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ब्राजील, मेक्सिको निभाएंगे भारत से दोस्ती, दोनों देशों से बढ़ सकता है तेल का आयात


नई दिल्ली। भारत कच्चे तेल का आयात ब्राजील और मेक्सिको से बढ़ा सकता है, क्योंकि वेनेजुएला पर अमरीकी प्रतिबंध के चलते वहां से भारत को होने वाले तेल आयात में कमी की पूर्ति करने की जरूरत है। भारत को तेल की आपूर्ति करने वाले देशों में सऊदी अरब, इराक और ईरान के बाद वेनेजुएला चौथा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है।

वेनेजुएला से भारत ने 2017-18 में 1.8 करोड़ टन तेल का आयात किया जोकि देश के कुल तेल आयात का 11 फीसदी था। अमेरिकी प्रतिबंध के बाद वेनेजुएला से तेल आयात पर संकट छा गया है, लिहाजा भारतीय कंपनियां वैकल्पिक बाजार की तलाश में हैं।

राजनयिक सूत्रों के अनुसार, ब्राजील और मेक्सिको दोनों ने ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जाहिर की है और भारत विकल्प का मूल्यांकन कर रहा है। सूत्रों ने बताया कि सार्वजनिक व निजी क्षेत्र की विपणन कंपनियों से रिपोर्ट मिलने के बाद इस पर फैसला लिया जाएगा। भारत का मेक्सिको और ब्राजील के साथ अच्छे व्यापारिक संबंध हैं। ब्राजील दुनिया का 10वां सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है, जबकि मेक्सिको का स्थान 11वां है।

सूत्र ने बताया, "वेनेजुएला से तेल आयात के विकल्प के रूप में दोनों देश उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन इन देशों से तेल का आयात बढ़ाने का फैसला वेनेजुएला के मुकाबले इनके तेल की गुणवत्ता और आपूर्ति की शर्तो की समीक्षा पर निर्भर करेगा।"

भारत पहले से ही ब्राजील और मेक्सिको से तेल का आयात करता है, लेकिन आयात का परिमाण 2013 से लगातार घटता गया है। भारत 2013 में जहां मेक्सिको से 3.50 अरब डॉलर और ब्राजील से 1.78 अरब डॉलर का तेल आयात करता था वहां अब यह घटकर क्रमश : 1.38 अरब डॉलर और 0.81 अरब डॉलर रह गया है।


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आईएलएंडएफएस मामला: एनसीएलएटी में पहुंची 100 याचिकाएं, कर्मचारी वर्ग ने डाली 50 फीसदी से ज्यादा


नई दिल्ली। राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) को प्रस्तावित आईएलएंडएफएस समाधान योजना के तहत निपटारे की मांग करते हुए तकरीबन 100 क्रेडिटर्स की ओर से याचिकाएं डाली गई ळैं। करीब 100 याचिकाओं में आईएएनएस की जानकारी के अनुसार, तकरीबन 50 फीसदी याचिकाएं कर्मचारी निधि, सेवानिवृत्ति निधि, ग्रेच्यूटी फंड और भविष्य निधि द्वारा दाखिल की गई हैं। इसका मतलब यह है कि यह कामकाजी कर्मचारी वर्ग की सेवानिवृत्ति की बचत राशि है। यह योजना सरकार द्वारा सौंपी गई थी। कॉरपोरेट समूहों और उनके पीएफ फंड, कर्मचारी फंड, एमएनसी, डाक निधि, बैंक, पीएसयू और कुछ पावर कंपनी समेत सिक्योर्ड व अनसिक्योर्ड क्रेडिटर्स की ओर से प्राप्त याचिकाएं मिली हैं।

अधिकांश याचिकाएं हालांकि कर्मचारी निधि व न्यास की ओर से दाखिल की गई हैं जो अपने निवेश को असुरक्षित मानते हुए समाधान रूपरेखा से सहारे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे लाखों अल्पकालिक, वेतनभोगी और भोलेभाले निवेशक प्रभावित हुए हैं। नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर निधि के प्रतिनिधि ने आईएएनएस से कहा, "हमें आईएलएंडएफएस में निवेश की गई अपने जीवनभर की कमाई की सुरक्षा के लिए सरकार की मदद की दरकार है। मौजूदा कानूनी संरचना सिक्योर्ड क्रेडिटर्स के प्रति पूर्वाग्रही है। सरकार को अब छोटे निवेशकों के हितों में कार्रवाई शुरू करनी चाहिए। हम सिक्योर्ड क्रेडिटर्स, बैंक और एमएनसी की तहत संगठित व शक्तिशाली नहीं हैं, जो अपने हिस्से के लिए लडऩे को तैयार हैं। लेकिन हम वेतनभोगी वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो बड़ी तादाद में निर्वाचक वर्ग हैं और अपने प्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की मांग करते हैं।"

आईएलएंडएफएस के प्रवक्ता से संपर्क करने पर उन्होंने इन बदनसीब कर्मचारी वर्ग के निवेशकों के समाधान पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। जाहिर है कि यह चुनावी साल है और कर्मचारी वर्ग मतदाता भी हैं, लेकिन कोई उनकी समस्या को लेकर जवाब देने को आगे नहीं आ रहे हैं, इसलिए यह संवदेनशील मसला अनियंत्रित बनता जा रहा है। आईएएनएस की जानकारी के अनुसार, कुछ फंड इस मसले पर राजनीतिक मदद भी तलाश रहे हैं और आईएलएंडएफएस संकट से प्रभावित लाखों मध्यमवर्गीय मतदाताओं के मसले को लेकर आंखें फेर लेना किसी भी राजनीतिक दल के लिए मुश्किल होगा।

एक फंड के प्रतिनिधि ने आईएएनएस को बताया, "सरकार ने क्रेडिटर के हितों व मूल्य की सुरक्षा के लिए एक नया बोर्ड नियुक्त किया। लेकिन अब तक छोटे क्रेडिटर्स की भागीदारी नहीं होने से समाधान रूपरेखा में सिर्फ बड़े व शक्तिशाली क्रेडिटर्स के लिए ही काम हो रहा है।" एनसीएलएटी की अगली सुनवाई 29 मार्च को होने वाली है। उधर, विपक्ष जनसमूह से जुडऩे का हर मौके की तलाश में है और खुद को उनके हितैषी के रूप में देख रहा है।


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वैश्विक मंदी के संकेतों के बीच शेयर बाजार धड़ाम, सेंसेक्स 300 अंकों तक लुड़का, निफ्टी भी 100 अंक नीचे


