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अंतरिम बजट 2019: सस्ता हो जाएगा AC, TV, फ्रिज समेत ये सामान, 1 फरवरी काे सरकार कर सकती है एेलान


नर्इ दिल्ली। आगामी अंतरिम बजट में सरकार टीवी, फ्रिज, एयर कंडिशनर आैर वाॅशिंग मशीन के दाम को कम करने का एेलान कर सकती है। कंज्यूर इलेक्ट्राॅनिक्स एंड अप्लायंस मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (CEAMA) ने सरकार को सलाह दिया है कि इन सभी सामानों के आयात पर लगने वाले क्सटम ड्यूटी को घटा दिया जाए। एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ceama ने सरकार ने कम्प्रेसर, बैटरी आैर डिस्प्ले पैनल समेत कुछ सामानाें पर कस्टम ड्यूटी घटाने को लेकर भी बात की है। इन सामानों पर मौजूदा कस्टम ड्यूटी 10 फीसदी है जिसे घटाकर 5 फीसदी करने का आग्रह किया गया है। यह कदम मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बूस्ट को लेकर उठाया जा सकता है।


पिछले बजट में सरकार ने बढ़ाया था कस्टम ड्यूटी

CEAMA के अध्यक्ष कमल नंदी ने न्यूज एजेंसी को दी गर्इ जानकारी में कहा, "इससे मैन्युफैक्चर्स को उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी साथ ही बाजार में इस सेग्मेंट में प्रतिस्पर्धा भी बनेगी। इससे निर्यात में इजाफ के साथ-साथ एसीर्इ गुड्स पर टैक्स फायदा भी होगा।" पिछले साल बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मोबाइल फोन्स पर कस्टम ड्यूटी को 15 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया था। साथ ही माेबाइल फोन्स के कुछ पार्ट्स आैर टीवी पर लगने वाले कस्टम ड्यूटी को 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था। इसके बाद सितंबर माह में, राजकोषीय घाटे पर दबाव को देखते हुए सरकार ने 10 किलोग्राम से कम क्षमता वाले वाॅशिंग मशीन, फ्रिज आैर एसी पर कस्टम ड्यूटी को 10 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया था।


सरकार केवल कस्टम ड्यूटी में की कर सकती है बदलाव

बताते चलें कि इस बार का बजट अंतरिम बजट होगा आैर इसे अंतरिम वित्त मंत्री एवं रेल मंत्री पीयूष गोयल पेश करेंगे। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद अब सरकार के पास अप्रत्यक्ष कर में अधिक बदलाव करने का स्कोप नहीं है। जीएसटी काउंसिल ही जीएसटी दरों से संबंधित सभी फैसले लेती है। सरकार इसमें कस्टम ड्यूटी से जुड़े हुए ही फैसले ले सकती है। साथ ही सरकार उन सामानों पर लगने वाले अप्रत्यक्ष कर में भी बदलाव कर सकती है जो जीएसटी के दायरे में नहीं आती।
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बजट 2018 - एक क्लिक में जानिए मोदी सरकार के घोषणाओं की हकीकत


नई दिल्ली। बजट 2018 -19 के लिए मोदी सरकार ने स्वास्थय, कृषि, गोल्ड, रक्षा जैेसे क्षेत्रों के लिए जो बड़ी तो कर दी है। लेकिन क्या इसको अमल मेंं लाना इतना आसान है। आइए जानते हैं कि सरकार ने किस क्षेत्र के लिए क्या घोषणाएं की हैं और उनकी हकीकत क्या है।

1. स्वास्थ्य नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम
दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ केयर योजना का दावा
ओ बामा केयर के जवाब में दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थकेयर स्कीम लाने का ऐलान किया है। नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम (राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना) के तहत अब 10 करोड़ गरीब परिवारों के लिए सालाना 5 लाख रुपए के स्वास्थ्य बीमा का ऐलान किया। वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि इससे 50 करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा। इस लिहाज से देखें तो देश की करीब १२५ करोड़ आबादी में से करीब 40 प्रतिशत लोग इस दायरे में आएंगे।
योजना तो है पर लापरवाही
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना 1 अप्रेल 2008 से लागू है। इस साल केंद्र ने राज्यों को 1000 करोड़ दिया, लेकिन पैसे खर्च ही नहीं हुए। 21 राज्यों के 21 करोड़ बीपीएल को नौ महीने में लाभ नहीं मिला है। जबकि योजना के तहत केंद्र से 60फीसदी रकम मिलती है।

2. कृषि किसानों को सब्जबाग दिखाए
खरीफ फसलों पर लागत से डेढ़ गुना एमएसपी देंगे
जे टली ने कहा-सरकार ने रबी की फसल पर उत्पादन लागत से डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया है, अब खरीफ की फसल पर भी कम से कम डेढ़ गुना एमएसपी देंगे। इसके अलावा किसान के्रडिट कार्ड मछुआरों और पशुपालकों को दिया जाएगा। टमाटर, आलू और प्याज जैसे सालभर प्रयोग में आने वाली खाद्य वस्तुओं के लिए ऑपरेशन ग्रीन लॉन्च। बांस की पैदावार बढ़ाने के लिए सरकार मुहैया कराएगी फंड।
ये है हकीकत
भारतीय खाद्य निगम के आंकड़ों के अनुसार 2015-16 में गेहूं पर उत्पादन लागत 2408 रुपए प्रति क्विंटल आई थी। जबकि 2017 में एमएसपी 1735 रुपए प्रति क्विंटल ही मिला है। इसी तरह धान की फसल पर लागत 3264 रुपए प्रति क्विंटल थी, जबकि समर्थन मूल्य 1590 रुपए तक मिला।

3. गोल्ड नीति आयात-निर्यात पर असर
अब कहीं भी सोना लाने-ले जाने में होगी आसानी
कें द्र सरकार जल्द ही नई गोल्ड नीति का ऐलान करेगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इससे सोने के आयात और निर्यात में आसानी होगी। ज्वेलर्स कारोबारियों की मांग थी कि सोने पर आयात शुल्क घटाकर 4 फीसदी किया जाए। हालांकि, जवाहरात उद्योग को सरकार ने झटका दे दिया है। हीरे व रंगीन रत्नों पर कस्टम ड्यूटी 2.5 फीसदी से बढ़ाकर पांच फीसदी कर दी गई है।
मंदी की मार...
5 फीसदी सीमा शुल्क से जवाहरात के कच्चे माल का निर्यात महंगा होगा। जबकि अन्य देशों में हीरे व रंगीन रत्नों का निर्यात कस्टम फ्री है। पहले से ही मंदी है। इमिटिशन ज्वैलरी पर आयात शुल्क २०त्न हो गई, इससे ये महंगी हो जाएगी।

4. सुरक्षा - संभावित जीडीपी का 1.58%

रक्षा बजट 1962 में चीन युद्ध के बाद सबसे कम

2018-19 के संभावित जीडीपी का लगभग ये 1.58 फीसदी है। पिछले बजट अनुमान के मुकाबले यह 7.81 फीसदी ज्यादा है, जबकि संशोधित अनुमान के मुकाबले यह 5.91फीसदी ज्यादा है। लेकिन देश की जीडीपी के मुकाबले रक्षा खर्च लगातार गिर रहा है।

अन्य देशों में बढ़ रहा खर्च..
अमरीका अपनी जीडीपी का 4 प्रतिशत, रूस 4.5, इजरायल 5.2, चीन 2.5 और पाकिस्तान 3.5 फीसदी रक्षा बजट के लिए आवंटित करता है।

 


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बिटकॉइन से कमाई करने की सोच रहे हैं तो हो जाए सावधान, सरकार ने लिया बड़ा फैसला


नई दिल्ली। बीते कुछ महीनों में क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन की चकाचौंध में कईयों ने खूब मोटे पैसे कमाए। आलम यह था कि दो - महीने तक लगातार हर ओर बिटकॉइन की चर्चा थी। क्योकिं इसका तगड़ा मुनाफा हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा था। अभी भी कई लोग ऐसे हैं जो बिटकॉइन की लालच में फंसे हुए हैं। अगर आप भी बिटकॉइन के जरिए पैसा कमाने की सोच रहे तो सावधान हो जाइए। मोदी सरकार ने अपने बजट में साफ ऐलान कर दिया है कि बिटकॉइन गैरकानूनी है। वित्त मंत्री ने बजट भाषण के दौरान एक बार फिर साफ कर दिया कि बिटकॉ़इन या फिर इस तरह की कोई भी क्रिप्टो करेंसी भारत में मान्य नहीं है। सरकार के इस ऐलान के बाद उन लोगों को बड़ा झटका लगेगा जिन्होंने बिटकॉइन में निवेश किया था। यानी की बाजार में लाखों लोगों को करोड़ों और अरबों का नुकसान होगा। उससे पहले आरबीआई भी बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी को खारिज कर चुकी है। चर्चा थी कि रिलायंस भी जियोकॉइन के नाम से क्रिप्टोकरेंसी लॉन्च करने की तैयारी में है लेकिन बजट से पहले जियो ने भी साफ कर दिया कि ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।

140 फीसदी तक मिला था रिटर्न

इससे पहले पिछले साल साल अगस्त से अभी तक नवंबर तक केवल 3 महीने में इसकी कीमत में 140 फीसदी का उछाल देखा गई थी। अगस्त में बिटकॉइन की 1 यूनिट की कीमत 3,16,200 रुपए थी जो नवंबर 7,51,500 के उपर जा पहुंची है। जबकि सालाना आधार पर देखें तो इस करेंसी ने एक साल में 9 गुना से ज्यादा का रिटर्न दिया था। हालांकि उसके बाद सरकार और आरबीआई के बयानों के बाद इसमें निवेश करने वाले सावधानी बरतने लगे।

