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राजनीतिक दलों ने विज्ञापनों पर 53 करोड़ रुपए खर्च किए, भाजपा सबसे आगे रही


नई दिल्ली. आम चुनावों के दौरान सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने के मामले में भाजपा ने दूसरी पार्टियों को पीछे छोड़ दिया। जबकि राजनीतिक विज्ञापन जुटाने के मामले में गूगल और उसकी सहयोगी कंपनियां सबसे आगे रहीं। गूगल, यूट्यूब पर 27.36 करोड़ रुपये के कुल 14, 837 विज्ञापन आए। फेसबुक और उसकी और सहयोगी कंपनियों ने 26.5 करोड़ के 1.21 लाख विज्ञापन जुटाए। यह आंकड़ा फरवरी से 15 मई के बीच का है।

  1. भाजपा ने 4.23 करोड़ रुपए खर्च करके फेसबुक पर 25सौ विज्ञापन दिए। माय फर्स्ट वोट फॉर मोदी, भारत के मन की बात और नेशन विद नमो जैसे पेजों पर भी पार्टी ने 4 करोड़ रुपए खर्च किए। गूगल पर भाजपा ने 17 करोड़ के विज्ञापन दिए।

  2. कांग्रेस ने फेसबुक पर 1.46 करोड़ रुपए खर्च करके 3686 विज्ञापन दिए। पार्टी ने गूगल पर 2.71 करोड़ रुपए के 425 विज्ञापन दिए। कुल मिलाकर सोशल मीडिया के जरिए प्रचार करने के मामले में वह भाजपा से काफी पीछे रही।

  3. तृणमूल कांग्रेस ने फेसबुक पर 29.28 लाख रुपए खर्च किए। जबकि आम आदमी पार्टी ने फेसबुक पर 13.62 लाख रुपए खर्च करके 176 विज्ञापन दिए। हालांकि, गूगल के पॉलिटिकल एड डेशबोर्ड के मुताबिक- आबर्न डिजीटल सॉल्यूशन नाम की कंपनी आप का राजनीतिक कैंपेन चला रही थी। इसके जरिए कुल 2.18 करोड़ के विज्ञापन जारी किए गए।

  4. सोशल मीडिया पर भी इस बार निर्वाचन आयोग की पैनी नजर है, क्योंकि यहां भी चुनाव प्रचार संबंधित कानूनी प्रावधान प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तर्ज पर लागू किया गया है। इसमें प्रावधान किया गया है कि राजनीतिक विज्ञापनों का पूर्व प्रमाणन किया जाएगा। विज्ञापन से संबंधित सामग्री का प्रकाशन किए जाने पर इसे प्रचार पर व्यय में जोड़ा जाएगा।



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अरविंदो फार्मा के खिलाफ अमेरिकी कोर्ट में याचिका, पेटेंट नियमों के उल्लंघन का आरोप


हैदराबाद. फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने अरविंदो फार्मा के खिलाफ अमेरिकी कोर्ट में याचिका दाखिल की है। एस्ट्राजेनेका ने 15 मई को न्यू जर्सी की कोर्ट में दाखिल की गई अपनी याचिका में अपील की है कि अरविंदो को उसकी दवा डलिरेस्प का जेनरिक वर्जन बनाने से रोका जाए। एस्ट्राजेनेका का आरोप है कि इस दवा का पेटेंट उसके पास है और अरविंदो इसका उल्लंघन कर रही है।

  1. एस्ट्राजेनेका का आरोप है कि अरविंदो ने पेटेंट एक्ट की तीन धाराओं 206, 064 और 142 का उल्लंघन किया है। फार्मा कंपनी ने कोर्ट से अपील की है कि परमानेंट इंजेक्शन के जरिए अरविंदो को अमेरिका में इस दवा का उत्पादन और वितरण करने से रोका जाए।

  2. डलिरेस्प व्यस्क मरीजों को दी जाती है। इसका ज्यादातर इस्तेमाल सेवर क्रॉनिक ओब्सट्रक्टिव डिसीज (सीओपीडी) से ग्रस्त मरीजों के उपचार के लिए किया जाता है। अरविंदो इसका जेनरिक वर्जन तैयार करना चाहती है। डलिरेस्प को फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन ने पहली बार 28 फरवरी 2011 को मान्यता दी थी।

  3. एस्ट्राजेनेका का कहना है कि अरविंदो ने उसे 5 अप्रैल 2019 को एक पत्र लिखा था। इसमें कहा गया था कि भारतीय कंपनी डलिरेस्प का जेनरिक वर्जन बनाना चाहती है। इसके लिए अरविंदो ने अमेरिकी अथॉरिटी से अनुमति भी मांगी थी। हालांकि, कंपनी के एक अधिकारी का कहना है कि इस तरह के मामलों में कोर्ट में अपील होना कोई नई बात नहीं है।



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यूरोपियन देशों के साथ जापान और आस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में अपनी पैठ जमाएगी टीसीएस


नई दिल्ली. भारत की सबसे बड़ी आईटी फर्म टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (टीसीएस) यूरोप, जापान, न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में अपनी पैठ जमाने की तैयारी में है। कंपनी के ग्लोबल हैड कृष्णन रामानुजम का कहना है कि बड़े बाजारों में कंपनी की ग्रोथ सिंगल डिजिट तक ही सीमित है। उनका मानना है कि कंपनी बड़े बाजारों में जब चुनौती पेश करेगी, तभी उसकी ग्रोथ बढ़ेगी। भारत, लैटिन अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका जैसे बाजारों से भी कंपनी को काफी उम्मीदें हैं। ये तीनों देश आईटी ग्रोथ के मामले में काफी पीछे हैं।

टीसीएस को अपने कुल राजस्व का 53% हिस्सा अमेरिका से मिलता है
टीसीएस के कुल राजस्व का 53% हिस्सा अमेरिका से आता है। दूसरे नंबर पर यूरोपियन देश हैं। यहां से कंपनी को 29.7% राजस्व मिलता है। जबकि भारत से उसे सालाना 5.7% राजस्व ही मिल पाता है। कंपनी अपनी ग्रोथ को तेज करने के लिए नए प्रोडक्ट और प्लेटफार्म लॉन्च करने की तैयारी में है। पिछले साल टीसीएस ने बिजनेस 4.0 स्ट्रेटजी की शुरुआत की थी।

2018-19 में टीसीएस को1.46 लाख करोड़ का राजस्व मिला

वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान टीसीएस का शुद्ध लाभ 31 हजार 562 करोड़ रुपए का रहा। इस दौरान उसे 1.46 लाख करोड़ का राजस्व हासिल हुआ था। टीसीएस की कुल मार्केट वेल्यू 20 अरब डॉलर से ज्यादा आंकी गई है। कंपनी के सीओओ एनजी सुब्रमण्यम का कहना है कि जब भी कोई मील का पत्थर पार होता है, टीसीएस और ज्यादा ताकतवर हो जाती है। उनका कहना है कि कंपनी की 24वीं सालाना जनरल मीटिंग मुंबई में 13 जून को होगी। इसमें कंपनी के विस्तार की योजना बनाई जाएगी।

टीसीएस 2018 में 100 अरब डॉलर के क्लब में शामिल होने वाली भारत की पहली कंपनी बनी

2018 में टीसीएस 100 अरब डॉलर के क्लब में शामिल होने वाली भारत की पहली कंपनी बनी थी। इसके अलावा टीसीएस देश की पहली ऐसी कंपनी बन गई है, जिसका मार्केट कैप 7 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा है। इस दौरान बीएसई पर कंपनी के शेयरों में 1.49% की बढ़ोतरी देखने को मिली। टीसीएस के एक शेयर का भाव भी 3658.45 रुपये पर पहुंच गया।



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आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से जुड़ेगा एमसीए 21 पोर्टल, सारा काम आटो पायलट मोड पर होगा


नई दिल्ली. सरकार एमसीए 21 पोर्टल को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से जोड़ने की तैयारी कर रही है। यह पोर्टल 2006 में लॉन्च हुआ था। 2019 की शुरुआत में इसे अपग्रेड करने के लिए सर्विस प्रोवाइडर्स से निविदाएं मांगी गई थीं। कॉरपोरेट अफेयर्स सेक्रेट्री इन्जेती श्रीनिवास का कहना है कि पोर्टल का वर्जन 3 एक साल में तैयार होगा। फिरइसे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से जोड़ा जाएगा।

  1. कॉरपोरेट अफेयर्स सेक्रेट्री का कहना है कि कंप्लायंस प्रोसेस को आसान बनाने के लिए यह कवायद की जा रही है। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद इन्फोर्समेंट एक्टिविटीज आटोपायलट मोड पर होने लग जाएंगी।

  2. कंपनीज ला के तहत एमसीए 21 के जरिए ही कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री को सारा डेटा भेजा जाता है। इसके माध्यम से सभी स्टेक होल्डर्स को इलेक्ट्रानिक तरीके से जानकारी मुहैया कराई जाती है। स्टेक होल्डर्स में रेगुलेटर, कॉरपोरेट और इन्वेस्टर शामिल हैं।

  3. श्रीनिवास का कहना है कि नई व्यवस्था के लागू होने के बाद संबंधित कंपनी को संज्ञेय जानकारी बार-बार नहीं भरनी पड़ेगी। सिस्टम के डेटाबेस से जुड़ने के बाद सप्ताह में 24 घंटे आटो पायलट मोड पर सारी प्रक्रिया पूरी होने लग जाएंगी।

  4. ई गवर्नेंस के पहले चरण का काम टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने पूरा किया था, जबकि दूसरे चरण का काम इंफोसिस कर रही है। इंफोसिस ने जनवरी 2013 से दूसरे चरण का काम शुरू किया था, इसके जुलाई 2021 तक पूरा होने की संभावना है।



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विदेशी निवेशकों ने 6399 करोड़ रुपए वापस खींचे


  • चुनावी अनिश्चितता और अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर की वजह से निवेशकों ने यह कदम उठाया है। इससे घरेलू पूंजी बाजार सकते में है।
  • 1255 करोड़ रुपए 2 और 3 मई को ही निकाल लिए गए थे। इक्विटी से 367 करोड़ और डेट मार्केट से 888 करोड़ रुपए भी निकाले गए।


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FPIs withdraw Rs 6,399 cr in May so far

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विदेशी निवेशकों ने 6399 करोड़ रुपये वापस खींचे, घरेलू पूंजी बाजार सकते में


नई दिल्ली. घरेलू पूंजी बाजार से विदेशी निवेश के वापस लौटने का सिलसिला थम नहीं पा रहा है। मई महीने में विदेशी निवेशकों ने घरेलू पूंजी बाजार से 6399 करोड़ रुपये वापस खींच लिए। 1255 करोड़ रुपये 2 और 3 मई के दौरान ही निकाल लिए गए थे। इस दौरान इक्विटी से 367 करोड़ और डेट मार्केट से 888 करोड़ निकाले गए थे। एक्सपर्टस का कहना है कि चुनावी अनिश्चितता और अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर की वजह से निवेशकों ने यह कदम उठाया है। इस कदम घरेलू पूंजी बाजार सकते में है।

फरवरी, मार्च और अप्रैल में विदेशी निवेश जमकर हुआ था
सूत्रों का कहना है कि इससे पहले घरेलू पूंजी बाजार में फरवरी, मार्च और अप्रैल में जमकर विदेशी निवेश हुआ था। फरवरी में 11,182 करोड़, मार्च में 45,981 करोड़ और अप्रैल में 16,093 करोड़ रुपये का निवेश इक्विटी और डेट मार्केट में किया गया था। वैश्विक स्तर पर सेंट्रल बैंकों की उदारवादी नीतियों के चलते भारत में विदेशी पूंजी निवेश पर्याप्त रूप से हो रहा था। घरेलू पूंजी बाजार इसकी वजह से सशक्त बना हुआ था।

हालांकि, घरेलू पूंजी बाजार से विदेशी निवेशकों के मोहभंग की शुरुआत अप्रैल महीने से हो गई थी। अप्रैल में जो पूंजी निवेश हुआ वह मार्च की तुलना में काफी कम था। सूत्रों का कहना है कि विदेशी निवेशकों ने बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, इंश्योरेंस सेक्टर के साथ ऑयल और गैस से जुड़े कारोबार में काफी रुचि दिखाई थी।

विदेशी निवेशकों की नई सरकार पर नजरेंटिकीं
सूत्रों कहना है कि मई में विदेशी निवेशकों के रवैये से निश्चित तौर पर घरेलू पूंजी बाजार को झटका लगा है। निवेशकों का रुख देश में बनने वाली सरकार पर लगा है। चुनावी नतीजे घोषित होने के बाद ही वे नई सरकार के हिसाब से अपनी अगली रणनीति तय करेंगे। स्थितियां उनके अनुकूल हुई तो फिर से विदेशी निवेश घरेलू बाजार में आना शुरू हो जाएगा।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर ने भी विदेशी निवेशकों को भ्रम की स्थित में डाला हुआ है। दोनों महाशक्तियों के बीच बातचीत तो चल रही है, लेकिन कोई नतीजा न निकलने से विदेशी निवेशक भ्रम में हैं। उनका कहना है कि ट्रेड वॉर जल्दी खत्म नहीं हुई तो घरेलू बाजार में आने वाला विदेशी निवेश और ज्यादा प्रभावित होगा।



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प्रतीकात्मक फोटो

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अमेजन हिंदू देवताओं की फोटो लगे जूते और टॉयलेट सीट कवर बेच रहा, सोशल मीडिया पर लोगों ने गुस्सा जताया


नई दिल्ली.ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल अमेजन हिंदू देवी-देवताओं के फोटो लगे जूते और टॉयलेट सीट कवर बेच रहा है। इसे लेकर लोगों ने उसकी जमकर आलोचना की है। साथ ही सोशल मीडिया पर #बायकॉटअमेजन का ट्रेंड चला रखा है। अमेजन पर भगवान शिव और गणेश की तस्वीरों वाले डोरमेट भी बिक रहे हैं।

इनकी तस्वीरें सामने आने के बाद लोग अपने फोन से अमेजन ऐप हटा रहे हैं। इसी के साथ अमेजन को बायकॉट करने की मुहिम तेजी से आगे बढ़ रही है। लोग एक दूसरे से अपील कर रहे हैं कि अमेजन का सार्वजनिक बहिष्कार किया जाना चाहिए। इससे पहले अमेजन पर तिरंगेवाला डोरमेट बिक रहा था, जिसके बाद लोगों ने कंपनी को चेतावनी दी थी।

अमेजन का कहना है कि सभी विक्रेताओं को कंपनी की गाइडलाइंस का पालन करना चाहिए। ऐसा नहीं करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। जिन प्रोडक्ट पर सवाल उठ रहे हैं उन्हें स्टोर से हटाया जा रहा है।

23 मई को देखिए सबसे तेज चुनाव नतीजे भास्कर APP पर



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Amazon sells footwear and toilet seat covers of Hindu Gods

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बैंक धोखाधड़ी मामले में ईडी ने 483 करोड़ रु की संपत्ति जब्त की


नई दिल्ली. बैंक धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुंबई में केएसएल और इंडस्ट्रीज लिमिटेड की 483 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की है। कंपनी पर 2008 में कथित तौर परबैंक ऑफ इंडिया और आंध्रा बैंक से 524 करोड़ रुपए काकर्ज लेने के मामले में धोखाधड़ी का आरोप है। इस आधार पर एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई की है।

  1. ईडी के मुताबिक केएसएल और इंडस्ट्रीज लिमिटेड तायल समूह की एक कंपनी है। इसे बिजनेसमैन प्रवीण कुमार तायल के परिवार द्वारा प्रमोट किया गया है। कंपनी की जब्त की गई संपत्तियों में जमीन और नागपुर में एक शॉपिंग मॉल शामिल है।

  2. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस समूह की तीन विभिन्न कंपनियों-एक्टिफ कोर्पोरेशन लिमिटेड, जयभारत टेक्सटाइल एंड रियल इस्टेट लिमिटेड और केकेटीएल और इस्के निट (इंडिया) लिमिटेड के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम के तहत जांच शुरू की।

  3. ईडी ने बताया ,‘‘हमारी जांच से खुलासा हुआ कि इस समूह की मुंबई स्थित कंपनियां एमएस एक्टिफ कार्पोरेशन लिमिटेड, एमएस जयभारत टेक्सटाइल एंड रियल इस्टेट लिमिटेड और एमएस केकेटीएल और एसएस इस्के निट (इंडिया) लिमिटेड ने 2008 के दौरान बैंक ऑफ इंडिया और आंध्रा बैंक से धोखाधड़ी करके 524 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।’’

  4. एजेंसी ने बताया कि इन कंपनियों ने धनशोधन के लिए मुखौटा कंपनियों का गोरखधंधा तैयार किया। इससे पहले इसी तरह से यूको बैंक के साथ धोखाधड़ी करने के मामले में ईडी ने तायल समूह की 234 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की थी।

  5. एजेंसी ने कहा, ‘‘इस तरह समूह की 717 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। इस मामले में एक अभियोजन शिकायत पीएमएलए अदालत के समक्ष दायर की गई है। बाकी जांच भी जारी है।’’



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मिस्डकॉल से फोन में पहुंच रहा स्पायवेयर, कंपनी ने यूजर्स से कहा- अपना ऐप तुरंत अपडेट करें


गैजेट डेस्क.वॉट्सऐप ने जासूसी करने वाले सॉफ्टवेयर स्पायवेयरसे बचाव के लिए यूजर्स को ऐप का नया वर्जन (2.19.139) तुरंत अपडेट करने की सलाह दी है। कंपनी के मुताबिक, वॉयस मिस्डकॉल के जरिए स्मार्टफोन में एक सॉफ्टवेयर ऑटोमैटिक इंस्टॉल हो रहा है। इससे फोन में वायरस हमले और उसके डैमेज होने का खतरा है।

वॉट्सऐप ने बताया कि इस बग की जानकारी मई की शुरुआत में मिली थी। इसके लिए एडवांस्ड साइबर एक्ट जिम्मेदार है। इसमें वे सभी हॉलमार्क हैं जो किसी प्राइवेट कंपनी में होते हैं। कंपनी के मुताबिक, इस सॉफ्टवेयर के जरिए फोन को हैक किया जा सकता है। यूजर्स के फोटो, वीडियो, कॉन्टैक्ट, चैट, कॉल डिटेल के साथ बैंक से जुड़ी जानकारी चोरी होने का खतरा है।

क्या होता है स्पाइवेयर?

