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गर्मी की छुट्टियां: घूमने, मौज-मस्ती के साथ घर खरीदने का सुनहरा मौका


नई दिल्ली। गर्मी की छुटि्टयां शुरू होने वाली है। मतलब लंबी छुट्टियों में ढेर सारी मौज-मस्‍ती और घूमने का सिलसिला परवान चढ़ने वाला है। आप इस मौके का फायदा उठाकर घूमने के साथ अपनी पसंद की प्रॉपर्टी ढूढने और खरीदने में कर सकते हैं। ऐसा इसलिए कि आपके पास समय की कोई कमी नहीं होगी। वहीं दूसरी ओर पिछले दो महीनों से आम चुनाव के कारण प्रॉपर्टी बाजार ठ‍हरा हुआ है। ऐसे में डेवलपर्स पास बिक्री दवाब बना हुआ है। आप इस सुनहरे अवसर का फायदा उठाकर कम बजट में अच्‍छी डील हासिल कर सकते हैं।

गर्मी के मौसम में घर खरीदने पर मिलेंगे ये फायदे

आमतौर पर भारत में सबसे अधिक घर की खरीदारी त्‍योहारी सीजन यानी अक्‍तूबर से लेकर जनवरी तक होती है। बहुत कम लोग गर्मी में घर खरीदने की सोचते हैं। इस कारण गर्मी में घर की बिक्री सुस्‍त ही रहती है। ऐसे में अगर आप घर की खरीदारी करने जाते हैं तो आपको अच्‍छी डील आसानी से मिल सकता है क्‍योंकि डेवलपर्स पर बिक्री करने का दबाव होता है। बहुत संभावना है कि आपको कम कीमत में अच्‍छी लोकेशन पर फ्लैट मिल जाए। वहीं त्‍योहारी सीजन में आपको उसी प्रॉपर्टी के लिए अधिक निवेश करना होगा।

बिना मांगे कई तरह की छूट संभव

गर्मियों में बिक्री बढ़ाने के लिए डेवलपर्स से आपको बिना मांगे कई ऑफर्स मिल सकते हैं। वह आपको फ्लैट का इंटीरियर से लेकर कई तरह की छूट ऑफर कर सकता है। अंतरिक्ष इंडिया ग्रुप भी इस बार कई तरह के ऑफर दे रहा है। होम बायर्स हमारे रेडी टू मूव और अंडर कंस्‍ट्रक्‍शन प्रॉपर्टी में इसका फायदा उठा सकते हैं।

पूरे परिवार के साथ मकान देखने का संयोग

गर्मी में घर सर्च और फाइनल करने का सबसे बड़ा फायदा है कि आप अपने पूरे परिवार के साथ घर को पसंद या नापसंद कर सकते हैं। आपके बच्‍चे साथ में होंगे। वह सोसाइटी में मिलनी वाली सुविधओं से रूबरू होंगे। वहीं आप गर्मी में सोसाइटी के बारे में आसानी से अधिक जानकारी ले पाएंगे कि यहां का लाइफस्‍टाइल कैसा है या होगा? अगर सोसाइटी रेडी टू मूव है तो आप आसानी से कई लोगों से फीडबैक ले पाएंगे। ये फायदा आपको सर्दी या त्‍योहारी सीजन में नहीं मिल सकता है।

वक्‍त की कोई कमी नहीं

गर्मी की छुट्टियों में आपके पास वक्‍त की कोई कमी नहीं रहता है। आप अपनी पसंद का फ्लैट देखने में समय दे सकते हैं। पसंद आने पर आप डेवलपर से अच्‍छे तरीके से मोल-तोल भी कर सकते हैं।

जीएसटी-सस्‍ते लोन का फायदा भी

एक अप्रैल से जीएसटी की दरें निर्माणाधीन प्रॉपर्टी पर घटी है। वहीं दूसरे ओर होम लोन पर भी ब्‍याज दर कम हुई है। इसका फायदा उठाने का यह सबसे माकूल वक्‍त है। अगर आप इंतजार करते हैं तो अगले दो तीन महीनों में प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ना तय है क्‍योंकि डेवलपर्स का अब इनपुट क्रेडिट का लाभ नहीं ले पाएंगे। यानी लागत बढ़ेगी जिसकी भरपाई कीमत बढ़ाने से संभव होगा। वहीं कई रिपोर्ट में मांग बढ़ने की बात कही गई लेकिन नए प्रोजेक्‍ट की लॉन्चिंग में कमी आई है। इसका भी असर बाजार पर आने वाले समय में देखने को मिलेगा।

 


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सोना खरीदेने का ये है बेहतर समय, अक्षय तृतीया पर ऐसे करें निवेश


नई दिल्ली। बुलियन बाजार के लिए इस साल की शुरुआत अच्छी रही थी, लेकिन फेडरल रिजर्व दवारा नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने के इशारे के बाद मार्च माह में सोने के भाव ने अपने बढ़त को गंवा दिया है। हमें लगता है कि वैश्विक आर्थिक मंदी, बढ़ते अनिश्चित्ताओं और केंद्रीय बैंक की लिवाली से सोने में बढ़त जारी रह सकती है। निवेश डिमांड भी तेजी से बढ़ रहा है जिसके तहत फड्स और ईटीएफ में खरीदारी बढ़ेगी। वैश्विक बाजार के भाव की तुलना में घरेलू बाजार में भाव अभी भी बेहतर लग रहे हैं। इसके पीछे की वजह डॉलर के मुकाबले रुपए का भाव है जोकि इस साल की शुरुआत से हल्के दबाव में है। इसी वजह से घरेलू बाजार का भाव थोड़ा उंचा रहा है।

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अक्षय तृतीया अभी भी सोना खरीदने के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है। हमने देखा है कि औसतन पिछले 10 सालों में सोने में निवेश से सालाना 8 फीसदी का रिटर्न मिला है। हमारा मानना है कि पिछले कुछ सालों में हल्की मंदी के बावजूद भी सोने में निवेश से अच्छा रिटर्न मिल सकता है, क्योंकि मैक्रो स्तर पर कुछ अर्थव्यवस्थाओं की रफ्रतार धीमी पड़ेगी। इस वजह से मेटल में खरीदारी बढ़ेगी।

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उम्मीद के हिसाब से ही फेडरल रिजर्व ने नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है और भविष्य में जरूरत के मुताबिक इसमें बदलाव करने की तरफ इशारा भी किया है। फेड चेयरमैन ने कहा है कि कम मुद्रास्फिति की वजह से केंद्रीय बैंक को यह फैसला लेना पड़ा है। इसके विपरीत, यदि आर्थिक आंकडों में गिरावट आती है तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसी तरह, इसीबी ने भी इस साल ब्याज दरों में कोई बड़े बदलाव करने से बचा है। एक तरफ, आर्थिक मंदी की चिंता में केंद्रीय बैंक सतर्क हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आर्थिक आंकड़े नीतिगत कदम में दिर्खा नहीं दे रहे हैं


इस साल, हमें उम्मीद है कि गोल्ड ट्रेड साकारात्मक रहेगा और 32,500 के आसपास ट्रेड करेगा। यदि इस आंकड़े को यह पार करता है तो सोने का भाव 35,000 के पार जा सकता है। इस प्रकार आने वाले कुछ सालों में सोने का भाव 40,000 के पार भी जा सकता है। इस समय कोई सोने में निवेश शुरू कर सकता है।

 

सोने का प्रदर्शन: अक्षय तृतीय पर साल-दर-साल के हिसाब से
अक्षय तृतीया कीमत में कितना बदलाव हुआ (फीसदी में)
04/01/2015 26,960 -6.44
05/09/2016 29855 10.74
4/28/2017 28873 -3.29
4/18/2018 31,118 7.78
4/25/2019 31,760 2.00

 

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ऐसी स्‍वास्थय बीमा पॉलिसी में निवेश करें जो विदेश में आपका इलाज खर्च उठाए


एक संगठित दुनिया को लेकर जैसे-जैसे मौजूदा वैश्विक रुझान बदल रहे है, वैसे ही आधुनिक और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर हमारी समझ भी बदल रही है। पिछले कुछ वर्षों में, अधिक से अधिक लोग भारत के बाहर बेहतर इलाज की तलाश करने लगे हैं। इस बढ़ती अंतरराष्ट्रीय सक्रियता के पीछे कई सारे कारण हैं। जहां पैसों से संपन्न वर्ग के मरीज सबसे बेहतर मेडिकल सेवाएं हासिल करना चाहते हैं, वहीं दूसरे लोग भी विदेशों में कम खर्चीले उपचार की तलाश कर रहे हैं। यहां हर किसी को पता होना चाहिए कि विदेश में इलाज करवाना बहुत महंगा पड़ सकता है, ऐसे में आपके पास एक ऐसी पॉलिसी होना सुविधाजनक होगा, जो विदेश में इलाज के खर्चों को भी कवर करती हो। उपभोक्ताओं के बीच तेजी से बढ़ रही जरूरतों को पूरा करने के लिए, भारत में कई हेल्‍थ इंश्‍योरेंस कंपनियों ने ऐसी पॉलिसियां पेश कीं हैं जो पर्याप्त ग्‍लोबल कवरेज प्रदान करती हैं। नियमित रूप से कवर देने के अलावा, ये विशेष पॉलिसियां अतिरिक्त रूप से आपको विदेश यात्रा करते समय और यहां तक कि पहले से प्लान की गई इंटरनेशनल हॉस्पिटलाइजेशन के दौरान किसी भी मेडिकल इमरजेंसी के प्रति कवरेज प्रदान करती हैं।

इस सेवा का लाभ उठाने से पहले यह ज़रूर देखना चाहिए कि आपने विशिष्ट ऐड-ऑन के रूप में विदेशी उपचार का विकल्प चुना है या फिर पॉलिसी में यह स्पष्ट रूप से दिया गया हो।

रॉयल सुंदरम- लाइफलाइन एलीट (क्रिटिकल इलनेस)

रॉयल सुंदरम का लाइफलाइन एलीट प्‍लान भारत के साथ-साथ विदेशों में भी सर्वश्रेष्ठ स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करता है। यह पॉलिसी 18 वर्ष से अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति खरीद सकता है और यह एक व्यक्तिगत प्‍लान के साथ-साथ पॉलिसीधारक, उसके जीवन साथी और बच्चों को कवर करने वाले फैमिली फ्लोटर प्‍लान के रूप में भी उपलब्ध है। पालिसी के तहत, बीमा कंपनी विभिन्‍न सम एश्‍योर्ड जैसे 25 लाख रुपये, 30 लाख रुपये, 50 लाख रुपये, 1 करोड़ रुपये और 1.5 करोड़ रुपये के विकल्‍प पेश करती है। लाइफलाइन एलीट प्‍लान के तहत दिए जाने वाले विभिन्न चिकित्सा लाभों में क्रिटिकल इलनेस, अंतरराष्ट्रीय उपचार, गंभीर बीमारी और दुर्घटनाओं के लिए कवरेज शामिल हैं।

मैक्‍स बूपा का हार्टबीट इंडिविजुअल- प्‍लेटिनम (क्रिटिकल इलनेस)

यह पॉलिसी कुछ खास बीमारियों जैसे दिल का दौरा, कुछ खास प्रकार के कैंसर, स्ट्रोक और मस्तिष्क की कुछ बीमारियों के लिए दुनिया भर में मेडिकल कवरेज प्रदान करती है। पॉलिसी खरीदने के लिए, वयस्क पॉलिसीधारक की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए, और यहां उम्र की कोई अधिकतम सीमा नहीं है। हालांकि, 40 से ज्‍यादा उम्र के लोगों को एक प्री-मेडिकल चेकअप करवाना होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि क्‍लेम करने के लिए नेटवर्क हॉस्पिटल में उपचार कराना होगा। पॉलिसी के विभिन्न लाभों में अस्पताल में भर्ती होने के पहले और बाद के खर्च, कैशलेस उपचार, आपातकालीन मेडिकल परिवहन और सेकेंड मेडिकल ओपिनियन शामिल हैं। हालांकि, यह पॉलिसी यात्रा और आवास खर्चों को कवर नहीं करती है। सम एश्‍योर्ड का विकल्प 15,00,000 रुपये से शुरू होता है, और 20,00,000 रुपये, 50,00,000 रुपये और 1,00,00,000 रुपये के कवरेज विकल्‍प में खरीदा जा सकता है।

सिग्ना टीटीके- प्रोहेल्‍थ (इमरजेंसी हॉस्‍पिटलाइजेशन)

सिग्ना टीटीके हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी का प्रोहेल्‍थ प्‍लान अस्‍पताल में इमरजेंसी उपचार के लिए दुनिया भर में कवरेज प्रदान करती है। यह सेवा केवल तभी उपलब्ध होगी जब पॉलिसीधारक देश से बाहर है और उपचार के लिए वापस भारत लौटने की स्थिति में नहीं है। विदेश में उपचार के लिए, उपचार के स्थान पर एक मान्‍यता प्राप्‍त डॉक्‍टर से मेडिकल इमरजेंसी का प्रमाण पत्र प्राप्‍त करना जरूरी होता है। आवश्यक सर्टिफिकेशन के बाद ही क्‍लेम स्‍वीकारा जाएगा। हालांकि, पॉलिसी के तहत, इंश्‍योरेंस क्‍लेम का भुगतान पॉलिसीधारक को रीइंबर्समेंट के आधार पर किया जाता है क्योंकि इस प्‍लान में कैशलेस सुविधा उपलब्ध नहीं है। क्‍लेम भुगतान भारतीय रुपये में किया जाता है और भुगतान तभी होगा जब मरीज भारत लौट कर आ जाता है।

एचडीएफसी एर्गो- हेल्‍थ सुरक्षा ग्‍लोबल (प्‍लांड एवं क्रिटिकल इलनेस)

एचडीएफसी एर्गो हेल्थ सुरक्षा ग्लोबल एक और यूनिक हेल्‍थ इंश्‍योरेंस प्‍लान है जो एक संपूर्ण हेल्‍थ कवरेज प्रदान करता है। यह प्‍लान न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में हेल्थ कवर प्रदान करता है। सुरक्षा ग्लोबल प्लान के तहत, पॉलिसीधारक यह तय करने के लिए स्वतंत्र होगा कि वह दुनियाभर में कहां उपचार कराना चाहता है। यदि विदेश में उपचार किया जाता है, तो उपरोक्त कवर के तहत चिकित्सा खर्च का भुगतान किया जाता है। हालांकि, पॉलिसी की नियमों और शर्तों के अनुसार कवर के लिए 100 डॉलर की एक कटौती की जाती है। यह पॉलिसी पहले से प्लान हॉस्‍पिटलाइजेशन के लिए सबसे बेहतर तरीके काम करती है और यह 25 लाख रुपये से लेकर 2 करोड़ रुपये के सम एश्‍योर्ड में उपलब्‍ध है। इस पॉलिसी में शामिल होने की न्यूनतम आयु 91 दिन है, इसमें अधिकतम उम्र की कोई सीमा नहीं है।

अपोलो म्‍यूनिख- क्रिटिकल एडवान्‍टेज रायडर

अपोलो म्‍यूनिख हेल्‍थ इंश्‍योरेंस का क्रिटिकल इलनेस एडवांटेज एक क्रिटिकल इलनेस रायडर है, जो कि विदेश में 8 बड़ी बीमारियों के इलाज के लिए कवरेज प्रदान करता है। साथ ही परिवार के एक सदस्‍य की यात्रा एवं ठहरने के खर्च को भी कवर करता है। यह रायडर कम से कम 10 लाख रुपये के सम एश्‍योर्ड वाली हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी (ईजी हेल्‍थ और ऑप्‍टिमा रिस्‍टोर) के साथ खरीदा जा सकता है। क्रिटिकल एडवांटेज रायडर व्यक्तिगत आधार पर पेश किया जाता है और इसके दो संस्करण हैं - 250,000 डॉलर (लगभग 1.5 करोड़ रुपये) और 500,000 डॉलर (लगभग 3 करोड़ रुपये)। पॉलिसी में शामिल विभिन्न बीमारियों में न्यूरोसर्जरी, कैंसर, कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी, हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट / रिपेयर, लाइव डोनर ऑर्गन ट्रांसप्लांट, पल्मोनरी आर्टरी ग्राफ्ट सर्जरी, एओरा ग्राफ्ट सर्जरी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट शामिल हैं।


