educratsweb logo


 

शाबर मंत्रों से पल भर में सिद्ध होते हैं हर काम

अचूक एवं स्वयंसिद्ध मंत्र
शाबर मंत्र आम ग्रामीण बोलचाल की भाषा में ऐसे स्वयंसिद्ध मंत्र हैं जिनका प्रभाव अचूक होता है।

व्यक्ति के लिए प्रभावशाली
शाबर मंत्र शास्त्रीय मंत्रों की भांति कठिन नहीं होते तथा ये ऐसे हर वर्ग एवं हर व्यक्ति के लिए प्रभावशाली हैं, जो भी इन मंत्रों का लाभ लेना चाहता है।
मंत्र सिद्ध

मंत्र सिद्ध
थोड़े से जाप से भी ये मंत्र सिद्ध हो जाते हैं तथा अत्यधिक प्रभाव दिखाते हैं। इन मंत्रों का प्रभाव स्थायी होता है तथा किसी भी मंत्र से इनकी काट संभव नहीं है।

शक्तिशाली मंत्र
परंतु ये किसी भी व्यक्ति द्वारा प्रयोग किए गए अन्य शक्तिशाली मंत्र के दुष्प्रभाव को आसानी से काट सकते हैं। शाबर मंत्र सरल भाषा में होते हैं तथा इनके प्रयोग अत्यंत सुगम होते हैं।

समस्याओं का समाधान
शाबर मंत्र से प्रत्येक समस्या का निराकरण सहज ही हो जाता है। उपयुक्त विधि के अनुसार मंत्र का प्रयोग करके स्वयं, परिवार, अपने मित्रों तथा अन्य लोगों की समस्याओं का समाधान आसानी से कर सकते हैं।

'शाबर-मंत्र’ भी अनादि
वैदिक, पौराणिक एवम् तांत्रिक मंत्रों के समान ‘शाबर-मंत्र’ भी अनादि हैं। सभी मंत्रों के प्रवर्तक मूल रूप से भगवान शंकर ही हैं, परंतु शाबर मंत्रों के प्रवर्तक भगवान शंकर प्रत्यक्षतया नहीं हैं, फिर भी इन मंत्रों का आविष्कार जिन्होंने किया वे परम शिव भक्त थे।

शाबर-तंत्र के जनक
गुरु गोरखनाथ तथा गुरु मछन्दर नाथ शाबर-तंत्र के जनक हैं। अपने साधन, जप-तप-सिद्धि के प्रभाव से वे भगवान् शिव के समान पूज्य माने जाते हैं। ये अन्य मंत्र प्रवर्तक ऋषियों के समान विश्वास व श्रद्धा के पात्र हैं, पूजनीय व वंदनीय हैं।

‘आन और शाप’ तथा ‘श्रद्धा
शाबर मंत्रों में ‘आन और शाप’ तथा ‘श्रद्धा और धमकी’ दोनों का प्रयोग किया जाता है। साधक याचक होता हुआ भी देवता को सब कुछ कहने की सामर्थ्य रखता है और उसी से सब कुछ कराना चाहता है।

‘आन’ भी फलदायी
विशेष बात यह है कि उसकी यह ‘आन’ भी फलदायी होती है। आन माने सौगन्ध। अभी वह युग गए अधिक समय नहीं बीता है, जब सौगन्ध का प्रभाव आश्चर्यजनक व अमोघ हुआ करता था।

अनाधिकृत कृत्यों के लिए
सामन्तशाही युग में ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले लोग अनाधिकृत कृत्यों के लिए साधारणतया गांव के ठाकुर, गाय या बेटे आदि की सौगन्ध दिलाने पर ही अवैध कार्यों को रोक देते थे।

‘शपथ’ लेकर बयान
न्यायालय, लोक सभा, राज्य सभा, विधान सभा में आज भी भगवान की ‘शपथ’ लेकर बयान देने की प्रथा है। अधिकांश लोग आज भी अपनी बात का विश्वास दिलाने के लिए सौगन्ध खाया करते हैं।

देवी -देवताओं की ‘शपथ’
यह उस समय की स्मृतियां हैं, जब छोटी-छोटी जनजाति तथा उलट-फेर के कार्य करने वाले भी सौगन्ध को नहीं तोड़ते थे। आज परिवर्तन हो गया है- सौगन्ध लोगों के लिए कोई महत्व नहीं रखते, किंतु ‘शाबर’ मंत्रों में जिन देवी -देवताओं की ‘शपथ’ दिलायी जाती है, वे आज भी वैसे ही हैं।

