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पुलिस ने ट्रक को रोका तो मिला कुछ ऐसा कि रह गई दंग



वापी. एलसीबी ने पारडी विस्तार से पेट्रोङ्क्षलग के दौरान एक ट्रक से 16 लाख रुपए से ज्यादा की शराब बरामद की है। एलसीबी की ओर से बताया गया है कि पुलिस निरीक्षक एन के कामलिया और उप निरीक्षक जेएन गोस्वामी क्षेत्र में पेट्रोलिंग पर निकले थे। इस दौरान पुलिस को एक ट्रक से भारी मात्रा में शराब ले जाने की सूचना मिली थी। कुछ देर बाद पारडी हाइवे से एमएच 04 एफजे 0661 नंबर ट्रक वहां से निकला। एलसीबी ने रोकना चाहा तो चालक ने कुछ दूरी पर ट्रक रोक दिया और क्लीनर समेत उतरकर फरार हो गया। ट्रक की जांच करने पर अंदर से 312 बॉक्स में शराब की 3744 बोतल बरामद हुई। इसकी कीमत 16 लाख, 86 हजार छह सौ रुपए है। दस लाख की ट्रक और शराब को एलसीबी ने पारड़ी पुलिस को सौंप दिया है। मामले की जांच पारड़ी पुलिस कर रही है।

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भिलाड़ में शराब के साथ दो गिरफ्तार
इधर, भिलाड़ पुलिस ने कार की सीएनजी टंकी में शराब ले जा रहे दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बताया गया है कि पुलिस ने वाहनो की जांच के दौरान शंका के आधार पर एक कार को रोककर तलाशी लेकर डेढ़ लाख की शराब बरामद की। पुलिस के अनुसार बूटलेगरों ने सीएनजी टंकी में शराब छुपाने के लिए चोरखाना बनाया था। जांच के दौरान उसमें से 144 बोतल शराब बरामद कर बुटलेगर अनीश तथा ईश्वर को गिरफ्तार कर लिया है।

फरार घूसखोर आयकर अधिकारी ने किया सरेंडर
वलसाड. ब्याज पर रुपए देने का धंधा करने वाले शख्स से 1.55 लाख रुपए की रिश्वत लेने के बाद पकड़े जाने के डर से पुलिस कर्मी को कार से टक्कर मार कर फरार आयकर अधिकारी रविन्द्र बाकड़े ने 12 दिन बाद कोर्ट में सरेन्डर कर दिया। जहां से कोर्ट ने उसे एसीबी को सुपुर्द कर दिया।

पकड़े जाने से पुलिसकर्मी को टक्कर मारी थी
वापी में तैनात आयकर अधिकारी रविन्द्र बाकड़े ने ब्याज का धंधा करने वाले महावीर परमार को वर्ष 2011-12 के दौरान अकाउन्ट में 12 लाख रुपए के लेनदेन मामले में नोटिस दिया था। बाद में उसने महावीर से पूरे मामले को निपटाने के लिए तीन लाख की घूस मांगी थी। अंत में मामला 1.55 लाख पर तय हुआ, लेकिन बाद में इसकी शिकायत सूरत एसीबी में कर दी गई। इसके बाद एसीबी की टीम ने ट्रेप लगाया और चला में प्रमुख ग्रीन सोसायटी के पास फरियादी ने आयकर अधिकारी को 1.55 लाख रुपए भी दिए। लेकिन एसीबी के पकडऩे से पहले ही भनक लगने से रविन्द्र अपनी कार से वहंा से भागने लगा। उसे रोकने गए एसीबी टीम के पुलिसकर्मी को टक्कर मारकर वह फरार हो गया था। इस संबंध में टाउन थाने में उसके खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ था। इस घटना के बाद से फरार चल रहे रविन्द्र ने 12 दिन बाद वलसाड कोर्ट में सरेन्डर कर न्यायिक हिरासत में भेजने का अनुरोध किया था। कोर्ट ने उसे नामंजूर करते हुए एसीबी की कस्टडी में सौंप दिया। एसीबी आगे की जांच में जुटी है।


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कर्ज के बोझ में डूबी JP Associates के हाथ बड़ी सफलता, जम्मू-कश्मीर में मिला 2850 कराेड़ रुपये का प्रोजेक्ट


नर्इ दिल्ली। दिवालिया होने की कगार पर खड़ी जय्रप्रकाश ग्रुप की कंपनी जेपी एसोसिएट्स लिमिटेड को जम्मू-कश्मीर में एक बड़ी सफलता मिली है। जेपी ने चेनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स 2850 करोड़ रुपये की डील हासिक कर ली है। इस डील के तहत जेपी एसोसिएट्स जम्मू-कश्मीर में डाइवर्जन टनल आैर हाइड्रो इलेक्ट्रीसिटी के लिए कंक्रीट फेस डैम का निर्माण करेगी। इसे प्रोजेक्ट से करीब 1000 मेगावाॅट बिजली उत्पादन करने की योजना है।


कंपनी के बिजनेस में हुअा बड़ा इजाफा

इस कंट्रैक्ट के तहत जेपी एसोसिएट पकल डूल हाइड्रोइलेकट्रीसिटी प्रोजेक्ट के लिए डाइवर्जन टनल, कंक्रीट फेस राॅकफिल डैम, सर्फेस व टनल स्पिलवे, इनटेक इंफ्रास्ट्रक्चर, हेड रेस टनल का निर्माण करेगी। इस डील के साथ ही जेपी एसोसिएट का ने र्इपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट आैर कंस्ट्रक्शन) द्वारा बुक किए गए बिजनेस 14000 करोड़ रुपये हो गया है। जो कि एक साल पहले 5500 करोड़ रुपये का ही था। आपको बता दें कि चेनाब वैली प्रोजेक्ट NHPC लिमिटेड, JKSDPC लिमिटेड अौर PTC इंडिया लिमिटेड की ज्वाइंट वेंचर कंपनी है।


जम्मू-कश्मीर को 12 फीसदी की रियायत पर मिलेगी बिजली

मर्इ माह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पकल डूल हाइड्रोइलेक्ट्रिसीटी की नींव रखी थी। प्रस्तावित पावर प्रोजेक्ट मरूसादर नदी, चेनाब नदी की ट्रीब्यूटरी नदी पर बनेगी। इस प्रोजेक्टा को 66 माह में पूरा किया जाएगा जो कि जम्मू कश्मीर को 12 फीसदी रियायत पर बिजली देगा। इससे पहले भी जेपी एसोसिएट ने राज्य में सलाल, दुलहस्टी आैर बालीगढ़ हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन में भागीदार रही है। कर्ज के बोझ में डूबी कंपनी अपने एसेट्स बेचने के अलावा नकदी प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए र्इपीसी व्यापार पर ज्यादा फोकस कर रही है।


कर्ज कम करने की जुगत में लगी है कंपनी

पिछले कुछ दिनों में कंपनी अपने सीमेंट आैर पावर के कर्इ प्राॅपर्टी को बेच चुकी है। इससे चार साल पहले कंपनी पर जो कर्ज का बोझ 61,101 करोड़ रुपये था वो अब कम होकर 26,401 करोड़ रुपये हो गया है। यही नहीं कंपनी अपने कर्ज को आैर कम करने के लिए बचे हुए सीमेंट बिजनेस को बेचने का भी प्लान बना रही है। अापको बता दें कि समय पर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट पूरा न करने के बाद कंपनी पर मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।


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मौजूदा अवसर का लाभ उठा कर सस्‍ते में प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं बायर्स


वर्तमान सुस्ती से कई सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं जिनमें रियल एस्टेट भी शामिल है। रियल एस्टेट सेक्टर की मौजूदा स्थिति निवेशकों और घर खरीदारों को एक उपयुक्त अवसर उपलब्ध करा रही है। अगर, खरीदार के पास आवश्यक सूचनाएं हों और वह एक नीति के तहत काम करें तो वह सबसे बेस्‍ट डील प्राप्‍त कर सकता है। आज मैं आपको कुछ ऐसी जानकारियों के बारे में बाता रहा हूं जो आपको इस अवसर का अधिकतम लाभ लेने में मदद करेगा।

मौजूदा बाजार परिस्थितियों की जानकारी
वर्तमान में, किसी खरीदार को अगर किसी एक बड़ी चीज की जानकारी होनी चाहिए तो वह है इन्वेंट्री का स्तर। शहर चाहे जो भी हो लेकिन इन्वेंट्री का स्तर मोलभाव करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, किसी खरीदार को यह बात भी समझ कर चलना चाहिए कि पिछले कुछ महीनों में कीमतों की चाल क्या रही है ताकि वह अपनी अपेक्षाओं को उसके अनुरूप रख सके।

