Patrika : Leading Hindi News Portal - Dharma Karma #educratsweb
HOME | LATEST JOBS | JOBS | CONTENTS | STUDY MATERIAL | CAREER | NEWS | BOOK | VIDEO | PRACTICE SET REGISTER | LOGIN | CONTACT US

Patrika : Leading Hindi News Portal - Dharma Karma

http://api.patrika.com/rss/dharma-karma 👁 1237

मंगल भवन अमंगलहारी, सब समस्याओं की एक ही दवा, हनुमान जी


श्रीराम चरित्र मानस ही यह चौपाई- मंगल भवन अमंगलहारी अर्थात सभी का मंगल ही मंगल हो । रामायण के अनुसार स्वयं राम जी को भी संकटों से बचाने वाले श्री हनुमान जी मनुष्य के भी कठिन से कठिन संकटों को पल भर में दूर कर देते हैं । अगर आपके जीवन में किसी भी तरह के दुख या समस्याएं हो तो मंगलवार के दिन इन उपायों को जरूर करें । इन्हें लगातार 3 मंगलावारों को करने से हमेशा के लिए सारे कष्ट हनुमान जी दूर कर देते हैं ।

 

मंगलवार के दिन इन उपायों को करने से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं ।


1- मंगलवार के दिन किसी भी हनुमान मंदिर में एक नींबू और 4 लौंग लेकर जाएं, इसके बाद हनुमानजी के सामने नींबू के ऊपर चारों लौंग अर्पित करें । फिर हनुमानजी के इस बीज मंत्र- ।। ॐ ऐं भ्रीम हनुमते, श्री राम दूताय नम: ।। का 108 बार जप करें । मंत्र जप के बाद हनुमानजी से मनोकामना पूर्ति की कामना करते हुए नींबू को अपने साथ ही रख लें । कुछ ही दिनों में कठिन से कठिन समस्या भी दूर हो जायेगी ।

 

2- किसी पुराने हनुमान मंदिर में एक गीला नारियल लेकर जाएं, मंदिर में हनुमानजी के सामने खड़े होकर नारियल को अपने सिर से पैर तक 7 बार उतार कर जोर से फोड़ दे । इसके बाद 7 बार श्री हनुमान चालीसा का पाठ वहीं बैठकर करें । ऐसा करने से सभी बाधाएं दूर हो जाएंगी । ध्यान रहे कोई भी यह उपाय करते हुए आपको रोके टोके नहीं । इस उपाय के लाभ 7 दिनों में दिखाई देने लगते हैं ।

 

3- यदि परेशानियों से हमेशा के लिए मुक्ति चाहते हैं तो मंगलवार को हनुमानजी के मंदिर में जाकर एक नारियल पर सिंदूर से स्वस्तिक बनाएं और हनुमानजी को भेट कर दें । फिर हनुमान चालीसा का पाठ करें । इस उपाय से जल्दी ही शुभ फल प्राप्त होते हैं ।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/dharma-karma/mangalwar-hanuman-ji-puja-vidhi-in-hindi-4011486/

रविवार की रात को करें ये चमत्कारी उपाय, दूर हो जाएगी पैसों से जुड़ी समस्याएं


सुख, शांति, समृद्धि और धन सभी व्यक्ति अपने जीवन में चाहते हैं। हर व्यक्ति की यही एक इच्छा होती है की उसका जीवन बीना किसी परेशानी के निकले। लेकिन ऐसा नहीं होता क्योंकि दुनिया में हर व्यक्ति को कुछ ना कुछ परेशानी जरुर होती है, शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसे कोई दिक्कत ना हो या वो अपने जीवन में किसी कारण से दुखी ना हो। ज्योतिषशास्त्र में मनुष्य की लगभग सभी परेशानियों का समाधान व उपाय हैं जिनते माध्यम से वह अपनी समस्याओं को दूर कर सकते हैं। उन्हीं समस्याओं में से एक समस्या है धन की समस्याएं। जब भी किसी व्यक्ति को पैसों की समस्या होती है तो वह भौतिक सुख नहीं ले पाता। जब व्यक्ति को मेहनत के बाद भी पैसों की किल्लत सहनी पड़ती है, तो कुंडली या भाग्य दोष कारण होता है। ऐसे में कुछ असरदार उपाय आपकी परेशानी हल कर सकते हैं। आइए जानते हैं वो आसान उपाय....

dhan upay on ravivar

रविवार को करें ये असरदार उपाय

जिन लोगों परिश्रम के बाद भी सफलता प्राप्त नहीं होती वो लोग इस उपाय को आजमा सकते हैं। रविवार की रात को सोते समय एक दूध भरा गिलास अपने सिरहाने रखकर सो जाएं। सुबह उठकर यह दूध से भरा गिलास को किसी भी बबूल के पेड़ की जड़ में ड़ाल दें। यह टोटका लगातार दोहराएं इससे आपकी धन संबंधी समस्याएं दूर हो जाएगी। धन संबंधी समस्याओं के साथ-साथ यदि आपके आसपास नकारत्मक शक्तियां हैं तो उनसे भी छुटकारा मिल जाएगा। इस उपाय को श्रृद्धा पूर्वक करने से आपको अपार धन, सुख-समृद्धि, संपन्नता प्राप्त होगी।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/dharma-karma/ravivar-ke-tantrik-totke-for-money-in-hindi-4008178/

