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ICICI-Videocon Loan Case: चंदा कोचर के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं 20 सवाल


नई दिल्ली। आईसीआईसीआई बैंक ( icici bank ) की पूर्व सीईओ व प्रबंध निदेशक चंदा कोचर ( Chanda Kochhar ) और उनके पति दीपक कोचर ईडी द्वारा उनसे पूछे गए 100 सवालों में से 20 सवालों के संतोषप्रद जवाब देने में विफल रहे। जांच एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तहकीकात में 13 मई से लेकर अगले पांच दिनों तक 60 घंटे से अधिक समय तक की गई पूछताछ के दौरान उनसे 100 सवाल किए गए, जिनमें से 20 सवालों के संतोषप्रद जवाब देने में वे विफल रहे।


क्या है मामला

ईडी वीडियोकॉन के 1,875 करोड़ रुपये के मामले में कोचर दंपति से पूछताछ कर रही है। मामला वर्ष 2009 और 2011 के दौरान आईसीआईसीआई बैंक द्वारा वीडियोकॉन समूह को कर्ज की राशि को मंजूरी प्रदान करने में बरती गई कथित अनियमितता से जुड़ा है। एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि दिल्ली के खान मार्केट स्थित ईडी मुख्यालय में दंपति से की गई पूछताछ के दौरान वे 20 सवालों के अपने जवाब के पक्ष में प्रामाणिक सबूत पेश नहीं कर पाए। कोचर दंपति से 13 मई से लेकर अगले पांच दिनों तक पूछताछ की गई, जिस दौरान उन्हें अपनी बात साबित करने के लिए दस्तावेज पेश करने को कहा गया। उनका कहना था कि उनके खिलाफ आरोप झूठे हैं।

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ईडी ने चंदा कोचर से 10 मुख्य सवाल किया

सूत्रों ने बताया कि कई सवालों के जवाब में कोचर दंपति ने दस्तावेज पेश किए, जिसके बाद जांचकर्ताओं ने उन बिंदुओं पर और संदेह नहीं किया, लेकिन 100 में से 20 सवालों को उन्होंने अस्पष्ट जवाब दिए। ज्यादातर सवाल कोचर परिवार और वीडियोकॉन समूह के बीच सौदे में गड़बड़ी और कर्ज की मंजूरी में बरती गई अनियमितताओं पर आधारित थे। ईडी ने चंदा कोचर से 10 मुख्य सवाल किए जिनमें से एक सवाल यह किया गया कि जब कंपनी की ओर से आईसीआईसीआई बैंक के पास पहली बार जून 2009 में कर्ज का प्रस्ताव आया, तब क्या उनको अपने पति के वीडियोकॉन के अध्यक्ष वेणुगोपाल धूत के साथ संयुक्त उपक्रम के बारे में पता था?


चंदा कोचर ने क्या कहा

सूत्रों के मुताबिक, चंदा ने इस सवाल का नकारात्मक जवाब दिया। उनसे दूसरा सवाल यह पूछा गया कि क्या वीडियोकॉन समूह की कंपनियों को जून, 2009 से लेकर अक्टूबर, 2011 के दौरान कर्ज की मंजूरी देने वाली आईसीआईसीआई बैंक की ऋण को मंजूरी प्रदान करनेवाली विभिन्न समितियों को दीपक कोचर-धूत के संबंध के बारे में जानकारी थी। सूत्रों ने बताया कि उन्होंने इस बात की जानकारी से खुद के अवगत होने से इनकार कर दिया। चंदा कोचर से तीसरा सवाल पूछा गया कि उनको दीपक कोचर और धूत के उपक्रम के बारे में कब पता चला?

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सूत्रों के अनुसार, उन्होंने इसका भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया। चौथा सवाल यह था कि उन्होंने उपक्रम के बारे संबंधित अधिकारियों के पास शिकायत क्यों नहीं की। ईडी के सूत्रों ने बताया कि इसका भी जवाब चंदा कोचर ने अस्पष्ट दिया। पांचवां सवाल यह था कि क्या उनको मालूम था कि धूत द्वारा दीपक कोचर के प्रबंधन वाली कंपनी मेसर्स एनआरएल 64 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए जाने के बारे में जानकारी थी। इसके अगले ही दिन वीडियोकॉन इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को सात सितंबर 2009 को 300 करोड़ रुपये का कर्ज प्रदान करने की मंजूरी दी गई थी। चंदा कोचर ने इस सवाल पर 'नहीं' कहा। चंदा से छठा सवाल एनआरएल को लेकर किया गया, जिस पर उन्होंने कंपनी के बारे में जानकारी होने की बात स्वीकारी, लेकिन कहा कि उनको कंपनी के कामकाज की जानकारी नहीं थी।

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IndiGo के CEO ने मानी आपसी मतभेद की बात, कहा - इससे कंपनी की रणनीति पर कोर्इ असर नहीं


नर्इ दिल्ली। इंडिगो ( indigo )के चीफ एग्जीक्युटिव रोनोजाॅय दत्त ( Ronojoy Dutta ) ने स्वीकार किया की कंपनी में मतभेद की स्थिति है जिसे समय रहते नहीं सुलझाया गया तो यह खुलकर सामने आ जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि कंपनी ( IndiGo Airlines ) के पास एक मजबूत ट्रैक रिकाॅर्ड है आैर उसकी ग्रोथ स्ट्रैटेजी में अभी भी कोर्इ बदलाव नहीं हुआ है। दत्त ने कहा,"हम सब जानते हैं कि एक मजबूत कंपनी में आपसी मदभेद तो होते ही हैं।"

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समय रहते बन सकती है मतभेद पर सहमति

हाल ही में कंपनी की शीर्ष अधिकारियों के बीच आपसी मदभेद को लेकर उन्होंने कहा कि कुछ मसलों पर आपसी मतभेद हैं, लेकिन कंपनी का ट्रैक रिकाॅर्ड बेहतर है जिसकी वजह से समय रहते ही इसे सुलझाया जा सकता है। अगर मौजूदा मतभेद को समय रहते नहीं सुलझाया गया तो यह सब खुलकर सामने आ जाएगा। बता दें कि गत 16 मर्इ कंपनी के संस्थापक राहुल भाटिया आैर राकेश गंगवाल के बीच मतभेद के मामले सामने आए थे।

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अक्टूबर के बाद इंटरग्लोब एंटरप्राइज को मिल जाएंगे विशेषाधिकार

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, भाटिया के पक्ष में शेयरहोल्डर्स का रुख आैर कंपनी के भविष्य को लेकर स्ट्रैटेजी समेत कर्इ मुद्दों पर दोनों में मतभेद हैं। आगामी अक्टूबर माह में खत्म हो रहे अग्रीमेंट के बाद, भाटिया की होल्डिंग कंपनी इंटरग्लोब एंटरप्राइज ( InterGlobe Enterprize ) को यह अधिकार मिल जाएगा कि वह प्रबंध निदेशक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी व अध्यक्ष समेत कर्इ प्रमुख पदों पर खुद नियुक्ति कर सकती है। इंटरग्लोब एंटरप्राइज के पास इसका भी अधिकार होगा कि वह तीन स्वतंत्र निदेशक की भी नियुक्ति कर सकती है, जिसमें से एक नाॅन-रिटायरिंग होगा।

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आरजी ग्रुप के पास भी विशेष अधिकार