नर्इ दिल्ली। दुनियाभर में वैश्विक मंदी के संकेतों के बीच आज भारतीय शेयर में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। जहां एक आेर सेंसेक्स 300 अंकों से ज्यादा टूट गया है। वहीं निफ्टी में 100 से ज्यादा गिरावट देखने को मिल रही है। इससे पहले मंदी की आशंका से शुक्रवार को अमरीकी बाजारों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली थी। शुक्रवार को यूएस मार्केट 2.5 फीसदी तक फिसले थे। पिछले कारोबारी दिन डाओ 460 अंक टूटाकर बंद हुआ था।

सेंसेक्स आैर निफ्टी धड़ाम
आज शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। मौजूदा समय में बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 301.33 अंक यानि 0.79 फीसदी की कमजोरी के साथ 37863.28 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं एनएसई का प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 88.80 अंक यानि 0.78 फीसदी की कमजोरी के साथ 11368.10 अंकों पर कारोबार कर रहा है। दिग्गज शेयरों के साथ ही आज मिड और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी बिकवाली देखने को मिल रही है। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 0.91 फीसदी की कमजोरी के साथ 14940.05 के स्तर पर नजर आ रहा है। वहीं, स्मॉलकैप इंडेक्स 0.83 फीसदी की कमजोरी के साथ 14635.84 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

सेक्टोरियल इंडेक्स में बड़ी गिरावट
बाजार की चौतरफा कमजोरी में बैंकिंग शेयरों का बड़ा योगदान है। निफ्टी का पीएसयू बैंक इंडेक्स 1.62 फीसदी और प्राइवेट बैंक इंडेक्स 1.24 फीसदी की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहे हैं। बैंक शेयरों में कमजोरी के चलते बैंक निफ्टी करीब 1.16 फीसदी की गिरावट के साथ 29239.85 के स्तर पर नजर आ रहा है। आज के कारोबार में एफएमसीजी, फार्मा, ऑटो, मेटल और रियल्टी शेयरों में भारी कमजोरी देखने को मिल रही है। निफ्टी का ऑटो इंडेक्स 0.77 फीसदी, एफएमसीजी इंडेक्स 0.78 फीसदी, आईटी इंडेक्स 0.68 फीसदी, फार्मा इंडेक्स 0.42 फीसदी, मेटल इंडेक्स करीब 2 फीसदी और रियल्टी इंडेक्स 1.3 फीसदी की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहे हैं। तेल और गैस शेयरों में आज बिकवाली नजर आ रही है। बीएसई का ऑयल एंड गैस इंडेक्स 0.11 फीसदी की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहा है।


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पेट्रोल के दाम स्थिर, डीजल की कीमत में 11 पैसे प्रति लीटर की कटौती


नई दिल्ली। पेट्रोल और डीजल के दाम में लुकाछिपी का खेल जारी है। जहां एक दिन पेट्रोल के दाम में बढ़ोतरी डीजल की कीमत में स्थिरता लाई जा रही है। वहीं दूसरे दिन डीजल के दाम में कटौती कर पेट्रोल के दाम में स्थिरता लाई जा रही है। सोमवार को भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला है। रविवार के विपरीत आईओसीएल ने आज पेट्रोल के दाम में स्थिरता रख डीजल के दाम में कटौती की गई है। डीजल के दाम में 11 पैसे प्रति लीटर की कटौती की है। रविवार को पेट्रोल के उाम दाम में स्थिरता रखी गई थी। जबकि पेट्रोल के दाम में 5 पैसे का इजाफा किया गया था। आइए आपको भी बताते हैं कि पेट्रोल और डीजल के दाम आपके शहर में क्या होंगे।

पेट्रोल के दाम के दाम में नहीं हुआ बदलाव
आईओसीएल से मिली जानकारी के अनुसार देश के चार प्रमुख महानगरों में पेट्रोल के दाम में सोमवार को कोई इजाफा नहीं किया गया है। जबकि रविवार को पेट्रोल के दाम में 5 पैसे का इजाफा देखने को मिला था। जिससे देश के चार महानगरों नई दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल के दाम क्रमश: 72.81, 74.89, 78.43 और 75.62 रुपए प्रति लीटर हो गए थे। आज भी आपको यही दाम चुकानें होंगे।

डीजल के दाम में 11 पैसे प्रति लीटर की कटौती
आईओसीएल से मिली जानकारी के अनुसार देश के चार प्रमुख महानगरों में डीजल के दाम में 11 पैसे प्रति लीटर की कटौती की गई है। जिसके बाद नई दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई में डीजल के दाम क्रमश: 66.49, 68.28 और 70.26 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं। वहीं मुंबई में डीजल के दाम में 12 पैसे प्रति लीटर कटौती हुई है। जिसके बाद यहां पर दाम 69.64 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं। आपको बता दें कि रविवार को डीजल के दाम स्थिर रखे गए थे।


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इस खाते में हर माह जमा करें 210 रुपए, 60 साल की उम्र के बाद मिलेगा 60 हजार रुपए हर साल


नई दिल्ली। जैसे-जैसे आपके रिटायरमेंट के दिन नजदीक आते हैं, वैसे-वैसे आपको अपने भविष्य को वित्तीय रूप से मजबूत करने की चिंता सताने लगते ही। यदि आप भी उन लोगों में से हैं, जिन्हे रिटायरमेंट के बाद अपने भविष्य को लेकर चिंता है तो केंद्र सरकार की अटल पेंशन योजना आपके काम आ सकती है। अभी तक सरकार के इस कदम से करीब 1.25 करोड़ लोगों को लोग जुड़ चुके हैं। कम आय वर्ग के लोगों के लिए सरकार की यह पॉपुलर स्कीम तय गारंटी का एक बेहतर विकल्प देता है। आइए जानते हैं कि आप भी इस स्कीम का लाभ कैसे उठा सकते हैं।


टैक्स छूट का भी मिलेगा लाभ

मोदी सरकार की इस योजना का लाभ लेने के लिए आपकी न्यूनतम उम्र 18 साल होनी चाहिए। यदि आप भी इस स्कीम का लाभ उठाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको एक खाता खुलवाना होगा। इस स्कीम के तहत आपको 60 हजार रुपए सालाना या 5 हजार रुपए प्रति माह के पेंशन की गारंटी मिलती है। वहीं, इस स्कीम के तहत आपको आयकर अधिनियम के तहत सेक्शन 80C के तहत आपको टैक्स छूट का भी लाभ मिलेगा। इसके लिए कुछ चुनिंदा बैंकों में अपना खाता खुलवाते सकते हैं जिसमें शुरुआती 5 साल में सरकार भी आपको खाते में योगदान देगी। इस स्कीम की एक खास बात यह भी है कि यदि 60 साल पहले या बाद में खाताधारक की मौत हो जाती है तो पेंशन की रकम खाताधारक की पत्नी को मिलेगी। यदि पति-पत्नी दोनों की मौत हो जाती है तो नॉमिनी को पेंशन मिलेगी।