सभी समस्याओं का समाधान केवल सात दिनों में हो जायेगा, कर देखें


जीवन में आने वाली सभी समस्याओं का समाधान केवल सात दिनों में संभव हैं । रविवार का दिन भगवान सूर्य नारायण का दिन होता हैं । इस दिन से लेकर लगातार 7 दिनों तक यानी की शनिवार तक इस उपाय को करने से जीवन की प्रत्येक समस्याएं चाहकर भी उपाय करने वाले के पास नहीं आ पायेगी । सातों दिनों के सात देवता बतायें गये हैं । अगर हर दिन उस दिन के देवता और ग्रह को प्रसन्न व शांत करने के लिए इन उपायों को जरूर करना चाहिए । उपाय करने के बाद गरीबों को कुछ धन या फिर फल जरूर दान करें ।

 

1- रविवार का दिन- अगर किसी की कुंडली में सूर्य के कमज़ोर होने पर व्‍यक्‍ति को अपने जीवन में किसी भी क्षेत्र में सफलता नहीं मिल पाती । सूर्य को प्रसन्‍न करने के लिए नियमित जल अर्पित करें ।
रविवार का उपाय- किसी गरीब अथवा जरूरतमंद व्‍यक्‍ति को गुड़ का दान करें ।

 

2- सोमवार का दिन- अगर किसी की कुंडली में चंद्र दोष है या चंद्रमा कमज़ोर स्थिति में है तो व्यक्ति को हमेशा कोई न कोई बीमारी लगी रहती है । सर्दी-जुकाम, नेत्र संबंधी रोग और अर्थराइटिस से आप परेशान रहते हैं । चंद्र ग्रह को शांत करने के लिए आपको सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करना चाहिए ।
सोमवार का उपाय- हो सके तो किसी गरीब परिवार को भोजन करायें । भोजन में दूध से बने पदार्थ होने चाहिए ।

 

3- मंगलवार का दिन- कहा जात है कि मंगल कई प्रकार की शारीरिक बीमारियां देता है । कुंडली में मंगल को मजबूत करने के लिए आपको मंगलवार के दिन हनुमान जी और मां काली की आराधना करना चाहिए ।
मंगलवार का उपाय- छोटी कन्याओं को उड़द, मूंग या तुअर की दाल से बना भोजन करावें ।

 

griha shanti

4- बुधवार का दिन- अगर कुंडली में बुध कमज़ोर हो तो उसे मजबूत करने के लिए बुधवार के दिन भगवान गणेश जी को 11 लड्डूओं का भोग लगाएं और दूर्वा चढ़ाएं ।
बुधवार का उपाय- बुधवार के दिन शाम के समय गणेश मंदिर के सामने कोई भिखारी दिखाई दे तो उसे पीली रूमाल या कपड़ा जरूर दान करें ।

 

5- गुरुवार का दिन- गुरुवार का दिन देवों के गुरु बृहस्‍पति देव की आराधना का दिन माना जाता हैं । अगर किसी की कुंडली में गुरु नीच या कमज़ोर स्‍थान में हो तो उसे अवनति मिलती है । इस दिन भगवान विष्‍णु को खीर का भोग लगाने से गुरु को मजबूती मिलती हैं ।
गुरुवार का उपाय- इस दिन पीली वस्‍तुओं, पीले रंग के वस्‍त्रों और जनेऊ का दान करें ।

 

6- शुक्रवार का दिन- यह दिन शुक्र ग्रह से संबंधित है, शुक्र ग्रह भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक होता है । इस दिन शुक्र मंत्र का जप जरूर करें ।
शुक्रवार का उपाय- शुक्रवार के दिन किसी गरीब सुहागिन स्‍त्री को सुहाग से जुड़ी वस्‍तुओं का दान करें ।

 

7- शनिवार का दिन- शनिवार का दिन न्‍याय के देवता शनि देव का दिन होता है । शनि देव को प्रसन्‍न करने के लिए शनिवार के दिन शनि से संबंधित वस्‍तुओं का दान करें । शनिवार के दिन शिवलिंग पर काले तिल मिले जल से अभिषेक करें । पीपल के पेड़ पर भी जल चढ़ाएं ।
शनिवार का उपाय- इस दिन किसी गरीब को उड़द की दाल से बनी खिचड़ी जरूर खिलाएं ।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/dharma-karma/griha-shanti-ke-upay-4002213/