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गुड़ी पड़वा पर सोना खरीदना कितना फायदेमंद, एक्सपर्ट से समझिए


नई दिल्ली। बीते कुछ सालों में इक्विटी मार्केट ने लगातार बेहतर प्रदर्शन क चलते सोने की चमक फीकी होती जा रही है। पिछले छह महीने की बात करें तो सोने की वैल्यू बाइंग अपने न्यूनतम स्तर पर आ गई है। वहीं कच्चे तेल की कीमतें पिछले कुछ महीनों में उछाल दर्ज की गई है। इसके अलावा भूराजनीतिक तनाव के चलते भी सोने की कीमतों पर दबाव देखा गया है। रिटर्न की बात करें तो पिछले कुछ सालों में निवेशकों को उम्मीद के मुताबिक मुनाफा नहीं मिला है। लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि साल 2010 से 2012 सोने में जो ट्रेंड देखा गया था वो एक बार फिर लौट सकता है। ऐसे में निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में 8 से 10 फीसदी हिस्सा सोने को भी रखना चाहिए।

2. क्या गुडीपडवा पर सोना खरीदना चाहिए आप क्या कहते हैं।

उम्मीद जताई जा रही है आने वाले दिनों में सोने में पॉजिटिव रिटर्न मिल सकता है क्योंकि मंहगाई दर में उछाल और क्च्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा सकती है। वहीं गोल्ड ईटीएफ की बात करें तो इसकी कीमतें स्थिर रह सकती है। हालांकि डिमांड बढ़ने पर ईटीएफ में भी तेजी का रुख देखा जा सकता है। गुडीपडवा की जहां तक बात है तो इस अवसर पर सोने की कीमतों में बहुत ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है। क्योंकि कीमतों में पहले ही 3 से 4 फीसदी तक की रैली हो चुकी है।

3. ऐसे कौन से फैक्टर्स है जो सोने की कीमतें निर्धारित करेंगे

जहां तक कैलेंडर ईयर 2018 की बात है तो यह साल अनिश्तताओं से भरा रहा, अमेरिका सरकार की पॉलिसी, ट्रेड वार, डॉलर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड की टिप्पणी, फेड रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी, अमेरिकी सेंग्सन और अमेरिकी – नार्थ कोरिया के बीच मतभेद जैसे कारणों से सोने की कीमतों पर प्रभाव डाला है। मध्यम अवधि में सोने की में तेजी रहेगी। लंबे समय के लिए यह एक उभरती हुई संपत्ति बनती जा रही है। अनुमानित तौर पर सोना 35,000 रुपए पर आधारित रहेगा और मौजूदा ट्रेड में तेजी की तरफ बढ़ सकता है। 2019 की पहल तिमही में कीमतें 34,000 रुपए की तरफ तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में, लंबी अवधि के लिए सोने की कीमतों में अचानक गिरावट निवेश के लिए सबसे बेहतर मौका होगा।

4. सोने की कीमतों के लिए आपका टार्गेट प्राइस क्या है?

हमारा अनुमान है कि 2019 के लिए सोन की कीमतें 1410 से लेकर 1430 डॉलर के करीब रह सकता है। वैश्विक बाजारों में इसमें गिरावट के बावजूद भी अगर इसमें हल्की तेजी आती है और अस्थिरता बढ़ती है तो यह कीमत 1470 डॉलर के करीब पहुंच सकता है। हमें उम्मीद है कि इस साल के लिए 1235 से लेकर 1270 डॉलर एक मजबूत आधार हो सकता है। वहीं, घरेलू स्तर पर देखें तो इस साल के लिए 30,000 से 30,500 का स्तर पर मजबूत आधार होगा। इसके बाद इसमें 35,000 से 37,000 रुपए प्रति दस ग्राम की तरफ तेजी देखने को मिलेगी।


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अफोर्डेबल हाउसिंग से भारतीय रियल्टी सेक्टर में आएगी तेजी


नर्इ दिल्ली। बीते कुछ सालों में रेरा, जीएसटी व नोटबंदी के बाद से देश के रियल्टी सेक्टर को तगड़ा झटका लगा है। लेकिन धीरे-धीरे अब इस सेक्टर में तेजी देखने को मिल रही है। बीते कुछ तिमाहियों में कर्इ नए प्रोजेक्ट लाॅन्च हुए हैं आैर हाउसिंग डिमांड में तेजी देखने को मिल रही है। इस सेक्टर से जुड़े कर्इ जानकारों का मानना है कि हाल के दिनों में नीतियों में कुछ बदलाव के बाद इस सेक्टर की तस्वीर अब बदलने लगी है।


केंद्र सरकार भी मिड इनकम वर्ग के लिए अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट लेकर आर्इ जिससे इस सेक्टर में आैर भी ग्रोथ देखने को मिलेगा। देश के कर्इ प्रमुख शहरों में कर्इ नामी डेवलपर्स द्वारा उपयुक्त सुविधाएं देने से भी तेजी की उम्मीद की जा रही है। केंद्र सरकार ने 'प्रधानमंत्री आवास योजना' (पीएमएवार्इ) के तहत भी इस सेक्टर में तेजी लाने का प्रयास कर रही है। सरकार की इस स्कीम के तहत शहरों में रहने वाले गरीब वर्ग के करीब 2 करोड़ लोगों को बेहद ही किफायती मूल्य पर घर मुहैया कराया जाएगा। साथ ही सरकार ने इस स्कीम के तहत कर्इ तरह की छूट का भी एेलान किया है। जिसमें CLSS व जीएसटी के तहत छूट शामिल हैं। डेवलपर्स को भी इन सुविधाआें को खरीदारों को मुहैया कराना होगा।


हाल ही में उप-राष्ट्रपति ने भी अपने एक संबोधन में लाेगों को दिए जाने वाले किफायती घरों के बारे में एक महत्वपूर्ण बात कही थी। उप-राष्ट्रपति ने कहा कि इस हाउसिंग सेग्मेंट प्राइवेट सेक्टर व रियल सेक्टर डेवलपर्स की भागीदारी होना बेहद ही जरूरी है। किफयाती प्राइसिंग सेग्मेंट घरों के लिए भारत के सभी शहरों में डेवलपर्स घर खरीदारों को मिलने वाले सुविधाआें को ध्यान में रख रहे हैं। लगभग सभी हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां को किफायती हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए कर्ज मुहैया कराने की सुविधा दी जा रही है। देश के कर्इ प्रमुख बैंकों ने भी किफायती हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए प्राइवेट इक्विटी फंड बनाया है। इस सेग्मेंट की कर्इ कंपनियों ने भी इसपर ध्यान दिया है।


बीते 5 से 7 सालों की बात करें तो वर्तमान में इसमें कर्इ बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। पहले बेहद ही कम निवेशक किफायत हाउसिंग प्रोजेक्ट में निवेश करने के लिए तैयार होते थे। इसके अतिरिक्त, इंडिपेन्डेंट प्राॅपर्टी कंस्लटेंट्स (आर्इपीसी) की एक हालिया रिपोर्ट से पता चलता है कि 2018 के तीसरी तिमाही में कुल हाउसिंग यूनिट्स का अब्जाॅर्पशन बढ़ा। इसके पहले की तिमाही के मुकाबले इस आंकड़े में तेजी आर्इ है। इसमें किफायती घरों की बिक्री की सबसे बड़ी वजह लोकेशन, कीमत आैर किन ब्रांडेड डेवलपर्स के अंतर्गत प्रोजेक्ट का निर्माण हुआ, रहा है। बीते कुछ तिमाहियों मार्केट में रिकवरी देखने को मिली है।


चूंकि, किफायती घरों की मांग में लगातार तेजी देखने को मिल रही है, एेसे में यह कहा जा सकता है कि आगामी एक दो दशकों में इसी से रियल्ट सेग्मेंट में तेजी आएगी। मार्केट को भी इस बात की उम्मीद है कि नीतियों में कुछ खासा बदलाव नहीं देखने को मिलेगा। साथ ही आगामी लोकसभा चुनाव को भी देखते हुए काेर्इ राजनीतिक पार्टी रियल एस्टेट सेक्टर में ग्रोथ कम करने का जोखिम उठाएगी। साल 2020z तक उम्मीद की जा रही है कि हाउसिंग सेक्टर की भारत के कुल जीडीपी में 11 फीसदी हो जाएगा।

 


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बजट 2019: घर खरीदारों को रियायत और अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा मिले: राकेश यादव


नई दिल्ली। लंबे समय से चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना कर रहे रियल एस्‍टेट सेक्‍टर को इस बार बजट से काफी उम्‍मीदें हैं। चुनावी साल होने से संभावना भी है कि रियल्‍टी सेक्‍टर और घर खरीदारों को बजट में कई तरह की छूट और मिलेंगी। ऐसे में एस्‍टेट सेक्‍टर की सरकार से मांग है कि बजट में अन्य उद्योगों की तरह इस सेक्टर से भी स्टाम्प ड्यूटी को खत्‍म कर जीएसटी में शामिल कर दिया जाए। इससे रियलटी सेक्‍टर को प्रोत्‍साहन मिलेगा। इसके साथ ही रियल एस्‍टेट सेक्‍टर प्रोजेक्‍ट को पूरा करने के लिए आसानी से फंड की जरूरत को पूरा करने के लिए एक कोष का गठन करने का मांग कर रहा है।


सस्‍ते घरों को और छूट दी जाए

आयकर अधिनियम 1981 की धारा 80 आईबीए का दायरा, जो कि डेवलपर को सस्‍ते आवासीय प्रोजेक्ट से प्राप्त लाभ और लाभ के 100 फीसदी के बराबर कटौती की अनुमति देता है, को अफोर्डेबल हाउसिंग की सभी श्रेणियों जिनमें ईडब्ल्यूसी, एलआईजी, एमआईजी-3 और एमआईजी-2 में लागू करना चाहिए। सस्‍ते घरों की वर्तमान सीमा चार मेट्रो के लिए 30 मीटर और अन्य शहरों के लिए 60 मीटर के बजाय 200 वर्ग मीटर कारपेट एरिया तक के प्रोजेक्टस तक विस्तारित की जानी चाहिए। इससे घर के खरीदारों के सभी वर्गों को कवर किया जा सकेगा। यह 2022 तक सभी के लिए आवास के सरकार के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।


होम लोन, किराए और आयकर पर छूट बढ़े

रियल्‍टी सेक्‍टर में सुस्‍ती खत्‍म हो इसके लिए जरूरी है कि घर खरीदरों को सरकार का बढ़ावा मिले। यह तभी हो सकता है जब सरकार होम लोन, किराए और आयकर छूट की सीमा पर मिल रहे रियायतों को बढ़ाएगी। इससे आम लोगों के पास बचत बढ़ेगा और वह अपने घर के सपने को पूरा कर पाएंगे। इसके अलावा इस सेक्‍टर को उद्योग का दर्जा दिया जाए। इससे डेवलपर्स के लिए कम ब्‍याज दर पर फंड जुटाना आसान हो जाएगा।


अर्थव्‍यवस्‍था में तेजी इस सेक्‍टर के लिए जरूरी

भारतीय रीयल एस्टेट सेक्टर अर्थव्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है जिसने 2017 में सकल घरेलू उत्पाद में 6.7 फीसदी का योगदान दिया। उम्‍मीद है कि वर्ष 2025 तक इसके 13 फीसदी तक पहुंच जाएगा। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के अनुसार 2022 तक रियल एस्टेट एवं निर्माण उद्योग में 66 मिलियन से अधिक लोगों की मांग होगी, वहीं केपीएमजी के अनुमान के मुताबिक 2022 तक यह आंकड़ा 75 मिलियन को पार कर जाएगा। ऐसे में सरकार को चाहिए कि इस सेक्‍टर को पटरी पर लाने के विशेष ध्यान दें।

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करदाताओं, वेतनभोगियों और उद्यमियों की बजट से हैं ये उम्मीदें


नई दिल्ली। जैसा कि वर्ष के इस समय नियमित रूप से होता है, मीडिया बजट की उम्मीदों से उत्साहित है और करदाता-वेतनभोगी और उद्यमी- की उम्मीदें कुछ ज्यादा ही रहती हैं कि नया बजट उन्हें अपने आयकर को बचाने में मदद करेगा। उसी के संबंध में कुछ अपेक्षाएं इस प्रकार हैंः

बैंगलोर, पुणे, हैदराबाद जैसे टायर-2 शहरों में एचआरए लिमिट में बढ़ोतरी

भारतीय आयकर प्रावधान केवल मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई को महानगर मानते हैं और हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) के तहत वेतन के 50% तक का दावा किया जा सकता है। पुणे, बैंगलोर, हैदराबाद और गुड़गांव जैसे शहरों में घर का किराया बढ़ने के साथ ही यह उम्मीद की जाती है कि नया बजट उन्हें महानगरों की सूची में जोड़ेगा, ताकि इन शहरों के निवासी भी उसी तरह के लाभ का दावा कर सकें।

धारा-80 सी के तहत छूट की सीमा में वृद्धि

पिछली बार धारा 80-सी के तहत निवेश सीमा को केंद्रीय बजट 2014-15 में संशोधित किया गया था और 1 लाख से रुपए से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपए किया गया था। बढ़ते आय स्तर और मुद्रास्फीति के साथ यह राशि अब करों पर बचत के लिए पर्याप्त नहीं है। हमें उम्मीद है कि नया बजट धारा 80 सी के तहत छूट की सीमा को बढ़ाकर 2 लाख रुपए करेगा।

साझेदारी फर्मों / एलएलपी के लिए कर की दर में कमी

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2015 में बजट प्रस्तुत करने के दौरान आश्वासन दिया था कि वह आने वाले वर्षों में कॉर्पोरेट टैक्स की दर को घटाकर 30% से 25% करेंगे। 2018 में उन्होंने टर्नओवर के संदर्भ में निर्दिष्ट कंपनियों के लिए दर में कटौती की, लेकिन यह कर राहत केवल पंजीकृत कंपनियों तक ही सीमित थी और साझेदारी फर्मों और एलएलपी को नहीं। इस साल एलएलपी और साझेदारी कंपनियों को समान लाभ प्राप्त होने की उम्मीद है।

लिस्टेड सिक्योरिटीज पर एलटीसीजी पर स्पष्टीकरण

इक्विटी पर लाभ यदि एक लाख रुपए से अधिक है तो बजट-2018 में इस पर 10% एलटीसीजी टैक्स लगाया गया है। इसके साथ ही ग्रोथ ऑप्शन से लेकर डिविडेंड ऑप्शन या इसके विपरीत में स्विच करना दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ या एलटीसीजी टैक्स के अधीन है। हालांकि, यूलिप और एनपीएस के मामले में एक ही स्कीम के भीतर यानी डेट से इक्विटी तक के स्विच या उनके बीच की संपत्ति फिर से आवंटित करने पर टैक्स नहीं लगता है। यह आशा की जाती है कि इस पर कुछ स्पष्टता होगी और किसी योजना के भीतर किए गए स्विच एलटीसीजी कर के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।

