educratsweb@gmail.com

RELATED POST
1. पितरों का श्राद्ध करना चाहिए? शास्त्रों और पुराणों में श्राद्ध के बारे में क्या बताया है?
पितरों का श्राद्ध करना चाहिए? शास्त्रों और पुराणों में श्राद्ध के बारे में क्या बताया है?
2. श्री रावण कृतं सम्पूर्ण शिव तांडव स्तोत्र
“श्री रावण कृतं सम्पूर्ण शिव तांडव स्तोत्र” "शिव ताण्डव स्तोत्र की महिमा" हर किसी के मन में एक ख्याल हमेशा आता है कि; क्या कोई ऐसा मंत्र है जो आपको सारा वैभव और सिद्ध
3. आरती के बाद क्यों बोलते हैं कर्पूरगौरं मंत्र
आरती के बाद क्यों बोलते हैं कर्पूरगौरं मंत्र किसी भी मंदिर में या अपने घर में जब भी पूजन कर्म होते हैं तो वहां कुछ मंत्रों का जप अ
4. बरसाने के एक संत की कथा
बरसाने के एक संत की कथा एक संत बरसाना में रहते थे और हर रोज सुबह उठकर यमुना जी में स्नान करके राधा जी के
5. 12 ज्योतिर्लिंग और क्या है उनके महत्व
12 ज्योतिर्लिंग और क्या है उनके महत्व July 12, 2020 12 Jyotirlingas, Baidyanath, Bhimashankar,
6. शाबर मंत्रों से पल भर में सिद्ध होते हैं हर काम
  शाबर मंत्रों से पल भर में सिद्ध होते हैं हर काम अचूक एवं स्वयंसिद्ध मंत्र शाबर मंत्र आम ग्रामीण बोलचाल की भाषा में ऐसे स्वयंसिद्ध मंत्र हैं जिनका प्रभाव अचूक होता है।
7. पूजा के नियम : सामान्य पूजन विधि
पूजा के नियम : सामान्य पूजन विधि  इस पेज में मैंने पूजन करने की सामान्य विधि का वर्णन किया है. ये परम पूज्य रामकृष्ण परमहंस द्वारा प्रतिपादित तांत्रिक पद्धति है. राम कृष्ण मिशन में इसी पद्धत
8. Navratra : नवरात्री विशेष : साधकों/उपासकों द्वारा नवरात्र के पूजन में की जाने वाली सामान्य भूलें
साधकों/उपासकों द्वारा नवरात्र के पूजन में की जाने वाली सामान्य भूलें https://shaktianusandhankendra.blogspot.com/2019/02/navratra.html इस पेज पर मैं कुछ और लिखना चाह रहा था, जैसे पूजन क
9. ईश्वर को जानने की प्रक्रिया है ध्यान
ईश्वर को जानने की प्रक्रिया है ध्यान            ईश्वर को पाना संभव
10. Navratra Muhurt 2019 : नवरात्र मुहूर्त 2019
नवरात्र मुहूर्त 2019  (सम्पूर्ण नवरात्र महापुजनम)
11. शाबर मंत्र साधना के नियम | साधना में सफल होने के लिए आवश्यक नियम
शाबर मंत्र साधना , वैदिक मंत्र साधना की तुलना में थोड़ी आसान होती है किन्तु इसका अभिप्राय यह नहीं कि शाबर मंत्र से जुड़े नियमों को ध्यान में न रखते हुए साधना में सफल होने के प्रयास किये जाये | किसी भी
12. अग्रसेन महाराज की जीवन गाथा
'जाने भगवान श्री अग्रसेन जी का ऐतिहासिक इतिहास'' धार्मिक मान्यतानुसार इनका जन्म मर्यादा पुरुषोतम भगवान श्रीराम की चौंतीसवी पीढ़ी में सूर्यवशीं क्षत्रिय कुल के महाराजा वल्लभ सेन के घर म
13. मंत्रों का विशिष्ट विज्ञान
मंत्रों का विशिष्ट विज्ञान   ‘’मननात्
14. संयुक्त यन्त्र : श्री गणेश, लक्ष्मी और सरस्वती के एक साथ पूजन का यन्त्र और पूजन विधि
संयुक्त यन्त्र : श्री गणेश, लक्ष्मी और सरस्वती के एक साथ पूजन का यन्त्र और पूजन विधि
15. जय मां वैष्णो देवी जी