अगर आपकी कुंडली में हैं ये योग तो- हो सकते हैं भगवान के दर्शन


ईश्वर के दर्शन करना उनको प्राप्त करना हर मनुष्य की कामना होती हैं, लेकिन अगर बात मोक्ष पाने की करें तो वह आसान बात नहीं है । बड़े-बड़े साधु-संतों को मोक्ष की प्राप्‍ति हेतु कई वर्षों तक घोर तपस्‍या करनी पड़ी थी । यहां तक कि भगवान बुद्ध को भी निर्वाण प्राप्‍त करने के लिए अपना संपूर्ण जीवन साधना में व्‍यतीत करना पड़ा था । कुंडली में मोक्ष प्राप्‍ति योग काफी शुभ माना जाता है । कुंडली में केवल इस योग के बनने से ही मनुष्‍य को मोक्ष मिल जाता है जिसे कई लोग घोर तपस्‍या के बाद हासिल कर पाते हैं ।

 

ऐसे हो सकती हैं ईश्वर की प्राप्ति
ज्योतिषशास्त्र की माने तो सौरमंडल के कुछ ग्रह ऐसे हैं जिनके प्रभाव में आने पर मनुष्‍य सदमार्ग पर चलने की ओर प्रेरित होता है । सभी ग्रहों में गुरु सबसे अधिक शुभ ग्रह है । इसके प्रभाव में व्यक्ति सदा शुभ कर्मों के लिए प्रेरित रहता है । माना जाता है कि गुरु के शुभ स्‍थान में होने पर जातक अपने जीवन में सफलता और मान-सम्‍मान प्राप्‍त करता है, और गुरु ही एक मात्र वह व्यक्ति हैं जो ईश्वर के दर्शन करा सकता हैं ।

 

1- यदि कुंडली के बारहवें भाव में शुभ ग्रह विराजमान है और बारहवें भाव का स्वामी अपनी राशि या मित्र राशि में बैठा है एवं इन्‍हें कोई शुभ ग्रह देख रहा है तो ऐसी स्थिति में जातक अपने शुभ कर्मों के कारण ईश्वर से मिल सकता हैं ।
2- इसके अलावा जब कुंडली में केवल गुरू ही कर्क राशि में छठे, आठवें, प्रथम, चतुर्थ, सप्तम या दशम भाव में बैठा हो और अन्‍य सभी ग्रह कमजोर हों तो व्‍यक्‍ति के मोक्ष प्राप्‍ति के योग बनते हैं ।
3- जब जन्‍मकुंडली में गुरु लग्‍न स्‍थान में मीन राशि में बैठा हो या दसवें घर में विराजमान हो या किसी अशुभ ग्रह की दृष्टि उस पर न पड़ रही हो तो ऐसी स्थिति में मोक्ष प्राप्ति का योग बनता है ।

 

इन उपायों के द्वारा ईश्वर का प्राप्त किया जा सकता हैं
1- मोक्ष प्रदानता की डोर ईश्‍वर के हाथ में है लेकिन मनुष्‍य अपने सत्‍कर्मों से भी मोक्ष पा सकता है ।
2- यदि ईश्वर दर्शन चाहते हैं तो इसके लिए जरूरी है कि सबसे पहले आप वासना से भरे भावों को अपने मन से दूर कर दें ।
3- योनि-पूजन, लिंगार्चन, भैरवी-साधना, चक्र-पूजा जैसी गुप्त साधनाओं के द्वारा भी ईश्वर की प्राप्‍ति संभव है ।
3- स्त्रियों के प्रति सम्‍मान और आदर भाव रखने वाला व्‍यक्‍ति भी शीघ्र ईश्वर को प्राप्‍त कर सकता है ।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/dharma-karma/bhagwan-ke-darshan-kaise-kare-4001701/

शनिवार शाम को एक बार जरूर करें ये काम- लेकिन किसी से कहना नहीं..


अगर गाड़ी, बंगला और लग्जरी जीवन जीने की चाहत हो तो शनिवार को शाम के समय इस एक काम को जरूर कर लें, पर ध्यान रखे इस उपाय को करने के बाद किसी को भी बताना नहीं हैं नहीं तो इसका प्रभाव तुरंत खत्म हो जायेगा । शायद आपने अमीर बनने के लिए अनेक टोटके और उपाय जरूर किये होंगे लेकिन इतना शक्तिशाली उपाय कभी नहीं किया होगा । शनिवार का शनि देव का दिन माना जाता है, और शनि देव की कृपा पाने के लिए व्यक्ति अनेक प्रकार के टोने टोटके, उपाय करता है लेकिन कभी सफलता मिलती हैं तो कभी नहीं । अगर वाकई लग्जरी लाईफ का आनंद लेना हैं तो इस उपाय को एक बार जरूर करें ।

 

1- शनिवार के दिन शाम के समय काले घोड़े की नाल या फिर बहुत पुरानी काले रंग की नाव की कील से बनी लोहे की अंगूठी बनाकर सीधे हाथ की मध्यमा उंगली में हनुमान जी के मंदिर में जाकर हनुमान जी के चरणों का सिंदूर उस पर लगाने के बाद 7 बार हनुमान चालीसा का पाठ करके अंगुठी का पहन लें । इस उपाय के बाद शनि से संबधित सभी तरह के दोषों से राहत मिलेगी ।