क्या है बिटकॉइन

बिटकॉइन एक तरह की डिजिटल करेंसी है। जिसे क्रिप्टो करेंसी भी कहा जाता है। इसका इस्तेमाल ऑनलाइन ही किया जा सकता है। आप बिटकॉइन का इस्तेमाल सिर्फ कुछ बाहरी देशों में ऑनलाइन शॉपिंग या हस्तांतरण के लिए कर सकते हैं। यह एक प्रकार की स्वतन्त्र मुद्रा है, जिस पर किसी भी संस्था या देश का अधिकार नहीं है। इसका उत्पादन स्वतन्त्र रूप से कंप्यूटर प्रोसेसिंग प्रणाली माइनिंग के द्वारा किया जाता है। माइनर्स विशेष प्रकार के हार्डवेयर का उपयोग करके विभिन्न प्रकार के ट्रांजेक्शन को प्रोसेस करते हैं और नेटवर्क को सिक्योर करते हैं। जिनके बदले में नए बिटकॉइन बनते है, जो माइनर्स को मिलते हैं।

एप के जरिए खरीद-फरोख्त

दो कंपनियां अपने एप के जरिए क्रिप्टो करेंसी बिटकॉइन की खरीद-फरोख्त करा रही है। इसमें जेप-पे समेत एक अन्य एप भी शामिल है। इन एप पर पहले रजिस्ट्रेशन करना होता है। रजिस्ट्रेशन के बाद बिटकॉइन खरीदने के लिए जेप-पे के अकाउंट में पेमेंट करनी होगी। जिसके बाद एक यूनिक कोड आता है। वही, कोड बीटीसी बिटकॉइन ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

 


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MARKET UPDATE: जेटली ने फिर किया बाजार को निराश, जानिए क्यों टूटा सेंसेक्स


नई दिल्ली। मोदी सरकार का बजट भारतीय शायद भारतीय शेयर बाजार को रास नही आया। बजट के बाद हफ्ते के आखिरी कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत हुई है। सुबह के 11.36 बजे बीएसई का सेंसेक्स 546 अंक गिरकर 35361 अंक पर कारोबार करता दिख रहा है। जबकि एमएसई के निफ्टी में भी 163 अंकों की कमजोरी देखी जा रही है और यह 10854 अंक पर कारोबार कर रहा है। इंडेक्स की बात करें बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.61 फीसदी की गिरावट देखी जा रही है। जबकि बीएसई मिडकैप इंडेक्स में 1.26 फीसदी की कमजोरी देखी जा रही है।

मिडकैप-स्मॉलकैप इंडेक्स में भारी गिरावट

इंडेक्स की बात करें लार्जकैप शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 1.61 फीसदी टूट गया है। जबकि वहीं बीएसई के स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.26 फीसदी की कमजोरी आई है।

एशियन मार्केट में गिरावट

शुक्रवार को एशियाई बाजारों में भी गिरावट देखी जा रही है। सिंगापुर का एसजीएक्स निफ्टी 1.11 फीसदी टूटकर 10,927 अंक पर कारोबार कर रहा। जापान का बाजार निक्केई 304 अंक की कमजोरी के साथ 23,182 अंक पर कारोबार कर रहा है। हालांकि हैंग सेंग 63 अंक चढ़कर 32,702 अंक पर कारोबार कर रहा है। कोरियाई बाजार का इंडेक्स कोस्पी 1.61 फीसदी की बढ़त के साथ 2568 अंक पर कारोबार कर रहा है, जबकि ताइवान इंडेक्स 0.33 फीसदी गिरकर 11,124 अंक पर कारोबार कर रहा है। शंघाई कम्पोजिट 0.40 फीसदी टूटा है। वहीं स्ट्रेट्स टाइम्स में 0.20 फीसदी की कमजोरी आई है। वहीं गुरुवार के कारोबार में अमेरिकी बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। डाओ जोंस 37 अंक की मामूली बढ़त के साथ 26,187 अंक पर बंद हुआ। वहीं नैस्डैक 26 अंक गिरकर 7,386 अंक पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 इंडेक्स 0.06 फीसदी की कमजोरी के साथ 2,822 अंक पर बंद हुआ।

शेयरों का हाल

निफ्टी में शुमार दिग्गज शेयर्स की बात करें तो 10 हरे निशान में और 40 गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। सबसे ज्यादा तेजी आइटीसी, एचसीएलटेक, टीसीएस, बजाज ऑटो और इंफोसिस के शेयर्स में है। वहीं, गिरावट इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस, बजाज फाइनेंस, अदानीपोर्ट्स, येस बैंक और एसबीआईएन के शेयर्स में है।


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RSS के सहयोगी संगठन ने बजट का बताया निराशाजनक, ​राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन की घोषणा


नई दिल्ली। भारतीय मजदूर संघ ने बजट 2018 को निराशाजनक बताया है। यही नहीं संघ ने बजट के खिलाफ शुक्रवार को देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान भी किया है। मजदूर संघ का यह असंतोष और अधिक महत्वपूर्ण इस लिए है, क्योंकि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक सहयोगी संगठन है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो बजट के खिलाफ आरएसएस के सहयोगी संगठन के इस तहर से खुलकर सामने आने को विपक्षी दल मुददा बना सकती हैं।

मजदूर वर्ग का नहीं बजट

वित्त मंत्री की ओर से गुरुवार को पेश किए आम बजट पर भारतीय मजदूर संघ का कहना है कि सरकार यह ने मजदूरों और नौकरीपेशा वर्ग का बजट नहीं है। बजट में मजदूर वर्ग को बिल्कुल तवज्जो नहीं दी गई है। यही नहीं अपेक्षा के अनुरूप न तो आयकर स्लैब में कोई बदलाव किया गया और न ही मजदूरों को ध्यान में रखते हुए कोई ऐलान किया गया है। बजट को निराशाजनक बताते हुए भारतीय मजदूर संघ ने बजट शुक्रवार को देशव्यापी प्रदर्शन की घोषणा कर दी है।

नोटबंदी पर उठाए थे सवा

बता दें कि भारतीय मजदूर संघ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक सहयोगी संगठन है। यह संगठन मजदूरों से जुड़ी समस्याओं को उठाता है। ऐसा पहली बार नहीं है, जब संगठन ने बीजेपी नीत सरकार पर हमला बोला हो। इससे पहले भी भारतीय मजदूर संघ मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना करता रहा है। नोटबंदी और जीएसटी जैसे मसलों पर भी संगठन काफी मुखर रहा है। संगठन ने केन्द्र सरकार के दोनों कदमों को मजदूर वर्ग के लिए काफी नुकसानदेह बताया था। उधर, पीएमके के संस्थापक एस. रामदॉस ने गुरुवार को 2018-19 के केंद्रीय बजट को 'कुल मिलाकर निराशाजनक' करार दिया। रामदॉस ने यहां एक बयान में कहा कि वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा कृषि से संबंधित प्रस्तावों का फायदा लोगों को तभी मिलेगा जब वे सही तरीके से लागू किए जाएंगे। मोदी सरकार के अंतिम पूर्ण बजट के सवाल पर रामादॉस ने कहा कि ऐसी अपेक्षाएं थीं कि बजट में लोगों के फायदे के लिए कुछ घोषणाएं हो सकती हैं, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। उन्होंने कहा कि कृषि और ग्रामीण विकास के लिए बहुत कुछ अपेक्षित था लेकिन कुछ बड़े बदलाव नहीं हुए।

 

 

 

 

 

 

 


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जानिए क्या है बजट की सबसे बड़ी घोषणा की सच्चाई


सरकार एक नई स्वास्थ्य सुरक्षा योजना शुरू करेगी जिसके तहत प्रति परिवार को एक लाख रुपये सालाना का कवर मिलेगा। 60 साल से ऊपर के वरिष्ठ नागरिकों को 30 हजार रुपये का अतिरिक्त टॉप अब भी मिल सकेगा।

- अरुण जेटली , बजट भाषण, 2016

मौजूदा राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत सालाना सिर्फ 30 हजार रुपये का कवरेज मिल रहा है। हम एक फ्लैगशिप स्वास्थ्य सुरक्षा योजना शुरू करेंगे। इसके तहत 10 करोड़ गरीब परिवारों (50 करोड़ सदस्यों) को पांच लाख रुपये प्रति वर्ष प्रति परिवार का लाभ मिल सकेगा।

- अरुण जेटली, बजट भाषण, 2018

 

नई दिल्ली : वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दस करोड़ परिवारों को सालाना पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध करवाने का जो एलान किया है, वह इस बजट ही नहीं, मोदी सरकार की अब तक की सबसे बड़ी लोक कल्याणकारी योजनाओं में शामिल हो सकता है। लेकिन हैरानी की बात है कि खुद उन्होंने ही दो साल पहले अपने बजट भाषण में इसी नाम से इस योजना का एलान किया था। लेकिन वित्त मंत्री का वह एलान सिर्फ कागजों में ही रह गया। इस बात की गवाही उन्होंने खुद अपने ही भाषण में दे दी। उन्होंने खुद कहा कि मौजूदा स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत सिर्फ 30 हजार रुपये का कवर ही मिल रहा है।

 

पहले थी आरएसबीवाई

पिछली सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) के नाम से असंगठित क्षेत्र के मजजदूरों के लिए इसे शुरू किया था। इसके बेहद सफल मॉडल को देखते हुए इसे दूसरे गरीब परिवारों के लिए भी शुरू करने का फैसला किया गया। बाद में इसे स्वास्थ्य मंत्रालय के जिम्मे दे दिया गया। इसके साथ ही इसका नाम 2016-17 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना यानी नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम (आरएसएसवाई या एनएचपीएस) रखा गया। अपने बजट भाषण में गुरुवार को वित्त मंत्री ने फिर से इसी नाम से इस योजना को शुरू करने की घोषणा की है। दो साल पहले के बजट में एलान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी मासिक प्रगति बैठक के दौरान इस पर कई बार चर्चा भी की थी। लेकिन इस पर सहमति नहीं बन सकी थी।