महंगाई की तुलना में कीमतें नहीं बढ़ीं
पिछले कई सालों से देश के प्रमुख शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। अगर हम इन कीमतों की तुलना थोक महंगाई दर से करें तो हम पाते हैं कि वास्तव में प्रॉपर्टी की कीमतों में मामूली गिरावट हुई है। इसलिए, मोलभाव करने के दौरान अपेक्षाओं को तर्कसंगत रखना ज्यादा अच्छा रहेगा।

विशेषज्ञ की सलाह लेने से न करें परहेज
आम तौर पर प्रॉपर्टी खरीदने वाले ब्रोकर को जरिया बनाने से परहेज करते हैं ताकि ब्रोकरेज के पैसे बच जाएं। खरीदारों को लेन-देन के सभी चैनल को आजमाना चाहिए जैसे ब्रोकर, ऑनलाइन सूचना के स्रोत आदि। इसके अलावा, अगर संभव हो तो उन्हें सीधे-सीधे मालिक से भी संपर्क करना चाहिए। इससे सभी संभावनाओं का आकलन करते हुए अच्छे सौदे को अंजाम देने में मदद मिलेगी। हो सकता है कि एक अच्छा ब्रोकर इसमें काफी मददगार साबित हो।

प्रॉपर्टी में दिखाएं अपनी दिलचस्पी
आम तौर पर लोगों में यह धारणा होती है कि अगर वह किसी प्रॉपर्टी में अपनी दिलचस्पी दिखाएंगे तो वह ज्यादा मोलभाव नहीं कर पाएंगे। यह धारणा गलत है। वास्तव में, खरीदारों को प्रॉपर्टी में पूरी दिलचस्पी दिखानी चाहिए ताकि डेवलपर उन्हें बेहतर डील देने के बारे में सोच सके। डेवलपर वास्तविक खरीदारों को सूचनाएं इकट्ठा करने वालों की तुलना में बिल्कुल भिन्न तरीके से पेश आते हैं। मोलभाव करने की जगह पर खरीदारों को चेक बुक लेकर जाना चाहिए ताकि डेवलपर को लगे कि वह टोकन अमाउंट देने को तैयार है और बेहतर सौदे को अंजाम दिया जा सके। अगर सौदा पसंद आता है तो ठीक नहीं तो विकल्प तो खुले ही हैं, लेकिन कहीं भी पूरी तैयारी के साथ ही जाना चाहिए।

सही वक्त का इंतजार करना ठीक नहीं
बीते समय में कई खरीदार प्रॉपर्टी बाजार के सही समय के निर्धारण के मामले में फंस चुके हैं। प्रॉपर्टी मार्केट हो या शेयर बाजार यहां खरीदारी के सही समय का निर्धारण करना कठिन है। वर्तमान में बिल्डर वास्तविक ग्राहकों को अच्छी डील की पेशकश कर रहे हैं। मौजूदा बाजार परिस्थितियों का सही ज्ञान और मोलभाव करने की दक्षता की बदौलत ग्राहक मौजूदा अवसर का लाभ उठा सकते हैं और अच्छी कीमत पर अपने घर के सपने को साकार कर सकते हैं। संभव है कि कुछ शहरों में कीमतों में कुछ गिरावट देखने को मिले लेकिन कोई भी व्यक्ति इसकी सही-सही भविष्यवाणी नहीं कर सकता है।


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शहरों में बने हाईराइज बिल्डिंग


वर्ल्ड ट्रेड पार्क चेयरमैन एंड एमडी अनूप बरतरिया ने बताया कि जयपुर में हाईराइज बिल्डिंग्स बनाने की परमिशन होनी चाहिए। हांगकांग और शंघाई की तर्ज पर हाईराइज बिल्डिंग्स को प्रमोट किया जाना चाहिए, इसके लिए सरकार को शहर में मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलप करना होगा। इसके साथ ही जयपुर के हैरिटेज के रख-रखाव की भी मजबूत नीति पर काम करना होगा, जिससे जयपुर को विश्व में पहचान मिल सके।

सराहनीय प्रयास...
प्रॉपर्टी एक्सपो में रेरा रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स को शामिल करने से लोगों को प्रॉपर्टी के लिए डीटेल इन्क्वायरी की जरूरत नहीं पड़ी। इसके माध्यम से लोग तुरंत डिसीजन ले सकेंगे।
- आत्माराम गुप्ता, चेयरमैन, एआरजी ग्रुप

जीएसटी से बायर्स या सेलर्स, दोनों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। रीयल एस्टेट प्रॉपर्टी के लिए रेरा एक बेहतरीन कानून है। पत्रिका के माध्यम से लोगों में रेरा के बारे में अवेयरनेस बढ़ी।
- हिमांशु गोयल, सीए

प्रॉपर्टी फेयर में बेहतरीन फुटफॉल देखने को मिला। बिल्डर भी नई एनर्जी के साथ काम कर रहे हैं। एेसे में इसका सीधा फायदा पब्लिक को होगा।
- एस.एन. गुप्ता, चेयरमैन, एसएनजी ग्रुप

लिमिटेड बिल्डर्स के लिए कॉम्पैक्ट स्पेस में फुटफॉल बेहतर मिला। इस तरह के इवेंट हर क्वार्टर में होने चाहिए, जिससे पब्लिक में अवेयरनेस बढ़े। दो दिन तक बेहतरीन लीड मिली।
- आनंद मिश्रा, एमडी त्रिमूर्ति बिल्डर्स

काफी समय बाद उम्मीद से बेहतर रिस्पॉन्स मिला। प्रॉपर्टी एक्सपो में बेहतरीन क्लाइंट मिले, इनसे काफी बुकिंग मिलने की संभावना है। राजस्थान पत्रिका को इस तरह के प्रयास को आगे भी जारी रखना चाहिए।
- रविन्द्र सिंह ठक्कर, डायरेक्टर यूडीबी

सुवास के माध्यम से लोगों के लिए सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। दो नए प्रोजेक्ट लॉन्च किए गए हैं। प्रॉपर्टी एक्सपो से बेहतरीन रिस्पॉन्स मिला।
- चरण सिंह खंगारोत, एमडी, फस्र्ट स्टोन

प्रॉपर्टी एक्सपो जैसे आयोजन से बेहतरीन रिस्पॉन्स मिला। एेसे आयोजनों को समय-समय पर कराया जाना चाहिए, साथ ही इसके दिन भी बढ़ाए जाने चाहिए।
- अजय कृष्ण मोदी, डायरेक्टर, ओके प्लस

राजस्थान पत्रिका के इस बेहतरीन आयोजन से एक ही छत के नीचे विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को आने का मौका मिला। एेसे आयोजन से न सिर्फ बिल्डर्स बल्कि आमजन को भी काफी फायदा मिलता है।
- धीरेन्द्र मदान, एमडी महिमा ग्रुप

राजस्थान पत्रिका की पहल से न सिर्फ लोगों, बल्कि सरकार से भी इंटरेक्शन का मौका मिला। पत्रिका का एक्सपो एक बेहतरीन आयोजन बनकर सामने आया।
- अवनीश बंसल, डायरेक्टर, अनुकृति ग्रुप

एेसे आयोजन के लिए राजस्थान पत्रिका को बधाई। इसके जरिए मल्टीपल एजेंसीज ने एक प्लेटफॉर्म पर आकर इंटरेक्शन किया। जिससे भविष्य की संभावनाओं और सुधारों पर मंथन हुआ। लोगों के लिए भी प्रॉपर्टी एक्सपो एक बेहतरीन अवसर बनकर सामने आया। भविष्य के लिए भी इस तरह के प्रयास निरंतर
होने चाहिए।
- प्रो. आर.के. कोठारी, वाइस चांसलर, राजस्थान यूनिवर्सिटी

पत्रिका के प्रॉपर्टी एक्सपो के जरिए डिफरेंट फील्ड्स के लोगों को एक प्लेटफॉर्म मिला तो लोगों के घर खरीदने के सपने को भी पंख लगे। राजस्थान पत्रिका को इस बेहतरीन आयोजन के लिए बधाई।
- विपुल भार्गव, जीएम, होटल ललित

बिल्डर्स के साथ ही आमजन के लिए काफी अच्छा इनिशिएटिव रहा। राजस्थान पत्रिका का यह इनिशिएटिव समय-समय पर आयोजित होना चाहिए। सरकार और बिल्डर्स के बीच इंटरेक्शन से कई समस्याओं के समाधान सामने आएंगे।
- सी. पी. जैन, डायरेक्टर, सिद्धा ग्रुप