आवास ऋण पर ब्याज राहत का विस्तार करें

होम लोन उन सबसे बड़े लोन में से एक है जिसका लाभ व्यक्ति अपने जीवन में उठा सकता है। सिर्फ 2 लाख रुपए तक के ब्याज कम्पोनेंट पर छूट अब पर्याप्त नहीं हैं। घर खरीदने वाले कम से कम 2.5 लाख रुपये तक के ब्याज भुगतान पर छूट मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। व्यक्तिगत करदाता 50,000 रुपए के अतिरिक्त लाभ की उम्मीद कर रहे हैं।

बजट 2019 के बाद प्रभावी होंगे नए एनपीएस नियम

सरकार ने पिछले महीने नए एनपीएस नियम जारी किए गए जो 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किए जाने के बाद लागू होंगे। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के एनपीएस योगदान में सरकार की हिस्सेदारी में 4% की वृद्धि (10% से 14% तक) की जा रही है। इसके अलावा एनपीएस निकासी को 60% तक कर मुक्त बनाया जाएगा। बाकी अनिवार्य रूप से वार्षिकियों में निवेश किया जाना चाहिए। यह उम्मीद की जाती है कि ये प्रावधान सभी करदाताओं पर लागू होंगे, सिर्फ केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए नहीं- यह निश्चित रूप से सेवानिवृत्ति योजना के लिए एक लोकप्रिय योजना के रूप में एनपीएस को बढ़ावा देगा।


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आउटलुक 2019 : उतार-चढ़ाव के साथ इन अहम पहलुओं पर रहेगी बाजार की नजर


नई दिल्ली। साल 2018 में भारतीय इक्विटी बाजार मिश्रित रहा। जिसमें ग्लोबल ट्रेड वार और कच्चे तेल की कीमतों जैसे फैक्टर ने साल भर अहम भुमिका निभाने में कामयाब रही। भारतीय बाजार में आईएल एंड एफएस के मामले में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई । खासकर सितंबर और अक्टूबर 2018 के महीने में। हालांकि कुछ दिन में ही इस मामले से बाजार ने अपने आप को रिकवर कर लिया। जिसके बाद निफ्टी 50 में 3.2फीसदी की बढ़त देखने को मिली, तो वही बीएसई के सेंसेक्स में 5.9 फीसदी की रिकवरी देखी गई। हालांकि बाजार पुजींकरण की बात करें तो साल 2018 में इंडियन मार्केट में 7.2लाख करोड़ का मार्केट कैप घट गया। जिसमें लार्ज कैप का हिस्सा ज्यादा रहा। वहीं मिडकैप औऱ स्मालकैप इंडेक्स में भी अच्छी खासी गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान निफ्टी के मिडकैप इंडेक्स में 16 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई तो वहीं स्मालकैप इंडेक्स 30 फीसदी तक लुढ़क गया। हालांकि इस दौरान घरेलू निवेशकों ने बाजार पर अपना भरोसा कायम रखा और साल 2018 में करीब 1.1 लाख करोड़ का निवेश किया। जबकि इससे पहले एफपीआई के .4.5बिलियन डॉलर के मुकाबले घरेलू निवेशकों ने साल 2017 में 1.17लाख करोड़ का निवेश किया था ।

राजनीतिक हलचल, ब्याज दर और कैपेक्स पर नजर

साल 2019 की बात करें तो तो पहली छमाही में लोकसभा चुनावों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। साल 2019 में बाजार की चाल इन तीन अहम पहलुओं के साथ चलेगी। जिसमें पहला, एक ऐसी सरकार जिसे पूर्ण बहुमत हासिल हो। दूसरा, निजी कैपेक्स के अंतराल में कमी आए और तीसरा, ब्याज दरों का कम होना। अगर 2019 में पूर्ण बहुमत वाली सरकार आती है तो भारतीय बाजार को इसका बहुत फायदा मिलेगा। हालांकि जबतक चुनावों के नतीजे नहीं आ जाते तबतक बाजार की चाल ग्लोबल संकेतों और इंडिया इंक पर ही निर्भर करेगा।

यहां ध्यान देने योग्य बात है कि 2019 के पहली छमाही में जीडीपी ग्रोथ में सुधार, ग्रॉसफिक्स्ड कैपिटल फोरमेशन यानि जीएफसीएफ और बैंक के क्रेडिट ग्रोथ में सुधार में हालात में बदलाव देखा जा सकता है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बात करें जो कि ( पहले से ही 70 फीसदी के आंकडें को पास कर चुकी है) 2019 के निजी कैपेक्स साइकल में एक सुधार की बयां बिखेर सकता है। इससे उद्योगों की अर्निग्स यानि कमाई में इजाफा देखने को मिल सकता है। हालांकि इसका पूरा असर चुनावी नतीजों के बाद ही देखा जा सकेगा। इसके अलावा ट्रे़ड वार के चलते ग्लोबल ग्रोथ की धीमी गति, कच्चे तेल की कीमतें महंगाई में बड़ी भुमिका अदा करेंगी। वहीं खुदरा महंगाई की बात करें तो भारतीय रिजर्व बैंक को इसे भी एक रेंज में सीमित करना होगा। हालांकि उम्मीद की जा रही है कि केंद्रीय बैंक फरवरी 2019 की पॉलिसी बैठक ने तो नहीं लेकिन अप्रैल की बैठक में इसपर काबू पा सकने में कामयाब हो जाएगी। ब्याज दरों का असर खासकर एनबीएफसी और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों पर खासा देखा जा सकेगा।

उम्मीद की जा रही है कि भारतीय रुपए में स्थिरता, डेफिसिट में सुधार के कारण कुछ अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे। जिसके चलते साल 2019 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ज्यादा से ज्यादा विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार में निवेश कराने में कामयाब हो सकेगा।

बाजार में जारी रहेगा उतार-चढ़ाव का दौर

साल 2019 के पहली छमाही तक भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर देखन को मिल सकता है। हालांकि पहली छमाही के बाद सरकार की स्थिति साफ होन के बाद इसमें बदलाव देखे जाएंगे। साथ ही महंगाई दरों में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भी भी स्थिति में काफी बदलाव की गुंजाइश देखी जा सकेगी। इसलिए निवेशकों को सलाह है कि वे क्वालिटी स्टॉक में ही निवेश करें। जिनका वैल्युएशन अच्छा हो या फिर वे अपने ऐतिहासिक लो लेवल से बेहतर ट्रेड कर रहे हों। मिडकैप और स्मॉलकैप में कई ऐसे स्टॉक्स हैं जिनमें साल 2018 के मुकाबले काफी सुधार देखने को मिल सकता है।

अच्छा पोर्टफोलियो बनाने का समय

इसिलिए हमें उम्मीद है कि ये सही समय है जब निवेशक बाजार से न भागें, वो एसआईपी के जरिए निवेश शुरु करें और धीरे धीरे अपने को बढ़ाकर इक्विटी तक लें जाएं। हालांकि बाजार के उतार-चढ़ाल से घबराने की बजाय अपनी रणनीति पर भरोसा करना सीखें। जब बाजार में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव दिख रहा हो तो असमंजस में आने की बजाय अपने निवेश को अलग अलग तरीके से बांटे। जैसे कि अपने निवेश के 60 फीसदी हिस्से को लार्ज कैप में और 40 फीसदी हिस्से को मिडकैप में लगाएं औऱ साथ ही स्मॉलकैप पर भी नजर बनाएं रखें। ताकि तुरंत कैश उपलब्ध हो सकें। उदाहरण के तौर पर साल 2019 में आप अपने निवेश का 80 से 85 फीसदी हिस्सा लार्ज कैप स्टॉक्स में रखें। और 15 से 16 फीसदी हिस्से को मिडकैप पर निवेश करें, ताकि आपका बैलेंस बना रहे और आप एक अच्छा पोर्टफोलियों बनाने में कामयाब हो सकें।


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बढ़ाना हो अपना बिजनेस तो अपनाएं ये 5 तरीके


नई दिल्ली। आज के व्यावसायिक जगत में अनेक विषयों की जोरदार चर्चा है – बिग डेटा, क्लाउड, एआई, आईओटी,ब्लॉक चेन, सोशल मीडिया, डिजिटल, आदि। दुनिया धीरे-धीरे डिजिटलीकरण प्रक्रिया की ओर बढ़ रही हैं और इसके साथ ही जिस चीज को काफी तवज्जो मिल रही है, वह है कारोबार का स्वचालन, यानी बिज़नेस ऑटोमेशन।

बिज़नेस ऑटोमेशन क्या है?

साधारण अर्थ में बिज़नेस ऑटोमेशन वह तरीका है जिसमें संगठन अपनी दैनिक प्रक्रियाओं से सबसे जटिल और/या सबसे अनावश्यक पद्धतियों को निकाल कर उन्हें सहजता के लिए दुरुस्त करते हैं। यह व्यवसायी के नाते आपके लिए एक अवसर है कि आप नवोन्मेष लागू करें और अपनी सबसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक प्रक्रियाओं को इस तरह व्यवस्थित करें कि आपका व्यवसाय पहले से ज्यादा कार्यकुशल और आपका जीवन ज्यादा सरल हो जाए। और भी सरल ढंग से हम ऑटोमेशन को एक चमत्कारिक कदम के रूप में समझ सकते हैं, जिससे लागत में कमी आती है, आपका समय बचता है, यह गलतियाँ होने से रोकता है और आपके मानव श्रमबल को, रोजमर्रे के बार-बार होने वाले कामों पर समय खर्च करने के बदले ज्यादा गंभीर समस्याओं को हल करने का समय मिलता है।

जैसा कि हमने ऑटोमेशन को विभिन्न रूप में समझने का प्रयास कर लिया है, अब कुछ बुनियादी सवालों पर गौर करें :
-क्या दुनिया में कोई उद्योग हो सकता है जो खर्च में कटौती नहीं करना चाहेगा?
-कोई ऐसा उद्योग है जो समय बचाना और गलतियों से बचना नहीं चाहता होगा?
-क्या विश्व में कोई उद्योग है जो नहीं चाहेगा कि उसके जटिल काम-काज के लिए कोई आसान तरीका मिल जाए?

बेशक, हर कोई ऐसा ही चाहेगा। किन्तु, ऐसा ही होता तो दुनिया के छोटे-बड़े सभी उद्योग अपनी शुरुआत ही से स्वचालित हो गए होते। भारत के एमएसएमई उद्योग पर सरसरी नजर डालने से यह सहज पता चल जाता है कि अभी भी काफी उद्योग हैं जिनकी व्यावसायिक प्रक्रियाएँ मानव संचालित ही है। यहाँ गौर करने वाली बड़ी बात यह है कि ऑटोमेशन या स्वचालन का अर्थ एक कंप्यूटर रख लेना भर नहीं होता। ऐसे अनेक कारोबारी संस्थानों के उदाहरण हैं जहां कंप्यूटर है, लेकिन उनका इस्तेमाल कुछ ख़ास काम-काज के लिए ही किया जा रहा है। जैसे कि विक्रय, खरीदारी, प्राप्तियाँ, देनदारियाँ या इन्वेंटरी या बैंकिंग आदि में से कोई या कुछ काम कंप्यूटर पर किये जा रहे हैं, लेकिन अभी भी वे एक कंपनी के रूप में समस्त काम-काज को एकीकृत करने के लिए कंप्यूटर का प्रयोग नहीं कर रहे हैं।

क्या कारण है कि उद्योग स्वचालन में पीछे हैं?

तो, उनके सामने क्या रुकावट है? वे कौन-से संभावित कारण हो सकते हैं जिनको लेकर भारत में आज भी व्यवसायी अपने काम-काज का स्वचालन नहीं कर रहे हैं, जबकि स्पष्‍टतया इसके अनेक फायदे है।

मोटे तौर पर निम्नलिखित में से कोई एक या दोनों कारण हो सकते हैं :

अपेक्षित स्वचालन में काफी समय लगेगा और स्वचालन के कार्यान्वयन में लगने वाला समय स्वचालन से बचने वाले समय से काफी हयादा है। अपेक्षित स्वचालन में काफी खर्च आयेगा, और स्वचालन के कार्यान्वयन का खर्च, स्वचालन के बाद खर्च में आने वाली कमी से काफी अधिक है या स्वचालन से मुझे जो लाभ मिलेगा उससे कहीं अधिक तो स्वचालन के कार्यान्वयन पर खर्च हो जाएगा। संक्षेप में, अगर आप केवल समय और पैसों के आधार पर फैसला करते हैं तो आपको उत्तर जल्द मिल जाएगा। अगर स्वचालन तीव्र एवं किफायती हो, तो आप इसे अवश्य अपनाना चाहेंगे, फिर आपके उद्योग का आकार कुछ भी हो। अगर स्वचालन समय लेने वाला और खर्चीला है, तो आपको हिसाब लगाने की ज़रुरत होगी कि इसे करें या नहीं करें, फिर फैसला करें। और ऐसे में कभी उद्यमों के लिए एक वाजिब सवाल यह है कि – अपने कारोबार को स्वचालित करने का सही समय कब है।

बिज़नेस ऑटोमेशन के लिए 5 विचारणीय बातें

बिज़नेस ऑटोमेशन पर सोच-समझकर फैसला करने में आपकी मदद के लिए हमने 5 घटकों को सूचीबद्ध किया है जिन्हें हम बिज़नेस ऑटोमेशन की ए,बी,सी,डी और ई कहते हैं, जो इस प्रकार हैं :

उत्तरदायित्व – आप जब स्वचालन करते हैं, तो अपनी व्यावसायिक प्रक्रियाओं के एक-एक चरण के लिए एक अधिकारी बनाते हैं। उसके बाद सारे दायित्वों को एक या दूसरे व्यक्ति के अधीन कर दिया जाता है जो केवल उस दायित्व के लिए उत्तरदायी होता है। सूचना की पारदर्शिता के उस स्तर को समर्थ बनाने से आपको अपने व्यवसाय के सभी हिस्सेदारों में उत्तरदायित्व आगे बढ़ाने में मदद मिलती हैं। इससे आपको कुछ निश्चित रुझानों के बारे में जानने में भी आसानी होती है, जैसे कि किस काम में सबसे ज्यादा समय लग रहा है, चीजें अक्सर सबसे अधिक कहाँ अटकती हैं, आदि।

समय का बेहतर उपयोग – स्वचालन से आपको बेकार हो चुके, गैरज़रूरी चरण और प्रक्रियाओं की पहचान करने और उन्हें हटाने में मदद मिलती है। आप समय और संसाधन की बर्बादी करने वाले बिन्दुओं को समझ पाते हैं। इतना ही नहीं, सूचनाओं के संकलन और पुनर्संकलन जैसे बार-बार होने वाले कार्यों को, जिनमे मानव कौशल या विशेषज्ञता की ज़रुरत नहीं होती, हटाकर उनकी जगह स्वचालित प्रणालियाँ लगाई जा सकतीं हैं। आप जब अपनी प्रक्रियाओं को स्वचालित करना आरम्भ करते हैं, तभी यह स्पष्ट हो जाता है कि आपके कारोबार में लोग एक ही वृत्त में चक्कर लगाते हुए कितना समय खर्च कर देते हैं, सिर्फ इसलिए कि उनके पास ज़रुरत पड़ने पर ज़रूरी सूचना नहीं होती। ऐसा करते हुए आप अपने लिए और अपने संसाधनों के लिए खाली समय निकाल पाते हैं और उस समय में अपनी कंपनी के मुख्य कार्यों से सम्बंधित रणनीतिक पहलुओं पर ध्यान केन्द्रित करते हैं। दूसरे शब्दों में, उन कार्यों के लिए समय देना जहां टेक्नोलॉजी उनकी जगह नहीं ले सकती।