स्पाइवेयर, सॉफ्टवेयर कैटेगरी से लिया गया शब्द है। इसका इस्तेमाल किसी यूजर का पर्सनल डेटा चुराने या हैक करने में किया जाता है। स्पाइवेयर के कई सॉफ्टवेयर होते हैं, जिनका इस्तेमाल चोरी छिपे यूजर्स केकम्प्यूटर, लैपटॉप और फोन में किया जाता है। डेटा चोरी के साथ वायरस भेजकर डिवाइस को क्रैश भी किया जा सकता है। स्पाइवेयर के चार प्रकार- कीलॉगर्स, पासवर्ड स्टीलर, इन्फोस्टीलर और बैंकिंग ट्रोजन हैं।

वॉट्सऐप में नए इमोजी जोड़े गए
कंपनी ने अपडेट वर्जन में नए इमोजी जोड़ने के साथ 155 इमोजी के डिजाइन में बदलाव किया है। वॉट्सऐप में यूजर की मर्जी के साथ ग्रुप में जोड़ने वाला फीचर भी आ चुका है।



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WhatsApp now to avoid spyware installation from a single missed call

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अमेरिका की चेतावनी- चीन से होने वाले पूरे आयात पर शुल्क बढ़ा सकते हैं


वॉशिंगटन. अमेरिकीराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि चीन से आने वाले सारे सामान पर टैरिफ 10% से बढ़ाकर 25% किया जा सकता है। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है। उनका कहना है कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि चीन भी उनके सामान पर टैरिफ बढ़ाने का ऐलान कर चुका है। अमेरिका आज जहां है, उस पर उन्हें गर्व है। उन्हें पहले से पता था कि चीन जवाबी कार्यवाही कर सकता है।

चीन ने 60 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान पर बढ़ाया टैरिफ
ट्रम्प ने पिछले सप्ताह चीन से आने वाले 200 अरब डॉलर के सामान पर टैरिफ 10% से बढ़ाकर 25% किया था। इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिका के 60 अरब डॉलर के सामान पर टैरिफ बढ़ाकर 25% दिया है। इससे पहले अमेरिकी सामान पर चीन 10% टैरिफ वसूल रहा था।

सूत्रों का कहना है कि ट्रेड वॉर में अमेरिका को ही फायदा मिलने की संभावना है, क्योंकि 2018 के डेटा के मुताबिक अमेरिका से चीन में जो सामान जाता है उसकी कीमत तकरीबन 120 अरब डॉलर है, जबकि चीन से हर साल तकरीबन 540 अरब डॉलर का सामान अमेरिका भेजा जाता है।

ट्रम्प ने कहा कि चीन के कदम से उनके किसानों को कुछ परेशानी होगी, लेकिन उन्होंने इसके लिए रास्ता तैयार कर लिया है। चीन से वसूले जाने वाले टैक्स में से 15 अरब डॉलर वह किसानों की भलाई के लिए खर्च करने जा रहे हैं।

ट्रम्प को भरोसा, जिनपिंग से मुलाकात सार्थक होगी
हालांकि, चेतावनी के बीच ट्रम्प ने उम्मीद जताई कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद कोई सार्थक नतीजा निकल सकता है। जापान के ओसाका में 28-29 जून को होने जा रहेजी-20 सम्मिट के दौरान दोनों कीमुलाकात होने की संभावना है।

इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स को लेकर गतिरोधः यूएस

ट्रेड वॉर खत्म करने को लेकर अमेरिका और चीन के बीच चल रही बातचीत शुक्रवार को खत्म हुई थी, लेकिन इसमें कोई नतीजा नहीं निकल सका। ट्रम्प का कहना है कि जो कुछ हुआ उसके लिए चीन जिम्मेदार है। उधर, व्हाइट हाउस के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर लैरी कुडलोने कहा कि बातचीत में सबसे बड़ा गतिरोध चीन का रवैया है। चीन में काम कर रही अमेरिकी फर्मों की इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स के मामले में चीन अपना कानून बदलने को तैयार नहीं है।



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डोनाल्ड ट्रम्प

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जकरबर्ग ने 12 की उम्र में मैसेजिंग प्रोग्राम, 16 की उम्र में ऐप बनाया; आज 4.90 लाख करोड़ की नेटवर्थ


नई दिल्ली. मार्क जकरबर्ग आज 35 साल के हो गए। जकरबर्ग की नेटवर्थ 4.9 लाख करोड़ रुपए है और वे दुनिया के 8वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं। जकरबर्ग ने 20 साल की उम्र में फेसबुक की शुरुआत की थी,लेकिन यह उनका पहला एक्सपेरिमेंट नहीं था। इससे पहले वे 12 साल की उम्र में पिता के क्लिनिक के लिए मैसेजिंग प्रोग्राम और 16 साल की उम्र में हाईस्कूल के प्रोजेक्ट के तौर पर म्यूजिक ऐप बना चुके थे। हाईस्कूल में ही उन्हें कई कंपनियों ने ऐप खरीदने और जॉब के ऑफर दिए, लेकिन जकरबर्ग ने उन्हें ठुकरा दिया। आज वे 38 लाख करोड़ रुपए के मार्केट कैप वाली फेसबुक के सीईओ और चेयरमैन हैं। उनके जन्मदिन पर दैनिक भास्कर प्लस ऐप उनसे जुड़े किस्से साझा कर रहा है...


पेशेंट क्लिनिक पर आता था तो रिसेप्शनिस्ट मैसेजिंग प्रोग्राम इस्तेमाल करती थी
जकरबर्ग ने 12 साल की उम्र में इंस्टैंट मैसेजिंग प्रोग्राम बनाया था। इसे वे जकनेट कहते थे। उनके डेंटिस्ट पिता इसका उपयोग अपने क्लिनिक पर करते थे। जब भी कोई पेशेंट क्लिनिक पर आता था, तो रिसेप्शनिस्ट आवाज लगाने की बजाय इस मैसेजिंग प्रोग्राम से डॉक्टर को सूचना देती थी। जकरबर्ग के घर में भी कम्युनिकेशन के लिए यह मैसेजिंग प्रोग्राम इस्तेमाल होता था। स्कूल टाइम में वे अपने दोस्तों के साथ मिलकर वीडियो गेम भी बनाया करते थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया भी था कि मेरे कुछ दोस्त आर्टिस्ट थे। वे डिजाइन बनाते थे और मुझे उस पर गेम बनाना होता था। यह हम अपने मजे के लिए करते थे।


हाईस्कूल में ही माइक्रोसॉफ्ट से जॉब ऑफर आया था
जकरबर्ग ने न्यू हैम्पशायर स्थित फिलिप्स एक्जेटर एकेडमी में हाईस्कूल की पढ़ाई के दौरान साल 2000 में अपने दोस्तों के साथ एक म्यूजिक ऐप ‘सिनाप्स मीडिया प्लेयर’ बनाया था। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड ऐप था। यह यूजर की पंसद के हिसाब से एमपी3 प्ले लिस्ट बनाता था। माइक्रोसॉफ्ट और एओएलजैसी बड़ी कंपनियों ने उन्हें इसके बदले 10 लाख डॉलर ऑफर किए थे। दोनों ही कंपनियां उन्हें हायर भी करना चाहती थीं, लेकिन जकरबर्ग ने नौकरी की जगह हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई को तरजीह दी। हाईस्कूल के दौरान ही उन्होंने कई कंपनियों के जॉब ऑफर ठुकराए थे।


फेसबुक से पहले ‘फेसमैश’ और ‘कोर्समैच’
जकरबर्ग ने हार्वर्ड में पढ़ाई के दौरान फेसबुक से पहले एक प्रोग्राम ‘फेसमैश’ बनाया था, जो यह खोजने में मदद करता था कि कैंपस में सबसे आकर्षक लड़के, लड़कियां कौन हैं? इसमें यूजर्स छात्र-छात्राओं के फोटोज़ की तुलना कर बताते थे कि उन्हें सबसे ज्यादा अच्छा कौन लगता है। बाद में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इसे बंद करा दिया था। अपने इस प्रोग्राम के चलते जकरबर्ग पर यूनिवर्सिटी से बाहर होने तक की नौबत तक आ गई थी। कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने ‘कोर्समैच’ प्रोग्राम भी बनाया था। इसमें यूजर्स यह बताते थे कि वे कौन-कौन सी क्लास अटेंड कर रहे हैं ताकि दूसरे छात्र अपने इंटरेस्ट के साथ कोर्स और क्लासेस का सिलेक्शन कर सकें।

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20 साल की उम्र में फेसबुक शुरू की, सोशल मीडिया किंग बने
14 मई 1984 को जन्मे मार्क जकरबर्ग जब 20 साल के थे तब उन्होंने अपने तीन दोस्तों डस्टिन मोस्कोविट्ज, क्रिस ह्यूजऔर एडुआर्डो सेवेरिन के साथ फेसबुक की शुरुआत की। उस वक्त नाम ‘द फेसबुक’ रखा गया। इसे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए 4 फरवरी 2004 को लॉन्च किया गया। कुछ ही समय में इसकी पहुंच अमेरिका के कई कॉलेजों में हो गई। जकरबर्ग ने फेसबुक को आगे बढ़ाने के लिए हार्वर्ड यूनिवर्सिटी छोड़कर कैलिफॉर्निया के पालो अल्टो में किराए का घर लिया। इसी दौरान पेपाल के को-फाउंडर पीटर थील ने फेसबुक में 355 करोड़ रुपए का निवेश किया। दिसंबर 2004 तक फेसबुक का एक्टिव यूजर बेस 10 लाख के पार पहुंच गया।


याहू की पेशकश ठुकराई, 6 साल बाद कंपनियों को खरीदना शुरू किया
जुलाई 2006 में याहू ने फेसबुक को 7100 करोड़ रुपए में खरीदने का प्रस्ताव दिया, लेकिन जकरबर्ग ने इसे खारिज कर दिया। अक्टूबर 2007 में माइक्रोसॉफ्ट ने 1,704 करोड़ रुपए में फेसबुक की 1.6% हिस्सेदारी खरीद ली, जिसके बाद कंपनी की मार्केट वैल्यू 10.65 लाख करोड़ रुपए हो गई। फेसबुक ने अप्रैल 2012 में 100 करोड़ डॉलर (7,100 करोड़ रुपए) में इंस्टाग्राम खरीदा। इसके बाद मार्च 2014 में वीआर हार्डवेयर और तकनीक पर काम करने वाली कंपनी ऑक्यूलस को भी 200 करोड़ डॉलर (करीब 14,000 करोड़ रुपए) में खरीदा। उसी साल अक्टूबर में कंपनी ने 1,900 करोड़ डॉलर (1.34 लाख करोड़ रुपए) में वॉट्सऐप को भी खरीद लिया। ये कंपनी की अब तक की सबसे महंगी डील थी। यही वजह है कि जकरबर्ग को अब सोशल मीडिया किंग भी कहा जाता है।


अक्सर एक जैसे कपड़े पहनते हैं, ताकि कपड़े चुनने में समय बर्बाद न हो

  • जकरबर्ग को अक्सर एक ही जैसे कपड़ों में देखा जाता है। जकरबर्ग चाहे ऑफिस में हों या बिल गेट्स जैसे अरबपति के साथ मीटिंग में, वे अक्सर ग्रे या डार्क ग्रे कलर की टी-शर्ट पहने दिखते हैं। काफी कम मौके होते हैं, जब उन्हें कुछ अलग कपड़ों में देखा गया हो। जकरबर्ग के पास एक ही जैसी कई टी-शर्ट्स हैं। एक इंटरव्यू में जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि मेरी जिंदगी में इन छोटी-छोटी बातों के लिए समय नहीं है। अगर आप अपने कपड़े या सुबह के नाश्ते जैसी छोटी चीज के बारे में भी सोचते हैं तो आप अपनी एनर्जी वेस्ट कर रहे होते हैं।’’
  • आमतौर पर ग्रे टी-शर्ट और हुडी में दिखने वाले जकरबर्ग 2009 में हर दिन ऑफिस टाई पहनकर जाते थे। अपनी एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने इसका कारण भी बताया था। जकरबर्ग ने लिखा था, ‘‘2008 में शुरू हुई आर्थिक मंदी के बाद मैंने 2009 में पूरे साल टाई पहनी, क्योंकि मैं अपनी कंपनी के कर्मचारियों को यह संकेत देना चाहता था कि मंदी के इस दौर में यह साल हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है।’’

वॉशरूम के लिए लगी लाइन में प्रिसिला चान से मिले
19 मई 2012 को जकरबर्ग और प्रिसिला चान की शादी हुई। पहली बार दोनों की मुलाकात 2003 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी कैंपस में एक पार्टी में हुई थी। पार्टी के दौरान वॉशरूम के लिए लगी लाइन में दोनों मिले थे। एक इंटरव्यू में प्रिसिला ने इस मुलाकात के बारे में बताते हुए कहा था कि "मार्क अपने हाथ में बियर का ग्लास लिए हुए थे, जिस पर टैग था, ‘Pound Include Beer.H’।" उन्होंने बताया था कि यह एक C++ टैग था, जो कम्प्यूटर साइंस के लिए अपील को दर्शा रहा था।

ग्रेजुएशन पार्टी बताकर शादी का जश्न मनाया
जकरबर्ग और प्रिसिला चान की शादी का भी एक दिलचस्प किस्सा है। जिस दिन दोनों शादी करने जा रहे थे, उस दिन मेहमानों को यह कहकर आमंत्रित किया गया था कि चान के मेडिकल स्कूल ग्रेजुएशन पूरा होने पर एक पार्टी रखी गई है, लेकिन जब मेहमान वेन्यू पर पहुंचे, तब उन्हें इस सरप्राइज वेडिंग के बारे में पता चला।

5 साल से सिर्फ 1 डॉलर महीने की सैलरी ले रहे, शेयर से कमाई
जकरबर्ग न सिर्फ फेसबुक के फाउंडर हैं, बल्कि कंपनी के चेयरमैन और सीईओ भी हैं। इसके बावजूद जकरबर्ग की हर महीने की सैलरी सिर्फ 1 डॉलर (70 रुपए) है। 2012 में जकरबर्ग 5 लाख डॉलर (मौजूद 3.50 करोड़ रुपए) सैलरी लेते थे, लेकिन 2013 से वे 1 डॉलर पर आ गए। उनकी ज्यादातर कमाई फेसबुक के शेयर से होती है। फेसबुक में ड्युअल क्लास शेयर स्ट्रक्चर काम करता है। इसमें क्लास-ए और क्लास-बी शेयर शामिल होते हैं। कंपनी की फाइलिंग के मुताबिक, दिसंबर 2018 तक जकरबर्ग के पास क्लास-ए के 1,21,78,053 और क्लास-बी के 39,83,19,062 शेयर हैं।


2004 से ही विवादों में रहे, भारतीय मूल के व्यक्ति ने भी मुकदमा किया
फेसबुक की शुरुआत होते ही मार्क जकरबर्ग विवादों से जुड़ गए। फरवरी 2004 में जब जकरबर्ग ने फेसबुक शुरू की तो उनके साथ ही हार्वर्ड में पढ़ने वाले तीन छात्र- टाइल विंकलेवॉस, कैमरून विंकलेवॉस और दिव्य नरेंद्र ने जकरबर्ग पर आइडिया चुराने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर कर दिया। दिव्य नरेंद्र भारतीय मूल के हैं, जिनका जन्म न्यूयॉर्क में ही हुआ। तीनों ने अमेरिका की एक अदालत में जकरबर्ग के खिलाफ मुकदमा दायर कर दावा किया कि फेसबुक के पीछे असल आइडिया जकरबर्ग का नहीं, बल्कि उन तीनों का था। 2008 में अदालत ने फेसबुक और जकरबर्ग के खिलाफ फैसला देते हुए तीनों छात्रों को 650 लाख करोड़ डॉलर देने का आदेश दिया। इसके बाद भी मामला सुलझा नहीं और तीनों ने 2011 में फिर मुकदमा दायर कर दिया। बाद में समझौता हो गया। फिलहाल दिव्य नरेंद्र के पास फेसबुक में 0.022% शेयर हैं।