 

2- शनि की कृपा पाने के लिए शनिवार के दिन सूर्यास्त के समय शनि मंदिर में थोड़े से काले तिल, आटा, शक्कर इन तीनों चीजों को लेकर जाये । वहां इन सभी को शनि देव के सामने रखकर धन प्राप्ति की कामना से शनि देव के बीज मंत्र का 108 बार जप करें । जप पूरा होने के बाद सभी सामग्रियों साथ में लेकर पीपल के पेड़ के पास जाकर पीपल के पत्तों पर रख दें । ध्यान रखे इस कार्य को करते हुये कोई भी आपको देखें नहीं और ना ही आप भी किसे कहे । इस उपाय के बाद लक्ष्मीजी आपका साथ कभी नहीं छोड़ेगी ।

 

3- शनिवार को सूर्यास्त के आधे घंटे बाद काले तिल, काला कपड़ा, कंबल, लोहे के बर्तन, काले उड़द की दाल ये सभी चीज ऐसे व्यक्ति को दान करें जो केवल भिक्षा मांगकर ही गुजारा करता हों । इतना करने के बाद घर में बनी हुई ताजी रोटी में सरसों का तेल लगाकर किसी काले कुत्ते खिला दें । इस उपाय के बाद पैसा बरसने लगेगा ।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/dharma-karma/shanivar-ko-dhan-prapti-ke-upay-in-hindi-4000641/

शनिवार के दिन करें ये 4 विशेष उपाय, चमक जाएगी आपकी किस्मत


ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक न्याय के देवता शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए बहुत से उपाय किए जाते हैं। माना जाता है की शनिदेव की अशुभ दृष्टि से व्यक्ति के जीवन में कई कठिनाईयां आती है। बने बनाए कार्य बिगड़ने लगते हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार वैसे तो हर ग्रह की महादशा और अंतर्दशा सभी राशियों पर चलती रहती है। जिसके उच्छे व बुरे दोनों परिणाम देखने को मिलते हैं। व्यक्ति के जीवन में, लेकिन लोगों को अगर किसी ग्रह की महादशा से सबसे ज्यादा डर लगता है तो वह है शनि की महादशा। इसके कारण कई लोग परेशान हो जाते हैं की आखिर क्या किया जाए, लेकिन इससे भी ज्यादा मुश्किल का समय होता है उनके लिए जिन लोगों की कुंडली में शनि ग्रह गलत जगह स्थापित हो, ऐसे में व्यक्ति को जीवन भर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं परेशानियों का हल करने के उपाय ज्योतिष में बताए गए हैं, आइए जानते हैं...

shani upay

1. अपार विद्या और बुद्धि की प्राप्ति के लिए शनिवार की रात को रक्त चंदन से अनार की कलम से 'ॐ ह्वीं' को भोजपत्र पर लिख कर नित्य पूजा करना चाहिए।

2. शनिवार के दिन काले कुत्ते, काली गाय को रोटी और काली चिड़िया को दाने डालने चाहिए। इससे व्यक्ति के जीवन की सभी रुकावटें दूर हो जाती है।

3. शनिवार को तेल से बने पदार्थ भिखारी को खिलाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं।

4. शनिवार के दिन अपनी लंबाई के बराबर लाल रेश्मी सूत नाप लें। इसके बाद बरगद का एक पत्ता तोड़कर उसे स्वच्छ जल से धोकर पोंछ लें और पत्ते पर अपना नापा हुआ रेशमी सूत लपेट दें। इसके बाद पत्ते को बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। यह उपाय आप किसी भी शनिवार को अच्छे मुहूर्त व चौघड़िये में कर सकते हैं। इस उपाय से सभी बाधाएं दूर होगी और आपका भाग्य चमक जाएगा।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/dharma-karma/bhagya-chamkane-ke-liye-shanivar-ke-upay-in-hindi-3997448/

इस उपाय से नींद न आना एवं डरावने सपने की समस्या हो जाती है दूर


आजकल नींद नहीं आने की बीमारी और बुरे डरावने स्वप्न की समस्या हर दूसरे व्यक्ति के मुख से सुनाई देती हैं । कभी-कभी व्यक्ति का मन किसी प्रकार की घटना से इतना क्षुब्ध हो जाता है जिसके कारण न तो नींद ही ठीक से आती है और यदि थोड़ी नींद आती भी है तो तरह-तरह के बुरे डरावने सपने नींद नहीं आने देते, और व्यक्ति दु:स्वप्नों से इतना तंग आ जाता है कि उसे सोने से भी डर लगने लगता है । अगर आपको या आपके कोई प्रिय को ऐसी परेशानी हो तो आज ही नीचे दिये उपायों को एक बार जरूर आजमाएं, उपरोक्त समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाती हैं ।

 