 

तैयारी में लगेगा वक्त

स्वास्थ्य मंत्रालय के शीर्ष सूत्रों ने कहा कि इसे किस तरह लागू किया जाएगा, इसको ले कर अभी पूरी व्यवस्था तय नहीं की गई है। अगर सरकार इसे लागू करने के लिए निजी बीमा कंपनियों की बजाय कुछ राज्यों में अपनाए गए ट्रस्ट के सफल मॉडल को अपनाती है, तो उसके गठन से ले कर उसे ऑपरेशनल बनाने तक में समय लगेगा। इसी तरह लाभार्थियों की पहचान, रजिस्ट्रेशन, कार्ड उपलब्ध करवाने से ले कर बहुत सी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। ऐसे में सरकार के लिए अपने मौजूदा कार्यकाल में इसे लागू करना बड़ी चुनौती होगी।

 

क्या है बीमा योजना

अगर यह योजना लागू हो जाती है तो आम लोगों को अस्पताल में भर्ती होने पर खर्च होने वाली पांच लाख रुपये तक की रकम की चिंता नहीं करनी होगी। यह वास्तव में दुनिया की ऐसी सबसे बड़ी योजनाओं में शामिल होगी। ऐसे में गरीबों को सिर्फ सरकारी अस्पताल में ही जाने की बाध्यता नहीं होगी। वे ऐंपेनल्ड प्राइवेट अस्पताल में भी इलाज करवा सकेंगे। यह रकम परिवार के लिए सामूहिक रूप से तय की गई है। यानी एक सदस्य पर अगर चार लाख खर्च हुए तो उसी साल के दौरान दूसरे को एक लाख तक का ही लाभ मिल सकेगा।

 

क्या हैं खतरे

अब तक सरकार अपनी योजनाओं के तहत सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर खर्च करती थी। लेकिन बीमा योजना के बाद सरकारी धन का बड़ा हिस्सा इस पर खर्च हो जाएगा। इससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के उपेक्षित होने और सही निगरानी व्यवस्था नहीं होने पर निजी क्षेत्र की मुनाफाखोरी बढ़ने की आशंका भी है।

स्वास्थ्य मंत्री भी चुप

बजट के तुरंत बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मीडिया को बुलाया था। इस दौरान खास तौर पर मीडिया के सामने दोनों राज्य मंत्री भी मौजूद रहते। जाहिर है कि बजट के तुरंत बाद इस योजना के बारे में ही वे मीडिया को बताते। लेकिन ऐन मौके पर उनका कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। इसकी कोई वजह भी नहीं बताई गई है।


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बजट से केजरीवाल निराश, कहा- दिल्ली के साथ सौतेला व्यवहार, नहीं दिया कुछ


नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को कहा कि वह केंद्रीय बजट से निराश हैं और भाजपानीत केंद्र सरकार ने 'दिल्ली के साथ सौतेला व्यवहार' जारी रखा है। केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, "मैंने राष्ट्रीय राजधानी में कुछ आधारभूत परियोजनाओं के लिए कुछ वित्तीय सहायता की उम्मीद की थी। मैं बहुत निराश हूं कि केंद्र ने दिल्ली के साथ सौतेला व्यवहार जारी रखा है। उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी बजट को 'निराशाजनक' बताया और कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार दिल्ली के नागरिकों के साथ दूसरे दर्जे के नागरिक के तौर पर व्यवहार करती है।

जाहिर की नाखुशी

कई सिलसिलेवार ट्वीट में उन्होंने बजट के प्रति अपनी नाखुशी जाहिर की। उन्होंने अनाधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की योजना की घोषणा न करने और शहर में वायु प्रदूषण से मुक्ति के लिए इलेक्ट्रिक बस आवंटित न करने पर निराशा जाहिर की। इस बात का ध्यान दिलाते हुए कि दिल्ली में जमीन केंद्र सरकार के अंतर्गत है, उन्होंने कहा कि अनाधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की किसी योजना की घोषणा नहीं की गई और ना ही दिल्ली सरकार को क्लिनिक, स्कूल, अस्पताल और बस डिपो बनाने के लिए और जमीन दी गई। सिसोदिया ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि दिल्ली पुलिस केंद्र के अंतर्गत आती है। इसके बावजूद भी अपराध को नियंत्रित करने और महिलाओं की सुरक्षा, जिसने दिल्ली को भारत की अपराध राजधानी बनाया है, पर किसी योजना की घोषणा नहीं की गई। बहुत ही निराशाजनक।

दिल्ली को नहीं मिला कुछ

सिसोदिया ने कहा कि वर्ष 2001-02 के बाद केंद्रीय कर में दिल्ली के हिस्से में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं की गई। यह अभी भी 325 करोड़ रुपये पर ठहरी हुई है। भारत में किसी भी अन्य राज्य के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाता। भाजपा सरकार दिल्ली के निवासी को दूसरे दर्जे का नागरिक समझती है।


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बजट 2018 : हवाई परिवहन को मध्यमवर्ग के लिए सुलभ बनाने का लक्ष्य, बुनियादी ढांचा बढ़ाने पर जोर


नई दिल्ली : आर्थिक विशेषज्ञ पहले से ही यह उम्मीद कर रहे थे कि इस बार का बजट चुनावी बजट होगा, क्योंकि इस पूर्ण बजट के बाद अगले आम बजट तक कोई और पूर्ण बजट नहीं आना है। इसलिए यह उम्मीद की जा रही थी कि हर वर्ग के लिए इसमें जरूर कुछ न कुछ खास होगा। इसी के मद्देनजर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट में किसानों और मध्य वर्ग को साधने का पूरा प्रयास किया है। मध्यवर्ग को साधने के लिए उन्होंने इस बार के बजट में हवाई परिवहन को छोटे शहरों और मध्यम वर्ग के पॉकेट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही वित्त मंत्री ने पर्यटन और आपातकालीन चिकित्सा देखभाल को प्रोत्साहन देने के लिए सी-प्लेन गतिविधियों में निवेश को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया है। इसके लिए वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में हवाई परिवहन और सी-प्लेन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार करने की घोषणा की।

हवाई अड्डा क्षमता में पांच गुना विस्तार का लक्ष्य
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में नागर विमानन क्षेत्र में हवाई अड्डा क्षमता में पांच गुना विस्तार के लिए एक साल में करीब एक अरब आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए एक नई पहल ‘नाभ निर्माण’ की घोषणा की। इस विस्तार को भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण द्वारा वित्त पोषित किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि घरेलू हवाई यात्री परिवहन में प्रतिवर्ष 18 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि ऐसे शहरों को जहां अभी सेवाएं नहीं है, उनका लक्ष्य क्षेत्रीय संपर्क योजना ‘उड़ान’ के माध्यम से देशभर में 56 हवाई अड्डों और 31 हैलीपैडों को जोडऩे का है। इनमें से 16 हवाई अड्डों पर संचालन पहले से ही शुरू किया जा चुका है।

राष्ट्रपति के अभिभाषण से मिल गया था संकेत
इससे पहले बजट सत्र की शुरुआत में सरकार के एजेंडे के बारे में जब राष्ट्रपति ने अभिभाषण दिया था तभी इस बात के संकेत मिल गए थे कि इस बार सरकार की प्राथमिकता में हवाई परिवहन और मध्यवर्ग रहेगा। महामहिम ने संसद के दोनों सत्रों को संबोधित करते हुए कहा था कि देश के छोटे शहर हवाई मार्ग से जुड़ सकें और निम्न मध्यम वर्ग, मध्यम वर्ग और युवा कम खर्च पर, आसानी से हवाई यात्रा का लाभ उठा सकें, इसके लिए ‘उड़े देश का आम नागरिक’ यानी, ‘उड़ान’ योजना शुरू की गई है। स्वतंत्रता के बाद देश में जहां केवल 76 हवाई अड्डे ही वाणिज्यिक उड़ानों से जुड़े थे, वहीं ‘उड़ान’ योजना के तहत मात्र 15 महीनों में 56 हवाई अड्डों और 31 हेलीपैडों को जोडऩे के लिए कार्य शुरू कर दिया गया है। अब तक 16 ऐसे हवाई अड्डों से उड़ानें शुरू भी हो चुकी हैं। इन योजनाओं से कनेक्टिविटी बढ़ाने के साथ-साथ देश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

 

 


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बजट 2018: उद्यमियों ने कहा - ढांचागत क्षेत्रों में निवेश से अर्थव्‍यवस्‍था को मिलेगी मजबूती


नई दिल्‍ली. वर्ष 2018-19 के बजट को लेकर उद्यमियों की प्रतिक्रियाएं सकारात्‍मक हैं। कराधान और जीएसटी स्‍लैब में अनुकूल बदलाव न होने के बावजूद सरकार ने जिस तरह से ग्रामीण, गरीब और किसानों के लिए ढांचागत सुविधाओं के विकास पर जोर दिया है उससे प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष दोनों तरीके से अर्थव्‍यवस्‍था को गति देने वाला साबित होगा। हालांकि ये बात भी सही है कि नौकरीपेशा वर्ग के लोगों को इस बजट से निराशा हाथ लगी है तो कुछ मामलों में कारोबारियों को भी झटका लगा है।

ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था को मजबूती मिलेगी
थॉमसन रायटर्स दक्षिण एशिया के साइड बिजनेस हेड अनिरुद्ध चटर्जी का कहना है कि बजट 2018 से कृषि क्षेत्र में ऋणों की उपलब्‍धता और निवेश को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था को मजबूती मिलेगी। बजट में ढांचागत विकास पर भी जोर दिया गया है। बजट में लॉंग टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स (एलटीसीजीटी) की वापसी कोई अप्रत्‍याशित नहीं है लेकिन उच्‍च मूल्‍य स्‍तर के निवेशक इसका स्‍वागत नहीं करेंगे। इसको लेकर एक डर यह भी है कि इससे अल्‍प समय के लिए निवेश को झटका लगेगा।

रिएल एस्‍टेट कारोबार में आएगी तेजी
सेठ ग्रुप के सीएमडी अश्विन सेठ का कहा है कि किफायती आवास योजना पर जोर देने से रिएल एस्‍टेट कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही हर गरीब को 2022 तक आवास मुहैया कराने का सपना हकीकत में बदल सकता है। मुम्‍बई सबरबन रेल केनेक्टिविटी योजना से मुम्‍बई व उसके आसपास के क्षेत्रों में आसावीय व व्‍यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए नेशनल हाउसिंग बैंक को फंड मुहैया कराने का ऐलान सरकार ने बजट में किया है। रेल और सड़कों के विकास पर जोर देने से सैटेलाइट और कस्‍बाई शहरों में भी विकास को बढ़ावा मिलेगा। स्‍मार्ट सिटी परियोजनाओं से लोगों का लिविंग स्‍टैंडर्ड में इजाफा होगा। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि इस बजट से देश के सभी क्षेत्रों के विकास को बढ़ावा मिलेगा।

ढांचागत क्षेत्र में निवेश बढ़ावा
पीडब्‍लूसी इंडिया इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के पार्टनर और लीडर मनीष अग्रवाल का कहना है कि ढांचागत क्षेत्र में 50 लाख करोड़ के निवेश से रोड, रेल और शहरी सुविधाओं में तेजी आएगी। हवाई अड़डों की क्षमताओं में वृद्धि होगी और निजी सेक्‍टर को बढ़ावा मिलने से विकास को और तेजी से बढ़ावा मिलेगा।

बिटक्‍वाइन को झटका
एलएलपी के पार्टनर और सलाहाकर संजय अग्रवाल मानते हैं कि सरकार ने बजट प्रस्‍ताव में बिटक्‍वाइन को चलन से बाहर करने का स्‍पष्‍ट संकेत दिया है। साथ ही इससे साफ हो गया है कि सरकार यह मानती है कि इसका उपयोग गैरकानूनी मकसद से भी हो रहा है। ऐसे में बिटक्‍वाइन को नकारात्‍मक कराधान और कारोबारी समस्‍याओं से जूझना पड़ेगा जो उसके विस्‍तार के लिए नुकसानदेह साबित होगा।

करदाता निराश
रैंसकॉम डेवलपर्स की सरोजिनी अहूजा का कहना सरकार ने महिलाओं की आय को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं तो टैक्‍सदाताओं को बजट में राहत नहीं दी है। साथ ही लॉंग टर्म कैपिटल गेंस पर 10 फीसद का अधिभार भी लगा दिया है, जो निवेशकों और करदाताओं को निराश करने वाला है।

आवास योजना हो सकता है साकार
ओमकार रियलटर्स एंड डेवलपर्स के मनोज पालीवाल का कहना है कि हाउसिंग फार ऑल 2022 सरकार का ड्रीम प्रोजेक्‍ट है। यह बजट उस सपने को पूरा करने वाला साबित होगा। इसके लिए सरकार ने बजट आवंटन कर हाउसिंग स्‍कीम को रफ्तार को देने की कोशिश की है। बड़े पैमाने पर बजट आवंटन से साफ हो गया है कि सरकार इस योजना को लेकर गंभीर है और यह केवल चुनावी जुमला नहीं है। लेकिन जीएसटी स्‍लैब में चेंज न होने से होम बायर्स को अब और अतिरिक्‍त लाभ नहीं मिल पाएगा।

 


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बजट 2018 - उद्योग जगत ने किया स्वागत, डिजिटलीकरण और कारपोरेट टैक्स में कमी से मिलेगा बूस्ट


नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली के इस बजट को हर आदमी अपने नजरिए से देख रहा है। उद्योग जगत ने बजट में डिजटलीकरण और कॉरपोरट टैक्स में कमी का स्वागत किया है। आइए जानते हैं उद्दोग जगत ने इस बजट पर क्या प्रतिक्रिया दी है।

रेणू सट्टी, एमडी और सीईओ - पेटीएम पेमेंट्स बैंक

हम बैंकिंग सेवाओं के उच्च पहुंच के माध्यम से वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने के लिए बजट की पहल का स्वागत करते हैं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा कवरेज बढ़ाते हैं और क्रेडिट तक आसानी से पहुंचते हैं। वाईफाई स्पॉट्स सहित बुनियादी ढांचे में बढ़ोतरी से इंटरनेट और प्रौद्योगिकी-सक्षम सेवाओं के लाभों को जनता में बढ़ाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, कृषि बाजारों के विकास और डिजिटलीकरण औपचारिक अर्थव्यवस्था में किसानों को लाएगा। हम ग्रामीण भारत में डिजिटल भुगतान, बैंकिंग और अन्य वित्तीय सेवाएं प्रदान करने के लिए एवं इन प्रयासों को साथ लेकर काम करने के लिए तत्पर हैं जिससे लोगों को ज्यादा से ज्यादा लाभ हो सके ।

दिनेश अग्रवाल, इंडियामार्ट डॉट कॉम के संस्थापक और सीईओ

250 करोड़ के कारोबार में कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स में 25% की कमी एक सकारात्मक कदम है। इसके अलावा, ऑनलाइन उधार को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा दिखाए गए ब्याज भी फाइनटेक के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। हालांकि वित्त मंत्री ने एंजेल टैक्स पर छुआ, लेकिन यह अभी तक नहीं देखा जाना चाहिए कि व्यापार ईको-सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए क्या है। कंपनियों के लिए यूनीक आईडी को लागू करने का कदम भी एक स्वागत योग्य कदम है। व्यक्तिगत रूप से, मैं शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में किए गए उपायों को देखने के लिए बहुत खुश हूं "

आर्चित गुप्ता, संस्थापक और सीईओ क्लियरटेक्स

मानक कटौती को फिर से शुरू किया गया है लेकिन लागत पर, यह चिकित्सा प्रतिपूर्ति और यात्रा भत्ता ले जाती है। चिकित्सा प्रतिपूर्ति बढ़ाने के लिए कई मांगें 15,000 से थीं और मौजूदा कीमतों के मुताबिक इसे लाने के लिए (एक दशक से अधिक समय से यह राशि समान हो गई है) हालांकि, अब इस सीमा को बढ़ाने के लिए आवाज़ नहीं उठाई जाएगी । इसके साथ, वेतनभोगी के लिए, वेतन के तहत कर योग्य राशि को 5,800 रुपये तक घटा दिया जाएगा। हालांकि सैस 1% तक बढ़ जाएगा। वरिष्ठ नागरिकों को बहुत खुशी होती है और करों के बहुत कम बोझ का सामना करना पड़ता है, बैंकों और जमाओं की गिरती ब्याज दरों में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। एमएसएमई के लिए 250 करोड़ रुपये के मुकाबले टर्नओवर के लिए कॉर्पोरेट टैक्स में कमी से इस सेक्टर को बहुत जरूरी प्रेरणा मिलेगी। फंड की उपलब्धता में सुधार के लिए और क्रेडिट सहायता देने के लिए अपने डेटा को सम्मिलित करने का विचार बहुत उत्साहजनक है।

रवि वीरमणी, सीईओ और संस्थापक, क्रेडीहेल्थ

"केंद्रीय बजट 2018 ने स्वास्थ्य देखभाल को राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की प्रमुख पहल से अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक कदम उठाया है, जो अस्पताल में भर्ती के लिए हर साल 5 लाख रुपये प्रति परिवार तक उपलब्ध कराता है। हालांकि, लाख डॉलर के शैतानी सवाल जो प्रचलित है - क्या इन लाभों को आम आदमी के लिए कैस्केड किया जाएगा। व्यापार के सामने, दुर्भाग्य से, सामान्य तौर पर स्वास्थ्य-तकनीक के शुरुआती विशेष उल्लेख नहीं हुए हैं। निजी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को जीएसटी से सब्सिडी और छूट प्रदान की जानी चाहिए व्यापार का अधिक से अधिक प्रसार और सरकार को सभी के लिए स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने को सक्षम करता है। इसके अलावा, एक तरफ, सरकार डिजिटल जाने की बात कर रही है, हालांकि, इसमें कुछ क्षेत्रों जैसे कि स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल कैमरा के साथ डिजिटल ड्राइव को जोड़कर यह कार्य नहीं किया गया है। शिक्षा जो पूरी तरह से समाज के उत्थान के लिए रीढ़ की हड्डी बनती है।

मयंक भांगडिया, सह-संस्थापक, और सीईओ, रोपसो-

"2018 के बजट में बड़े पैमाने पर कृषि और शिक्षा उद्योग पर ध्यान केंद्रित किया गया है, लेकिन ऐसे कुछ बिंदु हैं जो भारत में शुरुआती विकास की भविष्य की वृद्धि के रूप में कार्य कर सकते हैं। कॉर्पोरेट टैक्स में कमी उनमें से एक स्पष्ट रूप से है और निश्चित रूप से कुछ हद तक मदद करेगी 5 लाख वाईफाई हॉटस्पॉट की स्थापना की प्रस्तावित योजना भी एक प्रगतिशील निर्णय है, यह ठीक से लागू किया गया है और जितनी जल्दी हो सके। बजट बहुत बेहतर होगा यदि यह शुरूआती अप पर अधिक ध्यान केंद्रित करता है जो उद्योग पिरामिड के नीचे होता है। मेरा मानना है कि इस योजना में शामिल होने से पूरे उद्योग के विकास में मदद मिलेगी। इसके अलावा, मुझे बहुत खुशी है कि सरकार ने 201 9 के चुनावों के बजाय बजट के लिए अपने मुख्य एजेंडे के रूप में विकास किया है। "