पिछला साल फेसबुक के लिए सबसे खराब रहा
2018 फेसबुक के 15 साल के इतिहास का सबसे खराब साल रहा। मार्च 2018 में कैम्ब्रिज एनालिटिका स्कैंडल सामने आया। इसमें ब्रिटिश पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म कैम्ब्रिज एनालिटिका पर फेसबुक के 8.7 करोड़ यूजर्स का डेटा चोरी करने का आरोप लगा, जिसका इस्तेमाल 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में किया गया। इसके बाद सितंबर में एक बार फिर फेसबुक के 5 करोड़ यूजर्स का डेटा हैक होने की बात सामने आई। दिसंबर में अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने दावा किया कि फेसबुक ने अपने यूजर्स का डेटा 150 से ज्यादा कंपनियों के साथ साझा किया। इसी साल इंस्टाग्राम के को-फाउंडर केविन सिस्ट्रोम और माइक क्रीगर, ऑक्यूलस के को-फाउंडर ब्रैंडन इराइब और वॉट्सऐप के को-फाउंडर जॉन कॉम ने फेसबुक और जकरबर्ग से मतभेद के चलते कंपनी छोड़ दी।

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Happy Birthday, Mark Zuckerberg! Facts that you didn't know about Mark Zuckerberg, on its 35th birthday
मार्क जकरबर्ग।
हार्वर्ड में अपने यहूदी ग्रुप \'अल्फा एप्सीलॉन पाई\' के दोस्तों के साथ जकरबर्ग
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में जकरबर्ग का कमरा।
Happy Birthday, Mark Zuckerberg! Facts that you didn't know about Mark Zuckerberg, on its 35th birthday
दोस्तों के साथ जकरबर्ग।
यूनिवर्सिटी के दोस्तों के साथ जकरबर्ग।
2002 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से एडमिशन का एक्सेप्टेंस मिलने के बाद की तस्वीर।
फेसबुक लॉन्चिंग के बाद न्यूजपेपर को दिया पहला फोटो।
बहन एरिल, रैंडी और डोना और जकरबर्ग।
तीनों बहनों के साथ एक और तस्वीर।
डस्टिन मोस्कोविट्ज और क्रिस ह्यूज। इन्हीं के साथ मिलकर जकरबर्ग ने फेसबुक की शुरुआत की।
फेसबुक के को-फाउंडर डस्टिन मोस्कोविट्ज और जकरबर्ग।
पालो आल्टो के घर में जकरबर्ग अपने दोस्त के साथ। यूनिवर्सिटी छोड़ने के बाद जकरबर्ग ने यहीं घर किराए पर लिया था।
2009 में अपने दोस्तों के साथ।
जकरबर्ग और उनकी बहनें।
फेसबुक शुरू करने के बाद 2005 में स्क्रिप्स कॉलेज में पहली स्पीच।
2006 में बिजनेस वीक के दौरान ली गई फोटो।
2005-06 के बीच ली गई एक तस्वीर
2004 में हार्वर्ड में गेस्ट लेक्चर के दौरान।
फैमिली फोटो
पिता एडवर्ड और मां कैरन के साथ जकरबर्ग।
19 मई 2012 को जकरबर्ग ने प्रिसिला चान से शादी की। दोनों यूनिवर्सिटी के समय से ही दोस्त थे।
जकरबर्ग और उनकी पत्नी प्रिसिला।
पैटरनिटी लीव के दौरान बेटी मैक्सिमा को खिलाते हुए जकरबर्ग। साथ में पत्नी प्रिसिला।
1 दिसंबर 2015 को जकरबर्ग की पहली बेटी मैक्सिमा का जन्म हुआ था।
बेटी मैक्सिमा के साथ जकरबर्ग।
बड़ी बेटी मैक्सिमा जकरबर्ग की गोद में। छोटी बेटी अगस्त प्रिसिला की गोद में।
सितंबर 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फेसबुक हेडक्वार्टर गए थे। उसी दौरान जकरबर्ग, उनके पिता एडवर्ड और मां कैरन के साथ पीएम मोदी।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ जकरबर्ग।
जापान के राष्ट्रपति शिंजो आबे के साथ।
ब्राजील की पूर्व राष्ट्रपति डिलमा रॉसेफ के साथ।
बिल गेट्स के साथ जकरबर्ग और फेसबुक की टीम।
पत्नी प्रिसिला के साथ कुकिंग।
कैम्ब्रिज एनालिटिका स्कैंडल के बाद अमेरिकी सीनेट में पेश हुए जकरबर्ग।

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जकरबर्ग ने 12 की उम्र में बनाया था मैसेजिंग प्रोग्राम


  • फेसबुक के फाउंडर मार्क जकरबर्ग आज 35 साल के हो गए। उनकी नेटवर्थ 4.9 लाख करोड़ रुपए है और वे दुनिया के 8वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं।
  • उन्होंने 20 साल की उम्र में फेसबुक की शुरुआत की थी, लेकिन इससे पहले पिता के क्लिनिक के लिए मैसेजिंग प्रोग्राम और म्यूजिक ऐप बना चुके थे।


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Mark Zuckerberg Facebook

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खुदरा महंगाई दर 6 महीने में सबसे उच्च स्तर पर, अप्रैल में 2.92% हुई


नई दिल्ली. मांस-मछली, पान-तंबाकू, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं की कीमतें बढ़ने से खुदरा महंगाई की दर अप्रैल में 2.92 % बढ़ गई है। पिछले महीने मार्च में यह2.86% दर्ज की गई थी। खुदरा महंगाई दर 6 महीने के सबसे उच्च स्तर पर है। पिछले साल अक्टूबर में महंगाई दर 3.38% थी।

  1. सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने सोमवार को बताया कि अप्रैल 2018 में खुदरा महंगाई की दर 4.58% दर्ज की गई थी। आंकड़ों के अनुसार खुदरा बाजार में अप्रैल 2019 में मांस-मछली की कीमतों में 7.55% का इजाफा हुआ है।

  2. आंकड़े के अनुसार, इसी अवधि में मोटे अनाज के मूल्य 1.17%, अंडा 1.94%, दूध और दुग्ध उत्पाद 0.42%, तेल और वसा 0.74%, साग-सब्जी 2.87%, मसाले 0.80%, तैयार भोज्य पदार्थ 2.71 %, कपड़ा 1.93%, जूता 2.41%, आवास 4.76% और स्वास्थ्य सेवा 8.43% बढ़े हैं।

  3. आंकड़े के मुताबिक, फल की कीमतों में 4.87%, दाल में 0.89% और चीनी में 4.05% गिरावट दर्ज की गई है। पिछले महीने की तुलना में अप्रैल में महंगाई दर में 0.6% का इजाफा हुआ है। मार्च में खाद्य पदार्थों की महंगाई दर 0.3% हो गई थी। जबकि अप्रैल में यह 1.1% तक पहुंच गई है।

  4. देश के ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई 1.87% है, जो मार्च में 1.8% थी। अप्रैल के दौरान शहरी इलाकों में बढ़कर 4.23% हो गया, जो पिछले महीने 4.1% था। हालांकि, खुदरा महंगाई दर लगातार रिजर्व बैंक के लक्ष्य 4% से नीचे बनी हुई है।



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      Retail inflation at 6-month high of 2.92 pc in Apr

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संजीव पुरी बने नए चेयरमैन, देवेश्वर के निधन के बाद खाली हुआ था पद


नई दिल्ली. इंडियन टुबैको कंपनी लिमिटेड (आईटीसी) ने संजीव पुरी को अपना नया चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। पुरी अभी तक कंपनी के एमडी के तौर पर काम कर रहे थे। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने फैसला लिया कि संजीव 13 मई से बतौर चेयरमैन कंपनी का कामकाज संभालेंगे।

  1. कंपनी के पूर्व एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और सीईओ वाईसी देवेश्वर का शनिवार को 72 साल की उम्र में निधन हो गया था। वे लंबे समय से बीमार थे। देवेश्वर दो दशक से ज्यादा आईटीसी के प्रमुख रहे।

  2. देवेश्वर का जन्म 4 फरवरी 1947 को लाहौर में हुआ था। उन्होंने दिल्ली आईआईटी और उसके बाद हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की। 1968 में उन्होंने आईटीसी ज्वाइन की। 1996 में वे कंपनी के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बने और 5200 करोड़ रु. रेवेन्यू को 51 हजार 500 करोड़ रुपए तक पहुंचा दिया।

  3. 1991 से 94 तक देवेश्वर एयर इंडिया के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) रहे। वे आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड में भी डायरेक्टर रहे। देवेश्वर ने 2017 में आईटीसी का चीफ एग्जीक्यूटिव का पद छोड़ दिया था। इसके बाद वे कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बने रहे।



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      संजीव पुरी।

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एक दशक में 7% की विकास दर से आगे बढ़ेंगे भारत समेत कई एशियाई देश, चीन हो सकता है मंदी का शिकार


वॉशिंगटन. अगले एक दशक के दौरान भारत समेत एशिया के कई देश 7% की विकास दर हासिल करके वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का काम करेंगे, लेकिन चीन इसमें शामिल नहीं है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 से विश्व की सबसे तेजी सेबढ़ने वाली 7 अर्थव्यवस्थाओं में से पांच एशिया से होंगी। चीन की तुलना में भारत की तरक्की ज्यादा तेज होगी।

इथोपिया और कोटे डी आवोरे की विकास दर होगी 7%
रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व के 7 देश अगले एक दशक में तेजी से तरक्की करेंगे। एशिया की जो 5 अर्थव्यवस्थाएं अगले एक दशक में तेजी से आगे बढ़ेंगी, उनमें भारत, बांग्लादेश, वियतनाम, म्यांमार और फिलीपींस शामिल हैं। अन्य दो देश जो बेहतरीन विकास दर हासिल करके आगे बढ़ेंगे, उनमें अफ्रीका के इथोपिया और कोटे डी आवोरे शामिल हैं।

विकास दर बढ़ने से सुधारों का मार्ग प्रशस्त होगा
ब्लूमबर्ग ने स्टैंडर्ड चार्टेड बैंक के साथ मिलकर तैयार की अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इन सभी देशों की जीडीपी इस दौरान तेजी से आगे बढ़ेगी। इसका मतलब यह नहीं है कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मामलों में इन देशों के लोगों की हालत पूरी तरह से तब्दील हो जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि विकास दर बढ़ने से इनकी आय में इजाफा होगा। इससे यहां सामाजिक-राजनीतिक स्तर पर मौजूद असमानता दूर होने के साथ सुधारों का मार्ग प्रशस्त होगा।

चीन की विकास दर 5.5% रहने का अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार चीन की विकास दर 5.5% रहने का अनुमान है। पिछले चार दशकों से चीन इस लिस्ट में हमेशा शामिल रहा है, लेकिन आर्थिक मंदी की वजह से वह इस बार लिस्ट में अपनी जगह नहीं बना सका है। चीन की अर्थव्यवस्था लगातार मंदी का शिकार हो रही है। 2017 में उसकी विकास दर 6.8% थी, जबकि 2018 में यह 6.6 तक सिमट गई।

अमेरिका से चल रहे ट्रेड वॉर की वजह से चीन का नुकसान
एक अन्य रिसर्च कंपनी का दावा है कि अगले साल चीन की अर्थव्यवस्था के 6.2% रहने का अनुमान है। फिलहाल उसे सबसे ज्यादा नुकसान अमेरिका से चल रहे ट्रेड वॉर की वजह से हो रहा है। हालांकि, इस विवाद की वजह से पूर्वी एशिया के कुछ देशों को भी नुकसान होने की संभावना है।



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प्रतीकात्मक फोटो

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अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से रुपया 26 पैसे लुढ़का


मुंबई. अमेरिका-चीन के बीच चल रही ट्रेड वॉर और कच्चे तेल की कीमतों में हुए इजाफे ने रुपये की सेहत पर उलटा असर डाला। सोमवार सुबह जब शेयर बाजार खुला तो डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत 70.16 पैसे थी। कुछ देर बाद इसमें और गिरावट देखी गई और यह 70.18 पैसे तक पहुंच गया। रुपये की कीमत में कुल 26 पैसे की गिरावट हुई, क्योंकि शुक्रवार को जब बाजार बंद हुआ था तब रुपये की कीमत 69.92 पैसे थी।

  1. अमेरिका-चीन के बीच शुक्रवार को संपन्न हुई वार्ता के बाद रविवार को ट्रम्प ने जो ट्वीट किया, उससे बाजार पर प्रतिकूल असर पड़ा। ट्रम्प ने चीन से आने वाले सभी सामानों पर टैरिफ बढ़ा दिया था।

  2. वार्ता शुरू होने से पहले ही ट्रम्प 200 अरबडॉलर के चीनी सामान पर टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 25% फीसदी कर चुके थे। वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंची तो रविवार को उन्होंने चीन से आने वाले300 अरबडॉलर केअन्य सामानों पर भी इतना ही टैरिफ बढ़ाने का ऐलान कर दिया।

  3. सूत्रों का कहना है कि आर्थिक मामलों में जहां अमेरिका विश्व की सबसे बड़ी ताकत है, वहीं चीन दूसरे पायदान पर काबिज है। दोनों के बीच चल रहे गतिरोध से सारे विश्व के बाजार प्रभावित होते हैं। भारत भी उनसे अछूता नहीं है।

  4. उधर, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एफआईआई) ने भी भारतीय बाजार से 1245.14 करोड़ रुपये बाहर निकाल लिए। शुक्रवार का डेटा बताता है कि इतनी फॉरेन करेंसी के बाजार से हटने का उल्टा असर भी रुपए पर पड़ा। कच्चे तेल की कीमतों में भी सोमवार को इजाफा देखा गया। तेल की कीमतें .27% बढ़कर 70.81 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गईं।



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      शेयर बाजार

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वीडियोकॉन लोन मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने चंदा कोचर से की पूछताछ


नई दिल्ली. आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व एमडी और सीईओ चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दिल्ली स्थित मुख्यालय में पेश हुए। वीडियोकॉन लोन मामले में उनसे पूछताछ की गई। यह पहली बार है जब कोचर दंपती को पूछताछ के लिए दिल्ली में तलब किया गया। इससे पहले उनसे कई बार पूछताछ की गई, लेकिन तब उन्हें मुंबई स्थित दफ्तर में समन किया गया था। दंपती सुबह 10.30 बजे ईडी के दफ्तर में पहुंच गए थे।

वीडियोकॉन और न्यूपावर रिन्यूएबल्स के लेनदेन पर निगाह
2012 में वीडियोकॉन ग्रुप को आईसीआईसीआई बैंक ने 1,875 करोड़ रुपए का लोन दिया था। इसी मामले में ईडी कार्रवाई कर रहा है। एजेंसी वीडियोकॉन और न्यूपावर रिन्यूएबल्स के बीच हुए लेन-देन को भी खंगाल रही है। न्यूपावर चंदा के पति दीपक की कंपनी है।

धूत ने किया था दीपक की कंपनी में निवेश
सूत्रों का कहना है कि वीडियोकॉन के प्रमोटर वेणुगोपाल धूत ने लोन के बदले दीपक कोचर की कंपनी में निवेश किया था। दीपक समेत उनके परिवार के सदस्यों को धूत ने वित्तीय फायदे पहुंचाए थे। इससे पहले फरवरी में ईडी ने कोचर दंपती और धूत समेत कुछ अन्य लोगों के खिलाफ के मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत केस दर्ज किया था।

मार्च में ईडी ने कई जगहों पर मारे थे छापे
ईडी ने मार्च में चंदा कोचर, उनके पति दीपक और धूत के कई ठिकानों पर रेड की थी। एजेंसी उन दस्तावेजों को खंगाल रही है, जिनमें
वीडियोकॉन के न्यूपावर रिन्यूएबल्स से लेनदेन का ब्योरा है।

सीबीआई भी दर्ज कर चुकी है केस
जनवरी में सीबीआई ने भी कोचर दंपती और वेणुगोपाल धूत के खिलाफ केस दर्ज किया था। एजेंसी ने वीडियोकॉन के मुंबई-औरंगाबाद स्थित दफ्तरों और दीपक के ठिकानों पर छापे भी मारे थे। कुछ दिनों पहले सीबीआई ने चंदा कोचर के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया था।

आईसीआईसीआईने वीडियोकॉन को3250 करोड़ रुपये दिए थे
वीडियोकॉन ग्रुप को कुल 40 हजार करोड़ रुपये का लोन दिया गया था। इनमें से 3250 करोड़ रुपये आईसीआईसीआई बैंक की तरफ से जारी किए गए थे, लेकिन 2017 तक इसमें से बहुत सारा पैसा चुकता ही नहीं किया गया।



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चंदा कोचर (फाइल फोटो)

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ट्रम्प ने कहा- हम चीन के साथ जैसी परिस्थिति चाहते थे, वैसी ही हैं


वॉशिंगटन. अमेरिकीराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को एक बार फिर अमेरिका-चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर पर कमेंट किया। ट्रम्प ने ट्वीट किया कि व्यापार समझौते को लेकर चीन के साथ जैसी परिस्थिति हम चाहते थे, वैसा ही हैं।याद हो, उसने अमेरिका के साथ डील तोड़ी है और ट्रेड वॉर को लेकर बीजिंग में हुई वार्ता भी असफल रही। हम चीन से टैरिफ के रूप में 10 अरब डॉलर (करीब 7 लाख करोड़ रुपए) वसूल करेंगे।

