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दिल्ली मेट्रो बनी विश्व की पहली एकमात्र पूर्ण 'हरित मेट्रो प्रणाली'


नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो अपनी आवासीय कॉलोनियों के लिए हरित इमारत संबंधी मानदंड अपनाने के लिए विश्व में एकमात्र पूर्ण 'हरित मेट्रो प्रणाली' बन गई है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

दिल्ली मेट्रो ने भारतीय हरित इमारत परिषद (आईजीबीसी) की ओर से अपनी 10 आवासीय कॉलोनियों के लिए हरित इमारत मानदंडों का पालन करने के लिए प्लैटिनम रैटिंग हासिल किया है। एक बयान में कहा गया है कि दिल्ली मेट्रो रेल निगम(डीएमआरसी) ने इससे पहले अपने फेस 3 स्टेशनों, डिपो(इंजन यार्ड) और उप-स्टेशनों के लिए हरित प्रमाण-पत्र प्राप्त किए थे।

डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक मंगू सिंह ने ऊर्जा अनुकूलन की आवश्यकता पर बोलते हुए 'हरित परिवहन' की आवश्यकता पर जोर दिया। मेट्रो भवन में शुक्रवार को हरित मेट्रो प्रणाली पर आयोजित तीसरे सम्मेलन में उन्होंने कहा, पिछले चार दशकों में देश में ऊर्जा उपभोग 700 प्रतिशत बढ़ा है और यह 2030 तक तीन गुना और बढ़ जाएगा। ऊर्जा के उपभोग का प्रमुख स्त्रोत परिवहन क्षेत्र है, खासकर शहरी परिवहन। इसलिए मेट्रो प्रणाली और हरित मेट्रो की बात पर ध्यान देना बहुत ही प्रासंगिक है।

सभी मेट्रो नेटवर्क में 2.6 मेगावाट के उत्पादन के लिए नए सौर ऊर्जा सुविधाएं लगाने के बाद डीएमआरसी ने 20 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन की घोषणा की है।

दिल्ली मेट्रो द्वारा अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने की पहल की प्रशंसा करते हुए आईजीबीसी के चेयरमैन प्रेम सी. जैन ने कहा, डीएमआरसी 'हरित मेट्रो' बनने वाला पहला मेट्रो है। प्लैटिनम रैटिंग पाना बहुत ही कठिन काम है और इस प्रक्रिया में कठिन परिश्रम भी लगा है।

डीएमआरसी और गुरुग्राम के श्रीराम स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में डीएमआरसी ने 'स्वच्छ चेतना-एक पर्यावरण क्लब' नामक पहल के माध्यम से स्कूली बच्चों को पर्यावरण के प्रति दोस्ताना परियोजनाओं और गतिविधियों में प्रतिभाग के लिए उत्साहित करने संबंधी प्रयासों की भी तारीफ की।

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लाईफ इज लर्निंग, ड्रीम इज लर्निंग एंड एवरीथिंग इज लर्निंगः प्रो. उदय कुमार


लाईफ इज लर्निंग, ड्रीम इज लर्निंग एंड एवरीथिंग इज लर्निंग। यह बात एमएनआईटी जयपुर के निदेशक प्रो. उदय कुमार आर यारागती ने कही। वे मणिपाल विश्वविद्यालय जयपुर में बीटेक फ्रेशर्स के लिए आयोजित ओरिएंटेशन कार्यक्रम में बातौर मुख्य अतिथि विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। 



इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों से चार साल पिकनिक की तरह नहीं बल्कि तपस्वी की जैसे तपस्या कर अपने माता-पिता, संस्थान एवं समाज को उनके अनुरूप रिजल्ट देने का आह्वान किया। उन्होंने मोबाईल का सद्उपयोग करने को कहा। इस अवसर पर मणिपाल विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट प्रो. संदीप संचेती ने विश्वविद्यालय में संचालित पाठ्यक्रमों, विष्वविद्यालय में कार्यरत उच्च पदास्थापित कर्मचारियों, शैक्षणिक गतिविधियों, एमयूजे को मिले अवार्डस, आगामी योजनाओ, विजन, मिशन, पाॅलीसी के बारे में बताया। साथ ही मणिपाल एज्यूकेशन ग्रुप के बारे में जानकारी दी। 



विश्वविद्यालय के प्रो-प्रेसिडेंट, प्रो. एन. एन. शर्मा ने एकेडेमिक गतिविधियों के  बारे में जानकारी दी। डीन, फेकल्टी अफेअर्स एवं प्रो-वोस्ट, प्रो. अवधेष कुमार ने विद्यार्थियों को दी जाने वाली स्काॅलरषिप एवं फायनेनषियल सपोर्ट के बारे में जानकारी दी। रजिस्ट्रार, प्रो. वंदना सुहाग ने मणिपाल एज्यूकेषन ग्रुप की विकास यात्रा के बारे में बताया। साथ ही विश्वविद्यालय के नियमों का पालन करने का आह्वान किया। 



विश्वविद्यालय के हैड बी. टेक. फस्र्ट इअर एवं चीफ कोर्डिनेटर स्टूडेंट एक्टिीविटी, प्रो. राजेष माथूर ने बी. टेक. प्रथम वर्ष की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। डीन, रिसर्च एंड इनोवेषन, प्रो. बी. के. शर्मा ने विष्वविद्यालय की रिसर्च गतिविधियों के बारे में प्रकाष डाला। 



डीन, फेकल्टी आॅफ मैनेजमेंट एंड काॅमर्स एवं डायरेक्टर ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट प्रो. निलांजन चट्टोपाध्याय ने विष्वविद्यालय की प्लेसमेंट गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। विश्वविद्यालय की डायरेक्टर एडमिषन, प्रो. रिचा अरोड़ा ने नवआगंतुक विद्रूार्थियों एवं अभिभावकों का कविता के माध्यम से स्वागत करते हुए मणिपाल एज्यूकेषन फाउंडेषन के उद्देश्यों पर प्रकाष डाला एवं  एडमिषन से संबंधित जानकारी दी।  