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प्रोजेक्ट्स में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की बढ़ी डिमांड


जयपुर। स्पोर्ट्स को लेकर लोगों में जिस तरह से अवेयरनेस बढ़ रही है, उसका असर उनकी लाइफस्टाइल रिलेटेड एक्टिविटीज में भी दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि राजस्थान पत्रिका की ओर से शनिवार से शुरू हुए प्रॉपर्टी एक्सपो में विजिटर बिल्डर्स से फ्लैट्स में स्पोर्ट्स एमिनिटीज की डिमांड करते नजर आए।

जहां एक ओर बिल्डर्स का कहना है कि स्पोर्ट्स एमिनिटीज अब लोगों की प्रायोरिटी में शामिल हो गया है, वहीं लोगों का भी मानना है कि फिटनेस और स्पोर्ट्स में कॅरियर के लिए बच्चों को गेम्स से जोडऩा जरूरी है। प्रॉपर्टी एक्सपो में हिस्सा ले रहे बिल्डर्स की मानें तो लोग अब स्पोर्ट्स में विभिन्न गेम्स की डिमांड कर रहे हैं। मसलन, क्रिकेट और बैडमिंटन तक सीमित रहने वाला स्पोर्ट्स एरिया अब पहले से बड़ा होने लगा है। जबकि स्क्वैश कोर्ट के साथ ही विभिन्न गेम्स की डिमांड होने लगी है।

थ्री लेयर सिक्योरिटी होगी खास
एआरजी के गोपालपुरा स्थित प्रीमियम लग्जरी प्रोजेक्ट में थ्री लेयर सिक्योरिटी देखी जा सकेगी। एआरजी प्रतिनिधि ने बताया कि प्रोजेक्ट में गेट पर फेस रीडिंग कैमरा होगा, वहीं विजिटर एंट्री के लिए उसी फ्लोर का कार्ड इश्यू किया जाएगा, जिस फ्लोर पर वह जाना चाहता है। वहीं हर गेट पर पाम रीडिंग, टच और न्यूमेरिक लॉक लगे होंगे। इस तरह विजिटर्स से सुरक्षा की चिंता नहीं होगी। वहीं कस्टमर डिमांड की बात करें तो बेसिक एमिनिटीज में अब बड़े प्लेग्राउंड और अन्य गेम्स के लिए कोट्र्स की डिमांड होने लगी है।

पोडियम बेस्ड प्रोजेक्ट
विश एम्पायर प्रतिनिधि का मानना है कि लोगों का माइंडसैट अब फ्लैट के लिए चेंज हो गया है। अब फैमिलीज सिटी के बाहर के एरिया भी प्रिफर कर रहे हैं। वहीं प्रोजेक्ट की बात करें तो ग्रुप ने अजमेर रोड पर सिंगल पोडियम पर सात ब्लॉक वाला प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसकी खास बात यह है कि इसमें सातों ब्लॉक इंटरकनेक्टेड हैं।

इसमें फस्र्ट फ्लोर को रेजिडेंशियल के बजाय पोडियम बेस्ड एमिनिटीज के लिए डवलप किया गया है, जिसमें जकूजी, सोना बाथ, डे केयर सेंटर जैसी कई एमिनिटीज शामिल हैं। वहीं लोगों की डिमांड की बात करें तो अब लोग कम एरिया में ज्यादा लग्जरी की डिमांड कर रहे हैं। प्रॉपर्टी एक्सपो के जरिए सर्विस क्लास की सबसे ज्यादा डिमांड सामने आ रही है।

विजिटर्स ने कहा- ट्रांसपोर्टेशन बेहतर और बेसिक एमिनिटीज चाहिए
प्रॉपर्टी एक्सपो में आए विजिटर्स ने कहा कि उन्हें एेसे फ्लैट और विला की तलाश है, जिसके लिए ट्रांसपोर्टेशन बेहतर हो। साथ ही फुली फर्निश्ड हो और जल्द से जल्द पजेशन मिल सके।

राजस्थान पत्रिका का यह आयोजन अनूठा प्रयास है। जहां सभी वर्गों की जरूरतों के अनुसार प्रॉपर्टी पसंद करने और खरीदने का सुनहरा अवसर है। जयपुर वर्टिकल ग्रोथ की ओर बढ़ रहा है।
- विनय जोशी, प्रेसिडेंट, राजस्थान अफोर्डेबल हाउसिंग डवलपर एसोसिएशन

रीयल एस्टेट इंडस्ट्री में भरपूर संभावना है। रीयल एस्टेट ही एक एेसा प्रत्यक्ष असेट है, जो काफी सुरक्षित और संभावनाओं से भरपूर है। राजस्थान पत्रिका के इस अनूठे एक्सपो की काफी सराहना करता हूं।
- अनूप बरतरिया, चेयरमैन एंड एमडी, वल्र्ड ट्रेड पार्क

राजस्थान पत्रिका द्वारा किया जा रहा प्रॉपर्टी एक्सपो सराहनीय कदम है। प्रोजेक्ट घर आंगन को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। कस्टमर विजिट कर स्पॉट बुकिंग करा रहे हैं। इस तरह के आयोजन समय समय पर होने चाहिए।
- विनय चोरडि़या, एमडी, चोरडि़या ग्रुप

प्रॉपर्टी एक्सपो से उम्मीदों से बेहतर रिजल्ट आए हैं। उम्मीद है कि ज्यादा से ज्यादा कंवर्जन सामने आएंगे। लोगों की सुविधा के लिए इस तरह के प्रयास जरूरी हैं।
- अजय कृष्ण मोदी, डायरेक्टर, ओके प्लस

एक्सपो का आयोजन भव्य तरीके से किया है। यहां बिल्डर्स के क्वालिटी प्रोजेक्ट्स डिस्प्ले किए गए हैं। जेनुइन बायर्स ने रुचि दिखाकर पहले ही दिन छह साइट विजिट की।
- विकास जैन, एमडी, संकल्प ग्रुप

राजस्थान पत्रिका अपने ग्राहकों के लिए कुछ नया लेकर आता है। इसी सीरीज में पत्रिका प्रॉपर्टी एक्सपो एक अनुकूल पहल है, क्योंकि यह ग्राहकों को अपने सपनों का घर पसंद करने के लिए कई ऑप्शन दे रहा है।
-एस.एन. गुप्ता, एमडी, एसएनजी ग्रुप

प्रॉपर्टी एक्सपो के जरिए सीरियस जेनुइन बायर्स ने विजिट की। कस्टमर्स को एक्सपो से बिल्डर्स की जेनुइननेस, लॉस एप्लिकेबिलिटी और टाइमली पजेशन को लेकर शंकाएं दूर हो रही हैं। राजस्थान पत्रिका की यह पहल काफी सहूलियतभरी साबित होगी।
- हितेष धानुका, डायरेक्टर धानुका ग्रुप

पहले ही दिन भव्य शुरुआत से लोगों का बेहतरीन रिस्पॉन्स भी आना शुरू हो गया। राजस्थान पत्रिका ने सही समय पर यह इनिशिएटिव लेकर लोगों को अपनी पसंद की प्रॉपर्टी खरीदने की सुविधा दी है।
- मदन यादव, निदेशक, एसएसबीसी ग्रुप

रेरा सर्टिफिकेशन से बिल्डर्स के प्रति विश्वास बढ़ेगा। बायर निश्चिंत होकर अपने बजट में पसंदीदा प्रॉपर्टी खरीद सकें, राजस्थान पत्रिका की इस पहल ने लोगों को यह मौका दिया है।
- टीटू तनवानी, डायरेक्टर ट्रस्ट मार्केटिंग

राजस्थान पत्रिका के प्रॉपर्टी एक्सपो में ग्राहकों को सभी डवलपर्स के प्रोजेक्ट्स देखने का मौका मिला है। ग्राहकों के लिए मिनिमम प्राइस पर प्रॉपर्टी खरीदने का बेस्ट टाइम है।
- एन. के. गुप्ता, चेयरमैन, मंगलम ग्रुप


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रीयल एस्टेट का सबसे बड़ा सौदा!