कितना करना होगा निवेश

इस स्कीम के तहत यदि आप 18 साल की उम्र में खाता खुलवाने के बाद आपको प्रति माह 210 रुपए प्रति माह जमा करने होंगे। 210 रुपए प्रति माह के लिहाज से देखें तो आपको हर साल केवल 2,520 रुपए ही जमा करने होंगे। यह रकम आपको 60 साल की उम्र तक हर माह जमा करने होंगे। जैसे आप 60 साल की उम्र को पार करते हैं तो इससे आपके खाते में 5 हजार रुपए प्रतिमाह पेंशन के रूप में आएंगे। वार्षिक तौर पर देखें तो यह रकम 60 हजार रुपए आपको पेंशन के रूप में मिलेगा। इस प्रकार आपकी तरफ से कुल निवेश की बात करें तो आज मात्र 1.05 लाख रुपए का निवेश कर हैं और 60 साल के बाद पूरी जिंदगी 60 हजार रुपए प्रति वर्ष पाते रहेंगे।


कैसे करना होगा निवेश

इस स्कीम के तहत आपके पास निवेश के दो विकल्प होंगे। आपके पास तिमाही व छमाही के हिसाब से निवेश करने का विकल्प है। यदि आपक तिमाही हिसाब से पैसे जमा करते हैं तो आपको हर तीन महीने में केवल 626 रुपए देने होंगे वहीं छमाही हिसाब से आपको हर छह माह में 1,239 रुपए देने होंगे। 18 साल की शुरुआती निवेश के हिसाब से आपको 42 साल तक निवेश करना होगा, जिसमें आपको केवल 1.05 लाख रुपए ही निवेश करने होंगे। आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि आप किस उम्र में इस स्कीम के तहत निवेश कर रहे हैं। इसी के साथ हिसाब होगा कि आपको हर माह कितना निवेश करना होगा। इस स्कीम के बारे में आप अटल पेंशन स्कीम की आधिकारिक वेबसाइट पर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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इस साल भी नहीं लागू होगा अकाउंटिंग रूल, बैंकों के फंसे कर्ज से निजात पाने की उम्मीद टूटी


नई दिल्ली। भारत ने लगातार दूसरी बार कड़े अकाउंटिंग नियम को टाल दिया है। इस कदम के बाद देश को बैंकों को एक बार फिर 190 अरब डॉलर के फंसे कर्ज को रिकवर करने का मौका धूमिल हो गया है। बीते दिनों भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि इंडियन अकाउंटिंग स्टैंर्ड्डस नियम में बदलाव करने पर सरकार अभी भी विचार कर रही है। आरबीआई ने अपनी वेबसाइट पर इस संबंध में लिखा, " आगामी नोटिस तक इस प्रावधान को लागू करने में देर कर दी गई है।"


बैंकों को मिल सकता था बूस्ट

आईएफआरएस9 स्टैंर्ड्डस के आधार पर वित्तीय संकट को देखते हुए आगामी 1 अप्रैल से नए नियम को लागू करना था। फिच रेटिंग्स के अनुसार, यदि इस नियम को लागू कर दिया जाता तो 30 जून को समाप्त होने वाली आगामी वित्त विर्ष की पहली तिमाही में देश की सरकारी उधारकर्ताओं की संपत्ति में 1.1 ट्रिलियन रुपए का फायदा होता। इससे प्राइवेट बैंकों को भी एक ठोस पूंजी मिल सकती थी। बता दें कि सरकार ने पहले ही दो साल की अवधि में बैंकों में करीब 1.9 ट्रिलियन रुपए के कैपिटल इन्फ्युजन का प्लान बनाया है। ऐसे में बैंकों को एक बड़े बूस्ट मिलने को धक्का लगा है।


नियम में देरी से इस बैंकों पर नहीं पड़ेगा अधिक असर

पिछले साल अप्रैल में, आरबीआई ने अकाउंटिंग स्टैंडर्ड नियम लागू करना के प्लान को भी टाल दिया है। उस दौरान आरबीआई ने कारण बताया था कि इस नियम में कुछ कानूनी प्रावधानों के बारे में विचार करना है और साथ ही तैयारियों के लिए भी कुछ समय चाहिए होगा। हालांकि, विश्लेषकों ने कहा कि पिछले साल की तुलना में इस साल बैंकों पर इसका अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस नियम के तहत बैंकों को यदि इस बात की आशंका होती है उनका दिया हुआ कर्ज फंसने वाला है तो इससे बचने के लिए बैंक कुछ प्रावधान कर सकते हैं।

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अंतिम समय में बचाना चाहते हैं टैक्स तो अपनाए ये तरीके, होगा बड़ा फायदा


नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष पूरा होने में अब बस कुछ दिन ही बचे हुए हैं। ऐसे में आप एक निवेशक के तौर पर टैक्स बचाने के लिए कई तरीकों के बारे में पता करने में लगे होंगे। टैक्स सेविंग के लिए निवेशक सबसे अधिक आयकर अधिनियम के सेक्शन 80ष्ट का सहारा लेते हैं। आज हम ऐसे ही एक खास तरीके के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे की अंतिम समय में आप टैक्स सेंविंग्स कर सकते हैं।


ऐसे बच सकता है 46,800 रुपए

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (इएलएसएस) छोटी अवधि के लिए एक निवेश विकल्प है, जो आपको बेहतर रिटर्न के साथ-साथ टैक्स बचाने में मदद कर सकता है। आंकड़ों की बात करें तो तनी साल से अधिक के ट्रैक रिकॉर्ड वाले ऐसे करीब 31 स्कीम्स हैं जिसमें 1 हजार करोड़ का निवेश किया गया है। आपको बताते चलें कि इएलएसस एक म्यूचुअल फंड स्कीम है जिससे आप एक वित्तीय वर्ष में आप 46,800 रुपए तक की बचत कर सकते हैं। इसके तहत 1.5 लाख रुपए तक के निवेश पर आयकर अधिनियम, 1961 के सेक्शन 80ष्ट के तहत आपको टैक्स छूट मिलती है।


कैसे मिलेगा इएलएसएस में निवेश से फायदा

इन फंड्स में निवेश से पहले आपको इस बात का ख्याल रखना है कि इनके लिए लॉक इन पीरियड तीन साल के लिए होता है। इसका मतलब है कि तीन साल के अंदर आप इस निवेश को रीडिम नहीं कर सकते हैं। इसमें आपको लिए राहत की बात यह भी है कि यदि छोटी अवधि में आपको कुछ पैसों की जरूरत है तो इससे आपको मदद मिल सकती है। बीते तीन साल में इन 31 स्कीम्स से मिलने वाले रिटर्न की बात करें तो यह करीब 49 फीसदी का रहा है।