एक बयान में दत्त ने गंगवाल का नाम लेते हुए कहा कि उनकी कंपनी फैमिली होल्डिंग कंपनी आरजी ग्रुप की कोर्इ मंशा नहीं है कि वो कंपनी की नियंत्रण अपने हाथों में ले या शेयरधारकों से अग्रीमेंट को लेकर कोर्इ मोलभाव करे। दूसरी तरफ आरजी ग्रुप के पास एक गैर-स्वंतत्र निदेशक की नियुक्ति करने का अधिकार है। दोनों के बीच वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर पहले भी मतभेद की खबरें आ चुकी हैं।

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जेट एयरवेज पर SBI प्रमुख ने दी जानकारी, कहा - सप्ताह भर में साफ हो जाएगी तस्वीर


नई दिल्ली। वित्तीय संकट के कारण अस्थाई तौर पर परिचालन बंद कर चुकी एयरलाइन जेट एयरवेज ( Jet Airways ) के भविष्य को लेकर कुछ जानकारों को इसके दोबारा पटरी पर लौटने की उम्मीद थी, लेकिन अब एक बार फिर से जेट का अपने पहले वाली स्थिति में आना मुश्किल लग रहा है। भारतीय स्टेट बैंक ( SBI ) के अध्यक्ष रजनीश कुमार ( rajneesh kumar ) ने जानकारी देते हुए कहा कि आने वाले एक सप्ताह के भीतर तस्वीर साफ हो जाएगी।


SBI अध्यक्ष ने दी जानकारी

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के प्रमुख ने शनिवार को मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि विभिन्न विकल्पों का मूल्यांकन किया जा रहा है। कानूनी राय भी ली जा रही है। कई निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई है। हमें यह देखना है कि क्या उनके पास पैसे व साधन हैं। मेरा मानना है कि एक सप्ताह के भीतर तस्वीर साफ हो जाएगी।


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8,400 करोड़ रुपए की करनी है वसूली

उनसे जब यह पूछा गया कि क्या ये निवेशक उनसे अलग हैं, जिन्होंने अनपेक्षित पेशकश की थी, तो कुमार ने कहा कि कुछ हैं, लेकिन उनकी गंभीरता परखनी होगी। एसबीआई की अगुवाई में जेट एयरवेज के ऋणदाता इस समय अपने 8,400 करोड़ रुपए के बकाए की वसूली के लिए एयरलाइन बेचने की प्रक्रिया में जुटे हैं।


एतिहाद कर सकती है मदद

बोलीदाताओं के रूप में प्राइवेट इक्विटी फर्म टीपीजी कैपिटल, इंडिगो पाटर्नर्स, नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ) और एतिहाद एयरवेज की संक्षिप्त सूची बनाई गई है। इन कंपनियों ने अपने एक्सप्रेशन ऑफ इंटेरेस्ट (ईओआई) पेश किए हैं, लेकिन बाध्यकारी निविदा सौंपने की अंतिम तिथि 10 मई को सिर्फ एतिहाद ने अपनी पेशकश की और उसने भी आखिरी वक्त में पेशकश की है। एयरलाइन के लिए प्राप्त अन्य दो निविदाएं अनपेक्षित थीं।


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जेट के एग्जिक्यूटिव दे रहे इस्तीफा

हालांकि, अन्य कर्जदाता विभिन्न प्रस्तावों का पुनरीक्षण कर रहे हैं, लेकिन जेट के अधिकांश शीर्ष स्तर के एग्जिक्यूटिव ने अपना इस्तीफा दे दिया है। निजी कारणों का जिक्र करते हुए इस्तीफा देने वालों में कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) और कंपनी सेक्रेटरी शामिल हैं। जेट के एक पूर्णकालिक निदेशक गौरांग शेट्टी के इस्तीफे के शीघ्र बाद बोर्ड में एतिहाद के नामित रॉबिन कर्माक ने 16 मई को पद छोड़ दिया।

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नकदी की समस्या कम करने के लिए अनिल अंबानी ने बनाया नया प्लान, संपत्ति बेचकर जुटाएंगे 10 हजार करोड़ रुपए


नई दिल्ली। उद्योगपति अनिल अंबानी ( Anil Ambani )की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं हैं। लंबे समय से वित्तीय परेशानी से जूझ रही कंपनी रिलायंस कैपिटल ने शनिवार को कहा कि उसे चालू वित्त वर्ष में संपत्तियों की बिक्री कर 10 हजार करोड़ रुपए जुटाने तथा कर्ज 50 फीसदी कम करने का अनुमान है। हाल ही में हुए एरिक्सन मामले में भी उनके बड़े भाई मुकेश अंबानी ने उनकी मदद की और उनको जेल जाने से बचाया था। मुकेश अंबानी की मदद के बाद भी अनिल अंबानी इस समय नकदी की समस्या से जूझ रहे हैं।


कंपनी ने दी जानकारी

कंपनी ने एक बयान में जानकारी देकर कहा कि वह कर्ज की किस्तें भरने में नियमित रही है और समय पर किस्तों का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए काम करती रही है। उसने कहा कि संपत्ति बेचकर पैसे जुटाने की उसकी योजना सही तरीके से आगे बढ़ रही है।


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संपत्ति बेचने की बनाई योजना

कंपनी ने कहा कि वह रिलायंस निप्पन लाइफ एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड में अपनी पूरी 42.88 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया में है जिसका बाजार मूल्यांकन अभी की कीमत से पांच हजार करोड़ रुपए से अधिक है। कंपनी ने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी की 49 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की भी घोषणा की।


मूल कारोबार की कुछ संपत्तियों को बेचेंगे

कंपनी ने बयान में कहा कि वह अपने मूल कारोबार की कुछ संपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया में है। उसने कहा कि कंपनी को इन बिक्रियों से कम से कम 10 हजार करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है। इससे चालू वित्त वर्ष में कुल कर्ज 50 फीसदी से अधिक कम हो जाएगा। कंपनी ने रेटिंग एजेंसी केयर से भी असहमति व्यक्त की। केयर ने हाल ही में कंपनी के दीर्घकालिक ऋणपत्र कार्यक्रम, बाजार से जुड़े डिबेंचर और सबऑर्डिनेटेड डिबेंचर की रेटिंग कम कर दी थी।

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( ये न्यूज एजेंसी से ली गई है। )


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Amazon को देवी-देवताओं का अपमान करना पड़ा भारी, मामले में दर्ज हुआ मुकदमा


नई दिल्ली। ई-कामर्स की दिग्गज कंपनी Amazon को देवी देवताओँ का अपमान करना भारी पड़ गया है। कंपनी के खिलाफ एक व्यक्ति में मुकदमा दर्ज कराया है। कंपनी पर एक विशेष धर्म के लोगों की भावनाओं का ठोस पहुंचाने का आरोप है।

यहां दर्ज हुआ केस

अमेजन के खिलाफ नोएडा के सेक्टर-58 कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है। विकास मिश्र नाम के शख्स की तहरीर पर कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। विकास मिश्र के मुताबिक अमेजॉन कंपनी अपनी साइट पर ऐसे सामानों की तस्वीर डालती है जिससे हिंदू लोगों की भावनाएं आहत होती हैं। उनके मुताबित इससे इससे देश में कभी भी धार्मिक तनाव पैदा हो सकता है।

सोशल मीडिया पर भी भड़के लोग

आपको बता दें कि कंपनी के इस मामले पर सोशल मीडिया पर भी लोगों ने अपना गुस्सा दिखाया है। इसे लेकर शुक्रवार रात तक करीब 24,000 से अधिक ट्वीट किए जा चुके थे। कुछ लोगों ने अपने ट्वीट में तो विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को भी टैग किया गया। इनमें बायकॉट अमेजन ट्विटर पर सबसे अधिक ट्रेंड कर रहा था। संपर्क करने पर अमेजन के प्रवक्ता ने कहा कि अमेजन के सभी विक्रेताओं को कंपनी के दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए। जो ऐसा नहीं करते हैं उन्हें कारवाई का सामना करना पड़ सकता है। उन विक्रेताओं को अमेजन के प्लेटफॉर्म से हटाया भी जा सकता है।

