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अच्छी खबर ! दिल्ली यूनिवर्सिटी में इस साल एडमिशन जल्दी शुरू होंगे


du Admissions 2019 : दिल्ली यूनिवर्सिटी (Delhi University) अगले महीने से उसे जुड़े 63 कॉलेजों की 56 हजार सीटों को भरने के लिए एडमिशन प्रक्रिया शुरू करेगी। डीयू केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education) से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है ताकि उसके डाटाबेस का इस्तेमाल कर छात्र-छात्राओं की मार्कशीट और सर्टिफिकेट को हासिल किया जा सके ताकि एडमिशन के लिए आवेदन करते वक्त उन्हें जमा करवाने की जरूरत नहीं पड़े।

DU admissions 2019 : तारीखें
यूनिवर्सिटी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि स्नातक, स्नातकोत्तर, MPhil और PhD courses के लिए एडमिशन प्रक्रिया संभवत: 15 अप्रेल से शुरू हो जाएगी। एडमिशन प्रक्रिया 7 मई को बंद हो जाएगी।

DU Admissions 2019 : अंक और कोर्सेस
इसके अलावा, यूनिवर्सिटी की वेबसाइट 20 मई को दो हफ्तों के लिए फिर से खुलेगी ताकि अंकों और कोर्सेस को अपडेट किया जा सके। ECA और Sports ट्रायल 20 मई से शुरू होंगे और प्रवेश सूचियों से डी-लिंक किए जाएंगे। इसका मतलब है कि कट ऑफ की घोषणा से पहले ECA परीक्षण शुरू हो सकता है। यूनिवर्सिटी ने आगे कहा कि इसके अलाव सभी कॉलेजों को अपनी शिकायत समितियों में एससी, एसटी, ओबीसी, श्वङ्खस् और उत्तर पूर्व जैसी विभिन्न श्रेणियों के प्रतिनिधियों को शामिल करना होगा। समिति ने स्ट्रीम में बदलाव के लिए अंकों कटौती को पांच फीसदी से घटाकर केवल दो फीसदी करने का फैसला किया है।

DU Admissions 2019 : ऐसे करें अप्लाई
-आधिकारिक वेबसाइट पर लॉग इन करें

-संबंधित लिंक पर क्लिक करें

-नोटिफिकेशन के अनुसार, ऑनलाइन कोर्स/कॉलेज सीट के लिए अप्लाई करें

-ई-मेल आईडी के जरिए रजिस्टर करें

-'signup' पर क्लिक करें

-तय फॉर्मेट में मांगी गई सारी जानकारियां भरें

-सबमिट पर क्लिक करें

delhi university Admissions 2019 : नए बदलाव
-डीयू से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि डीयू शैक्षिक सत्र 2019-20 के शुरू होने से पहले एडमिशन प्रक्रिया को पूरी करने की कोशिश करेगा।

-फॉर्म किस तरह भरना है, इस संदर्भ में डीयू अपनी वेबसाइट पर वीडियो अपलोड करेगा। साथ ही भरे हुए डमी फॉर्म भी वेबसाइट पर उपलब्ध होंगे।

-यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने बताया कि उत्तर-पूर्व के छात्र-छात्राओं के एडमिशन के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। साथ ही यूनिवर्सिटी के 'Bulletin of Information' को हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध करवाया जाएगा।


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IGNOU admissions 2019 : MPhil, PhD के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू


IGNOU admission 2019 : इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (Indira Gandhi National Open University), नई दिल्ली ने MPhil और PhD कोर्स में एडमिशन लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक उम्मीदवार IGNOU की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। कोर्स जुलाई, 2019 में शुरू होगा। इन कोर्सेस में एडमिशन लेने की प्रक्रिया शुरू हो गई है और उम्मीदवार 25 मार्च तक प्रवेश प्रक्रिया के लिए अप्लाई कर सकते हैं। इन कोर्सेस में एडमिशन लेने के लिए उम्मीदवारों को प्रवेश परीक्षा से गुजरना होगा। 7 अप्रेल, 2019 को होने वाली परीक्षा में पास होने के बाद ही कोर्सेस में प्रवेश दिया जाएगा।

उम्मीदवार M.Phil. Chemistry, Commerce, Journalism and Mass Communication, Translation Studies विषयों में कर सकते हैं, जबकि Ph.D कोर्स Bio-Chemistry, Chemistry, Commerce, English, Education, Environmental Science, Fine Arts, Gender and Development Studies, Geology, Hindi, Journalism and Mass Communication, Management, Music, Rural Development, Social work, Statistics, Translation Studies, Women’s Studies विषयों में किया जा सकेगा।

IGNOU Admissions 2019 : ऐसे करें अप्लाई
-आधिकारिक वेबसाइट ignou.ac.in पर लॉग इन करें

-‘Register online’ के तहत ‘entrance exam’ लिंक पर क्लिक करें

-पीडीएफ खुलने पर ‘online registration for PhD/ MPhil लिंक पर क्लिक करें

-‘register yourself’ पर क्लिक करें

-पहले ‘Declaration’ और फिर ‘I agree and proceed’ पर क्लिक करें

-फॉर्म भरें

-फीस का भुगतान करें


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यूजीसी नेट परीक्षा-2019 : 30 मार्च तक कर सकते हैं आवेदन


यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर और जूनियर रिसर्च फेलोशिप की योग्यता पाने के लिए यूजीसी नेट परीक्षा जून-2019 के लिए आवेदन प्रक्रिया 1 मार्च से शुरू हो गई है। आवेदन करने की आखिरी 30 मार्च निर्धारित की गई है। पिछले बार की तरह इस बार भी परीक्षा कम्प्यूटर बेस्ड ही होगी। परीक्षा 20 से 28 जून तक देश के सभी बड़े शहरों में करवाई जाएगी। परीक्षा का एडमिट कार्ड 15 मई 2019 को जारी कर दिया जाएगा। परीक्षा को पूरा करने के लिए उम्मीदवारों को 3 घंटे का समय दिया जाएगा। ऑनलाइन आवेदन के लिए संस्थान की ऑफिशियल वेबसाइट ntanet.nic.in पर कर सकते हैं। यूजीसी ने करीब दो दशक बाद यूजीसी-नेट सिलेबस को अपडेट किया है। यूजीसी द्वारा पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर पर 101 विषयों में नेट और जेआरएफ की परीक्षा ली जाएगी।

No नेगेटिव मार्किंग
परीक्षा में किसी तरह की नेगेटिव मार्किंग नहीं की जाएगी। इसके साथ ही यूजीसी-नेट परीक्षा के लिए दोनों पेपर के सिलेबस में 10-10 यूनिट शामिल की गई हैं।

क्या है योग्यता
उम्मीदवार के पास मास्टर या इसके समकक्ष 55 प्रतिशत अंकों के साथ डिग्री का होना आवश्यक है। रिजर्व कैटेगरी (अन्य पिछड़ा वर्ग एनसीएल, पीडब्ल्यूडी, अनुसूचित जाति, जनजाति) के उम्मीदवार के कम से कम 50 प्रतिशत अंक होने चाहिए। जो आवेदक फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रहे हैं वे भी आवेदन कर सकते हैं। जिन पीएचडी उम्मीदवारों ने 19 सितंबर, 1991 में मास्टर की परीक्षा पूरी की है उन्हें कुल अंकों में 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। जूनियर रिसर्च फेलोशिप के लिए 30 वर्ष से अधिक आयु नहीं होनी चाहिए। असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए आवेदन करने की कोई उच्च आयु सीमा निर्धारित नहीं है।

नए सिलेबस से परीक्षा
इस वर्ष जून में होने वाली परीक्षा नए सिलेबस के हिसाब से होगी। यूजीसी ने करीब दो दशकों के बाद सिलेबस को अपडेट किया है। इसके अनुसार अब यूजीसी-नेट के 3 पेपर को घटाकर दो कर दिया गया है। देशभर में उच्च शिक्षा प्रणाली में किए गए बदलावों से जुड़े विषयों को भी सिलेबस में जोड़ा गया है। यूजीसी-नेट के लिए दोनों पेपर के सिलेबस में 10-10 यूनिट शामिल की गई हैं। पहले पेपर में 50 और दूसरे पेपर में 100 सवाल पूछे जाएंगे। परीक्षा के लिए उम्मीदवारों को एडमिट कार्ड लेकर जाना आनिवार्य होगा। यूजीसी की तरफ से किसी भी उम्मीदवार के एडमिट कार्ड की कोई हार्ड कॉपी नहीं भेजी जाएगी।

