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विप्रो को 2545 करोड़ का मुनाफा; 3 पर 1 बोनस शेयर, 1 रु का डिविडेंड देगी


बेंगलुरु. देश की तीसरी बड़ी आईटी कंपनी विप्रो को साल 2018 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 2,544.5 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ है। यह साल 2017 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के मुनाफे की तुलना में 31.8% ज्यादा है। रेवेन्यू 10.17% बढ़कर 15,059.5 करोड़ रुपए रहा है।

कंपनी ने शेयरधारकों को 3 पर 1 बोनस शेयर देने का ऐलान किया है। साथ ही 1 रुपए प्रति शेयर का डिविडेंड देने की घोषणा भी की है। डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड तारीख 30 जनवरी तय की गई है। भुगतान 6 फरवरी तक किया जाएगा। बोनस शेयर के लिए रिकॉर्ड तारीख बाद में घोषित की जाएगी।



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Wipro says consolidated profit rises 31.8pc to Rs 2,544.5 cr in Oct-Dec

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8th जनरेशन टोयोटा कैमरी हाइब्रिड लॉन्च; 9 एयरबैग से है लैस, कीमत 36.95 लाख रुपए


ऑटो डेस्क. 8th जनरेशन 2019 टोयोटा कैमरी हाइब्रिड भारत में लॉन्च हो गई है। नए TNGA-K(टोयोटा न्यू ग्लोबल आर्किटेक्चर ) प्लेटफॉर्म पर बेस्ड कैमरी हाइब्रिड में पहले से ज्यादा स्पेशियस और कंफर्टेबल है। इसके साथ ही इसमें बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी और सुपीरियर ड्राइविंग डायनामिक मिलेगा। इसकी एक्स शोरूम कीमत 36.95 लाख रुपए है।

नई कैमरी का लुक पहले से ज्यादा स्पोर्टी है क्योंकि इसमें स्लिम हेडलैंप, स्टाइलिश वी शेप हाउसिंग जिसमें टोयोटा की बैजिंग है, फ्रंट ग्रिल जिसपर क्रोम का काफी ज्यादा इस्तेमाल किया गया है और यूनिक डिजाइन मल्टी स्पोक अलॉय व्हील्स मिलते हैं। नई कैमरी डायमेंशन के मामले में पहले से ज्यादा लंबी और चौड़ी है। इसका व्हीलबेस पुराने मॉडल से 50mm ज्यादा बड़ा है।

  1. नई कैमरी में फ्रंट और रियर पैसेंजर्स के लिए क्रमश: 22 mm और 30 mm ज्यादा बड़ा हेडरूम मिलता है इससे ड्राइविंग डायमिक पहले से और ज्यादा बेहतर हो गया है। नई कैमरी में रैक माउंटेड इलेक्ट्रॉनिक पावर स्टीयरिंग मिलता है जिसकी टर्निंग रेडियस सिर्फ 5.7 मीटर है। वहीं इसमें ब्रांड न्यू सस्पेंशन का इस्तेमाल किया गया है जिसके फ्रंट में MacPherson struts और रियर में डबल विशबोन सिस्टम मिलता है।

  2. 2019 कैमरी में सुपीरियर कंफर्ट के लिए डिजाइन की गई है जिसमें कई सारे हाईटेक फीचर्स दिए गए हैं। जैसे इसमें 10 इंच की हेड अइप डिस्प्ले (HUD), 7 इंच का इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और 7 इंच का ही टचस्क्रीन डिस्प्ले सिस्टम है। वहीं इसमें 9 स्पीकर JBL डोल्बी ऑडियो सिस्टम, वायरलेस Qi चार्जिंग, लैदर फिनिश स्टीयरिंग व्हील विथ टिल्ट एंड टेलीस्कोपिक एडजस्टमेंट, क्रूज कंट्रोल, ट्रिपर जोन नैनो एयर कंडिशन, इलेक्ट्रिकली ऑपरेटेड ORVMs, ड्युअल USB पोर्ट्स और 12V USB चार्जर मिलता है।

  3. इसकी ड्राइवर सीट 10 वे पावर एडजस्टेबल है जो रिमोट से हैंडल किया जा सकता है। ऑल नयू कैमरी में ऑटो गाइड कंट्रोल है जो इको मोड में ऑटोमैटिक एक्टिवेट हो जाता है। इससे लॉन्ग राइड में बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी मिलती है।

  4. पावर की बात की जाए तो ऑल न्यू कैमरी में 2,487 सीसी का ड्युअल VVT-i 4 सिलेंडर पेट्रोल इंजन है जो 5,700rpm पर मैक्सिमम 178 hp की ताकत प्रोड्यूस करता है वहीं 3,600-5,200 rpm पर 221 Nm का टॉर्क प्रोड्यूस करता है। इसका इंजन e-CVT गियरबॉक्स ट्रांसमिशन से लैस है। पेट्रोल इंजन पहले की तरह ही है लेकिन इसमें 18 hp का ज्यादा पावर मिलता है क्योंकि पेट्रोल इंजन के साथ इसमें 88 kW का इलेक्ट्रिक मोटर भी है जिससे यह कुल 208 hp का पावर प्रोड्यूस करती है।

  5. सेफ्टी फीचर्स की लिए इसमें ने 9 एयरबैग, एबीएस और ईबीडी, व्हीकल स्टेबिलिटी कंट्रोल, ब्रेक असिस्ट, हिल स्टार्ट असिस्ट, ट्रैक्शन कंट्रोल सिस्टम, पार्क असिस्ट विथ रियर कैमरा और सोनार सेंसर है। इनके अलावा पैसेंजर्स की सेफ्टी इसमें हाई स्ट्रेंथ स्टील सेंट्रल टनल को उपयोग किया गया है।

  6. कंपनी ने दावा किया है कि यह 23.27 kmpl का माइलेज ऑफर करती है। ऑल न्यू कैमरी 7 कलर ऑप्शन रेड माइका, फैंटम ब्राउन, बर्निंग ब्लैक, एटीट्यूड ब्लैक, पर्ल व्हाइट, सिल्वर और ग्रेफाइट कलर में उपलब्ध होगी। भारत में इसका मुकाबला होंडा एकॉर्ड हाइब्रिड से होगा।



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      8th जनरेशन 2019 टोयोटा कैमरी हाइब्रिड भारत में लॉन्च हो गई है। नए TNGA-K(टोयोटा न्यू ग्लोबल आर्किटेक्चर ) प्लेटफॉर्म पर बेस्ड कैमरी हाइब्रिड में पहले से ज्यादा स्पेशियस और कंफर्टेबल है।
      इसमें बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी और सुपीरियर ड्राइविंग डायनामिक मिलेगा। इसकी एक्स शोरूम कीमत 36.95 लाख रुपए है।
      हैं। नई कैमरी डायमेंशन के मामले में पहले से ज्यादा लंबी और चौड़ी है। इसका व्हीलबेस पुराने मॉडल से 50mm ज्यादा बड़ा है।
      इसकी ड्राइवर सीट 10 वे पावर एडजस्टेबल है जो रिमोट से हैंडल किया जा सकता है।
      इसमें ने 9 एयरबैग, एबीएस और ईबीडी, व्हीकल स्टेबिलिटी कंट्रोल, ब्रेक असिस्ट, हिल स्टार्ट असिस्ट, ट्रैक्शन कंट्रोल सिस्टम, पार्क असिस्ट विथ रियर कैमरा और सोनार सेंसर है।
      इसमें 10 इंच की हेड अइप डिस्प्ले (HUD), 7 इंच का इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और 7 इंच का ही टचस्क्रीन डिस्प्ले सिस्टम है।
      नई कैमरी का लुक पहले से ज्यादा स्पोर्टी है क्योंकि इसमें स्लिम हेडलैंप, स्टाइलिश वी शेप हाउसिंग जिसमें टोयोटा की बैजिंग है, फ्रंट ग्रिल जिसपर क्रोम का काफी ज्यादा इस्तेमाल किया गया है और यूनिक डिजाइन मल्टी स्पोक अलॉय व्हील्स मिलते हैं।
      पैसेंजर्स की सेफ्टी इसमें हाई स्ट्रेंथ स्टील सेंट्रल टनल को उपयोग किया गया है।
      कंपनी ने दावा किया है कि यह 23.27 kmpl का माइलेज ऑफर करती है।
      ऑल न्यू कैमरी 7 कलर ऑप्शन रेड माइका, फैंटम ब्राउन, बर्निंग ब्लैक, एटीट्यूड ब्लैक, पर्ल व्हाइट, सिल्वर और ग्रेफाइट कलर में उपलब्ध होगी।
      इसमें 9 स्पीकर JBL डोल्बी ऑडियो सिस्टम, वायरलेस Qi चार्जिंग, लैदर फिनिश स्टीयरिंग व्हील विथ टिल्ट एंड टेलीस्कोपिक एडजस्टमेंट, क्रूज कंट्रोल, ट्रिपर जोन नैनो एयर कंडिशन, इलेक्ट्रिकली ऑपरेटेड ORVMs, ड्युअल USB पोर्ट्स और 12V USB चार्जर मिलता है।

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आयकर रिटर्न ई-फाइलिंग के लिए नेक्स्ट जेन परियोजना को मंजूरी, रिफंड की प्रक्रिया भी तेज होगी


नई दिल्ली. सरकार ने इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए नेक्स्ट जेनरेशन सिस्टम लागू किया जाएगा। सरकार ने इस परियोजना के लिए आईटी कंपनी इन्फोसिस का चयन किया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि यह सिस्टम लागू होने के बाद आईटीआर भरने और रिफंड की प्रक्रिया पहले से ज्यादा तेज हो जाएगी।

  1. गोयल ने बताया कि कैबिनेट ने एकीकृत ई-फाइलिंग और केंद्रीकृत प्रोसेसिंग सेंटर की 2.0 परियोजना के लिए बजट को मंजूरी दे दी है। सरकार ने इस परियोजना के लिए 4241.97 करोड़ का बजट स्वीकृत किया है।

  2. केंद्रीय मंत्री ने कहा- मौजूदा समय में आईटीआर की पूरी प्रक्रिया होने में 63 दिन का समय लगता है। नया सिस्टम लागू होने के बाद यह समय घटकर एक दिन तक हो जाएगा।

  3. गोयल ने बताया कि इस परियोजना के 18 महीनों में पूरा होने की उम्मीद है। 3 महीने के परीक्षण के बाद इस सिस्टम को लॉन्च किया जाएगा।

  4. इन्फोसिस ने कहा- हमें नीलामी प्रक्रिया के बाद परियोजना को लागू करने के लिए चुना गया है। मौजूदा सिस्टम काफी प्रभावी रहा है और आने वाला सिस्टम और ज्यादा टैक्स फ्रैंडली होगा।

  5. गोयल ने बताया- कैबिनेट ने 2018-19 की मौजूदा सीपीसी-आईटीआर 1.0 परियोजना के लिए 1482 करोड़ रुपए के एकीकृत लागत को भी मंजूरी दी है। मौजूदा वित्त वर्ष के लिए 1.83 लाख करोड़ रुपए का रिफंड जारी किए गए हैं।

  6. उन्होंने कहा कि ये निर्णय पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने के अलावा प्रक्रिया को तेज करने और करदाताओं को जल्द रिफंड मुहैया कराने के लिए लिए गए हैं।



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      ITR refunds will be faster, Infosys to implement rs 4242 crores next gen IT system get cabinet clearance

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पेप्सिको की पूर्व सीईओ इंद्रा नूई वर्ल्ड बैंक अध्यक्ष पद की रेस में शामिल


वॉशिंगटन. पेप्सीको की पूर्व सीईओ इंद्रा नूई (62) वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष पद की रेस में शामिल हैं। अमेरिकी न्यूज वेबसाइट एक्सिओस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष जिम यॉन्ग किम ने सोमवार को अचानक इस्तीफे का ऐलान कर दिया था। वे एक फरवरी को पद छोड़ देंगे।

  1. वर्ल्ड बैंक ग्रुप के अध्यक्ष किम का कार्यकाल 2022 में पूरा हो रहा था, लेकिन उन्होंने इससे तीन साल पहले अचानक ही सोमवार को इस्तीफा दे दिया था।

  2. इंद्रा नूयी वर्ल्ड बैंक की अध्यक्ष बनती हैं तो इतिहास में पहली बार ऐसा होगा कि कोई गैर-अमेरिकी यह जिम्मेदारी संभालेगा।

  3. भारतीय मूल की इंद्रा नूई अमेरिका की प्रमुख फूड एंड ब्रेवरेज कंपनी पेप्सीको की पहली महिला सीईओ चुनी गईं थीं। बतौर सीईओ नूई के 12 साल के कार्यकाल में पेप्सीको के रेवेन्यू में 81% तक इजाफा हुआ। नूई ने पिछले साल 3 अक्टूबर को सीईओ का पद छोड़ दिया था।

  4. वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष पद पर अब तक अमेरिकी और आईएमएफ के अध्यक्ष पद पर यूरोपियन ही चुने जाते रहे हैं। ऐसा अमेरिका और यूरोप के बीच हुए गैरआधिकारिक समझौते के तहत होता रहा है।

  5. वेबसाइट के मुताबिक, अगर ट्रम्प इंद्रा नूयी जैसी भारतीय मूल की बेहद काबिल उम्मीदवार को नॉमिनेट करते हैं तो यूरोपियन स्वाभाविक तौर पर इसका समर्थन करेंगे। क्योंकि, अभी तक उनके लिए दोनों पक्षों में चलने वाला सहयोगात्मक सिद्धांत काम का रहा है।

  6. वेबसाइट ने बताया कि वर्ल्ड बैंक अध्यक्ष के लिए नूई के अलावा वर्ल्ड बैंक की पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर नोजी ओकोंजा इविएला और श्री मुल्यानी भी दावेदार हैं। किम की जगह अंतरिम अध्यक्ष बनने वाली क्रिस्टालीना जॉर्जिएवा भीइस पद पर बनी रह सकती हैं।



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      इंद्रा नूई।

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आईटी सेक्टर डाउनग्रेड, खर्च बढ़ने और रुपया मजबूत होने का असर


नई दिल्ली. भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों टीसीएस और इन्फोसिस ने आने वाले दिनों में बिजनेस बढ़ने का अनुमान जताया है। इसके बावजूद ब्रोकरेज हाउसेज ने आईटी सेक्टर को निवेश के लिहाज से डाउनग्रेड किया है। पहले इसने सेक्टर को 'आकर्षक' ग्रेड दे रखा था। अब इसने निवेशकों को सलाह दी है कि वे सुरक्षात्मक रवैया अपनाएं और चुनिंदा स्टॉक्स में ही पैसे लगाएं। करेंसी में ज्यादा उतार-चढ़ाव और खर्च बढ़ने को इसकी मुख्य वजह बताया गया है। आगे डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होने के आसार हैं। आईटी कंपनियों की ज्यादातर कमाई विदेश से होती है। इसलिए डॉलर को रुपए में बदलने पर उनकी कमाई घटेगी। अमेरिका इन कंपनियों का सबसे बड़ा बाजार है। वहां ट्रंप प्रशासन के नए नियमों से कर्मचारियों पर खर्च बढ़ रहा है। कंपनियां डिजिटल सेगमेंट में बिजनेस बढ़ा रही हैं। इससे भी उनके खर्च में बढ़ोतरी हो रही है।

बैंकिंग एवं फाइनेंस: दिसंबर तिमाही में इस सेक्टर की कंपनियों के नतीजे कुछ कमजोर रह सकते हैं। लेकिन आगे सुधार के आसार हैं। इनका कर्ज बढ़ रहा है। सरकारी बांड में निवेश पर लाभ से इनकी प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ेगी। दिसंबर 2017 में कमजोर नतीजों के कारण (बेस इफेक्ट) सरकारी बैंकों के मुनाफे में तेज बढ़ोतरी के आसार हैं।

कहां करें निवेश: बैंक ऑफ बड़ौदा, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, फेडरल बैंक।

कंज्यूमर गुड्स: इस सेक्टर की कंपनियों के रेवेन्यू और प्रॉफिट, दोनों में अच्छी बढ़ोतरी की उम्मीद है। रेवेन्यू में औसतन 15% बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि कच्चे माल की कीमतें बढ़ने का असर भी दिख सकता है। नेस्ले, मैरिको, हिंदुस्तान यूनिलीवर और टाइटन उन कंपनियों में होंगी जिनके रेवेन्यू में ज्यादा ग्रोथ दिखेगी।
कहां करें निवेश: एशियन पेंट्स, नेस्ले, टाइटन, मेरिको।

इन्फ्रास्ट्रक्चर, बिल्डिंग मैटेरियल: सीमेंट कंपनियों के रेवेन्यू में सालाना आधार पर 23% ग्रोथ रह सकती है। दक्षिण भारत में ज्यादा बिक्री वाली कंपनियों को छोड़ दें तो दूसरी क्षेत्रीय और राष्ट्रीय कंपनियों के नतीजे बेहतर रहने की उम्मीद है। इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ने से इस सेक्टर के साथ कैपिटल गुड्स कंपनियां भी अच्छी बढ़त दर्ज करेंगी।
कहां करें निवेश: हाइडलबर्ग सीमेंट, जेके सीमेंट, एचजी इन्फ्रा, कल्पतरु पावर, पावर मेक।

ऑटोमोबाइल: पिछली तिमाही कच्चे माल की लागत बढ़ने के बावजूद कंपनियों ने दाम नहीं बढ़ाए। इसलिए रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद मुनाफा गिर सकता है। एस्कॉर्ट्स, बजाज ऑटो, टीवीएस और महिंद्रा में ग्रोथ रह सकती है। टाटा मोटर्स और हीरो मोटोकॉर्प के नतीजे पिछले साल के समान रहने के आसार हैं।
कहां करें निवेश: मारुति सुजुकी, एक्सकॉर्ट्स।

(निवेश के सुझाव मॉर्गन स्टैनले और रिलायंस सिक्युरिटीज के हैं। इनके आधार पर निवेश के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा)



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it sector downgrades, due to rising costs and rupee strengthening says invetment advisors

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E-Cell IIT Bombay ने किया Entrepreneurship Summit 2019 का शुभारंभ


उद्यमिता शिखर सम्मेलन के लिए E-Summit भारत भर में व्यापक रूप से उद्यमशीलता और व्यापार सम्मेलन में जाना जाता है। यह उद्यमिता सेल, आईआईटी बॉम्बे द्वारा आयोजित किया जाता है। उनके वार्षिक प्रमुख सम्मेलन के रूप में मान्यता प्राप्त, यह छात्रों के लिए पेशेवरों और इसके विपरीत बातचीत करने के लिए एक महान मंच के रूप में कार्य करता है। दो दिवसीय सम्मेलन में आयोजित कार्यक्रम आपको अपने स्वयं के उद्यम को शुरू करने का कारण देंगे। ई-शिखर सम्मेलन में उपस्थित लोगों को गुणवत्ता का अनुभव प्रदान करने का विश्वास है, इस प्रकार वे दुनिया भर के सर्वश्रेष्ठ वक्ताओं में से सबसे अच्छा लाइन अप करते हैं। कुछ प्रमुख नाम हैं: ट्रैविस कलानिक (सह-संस्थापक, उबर), इंद्रा नूई (सीईओ, पेप्सिको), बीबॉप ग्रस्टा (अध्यक्ष, हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजीज), एलन ममेदी (सीईओ, ट्रूक्लर), नील क्रॉस (सीआईओ, डीबीएस बैंक), पैट्रिक बेट-डेविड (निर्माता, वेलुइटेनमेंट), वर्नर वोगेल्स (सीटीओ, अमेज़ॅन), माइकल स्पीगलमैन (वीपी, नेटफ्लिक्स) और पा जोफ, जॉन रामप्टन, जॉन बेट्स, जिम बीच और अन्य लोग विश्व में बहुत खुश हैं। निवेशकों और पेशेवरों के लिए भी ई-समिट में नेटवर्किंग इवेंट और कॉन्क्लेव की एक श्रृंखला है।