संचार – स्वचालित दृष्टिकोण से आपके हिस्सेदारों और कर्मचारियों के बीच ज्यादा व्यवस्थित संचार होता है। इसलिए, विक्रय की देखभाल करने वाला व्यक्ति इन्वेंटरी के व्यक्ति के साथ तालमेल बना सकेगा और भण्डार में अपेक्षित सामान होने पर ही ग्राहक से वादा किया जाएगा। इसी प्रकार इन्वेंटरी के प्रभारी व्यक्ति और क्रय के देखभाल करने वाले व्यक्ति के बीच तालमेल होगा जिसकी कि हर समय पर्याप्त इन्वेंटरी उपलब्ध रह सके. आगे चल कर इससे आपको फायदा यह होगा कि आप अपने आस-पास के इकोसिस्टम के लिए एक उन्नत प्रतिक्रियात्मकता तैयार कर सकेंगे। आप अधिक तेजी से अपने आपूर्तिकर्ताओं और ग्राहकों के लिए प्रतिक्रिया करने में सक्षम होंगे और इस तरह आपकी प्रतिस्पर्धी ताकत बढ़ेगी तथा नगदी एवं धन के प्रवाह का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा।

निर्णय निर्धारण – सभी उपलब्ध सूचनाओं पर विचार किये बगैर व्यावसायिक निर्णय की परिणति अक्सर असफलता में होती है। अपनी व्यावसायिक प्रक्रियाओं को स्वचालित करने से आपको मूल्यवान सूचनाएं मिलेंगी जो हाथ से या किसी भिन्न प्रणाली पर काम करने से प्राप्त नहीं होतीं। इससे न केवल आपका समय बचता है, अपितु आप ज्यादा तेज और बेहतर ढंग से डेटा का विश्लेषण भी कर पाते हैं। उपलब्ध डेटा की गुणवत्ता जितनी अधिक होगी, आप उतना ही बेहतर निर्णय कर सकेंगे, उतना ही ज्यादा आपका पैसा और समय बचेगा।

भूल सुधार और खोज – बिज़नेस प्रोसेस ऑटोमेशन यानी व्यावसायिक प्रक्रिया स्वचालन के अनेक विशेषताओं में से एक यह है कि आप मानवीय संवेदनाओं को मशीन की सटीकता से स्थानापन्न कर देते हैं। विलंबित भुगतान, धीमी विक्रय स्वीकृति, उन माल के लिए गलत टैक्स रिटर्न और भुगतान जो कभी प्राप्त नहीं हुआ, ये सभी बड़ी मंहगी गलतियाँ होतीं हैं जिनसे आपके उद्योग की कार्यशील पूंजी प्रभावित हो सकती है. और खुद गलतियों से भी अधिक बड़ी बात यह है कि उन्हें आगे पहचानना और ठीक करना मुश्किल हो जाता है। इस प्रकार स्वचालन (ऑटोमेशन) एक शानदार उपाय है जिसके सहारे आप काफी पैसों का खर्च बचा सकते हैं, जो अन्यथा रूप में गलतियों के कारण बेकार चला जाता।

अब, जैसा कि आपने उपर्युक्त 5 घटकों को पढ़ लिया है, तो खुद से सवाल करें – क्या ये घटक अभी मेरे लिए समस्या खड़ी करते हैं? क्या ये घटक अभी इस समय मेरे और मेरे व्यवसाय के लिए महत्वपूर्ण है? अगर इनका उत्‍तर “नहीं” है, तो आप बिज़नेस ऑटोमेशन का फैसला करने से पहले अपने व्यवसाय के आकार, राजस्व, ग्राहक आदि के सन्दर्भ में कुछ और बड़ा होने का इंतज़ार कर सकते हैं। लेकिन अगर उत्तर“हाँ” है, तो आपके व्यवसाय को स्वचालित करने का यह बिल्‍कुल सही समय है।


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पहली बार भरने जा रहे हैं आयकर रिटर्न, तो जरुर ध्यान रखें ये 8 बातें


करदाताओं की विभिन्न श्रेणियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने विभिन्न प्रकार की वार्षिक रिटर्न पेश किए हैं। उदाहरण के लिए, नियमित करदाताओं के लिए जीएसटीआर-9और रचना योजना करदाताओं के लिए जीएसटीआर-9ए जारी किए गए हैं। इनपुट सेवा वितरकों, आकस्मिक कर योग्य व्यक्तियों, अप्रवासी कर योग्य व्यक्तियों और स्रोत पर कर कटौती करने के लिए उत्तरदायी व्यक्तियों को छोड़कर, जीएसटी के तहत पंजीकृत सभी करदाताओं को, वार्षिक रिटर्न दाखिल करने की आवश्यकता है।

यहां कुछ बिंदु दिए गए हैं, जिसे व्यक्ति को वित्त वर्ष2017-18 के लिए वार्षिक रिटर्न भरने से पहले ध्यान में रखना चाहिए।

1. बहीखातों और कर चालानों का पुनर्मूल्यांकन जुलाई 17से मार्च 18 के दौरान जारी किया जाता है और यह बहुत महत्वपूर्ण है; यह आॅडिट किए गए वित्तीय विवरणों में घोषित कारोबार से मेल खाना चाहिए। बहीखातों और चालानों में दिए गए आंकड़ों मेल खाना महत्वपूर्ण है या अन्यथा जीएसटी भुगतान गलत होगा। इनवॉइस के साथ, डेबिट और क्रेडिट नोट्स भी बहीखातों के साथ अनुबंध में होंगे।

2. बहीखातों के मौजूदा बैलेंस और जीएसटी डेटा की किसी भी विसंगति से बचने के लिए, कंपनी की इकाइयों/शाखाओं के बीच स्टॉक ट्रांसफर को बहीखाते से मेल खाना चाहिए।

3. अवधि के दौरान जारी कर चालान के साथ ई-वे बिल डेटा का मिलान भी बहुत जरूरी है। राज्य-वार ई-वे बिल डेटा चालान के साथ ध्यान से मिलाया जाना चाहिए ताकि भेजे गए माल और उस पर जीएसटी के भुगतान को ट्रैक किया जा सके।

4. करदाताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी खरीद और अन्य सेवा चालान बहीखातों में शामिल हैं और इनपुट टैक्स क्रेडिट का उचित रूप से लाभ उठाया गया है। इनपुट टैक्स क्रेडिट के बीच किसी भी असमानता और खरीद पर भुगतान किए गए टैक्स की वजह से जीएसटी रिटर्न में आईटीसी का गलत दावा होगा।

5. एक बार खरीदी चालान बहीखाते के साथ मिला लिए जाए, तो करदाताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि खरीदी डेटा आपूर्तिकर्ताओं द्वारा विधिवत अपलोड किया गया हो; यह डेटा जीएसटीआर-2ए फ़ॉर्म में दिखाई देगा।

6. वार्षिक रिटर्न दाखिल करने के साथ आगे बढ़ने से पहले, करदाताओं को बहीखातों के साथ सभी मासिक या तिमाही जीएसटी रिटर्न मिलाना चाहिए। कर योग्य, छूट और गैर-जीएसटी कारोबार को सावधानी से मिलाना चाहिए। किसी भी अंतर को तुरंत ठीक किया जाना चाहिए।

7. सुनिश्चित करें कि वे चालान जिन पर इनपुट कर क्रेडिट का दावा किया गया है, आपूर्तिकर्ताओं को 180 दिनों के भीतर उनका भुगतान किया जाना चाहिए। यदि नहीं, तो उस पर प्राप्त क्रेडिट को उलट दिया जाएगा और करदाता इस तरह की राशि का ब्याज और जुर्माना के साथ भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होंगे।

8. इलेक्ट्रॉनिक कैश या क्रेडिट लेजर द्वारा भुगतान किए गए जीएसटी को सुलझाने के दौरान, करदाताओं को लागू खर्चों पर रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (आरसीएम) के तहत भुगतान जीएसटी के लिए भी जिम्मेदार होना चाहिए।

सुनिश्चित करें कि 31दिसंबर 2018से पहले, ऊपर उल्लिखित युक्तियों का पालन करें। वार्षिक रिटर्न दाखिल करने के पीछे तर्क वर्ष के दौरान मासिक या त्रैमासिक जीएसटी रिटर्न में प्रस्तुत सभी जानकारी को समेकित और घोषित करना है।


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नोएडाः एनसीआर में सबसे पसंदीदा आवासीय जगह


नई दिल्ली। क्या नोएडा क्षेत्र में आर्थिक संभावनाएं व नए नियम रियल एस्टेट सेक्टर को पुनर्जिवित कर सकते हैं? हम इस बात के बारे में पता लगा रहे हैं कि एनसीआर और दूसरे शहरों के मुकाबले नोएडा में क्या संभावनाएं हैं। गोल्फ लिंक में एक आलीशान विला हर किसी का सपना है लेकिन हर कोई इसे वास्तविकता में नहीं बदल सकता है। सपनों को पूरा करने के लिए आपको वास्तविकता में जीना होगा। आज दिल्ली का अधिकतर मध्यमवर्गीय परिवार खुद के घर का सपना पूरा करने के लिए एनसीआर की ओर भाग रहा है। चाहें वो गुड़गावं, द्वारका, नोएडा या ग्रेटर नोएडा हो।इस साल के शुरुआत में एनारौक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एनसीआर में करीब 2.8 करोड़ लोग रहते हैं और बीते कुछ सालों में किफायती आवासीय सेगमेंट में यहां सबसे अधिक विस्तार देखने को मिला है। इसमें करीब 26 से 30 फीसदी की कुल तेजी देखी गई है।

ये है लोगों की सबसे पसंदीदा जगह

इन क्षेत्रों में सबसे पसंदीदा जगह गुड़गांव में सोहना रोड, गाजियाबाद में राजनगर एक्सटेंशन, यमुना एक्सप्रेसवे और पश्चिमी ग्रेटर नोएडा व भिवाड़ी है। एटीएस समूह होमक्राफ्ट सीईओ प्रसुन चौहान का मानना है कि मध्यम वर्गीय परिवारों को खुद के घर का सपना पूरा करने के लिए नोएडा सबसे उचित जगह है। हाल ही में एक वेबसाइट से अपने बातचीत में चौहान ने कहा, ‘‘नोएडा में किफायती व मिड-इकनम मकानों का बहुत स्कोप है और बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी नोएडा व ग्रेटर नोएडा में तेजी से बढ़ रही हैं। आने वाले दिनों में नोएडा में नौकरियों के अवसर बढ़ने वाले हैं और ऐसे में किफायती मकानों की मांग भी बढ़ेगी।’’दिल्ली एनसीआर में सबसे बड़े रियल एस्टेट डेवलपर्स में से एक एटीएस समूह इस साल के शुरुआती तीन महीनों में 1,000 करोड़ से भी अधिक की बिक्री दर्ज कर चुका है। एटीएस व उसकी किफायती हाउसिंग कंपनी होमक्राफ्ट नोएडा, गुडगांव, मोहाली व चंडीगढ़ में करीब 975 से भी अधिक प्रोजेक्ट की बिक्री कर चुके हैं।

अप्रैल में ग्रेटर नोएडा में लॉन्च हुआ पहला प्रोजेक्ट

होमक्राफ्ट ने इस साल अप्रैल माह में पश्चिमी ग्रेटर नोएडा में अपने पहले प्रोजेक्ट को लॉन्च किया है। कंपनी इस प्रोजेक्ट के लिए 500 करोड़ खर्च करने वाली है। कंपनी यह खर्च डेट, इंटरनल एक्रुअल व खरीदारों से मिले एडवांस से फंड करेगी। मिड सेग्मेंट को ध्यान में रखते हुए प्रोजेक्ट ‘हैप्पी ट्रेल्स’ साल 2022 तक पूरा हो जाएगा। होमक्राफ्ट का यह नवीन प्रोजेक्ट है।नोएडा एक्सटेंशन का निर्माण नोएडा व ग्रेटर नोएडा की तुलना में किफायती बाजार के तौर पर हुआ था, लेकिन इसे उप-शहर के तौर पर कभी नहीं देखा गया। अब इस क्षेत्र में नए प्रोजेक्ट्स आ रहे हैं जो किफायती होने के साथ-साथ प्रीमियम भी है।

तीन तिमाहियों में 50,000 फ्लैट्स होंगे तैयार

हवेलिया ग्रुप के प्रबंध निदेशक, निखिल हवेलिया का मानना है कि पश्चिमी ग्रेटर नोएडा में अगले तीन तिमाहियों में करीब 50,000 फ्लैट्स तैयार हो जाएंगे। हवेलिया का यह भी मानना है कि यह लोवर व मिडिल इनकम वाले लोगों के लिए एक नया विकल्प होगा। इस क्षेत्र में अधिकतर अपार्टमेंट 700 से 1500 वर्गफुट के हैं। जबकि पास के दूसरे सेक्टर्स में 1200 से 2500 वर्गफुट फ्लैट्स आसानी से उपलब्ध हैं।कुछ समय पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व कोरियन राष्ट्रपति मून जे-इन ने नोएडा के सेक्टर 81 में सैमसंग की सबसे बड़ी मैन्युफैक्चरिंग हब का उद्रघाटन किया है। सैमसंग की मौजूदगी से कार्बन, ओप्पो, लावा व इंटेक्स जैसे दूसरी मोबाइल कंपनियों के लिए भी यहां भरपूर मौका है।

बढ़ रही है घरों की मांग

उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेसवे को मोबाइल इंडस्ट्री क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया है। इससे नोएडा व ग्रेटर नोएडा में आवासियों घरों की मांग में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली से बेहतर कनेक्टिविटी भी इसका एक कारण है जिससे मोबाइल कंपनियों के लिए नोएडा पंसद बनता जा रहा है। यह और भी सुगम हो जाएगा जब नोएडा-ग्रेटर नोएडा के बीच 30 किलोमीटर का एक्वा मेट्रो लाइन चालू हो जाएगी। यह सेक्टर 81 से होकर निकलेगा जिससे ट्रैवल टाइम में भी बचत होगा। इस मेट्रो लाइन में नोएडा के सेक्टर 78, 79, 101, 107, 104, 80 व 81 पड़ेगा जहां 20 लाख में 2 BHK किफायती फलैट आसानी से उपलब्ध हैं।

ये है निवेश के लिए सबसे उचित

त्योहारी सीजन में एनसीआर में आवासीय रियल एस्टेट में निवेश के लिए सबसे उचित समय बनता जा रहा है, खासतौर पर नोएडा क्षेत्र। क्रेडाई के चेयरमैन व एटीएस सीएमडी, गीतांबर आनंद का कहना है कि अचल संपत्ति क्षेत्र में साल 2018 की वृद्धि आने पर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एआरआई अधिनियम के साथ खरीदारों के आत्मविश्वास की वापसी के रूप में देखा जा सकता है।रियल एस्टेट डेवलपर्स अब आसान पेमेंट स्कीम जैसे एक्सटेंडेड डिस्काउंट, फुली पैक्ड फ्लैट्स, और मर्सीडीज बेंच व दूसरी कारों, सोने के सिक्के, आईफोन आदि जैसे विकल्पों की पेशकश कर रहे हैं। डेवलपर्स खासतौर पर यह विकल्प त्योहारी सीजन को ध्यान में रखकर दे रहे हैं। महागुन व सिक्का ग्रुप जैसे फम्र्स रेडी-टू-मूव इन्वेंटरी में 25 फीसदी तक की छूट भी दे रहे हैं। वहीं गौर संस, सुपरटेक, अंतरिक्ष, साया, , मिगसन व एक्जॉटिका जैसी कंपनियां फ्री कार पार्किंग, क्लब मेंबरशिप, लीज रेन्ट, फ्री मॉडुल किचन व बेडरूम में वार्डरॉब जैसे ऑफर्स की पेशकश कर रही हैं।कुल मिलाकर इस सेक्टर में निवेश का यह सबसे उचित समय है। आप अपने सपनों के घर को उसी प्राइस रेंज में पा सकते हैं जितना आप खर्च कर सकते हैं। सपना हकीकत बन सकता है, बस इसके लिए थोड़ी मेहनत की जरूरत होती है।

 

 

 


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IRDAI ने जारी किया स्वास्थ्य बीमा पाॅलिसियों में अपवादों के मानकीकरण रिपोर्ट, जानिए क्या है खास