ट्रम्प ने अपने ट्वीट में कहा कि जो लोग इस डील के तहत चीन से उत्पाद खरीदते थे, वे अब अमेरिका में भी इन्हें बना सकते हैं। या फिर किसी ऐसे देश से खरीद सकते हैं, जहां टैरिफ नहीं लगता है। ट्रम्प ने दूसरे ट्वीट में कहा कि हम चीन के साथ ज्यादा खर्च के बारे में क्यों सोचें, जब वो हमारे देशभक्त किसानों के लिए कुछ नहीं करता। जो किसान देश और दुनिया के लिए खाने की सामग्रियों की सेवाएं दे रहे हैं, वे चीन के साथ कुल टैरिफ का मामूली प्रतिशत ही प्राप्त कर पाते हैं।

300 अरब डॉलर के आयात पर टैरिफ बढ़ा सकता है अमेरिका

अमेरिका ने शुक्रवार को 200 अरब डॉलर (करीब 14 लाख करोड़ रुपए) के आयात पर 10 से 25 प्रतिशत टैरिफ बढ़ाया था। इस आयातित चीजों में मछलियां, हैंडबैग, कपड़े और जूते शामिल थे। इसके अगले दिन अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने ट्रम्प के हवाले से कहा था कि चीन से आयात होने वाली अन्य सभी चीजों पर भी टैरिफ बढ़ाने का विचार किया जा रहा है। यह 300 अरब डॉलर (करीब 21 लाख करोड़ रुपए) के बराबर है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि चीन सिर्फ अपने टैरिफ के बारे में सोचता है, अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए नहीं।



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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प। - फाइल फोटो

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रिलायंस देश की 50 लाख किराने की दुकानों को डिजिटल बनाएगा, जियो डिवाइस के जरिए जोड़े जाएंगे ग्राहक


नई दिल्ली. मुकेश अंबानी की रिलायंस कंपनी देश के रिटेल किराना बाजार में ऑनलाइन डिजिटल प्लेटफॉर्म लेकर आने वाली है। रिलायंस 2023 तक 50 लाख से ज्यादा किराने की दुकानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ले आएगा। फिलहाल देश में करीब 15 हजार डिजिटल किराने की दुकानें ही संचालित हैं। यह बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच की एक रिपोर्ट में सामने आया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में 90% रिटेल बाजार असंगठित है। 700 अरब डॉलर (करीब 49 लाख करोड़) का यह बाजार रिलांयस के लिए एक अवसर होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि देशभर में 10 हजार रिटेल आउटलेट के साथ, रिलायंस दुनिया का सबसे बड़ा ऑनलाइन-टू-ऑफलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बनाने के लिए काम कर रहाहै। रिपोर्ट के मुताबिक, किराना दुकान ई-कॉमर्स के लिए भी उन्हीं को रजिस्टर किया जाता है, जिनका महीने का टर्नओवर 9 लाख रुपए हो। रिलायंस की एंट्री के बाद यह प्राइस प्वाइंट कम होने की संभावना है। ऐसा होने से ज्यादा से ज्यादा व्यापारी खुद को ई-कॉमर्स पर रजिस्टर कराने को तैयार होंगे।

जियो एमपीओएस के जरिए ग्राहकों से जुड़ेगा रिलायंस
रिलायंस अपने ग्राहकों से सीधे जुड़ने के लिए जियो एमपीओएस (मोबाइल पॉइंट-ऑफ-सेल) डिवाइस का इस्तेमाल करेगा। किराने की दुकानों को ऑनलाइन डिजिटल बनाने के लिएजियो डिवाइस को लगाया जाएगा। इस डिवाइस को 4जी नेटवर्क गति प्रदान करेगा। इसी डिवाइस के जरिए दुकानदार ग्राहकों से ऑर्डर प्राप्त करेगा और उन्हें किराना सामान पार्सल करेगा। इसी डिवाइस के जरिए ऑनलाइन भुगतान भी होगा।

रिलायंस 3 हजार रुपए में बेच रहा पीओएस डिवाइस
फिलहाल, देश के छोटे शहरों, गांवों और कस्बों में मौजूद किराना दुकानों में यह पीओएस डिवाइस देने वाली कंपनीज में स्नैपबिज, नुक्कड शॉप, और गोफ्रुगल शामिल हैं। स्नैपबिज ने देश के 7 से ज्यादा शहरों में 4,500 डिवाइसेज को इंस्टॉल किया है। यह आंकड़ा देश के कुल डिजिटाइज किए गए किराना स्टोर का 30 फीसदी है। यह सभी कंपनियां इस डिवाइस को 50 हजार रुपए की कीमत में बेच रही हैं, जबकि रिलायंस इसी डिवाइस को 3 हजार रुपए में उपलब्ध करा रहा है।



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प्रतीकात्मक तस्वीर।

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ट्रम्प ने कहा- चीन मुगालते में न रहे, 2020 का चुनाव वो ही जीतने जा रहे हैं


वॉशिंगटन. अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर खत्म करने को लेकर चल रही बातचीत बगैर किसी नतीजे के खत्म हो गई है। इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन को नसीहत दी है कि उसके लिए अच्छा रहेगा कि वो अमेरिका के 2020 चुनाव से पहले सारे विवाद निपटा ले। ट्रम्प ने ट्वीट करके कहा कि अगर चीन को लगता है कि इस बार कोई डेमोक्रेट अमेरिका का राष्ट्रपति बनने जा रहा है तो यह उसका मुगालता है। इस बार भी वो ही अमेरिका के राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं। तब चीन को खामियाजा भुगतना होगा।

ट्रम्प ने चीन से आने वाली सभी चीजों पर शुल्क बढ़ाया
वार्ता की विफलता के बाद ट्रम्प ने अपने शीर्ष अधिकारियों को चीन से आयातित लगभग सभी तरह के माल पर टैरिफ (आयात शुल्क) बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दे दिए हैं। यह 300 अरब डॉलर के बराबर है और चीन से 200 अरब डॉलर मूल्य के उस आयात से अलग है, जिस पर शुल्क 10 से बढ़ाकर 25 फीसदी किया गया है। वार्ता की विफलता का एक कारण यह भी माना जा रहा है कि ट्रम्प ने चर्चा से ठीक पहले 200 अरब डॉलर पर शुल्क बढ़ाते हुए लंबी आर्थिक लड़ाई जारी रखने की बात कही।

वार्ता टूटी नहीं, बीजिंग में जारी रहेगीः चीन
चीन के शीर्ष व्यापार वार्ताकार और उप प्रधानमंत्री लियू हे ने मामले में अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ यह व्यापार वार्ता बीजिंग में जारी रहेगी, लेकिन चेताया कि महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर कोई रियायत नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, वार्ता टूटी नहीं है बल्कि दोनों देशों के बीच बातचीत का यह सिर्फ एक सामान्य मोड़ है। दोनों पक्ष चीन में आगामी वार्ता के लिए सहमत हैं लेकिन फिलहाल तारीख तय नहीं है।



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डोनाल्ड ट्रम्प

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चीन मुगालते में न रहे, 2020 का चुनाव हम ही जीतेंगे: ट्रम्प


  • राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन को नसीहत दी है कि उसके लिए अच्छा रहेगा कि वो अमेरिका के 2020 चुनाव से पहले सारे विवाद निपटा ले।
  • ट्रम्प ने ट्वीट किया- अगर चीन को लगता है कि इस बार कोई डेमोक्रेट अमेरिका का राष्ट्रपति बनने जा रहा है तो यह उसका मुगालता है।


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Trump urges China to strike trade deal quickly instead of waiting for 2020 US elections

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वाइस प्रेसीडेंट ने कहा- केवल इस आधार पर कंपनी को बांटना गलत, क्योंकि वो कामयाब है


सैन फ्रांसिस्को. फेसबुक के ग्लोबल अफेयर्स और कम्युनिकेशन महकमे के वाइस प्रेसीडेंट निक क्लेग ने कहा है कि कंपनी को केवल इस आधार पर दंडित करना गलत है, क्योंकि वो कामयाब है। वह फेसबुक के सह संस्थापक क्रिस ह्यूज की उस मांग पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि कंपनी बहुत बड़ी हो गई है और इसके संस्थापक मार्क जुकरबर्ग बेहद शक्तिशाली। लिहाजा इसे बांट देना चाहिए। क्लेग का कहना है कि कंपनी को इस आधार पर नहीं तोड़ सकते, क्योंकि वो ज्यादा बड़ी हो चुकी है।

  1. क्लेग ने कहा कि क्रिस ह्यूज की वह मांग ठीक है, जिसमें कहा गया है कि डेटा लीक और चुनावों में दखल को लेकर फेसबुक को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, लेकिन उनका यह भी कहना था कि कंपनी का बंटवारा करने से उन समस्याओं का समाधान नहीं होगा, जो फिलहाल सामने खड़ी हैं। इंस्टाग्राम और वाट्सऐप फेसबुक की सहयोगी कंपनियां हैं।

  2. उधर, फ्रांस के दौरे पर गए कंपनी के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने भी ह्यूज की मांग को गलत बताया। उनका कहना था कि इससे समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उनका कहना है कि फेसबुक की वजह से करोड़ों लोग एक दूसरे से जुड़ सके हैं।

  3. ह्यूज ने चेताया था कि कंपनी के हेड मार्क जुकरबर्ग जरूरत से ज्यादा ताकतवर हो गए हैं, इसलिए अब फेसबुक को बांटना जरूरी है। ह्यूज ने आरोप लगाया कि फेसबुक अपनी प्रतियोगी कंपनियों को या तो खरीद लेता है या फिर उनकी नकल कर लेता है, ताकि सोशल मीडिया के क्षेत्र में उसका वर्चस्व बना रहे।

  4. जुकरबर्ग और क्रिस ह्यूज ने ही हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में 2004 में दो अन्य दोस्तों के साथ मिलकर फेसबुक शुरू की थी। हालांकि, करीब 10 साल पहले ह्यूज ने खुद को कंपनी से अलग कर लिया था। फिलहाल वह अमेरिका में इकोनॉमिक सिक्योरिटी प्रोजेक्ट नाम के संगठन से जुड़े हैं। यह संगठन देश में यूनिवर्सल बेसिक इनकम लागू करने की मांग उठा रहा है।

  5. फेसबुक को विभाजित करने का मसला अमेरिका में इस समय सबसे ज्यादा सरगर्म है। राजनीतिज्ञ भी इस विवाद में कूद पड़े हैं। ड्रेमोक्रेट सांसद एलिजाबेथ वारेन ने यहां तक कहा है कि अगर 2020 चुनाव जीतकर वह राष्ट्रपति बनती हैं तो कंपनी को विभाजित कर देंगी।



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बोइंग 737 मैक्स का नाम नहीं बदलेगा, उड़ानें दोबारा शुरू करने के लिए कंपनी ने प्रयास तेज किए


लंदन. बोइंग 737 मैक्स ने एक बार फिर खुद कोब्रांड के तौर पर स्थापित करने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। सीईओ डेनिस मुलिनबर्ग और कमर्शियल एयरप्लेन चीफ केविन मैकेलिस्टर लगातार एयरलाइन एग्जीक्यूटिव्स के साथ मुलाकात भीकर रहे हैं। सॉफ्टवेयर में किए जाने वाले बदलावों को लेकर कुछ मैक्स ऑपरेटर्स और लेजर्स को निमंत्रित किया गया है।

  1. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिकबोइंग अपनेसॉफ्टवेयर को अपडेट करने की प्रक्रिया में है, जिसका ताल्लुक पिछले दो क्रैश से है। यह फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन को भेजा जाएगा। इसका उद्देश्य एक बार फिर उड़ान के लिए बोइंग को लाना है। 23 मई को ग्लोबल रेगुलेटर्स की मुलाकात होना है।

  2. बोइंग के प्रवक्ता गॉर्डन जॉन्ड्रो ने कहा, ‘‘यह एक बहुविकल्पीय प्रयास है। इसके अंतर्गत हमारी कोशिश उड़ान को फिर से शुरू करने की है। हम चाहते हैं कियात्रियों के बीच बोइंग को लेकर पहले सा भरोसा हो।पायटल पूरी सुरक्षा और विश्वास के साथ इसे उड़ाएं।’’

  3. प्रवक्ता जॉन्ड्रो ने कहा कि कंपनी का नाम बदलने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। पहले माना जा रहा था कि कंपनी अपनेब्रांड नेम मैक्स-8 के बजाए कोई और नाम रखेगी।जॉन्ड्रो ने कहा,‘‘कुछ क्षेत्रों में हमें सुधार करने की जरूरत है। पारदर्शिता उन्हीं में से एक है।’’

  4. जॉन्ड्रो ने कहा,‘‘फिलहाल कंपनी की प्राथमिकता यात्रियों के बीच खोए विश्वास को हासिल करना है। अगले कुछ महीनों में कंपनी बोइंग 737 को फिर से उड़ान भरवाने के प्रयास करेगी।हालांकि इसके पहले कंपनी को पायलट, फ्लाइट अटैंडेंट्स और कर्मचारियों के बीच भरोसा बनाना होगा।’’



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3.3% की विकास दर से आगे बढ़ी अर्थव्यवस्था, सरकार ने 6.2% का अनुमान लगाया था


इस्लामाबाद. फंड की कमी से जूझ रही पाक सरकार को 2018-19 के दौरान आर्थिक मोर्चे पर गहरा झटका लगा है। सरकार ने विकास दर के 6.2% रहने का अनुमान लगाया था, जबकि यह 3.3% तक ही पहुंच सकी। सूत्रों का कहना है कि प्रमुख क्षेत्रों में 50% लक्ष्य ही पूरे हो सके, जिसकी वजह से विकास दर धीमी पड़ गई।

  1. प्रधानमंत्री इमरान खान सरकार का यह पहला साल था और पाक की विकास दर पर सारे विश्व की निगाहें लगी हुई थीं, लेकिन कर्ज के बोझ तले दबे पाक को इमरान राहत नहीं दे सके। इमरान फिलहाल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से बेल आउट पैकेज हासिल करने के लिए जूझ रहे हैं।

  2. सरकार का लक्ष्य कृषि को 3.8%, उद्योग को 7.6% और सर्विस सेक्टर को 6.2% की विकास दर से आगे बढ़ाना था, जबकि वित्त वर्ष खत्म होने पर कृषि की विकास दर केवल .85%, उद्योग की 1.4% और सर्विस सेक्टर की 4.7% रही।

  3. महंगाई ने पाकिस्तान के जनजीवन को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। आतंकवाद के मुद्दे पर वैश्विक स्तर पर ज्यादातर देश पाकिस्तान से व्यापारिक रिश्ते नहीं रखना चाह रहे हैं। कारोबार कम होने के कारण देश की जनता को बहुत ज्यादा महंगाई का सामना करना पड़ रहा है।

  4. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कंगाल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए उसके सामने एक शर्त रखी है।इसके मुताबिक, पाकिस्तान को 2 साल में 700 अरब रुपए की टैक्स छूट वापस लेनी होगी। पाकिस्तान ने यह शर्त मान ली है। उसने टैक्स छूट को वापस लेने के लिए सहमति दे दी है।

  5. सूत्रों के मुताबिक, टैक्स छूट वापस लेने से पाकिस्तान में महंगाई के आसमान पर पहुंचने की आशंका है। पाकिस्तान सरकार ने 2019-20 के बजट में विभिन्न करों में दी गई करीब 350 अरब रुपए की छूट वापस लेने शुरू कर दी है।



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मार्च तिमाही में 838 करोड़ रु. का मुनाफा, पिछले साल इसी तिमाही में 7,718 करोड़ का था घाटा


मुंबई. भारतीय स्टेट बैंक को 2018-19 की मार्च तिमाही में 838.40 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ है। सूत्रों का कहना है कि बैंक का यह मुनाफा नॉन पर्फामिंग असेट्स (एनपीए) कम होने से हुआ है। पिछले साल इसी तिमाही (2017-18) में बैंक को 7 हजार 718 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। उस दौरान एनपीए में बढ़ोतरी होने की वजह से बैंक को नुकसान हुआ था।

  1. शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में बैंक ने बताया कि मार्च तिमाही में उसकी आय करीब 10.57% बढ़कर 75 हजार 670 करोड़ रुपए हो गई। एक साल पहले इसी अवधि में बैंक की आय 68 हजार 436 करोड़ रुपए थी। 2018-19 में बैंक का शुद्ध एकीकृत लाभ 3,069.07 करोड़ रुपए रहा, जबकि 2017-18 में उसे 4,187.41 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था।

  2. 2017-18 वित्त वर्ष के दौरान बैंक को बैड लोन की वजह से घाटा झेलना पड़ा था। पिछले साल की आखिरी तिमाही तक इस तरह के लोन 24% बढ़कर 17 हजार 335 करोड़ रुपए तक पहुंच गए थे। पिछले साल की तिमाही में एनपीए 8.71% था, जबकि इस बार यह आंकड़ा घटकर 7.53% तक रह गया है।