जतिन अहुजा, बिग बॉय टोयज़ के संस्थापक और प्रबंध निदेशक

"कॉरपोरेट कॉरीडोरों के लिए कॉर्पोरेट टैरिफ के 25% से 25% कम करने के लिए एक स्वागत योग्य कदम के रूप में आता है। उद्योगों को अब कम कर के बोझ के साथ नए वित्तीय लक्ष्यों को लेने के लिए चार्ज किया जाएगा।

कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र:

मनमोहन मलिक, संस्थापक और सीएमडी हिमालय फूड्स इंटरनेशनल

बजट ने ग्रामीण उत्थान के लिए प्रमुख उपकरण के रूप में खाद्य प्रसंस्करण को स्पष्ट रूप से मान्यता दी है और किसानों की आय बढ़ाने के लिए डबल आवंटन के अलावा,ग्रामीण इन्फ्रा में भारी वृद्धि और नए पहलों के माध्यम से कृषि क्षेत्र में समग्र समर्थन आगे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विकास में जोड़ देगा। कृषि और संसाधित खाद्य निर्यात पर तेजी से आगे बढ़ना होगा। युवा और नए उद्यमियों के लिए मुद्रा ऋण की आसान उपलब्धता उपभोक्ता को सीधे उपभोक्ता को प्रोसेस करने के लिए खेतों को जोड़ने वाली खाद्य सेवा श्रृंखला का निर्माण करने में सहायता करेगा।

अक्षय वर्मा, सह-संस्थापक, फिटपास

'मुझे यह देखने में खुशी हो रही है कि माननीय वित्त मंत्री और उनकी टीम के साथ हमारे परामर्श के परिणाम ने 2018 के केंद्रीय बजट में स्वास्थ्य और फिटनेस पर स्पष्ट ध्यान दिया है। नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम - दुनिया के सबसे बड़े सरकारी वित्त पोषित सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम की शुरूआत - यह सुनिश्चित करेगी कि बेहतर स्वास्थ्य सेवा अधिक भारतीयों के लिए सुलभ होगी। हालांकि इस योजना में माध्यमिक और तृतीयक देखभाल लागत शामिल हैं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के लिए 1200 करोड़ रुपये का आवंटन फिटनेस और कल्याण पर केंद्रित है। हालांकि, पॉलिसी का ब्योरा अभी भी अस्पष्ट है, घोषणा की फिटनेस और अच्छी तरह से एक सीमांकनित उद्योग के रूप में मान्यता की जरूरत है जो कि सस्ती और सुलभ बनाने के लिए अत्यंत सकारात्मक है। उपचारात्मक स्वास्थ्य देखभाल और निवारक और सक्रिय फिटनेस और स्वास्थ्य से परे यह ध्यान करोड़ों भारतीयों के लिए जीवन की अधिक गुणवत्ता सुनिश्चित करेगा जो हमारे कार्यबल और हमारे राष्ट्र की विकास कहानी का हिस्सा बन जाए।

जयंत शर्मा, सह-संस्थापक और सीईओ, टूहॉल्ड

यद्यपि हमें जीएसटी लाभ और इनपुट क्रेडिट नहीं मिल पाया था, जिसे मैं उम्मीद कर रहा था, मुझे पर्यटन उद्योग की अन्य घोषणाओं, विशेषकर कनेक्टिविटी में वृद्धि करने और संबंधित अवसंरचना को विस्तारित करने या विस्तार करने की योजनाओं के कारण बहुत खुशी हो रही है।


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बजट 2018: नए रोजगार के लिए 3 लाख करोड़ का ​प्रावधान, 70 लाख नौकारियां दीं


नई दिल्ली। गुरुवार को संसद में आम बजट पेश किया गया। केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट में रोजगार व लघु उद्दयोगों को बढ़ावा देने की घोषणा की है। अपने चौथे बजट में जेटली ने नए रोजगार मुहैया कराए जाने से लेकर मुद्रा योजना के लिए 3 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इस दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि 2014 में बीजेपी की सरकार बनी, उस समय रोजगार को लेकर पीएम मोदी के सामने बड़ी चुनौती थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए इस दिशा में बड़े कदम उठाए हैं।


20 प्रतिशत अधिक राशि का प्रावधान

वित्त मंत्री ने लघु और मझोले उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बड़े कदम उठाएं हैं। जेटली ने पिछले बजट के मुकाबले इस बार ऐसे उद्योगों के लिए 20 प्रतिशत अधिक धन की व्यवस्था की है। बता दें कि 2017—18 में यह राशि 2.44 लाख करोड़ थी, जबकि बार इस पर मुख्य फोकस रखा गया है। दरअसल, 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लघु उद्योग को बढ़ावा देने के लिए मुद्रा योजना की शुरुआत की थी। एक रिपोर्ट के अनुसार इस योजना के अंतर्गत अब तक 5.5 करोड़ लोगों को रोजगार मुहैया कराया गया है।

 


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बजट 2018: विपक्षी नेताओं की सधी प्रतिक्रिया, कहा - नौकरीपेशा और आम लोगों को निराश करने वाला


नई दिल्‍ली. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को केन्‍द्र के वर्तमान कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट पेश किया। इस बजट का भाजपा ने बेहतर बजट बताया है। दूसरी तरफ विपक्षी नेताओं ने इस पर अपनी सधी प्रतिक्रियाएं दी हैं। विरोधी पार्टी के नेताओं का कहना है कि यह बजट नौकरीपेशा और आम आदमी को निराश करने वाला बजट है। सरकार ने जो कदम उठाएं उसे पहले उठाने चाहिए था।

जेटली जी ने अच्‍छा भाषण दिया
कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने बजट पर तत्‍काल अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि जेटली जी ने अच्‍छा भाषण दिया, शेरो-शायरी की, लेकिन उसका आधार कुछ नहीं। हालांकि उन्‍होंने राजनीतिक चंदे को लेकर तय किए गए नए नियम का समर्थन जरूर किया। विमुद्रीकरण के बाद सरकार ने जो झटका देश को लोगों खासकर गरीबों को दिया, उससे उबरने को लेकर बजट में अपेक्षाओं के अनुसार कोई खास घोषणा नहीं की गई। किसानों, गरीबों, युवाओं और उनके रोजगार के लिए कुछ खास नहीं किया गया। बजट में इसको लेकर कोई साफ विजन नहीं है।

प्रयास नाकाफी
पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि वित्त मंत्री ने किसानों के लिए बहुत कुछ करने की कोशिश की है , लेकिन किसानों और ग्रामीणों की समस्‍याएं विकाराल है, जिसके सामने ये उपाय पर्याप्‍त नहीं है।

जनता के साथ धोखा
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि वित्त मंत्री तेल की कीमतों में दो रुपए की कटौती की बात की है। यह उनके साथ धोखा है, क्‍योंकि जहां प्रति लीटर तेल पर दो रुपए की कमी आई है वहीं उन्‍होंने पिछले दरवाजे से उस पर छह से आठ रुपए का सेस लगा दिया है। यह जनता के साथ फ्रॉड है।

देर से उठाया गया कदम
केन्‍द्र सरकार ने किसानों और हाशिए पर जीवन जीने वाले लोगों के राहत देने वाला काम किया है, लेकिन यह काम सरकार को पहले करना चाहिए था। किसानों का जो नुकसान हो चुका है उसकी भरपाई इस बजटीय व्‍यवस्‍था से नहीं हो पाएगी।

चुनावी बजट
चुनावी बजट पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ये बजट लोकसभा चुनाव के लिए पेश की है। सरकार ने इसलिए लोक लुभावन ऐलान किए हैं। इस बात का सबको पता है कि पिछले चार साल से सरकार कैसे चल रही है और वर्तमान में क्या हालात हैं।

किसानों को छलने वाला बजट
चारा घोटाले में जेल में बंद आरजेडी नेता लालू प्रसाद यादव ने अपने ट्विट में कहा है कि पीएम मोदी की सरकार किसानों के साथ धोखा किया है। अगर सरकार को किसानों की इतनी ही चिंता है तो कर्जा माफ़ क्यों नहीं किया? कृषकों की आय को 2022 तक दुगुना कैसे किया जाएगा? इसका रोड मैप क्या है? सिर्फ़ हवाई बातों आय दुगुनी हो जायेगी क्या? किसानों की आत्महत्या क्यों नहीं रूक रही?