जय मां वैष्णो देवी जी जय भैरों बाबा जी आप सभी भक्तजनों को "नवरात्री" के महापर्व की कोटि कोटि शुभकामनाए । मां वैष्णो देवी आप सभी की मनोकामनाए
16. जय माँ श्री महालक्ष्मी देवी
जय माँ श्री महालक्ष्मी देवी  मुंबई, महाराष्ट्र  
17. जानिए दुर्गा देवी के शस्रों का रहस्य (ज्ञान) !! Devi durga weapons meaning in hindi
जानिए दुर्गा देवी के शस्रों का रहस्य (ज्ञान) !! Devi durga weapons meaning in hindi
18. हनुमान चालीसा | Hanuman Chalisa in Hindi
हनुमान जी सम्पूर्ण भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय देव हैं। शायद ही कोई गांव हो जहाँ हनुमान जी का मंदिर न हो। उनकी युवाओं में महती लोकप्रियता उनके बल, बुद्धि और विद्या के निधान होने से है और वे इन सब के
19. महाकाली शाबर मंत्र सिद्धि | इस शाबर मंत्र से माँ काली को शीघ्र प्रसन्न करें |
|| महाकाली शाबर मंत्र साधना || महाकाली , माँ दुर्गा का ही प्रचंड रूप है जिनका जन्म धर्म की रक्षा करने के लिए और पापियों और दुष्टों का नाश करने के लिए हुआ है | महाकाली – महा और काली जिसका अर्
20. दशहरा एवं दुर्गा पूजा की शुभकामना संदेश भेजे । अपने दोस्तो को शुभकामनाएँ संदेश अपने नाम के साथ भेजे @educratsweb #educratsweb
दशहरा एवं दुर्गा पूजा की शुभकामना संदेश भेजे । अपने दोस्तो को शुभकामनाएँ संदेश अपने नाम के साथ भेजे @educratsweb #educratsweb
21. संपूर्ण हवन विधि
संपूर्ण हवन विधि    हवन की पुरी विधि जानने और Download करने के लिए दिए गए ल
22. Shri Yantra : श्री यन्त्र
श्री यन्त्र महा प्रयोगम श्री यन्त्र के बारे में श्री अभिषेक जी के कलम से  https://shaktianusandhankendra.blogspot.com/2019/07/shri-yantra.html
23. हिंगलाज माता मन्दिर, पाकिस्तान
हिंगलाज माता मन्दिर, पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रान्त के हिंगलाज में हिंगोल नदी के तट पर स्थित एक हिन्दू मन्दिर है। यह हिन्दू देवी सती को समर्पित इक्यावन शक्तिपीठों में से एक है। यहाँ इस द
24. 51 शक्तिपीठ के बारे में जाने | Know more about 51 shakti peeth in Hindi - Part 2
25. कन्याश्रम- सर्वाणी कन्याश्रम में माता का पीठ गिरी थी। इस शक्तिपीठ को सर्वाणी के नाम से जाना जाता है।कन्याश्राम को कालिकशराम या कन्याकुमारी शक्ति पीठ के रूप में भी जाना जाता है।कन्याकुमार
25. 51 शक्तिपीठ के बारे में जाने | Know more about 51 shakti peeth in Hindi
भारतीय आध्यात्मिक इतिहास में शक्ति पीठों का बहुत महत्व है l निम्नलिखित लेख में, हमने भारत में और उसके आसपास के शक्ति पीठों से संबंधित सभी उचित जानकारियां प्राप्त करने की कोशिश की है। हमने शक्तिप
We would love to hear your thoughts, concerns or problems with anything so we can improve our website educratsweb.com ! visit https://forms.gle/jDz4fFqXuvSfQmUC9 and submit your valuable feedback.
Save this page as PDF | Recommend to your Friends

http://educratsweb(dot)com http://www.educratsweb.com/content.php?id=807 http://educratsweb.com educratsweb.com educratsweb