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डिस्कॉम के भुगतान में देरी से 3 लाख करोड़ रुपए के निजी निवेश पर खतरा, भाजपा शासित राज्यों पर सबसे अधिक बकाया


नई दिल्ली। कई राज्यों द्वारा महीनों से बिजली भुगतान नहीं करने के बाद अब एक दर्जन से भी अधिक बिजली संयंत्रों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इन एक दर्जन से भी अधिक संयंत्रों पर 3 लाख करोड़ रुपए का निजी निवेश पर अब जोखिम बढ़ गया है। इन बिजली संयंत्रों की प्राप्ति पोर्टल के मुताबिक, जीएमआर और अडानी समूह की कंपनियों के अतिरिक्त सार्वजनिक क्षेत्र की एनटीपीसी को दिसंबर 2018 तक राज्यों को बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) से 41,730 करोड़ रुपए की वसूली करनी थी।


भाजपा शासित राज्यों में सबसे अधिक बकाया

करीब 42 हजार करोड़ रुपए का यह बकाया अब बढ़कर 60 हजार करोड़ रुपए का हो गया है। इनमें आधी से भी अधिक रकम स्वतंत्र उत्पादक इकाइयों को वसूलनी है। सभी राज्यों में सबसे अधिक बकाया उत्तर प्रदेश (6,497 करोड़ रुपए) और महाराष्ट्र (6,179 करोड़ रुपए) का है। ये दोनों राज्य भारतीय जनता पार्टी शासित प्रदेश हैं। अन्य राज्य भी बिजली उत्पादक कपंनियों को समय पर भुगतान नहीं कर रहे हैं। इन राज्यों में तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पंजाब शामिल हैं।


निजी कंपनियों को भुगतना पड़ रहा है खामियाजा

पोर्टल से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश अपने बकाये को चुकाने के लिए 544 दिन का समय लेता है वहीं महाराष्ट्र इसके लिए करीब 580 दिन का समय लेता है। पोर्टल पर दी गई जानकारी से पता चलता है कि महाराष्ट्र और तमिलनाडु पर पूरे बकाए का कुल 80 फीसदी रकम बकाया है। ये दोनों राज्य बिजली के सबसे प्रमुख उपभोक्ता हैं। टॉप 10 राज्यों की बात करें तो ये भुगतान के लिए 562 दिन का समय लेते हैं। सूत्रों ने कहा कि भुगतान में देरी की वजह से निजी क्षेत्र की बिजली कंपनियों के समक्ष कार्यशैली पूंजी का संकट पैदा हो रहा है।


किन कंपनियों का कितना बकाया

उत्तर प्रदेश की डिस्कॉम द्वारा 2,185 करोड़ रुपए के बिजली भुगतान न होने के कारण बजाज समूह की स्वामित्व वाली ललितपुट पावर जेनरेशन कंपनी अपने तीन हजार कर्मचारियों का भुगतान नहीं कर पा रही है। कंपनी के लिए एक बड़ी समस्या यह भी रही है कि वो पर्याप्त मात्रा में कोयले का भंडारण रखने में विफल रही है। दिसंबर 2018 तक, कुल 41,730 करोड़ रुपए के बकाए में अडानी समूह को 7,433.47 करोड़ रुपए और जीएमआर को 1,788.18 करोड़ रुपए का बकाया है। वहीं अन्य कंपनियों में सेम्बकॉर्प को 1,497.07 करोड़ रुपए और एनटीपीसी को 17,187 करोड़ रुपए का भुगतान करना है।

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कर्नाटक ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने आेला को दिया सोमवार तक का समय, नियमों के उल्लंघन पर मांगा जवाब


नर्इ दिल्ली। टैक्सी एग्रीगेटर ओला को नियमों का पालन करने के लिए कर्नाटक परिवहन विभाग ने सोमवार तक का समय दिया है और शहर में अवैध रूप से चल रही बाइक टैक्सियों के लिए अपने लाइसेंस को निलंबित करने के आदेश पर जवाब देने को कहा है। 18 मार्च के आदेश के अनुसार, ओला को निर्देश दिया गया था कि वह तुरंत अपनी सेवाएं बंद करे और आदेश मिलने के तीन दिनों के भीतर संबंधित प्राधिकरण को लाइसेंस सरेंडर करे। आपको बता दें कि शनिवार को भी ओला सेवाएं सामान्य रूप से चल रही थीं।

परिवहन आयुक्त वीपी इक्केरी ने द हिंदू के हवाले से कहा कि विभाग कैब एग्रीगेटर की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। एग्रीगेटर को शुक्रवार को आदेश मिला था और उन्हें नियमों का पालन करने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। विभाग ने एग्रीगेटर्स के नियमों के पालन के लिए आदेश जारी किया था और नियमों के अनुपालन के आधार पर इसे किसी भी समय रद्द किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विभाग कठोर कार्रवाई करने से पहले सभी कानूनी विकल्पों का पता लगाएगा, क्योंकि अदालत के सामने इस पर सवाल उठाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि ओला के पास सीधे स्वामित्व वाली कैब का एक छोटा बेड़ा है, जबकि अधिकांश टैक्सी ड्राइवरों के माध्मय से एक एमओयू के माध्यम से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा, 'हमें कोई कार्रवाई करने से पहले उनकी आजीविका पर विचार करना होगा क्योंकि इसका उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ेगा। हालांकि, हम एग्रीगेटर्स के प्रति किसी प्रकार की ढिलाई नहीं दिखा रहे हैं। '

5 मार्च को विभाग ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। आयुक्त ने कहा, “पिछले नोटिस का जवाब देते हुए, ओला ने कहा था कि उन्होंने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शहर में बाइक-टैक्सी सेवा शुरू की थी। उनका जवाब संतोषजनक नहीं था।

उन्होंने बिना किसी कानूनी मंजूरी के सेवा शुरू की थी।” विभाग ने फरवरी में ओला की लगभग 260 बाइक टैक्सियों को लगाया था। गुरुवार को, राज्य परिवहन प्राधिकरण, परिवहन आयुक्त के आदेश के आधार पर, राज्य में आरटीओ को नियमों को लागू करने और ओला कैब सेवा को रोकने के लिए कार्रवाई करने का निर्देश दिया।


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पाक पीएम ने कहा- हमें जल्द मिल सकता है तेल व गैस का बड़ा भंडार, खस्ताहाल अर्थव्यवस्था से मिलेगी निजात