पहले भी हो चुका है अपमान

आपको बता दें कि इससे पहले भी कई बार इस तरह के प्रोडक्ट्स सामने आ चुके हैं कि जिसमें हिंदू देवी देवताओं की तस्वीरें लगी होती हैं। उनका काफी विरोध भी होता रहा है। जिसके बाद कंपनियों को उन प्रोडक्ट्स को हटाने की मजबूरी बन जाती है।

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फिल्मों में अरबों रुपए कमाने के बाद देश में 250 सिनेमाघर खोलने जा रहे हैं अजय देवगन, ये है पूरा प्लान


नई दिल्ली। मौजूदा समय में हर बॉलीवुड अदाकार अपने रुपए को निवेश करने में जुटा है। हाल ही में दीपिका पादुकोण ने एक कॉस्मैटिक कंपनी में निवेश किया है। अब नाम बॉलीवुड के सिंघम यानी अजय देवगन का नाम सामने आया है। अजय देवगन देश में करीब 250 NY का निर्माण करने करने की योजना बना रहे हैं। यहां बात New York की नहीं हो रही है। बल्कि अपनी बेटी न्यासा और बेटे युग के नामों के पहले अक्षर को लेकर मल्टीप्लेक्स खोलने जा रहे हैं। जिसमें 600 करोड़ रुपए का निवेश करेंगे। करीब पांच सालों के इस प्रोजेक्ट को देश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में करीब 250 स्क्रीन खोलने का प्लान बनाया जा रहा है। अजय देवगन के अनुसार NY वेंचर का पहला सिनेमाघर मध्यप्रदेश के रमलाम में खोला जाएगा।

इन लोगों को टारगेट
अभी अजय देवगन के द्वारा पूरे प्रोजेक्ट के बारे में खुलासा नहीं किया है, लेकिन इतना जरूर पता चला है कि NY सिनेमा उन लोगों को सबसे ज्यादा टारगेट करने के मूड में हैं जिनसे मल्टीप्लेक्स सिनेमा काफी दूर हैं। वहीं हृङ्घ मल्टीप्लेक्स बाजार में बाकी मल्टीप्लेक्स से थोड़ा अलग होगा। अजय देवगन यूपी के हापुड़ और गाजीपुर के दो सिंगल स्क्रीन थिएटर को पहले ही खरीद चुके हैं। NY सिनेमा के सीईओ राजीव शर्मा के अनुसार देश के दूसरे और तीसरे श्रेणी के शहरों में मल्टीप्लेक्स खोलने की योजना पर काम चल रहा है। अभी ऐसे कई शहरों में मल्टीप्लेक्स की काफी कमी है।

गुरुग्राम में खुलेगा 5 स्क्रीन मल्टीप्लेक्स
हाल ही में हृङ्घ सिनेमा ने एलन ग्रुप के साथ सौदा किया है। जिसके तहत गुरुग्राम के एक शॉपिंग मॉल में 5-स्क्रीन मल्टीप्लेक्स खोला जाएगा, जिसकी लागत 450 करोड़ रुपए होगी। यह हृङ्घ की नॉर्थ इंडिया में पहली डील है। आपको बता दें कि एलन ग्रुप गुरुग्राम में 7.5 लाख स्क्वायर फीट एरिया में 'एलन एपिन' नाम से एक लग्जरी रिटेल प्रॉजेक्ट तैयार कर रहा है। जिसका बजट करीब 450 करोड़ रुपए है। इसी प्रॉजेक्ट में 5 सिल्वर स्क्रीन मल्टीप्लेक्स भी होगा जिसका एरिया 46,000 स्क्वायर फीट है।

 

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भारतीय यूट्यूबर अजय नागर को मिली बड़ी सफलता, TIME की 'Next Generation Leaders 2019' की सूची में हुए शामिल


नई दिल्ली। ‘कैरीमिनाटी’ ( CarryMinati ) के नाम से मशहूर भारतीय यूट्यूबर अजय नागर ने टाइम मैगजीन की ‘नेक्सट जेनरेशन लीडर्स 2019’ ( Next Generation Leaders 2019 ) सूची में जगह बना ली है। टाइम मैगजीन की इस सूची में भारत से सिर्फ 10 लोगों को शामिल किया है, जिनमें से एक अजय नागर हैं। टाइम की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार 19 वर्षीय नागर के यूट्यूब चैनल के करीब 70 लाख सब्सक्राइबर हैं।


नागर के यूट्यूब पर हैं 70 लाख सब्सक्राइबर

टाइम ने कहा, 'भारत में यूट्यूब के बड़े प्रशंसक हैं। 26.5 करोड़ मासिक यूजर्स के साथ भारत ने 2018 में अमरीका को पीछे छोड़ दिया था। भारत में सबसे ज्यादा यूट्यूब देखने वाले हैं। अपनी ऊर्जावान प्रस्तुति और हिंदी शब्दों को बेहतरीन एवं अलग अंदाज में पेश करने के चलते नागर भारत में सबसे अधिक पसंद किए जाने वाले यूट्यूबर में से एक हैं।'


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नागर ने पहला वीडियो 10 साल की उम्र में डाला

अमरीकी प्रकाशन ने नागर पर कहा कि उन्होंने अपना पहला वीडियो 10 साल की उम्र में डाला था और 2016 में अपने ‘डिस्क ट्रैक’ (दूसरों पर निशाना साधते हुए रैप करना) के जरिए लोकप्रियता प्राप्त की। नागर को जनवरी में उस समय खासी लोकप्रियता मिली, जब उन्होंने ‘पीयूडीपाई’ के नाम से मशहूर स्वीडन के यूट्यूबर फेलिक्स कजेलबर्ग के खिलाफ अपना ‘डिस्क ट्रैक’ जारी किया। यह काफी वायरल हुआ था।


फिल्म का किया प्रचार

अपनी फिल्म ‘मिशन इम्पॉसिब फॉलआउट’ का प्रचार करने भारत की यात्रा पर गए टॉम क्रूज और हेनरी कैविल का साक्षात्कार भी नागर ने लिया था और उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता के लिए उन्हें अंग्रेजी में अपना कार्यक्रम पेश करने की जरूरत नहीं है।


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लोगों में बढ़ा लोकप्रियता

उनका मानना है कि उनकी लोकप्रियता उनकी जड़ों से जुड़े रहने की क्षमता में निहित है और उनमें पश्चिमी लोगों के लिए खुद में बदलाव लाने की कोई इच्छा नहीं रखते। नागर ने ‘टाइम’ से कहा, 'मैं यह संदेश देना चाहता हूं कि आप जो हैं बस वही रहें।' उन्होंने कहा कि अगर आप किसी और की तरह बनना चाहेंगे, तो लोग आपको नहीं अपनाएंगे।

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(ये न्यूज एजेंसी से ली गई है।)


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भारत में McDonald's के स्‍टोर बंद होने का ये है बड़ा कारण, लंबे समय से चल रहा था विवाद