विश्वविद्यालय के चीफ वार्डन अनिल सिंह ने विद्यार्थियों से कहा कि ज्ञान एक ऐसा इन्वेस्टमेंट है जिसका डिवीडेंट जीवन भर मिलता है। साथ ही उन्होंने हाॅस्टल लाईफ एवं अनुषासन से संबंधित जानकारी दी। विष्वविद्यालय के चीफ सिक्योरिटी आॅफिसर, कर्नल रतन सिंह ने सुरक्षा संबंधी जानकारी दी।



विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट आॅफ इकाॅनोमिक्स के विभागाध्यक्ष एवं सेंट्रल लाइब्रेरी के फेकल्टी एडवाइजर प्रो. एनडी माथूर ने लाइब्रेरी के स्त्रतों के बारे में जानकारी दी। स्पोर्टस आॅफिसर डाॅ. रीना पुनिया ने स्पोर्टस गतिविधियों एवं सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। 



कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया एवं इस अवसर पर गणेष वंदना एवं स्वागत नृत्य की प्रस्तुती भी कलाकारों ने दी। 


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अरबन डवलपमेंट सेंटर की स्थापना होगी ओटीएस में


जयपुर। राज्य में विरासत हैरिटेज संरक्षण के साथ स्वच्छता पर भी फोकस होगा। इसके लिए 40 शहरों में राज्यस्तरीय हैरिटेज प्रोग्राम शुरू किया जा रहा है। ऐसे हर निकाय में हैरिटेज सेल का गठन होगा, जिससे विरासत संरक्षण को पूरी तरह सहेजा जा सके। चिन्हित शहरों को हैरिटेज सिटी के रूप में पहचान मिलेगी। स्वच्छता के तहत सीवरेज निस्तारण के लिए सेप्टेज मैनेजमेंट लागू किया जाएगा।

इसका उपयोग पहले उन 100 छोटे शहरों में होगा, जहां सीवर लाइन नहीं पहुंच पाई है। इस तकनीक में साइंटिफिक सेफ्टी टैंक में मल एकत्रित होगा, जिसे वाहन के जरिए ट्रीमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। राजस्थान स्टेट हैरिटेज प्रोग्राम व स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत सेप्टेज मैनेजमेंट पर शुक्रवार को ओटीएस में कार्यशाला हुई, जिसमें विरासत संरक्षण व स्वच्छता पर मंथन हुआ।
 
हरिश्चन्द माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान  में अरबन डवलपमेंट सेंटर की स्थापना होगी। इस पर करीब 10 करोड़ लागत आएगी। इसके जरिए ऐतिहासिक फसाडों, हवेलियों, मन्दिरों एवं अन्य ऐतिहासिक मान्यूमेंट्स का संरक्षण होगा। हैरिटेज वॉक-वे का निर्माण किया जाएगा। कार्यशाला में सिटी एलायंस की टीम प्रमुख मधुरिमा वाघमरे, द्रोणा की निदेशक शिखा जैन, राष्ट्रीय नगर कार्य संस्थान सेनिटेशन प्रोग्राम के टीम प्रमुख दीपेन्द्र कपूर, अहमदाबाद विवि के निदेशक देबाशीष नायक सहित अन्य संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

सेप्टेज प्रबंधन नीति पर काम- जनस्वास्थ्य की बेहतर स्थिति बनाने और भूगर्भीय अन्य जल स्रोतों का प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से सेप्टेज प्रबंधन नीति पर काम हो रहा है। इससे अपार्टमेंट, मॉल, बड़े होटल और हॉस्पिटल को भी जोडऩे के लिए प्रेरित किया जाएगा।  जहां सेप्टिक टेंक से मल गाद का रिसाव होता है, वहां सेप्टेज उपचार प्लांट लगाने का सुझाव दिया गया है।

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रिम-झिम फुहारों के बीच मना हरियाली अमावस्या, पौधरोपण कर दिया गया हरा-भरा वातावरण बनाने का सन्देश



हरियाली अमावस्या के अवसर पर रविवार को प्रदेश भर में कई कार्यक्रम आयोजित किये गए। दिन भर चली सावन की बरसात के बीच राजधानी जयपुर में भी जगह-जगह पौधरोपण के कार्यक्रम आयोजित किये गए। 



इसी कड़ी में संरक्षण संस्थान की ओर से नेहरू गार्डन में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित हुआ।  संस्थान के सदस्यों ने यहां बड और पीपल के पौधे लगाए। 



संस्था पिछले दो साल से इसी तरह से पौधरोपण के कार्यक्रम करवा रही है।  


 


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पट्टा वितरण शिविर पर फिर हावी हुई सियासत


जयपुर। मुख्यमंत्री शहरी जनकल्याण योजना के तहत जेडीए की ओर से लगाए जा रहे शिविर पर गुरुवार को फिर राजनीति हावी होती नजर आई। सांसद रामचरण बोहरा जनता को पट्टे बांटने गए लेकिन नगर निगम के पार्षद ने कुछ लोगों के साथ मिलकर हंगामा कर दिया।

मानसरोवर में जेडीए के पृथ्वीराज नगर कार्यालय में गुरुवार को शिविर लगाया गया, जहां सांसद बोहरा को पट्टा देने के लिए बुलाया गया। वहां पहुंचे निगम के पार्षद व उपनेता धर्मसिंह सिंघानिया ने पृथ्वीराज नगर में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने, बीसलपुर लाइन से नहीं जोडऩे की बात पर हंगामा कर दिया।

कुछ लोगों के साथ सांसद को घेरने लगे तो भाजपा पार्षद मुकेश लख्यानी बीच में आ गए। बात बढऩे लगी तो सांसद उठकर पीछे हो गए। इस बीच उनके साथ आई महिलाओं ने नारेबाजी की। सिंघानिया का आरोप है कि जिस कॉलोनी का शिविर है, वह उनके क्षेत्र में है। उन्हें शिविर में नहीं बुलाया गया जबकि लख्यानी को बुलाया गया, जिनका क्षेत्र ही नहीं है।

