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ऑफिस में आजमाएं ये खास टिप्स, मिनटों में दूर होगी थकान


ऑफिस में लगातार 8-10 घंटे बैठे रहना सामान्य बात है। लंबी सिटिंग से जोड़ों, कमर व गर्दन में दर्द के साथ सूजन और खून जमने जैसी शिकायतें आम हो गई हैं। ये आगे चलकर हृदय रोग व अन्य असाध्य बीमारियों का कारण बन सकती हैं। ऐसी कई एक्सरसाइज हैं जिन्हें हम रुटीन में करके खुद को फिट रख सकते हैं।

बैठने का तरीका सही हो
गलत सिटिंग से कई तरह के दर्द व खून का संचार गड़बड़ाने से रक्तवाहिकाओं में खून जमने की शिकायत हो सकती है। इसलिए सीधा बैठें, कंधे रिलेक्स रखें, पांव जमीन पर टिकाकर सीधे रखें, रीढ़ की हड्डी के अनुरूप घुमाव वाली कुर्सी पर बैठें, कम्प्यूटर स्क्रीन आंखों के लेवल में हो और कोहनी, हाथ व की-बोर्ड एक लेवल में रखें।

गर्दन
आराम से और ध्यानपूर्वक हल्के से गर्दन को आगे-पीछे करें। किसी भी मूवमेेंट में दर्द हो तो जबरदस्ती न करें। यह स्पोंडेलाइटिस से बचाएगी।

ऐसा न करें: गोल घुमाने का और कटका निकालने का प्रयास न करें क्योंकि इससे चक्कर आ सकता है या दर्द बढ़ सकता है।

कमर
सीधा बैठें और पेट को 10 सेकेंड के लिए अंदर की ओर खींचकर रोकें। इससे पेट की मांसपेािशयां मजबूत होती हैं और कमर दर्द की समस्या नहीं होती। फाइल देने और प्रिंटर तक खुद ही जाएं ताकि बॉडी मूवमेंट बना रहे और दर्द की आशंका न रहे।

हाथ-पांव के लिए यह जरूरी
पूरे पंजे को टखने से हिलाएं। हाथ को सही सपोर्ट दें और लटकाकर न रखें जिससे कंधे रिलेक्स रहें और दर्द न हो। इससे खून का दौरा सामान्य रहेगा, सूजन, ऐठन और रक्तके जमने की परेशानी में काफी फायदा मिलेगा। पांव में होने वाली ऐंठन को दूर करने के लिए दूध-दही-छाछ, नींबू-नारियल पानी और केला डाइट में शामिल करें। केला पैरों का भड़कना और ऐठन दूर करने में मददगार होता है।

ज्यादा मालिश ना करें
एक घंटे के काम के बाद शरीर को 5-10 मिनट आराम दें। दो कप से ज्यादा चाय न पिएं, पीनी भी पड़े तो साथ में कुछ हल्का खाएं। चाय में चीनी ज्यादा न लें, इससे एसिडिटी व पाचन मेंं गड़बड़ी होती है। थोड़े-थोड़े अंतराल में ठंडे पानी से आंखों को धोएं। गर्दन व कमर दर्द में तौलिए को गर्म पानी में भिगोकर, निचोड़कर दर्द की जगह रखें, उस पर हल्के गर्म पानी से भरा हॉट बैग रखें व 10-15 मिनट बाद हटा दें। जैल या ऑइंटमेंट से जोड़ों पर ज्यादा देर न तो मालिश करें और न ही रगड़ें। इससे मांसपेशियां फट सकती हैं और सूजन व दर्द बढ़ सकता है।


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उम्र के नाजुक पड़ावों में संभालें हड्डियों की ताकत, जानें ये खास बातें


विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में करीब 30 करोड़ लोग ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित हैं। यानी हर चार में से एक भारतीय को ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी किसी न किसी रूप में है। यदि ऐसी ही स्थितियां रहीं तो मात्र एक दशक में ऑस्टियोपोरोसिस भारत की लगभग आधी जनसंख्या को अपना शिकार बना लेगा। आइए जानते हैं इससे बचने के उपायों के बारे में।

हमारे देश में हर एक सेकंड में किसी न किसी को ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों के भुरभुरेपन के कारण फ्रैक्चर होता है। हड्डियों की सेहत और उम्र के पड़ाव के संबंध पर एक नजर।

बचपन से जवानी (0 से 20 वर्ष)
विटामिन डी और कैल्शियम की कमी से बच्चों की हड्डियां नरम या कमजोर हो जाती हैं। जिससे उन्हें सूखा रोग या रिकेट्स हो जाता है।

लक्षण और खतरे -
गड़बड़ी : पैरों और मेरुदंड का असामान्य टेढ़ा होना, छाती की हड्डियों का बाहर आना।
दांतों की समस्या : दांतों में कैविटी या उनका देर से विकास होना।

बचाव और उपचार -
शिशु और बच्चों को गुनगुनी धूप में ले जाएं, जिससे विटामिन डी का निर्माण हो।
बच्चों को पर्याप्त मात्रा में दूध दें। बच्चे जब मां के दूध के अलावा खाना भी खाने लगे तो उसे कैल्शियम युक्त पदार्थ जैसे दूध से बनीं चीजें पनीर, दही और अंजीर आदि खाने को दें।

वयस्कता की उम्र : (21 से 30 वर्ष)
लगभग 30 वर्ष की उम्र के बाद बोन डेंसिटी (हड्डियों का घनत्व) घटने लगती है। यदि इस उम्र में इन पर ध्यान नहीं दिया जाए तो आने वाले सालों में हड्डियां सबसे बड़ी समस्या बन सकती हैं। ऐसे में व्यायाम पर विशेष ध्यान दें, खानपान में सावधानी बरतें और कैल्शियम से भरपूर चीजें जैसे दूध, दही, पनीर, अंजीर, तिल, बादाम, टोफू, संतरा आदि को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं।

उठाएं जरूरी कदम -
हर रोज कम से कम 700 मिलीग्राम कैल्शियम और मैग्नीशियम हड्डियोंं के लिए जरूरी है।
विटामिन डी के लिए रोजाना कम से कम 15 मिनट धूप जरूर लें।
प्रतिदिन 6 ग्राम से ज्यादा नमक न लें इससे शरीर के कैल्शियम का नुकसान होगा और हड्डियां कमजोर पड़ेंगी।
मजबूत हड्डियों के लिए व्यायाम जरूरी है। इसके लिए आप साइक्लिंग, स्वीमिंग या एरोबिक्स कर सकते हैं।