इस E-Summit'19 में डॉ. गुरुराज देशपांडे, देशपांडे फाउंडेशन के सह-संस्थापक, क्रिश गोपालकृष्णन, एक्सिलर वेंचर्स के अध्यक्ष और इन्फोसिस के सह-संस्थापक, गौतम सिंघानिया, रेमंड ग्रुप के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, श्री सुरेश प्रभु, माननीय वाणिज्य और उद्योग और नागरिक उड्डयन मंत्री, नवीन जिंदल, जिंदल स्टील एंड पावर के अध्यक्ष, निरंजन हीरानंदानी, हीरानंदानी ग्रुप के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक, नितिन सलूजा, चैयोस के संस्थापक और सीईओ, अमन अरोड़ा, कीवेंटर्स के संस्थापक और वेंकटेश अय्यर, गोली वड़ा पाव के संस्थापक और सीईओ जैसी बड़ी हस्तियाँ शामिल हुई।

इंटर्नशिप और जॉब फेयर


ई-शिखर सम्मेलन छात्रों के लिए इंटर्नशिप और नौकरियों के लिए एक क्षेत्र की मेजबानी करता है। यह स्टार्टअप और छात्रों दोनों के लिए बातचीत करने का एक शानदार अवसर है। छात्र मौके पर अपना सीवी और रिज्यूमे जमा कर सकते हैं और विभिन्न स्टार्टअप के लिए साक्षात्कार दे सकते हैं।


कार्यशाला के आयोजन में निम्नलिखित 13 विषयों पर ई-समिट 19 हुआ।
एआई और आईओटी
नैतिक चैटिंग
Android वेब विकास
लीन स्टार्टअप कामकाजनाली
विचार पैदा करना
विचार त्वरण
Webpreneurship
स्टैक प्रबंधन
ब्रांड प्रबंधन
अंचल क्रय विक्रय
बातचीत करना ।

हैकाथॉन (I-Hack)


ई-समिट में भारत के सर्वश्रेष्ठ कोडर्स, डेवलपर्स, डिजाइनर, इनोवेटर्स, कल के रचनाकारों और उद्यमियों को एक साथ लाया गया है। I-Hack उन लोगों के लिए तैयार है, जिन्हें बिल्डिंग, डिजाइनिंग और इनोवेटिंग का शौक है। यह 48 हर्ट ईवेंट है, जहां उत्साही लोग उत्पाद प्रोटोटाइप प्रतियोगिता में मिलते हैं, विकसित होते हैं और प्रतिस्पर्धा करते हैं। यह सभी प्रकार के विचारों को प्रोत्साहित करता है, चाहे वह अवधारणा का प्रमाण हो, समान कार्य-समान मॉडल या एक प्रोटोटाइप। यह दो श्रेणी में चलता है: हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर। कुल पुरस्कार INR 2,50,000 मूल्य के हैं।

The Ten Minute Million


TTMM के लिए पूर्ण किया गया टेन मिनट मिलियन एक ऐसा मंच है, जहां आपको निवेशकों के पूल को प्रभावित करने और मिलियन जीतने के लिए 10 मिनट मिलते हैं। प्रत्येक 2 स्टार्टअप में से 1 ने अपनी पिचों के साथ निवेशकों की प्रशंसा और हर सफल पिच के लिए INR 1.6 मिलियन के पुरस्कार के साथ, इस घटना को विशेषज्ञों के साथ-साथ मीडिया से भी व्यापक प्रशंसा प्राप्त की है। निवेशक पैनल में रवि गुरुराज, अजीत खुराना, कुणाल शाह, सुनील कालरा, अनिरुद्ध मालपाणी, अनुपम मित्तल जैसे कई नामी निवेशक शामिल थे। TTMM ने अपने पिछले तीन संस्करणों में मीडिया का बहुत ध्यान आकर्षित किया है और कई स्टार्टअप को अपनी यात्रा में मील के पत्थर तक पहुंचने में मदद की है। सफल स्टार्टअप में से एक साउंडरेक्स है, जो एक पहनने योग्य स्पीकर के साथ आया है जो आपके चारों ओर हजारों वक्ताओं के साथ डूबे होने का अनुभव प्रदान करेगा। हजारों वक्ताओं पर नियंत्रण के साथ, उन्होंने ध्वनि प्रभाव पैदा किए जो 2 स्पीकर सेटअप का उपयोग करना असंभव था। अंतिम 10 मिनट की पिच 20 जनवरी 2019 को आईआईटी बॉम्बे में होगी।

अधिक जानकारी और पंजीकरण के लिए ecell.in/esummit पर जाएं।




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E-Cell IIT Bombay launched Entrepreneurship Summit 2019
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दिसंबर में खुदरा महंगाई दर 2.19% रही, 18 महीनों के निचले स्तर पर पहुंची


नई दिल्ली. दिसंबर 2018में खुदरा महंगाई दर 2.19% पर पहुंच गई। यह18 महीनों में सबसे कम है। वहीं,थोक महंगाई दर दिसंबर 2018 में घटकर 3.8% रह गई। यह 8 महीने में सबसे कम है। इससे पहले अप्रैल 2018 में थोक महंगाई दर 3.62% रही थी। नवंबर में यह 4.64% दर्ज की गई थी। ईंधन और कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमत कम होने से दिसंबर में थोक महंगाई दर में गिरावट आई। सरकार ने सोमवार को इसके आंकड़े जारी किए।

  1. दिसंबर 2018 में खाद्य वस्तुओं की कीमतें 0.07% कम हुईं। नवंबर में 3.31% कमी आई थी। सब्जियां दिसंबर में 17.55% सस्ती हुईं। नवंबर में 26.98% गिरावट आई थी।

  2. फ्यूल एंड पावर बास्केट की महंगाई दर 8.38% रही। नवंबर में यह 16.28% दर्ज की गई थी। दिसंबर में पेट्रोल-डीजल के रेट घटने की वजह से फ्यूल एंड पावर बास्केट की महंगाई दर में कमी आई। दिसंबर में पेट्रोल की महंगाई दर 1.57%, डीजल की 8.61% और एलपीजी की 6.87% रही।

  3. दिसंबर में आलू सस्ता हुआ। इसकी महंगाई दर घटकर 48.68% रह गई। नवंबर में यह 86.45% थी। दिसंबर में दालों की महंगाई दर 2.11%, अंडा-मांस-मछली की 4.55% दर्ज की गई। प्याज की कीमतों में दिसंबर महीने में 63.83% गिरावट आई। नवंबर में कीमतें 47.60 कम हुई थीं।

  4. थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) थोक महंगाई का इंडेक्स है। डब्ल्यूपीआई में शामिल वस्तुएं अलग-अलग वर्गों में बांटी जाती हैं। थोक बाजार में इन वस्तुओं के समूह की कीमतों में हर बढ़ोतरी का आंकलन थोक मूल्य सूचकांक के जरिए होता है।

  5. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ब्याज दरें तय करते वक्त रिटेल (खुदरा) महंगाई दर को ध्यान में रखता है। पिछली समीक्षा बैठक में आरबीआई ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। आरबीआई ने रिटेल महंगाई दर का अनुमान कम करते हुए चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में 2.7 से 3.2% रहने का अनुमान जारी किया था।



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      WPI inflation falls to 3.80 per cent in December, from 4.64 per cent in November

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भारत में एपल का मार्केट शेयर एक साल में घटकर आधा हुआ, महंगे आईफोन की मांग कम


गैजेट डेस्क. भारत तेजी से बढ़ता स्मार्टफोन मार्केट है, वहीं दूसरी तरफ एपल के आईफोन की बिक्री यहां हर साल गिरती ही जा रही है। पिछले हफ्ते ही काउंटरप्वॉइंट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि 2017 के मुकाबले 2018 में आईफोन की बिक्री 20% कम रही। आईफोन का महंगा होना इसकीबड़ी वजह मानीजा रहीहै।


आईफोन शिपमेंट में 10 लाख से ज्यादा यूनिट की कमी

  • 2017 में एपल ने तीन आईफोन लॉन्च किए थे। उस साल एपल ने 32 लाख आईफोन की भारत भेजेथे, जबकि 2018 में ये संख्या घटकर 16-17 लाख रहने का अनुमान है। साइबर मीडिया रिसर्च ने 20 लाख आईफोन आने का अनुमान जताया है।
  • मीडिया रिपोर्ट्स मेंकाउंटरप्वॉइंट केरिसर्च डायरेक्टर नील शाह के हवाले सेबताया गया हैकि एपल ने अक्टूबर से दिसंबर 2018 तक 3महीनेमें करीब 4 लाख आईफोन भारत भेजे। इसदौरान वनप्लस ने करीब5 लाख यूनिट आईफोन सप्लाई किए।


भारत में 15 करोड़ फोन बिके, इनमें सिर्फ 16-17 लाख आईफोन

  • काउंटरप्वॉइंट के मुताबिक, 2014 में भारत में 8 करोड़ फोन बिके थे जिसमें से 15 लाख आईफोन थे। साल 2018 में भारत में फोन की बिक्री का आंकड़ा15 करोड़ पहुंच गया, लेकिनएपल के आईफोन सिर्फ 16-17 लाख ही बिकने का अनुमान है। मतलब, भारतीय स्मार्टफोन मार्केट पिछले चार साल में दोगुना बढ़ गया लेकिन आईफोन की बिक्री कम हो गई।
  • 2016 में एपल ने 28 लाख आईफोन बेचे थे, जिनकी संख्या 2017 में बढ़कर 32 लाख पहुंच गई, लेकिन 2018 में इनकी संख्या आधी से भी कम होने का अनुमान है। इस हिसाब से एपल का मार्केट शेयर 2016 में 2.30% और 2017 में 2.40% था, वहीं 2018 में सिर्फ 1.20% हो गया।


एपल कारेवेन्यू भी कम होने के आसार, प्रोडक्शन 10% घटाया

  • एपल के सीईओ टिम कुक ने 2 जनवरी को निवेशकों को लिखे पत्र में दिसंबर तिमाही के लिए रेवेन्यू का अनुमान घटाकर 84 अरब डॉलर कर दिया। पहले 89 से 93 अरब डॉलर का अनुमान जारी किया था।
  • इस अनुमान के चलते एपल ने जनवरी-मार्च 2019 में आईफोन का प्रोडक्शन 10% कम करने का फैसला लिया है। जिसके बाद नए और पुराने आईफोन मॉडल मिलाकर जनवरी-मार्च तिमाही में 4 से लेकर 4.3 करोड़ यूनिट का प्रोडक्शन होगा जो पहले 4.7-4.8 करोड़ यूनिट था। जबकि जनवरी-मार्च 2018 में 5.21 करोड़ आईफोन का प्रोडक्शन हुआ था।

2019 में 30 करोड़ फोन बिकेंगे, प्रीमियम सेगमेंट में वनप्लस ही रहेगी आगे

  • दिसंबर में टेक्नोलॉजी रिसर्च फर्म टेकआर्क ने अपनी रिपोर्ट में 2019 में 30.20 करोड़ मोबाइल फोन भारत में बिकने का अनुमान लगाया है। टेकआर्क के मुताबिक, इनमें सबसे ज्यादा 14.9 करोड़ स्मार्टफोन, 9.8 करोड़ फीचर फोन और 5.5 करोड़ स्मार्ट फीचर फोन बिकेंगे।
  • इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया था कि 2019 में भारत में सबसे ज्यादा मोबाइल फोन चीनी कंपनियां बेचेंगी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल श्याओमी, वनप्लस, गूगल, नोकिया, आसुस और रियलमी के फोन ज्यादा बिकेंगे जबकि एपल के आईफोन की बिक्री में गिरावट आने का अनुमान है।
  • रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में श्याओमी का भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में दबदबा रहेगा जबकि प्रीमियम सेगमेंट में वनप्लस के ही आगे रहने की उम्मीद है। हालांकि, गूगल अपने फोन की कीमतें कम कर एंड्रॉयड स्मार्टफोन मार्केट में सैमसंग को टक्कर दे सकता है।


apple

वनप्लस जैसी चीनी कंपनियों से एपल को नुकसान हो रहा

  • पिछले साल नवंबर में इंटेलिजेंस रिसर्च फर्म आईडीसी ने सितंबर तिमाही (जुलाई-सितंबर 2018) के आंकड़े जारी किए थे जिसके मुताबिक, प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में एपल और सैमसंग को पीछे छोड़कर वनप्लस भारत में पहले नंबर की कंपनी बन गई थी।
  • प्रीमियम सेगमेंट कैटेगरी में सितंबर तिमाही में वनप्लस का मार्केट शेयर भारत में जहां सबसे ज्यादा 37% था, वहीं एपल का मार्केट शेयर 30% और सैमसंग का मार्केट शेयर 26% रहा था। आईडीसी की एसोसिएट रिसर्च मैनेजर उपासना जोशी के मुताबिक, आईफोन XS और XS Max की कीमत ज्यादा होने की वजह से आईफोन की डिमांड भारतीय यूजर्स में घट गई है।


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apple iphone shipments in india have fallen by 50 percent

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जीएसटी रजिस्ट्रेशन में छूट से 20 लाख कारोबारियों को लाभ: देवांग्शु दत्ता


मुंबई. कमजोर आर्थिक आंकड़ों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की बिक्री के चलते रुपया पिछले हफ्ते डॉलर के मुकाबले गिरकर 70.38 पर आ गया। नवंबर में औद्योगिक उत्पादन में सिर्फ 0.5% बढ़ोतरी हुई। यानी मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में कमी आई है। सीएसओ ने जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.4% से घटाकर 7.2% किया है। दिसंबर में गाड़ियों की बिक्री कम रही है। डीलरों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों से डिमांड में कमी आई है। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई दिसंबर में बढ़ी तो है लेकिन इसकी रफ्तार कम हुई है। जीएसटी काउंसिल ने छोटी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए जीएसटी में रजिस्ट्रेशन की सीमा 20 लाख से बढ़ाकर 40 लाख रुपए करने का फैसला किया है। इससे करीब 20 लाख कारोबारियों को राहत मिल सकती है।

इन्फोसिस के रेवेन्यू गाइडेंस को लेकर निवेशक सकारात्मक
इन्फोसिस ने अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में मुनाफे में 29.62% गिरावट की जानकारी दी है। सितंबर तिमाही की तुलना में मुनाफा 12.2% कम हुआ है। हालांकि दिसंबर तिमाही में रेवेन्यू ग्रोथ अच्छी रही है। यह 20.3% बढ़कर 21,400 करोड़ रुपए हो गई। सितंबर तिमाही के मुकाबले रेवेन्यू 3.8% बढ़ा है। डॉलर के लिहाज से देखें तो रेवेन्यू सालाना आधार पर 10.1% और तिमाही आधार पर 2.7% बढ़ा है। मुनाफे में गिरावट की वजह है पनाया और स्कावा। इनके एसेट अलग करने से कंपनी का प्रॉफिट 539 करोड़ रुपए घट गया। निवेशक रेवेन्यू गाइडेंस को लेकर सकारात्मक हैं।

टीसीएस का ऑपरेटिंग मार्जिन घटने से निवेशक निराश
भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस ने अब तक का रिकॉर्ड मुनाफा कमाया है, इसके बावजूद निवेशक निराश हैं। दिसंबर तिमाही में इसने 8,105 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया है। रेवेन्यू 20.8% बढ़कर 37,338 करोड़ हो गया। यह 14 तिमाही में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी है। डॉलर के लिहाज से देखें तो रेवेन्यू 12.1% बढ़ा है। सितंबर तिमाही के मुकाबले इसमें 1.8% ग्रोथ रही। ऑपरेटिंग मार्जिन 0.9% से 25.6% रह गया है। यह निवेशकों के लिए निराशा का बड़ा कारण है। इस वजह से नतीजे के दिन शेयरों में गिरावट भी आई थी। हालांकि कंपनी ने गाइडेंस में कहा है कि पूरे साल में इसकी ग्रोथ 10% से अधिक रहेगी।

गृह फाइनेंस की ज्यादा वैल्यू से बंधन बैंक के शेयर लुढ़के
बंधन बैंक ने गृह फाइनेंस लिमिटेड को खरीदने की घोषणा की है। इस घोषणा के बाद बैंक के शेयर सोमवार को 6% लुढ़क गए। विलय के लिए गृह फाइनेंस के 5 शेयरों के बदले बंधन बैंक के 2.84 शेयर मिलेंगे। माना जा रहा है कि बंधन बैंक ने इसके लिए ऊंची वैलुएशन लगाई है। उसने प्रमोटर की हिस्सेदारी कम करने यह कदम उठाया है। रिजर्व बैंक ने इस मसले को लेकर बैंक पर कुछ बंदिशें लगा रखी हैं। डील फाइनल होने पर बंधन बैंक में प्रमोटरों की हिस्सेदारी 82.30% से 61% रह जाएगी। रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक हिस्सेदारी घटाकर 40% पर लानी है। गृह फाइनेंस में एचडीएफसी की 57.8% हिस्सेदारी थी।



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देवांग्शु दत्ता, कंट्रीब्यूटिंग एडिटर, बिजनेस स्टैंडर्ड।

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एपल के नए मॉडल में आईफोन XR की बिक्री सबसे ज्यादा, फिर भी 2017 के मुकाबले 20% कम सेल


गैजेट डेस्क. रिसर्च फर्म काउंटरप्वॉइंट की रिपोर्ट के मुताबिक, सालाना आधार पर नवंबर 2018 में आईफोन की बिक्री कम हुई, लेकिन आईफोन XR सबसे ज्यादा बिकने वाला मॉडल रहा। काउंटरप्वॉइंट की रिपोर्ट में कहा गया है कि नए आईफोन (XS, XS Max और XR) की बिक्री 2017 में आए आईफोन (8, 8 प्लस और X) से 20% कम रही, लेकिन आईफोन XR के 64 जीबी मॉडल की बिक्री नवंबर 2018 में सबसे ज्यादा हुई।

  1. काउंटरप्वॉइंट की रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 में लॉन्च हुए एपल के उस वक्त के सबसे सस्ते मॉडल आईफोन 8 और 2018 में आए सबसे सस्ते मॉडल आईफोन XR की तुलना की जाए तो आईफोन XR, आईफोन 8 से 5% कम बिका है। वहीं, आईफोन XS की बिक्री आईफोन 8 प्लस के मुकाबले 3% कम रही।

    iphone
  2. इसी तरह से आईफोन X और आईफोन XS Max की तुलना करें तो सालाना आधार पर नवंबर में आईफोन XS Max की बिक्री आईफोन X के मुकाबले 46% तक कम रही। काउंटरप्वॉइंट का अनुमान है कि दिसंबर 2018 में भी आईफोन XR की बिक्री आईफोन XS और XS Max से ज्यादा हो सकती है।

  3. काउंटरप्वॉइंट का कहना है कि अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापारिक विवाद (ट्रेड वार) के चलते आईफोन की बिक्री में गिरावट आने की संभावना है। इसके अलावा चीन की कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को चीनी स्मार्टफोन ही इस्तेमाल करने का कह रही हैं।

  4. हालांकि, काउंटरप्वॉइंट का ये भी कहना है कि नए मॉडल की कीमतें काफी ज्यादा है, जिस वजह से इनकी बिक्री कम हो रही है। लेकिन इस वजह से पुराने मॉडल जैसे आईफोन 7 या आईफोन 8 की बिक्री में बढ़ोतरी हो सकती है।



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      apple new iphone xr was the best selling in november 2018 says counterpoint

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विराट 1200 करोड़ की ब्रांड वैल्यू के साथ लगातार दूसरे साल नंबर-1 सेलिब्रिटी


नई दिल्ली.भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली लगातार दूसरे साल भारत के नंबर-1 सेलिब्रिटी ब्रांड बने हुए हैं। उनकी ब्रांड वैल्यू 1,203 करोड़ रुपए है। दीपिका पादुकोण 721 करोड़ रुपए की ब्रांड वैल्यू के साथ दूसरे स्थान पर आ गई हैं। वह पिछले साल तीसरे स्थान पर थीं। पिछले साल दूसरे स्थान पर मौजूद शाहरुख खान इस बार पांचवें स्थान पर फिसल गए हैं। उनकी ब्रांड वैल्यू 427 करोड़ रुपए है। अक्षय कुमार (473 करोड़ रुपए) तीसरे और रणवीर सिंह (443 करोड़ रुपए) चौथे स्थान पर हैं।