नई दिल्ली। आर्थिक रूप से खस्ताहाल पाकिस्तान के लिए बहुत जल्द की एक अच्छी खबर आ सकती है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि देश अरब सागर में बड़े पैमाने पर तेल एवं गैस भंडार खोज के करीब है और अगर ऐसा होता है तो यह 'जैकपाट' होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस खोज से नकदी संकट से जूझ रहे देश की आर्थिक समस्याओं का समाधान होगा।इमरान खान ने कहा कि तेल के अपतटीय क्षेत्र में खुदाई अंतिम चरण में हैं और यह बड़ी खोज हो सकती है।


पाक ने नहीं साझा किया खुदाई का ब्यौरा

पाक पीएम ने गत बृहस्पतिवार को कहा, "हम सभी यह प्रार्थना करते हैं कि पाकिस्तान को प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संशाधन मिले। हमारी उम्मीदें अपतटीय क्षेत्र में खुदाई से है जो एक्सोन मोबिल की अगुवाई वाला समूह कर रहा है।" उन्होंने कहा, "पहले ही तीन सप्ताह की देरी हो चुकी है लेकिन जो हमें संकेत मिल रहे हैं, उससे इस बात की मजबूत संभावना है कि हम अपने जल क्षेत्र में बड़ा भंडार खोजें। और अगर यह होता है पाकिस्तान एक अलग लीग में होगा।" कुछ अखबारों के संपादकों तथा वरिष्ठ पत्रकारों के साथ एक अनौपचारिक बातचीत में खान ने हालांकि अपतटीय क्षेत्र में खुदाई प्रक्रिया का ब्योरा साझा नहीं किया।


अंतरराष्ट्रीय तेल उत्खनन कंपनियों ने नहीं दिया है आधिकारिक बयान

एक्सोन मोबिल तथा अंतरराष्ट्रीय तेल उत्खनन कंपनी ईएनआई से भी इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। ये कंपनियां जनवरी से समुद्र के काफी गहराई (समुद्र के भीतर 230 किलोमीटर नीचे) वाले क्षेत्र में खुदाई कर रही हैं। इस क्षेत्र को केकरा-1 क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। इटली की ईएनआई तथा अमेरिकी तेल कंपनी एक्सोन मोबिल संयुक्त रूप से पाकिस्तान के अरब सागर क्षेत्र में गैस के लिये खुदाई कर रही है।


पिछले साल तेल भंडार होने के मिले थे संकेत

आतंकवाद के कारण पश्चिमी देशों की कई अन्य कंपनियां पाकिस्तान छोड़कर चली गयी थी। एक्सोन मोबिल करीब एक दशक बाद पाकिस्तान लौटी है। पिछले साल एक सर्वे में पाकिस्तानी जल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तेल भंडार होने के संकेत मिलने के बाद कंपनी यहां लौटी है। प्रधानमंत्री को भरोसा है कि अगर तेल भंडार खोजा जाता है, पाकिस्तान की कई आर्थिक समस्याएं दूर होंगी और उसके बाद देश की तरक्की को कोई नहीं रोक सकता। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिरता कायम करना सबसे बड़ी चुनौती है।

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रुपये की चाल,राजनीतिक समीकरण और एफआईआई के रुख से तय होगी शेयर बाजार की दिशा


नर्इ दिल्ली। बीते सप्ताह घरेलू संस्थागत निवेशकों की मुनाफावसूली के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के शुद्ध लिवाल बने रहने तथा भारतीय मुद्रा की मजबूती के दम पर घरेलू शेयर बाजार में लगातार पांचवीं साप्ताहिक तेजी दर्ज की गर्इ। आलोच्य सप्ताह के दौरान बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 140.29 अंक यानी 0.37 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त के साथ 38,164.61 अंक पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 30.05 अंक यानी 0.26 प्रतिशत की तेजी के साथ 11,456.90 अंक पर बंद हुआ। आने वाले सप्ताह में रुपए की चाल,राजनीतिक समीकरण और एफआईआई के रुख से तय शेयर बाजार की चाल तय होगी।

आगामी सप्ताह भी शेयर बाजार पर डॉलर की तुलना में रुपए की स्थिति पर निवेशकों की नजर रहेगी। बीते सप्ताह रुपया डॉलर की तुलना में 15 पैसे मजबूत हुआ है। इस दौरान देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी तेजी से बढ़ा। देश का विदेशी मुद्रा भंडार गत 15 मार्च को समाप्त सप्ताह में लगातार पांचवीं साप्ताहिक तेजी दर्ज करता हुआ 3.60 अरब डॉलर बढ़कर 405.63 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

अगले सप्ताह 29 मार्च को वित्तीय घाटे के आंकड़े जारी होने हैं, जिसका असर शेयर बाजार पर रहेगा। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का असर भी शेयर बाजार पर रहेगा। ब्रेंट क्रूड वायदा फिलहाल 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बना हुआ जिससे निवेश धारणा को मजबूती मिली है। अगले सप्ताह जारी होने वाले जापान के आर्थिक आंकड़े पर भी निवेशकों ही नजर रहेगी।

निवेशक इसके साथ ही आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बदलते राजनीतिक समीकरणों पर भी अपना ध्यान रखेंगे। कई राजनीतिक दलों ने बीते सप्ताह कई लोकसभा सीटों के लिए अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। विश्लेषकों के मुताबिक अगली बार भी नरेंद्र मोदी की सरकार के सत्ता में वापस आने की अधिक संभावना को देखते हुए विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी घरेलू शेयर बाजार में बढ़ी हुई है और इसी वजह से इसमें लगातार पांचवें सप्ताह तेजी रही है। हालांकि, बाजार में बीते सप्ताह मुनाफावसूली भी हावी रही जिससे इसमें अपेक्षाकृत कम तेजी रही।


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मिराज सिनेमा करेगी 200 करोड़ रुपए का निवेश, 90 स्क्रीन जोड़ने की है योजना


नर्इ दिल्ली। मल्टीप्लेक्स संचालित करने वाली कंपनी मिराज सिनेमा ने पूरे देश में अपनी पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए चालू वित्त वर्ष में 200 करोड़ रुपए के निवेश से स्क्रीन की संख्या बढ़ाकर 200 करने की योजना बनार्इ है।

कंपनी के प्रबंध निदेशक अमित शर्मा ने कहा कि अभी उनकी कंपनीे के पास 110 स्क्रीन है और वर्ष 2019-20 में 90 स्क्रीन जोड़ने की योजना है। इस पर 200 करोड़ रुपए का निवेश किया जायेगा। चालू वर्ष में 50 से 60 स्क्रीन जोड़ने का काम जारी है।

उन्होंने कहा कि महानगरों के साथ ही छोटे शहरों में भी उनकी कंपनी की पहुंच बढ़ी है। टियर 2 और टियर 3 शहरों में भी उनके स्क्रीन है। बड़े महानगरों में प्रीमियम ब्रांड मिराज मैक्सिमम शुरू किए गए हैं। देश के 14 राज्यों में 40 मल्टीप्लेक्स है जिसमें 110 स्क्रीन है।