बिहार के साथ सौतेला व्‍यवहार
बिहार में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने ने ट्वीट कर कहा है कि बजट में बिहार के लिए कुछ भी नहीं है। बिहार को विशेष पैकेज और विशेष राज्य के दर्जे पर कुछ भी नहीं मिला। नीतीश कुमार बताएं क्या यही उनके लिए डबल इंजन हैं ? नीतीश जी की वजह से बीजेपी केंद्र सरकार बिहार के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।

विकास को अवरुद्ध करने वाला बजट
केन्‍द्रीय बजट से दिल्‍ली की जनता को निराशा हाथ लगी है। आधारभूत ढांचों के विकास के लिए बजट आवंटन की उम्‍मीद थी वो भी नहीं मिली। केन्‍द्र सरकार दिल्‍ली में विकास को अवरुद्ध करने में लगी है। यह दिल्‍ली की जनता के साथ धोखा है।

 


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बजट 2018: पीएम मोदी ने कहा, 2022 तक किसानों की आय होगी दोगुनी


नई दिल्ली: बजट पेश होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा है कि ये सपनों को साकार करने वाला बजट है। पीएम मोदी ने कहा कि इस बजट से गांव गरीब, किसान और मध्यम वर्ग की समस्याएं काफी हद तक कम होंगी। प्रधानमंत्री ने बजट की सराहना करते हुए कहा कि किसानों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी। पीएम ने कहा कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी। पीएम मोदी ने देश में अलग-अलग जिलों में पैदा होने वाले कृषि उत्पादों के लिए स्टोरेज, प्रोसेसिंग, मार्केटिंग के लिए योजना विकसित करने का कदम अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि गोबर-धन योजना भी, गांव को स्वच्छ रखने के साथ-साथ किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करेगी।

गरीब, किसानों और बेरोजगारों के लिए नए विकल्प खोलेगा बजट- पीएम मोदी

गांवों को आगे बढ़ाने के लिए पीएम मोदी ने कहा कि देश भर में करीब-करीब 7 हजार ब्लॉक हैं। इन ब्लॉक में लगभग 22 हजार ग्रामीण व्यापार केंद्रों के इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण, नवनिर्माण और गांवों से उनकी कनेक्टिविटी बढ़ाने पर बजट में जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में ये केंद्र, ग्रामीण इलाकों में आर्थिक गतिविधि, रोजगार एवं किसानों की आय बढ़ाने के लिए, नए ऊर्जा केंद्र खोलने पर विचार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत अब गांवों को ग्रामीण हाट, उच्च शिक्षा केंद्र और अस्पतालों से जोड़ने का काम भी किया जाएगा। इस वजह से गांव के लोगों का जीवन और आसान होगा। पीएम ने कहा कि बजट में छोटे व्यापारियों के मदद का खास ख्याल रखा गया है। उज्जवला योजना की सराहना करते हुए मोदी ने कहा कि ये योजना देश की गरीब महिलाओं को न सिर्फ धुंए से मुक्ति दिला रही है बल्कि उनके सशक्तिकरण का भी बड़ा माध्यम बनी है। उन्होंने कहा, 'मुझे खुशी है कि इस योजना का विस्तार करते हुए अब इसके लक्ष्य को 5 करोड़ परिवार से बढ़ाकर 8 करोड़ कर दिया गया है' इस योजना का लाभ बड़े स्तर पर देश के दलित-पिछड़ों को मिल रहा है।


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बजट 2018: जानें आपके लिए क्या हुआ सस्ता और क्या महंगा


नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में सत्र 2018-2019 का आम बजट पेश किया। मोदी सरकार का यह बजट लोकसभा चुनाव से पहले आखिरी पूर्ण बजट है। बजट में वित्त मंत्री जेटली ने लगभग हर सेक्टर में कई बड़े ऐलान किए हैं। बजट भाषण में वित्त मंत्री किसान, गरीब, युवा, गृहणी, उद्यमी सबों को खुश करते नजर आए लेकिन इस बार इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। साथ ही अरुण जेटली ने इस बार कई चीजों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने की घोषणा की है। इससे दैनिक उपयोग में आने वाले और आम आदमी के जरूरत की कई वस्तुओं के दाम में भी बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि वरिष्ठ नागरिकों को डिपॉजिट में राहत दी गई है। उनकी डिपॉजिट 10 हजार से बढ़कर 50 हजार (बिना टैक्स) हो गई है। लेकिन बजट का बेसब्री से इंतजार कर रहे आम नागरिको के लिए इस बजट में क्या रहा खास? आइये जानते हैं एक्साइज ड्यूटी पर बढ़ोतरी और बजट में हुईं घोषणाओं ने बाद वस्तुओं की कीमत पर क्या असर पड़ेगा,

ये चीजें महंगी हुईं:-
- मोबाइल फोन पर 20 फीसदी कस्टम ड्यूटी बढ़ने से मोबाइल फोन महंगे होंगे
- टीवी पर भी कस्टम ड्यूटी बढ़ने से टीवी भी महंगे होंगे
- विदेश से आयात की जाने वाली वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी 20 फीसदी तक बढ़ाई गई.
- लैपटॉप महंगा होगा
- फ्रिज के भी दाम बढ़ सकते हैं
- इलेक्ट्रोनिक्स और फूड प्रोसेसर पर 5 फीसद की कस्टम ड्यूटी बढ़ाई
- 31 जनवरी 2018 के बाद खरीदे गए शेयर पर 10 पर्सेंट टैक्स
- मेडिकल बिल पर 15 हजार की छूट नहीं खत्म
- एलसीडी-एलईडी-ओएलईडी टीवी के पार्ट्स पर सीमा शुल्क को बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया गया -मोबाइल फोन लिथियम आयन बैटरी पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाकर 15 फीसद किया गया है
-स्मार्टवॉच, वियरेबल डिवाइसेज भी महंगी, कस्टम ड्यूटी बढ़ाकर 20 फीसद की गई
-इमिटेशन ज्वैलरी पर भी टैक्स 15 से बढ़ाकर 20 फीसद कर दिया गया
-ट्रक और बसों के रेडियल टायर पर अब 15 फीसद की दर से कस्टम ड्यूटी वसूला जाएगा
-इंपोर्टेड जूते भी महंगे, आम बजट में इस पर लगने वाले कस्टम ड्यूटी को 10 से बढ़ाकर 20 फीसद कर दिया गया
-इंपोर्टेड परफ्यूम्स, डेंटल हाइजीन, ऑफ्टर शेव, डिओड्रैंट्स भी महंगे

इसके साथ ही बजट पेश होने के बाद ये चीजे सस्ती हुईं:-
- एलएनजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस)
- प्रिपेएर्ड लेदर
- सिल्वर फॉयल
- पीओसी मशीनें
- फिंगर स्कैनर
- माइक्रो एटीएम
- आइरिस स्कैनर
- सौर बैटरी
- देश में तैयार हीरे
- ई-टिकट से सर्विस टैक्स कम किया गया


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बजट 2018 : पहली बार प्री नर्सरी से 12वीं तक शिक्षा के लिए देश में होगी एक ही नीति


नई दिल्ली: वित्तमंत्री ने आम बजट में इस बार शिक्षा के लिए विशेष ऐलान किए हैं। इसके तहत पहली बार पूरे देश में प्री नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक एक ही शिक्षा नीति होगी। इससे पहले हर राज्य में अलग-अलग शिक्षा नीति है। साथ ही शिक्षा के डिजिटिलाइजेशन पर भी जोर दिया। उन्होंन कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलावों की जरूरत है। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षकों की विशेष ट्रेनिंग पर ध्यान दिया जाएगा। जेटली ने आदिवासी बच्चों के लिए रेजीडेंशियल स्कूल खोलने के लिए एकलव्य स्कीम तथा वड़ोदरा में रेलवे यूनिवर्सिटी स्थापित करने की घोषणा भी की। साथ ही 18 नई आईआईटी और एनआईआईटी भी स्थापित किए जाएंगे। बजट में बच्चों की शिक्षा पर लगभग 96 हजार करोड़ रुपए के खर्च का प्रावधान है।

खुलेंगे 24 नए सरकारी मेडीकल कॉलेज

वित्त मंत्री ने शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नई तकनीक शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने में सबसे बड़ा हथियार सिद्ध होगी। स्कूलों में ब्लैकबोर्ड के स्थान पर डिजिटल बोर्ड होंगे। उन्होंने देश में 24 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज खोले जाने की घोषणा भी की। वर्तमान बजट में सरकार ने आदिवासी बच्चों की शिक्षा पर पर विशेष जोर दिया है। इसके लिए 20 लाख बच्चों को स्कूल भेजने का लक्ष्य रखा गया है। साल 2022 तक 50 फीसदी से अधिक जनजातीय जनसंख्या वाले और कम से कम 20,000 जनजातीय लोगों वाले क्षेत्रों में नवोदय विदयालय की तर्ज पर 'एकलव्य' स्कूल खोले जाने की बात भी उन्होंने कही।

बीएड प्रोग्राम को नया कलेवर

बजट पेश करते हुए जेटली ने शिक्षकों के लिए बीएड प्रोग्राम को नया कलेवर देने की ओर भी संकेत दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए केंद्र सरकार दो प्लानिंग और आर्किटेक्चर के स्कूल खोलने की योजना पर काम कर रही है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री रिसर्च फेलो स्कीम की शुरुआत करने की घोषणा भी की।

बजट में शिक्षा से जुड़ी अन्य बातें-

- 13 लाख से ज्यादा शिक्षकों को प्रशिक्षण दिए जाने का लक्ष्य।
- नवोदय विद्यालय की तर्ज पर आदिवासियों के लिए एकलव्य स्कूल।
- वडोदरा में रेलवे यूनिवर्सिटी स्थापित करने का प्रस्ताव।
- आईआईटी और एनआईटी में 16 नए प्लानिंग ऐंड आर्किटेक्चर स्कूल ऑटोनोमस मोड में स्थापित होंगे।
- एकीकृत बीएड कार्यक्रम।

 


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बजट 2018 : राष्‍ट्रपति, उप राष्‍ट्रपति और राज्‍यपालों का वेतन तीन गुणा से ज्‍यादा बढ़ा


नई दिल्‍ली. वित्त मंत्री ने बजट में बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि एक जनवरी को रिव्यू के बाद हाल ही में वेतन की समीक्षा की गई और इसके बाद राष्ट्रपति को मिलने वाले वेतन भत्ते 5 लाख रुपए, उप राष्ट्रपति के 4.5 लाख रुपए और राज्यपाल को 3.5 लाख रुपए कर दिया गया है। सांसदों के भत्ते हर 5 साल में बढ़ाए जाएंगे।