  1. यह रैंकिंग ग्लोबल वैलुएशन एंड कॉर्पोरेट फाइनेंस एडवाइजर डफ एंड फेल्प्स ने तैयार की है। सेलिब्रिटी वाले विज्ञापनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2017 तक कुल 1,660 ब्रांड का विज्ञापन कोई न कोई सेलिब्रिटी कर रहा था। 2007 में यह आंकड़ा 650 था। यानी एक दशक में इसमें 155% का इजाफा हुआ है। टॉप-20 सेलिब्रिटी के पास 2018 तक 314 प्रोडक्ट ब्रांड के विज्ञापन थेे। टॉप-5 के पास कुल 105 विज्ञापन हैं। इनमें 25 ब्रांड के विज्ञापन के साथ रणवीर सिंह सबसे आगे हैं। विराट कोहली (24) दूसरे स्थान पर हैं।

  2. सेलिब्रिटी विज्ञापन का सबसे बड़ा हिस्सा फिल्म सितारों के पास है। टॉप-20 लिस्ट में कुल 16 फिल्म सितारे और चार स्पोर्ट्स स्टार शामिल हैं। स्पोर्ट्स स्टार में विराट कोहली के अलावा महेंद्र सिंह धोनी (189 करोड़ रुपए), सचिन तेंडुलकर (152.7) करोड़ रुपए) और बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु (152 करोड़ रुपए) शामिल हैं।

  3. अलग-अलग सेक्टर में महिला और पुरुष सेलिब्रिटी की मांग भी अलग है। पर्सनल केयर और बैंकिंग सेक्टर में महिला सेलिब्रिटी की मांग ज्यादा है। पर्सनल केयर में 67% और बैंकिंग में 65% विज्ञापन महिला सेलिब्रिटी के पास हैं। इसके उलट ई-कॉमर्स सेक्टर में 72% विज्ञापन पुरुषों के पास हैं। ऑटोमोबाइल में पुरुष सेलिब्रिटी का दबदबा और भी ज्यादा है। इसमें 87% विज्ञापन पुरुष सेलिब्रिटी के पास हैं।

  4. पावर कपल में दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह सबसे आगे हैं। इन दोनों के पास कुल 46 प्रोडक्ट के विज्ञापन हैं। हालांकि, दोनों किसी एक ब्रांड के लिए साथ विज्ञापन नहीं करते हैं। विरुष्का यानी विराट कोहली और अनुष्का शर्मा दूसरे स्थान पर हैं। इनके पास कुल 39 विज्ञापन हैं। अक्षय और ट्विंकल के पास 28, सैफीना (सैफ और करीना) के पास 27 और शाहरुख-गौरी के पास 18 ब्रांड के विज्ञापन हैं।

    report

  5. ऐसा नहीं कि सारे सेलिब्रिटी विज्ञापन राष्ट्रीय स्तर के सितारों के पास हैं। क्षेत्रीय सितारों के पास भी अच्छे-खासे विज्ञापन हैं। दक्षिण भारतीय एक्टर महेश बाबू 15 ब्रांड का विज्ञापन करते हैं। वहीं, तमन्ना के पास आठ ब्रांड के विज्ञापन हैं। इसी तरह रिटायर हो चुके स्टार खिलाड़ियों से पास भी खूब विज्ञापन हैं। सचिन तेंडुलकर आज भी 18 ब्रांड का विज्ञापन करते हैं। राहुल द्रविड़ पांच और सौरव गांगुली चार ब्रांड का विज्ञापन करते हैं।

  6. रैंक सेलिब्रिटी ब्रांड वैल्यू
    1 विराट कोहली 1203
    2 दीपिका पादुकोण 721
    3 अक्षय कुमार 473
    4 रणवीर सिंह 443
    5 शाहरुख खान 427
    6 सलमान खान 392
    7 अमिताभ बच्चन 290
    8 आलिया भट्‌ट 256
    9 वरुण धवन 222
    10 रितिक रोशन 218

    नोट : ब्रांड वैल्यू करोड़ रुपए में



    1. Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
      विराट और अनुष्का दोनों टॉप-20 में हैं। विराट पहले और अनुष्का 13वें स्थान पर हैं। दोनों के पास कुल 39 विज्ञापन हैं।
      Virat number one celebrity again in second year
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अब रेलवे में भी मिलेगा जियो का नेटवर्क, इससे फोन के बिल में 35% कमी आएगी


गैजेट डेस्क. देश की तीसरी सबसले बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो अब भारतीय रेलवे को अपनी सर्विसेस देगा। जियो रेलवे को अपनी सर्विसेस 1 जनवरी 2019 से देने लगेगा। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, जियो की सर्विसेस की मदद से रेलवे कर्मचारियों के फोन कनेक्शन बिल में 35% तक की कमी आने की उम्मीद है। रेलवे अधिकारी-कर्मचारियों के फोन कनेक्शन का बिल भारतीय रेलवे ही चुकाता है।

दरअसल, रेलवे के अधिकारी और कर्मचारियों को क्लोज्ड यूजर ग्रुप (सीयूजी) के तहत मोबाइल कनेक्शन दिए जाते हैं। अधिकारियों ने बताया कि पिछले 6 सालों से भारती एयरटेल रेलवे को सर्विस दे रहा था, जिसके लिए रेलवे हर साल 100 करोड़ रुपए का बिल जमा करता था लेकिन इसकी वैलिडिटी 31 दिसंबर 2018 को खत्म हो रही है। इसलिए अब इसका टेंडर रिलायंस जियो इन्फोकॉम को दिया गया है।

एयरटेल के मुकाबले 1.83 लाख ज्यादा कर्मचारियों को मिलेगी सुविधा : भारती एयरटेल रेलवे के करीब 1.95 लाख अधिकारी-कर्मचारियों को अपनी सुविधाएं देता था, लेकिन रिलायंस जियो 3.78 लाख कर्मचारियों को अपनी सुविधाएं देगा। इस हिसाब से एयरटेल के मुकाबले जियो 1.83 लाख ज्यादा अधिकारी-कर्मचारियों को अपनी सुविधा देने जा रहा है।

रेलवे कर्मचारियों को मिलेगा डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग : रेलवे के कर्मचारियों को जियो की तरफ से हाई-स्पीड इंटरनेट डेटा और अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग के अलावा एसएमएस की सुविधा भी मिलेगी। जियो के प्लान के मुताबिक, रेलवे के कर्मचारी डेली डेटा खत्म होने के बाद सिर्फ 10 रुपए में 2 जीबी एक्स्ट्रा डेटा भी ले सकेंगे।

जियो की तरफ से मिलेंगे चार प्लान : रेलवे के अधिकारी-कर्मचारियों को रिलायंस जियो चार तरह के प्लान देगा। इस प्लान में रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी को 60 जीबी डेटा मिलेगा, जिनकी संख्या सिर्फ 2% है। वहीं ज्वॉइंट सेक्रेटरी लेवल के अधिकारियों (26%) को 45 जीबी डेटा मिलेगा जबकि ग्रुप-सी के स्टाफ (72%) को 30 जीबी डेटा मिलेगा। इसके अलावा एक 49 रुपए का एसएमएस प्लान भी रेलवे वालों को मिलेगा।

प्लान डेटा
125 रुपए 60 जीबी डेटा
99 रुपए 45 जीबी डेटा
67 रुपए 30 जीबी डेटा


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reliance jio to take over as service provider for railways

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31 मार्च 2020 तक मिडिल क्लास को मिलती रहेगी होम लोन पर सब्सिडी, सरकार ने बढ़ाया समय


यूटिलिटी डेस्क. आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने मिडल इनकम ग्रुप (MIG) के लिए क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (CLSS) की अवधि को 12 म‍हीने तक बढ़ा दी है। अब यह स्कीम 31 मार्च 2020 तक लागू रहेगी। आवास और शहरी कार्य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी ने इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि एमआईजी के लिए सीएलएसएस की वृद्धि और प्रदर्शन बहुत अच्‍छा रहा है और इस साल के आखिर तक लाभार्थियों की संख्‍या एक लाख तक पहुंचने वाली है।

पहले भी बढ़ाई जा चुकी है अंतिम तिथि:शहरी मिडिल इनकम ग्रुप के लिए CLSS,31 दिसंबर 2017 को शुरू की गई थी। तब इसे 12 महीने के लिए लागू किया गया था। इसका उद्देश्य देश के हर नागरिक को आवास उपलब्ध कराना था। इस स्कीम के माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र उम्मीदवारों को पहली बार घर खरीदने के लिएहोम लोन लेने पर सब्सिडी मिलती है। बाद में इस योजना की वैधता में 3 महीने का इजाफा किया गया और इसे 31 मार्च 2019 तक कर दिया गया।

कितना मिलता है फायदा:CLSS का लाभ लेने वालों के लिए सरकार ने मिडिल इनकम ग्रुप की दो कैटेगरी बनाई है। इनमें 6 लाख से 12 लाख रुपए की सालाना आय वाले परिवार MIG-1 कैटेगरी में आते हैं। जबकि, 12 से 18 लाख सालाना आय वाले MIG-2 कैटेगरी में आते हैं। MIG-1 कैटेगरी वालों को 20 साल की अवधि के लिए 9 लाख रुपए होम लोन लेने पर ब्याज दर में 4 फीसदी की सब्सिडी दी जाती है। सब्सिडी की अधिकतम सीमा 2.35 लाख होगी। इसके साथ ही MIG-2 कैटेगरी वालों को 20 साल की अवधि के लिए 12 लाख तक के होम लोन लेने पर ब्याज दर में 3 फीसदी की छूट मिलती है, जो अधिकतम 2.30 लाख तक होगी।



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government has increased the validity of credit linked subsidy scheme till 31 march 2020

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कार्ड फ्रॉड रोकने के लिए RBI ने जारी की टोकन सिस्टम की गाइडलाइन्स, 3 पॉइंट में समझिए व्यवस्था


यूटिलिटी डेस्क.डेबिट और क्रेडिटकार्ड से लेनदेन को सुरक्षित करने के लिए रिजर्व बैंक ने नई व्यवस्था शुरू करने के दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। इस व्यवस्था को टोकनाइजेशन (टोकन व्यवस्था) के नाम से जाना जाएगा। इसके लागू होने पर पेमेंट कंपनियां थर्ड पार्टी के साथ मिलकर अपने ग्राहकों की सुरक्षा के लिए टोकन जारी कर सकेंगी। लगातार बढ़ रहे कार्ड फ्रॉड की घटनाओं को देखते हुए आरबीआई ने यह गाइडलाइन तयकी है।

  1. टोकन सिस्टमके तहत ग्राहक के कार्ड की वास्तविक डिटेल्स को एक विशेष कोड (टोकन) में बदल दिया जाएगा। इस टोकन का इस्तेमाल करके ग्राहक किसी थर्ड पार्टी ऐप या पॉइंट ऑफ सेल (PoS) पर पेमेंट कर सकेंगे।

  2. टोकन सिस्टम पहले ही कुछ जगह इस्तेमाल किया जाता रहा है। लेकिन, रिजर्व बैंक ने अब इसके दायरे को बढ़ा दिया है। अब नियर फील्ड कम्युनिकेशन (एनएफसी), मैग्नेटिक सिक्योर ट्रांसमिशन बेस्ड कॉन्टैक्टलेस ट्रांजैक्शन और क्यूआर कोड आधारित पेमेंट भी कर सकेंगे।

  3. कार्ड प्रदाता कंपनियां इनसेवाओं के लिए किसी थर्ड पार्टी ऐप डेवलपर से टोकन सर्विस के लिए कॉन्ट्रैक्ट कर सकेंगी। हालांकि, इस टोकनाइज्ड पेमेंट सिस्टम में भाग लेने वाली सभी कंपनियों को रिजर्व बैंक के साथ रजिस्टर्ड होना जरूरी है।

  4. यह सुविधा अभी सिर्फ मोबाइल फोन और टैबलेट के माध्यम से ही मिलेगी। इससे मिलेफीडबैक के आधार पर बाद में अन्य डिवाइसों के लिए भी इसका विस्तार किया जाएगा।

  5. यूजर को टोकनाइजेशन के लिए कार्ड प्रदाता कंपनियों से रिक्वेस्ट करनी होगी। इसके बाद यूजर के कार्ड की डिटेल्स, टोकन रिक्वेस्ट करने वाली कंपनी की डिटेल्स (जिस कंपनी को पेमेंट करने के लिए टोकन जेनरेट करना चाहते हैं) और यूजर की डिवाइस (मोबाइल/टैबलेट)के आइडेंटिफिकेशन से टोकन जेनरेट होगा। टोकन जेनरेट होने के बाद केवल उसी कंपनी के साथ इसे शेयर किया जा सकेगा, जिसके लिए इसे जेनरेट किया गया है।

  6. इस व्यवस्था के शुरू होने के बाद कार्ड धारक अपने कार्ड की डिटेल्स किसी थर्ड पार्टी ऐप (जैसे- फूड डिलेवरी ऐप, कैब सेवा प्रदाता ऐप) के साथ शेयर नहीं करनी होगी। पहले ऐसा करने से यूजर को कार्ड का डेटा इन वेबसाइट्स या ऐप पर सेव करना होता था, जिसके चोरी होने का डर लगा रहता है।

  7. ग्राहकों के लिए यह सर्विस पूरी तरह मुफ्त होगी और कार्ड प्रदाता कंपनियां इसके लिए उनसे किसी भी तरह का कोई शुल्क नहीं वसूल सकेंगी।

  8. टोकन सर्विस ग्राहकों के इच्छा पर निर्भर करेगी। इसे लेने के लिए उन पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं बनाया जा सकेगा और न ही बैंक/कार्ड प्रदाता कंपनियोंद्वारा अनिवार्य रूप से इसे लागू किया जा सकेगा।

  9. ग्राहकों के पास खुद को कॉन्टैक्टलेस, क्यूआर कोड या इन-ऐप परचेज जैसी किसी भी सर्विस के लिए रजिस्टर और डी-रजिस्टर करने का अधिकार होगा।

  10. टोकनाइज्ड कार्ड ट्रांजेक्शन के माध्यम से होने वाले लेनदेन के लिए ग्राहक हर ट्रांजेक्शन कीलिमिट के साथ-साथ डेली ट्रांजेक्शन लिमिट भी तय कर सकते हैं।इसके बाद तय लिमिट से ज्यादा का लेनदेन नहीं हो सकेगा।

  11. कार्ड प्रदाता को यह सुनिश्चित करना होगा कि ग्राहक जल्द से जल्द आईडेंटिफाइड डिवाइस (मोबाइल/टैबलेट)खोने की कंप्लेन दर्ज करा सके ताकि अनाधिकृत लेनदेन रोका जा सके।

  12. रिजर्व बैंक ने कहा है कि टोकन ट्रांजेक्शन सिस्टम के दौरान होने वाले सभी ट्रांजेक्शन के लिए कार्ड पेमेंट कंपनी ही जिम्मेदार होंगी।

  13. रिजर्व बैंक ने कहा है कि कार्ड के लिए टोकन सेवाएं शुरू करने से पहले अधिकृत कार्ड पेमेंट नेटवर्क को निश्चित अवधि में ऑडिट प्रणाली स्थापित करनी होगी। यह ऑडिट साल में कम से कम एक बार होनी चाहिए।



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      what is reserve banks tokenization system and how it will works

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77% भारतीय अमीरों को आतंकवाद और 40% को पैसा चोरी होने का डर


नई दिल्ली. देश के 77% अमीर आतंकवाद के बढ़ते खतरे को लेकर चिंतित रहते हैं। 73% अमीर साम्प्रदायिक तनाव, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और सामाजिक-आर्थिक विषमता जैसे सामाजिक मुद्दों की चिंता करते हैं। वहीं, 40% अमीर ऐसे हैं, जिन्हें पैसा चोरी होने का डर सताता है।

  1. ये आंकड़े इन्वेस्टमेंट सर्विसेज कंपनी आईआईएफएल की वेल्थ इंडेक्स रिपोर्ट 2018 के जरिए सामने आए हैं। यह रिपोर्ट एक सर्वे के आधार पर तैयार की गई है, जिसमें देश के टॉप-500 अमीरों से रायशुमारी की गई थी।

  2. सर्वे के लिए देशभर के 500 अमीरों को तीन ग्रुप- हाई नेटवर्थ, वेरी हाई नेटवर्थ और अल्ट्रा हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल में बांटा गया। आतंकवाद के बाद इनकी सबसे बड़ी चिंता सामाजिक मुद्दे हैं। इनमें अंतर जातीय टकराव, महिला हिंंसा और गरीबों-अमीरों के बीच असमानता जैसी बातें शामिल हैं।

  3. सर्वे में शामिल 52% भारतीय अमीरों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी चिंता का विषय हैं। भारतीय अमीर ये मानते हैं कि ट्रम्प की नीतियां अस्थिरता का कारण बन सकती हैं। 62 फीसदी अमीरों के लिए वर्तमान अस्थिरता परेशान करने वाला का विषय है क्योंकि इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

  4. भारत-पाक संबंध, चीन का दक्षिण चीनी समुद्र में विस्तार होना और यूरोपियन यूनियन का टूटना भी भारतीय अमीरों को चिंतित करता है। 8 फीसदी अमीरों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मामलों का असर भी भविष्य में भारत की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है। सर्वे में शामिल 5 फीसदी अमीरों के लिए अपनी कंपनी का उत्तराधिकारी चुनना भी कड़ी चुनौती है।



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      terrorism and fear of losing money keep Indias riches people tensed says IIFL Wealth Index 2018

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गैरकानूनी तरीके से ऑनलाइन दवाईयां बेचने पर स्नेपडील पर कार्रवाई के आदेश


बेंगलुरु. कर्नाटक सरकार ने संबंधित औषधि नियंत्रक को स्नेपडील और लुधियाना की एक फार्मा कंपनी के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए। दोनों कंपनियों पर गैरकानूनी तरीके से दवाईयों की ऑनलाइन बिक्री का आरोप है।

  1. सरकार ने 21 दिसंबर को यह आदेश जारी कर बेलागवी के असिस्टेंट औषधि नियंत्रक को स्नेपडील के खिलाफ तुरंत कानूनीकार्रवाई करने को कहा था। कंपनी पर ऑनलाइन सुहाग्रा-100 की बिक्री करने का आरोप है। इसमें कंपनी के सीईओ कौर बहल और सीओओ रोहित कुमार बंसल की भूमिका की भी जांच की जा रही।

  2. कर्नाटक औषधि नियंत्रक अमरेश तुम्बागी ने बुधवार को कहा, इस प्रकार की दवाइयों को ऑनलाइन प्लेटफार्म पर बेचना ड्रग्स और कास्मेटिक्स नियमों का उल्लंघन है। लुधियाना की हर्बल हेल्थ केयर कंपनी, उसके प्रोप्रायटर और स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

  3. तुम्बागी ने कहा, सुहाग्रा-100 एक सेक्स वर्धक दवा है। येएच कैटेगरी की दवा है। इसको बगैर डॉक्टर की सलाह के नहीं दिया जाता।

  4. स्नेपडील कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, कंपनी कानूनी कार्रवाई के लिए आवश्यक सहयोग करेगी। स्नेपडील सिर्फ क्रेता और विक्रेता के बीच वस्तु खरीदने-बेचने के लिए स्वतंत्र प्लेटफार्म उपलब्ध कराती है। यहां एच कैटेगरी की दवाएं प्रतिबंधित हैं।



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      Drug regulator initiates prosecution proceedings against Snapdeal for Suhagra 100 selling

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सीईओ टिम कुक को पिछले साल रिकॉर्ड 84 करोड़ रु का बोनस मिला, कुल कमाई 957 करोड़ रु