स्टाम्प और फोटो के लिए परेशान हुए लोग
इधर, सांगानेर तहसील के नेवटा में एक स्कीम के फ्लैट के पट्टे बांटने का गुरुवार को आखिरी दिन था, इसके बावजूद शिविर में अव्यवस्थाएं हावी रहीं। स्टाम्प और फोटो के लिए लोग मशक्कत करते दिखे। शिविर स्थल शहर से 15 किमी दूर होने के कारण लोग परेशान हुए। सुबह शिविर शुरू भी देर से हुआ।

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अहमदाबाद बना देश का पहला वर्ल्ड हैरिटेज शहर


अहमदाबाद। गुजरात का 600 साल पुराना ऐतिहासिक शहर अहमदाबाद अब वर्ल्ड हैरिटेज सिटी बन गया है। सात सालों से जारी मेहनत आखिरकार शनिवार को रंग लाई। पोलेन्ड के क्रेको शहर में जारी वर्ल्ड हैरिटेज कमेटी की 41वीं बैठक में अहमदाबाद को वर्ल्ड हैरिटेज सिटी का दर्जा प्रदान किया गया। इसी के साथ यह देश का पहला वर्ल्ड हैरिटेज सिटी का दर्जा प्राप्त शहर बन गया है।

इस शहर की स्थापना वर्ष 1411 में तत्कालीन मुगल शासक अहमद शाह बादशाह की ओर से की गई थी। पूर्व में इसे आशावल के नाम से भी जाना जाता था। शहर में 29 ऐतिहासिक महत्व स्मारक हैं। इन्हें  एएसआई की ओर से संरक्षित घोषित किया गया है। वहीं 10 ऐतिहासिक दरवाजे भी हैं।

अहमदाबाद को वर्ल्ड हैरिटेज सिटी का दर्जा दिलाने के लिए वर्ष 2010 में तत्कालीन सीएम नरेन्द्र मोदी ने शुरुआत की थी। महानगर पालिका द्वारा करीब 7 साल पहले 31 मार्च 2011 को यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज सेंटर में शहर को सांस्कृतिक शहरों की श्रेणी में वर्ल्ड हैरिटेज सिटी का दर्जा प्रदान करने के लिए आवेदन किया था।

ओटले, पोल और गलियां हैं पहचान
आवेदन में परकोटा क्षेत्र में बने ओटले (चबूतरे), पोल व उनकी गलियां, पोलों में रहने वाले लोगों के रहन सहन को शामिल किया गया था। लकड़ी व स्थानीय ईंटों से तैयार किए गए पोल के मकान अपनी बनावट और नक्काशी के लिए अनूठी पहचान रखते हैं। इन पोलों के मकान के आंगन की खासियत यह है कि वह वातावरण को नियंत्रित रखने में मददगार साबित होता है।

20 देशों ने किया समर्थन  

भारत के अहमदाबाद को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी बनाने के लिए दुनिया के 20 देशों ने समर्थन दिया। जिन देशों ने अहमदाबाद का समर्थन किया उनमें तुर्की, लेबनान, पेरू, ट्यूनेशिया, पुर्तगाल, कजाकिस्तान, वियतनाम, फिनलैंड, अजरबैजान, जमैका, क्रोएशिया, जिम्बाब्वे, तंजानिया, दक्षिण कोरिया, अंगोलम, क्यूबाद और पोलैंड आदि शामिल हैं।

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सैटलमेंट कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट, एनएचएआई से एमओयू जल्द


जयपुर। रिंग रोड परियोजना से जेडीए, अनुबंधित कंपनी सेनजोस सुप्रीम टॉलवेज को आपसी सहमति से बाहर निकालने के लिए बनी सैटलमेंट कमेटी ने गुरुवार को सरकार को रिपोर्ट सौंप दी। कमेटी चेयरमैन सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुनील कुमार गर्ग ने नगरीय विकास मंत्री श्रीचंद कृलपानी को रिपोर्ट सौंपी। इसी रिपोर्ट के आधार पर कंपनी और जेडीए के क्लेम तय किए गए हैं। हालांकि, इसमें कंपनी को ही क्लेम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जो एनएचएआई देगी।

कमेटी 30 मार्च को गठित हुई थी, जिसके 97 दिन बाद रिपोर्ट सामने आई है। नगरीय विकास मंत्री ने बताया कि अगले 7 दिन में एम्पावर्ड कमेटी की बैठक होगी। इसके बाद एनएचएआई से एमओयू किया जाएगा। संभवतया अगले माह तक एनएचएआई निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी कार्यवाही शुरू कर सकती है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी प्रोजेक्ट के विवाद को सुलझाने के लिए जयपुर तक आए। उनके हस्तक्षेप के बाद ही सैटलमेंट कमेटी बनाई गई ताकि जेडीए और कंपनी दोनों रजामंदी से प्रोजेक्ट से बाहर हो जाएं।

7043 से 180 करोड़ पर आया जेडीए
जेडीए ने अनुबंधित कंपनी पर 7043 करोड़ रुपए का चौकाने वाला क्लेम का दावा पेश किया था। इस पर अफसरों को सरकार से जमकर फटकार लगी थी। इसके बाद जेडीए ने संशोधित क्लेम केवल 180 करोड़ रुपए का सौंपा।

निर्णय दोनों के लिए होगा मान्य
जेडीए और कंपनी दोनों एक-दूसरे के पेश किए क्लेम पर काउंटर क्लेम पेश किया। इसके अध्ययन करने के बाद कमेटी ने रिपोर्ट तैयार की। ये निर्णय दोनों एजेंसियों को मान्य होगा। कोई भी एजेंसी इस निर्णय को चुनौती नहीं दे सकेगी।

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अब 3.16 रुपए में मिलेंगे फ्लैट्स, जाने पूरी डिटेल