नर्इ दिल्ली। आईआरडीएआई ने स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों में अपवादों के मानकीकरण के लिए एक कार्यकारी समूह की रिपोर्ट जारी की है, यहां ध्‍यान देने योग्‍य कुछ प्रमुख सिफारिशें दी गई है:

8 साल बाद पॉलिसी से इनकार नहीं किया जा सकता है- 8 वर्षों के बाद बीमा कंपनी स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्‍या के चलते क्‍लेम से इंकार नहीं कर सकती है। तकनीकी रूप से, कोई भी अस्वीकृति केवल संभावित जांच/धोखाधड़ी के कारण हो सकती है। यह उन ग्राहकों को सुरक्षा प्रदान करता है जिनका क्‍लेम भुगतान करने के 10 या 14 साल बाद अस्वीकार कर दिया गया है। 8 साल ही क्‍यों? यह बीमा कंपनियों को घोषणा और दावों के संदर्भ में संभावित रूप से ग्राहक के बारे में पता लगाने का समय देता है। 8 साल किसी भी प्रकार की मौजूदा बीमारी के प्रकट होने और अंततः क्‍लेम के निपटान के लिए एक पर्याप्‍त समय है। यहां तक कि अगर 8 साल के भीतर किसी बीमारी के बारे में कुछ पता चलता है जो संभावित पूर्व-मौजूदा बीमारी है, तो इसे या तो स्थायी या अस्थायी अपवाद के रूप वर्गीकृत किया जा सकता है, इसमें सह-भुगतान लागू किया जा सकता है, या फिर पॉलिसी में अतिरिक्‍त रकम जोड़ी जा सकती है। यह ग्राहकों के लिए एक उचित व्‍यवस्‍था है क्योंकि परिस्थिति कोई भी हो, बीमाधारक को हमेशा सुरक्षा मिलती रहेगी।


अपवादों का मानकीकरण - अब पॉलिसी में केवल 17 तय अपवाद हो सकते हैं। इसके अतिरिक्‍त किसी भी दूसरे अपवाद को अंडरराइट किया गया है। इनमें से अधिकतर अपवादों को डब्ल्यूएचओ द्वारा दी गई बीमारियों की परिभाषा के अनुरूप तैयार किया गया है, जो कि रोगों का अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण (आईसीडी) है। इसके अलावा इनका क्‍या अर्थ है और इसमें किसे अपवाद के रूप रखने की अनुमति है तथा बाहर रखने की अनुमति नहीं है, इस प्रकार से इनकी व्‍याख्‍या की जाएगी। ग्राहकों को व्यापक कवरेज प्रदान करने के लिए, पैनल ने सुझाव दिया है कि यदि विकलांगता के साथ कोई व्यक्ति किसी भी गंभीर बीमारी से पीड़ित है, तब भी वे एक अच्‍छा हेल्‍थ इंश्‍योरेंस प्राप्त कर सकते हैं। जिसमें बीमा कंपनी ग्राहक की सहमति के अनुसार इसे स्थायी अपवाद के रूप में मान सकती है।


पॉलिसी को खरीदने के बाद रोगों/बीमारियों को कवर किया जाएगा -

पॉलिसी खरीदने के बाद ग्राहक को यदि कोई भी बीमारी होती है (यदि उन्‍हें परिभाषित किया गया है और पॉलिसी में दिए गए 17 अपवादों का हिस्सा हैं) तो उसे भी कवर किया जाता है। इसमें मानसिक बीमारी, एचआईवी और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां जैसे हाइपरटेंशन भी शामिल हैं।


शराब से जुड़े मामलों भी शामिल -

यहां एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है वह यह कि अब शराब और उससे जुड़े मामलों में भी थोड़ी बहुत सुरक्षा मिल सकती है। जब तक कोई शराब की व्‍यसन मुक्ति के इलाज के लिए नहीं जा रहा है, तब तक अल्कोहल के प्रभाव में होने वाले मामलों को कवर किया जाएगा। लेकिन अवैध गतिविधि में शामिल मामलों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।


प्रतीक्षा अवधि का मानकीकरण-

प्रतीक्षा अवधि अब और अधिक मानकीकृत किया जा रहा है। अब लगभग सभी पॉलिसियों में 4 साल या उससे कम की मानक प्रतीक्षा अवधि होगी। कुछ निश्चित बीमारियों जैसे कि उच्‍च रक्‍तचाप, मधुमेह, और हृदय रोगों के लिए, प्रतीक्षा अवधि घटकर 30 दिन होगी।


एडवांस मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए कवरेज-

इस प्रस्‍ताव के तहत, एक समर्पित हेल्‍थ टेक्‍नोलॉजी असेस्‍मेंट कमेटी का गठन किया जाएगा जो एडवांस ट्रीटमेंट और दवाओं को शामिल करने की अनुमति देगी। यह कमेटी एक स्व-नियामक निकाय के रूप में कार्य करेगी और यह तय करने का काम करेगी कि बताया गया उपचार बीमा योग्य माना जाएगा या नहीं। बीमा कंपनी इस कार्य समिति द्वारा सूची में पहले से जोड़े गए किसी भी महत्वपूर्ण इलाज को बाहर करने में सक्षम नहीं होगी।

 


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सोने में अगली तेजी की शुरुआत, निवेश में मिल सकता है अच्छा रिटर्न


पिछले कुछ महीनों में या कहें कि पिछले कुछ सालों से सोने ने कई संपत्ति वर्गों के अंतर्गत उम्मीद से कम प्रदर्शन किया है, और ऐसा लगता है कि यह सुरक्षित हेवन का खिताब खोता जा रहा है। कॉमेक्स सोने की कीमतें पिछले छह महीने की अवधि में $1365 से गिर कर $1160 हो गई है और सुधारात्मक मोड में रही हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों में सोना, अमरीका और चीन के बीच व्यापारिक युद्ध की चिंता और डॉलर में उच्च अस्थिरता के बावजूद $1,180 से $1,220 के दरम्यान बना रहा है। सोने के लिए व्यापार सीमा बहुत संकीर्ण रही है, लेकिन वित्तीय वर्ष के प्रारंभ से अबतक घरेलू बाजारों की कीमतें मुख्य रूप से रुपये में कमजोरी के कारण बढ़ी हैं जो लगभग 14% तक कमजोर हुई है। अमरीका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव ने वैश्विक भू-राजनीति का केन्द्र बना हुआ है, जहां अमरीका ने अब तक कई प्रतिबंधों की घोषणा की है और अन्य प्रतिबंध लगाने का भी संकेत दिया है। चीन से हमने भी समान प्रतिस्पर्धा देखी है, लेकिन इससे भी सोने की कीमत ज्यादा प्रभावित नहीं हुई है।


दूसरी तरफ, डॉलर ने अमरीका से अपेक्षाकृत बेहतर आर्थिक आंकड़े हासिल किये हैं। अमरीका से जारी किए गए अधिकांश आर्थिक अांकड़े प्रभावशाली रहे हैं जिससे कि डॉलर के घाटे को सीमित रखा जा सके। एक अन्य महत्वपूर्ण कारक यह है कि अमरीका के 10 साल की राष्ट्रीय उत्पाद, जो वर्ष 2011 के मध्य में उच्चतम स्तर तक पहुंच गई थी, अपेक्षित आर्थिक आंकड़े से बेहतर रही है। साथ ही, फेडरल रिजर्व की टिप्पणियां और अमरीका और चीन के बीच व्यापार युद्ध में वृद्धि के कारण देश के व्यापार घाटे को कम करने में सहायक रही हैं। अमरीका राष्ट्रीय उत्पाद और सोने के बीच विपरीत सम्बन्ध रहा है और दुनिया भर में बढ़ती अनिश्चितता यूएस बॉन्ड में निवेश को आकर्षित कर सकती है तथा इस तरह यह भविष्य में सोने की कीमतों में बढ़ोत्तरी भी कर सकती है।


व्यापार युद्ध के मोर्चे पर अमरीका अब चीन के साथ चल रहे तनावों के साथ-साथ रूस और जापान पर भी नजर गड़ा रहा है और उन पर भी टैरिफ लगा सकता है। पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति की समस्या घटी है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों और व्यापार शुल्क में बढ़ोत्तरी के कारण कई देशों पर मुद्रास्फीति के दबाव में वृद्धि करने तथा उनकी मुद्रा पर दबाव डालने का कारक बन सकता है। सामान्यतया क्रूड और गोल्ड साथ-साथ चलते हैं जैसा कि नीचे के चार्ट में दर्शाया गया है, लेकिन दोनों के बीच संपर्क खो सा गया है। हम उम्मीद करते हैं कि सोना की अपनी खो चुकी कीमतें पुनः प्राप्त करने की संभावना है।


सोने की कीमतों में सुधार के बावजूद, ईटीएफ में ब्याज की वसूली कमजोर रही है। हम उम्मीद करते हैं कि वैश्विक संकेतों की कमी सोने की अस्थिरता को निम्न स्तर पर रख सकती है, लेकिन घरेलू बाजारों में रुपये की कीमतों में कमजोरी के कारण इसकी कीमतों में उछाल आ सकता हैं। बाजार के खिलाड़ी अमरीकी मुद्रास्फीति और प्राथमिक उपभोक्ता संवेदनशीलता के आँकड़ों पर नजर रखने के लिए डॉलर पर नजर बनाए रखेंगे जो अंततः सोने की कीमतों को प्रभावित करेगा। सीएफटीसी डेटा द्वारा दिये गए सुझाव के अनुसार सोने की संवेदनशीलता निराशाजनक रही है जो रिकॉर्ड नेट शॉर्ट पोजिशन को भी दर्शाती है। (यह कन्ट्रा-ट्रेड के लिए शानदार अवसर पैदा करता है)।


एमसीएक्स गोल्ड पिछले पाँच वर्षों से सममित त्रिभुज के रूप में सिमटा रहा है। हाल ही में, एक ब्रेकआउट के रूप में यह 31,600 रुपये से ऊपर गया, जो पिछले अपट्रेंड की निरंतरता को इंगित करता है। सममित त्रिभुज का लक्ष्य लगभग 35,500 - 36000 के अंतर्गत आता है। मुख्य समर्थन 29,250 रुपये – 28,100 के स्तर पर देखा गया है।


इलियट वेव विश्लेषण के अनुसार, कीमत में प्राथमिक डिग्री अपट्रेंड की 5 वीं लहर शुरू हुई प्रतीत होती है। वेव 4 एक सममित त्रिभुज था जो 27,600 के स्तर के करीब पूरा हुआ। 5वें लहर के अंतर्गत हमने प्रारंभिक 1-2 वेव की संरचना पूरी की है और वेव 3 प्रगति पर है। हम उम्मीद करते हैं कि यह तीसरी लहर कम-से-कम पिछले उच्चतम स्तर 35,000 अंक के करीब अवश्य पहुँच जाएगी। डॉ सिद्धांत के अनुसार, उच्च ऊँचाई - उच्च निम्नता की संरचना तेजी का संकेत करता है। संक्षेप में, एक सममित त्रिभुज का ब्रेकआउट और एक सहायक इलियट वेव की गणना एक लंबे समय के लिए उछाल का संकेत देती है। हमारी राय में, कॉमोडिटी का दीर्घकालिक लक्ष्य 42,000 रुपये है जो अगले 18-24 महीनों में हासिल किया जा सकता है।

 


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अापको अमीर बनने से रोक रही हैं ये 6 बुराइयां, इस दशहरे पर रावण के साथ करें इनका भी दहन


नई दिल्ली। नवरात्रि, दशहरा और इसके बाद के त्यौहारों की भारतीय कैलेंडर में सबसे उत्सुकतापूर्वक प्रतीक्षा होती है। त्यौहारों के अवसर पर हम अपने परिजनों को कपड़ें, गैजेट्स और गहने उपहारस्वरूप भेंट करते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, विभिन्न निर्माता, खुदरा विक्रेता और आॅनलाइन शाॅपिंग पोर्टल्स इस अवसर पर आकर्षक आॅफर्स, छूटों, पुरस्कारों, रिवार्ड प्वाॅइंट्स एवं अन्य चीजों की पेशकश कर रहे हैं। हालांकि हम में से अधिकांश लोग अपने क्रेडिट कार्ड्स का उपयोग अधिक पैसों की खरीदारी कर सकते हैं, लेकिन इस बात की भी संभावना है कि इन सभी पेशकशों के लालच में, क्रेडिट को लेकर सर्वाधिक सजग रहने वाले ग्राहक भी फाल्टर हो सकते हैं। स्पष्ट रूप से क्रेडिट से जुड़ी सामान्य-से-सामान्य गलतियां आपके क्रेडिट प्रोफाइल को प्रभावित कर सकती हैं और आपके सिबिल स्कोर को नीचे ला सकती हैं। यहां यह बताया जा रहा है कि ऐसा किस प्रकार से हो सकता हैः आपके सिबिल स्कोर से आपके ऋण व्यवहार का पता चलता है, और यह एक ऐसा कारक है जिसे कोई भी ऋणदाता ऋण की स्वीकृति देने से पूर्व ध्यान में रखता है। यदि आपका सिबिल स्कोर अधिक है, तो आपको तेजी से और सस्ते में ऋण मिल सकता है, जबकि कम सिबिल स्कोर वाले लोगों को भविष्य में ऐसे वक्त में ऋण लेने में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है, जब आपको इसकी सबसे अधिक जरूरत हो।

इसलिए, खरीदारी करने से पहले, क्रेडिट से जुड़ी इन छः बुराइयों का ध्यान रखना चाहिए, जो आपके सिबिल स्कोर को नकारात्मक तरीके से प्रभावित कर सकती हैंः

1 क्रेडिट का क्षमता से अधिक उपयोग - आपके ईएमआई और आय का अनुपात, आपके कुल ऋण के ईएमआई और आपकी शुद्ध मासिक आय के बीच तुलना करता है और यह आपके ऋण संबंधी स्वास्थ्य का विश्वसनीय है। सामान्य नियम के अनुसार, सुनिश्चित करें कि आपकी ईएमआई आपकी शु़द्ध मासिक आय के 30 प्रतिशत के भीतर हो। यदि आप और अधिक ऋण लेने के बारे में सोचते हैं, तो आप अपनी ऋण क्षमता के अधिकतम उपयोग के लिए जोखिम खड़ी करते हैं।

2 भुगतान की तय तिथि पर भुगतान न कर पाना - यदि आपने एक भी किश्त का भुगतान समय से नहीं किया तो इसके कई परिणाम हो सकते हैं - जुर्माना और/या ब्याज शुल्क, आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में बकाया और इन सब के साथ-साथ आपके क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक प्रभाव। अपनी बकाया राशि का बिल्कुल समय से भुगतान करें, हर बार स्वयं को ऋण को लेकर सतर्क रखें, ताकि आप झंझटरहित रह सकें।

3 अपनी ऋण सीमा का अधिकतम उपयोग करना - नियमित रूप से अपने कार्ड पर उपयोतगिता सीमा का अधिकतम उपयोग अत्यधिक ऋण लालच को दर्शाता है - जिसे ऋणदाताओं द्वारा नकारात्मक रूप से देखा जा सकता है। यदि आप स्वस्थ अनुपात और अपने स्कोर पर पड़ने वाले किसी भी प्रभाव को कम करना चाहते हैं, तो अपने कार्ड से अपनी ऋण उपयोग सीमा का 30 प्रतिशत तक खर्च करें।

4 कई क्रेडिट कार्ड्स का होना - क्या आप अपनी खर्च करने की क्षमता को बढ़ाने या आकर्षक कैशबैक आॅफर्स हासिल करने के लिए, नये क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करने के बारे में सोच रहे हैं? इस पर दोबारा विचार कर लें। अलग-अलग ऋण दाताओं से एक से अधिक क्रेडिट कार्ड्स के लिए आवेदन देने को आर्थिक दबाव के रूप में देखा जा सकता है।