शर्मा ने कहा कि दिल्ली एनसीआर में मिराज मैक्सिमम का सबसे बड़ा 86 फुट चौड़ा स्क्रीन शुरू किया गया है जहां फिल्म देखने का अनुभव एकदम अलग होता है। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हैदराबाद में कंपनी के 40 स्क्रीन है। केरल में भी विस्तार योजना चल रही है और बिहार में प्रवेश करने की तैयारी है।


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ब्रिटेन का सबसे अमीर एशियाई हिंदुजा परिवार लगातार छठी बार एशियन रिच लिस्ट में टॉप पर, मित्तल को छोड़ा पीछे


नई दिल्ली। लंदन में रहे एनआरआई उद्योगपति हिंदुजा फैमिली लगातार छठवीं बार एशियन रिच लिस्ट के टॉप पर कब्जा जमाया है। उन्होंने अपने पीछे कई एनआरआई उद्योपतियों को पीछे छोड़ दिया है। खास बात तो ये है कि उन्होंने अपनी दौलत में इजाफा किया है। जबकि मित्तल परिवार की दौलत में कमी आई है। लंदन में शुक्रवार रात एशियन बिजनस अवाड्र्स के दौरान जारी 'एशियन रिच लिस्ट 2019' सूची जारी हुई थी। इस लिस्ट में कई नए नाम भी शामिल हुए हैं। आइए आपको भी बताते हैं कि हिंदुजा परिवार की अपार दौलत कितनी है और किस लिस्ट में कौन किस स्थान पर है?

हिंदुजा परिवार की इतनी बढ़ गई दौलत
लंदन में रहे हिंदुजा परिवार की कुल संपत्ति 25.2 अरब पाउंड है। इसमें पिछले साल के मुकाबले 3 अरब पाउंड से अधिक का इजाफा हुआ है। वहीं स्टील किंग लक्ष्मी मित्तल और उनके बेटे आदित्य मित्तल दूसरे पायदान पर हैं। इनकी कुल संपत्ति 11.2 अरब पाउंड की है, जिसमें पिछले साल की तुलना में 2.8 अरब पाउंड की गिरावट आई है। जबकि एसपी लोहिया 5.8 अरब पाउंड की संपत्ति के साथ तीसरे पायदान काबिज हुए हैं। ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त यूके रुचि घनश्याम ने सूची को जारी की है। इस लिस्ट में ब्रिटेन में रहने वाले एशिया के कुल 101 अरबपतियों की रैंकिंग और पिछले 12 महीने में कारोबार के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों को बताया गया है।

सूची में आए नए नाम
एशियन रिच लिस्ट 2019 में शामिल होने वाले कारोबारियों की कुल संपत्ति 85.2 अरब पाउंड से अधिक है। जिनकी कुल संपत्ति में इस साल 5 अरब पाउंड की बढ़ोतरी हुई है। सूची में सात नए अरबपति शामिल हुए हैं, जिनमें होटल कारोबारी जोगिंदर सेंगर और उनके बेटे गिरीश सेंगर भी हैं, जो 40वें पायदान पर हैं। इनकी कुल संपत्ति लगभग 30 करोड़ पाउंड से अधिक है। दिग्गज एनआरआई उद्यमी लॉर्ड स्वराज पॉल एंड फैमिली 90 करोड़ पाउंड के साथ 17वें पायदान पर हैं। उनकी संपत्ति में पिछले साल की तुलना में 10 करोड़ पाउंड की बढ़ोतरी हुई है।


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सैमसंग के 5जी स्मार्टफोन लांच होने से पहले अमरीका में कंपनी के मार्केटिंग प्रमुख का इस्तीफा


नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल बनाने वाली कंपनियों में से एक सैमसंग को बड़ा झटका लगा है। अमरीका में सैमसंग के मार्केटिंग प्रमुख ने इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा तब आया है जब सैमसंग अपने और दुनिया के पहले 5जी स्मार्टफोन की लांच करने की तैयारी कर रहा है। कंपनी ने घोषणा की है कि वो पांच अप्रैल को अपना फोन लांच करेगी। उससे पहले यह इस्तीफा कई तरह के सवाल भी खड़े कर रहा है।

इसलिए दिया इस्तीफा
सैमसंग द्वारा उसके कर्मचारियों और विपणन साझेदारों के बीच रिश्वत के लेन-देन के मामले की जांच शुरू करने के बाद कंपनी के चीफ मार्केटिंग आफिसर मार्क मैथ्यू ने अचानक इस्तीफा दे दिया। द वाल स्ट्रीट जर्नल की शुक्रवार की रिपोर्ट के अनुसार, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी ने अपने अमेरिकी विपणन कार्य की लेखापरीक्षा की, जिसका मकसद यह पता लगाना था कि क्या उसके कर्मचारियों ने व्यापारिक साझेदारों से लेन-देन में कंपनी की नीतियों का उल्लंघन किया है, जिसके फलस्वरूप कई कर्मचारियों की छुट्टी हो गई।

बुरे दौर से सैमसंग को निकाला
मैथ्यू सैमसंग के लिए अच्छा काम कर रहे थे। उन्होंने सैमसंग को काफी बुरे दौर से निकाला है। उन्होंने कंपनी को कामयाब बनाने में अहम भूमिका भी निभाई है। उन्होंने 2016 में गैलक्सी नोट-7 की वापसी भी कराई। जिसके बाद यह फोन दोबारा से लाया गया। मौजूदा समय में वो यूट्यूब क्रिएटर कम्युनिटी में निवेश बढ़ाने में सक्रिय थे। फिलहाल वो क्या करेंगे उनका क्या प्लान होगा। इस बारे में उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी है।


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पेट्रोल के दाम में 5 पैसे प्रति लीटर कर इजाफा, डीजल के दाम स्थिर


नई दिल्ली। काफी दिनों के बाद डीजल के दाम में स्थितरता देखने को मिली है। वहीं पेट्रोल के दाम में रविवार के दिन भी इजाफा हुआ है। आईओसीएल से मिली जानकारी के अनुसार देश के चार प्रमुख महानगरों में पेट्रोल के दाम में 5 पैसे प्रति लीटर का इजाफा देखने को मिला है। वहीं डीजल के दाम में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला। जानकारों की मानें तो क्रूड ऑयल के दाम में इजाफा होने से देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में दबाव देखने को मिल रहा है। ऑयल कंपनियां डीजल के दाम तो नहीं बढ़ा रही हैं। लेकिन डीजल की कीमतों में इजाफा किया जा रहा है। आने वाले दिनों में सही ट्रेड देखने को मिल सकता है। आइए आपको भी बताते कि आपको अपने शहर में पेट्रोल और डीजल के दाम कितने चुकाने होंगे।