आवेदन सावधानी से भरें
ऑनलाइन आवेदन के लिए सबसे पहले उम्मीदवार एनटीए की वेबसाइट पर जाएं और अपना रजिस्ट्रेशन करें। उम्मीदवार को आवेदन पत्र प्राप्त हो जाएगा। इसे पूर्ण रूप से भरकर अपने हस्ताक्षर और पासपोर्ट साइज फोटो को स्कैन करके अपलोड कर दें। अब उम्मीदवार आवेदन शुल्क का भुगतान करें और फॉर्म सब्मिट कर दें। संपूर्ण प्रक्रिया के बाद उम्मीदवार अपने भरे हुए फॉर्म का एक प्रिंट आउट जरूर निकाल लें।

यह होगा परीक्षा शुल्क
उम्मीदवार आवेदन शुल्क का भुगतान क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग से कर सकते हैं। ऑफलाइन के लिए बैंक ई-चालान से पेमेंट कर सकते हैं। सामान्य व अन्य अनारक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए १ हजार, ओबीसी (नॉन क्रीमी लेयर) उम्मीदवारों के लिए 500 और एससी, एसटी, पीडब्ल्यूडी और ट्रांसजेंडर उम्मीदवाओं के लिए 250 रुपए फीस निर्धारित की गई है।

ऑब्जेक्टिव होंगे प्रश्न
परीक्षा ऑनलाइन मोड में होगी। नेट एग्जाम 2 शिफ्ट में आयोजित किया जाएगा। प्रथम पेपर सुबह की शिफ्ट में 9:30 से 10:30 बजे तक आयोजित किया जाएगा जबकि दूसरा पेपर दूसरी शिफ्ट में 11 बजे से 1 बजे तक होगा। परीक्षा में ऑब्जेक्टिव टाइप के प्रश्न पूछे जाते हैं। छात्रों को प्रत्येक सही उत्तर के लिए 2 अंक दिए जाएंगे।


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ओपी जिंदल यूनिवर्सिटी ने इम्पैक्ट इन्वेस्टमेंट में शुरू किया ऑनलाइन कोर्स


ओ.पी.जिंदल ग्लोबल विश्वविद्यालय ने चार सप्ताह के ऑनलाइन इंपैक्ट इन्वेस्टमेंट कोर्स की शुरुआत की है। इसका मकसद लोगों को सामाजिक व पर्यावरणीय फायदा प्राप्त करने के लिए निवेश के तरीके के बारे में प्रशिक्षित करना है। इस कोर्स की शुरुआत विश्वविद्यालय के जिंदल सेंटर फॉर सोशल इन्नोवेशन एंड इंटरप्रेन्योरशिप द्वारा गुरुवार को फ्यूचरलर्न (यूरोप की प्रमुख ऑनलाइन सोशल लर्निंग मंच) पर की गई।

सेंटर ने एक बयान में कहा, प्रभावी निवेश का असर सामाजिक या वातावरणीय व वित्तीय वापसी दोनों पर सकारात्मक रूप से पड़ता है। इस ऑनलाइन कोर्स का मकसद भौतिक रूप से संस्थान के बिना वित्तीय व सामाजिक क्षेत्र के पेशेवरों को शिक्षा प्रदान करना है। इसके अलावा प्रभावी निवेश की संभावनों में रुचि रखने वालों को भी शिक्षित करना है। कोर्स को संचालित करने वाले जेरेमी वेडे ने कहा कि इस कोर्स के उद्देश्यों में से एक चीज यह है कि कैसे आसान तरीकों से दुनिया को बेहतर स्थान बनाया जा सकता है।

इस कोर्स को जेएसआईई व आशा इंपैक्ट ने साथ मिलकर बनाया है। आशा इंपैक्ट भारत के प्रमुख विकास थिंक टैंक में शुमार है। विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति प्रो. सी. राज कुमार ने कहा, ''विश्वविद्यालय सोशल इंटरप्राइजेज एवं आंत्रप्रेन्योर को ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए जरिये मजबूत बुनियाद के लिए प्रोत्साहित करेगा।


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हिमाचल : देहरा में बनेगा केन्द्रीय विश्वविद्यालय


केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावेड़कर तथा हिमाचल के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने गुरुवार को कांगड़ा जिले के देहरा में हिमाचल प्रदेश के केन्द्रीय विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी। प्रकाश जावेड़कर ने इस अवसर पर कहा कि इस विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए वन स्वीकृति उस समय दी गई थी जब वह केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री थे। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय से क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित होने के अतिरिक्त क्षेत्र के युवाओं को गुणात्मक उच्च शिक्षा प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार विश्वविद्यालय परिसर का कार्य शीघ्र पूरा करना सुनिश्चित बनाने के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध करवाएगी।

केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार ने प्रदेश के लिए अनेक राष्ट्रीय संस्थान स्वीकृत किए है। उन्होंने कहा कि ऊना के लिए आई.आई.आई. टी तथा मण्डी के लिए आई.आई.आई.टी स्वीकृत की गई है। उन्होंने कहा कि मण्डी जिला के लिए कलस्टर विश्वविद्यालय भी स्वीकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त प्रदेश के लिए अनेक केन्द्रीय विद्यालय भी स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार देश के लगभग 9 लाख स्कूलों को चरणवद्ध तरीके से डिजिटल बोर्ड उपलब्ध करवाने के लिए वचनवद्ध है।

मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने इस अवसर पर कहा कि केन्द्रीय विश्वविद्यालय के दो विभिन्न स्थानों पर दो परिसर होंगे। उन्होंने कहा कि पहला परिसर धर्मशाला के निकट जदरंगल में जो 750 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला होगा। दूसरा परिसर देहरा में 287 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दोनों परिसरों के निर्माण पर 1300 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जाएगी और इनका निर्माण कार्य अगले तीन वर्षों में पूरा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस परिसर का लगभग 1 हजार हेक्टेयर तक विस्तार होगा जो कि क्षेत्र का बहुत बड़ा विश्वविद्यालय होगा।


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एग्रीकल्चर फील्ड में बढ़ रहा युवाओं का रुझान, हर महीने कमा सकते हैं लाखों रुपए


अब खेती-बाड़ी में कई तरह की नई तकनीकों का समावेश हो गया है। इससे युवा पीढ़ी इस फील्ड में कॅरियर बनाने में काफी रुचि दिखा रही है। प्रगतिशील भारत में समय के साथ खेती-किसानी के क्षेत्र में कई नए बदलाव देखने को मिले हैं। आप चाहें तो एक क्लिक पर अपनी खेती से जुड़ी किसी भी परेशानी का हल प्राप्त कर सकते हैं। वहीं इन दिनों इस्तेमाल में लाए जाने वाले लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से लैस एग्रीकल्चर इक्यूप्मेंट्स के इस्तेमाल ने फसल बुवाई से लेकर कीटनाशकों के छिड़काव और फसल कटाई तक के पूरे प्रोसेस को भी काफी सरल बना दिया है और शायद यही कारण है कि आज देश की युवा शक्ति सिर्फ डॉक्टरी और Engineering की तरफ न भागकर, खेती के क्षेत्र में भी अपने कॅरियर की तलाश कर रही है। जानते हैं इसके बारे में।

व्यापक है एग्रीकल्चर फील्ड
देश के कई हिस्सों में युवा एग्रीकल्चर से जुड़े व्यवसायों को अपनाकर गुणवत्तापूर्ण फसल तो उगा ही रहे हैं, साथ ही खुद को फाइनेंशियली मजबूत भी बना रहे हैं। एग्रीकल्चर एक व्यापक शब्द है, जिसमें फसल उत्पादन, पशुओं की खेती, मत्स्य पालन आदि सभी पहलुओं को शामिल किया गया है। एग्रीकल्चर फील्ड में ऐसे कई डिप्लोमा, डिग्री और सर्टिफिकेट कोर्सेज हैं, जिनको पूरा कर बेहतर कॅरियर बना सकते हैं।

नई टेक्नोलॉजी से अपडेट रहना जरूरी
ग्रामोफोन के संस्थापक तौसीफ अहमद खान कहते हैं कि ट्रैक्टर, रोटावेटर, थ्रेशर और पॉवर टिलर के अलावा फार्म मशीनरी की तकनीकों में बदलाव आए हैं। सीड ड्रिल मशीन, लैंड लेवलर, ड्राइवर लैस ट्रैक्टर, प्लान्टर और हार्वेस्टर जैसे तकनीकी ने भारतीय कृषि को बदलकर रख दिया है।