जयपुर। द्रव्यवती नदी के सौन्दर्यकरण में बाधा बन रहे स्ट्रक्चरों को हटाने और उनमें रह रहे परिवारों के पुर्नवास को लेकर शुक्रवार को जेडीए, नगर निगम और स्थानीय लोगों की सोडाला थाने में बैठक हुई। बैठक में जेडीए ने प्रभावितों को अजमेर रोड पर जयसिंहपुरा में बने बीएसयूपी के फ्लैट्स में शिफ्ट करने का प्रस्ताव दिया। इस पर लगभग सभी ने लगभग सहमति जता दी। हालांकि, कुछ लोगों ने फ्लैट्स की दरों को लेकर विरोध जताया है।

सुशीलपुरा पुलिया से हसनपुरा पुलिया के बीच डेढ़ सौ फीट चौड़ाई में करीब 584 निर्माण प्रभावित हो रहे हैं। इन परिवारों को पुर्नवास के लिए मनाने के लिए थाने में बैठक बुलाई गई। इसमें नगर निगम आयुक्त रवि जैन, जेडीए के अभियांत्रिकी निदेशक ललित शर्मा, अतिरिक्त मुख्य अभियंता बी.डी. शर्मा, नगर निगम सिविल लाइन्स जोन उपायुक्त रविन्द्र शर्मा, जेडीए के अधीक्षण अभियंता मकसूद अहमद सहित स्थानीय वार्ड पार्षद, पूर्व पार्षद और स्थानीय नेता शामिल हुए। जमना नगर विस्तार, गोविंदपुरी, बिहारी बस्ती, नेताजी नगर, वेलकम कॉलोनी के साथ अन्य कॉलोनियों के परिवार इसमें प्रभावित हो रहे है।

3.16 लाख का पड़ेगा फ्लैट
जेडीए ने जो जयसिंहपुरा में फ्लैट बनाए हैं, वे फ्लैट करीब 3.16 लाख रुपए में पड़ेगा। यह राशि भी करीब 20 किश्तों में ली जाएगी। इन परिवारों के सहमति पत्र भरवाने के लिए 18 जुलाई को शिविर लगाए जाएंगे।

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स्मार्ट सिटी: कागजों में ऐसी तस्वीर, विधायक भी हैरान


जयपुर। शहर में स्मार्ट सुविधाओं को गति देने के लिए आखिर सरकार को याद आ ही गई। नगरीय विकास मंत्री ने ऐसे करीब 500 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट का शिलान्यास-लोकार्पण मंगलवार को किया। स्मार्ट सिटी, हृदय एवं अमृत मिशन की दूसरी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में सिटी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कृपलानी ने इन सभी कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश भी दिए।

हालांकि, उन्होंने मान लिया कि इन प्रोजेक्ट्स को शुरू होने में देरी हुई है। इनमें 15 स्मार्ट क्लास, 50 स्मार्ट टॉयलेट, स्मार्ट रोड के साथ बाइसाइकिल शेयरिंग प्रोजेक्ट भी शामिल है। इस मौके पर मंत्री, विधायक, सांसद महापौर, स्मार्ट सिटी कंपनी के सीईओ रवि जैन सहित अन्य अधिकारी व जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

दिखाए बाजारों में तीन मंजिला पेड़ और आधुनिक पोल
प्रोजेक्ट का काम देख रही कंपनी ने कागजों में चारदीवारी की ऐसी तस्वीर दिखाई कि विधायक व अन्य जनप्रतिनिधि भी एकबारगी तो हैरान रह गए। अजमेरी गेट के ठीक बाहर मंच बनाने, बाजारों में 3 मंजिला पेड़, अत्याधुनिक पोल व अन्य तस्वीरें दिखाई जाती रही।

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GST Effect: मार्बल और दूसरी चीजें महंगी, घर बनाना हुआ तिगुना खर्चीला


प्रदेश सहित देश भर में एक जुलाई से लागू हो रहे गुड्स एवं सर्विस टैक्स (जीएसटी) से मार्बल चमक फीकी पडऩा तय है। मार्बल पर टैक्स पांच फीसदी से बढ़कर 28 फीसदी हो जाएगा। पांच गुना कर बढऩे से इसका असर आम आदमी के साथ ही छोटे-बड़े उद्यमियों, हजारों श्रमिकों पर पड़ेगा।

कुछ वर्ष पूर्व तक मार्बल पर 14 प्रतिशत टैक्स बतौर वेट लिया जा रहा था। मौजूदा सरकार ने इसे घटाकर पांच प्रतिशत किया। इससे दम तोड़ते मार्बल व्यवसाय को ऑक्सीजन मिली थी, कि अब जीएसटी की मार पड़ गई।

प्रदेश में मार्बल उद्योग
- 20 जिलों में होता है मार्बल का खनन और उत्पादन प्रदेश में
- 50 हजार करोड़ रुपए का निवेश है मार्बल व्यवसाय में
- 20 लाख से अधिक श्रमिकों की आजीविका जुड़ी है प्रदेश में

यूं समझें इतनी कटेगी जेब अधिक
मार्बल टाइल्स अब तक 10 से 20 रुपए प्रति स्क्वायर फीट मिल रही हैं। इस पर पांच फीसदी टैक्स अर्थात करीब 75 पैसा लग रहा है। नई दरों के मुताबिक अब 3.50 रुपए होगा।

मार्बल स्लैब अब तक 20 से 70 रुपए प्रति स्क्वायर फीट मिल रहा है। फिलहाल 1.10 रुपए प्रति स्क्वायर फीट कर लग रहा था, जो अब 10 से 15 रुपए होगा।

बांसवाड़ा में मार्बल उद्योग
- 50 खदानें हैं मार्बल की बांसवाड़ा जिले में
- 10 हजार श्रमिक जुड़े हैं मार्बल व्यवसाय से
- 500 करोड़ का निवेश है जिले में