नई दिल्ली। अमरीका की फूड कंपनी मैकडॉनल्ड्स ( McDonald's ) के बारे में हम सभी लोग जानते हैं और आज के समय में भारत में मैकडॉनल्ड्स के बर्गर का हर कोई दीवाना है। फिलहाल इस समय अमरीका की चर्चित फूड चेन मैकडॉनल्ड्स ( MacDonald ) और भारत में कंपनी के एमडी विक्रम बख्शी ( Vikram Bakshi ) के बीच के 10 साल पुराने विवाद की चर्चा एक बार फिर होने लगी है। इसी विवाद के चलते साल 2017 में भारत में मैकडॉनल्ड्स के कई स्टेर बंद हो गए थे।


मैकडॉनल्ड्स को भारत में उठाना पड़ा भारी नुकसान

भारत में स्टोर बंद होने के बाद मैकडॉनल्ड्स को काफी नुकसान भी उठाना पड़ा था, लेकिन अब मैकडॉनल्ड्स इंडिया और विक्रम बख्शी के बीच के विवाद का सेटलमेंट होने की खबरें सामने आ रही हैं। हालां‍कि, इस पर नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल ( nclat ) ने फिलहाल अभी रोक लगा दी है, लेकिन आज हम आपको बताते हैं कि विक्रम बख्शी के बीच विवाद की शुरुआत कैसे हुई। इसके बार में हम आपको विस्तार से बताते हैं-


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1995 में शुरू की थी कंपनी

आपको बता दें कि साल 1995 में विक्रम बख्शी और मैकडॉनल्ड्स ने 50-50 फीसदी की हिस्‍सेदारी के साथ एक ज्वाइंट वेंचर बनाया था और इस वेंचर से अपने बिजनेस की एक नई शुरुआत की थी। इस वेंचर का नाम कनॉट प्लाजा रेस्टोरेंट लि यानी CPRL रखा गया था, लेकिन दोनों लोगों के बीच यह समझौता लगभग 25 साल तक के लिए किया गया था। जब दोनों ने ज्‍वाइंट वेंचर में काम करना शुरू किया तो मैकडॉनल्ड के नाम से देश के उत्तरी और पूर्वी क्षेत्र में भी अपनी सेल को बढ़ाने के लिए विक्रम बख्शी को जिम्मेदारी दी गई थी, जिसके बाद भारत में मैकडॉनल्ड्स के कई जगह पर सेंटर खोले गए और जब भारते के लोगों ने इसको पसंद किया तो सभी जगहों पर इसके सेंटर को बढ़ावा दिया गया और आज के समय में भारत में मैकडॉनल्ड्स के बर्गर की दीवनगी बढ़ती ही जा रही है।


2013 में सामने आया था मामला

विक्रम बख्शी और मैकडॉनल्ड्स के बीच विवाद की शुरुआत पहली बार साल 2008 में हुई थी, जिसके बाद यह विवाद बढ़ता ही जा रहा था। जब यह विवाद शुरू हुआ था तब मैकडॉनल्ड्स ने CPRL में बख्शी की 50 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की कोशिश की थी, लेकिन उस दौरान यह मामला सामने नहीं आया। यह मामला दुनिया के सामने साल 2013 में आया था जब बख्‍शी के ऊपर मिसमैनेजमेंट का आरोप लगाया गया था और उशको CPRL के प्रबंध निदेशक के पद से हटा दिया गया था।


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मैकडॉनल्ड्स को होने लगा था नुकसान

विवाद ज्यादा बढ़ने के कारण सितंबर 2013 में बख्‍शी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ( NCLT ) की शरण में पहुंच गए थे, जिसके बाद NCLT ने बख्शी के पक्ष में फैसला सुना कर उनको पद पर बने रहने को कहा। जब मैकडॉनल्ड्स की बारी आई तो कंपनी ने बख्‍शी को पद पर बिठाने के फैसले को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में चुनौती दे दी और इसी बीच भारत में मैकडॉनल्ड्स के लिए भी कई मुसीबतें खड़ी हो गई औऱ भारत में मैकडॉनल्ड्स के स्टोर बंद होने लगे, जिससे मैकडॉनल्ड्स को काफी नुकसान उठाना पड़ा।

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बफेट ने अमेजन में 90.4 करोड़ डॉलर के दांव का किया खुलासा, फिर कही यह बात


नई दिल्ली। वारेन बफेट की कंपनी बर्कशायर हैथवे का ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन में 31 मार्च तक 90.4 करोड़ डॉलर का शेयर था। मीडिया रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है। सीएनबीसी की गुरुवार को एक रिपोर्ट के अनुसार अमरीकी सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन ने इस बात का खुलासा कि बर्कशायर ने अमेजन में मार्च के अंत तक 4 लाख 83 हजार 300 शेयर का दांव लगाया था।

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रिपोर्ट के अनुसार इस निवेश में अमेजन की आउटस्टेंडिंग इक्विटी महज 0.1 प्रतिशत ही रही। इसी महीने की शुरुआत में बफेट ने अमेजन में अपने नए निवेश के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था कि बर्कशायर प्रबंधन में से ही किसी ने अमेजन के शेयर में निवेश किया है मगर उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर निवेश की बात से इंकार किया।

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उन्होंने दफ्तर में ही एक सहयोगी द्वारा अमेजन में पैसा लगाने की बात कही थी। इससे पहले बफेट ने कई बार अमेजन कंपनी व इसके सीईओ जेफ बेजोस की तारीफ भी की थी।

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बफेट ने कहा, "मैंने जो देखा है और वह सच है कि जेफ बेजोस का काम किसी चमत्कार से कम नहीं है। मगर मेरे साथ एक दिक्कत यह है कि मुझे बेशक पता है कि कुछ चमत्कार जैसा होने वाला है, मगर वह इस पर शर्त नहीं लगा सकते।"

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गौरतलब है कि पिछले वर्ष ही बर्कशायर, अमेजन और जेपी मॉर्गन ने कर्मचारियों की स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बनाने के लिए संयुक्त उद्यम शुरू किया था। बर्कशायर हैथवे के एप्पल में भी अपने 25.0 करोड़ शेयर हैं।

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आईएलएंडएफएस केस में आया नया मोड़, स्वतंत्र निदेशक पर लगे लापरवाही के आरोप


नई दिल्ली। पिछले लंबे समय से चर्चा में बने हुए आईएलएंडएफएस संकट में एक बार फिर से नया मोड़ आ गया है। आईएलएंडएफएस ( Infrastructure Leasing & Financial Services Limited ) की कंपनियों के स्वतंत्र निदेशक कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की जांच के घेरे में आ गए हैं। अब इन सभी निदेशकों की जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कदम उठाया जाएगा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कई क्षेत्रों में कार्यरत इस समूह में वित्तीय समस्या पैदा होने के समय इन स्वतंत्र निदेशकों ने अपनी जिम्मेदारियों को ठीक तरीके से पूरा नहीं किया और उनके कामकाज में कमियां रही हैं।


ऑडिटर के द्वारा की जा रही जांच

आपको बता दें कि समूह की विभिन्न कंपनियों के स्वतंत्र निदेशक इस समय जांच के घेरे में फंसे हुए है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो कुछ बड़ी कंपनियों में बोर्ड में हैं। इस मामले के बारे में ऑडिटर, क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों और इन कंपनियों के कुछ पूर्व अधिकारियों की भूमिका की मंत्रालय द्वारा जांच की जा रही है। इसके साथ इस जांच में जो भी दोषी मिलता है उसके खिलाफ जुर्माना भी लगाया जा सकता है। कंपनियों में कामकाज के संचालन को बेहतर करने में स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।


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अक्टूबर, 2018 को सामने आया था कंपनी का संकट