कोर्स और योग्यता
एग्रीकल्चर साइंटिस्ट बनने के लिए जरूरी है कि बारहवीं फिजिक्स, कैमिस्ट्री, मैथ और बायोलॉजी विषयों से पास की हो। इसके बाद सर्टिफिकेट इन एग्रीकल्चर साइंस (एक वर्ष), डिप्लोमा कोर्सेज इन एग्रीकल्चर (दो वर्ष) व बीएससी इन एग्रीकल्चर (तीन वर्ष) जैसे कोर्स कर सकते हैं। बैचलर डिग्री या डिप्लोमा लेने के बाद मास्टर्स ऑफ साइंस इन एग्रीकल्चर (दो वर्ष) और फिर डॉक्टर ऑफ फिलोसॉफी इन एग्रीकल्चरल (तीन वर्ष) की डिग्री ले सकते हैं।

आर्थिक फायदे का क्षेत्र है
तकनीकी विकास को ध्यान में रखते हुए युवा एक कुशल साइंटिफिक मैनेजमेंट के द्वारा प्रति एकड़ के हिसाब से एक लाख रुपए तक की मासिक कमाई कर सकते हैं। नए कृषि-उद्योग को प्रशिक्षित पेशेवरों की बड़ी जरूरत है। नेशनलाइज्ड बैंकों में युवाओं की नियुक्ति कृषि विस्तार अधिकारी, ग्रामीण विकास अधिकारी, फील्ड ऑफिसर के रूप में हो सकती है। ग्रामीण बैंकों, सहकारी बैंकों, राज्यों के विभिन्न कृषि विभागों में भी बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध हो सकता है।

क्लीन लेबलिंग कंपनियों को है जरूरत
हाल ही में कई भारतीय स्टार्टअप्स ने क्लीन लेबलिंग का ट्रेंड बखूबी अपनाया है। देश में रॉ प्रेशरी, एपिगेमिया, पेपरबोट, जस डिवाइन, एंटीडॉट, 24 मंत्रा जैसी कई क्लीन लेबलिंग कंपनियां अपने ग्राहकों को पौष्टिक जीवनशैली उपलब्ध कराने के लिए टैलेंटेड लोगों की तलाश कर रही हैं। इन कंपनियों के साथ जुड़कर भी आप एक अच्छे भविष्य की तरफ अग्रसर हो सकते हैं।

बेस्ट इंस्टीट्यूट
-नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टिट्यूट
-इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टिट्यूट
-पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी
-इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट
-चौधरी चरण सिंह हरियाणा एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी


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उत्तराखंड में खुलेगा राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय


केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय खोलने का फैसला लिया है। यह जानकारी बुधवार को एक आधिकारिक बयान में दी गई। बयान में कहा गया कि काननू के क्षेत्र में करियर बनाने की ख्वाहिश रखने वाले युवाओं के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह जानकारी दी है कि उत्तराखंड में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय खोला जाएगा।

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प्रदेश में विधि विश्वविद्यालय खोलने को मंजूरी प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि मोदी का उत्तराखंड प्रति विशेष अनुग्रह है। भारत में 21 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय हैं, जिनमें दाखिला कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (सीएलएटी) के माध्यम से होता है।

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वाइल्ड लाइफ साइंसेज से जुड़े क्षेत्रों में करियर बनाना आसान, जानें योग्यता और पात्रता


वन्यजीवन संरक्षण एवं प्रबंधन के क्षेत्र में देश के जाने माने संस्थान भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) ने एमएससी इन वाइल्ड लाइफ साइंसेज में प्रवेश लेकर अपने सपनों को साकार कर सकते हैं। निचे कोर्स से संबंधित जरुरी जानकारी दी गई है।

क्या है कोर्स
एमएससी इन वाइल्ड लाइफ साइंसेज दो साल का कोर्स है, जिसका उद्देश्य वाइल्ड लाइफ साइंसेज के क्षेत्र से जुड़े सिद्धांतों, तकनीकों एवं कौशल को विकसित करना एवं बढ़ावा देना है। वाइल्ड लाइफ से जुड़े इस कोर्स को सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी, राजकोट (गुजरात) से मान्यता प्राप्त है।

क्या है योग्यता
डब्ल्यूआईआई के इस पीजी कोर्स में प्रवेश के लिए जरूरी है कि आपने कम से कम 55 फीसदी अंकों के साथ इनमे से किसी एक फील्ड में बैचलर्स किया हो- साइंस/ मेडिकल साइंस/ इंजीनियरिंग/ वेटेरनेरी साइंस/ एग्रीकल्चर/ फॉरेस्ट्री/ फार्मेसी/ सोशल साइंस/ कंप्यूटर साइंस एंड कंप्यूटर एप्लीकेशन्स। दसवीं में साइंस पढ़ा होना जरूरी है। योग्यता और कोर्स से जुड़ी विस्तृत जानकारी संस्थान के ब्रॉशर में देखी जा सकती है।

प्रवेश की परीक्षा
डब्ल्यूआईआई के इस कोर्स में प्रवेश के लिए आवेदक को प्रवेश परीक्षा देनी होगी, जिसका आयोजन कार्यक्रम आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार बता दिया जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए आपको कम से कम 50 फीसदी अंक हासिल करना जरूरी है। इसके बाद देहरादून में पर्सनेलिटी व एप्टीटयूड टेस्ट और इंटरव्यू का आयोजन किया जाता है।

ऑनलाइन आवेदन
आवेदन के लिए संस्थान के वेबलिंक www.wii.gov.in पर जाएं। यहां दिए गए लिंक पर क्लिक करके अपनी पर्सनल, एजुकेशनल और एक्सपीरियंस की जानकारियां भरें। आपको पासपोर्ट साइज फोटो, जन्मतिथि के लिए स्कूल सर्टीफिकेट, ग्रेजुएशन की मार्क्सशीट, कास्ट सर्टिफिकेट की स्कैन्ड कॉपी अपलोड करनी होती है। अधिक जानकारी के लिए नोटिफिकेशन और आधिकारिक वेबसाइट देखते रहें।


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आईआईएमसी से जर्नलिज्म मास कम्यूनिकेशन के जरिए कर सकते हैं अपने सपनों को साकार


प्रिंट, टीवी, रेडियो समेत विभिन्न संचार माध्यमों से जुड़कर जर्नलिज्म करने या एड एजेंसीज, कॉरपोरेट कंपनियों व एनजीओज से जुड़कर एडवर्टाइजमेंट या पब्लिक रिलेशन के फील्ड में करियर बनाने के इच्छुक लोगों अब इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन से पढ़ाई कर सकते हैं। संस्थान ने हाल ही में आवेदन मंगवाए हैं। आईआईएमसी के विभिन्न पीजी डिप्लोमा कोर्सेज में आवेदन मई महीने में लिए जाते हैं।

आईआईएमसी
इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का एक स्वायत्त संस्थान है, जो कि कम्यूनिकेशन से जुड़े प्रमुख कोर्सेज करवाता है। संस्थान के कोर्सेज के उपरांत स्टूडेंट्स को पीजी डिप्लोमा दिया जाता है, जिसे देशभर के प्रमुख मीडिया संस्थानों एवं कंपनियों में विशेष मान्यता प्राप्त है। संस्थान की कई शहरों में शाखाएं हैं। ये शाखाएं हैं- नई दिल्ली, ढेंकनाल (ओडिशा), अमरावती (महाराष्ट्र), आइजोल (मिजोरम), जम्मू (जम्मू-कश्मीर) और कोट्टयम (केरल)।

ये हैं कोर्सेज
आईआईएमसी में संचालित पीजी डिप्लोमा कोर्सेज की अवधि लगभग एक साल की होती है। आवेदक के पास पांच कोर्सेज के विकल्प हैं। ये कोर्सेज इस प्रकार हैं-
पीजी डिप्लोमा इन हिंदी जर्नलिज्म
पीजी डिप्लोमा इन इंग्लिश जर्नलिज्म
पीजी डिप्लोमा इन एडवर्टाइजमेंट एंड पब्लिक रिलेशन
पीजी डिप्लोमा इन रेडियो एंड टीवी जर्नलिज्म
पीजी डिप्लोमा इन उडिया जर्नलिज्म

आईआईएमसी में आवेदन करने वाले आवेदक एक से अधिक कोर्सेज के लिए आवेदन कर सकते हैं। हिंदी और इंग्लिश जर्नलिज्म का पेपर एक ही होता है इसलिए आप इनमें से किसी एक पेपर मे ही बैठ सकते हैं। इसके अलावा आप किसी अन्य कोर्स में प्रवेश के लिए आयोजित पेपर में भी बैठ सकते हैं। जितने कोर्सेज मे आप आवेदन क रना चाहते हैं, आपको उतने ही फॉर्म भरने होंगे और उतनी ही प्रवेश परीक्षाओं मे बैठना होगा। इन कोर्सेज को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले स्टूडेंट्स के लिए आईआईएमसी में ही कैंपस प्लेसमेंट की सुविधा दी जाती है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित कंपनियां संस्थान के कैंपस में आती हैं।आईआईएमसी के पूर्व छात्र आज देश की जाने माने मीडिया हाउसेज, पीआर व एड एजेंसीज में कार्यरत हैं। आईआईएमसी की प्रवेश परीक्षा मई - जून महीने में आयोजित होती है। हालांकि उडिया जर्नलिज्म के लिए प्रवेश परीक्षा सिर्फ भुवनेश्वर में ही आयोजित होती है।