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तीन माह में रिफाइनरी स्थल तक पानी, बिजली और सड़क


नई दिल्ली। बाड़मेर के पचपदरा में लगने वाली रिफाइनरी की जमीन को लेकर जुलाई में लीजडीड और सितंबर में शिलान्यास कराने को लेकर सरकार ने तैयारी तेज कर दी है। जमीन संबंधी सभी तरह के काम आगामी तीन माह में पूरे करने को लेकर बाड़मेर कलक्टर और जैसलमेर कलक्टर व एसडीएम पचपदरा को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

रिफाइनरी स्थल को हाइवे से एप्रोच रोड बनाकर जोडऩे, रिफाइनरी निर्माण के लिए पानी और बिजली आपूर्ति तीन माह में पूरे किए जाएंगे। ताकि शिलान्यास के साथ रिफाइनरी का निर्माण कार्य तेज हो सके, इसके लिए बिजली, पानी और सड़क का काम तीन माह में पूरा कर लिया जाए।

दूसरी बार शिलान्यास
रिफाइनरी का सरकार सिंतबर में शिलान्यास कराती है तो चार साल बाद दूसरी बार शिलान्यास होगा। इससे पहले पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने 22 सितंबर 2013 को यूपीए की राष्ट्रीय सोनिया गांधी से शिलान्यास कराया गया था। अब 18 अप्रेल को पुन: एमओयू एचपीसीएल के साथ किया है।

दो जमीनों की लीजडीड
आरक्षित जमीन 4800 एकड़ और जैसलमेर के नाचना से पानी लाने को लेकर वहां पानी कलेक्शन केन्द्र बनाने को लेकर दी गई 105 एकड़ जमीन पर राजस्व विभाग, एचपीसीएल रिफाइनरी लि. के बीच जुलाई द्वितीय सप्ताह में लीजडीड पर हस्ताक्षर होंगे। सरकार और एचपीसीएल के बीच रिफाइनरी लगाने को लेकर एमओयू 18 अप्रेल को हो चुका है।

रिफाइनरी निर्माण के साथ ये काम...
28 एमडीडी पानी की पाइपलाइन: जैसलमेर जिले के नाचना स्थित इन्दिरा गांधी कैनाल से पानी लाने के लिए
पचपदरा से गुजरात पोर्ट तक पाइपलाइन : 650 किमी लम्बी पाइपलाइन गुजरात पोर्ट से रिफाइनरी तक बिछेगी। इसकी चौड़ाई करीब 30 इंच होगी। इस पाइपलाइन के जरिए पेट्रोल-डीजल व अन्य उत्पाद गुजरात पोर्ट भेजे जाएंगे।
270 मेगावाट बिजली पेटकॉक से बनेगी : रिफाइनरी में रोजाना करीब 270 मेगावाट बिजली खर्च होगी। यह बिजली रिफाइनरी से निकलने वाले पेटकॉक से तैयार की जाएगी।
तेल कुओं से पचपदरा तक लाइन: 60 किमी लंबी पाइपलाइन बाड़मेर में केयर्न एनर्जी की ओर से निकाले जा रहे क्रूड ऑयल को रिफाइनरी तक लाने के लिए 30 इंच चौड़ी लाइन बिछाई जाएगी।

क्लीयरेंस की कमान
राज्य सरकार ने एचपीसीएल के अधिकारियों को रिफाइनरी प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरणीय अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने को लेकर केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय से जल्द प्रोजेक्ट क्लीयरेंस सर्टिफिकेट लेने के लिए कहा है। जिससे कि केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के प्रयास तेज हो सकें।

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अवैध औद्योगिक क्षेत्र बस गया, नाम भी रख दिया, जिम्मेदारों का ध्यान ही नहीं


जयपुर। क्या कोई यकीन करेगा कि भूखंड काटकर औद्योगिक क्षेत्र बसा दिया जाए, नाम रख दिया जाए, लेकिन जिम्मेदारों को कानों कान इसकी खबर न हो। विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र से सटी कई बीघा जमीन पर यह खेल हो चुका है।

पहले तो अवैध तरीके से भूखंड सृजित कर बेच दिए गए और अब यहीं औद्योगिक फैक्ट्रियां और कारखाने, गोदाम पनपते जा रहे हैं। अवैध क्षेत्र को विकसित करने के लिए वीकेआई एरिया 19 बना दिया गया। जबकि औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना करने वाले रीको के रिकॉर्ड में ऐसा क्षेत्र है ही नहीं।

यह जमीन वीकेआई के पास, दिल्ली की तरफ बायपास की तरफ दाईं ओर है। वीकेआई एरिया 18 में भी कई जगह इसी खेल के जरिए चांदी कूटी जा रही है। यह जानकारी जेडीए अफसरों से लेकर जिला प्रशासन तक को है, लेकिन मिलीभगत के इस खेल में मास्टर प्लान की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

जांच का बहाना, कहीं भी करो निर्माण...
जिस जमीन पर अवैध गतिविधि की जा रही है, उस पर विवाद भी बताया जा रहा है। जेडीए अधिकारियों के मुताबिक ग्राम लक्ष्मीनारायणपुरा में खसरा संख्या 676/1, 676/2, 676/3,676/4, 676/5, 676/6, 677, 678, 679, 680/760, 681, 682, 687/1, 687/2 से जुड़ी जमीन का मामला है। अफसर इसकी जांच कर रहे हैं। हालांकि, जांच की बात कहकर लम्बे समय से टरकाया जा रहा है। इस भूमि की किस्म चारागाह होने की भी आशंका जताई जा रही है।

कई बड़े घरानों ने खरीदी जमीन...
यहां कृष्णा इण्डस्ट्रीयल के नाम से योजना सृजित कर भूखंड बेचे जा रहे हैं। रजिस्ट्री भी करवाई जा रही है। यहां कई बड़े औद्योगिक घरानों ने भी निर्माण कर लिया है। इसी से सटी जमीन पर वैष्णो देवी नगर व वृदावन विहार नाम से आवासीय योजना भी सृजित कर दी गई। यहां भैरव गृह निर्माण सहकारी समिति व हथरोई गृह निर्माण सहकारी समिति के पट्टे देने की बात कही जा रही है।