पेट्रोल के दाम में इजाफा
आईओसीएल से मिली जानकारी के अनुसार देश के चार प्रमुख महानगरों में पेट्रोल के दाम में 5 पैसे प्रति लीटर का इजाफा देखने को मिला है। जिसके बाद नई दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल के दाम क्रमश: 72.86, 78.48 और 75,67 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं। वहीं कोलकाता में पेट्रोल के दाम में 4 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। जिसके बाद यहां पर दाम 74.93 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं। आपको बता दें कि शनिवार को भी पेट्रोल के दाम में 5 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हुआ था।

डीजल के दाम स्थिर
आईओसीएल से मिली जानकारी के अनुसार देश के चार प्रमुख महानगरों में डीजल के दाम में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है। जिसके बाद नई दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में डीजल के दाम क्रमश: 66.60, 68.39, 69.76 और 70.37 रुपए प्रति लीटर देखने को मिले हैं। आपको बता दें कि शनिवार को भी डीजल के दाम में 7 पैसे प्रति लीटर की कटौती देखने को मिली थी।


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देश के विदेशी पूंजी भंडार में इजाफा, 3.60 अरब डॉलर की हुर्इ बढ़ोतरी


नई दिल्ली। देश के विदेशी पूंजी भंडार में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। पिछले सप्ताह के मुकाबले 3.60 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, 15 मार्च को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी पूंजी भंडार 405.63 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जबकि उससे पिछले सप्ताह आठ मार्च को विदेशी पूंजी भंडार 402.03 अरब डॉलर था।

विदेशी पूंजी भंडार में विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति (एफसीए), स्वर्ण भंडार, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में भारत की आरक्षित निधि शामिल होती हैं।

विदेशी पूंजी भंडार से संबंधित आरबीआई के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़े शुक्रवार को जारी किए गए। इन आंकड़ों के अनुसार, एफसीए पिछले सप्ताह 3.54 अरब डॉलर बढ़कर 377.77 अरब डॉलर हो गया। वहीं, स्वर्ण भंडार 3.89 करोड़ डॉलर बढ़कर 23.40 अरब डॉलर हो गया।

एसडीआर के मूल्य में 59 लाख डॉलर का इजाफा हुआ, जिसके बाद इसका मूल्य 1.46 अरब डॉलर हो गया। आईएमएफ के पास आरक्षित निधि 1.21 करोड़ डॉलर बढ़कर 2.99 अरब डॉलर हो गई।


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शेयर बाजार साप्ताहिक समीक्षाः लगातार 5वें सप्ताह शेयर बाजार में रही तेजी


नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान बने रहने से प्रमुख शेयर संवेदी सूचकांकों में लगातार पांचवें सप्ताह तेजी का सिलसिला बना रहा, हालांकि सप्ताह के आखिरी सत्र में शुक्रवार को मुनाफावसूली के दबाव में नकारात्मक रुझान देखने को मिला। बंबई स्टॉक एक्सचेंज के 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स कारोबारी सप्ताह के अंत में शुक्रवार को पिछले सप्ताह के मुकाबले 140.29 अंक यानी 0.37 फीसदी की तेजी के साथ 38,164.61 पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के 50 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक निफ्टी 30.05 अंक यानी 0.26 फीसदी की बढ़त के साथ 11,456.90 पर रहा।

बीएसर्इ मिडकैप आैर स्माॅलकैप
हालांकि बीएसई के मिड-कैप और स्मॉल कैप सूचकांक में गिरावट दर्ज की गई। साप्ताहिक आधार पर बीएसई के मिड-कैप सूचकांक 94.63 अंक यानी 0.62 फीसदी नीचे लुढ़ककर 15,076.89 पर बंद हुआ और स्मॉल कैप सूचकांक 78.38 अंक यानी 0.53 फीसदी की गिरावट के साथ 14,758.80 पर रहा।

पूरे सप्ताह रहा कुछ इस तरह का कारोबार
कारोबारी सप्ताह के पहले सत्र में सोमवार को विदेशी बाजारों से मिले मजबूत संकेतों से सेंसेक्स पिछले सत्र के मुकाबले 70.75 अंक यानी 0.19 फीसदी की बढ़त के साथ 38,095.07 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 35.35 अंक यानी 0.31 फीसदी की बढ़त के साथ 11,462.20 पर बंद हुआ।

अगले दिन मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में तेजी का रुझान जारी रहा और कुछ घरेलू कंपनियों के शेयरों में तेजी से बाजार को सहारा मिला। सेंसेक्स 268.40 अंक यानी 0.70 फीसदी के तेजी के साथ 38,363.47 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 70.20 अंक यानी 0.61 फीसदी की तेजी के साथ 11,532.40 पर बंद हुआ।

कारोबारी सप्ताह के तीसरे दिन बुधवार को सेंसेक्स में लगातार आठ सत्रों में तेजी का दौर जारी रहा, लेकिन निफ्टी लगातार सात सत्रों की तेजी के बाद थोड़ा फिसलकर बंद हुआ। सेंसेक्स बुधवर को 23.28 अंक की बढ़त के साथ 38,386.75 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 11.35 अंक फिसलकर 11,521.05 पर रहा।

इसके अगले दिन गुरुवार को होली का अवकाश होने के कारण घरेलू शेयर बाजार में कारोबार बंद रहा।

सप्ताह के आखिरी सत्र में शुक्रवार को मुनाफावसूली का दबाव बढ़ने से बाजार में मंदी का रुख देखने को मिला और सेंसेक्स पिछले सत्र के मुकाबले 222.14 अंक यानी 0.58 फीसदी की गिरावट के साथ 38,164.61 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 64.15 अंक यानी 0.56 फीसदी लुढ़ककर 11,456.90 पर बंद हुआ।

फिच की नकारात्मक रिपोर्ट
आखिरी सत्र में घरेलू शेयर बाजार में नकारात्मक रुझान रेटिंग एजेंसी फिच द्वारा भारत के आर्थिक विकार दर अनुमान में कटौती की रिपोर्ट के बाद देखने को मिला। फिच वित्त वर्ष 2019-20 के लिए भारत की आर्थिक विकार दर का अपना अनुमान सात फीसदी से घटाकर 6.8 फीसदी कर दिया। उधर, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा शुक्रवार को जारी साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार, देश का विदेशी मुद्रा भंडार पिछले सप्ताह 3.60 अरब डॉलर से बढ़कर 405.63 अरब डॉलर हो गया।


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जेवराती मांग से सोना 80 रुपए महंगा, चांदी के दाम में 30 रुपए की उछाल