बुरे स्वप्न और नींद नहीं आने की समस्या से बचने के लिए ये उपाय करें

1- यदि किसी को नींद न आती हो तो हाथ-पैर धोकर सोते समय इस मन्त्र का जप 7 बार करे सो जाये, अच्छी नींद आने लगेगी ।
अगस्तिर्माधवश्चैव मुचुकुन्दो महाबल : ।
कपिलो मुनिरास्तीक: पंचैते सुखशायिन: ।।

 

2- रात को सोने से पहले इस मन्त्र जप 3 या 5 बार करके सो जाये बुरे स्वप्न आना बंद हो जायेंगे ।
या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।

 

bure sapne ke upay

3- सोते समय बिस्तर पर आंख बंद करके बैठ जाये एवं एकाग्रचित्त होकर 5 बार गहरी सांस लेने के बाद इस प्रार्थना को मन ही मन बोले- मैं शान्त और संतुलित हूँ । मेरे मन में किसी प्रकार की चंचलता, व्याकुलता या बुराई नहीं है क्योंकि मेरे अंदर साक्षात् ईश्वर विराजमान हैं । उन्हीं की शक्ति मुझमें काम कर रही है । मेरी शान्ति को कोई भंग नहीं कर सकता । इस प्रार्थना को रोजाना सोते समय 7 बार दुहराएं । तुरन्त ही आपका मन हल्का हो जाएगा और गहरी नींद आने लगेगी ।

 

 

4- यदि किसी को बुरे स्वप्न आते हों तो रात्रि में हाथ-पैर धोकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके इस मन्त्र को 21 बार उच्चारण करने के बाद सो जाये बुरे स्वप्न आने बंद हो जाएंगे ।
वाराणस्यां दक्षिणे तु कुक्कुटो नाम वै द्विज: ।
तस्य स्मरणमात्रेण दु:स्वप्न सुखदो भवेत् ।।

 

 

5- रात्रि में सोते समय आंख बंद करके बोले हे परमपिता, जो दु:खदायक वस्तुएं हों, उन्हें हमसे दूर हटा दीजिए । जो सब दु:खों से रहित कल्याणप्रद है, जिन चीजों से हमें आत्मिक सुख प्राप्त हो, उन्हें ही हमें प्रदान कीजिये । इसके बाद नीचे के मंत्र को 7 बार जप कर लें । मंत्र- ।। ॐ विश्वानि देव सवितु: दुरितानि परा सुव यद् भद्रं तन्न आ सुव ।।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/dharma-karma/bure-sapno-ko-rokne-ka-upay-in-hindi-3996205/

इस दिन सूर्यास्त के समय चुपके से करें यह काम, बार-बार होने वाली पैसों की टेंशन हमेशा के लिए खत्म


गुरुवार का दिन गुरु बृहस्पति की उपासना का दिन माना जाता हैं । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह दिन बहुत ही ज्यादा सकारात्मक ऊर्जा से भरा पूरा माना जाता हैं । अगर किसी के जीवन में धन संबंधित कोई परेशानी हो तो गुरुवार के दिन शाम के समय ज्योतिष में बतायें गये इन उपायों को कुछ नियमों का पालन करते हुये किया जाये तो अनेक समस्यों के साथ पैसों की तंगी हमेशा के लिए खत्म हो जायेंगी ।

 

गुरुवार के दिन सूर्यास्त के ठीक बाद ही इन उपायों को करना हैं एवं ध्यान रखें ऐसा करते समय आपको कोई भी रोके टोके नहीं ।

1- गुरुवारे के दिन शाम को गोधूली बेला में गाय को आटे की लोई में कच्ची चने की दाल रखकर खिलाएं ।
2- हर गुरुवार को सूर्यास्त के समय शिवमंदिर में जाकर शंकर जी को बेसन के 5 लड्डूओं का भोग लगाएं ।
3- गुरुवार को दिनभर उपवास रखकर पीले कपड़े पहने एवं शाम को किसी गरीब कन्या को पीली रूमाल भेट करें । जींदगी पर पैसों की कमी नहीं रहेगी ।


4- इस दिन उपवास में बिना नमक का भोजन ही करें । अगर फल ले तो वें पीले ही हो, जैसे केले या आम आदि ।
5- शाम को सूर्यास्त के बाद भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ पीपल के वृक्ष के नीचे विष्णुजी के निमित्त 5 दीपक जलाकर श्री विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ वहीं बैठकर करें ।
6- गुरुवार के दिन सुबह एवं शाम को दोनों समय की पूजा के बाद अपने माथे पर केसर या हल्दी का पीला तिलक लगाएं ।
7- गोधूली बेला में केले के पेड़ के नीचे आटे बना दीपक गाय के घी का जलाने से लक्ष्मी जी सदैव आपके घर में निवास करती रहेगी ।
8- सूर्यास्त के समय लक्ष्मीनारायण मंदिर या फिर अपने घर में ही इस मंत्र का 1100 बार मोती का माला से जप करें ।
मंत्र- ।। ऊँ बृं बृहस्पते नमः ।।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/dharma-karma/guruvar-ko-dhan-prapti-ke-achuk-upay-3995572/