नई दिल्ली। रीयल्टी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी डीएलएफ को उसकी समूह कंपनी डीएलएफ साइबर सिटी डवलपर्स लिमिटेड (डीसीसीडीएल) में प्रवर्तकों की पूरी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी 11,900 करोड़ रुपए में बेचने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी मिल गई है। देश के रीयल एस्टेट क्षेत्र में इस सौदे को सबसे बड़ा माना जा रहा है। सौदे के तहत डीसीसीडीएल में 33.34 प्रतिशत हिस्सेदारी को सिंगापुर के सरकारी संपत्ति कोष जीआईसी को 8900 करोड़ रुपए में बेचा जाएगा और शेष हिस्सेदारी को डीसीसीडीएल खुद 3000 करोड़ रुपए में बॉयबैक करेगी।

बंबई शेयर बाजार को भेजी गई सूचना में डीएलएफ ने कहा है कंपनी की वार्षिक आम बैठक में एक विशेष प्रस्ताव के तहत इस सौदे को मंजूरी दे दी गई। बैठक में 99.96 प्रतिशत शेयरधारकों ने प्रस्ताव के पक्ष में मत दिया। प्रवर्तकों की जिनकी डीएलएफ में 75 प्रतिशत हिस्सेदारी है, ने प्रस्ताव में वोट नहीं दिया।

अनंता प्रोजेक्ट का भूमि पूजन
जयपुर। एआरजी ग्रुप की वैल्यू होम्स सीरीज प्रोजेक्ट ‘अनंता’ का भूमि पूजन शनिवार को हुआ। हीरापुरा पुलिया के पास स्थित इस प्रोजेक्ट मे 1,2,2.5 बीएचके फ्लैट्स की करीब 500 यूनिट होंगी। यहां ज्यादातर फ्लैट्स पहले ही बुक हो चुके हैं और अब केवल 43 फ्लैट्स ही शेष हैं। ‘अनंता’ मे क्लब, स्विमिंग पूल, जिम, योगा गार्डन, एक्टिविटी रूम जैसी सुविधाएं हैं। ग्रुप के चेयरमैर आत्मा राम गुप्ता ने कहा कि अनंता सीरीज ने अर्फोडेबल केटेगरी मे अलग पहचान बनाई है।

यूनिक अभिनंदन को अच्छा रेस्पोंस
जयपुर। रियल एस्टेट समूह यूनिक बिल्डर्स ने मुख्यमंत्री जन अवास योजना के तहत यूनिक अभिनंदन में फ्लैट की कीमत ८.५१ लाख रुपए से शुरू है। यहां एक व दो बीएचके फ्लैट्स बनाए गए हैं। गु्रप के निदेशक विभिषेक सिंह ने बताया कि यहां सरकार की क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम के तहत २.६७ लाख रुपए तक की सब्सिडी दी जा रही है। इस प्रोजेक्ट में स्पोर्ट्स एरिया, फंक्शन लॉन, जॉगिंग ट्रैक, योगा एरिया आदि की सुविधाएं हैं।


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आज से प्रॉपर्टी एक्सपो शुरु, एक ही छत के नीचे मिलेंगे सभी तरह के आशियाने


जयपुर। राजस्थान पत्रिका की ओर से दो दिवसीय प्रॉपर्टी एक्सपो शनिवार को जवाहर सर्किल के पास स्थित होटल ललित में शुरू होगा। सांसद रामचरण बोहरा, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी , विधायक दीया कुमारी दोपहर 2.45 बजे दीप प्रज्वलन करेंगी। दोनों दिन एक्सपो का समय सुबह 11 से रात 8 बजे तक रहेगा।

एक्सपो में खास बात यह है कि आशियाना ढूंढने के लिए लोगों को अब इधर—उधर घूमने की जरूरत नहीं रहेगी। एक ही छत के नीचे बजट प्रॉपर्टी से लेकर लग्जरी सुविधा युक्त आशियाना मिल सकेगा। यहां सभी प्रोजेक्ट रेरा (रियल एस्टेट रेगूलेशन एक्ट) से जुड़े होंगे, यानी खरीदारों को समय पर घर का कब्जा मिलेगा।

एक्सपो में वास्तुशास्त्र, इंटीरियर डिजाइनिंग क्षेत्र के एक्सपट्र्स की ओर से नि:शुल्क सलाह भी दी जाएगी। बैंकिंग पार्टनर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया होगा, जो लोगों को हाउसिंग फाइनेंस से जुड़ी सभी जानकारी उपलब्ध कराएगा। एफएम पार्टनर 95 एफएम तडका व टीवी पार्टनर पत्रिका टीवी है।

इस प्रॉपर्टी एक्सपो में आम जनता अपने बजट तथा सुविधाओं के हिसाब से फ्लैट्स की जानकारी ले सकेगी। साथ ही वहां पर रेरा संबंधी जानकारी भी दी जाएगी।

ये बिल्डर होंगे साथ
एआरजी, महिमा ग्रुप, मंगलम्, एसएनजी, ओके प्लस, चौरडियाज, एफएस रियलटी, धानुका, यूडीबी, विश एम्पायर, त्रिमूर्ति, एसएसबीसी, आर.टेक, संकल्प ग्रुप।

सुविधा युक्त होंगे फ्लैट
लग्जरी सेगमेंट अपार्टमेंट में भूकम्प, रेसिस्टेंट स्ट्रक्चर, वेन्टीलेशन, फायर सेफ्टी अलार्म, पैसेंजर लिफ्ट, टाइल फ्लोरिंग, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, एके्रलिक इमल्शन पेंट, टेली सिक्योरिटी सिस्टम, पावर बैकअप लिफ्ट, पार्किंग व कॉमन एरिया, टीवी टेलीफोन पॉइंट इन ऑल रूम, सफीसिएंट वाटर मैनेजमेंट, इलेक्ट्रिकल मॉड्यूलर स्विच एंड फिटिंग, डिजाइनर एंट्रेस लॉबी एंड रिसेप्शन।

रेरा के दूरगामी प्रभाव रियल एस्टेट सेक्टर के लिए गेम चेंजर साबित होंगे। इससे सिर्फ सलेक्टेड व क्वालिटी प्रोजेक्ट ही मार्केट में आएंगे। इससे ना सिर्फ प्राइवेट डवल पर बल्कि सरकारी प्रोजेक्ट पर भी अच्छी गुणवत्ता के साथ समय पर डिलीवरी के लिए नकेल कसी जा सकेगी।
- विकास जैन, एमडी, संकल्प ग्रुप


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परकोटे में होंगी और २ टनल


जयपुर। मेट्रो के नाम पर हैरिटेज को बर्बाद करने के बाद सरकार का चारदीवारी में टनल (सबवे) बनाने का प्लान एक कदम और बढ़ गया है। रामनिवास बाग से जोरावर सिंह गेट के पहले तक दो टनल बनेगी। जयपुर मेट्रो ने इसकी हरी झण्डी दे दी है। इसके लिए स्मार्ट सिटी कंपनी को फिजिबिलिटी रिपोर्ट भेज दी है। अब डीपीआर बनाने की तैयारी शुरू कर दी।

स्मार्ट सिटी कंपनी की बोर्ड बैठक में यह फैसला किया गया। रूट की लम्बाई 3.3 किमी है। टनल जौहरी बाजार, बड़ी चौपड़, सुभाष चौक होते हुए जोरावर सिंह गेट तक होगी। सूत्रों के मुताबिक सरकार के आदेश पर यह किया जा रहा है ताकि चारदीवारी से बाहर जाने वाले वाहन चालक सीधे निकलें और चारदीवारी में वाहनों का दबाव कम हो।

गौरतलब है कि पिछले दिनों केन्द्रीय मंत्री वैंकया नायडू के सामने प्रस्ताव पर चर्चा की थी। अफसरों ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) से लागत राशि दिलाने की ने जरूरत जताई थी, जिस पर नायडू ने रजामंदी जता दी। हालांकि अब केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री बदल चुके हैं। बैठक में सीईओ रवि जैन सहित अन्य अधिकारी शामिल हुए।

परकोटा न हो जाए खोखला
अफसरों का कहना है कि बड़ी संख्या में वाहन चालक अजमेरी गेट, सांगानेरी गेट होते हुए सीधे जोरावर सिंह गेट की ओर गुजरते हैं। उनका चारदीवारी के बाजार व अन्य हिस्सों में ठहराव नहीं है। ऐसे वाहन चालकों के लिए अण्डरपास प्रस्तावित किया जा रहा है। हालांकि सरकार के प्रस्ताव की हकीकत डीपीआर से ही सामने आएगी लेकिन इससे हैरिटेज में शुमार चारदीवारी को खोखला जरूर कर दिया जाएगा। वैसे यह प्रस्ताव मौजूदा भाजपा सरकार के शुरुआती दौर का है। उस समय भी यही प्रस्ताव आया था लेकिन तब भी मेट्रो में फिजिबल नहीं होने की आशंका जताकर इसे ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया था।