नर्इ दिल्ली। स्थानीय जेवराती मांग निकलने से दिल्ली सर्राफा बाजार में शनिवार को सोना 80 रुपए चमककर 33,130 रुपए प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया। इस दौरान औद्योगिक ग्राहकी आने से चांदी भी 30 रुपए चमककर 39,300 रुपए प्रति किलोग्राम बोली गर्इ।

इंटरनेशनल मार्केट में सोना आैर चांदी के दाम
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सप्ताहांत पर शुक्रवार को पीली धातु की चमक बढ़ी रही। लंदन का सोना हाजिर तेजी में 1,313.20 डॉलर प्रति औंस पर रहा। अप्रैल का अमरीकी सोना वायदा भी 6.10 डॉलर बढ़कर 1,319.7 डॉलर प्रति औंस बोला गया। विदेशी बाजारों में चांदी हाजिर मामूली गिरावट के साथ शुक्रवार को 15.42 डॉलर प्रति औंस पर रही। बाजार विश्लेषकों ने बताया कि होली से पहले सोने के भाव में रही गिरावट के बाद से खुदरा जेवराती ग्राहकी तेज हो गर्इ है, जिससे स्थानीय बाजार में पीली धातु की चमक बढ़ी है।

घरेलू बाजार में सोना आैर चांदी
घरेलू स्तर पर ग्राहकी आने से सोना स्टैंडर्ड 80 रुपए बढ़कर 33,130 रुपए प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया। सोना बिटुर भी इतनी ही तेजी के साथ 32,960 रुपए प्रति दस ग्राम बोला गया। हालांकि, आठ ग्राम वाली गिन्नी 26,400 रुपए पर टिकी रही। औद्योगिक मांग आने से चांदी हाजिर 30 रुपए की तेजी में 39,300 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गर्इ। चांदी वायदा हालांकि 10 रुपए की गिरावट में 38,360 रुपए प्रति किलोग्राम बोली गर्इ। इस दौरान सिक्का लिवाली और बिकवाली 80 हजार और 81 हजार रुपए प्रति सैकड़ा पर टिके रहे।

दिल्ली सर्राफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के दाम
सोना स्टैंडर्ड प्रति 10 ग्राम : 33,130
सोना बिटुर प्रति 10 ग्राम : 32,960
चांदी हाजिर प्रति किलोग्राम : 39,300
चांदी वायदा प्रति किलोग्राम : 38,360
सिक्का लिवाली प्रति सैकड़ा : 80,000
सिक्का बिकवाली प्रति सैकड़ा : 81,000
गिन्नी प्रति आठ ग्राम : 26,400


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किसान निधि की दूसरी किस्त को चुनाव आयोग हरी झंडी, सिर्फ इन किसानों को दी जाएगी राशि


नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से पहले किसानों को लुभाने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम किसान) योजना की दूसरी किस्त जारी करने की चुनाव आयोग ने सशर्त मंजूरी दे दी है। इसके तहत फिलहाल दूसरी किस्त की 2000 रुपए की रकम सिर्फ उन्हीं किसानों के खातों में भेजी जा सकेगी, जिनका रजिस्ट्रेशन चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले हुआ है।

इतने किसानों का है ब्याेरा
चुनाव आयोग और कृषि मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इस सशर्त मंजूरी के तहत 10 मार्च से पहले इस योजना में रजिस्टर्ड किसानों को एक अप्रैल से दूसरी किस्त मिलनी शुरू हो जाएगी। कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के मुताबिक करीब 4.75 करोड़ किसानों का पहले से रजिस्ट्रेशन है, जिनमें से 1.65 करोड़ किसानों का ब्योरा दुरुस्त करने के लिए वापस राज्यों के पास भेजा गया है। ऐसे में मंत्रालय के पास 3.11 करोड़ पात्र किसानों का ब्योरा है, जिसमें से 2.75 करोड़ किसानों को पहली किस्त भेजी जा चुकी है। सवा सात करोड़ किसानों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया है।

चार लाख से ज्यादा ट्रांजेक्शन फेल
योजना के चार लाख से ज्यादा ट्रांजेक्शन फेल हो गए हैं। किसानों के खाते में पैसा भेजा तो गया, लेकिन तकनीकी कारणों से वह पैसा खाते में जमा नहीं हुआ। सूत्रों के अनुसार भाजपा शासित राज्यों ने केंद्र सरकार के कहने पर ज्यादा से ज्यादा किसानों के डाटा बगैर जांच-परख के भेज दिए, जिस कारण इस तरह की समस्या सामने आ रही है।

गलत खातों में भी गई रकम
कई ऐसे लोगों के खातों में भी रकम पहुंचने की शिकायत आई है, जिनका खेती-किसानी से कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए सरकार पीएम-किसान योजना के लाभार्थियों के लिए अब आधार को अनिवार्य करने जा रही है।


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लोकसभा चुनाव से पहले सरकार का बड़ा तोहफा, 16 लाख कर्मचारियों का बढ़ा वेतन


नर्इ दिल्ली। देश में लोकसभा चुनाव की हीट जबरदस्त है। पार्टियां अपने प्रत्याशियों का एेलान कर रही हैं। वहीं दूसरी आेर यूपी सरकार ने चुनाव से ठीक पहले राज्य के 16 लाख कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है। राज्य सरकार की आेर से कर्मचारियों के महंगार्इ भत्ते में 3 फीसदी का इजाफा कर दिया गया है। इस बढ़ोतरी के बाद कर्मचारियों का महंगार्इ 12 फीसदी हो गया है। सरकार की आेर से यह एेलान बुधवार को किया है।

एक जनवरी से मिलेगा कर्मचारियों को बढ़ा हुआ भत्ता
यूपी सरकार के वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव की आेर से जारी शासनादेश के अनुसार कर्मचारियों को बढ़ा हुआ भत्ता एक जनवरी 2019 से मिलेगा। जनवरी आैर फरवरी के भत्ते का भुगतान 31 मार्च को किया जाएगा। वहीं मार्च का बढ़ा हुआ सैलरी के साथ जुड़कर आएगा। इस आदेश के बाद कर्मचारियों के वेतन में एक हजार रुपए से लेकर 4 हजार रुपए के इजाफे का अनुमान है।

यह राज्य पहले कर चुके हैं एेलान
चुनाव से पहले सिर्फ यूपी सरकार ने ही इस तरह का एेलान नहीं किया है। इसकी शुरूआत कर्नाटक से हुर्इ थी।जब कुछ दिन पहले कांग्रेस आैर जेडीएस की गठबंधन वाली सरकार ने सरकारी डिग्री काॅलेजों आैर यूनिवर्सिटीज के लेक्चरों के लिए 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है। जिसके बाद सरकार के इस फैसले से प्रोफेसर की सैलरी 35 हजार रुपए से 57,700 रुपए प्रति माह हो गर्इ है।


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