शास्त्रीय प्रयोगों पर बेईमानी का असर नहीं
उन देवों पर जमाने की बेईमानी का कोई असर नहीं हुआ है। शास्त्रीय प्रयोगों में उक्त प्रकार की ‘आन’ नहीं रहती, किंतु शाबर मंत्रों में जिस प्रकार एक अबोध बालक अपने माता-पिता से गुस्से में आकर चाहे जो कुछ बोल देता है, हठ कर बैठता है।

“शाबर’ मंत्रों” का साधक मंत्र
उसके अंदर छल-कपट नहीं होता, वह तो यही जानता है कि मेरे माता-पिता से मैं जो कुछ कहूंगा, उसे पूरा करेंगे ही। ठीक इसी प्रकार का अटल विश्वास ‘शाबर’ मंत्रों का साधक मंत्र के देवता के प्रति रखता है।

विश्वास के आधार पर निष्कपट भाव
जिस प्रकार अल्पज्ञ, अज्ञानी, अबोध बालक की कुटिलता व अभद्रता पर उसके माता-पिता अपने वात्सल्य, प्रेम व निर्मलता के कारण कोई ध्यान नहीं देते, ठीक उसी प्रकार बाल सुलभ सरलता, आत्मीयता और विश्वास के आधार पर निष्कपट भाव से शाबर मंत्रों की साधना करने वाला परम लक्ष्य सिद्धि को प्राप्त कर लेता है।

तमिल भाषाओं का मिश्रित रूप
शाबर मंत्रों में संस्कृत - हिंदी - मलयालम - कन्नड़ - गुजराती या तमिल भाषाओं का मिश्रित रूप या फिर शुद्ध क्षेत्रीय भाषाओं की ग्राम्य शैली और कल्पना का समावेश भी दृष्टिगोचर होता है। सामान्यतया ‘शाबर-मंत्र’ हिंदी में ही मिलते हैं।

केवल गुरु नाम
प्रत्येक शाबर मंत्र अपने आप में पूर्ण होता है। उपदेष्टा ‘ऋषि’ के रूप में गोरखनाथ, सुलेमान जैसे सिद्ध पुरूष हैं। कई मंत्रों में इनके नाम का प्रवाह प्रत्यक्ष रूप से तो कहीं केवल गुरु नाम से ही कार्य बन जाता है।

उच्च भूमिका
शाबर मंत्र शास्त्रीय मान्यता से परे होते हुए भी अशास्त्रीय रूप में अपने लाभ व उपयोगिता की दृष्टि से विशेष महत्व के हैं। शाबर मंत्र ज्ञान की उच्च भूमिका नहीं देता, न ही मुक्ति का माध्यम है। इनमें तो केवल ‘काम्य प्रयोग’ ही हैं।

शास्त्रीय प्रयोग
इन मंत्रों में विनियोग, न्यास, तर्पण, हवन, मार्जन, शोधन आदि जटिल विधियों की कोई आवश्यकता नहीं होती। फिर भी वशीकरण, सम्मोहन, उच्चाटन आदि सहकर्मों, रोग-निवारण तथा प्रेत-बाधा शांति हेतु जहां शास्त्रीय प्रयोग कोई फल तुरंत या विश्वसनीय रूप में नहीं दे पाते, वहां ‘शाबर-मंत्र’ तुरंत, विश्वसनीय, अच्छा और पूरा काम करते हैं।

साधना के महत्वपूर्ण बिंदु
शाबर मंत्र साधना के महत्वपूर्ण बिंदु: इस साधना को किसी भी जाति, वर्ण, आयु का पुरुष या स्त्री कर सकते हैं। इन मंत्रों की साधना में गुरु की इतनी आवश्यकता नहीं रहती क्योंकि इनके प्रवर्तक स्वयंसिद्ध-साधक रहे हैं।

गुरु मिलने से काम आसान हो जाता है
फिर भी कोई पूर्णत्व को प्राप्त निष्ठावान् साधक गुरु बन जाए या मिल जाए तो सोने पे सुहागा सिद्ध होगा और उसमें होने वाली किसी भी परेशानी से आसानी से बचा जा सकता है। षट्कर्मों की साधना तो बिना गुरु के न करें।