5 अत्यधिक अप्रत्याभूत ऋण - प्रत्याभूत ऋणों में प्रकट संपाश्र्विक होता है, जबकि अप्रत्याभूत ऋणों में कोई भी संपाश्र्विक नहीं होता है, इसलिए यह अधिक जोखिमपूर्ण होता है। इसके बजाये, अपने क्रेडिट प्रोफाइल में दोनों का अच्छा मिश्रण रखें।

6 गारंटीदाता की स्थिति - किसी और के ऋण के लिए गारंटर बनने पर, न केवल आप भी समान रूप से उनकी चुकौती सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होते हैं, बल्कि कर्जदार द्वारा भुगतान न किये जाने की स्थिति में आपको स्वयं भुगतान करना पड़ेगा। यदि किसी भी किश्त का भुगतान समय से नहीं हो पाता है, तो यह आपके क्रेडिट रिपोर्ट में दिखाई देगा, इस प्रकार, आपके क्रेडिट स्कोर को भी नकारात्मक तरीके से प्रभावित करेगा। इसलिए, किसी का भी गारंटीदाता बनने से पहले अच्छी तरह से सोच लें, और इस बात का रिकाॅर्ड रखें कि आप कितने ऋणों के लिए गारंटीप्रदाता हैं।

ऋण संबंधी इन बुराइयों से बचें और अच्छे ऋण व्यवहार के साथ, त्यौहारी मौसम की सकारात्मक तरीके से शुरूआत करें। ऋण को लेकर अनुशासित रहें, लगातार अपने सिबिल स्कोर व रिपोर्ट पर नजर रखें और अपना स्कोर अधिक बढ़ाने की कोशिश करें, ताकि आपको आपके आवश्यकता के समय में ऋण हासिल हो सके।

 


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सोशल मीडिया में 2021 तक अंग्रेजी भाषा को पीछे छोड़ देंगे स्थानीय भाषा के डिजिटल यूजर


संचार एवं नेटवर्किंग सभी मनुष्यों की मूलभूत जरूरत है और लोगों से जुड़ने की इस इच्छा को पूरा करने के लिए हमने पत्रों व टेलीग्राम से लेकर सोशल मीडिया तक बहुत लंबी दूरी तय की है। सोशल मीडिया के जन्म से ही यह लगातार विकसित हो रहा है और आज अनेक लोग उठने के बाद जो सबसे पहला काम करते हैं, वह है अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल को देखना। आज सोशल मीडिया प्रोफाइल का उपयोग न केवल दोस्त बनाने और लोगों से मिलने के लिए होता है, बल्कि लोग जानकारी, समाचार देखने या फिर उत्पाद खरीदने जैसे कामों के लिए भी सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं।

भारत के बहुभाषी सोशल मीडिया यूजर्स

भारत में सांस्कृतिक विविधता है और यहां का सबसे महत्वपूर्ण बैरोमीटर यहां की बहुभाषी संस्कृति है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक 1600 से अधिक भाषाएं बोली जाती हैं और सोशल मीडिया के इस युग में डिजिटल विविधता भी तेजी से विकसित हो रही है। देश के कोने कोने में स्मार्टफोन और इंटरनेट का उपयोग बढ़ने के साथ स्थानीय, उपयोगी और स्थानीय भाषा में उपलब्ध कंटेंट की मांग भी बढ़ी है। आज अनेक सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म उपलब्ध हैं, लेकिन प्रश्न यह है कि ये विशेष स्थानीय सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म क्या पेश करते हैं।

आपकी पसंद की भाषा: आज लोग सभी के लिए एक ही चीज के सिद्धांत से आगे बढ़ गए हैं। ऐसे प्लेटफाॅर्म की मांग बढ़ी है, जो विशेष समूह की संस्कृति और परंपरा के अनुरूप हो, जो उन्हें उम्र के बंधन के बिना अपने परिवार और दोस्तों से कनेक्ट करे। आज का समाज हर किसी से सुगमता से कनेक्ट होना और ऐसी भाषा में अपने विचारों की अभिव्यक्ति करना चाहता है, जो सभी के लिए सुविधाजनक हो।

क्षेत्रीय एवं उपयोगी चर्चा: क्षेत्र विशिष्ट सामग्री काफी लोकप्रिय हो गई है और स्थानीय त्योहारों एवं आयोजनों के बारे में चर्चाएं बढ़ रही हैं। स्थानीय सामग्री में लोगों की संलग्नता बढ़ी है क्योंकि वो शीघ्रता से कनेक्ट होकर यह सामग्री अपने समूहों से साझा करना चाहते हैं। स्थानीय सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म, शेयरचैट 14 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है, इसलिए इस पर देश के स्थानीय आयोजनों/त्योहारों जैसे उगडी, लिट्टी चोखा फेस्टिवल, लोहड़ी, रक्षाबंधन आदि की बड़ी संख्या में पोस्ट साझा होती हैं। साथ ही आज कई बिज़नेस अपने ग्राहकों तक पहुंचने के लिए क्षेत्रीय डिजिटल कंटेंट का लाभ उठा रहे हैं।

क्षेत्रीय सेलिब्रिटीज एवं प्रभावशाली हस्तियों से कनेक्ट होना: कई सेलिब्रिटीज़ और प्रभावशाली लोग अपने फैंस से उनके राज्य/शहर की भाषा में बात करना पसंद करते हैं। दूसरी तरफ जो लोग अपनी स्थानीय बोली में बात करना सुगम महसूस करते हैं, वो डिजिटल प्लेटफाॅर्म्स पर अपने स्थानीय हीरो से बात करने के लिए उतावले होते हैं क्योंकि यहां पर वो उनसे ज्यादा व्यक्तिगत तरीके से हो सकते हैं।

पहली बार इंटरनेट का उपयोग करने वालों के लिए सरल एवं अद्वितीय तकनीकी फीचर्स: साइन-अप की आसान प्रक्रिया, आसान यूजर इंटरफेस पहली बार इंटरनेट से जुड़ने वालों के लिए सोशल मीडिया का काॅन्सेप्ट आसान बना देता है।

2021 तक बदल जाएगी सोशल मीडिया की तस्वीर

एक रिपोर्ट के अनुसार, 2021 तक स्थानीय भाषा का इंटरनेट यूजर बेस इंग्लिश भाषा के डिजिटल उपभोक्ताओं को पीछे छोड़ देगा और इस परिवर्तन का नेतृत्व सोशल मीडिया करेगा। सोशल मीडिया समाचार, डिजिटल एंटरटेनमेंट, भुगतान करने, सरकारी योजनाओं/सेवाओं पर जानकारी प्राप्त करने के लिए वन स्टाॅप विकल्प है। इस सामग्री को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जाना बहुत जरूरी है, ताकि इंटरनेट से जुड़ने वाले करोड़ों लोग इसका लाभ ले सकें। स्थानीय सोशल मीडिया इस डिजिटल लहर का सबसे उपयोगी प्लेटफाॅर्म होगा।

 


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5 साल में 36 फीसदी की ग्रोथ दर्ज करेगा रिटेल लॉजिस्टिक्स उद्योग: एक्सपर्ट


नई दिल्ली। लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन का क्षेत्र आर्थिक विकास को महत्वपूर्ण रूप से आगे बढ़ाता है। यह क्षेत्र उच्च ग्राहक मांग के कारण भारत में तेजी से विकास कर रहा है जो हर जगह वितरण करने, हाइपरलोकल डिलीवरी और मुख्यधारा के लॉजिस्टिक्स (बी2बी) में बदलाव ला रहा है। ऑनलाइन रिटेल बिक्री के अभूतपूर्व गति से बढ़ने के साथ, रिटेल लॉजिस्टिक्स उद्योग के अगले 5 वर्षों में 36% की दर से विकसित होने की उम्मीद है। इसके अलावा, तकनीकी प्रगति ने उपभोक्ताओं की उम्मीदों को उठाया है, जहां एक आम ग्राहक तेजी से डिलिवरी और उच्च स्तर की सेवाएं की उम्मीद करता है, जिसकी कल्पना वे 10 साल पहले नहीं कर सकते थे।

ऐसे तेजी से बदल रहा है उद्योग

मौजूदा व्यापार संचालन में सुधार करने, नए ग्राहकों के साथ लेनदेन करने और अपने नेटवर्क का विस्तार करने के लिए स्टार्टअप और लॉजिस्टिक्स कंपनियों द्वारा इंटरनेट ऑफ थिंग्स, मोबाइल एप्लीकेशंस, क्लाउड स्टोरेज, बड़े डेटा एनालिटिक्स और कंप्यूटिंग जैसी नई तकनीकें तेजी से उपयोग की जा रही हैं। रोबोटिक्स और ऑटोमेशन की अवधारणा को भी सप्लाई चेन के क्षेत्र में व्यापक रूप से कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसमें विशेष रूप से वेयरहाउसिंग सेगमेंट में सप्लाई चेन में कई अनुप्रयोगों के लिए एक व्यवहार्य समाधान के रूप में एआई को देखा जा रहा है।

भारत में लॉजिस्टिक्स क्षेत्र सड़क, रेल, वायु और पानी के माध्यम से माल और परिवहन प्रदान करता है, और इनवेंटरी स्टॉक और गोदाम जैसे सहायक क्षेत्रों का प्रबंधन भी करता है। यह क्षेत्र बहुत अव्यवस्थित है और इसमें मुख्य रूप से छोटे और असंगठित कंपनियों का प्रभुत्व है, लगभग 85-90% जबकि संगठित क्षेत्र केवल 10% भारतीय बाजार में योगदान देता है। वर्तमान में यह क्षेत्र 16.74 मिलियन से अधिक कर्मचारियों को रोजगार देता है और 2022 तक 28.4 मिलियन से अधिक कर्मचारियों को रोजगार देने के लिए तैयार है। इसका तात्पर्य है कि लॉजिस्टिक्स और गोदामों के संचालन में आॅटोमेशन के स्तर में वृद्धि के कारण 11.7 मिलियन अतिरिक्त नौकरियों का निर्माण होगा।

नई नौकरियों के मिलेंगे मौके

तकनीकी प्रगति की गति को बनाए रखने और उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए, कई कंपनियां कुशलकर्मचारियों की तलाश में हैं जो लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन डोमेन में विभिन्न भूमिकाएं निभा सकते हैं। तीसरे पक्ष के लॉजिस्टिक्स (3पीएल) के उद्भव के साथ, निकट भविष्य में विशिष्ट कौशल वाले प्रशिक्षित कर्मचारियों की मांग भी बढ़ने की उम्मीद है। आइए उन कुछ भूमिकाओं और नौकरी के विकल्पों को देखें जिनके आगामी वर्षों में उभरने की संभावना है।

लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन में भूमिकाएं

आदर्श रूप से, लॉजिस्टिक्स का व्यापक और एकीकृत ज्ञान उम्मीदवार को नौकरी बाजार में एकदम सही फिट बनाता है। ऑपरेशन सहायक या पिकर/पैकर या ड्राइवर, जैसे प्रवेश स्तर की नौकरी की भूमिओं से लेकर प्रबंधक के रूप में मध्य प्रबंधन स्तर या उच्च स्तर की एनालिटिक्स विशेषज्ञता वाले वरिष्ठ प्रबंधक तक सभी स्तर में कौशल की जरूरत महत्वपूर्ण है।

सप्लाई चेन प्रबंधन मुख्य रूप से गोदाम, रिटेल बिक्री और परिवहन क्षेत्र में प्रवेश स्तर और अनुभवी पेशेवरों के लिए विभिन्न प्रकार के रोजगार विकल्प प्रदान करता है। व्यावसायिक कौशल का एक व्यापक आधार, सप्लाई चेन प्रक्रियाओं का ज्ञान, और प्रासंगिक इंटर्नशिप/कार्य अनुभव, निर्माता, रिटेलर, वाहक, तृतीय पक्ष लॉजिस्टिक्स फर्म, या अन्य संगठन के साथ अपने करियर को शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने का पर्याप्त अवसर प्रदान करेगा।

एक लॉजिस्टिक्स प्रबंधक आपूर्तिकर्ता से उपभोक्ता तक किसी उत्पाद या सेवा के कुशल मूवमेंट को निर्देशित करता है। वह उत्पाद अधिग्रहण की शुरुआत से लेकर उसके सुरक्षित वितरण तक का प्रभारी होता है। इसी तरह, एक सप्लाई चेन प्रबंधक मौजूदा स्थितियों को व्यवस्थित करने के अवसरों के लिए प्रक्रियाओं की जांच करता है। जैसे ही आप लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन प्रबंधन में अनुभव प्राप्त करते हैं और अपने ज्ञान का विस्तार करते हैं, तो इस क्षेत्र में उद्योग विश्लेषक, परियोजना प्रबंधक, वैश्विक लॉजिस्टिक्स प्रबंधक, संचालन निदेशक, परिवहन निदेशक, या अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स प्रबंधन जैसी उन्नत भूमिकाओं का भी निर्माण भी हो जाएगा।

लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन के क्षेत्र में विकास के अवसर और सरकारी पहल

माल और सेवा कर (जीएसटी), उदार विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) के नियमों की शुरूआत, सरकारी खर्च में वृद्धि ने इस क्षेत्र में वृद्धि को बढ़ावा देने में मदद की है। जीएसटी का कार्यान्वयन उद्योग की जरूरतों को पूरा करने के लिए पुराने लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं की प्रक्रियाओं और संचालन को सुव्यवस्थित करने के लिए उन्हें आगे बढ़ा रहा है। इसके परिणामस्वरूप कुशल कार्यबल की जरूरत भी पैदा हुई है, जिससे ग्राहक संतुष्टि में सुधार करने और अपने ग्राहकों की कुशल सप्लाई चेन से खुद को अलाइन करने में फर्मों को मदद मिलेगी। ई-कॉमर्स फर्मों की उच्च वृद्धि और बढ़ते ऑर्डर्स की वजह से बड़े गोदामों का विकास भी किया गया है जो अधिक भंडारण और पूर्ति क्षमता पेश करते हैं। अधिकांश गोदामों एक जटिल इन्वेन्ट्री सिस्टम को अपनाते हैं जिसमें वेयरहाउस कार्यक्षमता और वितरण केंद्र प्रबंधन को अनुकूलित करने के लिए कुशल कर्मचारियों की जरूरत होती है। यहां तक कि भारत का महत्वाकांक्षी भारतमाला कार्यक्रम निर्माण क्षेत्र में बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने में मदद करेगा और राजमार्ग सुविधाओं का विकास भी होगा। सरकार ने2017-18 के दौरान राजमार्ग क्षेत्र में लगभग 1.5 करोड़ रुपये में निवेश किया है और इन सबकी वह से देश भर में अधिक निर्माण गतिविधि होंगी और नौकरियां पैदा होंगी। सरकार के अनुसार, भारतमाला और संबंधित नेटवर्क के परिणामस्वरूप 2 करोड़ नौकरियां पैदा होंगी।

सरकार ने की पहल

लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सरकार की पहलों ने लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को बढ़ावा दिया है। लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में आधारभूत संरचना की स्थिति घोषित करके, सरकार ने विकास के लिए जरूरी मंच प्रदान किया है। इस क्षेत्र में जुड़ी कंपनियों को अब सस्ता और दीर्घकालिक ऋण मिलेगा और वे अधिक नौकरियां पैदा करने में सक्षम होंगे। सागरमाला परियोजना जो मौजूदा बंदरगाहों का आधुनिकीकरण करेगी और नए बंदरगाह विकसित करेगी, उससे सालाना लॉजिस्टिक्स लागत के रूप में 35,000 रुपये से 40,000 करोड़ रुपये बचाने, 110 अरब अमेरिकी डॉलर तक के निर्यात को बढ़ावा देने और एक करोड़ नई नौकरियां पैदा करने की उम्मीद है। वाणिज्य मंत्रालय के तहत एक अलग लॉजिस्टिक्स विभाग का निर्माण करने से कई मुद्दों से निपटने में मदद मिलेगी, जिसमें निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने वाली बढ़ती लागत शामिल है और इसके परिणामस्वरूप लॉजिस्टिक्स क्षेत्र से निपटने वाले विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय होगा।