अब डीपीआर बनाने का काम होगा
जयपुर मेट्रो की फिजिबिलिटी रिपोर्ट में टनल को हरी झण्डी दी गई है। अब डीपीआर बनाने का काम होगा। इससे चारदीवारी में यातायात, प्रदूषण समस्या दूर हो सकेगी। केन्द्र सरकार से भी मदद लेने की कोशिश रहेगी। चौगान स्टेडियम में स्पोट्र्स कॉम्पलेक्स भी बनेगा।
- मंजीत सिंह, चेयरमैन, स्मार्ट सिटी कंपनी


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शहरी विकास पॉलिसी बनाएगी केंद्र सरकार


नई दिल्ली। गांवों के देश से शहरों के देश के रूप में बदलते भारत के शहरों को बेतरतीब विकास से बचाने के लिए केंद्र सरकार जल्द ही शहरी विकास पर एक राष्ट्रीय स्तर की पॉलिसी तैयार करने जा रही है। इस राष्ट्रीय शहरी विकास पॉलिसी का पहला ड्राफ्ट दो महीने में तैयार कर लिया जाएगा और शहरी विकास की योजनाओं की समीक्षा के लिए दिसंबर में प्रस्तावित राज्यों के मेगा कन्क्लेव में इस ड्राफ्ट को राज्यों के समक्ष रखा जाएगा।

शहरी विकास मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इस पॉलिसी में सैनिटेशन, पेयजल, सीवेज, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, शहरी आवागमन समेत नगरीय नियोजन से जुड़े सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि भारत की शहरी आबादी 2031 तक वर्तमान के 38 करोड़ से बढक़र 60 करोड़ होने की अनुमान है।

रिपब्लिक ऑफ कोरिया ने प्रदेश में दिखाई निवेश की रुचि
उद्योग मंत्री राजपाल सिंह शेखावत से मंगलवार को उद्योग भवन में रिपब्लिक ऑफ कोरिया के कार्यवाहक राजदूत ली हे वांग के नेतृत्व में 11 सदस्यीय दल ने मिलकर राजस्थान में औद्योगिक निवेश में रुचि दिखाई है। शेखावत ने कहा कि औद्योगिक निवेष के लिए राजस्थान में अनुकूल वातावरण बना है।

राजस्थान शांतिपूर्ण और कानून व व्यवस्था की दृष्टि से बेहतर प्रदेश है। नीमराणा में जापानी औद्योगिक जोन में 40 से अधिक कंपनियां काम कर रही है। कोरियाई कंपनियां प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के ठोस प्रस्ताव लेकर आती है तो उन्हें भूमि व अन्य आवश्यक देय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स (सीजीएसटी) के चीफ कमिशनर एसएल. मीणा ने आगे कहा कि देश भर में जीएसटी को लेकर आ रही समस्याओं के बारें में हमें ई-मेल से अवगत कराएं। जीएसटी में लगातार सुधार किया जा रहा है। मीणा यहां मंगलवार को विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र स्थित वीकेआई एसोसिएशन के एक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।


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सस्ते होंगे जमीन-आशियाने: बिल्डर—विकासकर्ताओं के लिए राहत भरा आदेश


नई दिल्ली/जयपुर। मंदी से जूझ रहे रियल एस्टेट कारोबार और विल्डर—विकासकर्ताओं को राहत देने के लिए जेडीए ने आरक्षित दर में कमी कर दी है। आरक्षित दर शहर के बाहरी इलाकों में कम की गई है, जबकि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यथावत रखी है। इसमें 6 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर तक दर में कमी की है। इनमें ज्यादातर नगर निगम सीमा के आखिरी हिस्से से आगे का क्षेत्र शामिल है, जहां आरक्षित दर बहुत ज्यादा थी। इससे सबसे ज्यादा राहत बिल्डर—विकासकर्ताओं को मिलेगी, जो लम्बे समय से दरों में कमी करने की मांग कर रहे थे।

जेडीए अध्यक्ष व नगरीय विकास मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने जेडीए के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। जेडीए ने भी गुरुवार को इसके आदेश जारी कर दिए। इससे जमीन व आशियाने की लागत कुछ हद तक कम हो जाएगी। बशर्ते, विकासकर्ता या बिल्डर जनता को सीधे तौर पर इसका फायदा पहुंचाएं। जेडीए ने पहली बार सडक़ चौड़ाई बढऩे के आधार पर आरक्षित दर तय की है।

आरक्षित दरें कम होने से विकासकर्ताओं को सर्वाधिक लाभ उन जमीन पर नए प्रोजेक्ट लाने में मिलेगा। कारण, जमीनों की 90 ए, लीज गणना बिल्डिंग प्लान व ले-आउट प्लान मंजूरी करवाने में लगने वाला शुल्क और जमीन की लीज राशि की गणना अब संशोधित आरक्षित दर से होगी।

समझें... क्या है यू एरिया और कम दर
मास्टर प्लान में जेडीए परिधि क्षेत्र को तीन भागों में बांटा गया है, इसमें यू—1, यू—2 व यू—3 शामिल है। यू-1 एरिया नगर निगम सीमा तक का हिस्सा है। यू-2 एरिया नगर निगम सीमा के आखिर छोर से जेडीए के उस हिस्से तक आता है जहां आबादी कम है। करीब—करीब रिंग रोड की परिधि के भीतरी हिस्से तक। वहीं, यू-3 एरिया पूरी तरह ग्रामीण क्षेत्र है।

2015 में बढ़ी थी
जेडीए ने सितम्बर, 2015 में जमीनों की आरक्षित दरों में अप्रत्याशित वृद्धि की थी। बिल्डर भी जमीनों की आरक्षित दरों को कम करने के लिए कई बार सरकार व जेडीए को कहते रहे।

ग्रामीण इलाका
जोन 11: 6 हजार रुपए से घटाकर 4 हजार रुपए और जोन 12 में 6 हजार से घटाकर 5 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर

यहां कम हुई दर
कालवाड़ रोड... (250 मीटर दोनों साइड हाथोज तक)— 16 से घटाकर 14 हजार रुपए
हाथोज करधनी एक्सटेंशन स्कीम... 12 हजार से घटाकर 9 हजार रुपए
आकेडा डूंगर... 14 हजार से कम कर 10 हजार रुपए

यहां बढ़ाया
कॉमर्शियल स्कीम मालवीय नगर... 14 हजार से बढ़ाकर 16 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर
लक्कड़ पत्थर मंडी... 14 हजार से बढ़ाकर 16 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर

जोन 5 व 7...
यू 1 एरिया में 12 हजार व 14 हजार प्रति वर्गमीटर दर थी। अब समान रूप से 12 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर।

जोन ८...
यू 1 एरिया में 12 हजार व 14 हजार प्रति वर्गमीटर दर, जो अब समान रूप से 10 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर होगी। यानि, 4 हजार रुपए तक की कमी।

जोन ९ - दिल्ली रेलवे लाइन से जगतपुरा-गोनेर तक
यू-1 - 12 हजार व 14 हजार अलग—अलग दर। अब समान रूप से 10 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर।
यू-२ - 8 हजार व 10 अलग—अलग दर अब समान रूप से 8 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर रहेगी।
यू-३ - 10 हजार रुपए से 2 हजार रु. प्रति वर्गमीटर कम दर। यानि, यहां आरक्षित दर 8 हजार प्रति वर्गमीटर रहेगी।

जोन १० - आगरा रोड के दोनों तरफ का हिस्सा
यू-1 - 12 हजार व 14 हजार से घटाकर समान रूप से 8 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर।
यू-२ - 8 व 10 हजार से घटाकर समान रूप से 6 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर


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केंद्र सरकार इंफ्रा सेक्टर में बढ़ा सकती है निवेश


नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही (अप्रेल-जून) में देश की जीडीपी ग्रोथ 5.7 फीसदी रही। यह तीन का निचला स्तर है। आगे भी विकास दर और ना गिरे इसके लिए सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर निवेश बढ़ाकर ग्रोथ को पटरी पर लाने की कोशिश कर सकती है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि विकास दर को गिरने से रोकने और पटरी पर लाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, हाउसिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर सरकार फोकस बढ़ाएगी।

इसके लिए सरकार खुद और प्राइवेट सेक्टर का निवेश बढ़ाने पर जोर देगी। अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने बताया कि जीडीपी के सुस्त आंकड़ों के बाद सरकार पर ग्रोथ को वापस पटरी पर लाने का दबाव बढ़ जाएगा। ग्रोथ तेज करने के लिए सरकार के पास सबसे अहम टूल है सरकारी खर्च बढ़ाना। इससे एक साथ कई सेक्टर्स में डिमांड जनरेट की जा सकती है। सरकार की ओर से इंफ्रा सेक्टर पर खर्च बढऩे से ग्रोथ की रफ्तार फिर से तेज हो सकती है। मार्केट में जॉब क्रिएट होंगे और डिमांड बढ़ेगी।