  3. 2018-19 दिसंबर की तिमाही से तुलना की जाए तो एनपीए में काफी कमी देखी गई है। बैंक का कहना है कि दिसंबर की तिमाही में एनपीए के तहत कुल रकम 1 लाख 87 हजार 764 करोड़ रुपए थी, जबकि मार्च की तिमाही में एनपीए के तहत आने वाली रकम 1 लाख 72 हजार 750 करोड़ रुपए है।

  4. बैंक के मुताबिक, मार्च तिमाही के दौरान खातों में जमा रकम 7.58% बढ़कर 29 लाख 11 हजार 386 करोड़ रुपए हो गई है। एडवांस रकम में कुल 13% की बढ़ोतरी हुई है। अब यह रकम 21 लाख 85 हजार 876 करोड़ रुपए हो गई है।



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ट्रम्प ने कहा- ट्रेड वॉर खत्म होने के आसार बन रहे थे पर चीन ने सौदेबाजी शुरू कर दी


वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि चीन के साथ चल रहे ट्रेड वॉर के खत्म होने के आसार बन रहे थे, लेकिन चीन सौदेबाजी पर उतर आया। उनका कहना था कि चीन के उप प्रधानमंत्री लियू यहां पहुंच गए हैं। वह एक अच्छे आदमी हैं, लेकिन उन लोगों ने समझौता खत्म कर दिया है। चीन को इसका नतीजा भुगताना होगा। अगर हम कोई समझौता नहीं कर रहे हैं तो सालाना 100 अरब डॉलर से अधिक की रकम लेने में कुछ गलत नहीं है। हालांकि, उनका यह भी कहना था कि चीन के राष्ट्रपति शी-जिनपिंग का पत्र उन्हें गुरुवार को मिला है। ट्रम्प के मुताबिक- देखते हैं कि चीन के उप प्रधानमंत्री से हो रही वार्ता किस नतीजे पर पहुंचती है।

तल्खी दिखाई तो चीन बातचीत को तैयार हुआः ट्रम्प
उन्होंने कहा कि जब अमेरिका ने रविवार को 200 अरब डॉलर के चाइनीज इंपोर्ट पर आयात शुल्क 10% से बढ़ाकर 25% करने की धमकी दी तब कहीं जाकर चीन का रवैया बदला। उससे पहले चीन बातचीत के दौरान चीजों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहा था। यही नहीं वह बार-बार वार्ता को टाल भी रहा था।

अमेरिका को गुल्लक समझ रहे दूसरे देश
ट्रम्प ने कहा कि वे लोग (चीन और दूसरे देश) अमेरिका को एक गुल्लक समझते हैं। ऐसे देशों का मानना है कि जब और जितना मर्जी पैसा इस गुल्लक से निकाल लो, कोई कुछ नहीं कहेगा। ट्रम्प ने कहा कि अब अमेरिका बदल चुका है। अपने हितों की कीमत पर वह किसी दूसरे देश का भला नहीं करने वाला। उनका कहना था कि आज चीन तेजी से जंगी जहाज तैयार कर रहा है। रोजाना लड़ाकू विमान तैयार किए जा रहे हैं। उनकी तरक्की देखने लायक है, लेकिन उन्हें ध्यान रखना होगा कि यह सारा कुछ अमेरिकी मेहरबानी पर है।

राष्ट्रपति ने कहा-अपने संसाधनों पर दूसरों को लुत्फ क्यों उठाने दें

ट्रम्प के मुताबिक- अमेरिका अपने हितों की कुर्बानी देकर दूसरे देशों को तरक्की के लायक बनने के मौका देता रहा है। 200 अरब डॉलर के चाइनीज इंपोर्ट पर आयात शुल्क 10% से बढ़ाकर 25% करने के फैसले को जायज ठहराते हुए ट्रम्प ने कहा कि यह फैसला उनके पूर्ववर्ती बराक ओबामा से भी पहले लिया जाना था। आखिर हम अपने संसाधनों पर दूसरों को लुत्फ क्यों उठाने दें।

ट्रम्प ने दिखाया कि वार्ता असफल होने से उन्हें फर्क नहीं पड़ताः सूत्र
सूत्रों का कहना है कि ट्रम्प ने अपने तल्ख तेवरों के जरिए दिखा दिया है कि अगर चीन के साथ चल रही वार्ता असफल भी हो जाती है तो भी उन्हें कोई खास फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने अपने तेवरों से चीन को बैकफुट पर ला दिया है। यही वजह है कि वे एक तरफ कह रहे हैं कि चीन की वजह से वार्ता लगभग समाप्ति के कगार पर पहुंच गई है, वहीं शी-जिनपिंग का पत्र का हवाला भी दे रहे हैं। यानी, वह बता रहे हैं कि वार्ता तभी सार्थक हो सकती है जब इससे अमेरिका को फायदा हो।

2018 से चल रहा है ट्रेड वॉर
अमेरिका और चीन के बीच मार्च 2018 में ट्रेड वॉर शुरू हुआ था। यह लगातार तल्ख हो रहा था। हालांकि, पिछले साल नवंबर में ट्रम्प और शी-जिनपिंग की जी-20 में हुई मुलाकात के बाद फिर से वार्ता शुरू करने पर सहमति बनी थी, लेकिन ट्रम्प ने रविवार को ट्वीट कर 200 अरब डॉलर (13.84 लाख करोड़ रुपए) के चाइनीज इंपोर्ट पर आयात शुल्क 10% से बढ़ाकर 25% करने का ऐलान कर दिया। इससे चीन भड़क गया है। बुधवार को उसने कहा था कि ट्रम्प ने टैरिफ बढ़ाए तो बीजिंग भी चुप नहीं बैठेगा।

चीन के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 378.73 अरब डॉलर
अमेरिका चाहता है कि चीन के साथ उसका व्यापार घाटा कम हो। पिछले साल यह 378.73 अरब डॉलर रहा था। यूएस की यह मांग भी है कि उसके उत्पादों की चीन के बाजार में पहुंच बढ़े और चीन में अमेरिकी कंपनियों पर टेक्नोलॉजी शेयर करने का दबाव खत्म किया जाए। अमेरिका-चीन के बीच चल रही ट्रेड वॉर का असर केवल इन दोनों देशों पर ही नहीं बल्कि पूरे विश्व पर पड़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि दोनों महाशक्ति हैं और इनके बीच की तल्खी बढ़ती है तो सारे विश्व पर इसका प्रभाव पड़ेगा।



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डोनाल्ड ट्रम्प

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डॉलर के मुकाबले 23 पैसे कमजोर हुआ रुपया, अमेरिकन करेंसी की डिमांड बढ़ने का असर


मुंबई. डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत के गिरने का सिलसिला गुरुवार को भी नहीं थमा। बुधवार को रुपया 23 पैसे तक लुढ़क गया। शाम को डॉलर के मुकाबले रुपया 69.94 रुपए पर बंद हुआ। गुरुवार को उम्मीद थी कि रुपया अपनी लय हासिल करने की कोशिश करेगा, लेकिन फॉरेक्स मार्केट में रुपया जब लुढ़क गया तो शेयर बाजार में मायूसी छा गई।

फॉरेक्स मार्केट में रुपया 69.70 पैसे पर खुला

गुरुवार सुबह फॉरेक्स मार्केट में रुपया 69.70 पैसे पर खुला। कुछ देर बाद में रुपया 69.89 तक लुढ़क गया। शाम को 69.94 रुपए पर बंद हुआ। सूत्रों का कहना है कि घरेलू बाजार में रुपये के कमजोर होने की वजह डॉलर की मांग में बढ़ोतरी होना है। उनका कहना है कि अमेरिकन करेंसी की मांग बढ़ेगी तो भारतीय करेंसी अपने आप कमजोर हो जाएगी।

चीन की चेतावनी का भी दिखा असर

अमेरिका-चीन के बीच चल रही ट्रेड वॉर का असर भी रुपये पर दिख रहा है। गुरुवार से अमेरिका और चीन के बीच वॉशिंगटन में वार्ता होनी थी, लेकिन रविवार को ट्रम्प के ट्वीट और बुधवार रात चीनी वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से अमेरिका को जारी चेतावनी का असर बाजार पर दिख रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों देशों के बीच हाल फिलहाल में समझौता होने के आसार नहीं हैं।

महाशक्तियों में समझौता न होने से बाजार प्रभावित

शेयर बाजार के सूत्रों का कहना है कि अमेरिका और चीन दोनों महाशक्ति हैं। चीन विश्व की दूसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति है तो अमेरिका इस क्षेत्र का सिरमौर है। अगर दोनों के बीच कोई सहमति नहीं बनी तो वैश्विक बाजार तो प्रभावित होगा ही। यह कारण भी रुपये की कमजोरी की वजह बन रहा है।



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प्रतीकात्मक फोटो

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रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ब्रिटेन की 259 साल पुरानी टॉय कंपनी हेमले को खरीदा


मुंबई. मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ब्रिटेन की 259 साल पुरानी टॉय कंपनी हेमले को खरीद लिया है। हालांकि सौदे की कीमत का खुलासा अभी नहीं हुआ है। पिछले दिनों न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया था कि दोनों कंपनियों के बीच इस मामले पर बात चल रही है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिटेल यूनिट रिलायंस रिटेल एग्रीमेंट के तहत देश में हेमले के उत्पाद पहले से ही बेचती आ रही है।

  1. चौथी बार हेमले के मालिकाना हक वाली कंपनी बदल गई है। इससे पहले हेमले चीन के सी डॉट बैनर इंटरनेशनल के पास थी। उसने कंपनी को 2015 में 10 करोड़ पाउंड में खरीदा था। पिछले साल मीडिया में खबरें थी कि सी डॉट बैनर घाटे में चल रही हेमले को बेचने पर विचार कर रही है।

  2. हेमले की शुरुआत 1760 में लंदन से हुई थी। सऊदी अरब का शाही परिवार इसके प्रमुख ग्राहकों में शामिल है। ब्रेग्जिट की अनिश्चितताओं और यूके के कंज्यूमर कॉन्फिडेंस में गिरावट की वजह के हेमले की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

  3. 2017 में हेमले को 1.2 करोड़ पाउंड का घाटा हुआ था। हालांकि दुनिया भर में 11 अरब डॉलर की टॉय इंडस्ट्री में अभी भी हेमले का दबदबा है। इसके 129 स्टोर हैं। यूके के बाहर कंपनी का चीन, जर्मनी, रूस, भारत, दक्षिण अफ्रीका, मध्य-पूर्व और कुछ अन्य क्षेत्रों में कारोबार है।

  4. मार्केट रिसर्च फर्म आईएमएआरसी के मुताबिक 2018 में भारत में खिलौनों की इंडस्ट्री का वैल्यूएशन 1.5 अरब डॉलर था। 2011 से 2018 के बीच इसमें सालाना 15.9% (कंपाउंड) ग्रोथ दर्ज की गई।

  5. बड़ी संख्या में युवा आबादी और मजबूत आर्थिक विकास को देखते हुए 2024 तक देश में खिलौनों का बाजार 3.3 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के टॉय मार्केट में फिलहाल फनस्कूल, लेगो, मेटेल और हेसब्रो प्रमुख ब्रांड हैं।

  6. पिछले कुछ सालों में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रिफायनिंग और पेट्रोकेमिकल्स के कोर बिजनेस से आगे बढ़कर अलग-अलग सेक्टर में विस्तार किया है। टेलीकॉम और रिटेल में रिलायंस ने अच्छी पकड़ बना ली है। रिलायंस की ई-कॉमर्स में आने की योजना भी है।



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      Reliance Industries acquires British toy-maker Hamleys

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चीन की अमेरिका को चेतावनी- ट्रम्प ने टैरिफ बढ़ाए तो बीजिंग भी उठाएगा सख्त कदम


बीजिंग. अमेरिका और चीन के बीच मार्च 2018 में शुरू हुआ ट्रेड वॉर और ज्यादा तल्ख होता जा रहा है। हालांकि, पिछले साल नवंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीन के राष्ट्रपति शी-जिनपिंग की जी-20 में हुई मुलाकात के बाद फिर से व्यापार वार्ता शुरू करने पर सहमति बनी थी, लेकिन ट्रम्प ने रविवार को ट्वीट कर 200 अरब डॉलर (13.84 लाख करोड़ रुपए) के चाइनीज इंपोर्ट पर आयात शुल्क 10% से बढ़ाकर 25% करने की बात की, उससे चीन भड़क गया है। उसका कहना है कि ट्रम्प ने टैरिफ बढ़ाए तो बीजिंग भी चुप नहीं बैठेगा। दोनों देशों के बीच 9, 10 मई को वॉशिंगटन में व्यापार वार्ता प्रस्तावित है।

चीनी कामर्स मिनिस्ट्री ने देर रात जारी किया बयान
ट्रम्प के टैरिफ बढ़ाने के ऐलान पर चीनी कामर्स मिनिस्ट्री ने बुधवार देर रात बयान जारी करके कहा कि अगर अमेरिका ने टैरिफ बढ़ाने की घोषणा पर अमल किया तो बीजिंग भी सख्त कदम उठाएगा। चीन का कहना है कि उसे पता है कि ट्रेड वॉर से दोनों देशों ही नहीं बल्कि सारे विश्व पर असर पड़ रहा है। हालांकि, मिनिस्ट्री ने 9, 10 मई को वॉशिंगटन में होने वाली वार्ता का जिक्र नहीं किया। अमेरिका और चीन के प्रतिनिधियों की गुरुवार को वाशिंगटन में मुलाकात हो रही है, जिसमें अमेरिका की ओर से चीन के उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगाए जाने को लेकर चर्चा होगी। व्यापार वार्ता के आखिरी दौर के लिए चीन की तरफ से उप प्रधानमंत्री लियू ही गुरुवार को अमेरिका पहुंच रहे हैं।

ट्रंप ने कहा- चीन ने खत्म किया व्यापार समझौता
ट्रम्प ने बुधवार को कहा, चीन ने समझौता खत्म कर दिया है। चीन के उप प्रधानमंत्री लियू ही गुरुवार को यहां आ रहे हैं। वह एक अच्छे आदमी हैं, लेकिन उन लोगों ने समझौता खत्म कर दिया है। वे ऐसा नहीं कर सकते। उन्हें इसका नतीजा भुगताना होगा। अगर हम कोई समझौता नहीं कर रहे हैं तो सालाना 100 अरब डॉलर से अधिक की रकम लेने में कुछ गलत नहीं है।ट्रम्प ने कहा है कि चीन 10 महीने से 50 अरब डॉलर के इंपोर्ट पर 25% और 200 अरब डॉलर के इंपोर्ट पर 10% शुल्क दे रहा है। चीन के साथ व्यापार वार्ता जारी है। उनका कहना था कि इसकी गति बहुत धीमी है, क्योंकि चीन फिर से सौदेबाजी करना चाहता है।

चीन के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 378.73 अरब डॉलर
अमेरिका चाहता है कि चीन के साथ उसका व्यापार घाटा कम हो। पिछले साल यह 378.73 अरब डॉलर रहा था। यूएस की यह मांग भी है कि उसके उत्पादों की चीन के बाजार में पहुंच बढ़े और चीन में अमेरिकी कंपनियों पर टेक्नोलॉजी शेयर करने का दबाव खत्म किया जाए। अमेरिका-चीन के बीच चल रही ट्रेड वॉर का असर केवल इन दोनों देशों पर ही नहीं बल्कि पूरे विश्व पर पड़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि दोनों महाशक्ति हैं और इनके बीच की तल्खी बढ़ती है तो सारे विश्व पर इसका प्रभाव पड़ेगा।



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डोनाल्ड ट्रम्प, शी-जिनपिंग

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3 प्रमुख अमेरिकी कंपनियों के सीईओ भारतीय मूल के, इन्होंने अपनी कंपनी का मुनाफा और मार्केट कैप बढ़ाया


नई दिल्ली. दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति और बर्कशायर हैथवे के चेयरमैन वॉरेन बफे ने पिछले शनिवार कंपनी की एजीएम में संकेत दिए कि भारतीय मूल के अजित जैन उनके उत्तराधिकारी हो सकते हैं। बफे नेकहा कि ग्रेगरी एबल और अजित जैन भविष्य में शेयरहोल्डर के सवालों के जवाब देने के लिए उनके साथ मंच साझा करेंगे। पिछले साल दोनों को प्रमोट कर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल किया गया था।अगर अजित जैन बर्कशायर हैथवे के सीईओ बनते हैं, तो वे भारतीय मूल केऐसे चौथे व्यक्तिहोंगे जो किसी नामी अमेरिकी कंपनी के प्रमुख बनेंगे। अभी सत्या नडेला माइक्रोसॉफ्ट, सुंदर पिचाई गूगल और शांतनु नारायण एडोब के सीईओ हैं।

अजित के सीईओ बनने की ज्यादा संभावना, क्योंकि बफे खुद उनकी तारीफ कर चुके
ओडिशा में जन्मे अजित जैन (67) की बर्कशायर हैथवे का चेयरमैन बनने की ज्यादा संभावना है। बफे (88) खुद कई मौकों पर उनकी तारीफ कर चुके हैं। अजित 1986 में बर्कशायर हैथवे से जुड़े थे। 2008 में बफे ने अपनी चिट्ठी में खुलासा किया था कि उन्होंने अजित के माता-पिता को पत्र भेजकर पूछा था कि उनके घर में अजित जैसा कोई और होनहारभी हो तो उसे भेजें। इसके अलावा बफे ने एक बार कहा था कि मेरे मुकाबले अजित ने बर्कशायर हैथवे को ज्यादा फायदा पहुंचाया है। मैं वाकई अजित के प्रति एक भाई या बेटे जैसा अपनापन महसूस करता हूं। वहीं, 2017 में बफे ने कंपनी को लिखे एनुअल लेटर में कहा था कि अगर आपको कभी अजित के लिए मुझे हटाना भी पड़े तो जरा भी हिचकना नहीं।