रोकने के लिए ये उपाय -
जब हमारी उम्र बढ़ती है तो हड्डियां भी बूढ़ी होने लगती हैं। भुरभुरी हुई हड्डियों में फै्रक्चर की आशंका भी बढऩे लगती है। ऑस्टियोपोरोसिस या अस्थि भंगुरता के कारण सबसे सामान्य फै्रक्चर कूल्हे, कलाइयों और रीढ़ में होते हैं। 50वर्ष से ज्यादा उम्र की हर तीन में से एक महिला को ऑस्टियोपोरोसिस से फै्रक्चर की आशंका होती है जबकि 50 वर्ष से ज्यादा उम्र के हर पांच में से एक पुरुष को फ्रै क्चर का खतरा रहता है।

इनसे करें तौबा :
शराब, सिगरेट और तंबाकू हमारे खून में हड्डियों के लिए जरूरी कैल्शियम के स्तर को घटा देते हैं।
स्टेरॉयड युक्त दवाएं न लें, इनसे भी खून में कैल्शियम का स्तर कम होता है।
खून में कैल्शियम की जांच नियमित रूप से कराएं।
हर छह महीने में बीएमडी टेस्ट कराएं, ऑस्टियोपोरोसिस की जांच के लिए बोन मिनरल डेंसिटी टेस्ट हर छह महीने में कराएं और ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से उचित सलाह लें।


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अगर आप भी करते हैं प्लास्टिक के बर्तन और एल्युमीनियम फॉइल का इस्तेमाल तो हो जाएं सावधान


एक नए शोध के खाना खाने आदि में प्लास्टिक के बर्तनों के इस्तेमाल से कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। इन बर्तनों में खाना खाने से गर्भवती महिलाओं और उनके भू्रण पर असर पड़ता है। बच्चे के थायरॉयड हॉर्मोन का स्तर गिरता है और उसके दिमाग का विकास भी रुक सकता है। इसी तरह एल्युमीनियम फॉइल भी हमारे स्वास्थ्य को काफी नुकसान पहुंचाते हैं।

महिलाओं के लिए नुकसानदायी -
खाने-पीने के सामान के डिब्बों, कंटेनर्स, सीडी, डीवीडी और बोतलों आदि के निर्माण के लिए पॉलीकार्बोनिक प्लास्टिक का प्रयोग किया जाता है। इसमें बाइफेनोल-ए (बीपीए) कैमिकल होता है जो महिलाओं में बांझपन का एक प्रमुख कारण है। शिकागो की बायोसाइंटिस्ट डॉ. जॉडी फ्लॉज ने जब बीपीए के महिलाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर अध्ययन शुरू किया तो पता चला कि इससे उनके अंडाशय पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इस बात को प्रमाणित करने के लिए डॉ. फ्लॉज ने चुहिया को बीपीए सोल्यूशन की खुराक दी और उन्होंने पाया कि अन्य चुहियाओं की तुलना में बीपीए खुराक लेने वाली चुहिया का अंडाशय छोटा था। सामान्य प्रजननीय विकास के लिए जिम्मेदार हार्मोन्स भी सामान्य से कम स्रावित हो रहे थे।

एल्युमीनियम फॉइल हानिकारक -
एल्युमीनियम फॉइल ऑक्सीजन और प्रकाश को पूरी तरह अवरुद्ध कर देता है, जिससे हमारे खाने में बैक्टीरिया नहीं पनपता। एल्युमीनियम फॉइल से 2-6 मिलीग्राम तक एल्युमीनियम का अंश खाने में पहुंच जाता है। जिससे कैंसर, पाचन तंत्र की गड़बड़ी, याददाश्त कमजोर होना और बांझपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए कभी भी गर्म-गर्म चपाती को फॉइल में ना लपेटें। रखना भी हो तो पहले टिश्यू पेपर और फिर फॉइल का प्रयोग करें वर्ना कैमिकल कम्पाउंड पाचनतंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं। चपाती को प्लास्टिक की बजाय स्टील के कंटेनर में रखें। जहां तक हो सके ताजा बना खाना ही खाएं।

नॉन स्टिक कुकवेयर खतरनाक -
इनके निर्माण में एक खास कैमिकल का प्रयोग होता है, जिसे पीएफओए कहते हैं। ऐसे बर्तनों के लगातार इस्तेमाल से पैंक्रियाज, लिवर और टेस्टिस (पौरुष ग्रंथि) संबंधी कैंसर, कोलाइटिस, प्रेग्नेंसी में हाइपरटेंशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। नॉनस्टिक कुकवेयर की कोटिंग निकलने या उसमें कोई स्के्रच आने पर जब इनमें खाना बनाया जाता है तो हीट से निकलने वाले विषैले पदार्थ खाने को दूषित करते हैं। इसलिए किसी साधारण पैन में थोड़ा-सा नमक डालकर दो मिनट गर्म करें। अब यह बर्तन भी नॉन स्टिक की तरह ही काम करेगा।


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रोजाना दो बॉडी पार्ट्स का व्यायाम करती हैं नेहा धूपिया


बॉलीवुड अभिनेत्री नेहा धूपिया अपनी बॉडी को फिट रखने के लिए जिम एक्सरसाइज करती हैं। नेहा जिम में एक्सरसाइज करके घंटों पसीना बहाती हैं। नेहा जिम एक्सरसाइज के साथ ही योगा व अन्य तरह के व्यायाम भी करती हैं।

नेहा के मुताबिक वे अपनी फिटनेस के लिए हफ्ते में पांच दिन वर्कआउट करती हैं। वे हर दिन शरीर के दो हिस्सों के लिए व्यायाम करती हैं जैसे चेस्ट और बैक, कंधे और टांगे, ट्राईसेप्स और बाईसेप्स की एक्सरसाइज के लि अलग-अलग दिन निर्धारित करके एक्सरासाइज करती हैं।

इसके अलावा नेहा रोजाना कम से कम 20मिनट साइक्लिंग व कार्डियो एक्सरसाइज करती हैं। नेहा हफ्ते में एक दिन योगा और तीन दिन पिलेट्स करती हैं। उन्हें स्वीमिंग और स्क्वैश खेलने का भी शौक है। शहर से बाहर शूटिंग के लिए जाते समय वे स्नीकर्स और योगा मैट हमेशा अपने साथ रखती हैं।