योग्यता और परीक्षा
आईआईएमसी के विभिन्न पीजी डिप्लोमा कोर्सेज में प्रवेश के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता ग्रेजुएशन है। फाइनल ईयर के छात्र भी आवेदन के पात्र हैं। आवेदन करने वाले लोगों को प्रवेश परीक्षा देनी होगी। प्रवेश परीक्षा का आयोजन मई महीने में विभिन्न शहरों में किया जाता है। उडिया जर्नलिज्म में प्रवेश के लिए परीक्षा का आयोजन जून महीने में सिर्फ भुवनेश्वर में किया जाएगा। लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले चयनित आवेदकों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। उडिया जर्नलिज्म के अलावा सभी कोर्सेज के लिए इंटरव्यूज का आयोजन नई दिल्ली में किया जाएगा। उडिया जर्नलिज्म के लिए इंटरव्यू ढेकनाल ब्रांच में ही होगा। इसके बाद अंतिम चयन सूची बनाई जाएगी, जिसके आधार पर विभिन्न कोर्सेज में प्रवेश दिया जाएगा। एक से अधिक कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए आपको अलग-अलग फॉर्म भरने होंगे और अलग-अलग प्रवेश परीक्षा देनी होगी। आईआईएसी की विभिन्न ब्रांचेज में हॉस्टल फैसेलिटीज उपलब्ध हैं। नई दिल्ली में गल्र्स स्टूडेंट्स के लिए हॉस्टल है।

ऎसे करें तैयारी
इन कोर्सेज में प्रवेश के लिए आपको करंट अफेयर्स, संबंधित फील्ड से जुड़ी घटनाओं और लेखन पर पूरी कमांड होनी चाहिए। प्रश्नपत्र में आपसे समसामयिक घटनाओं पर संक्षिप्त उत्तर भी पूछे जाएंगे और इन घटनाओं पर विस्तृत लेख लिखने को भी कहा जाएगा। इसलिए अपनी तैयारी को तथ्यात्मक स्तर पर तो मजबूती दें ही, साथ ही लेखन में सुधार लाने के लिए नियमित रूप से अपने विचारों को लिखना शुरू कीजिए। तैयारी के लिए नियमित रूप से अखबार और मैगजीन्स पढ़ें। टीवी चैनल्स की भी मदद लें। प्रतिष्ठित पत्रकारों के ब्लॉग आपको किसी भी समसामयिक विषय पर गहरी समझ विकसित करने में मदद कर सकते हैं। इंटरव्यू के दौरान बनावटी बनने की कोशिश न करें। एड एंड पीआर के आवेदक मौजूदा विज्ञापनों एवं पीआर प्रैक्टिसेज पर भी गौर करें।

ऎसे करें आवेदन
आईआईएमसी के इन कोर्सेज में आवेदन के फॉर्म ऑनलाइन भी प्राप्त किए जा सकते हैं और ऑफलाइन भी। ऑनलाइन फॉर्म प्राप्त करने वालों को फॉर्म वेबसाइट से डाउनलोड करना होगा। इसके लिए www.iimc.gov.in पर जाएं। डाउनलोड किया हुआ फॉर्म भरने के बाद इसे 1200 रूपए के डिमांड ड्राफ्ट के साथ संस्थान के पते पर भेज दें।


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टी-सेक्टर में करियर बनाने का बेहतरीन मौका, चाय के शौक़ीन कर सकते हैं अप्लाई


क्या चाय का स्वाद बताना भी कॅरियर बन सकता है? जी हां, चाय की पत्ती बनाने वाली कंपनियां लंबे समय से पेशेवर टी टेस्टरों की सेवाएं लेती आ रही हैं। ये टी टेस्टर चाय की पत्ती का स्वाद व गुणवत्ता को जांचने के लिए रखे जाते हैं।

बेंगलुरू इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांटेशन मैनेजमेंट अपने सर्टिफिकेट प्रोग्राम के तहत चाय के बिजनेस मैनेजमेंट, मार्केट इंफॉर्मेशन, टी टेस्टिंग की तकनीक और उसके तरीकों के बारे में अध्ययन कराता है। यह कोर्स टी बोर्ड ऑफ इंडिया और वाणिज्य मंत्रालय के सहयोग से कराया जाता है। टी उद्योग भी इस कोर्स को मान्यता देता है। इसमें छात्रों को चाय के बाजार से लेकर खपत और मार्केटिंग के गुर सिखाएं जाते हैं।

कोर्सेस- डिग्री कोर्स इन टी मैनेजमेंट, डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्सेस इन टी मैनेजमेंट।

टेस्ट का काम विभिन्न प्रकार की चाय के बीच अंतर को भी पहचानना होता है। चाय, पत्तियों, ग्रेड्स व लिकर्स के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए।
कृषि विज्ञान, उद्यान विज्ञान, फूड साइंस में 12वीं पास या बॉटनी विषय से स्नातक छात्र को डिग्री और डिप्लोमा कार्यक्रम में प्राथमिकता दी जाती है।


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12वीं के बाद ये बेहतरीन कोर्सेज दिलाएंगे अपार सफलता, यहां पढ़ें


होटल इंडस्ट्री से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में कॅरियर बनाने के इच्छुक लोगों के लिए हैदराबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट केटरिंग टेक्नोलॉजी एंड अप्लाइड न्यूट्रिशन कई कोर्सेज में आवेदन आमंत्रित करती हैं। यहां कराए जाने वाले कुछ कोर्स ग्रेजुएट्स के लिए हैं तो कुछ में दसवीं पास लोग भी आवेदन कर सकते हैं। आवेदकों का चयन इंटरव्यू में उनके प्रदर्शन के आधार पर होगा। जितने कोर्सेज में आप आवेदन करना चाहते हैं, उतने ही फॉर्म भरने होंगे।

ये हैं कोर्स-
कोर्सेज की संख्या यहां तीन हैं- 1. क्राफ्ट्समैनशिप कोर्स इन फूड प्रोडक्शन (डेढ़ साल), 2. क्राफ्ट्समैनशिप कोर्स इन फूड एंड बिवरेज सर्विस (24 सप्ताह), 3. पीजी डिप्लोमा इन अकॉमोडेशन ऑपरेशन्स एंड मैनेजमेंट (डेढ़ साल)

ये है योग्यता
क्रमानुसार विभिन्न कोर्सेज की योग्यता इस प्रकार है-
1. पहले और दूसरे कोर्स में एसएससी या दसवीं पास वे लोग पहले कोर्स में आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने स्कूलिंग के फाइनल ईयर में अंग्रेजी भी पढ़ी हो।
2. तीसरा कोर्स ग्रेजुएट लोगों के लिए है। किसी भी स्ट्रीम के ग्रेजुएट लोग इस कोर्स में आवेदन कर सकते हैं। फाइनल ईयर के स्टूडेंट भी आवेदन कर सकते हैं। अधिकतम उम्र सीमा 25 साल निर्घारित है।

कब होते हैं इंटरव्यू
आवेदकों को प्रवेश के लिए इंटरव्यू देने होते हैं, अभ्यर्थियों की संख्या के अनुसार परीक्षा का आयोजन भी किया जा सकता है। इंटरव्यू और परीक्षा का आयोजन जुलाई महीने में किया जाता है।

अपॉर्च्यूनिटी की कमी नहीं
ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिसटिक्स के अनुसार, वर्ष 2016 तक शेफ और फूड प्रोफेशनल्स की नौकरियों की दर में 16 फीसदी का इजाफा होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस फील्ड में कॅरियर सेट करने के लिए होटल, रेस्टोरेंट, एयर कैटरिंग यूनिट्स, फूड प्रोसेसिंग कंपनीज, क्रूज लाइनर और कॉरपोरेट कैटरिंग यूनिट्स में शेफ के लिए नई अपॉच्र्युनिटीज क्रिएट हो रही हैं। इसके अलावा सेल्फ एंप्लॉयमेंट का भी ऑप्शन है। लेकिन इससे पहले किसी होटल में काम करें ताकि अनुभव और नॉलेज मिल सके।