ऊन या कंबल
साधना के समय नित्य-नैमित्तिक कर्मों को पूर्ण करके श्वेत या रक्त वस्त्र या फिर साधना के मंत्र प्रयोग में वर्णित वस्त्र धारण करना चाहिए। आसन ऊन या कंबल का श्वेत, रक्तवर्णी या पंचवर्णी ग्रहण करें तथा एक बार आसन पर सुखासन में बैठकर जप की नियत संख्या पूर्ण कर ही आसन से उठें।

धूप किसी भी प्रकार की प्रयुक्त की जा सकती है
साधना में घी या मीठे तेल का दीपक एक पटल पर नवीन वस्त्र बिछाकर उसके ऊपर जलाएंगे, जब तक मंत्र जप चले। अगरबत्ती या धूप किसी भी प्रकार की प्रयुक्त हो सकती है परंतु शाबर मंत्र साधना में गूगल तथा लोबान की अगरबत्ती या धूप की महत्ता मानी गयी है।

श्रद्धा से पूर्ण
पुष्प, शुद्ध जल, नैवेद्य यथाशक्ति अर्पण करें। मानस भाव उत्साह व श्रद्धा से पूर्ण हों तो मंत्र शीघ्र ही जागृत हो जाते हैं। जहां दिशा का निर्देश न हो वहां पूर्व तथा उत्तर दिशा की ओर मुख करके साधना करनी चाहिए। इस्लामी साधना में पश्चिम दिशा का महत्व है।

माला विशेष
जब तक दिशा निर्देश न हो दक्षिण की ओर मुंह न करें। जहां माला का निर्देश न मिले वहां कोई भी माला प्रयोग में ला सकते हैं। वैसे तुलसी, चंदन, रुद्राक्ष, स्फटिक की माला विशेष फलदायी है। इस्लामी शाबर मंत्र साधना में ‘सीपियों या हकीक’ की माला का विधान है।

108 मनकों वाली माला
यदि माला न हो तो कर रूपी मनोअंक माला का प्रयोग किया जा सकता है। नियमानुसार माला 108 मनकों वाली ही हो। जप की गति मध्यम हो, न तेज न कम। तन्मयता, श्रद्धा, विश्वास मंत्र सिद्धि के अचूक साधन हैं।

सरलता से सिद्ध
अविश्वास, अधूरा विश्वास व अश्रद्धा से फल प्राप्त नहीं होगा। मंत्र बड़ी ही सरलता से सिद्ध हो जाते हैं, परंतु साथ ही विषमता यह है कि इन मंत्रों की साधना करते समय विचित्र प्रकार की भयानक आवाजें सुनायी पड़ती हैं या डरावनी शक्लें दिखने लगती हैं।

धैर्य और साहस
इसलिए इन साधनाओं में धैर्य और साहस बहुत ही आवश्यक है। जप के समय किसी भी परिस्थिति में घबराएं नहीं। न ही जप व आसन छोड़ें। साधना-काल में एक समय भोजन करें तथा ब्रह्मचर्य का पालन करें।

शाबर मंत्र साधना
साधना दिन या रात्रि में किसी भी समय कर सकते हैं। शाबर मंत्र साधना सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण, दशहरा, गंगा दशहरा, शिवरात्रि, होली, दीपावली, रविवार, मंगलवार, पर्वकाल, सूर्य संक्रांति या नवरात्रियों से प्रारंभ की जा सकती है।

परिवर्तन नहीं
मंत्र का जाप जैसा है वैसा ही करें, अपनी तरफ से कोई परिवर्तन न करें। उच्चारण की शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।

पीपल वृक्ष या जप
मंत्र जप घर के एकांत कमरे में, मंदिर में, नदी-तालाब-गौशाला, पीपल वृक्ष या जप विधि में निर्देशित स्थान पर ही करें। साधना प्रारंभ करने की तिथि-दिन याद रखें।

पुनः जागरण
प्रतिवर्ष उन्हीं तिथियों में मंत्र का पुनः जागरण करें। जागरण में कम से कम एक माला जप के साथ होम (यज्ञ) भी करें। अधिक जप करने पर अधिक फलदायी होता है।