नेहा का खानपान -
नाश्ता : अंडे, बादाम, दूध, कॉर्नफ्लेक्स, इडली और वेजीटेबल सूप
लंच : रोटी, दाल, चावल, सब्जी व दही
डिनर : सूप, सलाद, ग्रिल्ड सब्जी


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कब्ज के लिए फायदेमंद है इस तरह की 'रोटी'


जिन लोगों को कब्ज की समस्या रहती है, उन्हें गेहूं की चोकर युक्त रोटी खानी चाहिए। चोकर की रोटी पानी ज्यादा सोखती है और पेट में मल को सूखने नहीं देती। दरअसल गेहूं के चोकर में अघुलनशील फाइबर होता है, जिसे सैल्यूलोज कहते हैं। इसमें कैल्शियम, सिलीनियम, मैगनीशियम, पोटेशियम, फॉस्फोरस जैसे खनिजों के साथ-साथ विटामिन ई और बी कॉम्प्लेक्स भी पाए जाते हैं।

चोकर आंतों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ कैंसर से भी रक्षा करता है। यह अमाशय के घाव को ठीककर टीबी से भी रक्षा करता है। चोकर हृदय रोग से बचाने के साथ-साथ कोलेस्ट्रोल की समस्या नहीं होने देता। नहाने के पानी में आधा कटोरी चोकर मिलाकर स्नान करने से चर्मरोग में भी राहत मिलती है।

ऐसे करें प्रयोग -
गेहूं के एक किलो आटे में 100 ग्राम चोकर मिला लें और इस आटे की रोटी बनाकर खाएं। इससे खाना न पचने की समस्या दूर होगी और आपको कब्ज से छुटकारा मिलेगा।

5 कप पानी में 25 ग्राम चोकर, तुलसी के 10-11 पत्ते व मुनक्के के 10-11 दाने डालकर अच्छी तरह उबालें। मीठा करने के लिए इसमें शक्कर डाल लें। चोकर वाली स्वादिष्ट चाय लाभ देगी।

जितना चोकर लें, उससे दोगुना पानी डालकर एक घंटे के लिए रखे दें। नहाने से पहले इसे पूरे शरीर पर मसलने से त्वचा मुलायाम व चमकदार होगी।


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Fitness samachar - इन बातों का रखेंगे ध्यान तो कभी नहीं होगी थकान


कई लोग अक्सर शिकायत करते हैं कि यार मैं तो थक गया। बार-बार और बिना काम के ही होने वाली थकान से बचना चाहते हैं तो इन बातों पर ध्यान दें :-

- शारीरिक ऊर्जा को बरकरार रखने के लिए प्रोटीन युक्त नाश्ता जरूरी होता है। प्रोटीनयुक्त व रेशेदार नाश्ते से ब्लड शुगर संतुलित रहता है और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। सुबह का नाश्ता अच्छा हो तो दिन की शुरुआत भी अच्छी होती है।

- दिन भर थोड़ा-थोड़ा पानी या कोई भी तरल पदार्थ पीते रहें। पानी शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालकर शारीरिक प्रणाली में नई ऊर्जा भरता है। शर्बत, फलों का रस, छाछ व नारियल पानी आदि पीना चाहिए।

- कार्बोहाइड्रेट से शरीर को ऊर्जा मिलती है। ऐसे फल जरूर खाएं, जिसमें ग्लूकोज पर्याप्त मात्रा में हो, जैसे संतरा, मौसमी, लीची आदि। चीनी का प्रयोग न करें। दूध में शहद डालकर पिएं या फिर केले का शेक पीना भी बेहतर विकल्प है। दिन में कम से कम 10 मिनट तक टहलना सेहत के लिए बहुत जरूरी होता है।

पर्याप्त नींद लें
7-8 घंटे की नींद जरूर लें ताकि अगले दिन के लिए आपको पर्याप्त ऊर्जा मिले। जब भी थकान महसूस हो तो 15-20 मिनट की झपकी जरूर लें। नींद पूरी न होने से वजन भी बढ़ता है और थकान भी जल्दी होती है।


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महिलाएं भूल जाती हैं अपना दर्द, लेकिन पुरूषाें काे रहता है याद, जानिए क्याें


पुरुषों की तुलना में महिलाएं सहन किए गए ज्यादा दर्द को जल्दी भूल जाती हैं। चूहे व मानव पर किए गए एक शोध में इसकी पुष्टि हुई है।

कनाडा की टोरंटो मिसिसॉगा विश्वविद्यालय (यूटीएम) के शोधकर्ताओं के शोध में पता चला है कि महिला व पुरुष पूर्व के कष्टदायी अनुभवों को अलग-अलग तरीके से याद रखते हैं।

पुरुष पूर्व के कष्टदायी अनुभवों स्पष्ट तौर पर याद रखते हैं, जबकि महिलाएं दर्द के प्रति बेपरवाह रवैया अपनाती हैं। इसी तरह के परिणाम नर व मादा चूहों में देखने को मिले।

पुरुष जब दर्द का अनुभव दोबारा करने पर अतिसंवेदनशील रवैया दिखाते हैं, लेकिन महिलाएं अपने दर्द के पूर्व अनुभव से तनाव नहीं लेती हैं।

यूटीएम के सहायक प्रोफेसर लोरेन मार्टिन ने कहा, ''अगर दर्द की याद, दर्द के लिए प्रेरक का कार्य करती है और हम समझते हैं कि दर्द को कैसे याद रखा जाए तो यादाश्त पर क्रियाविधि का इस्तेमाल करके हम कुछ पीड़ितों की मदद करने में समर्थ हो सकते हैं।'


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कपालभाति योग आपको देगा पॉजिटिव सोच


एकांत में और आराम की स्थिति में किया जाने वाला योग है कपालभाती। इसे किसी भी उम्र के लोग कर सकते हैं।

लाभ : डायबिटीज, जोड़ों का दर्द, आर्थराइटिस, सांस व पेट संबंधी रोग, कब्ज, मोटापा व तनाव जैसी बीमारियों को दूर करने के साथ ही सकारात्मक सोच विकसित होती है। हृदय रोगियों को धीमी गति से इस योग को करना चाहिए।

कब करें : यह योग खाली पेट सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद 10-15 मिनट के लिए कर सकते हैं। इसे खाने के तुरंत बाद न करके ३ से 4 घंटे बाद शांत वातावरण व खुली हवा में आसन पर बैठकर करें। इस योग को जल्दबाजी में न करके क्रमानुसार ही करना चाहिए।
कैसे करें

पालथी मारकर आसन पर बैठें। कमर सीधी रखें। हाथ घुटनों पर व हथेली ऊपर की ओर रखें। तर्जनी अंगुली को अंगूठे से मिलाएं। 3-4 मिनट तक नाक से सांस झटके से छोड़ें। पेट अंदर जाएगा। थकने पर आंखे बंद करें व नाक पर ध्यान केंद्रित कर दोहराएं।


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जानिए आपके आसपास सेहत है या सिर्फ सामान ?