फूड स्टाइलिंग भी है विकल्प
शेफ के तौर पर फूड स्टाइलिंग में भी कॅरियर बनाया जा सकता है। एक फूड स्टाइलिस्ट खाने के आइटम को इस तरह से सजाते हैं कि उसे तुरंत टेस्ट करने का मन होता है। इस फील्ड में जाने के लिए अतिरिक्त योग्यता की आवश्यकता नहीं होती। इसमें क्रिएटिव क्राफ्टवर्क और विजुअलाइजेशन पावर का अच्छा होना जरूरी है। इसके अलावा आपके पास एस्थेटिक सेंस, सृजनात्मक विचार, तकनीकी ज्ञान, धैर्य और नेटवर्किंग का कौशल होना भी बहुत जरूरी है।

जरूरी है हार्ड वर्क
हार्डवर्किंग से ही इस इंडस्ट्री में सफल हुआ जा सकता है। जब आप शेफ के तौर पर अपनाकॅरियर सेट करते हैं तो आपको अलग-अलग देशों के खाने का जायका पता होना चाहिए क्योंकि रोजाना नए-नए कस्टमर्स से मिलने का मौका मिलता है। ऐसे में उनको संतुष्ट करने के लिए कुछ नया प्रयोग करना होगा। इसी तरह शेफ का अच्छा लीडर होना भी जरूरी है क्योंकि कुकिंग मेें फूड की क्वालिटी कंट्रोल, फाइनेंस मैनेजमेंट, मेन्यू प्लानिंग, हायरिंग और टीम मैनेजमेंट का ध्यान रखना भी जरूरी है।

रहें अपडेट
कुकिंग आज कोई डेली रूटीन या एक्टिविटी नहीं रह गई है। इसमें कई तरह के प्रयोग हो रहे हैं। ऐसे में आपको लगातार अपडेट रहने की जरूरत है। साथ ही जो भी नई-नई डिशेज मार्केट में आ रही हैं, उनके बारे में भी नॉलेज रखें ताकि कस्टमर्स को खुश किया जा सके। दरअसल अब लोगों के खाने का स्वाद बदल रहा है। अब इंडियन फूड्स के अलावा इंटरनेशनल फूड्स का क्रेज भी बढ़ा है। इससे पूरी हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री को फायदा मिला है। देखा जाए तो कस्टमर्स की नई डिमांड को एक प्रोफेशनल शेफ ही पूरा कर सकता है। एक शेफ के तौर पर आपको ग्राहक के टेस्ट के मुताबिक अलग-अलग तरह के खान-पान का प्लान करने का हुनर भी होना चाहिए। इसलिए एक शेफ के रूप में सफल होने के लिए चाइनीज, फ्रेंच, इटैलियन, कॉन्टिनेंटल मैक्सिकन जैसे तमाम कुजीन की जानकारी होना भी जरूरी है।

 


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आर्किटेक्चर के क्षेत्र में करियर बनाकर रखें भविष्य की इमारत की नींव


देश-विदेश की विभिन्न खूबसूरत इमारतों में स्थापत्य कला के अदभुत कौशल से प्रेरणा लेते हुए यदि आप भी आर्किटेक्चर के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखते हैं, तो काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर द्वारा आयोजित कराई जाने वाली परीक्षा नाटा (नेशनल एप्टीट्यूड टेस्ट इन आर्किटेक्चर) के लिए आवेदन कर सकते हैं। परीक्षा का आयोजन अप्रैल से जून महीने के बीच होता है।

क्या है नाटा?
नेशनल एप्टीट्यूड टेस्ट इन आर्किटेक्चर एक ऎसी परीक्षा है, जिसका आयोजन किसी व्यक्ति की इस फील्ड विशेष के प्रति अभिरूचि की माप करने के लिए किया जाता है। विभिन्न संस्थान आर्किटेक्चर कोर्स मे प्रवेश देते हुए इसके स्कोर को आधार बनाते हैं। यह परीक्षा अभ्यर्थी के ड्राइंग स्किल्स और ऑब्जर्वेशनल स्किल्स के साथ-साथ विभिन्न वस्तुओं के सौंदर्य के बारे में उसकी समझ एवं सोच-विचार की क्षमता की परख है। हालांकि सिर्फ यह परीक्षा पास करना प्रवेश की गारंटी नहीं है, क्योंकि इसे पास करने के अलावा भी कई शर्ते हैं।

कैसी होगी परीक्षा?
नाटा के जरिए आवेदक के ड्राइंग कौशल के साथ-साथ सौंदर्य के प्रति उसकी समझ यानी एस्थेटिक सेंसिटीविटी का भी आकलन किया जाना है, इसलिए इस परीक्षा के दो भाग हैं। पहला भाग पेपर आधारित ड्राइंग टेस्ट का है और दूसरे भाग में सौंदर्य की समझ की परख के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा ली जाएगी। ड्राइंग टेस्ट की अवधि दो घंटे होगी, जिसमें आवेदक को किसी दी हुई या स्मृति आधारित थीम/ऑब्जेक्ट की तस्वीर कागज पर उकेरनी होगी। इसमें उसे दी गई आकृतियों के समायोजन से कोई कृति बनानी होगी। इस तरह के कई सवाल परीक्षा में पूछे जा सकते हैं। एस्थेटिक सेंसिटीविटी टेस्ट में 40 बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे, जो कि आवेदक की कल्पना एवं अवलोकन, रचनात्मक ता, संचार, आर्किटेक्चर संबंधी जागरूकता से जुड़े होंगे। इसमें आवेदक की मानसिक योग्यता एवं विश्लेषण क्षमता की भी परख की जाएगी। इनके आधार पर ही अपनी तैयारी करें।

यह है योग्यता
नाटा की परीक्षा में तो हर वह व्यक्ति बैठ सकता है, जो दसवीं पास कर चुका है। हालांकि बीआर्क कोर्स में प्रवेश उसे ही दिया जाता है, जिसने एप्टीटयूड टेस्ट पास करने के साथ-साथ बारहवीं में मैथ्स के साथ कम से कम 50 प्रतिशत अंक भी हासिल किए हों। नाटा स्कोर के आधार पर किसी संस्थान में बीआर्क में प्रवेश लेने के लिए नाटा में क म से कम 40 फीसदी अंक तो होने ही चाहिए। नाटा का स्कोर दो साल तक मान्य रहता है। इसलिए परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद आपको दो साल के भीतर ही आर्किटेक्चर में प्रवेश लेना होगा।

यूं करें तैयारी
नाटा में प्रश्न पत्र को डिजाइन करते समय यह बात खासतौर पर ध्यान में रखी जाती है कि आवेदक को संभवत: आर्किटेक्चर का या तो बहुत कम ज्ञान होगा या फिर बिल्कुल ही नहीं होगा। इसलिए सवाल उन्हीं गुणों के अनुरूप पूछे जाते हैं, जो इस क्षेत्र के प्रति अभिरूचि रखने वाले व्यक्ति में स्वाभाविक तौर पर मौजूद होंगे ही। प्रश्नपत्र में देश- विदेश की कुछ बेहद महत्वपूर्ण इमारतों से जुड़े सवाल भी पूछे जा सकते हैं। इनके बारे में आप पढ़कर या इंटरनेट की मदद से जानकारी जुटा सकते हैं। ड्राइंग का अभ्यास क रते रहें।

कैसे करें आवेदन
नाटा में बैठने के लिए आवेदक अपना रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन करवा सकते हैं। इसके लिए वेबलिंक http://www.nata.in पर जाएं और यहां पर दिया हुआ रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरें। रजिस्ट्रेशन के लिए आपको तय शुल्क भी भरना होगा। आवेदन शुल्क आप डेबिट/क्रेडिट कार्ड से या नेट बैंकिंग के जरिए भी भर सकते हैं। आप चाहें तो इसकी वेबसाइट से चालान का प्रिंट लेकर आईसीआईसीआई बैंक की किसी ब्रांच में जाकर भी शुल्क जमा करवा सकते हैं।


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एमबीए टूरिज्म कोर्स के जरिए बनायें ट्रैवल एंड टूरिज्म में बेहतरीन करियर


टूरिज्म एंड ट्रैवल के प्रबंधन के क्षेत्र में कॅरियर बनाने के इच्छुक लोग भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के संस्थान इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ टूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट के एमबीए टूरिज्म कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं। कोर्स की अवधि दो साल की है और इसमें प्रवेश के लिए आपको पहले आपको संस्थान की प्रवेश परीक्षा या कैट/मैट/एक्सएटी/जीमैट आदि की परीक्षा देनी होगी। आवेदन की प्रक्रिया मई महीने में शुरू होती है।