कैलिफॉर्निया. आईफोन कंपनी एपल के सीईओ टिम कुक को 2018 में 84 करोड़ रुपए (1.2 करोड़ डॉलर) का बोनस मिला। यह अब तक का सबसे ज्यादा है। एपल ने मंगलवार को रेग्युलेटरी फाइलिंग में बोनस की रकम के बारे में जानकारी दी। कुक को 2017 में 65करोड़ रुपए का बोनस मिला था।

29 सितंबर 2018 को खत्म वित्त वर्ष में कुक को वेतन के तौर पर 21 करोड़ रुपए (30 लाख डॉलर) मिले। साथ ही 847 करोड़ रुपए (12.1 करोड़ डॉलर) की वैल्यू के शेयर मिले। अन्य भत्तों के तौर पर 4.77 करोड़ रुपए (6.82 लाख डॉलर) मिले। इस तरह उनकी कुल कमाई 956.77 करोड़ रुपए रही।

कंपनी के रेवेन्यू और ऑपरेटिंग इनकम टार्गेट के आधार पर बोनस की रकम तय की जाती है। बीते वित्त वर्ष में एपल के रेवेन्यू में 16% का इजाफा हुआ था। एपल का फाइनेंशियल ईयर 29 सितंबर को खत्म होता है और 30 सितंबर से नया वित्त वर्ष शुरू होता है।

  1. साल बोनस (रुपए)
    2014 46.9 करोड़ रुपए
    2015 56 करोड़ रुपए
    2016 37.8 करोड़ रुपए
    2017 65.1 करोड़ रुपए
    2018 84 करोड़ रुपए

  2. कुक की कमाई का बड़ा हिस्सा एपल के शेयरों से आता है। उन्हें सालाना इन्क्रीमेंट के तौर पर शेयर मिलते हैं। इनकी संख्या एसएंडपी-500 की कंपनियों के मुकाबले एपल के शेयर की परफॉर्मेंस के आधार पर तय होती है।

  3. पिछले साल अगस्त में कुक को 5.60 लाख शेयर मिले थे। क्योंकि, एपल के शेयर का प्रदर्शन एसएंडपी-500 की दो तिहाई कंपनियों से बेहतर रहा था। बीते वित्त वर्ष में एपल के शेयर ने निवेशकों को 49% रिटर्न दिया।

  4. एपल के 4 अन्य अधिकारियों को 28 करोड़ रुपए (40 लाख डॉलर) का बोनस मिला। इनमें से प्रत्येक को सैलरी और शेयरों समेत कुल 185.5 करोड़ रुपए (2.65 करोड़ डॉलर) की रकम मिली।

  5. एपल ने पिछले बुधवार को ऐलान किया कि वह अक्टूबर-दिसंबर 2018 तिमाही के लिए रेवेन्यू अनुमान 5.5% घटा रही है। करीब 20 साल में पहली बार ऐसा हुआ। आईफोन की बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं रहने की वजह से कंपनी ने रेवेन्यू गाइडेंस में कमी की। एपल 29 जनवरी को तिमाही नतीजे जारी करेगी।

  6. गाइडेंस में कमी की वजह से एपल के शेयर में पिछले गुरुवार को 10% गिरावट आ गई। इस गिरावट से कंपनी का मार्केट कैप एक ही दिन में 5 लाख करोड़ रुपए घट गया था।



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      apple tim cook bonus usd 12 millions for year 2018, highest ever he recieved so far

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4-5 महीने में निवेश के मौके मिलेंगे, कम से कम 3 साल के लिए निवेश करें: ताहेर बादशाह


नई दिल्ली. नया साल शुरू होने के साथ एक सवाल सबके दिमाग में आता है कि यह साल कैसा रहेगा। मेरा मानना है कि किसी तरह की भविष्यवाणी करने के बजाय हमें खुद को हर तरह के बदलाव के लिए तैयार रखना चाहिए। अतीत के विश्लेषण और वर्तमान हालात को समझकर हम अपने आपको तैयार कर सकते हैं। हाल के वर्षों में देखें तो आर्थिक परिस्थितियां बेहतर रही हैं, कंपनियों की कमाई के आंकड़े कमजोर रहे हैं लेकिन उनकी वैलुएशन काफी बढ़ी थी। दिसंबर 2017 में मिडकैप और स्मॉल कैप कंपनियों का प्रीमियम लार्ज कैप शेयरों की तुलना में ज्यादा हो गया था।

अब जब हमने 2019 में प्रवेश किया है, तो आर्थिक हालात बेहतर लग रहे हैं। महंगाई दर कम है, राजकोषीय और चालू खाते का घाटा भी नियंत्रण में हैं। बैंकों के एनपीए कम हो रहे हैं। नया निवेश भी रफ्तार पकड़ रहा है। इसलिए आने वाले दिनों में कंपनियों की कमाई बढ़ने की पूरी उम्मीद है। पिछले साल रुपए में गिरावट और अमेरिका की इकोनॉमी में मजबूती आई। निर्यात आधारित कंपनियों को इसका फायदा मिलेगा।

जहां तक वैलुएशन की बात है तो 2018 में मिड कैप और स्मॉल कैप शेयरों में अच्छा खासा करेक्शन आया। इन कंपनियों के शेयर अभी लार्ज कैप की तुलना में प्रीमियम पर नहीं हैं। इसलिए हर साइज की कंपनियों में निवेश के मौके हैं। हालांकि निवेशकों को पैसे लगाने से पहले उचित वैलुएशन देखनी चाहिए। उन्हें ऐसी कंपनियां चुननी चाहिए जिनमें आम चुनाव और ग्लोबल कारणों से 4-5 महीने में निवेश का अवसर मिले। उचित वैलुएशन पर निवेश करने से 3 से 5 साल में अच्छा रिटर्न मिल सकता है, क्योंकि लंबे समय में कंपनी के प्रदर्शन का ही नहीं, पीई (प्राइस-अर्निंग) अनुपात का भी फायदा मिलता है। निवेशकों को कम से कम तीन साल के निवेश की बात सोचनी चाहिए। कंपनियों को अपनी परिस्थितियां सुधारने में समय लगता है, इसलिए एक साल की परफॉर्मेंस पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।)



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ताहेर बादशाह, सीआईओ (इक्विटीज), इनवेस्को म्यूचुअल फंड।

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डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए कमेटी बनाई गई, नंदन नीलेकणि होंगे चेयरमैन


नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिएडिजिटल पेमेंट कमेटी बनाई।उद्योगपति नंदन नीलेकणि को इसका चेयरमैन बनाया गया। नीलेकणि इंफोसिस के चेयरमैन और को-फाउंडर रहे हैं। आधार को लागू कराने का श्रेय इन्हीं को मिलता है। वे यूआईडीएआई के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देनेऔर इसे सुरक्षित बनाने के लिए आरबीआई ने मंगलवार को नीलेकणि की अध्यक्षता में पांच सदस्यों वाली कमेटी का गठन किया।

90 दिन में रिपोर्ट पेश कर सकती है कमेटी

कमेटी पहली बैठक के 90 दिनों के बाद अपनी पहली रिपोर्ट पेश करेगी। कमेटी का कार्य देश में डिजिटल पेमेंट की मौजूदा स्थिति और इसकी खामियों के बारे में जानकारी इकट्ठा करनाऔर इन समस्याओं को दूर करने के उपाय सुझाने हैं। कमेटी डिजिटल पेमेंट के अधिक इस्तेमाल से अर्थव्यवस्था और वित्तीय समावेशन में तेजी लाने के लिए क्रॉस कंट्री एनालिसिस भी करेगी।

कमेटी में नीलेकणि के अलावा पूर्व आरबीआई डिप्टी गवर्नर एच आर खान, विजया बैंक के पूर्व एमडी और सीईओ किशोर सनसी, आईटी और स्टील मंत्रालय में पूर्व सचिव अरुणा शर्मा और आईआईएम अहदाबाद केचीफ इनोवेशन ऑफिसर संजय जैन शामिल हैं।

लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं नीलेकणि
नीलेकणि 2014 में कांग्रेस के टिकट पर बेगलुरु की साउथ सीट से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि, उन्हें भाजपा के अनंत कुमार से हार का सामना करना पड़ा था। वे 2015 से राजनीति में सक्रिय नहीं हैं।



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नंदन नीलेकणि।

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'सैंडविच जनरेशन' में कदम रखने से पहले करें कुछ जरूरी फाइनेंशियल प्लानिंग



आप सभी ने यंग जनरेशन, ओल्ड जनरेशन के बारे में तो सुना ही होगा, पर आप में से कुछ ही लोग होंगे जो सैंडविच जनरेशन कोन्सेप्ट से परिचित होंगे। सैंडविच जनरेशन शब्द भारतीय नस्ल की उस पीढ़ी की परिस्थितियों के लिए अनुरूप है जो अपने बच्चों के साथ-साथ अपने माँ-बाप का खर्च भी उठाते हैं। इसलिए कई बार ये पीढ़ी अपने आप को दो पीढ़ियों के बीच में फंसा हुआ महसूस करती है इसी कारण से इस पीढ़ी को सैंडविच जनरेशन कहा जाता है।


इस जनरेशन के लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत होना भी बहुत जरूरी है, क्यूंकि कई बार जीवन के इस पड़ाव में विभिन्न स्तरों पर चुनौतियां अचानक बढ़ने लगती हैं जैसे बूढ़े माता- पिता के स्वास्थ संबंधी खर्चे, बढ़ते बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की प्लानिंग। साथ ही इसी समय व्यक्ति अपने लिए हेल्थ या रिटायरमेंट प्लानिंग भी करता है और अपने बच्चों की शादी के खर्च की तैयारी करता है। इन सभी जरूरतों को पूरा करने में कई बार व्यक्ति पर ज़िम्मेदारियों का बोझ बढ़ जाता है जिससे घर खर्च में इजाफ़ा होने लगता है। इन सभी कारणों से कई बार इस पीढ़ी के लोग आर्थिक रूप से अपने आप को असहाय भी महसूस करने लगते हैं जिसकी वजह से वो मानसिक और शारीरिक परेशाननियों से जूझने लगते हैं।

अगर आप भी इस पीढ़ी के पड़ाव पर हैं या पहुँचने वाले हैं तो जानिए किस तरह की फाइनेंशियल प्लानिंग आपके लिए ज़रूरी है,ताकि आप अपनी आर्थिक समस्याओं से बेहतर तरीके से निपट सकें।


फाइनेंशियल प्राथमिकताओं को पहचानें:

ज़िम्मेदारियों को निभाना एक चुनौती भरा काम हो सकता है, खासतौर पर जब बात परिवार की हो। सैंडविच जनरेशन में व्यक्ति सीमित बजट के साथ इतने सारे दायित्वों से घिरा होता है जैसे बच्चों की पढ़ाई, शादी का खर्च, अपना घर खरीदना आदि इसके साथ ही फ़ैमिली ट्रैवल और आवागमन के लिए वाहन खरीदना भी काफी हद तक प्राथमिकता बन जाती है,जिसके बीच फंस कर व्यक्ति मानसिक और शारीरिक रूप से भी मुश्किल में पड़ जाता है। इसलिए हमेशा घर और परिवार की प्राथमिकता को समझते हुए ही कदम उठाएँ, उन चीजों को हमेशा नज़रअंदाज़ करें जो प्राथमिकता की लिस्ट में सबसे नीचे हों। हमेशा अल्पकालिक और लंबी अवधि के लिए पहले से ही प्राथमिकता निर्धारित करना एक बेहतर सुझाव माना जाता है।

सैंडविच जनरेशन के लिए जरूरी है इन्श्योरेंस:

आपकी फाइनेंशियल सुरक्षा सिर्फ आप पर निर्भर है, किसी और पर नहीं। तो इसलिए लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट प्लान में निवेश करना लाभदायक होता है। खासतौर पर जब आप सैंडविच जनरेशन के पड़ाव पर हों, क्यूंकि इस दौरान परिवार में आकस्मिक खर्चे एक ही समय पर आ जाते हैं चाहे वो बच्चों की पढ़ाई का खर्च हो, बूढ़े माता- पिता के स्वास्थ का खर्च हो या खुद के लिए रिटायरमेंट प्लानिंग हो। इन सब खर्चों से निपटने के लिए विभिन्न वित्तीय सेवाओं की जानकारी होना आवश्यक है जैसे; परिवार के लिए मेडिकल इन्श्योरेंस, लाइफ इन्श्योरेंस, गाड़ियों का इन्श्योरेंस, होम इन्श्योरेंस और यूएलआईपी (ULIP) प्लान्स। ULIP, बीमा कंपनियों द्वारा दिया जाने वाला एक ऐसा प्लान है, जिसमें नॉर्मल बीमा पॉलिसी के फ़ायदों से अलग इन्वेस्टर्स को वित्तीय सुरक्षा के साथ लाइफ कवर की सुविधा भी मिलती है। आजकल एचडीएफ़सी लाइफ जैसे कई संगठन अपने उपभोक्ताओं के लिए विभिन्न ऑफर ला रहें है जो आम जनता के लिए काफी सुविधाजनक साबित हो रहे हैं। इस तरह के बीमा प्रोडक्टस अब आप आसानी से ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं।

एक्स्पेंसिव बजट से बनाएँ दूरी:

सेविंग्स के लिए बजट बनाना सैंडविच जनरेशन के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। अधिकांश लोगों की ये धारणा होती है कि पहले खर्च करते हैं, और फिर जो बचेगा उसका निवेश करेंगें। लेकिन इस तरीके से अनावश्यक खर्च ज़्यादा होता है जिसकी वजह से बचत बहुत कम होने लगती है। इसलिए ये जरूरी हो जाता है कि आप अपने रोज़मर्रा के खर्चों का विश्लेषण करें कि आप किन चीजों पर कितना खर्च कर रहे हैं और क्या वो खर्च कहीं फिजूल तो नहीं है जैसे:बिना किसी जरूरत के सामानों की शॉपिंग करना, घर से बाहर पार्टी और आउटिंग करना आदि ऐसे कुछ अनावश्यक खर्चे हैं जो महीने की खर्चों को बढ़ा सकते हैं। इसलिए पहली प्राथमिकता हमेशा घरेलू और जरूरी खर्चों को दें न कि लियाबिलिटीज़ पर खर्च करें, ताकि मासिक खर्चों को सुव्यवस्थित किया जा सके और एक्स्पेंसिव बजट से बचा जा सके है।

फाइनेंशियल चर्चा में पूरे परिवार को सम्मिलित करें:

खासतौर पर ये देखा जाता है कि परिवारों में फाइनेंशियल फैसलों को लेते समय घर के सभी सदस्यों को शामिल नहीं किया जाता। लेकिन ये जरूरी है, कि आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग के बारे में पूरे परिवार को जानकारी हो। इस तरह आपके माता-पिता को पता चल पाता है कि बुढ़ापे में उनकी वित्तीय जरूरतों का ख्याल रखने के लिए आप क्या कदम उठा रहे हैं? इसी तरह, पत्नी और बच्चों के साथ भी निवेश के फैसले पर चर्चा करना महत्वपूर्ण है, ताकि वे पैसे के मूल्य को समझें और उसी हिसाब से अपने भविष्य की योजनाएँ बनाएँ। इसके साथ ही परिवार के लोगों व अपने लिए लाइफ इन्श्योरेंस लेते समय सभी सदस्यों को इस चर्चा में शामिल करें।


भारत में संयुक्त परिवारों का चलन काफी समय से चला आ रहा है इसलिए ये जरूरी है कि हमेशा प्लानिंग के साथ चला जाए। क्यूंकि आय के बढ़ते स्रोतों के साथ खर्च भी काफ़ी बढ रहें हैं जो खुशियों के साथ चुनौतियां भी उत्पन्न कर रहें हैं। तो अगर आप भी सैंडविच जनरेशन का एक हिस्सा हैं या फिर होने वाले हैं तो इन सभी बातों का ख्याल जरूर रखें ताकि आप अनचाही फाइनेंशियल समस्याओं से बच सकें।



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Here are some financial planning ideas for the Sandwich Generation

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रिलायंस समूह समेत रिसर्जेंट राजस्थान के 3.37 लाख करोड़ के एमओयू निरस्त करेगी गहलोत सरकार


जयपुर.अशोक गहलोत सरकार रिसर्जेंट राजस्थान इनवेस्टमेंट समिट के 200 से ज्यादा एमओयू निरस्त करेगी। पिछली भाजपा सरकार ने नवंबर 2015 में आयोजित रिसर्जेंट राजस्थान इनवेस्टमेंट समिट में 3.37 लाख करोड़ रुपए के 470 एमओयू किए थे। इसके मुताबिक इन कंपनियों काे राजस्थान में पर्यटन, खनन और मेडिकल जैसे क्षेत्र में निवेश करना था। बदले में सरकार ने इन्हें जमीन और टैक्स में रियायत देने की बात कही थी।

अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस समूह और गौतम अडानी केअडानी ग्रुप की कंपनियों ने एमओयू तो साइन किए लेकिन निवेश करने में ज्यादातर कंपनियाें ने रुचि नहीं दिखाई। मौजूदा उद्योग मंत्री परसादी लाल मीणा के मुताबिक पिछले तीन सालों में इनमें से सिर्फ 124 एमओयू ही ऐसे रहे जिन पर काम शुरू हुआ। इनसे सिर्फ 12 हजार करोड़ रुपए का ही निवेश आ सका है। जिन कंपनियों ने काम शुरू नहीं किया है उन्हें नोटिस दिए जाएंगे। कंपनियां नहीं आती हैं तो एमओयू रद्द किए जाएंगे।

टूरिज्म औरमेडिकल में सबसे ज्यादा विफल

सबसे ज्यादा विफलता पर्यटन, खनन और मेडिकल के एमओयू में देखने को मिली। इनमें ढाई लाख करोड़ रुपएसे ज्यादा के करीब 240 एमओयू किए गए। इन्हीं में ड्रॉप आउट रेट सबसे ज्यादा रही। टूरिज्म में 10,442 करोड़ के 221 एमओयू और मेडिकल में करीब 2,700 करोड़ रुपएके 14 एमओयू से संबंधितकोई भी प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ। माइंस में 76 हजार करोड़ के 25 एमओयू हुए लेकिननिवेश सिर्फ 1500 करोड़ रुपए का आया।

कुल 470 में से 154 एमओयू पिछली सरकार में ही निरस्त माने जा चुके थे। इनके निवेशकों ने समिट के बाद फॉलोअप नहीं किया। रिन्यूएबल एनर्जी में रिलायंस एनर्जी, अडानी, एजर पावर इंडिया जैसी दिग्गज कंपनियों ने 1.90 लाख करोड़ रुपएके एमओयू किए। रिलायंस एनर्जी, एजर पावर इंडिया, सन एडिसन ने एमओयू के बाद फोलोअप नहीं किया।



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राजस्थान के उद्योग मंत्री परसादीलाल मीणा।

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भारत की ग्रोथ रेट 7.2% रहने का अनुमान, पिछले वित्त वर्ष में यह दर 6.7% थी


नई दिल्ली. भारत की विकास दर मौजूदा वित्त वर्ष 2018-19 में 7.2% रहने की संभावना है। पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 6.7% था। एग्रीकल्चर और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में सुधार की वजह से इस बार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) दर का अनुमान बढ़ा है।

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने सोमवार को जारी आंकड़ों में कहा कि एग्रीकल्चर, फॉरेस्ट्री और फिशिंग सेक्टर में ग्रोथ रेट पिछले वित्त वर्ष के 3.4% के मुकाबले इस बार 3.8% रहने का आसार हैं। वहीं मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के भी 2017-18 में 5.7% के मुकाबले 2018-19 में 8.3% की दर से विकास करने का अनुमान है।

वित्त वर्ष देश की विकास दर
2015-16 8.2%
2016-17 7.1%
2017-18 6.7%
*2018-19 7.2%

(*अनुमानित)