बस एक बार कर लें यह छोटा सा उपाय- करोड़ों के मालिक बनने में देर नहीं लगेगी


धन प्राप्ति के लिए सबसे अच्छा दिन दीपावली के अलावा शुक्रवार को भी माना जाता हैं, लेकिन शास्त्रों में कहा गया हैं जब भुख लगे भोजन कर लेना चाहिए वैसे जब जीवन में पैसों की सबसे अधिक जरूरत हो तो इस उपाय को किसी भी दिन कोई भी कर सकता हैं और इसे करना वाला कभी निराश नहीं हो सकता । मां लक्ष्मी की कृपा अवश्य होती हैं । ऐसा ही एक बहुत ही प्रभावशाली उपाय हैं भवानी अष्टकं का पाठ । इस पाठ से प्रसन्न होकर माँ भवानी अपने शरणागत को प्रचुर मात्रा में धन वैभव प्रदान करती हैं, करोड़ों की संपत्ति का मालिक बना देती हैं एवं उसकी सभी विपत्तियों का नाश भी कर देती हैं ।

 

।। अथ भवानी अष्टकं ।।

1- न तातो न माता न बन्धुर्न दाता, न पुत्रो न पुत्री न भृत्यो न भर्ता ।
न जाया न विद्या न वृत्तिर्ममैव, गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥
अर्थात- हे भवानि, पिता, माता, भाई, दाता, पुत्र, पुत्री, भृत्य, स्वामी, स्त्री, विद्या और वृत्ति–इनमें से कोई भी मेरा नहीं है, हे देवि! एकमात्र तुम्हीं मेरी गति हो, तुम्ही मेरी गति हो ।

2- भवाब्धावपारे महादुःखभीरुः पपात प्रकामी प्रलोभी प्रमत्तः ।
कुसंसारपाशप्रबद्धः सदाहं गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥
अर्थात- मैं अपार भवसागर में पड़ा हूँ, महान दु:खों से भयभीत हूँ, कामी, लोभी, मतवाला तथा घृणायोग्य संसार के बन्धनों में बँधा हुआ हूँ, हे भवानि! अब एकमात्र तुम्हीं मेरी गति हो ।

 

3- न जानामि दानं न च ध्यानयोगं न जानामि तन्त्रं न च स्तोत्रमन्त्रम् ।
न जानामि पूजां न च न्यासयोगम् गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥
अर्थात- हे देवि, मैं न तो दान देना जानता हूँ और न ध्यानमार्ग का ही मुझे पता है, तन्त्र और स्तोत्र-मन्त्रों का भी मुझे ज्ञान नहीं है, पूजा तथा न्यास आदि की क्रियाओं से तो मैं एकदम कोरा हूँ, अब एकमात्र तुम्हीं मेरी गति हो ।

4- न जानामि पुण्यं न जानामि तीर्थं न जानामि मुक्तिं लयं वा कदाचित् ।
न जानामि भक्तिं व्रतं वापि मातर् गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥
अर्थात- न पुण्य जानता हूँ, न तीर्थ, न मुक्ति का पता है न लय का। हे माता! भक्ति और व्रत भी मुझे ज्ञात नहीं है, हे भवानि! अब केवल तुम्हीं मेरा सहारा हो ।

 

dhan prapti ke upya

5- कुकर्मी कुसंगी कुबुद्धिः कुदासः कुलाचारहीनः कदाचारलीनः ।
कुदृष्टिः कुवाक्यप्रबन्धः सदाहम् गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥
अर्थात- मैं कुकर्मी, बुरी संगति में रहने वाला, दुर्बुद्धि, दुष्टदास, कुलोचित सदाचार से हीन, दुराचारपरायण, कुत्सित दृष्टि रखने वाला और सदा दुर्वचन बोलने वाला हूँ, हे भवानि! मुझ अधम की एकमात्र तुम्हीं गति हो ।

6- प्रजेशं रमेशं महेशं सुरेशं दिनेशं निशीथेश्वरं वा कदाचित् ।
न जानामि चान्यत् सदाहं शरण्ये गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥
अर्थात- मैं ब्रह्मा, विष्णु, शिव, इन्द्र, सूर्य, चन्द्रमा तथा अन्य किसी भी देवता को नहीं जानता, हे शरण देने वाली भवानि! एकमात्र तुम्हीं मेरी गति हो ।

 

7- विवादे विषादे प्रमादे प्रवासे जले चानले पर्वते शत्रुमध्ये ।
अरण्ये शरण्ये सदा मां प्रपाहि गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥
अर्थात- हे शरण्ये, तुम विवाद, विषाद, प्रमाद, परदेश, जल, अनल, पर्वत, वन तथा शत्रुओं के मध्य में सदा ही मेरी रक्षा करो, हे भवानि! एकमात्र तुम्हीं मेरी गति हो ।