जेडीए को पता है
अवैध रूप से बसाई जा रही योजनाओं के मामले में जेडीए उपायुक्त, प्रवर्तन अधिकारी से लेकर जेडीए सचिव तक मामला पहुंच चुका है। जब भूखंड काटे गए तब भी शिकायतें की गईं थीं। अब जब बसावट हो रही है तो भी जानकारी है।

कौन सही, कौन गलत, तय करे जिम्मेदार
इस मामले में जमीन पर मालिकाना हक जताने वाले रामपाल, लालचंद, राकेश मीणा व अन्य से बातचीत भी की गई, जिससे कि हकीकत सामने आ सके। लेकिन उलटे मामला उलझता गया। लालचंद व रामपाल ने जमीन बेचान करने का तर्क दे दिया। उनका कहना है कि जिसे जमीन बेची, वही बताएगा कि यहां कैसे उद्योग शुरू हो गए। इस पर राकेश मीणा ने ऐसा कुछ होने से ही इनकार कर निर्माण करने वालों से ही बातचीत करने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।

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अब बढ़ रहा है वर्टिकल गार्डनिंग का फैशन, आप भी अपने घर में लगाएं


अक्सर फाइव स्टार होटल्स में दिखने वाली वर्टिकल गार्डनिंग पहली बार जयपुर के पिलर्स पर नजर आने लगी है। शहर की खूबसूरती में ग्रीनरी का सुखद अहसास कराने के लिए इस कॉन्सेप्ट को अपनाया जा रहा है। बेंगलूरु में वर्टिकल गार्डनिंग कॉन्सेप्ट हिट होने के बाद जयपुर डवलपमेंट अथॉरिटी (जेडीए) शहर में इस कॉन्सेप्ट को अपनाने जा रहा है।

इसके लिए जेडीए ने एक प्राइवेट फर्म को इसका डेमो देने के लिए कहा है। जिसके तहत वर्टिकल गार्डनिंग को फर्म ने गोपालपुरा पुलिया के नीचे एक पिलर पर इंस्टॉल किया गया है। यदि प्रयोग सफल रहा तो इसे पूरे शहर में अपनाया जाएगा। लोगों में कौतूहल का विषय बन रहे इस कॉन्सेप्ट की खासियत पत्रिका प्लस के जरिए जानिए...

250 से ज्यादा गमले
इस वर्टिकल गार्डनिंग के पास युवा सेल्फी लेते दिख रहे हैं। इस गार्डन में सीधे खड़े आकार यानी वर्टिकल रूप में छह किस्म के सदाबहार पौधे लगाए गए हैं। इनकी संख्या लगभग 250 है। इनमें तीन कलर, लाइट ग्रीन, रेड और डार्क ग्रीन का कॉम्बिनेशन रखा गया है। नीचे की तरफ घास लगाई गई है।

खास यह है कि इन पौधों को सर्वाइव करने के लिए पानी की जरूरत कम होती है। पानी देने के लिए सबसे नीचे छोटा टैंक बनाया गया है। इसके पानी को ड्रिपिंग सिस्टम से जोड़ा गया है। इसमें टाइमर लगाया गया है, जिससे सुबह 10, दोपहर 2 और शाम 6 बजे पानी छोड़ा जाता है। इससे पानी कम खर्च होता है और यह पौधे की जड़ तक जाता है।

...आसानी से सर्वाइव

इंस्टॉल करने वाले एक तकनीकी एक्सपर्ट ने बताया कि फिलहाल छांव वाले पौधे लगाए गए हैं। यदि प्रयोग सफल रहा तो जहां धूप ज्यादा होगी, वहां उसी वातावरण में सर्वाइव करने वाले पौधे लगाए जाएंगे। इसी तरह सर्दियों में ये पौधे बदल दिए जाएंगे। खास बात यह है कि इन पौधों में मिट्टी नहीं है, वरन ऑर्गेनिक खाद और कोकोपीट यानी नारियल का बुरादा भरा गया है। कोकोपीट काफी समय तक पानी को रोकने की क्षमता रखता है। एेसे में यदि किसी कारणवश पौधे को दो दिन तक पानी नहीं भी मिले तो ये आसानी से सर्वाइव कर सकते हैं।

बेंगलूरु में हिट रहा वर्टिकल गार्डन
देश में सबसे पहले वर्टिकल गार्डन की शुरुआत बेंगलूरु के पिलर्स पर हुई थी। इसे इसी साल शुरू किया गया है। शहर के विभिन्न पिलर्स पर लगभग 3500 प्लांट इंस्टॉल किए गए हैं। एक एनजीओ की ओर से इसकी शुरुआत की गई है, जिसमें 10 किस्म के पौधे लगाए गए हैं।

एनजीओ का उद्देश्य बेंगलूरु में बढ़ते पॉल्यूशन को कम कर ग्रीनरी को बढ़ावा देना है। अर्बन हीट गाइसलेंड इफेक्ट, स्मॉग को कम करने, पॉल्यूटेड एयर को प्यूरीफाई करने और बड्र्स के लिए हेल्दी हैबीटाट क्रिएट करने के लिए यह पहल की गई है। इन पौधों को रोजाना महज 100 मिलीलीटर पानी की ही जरूरत होती है।

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मास्टर प्लान सम्बन्धी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई आज


जोधपुर। जयपुर-जोधपुर सहित छह शहरों के मास्टर प्लान को लेकर पत्रिका समूह के प्रधान सम्पादक गुलाब कोठारी के पत्र पर स्व-प्रेरणा से दायर जनहित याचिका पर शुक्रवार को राजस्थान हाईकोर्ट में फिर सुनवाई होगी।

वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा व न्यायाधीश अरुण भंसाली की विशेष खण्डपीठ में मास्टर प्लान से सम्बन्धित याचिकाएं सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई हैं। गत सुनवाई पर न्यायमित्र एवं वरिष्ठ अधिवक्ता एम.एस. सिंघवी द्वारा ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से 20 अप्रेल, 2017 को जारी अधिसूचना पेश किए जाने पर हाईकोर्ट ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था।

वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी ने कहा था कि सरकार तो आगोर, चरागाह व वन भूमि को भी रेगुलराइज करने के लिए ग्राम पंचायत को सुपुर्द करने की तैयारी कर रही है।

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यूनिक श्री के नए प्रोजेक्ट यूनिक अनमोल की लॉन्चिंग


जयपुर। झुंझुनूं बाइपास स्थित यूनिक श्री के नए प्रोजेक्ट यूनिक अनमोल की लॉन्चिंग संत रतिनाथ महाराज की उपस्थिति में की गई। इस अवसर पर सीकर के सांसद सुमेधानंद महाराज, विधायक रतन जलधारी भी मौजूद थे।

समूह के निदेशक विभिषेक सिंह ने बताया कि यह प्रोजेक्ट शहर की प्राइम लोकेशन पर है। यहां मात्र 7.99 लाख रुपए में घर का सपना पूरा होगा। इसके साथ ही 12.60 लाख में एलआईजी फ्लैट मिलेगा। इस प्रोजेक्ट के लिए 30 मई तक बुकिंग की जा रही है। यूनिक अनमोल में सीनियर सिटीजन कॉर्नर, ओपन जिम, वॉक वे, लैंडस्केप आदि की सुविधाएं हैं।

चितवन का भूमि पूजन
आरएसआर ग्रुप की मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत जगतपुरा स्थित चितवन आवासीय योजना का शिलान्यास उद्योगमंत्री राजपाल सिंह शेखावत, सांसद रामचरण बोहरा, संसदीय सचिव डॉ. कैलाश वर्मा एवं ग्रुप के प्रमुख रामसिंह राजावत ने किया। इस मौके पर निदेशक देवव्रत सिंह राजावत ने बताया कि इस योजना में कमजोर आर्य वर्ग के लिए आवास बनाए जाएंगे। इस अवसर पर ग्रुप के सीईओ विशाल व्यास भी उपस्थित थे।

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कब्जे में निवास कर रहने वालों को मिलेगा पट्टा


नई दिल्ली। भूखंड के पट्टे जारी करने का अब कोई कार्य क्षेत्र नहीं रहेगा। बस्तियों के पट्टे केवल नगर परिषद ही नहीं नगर विकास न्यास भी जारी कर सकेगा। इतना ही नहीं लम्बे समय से जो अभी जहां निवास कर रहा है, उनको भी सरकार पट्टे देगी।

स्वायत्त शासन मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने ये बात शनिवार रात सर्किट हाउस में विधायक विट्टलशंकर अवस्थी, भाजपा जिलाध्यक्ष दामोदर अग्रवाल की मौजूदगी में भाजपा कार्यकर्ताओं से चर्चा करते हुए कही। न्यास अध्यक्ष खण्डेलवाल ने न्यास में सरकार के तय लक्ष्य के अनुरूप पट्टे जारी नहीं होने की पीड़ा जताई।

इस पर कृपलानी ने तुरन्त न्यास सचिव आशीष शर्मा को भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठक में ही बुला लिया और उनसे पूछ लिया कि आप पट्टे क्यों जारी नहीं कर रहे। इस पर न्यास सचिव शर्मा ने कहा कि वे पट्टे जारी कर रहे हैं। उन्होंने अभी तक के आंकड़े भी मंत्री को बताए। इस पर कृपलानी ने नगर विकास न्यास अध्यक्ष व सचिव के बीच सूचनाओं को लेकर तालमेल नहीं होने पर नाराजगी जताई।

कच्ची बस्ती में भी दें पट्टे
विधायक अवस्थी व सभापति समदानी ने मंत्री को बताया कि नगर विकास न्यास कच्ची बस्ती में भूखंडों के पट्टे जारी नहीं कर रहा है। कृपलानी ने इस पर स्वायत्त शासन विभाग के आला अधिकारियों से बात की और इसके बाद सचिव शर्मा को कहा कि पट्टे देने में कहीं कोई समस्या नहीं है। वे कच्ची बस्ती में पट्टे जारी करें।

यूआईटी से परिषद को दिलाओ 26 करोड़
सभापति ललिता समदानी ने कहा कि नगर परिषद की विभिन्न मदों में 26 करोड़ रुपए की बाकियात नगर विकास न्यास में है, लेकिन न्यास उन्हें ये राशि नहीं चुका रही है। मंत्री ने न्यास सचिव को इस मामले में कार्रवाई करने को कहा।

Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/city-news/govt-will-give-house-document-to-families-living-on-illegally-occupied-land-1589554/

मैक्स लिटिल आइकन के फिनाले में बच्चों ने जमकर लुभाया


नोएडा. डीएलएफ मॉल ऑफ इंडिया में मैक्स लिटिल आइकन के ग्रांड फिनाले में नन्हें सितारों ने सबको आकर्षित किया। मैक्स किड्स फेस्टिवल का एकीकृत भाग मैक्स लिटिल आइकन गायन, नृत्य, चित्रकारी और फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए नन्हें चैम्पियनों और दीवा को प्रोत्साहित करता है।

गायकों, डांसर और कलाकारों के एक होस्ट ने अपनी प्रतिभा से दर्शकों को मोहित कर दिया। मैक्स लिटिल आइकन के ग्रांड फिनाले में बच्चों  ने गायन, डांसिंग, चित्रकारी और फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता के लिए खिताब जीता। जजों में प्रोफेशनल संगीतकार सौरभ मिश्रा, आसमा डांस कंपनी की डायरेक्ट और इंडियाज गॉट टैलेंट के सीजन 2 की फाइनलिस्ट सोनिया वर्मा, प्रसिद्ध कलाकार प्रशांत के सरकार और प्रोफेशनल फैशन डिजाइनर निकेत मिश्रा शामिल थे।