शाबर मंत्रों से पल भर में सिद्ध होते हैं हर काम
educratsweb.com

Posted by: educratsweb.com

I am owner of this website and bharatpages.in . I Love blogging and Enjoy to listening old song. ....
Enjoy this Author Blog/Website visit http://twitter.com/bharatpages

if you have any information regarding Job, Study Material or any other information related to career. you can Post your article on our website. Click here to Register & Share your contents.
For Advertisment or any query email us at educratsweb@gmail.com

RELATED POST
1. श्री रावण कृतं सम्पूर्ण शिव तांडव स्तोत्र
“श्री रावण कृतं सम्पूर्ण शिव तांडव स्तोत्र” "शिव ताण्डव स्तोत्र की महिमा" हर किसी के मन में एक ख्याल हमेशा आता है कि; क्या कोई ऐसा मंत्र है जो आपको सारा वैभव और सिद्ध
2. 12 ज्योतिर्लिंग और क्या है उनके महत्व
12 ज्योतिर्लिंग और क्या है उनके महत्व July 12, 2020 12 Jyotirlingas, Baidyanath, Bhimashankar,
3. बरसाने के एक संत की कथा
बरसाने के एक संत की कथा एक संत बरसाना में रहते थे और हर रोज सुबह उठकर यमुना जी में स्नान करके राधा जी के
4. पितरों का श्राद्ध करना चाहिए? शास्त्रों और पुराणों में श्राद्ध के बारे में क्या बताया है?
पितरों का श्राद्ध करना चाहिए? शास्त्रों और पुराणों में श्राद्ध के बारे में क्या बताया है?
5. आरती के बाद क्यों बोलते हैं कर्पूरगौरं मंत्र
आरती के बाद क्यों बोलते हैं कर्पूरगौरं मंत्र किसी भी मंदिर में या अपने घर में जब भी पूजन कर्म होते हैं तो वहां कुछ मंत्रों का जप अ
6. रामायण से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं एवं उनकी जानकारी
रामायण से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं एवं उनकी जानकारी  
7. पूजा के नियम : सामान्य पूजन विधि
पूजा के नियम : सामान्य पूजन विधि  इस पेज में मैंने पूजन करने की सामान्य विधि का वर्णन किया है. ये परम पूज्य रामकृष्ण परमहंस द्वारा प्रतिपादित तांत्रिक पद्धति है. राम कृष्ण मिशन में इसी पद्धत
8. शाबर मंत्रों से पल भर में सिद्ध होते हैं हर काम
  शाबर मंत्रों से पल भर में सिद्ध होते हैं हर काम अचूक एवं स्वयंसिद्ध मंत्र शाबर मंत्र आम ग्रामीण बोलचाल की भाषा में ऐसे स्वयंसिद्ध मंत्र हैं जिनका प्रभाव अचूक होता है।
9. Navratra : नवरात्री विशेष : साधकों/उपासकों द्वारा नवरात्र के पूजन में की जाने वाली सामान्य भूलें
साधकों/उपासकों द्वारा नवरात्र के पूजन में की जाने वाली सामान्य भूलें https://shaktianusandhankendra.blogspot.com/2019/02/navratra.html इस पेज पर मैं कुछ और लिखना चाह रहा था, जैसे पूजन क
10. ईश्वर को जानने की प्रक्रिया है ध्यान
ईश्वर को जानने की प्रक्रिया है ध्यान            ईश्वर को पाना संभव
11. Navratra Muhurt 2019 : नवरात्र मुहूर्त 2019
नवरात्र मुहूर्त 2019  (सम्पूर्ण नवरात्र महापुजनम)
12. अग्रसेन महाराज की जीवन गाथा
'जाने भगवान श्री अग्रसेन जी का ऐतिहासिक इतिहास'' धार्मिक मान्यतानुसार इनका जन्म मर्यादा पुरुषोतम भगवान श्रीराम की चौंतीसवी पीढ़ी में सूर्यवशीं क्षत्रिय कुल के महाराजा वल्लभ सेन के घर म
13. शाबर मंत्र साधना के नियम | साधना में सफल होने के लिए आवश्यक नियम