3 प्रमुखअमेरिकी कंपनियों में भारतीय मूल के ही सीईओ, शांतनु नारायण ने सबसे ज्यादा 436% मार्केट कैप बढ़ाई

सीईओ कार्यकाल मार्केट कैप रेवेन्यू प्रॉफिट
सत्या नडेला, माइक्रोसॉफ्ट 5 साल 214% 26% -25%
स्टीव बॉल्मर,माइक्रोसॉफ्ट 14 साल -48% 28% 134%
सुंदर पिचाई, गूगल 4 साल 82% 83% 88%
लैरी पेज, गूगल 4 साल 150% 97% 68%
शांतनु नारायण, एडोब 12 साल 436% 186% 260%
ब्रूस चीजेन, एडोब 7 साल 67% 186% 278%

माइक्रोसॉफ्ट: सत्या नडेला सीईओ बने तो 5 साल में कंपनी का मार्केट कैप 214% बढ़ा
फरवरी 2014 में स्टीव के इस्तीफे के बाद सत्या नडेला माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ बने। उस वक्त कंपनी का मार्केट कैप 306 अरब डॉलर था। वर्तमान में मार्केट कैप 961अरब डॉलर है। पिछले महीने ही माइक्रोसॉफ्ट 1 लाख करोड़ डॉलर मार्केट वैल्यू का आंकड़ा छूने वाली दुनिया की चौथी कंपनी बनी थी। नडेला के पांच साल के कार्यकाल में मार्केट कैप 214% बढ़ा। इसी दौरान रेवेन्यू भी 26% बढ़कर 110.3 अरब डॉलरपहुंच गया। हालांकि, नडेला के कार्यकाल में कंपनी के मुनाफे में कमी देखी गई।

साल रेवेन्यू प्रॉफिट मार्केट कैप
2000 22.9 9.4 590
2014 86 22 306
2018 110.3 16.5 961 (8 मई 2019)

(आंकड़े अरब डॉलर में/ सोर्स- कंपनी फाइलिंग)

अप्रैल 1975 में बनी माइक्रोसॉफ्ट में 2000 से लेकर 2014 तक स्टीव बॉल्मर सीईओ रहे। जब उन्होंने कंपनी की बागडोर संभाली तब मार्केट कैप 590 अरब डॉलरथा। जब वे इस पद से हटे तो मार्केट कैप 306 अरब डॉलर रह गया। यानी स्टीव के 14 साल के कार्यकाल में माइक्रोसॉफ्ट का मार्केट कैप 48% तक गिर गया। हालांकि, इस दौरान कंपनी के रेवेन्यू और मुनाफे में बढ़ोतरी हुई।

पिचाई के सीईओ बनने के बाद गूगल का रेवेन्यू 83% और मुनाफा 88% बढ़ा
1998 में शुरू हुई गूगल के पहले सीईओ लैरी पेज थे। उन्होंने 2001 में इस्तीफा दे दिया। 2001 से 2011 तक एरिक श्मिट सीईओ रहे। 2011 में लैरी पेज दोबारा सीईओ बने। उस वक्त कंपनी का मार्केट कैप 180 अरब डॉलर के आसपास था। रेवेन्यू 37.9 अरब डॉलर और मुनाफा 9.7 अरब डॉलर था। उन्होंने 2015 में इस्तीफा दिया और सुंदर पिचाई सीईओ बने। तब गूगल का मार्केट कैप 450 अरब डॉलर, रेवेन्यू 75 अरब डॉलर और मुनाफा 16.3 अरब डॉलर था। यानी, लैरी पेज के साढ़े चार साल के कार्यकाल में मार्केट कैप 150%, रेवेन्यू 97% और मुनाफा 68% बढ़ा।

कंपनी का मौजूदा मार्केट कैप 816 अरब डॉलर है। यानी सुंदर पिचाई के 4 साल के कार्यकाल में मार्केट कैप में 82% की बढ़ोतरी हुई है। जबकि, कंपनी का 2018 में रेवेन्यू 136.8 अरब डॉलर और मुनाफा 30.7 अरब डॉलर रहा। इस हिसाब से 2015 की तुलना में रेवेन्यू 83% और मुनाफा 88% बढ़ा।

साल रेवेन्यू प्रॉफिट मार्केट कैप
2011 37.9 9.7 180
2015 75 16.3 450
2018 136.8 30.7 816 (8 मई 2019)

(आंकड़े अरब डॉलर में/ सोर्स- कंपनी फाइलिंग)

शांतनु 2007 में एडोब के सीईओ बने

अमेरिकी कंपनी एडोब के 2000 से लेकर 2007 तक ब्रूस चीजेन सीईओ रहे। इस दौरान एडोब का मार्केट कैप 15 अरब डॉलर से बढ़कर 25 अरब डॉलर हुआ। यानी, 7 साल में मार्केट कैप में 67% की बढ़ोतरी हुई। नवंबर 2007 में शांतनु नारायण एडोब के सीईओ बने। 12 साल के कार्यकाल में कंपनी का मार्केट कैप 436% बढ़कर 134अरब डॉलर पहुंच गया। अगर हर साल मार्केट कैप में आए औसत उछाल को देखें तो ब्रूस के कार्यकाल में मार्केट कैप 10%, जबकि नारायण के कार्यकाल में हर साल 37% बढ़ा।

साल रेवेन्यू प्रॉफिट मार्केट कैप
2002 1.1 0.191 15
2007 3.1 0.723 25
2018 9 2.6 134 (8 मई 2019)

(आंकड़े अरब डॉलर में/ सोर्स- कंपनी फाइलिंग)



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Indian-US CEOs Satya Nadella, Sundar Pichai & Shantanu Narayen of 3 top US companies that saw hike in profit, market cap

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इन्वेस्टमेंट की शुरुआत कर रहे हैं तो हाईब्रिड फंड अच्छा विकल्प है


हाइब्रिड फंड उसे कहते हैं जिसका एसेट क्लास दो तरह का होता है। यानी जिसका पैसा दो तरह के एसेट में लगाया जाता है। आम तौर पर हाइब्रिड फंड का पैसा इक्विटी और डेट में इन्वेस्ट होता है। इसमें इन्वेस्टर को दोनों एसेट का लाभ मिलता है। इक्विटी म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने वाले मूलत: कंपनियों के इक्विटी शेयर में इन्वेस्ट करते हैं। इक्विटी फंड में ज्यादा रिटर्न देने की गुंजाइश होती है, लेकिन इनमें रिस्क भी ज्यादा होता है। डेट फंड का पैसा कॉरपोरेट बॉन्ड, मनी मार्केट के इंस्ट्रूमेंट, ट्रेजरी बिल (सरकारी बॉन्ड) आदि में इन्वेस्ट किया जाता है। इन सब पर रिटर्न निश्चित होता है, इसलिए डेट फंड को इक्विटी फंड की तुलना में कम रिस्क वाला माना जाता है। लेकिन लंबे समय में इनमें रिटर्न की गुंजाइश इक्विटी से कम होती है। हाइब्रिड फंड में इन दोनों का मिला-जुला लाभ मिलता है।

  1. हाइब्रिड फंड की स्कीम में इक्विटी के जरिए ज्यादा रिटर्न और डेट के जरिए स्थिरता, दोनों का लाभ मिलता है। दूसरे शब्दों में कहें तो हाइब्रिड फंड में कम रिस्क में ज्यादा रिटर्न की गुंजाइश होती है। अगर हाइब्रिड म्यूचुअल फंड स्कीम का 65% पैसा इक्विटी में और बाकी डेट में लगाया जाता है तो उसे इक्विटी ओरिएंटेड फंड कहते हैं। अगर 65% पैसा डेट में और बाकी इक्विटी में लगाया है तो वह डेट ओरिएंटेड फंड कहलाएगा। एसेट एलोकेशन यानी कहां कितना पैसा इन्वेस्ट किया गया है, उसके हिसाब से हाइब्रिड फंड के कई प्रकार होते हैं। इनमें कंजरवेटिव, बैलेंस्ड और अग्रेसिव फंड प्रमुख हैं। कंजरवेटिव हाइब्रिड फंड का 10-25% पैसा इक्विटी और बाकी डेट में लगाया जाता है। बैलेंस्ड हाइब्रिड का 40-60% पैसा इक्विटी में होता है। अग्रेसिव हाइब्रिड का 65-80% पैसा इक्विटी में निवेश किया जाता है।

  2. यह म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टमेंट की शुरूआत करने वाले और पुराने इन्वेस्टर, दोनों के लिए होता है। इन्वेस्टर अपनी जरूरत के हिसाब से कैटेगरी चुन सकते हैं। नए इन्वेस्टर्स के लिए यह अच्छा होता है और यहां वे अनुभव भी हासिल कर सकते हैं। पुराने इन्वेस्टर भी सही हाइब्रिड फंड स्कीम चुनकर फायदा उठा सकते हैं। फंड की कैटेगरी के हिसाब से एसेट एलोकेशन बदलता रहता है, इसलिए एकमुश्त इन्वेस्टमेंट भी एक विकल्प हो सकता है। एक बार पैसा लगाने के बाद आप अनावश्यक रिस्क से बच सकते हैं। अगर इन्वेस्टमेंट का लक्ष्य लॉन्ग टर्म है, तो अग्रेसिव हाइब्रिड फंड अच्छा विकल्प हो सकता है। इसमें कम से कम 65% पैसा इक्विटी में लगाया जाता है, इसलिए इसमें लाभ पर टैक्स में छूट भी मिलती है।

  3. जो इन्वेस्टर रिस्क नहीं लेना चाहते, इक्विटी में कम निवेश करना चाहते हैं उनके लिए कंजरवेटिव और बैलेंस्ड फंड बेहतर विकल्प हैं। इनमें कम रिस्क के साथ लॉन्ग टर्म में एसेट बनाने का मौका मिलेगा। इक्विटी में पहली बार निवेश करने वालों या जो महंगाई दर से ज्यादा रिटर्न चाहते हैं, उनके लिए यह अच्छा है। लेकिन यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि हाइब्रिड फंड की इन दोनों कैटेगरी में टैक्स रेट ज्यादा है।



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      Hybrid fund is a good option if you are starting the investment

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तीन प्रमुख अमेरिकी कंपनियों के भारतीय सीईओ


  • अगर अजित जैन बर्कशायर हैथवे के सीईओ बनते हैं, तो वे ऐसे चौथे भारतीय होंगे जो किसी नामी अमेरिकी कंपनी के प्रमुख बनेंगे।
  • अभी सत्या नडेला माइक्रोसॉफ्ट, सुंदर पिचाई गूगल और शांतनु नारायण एडोब के सीईओ हैं। सभी ने कंपनी का मुनाफा बढ़ाया है।


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microsoft google and adobe growth under indian origin ceos

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एस्सार स्टील के प्रमोटर्स ने दूसरी बार आर्सेलर की बोली खारिज करने की अपील की


नई दिल्ली. दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही एस्सार स्टील की प्रमोटर एस्सार स्टील एशिया होल्डिंग्स लिमिटेड (ईएसएएचएल) ने आर्सेलरमित्तल के 42,000 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को नामंजूर करने की अपील की है। ईएसएएचएल के पास एस्सार स्टील के 72% शेयर हैं। उसने मंगलवार को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल(एनसीएलएटी) में याचिका लगाई। ईएसएएचएल का आरोप है कि आर्सेलर के प्रमोटर लक्ष्मी मित्तल ने अपने भाइयों की डिफॉल्टर कंपनियों से संबंध होने की बात छिपाई। इसलिए मित्तल की कंपनी दिवालिया प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए अयोग्य हो गई है।ट्रिब्यूनल ने याचिका स्वीकार कर आर्सेलर मित्तल से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 13 मई को होगी।

  1. ईएसएएचएल का आरोप है कि मित्तल जीपीआई टेक्सटाइल्स, बालासोर अलॉयज और गोंटरमन पीपर्स में प्रमोटर थे। ये कंपनियां उनके भाई प्रमोद और विनोद मित्तल की हैं। इनके कर्ज को बैंक एनपीए घोषित कर चुके हैं।

  2. ईएसएएचएल ने याचिका में कहा है कि आर्सेलरमित्तल इंडिया लिमिटेड और इसके प्रमोटर लक्ष्मी मित्तल ने सुप्रीम कोर्ट, कर्जदाताओं और दिवालिया अदालत को गुमराह किया। ईएसएएचएल ने लक्ष्मी मित्तल की ओर से 17 अक्टूबर 2018 को दिए गए उस एफिडेविट को चुनौती दी है जिसमें कहा गया था कि उनका या उनकी कंपनी आर्सेलर का 20 साल से भाइयों और उनकी कंपनियों से कोई संबंध नहीं है।

  3. ईएसएएचएल ने विभिन्न दस्तावेज पेश कर बताया है कि 30 सितंबर 2018 तक लक्ष्मी मित्तल नवोदय कंसल्टेंट्स लिमिटेड के को-प्रमोटर थे जिसमें उनके भाई प्रमोद और विनोद भी प्रमोटर के तौर पर शामिल थे। इसे छिपाने के लिए लक्ष्मी मित्तल ने 1 अक्टूबर 2018 से 31 दिसंबर 2018 के बीच नवोदय के अपने शेयर बेच दिए और खुद को प्रमोटर के तौर पर दिखाना बंद कर दिया।

  4. कंपनी हाथ से जाती देख पिछले साल अक्टूबर में एस्सार स्टील के प्रमोटर रुइया परिवार ने इतनी राशि चुकाने का ऑफर दिया था। रुइया परिवार चाहता था कि कर्जदाता आर्सेलर की बोली खारिज कर एस्सार स्टील के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया से बाहर आ जाएं लेकिन कर्जदाताओं ने इसे नामंजूर कर दिया था।



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      आर्सेलरमित्तल के चेयरमैन लक्ष्मी मित्तल।

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मास्टरकार्ड अगले 5 साल में भारत में 7 हजार करोड़ रुपए का निवेश करेगी


नई दिल्ली. ग्लोबल कार्ड पेमेंट कंपनी मास्टरकार्ड अगले पांच सालमें भारत में 1 अरब डॉलर(7,000 करोड़ रुपए)का निवेश करेगी। इतना ही निवेश बीते 5 साल में किया जा चुका है।कंपनी का कहना है कि भारत की इकोनॉमी में भरोसा बढ़ा है। इसलिए अगले एक दशक में निवेश और बढ़ाया जा सकता है।

भारत ग्लोबल टेक सेंटर बनाने की योजना

मास्टरकार्ड के को-प्रेसिडेंट (एशिया पैसिफिक) एरि सरकार का कहना है कि कंपनी अपने प्लेटफॉर्म्स के लिएभारत को ग्लोबल टेक्नोलॉजी सेंटर बनाना चाहती है। अमेरिका के बाहर भारत ऐसा पहला देश होगा। कंपनी की सात हजार करोड़ रुपए के निवेश में से करीब 207 करोड़टेक सेंटर तैयार करने में खर्च किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि इस निवेश से इनोवेशन को बढ़ावा देने और मास्टरकार्ड को अपनी क्षमता और वैल्यू-एडेड सर्विससकी संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी।भुगतान नेटवर्क के रूप में हम एक वैश्विक नेटवर्क हैं। हमारे सभी सौदे वैश्विक नेटवर्क के जरिए होते हैं।


एरी का मानना है कि भारत में फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी सेक्टरमें ग्रोथ अच्छी है। देश में डिजिटल भुगतान के लिएकार्ड पसंदीदा माध्यम है। आरबीआई के आंकड़ोंके मुताबिक इस साल फरवरी तक 99.06 करोड़ कार्ड थे। इनमें से 4.6 करोड़ क्रेडिट कार्ड और 94.5 करोड़ डेबिट कार्ड थे।



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सिंबॉलिक इमेज।

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डीजल सेगमेंट से छोटी कारों को हटाने पर विचार कर रही टाटा मोटर्स


नई दिल्ली. टाटा मोटर्स अपने डीजल सेगमेंट से छोटी कारों को हटाने पर विचार कर रही है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि छोटी गाड़ियों के लिए नए एमिशन नॉर्म्स बीएस-6 के हिसाब से डीजल इंजन डेवलप करना फायदेमंद नहीं होगा, क्योंकि इसमें ज्यादा खर्च आता है। उनका कहना है कि कंपनी ऐसा करती है तो इससे गाड़ियों के दाम बढ़ेंगे और उनकी डिमांड कम रहेगी। कंपनी के मुताबिक- छोटी कारों के सेगमेंट में 80 फीसदी डिमांड पेट्रोल कारों की है।