क्या है योग्यता
एमबीए टूरिज्म कोर्स में आवेदन करने के लिए आवेदक का कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ ग्रेजुएट होना अनिवार्य माना गया है। फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स भी इस कोर्स में आवेदन के पात्र हैं। आवेदक के पास कैट/ मैट/ जीमैट/ एक्सएटी/एटीएमए का स्कोर होना चाहिए या उसे संस्थान द्वारा आयोजित एप्टीटयूड टैस्ट में बैठना होगा। संस्थान की प्रवेश परीक्षा मई में होनी है।

कैसे होगा चयन
आईआईटीटीएम के इस एमबीए कोर्स में प्रवेश के लिए सबसे पहले आपको एक प्रवेश परीक्षा देनी होगी। परीक्षा का आयोजन मई महीने में होता है। इसके बाद के चरण में संस्थान ग्रुप डिस्कशन और पर्सनल इंटरव्यू करवाएगा। इस एमबीए कोर्स में सीटों की कुल संख्या 618 निर्घारित है। और उससे अधिक भी हो सकती है।

करें स्पेशलाइजेशन
एमबीए टूरिज्म करने वालों को इस क्षेत्र से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में से किसी एक में स्पेशलाइजेशन का भी विकल्प दिया जाएगा। स्पेशलाइजेशन के ये विकल्प हैं- टूरिज्म एंड ट्रैवल, इंटरनेशनल बिजनेस (टूरिज्म), इंटरनेशनल बिजनेस (टूरिज्म एंड लॉजिस्टिक्स), सर्विसेज टूरिज्म, टूरिज्म एंड लीशर, टूरिज्म एंड कार्गो।

क्या हैं अवसर
टूरिज्म एंड ट्रैवल के क्षेत्र के पेशेवरों के पास अवसरों की कमी नहीं है। विभिन्न ट्रैवल एजेंसीज, होटल्स, एयरलाइन्स, आईआरसीटीसी, एडवेंचर टूर कंपनीज, टूर गाइडिंग बॉडीज अपने यहां टूरिज्म प्रोफेशनल्स नियुक्त करती हैं। इसके अलावा ट्रैवल राइटिंग और टूरिज्म बोर्ड में भी कई अवसर हैं।

कैसे करें आवेदन
आईआईटीटीएम के एमबीए टूरिज्म कोर्स में आवेदन के लिए http://iittm.net/main/admission पर जाएं। यहां एप्लीकेशन फॉर्म और ब्रॉशर दोनों का ही लिंक दिया हुआ है। फॉर्म भरने से पहले पूरा ब्रॉशर पढ़ें, उसके बाद ही फॉर्म भरें।


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वाइल्ड लाइफ से जुड़े फील्ड्स में हैं करियर के बेहतरीन विकल्प, जानें पात्रता और अन्य जानकारी


Career in wild life : इंसान को जीवनयापन के लिए विविध प्रकार की चीजें उपलब्ध करवाने वाले जंगलों के एक-एक पहलू मे आज एक एडवेंचरस करियर छिपा है। वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी, फॉरेस्ट गाइड से इतर वुड साइंस, फॉरेस्ट्री, पेपर टेक्नोलॉजी और एनवायर्नमेंट मैनेजमेंट जैसे कई फील्ड्स भी आज करियर के अच्छे विकल्प पेश कर रहे हैं। जंगलों से जुड़े इन विभिन्न क्षेत्रों में करियर का सफर तय करने के लिए आप भी कर सकते हैं फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (डीम्ड) यूनिवर्सिटी के पीजी कोर्स में आवेदन और बना सकते हैं एक शानदार करियर।

एफआरआई
फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीटयूट (डीम्ड) यूनिवर्सिटी देहरादून में स्थित है और इसकी स्थापना वर्ष 1906 में इंपीरियल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीटयूट के रूप में हुई थी। वन्य क्षेत्र से जुड़े शोध कार्यो के लिए विशेष रूप से समर्पित इस संस्थान में वन्य जीवन, वन्य उत्पादों और पर्यावरण से जुड़े विभिन्न कोर्स करवाए जाते हैं। यहां पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को फॉरेस्ट्री से जुड़े विभिन्न फील्ड्स में शानदार करियर बनाने का अवसर मिलता है। फिलहाल यहां के पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर के कोर्सेज में प्रवेश खुले हैं।

क्या हैं कोर्सेज
एफआरआई (डीम्ड) यूनिवर्सिटी में वन्य जीवन से जुड़े मास्टर्स कोर्सेज में प्रवेश के लिए आवेदन मंगवाए गए हैं। ये कोर्सेज वन्य पर्यावरण से लेकर वन्य उत्पादों से जुड़ी तकनीक तक से संबंधित हैं। एमएससी कोर्सेज की विभिन्न स्ट्रीम्स और उनकी सीटों की संख्या इस प्रकार है-
एमएससी फॉरेस्ट्री- 38 सीट्स
एमएससी वुडसाइंस एंड टेक्नोलॉजी- 38 सीट्स
एमएससी एनवायरमेंट मैनेजमेंट- 38 सीट्स
एमएससी सेल्यूलोज एंड पेपर टेक्नोलॉजी- 20 सीट्स

क्या है योग्यताएं
प्रवेश के लिए अनिवार्य योग्यताएं इस प्रकार हैं-
एमएससी फॉरेस्ट्री- एग्रीकल्चर या फॉरेस्ट्री में बैचलर्स/तीन वर्षीय साइंस बैचलर्स में बॉटनी, जूलॉजी, फिजिक्स, केमिस्ट्री, जियोलॉजी, मैथ्स में से कम से कम एक

विषय।
एमएससी वुड साइंस एंड टेक्नोलॉजी- बीएससी फॉरेस्ट्री या पीसीएम के साथ तीन वर्षीय बैचलर्स
एमएससी एनवायरमेंट मैनेजमेंट-अप्लाइड या बेसिक साइंस में बैचलर्स/फॉरेस्ट्री या एग्रीकल्चर में बैचलर्स/ एनवायर्नमेंट साइंस में बीई/बीटेक
एमएससी सेल्यूलोज एंड पेपर टेक्नोलॉजी- केमिस्ट्री के साथ बैचलर्स/ केमिकल/ मैकेनिकल इंजीनियरिंग

क्या हैं अवसर
एफआरआई (डीम्ड) यूनिवर्सिटी के एमएससी कोर्सेज में वन्यक्षेत्र से जुड़े विभिन्न करियर्स के लिए स्टूडेंट्स को तैयार किया जाता है। इस क्षेत्र में उच्च शिक्षा लेने के बाद फॉरेस्ट सर्विसेज से जुड़ी सरकारी नौकरियों के लिए तो आवेदन किया जा ही सकता है, साथ ही एनवायरमेंट से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं से भी जुड़कर काम किया जा सकता है। विभिन्न एनजीओ में नौकरियों के अवसर मिलने के अलावा, फॉरेस्ट प्रोडक्ट्स बनाने वाली विभिन्न कंपनियों में भी कॅरियर के अवसर तलाशे जा सकते हैं। इस फील्ड में वाकई रूचि हो तो स्टूडेंट्स यहां कई नई ऊंचाइयां छू सकते हैं।

आरक्षण की सुविधा
एमएससी कोर्सेज की बताई गई कुल सीट्स में से कई सीटें विभिन्न वर्गो के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रखी गई हैं। आरक्षित सीटों की संख्या इस प्रकार है-
एससी व एसटी- सीटों की संख्या का क्रमश: 15 फीसदी व 7.5 फीसदी
ओबीसी- भारतसरकार की नीति के अनुरूप
विकलांग- एमएससी फॉरेस्ट्री व एनवायर्नमेंट मैनेजमेंट में एक सीट
आईसीएफआरई एंप्लॉई- एनवायर्नमेंट मैनेजमेंट में पांच सीट्स।
आरक्षण संबंधी जानकारी ब्रॉशर में वर्णित है।

कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट
एफआरआई के एमएससी कोर्सेज में प्रवेश के लिए मई महीने में एक एंट्रेंस एग्जाम आयोजित किया जाता है। यह एग्जाम कंप्यूटर आधारित होगा। जिसमें आवेदक को तय सेंटर पर कंप्यूटर अलॉट किया जाएगा। आवेदक अपने जवाब भी इसी कंप्यूटर पर देंगे। एग्जाम की अवधि समाप्त हो जाने पर इसमें दिए गए जवाब सेव हो जाएंगे। कुल 38 शहरों में या उससे अधिक इस परीक्षा के लिए सेंटर बनाए जाते हैं, जिनका विवरण वेबसाइट पर है। राजस्थान में जयपुर और जोधपुर में एग्जाम सेंटर बनाए जाने की जानकारी है। आप फॉर्म में पसंदीदा सेंटर भर सकते हैं।