मंत्रालय ने अक्टूबर, 2018 में जानकारी देते हुए बताया था कि आईएलएंडएफएस ( IL&FS )के बोर्ड को भंग किया जा रहा है और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय ( एसएफआईओ ) के मामले की जांच जा रही है। इससे पहले इसी महीने कॉरपोरेट मामलों के सचिव इंजेती श्रीनिवास ने कहा था कि आईएलएंडएफएस समूह के आडिटरों को काफी सवालों का जवाब देना होगा। प्रथम दृष्टया उन्हें ‘चौकीदार’ की भूमिका निभानी थी और व्यापक गड़बड़ियों को पकड़ना था। हालांकि, इसके साथ ही श्रीनिवास ने कहा कि अभी इस बारे में कोई नतीजा निकालना जल्दबाजी होगा।


कंपनी पर है 94 हजार करोड़ का कर्ज

आपको बत दें कि लंबे समय से वित्तीय बदहाली के दौर से गुजर रही आईएलएंडएफएस पर करीब 94,000 करोड़ रुपए का कर्ज है, जिसके कारण कंपनी पर संकट मंडरा रहा है और कंपनी के पास कर्ज चुकाने के लिए पैसा नहीं है। पिछले साल समूह में संकट सामने आया था। उस समय समूह की कई कंपनियों ने कर्ज भुगतान में चूक की थी।

 

क्या है आईएलएंडएफएस संकट

आईएलएंडएफएस समूह को इस समय भारी नकदी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी 27 अगस्त के बाद से अपने कर्ज के ब्याज का भुगतान नहीं कर पा रही है। कंपनी पर करोड़ों रुपए का कर्ज है। कंपनी को साल 2008 में तत्काल 300 करोड़ रुपए की जरूरत थी और वह 450 करोड़ रुपए राइट इश्यू की मदद से जुटाने की योजना बना रही थी। उस समय कंपनी को समय पर मदद न मिल पाने से कंपनी पर कर्ज का बोझ बढ़ता ही गया। इसके साथ ही कंपनी सिडबी के 1000 करोड़ रुपए के शॉर्ट टर्म लोन का भुगतान करने में विफल रही थी वहीं इसकी सहायक कंपनी भी 500 करोड़ रुपए के कर्ज का भुगतान करने से चूक गई।

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जेट एयरवेज संकट: पहले अधिकारियों ने दिया इस्तीफा, अब ऑफिस नीलाम करने जा रहा HDFC


नई दिल्ली। करीब एक माह पहले ही अस्थायी रूप से बंद हो चुकी विमान कंपनी जेट एयरवेज ( Jet Airways ) के लिए हर दिन परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। पिछले दिन ही कंपनी के डिप्टी CEO व CFO अमित अग्रवाल और कंपनी के CEO विनय दुबे ने निजी कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके ठीक एक दिन बाद यानी आज जेट एयरवेज को एक और बड़ा झटका लगने वाला है। 15 मई को जेट एयरवेज के मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) स्थित ऑफिस की नीलामी होने वाली है। इस ऑफिस को पैसों की किल्लत की वजह से नीलाम किया जा रहा है। इसकी नीलामी HDFC लिमिटेड करने जा रहा है।

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जेट एयरवेज पर एचडीएफसी का 414 करोड़ रुपए बकाया

आपको बता दें कि जेट एयरवेज ने एचडीएफसी की इसी ऑफिस को गिरवी रखकर कुछ कर्ज लिया था। जेट एयरवेज की इस ऑफिस की नीलामी के एचडीएफसी ने बीते दिनों एक पब्लिक नोटिस भी जारी किया था। यह ऑफेसी बीकेसी नाम की बिल्डिंग में चौथी मंजिल पर स्थित है। इस ऑफिस का कार्पेट एरिया 52,775 वर्ग फीट का हैं। जेट एयरवेज पर एचडीएफसी का कुल 414 करोड़ रुपए बकाया है। एचडीएफसी इसी कर्ज को वसूलने के लिए जेट एयरवेज की ऑफिस को नीलाम करने जा रही है, जिसके लिए उसने 245 करोड़ रुपए रिजर्व प्राइस के तौर पर रखा है।

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अधिकतर वरिष्ठ अधिकारी अपने पद से दे चुके हैं इस्तीफा

जेट एयरवेज पर फिलहाल 8 हजार करोड़ रुपए कर्ज है और पिछले माह ही 17 अप्रैल को कंपनी का परिचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। परिचालन बंद होने के एक माह के अंदर कंपनी की कई वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसी सिलसिले में बीते दिन डिप्टी सीईओ व सीएफओ अमित अग्रवाल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। मंगलवार को जेट एयरवेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय दुबे ने निजी कारणों को हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया है। कंपनी ने इस संबंध में स्टॉक फाइलिंग के दौरान जानकारी दी है।

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जेट एयरवेज को उबारने के लिए हिंदुजा ग्रुप की शरण में पहुंचे बैंक और एतिहाद


नई दिल्ली। जेट एयरवेज को खड़ा करने और अपना रुपया निकालने के लिए बैंक सब तरीके अपना रहे हैं। वहीं जेट एयरवेज में बड़े शेयरधारक एतिहाद एयरवेज भी अपनी ओर कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। अब बैंक और एतिहाद दोनों हिंदुजा ग्रुप की शरण में पहुंचे हैं। दोनों चाहते हैं कि हिंदुजा ग्रुप जेट एयरवेज को एक फिर से खड़ा करने में मदद के तौर जेट एयरवेज के स्टेक खरीदे। वैसे ग्रुप के मालिकों ने कोई वादा नहीं किया है। लेकिन ग्रुप ने इस बारे में थोड़ा सोचने पर मजबूर जरूर हुए हैं।

हिंदुजा ब्रदर्स से की मुलाकात
एतिहाद और बैंक के अधिकारियों ने सबसे पहले हिंदुजा ब्रदर्स के सबसे बड़े भाई जीपी हिंदुजर से मुलाकात की। जिसके बाद उन्होंने उन्हें छोटे भाई अशोक हिंदुजा के पास भेज दिया। भारत के सभी कारोबार की कमान अशोक हिंदुजा के पास ही है। पूरे मामले की जानकारी रखने वालों की मानें तो अभी ग्रुप की ओर से कोई आश्वासन नहीं दिया है, लेकिन उन्होंने इस बारे में सोचना जरूर शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में ग्रुप के अधिकारियों और कर्ज देने वाले बैंकोंके बीच मीटिंग हो सकती है। अभी तक टाइम और डेट फिक्स नहीं है।

आखिर हिंदुजा ग्रुप क्यों
अब सवाल ये है कि आखिर बैंक और एतिहाद आखिर हिंदुजा ग्रुप की ओर क्यों जा रहे हैं। इसके कई कारण हैं। पहला यह है कि हिंदुजा ग्रुप के पास पर्याप्त मात्रा में कैपिटल है, जिससे जेट एयरवेज के रिवाइवल प्लान को सक्सेस किया जा सकता है। द संडे टाइम्स रिच लिस्ट 2019 के अनुसार, हिंदुजा ब्रदर्स श्री और जीपी ने हाल में 22 अरब पौंड की वेल्थ के साथ ब्रिटेन के सबसे अमीर शख्स का दर्जा दोबारा हासिल किया था। ऐसे में ग्रुप जेट को दोबारा खड़े करने के लिए जरुरत रकम 15 हजार करोड़ रुपए जुटाने में सक्षम हैं। वहीं ग्रुप के दुनिया में 10 कारोबार हैं। ऑटोमोटिव, ऑयल एंड स्पेशियलिटी केमिकल्स, मीडिया, आईटी, पावर, हेल्थकेयर और रियल एस्टेट प्रमुख हैं।