  1. टाटा मोटर्स का यह बयान देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी की तरफ से अप्रैल 2020 से डीजल गाड़ियों की बिक्री बंद करने के ऐलान के बाद आया है। मारुति सुजुकी ने कहा था कि वह नए एमिशन नॉर्म्स लागू होने के बाद डीजल गाड़ियों की बिक्री बंद करेगी, क्योंकि नए मानकों के हिसाब से डीजल इंजन को अपग्रेड करने में मोटी रकम खर्च होगी।

  2. टाटा मोटर्स के पैसेंजर व्हीकल बिजनेस यूनिट के प्रेसीडेंट मयंक पारीक ने कहा कि नए एमिशन नॉर्म्स के लागू होने से छोटी डीजल गाड़ियों के मामले में कंप्लायंस महंगा हो जाएगा। हमें ऊंची लागत का बोझ आखिरकार ग्राहकों पर डालना होगा, इसलिए स्वाभाविक रूप से डीजल गाड़ियों की सेल में गिरावट आएगी।

  3. इंडस्ट्री के दिग्गजों का कहना है कि डीजल अब भी सस्ता है और ज्यादा माइलेज देता है, लेकिन बीएस-6पर खरा उतरने वाली गाड़ियां बनाने में जितना खर्च आएगा, उस अनुपात में डीजल गाड़ियों से अभी मिल रहे फायदे में बढ़ोतरी नहीं होगी। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि नए मानक लागू होने के बाद मार्केट की स्थिति क्या रहेगी, इसके बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।

  4. उधर, फोर्ड का कहना है कि वह देश में डीजल कारों को पहले की तरह से बेचती रहेगी। कंपनी इको स्पोर्ट्स और एंडेवर जैसे मॉडल बना रही है। कंपनी का कहना है कि वह नए मानकों के हिसाब से अपनी कारों को 1 अप्रैल 2020 से पहले अपग्रेड करने को तैयार है।



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      प्रतीकात्मक फोटो

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अरबपति कारोबारी वॉरेन बफे ने कहा- निवेश में महिलाओं को महत्व मिलना जरूरी


ओमाहा. अरबपति उद्यमी वॉरेन बफे ने कहा है कि निवेश के क्षेत्र में महिलाओं को महत्व मिलना बेहद जरूरी है। वह ओमाहा में अपने बर्कशायर हेथवे एंपायर के शेयरधारकों की सालाना बैठक में भाग लेने पहुंचे थे। इसका आयोजन वित्तीय क्षेत्र की महिला उद्यमियोंने किया था। बफे यहां बगैर किसी पूर्व सूचना के पहुंचे थे। कार्यक्रम में वित्तीय क्षेत्र में व्याप्त असमानताओं को दूर करने पर चर्चा की गई।

  1. वेरिएंट पर्स्पेक्टिव की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के इन्वेस्टमेंट फंड्स में महिलाओं की भागीदारी सिर्फ3% है। बफे का कहना है कि वित्तीय क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने की कवायद काफी पहले से शुरू की जानी थी।

  2. बफे का कहना है कि जब निवेश को लेकर कोई उनसे संपर्क करता है तो उनके लिए मायने नहीं रखता कि सामने वाला कोई पुरुष है या फिर महिला। उनका कहना था कि स्टॉक मार्केट को भी इस बात से कोई मतलब नहीं है कि जो पैसा निवेश हुआ है उसका मालिक कौन है।

  3. अपनी खुद की फर्म शुरू करने वाली महिला उद्यमी लौरा रिट्टेनहाउस का कहना है कि अमेरिका में 60% संपत्ति महिलाओं के हाथ में है, लेकिन यह बात चौंकाने वाली है कि उन्हें अपने निवेश की देखभाल करने के लिए कोई महिला प्रबंधक नहीं मिल पाती।

  4. सप्ताह में दो बार निकलने वाले पत्र इन्वेस्टेड प्रैक्टिस की संस्थापक डेनियल टाउन का कहना है कि महिलाएं आमतौर पर सफल वित्तीय प्रबंधक होती हैं, लेकिन उसके बाद भी वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में अहम जगह नहीं मिल पाती है।



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      वॉरेन बफे

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विदेशी निवेशकों ने घरेलू पूंजी बाजार से खींचे 1255 करोड़ रुपये


नई दिल्ली. एक चौंकाने वाले घटनाक्रम के तहत विदेशी निवेशकों (फारेन पोर्टफोलिया इन्‍वेस्‍टर्स) ने घरेलू पूंजी बाजार से 1255 करोड़ रुपये खींच लिए। निवेशकों ने 2 और 3 मई के दौरान इक्विटी से 367 करोड़ और डेट मार्केट से 888 करोड़ निकाले। महाराष्ट्र दिवस की वजह से 1 मई को अवकाश था। जियोजित फाइनेंशियल सर्विस के चीफ इन्‍वेस्‍टमेंट स्ट्रैटजिस्ट वीके विजय कुमार ने कहा कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ऐसा किस वजह से हुआ, लेकिन इसके पीछे फिलहाल जो कारण दिखाई दे रहा है, उससे लगता है कि चुनाव की वजह से यह संकट पैदा हुआ है।

  1. सूत्रों का कहना है कि इससे पहले घरेलू पूंजी बाजार में फरवरी, मार्च और अप्रैल में जमकर विदेशी निवेश हुआ था। फरवरी में 11,182 करोड़, मार्च में 45,981 करोड़ और अप्रैल में 16,093 करोड़ रुपये का निवेश इक्विटी और डेट मार्केट में किया गया था।

  2. एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैश्विक स्तर पर सेंट्रल बैंकों की उदारवादी नीतियों के चलते भारत में विदेशी पूंजी निवेश पर्याप्त रूप से हो रहा था। घरेलू पूंजी बाजार इसकी वजह से सशक्त बना हुआ था।

  3. म्यूचुअल फंड्स रिसर्च एट फंड्स इंडिया की प्रमुख विद्या बाला का कहना है कि अप्रैल में जो पूंजी निवेश हुआ वह मार्च की तुलना में काफी कम था। उनका कहना है कि विदेशी निवेशकों ने बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, इंश्योरेंस सेक्टर के साथ ऑयल और गैस से जुड़े कारोबार में काफी रुचि दिखाई थी।

  4. उनका कहना है कि मई में विदेशी निवेशकों के रवैये से निश्चित तौर पर घरेलू पूंजी बाजार को झटका लगा है। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि चुनाव की वजह से विदेशी निवेशक भ्रम की स्थित में हैं।



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चुनावी अनिश्चतता की वजह से सुस्त हुआ मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर


नई दिल्ली. चुनावी अनिश्चतता का असर लगभग हर क्षेत्र में देखने को मिल रहा है और उद्योग भी इससे अछूता नहीं हैं। पीएमआई (परचेसिंग मैनेजर्स इंडेक्स) की रिपोर्ट कहती है कि चुनावी अनिश्चतता की वजह से मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर की अप्रैल की रेटिंग 51.8 अंकों तक गिर गई है। मार्च में यह रेटिंग 52.6 अंक थी।

  1. सूत्रों का कहना है कि पीएमआई की मासिक रेटिंग अगर 50 से कम हो जाए तो इसका मतलब होता है कि औद्योगित जगत संकुचन की तरफ बढ़ रहा है। अगर रेटिंग 50 से ज्यादा हो तो इसका मतलब विस्तार से जोड़कर देखा जाता है।

  2. हालांकि, राहत की बात यह है कि लगातार 21वें सप्ताह में रेटिंग 50 अंकों से ज्यादा दर्ज की गई है। यह इस बात का भी सूचक होता है कि उद्योग जगह की प्रगति एक जगह पर जाकर ठहर गई है। इसमें इजाफा नहीं हो रहा, लेकिन गिरावट भी चिंताजनक नहीं है।

  3. सूत्रों का कहना है कि रेटिंग का कम रहना दर्शाता है कि मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर कुछ नया करने को तैयार नहीं हो रहा है। अब सभी की निगाहें चुनाव के बाद बनने वाली नई सरकार पर टिकी हैं। यही वजह है कि रोजगार सृजन की रफ्तार भी कम है।

  4. पीएमआई की रिपोर्ट के रचयिता और आईएचएस मार्किट के प्रमुख अर्थशास्त्री पोलियाना डी लिमा का कहना है कि मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर के सुस्त रहने की वजह चुनाव है। उनका कहना है कि नई सरकार के बनने के बाद इस क्षेत्र में तेजी दिखेगी।

  5. चुनाव बाद बनने वाली नई सरकार की नीतियों को देखकर ही उद्योग जगह अपनी रणनीति तय करेगा। फिलहाल उद्योगपति देख रहे हैं कि केंद्र में कौन सी सरकार बनती है और उसकी नीतियां उनके मनमाफिक होती भी हैं या नहीं।



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एपल का प्रॉफिट 16% घटा, फिर भी मुनाफे में 118% बढ़ोतरी वाली अमेजन के मुकाबले यह 3 गुना


नई दिल्ली. प्रॉफिट और रेवेन्यू घटने के बावजूद एपल 1 लाख करोड़ रुपए का मार्केट कैप छू चुकी दो अन्य कंपनियों अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट से आगे है। मार्च तिमाही में एपल का प्रॉफिट 80,325 करोड़ रुपए रहा, जबकि अमेजन का 24,741 करोड़ रुपए और माइक्रोसॉफ्ट का 61,204 करोड़ रुपए रहा। भास्कर प्लस ऐप ने जब दुनिया की चार प्रमुख कंपनियों अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, एपल और फेसबुक के तिमाही नतीजों का एनालिसिस किया तो पाया कि मार्केट कैप और तिमाही रेवेन्यू के मामले में अमेजन और एपल बराबरी पर हैं। लेकिन एपल का प्रॉफिट अमेजन से 55,584 करोड़ रुपए ज्यादा है। वहीं, मार्केट कैप के हिसाब से भारत की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज इनसे पीछे है। रिलायंस का मार्च तिमाही में मुनाफा 10,362 करोड़ रुपए रहा। मार्केट कैप के मामले में भी रिलायंस अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और एपल से करीब 8 गुना पीछे है।

वजह : आईफोन की कम बिक्री ने एपल का मुनाफा घटाया, अमेजन-माइक्रोसॉफ्ट को क्लाउड सर्विसेज से फायदा
फ्लैगशिप प्रोडक्ट आईफोन की बिक्री का घटना एपल के रेवेन्यू और मुनाफे में आई कमी का बड़ा कारण रहा। 2018 की मार्च तिमाही में कंपनी ने 2.62 लाख करोड़ रुपए के आईफोन बेचे थे। मार्च 2019 की तिमाही में यह आंकड़ा 17% घटकर 2.17 लाख करोड़ रुपए पर आ गया। इसके उलट अमेजन को एडवरटाइजिंग, क्लाउड और थर्ड पार्टी सेलर सर्विसेज में अच्छी ग्रोथ मिली। इससे उसके मुनाफे में इजाफा हुआ। माइक्रोसॉफ्ट की अजुरे क्लाउड सर्विसेज के रेवेन्यू में मार्च 2019 तिमाही में 41% की बढ़ोतरी हुई। यह इसके मुनाफे और रेवेन्यू में बढ़ोतरी का बड़ा कारण रहा। अजुरे, ऑफिस 365 और लिंक्डइन कंपनी की क्लाउड सर्विसेज है।

फेसबुक को जुर्माने की आशंका
फेसबुक के मुनाफे में इसलिए कमी आई क्योंकि उसने 20,844 करोड़ रुपए की नेट इनकम को अलग कर दिया। यह राशि कंपनी ने डेटा प्राइवेसी मामले में 3 से 5 अरब डॉलर के जुर्माने की आशंका के चलते रखी है। अगर यह राशि अलग नहीं की जाती तो फेसबुक का मुनाफा 37,720 करोड़ रुपए होता जो मार्च 2018 तिमाही की तुलना में 8.9% ज्यादा होता। हालांकि, तब भी इसके प्रॉफिट में बढ़ोतरी अन्य चार कंपनियों के तिमाही नतीजों की तुलना में कम ही रहती। उधर, रिलायंस का प्रॉफिट रिटेल और डिजिटल बिजनेस के रेवेन्यू में अच्छी ग्रोथ से बढ़ा है।

रेवेन्यू में सबसे ज्यादा इजाफा फेसबुक का
मार्च 2019 की तिमाही में रेवेन्यू में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी फेसबुक के नतीजों में देखने को मिली। 2018 की तुलना में इसमें 26% बढ़ोतरी हुई। हालांकि एपल (4.03 लाख करोड़ रुपए) और अमेजन (4.14 लाख करोड़ रुपए) की तुलना में फेसबुक का रेवेन्यू 4 गुना कम है। वहीं, माइक्रोसॉफ्ट की तुलना में यह आधा है। रिलायंस भी रेवेन्यू के मामले में फेसबुक से आगे है। फेसबुक का मार्च तिमाही में 1.04 लाख करोड़ रुपए रेवेन्यू रहा। वहीं, रिलायंस का रेवेन्यू 1.54 लाख करोड़ रुपए रहा।

रेवेन्यू

मार्च तिमाही 2019

मार्च तिमाही 2018

कमी/बढ़ोतरी

अमेजन

4.15 लाख करोड़ रुपए

3.54 लाख करोड़ रुपए

17% बढ़ा

माइक्रोसॉफ्ट

2.12 लाख करोड़ रुपए

1.86 लाख करोड़ रुपए

14% बढ़ा

एपल

4.03 लाख करोड़ रुपए

4.25 लाख करोड़ रुपए

5% घटा

फेसबुक

1.04 लाख करोड़ रुपए

83 हजार करोड़ रुपए

26% बढ़ा

रिलायंस

1.54 लाख करोड़ रुपए

1.29 लाख करोड़ रुपए

19.4% बढ़ा

अमेजन के शेयरों ने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया
मार्च 2019 की तिमाही में अमेजन ने अपने निवेशकों को प्रति शेयर 492 रुपए रिटर्न दिया, जो एपल के शेयरों से हुई आमदनी का करीब 3 गुना, माइक्रोसॉफ्ट से 6 गुना और फेसबुक से 8 गुना ज्यादा रहा। वहीं, रिलायंस से यह 28 गुना ज्यादा है। निजता के उल्लंघन मामले में 3 अरब डॉलर के लीगल एक्सपेंसेस के चलते फेसबुक की प्रति शेयर आमदनी घटी है।

प्रति शेयर रिटर्न

मार्च तिमाही 2019

मार्च तिमाही 2018

कमी/बढ़ोतरी

अमेजन

492 रुपए

227 रुपए

117% बढ़ा

माइक्रोसॉफ्ट

79 रुपए

66 रुपए

20% बढ़ा

एपल

171 रुपए

190 रुपए

10% घटी

फेसबुक

59 रुपए

117 रुपए

50% घटी

रिलायंस

17.5 रुपए

15.9 रुपए

9.7% बढ़ी



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analysis of amazon apple microsoft facebook and reliance march quarter earnings

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एपल का प्रॉफिट 16% घटा, फिर भी अमेजन के मुकाबले 3 गुना


  • दुनिया की 4 प्रमुख कंपनियों अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, एपल, फेसबुक और भारत की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस के नतीजों का एनालिसिस।
  • मार्च तिमाही में एपल का प्रॉफिट 80,325 करोड़ रुपए रहा, जबकि अमेजन का 24,741 करोड़ रुपए और माइक्रोसॉफ्ट का 61,204 करोड़ रुपए रहा।


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analysis of amazon apple microsoft facebook and reliance march quarter earnings

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बैंकिंग और रेल यात्रा समेत आम आदमी से जुड़े 5 बदलाव आज से लागू


नई दिल्ली. नए फाइनेंशियल ईयर (2019-20) का पहला महीना खत्म हो गया। अप्रैल में कई नए नियम लागू हुए तो कुछ नियमों में बदलाव भी किया गया। अब मई में भी कई नए नियम लागू हो गए हैंतो कुछ नियमों में बदलाव भी हुए हैं। आइए जानते हैं आम आदमी से जुड़े कौन-कौन से बदलाव लागू हुए हैं।

  1. एसबीआई बैंक की डिपॉजिट और लोन की ब्याज दरें आरबीआई की बेंचमार्क दर से जुड़ गई हैं। इसका मतलब यह हुआ कि अब आरबीआई के रेपो रेट में बदलाव होने पर बैंक की जमा और लोन की दरों पर भी असर होगा। इस नियम के लागू होने से ग्राहकों को पहले की तुलना में बचत खाते पर कम ब्याज मिलेगा। हालांकि 1 लाख रुपए से ज्यादा के जमा और लोन की ब्याज दरों पर ही यह नियम लागू होंगे।

  2. पंजाब नेशनल बैंक के डिजिटल वॉलेट (पीएनबी किटी) का इस्तेमाल करने वालों को झटका लग सकता है। पीएनबी ने अपने ग्राहकों से कहा था कि वह पीएनबी किटी में पड़े पैसे 30 अप्रैल तक या तो खर्च कर लें या फिर आईएमपीएस से अपने बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर लें। कहने का मतलब यह है कि अब आपको पीएनबी किटी की बजाए किसी दूसरे विकल्प या वॉलेट का इस्तेमाल करना होगा।