कहीं आपकी सेहत और सुविधाएं प्रतिद्वंद्वी तो नहीं बन गई? नीचे दिए सवालों के जवाब देकर खुद ही परख लीजिए कि कहीं आपने भी आस-पास बेकार का जमावड़ा तो नहीं किया हुआ है!

1. मुझे अपने आसपास ऐसा सब कुछ रखना पसंद है जिसकी मुझे जरूरत होती है?
अ: सहमत

ब: असहमत

2. घर में जरूरी सामान तो रखना ही पड़ता है, नहीं तो फिर घर कैसे लगेगा?
अ: सहमत

ब: असहमत

3. मुझे नहीं लगता कि कुछ भी गैरजरूरी होता है, क्योंकि कभी न कभी उसकी जरूरत पड़ती है?
अ: सहमत

ब: असहमत

4. मेरी सामाजिक प्रतिष्ठा ऐसी है कि अच्छी बैठक और जरूरी सुविधाएं न हो तो बात बिगड़ जाती है!
अ: सहमत

ब: असहमत

5. परिवारजनों के दबाव में अतिरिक्त चीजें जमा हो जाती है, इसका कोई उपाय नहीं!
अ: सहमत

ब: असहमत

6. मैं अपने आसपास बेकार चीजों को कम करने पर सोचता रहता/रहती हूं, लेकिन जाने क्यूं आलस आता है!
अ: सहमत

ब: असहमत

7. बहुत से पुरानी चीजों के साथ यादें जुड़ी हैं इसलिए अब लगाव के कारण हटाने का मन नहीं होता!
अ: सहमत

ब: असहमत

8. सेहत-सामान का संबंध मुझे समझ नहीं आता, मेरे हिसाब से खराब सेहत के लिए स्वयं जिम्मेदार हैं!
अ: सहमत

ब: असहमत

9. मुझे खाली और खुलापन पसंद है, लेकिन कुछ अच्छा देखकर खरीदने पर मन ललचा जाता है !
अ: सहमत

ब: असहमत

स्कोर और एनालिसिस -
सामान-सुविधाएं आपकी 'कमजोरी' है : यदि आप 7 या उससे ज्यादा सवालों से सहमत हैं तो आपने अपने आसपास बहुत कुछ ऐसा जमा कर रखा है जिसकी आपको न कल जरूरत पड़ी थी, न आज है और न आगे पड़ेगी। यदि आप सुविधा और सामान के मोह में अपने आसपास को जंकयार्ड बनाएंगे तो निश्चित रूप से हमेशा उलझे रहेंगे।

आप संतुलन बनाने में 'उस्ताद' है : यदि आप 7 या उससे ज्यादा सवालों से असहमत हैं तो आपने तन-मन की चाह में संतुलन बनाया हुआ है। आप जमा से ज्यादा सही उपयोग पर जोर देते हैं। आप न आप बेकार की चीजें जमा करते हैं और न उनसे मोह बढ़ाते हैं।


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खुश रहने के लिए लें ये 10 वचन, जानें इनके बारे में


अच्छी सेहत के लिए खुश रहना जरूरी है। खुश रहने के लिए आपको खुद से कुछ वचन लेने होंगे जो आपको खुश रखने में मदद करेंगे। मैं वचन देता/ देती हूं कि अपने और अपने परिवार के लिए :

मेरे चेहरे पर गुस्सा कम और हंसी ज्यादा होगी।
चिंताएं कम और नींद पर्याप्त होगी।
लालच कम और देने की प्रवृत्ति ज्यादा होगी।
पहियों का कम पैरों को ज्यादा उपयोग होगा।
प्रोसेस्ड चीजें कम और ताजा चीजें ज्यादा उपयोग में आएंगी।

शराब कम व दूध ज्यादा पिया जाएगा।
चीनी कम और फल-सब्जी ज्यादा खाए जाएंगे।
नमक कम और नींबू का उपयोग बढ़ेगा।

खाने की मात्रा कम और चबाने का श्रम ज्यादा होगा।
बोलना कम और करने पर जोर।

रोज शारीरिक व्यायाम किया जाएगा।

दूसरों से जलन और ईष्र्या नहीं की जाएगी।

पैसों जरूर से ज्यादा खर्च नहीं किए जाएंगे।

खुद को सक्रिय रखेंगे, दूसरों पर निर्भर नहीं रहेंगे।

रोज सुबह जल्दी उठेंगे और देर रात तक नहीं जागेंगे।

नकारात्मक चीजों को खुद से दूर रखेंगे।


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किडनी को इन तरीकों से रख सकते हैं दुरुस्त


हमारे शरीर के खास अंगों में एक है किडनी। कैंसर और दिल की बीमारी के बाद किडनी में खराबी तीसरी बड़ी जानलेवा बीमारी बनती जा रही है। एनजीओ 'द नेशनल किडनी फाउण्डेशन ऑफ इण्डिया के अध्ययन में खुलासा हुआ है कि भारत में किडनी से संबंधी बीमारियों के मरीज काफी तादाद में बढ़ रहे हैं। भारत में सालाना करीब 90 हजार किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। ऐसे में शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त रखने के लिए किडनी को फिट रहना बेहद जरूरी है। आइये जानते हैं कि हम अपनी किडनी को कैसे दुरुस्त रख सकते हैं।