कैसे करें आवेदन
एफआरआई में आवेदन ऑफलाइन भी किया जा सकता है और ऑनलाइन भी। ऑनलाइन आवेदन के लिए संस्थान की वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करवाएं और फॉर्म भरने से जुड़े दिशा-निर्देशों का पालन करें। ऑफलाइन आवेदन के लिए फॉम को वेबसाइट fri.icfre.gov.in से डाउनलोड करें। आवेदन फॉर्म अप्रैल महीने में भरे जाते हैं।


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सौंदर्य की बेहतर समझ है तो डिजाइनिंग में जरूर तलाशें अपना करियर


career in Designing : सौंदर्य की बेहतर समझ रखने के साथ अगर आप डिजाइनिंग की बारीखियों पर पकड़ भी रखते हैं तो डिजाइनिंग से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में आपके लिए कॅरियर के अवसर खुल सकते हैं। आज डिजाइनिंग से जुड़े ऎसे ही कुछ खास क्षेत्रों के बारे में जानिए और खुद को अपनी पसंद का एक खास डिजानर कॅरियर अपनाने के लिए तैयार कीजिए।

जीवन में सौंदर्य का काफी महत्व है, तभी तो लोग अपने कपड़े, जेवर, मकान और आसपास की हर चीज को खूबसूरत बनाना चाहते हैं। किसी चीज में खूबसूरती लाने की समझ रखने वाले लोग डिजाइनिंग में कॅरियर बनाने की कोशिश कर सकते हैं। डिजाइनिंग से जुड़े ऎसे कई बड़े संस्थान देश में हैं, जो आपको एक बेहतर कॅरियर के लिए तैयार करते हैं। निफ्ट, एनआईडी, पर्ल एकेडमी ऑफ फैशन समेत कई अहम संस्थान इस देश में हैं, जहां आप अपने कौशल में निखार ला सकते हैं।

ड्रेस डिजाइनर

डिजाइनिंग से जुड़ा एक अहम कॅरियर है, ड्रेस डिजाइनिंग। नए डिजाइन्स को कपड़ों में ढालने के शौकीन लोग निफ्ट, पर्ल एकेडमी ऑफ फैशन समेत देश के कई संस्थानों में चल रहे फैशन डिजाइनिंग के क ोर्सेज में प्रवेश ले सकते हैं। इससे आप अपनी क्रिएटिविटी निखार सकेंगे।

इंटीरियर डिजानर

डिजाइनिंग की समझ के साथ उपलब्ध स्पेस के अधिकतर इस्तेमाल के लिए इंटीरियर डिजाइनर की सेवाएं ली जाती हैं। घरों और ऑफिसों की इमारतों की खूबसूरती में चांद लगाने के इस पेशे में एक बार स्थापित हो जाने के बाद मुंह मांगे चार्जेज मिलते हैं।

एड डिजाइनर

क्रिएटिव सोच और उसे कागज पर उकेरने या पर्दे पर जीवंत करने का हुनर एडवर्टाइजमेंट के क्षेत्र में अच्छा स्थान दिला सकता है। आज डिजाइनिंग का बहुत सा काम कंप्यूटर और एनीमेशन की मदद से किया जाता है, इसलिए इन पर कमांड होना जरूरी है।

ज्वैलरी डिजाइनर्स की भी है डिमांड

कपड़ों के साथ-साथ अगर किसी चीज का क्रेज लोगों मे बढ़ा है तो वह है ज्वैलरी का। सोने-हीरे के जवाहरातों के अलावा आर्टिफिशियल ज्वैलरी की मांग में भी भारी इजाफा हुआ है। लेटेस्ट डिजाइन और उसमें तरह-तरह के नगों और मैटेलिक चूर्ण का इस्तेमाल होने लगा है। इस तरह के प्रयोगों को करने और नए-नए डिजाइन सोच सकने वाले लोग ज्वैलरी डिजाइनिंग में अपना हाथ आजमाकर देख सकते हैं।


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आईसीएआर ने 2500 से अधिक सीटें खाली छोड़ीं : RTI


एक RTI से खुलासा हुआ है कि हजारों योग्य अभ्यर्थियों के होने के बावजूद भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर) ने अखिल भारतीय कोटे में से गत चार वर्षों के दौरान 2,500 से ज्यादा सीटें खाली छोड़ रखी है। भारत में कृषि शिक्षा को समन्वित करने के लिए आईसीएआर कृषि मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है। यह प्रवेश के लिए अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा (एआईईईए) के जरिए कृषि और इससे संबद्ध गतिविधियों(पशु चिकित्सा विज्ञान को छोड़कर) के क्षेत्र में स्नातक(यूजी) और परास्नातक (पीजी) के लिए पूरे देश में अपने सरकारी संस्थानों के लिए परीक्षाएं आयोजित करवाता है।

इन संस्थानों/विश्वविद्यालयों में यूजी की 15 प्रतिशत सीटों और पीजी की 25 प्रतिशत सीटों के लिए प्रवेश परीक्षाएं आयोजित की जाती है। कुछ संस्थान ऐसे भी हैं, जहां एआईआईए के तहत 100 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। सूचना के अधिकार(आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब के अनुसार, इन संस्थानों/विश्वविद्यालयों में बीते चार वर्षों में यूजी व पीजी की सीटों को मिलाकर कुल 2,558 सीटें खाली छोड़ दी गईं। इसके लिए अंतिम बार परीक्षा 2018 में आयोजित की गई थी।

अलग-अलग आंकड़ों पर गौर करें तो, पीजी पाठ्यक्रमों के लिए कुल 1,095 सीटें छोड़ी गईं और यूजी पाठ्यक्रमों के लिए 1,463 सीटें छोड़ी गईं। इसके अलावा, परिषद को छात्रों से काउंसिलिंग के लिए एकत्रित किए गए लाखों रुपये को वापस लौटाना है। 2018 में, पूरे भारत में स्नातक की कुल 1954 सीटों के लिए कुल 25,246 अभ्यर्थियों ने 2000 रुपये देकर काउंसिलिंग के लिए खुद को पंजीकृत करवाया।

10 दिसंबर, 2018 को प्राप्त आरटीआई के जवाब में यह खुलासा हुआ है कि जिन्हें दाखिला नहीं दिया गया, उन अभ्यर्थियों को आईसीएआर को 4,52,34000 रुपये लौटाने हैं। आईसीएआर को परास्नातक अभ्यर्थियों(9,447) को कुल 1,31,36000 रुपए लौटाने हैं। सूचना प्रपत्र में पैसे लौटाने की समयसीमा का वर्णन नहीं किया गया है।

इस आरटीआई के आवेदक चंद्रशेखर गौर ने कहा, हजारों योग्य उम्मीदवार हैं, जिन्हें दाखिला दिया जाना चाहिए था। लेकिन आईसीएआर ने इन रिक्तियों को भरने का काम राज्यों को दे दिया, जिन्होंने जरा-सी भी परवाह नहीं की। दाखिला प्रक्रिया के तहत चयनित अभ्यर्थियों का ऑनलाइन काउंसिलिंग होता है, जिन्हें विश्वविद्यालय और पाठ्यक्रमों को चुनने का विकल्प दिया जाता है, लेकिन कॉलेज चुनने का विकल्प नहीं दिया जाता। इस प्रक्रिया के तहत कई तरह की काउंसिलिंग होती है।

आईसीएआर के सूचना प्रपत्र में कहा गया है कि अगर काउंसिलिंग के चरणों के बाद सीट नहीं भर पाती है तो इन सीटों को भरने का काम विश्वविद्यालय करेंगे। गौर आईसीएआर के सूचना प्रपत्र के इस उपनियम पर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि अगर सरकार ने परीक्षा करवाने का जिम्मा अपने ऊपर लिया है, तो उसे ही इन सीटों को भरने का दायित्व लेना चाहिए, जिसमें हर वर्ष हजारों छात्र शामिल होते हैं।

उन्होंने कहा, काउंसिलिंग के बाद मॉपिंग-अप चरण होना चाहिए और उसके बाद भी कोई सीट खाली रह जाती है तो इसे स्पॉट काउंसिलिंग के जरिए भरना चाहिए। वे इस तरह से इसपर अपना हाथ नहीं झाड़ सकते। राज्य विश्वविद्यालय की परीक्षा में शामिल होने के बदले कई अभ्यर्थियों का एआईईईए की परीक्षा में बैठने का निर्णय लेने की मुख्य वजह यह है कि एआईईईए के तहत अभ्यर्थियों को दूसरे राज्यों के विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने का अवसर मिलता है। आईसीएआर के महानिदेशक त्रिलोचन मोहापात्रा ने इस संबंध में आईएएनएस के ईमेल प्रश्रों के जवाब नहीं दिए।