  3. रेल यात्री अब चार्ट बनने से चार घंटे पहले तक बोर्डिंग स्टेशन बदलवा सकते हैं। पहले इसे सिर्फ 24 घंटे पहले तक ही बदला जा सकता था। मतलब यह कि ट्रेन में यात्रा के लिए टिकट बुक कराते समय आपने जिस बोर्डिंग स्टेशन को चुना है, बाद में उसे बदलवा सकते हैं। हालांकि शर्त यह है कि टिकट कैंसिलेशन पर पैसा रिफंड नहीं दिया जाएगा।

  4. कई अलग-अगल रूट्स पर आज से नई विमान सेवाएं शुरू हो गई हैं। गो एयर ने मुंबई और दिल्ली से दूसरे शहरों के लिए उड़ानें शुरू की हैं।

  5. मोबाइल उपभोक्ता अबबिना आधार के सिम कार्ड खरीद सकते हैं। नया सिम कार्ड लेने के लिए बिना आधार वाला डिजिटल केवाईसी सिस्टम तैयार कर लिया गया है। वर्तमान में इस प्रणाली का परीक्षण चल रहा है। इससे नए सिम कार्ड खरीदने वाले ग्राहक का वेरिफिकेशन कर 1 से 2 घंटे के भीतर ही नंबर चालू कर दिया जाएगा।



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      सिंबॉलिक इमेज।

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आम आदमी से जुड़े 5 बदलाव आज से लागू होंगे


  • नए वफाइनेंशियल ईयर का पहला महीना खत्म हो गया। अप्रैल में कई नए नियम लागू हुए तो कुछ नियमों में बदलाव भी किया गया।
  • एसबीआई बैंक की डिपॉजिट और लोन की ब्याज दरें आरबीआई की बेंचमार्क दर से जोड़ देगा। पीएनबी किटी इस्तेमाल पर झटका लगेगा।


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Important changes that will be effective from May 1 news and updates

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विस्तारा देगा जेट के 100 पायलट और 400 केबिन क्रू को नौकरी, शुरू हुई प्रक्रिया


मुंबई. विस्तारा एयरलाइन जेट एयरवेज के 100 पायलट और 400 केबिन क्रू कर्मचारियों को नौकरी पर रखेगा।इससे पहले ऐसा ही प्रस्ताव स्पाइस जेट की ओर से भी इन कर्मचारियों के सामने रखा गया था। सूत्र के मुताबिक पिछले तीन सालों में यह पहला मौका है जब विस्तारा ने इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों को नौकरी पर रखने का प्रस्ताव रखा है।

  1. सूत्र ने कहा, जेट के आर्थिक संकट में डूबने से बाकी कंपनियों के लिए नए अवसर खुले हैं। कंपनियों में नौकरी के लिए एयरलाइन बाजार में कुशल पायलट और ग्राउंड स्टाफ कर्मचारी मौजूद हैं। कंपनी के मुताबिक ऐसे कर्मचारियों के साथ काम करने में कंपनी का समय और पैसा दोनों बचते हैं।

  2. सूत्र ने बताया, निवेशकों से संतुष्टिपूर्ण जवाब न मिलने के बाद जेट ने 17 अप्रैल को सारे ऑपरेशन बंद कर दिए। अब कंपनी के 22 हजार कर्मचारियों का भविष्य अधर में है। इनमें 1300 पायलट और 2000 केबिन क्रू सदस्य भी शामिल हैं।

  3. सूत्र ने कहा, मंगलवार को विस्तारा एयरलाइन के द्वारा केबिन क्रू सदस्यों के लिए दो दिवसीय रिक्रूटमेंट ड्राइव आयोजित की गई। विस्तारा जल्द ही इंटरनेशनल ऑपरेशन शुरू करने जा रहा है। इसी प्रक्रिया में 100 पायलट और 400 केबिन क्रू नौकरी पर रखे गए हैं।

  4. सूत्र ने बताया, इससे पहले स्पाइस जेट ने कहा था कि हम जेट के 500 कर्मचारियों को नौकरी पर रखेंगे। इसमें 100 पायलट शामिल थे। जबकि एयरइंडिया की ओर से पांच बोइंग 777 विमानों को लीज पर लेने का प्रस्ताव रखा जा चुका है।



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      Vistara to hire 100 pilots, 400 cabin crew from Jet airways

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कर्मचारियों ने 3 हजार करोड़ इकट्ठा किए, एसबीआई से कहा- बोली लगाने की इजाजत दी जाए


नई दिल्ली. 8 हजार करोड़ रु. के कर्ज में डूबी जेट एयरवेज के कर्मचारियों ने एसबीआई से एयरलाइन के मैनेजमेंट पर नियंत्रण हासिल करने के लिए इजाजत मांगी है। 20 हजार कर्मचारियों में से एक समूह ने एसबीआई को इस संबंध में पत्र लिखा है। उन्होंने बाहरी निवेशकों से 3 हजार रु. का फंड इकट्ठा किया है। जेट को कर्ज से उबारने के लिए एसबीआई के नेतृत्व वाले बैंकों का कंसोर्शियम जेट की हिस्सेदारी बेचने के लिए बोली प्रक्रिया शुरू की है। यह प्रोसेस 10 मई तक पूरी होगी।

  1. सोसाइटी फॉर वेलफेयर ऑफ इंडियन पायलट (एसडब्ल्यूआईपी) और जेट एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर वेलफेयर एसोसिएशन (जेएएमईडब्ल्यूए) ने एसबीआई को प्रस्ताव भेजा। इसमें कहा गया कि कर्मचारी भविष्य में होने वाली कमाई से एयरलाइन को पुनर्जीवित करने के लिए काम करेंगे और प्रोडक्टिविटी को बढ़ाएंगे।

  2. पत्र में कहा गया कि इम्प्लॉई स्टॉक ओनरशिप प्रोग्राम (ईएसओपी) के पंचवर्षीय कार्यक्रम में कर्मचारियों का योगदान करीब 4 हजार करोड़ तक हो सकता है। एसोसिएशनों ने कहा कि यह फैसला बहुत चर्चा के बाद लिया गया है। इसमें कर्मचारियों के अलावा उन साथियों को भी शामिल किया गया था, जिन्होंने मैनेजमेंट वरिष्ठ पदों पर काम किया है।

  3. उन्होंने कहा कि हम यह जानते हैं कि हमें ऑपरेशन की लागत, ओवर स्टाफिंग, प्रतिकूल वेंडर और लीज परिस्थितियों, कर्ज और इक्विटी के विषम अनुपात जैसी समस्याएं विरासत में मिलेंगी।

  4. एसबीआई से अपील की गई कि एयरलाइन का रजिस्ट्रेशन खत्म करने और एयरपोर्ट स्लॉट के दोबारा आवंटन की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगा दी जाए। अगर ऐसा तुरंत नहीं किया जाता है तो कंपनी को दोबारा शुरू करने की भविष्य की कोई भी संभावना धूमिल हो जाएगी।

  5. जेट एयरवेज की हिस्सेदारी खरीदने की प्रक्रिया जारी है। एसबीआई अप्रैल अंत तक आर्थिक प्रस्ताव पेश करने के लिए निवेशकों को छांट रही है। प्राइवेट इक्विटी फर्म टीपीजी कैपिटल, इंडिगो पार्टनर्स, नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ) और ऐतिहाद एयरवेज एयरलाइन में हिस्सेदारी खरीदने की दौड़ में शामिल हैं।



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      employees has written to SBI seeking permission to allow a employees to bid

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50 साल बाद जीवित से ज्यादा मृत लोगों की प्रोफाइल होगी


  • ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ताजा अध्ययन में सामने आया है किफेसबुक पर मृत लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही।
  • फेसबुक की वर्तमान ग्रोथ के हिसाब से 50 साल बाद मौजूदा 2.3 अरब यूजर्स में से करीब 1.4 अरब की मौत हो चुकी होगी।


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50 साल बाद फेसबुक पर जीवित से ज्यादा मृत लोगों की प्रोफाइल होगी


लंदन .फेसबुक पर मृत लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने अपने एक अध्ययन में बताया है कि अगले 50 साल यानी 2070 तक फेसबुक पर जीवित लोगों से ज्यादा मृत लोगों की प्रोफाइल होगी। यूनिवर्सिटी ने अपने अध्ययन में कहा कि फेसबुक की वर्तमान ग्रोथ के अनुसार 50 साल बाद फेसबुक के वर्तमान 2.3 अरब यूजर्स में से कम से कम 1.4 अरब यूजर की मौत हो चुकी होगी। ये पहला मौका होगा जब फेसबुक पर जीवित लोगों से ज्यादा मृत लोग होंगे।


स्टडी के सह-लेखक डेविड वॉटसन ने कहा कि भविष्य में फेसबुक को इतिहासकारों को ऐसे लोगों की प्रोफाइल देखने की छूट दी जानी चाहिए ताकि वे इतिहास के बारे में सही बता पाएं। ऐसी प्रोफाइल्स की पोस्ट इतिहासकारों की काफी मदद कर सकती है। उन्होंने कहा कि मानव व्यवहार का इससे अच्छा अार्काइव कभी मौजूद नहीं रहा है।



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50 years later on Facebook will be profiled more dead than alive

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टी-सीरीज 10 करोड़ सब्सक्राइबर्स तक पहुंचने के करीब, स्वीडन के चैनल प्यूडीपाई से टक्कर


मुंबई .भारतीय चैनल टी-सीरीज यू-ट्यूब पर दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा है। अभी इसके 9.5 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं और ये दुनिया का सबसे ज्यादा सब्सक्राइबर वाला यू-ट्यूब चैनल है। 9.4 करोड़ सब्सक्राइबर के साथ स्वीडन का चैनल प्यूडीपाई दूसरे नंबर पर है। प्यूडीपाई गेम कमेंटेटर है जो फनी वीडियोज बनाता है।

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इसेे स्वीडन के फेलिक्स एरविद उल्फ केजेलबर्ग चलाते हैं। लंबे समय से दोनों के बीच नंबर वन बनने की दौड़ चल रही है। यह दौड़ पिछले वर्ष अक्टूबर में उस समय शुरू हुई जब दोनों चैनल के करीब 6.7 करोड़ सब्सक्राइबर हो गए थे। अब सोशल मीडिया एनालिटिकल पेज सोशल ब्लेड के अनुसार टी-सीरीज आने वाली 21 मई तक 10 करोड़ सब्सक्राइबर वाला दुनिया का पहला यू-ट्यूब चैनल हो सकता है। गौरतलब है कि प्यूडीपाई चैनल टी-सीरीज पर फेक सब्सक्राइबर और रोबोट का सहारा लेने का अारोप लगाता रहा है।

देश में सस्ता डेटा, पंजाबी सिंगर के कारण बढ़ रहा :उर्दू वालों को मिलाकर करीब 55 करोड़ लोग हिंदी बोलते- समझते हैं, जबकि प्यूडीपाई के वीडियो अंग्रेजी में होते हैं, जो करीब 98.3 करोड़ लोग समझते हैं। इसलिए ये बात गलत है कि भारत बड़ा देश है इसलिए टी-सीरीज आगे बढ़ रहा है, आइए जानंे क्या है सही कारण-

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  • देश में डेटा 2013 के मुकाबले 95% सस्ता हो चुका है। 2018 तक देश में 56 करोड़ इंटरनेट सब्सक्राइबर हो गए थे। हम अभी औसतन 8.3 जीबी डेटा प्रति यूजर हर महीने इस्तेमाल करते हैं।
  • देश की 65% आबादी 35 साल से कम उम्र की है। ये मीडिया कंटेंट पसंद करते हैं।
  • टी-सीरीज हिंदी के अलावा पंजाबी सितारों के साथ करार कर रही है। जैसे गुरु रंधावा, बादशाह, हार्डी संधु आदि। टी-सीरीज के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले वीडियो में गुरु रंधावा का लाहोर गाना नंबर एक पर है। इसे 71.6 करोड़ बार देखा गया।
  • टी-सीरीज रोज औसतन 6 से 8 वीडियो अपलोड करता है। इसकी तुलना में प्यूडीपाई एक वीडियो अपलोड करता है। वहीं दूसरी ओर टी-सीरीज में बड़ी संख्या में सितारों की लाइन है, जबकि प्यूडीपाई पर केवल एक व्यक्ति ही स्क्रीन पर होता है।
  • टी-सीरीज अकेले नहीं है। इसका एपल म्यूजिक, अमेजॉन प्राइम म्यूजिक, गाना, सावन, जियो म्यूजिक, विंक म्यूजिक, हंगामा आदि कई म्युजिक प्लेटफॉर्म्स के साथ करार है।



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T-series is close to reaching 10 million subscribers

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धोनी पेंटहाउस का पजेशन पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट गए


  • महेंद्र सिंह धोनी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। आम्रपाली ग्रुप के प्रोजेक्ट में धोनी को अब तक पेंटहाउस का पजेशन नहीं मिला है।
  • धोनी ने पांच सालों तक कंपनी के लिए ब्रांड एम्बेसेडर की भूमिका भी निभाई है। कंपनी पर धोनी के 40 करोड़ रुपए भी बकाया है।


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Mahendra Singh Dhoni moves SC over 'cheating' by Amrapali Group

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धोनी पेंटहाउस का पजेशन पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट गए, कहा- ग्रुप पर 40 करोड़ रु. बकाया


नई दिल्ली. पूर्व भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। दरअसल आम्रपाली ग्रुप के प्रोजेक्ट में धोनी को अब तक पेंटहाउस का पजेशन नहीं मिला है। कंपनी पर धोनी के 40 करोड़ रुपए भी बकाया है। धोनी ने पांच सालों तक कंपनी के लिए ब्रांड एम्बेसेडर की भूमिका भी निभाई है। धोनी के साथ उनकी पत्नी साक्षी भी कंपनी की चैरिटेबल विंग का हिस्सा हैं।

  1. धोनी ने शीर्ष अदालत में दाखिल की अपनी याचिका में कहा कि उनके द्वारा रांची में आम्रपाली सफारी में पेंटहाउस बुक करवाया गया था। इसका अधिकार अभी तक नहीं मिला है। कंपनी ने धोनी को ब्रांड एम्बेसेडर की जिम्मेदारी भी सौंपी थी। इसकी बकाया राशि भी नहीं चुकाई गई है।

  2. धोनी ने मांग की कि अदालत आम्रपाली समूह को आदेश दे कि वह धोनी को बकाया राशि का भुगतान करने के साथ ही पेंटहाउस का अधिकार भी दे। दरअसल 2009-2016 के बीच धोनी कंपनी के कुछ विज्ञापनों में भी नजर आए थे। धोनी के साथ कंपनी ने कई अनुबंध किए थे।

  3. बाद में आम्रपाली समूह आर्थिक परेशानियों में घिर गया। 46,000 लोग जो एडवांस में घर के लिए कंपनी को पैसा दे चुके थे, उन्होंने भी घर न मिलने पर कोर्ट की शरण ली। शीर्ष अदालत ने रियल एस्टेट समूह की संपत्ति को जब्त करने का आदेश दिया। इसमें समूह के साथ जुड़ी अन्य कंपनियां भी शामिल थीं।

  4. 25 जनवरी को कोर्ट ने सरकार के अधीन काम करने वाली नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड को निर्देशित किया था कि आम्रपाली हाउसिंग प्रोजेक्ट को पूरा करें। साथ ही आम्रपाली समूह के सीएमडी अनिल शर्मा और दो निदेशकों शिव दीवानी और अजय कुमार को पुलिस कस्टडी में भेजा।



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      Mahendra Singh Dhoni moves SC over 'cheating' by Amrapali Group

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आसानी से मिलेंगे श्याओमी के फोन, 4 हजार रिटेल स्टोर खुलेंगे


गैजेट डेस्क. चाइनीज कंपनी श्याओमी भारत में नंबर-1 स्मार्टफोन ब्रांड है। लेकिन लोगों की शिकायत रहती है कि इसके फोन आसानी से नहीं मिलते। इसके पीछे कारण है कि कंपनी अपने ज्यादातर डिवाइस ऑनलाइन बेचती है। ऑनलाइन सेल में इसके डिवाइस कुछ ही सेकंडों में सेल आउट हो जाते हैं। कंपनी अब भारतीय बाजार पर पकड़ मजबूत करने के लिए रणनीति बदलने जा रही है। कंपनी की योजना इस साल के अंत तक भारत में रिटेल स्टोर की संख्या 10 हजार करने की है। इनके माध्यम से यह 50% स्मार्टफोन बेचेगी। अभी भारत में इसके करीब 6,000 आउटलेट हैं। ये आउटलेट तीन फॉर्मेट एमआई होम्स, एमआई प्रीफर्ड पार्टनर्स और एमआई स्टोर के रूप में हैं।

श्याओमी ने 2014 में भारत में ऑनलाइन ब्रांड के तौर पर शुरुआत की थी। अब यह एमआई स्टूडियो नाम से नए रिटेल स्टोर देशभर में खोलने जा रही है। कंपनी को उम्मीद है कि इस कदम से वह सैमसंग की चुनौतियों का मुकाबला कर पाएगी। श्यओमी इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट और एमडी मनु जैन ने कहा, 'ऑनलाइन सेल्स में हमारा शेयर 50% है। लेकिन हमारी ऑफलाइन उपस्थिति न के बराबर है। इसलिए हम अपने ऑफलाइन बिजनेस को विस्तार दे रहे हैं।

श्याओमी और सैमसंग का भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में दबदबा

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xiaomi stores soon to be open new offline 4000stores in india

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