जुलाई-सितंबर में भारत की ग्रोथ रेट घटकर 7.1% हुई थी

तिमाही जीडीपी ग्रोथ
जुलाई-सितंबर 2018 7.1%
अप्रैल-जून 2018 8.2%
जनवरी-मार्च 2018 7.7%
अक्टूबर-दिसंबर 2017 7%
जुलाई-सितंबर 2017 6.3%
अप्रैल-जून 2017 5.6%


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सिम्बॉलिक इमेज।

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पिछले 5 साल में आर्थिक मामलों के 27 डिफॉल्टर विदेश भागे, सरकार ने 6 के प्रत्यर्पण की अपील की


नई दिल्ली. पिछले 5 साल में आर्थिक मामलों के 27 डिफॉल्टर देश छोड़कर भाग गए। इनमें से 20 के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने के लिए इंटरपोल सेअपील की जा चुकी है। वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने शुक्रवार को लोकसभा में यह लिखित जानकारी दी।

  1. शुक्ला ने बताया कि इंटरपोल ने अब तक 8 आरोपियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए हैं। छह आरोपियों के प्रत्यर्पण के लिए संबंधित देशों से अपील का गई है। आर्थिक मामलों के 27 भगोड़ों में से 7 के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की अपील पर भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून-2018 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

  2. वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार बैंकों को हमेशा यह सलाह देती है कि उन्हें 50 करोड़ रुपए से ज्यादा का लोन लेने वाली कंपनियों के प्रमोटर, डायरेक्टर और दूसरे अधिकृत व्यक्तियों के पासपोर्ट की सर्टिफाइड कॉपी रखनी चाहिए।

  3. लंदन की वेस्टमिन्स्टर मजिस्ट्रेट अदालत 10 दिसंबर को विजय माल्या के भारत प्रत्यर्पण की मंजूरी दे चुकी है। आखिरी फैसला वहां की सरकार लेगी। माल्या पर भारतीय बैंकों का 9000 करोड़ रुपए का लोन बकाया है। वह मार्च 2016 में लंदन भाग गया था।



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      विजय माल्या।

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सरकार ने 2000 के नोटों की छपाई रोकने के संकेत दिए, कहा- अभी सर्कुलेशन में पर्याप्त नोट


नई दिल्ली. सरकार ने शुक्रवार को संकेत दिए कि वह फिलहाल 2000 के नोटों की छपाई रोक रही है। आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि नोटों की छपाई अनुमानित आवश्यकता के हिसाब से तय की जाती है। हमारे पास 2000 के नोट जरूरत से ज्यादा मात्रा में हैं। सर्कुलेशन में चल रही कुल करंसी का ये 35% हैं। सरकार की यह सफाई तब आई, जब कुछ रिपोर्ट्स में यह कहा जा रहा था कि 2000 के नोटों को चरणबद्ध तरीके से चलन से बाहर किया जा रहा है।

  1. सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा- 2000 के नोटों की छपाई के संंबंध में हाल-फिलहाल सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है।

  2. रिपोर्ट में कहा जा रहा था किसरकार 2000 के नोटों की छपाई बंद कर चुकी है और उसकी योजना इन नोटों को चलन से बाहर करने की है।

  3. नवंबर 2016 में मोदी सरकार ने नोटबंदी का फैसला लिया तब 1000 व 500 को नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया। रिमोनेटाइजेशन के लिए 2000 के नोट लॉन्च किए थे।

  4. नोटबंदी के वक्त कुल सर्कुलेशन की86% करंसी चलन से बाहर हो गई थी। इस जरूरत को जल्द पूरा करने के लिए सरकार ने 2000 के बड़े नोट जारी किए थे।



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      No decision on phasing out Rs 2,000 rupees note says RBI

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भारत बना रहेगा सबसे तेज ग्रोथ वाला देश, दुनिया से दोगुनी होगी विकास दर


नई दिल्ली. भारत 2019 में भी दुनिया की सबसे तेज ग्रोथ वाली इकोनॉमी बना रहेगा। रिजर्व बैंक का अनुमान है कि 2018-19 में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.4% और 2019-20 में 7.5% रहेगी। मूडीज ने 2019 और 2020 में 7.3% ग्रोथ का अनुमान लगाया है। आईएमएफ के अनुसार 2018-19 में विकास दर 7.3% और 2019-20 में 7.4% रहेगी। यह बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक होगी। आईएमएफ का कहना है कि नोटबंदी और जीएसटी का असर खत्म होने के बाद खपत में तेजी आएगी। खासकर निजी क्षेत्र की खपत। भारत की जीडीपी में निजी खपत की हिस्सेदारी 60% के आसपास है।

  1. वर्ल्ड बैंक ने 2019 के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग जारी की है। इसमें भारत को 77वां स्थान मिला। 2018 में भारत की यह रैंकिंग 100 थी। भारत सरकार इस रैंकिंग में टॉप-50 में आना चाहती है। भारत ने 10 इंडिकेटर्स में से 6 में बेहतर प्रदर्शन किया है। कंस्ट्रक्शन परमिट में भारत ने 129 स्थान की छलांग लगाई है और इस साल 52 पर पहुंच गया है। कारोबार शुरू करने में भारत को 137 रैंकिंग मिली है। क्रेडिट पाने में 22वां स्थान मिला है। बिजली मिलने के मामले में भारत को 24वीं रैंक मिली है।

  2. 2019 में कंपनियों में 15% की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। आईटी, ऑटो सेक्टर के अलावा हॉस्पिटैलिटी में नौकरियों के ज्यादा मौके मिलेंगे। आईटी में डिजाइन और बिग डेटा एनालिटिक्स डेवलपर्स की ज्यादा मांग होगी। एआई/मशीन लर्निंग में टेक्नोलॉजी स्पेशलिस्ट की मांग बढ़ेगी। यह अनुमान इंडिया स्किल रिपोर्ट 2019 में जताया गया है। स्टाफिंग फर्म टीमलीज का आकलन है कि आईटी सेक्टर में नए साल में 2.5 लाख नई नौकरियां पैदा होंगी। कंपनियां इन क्षेत्रों में ऊंचे वेतन पर भर्तियां कर सकती हैं।

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  3. नया साल कामकाजी महिलाओं के लिए अच्छा रहने वाला है। इंडिया स्किल रिपोर्ट के अनुसार बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (बीएफएसआई), ऑटोमोटिव, आईटी, सॉफ्टवेयर, हॉस्पिटैलिटी और ट्रैवल सेक्टर में महिलाओं की भर्तियां 15-20% अधिक होने की उम्मीद है। 64% कंपनियों ने नए साल में हायरिंग को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है। वहीं, 20% कंपनियों ने कहा है कि वे 2018 के बराबर भर्तियां करेंगी।

  4. एचआर फर्म ग्लोबल हंट के अनुसार 2019 में औसत इन्क्रीमेंट 10-12% रहेगा। टॉप परफॉर्मर का इन्क्रीमेंट 15-20% और औसत परफॉर्म करने वालों का 5-8% रह सकता है। फ्रांस की ह्यूमन रिसोर्स कंसल्टिंग फर्म की रिपोर्ट के मुताबिक- इस साल जीडीपीआर प्रोजेक्ट मैनेजर की सैलरी सबसे ज्यादा 58 से 82 लाख रुपए सालाना रह सकती है।

    • भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट सालाना 41% की दर से बढ़ रहा है। यह रफ्तार दुनिया में सबसे तेज है। यह 2.8 लाख करोड़ रुपए का हो जाएगा।
    • ई-कॉमर्स बाजार 24% की रफ्तार से बढ़ेगा। स्टैटिस्टा के मुताबिक ई-कॉमर्स बाजार 2.18 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा।
    • टेक-साई रिसर्च के अनुसार एफएमसीजी बाजार 7.25 लाख करोड़ का हो जाएगा। यह सालाना 20.6% की ग्रोथ से बढ़ रहा है।
  5. प्रोफेशनल्स उनकी सैलरी
    जीडीपीआर प्रोजेक्ट मैनेज 58-82 लाख रुपए
    फाइनेंशियल प्लानर 34-74 लाख रुपए
    डेटा एनालिस्ट 38-53 लाख रुपए
    वेब डेपलपर 30-56 लाख रुपए
    बिजनेस लॉयर 29-57 लाख रुपए
    जनरल अकाउंटेंट 20-55 लाख रुपए
    सेल्स मैनेजर 19-28 लाख रुपए

    सोर्स: फ्रांस की ह्यूमन रिसोर्स कंसल्टिंग फर्म की रिपोर्ट।



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      2019 Expectations from Indian and World economy in new year

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2000 के नोटों की न्यूनतम छपाई होगी, अधिकारी ने कहा- नोटबंदी के वक्त ही लिया था फैसला


नई दिल्ली. रिजर्व बैंक दो हजार के नोटों की छपाई में कटौती करने जा रहा है। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि 2000 के नोटों की छपाई को न्यूनतम स्तर पर लाया जाएगा। उन्होंने कहा-करंसी की मात्रा को लेकर समय-समय पर फैसले लिए जाते हैं। इसके तहत ही यह निर्णय किया गया है।उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बादजब दो हजार का नोट शुरू किया गया था, तब ही फैसला लिया गया था कि इनकी मात्रा को कम से कम रखा जाए। यहकोई नई बात नहीं है।

  1. अधिकारी ने बताया कि नोटबंदी के बाद 2000 के नोट जारी करते वक्त यह तय कर लिया गया था कि इन नोटों की छपाई में कमी की जाती रहेगी। क्योंकि, इन नोटों को जारी करने का मकसद सर्कुलेशन से बाहर हुई करंसी की तात्कालिक जरूरत को पूरा करना था।

  2. अधिकारी ने बताया कि रिजर्व बैंक और सरकार समय-समय पर यह फैसला करते हैं कि कितने नोट छापे जाएं। यह फैसला सर्कुलेशन में मौजूद रकम के आधार पर लिया जाता है।

  3. आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2017 तक दो हजार के 32850 लाख नोट बाजार में थे। 31 मार्च 2018 तक इनकी तादाद 33630 लाख तक पहुंच चुकी है।

  4. मार्च 2018 के आखिर तक 18,037 अरब रुपए सर्कुलेशन में थे। इस रकम में 2000 के नोट की तादाद 37.3% थी। जबकि, मार्च 2017 अंत में इन नोटों की तादाद कुल सर्कुलेशन का 50.2% थी।

  5. नवंबर 2016 में नोटबंदी के फैसले के बाद 5 सौ और 1 हजार के नोट बंद करने का फैसला लिया गया था। उस समय इन नोटों की तादाद लगभग 86% थी। उसके बाद ही मोदी सरकार ने दो हजार के नोट बाजार में उतारने का फैसला लिया था।



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      RBI scales down printing of Rs 2000 note to minimum: Govt source

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1 साल वाली पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट पर मिलेगा ज्यादा ब्याज, सरकार ने जारी की नई दरें


यूटिलिटी डेस्क. सरकार ने जनवरी-मार्च तिमाही के लिए स्मॉल सेविंग स्कीम्स पर दिए जाने वाली ब्याज दरों की घोषणा कर दी है। पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट स्कीमों पर मिलने वाली ब्याज दरों में बदलाव किया है। हालांकि, पीपीएफ (सार्वजनिक भविष्य निधि), सुकन्या समृद्धि स्कीम्स और सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम्सपर मिलने वाली ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। वित्त मंत्रालय ने 31 दिसंबर को नोटिफिकेशन जारी करके इसकी जानकारी दी है।

  1. सरकार ने1 साल वाली पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट स्कीमपर मिलने वाली ब्याज दरों में 0.10% की बढ़ोतरी की है। इस स्कीम पर अब7 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगी, जोपिछली तिमाही में 6.9 फीसदी थी। तीनसाल वाली डिपॉजिट स्कीम पर मिलने वालीब्याज की दरों में कमी की गई है। अब तीन साल वाली डिपॉजिट स्कीम पर भी 7 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगी। पिछली तिमाही में यह दर 7.2 फीसदी सालाना थी।

  2. 2 साल वाली और 5 साल वाली डिपॉजिट स्कीम में मिलने वालीब्याज की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 2 साल वाली स्कीम पर 7 फीसदी जबकि, 5 साल वाली स्कीम पर 7.8 फीसदी की दर से ब्याज मिलतीरहेगी। इसके अलावा 5 साल वाली पोस्ट ऑफिस रेकरिंग डिपॉजिट स्कीम पर मिलने वाली ब्याज की दरों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस पर पहले की तरह 7.3 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगी।

  3. पब्लिक प्रोविडेंट फंड(पीपीएफ) और 5 साल वालेनेशनल सेविंग सार्टिफिकेट (एनएससी) में पहले की ही तरहवार्षिक आधार पर 8 फीसदी की दर से ब्याज मिलती रहेगी। जबकि, 5 साल वाली मंथली इनकम अकाउंट पर मिलने वाली ब्याज की दरों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस पर पहले की तरह 7.7 फीसदी ब्याज दी जाएगी।

  4. जनवरी-मार्च तिमाही में सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम्स पर 8.7 फीसदी और सुकन्या समृद्धि अकाउंट पर पिछली तिमाही की तरह 8.5 फीसदी की दर से ब्याज दी जाएगी। इसके अलावा किसान विकास पत्र पर भी पिछली तिमाही की तरह 7.7 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगी। इसकी परिपक्वता अवधि 112 महीने होगी।

    PPF SMALL SAVING SCHEMES
  5. इससे पहले अक्टूबर-जनवरी तिमाही में सरकार ने विभिन्न स्मॉल सेविंग स्कीम्स की दरों में बदलाव किया था।तब पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ), किसान विकास पत्र (केवीपी), नेशनल सेविंग सार्टिफिकेट (एनएससी), मासिक आय योजना, सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम्स और सुकन्या समृद्धि जैसी स्मॉल सेविंग स्कीम्स पर मिलने वाली ब्याज दरों में 40 बेसिस प्वाइंट (0.40%) तक की बढ़ोतरी की थी।



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      government has hiked 1 year post office time deposit interest rate small saving schemes

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चुनाव वाले साल बाजार में अस्थिरता रहती है, इसमें एसआईपी बेहतर विकल्प: निमेश शाह


मुंबई. आम चुनाव के कारण 2019 शेयर बाजार के लिए अस्थिर रहने वाला है। हमारा मानना है कि भारतीय इक्विटी मार्केट की वैलुएशन अभी ठीक है। यह ना तो सस्ता है और ना ही महंगा। बहुत से स्टॉक आकर्षक वैलुएशन पर उपलब्ध हैं। इसलिए फोकस व्यक्तिगत स्टॉक पर होना चाहिए। हाल के दिनों में कई वजहों से बाजार का मूड बेहतर बना हुआ है। कच्चा तेल सस्ता होने से चालू खाता और राजकोषीय, दोनों घाटा बढ़ने की आशंका कम हुई है। रुपया 74 से मजबूत होकर 70 के आस-पास आ गया है। बॉन्ड यील्ड में सुधार से इकोनॉमी पर ब्याज दरों का दबाव कम हुआ है। सबसे बड़ी बात है कि आर्थिक आंकड़े फिर से फाइनेंशियल स्थिरता के संकेत दे रहे हैं।

शॉर्ट टर्म से मीडियम टर्म तक देखें तो इक्विटी मार्केट में उतार-चढ़ाव रह सकता है। ऐतिहासिक रूप से चुनाव वाले साल बाजार की चाल ऐसी ही रही है। पिछले चुनावों को देखें तो 2004, 2009 और 2014 में बाजार ने निवेशकों को कई बार पैसे लगाने का मौका दिया। ऐसे माहौल में शेयरों में निवेश का सबसे अच्छा तरीका सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) होता है। 2019 भी एसआईपी के जरिए इक्विटी में निवेश का अच्छा मौका हो सकता है। आमतौर पर ऐसे समय के बाद बाजार में तेजी का माहौल बनता है। इसलिए जरूरी है कि निवेशक धीरज के साथ बाजार में बने रहें। हाल के वर्षों पर गौर करें तो ऐसा माहौल 2010 से 2013 के दौरान देखने को मिला था। उस समय बाजार की चाल सीमित दायरे में थी। जो निवेशक उस समय बने रहे उन्हें 2014-17 के दौरान तेजी के माहौल में अच्छा रिटर्न मिला।

फेडरल रिजर्व के फैसले पर नजर रखें: इन सबके बीच निवेशकों को कुछ बातों का ध्यान रखने की भी जरूरत है। सबसे पहले अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व पर नजर रखनी चाहिए कि ब्याज दरों को लेकर वह क्या रुख अपनाता है। हमारा मानना है कि अमेरिका में जब ब्याज दरें बढ़ने का चरण पूरा होगा, उसके बाद भारतीय इक्विटी बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिलेगी। लेकिन उसके साथ बाजार में निवेश का समय भी पूरा हो चुका होगा। यानी उससे पहले ही निवेश के मौके मिलेंगे।

नया एसआईपी भी शुरू कर सकते हैं: हमारा मानना है कि मौजूदा माहौल निवेशकों के लिए अच्छा है। उन्हें स्मॉल कैप, मिड कैप और वैल्यू फंड में एसआईपी के जरिए निवेश जारी रखना चाहिए। जिन निवेशकों के पास एसआईपी नहीं है वे भी इसकी शुरुआत कर सकते हैं।

एकमुश्त निवेश के लिए बैलेंस्ड फंड बेहतर: जो निवेशक एकमुश्त निवेश करना चाहते हैं उनके लिए बैलेंस्ड एडवांटेज फंड और इक्विटी सेविंग फंड अच्छा माध्यम हो सकता है। ऐसे फंड के मैनेजर स्कीम का पैसा इक्विटी और डेट दोनों में लगाते हैं। इसलिए बाजार में अगर गिरावट हो या अस्थिरता का माहौल बने तो निवेश का एक हिस्सा सुरक्षित रहता है।

कम अवधि वाले डेट फंड भी अच्छे: जो निवेशक डेट फंड में पैसे लगाना चाहते हैं उनके लिए हमारा सुझाव है कि डायनेमिक ड्यूरेशन स्कीम चुनें। अस्थिरता में इसमें फायदा मिल सकता है। कम अवधि के फंड और एक्रुअल स्कीम को लेकर भी हमारी राय सकारात्मक है। कम अवधि के फंड आमतौर पर 1 से 3 साल की मैच्योरिटी अवधि वाले इंस्ट्रूमेंट में निवेश करते हैं।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।)



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निमेश शाह, एमडी एवं सीईओ, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल।

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देना, विजया बैंक के बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय को मंजूरी, कर्मचारियों पर असर नहीं पड़ेगा


नई दिल्ली. देना बैंक, विजया बैंक के बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी)में विलय को कैबिनेट ने बुधवार को मंजूरी दे दी। यह मर्जर 1 अप्रैल से प्रभावी होगा। यह एसबीआई के बाद देश का दूसरा बड़ा सरकारी बैंक बन जाएगा। देश के बैंकिंग इतिहास में पहली बार तीन बैंकों का विलय होगा। सरकार ने पिछले साल सितंबर में इसकी घोषणा की थी।

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इस विलय का कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कर्मचारियों की छंटनी भी नहीं की जाएगी।

  1. बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से तय शेयर स्वैप रेश्यो के तहत विजया बैंक के शेयरधारकों को प्रति 1000 शेयरों के बदले बैंक ऑफ बदौड़ा के 402 शेयर जारी किए जाएंगे। देना बैंक के शेयरहोल्डर्स को 1000 शेयरों के बदले बीओबी के 110 शेयर मिलेंगे।

    बैंक शेयर प्राइस (बुधवार को एनएसई पर क्लोजिंग)
    बैंक ऑफ बड़ौदा 119.55 रुपए
    देना बैंक 17.90 रुपए
    विजया बैंक 51.05 रुपए
  2. बैंकों के कारोबार पर क्या असर पड़ेगा ?
    सरकार का अनुमान है कि मर्जर के बाद बनने वाले बैंक का एनपीए 5.71% होगा। यह सरकारी बैंकों के औसत 12.13% एनपीए की तुलना में काफी बेहतर होगा। मर्जर प्रक्रिया के मुताबिक देना और विजया बैंक का पूरा कारोबार, असेट्स, अधिकार, दावे, टाइटल, लाइसेंस, कर्ज, देनदारियां और दायित्व बैंक ऑफ बड़ौदा को ट्रांसफर हो जाएंगे। मर्जर के बाद देना बैंक को आरबीआई केप्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) फ्रेमवर्क से बाहर आने में भी मदद मिलेगी।