ये करें -
हमेशा ताजे फल और सब्जियां खाएं और खूब पानी पीएं।
कम वसा (फैट) वाले पदार्थ खाएं। ज्यदा तेल चिकनाई वाली चीजें न खाएं ।
व्यायाम करने को अपनी आदत में शामिल करें।

इनसे रहें दूर -
किडनी को स्वस्थ रखने के लिए धूम्रपान और शराब के सेवन से दूर रहें, किडनी को फिट रखने की यह सबसे बड़ी सीख है।
खाने में नमक की मात्रा घटाएं।
दर्द निवारक दवाओं का इस्तेमाल कम करें।
मोटापा व वजन न बढ़ने दें।


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जब निकलने वाले हों बच्चे के दांत ताे इन बाताें का रखें ध्यान


अगर आपके बच्चे के दांत निकल रहे हैं तो जरूरी है कि आप अलर्ट हो जाएं। ये दांत छह महीने से लेकर दो साल तक पूरी तरह से आ जाते हैं। इस समय उनके मसूड़े फूल जाते हैं और उनमें खुजली होती है जिससे वे अपना हाथ या कोई भी चीज मुंह में डालते हैं। ऐसे में परिवार वाले समझते हैं कि दांत निकलने की वजह से उसे दस्त लगे हैं जबकि ऐसा गंदे हाथ या दूषित वस्तु को मुंह में डालने से होता है। ऐसे में आप इन उपायों से अपने बच्चे की देखभाल कर सकते हैं।

चीजें दूर रखें :
माता-पिता बच्चे के आसपास रखी चीजों को व्यवस्थित रखें क्योंकि कई बार बच्चे किसी भी चीज को उठाकर खुद को या मसूड़ों को नुकसान पहुंचा लेते हैं।

मसूड़े :
ब्रेस्ट फीडिंग या बॉटल से दूध पिलाने के बाद एक अंगुली में साफ, मुलायम और गीला कपड़ा लपेटें और उसके मसूड़े पर हल्का सा रगड़ें। दिन में ऐसा एक बार करें। इससे उसके मुंह से किसी तरह की दुर्गंध नहीं आएगी।

होम्योपैथिक इलाज :
जब बच्चों के दांत निकलने वाले होते हैं तो उन्हें बायोकॉम्बिनेशन 21 दी जाती है। यह आयरन और कैल्शियम का मिश्रण होती है। कैल्शियम दांतों की वृद्धि और आयरन सूजन व खुजली को दूर करता है।

आयुर्वेदिक इलाज :
विशेषज्ञ के अनुसार बच्चे के मसूड़े पर दिन में दो से तीन बार शहद लगाएं। बालचक्रभद्र (पाउडर) दवा को एक चम्मच शहद में मिलाकर दिन में दो बार बच्चे को देने से उसे खुजली की समस्या नहीं होती। हर्विंदासव टॉनिक को दिन में दो से तीन बार दो चम्मच दी जाती है।

कब कराएं ब्रश :
दंत रोग विशेषज्ञ के अनुसार जब बच्चा कम उम्र का हो तो दूध या कुछ भी खाने के बाद उसे कुल्ला कराकर मुंह की सफाई करानी चाहिए। दो साल की उम्र तक बच्चे के दांत पूरी तरह से आ जाते हैं इसलिए इस समय से ही उन्हें ब्रश करवाना शुरू कर देना चाहिए। अगर बच्चे के दांत समय रहते नहीं आएं तो डॉक्टर से संपर्क करें क्योंकि कई बार आनुवांशिक कारणों या कुपोषण के कारण ऐसा होता है।


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आज ही छोड़ दें ये आदतें, नहीं ताे वक्त से पहले खत्म हाे जाएगी आपकी ताकत


भागदौड़ वाली दिनचर्या, अव्यवस्थित जीवनशैली, काम का बोझ और मानसिक तनाव के बीच बुरी लतें मौजूदा दौर में लोगों की परेशानी और बढ़ा रही हैं, क्योंकि उनकी शारीरिक ऊर्जा दिन-ब-दिन क्षीण होती चली जाती है। विशेषज्ञ इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हैं।

क्लिनिकल न्यूट्रीशियन, डाइटिशियन और हील योर बॉडी के संस्थापक रजत त्रेहन ने कहा कि लोगों यह सोचने की जरूरत है कि शारीरिक ऊर्जा को कम करने वाली कौन सी बुरी आदतें हैं जिन्हें त्यागकर वह स्वस्थ जीवनशैली अपना सकते हैं।

ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की कुल 130 करोड़ आबादी में से 28.6 फीसदी लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। रिपोर्ट में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि करीब 18.4 फीसदी युवा न सिर्फ तंबाकू, बल्कि सिगरेट, बीड़ी, खैनी, बीटल, अफीम, गांजा जैसे अन्य खतरनाक मादक पदार्थों का सेवन करते हैं।

बीते साल आई डब्लयू.एच.ओ की ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट में भी कुछ ऐसे ही चिंताजनक आंकड़े सामने आए थे। 2017 में आई इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में बीते 11 सालों में प्रति व्यक्ति शराब की खपत दोगुनी हुई है। जहां 11 साल पहले एक व्यक्ति 3 लीटर शराब पीता था वहीं बीते 11 वर्षों में बढ़कर इसकी खपत बढ़कर 6 लीटर हो गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस दशक में भारतीय युवाओं में तंबाकू और शराब के अलावा एक और नशीले पदार्थ की लत तेजी से बढ़ी है। वह नशीला पदार्थ है ड्रग्स। ड्रग्स और अन्य मादक पदार्थों के सेवन से शारीरिक कार्यक्षमता बनाए रखने में ऊर्जा का अत्यधिक उपयोग होता है, जिसके चलते ये नशीले पदार्थ यकृत और फेफड़ों में विषाक्त पदार्थ के रूप मं जमा होने लगते हैं ।

खान-पान की आदतें भी बीते कुछ वर्षों में काफी तेजी से बदली है। सपरफूड से लेकर जंक फूड न केवल शहरों बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी अब पांव पसारने लगे हैं। साल 2018 में आई क्लिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 35 फीसदी भारतीय सप्ताह से भी कम समय में एक बार फास्ट फूड खाते हैं।