एयर इंडिया में भी दिखा चुके हैं दिलचस्पी
एतिहाद और बैंकों ने इसलिए भी हिंदुजा ग्रुप को संपर्क किया है क्योंकि ग्रुप करीब 18 साल पहले एयर इंडिया में दिलचस्पी दिखा चुका है। साल 2001 में एयर इंडिया के लिए टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस के अलावा हिंदुजा ग्रुप ने भी बोली लगाई थी। उस समय एयर इंडिया की 40 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही थी। हिंदुजा ग्रुप ने इंडियन एयरलाइंस में 26 फीसदी की हिस्सेदारी के लुफ्थांजा के साथ साझेदारी की थी। लेकिन उस समय ग्रुप को कामयाबी हासिल नहीं हो सकी थी।


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वीडियोकाॅन कर्ज मामले में ईडी ने की कोचर दंपति से 8 घंटे तक पूछताछ


नई दिल्ली। आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर 1,875 करोड़ रुपए के वीडियोकॉन ऋण मामले की जांच के संबंध में मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय ( ईडी ) के समक्ष पूछताछ के लिए पेश हुए, और एजेंसी ने उनसे आठ घंटे तक पूछताछ की।

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कोचर दंपत्ति मंगलवार सुबह खान मार्केट इलाके में स्थित ईडी मुख्यालय पहुंचे, और उनसे शाम सात बजे तक पूछताछ की गई। उनसे कुछ दस्तावेज लाने को कहा गया है। एजेंसी के अधिकारियों ने कोचर दंपत्ति से वीडियोकॉन समूह के प्रमोटर और चेयरमैन वेणुगोपाल धूत से उनके सौदे तथा उनके बीच हुए आर्थिक लेन-देन के बारे में पूछताछ की।

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यह मामला 2009 और 2011 के दौरान आईसीआईसीआई बैंक द्वारा वीडियोकॉन समूह को 1,875 करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी देने में कथित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्ट आचार से संबंधित है। ईडी को अवैध लेन-देन से संबंधित सबूत मिले थे, जिसमें दीपक कोचर की कंपनी न्यूपॉवर को करोड़ों रुपये दिए गए थे।

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कोचर दंपति से पिछले महीने मुंबई में कई बार पूछताछ हुई थी। दिल्ली में कोचर दंपति पहली बार ईडी के समक्ष पेश हुए। ईडी ने मार्च में अपनी जांच के तहत कोचर दंपत्ति के आवास तथा कार्यालय परिसरों की सिलसिलेवार तलाशी ली थी और चंदा तथा उनके पति दीपक कोचर के साथ-साथ धूत से पूछताछ भी की थी।

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धूत ने कथित रूप से दीपक की कंपनी 'न्यूपॉवर रीन्यूवेबल्स लिमिटेड' में अपनी कंपनी 'सुप्रीम इनर्जी' के माध्यम से निवेश किया था, जिसके बदले में चंदा कोचर आईसीआईसीआई बैंक से ऋण को मंजूरी दिला दें।

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वीडियोकॉन समूह को दिए गए कुल 40,000 करोड़ रुपये के ऋण में से 3,250 करोड़ रुपये का ऋण आईसीआईसीआई बैंक द्वारा दिया गया था और आईसीआईसीआई के ऋण का बड़ा हिस्सा 2017 के अंत तक बकाया था। बैंक ने बकाया ऋण के 2,810 करोड़ रुपये को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित कर दिया था।

 

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जेट एयरवेज संकट: कंपनी के CEO विनय दुबे ने भी अपने पद से दिया इस्तीफा, व्यक्तिगत कारणों को बताया वजह


 

नई दिल्ली। बंद होने के बाद भी जेट एयरवेज ( Jet Airways ) के लिए परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले डिप्टी CEO व CFO के इस्तीफे के बाद अब जेट एयरवेज के सीईओ विनय दुबे ( vinay dubey ) ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मंगलवार को जेट एयरेवज ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में इस बाबत जानकारी दी है। विनय दुबे ने अचानक अपने इस इस्तीफ की वजह व्यक्तिगत कारणों को बताया है। बता दें कि गत 17 अप्रैल को अस्थायी रूप से बंद होने के बाद जेट एयरवेज के अधिकतर बोर्ड मेंबर्स इस्तीफा दे चुके हैं।

अमित अग्रवाल ने दिया इस्तीफा

अमित अग्रवाल ने इस्तीफा देते समय कहा कि मैं सूचित करना चाहता हूं कि मैं व्यक्तिगत कारणों से अपनी सेवाओं से त्यागपत्र दे रहा हूं। कंपनी के हालात के कारण मैं इस्तीफा नहीं दे रहा हूं। इसके साथ ही आपको बता दें कि अभी तक जेट को बचाने के लिए कोई भी कंपनी आगे नहीं आई है, जेट के कर्मचारियों काफी परेशानियों से गुजर रहे हैं। हालांकि जेट के ही अंतरराष्ट्रीय सहयोगी एतिहाद ने हिस्सेदारी खरीदने की इच्छा जताई है, लेकिन अभी तक इसके लिए कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है।


जेट एयरवेज के शेयरों में गिरावट

इसके पहले बीएसई पर शेयर मंगलवार को 12.44 फीसदी गिरकर 122.10 रुपए के स्तर पर आ गया। एनएसई पर जेट एयरवेज के शेयर्स 13 फीसदी लुढ़ककर 121 रुपए तक फिसल गया। हालांकि निचले स्तरों से कुछ रिकवरी हो गई। आर्थिक संकट में फंसी जेट एयरवेज ने 17 अप्रैल को अस्थाई रूप से बंद कर दिया था। एयरलाइन की 75 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए इसके कर्जदाता बैंकों ने बोलियां मांगी थीं। अंतिम बोली सिर्फ एतिहाद ने जमा की। लेकिन वह भी बड़ी हिस्सेदारी नहीं लेना चाहती है। उसके पास जेट के 24त्न शेयर पहले से हैं।

 


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996 के बाद चीन के सबसे अमीर आदमी जैक मा ने दिया 669 कॉन्सेप्ट, कहा- निजी जिंदगी में फॉलो करें ये कॉन्सेप्ट


नई दिल्ली। चीन के सबसे अमीर शख्स और अलीबाबा समूह के संस्थापक जैक मा का इस ससय काफी चर्चाओं में बने हुए हैं। इस वक्त उनका सोशल मीडिया पर भी काफी विरोध हो रहा है। दरअसल, जैक मा ने अपने कर्मचारियों को एक बार फिर से अजीब सलाह दी है। पिछले दिनों उन्होंने लोगों को 996 का कॉन्सेप्ट अपनाने की सलाह दी थी। वहीं, इस बार जैक मा 669 का नया कॉन्सेप्ट लेकर आए हैं। 669 का मतलब छह दिन में छह बार सेक्स करना है।


डेली मेल से मिली जानकारी

आपको बता दें कि डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक अपने कर्मचारियों के सामूहिक विवाह कार्यक्रम में जैक मा ने कहा कि काम के मामले में हें 996 की भावना लानी चाहिए। वहीं जीवन में 669 का सिद्धांत लागू करना चाहिए। यहां 669 के सिद्धांत से जैक मा का तात्पर्य है 6 दिन में 6 बार सेक्स करने से है।


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10 मई को दी थी सलाह

चीन के हंगजाओ स्थित अली बाबा के हेडक्वॉर्टर में हर साल 10 मई को अली डे मनाया जाता है। इस दिन कंपनी के कर्मचारियों का सामूहिक विवाह होता है। इसी मौके पर 54 वर्षीय जैक मा ने अपने कर्मचारियों को ये सलाह दी है। कुछ समय पहले 996 के सिद्धांत पर चलने की सलाह देने को लेकर भी जैक मा की काफी आलोचना हुई थी। 996 के तहत जैक मा का कहना था कि उनके कर्मचारी हफ्ते के छह दिन रोजाना 12 घंटे ( सुबह 9 से रात 9 बजे तक) काम करें।