निजी निवेश बढ़ाने पर भी जोर
सरकारी सूत्रों के मुताबिक इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निजी निवेश बढ़ाने के लिए कई नीतिगत पहल करने जा रही है। इसके तहत आईआईएफसीएल (इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड) को मजबूत करने की तैयारी भी शामिल है। सरकार का मानना है कि सिर्फ सरकारी खर्च से तेज ग्रोथ हासिल नहीं किया जा सकता है। इसके लिए प्राइवेट सेक्टर का योगदान भी जरूरी है। इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के काम पूरा करने के लिए विवादों को जल्द सुलझाने की कोशिश भी कर रही है।

अर्थव्यवस्था पर भरोसा कायम
दुनियाभर के ब्रोकरेज हाउस का भारत की ग्रोथ को लेकर भरोसा कायम है। उनका मानना है कि नोटबंदी और जीएसटी का असर अब खत्म हो चुका है और आने वाले समय में तेजी लौटेगी।

फोकस बढ़ाने की जरूरत
कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर भी कम रही है। पहली तिमाही में इस क्षेत्र में जीवीए 2.3 प्रतिशत रहा जो पिछले साल के मुकाबले कम है। कृषि का योगदान जीडीपी में 17 फीसदी है।


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जमीन और सोने में निवेश करना पसंद करते हैं भारतीय, इन बातों का भी रखें ध्यान


नई दिल्ली। कई विकल्प के बाद भी ज्यादातर देशवासी सोने या जमीन में ही अपना पैसा इन्वेस्ट करते हैं। म्यूचुअल फंड और पीपीएफ जैसे सभी वित्तीय एसेट की तुलना अब भी हमारे लोगों की दिलचस्पी कम ही है। यह खुलासा भारतीयों की बचत आदत पर पेश भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट से हुआ है। रिपोर्ट में भारतीयों के इस रवैये के प्रति चिंता भी जताई गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि लोगों की कुल संपत्ति का 84 फीसदी रियल एस्टेट के रूप में है। इनमें भी ज्यादातर संपत्ति पैतृक है।

पीपीएफ-म्यूचुअल फंड से अब भी दूरी
रिपोर्ट कहती है कि म्यूचुअल फंड, सावधि जमा, शेयर बाजार, बॉन्ड, पीपीएफ, जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा और रिटायरमेंट प्लान जैसे वित्तीय एसेट में अब भी भारत के लोग बहुत ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

पढ़े-लिखे लोगों की भी पहली पसंद गोल्ड
वित्तीय एसेट में कुल आवंटन का महज 5 फीसदी धन ही लगा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पढ़े-लिखे भी वित्तीय एसेट्स की तुलना में सोने में भी पैसे लगाना पसंद करते हैं। यदि कोई ज्यादा अमीर भी हो जाता है तो वह सोने में से पैसा निकाल कर रियल एस्टेट में लगाना पसंद करता है। वित्तीय एसेट में वह फिर भी निवेश नहीं करता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बचत की आदतों के चलते सोना और जमीन की कीमतों पर दबाव पड़ता है और उनकी कीमतें ज्यादा बढ़ जाती हैं।

लोगों ने कहां लगाया कितना पैसा?
राज्य - रियल एस्टेट - सोना - वित्तीय संपत्ति - रिटायरमेंट प्लान
राजस्थान - ७९.४% - ९.५% - १.४% - १.७%
मध्यप्रदेश - ८२.२% - ७.४% - २.७% - १.१%
छत्तीसगढ़ - ८१.७% - ६.८% - २.७% - १.१%
उत्तर प्रदेश - ८५.४% - ५.६% - १.८% - १.५%

सोने और जमीन के प्रति बढ़ते भारतीयों के लगाव को लेकर सरकार भी कई नए कानून लाने की तैयारी में हैं ताकि छिपी संपत्ति पर रोक लगाई जा सके और काले धन का पर्दाफाश किया जा सके।


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119 करोड़ का भुगतान, कंपनी ने अब मांगा 114 करोड़ का क्लेम


जयपुर। सात साल में बड़ी मुश्किल से बने दुर्गापुरा एलिवेटेड रोड और न्यू सांगानेर रोड बीआरटीएस कॉरिडोर प्रोजेक्ट ने एक बार फिर जेडीए प्रशासन की नींद उड़ा दी है। इसकी निर्माण लागत 119 करोड़ रुपए आई और इसका भुगतान भी कर दिया है। अब अनुबंधित कंपनी ने 114 करोड़ रुपए का अतिरिक्त क्लेम का नोटिस थमा दिया है। इसके अलावा 18 प्रतिशत (चक्रवृत्ति ब्याज) भी मांगा है।

इसमें प्रोजेक्ट देरी से लेकर अन्य संसाधनों का खर्चा जोड़ा गया है। जेडीए इतिहास में पहली बार है जब एक प्रोजेक्ट में ही बतौर क्लेम इतनी बड़ी राशि मांग ली गई हो। इससे एकबारगी तो अफसर भी भौंचक्के रह गए। जेडीए अफसर अब क्लेम दावे का अध्ययन करने में जुटे हैं। अफसरों का दावा है कि इसमें कई बिंदुओं पर क्लेम नहीं बनता। सात वर्ष तक जनता और जेडीए की गले की हड्डी बने रहे इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन मुख्यमंत्री ने दिसम्बर, 2015 में किया था।

जेडीसी वैभव गालरिया से सवाल-जवाब
सवाल: कंपनी ने इतना क्लेम कैसे मांग लिया।
जवाब: हां, कंपनी ने क्लेम पेश किया है। परीक्षण करा रहे हैं उसके बाद ही स्थिति साफ होगी।
सवाल: ऐसी स्थिति पनप ही क्यों रही है। कौन जिम्मेदार है?
जवाब: इन प्रोजेक्ट में तो प्लान ही बदलना पड़ा था और अन्य कई तकनीकी पहलु रहे हैं।
सवाल: भविष्य में इससे बचने के लिए कोई प्लान।
जवाब: भूमि मिलने के बाद ही आगे से प्लानिंग के साथ काम होगा।

क्लेम का लेखा—जोखा
लागत वृद्धि बकाया राशि
३.८४ करोड़ रुपए पांच बिलों में बढ़ी हुई राशि नहीं दी गई

सिक्यूरिटी राशि ६.५२ करोड़ रुपए
डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड 18 दिसम्बर, 2015 को खत्म हो चुका, इसके बाद भी जमा सिक्यूरिटी राशि रिलीज नहीं की गई

अतिरिक्त राशि कटौती ४२ लाख रुपए
(बिल में से विविध कटौती की गई अतिरिक्त राशि, जबकि डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड पहले ही समाप्त हो चुका)

पेनल्टी के खिलाफ दावा ३२ लाख रुपए
(निर्माण मियाद सितम्बर, 2015 तक बढ़ाने के बावजूद पेनल्टी लगा दी गई)

४ माह काम में देरी, यूं किया दावा
राज्य सरकार के निर्देश पर बीच में काम रोकने के आदेश दिए गए।
जेडीए ने कार्य में तब्दीली करते हुए दूसरी ड्राइंग सौंपी। 5 नवम्बर,11 को फिर काम शरू। कार्य में अतिरिक्त आइटम शामिल होने से देरी हुई।
जेडीए स्तर पर लागत वृद्धि राशि का भुगतान नहीं करने से निर्धारित समय पर काम पूरा नहीं हो सका। बाद में 19 मई, 2015 को भुगतान किया।
टै्रफिक डायवर्जन समय पर नहीं हुआ। जबकि, कई जगह काम की जगह तक नहीं थी।
जेडीए ने मार्च, 2015 में फिर प्लान बदला। इसमें रिटेलनिंग वॉल के पास पेयजल लाइन व अन्य सुविधा के लिए डक्ट रखी गई।

एक्सपर्ट व्यू...
अफसरों की अूधरी तैयारी और राजनीतिक हस्तक्षेप...प्रोजेक्ट्स पर भारी पड़ते आए हैं। इससे कंपनी को क्लेम मांगने का मौका मिलता है। ज्यादातर प्रोजेक्ट देखें तो सामने आ जाएगा कि कंपनियां ही एजेंंसी से ज्यादा क्लेम मांगती है। रिंग रोड में भी ऐसा हुआ है। अफसरों के अधूरे होमवर्क के कारण न तो समय पर जमीन मिली, न जरूरी क्लीरियेंस। नतीजा, सरकार को करोड़ों की राशि सरकारी खजाने से चुकानी पड़ रही है। एलिवेटेड रोड, बीआरटीएस कॉरिडोर में भी यही लापरवाही है तो अब सबक लेने का वक्त आ गया। इन कंपनियों को हावी होने का मौका ही न दें।
- बी.जी. शर्मा, सेवानिवृत सचिव, पीडब्ल्यूडी