  3. ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा ?
    सरकार को उम्मीद है कि तीन बैंकों के मर्जर से उनके कस्टमर को अच्छी सर्विस मिल पाएगी। विलय होने के बाद उन्हें बड़ा बैंकिंग नेटवर्क उपलब्ध हो जाएगा।

  4. बैंक ऑफ बड़ौदा देना बैंक विजया बैंक
    मार्केट कैप (रुपए) 31,587.46 करोड़ 4,054.99करोड़ 6,657.68करोड़
    बैंक में डिपॉजिट राशि (रुपए) 5.81 लाख करोड़ 1.03 लाख करोड़ 1.57 लाख करोड़
    शाखाएं 5,502 1,858 2,129
    कर्मचारी 56,361 13,440 15,874

  5. मोदी सरकार ने साल बैंकों के बढ़ते एनपीए को ध्यान में रखते हुए साल 2016 में सरकारी बैंकों के एकीकरण का ऐलान किया था। इसके तहत सरकारी बैंकों की संख्या 21 से घटाकर 10-12 तक सीमित करने की योजना थी।

  6. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बैंकों का मर्जर ग्राहकों और बैंकों के हित में नहीं है। विलय के विरोध में पिछले महीने की 26 तारीख को सभी 21 सरकारी बैंकों समेत 30 बैंकों के 10 लाख कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इससे पहले 21 दिसंबर को बैंक अधिकारियों ने हड़ताल की थी।



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      वित्त मंत्री अरुण जेटली और विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद।

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फाइनेंस और एफएमसीजी सेक्टर में निवेश पर मिल सकता है अच्छा रिटर्न: मुस्तफा नदीम


मुंबई. साल 2019 में शेयर बाजार की चाल कैसी रहेगी, इसे लेकर विशेषज्ञों में एक राय नहीं है। पर ज्यादातर एक्सपर्ट मानते हैं कि पहली छमाही में बाजार अस्थिर रहेगा। आम चुनाव के बाद दूसरी छमाही में इसमें तेजी आ सकती है। ऐसे माहौल में यह जानना महत्वपूर्ण है कि किस सेक्टर में निवेश से उन्हें ज्यादा रिटर्न मिलेगा।

फाइनेंस कंपनियों और चुनिंदा निजी बैंकों में संभावनाएं: मेरे विचार से फाइनेंशियल सेक्टर शॉर्ट टर्म में अच्छा प्रदर्शन कर सकता है। दिसंबर और मार्च तिमाही में इस सेक्टर की कंपनियों के नतीजे अच्छे रहने की उम्मीद है। सेक्टर ने बाजार को आउटपरफॉर्म किया है। यह मजबूती आगे भी बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि इस सेक्टर में भी कुछ स्टॉक्स ने कमजोर प्रदर्शन किया है। उदाहरण के लिए सरकारी बैंकों को ले सकते हैं। लेकिन फाइनेंस कंपनियों और चुनिंदा प्राइवेट बैंकों में आगे बढ़ने का मोमेंटम अच्छा लग रहा है। 2019 की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च के दौरान इनके शेयरों में अच्छी बढ़त दिख सकती है।

साल 2018 की शुरुआत में ग्लोबल मार्केट में गिरावट देखने को मिली थी। उसके बाद बाजारों में तेजी आई। लेकिन साल का अंत होते-होते फिर बाजार गिरावट की चपेट में आ गए। भारत को छोड़कर सभी प्रमुख देशों के शेयर बाजार के इंडेक्स में पिछले साल गिरावट दर्ज हुई। लेकिन पिछले साल के आखिरी 2 महीनों में जिन स्टॉक्स में रिकवरी हुई, उनमें फाइनेंस सेक्टर प्रमुख है। निवेश के लिहाज से बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व और एचडीएफसी अच्छे दिख रहे हैं। हाल के दिनों में कोटक बैंक ने भी रफ्तार पकड़ी है। एसबीआई भी मजबूत नजर आ रहा है। 2019 में ये शेयर अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।

एफएमसीजी में टाटा ग्लोबल और कॉलगेट अच्छे: फाइनेंस के बाद जो दूसरा सेक्टर निवेशकों को अच्छा रिटर्न दे सकता है, वह है एफएमसीजी। आने वाले दिनों में कई ऐसी घटनाएं होगीं जो अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं। इसका असर एफएमसीजी सेक्टर पर होगा। निफ्टी का एफएमसीजी इंडेक्स शॉर्ट टर्म में 28,400 के स्तर पर बेस बनाता दिख रहा है। पिछले दिनों ऊंचे भाव पर बिकवाली देखने को मिली थी। अब ये निवेश के लिए आकर्षक भाव पर उपलब्ध हैं। एफएमसीजी सेक्टर वैसे भी लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वालों में है। आर्थिक स्थिति खराब होने पर भी लोग एफएमसीजी कंपनियों के प्रोडक्ट खरीदते ही हैं। हालांकि शॉर्ट टर्म के लिहाज से हम इसमें भी चुनिंदा शेयरों में निवेश की ही राय देंगे। इनमें टाटा ग्लोबल और कॉलगेट प्रमुख हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप में अभी करेक्शन जारी रहने की उम्मीद है। फार्मा सेक्टर भी कमजोर लग रहा है। इसलिए ट्रेडर्स और निवेशकों को आने वाले कुछ महीनों तक इनसे दूर रहना चाहिए।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।)



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मुस्तफा नदीम, सीईओ, एपिक रिसर्च।

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एचडीएफसी ने होम लोन की दरें 0.10% बढ़ाईं, नए ग्राहकों के लिए बढ़ी हुई दरें आज से लागू


यूटिलिटी डेस्क. निजी क्षेत्र के बैंक एचडीएफसी (HDFC) ने नए होम लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी है। बैंक ने रिटेल प्राइम लेंडिंग रेट (RPLR) में 0.10 फीसदी का इजाफा किया है। इससे नए ग्राहकों के लिए होम लोन महंगा हो जाएगा। इस बढ़ोतरी के बाद एचडीएफसी के विभिन्न स्लैब्स में होम लोन की दर 8.90 फीसदी से 9.15 फीसदी हो जाएगी।

एसबीआई ने भी बढ़ाई थी दरें: अब एचडीएफसी से 30 लाख रुपए तक का लोन लेने वालों को8.95 फीसदी की दर से ब्याज चुकाना होगा। जबकि 30 लाख से 75 लाख रुपए तक का लोन 9.10 फीसदी की दर से उपलब्ध होगा। बैंक, होम लोन लेने वाली महिला ग्राहकों को 0.05 फीसदी की छूट भी दे रहा है। पिछले महीने देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.05 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। इससे होम ऑटो जैसे लोन महंगे हो गए थे।

अप्रैल से लागू होगी ब्याज दर तय करने की नई व्यवस्था: अभी रेपो रेट बढ़ने पर बैंक ब्याज दर तुरंत बढ़ा देते हैं पर कम होने पर उतनी तेजी से कर्ज सस्ता नहीं करते। इस बात को ध्यान रखते हुए रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों के निर्धारण की नई व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया है। ये व्यवस्था 1 अप्रैल 2019 से लागू होगी। इसके बाद आरबीआई द्वारा रेपो रेट घटाने के तुरंत बाद बैंक ब्याज दर घटाने को बाध्य होंगे।



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hdfc hiked retail prime lending rate that will increase interest rate of home loans

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जीडीपी ग्रोथ 2 साल में 1% तक घटी; सेंसेक्स रिकॉर्ड ऊंचाई पर, सालाना बढ़त सिर्फ 4%


बिजनेस डेस्क. 2018 में सेंसेक्स 29 अगस्त को 38,989.65 की रिकॉर्ड ऊंचाई तक गया, लेकिन इसके बाद दो महीने में 15% गिर गया। साल के अंत में यह रिकॉर्ड ऊंचाई से 9% नीचे था। 29 दिसंबर 2017 को इंडेक्स 34,056.83 पर था। इस तरह पूरे साल में बढ़त सिर्फ 4% की रह गई। वहीं पेट्रोल 84 रुपए और डीजल 75.45 रुपए तक महंगा हुआ। दूसरी तरफ डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत 74.46 तक गिरी। यह रुपए का अब तक का सबसे निचला स्तर था।

  1. 2018-19 में नवंबर तक डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 6.75 लाख करोड़ रु. रहा। यह पिछले साल के अप्रैल-नवंबर की तुलना में 15.7% ज्यादा है। 1.23 लाख करोड़ रुपए रिफंड के बाद नेट कलेक्शन 14.7% बढ़ा है। यह साल के लक्ष्य का 48% है।

  2. अप्रैल से नवंबर तक जीएसटी से 7,76,317 करोड़ रुपए आए। हर महीने का औसत कलेक्शन 97,039 करोड़ रुपए है। 2017-18 में औसत कलेक्शन 89,885 करोड़ था। यानी इस साल यह 8% ज्यादा है।

  3. 2017-18 में 1,12,835 रुपए थी। यह2016-17 की तुलना में 8.6% ज्यादा है। पिछले पांच साल में बढ़ी प्रतिव्यक्ति आय कोनीचे दिए गए टेबल से समझा जा सकता है।

    साल प्रति व्यक्ति आय (रुपए में) ग्रोथ
    2013-14 80,388 12.3%
    2014-15 88,533 10.1%
    2015-16 94,130 6.3%
    2016-17 1,03,870 10.3%
    2017-18 1,12,835 8.6%
    • 2018 के दौरान भारत में अरबपतियों की संख्या 141 हो गई, जबकि,2017 में यह 136 थी। यानी एक साल में यह संख्या3.6% बढ़ी। यहां अरबपति से मतलब एक अरब डॉलर यानी कम से कम 7,000 करोड़ रुपए नेटवर्थ है।
    • देश में 1,000 करोड़ रुपएसे ज्यादा नेटवर्थ वालों की संख्या एक साल में617 से बढ़कर 831 हो गई। यानी 2017 की तुलना में 2018 में 35% की बढ़ोतरी हुई।
    • हुरुन रिच लिस्ट के मुताबिक, दुनियाभर में 2,694 अरबपति हो गए हैं। ये आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले437 ज्यादा है। यानी एक साल में 19% का इजाफा हुआ।
  4. नाम कंपनी संपत्ति (2017 में) संपत्ति (2018 में)
    मुकेश अंबानी रिलायंस 2.9 लाख करोड़ 3.06 लाख करोड़
    अजीम प्रेमजी विप्रो 1.26 लाख करोड़ 1.20 लाख करोड़
    लक्ष्मी मित्तल आर्सेलर 1.37 लाख करोड़ 95.5 लाख करोड़

    • भारत में 1000 करोड़ रुपए से अधिक नेटवर्थ वालों की कुल संपत्ति 49 लाख करोड़ रुपए है। यह देश की जीडीपी का करीब 25% है।
    • दुनिया में 1 बिलियन डॉलर से अधिक संपत्ति वालों की नेटवर्थ 31% बढ़कर 735 लाख करोड़ रुपएहो गई। यह दुनिया की जीडीपी का 13.2% है।


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      gdp growth rate slashed by 1% in last two years but sensex at record level

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प्रभु ने कहा- एयरलाइन की बेहतरी के लिए दुनियाभर में होगी पेशेवरों की तलाश


नई दिल्ली. भारत सरकार ने एयर इंडिया को बेहतर करने के लिए बड़े पदों पर पेशेवरों को भर्ती करने की योजना बनाई है। यह भर्ती वैश्विक स्तर पर की जाएगी। नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने रविवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार प्रस्तावितयोजना के जरिएएयर इंडिया प्रबंधनको पूरी तरहव्यवसायिक कामों में लगानेकी तैयारी कर रही है।

  1. इस साल मई में एयर इंडिया की प्रस्तावित हिस्सेदारी की बिक्री में असफल रहने के बाद भारत सरकार अन्य योजनाओं पर कार्य कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार की योजना है कि एक जांच कमेठी गठित कर वैश्विक स्तर के बेहतर एविएशन प्रोफेशनल्स को एयर इंडिया के लिए भर्ती किया जाए।

  2. प्रभु ने बताया, एयर इंडिया के प्रबंधन को व्यवसायिक कामों में लगाने के लिएहम पहले ही आदेशदे चुके हैं। दुनियाभर मेंप्रोफेशनल्स की खोज के बादएयर इंडिया के बड़े पदों को भर दिया जाएगा। सरकार इस प्रस्ताव पर तेजी से कार्य कर रही है।

  3. प्रभु ने कहा, 'एयर इंडिया पर जो कर्ज है, वहीउसे पुनर्जीवित करने के बीच में बड़ी समस्या बना हुआ है। नागरिक उड्यन मंत्रालय इस कर्ज से निपटने के लिए वित्त मंत्रालय से बात कर रहा है।' फिलहाल एयर इंडिया पर 55,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है।

  4. नागरिक विमानन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने लोकसभा में 27 दिसंबर को बताया था कि वित्तीय संकट से जूझ रही एयर इंडिया को उबारने के लिए सरकार ने रिवाइवल प्लान तैयार किया है। यह प्लान इसे प्रतिस्पर्धी और मुनाफे वाली एयरलाइन में तब्दील करने पर केंद्रित है। इसके तहत एयरलाइन को वित्तीय पैकेज दिया जाएगा। कोर बिजनेस बढ़ाने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपनाई जाएंगी।



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      Govt Plans to Rope in Professionals for Top Positions at Air India say Minister Suresh Prabhu

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सोना खरीदने के लिए मिलेगा लोन, बचत खाते जैसे होंगेे गोल्ड अकाउंट


मुंबई (विनोद यादव).फिजिकल गोल्ड के लेन-देन को कम करने के लिए सरकार नई गोल्ड पॉलिसी ला रही है। नीति आयोग ने पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार कर सरकार को भेज दिया है। इसे नए सालमें लागू किया जा सकता है। पॉलिसी में सरकार सोनेको संपत्ति घोषित कर सकती है।

इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजे) के सचिव सुरेंद्र मेहता के मुताबिक सोना संपत्ति बन जाएगा तो इसे खरीदने के लिए बैंक से लोन भी मिल सकता है। अभी किसी परिवार (पति, पत्नी और अविवाहित लड़की) के पास 850 ग्राम से ज्यादा सोना होने की स्थिति में ही उसे इसे अपनी आय में बताना जरूरी होता है, यह संपत्ति की श्रेणी में नहीं आता है।

  1. इंडियन मर्चेंट चेंबर के आर्थिक निदेशक जी चंद्रशेखर कहते हैं कि प्राइज फ्लक्चुएशन का फायदा मिलने वाला है। गोल्ड सेविंग एकाउंट, बैंक एकाउंट जैसा होगा। आम आदमी के पास मौजूद सोने (सिक्के और बिस्किट, ज्वैलरी नहीं) को वह बैंक में रख सकेगा और उसकी मौजूदा कीमत पर ब्याज ले पाएगा। हालांकि ब्याज दर सामान्य सेविंग अकाउंट से कम रहेगी। इसमें आपको एक पासबुक दी जाएगी। आपके गोल्ड सेविंग अकाउंट में कितना सोना है, वह बैंक आपकी पासबुक में एंट्री करके देगा।

    अभी यह स्थिति है :सिर्फ मंदिर-ट्रस्ट के एक मात्रा विशेष से अधिक सोने को ही बैंक में जमा किया जा सकता है। आम आदमी शामिल नहीं है। गोल्ड बॉण्ड स्कीम में बॉण्ड भी खरीदे जा सकते हैं, लेकिन रिटर्न 2.5 फीसदी ही है।

  2. इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजे) के सचिव सुरेंद्र मेहता बताते हैं कि पॉलिसी में स्पॉट गोल्ड एक्सचेंज की बात है। इससे अलग-अलग शहरों के अलग-अलग भाव का चलन बंद हो जाएगा और पूरे देश में एक ही भाव रहेगा। साथ ही निवेश करने वाले लोगों के द्वारा एक्सचेंज में किए गए सोने के सौदे की डिलीवरी उसी दिन होगी। आईबीजे ने सुझाव दिया है कि एक्सचेंज के अंदर होने वाले सौदे पर कम टैक्स लिया जाए। बाहर के सौदे पर ज्यादा टैक्स लगेगा।


    अभी यह स्थिति है:रिद्धि-सिद्धि बुलियन के सीईओ पृथ्वीराज कोठारी बताते हैं कि एमसीएक्स में फ्यूचर के सौदे किए जाते हैं, उसमें सोने की डिलीवरी में 2 माह तक का वक्त लग जाता है। इसी तरह सोना बेचने पर भुगतान भी फौरन नहीं मिलता है।



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      सिम्बॉलिक इमेज।

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2017-18 में 6 हजार से ज्यादा बैंक अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की गई: जेटली


नई दिल्ली. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा कि बैड लोन के मामले में 2017-18 के दौरान6 हजार से ज्यादा अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की गई। संसद में दिए गए लिखित जवाब में जेटली ने बताया- खामियों के चलते दिए गए खराब लोन के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर निलंबन, अनिवार्य रिटायरमेंट और डिमोशन जैसी कार्रवाई की गई।

  1. वित्त मंत्री ने कहा, "राष्ट्रीयकृत बैंकों से मिली जानकारियों के मुताबिक 2017-18 में 6,049 अधिकारियों के िखलाफ कार्रवाई की गई। खामियों की गंभीरता के आधार पर उनके खिलाफ कदम उठाए गए।"

  2. पंजाब नेशनल बैंक समेत 19 राष्ट्रीयकृत बैंकों को इस वित्त वर्ष के शुरुआती 6 महीनों में करीब 21,388 करोड़ का घाटा हुआ। घाटे की यह राशि इसी समयावधि में पिछले साल 6,861 करोड़ थी।

  3. वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल ने बताया कि खराब लोन की पहचान की पारदर्शी प्रक्रिया के चलते सभी कमर्शियल बैंकों के एनपीए मार्च 2018 में 9.62 लाख करोड़ हो गया। इसके बाद यह राशि घटकर 9.43 लाख करोड़ हो गई है।यह मार्च 2016 में 5.66 लाख करोड़ रुपए था।

  4. पब्लिक सेक्टर बैंकों में इस साल की पहली छमाही में रिकॉर्ड 60,713 करोड़ की रिकवरी की गई है। यह पिछले साल इसी समयावधि में की गई रिकवरी की दोगुना है।

  5. शुक्ल ने सदन को बताया- इस वित्त वर्ष में आयकर विभाग ने 582 जांच और छापों के दौरान 992.52 करोड़ की संपत्तियां सीज कीं। 2016-17 में यह राशि 14,69.62 करोड़ थी।

  6. उन्होंने बताया कि 2018-19 के दौरान अप्रैल से अक्टूबर के बीच जीएसटी चोरी के 6,585 मामलों में 38,896 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी की गई।



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      Over 6,000 officers of PSBs held responsible for bad loans in FY18: Jaitley

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नए फीचर्स के साथ जल्द जारी होगा 20 रुपए का नया नोट


नई दिल्ली. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) जल्द ही 20 रुपए का नया नोट जारी करेगा। केंद्रीय बैंक के मुताबिक, नए फीचर्स के साथ 20 रुपए का ये नोट जल्द बाजार में आएगा।

  1. मोदी सरकार ने 8 नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपए के नोट बंद कर दिए थे। तब से लेकर अब तक आरबीआईमहात्मा गांधी सीरीज के कई नए नोट जारी कर चुकी है। ये सभी नोट आकार और रंग में पुराने नोटों से बिल्कुलअलग हैं।

  2. केंद्रीय बैंक अब तक 10, 50, 100, 500 के अलावा 200 और 2000 रुपए के नए नोट जारी कर चुका है।