सोशल मीडिया पर हो रहा वायरल

गौरतलब है कि 54 साल के जैक मा हर साल अपनी कंपनी के कर्मचारियों के लिए सामूहिक विवाह का आयोजन करते हैं। यह कार्यक्रम 10 मई को होता है। बता दें कि टेक इंडस्ट्री में जैक मा के 996 वाले कॉन्सेप्ट की काफी आलोचना हुई थी। वहीं उनके 669 वाली बात से भी सोशल मीडिया पर बवाल मचा हुआ है।


एक यूजर ने ली चुटकी

एक यूजर ने चुटकी लेते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, 'दुनिया में 669 करने के बाद किसके पास 996 करने की एनर्जी बचेगी।' वाइबो पर अलीबाबा के ऑफिशल पेज पर 669 को एक इमोजी के साथ पोस्ट किया गया।

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(ये न्यूज एजेंसी से ली गई है। )


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जेट एयरवेज की बढ़ती जा रही मुश्किलें, कंपनी के फाइनेंशियल ऑफिसर अमित अग्रवाल ने दिया इस्तीफा


नई दिल्ली। वित्तीय संकट से जूझ रही जेट एयरवेज की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अस्थाई रूप से बंद होने के बाद अब जेट एयरवेज के डिप्टी चीफ एग्जिक्यूटिव और चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर अमित अग्रवाल ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बता दें कि अप्रैल से ही जेट एयरवेज ने अपना संचालन बंद कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों को भी पिछले कई महीनों से वेतन नहीं दिया गया है, जिसके कारण भारी संख्या में कर्मचारियों ने अपनी नौकरी गंवा दी है।


अमित अग्रवाल ने दिया इस्तीफा

अमित अग्रवाल ने इस्तीफा देते समय कहा कि मैं सूचित करना चाहता हूं कि मैं व्यक्तिगत कारणों से अपनी सेवाओं से त्यागपत्र दे रहा हूं। कंपनी के हालात के कारण मैं इस्तीफा नहीं दे रहा हूं। इसके साथ ही आपको बता दें कि अभी तक जेट को बचाने के लिए कोई भी कंपनी आगे नहीं आई है, जेट के कर्मचारियों काफी परेशानियों से गुजर रहे हैं। हालांकि जेट के ही अंतरराष्ट्रीय सहयोगी एतिहाद ने हिस्सेदारी खरीदने की इच्छा जताई है, लेकिन अभी तक इसके लिए कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है।


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बैंकों ने भी खड़े किए हाथ

जेट जिस तरह की परेशानियों का सामना कर रही है। उसके लिए कंपनी को कम से कम 15,000 करोड़ के निवेश की जरूरत है। फिलहाल इस समय जेट एयरवेज की मदद करने के लिए कोई भी तैयार नहीं है। कंपनी को किसी बैंक की भी मदद नहीं मिल रही है। जेट एयरवेज को बैंकों ने भी मदद देने से हाथ खड़े कर दिए थे। इस समय जेट एयरवेज पर कुल 8,500 करोड़ का कर्ज है।

 

नरेश गोयल के करीबी हैं अमित अग्रवाल

आपको बता दें कि दिसंबर 2015 में अमित अग्रवाल जेट एयरवेज के साथ जुड़े थे। अमित अग्रवाल को जेट के संस्थापक नरेश अग्रवाल का करीबी माना जाता रहा है। इससे पहले अमित सुजलोन एनर्जी में चीफ फाइनेंशल ऑफिसर थे। इतना ही नहीं, वह अर्सेलर मित्तल और एस्सार स्टील जैसी कंपनियों से भी जुड़े रह चुके हैं।


एतिहाद कर सकती है निवेश

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लोगों का मानना है कि एतिहाद जेट में 1700 करोड़ रुपए का निवेश कर सकती है। एतिहाद ने जेट की उधारी चुकाने के बारे में कोई वादा नहीं किया है, लेकिन खबरें आ रही हैं कि जेट को बचाने के लिए एतिहाद आगे आ सकती है।

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4.90 लाख करोड़ के मालिक हैं सोशल मीडिया के किंग मार्क जकरबर्ग, 16 की उम्र में बनाया था म्यूजिक ऐप


नई दिल्ली। फेसबुक सीईओ मार्क जकरबर्ग ( Mark Zuckerberg ) का आज यानी 14 मई को जन्मदिन है। इस बार वह अपना 35वां जन्मदिन मना रहे हैं। 12 साल की उम्र से एक्सपेरिमेंट करने वाले जकरबर्ग ने साल 2004 में फेसबुक की शुरुआत की थी। जब उन्होंने फेसबुक की शुरूआत की थी उस समय वह मात्र 20 साल के थे। आपको बता दें फेसबुक बनाने से पहले जकरबर्ग 16 साल की उम्र में हाईस्कूल के प्रोजेक्ट के तौर पर म्यूजिक ऐप भी बना चुके हैं। उनको बचपन से ही नए-नए एक्सपेरिमेंट करने का शौक था। जब उन्होंने वह म्यूजिक ऐप बनाया था तब ही उनके पास नौकरी के ऑफर आने शुरू हो गए थे, लेकिन उन्होंने उऩ सभी को ठुकरा दिया है। आज हम आपको मार्क जकरबर्ग की नेटवर्थ के बारे में बताते हैं कि यह कितने करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं-


4.9 लाख करोड़ के मालिक हैं जकरबर्ग

आपको बता दें कि मार्क जकरबर्ग दो-चार करोड़ के नहीं बल्कि 4.9 लाख करोड़ के मालिक हैं। इस समय वह दुनिया के 8वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं। मार्क को बचपन से ही जुनून था और उनको हमेशा से ही कंप्यूटर में रूचि थी। उनका लगाव प्रोग्रामिंग डेलवपमेंट तब और बढ़ा जब उनके पिता ने उन्हें C++ नाम की एक किताब तोहफे में दी। इसके बाद जकरबर्ग ने एक ऐसा बेसिक मैसेजिंग प्रोग्राम जकनेट बनाया था जिसका इस्‍तेमाल उनके पिता अपने डेंटल ऑफिस में करते थे।


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ऐसे हुई थी फेसबुक की शुरुआत

आपको बता दे कि 14 मई 1984 में जकरबर्ग ने अपने तीन दोस्तों डस्टिन मोस्कोविट्ज, क्रिस ह्यूज और एडुआर्डो सेवेरिन के साथ मिलकर के फेसबुक की शुरुआत की थी। जब इसकी शुरुआत हुई थी तो इसका नाम ‘द फेसबुक’ रखा गया था। इसे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए 4 फरवरी 2004 को लॉन्च किया गया और उश समय इसका नाम बदलकर फेसबुक कर दिया गया था। इसके बाद जकरबर्ग ने कॉलेज छोड़ दिया और अपना पूरा समय फेसबुक को देने लगे। फेसबुक की कामयाबी का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि 2004 के आखिर तक तरह फेसबुक के 1 मिलियन यूजर्स हो गए।