वर्तमान में इनका वेतन इतना है
वर्तमान में राष्ट्रपति को प्रति माह 1.5 लाख रुपए, उप राष्ट्रपति को 1.25 लाख रुपए और राज्यपाल को 1.10 लाख रुपए वेतन मिलता है। बजट घोषणा में इन लोगों को वेतन तीन गुणे से भी अधिक बढ़ा दिया गया है। यह बढ़ोतरी उस समय है जबकि सरकार का घाटा 2017-18 में 5.95 लाख करोड़ रुपए का है जो जीडीपी का 3.5 फीसद है। इसके बावजूद संवैधानिक पदों लोगों के वेतन में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। वित्‍त मंत्री की घोषण के बाद राष्ट्रपति का वेतन 5 लाख रुपए होगा, उप-राष्ट्रपति का वेतन 4 लाख और राज्यपाल का वेतन 3 लाख रुपए होगा।

वरिष्‍ठ नौकरशाह का वेतन ढ़ाई लाख
वर्ष 2016 में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद कैबिनेट सचिव का वेतन 2.5 लाख रुपये प्रति माह है जबकि केंद्र सरकार के सचिव का वेतन 2.25 लाख रुपये प्रति माह है। इससे अब एक अहम संवैधानिक प्रश्‍न खड़ा हो गया था कि संविधान के सर्वोच्‍च पद पर बैठक व्‍यक्ति से ज्‍यादा सेलरी एक नौकरशाह की कैसे हो सकती है। इसको लेकर बहस का दौर भी चला था। उसके बाद वेतन में बढ़ोतरी के प्रस्‍ताव को कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इस आशय के विधेयक संसद में पेश किया गया था।

10 साल बाद वेतन में बढ़ोतरी
इसके पहले आखिरी बार 2008 में राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति और राज्यपाल के वेतनों में वृद्धि हुई थी। जब संसद ने तीन गुना वृद्धि को मंजूरी दी थी। उस समय पूर्व राष्ट्रपतियों, दिवंगत राष्ट्रपति की पत्नी या पति, पूर्व उप राष्ट्रपतियों, दिवंगत उपराष्ट्रपति की पत्नी या पति और पूर्व राज्यपालों के पेंशन में वृद्धि के लिए भी प्रस्ताव शामिल था।


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बजट 2018: चुनाव से पहले मोदी ने खेला पत्ता, 1.20 करोड़ युवाओं को लुभाने की नई योजना


नई दिल्ली। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने मौजूदा मोदी सरकार कार्यकाल का आखिरी आम बजट पेश किया है। जेटली को पोटली से किसानों, महिलाओं, युवाओं और गरीबों के लिए ढेर सारी योजनाएं निकली हैं। एक और जहां दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य कल्याण कार्यक्रम चलाए जाने की घोषणा की गई है, तो दूसरी ओर नई महिला कर्मचारियों के पीएफ में कटौती और 70 लाख नई नौकरी का ऐलान किया गया है।

70 लाख नई नौकरियों का ऐलान
वित्तमंत्री ने 70 साल नए नौकरियों का ऐलान कर युवाओं को लुभाने की पूरी कोशिश की है। खास बात ये है कि ये नौकरियां इसी साल देने की बात कही गई है। इतना ही नहीं सरकार 50 लाख युवाओं को नौकरी के लिए ट्रेनिंग देने की बात भी कही गई है।

महिला कर्मचारियों के PF में 8% की कटौती
महिलाओं को लुभाने के लिए भी इस बजट में खास इंतजाम देखने को मिला है। वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि अब नई महिला कर्मचारियों की सैलरी से सिर्फ आठ फीसदी ही पीएफ की कटौती होगी। इसका सीधा असर घर के बजट पर खर्च होगा। यानि अब महिलाओं के हाथ में ज्यादा पैसा पहुंचेगा।

10 करोड़ परिवार को 5 लाख का मेडिक्लेम
वित्त मंत्री ने गरीबों को तोहफा देते हुए नेशनल हेल्थ स्कीम की घोषणा की है। जिसमें देश के हर गरीब परिवार को 5 लाख रुपए प्रतिवर्ष का मेडिक्लेम दिया जाएगा।। 1200 करोड़ रुपए की यह योजना दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य योजना है। सरकार के मुताबिक इस योजना से 10 करोड़ परिवारों को फायदा मिलने वाला है।

2022 तक हर गरीब को होगा घर
आम बजट में गांव और महिलाओं के लिए भी कई लोकलुभावन योजनाओं की घोषणा हुई है। जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण इलाके हर परिवार को घर दिए जाएंगे। सरकार ने 2022 तक हर गरीब को घर देने का लक्ष्य रखा है।

8 करोड़ ग्रामीण परिवारों को LPG
सरकार ने आठ करोड़ ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन देने का ऐलान किया है। इसके अलावा 4 करोड़ गरीब परिवार को सौभाग्य योजना के तहत बिजली कनेक्शन देने का प्रावधान रखा है।


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बजट 2018: इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, गरीबों पर सरकार मेहरबान


नई दिल्ली। बजट से पहले यह कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार बजट में इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव किये जा सकते हैं। लेकिन बजट घोषणा में यह बात साफ हो गयी कि इनकम टैक्स में कोई छूट नहीं है। वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि पिछले तीन वर्षो में सरकार ने इससे जुड़े कई अच्छे बदलाव कर दिए हैं, इसलिए इसमें अब किसी तरह के संशोधन की आवश्यकता नहीं है। 40 हजार स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलेगा यानी जितनी सैलरी उतने में से 40 हजार घटा कर टैक्स देना होगा। अपने बजट भाषण में अबतक वित्तमंत्री ने कई लोकलुभावन घोषणाएं की हैं। हालांकि बजट में गरीबों पर मोदी सरकार मेहरबान दिखी है।

मौजूदा समय में आपको आपकी इनकम के मुताबिक 5 से 30 फीसदी तक टैक्स चुकाना पड़ता है। वित्त वर्ष 2017-18 के लिए अगर आपकी इनकम 2.5 लाख रुपये तक है, तो कोई टैक्स नहीं देना होगा। 2.5 से 5 लाख पर 5 फीसदी, 5 लाख-10 लाख पर 20 फीसदी और 10 लाख से अध‍िक पर आपको 30 फीसदी टैक्स देना पड़ता है।

वरिष्ठ नागरिकों का टैक्स स्लैब

अगर आपकी उम्र 60 साल से ज्यादा है और 80 साल से कम है, तो आपके लिए टैक्स रेट अलग हैं। यह रेट महिला और पुरुष दोनों के लिए मान्य है। इनके लिए 3 लाख तक कोई टैक्स नहीं। 3 से 5 लाख पर 5 प्रतिशत, 5 से 10 लाख पर 20 और 10 लाख से अध‍िक पर आपको 30 प्रतिशत टैक्स देना पड़ेगा।

वित्तमंत्री ने इसके अलावा अभी तक ये मुख्य घोषणाएं भी की :-

- मोबाइल महंगा, कस्टम ड्यूटी बढ़ी
- शिक्षा -स्वास्थ्य पर 1 प्रतिशत सेस बढ़ाया गया
- यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज की दिशा में आगे बढ़ रही है सरकार
- टीबी के मरीजों को उपचार के दौरान प्रति माह दिए जाएंगे 500 रुपए।
- 24 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्‍पताल खोले जाएंगे।
- 50 करोड़ लोगों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपए का स्‍वास्‍थ्‍य बीमा सरकार उपलब्‍ध कराएगी।
- 5 लाख रुपए प्रति परिवार प्रति वर्ष दिया जाएगा बीमा कवर
-10 करोड़ गरीब परिवारों को मिलेगा इस योजना का लाभ
- गरीब परिवारों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना लॉन्च
- 9 हेल्थ वेलनेस सेंटर के लिए 1200 करोड़ रुपए का आवंटन
- बीटेक छात्रों के लिए पीएम रिसर्च फेलो प्लान लॉन्च, हर साल 1000 छात्रों को मिलेगा फायदा
- प्लानिंग एंड आर्किटेक्ट के लिए खोले जाएंगे 2 नए स्कूल
- हेल्‍थ और वेलनेस सेंटर के लिए 1200 करोड़ रुपए दिए जाएंगे: जेटली
- अगले 4 साल में स्कूलों के इन्फ्रा पर 1 लाख करोड़ रुपए होंगे खर्च
- पॉल्यूशन को काबू में करने के लिए फसलों के अवशेष को करेंगे रिसाइकिल
- 2022 तक प्रत्‍येक ब्‍लॉक में होंगे नवोदय विद्यालय की तर्ज पर एकलव्‍य स्‍कूल, एसटी छात्रों को मिलेगी प्राथमिकता
- मॉडर्न होंगे स्कूल, ब्लैकबोर्ड की जगह लेगा डिजिटल बोर्ड
- सस्ता घर योजना के तहत गांवों में 51 लाख घर बनाने की योजना
- नेशनल हाउसिंग बोर्ड के तहत सस्ते घर के लिए अलग फंड बनाने की योजना
- ग्राउंड वाटर इरीगेशन के लिए 2600 करोड़ रु का आवंटन
- राष्ट्रीय आजीविका मिशन के लिए 5750 करोड़ रु का आवंटन
- ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 14.34 लाख करोड़ रुपए आव‍ंटित करने का प्रस्‍ताव
- शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य पर वित्‍त मंत्री अरुण जेटली किया बोलना शुरू।
- किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा अब मछली पालन और पशु पालन किसानों को भी मिलेगी : जेटली
- 1290 करोड़ रुपए के साथ संशोधित बांस योजना की हुई घोषणा
- प्रधानमंत्री सौभाग्‍य योजना के तहत 4 करोड़ गरीब घरों को बिना शुल्‍क के बिजली कनेक्‍शन से जोड़ा जा रहा है।
- स्‍वच्‍छ भारत मिशन के तहत सरकार ने अब तक 6 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया।
- खेती में सोलर पावर को बढ़ावा मिलेगा: जेटली
- 2022 तक हर गरीब को घर देंगे: जेटली
- इस साल 2 करोड़ नए सौचालय बनाए जाएंगे
- ऑपरेशन ग्रीन के लिए बजट में 500 करोड़ रुपए आवंटित
- ऑलू-प्‍याज के लिए ऑपरेशन ग्रीन लॉन्‍च करेगी सरकार
- दिल्‍ली-एनसीआर में प्रदूषण रोकने की योजना
- 8 करोड़ महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्‍शन
- ऑपरेशन ग्रीन के लिए 500 करोड़ रुपए आवंटित