8- अनाथो दरिद्रो जरारोगयुक्तो महाक्षीणदीनः सदा जाड्यवक्त्रः ।
विपत्तौ प्रविष्टः प्रणष्टः सदाहं गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥
अर्थात- हे भवानि! मैं सदा से ही अनाथ, दरिद्र, जरा-जीर्ण, रोगी, अत्यन्त दुर्बल, दीन, गूंगा, विपदा से ग्रस्त और नष्ट हूँ, अब तुम्हीं एकमात्र मेरी गति हो ।


।। इति भवान्यष्टकं सम्पूर्णम् ।।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/dharma-karma/dhan-prapti-ke-chamatkari-upya-3995358/

कुंभ में साधु संतों के कुल इतने अखाड़े होते हैं, इनके दर्शन मात्र से दुर्भाग्य भी सौभाग्य में बदल जाता हैं


अगर ये कहा जाये की कुंभ भारतीय संस्कृति का आधार हैं तो अतिशयोक्ति नहीं होगी, क्योंकि भारत में लगने वाला कुंभ का मेला विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन में से एक है, लाखों की संख्या में देश ही नहीं विदेशों के श्रद्धालु भी इस मेले में शामिल होते हैं । भारत की 4 पवित्र नदियों की गोद में हर बारह साल में एक बार कुंभ का मेला लगता हैं । इनमें से हरिद्वार में गंगा जी, उज्जैन में क्षिप्रा जी, नासिक में गोदावरी जी और प्रयागराज (इलाहाबाद) में जहां गंगा, यमुना और सरस्वती का मिलन होता हैं की गोद में लगता हैं । यहां पर हर 6 साल में एक अर्ध कुंभ भी लगता हैं ।

 

कुंभ में अखाड़ों का विशेष महत्व होता हैं, पहले इनकी संख्या कम थी लेकिन अब वर्तमान में कुल 13 अखाड़ें हैं । अखाड़े शब्द की शुरुआत मुगलकाल के दौर से हुई, अखाड़ा साधुओं का वह दल होता है, जो शस्त्र विद्या में भी पारंगत रहता हैं और इनके संतों के दर्शन भी सरलता से नहीं हो पाते है, लेकिन इनके दर्शन जिसे हो जाये, जिस पर इनकी दष्टि पड़ जाये तो उनके जीवन का दुर्भाग्य भी सौभाग्य में बदल जाता हैं ।

kumbh mela

कुल तीन संप्रदाय हैं और इन तीनों में कुल मिलाकर 13 अखाड़ें हैं ।

1- शैव संप्रदाय

2- वैष्णव संप्रदाय

3- उदासीन संप्रदाय

 

शैव संप्रदाय में कुल 7 अखाड़ें शामिल हैं-

1- श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी- दारागंज प्रयाग (उत्तर प्रदेश)
2- श्री पंच अटल अखाड़ा- चैक हनुमान, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
3- श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी- दारागंज, प्रयाग (उत्तर प्रदेश)
4- श्री तपोनिधि आनंद अखाड़ा पंचायती- त्रंब्यकेश्वर, नासिक (महाराष्ट्र)
5- श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा- बाबा हनुमान घाट, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
6- श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा- दशाश्वमेघ घाट, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
7- श्री पंचदशनाम पंच अग्नि अखाड़ा- गिरीनगर, भवनाथ, जूनागढ़ (गुजरात)

बैरागी वैष्णव संप्रदाय में कुल 3 अखाड़े शामिल हैं-


1- श्री दिगम्बर अनी अखाड़ा- शामलाजी खाकचौक मंदिर, सांभर कांथा (गुजरात)
2- श्री निर्वानी आनी अखाड़ा- हनुमान गादी, अयोध्या (उत्तर प्रदेश)
3- श्री पंच निर्मोही अनी अखाड़ा- धीर समीर मंदिर बंसीवट, वृंदावन, मथुरा (उत्तर प्रदेश)

उदासीन संप्रदाय में भी कुल 3 अखाड़े शामिल हैं-
1- श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा- कृष्णनगर, कीटगंज, प्रयाग (उत्तर प्रदेश)
2- श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन- कनखल, हरिद्वार (उत्तराखंड)
3- श्री निर्मल पंचायती अखाड़ा- कनखल, हरिद्वार (उत्तराखंड)

उपरोक्त 13 अखाड़ों के अलावा भी सिख, वैष्णव और शैव साधु-संतों के अखाड़े हैं जो कुंभ स्नान में शामिल होते हैं । लेकिन मान्यता केवल तेरह अखाड़ों की ही प्राप्त हैं ।

kumbh mela

Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/dharma-karma/kumbh-mela-allahabad-2019-3994888/