जकरबर्ग ने ठुकराया माइक्रोसॉफ्ट का ऑफर

जकरबर्ग का मानना है कि सफलता की एक ही गारंटी हैं लाइफ में रिस्क लेना चाहिए। रिस्क के बाद ही हमको सफलता मिल सकती है। मार्क ने कभी भी नौकरी का लालच नहीं किया। 17 साल की उम्र में मार्क ने दोस्तों के साथ मिलकर सिनेप्स मीडिया प्लेयर बनाया जो यूजर की पसंद के गानों को स्टोर कर लेता था। जब जकरबर्ग ने म्यूजिक सिस्टम बनाया था तो उस वक्त माइक्रोसॉफ्ट और एओएल जैसी बड़ी कंपनियों ने उन्हें इसके बदले 10 लाख डॉलर ऑफर किए थे। दोनों ही कंपनियां उन्हें हायर भी करना चाहती थी, लेकिन जकरबर्ग ने नौकरी की जगह हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई को तरजीह दी। हाईस्कूल के दौरान ही उन्होंने कई कंपनियों के जॉब ऑफर ठुकराए थे। आज वे 38 लाख करोड़ रुपए के मार्केट कैप वाली फेसबुक के सीईओ और चेयरमैन हैं।

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दो हजार निजी कंपनियों को लग सकता है ILFS में निवेश से झटका


नई दिल्ली। इनफ्रस्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज ( आईएलएफएस ) और उसकी सहायक कंपनियों के बांडों में निवेश का खमियाजा म्यूचुअल फंड ( Mutual Fund ) और बीमा कंपनियों के बाद अब निजी क्षेत्र की करीब 2,000 कंपनियों को उठाना पड़ सकता है। इनमें इन्फोसिस, टाटा पावर, ल्यूपिन जैसी दिग्गज कंपनियां शुमार हैं।

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इन कंपनियों नेअपने निजी भविष्य निधि और पेंशन फंड का निवेश आइएलएंडएफएस समूह की फर्मों के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचरों में किया है। इसपर उन्हें करीब 9,000 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इतना ही नहीं कर्मचारी भविष्य निधि योजना ( इपीएफएस ) 1952 के दिशा-निर्देशों के अनुसार इन कंपनियों को इस घाटे का वहन करना होगा।

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वित्त मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ( ईपीएफओ ) से भी आइएलएंडएफएस तथा इस तरह की जोखिम वाली फर्मों में निवेश की जानकारी मांगी है क्योंकि इसकी वजह से इस साल के लिए घोषित ब्याज दर का भुगतान करने में ईपीएफओ को मुश्किल हो सकती है। आइएलएंडएफएस, आइफिन और आइटीएनएल 'रेड' श्रेणी में हैं, जिसका मतलब है कि इन कंपनियों के पास नकदी नहीं है।

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रमजान के मौके पर टाटा ने किया ये काम, यकीन न हो तो इस वीडियो को देखिए.. रो पड़ेंगे आप


नई दिल्ली। रमजान का पावन महीना चल रहा है। ये पूरा महीना दुनिया के मुस्लिम वर्ग के लिए बेहद खास होता है। निवाला तो दूर पानी की एक बूंद तक भी नहीं पीने वाले लाखों करोड़ों मुस्लिम बड़ी ही शिद्दत है इसे पूरे महीने निभाते हैं। ये तो हुई बात रमजान की अब बात करते हैं देश के उस दिग्गज कारोबारी रतन टाटा की जो हमेशा कुछ नया करने के लिए जाने जाते हैं। रमजान के इस मौके पर भी टाटा ग्रुप की कंपनी ने एक ऐसा वीडियो बनाया है जिसे देखकर रहीम अंकल के साथ-साथ आप भी रो पड़ेंगे।

ये है टाटा का नया वीडियों

टाटा मोटर्स की तरफ से बनाए गए करीब 3 मिनट के इस वीडियो में रमजान को दिखाते हुए कुछ स्कूली बच्चों को दिखाया गया है। बैक ग्राउंड मे कतरा कतरा म्यूजिक वाले इस वीडियों में दिखाया गया हैं कि स्कुल के कुछ बच्चों ने अपने माता पिता के कामो मे मदद करते हैं। जैसे अपनी मा का थैला पकडना, जिससे खुश होकर उनके मा बाप उन्हे पैसे देते है। बच्चे अपने माता-पिता से मिले इस पैसे को गुल्लक में डालते है फिर अपने गुल्लक को सभी ब्च्चे जमा करते है और स्कूल गाडी चलाने वाले रहीम अकल को दे देते हैं।

वीडियो का अंतिम हिस्सा देख रो पड़ेंगे आप

टाटा मोटर्स की ओर से बनाए गए इस वीडियों एड का अंतिम हिस्सा इतना मार्मिक है जिसे देखकर आप भी रो पड़ेंगे। नेकी करने को प्रेरित करता यह वीडियों हर उस इंसान को देखना चाहिए जो धर्म-जाति से उपर उठकर नहीं सोच पाते। इसके अंतिम हिस्से में जब रहीम अंकल बच्चों के बैग को खोलते हैं तो उसे देखकर रो पड़ते हैं। आप भी देखिए कैसे बच्चों ने अपना कतरा-कतरा बचाकर किसी का भला किया है।


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ITC ने नियुक्त किए नए चेयरमैन, अब से संजीव पुरी संभालेंगे वाई सी देवेश्वर का कार्यभार


नई दिल्ली। 11 मई को आईटीसी ( ITC ) कंपनी के चेयरमैन और सीईओ रहे वाई सी देवेश्वर का निधन होने के बाद कंपनी ने आज अपने नए सीईओ के नाम का खुलासा कर दिया है। विविध क्षेत्रों में कारोबार करने वाली कंपनी आईटीसी ( ITC ) ने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव पुरी को उनकी वर्तमान जिम्मेदारी के साथ चेयरमैन नियुक्त किया है। कंपनी ने सोमवार को बताया कि पुरी चेयरमैन और सीएमडी होंगे।

संजीव पुरी होंगे ITC के चेयरमैन

पुरी का प्रमोशन पूर्व चेयरमैन वाई.सी.देवेश्वर के निधन के बाद हुआ है। देवेश्वर का शनिवार की सुबह निधन हो गया है। कंपनी ने नियामक को बताया कि कंपनी के निदेशक मंडल की सोमवार को हुई बैठक में प्रबंध निदेशक संजीव पुरी को चेयरमैन का दायित्व भी देने का निर्णय किया गया है। यह नियुक्ति 13 मई (सोमवार) 2019 से ही प्रभावी है। अब पुरी का नया पद चेयरमैन और सीएमडी होगा।

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कई क्षेत्रों में है ITC का योगदान

आपको बता दें कि देवेश्वर (72) को सिगरेट बनाने वाली कंपनी आईटीसी को एफएमसीजी, हॉस्पिटलिटी, आईटी समेत विभिन्न क्षेत्रों की अग्रणी कंपनी बनाने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने 2017 में कंपनी के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद छोड़ा था। हालांकि, वह अभी भी गैर-कार्यकारी चेयरमैन बने हुए थे। कंपनी ने नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे बढ़ाने के लिए 2017 में चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद अलग कर दिया था।

पहले से चल रही थी योजना

56 साल के पुरी को देवेश्वर मैनेजिंग डायरेक्टर के साथ चेयरमैन पद के लिए तैयार कर रहे थे। पहले की योजना के मुताबिक उन्हें मैनेजिंग डायरेक्टर के साथ चेयरमैन का पद 2021-22 में मिलना था। पुरी को 2017 में आईटीसी का सीईओ और इसके एक साल बाद मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया था। वहीं, 2017 में देवेश्वर को आईटीसी का नॉन-एग्जिक्यूटिव चेयरमैन अप्वाइंट किया गया था।

( ये न्यूज एजेंसी से ली गई है। )

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