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बजट 2018 - जेटली की पोटली से रेल, रोजगार और शिक्षा को बड़ा बूस्ट


नई दिल्ली। बजट 2018 कई मायनों में खास रहा है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शिक्षा, स्वास्थय और रोजगार पर काफी ध्यान दिया है। तो वहीं सोशल और इंफ्रा जैसे सेक्टर के लिए भी कई घोषणाएं की है। रेलवे को इस बजट में 1,48, 528 करोड़ रुपए देने की घोषणा की गई है।
रेलवे
विकास के लिए मिला 1,48, 528 करोड़ रुपए का फंड देने की घोषणा की गई है।
इंफ्रा और हाउसिंग
सौभाग्य योजना के तहत बांटे जाएंगे 4 करोड़ बिजली कनेक्शन
सोशल
SC वेलफेयर के लिए 56620 करोड़ रुपए का आवंटन
हेल्थ
पीएम इन्श्योरेंस योजना के दायरे में आएंगे सभी गरीब परिवार
एजुकेशन
बीटेक छात्रों के लिए पीएम रिसर्च फेलो प्लान लॉन्च, हर साल 1000 छात्रों को मिलेगा फायदा। प्लानिंग एंड आर्किटेक्ट के लिए खोले जाएंगे 2 नए स्कूल जाएंगे। अगले 4 साल में स्कूलों के इन्फ्रा पर 1 लाख करोड़ रुपए होंगे खर्च किए जाएंगे।
एग्रीकल्चर
रूरल इन्फ्रा के लिए 14.3 लाख करोड़ रुपए आवंटन किया गया। उज्ज्वला योजना के लिए बांटे जाएंगे 8 करोड़ कनेक्शन दिए जाएंगे। फार्म एक्सपोर्ट के लिए 42 मेगा फूड पार्क बनाए जाएंगे।

ये भी घोषणाएं की गई

2022 तक हर गरीब को घर देंगे: अरुण जेटली
इस साल 2 करोड़ नए सौचालय बनाए जाएंगे
ऑपरेशन ग्रीन के लिए बजट में 500 करोड़ रुपए आवंटित
ऑलू-प्‍याज के लिए ऑपरेशन ग्रीन लॉन्‍च करेगी सरकार
दिल्‍ली-एनसीआर में प्रदूषण रोकने की योजना
बजट ब्रेकिंग: 8 करोड़ महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्‍शन
ऑपरेशन ग्रीन के लिए 500 करोड़ रुपए आवंटित

मॉडर्न होंगे स्कूल, ब्लैकबोर्ड की जगह लेगा डिजिटल बोर्ड
सस्ता घर योजना के तहत गांवों में 51 लाख घर बनाने की योजना
नेशनल हाउसिंग बोर्ड के तहत सस्ते घर के लिए अलग फंड बनाने की योजना
ग्राउंड वाटर इरीगेशन के लिए 2600 करोड़ रु का आवंटन
राष्ट्रीय आजीविका मिशन के लिए 5750 करोड़ रु का आवंटन
ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 14.34 लाख करोड़ रुपए आव‍ंटित करने का प्रस्‍ताव


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बजट 2018: अब किसानों के लिए कर्ज लेना होगा आसान, बतौर कृषि कर्ज 11 लाख करोड़ जारी करने का ऐलान


नई दिल्‍ली. पीएम मोदी की सरकार के इस कार्यकाल का अंतिम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने किसानों के कर्ज को इस वर्ष के बजट में आसान बना दिया है। किसानों के कर्ज के लिए बजट में 11 लाख करोड़ रुपए जारी करने का ऐलान किया हैा उन्होंने बजट भाषण में कहा है कि देश को भरोसा दिलाया कि खेती की नीति के तहत साल 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करनी है। न्यूनतम समर्थन मूल्य डेढ़ गुना बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। इसके साथ ही किसानों की अर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने व संपन्‍नता की राह पर आगे बढ़ाने के लिए उन्‍होंने कृषि संपदा योजना का भी ऐलान किया है। कृषि उत्‍पादों को बाजार में खपाने एवं उन्‍हीं अपने उत्‍पाद का उचित मूल्‍य दिलाने के लिए देश भर में 42 मेगा फूड पार्क बनाए जाएंगे। किसानों को पशुपालक कार्ड भी मिलेगा।

बांस मिशन के लिए 1290 करोड़
1290 करोड़ रुपए की मदद से बांस मिशन चलाया जाएगा। इससे उत्‍तर-पूर्व भारत के किसानों को काफी लाभ मिलेगा। खासकर पूर्वी भारत में सात राज्‍यों को। ऐसा इसलिए कि वहां पर बांस का उत्‍पादन बहुत होता है और असम, नागालैंड, मेघालय में बांस का उत्‍पादन बड़े पैमाने पर होता है। अब बांस को बन क्षेत्र से अलग किया जाएगा तथा उसके व्‍यावसायिक उत्‍पादन को बढ़ावा दिया जाएगा।

आलू, टमाटर और प्‍याज के लिए 500 करोड़ का फंड
हर साल सब्जियों के ऑफ सीजन में केन्‍द्र और राज्‍य सरकारों को आलू, प्‍याज और टमाटर के मूल्‍यों में बेतहाशा वृद्धि की मार झेलनी पड़ती है। इन सब्जिलयों का दाम बढ़ने से लोगों में सरकार के खिलाफ असंतोष को बढ़ावा मिलता है। जिसका सीधा असर केन्‍द्र सरकार पर पड़ता है। जबकि ये सभी उत्‍पाद राज्‍य सूची के विषयों से जुड़े हैं। इसलिए सरकार ने आलू, टमाटर और प्‍याज के लिए 500 करोड़ रुपए का अगल से फंड बनाने की घोषणा की है।

किसानों के लिए बनेगा ई-नैम बाजार
नए बजट में नया ग्रामीण बाजार ई-नैम बनाने का प्रस्‍ताव है। इस बाजार को किसानों के लिए 2 हजार करोड़ की लागत से देश भर में विकसित किया जाएगा। वित्‍त मंत्री ने कहा कि अनाज का उत्पादन बढ़कर 217.5 टन हो गया है और किसान, गरीबों की आय बढ़ी है। फलों का उत्पादन 30 टन हुआ है। खरीफ का समर्थन मूल्य उत्पादन लागत से डेढ़ गुना हुआ है। किसानों को पूरा एमएसपी देने की कोशिश जारी है।

मोदी सरकार का अंतिम पूर्ण बजट
आपको बता दूं मोदी सरकार के आखिरी पूर्ण बजट है। इस बजट में किसान, मिडिल क्लास, युवा और कई तबकों के लोग सरकार से राहत की अच्‍छी उम्‍मीद है। इस बजट से लोग टैक्स के मोर्चे पर कुछ राहत मिलने की आस लगाए हुए हैं। यह बजट लोकसभा चुनाव 2019 में मोदी सरकार का भविष्‍य भी तय करेगा। इसलिए सरकार ने भी बजट को उसी के अनुरूप तैयार किया है। साथ ही इस बार उम्मीद है कि मोदी सरकार टैक्स छूट की सीमा बढ़ा सकती है।

 

खेती की नीति के तहत साल 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करनी है। बिचौलिए पर लगाम से भ्रष्टाचार पर
आठ करोड़ घरों को गैस कनेक्‍शन
चार करोड़ गरीबों को बिजली कनेक्‍शन देंगे
छह करोड़ शौचालय बनाए जा चुके हैं दो करोड़ शौचालय और बनाए जाएंगे


''''''''''
हमारा फोकस गांवों के विकास पर होगा। लोगों के जीवन में सरकारी दखल कम हो रहा है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में बजट पेश किया. कहा गरीबी दूर करके मजबूत भारत बनाएंगे।
देश के आम नागरिक के जीवन को आसान बनाया जा रहा है। वहीं विदेशी निवेश में भी बढ़ोत्तरी हुई है।
मोदी सरकार के आखिरी पूर्ण बजट में मिडिल क्लास और कई तबकों को अच्छी खबरों की उम्मीद है. इस बजट से लोग टैक्स के मोर्चे पर कुछ राहत मिलने की आस लगाए हुए हैं। मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट आज पेश होने में आधे घंटे से कम का वक्त बचा है। वित्त मंत्री अरुण जेटली सुबह 11 बजे संसद में बजट भाषण पढ़ना शुरु करेंगे. मोदी सरकार का ये आखिरी पूर्ण बजट है, क्योंकि लोकसभा चुनाव 2019 में होने वाले हैं। इस बार बजट में राहत मिलने वाली है या फिर बोझ और ज्यादा बढ़ने वाला है, इसको लेकर लोग कयास लगा रहे हैं. वहीं इस बार उम्मीद है कि मोदी सरकार टैक्स छूट की सीमा बढ़ा सकती है.


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