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आज से पांच साल पुरानी कीमत पर मिल रही हैं प्रॉपर्टी, अगले साल तक हो सकती हैं फिर महंगी


नई दिल्ली। जीएसटी लागू हो चुका है और रियल एस्टेट बाजार पर भी इसका सकारात्मक असर दिखना शुरू हो गया है। टैक्स में स्पष्टता और पारदर्शिता आने के साथ ही घर खरीदारों के लिए भी अब परिस्थितियां आसान हो गई हैं। होम बायर्स के लिए अपने घर का सपना सच करने का यह सबसे माकूल समय है।

ऐसा इसलिए कि इस समय फ्लैट के दाम वर्ष 2012 के स्तर पर ही बने हुए हैं। मुद्रास्फीती को न्यूनतम 10 फीसदी भी आधार के तौर पर मान लिया जाए तो फ्लैट्स 2012 के मुकाबले आधी कीमत यानि 50 फीसदी छूट पर मिल रहे हैं। मुद्रास्फीती के नियमों के अनुसार रुपए की कीमत हर साल 8 से 10 फीसदी महंगाई दर के अनुसार कम होती है।

सस्ती हुई ईएमआई
अभी हर महीने कम होती ईएमआई भी एक और आकर्षण है जो कि अपने घर का सपना साकार करने के लिए लोगों को आमंत्रित कर रहा है। एक समय में प्रति लाख होम लोन की ईएमआई 1100 रुपए मासिक से ऊपर थी जो कि अब 900 रुपए के वर्ग में आ गई है। बैंकों के पास जिस तरह से फंड्स मौजूद हैं, उसको देखते हुए ये स्पष्ट है कि आने वाले महीनों में होम लोन की ईएमआई और कम होगी।

कस्टमर इज किंग
हाल में सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का फायदा अब होम बायर्स को मिल रहा है क्योंकि प्रतिस्पर्धा के चलते कोई भी डेवलपर इन सभी राहतों को अपने लाभ में शामिल नहीं कर सकता है। क्योंकि कस्टमर इज किंग, की कहावत रियल एस्टेट सेक्टर पर भी समान तौर पर लागू होती है। ऐसे में होब बायर्स के लिए घर खरीदने का यह सबसे सुनहरा मौका है। वे कम बजट में अच्छा घर खरीद सकते हैं।

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2022 तक सबको आवास का वादा दिवास्वप्न : गहलोत


पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत ने कहा है कि भाजपा नीत केन्द्र सरकार ने वर्ष 2022 तक सबको आवास देने का वादा किया है, जो एक दिवास्वप्न से अधिक कुछ नहीं। इसके लिए आज तक समयबद्ध कार्यक्रम तय नहीं किए गए। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी का कार्य निजी क्षेत्र के बिल्डरों के भरोसे छोड़ दिया गया है। इसका लाभ कमजोर, अल्प एवं मध्यम वर्ग के लोगों को नहीं मिल पा रहा।

गहलोत ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में बीपीएल परिवारों के आवास की समस्या के समाधान के लिए राज्य स्तर पर सबसे बडी आवास योजना लागू की थी। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 3 जून 2011 को बांसवाड़ा में इसे लागू किया। योजना में सरकार ने हुडको से 3400 करोड़ रुपए का ऋण सहयोग जुटाया और इंदिरा आवास योजना को सम्मिलित करते हुए 10 लाख ग्रामीण बीपीएल परिवारों को आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया था।

इसके तहत सितंबर 2013 तक साढ़े 4 लाख से ज्यादा आवासों का निर्माण किया गया। वर्ष 2011-12 से 2015-16 के दौरान राज्य में स्वीकृत आवासों में से 1.60 लाख से अधिक आवास अभी भी निर्माणाधीन हैं। आज राज्य की भाजपा सरकार ने इस योजना को भी अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की तरह ठप कर दिया है।

याद आई दलितों कीजयपुर शहर कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि आखिर भाजपा को दलितों के सम्मान की बात याद आ गई। सुशीलपुरा में दलित के यहां भोजन ग्रहण किया, लेकिन उनके थाली-गिलास तक काम में नहीं लिए। उन्होंने कहा, सुशीलपुरा में जब गंदा पानी पीने से दो बच्चों की मौत हो गई थी तो क्षेत्रीय विधायक और मुख्यमंत्री इस बस्ती में नहीं पहुंचे थे।

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रिएल एस्टेट सेक्टर में मिल रहा है सबसे कम वेतन


नई दिल्ली। भारत को विनिर्माण का केंद्र बनाने के सघन प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन आपको जानकार यह आश्चर्य होगा कि विनिर्माण क्षेत्र में सबसे कम वेतन है। मॉन्स्टर इंडिया के मॉन्स्टर सेलरी इंडेक्स (एमएसआई) के मुताबिक विनिर्माण क्षेत्र में दिया जाने वाला वेतन सबसे कम है, जिसमें औसत सकल वेतन प्रतिघंटा केवल 211.7 रु. दिया जाता है।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि आर्थिक वृद्धि के बावजूद औसत प्रतिघंटा वेतन कुल 16 प्रतिशत की कमी आई है। इस सेक्टर में जिस दर से वेतन घट रहे हैं, उससे उद्योग में प्रवेश करने वाली नई प्रतिभाओं के सामने समस्याएं आ सकती हैं।

कौशल भारत मिशन की दूसरी सालगिरह
विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय ने विश्व युवा कौशल दिवस के मौके पर कौशल भारत मिशन की दूसरी सालगिरह मनाई। इस मौके पर 100 जीएसटी प्रशिक्षण केन्द्रों, 51 प्रधानमंत्री कौशल केन्द्रों और 100 योगा प्रशिक्षण केन्द्रों का उद्घाटन किया गया।कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कार्यक्रम की मेजबानी की। इस मौके पर प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षित हुए उम्मीदवारों को प्रमाणपत्र भी दिए गए।

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कब्जा लेकर मुआवजा कोर्ट में जमा कराया, अफसरों ने उसी जमीन का कर दिया पट्टा


जयपुर। भ्रष्टाचार को लेकर जेडीए अफसर फिर कठघरे में आ गए हैं। अफसरों ने जेब भरने के लिए ऐसा काम कर दिया, जो सरकार स्तर पर होता है। ऐसी ही बड़ी करतूत सामने आई है, जिसने जेडीसी को भी सकते में ला दिया। जेडीसी वैभव गालरिया ने उपायुक्त को चार्जशीट थमाने की फाइल तैयार कर ली है और पट्टा व आरक्षण पत्र निरस्त करने का प्रस्ताव सरकार को भेजने के निर्देश दे दिए हैं।

मामला अवाप्त जमीन का है, जिसका जेडीए कब्जा लेकर मुआवजा कोर्ट में जमा करा चुका। उपायुक्त नवलकिशोर बैरवा ने न केवल मुआवजा राशि कोर्ट से वापस मंगा ली, बल्कि जमीन का आरक्षण पत्र और पट्टा तक जारी कर दिया गया। इसमें सरकार तो दूर, जेडीसी तक से अनुमति नहीं ली। यह जमीन ग्राम राजपुरा उर्फ मथुरावाला तहसील सांगानेर में है। इसका क्षेत्रफल 1.05 हैक्टेयर है।

आरक्षण पत्र लिया और बेच दिया
खातेदार ने पहले तो भूखंड का आरक्षण पत्र हासिल किया और फिर उसे दो टुकड़ों में बांटकर बेच दिया। एक भूखंड 427 वर्गमीटर और दूसरा 360 वर्गमीटर का है। एक का पट्टा भी जारी करवा लिया। बेचान के नाम हस्तांतरण पत्र भी जोन द्वारा जारी कर दिए। बाद की कार्रवाई में यह स्थिति पकड़ी गई। इस बीच भूखंडधारी महिला भी पट्टे के लिए पहुंची, जिसके बाद तो मामले की परतें खुलती गई।

जिम्मेदार उपायुक्त को मिलेगी चार्जशीट
जेडीए अफसरों ने तो आरक्षण पत्र के आधार पर दूसरे भूखंड का पट्टा जारी करने की प्लानिंग कर ली थी। इसके लिए  मामला एग्जीक्यूटिव कमेटी को भी भेज दिया। यहां जेडीसी ने जमीन अवाप्ति से लेकर आरक्षण पत्र जारी करने तक की स्थिति पूछी तो करतूत सामने आ गई। उन्होंने जिम्मेदार अफसर को चार्जशीट सौंपने और पट्टा निरस्त करने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दे दिए।