इंडियन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ के एक सर्वेक्षण के मुताबिक, 14 फीसदी स्कूली बच्चे मोटापे का शिकार हैं। जंक फूड में जरूरी पोषण तत्वों की कमी से मोटापा बढ़ता है, कम उम्र में कोलेस्ट्रॉल बढऩे का खतरा और लीवर और खाना पचाने वाले अन्य पाचन अंगों को जंक फूड को पचाने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा और हार्मोनल स्त्राव की आवश्यकता होती है, क्योंकि इन खाद्य पदार्थों में काबोर्हाइड्रेट और वसा की उच्च मात्रा होती है।

बदलती जीवन शैली और शहरी लाइफस्टाइल कम नींद का एक प्रमुख कारण है। काम का बोझ, शिक्षा का दबाव, रिश्तों में आती खटास, तनाव और अन्य समस्याओं के कारण लोगों को नींद नहीं आती है। युवा ज्यादातर समय मूवी देखने और रात में पार्टी करने में बिताते हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि नींद की कमी से तनाव के हार्मोन रिलीज होते हैं। यह टेस्टोस्टेरोन कम करता है। कम नींद से हृदय रोग और मोटोपे बढ़ने का खतरा बना रहता है। कम नींद की वजह से शरीर को और भी ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है ऐसे में वसा का संचय होता है, जिससे मधुमेह यानी डायबीटिज का खतरा कई गुना तक बढ़ जाता है।

योग, ध्यान और व्यायाम ये तीनो चीजें शरीर और शरीर से जुड़ी स्वास्थ्य समास्याओं से निजात पाने की संजीवनी हैं। ये सभी हमारे शरीर को ब्लड सकुर्लेशन को नॉर्मल (रक्त संचरण) और हार्मोन्स को बैलेंस करते हैं इसके साथ ही शारीरिक ऊर्जा और उसकी कार्य क्षमता को बनाए रखते हैं। शारीरिक व्यायाम करने के दौरान हमारे शरीर से वसा और कैलोरी बर्न होती है, जिससे शरीर को अधिक ऊर्जा मिलती है।


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फेसबुक यूजर्स नशेड़ी की तरह ले सकते हैं जोखिमभरे फैसले : शोध


फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफाम्र्स का अत्यधिक प्रयोग करने वाले यूजर्स फैसले करने में उतने ही बुरे हो सकते हैं, जितना कोई नशेड़ी होता है। एक नए शोध में यह जानकारी मिली है।

शोध के मुख्य लेखक और अमेरिका के मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डार मेशी ने कहा कि धरती पर करीब एक तिमाही मनुष्य सोशल मीडिया का प्रयोग करते हैं, और इनमें से कुछ लोगों को इसकी गलत लत लग गई है, जो कि इन साइटों के अत्यधिक प्रयोग करने से लगती है।

मेशी ने कहा कि मेरा मानना है कि सोशल मीडिया का जबदस्त लाभ है, लेकिन इसका एक स्याह पहलू भी है, जब लोग अपने आप को इससे दूर नहीं रख सकते। हमें इस अभियान को बेहतर ढंग से समझने की आवश्यकता है, ताकि हम यह निर्धारित कर सकें कि अत्यधिक सोशल साइट्स के उपयोग को एक लत माना जाना चाहिए।

यह शोध जर्नल ऑफ बिहेबियर एडिक्शंस में प्रकाशित किया गया है। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों को आयोवा गैम्बलिंग टास्क पूरा करने दिया। इस टास्क का प्रयोग सामान्यत: मनोवैज्ञानिक निर्णय लेने की क्षमता को नापने के लिए करते हैं। इस टास्क को पूरा करने में सोशल मीडिया की लत रखने वाले लोगों ने किसी नशेड़ी की भांति ही सही चयन करने में गलतियां कीं। जिन लोगों ने जितनी अच्छी तरह से टास्क पूरा किया, उन्हें सोशल साइटों की लत उतनी ही कम थी।


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शरीर की इन समस्याओं के लिए करें गर्म और ठंडा सेंक, जानें इसके बारे में


चोट या जोड़ों के दर्द में राहत के लिए ठंडा या गर्म सेंक करना आसान उपाय माना जाता है। लेकिन यह जानना भी जरूरी है कि कब और किस दर्द में कौनसा सेंक करना चाहिए। आइये जानते हैं इसके बारे में

आर्थराइटिस - घुटनों, कंधों, कोहनी व अंगुलियों के जोड़ों में ऊत्तकों का घिस जाना।
यह करें - गर्म पानी से सेंक करने पर जोड़ों व मांसपेशियों की अकड़न दूर होती है।

गाउट फ्लेयर अप - बॉडी में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ने से पैर के अंगूठे, कोहनी व एडी में अचानक दर्द उठना।
बर्फ से सेंक करने पर अचानक उठे दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है।

सिर दर्द - तंत्रिकाओं व रक्त वाहिकाओं से सिर दर्द या मांसपेशियों में खिंचाव से गले में दर्द।
बर्फ से सेंक करने से सिरदर्द में राहत मिलती है और गर्म पानी के सेंक से गले के दर्द में आराम।

मोच आना - मांसपेशियों के खिंचने से शरीर के किसी भी भाग में खून इकट्ठा होने की स्थिति या लील पड़ जाना।
चोट पर बर्फ का सेंक करने से जलन दूर होती है और गर्म पानी से सेंक करने पर जकड़न खत्म होती है।

खिंचाव आना - एड़ी, घुटने, पांव, कोहनी आदि के जोड़ों मे लिगामेंट के फट जाने पर खिंचाव आ जाने से दर्द होना।
शुरू में ठंडे सेंक से दर्द के कारण हो रही जलन दूर होती है, बाद में गर्म सेंक करने पर मांसपेशियों की अकड़न।

टेन्डीनिटिस -
पैरों व हाथों की अंगुलियों के छोटे जोड़ों में स्थित नसों (टेंडन्स) की झिल्ली में सूजन आ जाने से दर्द होना।
इस स्थिति में ठंडा सेंक करने से बर्फ पहले जलन कम होती है और बाद में दर्द से भी राहत मिलती है।

टेन्डिनोसिस -
घर्षण के कारण एड़ी के पास टखने के जोड़ों की पेशियों में दर्द व अकडऩ।
जब जलन खत्म हो जाए तो गर्म सेंक करना चाहिए जिससे अकड़न दूर होती है।

ठंडा सेंक क्योंं?
बर्फ हमारे शरीर की रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देती है। जिससे हमें दर्द व जलन से हमें छुटकारा मिलने के साथ ही चोट ठीक हो जाती है।