  3. आरबीआई के आंकड़ोंके मुताबिक, मार्च 2018 तक देश में 20 रुपए के 10 अरब नोट प्रचलन मेंहैं। मार्च 2018 तक कुल करंसी का 9.8 फीसदी मूल्य के20 रुपए के नोट चलन में हैं।



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      Reserve Bank of India (RBI) will soon introduce new Rs 20 currency note

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पेट्रोल इस साल के सबसे निचले स्तर पर, दिल्ली में रेट 69.79 रुपए प्रति लीटर


नई दिल्ली. पेट्रोल के रेट मंगलवार को इस साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए। पेट्रोल मेंआज 7 पैसे की कटौती की गई,जिसके बाद दिल्ली में रेट 69.79 रुपए प्रति लीटर और मुंबई में 75.41 रुपए प्रति लीटर हो गए। डीजल के रेट में आज कोई बदलाव नहीं किया गया। सोमवार को दिल्ली में डीजल 63.83रुपए प्रति लीटर था। इसके साथ यहमार्च के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।

पेट्रोल और डीजल सस्ता होने की वजह क्रूड के रेट में आई कमी है।वैश्विक बाजार में सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में 6% की गिरावट दर्ज की गई।जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में क्रूड और सस्ता होगा।

  1. मेट्रो शहरों में पेट्रोल

    शहर सोमवार को रेट (रु/लीटर)

    मंगलवार का रेट

    (रु/लीटर)

    कमी
    दिल्ली 69.86 69.79 7 पैसे
    मुंबई 75.48 75.41 7 पैसे
    कोलकाता 71.96 71.89 7 पैसे
    चेन्नई 72.48 72.41 7 पैसे
  2. मेट्रो शहरों में डीजल

    शहर सोमवार को रेट (रु/लीटर) मंगलवार को रेट (रु/लीटर) कमी
    दिल्ली 63.83 63.83 कोई बदलाव नहीं
    मुंबई 66.79 66.79 कोई बदलाव नहीं
    कोलकाता 65.59 65.59 कोई बदलाव नहीं
    चेन्नई 67.38 67.38 कोई बदलाव नहीं
  3. डीजल: मार्च में निचला स्तर

    शहर 18 मार्च को रेट (रु/लीटर) 28 मार्च को रेट (रु/लीटर)
    दिल्ली 62.71 63.77
    मुंबई 66.78 67.91
    कोलकाता 65.40 66.46
    चेन्नई 66.12 67.25



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      Petrol Prices Hit 2018 Lows Diesel Lowest Since March on 25 december 2018

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एक साल के एसआईपी में रिटर्न निगेटिव, पर लंबे समय में 10 फीसदी से ज्यादा


बिजनेस डेस्क. शेयर बाजार में जब भी तेजी का माहौल बनता है, नए खुदरा निवेशक बाजार में आते हैं। हाल के दिनों में बाजार में जो तेजी आई, उसमें भी ऐसा ही हुआ। कुछ आंकड़ों पर गौर करते हैं। जून 2014 में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 10 लाख करोड़ रुपए था, अब यह ढाई गुना बढ़कर 25 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इक्विटी एयूएम इस दौरान 4 गुना बढ़कर 10 लाख करोड़ रुपए का हो गया। एसआईपी की संख्या भी बढ़ी है।

मार्च 2015 में 73 लाख एसआईपी अकाउंट थे जो अब ढाई करोड़ हो गए हैं। ये आंकड़े निश्चित ही आकर्षक हैं। चुनौती इस बात की है कि उतार-चढ़ाव के माहौल में नए निवेशक बाजार में कैसे बने रहें। मल्टीकैप फंड में देखें तो एक साल के एसआईपी पर निगेटिव रिटर्न 5.6% है। अक्सर निवेशक एश्योर्ड यानी निश्चित रिटर्न की बात सोचते हैं। लेकिन इक्विटी म्यूचुअल फंड में वे ज्यादा रिटर्न के लिए निवेश करते हैं। इसलिए जब उन्हें लगता है कि उनका रिटर्न कम होता जा रहा है तो वे बाजार से निकलने लगते हैं।

2008 में दुनियाभर के बाजारों में बड़ी गिरावट आई थी
इक्विटी फंड में लंबे समय तक निवेश नहीं करने की वजह से ही ज्यादातर निवेशक अपने निवेश को बड़ी रकम में नहीं बदल पाते हैं। 2008 में दुनियाभर के बाजारों में बड़ी गिरावट आई थी। उस समय सेंसेक्स 21,000 से थोड़े दिनों में ही 8,000 के स्तर पर उतर आया था। इसे प्राइस करेक्शन कहते हैं। लेकिन इसके बाद 5 साल में सेंसेक्स ने फिर 20,000 का स्तर हासिल कर लिया। यह टाइम करेक्शन है। ऐसे मौकों पर ही निवेशक के व्यवहार का पता चलता है। निवेशकों के लिए चुनौती यही है कि वे प्राइस करेक्शन और टाइम करेक्शन के अलग-अलग मौकों पर बाजार में बने रहें, तभी उनकी वेल्थ बन पाएगी।

ऐसा नहीं कि शॉर्ट टर्म में निगेटिव रिटर्न पहली बार देखने को मिला हो। फरवरी 2010 से 2011 के दौरान एक साल की अवधि में भी एसआईपी पर रिटर्न निगेटिव रहा था। लेकिन उस समय भी जो लोग बाजार में बने रहे उन्हें अच्छा रिटर्न मिला। फ्रेंकलिन टेंपलटन के दो फंड 1 दिसंबर 2018 को 25 साल के हुए। एक ने 106 गुना तो दूसरे ने 90 गुना रिटर्न दिया। सालाना औसत ग्रोथ 20% के आसपास रही। इससे भी पता चलता है कि इक्विटी मार्केट में धैर्य रखने से रिटर्न कितना अधिक मिल सकता है।

एसआईपी की अवधि रिटर्न
फरवरी 2010-फरवरी 2011 (-)10.02%
फरवरी 2010-फरवरी 2013 4.14%
फरवरी 2010-फरवरी 2015 22.90%
फरवरी 2010-फरवरी 2018 15.82%

लेखक: पेशोतन दस्तूर, नेशनल सेल्स डायरेक्टर, फ्रैंकलिन टेंपलटन इन्वेस्टमेंट्स।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।)



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Return Negative in one year's SIP

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यात्री वाहनों में मारुति स्विफ्ट बेस्ट सेलिंग मॉडल बनी


नई दिल्ली. मारुति सुजुकी की हैचबैक कार स्विफ्ट नवंबर में बेस्ट-सेलिंग यात्री वाहन रही है। इसने यह हैसियत कंपनी की एंट्री लेवल की कार ऑल्टो को पीछे छोड़कर हासिल की है। पिछले साल नवंबर में ऑल्टो पहले स्थान पर थी। इस बार यह चौथे नंबर पर है। भारतीय ऑटो उद्योग की शीर्ष संस्था सियाम के मुताबिक पिछले महीने 22,191 स्विफ्ट बिकी हैं। नवंबर 2017 में यह 13,337 बिकने के साथ छठे से स्थान पर थी।

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति की कॉम्पेक्ट सिडान डिजायर दूसरे स्थान पर रही है। सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों में मारुति की 6 और हुंडई की 4 गाड़ियां हैं। मारुति की कॉम्पेक्ट सिडान डिजायर दूसरे स्थान पर रही है। नवंबर में 21,037 डिजायर बिकी हैं। लेकिन यह आंकड़ा पिछले साल नवंबर में इसकी बिक्री के आंकड़े 22,492 से कम है।

हैचबैक कार बलेनो तीसरे स्थान पर

मारुति की ही प्रीमियम हैचबैक कार बलेनो तीसरे स्थान पर रही है। नवंबर में यह 18,649 बिकी है। पिछले साल नवंबर में इसका आंकड़ा 17,769 रहा था। हुंडई ने सैंट्रो को इस साल अक्टूबर में रिलॉन्च किया था। नवंबर में 9,009 गाड़ियां बिकने के साथ सैंट्रो नई टॉप-10 बेस्ट सेलिंग पैसेंजर व्हीकल की सूची में अपनी जगह बनाने में कामयाब रही। कंपनी ने सैंट्रो को दिसंबर 2014 में बनाना बंद कर दिया था।



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Maruti Swift Best Selling Model in Passenger Vehicles

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देशभर में बिजली के सभी मीटर तीन साल में स्मार्ट प्रीपेड में बदलेगी सरकार


नई दिल्ली. सरकार तीन साल में देशभर में बिजली के सभी मीटरों को स्मार्ट प्रीपेड में बदलेगी। बिजली मंत्रालय के इस फैसले का उद्देश्य बिजली के ट्रांसमिशन व डिस्ट्रीब्यूशन में होने वाले नुकसान में कमी लाना है। साथ ही वितरण कंपनियों की स्थिति बेहतर होगी। ऊर्जा संरक्षण को प्रोत्साहन मिलेगा। कागजी बिल की व्यवस्था खत्म होने के साथ बिल भुगतान में आसानी होगी।


बिजली मंत्रालय की ओर से सोमवार को एक बयान में कहा गया कि स्मार्ट मीटर गरीबों के हित में है। उन्हें पूरे माह का बिल एक बार में चुकाने की जरूरत नहीं होगी। वे जरूरत के मुताबिक बिल चुका सकेंगे।



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Government will convert all electricity meters into smart prepaid in three years

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इन्फोसिस के शेयर 2% तक चढ़े, 11 हजार करोड़ रु. के शेयर बायबैक कर सकती है कंपनी


मुंबई. आईटी कंपनी इन्फोसिस के शेयर में सोमवार को 2% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इन्फोसिस के एक शेयर की कीमत 659 रु. तक पहुंच गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शेयरों में बढ़ोतरी के बाद आईटी कंपनी 11200 करोड़ रुपए के शेयर बायबैक कर सकती है। इन्फोसिस की मार्केट कैप अभी 2.84 लाख करोड़ रुपए है।

  1. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन्फोसिस शेयरों के मौजूदा रेट से 20-25 फीसदी के प्रीमियम पर शेयर बायबैक कर सकती है। 11 जनवरी को होने वाली बोर्ड की बैठक में इसका ऐलान किया जा सकता है। हालांकि, इन्फोसिस ने इस बारे में पूछे गए सवाल का कोई जवाब नहीं दिया है।

  2. अगर इन्फोसिस शेयर बायबैक करती है तो यह कंपनी का दूसरा बायबैक होगा। इससे पहले इन्फोसिस ने 2017 में 1.13 करोड़ शेयर बायबैक करे थे।

  3. 30 नवंबर से 14 दिसंबर 2017 तक चली इस बायबैक प्रक्रिया में एक शेयर की 1150 रुपए कीमत अदा की गई थी। यानी एक शेयर बेचने वाले को 1 शेयर का दाम अतिरिक्त दिया गया था।

  4. इस बायबैक प्रोग्राम में एलआईसी, सिंगापुर सरकार, इन्फोसिस के को-फाउंडर एस गोपालकृष्णन की पत्नी सुधा गोपालकृष्णन, को-फाउंडर एनआर नारायणमूर्ति के बेटे रोहन मूर्ति शामिल हुए थे।

  5. एक्सपर्ट का कहना है कि शेयर बायबैक से हर शेयर पर कमाई बेहतर होती है। इसके अलावा शेयर होल्डर को अतिरिक्त कैश वापस मिलता है। इसके अलावा यह प्रक्रिया ये मार्केट की धीमी रफ्तार के दौरान भी शेयर प्राइस को गिरने नहीं देती।

  6. "कंपनी के लिए ये सकारात्मक कदम होता है। लॉन्ग टाइम इन्वेस्टर्स को इससे फायदा होता है। यह निवेशकों के लिए टैक्स बचाने के उपकरण की तरह होता है। इसके अलावा यह शेयर होल्डर के लिए अच्छा मुनाफा कमाने का मौका भी होता है।"



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      Market: Infosys share climbs 2%, reports says- company may consider Rs 112 billion share buyback

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सरकार के निवेश से 5 बैंक इसी वित्त वर्ष में पीसीए से बाहर आ सकते हैं


बिजनेस डेस्क. सरकार मार्च 2019 तक सार्वजनिक बैंकों में 83,000 करोड़ रुपए और निवेश करेगी। मौजूदा वित्त वर्ष में इन बैंकों में सरकार की तरफ से दी गई पूंजी 1.06 लाख करोड़ रुपए हो जाएगी। संसद से इन बैंकों के लिए 41,000 करोड़ रुपए की मंजूरी मांगी गई है। बजट में इनमें 65,000 करोड़ रुपए निवेश का प्रावधान किया गया था। इस पूंजी से बैंकों को कैपिटल टू रिस्क वेटेड एसेट रेशियो (सीआरएआर) 9% बनाए रखने में मदद मिलेगी।

कुल एसेट की तुलना में एनपीए भी 6% के नीचे आ जाएगा। इसके बाद 4-5 बैंक त्वरित सुधार कार्रवाई यानी पीसीए के दायरे से बाहर आ सकते हैं। रिजर्व बैंक ने 21 सरकारी बैंकों में से 11 को पीसीए में रखा है। पिछले वित्त वर्ष सरकार ने इन बैंकों में 88,000 करोड़ डाले थे। इस साल अब तक वह 22,900 करोड़ दे चुकी है।

जनवरी में घरों के जीएसटी रेट पर विचार हो सकता है
जीएसटी काउंसिल ने आम आदमी के इस्तेमाल की 17 वस्तुओं और 6 सेवाओं पर जीएसटी दरें घटाने का फैसला किया है। इनमें 32 इंच तक के टीवी, सिनेमा टिकट, टायर, वाहनों के कुछ पुर्जे जैसी वस्तुएं शामिल हैं। काउंसिल ने 7 वस्तुओं को 28% स्लैब से बाहर किया है। इसमें अब 28 आइटम बचे हैं। रेट घटने से सरकार का सालाना राजस्व 5,500 करोड़ रुपए कम होगा। जनवरी में काउंसिल की बैठक में फ्लैट और सीमेंट जैसी वस्तुओं के टैक्स रेट पर विचार होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों कहा था कि 28% टैक्स दायरे में सिर्फ 1% वस्तुएं रह जाएंगी।

80,000 करोड़ का विनिवेश लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद
सरकार को भरोसा है कि 2018-19 में 80,000 करोड़ रुपए विनिवेश का लक्ष्य हासिल कर लेगी। अभी तक वह 34,000 करोड़ जुटा चुकी है। पीएफसी द्वारा आरईसी में हिस्सेदारी खरीदने का प्रस्ताव है। इससे सरकार को 16,000 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है। भारत 22 ईटीएफ के दूसरे चरण से भी 10,000 करोड़ मिलने का अनुमान है। पवन हंस, सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स, एयर इंडिया की ग्राउंड हैंडलिंग सब्सिडियरी और स्कूटर्स इंडिया को सरकार पूरी तरह बेचने की कोशिश में है।

भारत 22 और सीपीएसई के पिछले फॉलो ऑन ऑफर से सरकार पहले ही क्रमशः 8,300 करोड़ और 17,000 करोड़ जुटा चुकी है। मझगांव डॉक, आरवीएनएल और आईआरएफसी के आईपीओ लाए जा सकते हैं। सरकार इनमें 10% हिस्सेदारी बेचेगी। जीआईसी और न्यू इंडिया एश्योरेंस के शेयर भी ऑफर फॉर सेल के तहत बेचे जाएंगे।

सेटलमेंट के लिए डॉट से बात कर रही हैं आरकॉम और जियो
दूरसंचार विभाग ने रिलायंस कम्युनिकेशंस द्वारा रिलायंस जियो को स्पेक्ट्रम बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी देने से मना कर दिया है। जियो ने कहा है कि डील पूरी होने से पहले स्पेक्ट्रम की जो भी देनदारी होगी वह आरकॉम चुकाएगी। अनिल अंबानी की आरकॉम पर 46,000 करोड़ रुपए का कर्ज है। यह उपकरण बनाने वाली कंपनी एरिक्सन का 500 करोड़ का कर्ज लौटाने में भी डिफॉल्ट कर चुकी है। आरकॉम 122.4 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम जियो को बेचकर कर्ज कम करना चाहती है। इसे दूरसंचार विभाग को 2,947 करोड़ रुपए चुकाने हैं। चर्चा है कि दोनों कंपनियां सेटलमेंट के लिए डॉट से बात कर रही हैं।

एयर इंडिया में 2,345 करोड़ का निवेश करेगी सरकार
सरकार ने एयर इंडिया में 2,345 करोड़ों रुपए इक्विटी निवेश के लिए संसद से मंजूरी मांगी है। यह एयर एसेट होल्डिंग में भी 1,300 करोड़ रुपए निवेश करेगी। एयर इंडिया का 29,000 करोड़ रुपए का कर्जट्रांसफर करने के लिए यह अलग कंपनी (एसपीवी) बनाई गई है। वर्षों से घाटे में चल रही इस एयरलाइन में हिस्सेदारी बेचने की सरकार की कोशिश अब तक नाकाम रही है।



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5 banks with government investment can come out of PCA in this financial year

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खाद्य मंत्रालय चीनी मिलों को 7,400 करोड़ का सस्ता कर्ज और देगी


नई दिल्ली. सरकार चीनी मिलों को कम ब्याज पर 7,400 करोड़ रुपए का अतिरिक्त कर्ज देने की तैयारी कर रही है। यह कर्ज हाल में शुरू की गई योजना के तहत एथनॉल उत्पादन क्षमता स्थापित करने के लिए दिया जाएगा। खाद्य मंत्रालय जून में शुरू की गई इस योजना के तहत यह सुनिश्चित करने पर विचार कर रहा है कि नॉनमोलासेस डिस्टलरीज भी नई एथनॉल निर्माण क्षमता लगाने या उसके विस्तार के लिए सस्ता कर्ज ले पाएं।

योजना के तहत सरकार ने मिलों को 4,400 करोड़ का कर्ज देने और 5 साल के लिए 1,332 करोड़ की ब्याज सहायता देने की घोषणा की है। इसमें एक साल तक ब्याज न चुकाने की छूट की अवधि भी शामिल है। अतिरिक्त सस्ता कर्ज देने पर मंजूरी लेने के लिए नियमों में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। फिलहाल योजना के तहत मोलासेस-आधारित डिस्टलरीज को ही इसकी अनुमति है।

सस्ते कर्ज के लिए 282 आवेदन आए, 114 को मंजूरी
खाद्य मंत्रालय को 13,400 करोड़ रुपए के सस्ते कर्ज के लिए 282 आवेदन मिले हैं। इसमें से 6,000 करोड़ रुपए की कर्ज राशि के 114 आवेदनों को मंजूरी दे दी गई है। शेष 168 आवेदनों के लिए मंत्रालय और 7,400 करोड़ रुपए का सस्ता कर्ज देने के लिए कैबिनेट की मंजूरी लेने की योजना बना रहा है। इस पर सब्सिडी का बोझ 1,600 करोड़ रु. आएगा।



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Food Ministry will give cheaper loans of Rs 7,400 crore to sugar mills

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एचआर कंपनियों का अनुमान- अगले साल कॉरपोरेट जगत में 10 लाख नई नौकरियां आएंगी


नई दिल्ली. रोजगार भले हर राजनीतिक पार्टी का नारा हो, आम चनुाव की अनिश्चितता के कारण कंपनियां अगले साल पहली छमाही में नई भर्तियां कम करेंगी। सरकारी स्कीमों से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर, सड़क, एयरपोर्ट जैसे सेक्टर में कंपनियां नई भर्तियों में सावधानी बरतेंगी। लेकिन खपत और निर्यात वाले सेक्टर की कंपनियां अपनी विस्तार योजनाएं जारी रखेंगी, इसलिए इनमें नई भर्तियां बढ़ने की उम्मीद है। जानी-मानी एचआर कंपनियों के प्रमुखों ने यह राय व्यक्त की है। इन्होंने कॉरपोरेट जगत में 10 लाख नई नौकरियों की उम्मीद जताई है।