3 साल में 200 अरब डॉलर का कारोबार

ग्लोबल एनालिटिक्स, रेटिंग और रिसर्च कंपनी क्रिसिल लिमिटेड के मुताबिक, भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर, जो वर्तमान में 160 बिलियन अमरीकी डॉलर के बराबर है, उसके सिर्फ तीन वर्षों में करीब 200 अरब डॉलर के होने की उम्मीद है। ईकॉमर्स रिटेल और बेहतर औद्योगिक गतिविधि समेत उपभोक्ता मांग में वृद्धि, सरकारी पहल, रिटेल में वृद्धि ने कुशल क्षेत्र और लॉजिस्टिक्स समाधान बढ़ावा देने के अलावा इस क्षेत्र का प्रोत्साहन किया है। छात्रों के लिए, अब समय है कि वे आगे एक लाभदायक सफर का आनंद लेने के लिए लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन प्रबंधन के क्षेत्र की ओर देखें।

 


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रुपये की कमजोरी ने एनआरआई निवेशकों को दिया सस्ती प्रॉपर्टी खरीदने का मौका


नई दिल्ली। रुपये में गिरावट सरकार के लिए जरूर चिंता का विषय है, लेकिन प्रवासी भारतीय (एनआरआई) के लिए यह बड़ा मौका ले कर आया है। वे इस मौके का फायदा उठाकर कम रकम में भी अपनी पसंद की प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं। ऐसा डॉलर के मुकाबले रुपये के एक्सचेंज से अधिक पैसा मिलने से संभव होगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक रुपये में पिछले साल के मुकाबले करीब 11 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि रियल एस्टेट में कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है, यानी आज की तारीख में निवेशकों को प्रॉपर्टी खरीदने पर 12-15 फीसदी का फायदा हो रहा है।

50 लाख के फ्लैट पर करीब 7 लाख की बचत

रुपये में गिरावट के बाद प्रवासी भारतियों के लिए प्रॉपर्टी खरीदना सस्ता हो गया है। इसके चलते अभी उनको 50 लाख के एक 2बीएचके फ्लैट के लिए करीब 43 लाख रुपये ही चुकाना होगा। इस तरह एनआरआई को अभी करीब 15 फीसदी तक कम कीमत में घर मिल रहे हैं। साथ ही, सुस्त सेल्स की वजह से प्रॉपर्टी मार्केट भी ठंडा है। इसका भी फायदा एनआरआई उठा सकते हैं।

इसलिए भी बढ़ी दिलचस्पी

लगभग पिछले दो वर्षों का समय रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए कठिन रहा है लेकिन इस साल प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त में तेजी देखी जा रही है। बाजार में रेडी टू मूव प्रॉपर्टी के ऑप्शन उपलब्ध होने के साथ रेरा और जीएसटी आने से भी विदेशी निवेशकों का रुझान भारतीय बाजार में तेजी से बढ़ा है। वे मुख्य रूप से दिल्ली-एनसीआर और मुंबई की प्रॉपर्टी में निवेश कर रहे हैं। पिछले दो-तीन महीनों से एनआरआई का रुझान प्रॉपर्टी में निवेश की तरफ एक बार फिर से बढ़ा है। यह रियल एस्‍टेट सेक्‍टर के लिए भी अच्‍छा है। आने वाले त्‍योहारी सीजन में इससे मांग को और बल मिलेगा।

निवेश से पहले इन बातों का जरूर ख्याल रखें

एनआरआई के लिए सही प्रॉपर्टी की पहचान करना थोड़ा मुश्किल होता है। ऐसे में सही प्रॉपर्टी और विश्वसनीय डेवलपर का चयन करने के लिए पहले ऑनलाइन और ऑफलाइन रिसर्च जरूर करें। इसके साथ ही निवेश करने से पहले लोकेशन का चयन कर लें। जिस शहर में प्रॉपर्टी खरीदनी है वहां क्‍या रेट चल रहा है यह भी पता करें। किसी कहने या बहकावे में आकर प्रॉपर्टी में निवेश करने से बचें। हो सके तो निवेश से पहले पार्टी या जमीन से जुड़े कागजातों की सलाहकार से अच्छी तरह जांच करा लें और रजिस्ट्रेशन की लागत को जान लें।

 



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प्रीमियम सेगमेंट में परचम लहराने के बाद अब ईलेक्ट्रिक वाहनों से धमाल मचाने की तैयारी में Audi


नई दिल्ली। प्रीमियम सेगमेंट के लिए कार बनाने वाली कंपनी Audi अब छोटे शहरों और ई वाहनों पर अपना फोकस बढ़ाएगी। कंपनी अपनी नई रणनीति के टियर टियर-2 और टियर-3 शहरों पर ध्यान दिया है इसके तहत कंपनी ने अभी हाल ही में जुलाई में आॅडी मोबाइल टर्मिनल के तहत आगरा में दौरा किया था। क्या है ऑडी की आगे की रणनीति, कैसा रहा कंपनी का प्रदर्शन.. इन सब पर पत्रिका के मनीष रंजन ने ऑडी इंडिया के प्रमुख राहिल अंसारी से खास बातचीत की...

Q. बिक्री के मामले में कंपनी का प्रदर्शन कैसा रहा? क्या आप इस प्रदर्शन से खुश हैं?

A. 2017 में आॅडी ने 10 वर्ष पूरे कर लिए और हमें खुशी है कि इस छोटी सी अवधि में हम देश के सबसे पसंदीदा लक्जरी कार ब्रांडों में से एक बन गए हैं। 2017 में हमने 7876 कारों की बिक्री करते हुए हमने बिक्री में 2 प्रतिशत की वृद्धि की और अपने डीलर पार्टनरों के लिए लाभकारी बढ़त हासिल की। हमारा हमेशा से विज़न रहा है मार्केट लीडर बनने का किंतु खरीद का वाॅल्यूम और मार्केट शेयर सबसे सरल पहलू हैं। यह हमारा विज़न नहीं है। हम चाहते हैं कि हमारे डीलरों व कंपनी दोनों के लिए मामला व्यवहार्य हो। इससे हमें डीलर नेटवर्क में कहीं ज्यादा निवेश की सुविधा मिलेगी और दीर्घकाल में हम वृद्धि को आगे बढ़ा सकेंगे।

Q. 2018 के लिए आपका क्या सोचना है?

A.अब तक तो हम यही उम्मीद कर रहे हैं कि पिछले साल की परफाॅरमेंस दोहराएं और हमारा लक्ष्य लाभकारी वृद्धि पर है। मेरा दृढ़ विश्वास है कि एक सतत् वर्ष के लिए हमारे पास सभी आवश्यक घटक मौजूद हैं। हमारा ब्रांड महज़ 10 सालों में पाॅप कल्चर में प्रवेश कर चुका है। लक्जरी कार खरीदने वालों की शीर्ष पसंद में हमारा शुमार होता है और हमारे पास एक आकर्षक प्राॅडक्ट पोर्टफोलियो है। वर्ष 2018 ’ईयर आॅफ आॅडी प्रोग्रैशन’ है और इस वर्ष हम अपनी रणनीति के चार बुनियादी स्तंभों पर फोकस व प्रगति जारी रखेंगे जो हैं- उत्पाद, नेटवर्क, ग्राहक और डिजिटलीकरण। हम अपनी उत्पाद रेंज का विस्तार जारी रखेंगे चाहे ’ए’ रेंज की सिडैन हो, ’क्यू’ रेंज की एसयूवी या परफाॅरमेंस कार रेंज। नई आॅडी क्यू5 को साल के शुरु में प्रस्तुत किया गया था और इसे जबरदस्त कामयाबी मिल रही है। नेटवर्क के मोर्चे पर हमने हमेशा टियर-2 और टियर-3 शहरों पर ध्यान दिया है; हमारी ’वर्कशाॅप फस्र्ट’ की रणनीति तरक्की करते हुए समर्पित ’फैसिलिटी’ में परिवर्तित हो गई है जिसका उद्घाटन विजयवाड़ा आदि में शीघ्र होगा। भारत के भीतरी भागों में पहुंचने पर हम ध्यान दे रहे हैं क्योंकि टियर-2 और टियर-3 शहरों में उपभोक्ता लक्जरी कारों के बारे में आकांक्षा दर्शा रहे हैं और वे भी लक्जरी अनुभव की अपेक्षा रखते हैं। इन ग्राहकों के लिए अपने ब्रांड को उपलब्ध कराना व उनकी पहुंच में लाना हमारे लिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि इन शहरों से आने वाले वाॅल्यूम में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। आॅडी मोबाइल टर्मिनल एक कामयाब पहल है क्योंकि इससे आॅडी ब्रांड ग्राहकों के दरवाजे तक पहुंचता है और उन्हें आॅडी खरीदने का वैसा ही बेमिसाल शानदार अनुभव मिलता है जैसा भारत में कहीं और किसी ग्राहक को हासिल होता है। आॅडी ने 2018 के लिए आॅडी मोबाइल टर्मिनल टूर शुरु कर दिया है। यह 2015 में ग्राहक-केन्द्रित पहल के तौर पर आरंभ किया गया था, इसे आॅडी टर्मिनल काॅन्सेप्ट के आधार पर तैयार किया गया है, यह एक पूरी तरह क्रियाशील चलता-फिरता शोरूम है जो ग्राहकों को संपूर्ण आॅडी अनुभव देता है - चाहे महानगर हो या कोई छोटा शहर। 2018 में आॅडी मोबाइल टर्मिनल 15 शहरों का दौरा करेगा, आगरा में 14 व 15 जुलाई 2018 को पहले प्रदर्शन से शुरुआत हो चुकी है। कस्टमर ऐंगेजमेंट के मामले में इस साल हम अपने ग्राहकों के लिए और ज्यादा अवसर उत्पन्न करेंगे ताकि वे ब्रांड आॅडी का अनुभव कर पाएं। हम आॅडी के अनुभव को देश भर के लोगों तक लेकर जाएंगे। इस साल हम आॅडी ब्रांड व उत्पाद अनुभव पर फोकस बरकरार रखेंगे क्योंकि यह हमारा बेहद मजबूत पहलू है। ब्रांड प्राॅपर्टीज़ निर्मित करने में हम अग्रणी रहे हैं जैसे आॅडी ड्राइविंग ऐक्सपीरियेंस, जो अब अपने छठे वर्ष में है, संभावित आॅडी ग्राहकों व कद्रदानों को एक अवसर देता है कि वे खास तौर से बनाए गए ट्रैक पर आॅडी कारों की बेहतरीन रेंज का अनुभव ले सकें। हमने हाल ही में आॅडी ड्राइविंग ऐक्सपीरियेंस प्रोग्राम (एडीई) - आॅडी वीकेंडर, आॅडी स्पोर्ट्सकार ऐक्सपीरियेंस (एएसई), आॅडी क्यू ड्राइव्स आदि का सीज़न 2018 शुरु किया है। उत्पादों के मामले में और सभी आॅडी टच पाॅइंट्स के मामले में भी आॅडी की रणनीति में डिजिटलीकरण मूल में रहता है। आॅडी डाॅट इन एक नई व ताज़गी लिए ऐप्रोच है जिसके द्वारा हम संभावित एवं वर्तमान ग्राहकों तक डिजिटल तरीके से पहुंचते हैं और उनके साथ चैबीसों घंटे सातों दिन कनेक्टिड रहते हैं। डिजिटलीकरण का विस्तार अन्य कस्टमर टच पाॅइंट्स तक भी होगा जैसे- शोरूम, वर्कशाॅप, एएमटी आदि जिससे पूरी वैल्यू चेन में परफाॅरमेंस का एक नया आयाम खुलेगा।

Q. इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर भारत में आपकी क्या रणनीति है? वैश्विक स्तर पर आॅडी का लक्ष्य 2025 तक इलेक्ट्रिक वाहनों की 30 प्रतिशत बिक्री करना है। इस संदर्भ में, आपकी भारत में इलेक्ट्रिक वाहन लाने की क्या योजना है?

A. वैश्विक स्तर पर आॅडी की योजना 2020 तक चार हाई परफाॅरमेंस इलेक्ट्रिक माॅडल लाने की है और 2025 तक 20 से अधिक इलेक्ट्रिक कारें व प्लग-इन हाइब्रिड प्रस्तुत करने का लक्ष्य है। आॅडी इंडिया पूरी तरह से इलेक्ट्रिक माॅडल ’आॅडी ई-ट्राॅन’ लांच करने को तैयार है; सहयोगकारी इंफ्रास्ट्रक्चर होने पर यह माॅडल भारतीय बाजार की जरूरतों के लिए उपयुक्त साबित होगा। इलेक्ट्रिक वाहनों पर आयात शुल्क कम होने से हमें अपने इलेक्ट्रिक वाहन पेश करने में मदद मिलेगी और इससे हमें वह वाॅल्यूम हासिल करने में सहायता प्राप्त होगी जो भारत में स्थानीय विनिर्माण हेतु आवश्यक है। यहां हम बतौर विनिर्माता एक मौका देखते हैं जिसके तहत हम भारत में मोबिलिटी इलेक्ट्रिफिकेशन में योगदान कर सकते हैं। ’इलेक्ट्रिफाइड इंडिया’ एक ऐसा प्रोजेक्ट है जिस पर हम पहले से ही कार्यरत हैं।

Q.नई आॅडी क्यू5 पर कैसी प्रतिक्रिया रही? 2018 के लिए आपकी उत्पाद रणनीति क्या रहेगी? इस साल कौन से बड़े लांच होने वाले हैं?