मैक्स फैशन के रीजन मैनेजर सौरभ गर्ग ने कहा, 'मैक्स का अर्थ है पारिवारिक खरीदारी का स्थान, और हम अपने उपक्रमों के माध्यम से उन्हें नजदीक लाने और निकटता से उनके साथ संलग्न होने पर विश्वास करते हैं। इतने सारे बच्चों को एक प्लेटफार्म में आते और अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करते हुए देखना वाकई उत्साहजनक है।'

बच्चों के माता- पिता ने कहा, 'यह प्रत्येक परिवार के लिए एक आदर्श रविवार था, जिसके लिए मैक्स फैशन को धन्यवाद। इतने छोटे बच्चों में ऐसी अद्भुत प्रतिभा देखना काफी मजेदार है। मैक्स इन बच्चों के आत्मविश्वास को सही तरीके से आगे बढ़ाने में सक्षम हुआ है।' जब मैक्स लिटिल आइकन अपने समापन की ओर बढ़ा, तो इस फेस्ट के लिए पंजीकृत किए गए 4 हज़ार से ज्यादा बच्चों के बीच ऊर्जा प्रत्यक्ष थी।


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जमीन घोटाले में दिल्ली, गुरुग्राम में ईडी के छापे


नई दिल्ली। जयपुर हाईवे पर गुरुग्राम जिले के मानेसर जमीन घोटाले के मामले में गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 10 जगहों पर छापेमारी की। ये छापेमारी हरियाणा और दिल्ली में की गई। ईडी अधिकारियों ने बताया कि आठ लोगों के परिसरों की तलाशी ली गई जिनमें आईएएस अधिकारी, हरियाणा सरकार के अधिकारी और बिल्डर शामिल।

गुरुग्राम में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली, गुरुग्राम और हरियाणा में कुछ अन्य स्थानों पर छानबीन की गई। मानेसर मामला हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार के वक्त का है। हुड्डा सरकार के कार्यकाल के दौरान करीब 900 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर उसे बिल्डरों को कौडिय़ों के भाव बेचने का आरोप है।

इस पूरे मामले में करीब 1500 करोड़ के घोटाले की बात कही जा रही है। बेची गई जमीन तीन गांवों की है। गांव के किसानों ने गुरुग्राम के मानेसर थाने में केस दर्ज करवाया था। हरियाणा में बीजेपी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद 17 सितंबर 2015 को मामला सीबीआई को दिया था।

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केवल 6 शहरों की पालना रिपोर्ट आई, वह भी कामचलाऊ


जयपुर। मास्टर प्लान को लेकर हाईकोर्ट के आदेश पर विकास प्राधिकरण, यूआईटी व अन्य निकाय बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। हाईकोर्ट में 29 मई को सौंपी जाने वाली पालना रिपोर्ट में औपचारिकता निभाई जा रही है। महाधिवक्ता के साथ शुक्रवार को हुई बैठक में यही हालात सामने आए। जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर और बीकानेर शहरों की पालना रिपोर्ट आ तो गई, लेकिन सभी में केवल फौरी कार्यवाही की गई है।

सभी ने हाईकोर्ट के आदेश की पालना करने का दावा तो किया है लेकिन अभी तक की गई अवहेलना का जिक्र तक नहीं किया। खासकर, 13 जनवरी को हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार के आदेश से ओट लेकर और उसके बाद निकायों ने कई मनमाने काम किए, जिन पर रोक लगाई गई थी। सरकार यही अधूरी पालना रिपोर्ट 29 मई को कोर्ट में सौंपने की तैयारी कर रही है।

अधिकारियों ने तर्क दिया है कि कोर्ट ने अभी केवल 6 शहरों की रिपोर्ट मांगी है। इसलिए अभी तक अन्य निकायों की पालना रिपोर्ट तैयार ही नहीं की गई। जबकी हकीकत यह है कि सरकार ने तीन दिन पहले ही सभी निकायों को 26 मई तक पालना रिपोर्ट भेजने के लिए कहा था। महाधिवक्ता के साथ हुई बैठक में सभी छह शहरों के अधिकारी शामिल हुए। इस बीच मुख्यमंत्री शहरी जनकल्याण शिविरों के संबंध में अब तक जारी आदेशों-निर्देशों का भी रिव्यू किया गया लेकिन इसका असर हुआ नहीं।

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शौचालय निर्माण के तीन हजार आवेदन गायब!


नई दिल्ली।  नगर निगम के सांगानेर जोन के वार्ड 49 में जमा किए आवेदन पत्र नहीं मिलने पर स्थानीय लोगों ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री जनकल्याण शिविर में हंगामा मचा दिया। अधिकारियों की अनुपस्थिति पर गुस्साए लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया।

दरअसल, वार्ड के करीब तीन हजार लोगों के शौचालय निर्माण संबंधी आवेदन जोन कार्यालय से गायब हो गए। स्थानीय पार्षद मोहन मीना के मुताबिक लोगों के पास मोबाइल पर मैसेज भी आ गए लेकिन आवेदनों का अता-पता नहीं है। इस कारण उन्हें पुन: आवेदन भरने के लिए कहा जा रहा है। शिविर में लोगों में आक्रोश बढ़ता देख पुलिस बुलाई गई। लोगों का कहना था कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण के लिए मिलने वाले अनुदान के आवेदनों को बिना कारण बताए निरस्त कर दिया गया।

कई किमी दूर से पहुंचे
सांगानेर जोन क्षेत्र गोनेर, खो-नागोरियान तक है। वार्ड 49 के लोगों को तेज गर्मी के बावजूद 20 किलोमीटर दूर शिविरों में आना पड़ रहा है। हालांकि जोन उपायुक्त रामरतन शर्मा का कहना है कि अधिकारियों को समय पर आने के लिए पाबंद किया गया है।

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