गर्म सेंक क्यों?
गर्मी से नसों में रक्त प्रवाह तेज हो जाता है जिससे अकड़ी हुई मांसपेशियां ढीली होने लगती हैं और दर्द में आराम मिलता है।

सावधानी -
गंभीर चोटों में गर्म सेंक न लें। यह चोट में हो रही जलन को और बढ़ा सकता है। ऐसे में उस चोट को ठीक होने में ज्यादा समय भी लग सकता है

चोट के 6-7 घंटे बाद ठंडे सेंक से बचें -
गर्म पानी का सेंक बहुत अधिक सर्दी के मौसम में करना फायदेमंद होता है। गर्मी के मौसम में गर्म सेंक नहीं करना चाहिए। सर्दी के मौसम में जोड़ों पर स्थित नसें सिकुडऩे लगती हैं। ऐसे में गर्म पानी के सेंक से दर्द पैदा करने वाले ऊत्तक और नसें खुल जाती हैं। ठंडा सेंक केवल ताजा चोट के समय ही करना चाहिए। यदि चोट लगे 6-7 घंटे हो चुके हैं तो ठंडे सेंक से बचना चाहिए। नील पड़ने से रोकने व जोड़ों में खून को इकट्ठा होने से रोकने के लिए ठंडा सेंक किया जाता है।


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चमत्कार जो हुआ नहीं, किया गया था, यूं बचाई गई एक जिंदगी


क्या कोई बच्चा जिसकी सांस गति और हृदय की धड़कन डेढ़ घंटे तक बंद रही हो, वह फिर से जीवित हो सकता है? घटना ऑस्ट्रिया के एक शीत प्रदेश की है। 3 साल की मासूम बच्ची ठंडे फिश पॉण्ड में डूब गई। माता-पिता को मालूम होने व कुंड से निकालने में आधा घंटा लग गया।

बच्ची ठंडी टीप, बेहोश, सांस रुकी हुई, हृदय गति बंद। इमरजेंसी को फोन किया। जवाब मिला हम तुरंत हेलिकॉप्टर से पहुंच रहे हैं, तब तक बच्ची के मुंह में सांस फूंकिए।उसका सीना आगे से दबाइए। 8 मिनट में इमरजेंसी टीम पहुंच गई और बच्ची को सीपीआर करते हुए हेलीकॉप्टर से ले उड़ी। अस्पताल की इमरजेंसी को फोन किया कि 30 मिनट तक ठंडे पानी में डूबी हुई बच्ची को ला रहे हैं। उचित आपतकालीन इलाज की तैयारी करें। अस्पताल पहुंचने में उन्हें 25 मिनट लगे।

बच्ची को सीधा ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। बच्ची का अंदर का ताप तब मात्र 18.7 डिग्री से. था। एक टीम ने कृत्रिम सांस और सीने को दबाने की प्रक्रिया (सीपीआर) चालू रखी। दूसरी टीम ने दाईं जांघ की बड़ी धमनी में एक नली डाली और पास की शिरा में दूसरी नली और दोनों को हार्ट-लंग-बाई-पास मशीन से जोड़ दिया। शिरा से खून कृत्रिम फेफड़े (लंग) में गया जहां उसके ऑक्सीकरण के साथ उसे धीरे-धीरे गर्म भी किया गया और एक पंप के द्वारा धमनी में लौटा दिया गया। यह शुरू करने में 20 मिनट लग गए। शरीर का तापमान 37 डिग्री लाने में 6 घंटे लगे।

जब बच्ची का तापमान 24 डिग्री पर पहुंचा तभी दिल पुन: धड़कना चालू हो गया। लेकिन दुर्भाग्य से फेफड़ों में तरल भरा था, अत: ऑक्सीकरण नहीं हो पा रहा था। दिल धड़कने से रक्त संचार शुरू हुआ लेकिन रक्त फेफड़ों में ऑक्सीकृत नहीं हो रहा था। जरूरी था कि हृदय को चालू रखते हुए रक्त को बाहर कृत्रिम फेफड़े में आक्सीकृत कर वापस हृदय में भेजा जाए। इस प्रक्रिया को एक्स्ट्राकोर्पोरियल मेम्ब्रेन आक्सीजेनेशन कहते हैं।

उन्होंने बच्ची का सीना खोला व अभ्यस्त विधि से एक नली हृदय की बड़ी धमनी एओर्टा में और दूसरी नली दाएं एट्रियम में डाली और ईसीएमओ मशीन से जोड़ दिया। बच्ची को आईसीयू में शिफ्ट किया गया। धीरे-धीरे ईसीएमओ के काम को कम करने और फेफड़ों का काम पूरा शुरू होने में 15 घंटे लगे। तब ईसीएमओ हटाया गया व सीना बंद किया गया।

उसके बाद कृत्रिम सांस यंत्र और सघन चिकित्सा चालू रखने के लिए बच्ची को बेहोश रखा गया। 12 दिन बाद बच्ची होश में आई और कृत्रिम सांस यंत्र को हटाया जा सका। दिमाग पूरी तरह काम कर रहा था। छह महीने बाद दाएं पांव और बाएं हाथ में थोड़ी कमजोरी के अलावा बच्ची पूरी तरह स्वस्थ थी। यह था चमत्कार जो हुआ नहीं, किया गया था।


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Stay Healthy - बढ़ती उम्र में 'फील गुड' कराती है जादू की झप्पी


दुनिया के कई शोधों में यह साफ हो गया है कि गले मिलने से न केवल फील गुड वाले हार्मोंस शरीर में स्रावित होते हैं, बल्कि मन भी शांत होता है। जादू की झप्पी लेना या देना यानी गले मिलना बढ़ती उम्र के लोगों के लिए फिट रहने का सबसे अच्छा उपचार है।

कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों द्वारा किए गए शोध के अनुसार बढ़ती उम्र के कारण शरीर में ऐसे रसायनों की कमी हो जाती है जो हड्डियों और जोड़ों में दर्द से राहत दिलाते हैं।

गले मिलने से मानव शरीर को पर्याप्त मात्रा में हार्मोंस मिल जाते हैं जिससे हड्डियों का दर्द कम हो जाता है और हम खुद को पहले की तुलना में जवां महसूस करने लगते हैं। जब आप किसी को गले लगाते हैं तो उसे सीधे-सीधे यह महसूस कराते हैं कि आप उसकी केयर करते हैं। इससे दोनों को ही 'फील गुड' महसूस होता है। यही नहीं, हग थैरेपी से जुड़े लोगों का मानना है कि जब इंसान परेशानी या निराशा से घिरा होता है तब उस पर बातों का असर नहीं होता। वहीं, गर्मजोशी के साथ गले लगाने से उसका मन हल्का हो जाता है।


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जानें क्या गुस्से में जोर से चिल्लाकर सेहत बिगाड़ रहे हैं आप ?