A.2018 ’ईयर आॅफ आॅडी प्रोग्रैशन’ है और इसका तात्पर्य है कि हम अपनी उत्पाद रेंज का विस्तार करते रहेंगे चाहे वह सिडैन की ’ए’ रेंज हो, एसयूवी की ’क्यू’ रेंज हो या परफाॅरमेंस कार रेंज हो। नई आॅडी क्यू5 साल के शुरु में पेश की गई थी और यह हमारे लिए अत्यंत सफल रही है। हमने पहले ही महीने में 500 से अधिक बुकिंग हासिल कर ली थी जो कि इस उत्पाद की कामयाबी का सबूत है। आॅडी का ध्यान इस पर रहता है कि अपने ग्राहकों के लिए क्षमता व शक्ति का उम्दा संयोजन प्रस्तुत किया जाए। हम देख रहे हैं कि ग्राहकों की सोच विकसित हो रही है और वे सक्षम ’स्मार्ट’ इंजन को अपनाना चाहते हैं। अभी हमारे लिए सबसे उत्साहजनक पहलू है अपनी ’क्यू’ रेंज में पैट्रोल इंजन पेश करना, आॅडी क्यू5 टीएफएसआई के लांच के साथ हमने ऐसा किया है। क्यू रेंज में पैट्रोल संस्करण की नई पेशकश ने हमारे पोर्टफोलियो में विस्तार किया है और हमारी पहुंच में इज़ाफा किया है। भारत में अपने परफाॅरमेंस कार पोर्टफोलियो का हम नवीनीकरण कर रहे हैं और आॅडी की परफाॅरमेंस कार के कद्रदानों के लिए आने वाले दिनों में हम और ज्यादा सरप्राइज़ लेकर आएंगे। हमने हाल ही में नई आॅडी आरएस 5 कूपे लांच की है जो कि एक विशिष्ट उत्पाद है, यह कार उन ग्राहकों की मांग पूरी करती है जो व्यावहारिक हैं और स्पोर्ट्सकार जैसी परफाॅरमेंस वाली लक्जरी कार के मालिक बनना चाहते हैं। हम अपने फ्लैगशिप माॅडल तथा वल्र्ड लक्जरी कार आॅफ द ईयर 2018 - आॅडी ए8 एल को जल्द ही भारत में लांच करेंगे। इस लांच से आॅडी ए रेंज सिडैन की नई एवं प्रगतिशील लाइनअप के लिए मार्ग प्रशस्त होगा।


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फ्लैट बुक करने से पहले निर्माण की गुणवत्ता को इस तरह जांचें


नई दिल्ली। ग्रेटर नोएडा वेस्‍ट के साहबेरी गांव में एक साथ दो बिल्डिंग के जमींदोज होने से अवासीय परियोजना की कंस्ट्रक्शन क्वालिटी को लेकर बहस तेज हो गई है। हर तरफ घटिया कंस्ट्रक्शन क्वालिटी को लेकर रोष है। ऐसे में सवाल उठता है कि एक आम घर खरीदार किसी तैयार या निर्माणाधीन परियोजना में निर्माण की गुणवत्ता की जांच कैसे करे। यह थोड़ा कठिन है लेकिन मुश्किल नहीं। मैं आपको निर्माण की गुणवत्ता जांचने के तरीके बता रहा हूं। आप इनको फॉलो कर आसानी से किसी भी प्रोजेक्‍ट की गुणवत्ता पता कर पाएंगे।

 

पहली प्राथमिकता बिल्डर के अनुभव को दें

घर खरीदने के दौरान जांचने वाली पहली और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिल्डर का निर्माण अनुभव कितने सालों का है। अगर, बिल्डर काफी लंबे समय से काम करता आ रहा है और कई प्रोजेक्‍ट पूरा कर चुका है तो आप उस बिल्डर के प्रोजेक्‍ट पर भरोसा कर सकते हैं। ऐसा इसलिए कि उसके पास निर्माण करने का लंबा अनुभव है। यानी वह सही निर्माण कर रहा तभी वह लंबे समय से काम कर पा रहा है। निर्माण की गुणवत्ता जांचने के लिए उसके पहले पूरे किए प्रोजेक्‍ट को देखकर भी सही गलत का फैसला कर सकते हैं।

 

कानूनी स्वीकृति नहीं तो बोले ना

किसी भी प्रोजेक्‍ट में फ्लैट बुक करने से पहले खरीदार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उस प्रोजेक्‍ट को सभी विभागों से कानूनी मंजूरी मिली हुई है। अगर मिली हुई तो यह जांच करें कि निर्माण स्वीकृत योजनाओं के अनुरूप है या नहीं। वहीं, स्वीक़ृति नहीं मिली है या स्वीक़ृति के अनुरूप निर्माण नहीं तो उस प्रोजेक्‍ट में कतई फ्लैट बुक न करें।

 

स्ट्रक्चर प्रमाण पत्र मांगे

फ्लैट बुक करन से पहले डेवलपर्स को स्ट्रक्चर प्रमाणपत्र की एक प्रति के लिए पूछ सकते हैं, जो इंजीनियर द्वारा दी जाती है। इससे आप यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि बिल्डिंग डिजाइन और निर्मित लोड के अनुसार बनाया गया है या नहीं। बाजार में कई एजेंसियां हैं जो प्रोजेक्‍ट की गुणवत्ता के मुताबिक ग्रेड देती हैं।

 

सॉयल जांच की कॉपी मांगे

बिल्डिंग निर्माण में उस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और सॉयल (वहां की मिट्टी) की भूमिका सबसे ज्यादा होती है। इन दोनों को आधार बना कर ही निर्माण कार्य शुरू किया जाता है। बिल्डिंग का नक्शा बनाने से पहले स्ट्रक्चरल इंजीनियर वहां की मिट्टी को जांचता है। उसके अनुसार ही वह इमारत की नींव के लिए उपयुक्त डिजाइन का चयन करता है। इसलिए सॉयल जांच की कॉपी भी मांगनी चाहिए।

 

अभी जांचने का सबसे माकूल समय

अभी मानसून सीजन चल रहा है। किसी भी परियोजना की निर्माण गुणवत्ता जांचने का यह सबसे माकूल समय है। इस वक्‍त घर खरीदार आसानी से फ्लैटों में सीलन से लेकर कंस्ट्रक्शन क्वालिटी चेक कर सकते हैं। बरसात के दौरान पानी के कारण कंस्ट्रक्शन क्वालिटी ठीक न होने पर दीवार झड़ने लगती है। या मेटेरियल खराब होने पर दिखने लगता है। इसके साथ ही प्लबिंग की भी जांच की जा सकती है। डोर व विंडो की क्वालिटी का भी पता चल जाता है।


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रिटायरमेंट के लिए ये शहर हैं सबसे बेहतर विकल्प, 20 सालों के लिए बस करनी होगी इतनी बचत


रिटायरमेंट के बाद सेविंग्स और खर्चों में तालमेल बिठाना हर किसी के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द होता है। सबसे बड़ा सवाल ये होता है कि रिटायरमेंट के बाद आखिर कितनी सेविंग्स पर्याप्त रहेगी। लेकिन आज चिंता न करें, क्योंकि हमारे एक्सपर्ट आपके इसी पशोपेश को दूर करेंगे। तो आइए जानते हैं रिटायरेमेंट से जुड़ी ये कुछ महत्वपूर्ण बातें जिसे अपने रिटायरमेंट प्लानिंग के समय आपको ध्यान में रखनी चाहिए।


रिटायरमेंट को लेकर जो सबसे पहला सवाल होता है वो ये कि मुझे रिटायरमेंट के बाद आखिर कितनी रकम की जरूरत होगी? हालांकि 47 प्रतिशत भारतीय रिटायरमेंट को ध्यान में रखकर बचत नहीं कर रहे हैं। ऐसे में यह जानना हम सब के लिए बेहद जरूरी है कि आपको कितनी बचत करनी चाहिए। ‘ऐसी तीन चीजें हैं जो प्रॉपर्टी के लिहाज से मायने रखती हैं: लोकेशन, लोकेशन, लोकेशन।’ ब्रिटेन में रियल एस्टेट दिग्गज स्वर्गीय लॉर्ड हेरोल्ड सैमुअल ने यह कहावत तैयार की है। यह कहावत समान रूप से आपके रिटायरमेंट संबंधित निर्णय के लिए भी लागू होती है। आप कब रिटायर होंगे, यह निर्णय इस संदर्भ में मायने रखता है कि आपको रिटायरमेंट के लिए कितनी बचत करने की जरूरत हो सकती है। इस लेख में हमने आपके पसंदीदा शहर के आधार पर आपकी रिटायरमेंट रकम निर्धारित करने के लिए एक विश्लेषण पेश किया है। आपको सेवानिवृति बचत राशि की सबसे कम जरूरत किस शहर में होगी?

 

retirement

यह दर्शाता है कि यदि आप कल ही रिटायर हो जाएं तो विभिन्न भारतीय शहरों में 20 वर्षों के लिए आपको वित्तीय स्वायतत्ता (या रिटायरमेंट) के लिए कितनी रकम की जरूरत होगी। यह अनुमान लगाया गया है कि बचत के जरिये एकत्रित हुई यह रकम आपको सालाना 7.5 प्रतिशत का रिटर्न दिलाएगी। रिटायरमेंट के बाद आपको जिस शहर में सबसे कम बचत राशि खर्च करने की जरूरत होगी वह है तिरूवनंतपुरम। सिर्फ 98 लाख रुपये के साथ आप वहां अनुकूल तापमान में सेवानिवृति के 20 वर्ष बिता सकते हैं। इतनी कम रकम में आप वहां चिंतामुक्त होकर शेष समय सुकून के साथ गुजार सकते हैं। प्रमुख शैक्षिक एवं आईटी हब कहे जाने वाला तिरूवनंतपुरम कई सर्वे में भारत में रहन-सहन के लिहाज से श्रेष्ठ शहरों में शामिल है।


इसके बाद नवी मुंबई का स्थान है। मुंबई के नजदीक नवी मुंबई में 20 वर्षों तक रहने के लिए आपको एक करोड़ रुपये की जरूरत होगी। इस रकम में आप वहां रिटायरमेंट के बाद का समय चैन से बिता सकते हैं। इसके बाद अगले तीन शहर हैं- मैसूर, विशाखापटनम और भोपाल। इन सभी में सेवानिवृति के बाद का समय बिताने के लिए आपको 1.15 करोड़ रुपये से कम की बचत राशि खर्च करने की जरूरत होगी।

 

रैंक शहर

मौजूदा सालाना खर्च

(रुपये में)

जीवन भर का खर्च

(रुपये में)

सेवानिवृति बचत

(रुपये में)

1. तिरूवनंतपुरम 1265021 4,18,29,119 98,47,125
2. नवी मुंबई 1314718 4,34,72,406 1,02,33,976
3. मैसूर 1452192 4,80,18,121 1,13,04,097
4. विशाखापटनम 1453483 4,80,60,804 1,13,14,145
5. भोपाल 1467682 4,85,30,314 1,14,24,674
6. गुवाहाटी 1485754 4,91,27,873 1,15,65,347
7. वड़ोदरा 1490917 4,92,98,604 1,16,05,540
8. भावनेश्वर 1490917 4,92,98,604 1,16,05,540
9. कोच्चि 1501889 4,96,61,408 1,16,90,948

 

10. नागपुर 1513507 5,00,45,553 1,17,81,381
11. कोयंबटूर 1516734 5,01,52,260 1,18,06,501
12. मंगलोर 1523188 5,03,65,674 1,18,56,742
13. सूरत 1558041 5,15,18,109 1,21,28,040
14. हैदराबाद 1589021 5,25,42,495 1,23,69,194
15. इंदौर 1618065 5,35,02,858 1,25,95,276
16. लखनऊ 1638718 5,41,85,782 1,27,56,046
17. अहमदाबाद 1645818 5,44,20,537 1,28,11,310
18. जयपुर 1647109 5,44,63,220 1,28,21,358
19. पणजी 1660017 5,48,90,048 1,29,21,839
20. कोलकाता 1660017 5,48,90,048 1,29,21,839
21. चेन्नई 1686479 5,57,65,045 1,31,27,825
22. चंडीगढ़ 1703906 5,63,41,262 1,32,63,474
23. पुणे 1747794 5,77,92,477 1,36,05,109
24. नोएडा 1767802 5,84,54,060 1,37,60,854
25. ठाणे 1801364 5,95,63,812 1,40,22,104
26. बंगलोर 1881396 6,22,10,144 1,46,45,086
27. दिल्ली 27 1884623 6,23,16,851 1,46,70,206
28. गुड़गांव 1909794 6,31,49,165 1,48,66,144
29. मुंबई 2042750 6,75,45,490 1,59,01,097

रहन-सहन का खर्च
खर्च प्रतिषत विभिन्न षहरों के लिए कुछ हद तक समान है। आइए, जानते हैं कि गुड़गांव में रहने के खर्च पर नजर डालते हैं। हालांकि मार्केट श्रेणी सबसे बड़ी श्रेणी है जिसमें सब्जियां, फल, बीयर, सिगरेट और पानी जैसी चीजें शामिल हैं, लेकिन खर्च के लिए मुख्य वाहक किराया है। मकान के ज्यादा किराए वाले शहरों में सामान्य तौर पर रहन-सहन का कुल खर्च ज्यादा है।


हमने कैसे यह विश्लेषण किया
हमने न्यूम्बियो से भारत में विभिन्न शहरों के लिए लिविंग इंडेक्स का आंकड़ा प्राप्त किया। शहरों के बारे में यह अनुमान पिछले 18 महीनों में 7,638 लोगों द्वारा भेजी गईं 93,809 प्रविश्टियों के आधार पर लगाया गया।


इसके बाद हमने निम्नलिखित अनुमानों के आधार पर गुड़गांव में रहन-सहन की लागत की गणना की। हमारे अनुमानः
- आर्थिक सहायता के लिए परिवार में सदस्यों की संख्या - 4
- रेस्टोरेंट में लंच या डिनर - कुल समय का 10 फीसदी
- रेस्टोरेंट में खाने के लिए आपके द्वारा सस्ते रेस्टोरेंट का चयन- 70 फीसदी
- अपने घर से बाहर काॅफी पीना- थोड़ा बहुत
- सिनेमा आदि के लिए बाहर जाना - काफी कम (प्रति परिवार महीने में दो बार)
- धूम्रपान नहीं
- मादक पदार्थों का सेवन- कम
- घर पर एशियाई भोजन का सेवन
- कार चलाना- थोड़ा बहुत
- जाने के लिए टैक्सी लेना - नहीं
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए रकम खर्च करना- 1 पारिवारिक सदस्य
- छुट्टियां और यात्रा - साल में दो बार (1-1 सप्ताह), अपेक्षाकृत सस्ती यात्रा
- कपड़े और जूतों की खरीदारी- सामान्य
- किराया- अपार्टमेंट (3 बेडरूम)
- किंडरगार्टन में पढ़ने वाले आपके बच्चों की संख्या - 0
- निजी स्कूल जाने वाले आपके बच्चों की संख्या - 0

retirement

गुड़गांव के डेटा के आधार पर हमने विभिन्न शहरों में रहन-सहन की लागत की गणना की है। इसके अलावा, हमने भारत में मुद्रास्फीति के अगले 20 वर्शों में 5 प्रतिषत औसत रहने पर विचार किया। इसके अलावा हमने रिटायरमेंट बचत के लिए रिटर्न 7.5 प्रतिषत माना जो पीपीएफ निवेश में अक्सर मिलने वाला रिटर्न है।


रिटायरमेंट बचत के लिए सुझाव
जब आप रिटायरमेंट के लिए योजना बनाते हैं तो वास्तविकता यह है कि जल्द बचत और निवेश शुरू कर आप बेहतर स्थिति में होंगे। हालांकि यह मायने नहीं रखता कि आप कब इसकी शुरुआत करते हैं, लेकिन आप अपनी रिटायरमेंट बचत बढ़ाने के लिए इन कदमों पर विचार कर सकते हैंः

पारंपरिक बचत विकल्पों तक सीमित न रहें
जहां पीपीएफ जैसे बचत के पारंपरिक विकल्प आपकी पूंजी की सुरक्षा के लिहाज से अच्छे विकल्प हैं, लेकिन अपने जोखिम प्रोफाइल के हिसाब से डाइवर्सिफाइड परिसंपत्ति श्रेणियों में निवेश कर आप बेहतर रिटर्न हासिल कर सकते हैं। इस अध्ययन में हमने रिटायरमेंट बचत पर 7.5 फीसदी के सालाना रिटर्न को आधार माना है जिसे हम आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

रहन-सहन की लागत को सीमित करें
जब आपको वेतन वृद्धि या बोनस मिले तो अतिरिक्त खर्च बढ़ाकर या ज्यादा सैर-सपाटा कर रहन-सहन की लागत बढ़ाने से परहेज करें। अपनी इस अतिरिक्त रकम और बोनस को सेवानिवृति बचत के लिए निवेष करें।

बच्चों पर खर्च सीमित रखें
हालांकि बच्चों की शिक्षा और शौक के लिए खर्च करना सही है, लेकिन डेस्टिनेशन बर्थडे पार्टियां आयोजित कर या हर साल नया आईफोन उपहार में देकर अपनी बचत को फालतू में बर्बाद न करें।

चिकित्सा खर्च पर बचत करें
हेल्थकेयर लागत सामान्य तौर पर रिटायरमेंट के लिए बचत की राह में सबसे बड़ी बाधा है। आपको स्वयं के लिए अपने परिवार के लिए निश्चित तौर पर हेल्थ इंश्योरेंस कवर लेना चाहिए।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/business-expert-column/know-how-much-you-need-in-20-years-after-retirement-in-various-cities-1-3130008/

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