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MSc courses के लिए इस तारीख से online registration शुरू करेगा AIIMS


All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर 7 फरवरी, 2019 से Masters of Science (MSc) courses एडमिशन प्रक्रिया शुरू करेगा। रजिस्ट्रेशन प्रकिया Biotechnology कोर्स में Nursing और Biotechnology के लिए शुरू होगी। इन कोर्स के लिए इच्छुक और योग्य उम्मीदवार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

official website : aiimsexams.org

aiims examination के बारे में बुनियादी जानकारी
AIIMS 12 मार्च, 2019 से MSc programmes के लिए prospectus अपलोड करेगा। रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 21 फरवरी, 2019 है। संस्थान संभवत: 26 फरवरी, 2019 तक परिणाम घोषित कर देगा। उम्मीदवार 6 मार्च, 2019 तक त्रुटियों में सुधार कर सकते हैं। आवेदकों की अंतिम स्थिति 1 मार्च, 2019 को जारी की जाएगी। उम्मीदवार इस बात का ध्यान रखें की AIIMS में M.Sc. admissions के लिए फाइनल रजिस्ट्रेशन 29 मार्च, 2019 से शुरू होगी।

Nursing and biotechnology exams के बारे में जानकारी
MSc Nursing exam 1 जून, 2019 को आयोजित होगी, जबकि MSc in Biotechnology entrance exam 29 जून, 2019 को आयोजित होगी। इन परीक्षाओं के लिए एडमिट कार्ड 16 मार्च, 2019 को जारी होंगे।

 


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स्टुडेंट्स को नवीनतम जानकारी देने के लिए स्किल विश्वविद्यालयों में करार


विश्वविद्यालयों के संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने और स्टुडेंट्स को बेहतर अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से भारतीय स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी (बीएसडीयू) ने शनिवार को राजस्थान आईएलडी स्किल यूनिवर्सिटी के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। एक आधिकारिक बयान में इस बात की जानकार दी गई। बयान के मुताबिक, राजस्थान आईएलडी स्किल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. ललित के. पंवार और भारतीय स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. (ब्रिगेडियर) सुरजीत सिंह पाब्ला ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि इस समझौते के बाद छात्र उन संभावित अवसरों को लेकर सबसे ताजातरीन जानकारी से लाभान्वित होंगे, जो विश्वविद्यालय एक-दूसरे के साथ साझा करेंगे।

बयान के मुताबिक, दोनों विश्वविद्यालय एक-दूसरे के संस्थान में कौशल प्रशिक्षण के लिए छात्रों का द्विपक्षीय आदान-प्रदान करेंगे। इसके अलावा, एमओयू प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण और दोनों विश्वविद्यालयों में विभिन्न कार्यक्रमों के लिए पाठ्यक्रम तैयार करने और अपडेट करने की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। राजस्थान के कौशल विकास, रोजगार और उद्यमिता राज्य मंत्री अशोक चांदना ने कहा, आजकल हर उद्योग में इतनी प्रतिस्पर्धा है कि छात्रों को स्कूली जीवन के दौरान ही निर्णय लेना और इसके मुताबिक तैयारी करनी पड़ती है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के साथ शिक्षा में कौशल का एकीकरण नए भारत को आकार देने में महत्तवपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा, 'बीएसडीयू राजस्थान के कौशल परि²श्य को बदलने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारतीय स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. सुरजीत सिंह पाब्ला ने कहा, एमओयू का उद्देश्य बीएसडीयू ? और आरआईएसयू के बीच स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम की सुविधा प्रदान करना और दोनों विश्वविद्यालयों से प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण को बढ़ावा देना है।

उन्होंने कहा, हम छात्रों के बीच नवाचार को बढ़ावा देने और वैज्ञानिक स्वभाव को विकसित करने की दिशा में हमारे प्रयासों के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार से आईआईसी प्रमाणन प्राप्त करके बहुत खुश हैं। हमारा मानना है कि यहां से हमें अभी और आगे जाना है।


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AMU ने विभिन्न कोर्सेस के लिए online application forms जारी किए


Aligardh Muslim University (AMU) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर विभिन्न bachelor's, master's और diploma courses के लिए online application forms जारी कर दिए हैं। एडमिशन के लिए प्रवेश परीक्षा की तारीख बाद में जारी की जाएगी।

इन कोर्सेस में दिया जाएगा एडमिशन

Faculty of Agricultural Sciences

-B.Sc. (Hons.) Home Science

-B.Sc. (Hons.) Agriculture

-M.Sc. (Agriculture) Microbiology

-M.Sc. (Agriculture) Entomology

-M.Sc. (Agriculture) Plant Pathology

-MBA (Agribusiness)

-M. Tech. in Agricultural Process and Food Engineering

-M.Sc. (Home Science)

 

Faculty of Arts

-B.A. (Hons.)

-Bachelor of Fine Arts (B.F.A.)

-M.A. (Arabic)

-M.A. (Persian)

-M.A. (Sanskrit)

-M.A. (Malayalam)

-M.A. (Bengali)

-M.A. (Linguistics)

-M.A. (Philosophy)

-M.A. (Urdu)

-M.A. (Hindi)M.A. (Hindi Translation)

-M.A. (English)

-M.A. (English Language Teaching)

-Master of Fine Arts (M.F.A.)

-M.A. (Language of Advertising Media & Market)

-P.G. Diploma in Mass Communication (Urdu)

-P.G. Diploma in Muslim Chaplaincy

-Post M.A. Diploma in Urdu Translation

-Pre-M.F.A. (Bridge Course)

Faculty of Commerce

-B. Com. (Hons.)

-M. Com.

-M.B.A. (Financial Management)

-Master of Tourism & Travel Management (M.T.T.M.)

-Master of Insurance & Risk Management (M.I.R.M.)

-Master of Human Resource Management (M.H.R.M.)

-P.G. Diploma in Banking, Risk & Insurance Management (B.R.I.M.)

-P.G. Diploma in Business Finance (P.G.D.B.F.)

Faculty of Engineering & Technology

-Bachelor of Technology (B. Tech.)

-Bachelor of Architecture (B. Arch.)

-Bachelor of Engineering (Evening)

-M. Tech. Chemical Engineering

-M. Tech. Civil Engineering

-M. Tech. Computer Engineering

-M. Tech. Electrical Engineering

-M. Tech. Electronics Engineering

-M. Tech. Mechanical Engineering

-M. Tech. Petroleum Processing and Petrochemical Engineering

-M. Tech. Nanotechnology

-M. Sc. (Polymer Science & Technology)

-Master of Architecture (M. Arch.)

-Advanced P.G. Diploma in Nanotechnology

 

इस तरह भरें आवेदन फॉर्म
-आधिकारिक वेबसाइट dt.amucontrollerexams.com पर लॉग इन करें

-सही ई-मेल और मोबाइल नंबर के जरिए रजिस्टर करें

-यूजर नेम और पासवर्ड के जरिए लॉग इन करें

-सही जानकारी के जरिए अपना आवेदन फॉर्म भरें

-सबमिट पर क्लिक करें

-फॉर्म को डाउनलोड कर उसका प्रिंट आउट ले लें


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पीएचडी स्टुडेंट्स की छात्रवृति बढ़ी


सरकार ने पीएचडी स्टुडेंट्स तथा रिसर्च एसोसिएट की छात्रवृत्ति में 25 से 35 प्रतिशत तक का इजाफा किया है। यह बढ़ोतरी एक जनवरी से प्रभावी होगी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने पीएचडी के पहले दो साल में जूनियर रिसर्च फेलो के लिए छात्रवृत्ति 25 हजार रुपए प्रति माह से बढ़ाकर 31 हजार रुपए कर दी है। पीएचडी की शेष अवधि में सीनियर रिसर्च फेलो के लिए छात्र वृत्ति 28 हजार रुपए से बढ़ाकर 35 हजार रुपए प्रति माह कर दी गई है।

इसी प्रकार, अनुसंधान में परियोजनाओं मे रिसर्च एसोसिएट के रूप में काम करने वाले वैज्ञानिकों को मिलने वाली राशि में 30 से 35 प्रतिशत का इजाफा किया गया है। इसमें मिलने वाली सर्वाधिक राशि अब 54 हजार रुपए प्रति माह होगी। सरकार का कहना है कि इससे 60 हजार रिसर्च फेलो लाभांवित होंगे। केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों के लिए भी उनके अधीनस्थ संस्थानों में इसी तरह की वृद्धि के लिए निर्देशिका जारी की है और उनसे पीएचडी छात्रों तथा रिसर्च एसोसिएट को मिलने वाली राशि बढ़ाने का अनुरोध किया है।


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