कई बार चिढ़ने, गुस्से या जोश में आकर जोर से बोलने से फायदा कम और नुकसान ज्यादा होता हैै। नीचे दिए सवालों के जवाब देकर खुद ही परख लीजिए कि कहीं आप भी अकारण तो नहीं गरजते!

1. आपको लगता है कि केवल उन्हीं लोगों की बात सुनी जाती है जो जोर से बोलते हैं !
अ: सहमत

ब: असहमत

2. अपने अनुभवों से आपको यकीन है कि चुप रहने वाले लोग अक्सर नुकसान में रहते हैं !
अ: सहमत

ब: असहमत

3. मेरी जोर से बोलने की आदत बचपन से ही है और अब इसे बदलना मुश्किल है !
अ: सहमत

ब: असहमत

4. मेरे परिवार में सब जोर-जोर से बोलते हैं तो मुझे भी तो वैसा ही करना पड़ेगा !
अ: सहमत

ब: असहमत

5. मुझे नहीं लगता कि जोर से या चिल्लाकर बोलने का सेहत पर कोई बड़ा नुकसान होता है !
अ: सहमत

ब: असहमत

6. मैं केवल तभी गरजता/गरजती हूं जब स्थिति बेहद बिगड़ जाती है, अन्यथा नहीं !
अ: सहमत

ब: असहमत

7. मेरे सहकर्मी ऐसे हैं कि जो मधुरता या चुप्पी की भाषा समझते नहीं, इसलिए मेरी आदत भी पड़ गई!
अ: सहमत

ब: असहमत

8. मैंने अकारण चिल्लाने के बुरे प्रभाव देखे और भोगे भी हैं, लेकिन मजबूरी में ऐसा करना पड़ता है !
अ: सहमत

ब: असहमत

9. मैं आगे से कोशिश करुंगी/करूंगा कि सामान्य व्यवहार में वाणी का संयम बनाए रखूं !
अ: सहमत

ब: असहमत

स्कोर और एनालिसिस -
गरजना आपकी 'कमजोरी' है : यदि आप 7 या उससे ज्यादा सवालों से सहमत हैं तो आपने जोर से बोलने, चिल्लाने को अपनी कमजोरी बना लिया है। इससे आपको नुकसान हो रहा है। सोचिए आपके कितने काम बिना ऐसा किए बन जाते हैं। सामान्य व्यवहार करना व मौन रहना सीखें।

बोलने का संयम आपकी 'शक्ति' है : यदि 7 या उससे से ज्यादा सवालों से असहमत हैं तो आपने बोलने पर लगाम लगा रखी है। यही आपकी शक्ति है। आपको चिल्लाने या गरजने की जरूरत केवल तभी पड़ती है जब कोई सही को गलत करता है। दूसरों को भी खासकर बच्चों को भी सिखाएं कि धीमे और अच्छा बोलने के फायदे हजार हैं।


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जानिए कान में पानी चला जाए तो क्या करें


कान में पानी चले जाने पर हम अंगुली के सहारे उसे निकालने की कोशिश करते हैं या घंटों गर्दन टेढ़ी किए बैठे रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कई बार व्यक्ति के कान में पानी जाता नहीं है बल्कि उसे सिर्फ एहसास होता रहता है। वैसे अगर पानी चला भी जाए तो खुद-ब-खुद निकल आता है।

पानी जाने पर किसी चीज के जरिए उसे निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए वर्ना कान में संक्रमण का खतरा हो सकता है। ज्यादा तकलीफ हो या कान में किसी अन्य प्रकार का रोग हो तो विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। स्वीमिंग करते समय कान में ईयर प्लग लगा सकते हैं लेकिन जिनके कान के पर्दे में छेद हो या कान से मवाद आती हो, उन्हें स्वीमिंग नहीं करनी चाहिए।

कान में गए पानी को बाहर निकालने के लिए ड्रायर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ड्रायर को कान से कुछ दूरी पर रखें। हीट और ब्लो को कम करके इससे कान में हवा फ्लो करें। कुछ देर तक एेसा करें। हीट को ज्यादा तेज न करें। जरूरत के हिसाब से प्रक्रिया को दोहराएं।


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Health tips in hindi - बार-बार घड़ी देखने से बचें, तनाव दूर होगा


आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव एक आम समस्या हो चली है, जिसका का असर हमारे पूरे स्वास्थ पर पड़ता है।तनाव दूर करने के लिए आजमाएं ये उपाय :

बार-बार घड़ी न देखें
बार-बार घड़ी देखकर समय समय का पाबंद बनना ठीक नहीं, इससे तनाव हो सकता है। बेहतर होगा कि आप समय तालिका बनाकर योजनाबद्ध तरीके से काम करें।

15 मिनट का शून्य काल
दिनभर में कम से कम 15 मिनट शून्य काल के लिए निकालें। इस समय कुछ भी न करें, चुपचाप बैठे रहें। दिमाग को शांति मिलेगी।

विचारों को महत्व दें
दिनभर की खास बातों के साथ ताजा घटनाक्रम पर अपने विचार लिखें। खुद की किसी यात्रा के अनुभव व कविताएं भी लिख सकते हैं। छुट्टी के दिन परिवार के सदस्यों के लिए व्यंजन बनाएं, बच्चों के प्रोजेक्ट बनाने में मदद करें या बागवानी को समय दें।

संतुष्ट होना सीखें
किसी काम को 100% परफेक्ट करने की चाह आपको तनाव दे सकती है। बेहतरीन कोशिश करें और अच्छे नतीजों से संतुष्ट होना सीखें। हरदम सर्वोत्तम नतीजे नहीं मिला करते।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/body-soul/follow-these-simple-ways-to-relieve-stress-and-anxiety-3963057/

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