3-4 दिन में दूसरे अफसर ने कर दिया खेल
जेडीए ने 2001 में ग्राम राजपुरा उर्फ मथुरावाला में 1.05 हैक्टेयर जमीन अवाप्त की थी। इसका अवार्ड 2002 में जारी भी कर दिया गया। जून 2006 में मुआवजा राशि करीब 3.38 लाख रुपए कोर्ट में जमा करा जेडीए ने जमीन का कब्जा तक ले लिया।
कुछ वर्ष बाद खातेदार कल्याण पुत्र मांगी लाल ने नकद मुआवजा लेने की बजाय विकसित भूमि के लिए जोन में आवेदन किया। उस समय तत्कालीन जोन उपायुक्त भंवर सिंह सान्दू थे। सान्दू 3-4 दिन के अवकाश पर गए। इस दौरान इस जोन अतिरिक्त कार्यभार उपायुक्त नवलकिशोर बैरवा को दिया गया।
बैरवा ने खातेदार से मिलीभगत की। पहले कोर्ट से मुआवजा वापस लेने की प्रकिया की। इसके लिए भूमि अवाप्ति अधिकारी को पत्र लिखा गया।
फिर बतौर मुआवजा 15 प्रतिशत जमीन के रूप में 787 वर्गमीटर जमीन का आरक्षण पत्र जारी
कर दिया।

इसकी आड़ में खेल
सरकार ने फरवरी, 2015 में आदेश जारी किया। इसमें उन खातेदारों को विकल्प दिया गया, जो नगद के बजाय विकसित भूमि मुआवजे के रूप में लेना चाहते हैं। यह आदेश उन्हीं प्रभावितों पर लागू होता जिनकी जमीन पर जेडीए कब्जा नहीं लेता। आदेश में भी स्पष्ट किया कि जिस भूमि का अवार्ड जारी होने के बाद कब्जा नहीं लिया, उसी में ये नियम लागू था। इसी आदेश की आड़ में उपायुक्त ने जेडीसी और सरकार की स्वीकृति लिए  बिना अपने स्तर पर ही आरक्षण पत्र जारी कर दिया।

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दीवारों पर फ्लोटिंग वॉल शेल्फ, खूबसूरत दिखने लगेगा घर


यदि आप दीवारों को मॉडर्न और रिच लुक देना चाहते हैं तो उन्हें फ्लोटिंग वॉल शेल्फ से सजा सकते हैं। ये न केवल खूबसूरत दिखती हैं, बल्कि बहुउपयोगी भी होती हैं।

(1) फ्लोटिंग वॉल शेल्फ की खासियत यही है कि इसे घर के किसी भी हिस्से में लगाया जा सकता है। लिविंग रूम, स्टेयर्स या किचन अथवा बाथरूम में।
(2) लिविंग रूम में ये न सिर्फ खाली दीवारों को खूबसूरत बनाती हैं, बल्कि ये ध्यान भी खींचती हैं। ऐसे में आप इन्हें सबसे प्रमुख दीवारों पर भी लगवा सकते हैं।
(3) ये वुडन, कांच या प्लास्टिक की हो सकती हैं। इनके रंग और पैटर्न आपके कमरे के कलर से मैच करने वाले होने चाहिए।
(4) इन्हें किचन में भी लगवाया जा सकता है। किचन साफ-सुथरी तो लगती ही है साथ ही किचन का स्पेस भी खुला-खुला नजर आता है।
(5) इनमें पीछे की ओर बैक फ्लैश लाइट भी लगायी जा सकती है। इसकी मदद से आप चीजों को हाइलाइट भी कर सकते हैं।
(6) इन पर एलईडी लाइटिंग भी की जा सकती है। इनका इस्तेमाल हर तरह के इंटीरियर में हो सकता है।
(7) शेल्फ बाथरूम में भी लगवाई जा सकती है। मार्बल फ्लोरिंग के बाथरूम में भी फ्लोटिंग वॉल शेल्फ अच्छी लगती है।

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द्रव्यवती नदी सौन्दर्यीकरणः देर रात जेडीए में डटे रहे खातेदार व कनिष्ठ लेखाकार


मुआवजे की मांग को लेकर पहुंचे द्रव्यवती नदी के प्रभावित किसान सोमवार को देर रात तक जेडीए में जेडीसी का इंतजार करते रहे वहीं ज्वानिंग की उम्मीद में आए कनिष्ठ लेखाकारों को भी बैरंग ही लौटना पड़ा। दोनों ही सोमवार देर रात तक जेडीए में डटे रहे, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं था। दोपहर में जेडीए से बाहर गए जेडीसी शाम तक वापिस लौटे ही नहीं, बल्कि उनकी गाड़ी खाली लौटी।

द्रव्यवती नदी के बहाव क्षेत्र से प्रभावित करीब 200 बीघा जमीन का मुआवजे की मांग लेकर पहुंचे। जेडीसी का इंतजार करते—करते आधी रात तक भी वहीं डटे रहे। इनमें 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग भी साथ रहे। जेडीसी को कई बार फोन मिलाया लेकिन नाकाम रहे। अतिरिक्त आयुक्त (प्रशासन) ओ.पी. बुनकर भी समाधान निकालने में फेल रहे। बताया जा रहा है कि 60 खातेदार—काश्तकार ऐसे हैं, जिनकी करीब दो सौ बीघा जमीन द्रव्यवती नदी से प्रभावित है।

यह है मामला
गोनेर के पास द्रव्यवती नदी के बहाव क्षेत्र में करीब 60 खातेदारों की 200 बीघा जमीन आ गई। इस जमीन का जेडीए ने आज तक मुआवजा नहीं दिया। काश्तकारों का कहना है कि जेडीए अधिकारियों ने डराकर जमीन को कब्जे में ले ली, लेकिन अब मुआवजा देने से मना कर रहे है। खातेदारों ने आरोप लगाया कि जेडीए अधिकारियों ने कुछ रसूखदारों की जमीनों को बचाने के लिए नदी के बहाव क्षेत्र के अलाइनमेंट में बार-बार
बदलाव किया।

हमने जमीन के संबंध में जेडीए ट्रिब्यूनल कोर्ट से भी स्टे ले रखा है, लेकिन उसके बाद भी जेडीए कोर्ट के आदेशों की पालना नहीं कर रहा और मौके पर काम करवा रहा है। जेडीसी सुनने तक को तैयार नहीं है।
- अशोक मेहता, महामंत्री, द्रव्यवती नदी प्रभावित किसान संघर्ष समिति

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अल्ट्राटेक ने किया अधिग्रहण


देश की सीमेंट इंडस्ट्री में दबदबा रखने वाले जेपी एसोसिएट की डायरेक्टर कमेटी ने कंपनी के पांच राज्यों के सीमेंट प्लांट्स का अल्ट्राटेक सीमेंट द्वारा अधिग्रहण किए जाने की अंतिम मंजूरी दे दी। अल्ट्राटेक ने इन सीमेंट प्लांटों का16189 करोड़ रुपए में सौदा किया है। इसमें यूपी, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और आंध्र प्रदेश के सीमेंट प्लांट्स शामिल हैं, जिनकी प्रॉडक्शन कैपेसिटी 1.72 करोड़ टन सालाना है।

अल्ट्राटेक इनके अलावा 4 एमटीपीए कैपेसिटी की ग्राइडिंग यूनिट भी जेपी ग्रुप से खरीदेगा।जेपी एसोसिएट प्रबंधन ने इस बड़े सौदे के पीछे की वजह आर्थिक मंदी को बताया है।जेपी ग्रुप के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन मनोज गौड़ ने रिवाइज्ड डील के बाद बताया, 'हम कर्ज कम करने के लिए कमिटेड हैं। इकनॉमिक स्लोडाउन के चलते ग्रुप अभी मुश्किल में है। इससे निकलने के लिए हम अपने एसेट्स बेच रहे हैं।'

डील फाइनल होने के बाद अल्ट्राटेक ने भी बयान जारी कर कहा है कि कंपनी बोर्ड ने जेपी असोसिएट्स, जेपी सीमेंट कॉरपोरेशन और उसके शेयरहोल्डर्स, लेंडर्स के साथ एक अरेंजमेंट स्कीम को मंजूरी दी है। इसके अनुसार 2.12 करोड़ टन के जेपी ग्रुप के सीमेंट एसेट्स के लिए 16,189 करोड़ रुपये की एंटरप्राइज वैल्यू पर डील करने को तैयार हुई है।

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