सोसायटी फॉर ह्मयून रिसोर्स मैनेजमेंट (एसएचआरएम) में एडवाइजरी सर्विसेज के प्रमुख नीतीश उपाध्याय ने कहा कि पहली छमाही में नई भर्तियां कम रहने की आशंका है। भारत में हर साल 1.2 करोड़ लोग जॉब मार्केट में आ रहे हैं। जीडीपी विकास दर तेज होने के बावजूद इतनी नौकरियां नहीं निकल रही हैं। एसएचआरएम दुनिया की सबसे बड़ी एचआर प्रोफेशनल सोसायटी है। 165 देशों में इसके 3 लाख मेंबर हैं।

आईटी सेक्टर ने 2018 में अच्छा प्रदर्शन किया
एचआर फर्म रैंडस्टैड इंडिया के प्रमुख पॉल डी. के अनुसार दो साल भर्तियां कम रहने के बाद आईटी सेक्टर ने 2018 में अच्छा प्रदर्शन किया। ईकॉमर्स में निवेश बढ़ने और स्किल्ड लोग उपलब्ध होने के कारण भर्तियां बढ़ी हैं। 2018 में इन्फ्राट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल और एफएमसीजी में सुधार देखने को मिला। दूसरी तरफ बैंकिंग, फाइनशिेंयल सर्विसेज और टेलीकॉम में स्थिति खराब रही। इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन की प्रमुख ऋतुपर्णचक्रवर्ती के अनुसार छोटे और मझोले शहरों में उपभोक्ताओं का खर्च बढ़ेगा। इसका फायदा रिटेल कंपनियों को मिलेगा।

कंपनियां खास स्किल वालों को रखने पर ध्यान दे रहीं
हायरिंग फर्म एऑन कोक्यूब्स में एंप्लॉयबिलिटी सॉल्यूशंस के डायरेक्टर समीर नागपाल के अनुसार कंपनियां खास स्किल वालों को रखने पर ध्यान दे रही हैं। तकनीकी रूप से दक्ष लोगों की मांग बनी रहेगी। इंडीड इंडिया के एमडी शशि कुमार ने बताया कि 2018 में कंपनियों को ऐसे लोगों की तलाश थी जो काम की बदलती प्रकृति के हिसाब से कंपनी को आगे बढ़ा सकें। ब्लॉकचने, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी में नौकरियां ज्यादा बढ़ीं। आगे भी इनमें डिमांड रहेगी।

नई टेक्नोलॉजी में स्किल्ड लोगों को 50% तक इन्क्रीमेंट संभव
एचआर विशेषज्ञों का कहना है कि 2018 में कर्मचारियों को औसतन 8-10% इन्क्रीमेंट मिला। 2019 में भी इन्क्रीमेंट की यही दर रहने के आसार हैं। एऑन कोक्यूब्स में एंप्लॉयबिलिटी सॉल्यूशंस के डायरेक्टर समीर नागपाल के अनुसार भारत में इन्क्रीमेंट 9-10% के आसपास स्थिर हो रहा है। यह एशिया प्रशांत क्षेत्र में सबसे ज्यादा है। 2018 में औसत इन्क्रीमेंट 9.5% रहा। 2019 के लिए इसका अनुमान 9.6% का है। हालांकि ग्लोबल हंट के एमडी सुनील गोयल का मानना है कि औसत इन्क्रीमेंट 10-12% रहेगा। टॉप परफॉर्मर का इन्क्रीमेंट 15-20% और औसत परफॉर्म करने वालों का 5-8% रह सकता है। खास क्षेत्रों में दक्षता रखने वाले 30-50% तक इन्क्रीमेंट पा सकते हैं।

2018 का ट्रेंड कैसा रहा

  • ईकॉमर्स में निवेश बढ़ने और स्किल्ड लोग आने से आईटी में भर्तियां बढ़ीं।
  • इन्फ्राट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल और एफएमसीजी में कंपनियों ने नई भर्तियां बढ़ाईं।
  • बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज में स्थिति खराब रही। टेलीकॉम में तो जॉब्स कम हुए।
  • जूनियर मैनेजमेंट और क्लर्क स्तर की नौकरियों में सबसे अधिक 23-25% गिरावट आई।


2019 में क्या हैं उम्मीदें

  • बैंकिंग, लॉजिस्टिक्स, आईटी, ईकॉमर्स, कंज्यूमर गुड्स और हेल्थकेयर में सबसे ज्यादा ग्रोथ देखने को मिलेगी।
  • टेक्नोलॉजी से जुड़े क्षेत्रों ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी में आगे भी डिमांड रहेगी।
  • छोटे-मझोले शहरों में उपभोक्ता खर्च बढ़ने से रिटेल कंपनियों में नौकरियां बढ़ेंगी।


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One million new jobs will come in the corporate world next year

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दुनिया का 7वां सबसे बड़ा शेयर बाजार बना भारत, जर्मनी को पीछे छोड़ा


नई दिल्ली. भारत ने वैश्विक स्तर पर शेयर बाजार के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। उसने जर्मनी के शेयर बाजार को पीछे छोड़ दिया। इस मामले में वह दुनिया का सातवां सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, पिछले सात साल में पहली बार भारत ने यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के शेयर बाजार को पीछे छोड़ा है।

इससे अगले साल मार्च में ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने पर दुनिया के सात शीर्ष शेयर बाजारों में संघ का नेतृत्व करने वाला देश फ्रांस होगा। यह भारत की सकारात्मक वापसी को दर्शाता है। यह यूरोपीय संघ के सामने चुनौतियों को भी रख रहा है। भविष्य में ब्रिटेन के साथ संबंध और बजट को लेकर इटली के साथ गतिरोध शामिल हैं।



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Indian Stock Market Now Bigger Than German stock market

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पीएसयू बैंकों को 83 हजार करोड़ देगी सरकार, ताकि कर्ज देने की क्षमता बढ़ सके


नई दिल्ली. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को कहा कि सरकार पब्लिक सेक्टर की बैंकों को 83 हजार करोड़ रुपए की पूंजी देगी। वित्त मंत्री ने कहा कि यह राशि मौजूदा वित्त वर्ष के अगले कुछ महीनों में बैंकों को दी जाएगी। इससे उनकी कर्ज देने की क्षमता में इजाफा होगा।

  1. जेटली ने बताया कि 2018-19 में सरकार ने पीएसयू बैंकों में 65 हजार करोड़ रुपए की पूंजी लगाने का लक्ष्य रखा था। इसमें से 23 हजार करोड़ लगाए भी जा चुके हैं।

  2. उन्होंने कहा कि 42 हजार करोड़ की पूंजी इन बैंकों को दी जानी है। इसके अलावा सरकार ने संसद से 42 हजार करोड़ रुपए की अतिरिक्त पूंजी की मंजूरी दिए जाने की मांग की है। इस तरह अगले कुछ महीनों में बैंकों को दी जाने वाली कुल राशि 83 हजार करोड़ हो जाती है।

  3. वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों का रीकैपिटलाइजेशन करने से उनकी कर्ज देने की क्षमता बढ़ेगी। साथ ही उन्हें आरबीआई के प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) फ्रेमवर्क से बाहर आने में भी मदद मिलेगी।

  4. उन्होंने कहा कि पीसीयू बैंकों में नॉन परफॉर्मिंग असेट (एनपीए) की पहचान का काम पूरा हो चुका है और खराब ऋण को कम करने पर काम शुरू किया जा चुका है।

  5. वित्त मंत्री ने कहा कि इस साल के पहले छह महीनों में पीएसयू में 60,726 करोड़ की रिकवरी की गई है, जो कि पिछले साल इसी समयावधि के दौरान 29,302 करोड़ रुपए थी।

  6. आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव राजीव कुमार ने कहा कि सरकार अच्छा प्रदर्शन करने वाले बैंकों को पूंजी उपलब्ध कराएगी, ताकि वे पीसीए फ्रेमवर्क से बाहर आ पाएं।



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      Govt to infuse Rs 83,000 cr in PSBs in next few months: Jaitley

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एफएमसीजी शेयरों की डिमांड रहने के आसार: देवेन आर चोकसे


मुंबई. पिछले हफ्ते यूरोप के बाजारों ने अमेरिका की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। अमेरिका के तीनों प्रमुख इंडेक्स- नास्डैक, डाउ जोंस और एसएंडपी में 1.26% तक गिरावट रही, जबकि यूरोपीय बाजारों में 1% तक की तेजी थी। ट्रेड वार पर अमेरिका और चीन के बीच ठोस बातचीत और अमेरिका में कच्चे तेल की इन्वेंटरी कम होने की खबर से कच्चे तेल के दाम में थोड़ी बढ़त दिखी, लेकिन बाद में फिर इसमें गिरावट आ गई। ओपेक ने कहा है कि 2019 में इसके तेल की डिमांड रोजाना 314.4 लाख बैरल रहेगी। यह अभी की तुलना में 15 लाख बैरल कम है। ओपेक ने पहले अगले साल रोजाना 315 लाख बैरल डिमांड की उम्मीद जताई थी। अमेरिका में तेल उत्पादन 117 लाख बैरल रोजाना पहुंच गया है। 2018 के अंत तक यह रूस और सऊदी अरब को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश बन सकता है।

एफएमसीजी: कंपनियों की बिक्री में तेज ग्रोथ जारी रहेगी
आने वाले दिनों में एफएमसीजी शेयरों की वैलुएशन ऊंची रहने की उम्मीद है। जीएसटी रेट घटने से कंज्यूमर डिमांड बढ़ रही है, जिसका फायदा इंडस्ट्री को मिल रहा है। परफॉर्मेंस अच्छी हो तो पुरस्कार मिलता ही है। चाहे वह खेल का मैदान हो, सिनेमा हो या फिर इक्विटी मार्केट। ज्यादातर एफएमसीजी कंपनियों के सामने आने वाले दिनों में यही स्थिति रहने वाली है। नोटबंदी और जीएसटी के कारण पिछली कुछ तिमाही में एफएमसीजी कंपनियों की ग्रोथ कम रही। लेकिन अब उनकी बिक्री तेजी से बढ़ रही है। आगे भी यह तेजी बनी रहने की उम्मीद है। शॉर्ट टर्म से मीडियम टर्म के लिए यह निवेशकों की अच्छी पसंद हो सकते हैं।

बैंकिंग: महंगाई कम है तो ब्याज दरें घटाने में हर्ज नहीं
नए गवर्नर की नियुक्ति के बाद माना जा रहा है कि रिजर्व बैंक का मैनेजमेंट आर्थिक विकास के संबंध में सरकार के लक्ष्य को ध्यान में रखकर फैसले करेगा। महंगाई को नियंत्रित रखना जरूरी है लेकिन इसके साथ-साथ ग्रोथ भी जरूरी है। मेरे विचार से रिजर्व बैंक लगातार मजबूत मौद्रिक नीति अपनाता रहा है, जिसका नतीजा है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी हुई। इसका असर इकोनॉमी पर उल्टा हुआ है। जब इकोनॉमी 7.5 से 8.0% की दर से आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हो, और खुदरा महंगाई दर नियंत्रण में हो तो कर्ज पर ब्याज दरें घटाई जा सकती हैं। कॉरपोरेट सेक्टर चाहता है कि नीति निर्धारण में ऐसा व्यक्ति आए जो इस बात को बेहतर समझे और इकोनॉमी की जरूरत के मुताबिक फैसले करे।

भारतीय बाजार ग्लोबल फंडों के शिकार
आगे बाजार की चाल कैसी रहने वाली है या अनुमान लगाना थोड़ा मुश्किल है ग्लोबल निवेशकों को क्रूड, करेंसी और बांड जैसे दूसरे पोर्टफोलियो में भी नुकसान हो रहा है। वे भारत जैसे देशों में शेयरों में भी बिकवाली कर रहे हैं। मेरी राय में भारत ग्लोबल फंडों का शिकार हो रहा है। जब वे पैसे निकालते हैं तो इसका असर रुपए पर भी होता है। भारतीय करेंसी डॉलर की तुलना में 69-70 के आसपास स्थिर रहनी चाहिए। लेकिन दुर्भाग्यवश विदेशी निवेशकों के दबाव में रुपया कमजोर हो रहा है। अगर कच्चा तेल 55 से 65 डॉलर प्रति बैरल के बीच बना रहता है तो रुपया भी 70 के आसपास स्थिर होगा। बाजार अभी खुद को इन अनिश्चितताओं के प्रति एडजस्ट करने की कोशिश कर रहा है।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।)



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देवेन आर. चोकसे, एमडी, केआर चौकसे इन्वेस्टमेंट।

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इंटरनेट, सोशल मीडिया यूजर का पर्सनल डेटा 3500 रु में बेच रहे हैं हैकर: कासपर्स्की लैब


नई दिल्ली. इंटरनेट और सोशल मीडिया यूजर का पर्सनल डेटा 3,500 रुपए में बेचा जा रहा है। इसमें क्रेडिट कार्ड और बैंक खाते की डिटेल से लेकर सोशल मीडिया खातों की जानकारी शामिल है। साइबर सिक्योरिटी फर्म कासपर्स्की लैब की रिसर्च में यह सामने आया है।

  1. रिसर्च के मुताबिक हैकर उबर, नेटफ्लिक्स, स्पोटीफाई और दूसरी गेमिंग, डेटिंग और पोर्न वेबसाइट्स से यूजर का डेटा चुरा रहे हैं। रिसर्च में सामने आया है कि साइबर अपराधी एक यूजर की डिटेल 70-72 रुपए में बेच रहे हैं। ज्यादा डिटेल्स के लिए डिस्काउंट भी ऑफर किया जाता है।

  2. कासपर्स्की लैब के सीनियर सिक्योरिटी रिसर्चर डेविट जैकॉबी का कहना है कि डेटा हैकिंग सभी के लिए बड़ा खतरा है। चाहे यह निजी स्तर पर हो या सामाजिक स्तर पर। क्योंकि, डेटा चोरी से असामाजिक तत्वों को फायदा हो रहा है।

  3. रिसर्च के मुताबिक साइबर सुरक्षा में कमी की वजह से डेटा चोरी के मामले बढ़ रहे हैं। इससे यूजर को आर्थिक नुकसान हो सकता है और छवि खराब हो सकती है।

  4. कासपर्स्की लैब का कहना है कि कई लोग अलग-अलग खातों के लिए एक ही पासवर्ड यूज करते हैं। इससे हैकर का काम आसान हो जाता है। रिसर्च फर्म का कहना है कि साइबर सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर डेटा हैकिंग से बचा जा सकता है।



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      Your digital life may be up for sale for just Rs 3500 says Kaspersky Lab

      Click here to Read full Details Sources @ https://www.bhaskar.com/business/news/your-digital-life-may-be-up-for-sale-for-just-rs-3500-says-kaspersky-lab-01397394.html

विदेशी सर्वर से भारतीयों का डेटा डिलीट कर देंगे, लेकिन सुरक्षा कमजोर होगी: मास्टरकार्ड


मुंबई. ग्लोबल कार्ड पेमेंट कंपनी मास्टरकार्ड ने आरबीआई से कहा है कि वह विदेशी सर्वरों से भारतीय कार्डधारकों के डेटा डिलीट कर देगी। लेकिन, एक समय के बाद इससे कार्ड की सुरक्षा में कमी आएगी। आरबीआई ने 16 अक्टूबर से कार्ड पेमेंट कंपनियों के लिए नए नियम लागू किए थे। इसके मुताबिक कंपनियों को भारतीय ग्राहकों के ट्रांजेक्शन संबंधी सभी डेटा देश में ही स्टोर करने पड़ेंगे। साथ ही विदेशी सर्वरों में स्टोर पुराना डेटा डिलीट करना पड़ेगा।

आरबीआई की गाइडलाइंस का पालन कर रहे: मास्टरकार्ड

मास्टरकार्ड का कहना है कि उसने 6 अक्टूबर से ही भारतीयों से लेन-देन के डेटा पुणे स्थित टेक्नोलॉजी सेंटर में स्टोर करना शुरू कर दिया था। कंपनी ने विदेश में स्थित पुराने डेटा एक निश्चित तारीख से डिलीट करने का प्रस्ताव भी आरबीआई को दिया है। जिस पर रिजर्व बैंक का जवाब मिलना बाकी है। लेकिन, मास्टरकार्ड को आशंका है कि पुराने डेटा डिलीट करने से ट्रांजेक्शन संबंधी विवाद हो सकते हैं।

मास्टरकार्ड के इंडिया एंड डिवीजन प्रेसिडेंट (साउथ एशिया) पोरुश सिंह ने न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा कि कंपनी 200 से ज्यादा देशों में बिजनेस कर रही है। लेकिन, भारत के अलावा किसी और देश ने ग्लोबल सर्वर से डेटा डिलीट करने के लिए नहीं कहा।



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Mastercard says will start deleting data of Indian cardholders from global servers warns of impact

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सीमेंट पर जीएसटी 28% से घटकर 18% हो सकता है, प्रति बैग 25 रु का फायदा होगा


नई दिल्ली. रियल्टी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सरकार सीमेंट पर जीएसटी घटाने पर विचार कर रही है। अभी सीमेंट पर 28% जीएसटी लगता है। इसे 18% किया जा सकता है। अभी 28% जीएसटी के साथ एक बोरी सीमेंट की कीमत 300 रुपए है, तो 18% जीएसटी रेट लगने पर कीमत 275-280 रुपए हो जाएगी। यानी प्रति बैग 20-25 रुपए का फायदा होगा।

  1. वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक 22 दिसंबर को होनी है। सूत्रों के मुताबिक इसमें 28% जीएसटी स्लैब में आने वाली वस्तुओं पर विचार होगा। 28% स्लैब में सिर्फ लग्जरी और सेहत को नुकसान पहुंचाने वाली वस्तुएं रखने का इरादा है।

  2. अक्टूबर में जब डीजल के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे, तब सीमेंट बनाने वाली कंपनियों ने कहा था कि खर्च बढ़ने की वजह से दाम 10% बढ़ सकते हैं। लेकिन उसके बाद से दो महीने तक डीजल के दाम घटे हैं।

  3. जीएसटी काउंसिल ने इस साल जुलाई की बैठक में रियल्टी और कंस्ट्रक्शन सेक्टर को राहत देते हुए पेंट और वार्निश पर जीएसटी रेट 28% से घटाकर 18% किया था। इसके अलावा परफ्यूम, कॉस्मेटिक्स, हेयर ड्रायर, शेवर, मिक्सर ग्राइंडर, वैक्यूम क्लीनर और लिथियम आयन बैटरी पर भी रेट 28% से घटाकर 18% किए गए थे।

  4. जीएसटी घटाने से सरकार का टैक्स कलेक्शन कम हो सकता है। सरकार ने पूरे वित्त वर्ष में 13.48 लाख करोड़ रुपए यानी प्रति माह 1.12 लाख करोड़ रुपए जीएसटी कलेक्शन का लक्ष्य रखा है। लेकिन नवंबर तक आठ महीने में सिर्फ 7.76 लाख करोड़ रुपए आए हैं। यानी हर महीने औसतन 97,000 करोड़ रुपए जीएसटी आया है।

  5. 1 जुलाई 2017 से जीएसटी लागू हुआ तो 28% टैक्स स्लैब में 226 वस्तुएं थीं। डेढ़ साल में इनमें से 191 वस्तुओं पर टैक्स कम किया गया है। अभी 28% जीएसटी स्लैब में 35 वस्तुएं हैं। इनमें सीमेंट के अलावा वाहन, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, टायर, याट, एयरक्राफ्ट, कोल्ड ड्रिंक्स, तंबाकू, सिगरेट और पान मसाला जैसी वस्तुएं शामिल हैं।

  6. 2018-19 में अप्रैल से सितंबर के दौरान सीमेंट की बिक्री 14% बढ़ी है। 2009-10 के बाद पहली बार इसमें 10% से ज्यादा ग्रोथ दर्ज हुई है। देश में 50 करोड़ टन सीमेंट उत्पादन की क्षमता है। लेकिन अभी 30 करोड़ टन ही उत्पादन हो रहा है।



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      reduction of Cement GST

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