शाबर मंत्र साधना , वैदिक मंत्र साधना की तुलना में थोड़ी आसान होती है किन्तु इसका अभिप्राय यह नहीं कि शाबर मंत्र से जुड़े नियमों को ध्यान में न रखते हुए साधना में सफल होने के प्रयास किये जाये | किसी भी
14. गायत्री मंत्र क्यों और कब ज़रूरी है
*गायत्री मंत्र क्यों और कब ज़रूरी है* *☀सुबह उठते वक़्त 8 बार ❕✋✌👆❕अष्ट कर्मों को जीतने के लिए !!* *🍚🍜 भोजन के समय 1 बार❕👆❕ अमृत समान भोजन प्राप्त होने के लिए !!* *🚶 बाहर जाते समय 3 बार ❕
15. सुलभ सामग्री : दुर्लभ प्रयोग
सुलभ सामग्री : दुर्लभ प्रयोग  आध्यात्म के अनेक रूप है, अनेक पहलू है. हर किसी से आध्यात्म का विशुद्ध रूप संभव नहीं है. इस पुस्तक में जन-सामान्य के लिए छोटे-छोटे वैसे प्रयोग सम्मिलित किय
16. मंत्रों का विशिष्ट विज्ञान
मंत्रों का विशिष्ट विज्ञान   ‘’मननात्
17. हनुमान चालीसा | Hanuman Chalisa in Hindi
हनुमान जी सम्पूर्ण भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय देव हैं। शायद ही कोई गांव हो जहाँ हनुमान जी का मंदिर न हो। उनकी युवाओं में महती लोकप्रियता उनके बल, बुद्धि और विद्या के निधान होने से है और वे इन सब के
18. जानिए दुर्गा देवी के शस्रों का रहस्य (ज्ञान) !! Devi durga weapons meaning in hindi
जानिए दुर्गा देवी के शस्रों का रहस्य (ज्ञान) !! Devi durga weapons meaning in hindi
19. जय माँ श्री महालक्ष्मी देवी
जय माँ श्री महालक्ष्मी देवी  मुंबई, महाराष्ट्र  
20. Jitiya Vrat 2019: जीवित्पुत्रिका व्रत तिथि, महत्‍व, कैसे करें पूजन...
जीवितपुत्रिका व्रत का काफी महत्‍व है Jivitputrika Vrat 2019: जितिया या जिउतिया या जीवित्पुत्रिका व्रत क
21. जय मां वैष्णो देवी जी
जय मां वैष्णो देवी जी जय भैरों बाबा जी आप सभी भक्तजनों को "नवरात्री" के महापर्व की कोटि कोटि शुभकामनाए । मां वैष्णो देवी आप सभी की मनोकामनाए
22. महाकाली शाबर मंत्र सिद्धि | इस शाबर मंत्र से माँ काली को शीघ्र प्रसन्न करें |
|| महाकाली शाबर मंत्र साधना || महाकाली , माँ दुर्गा का ही प्रचंड रूप है जिनका जन्म धर्म की रक्षा करने के लिए और पापियों और दुष्टों का नाश करने के लिए हुआ है | महाकाली – महा और काली जिसका अर्
23. हिंगलाज माता मन्दिर, पाकिस्तान
हिंगलाज माता मन्दिर, पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रान्त के हिंगलाज में हिंगोल नदी के तट पर स्थित एक हिन्दू मन्दिर है। यह हिन्दू देवी सती को समर्पित इक्यावन शक्तिपीठों में से एक है। यहाँ इस द
24. 51 शक्तिपीठ के बारे में जाने | Know more about 51 shakti peeth in Hindi - Part 2
25. कन्याश्रम- सर्वाणी कन्याश्रम में माता का पीठ गिरी थी। इस शक्तिपीठ को सर्वाणी के नाम से जाना जाता है।कन्याश्राम को कालिकशराम या कन्याकुमारी शक्ति पीठ के रूप में भी जाना जाता है।कन्याकुमार
25. Shri Yantra : श्री यन्त्र
श्री यन्त्र महा प्रयोगम श्री यन्त्र के बारे में श्री अभिषेक जी के कलम से  https://shaktianusandhankendra.blogspot.com/2019/07/shri-yantra.html
We would love to hear your thoughts, concerns or problems with anything so we can improve our website educratsweb.com ! visit https://forms.gle/jDz4fFqXuvSfQmUC9 and submit your valuable feedback.
Save this page as PDF | Recommend to your Friends

http://educratsweb(dot)com http://www.educratsweb.com/content.php?id=851 http://educratsweb.com educratsweb.com educratsweb