विचार मंथन : भगवान अपने भक्तों की रक्षा और पालन पोषण करते हैं - स्वामी विवेकानंद


स्वामी विवेकानंद का सम्पूर्ण जीवन एक दीपक के समान है जो हमेशा अपने प्रकाश से इस संसार को जगमगाता रहेगा और उनका जीवन सदा हम लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा । एक बार स्वामी विवेकानंद ट्रेन से यात्रा कर रहे थे और हमेशा की तरह भगवा कपडे और पगड़ी पहनी हुई थी । ट्रेन में यात्रा कर रहे एक अन्य यात्री को उनका ये रूप बहुत अजीब लगा और वो स्वामी जी को कुछ अपशब्द कहने लगा बोला – तुम सन्यासी बनकर घूमते रहते हो कुछ कमाते धमाते क्यों नहीं हो, तुम लोग बहुत आलसी हो, लेकिन स्वामी जी दयावान थे उन्होंने उसकी तरफ बिलकुल भी ध्यान नहीं दिया और हमेशा की तरह चेहरे पे तेज लिए मुस्कुराते रहे ।

 

उस समय स्वामी जी को बहुत भूख लगी हुई थी क्यूंकि उन्होंने सुबह से कुछ खाया पिया नहीं था। स्वामी जी हमेशा दूसरों के कल्याण के बारे में सोचते थे अपने खाने का उन्हें ध्यान ही कहाँ रहता था । एक तरफ स्वामी जी भूख से व्याकुल थे वहीं वो दूसरा यात्री उनको अप्शब्द और बुरा भला कहने में कोई कमी नहीं छोड़ रहा था । इसी बीच स्टेशन आ गया और स्वामी जी और वो यात्री दोनों उतर गए। उस यात्री ने अपने बैग से अपना खाना निकाला और खाने लगा और स्वामी जी से बोला – अगर कुछ कमाते तो तुम भी खा रहे होते ।

स्वामी जी बिना कुछ बोले चुपचाप थकेहारे एक पेड़ के नीचे बैठ गए और बोले मैं अपने ईश्वर पे विश्वास करता हूँ जो वो चाहेंगे वही होगा । अचानक ही कहीं से एक आदमी खाना लिए हुए स्वामी जी के पास आया और बोला क्या आप ही स्वामी विवेकानंद हैं और इतना कहकर को स्वामी जी के कदमों में गिर पड़ा और बोला कि मैंने एक सपना देखा था जिसमें खुद भगवान ने मुझसे कहा कि मेरा परम भक्त विवेकानंद भूखा है तुम जल्दी जाओ और उसे भोजन देकर आओ ।

 

बस इतना सुनना था कि वो यात्री जो स्वामी जी की आलोचना कर रहा था भाग कर आया और स्वामी जी के कदमों में गिर पड़ा, बोला – महाराज मुझे क्षमा कर दीजिये मुझसे बहुत बड़ी भूल हुई है मैंने भगवान को देखा नहीं है लेकिन आज जो चमत्कार मैंने देखा उसने मेरे भगवान में विश्वास को बहुत ज्यादा बड़ा दिया है । स्वामी जी ने दया भाव से व्यक्ति को उठाया और गले से लगा लिया । स्वामी जी के जीवन से जुडी ये सत्य घटना बहुत अधिक प्रभावित करती है और बताती है कि किस तरह भगवान अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और पालन पोषण करते हैं।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/dharma-karma/daily-thought-vichar-manthan-swami-sarvadanand-3989844/

इस उपाय को करने से साक्षात् प्रकट हो जाते है साई नाथ भगवान, पूरी कर देते है हर मनोकामना


अगर साई बाबा की कृपा पाना हैं, उनके दर्शन करना चाहते हैं तो गुरुवार के दिन किसी भी साई मंदिर में जाकर या फिर अपने घर में साईं बाबा की फोटों के सामने बैठक एक पीले कागज पर लाल रंग के पेन से साई के आशीर्वाद रूपी इन ग्यारह वचनों को शांत चित होकर बाबा का ध्यान करते हुये लिख लें । लिखने के बाद उस कागज को कुछ देर के लिए साई बाबा के चरणों में रख दें, और प्रार्थना करें की बाबा आपकी सभी मनोकामना पूरी करने के साथ दर्शन भी दें । अब उस पीले कागज को अपने साथ घर ले आयें एवं उसे अपने पूजा स्थल, शयन कक्ष या फिर अपने कार्य स्थल पर लगा दें । ये उपाय इतना शक्तिशाली है कि तुरंत ही चमत्कार दिखाई देने लगते हैं ।

 

साई बाबा के इन वचनों को पीले कागज पर लाल स्याही से ही लिखना हैं और लिखते समय मौन शांत रहते हुए बाबा का ध्यान करते रहना हैं-

 

।। जो शिरडी में आएगा, आपद दूर भगाएगा ।।
।। चढ़े समाधि की सीढ़ी पर, पैर तले दुख की पीढ़ी पर ।।
।। त्याग शरीर चला जाऊंगा, भक्त हेतु दौड़ा आऊंगा ।।
।। मन में रखना दृढ़ विश्वास, करे समाधि पूरी आस ।।
।। मेरी शरण आ खाली जाए, हो तो कोई मुझे बताए ।।
।। जैसा भाव रहा जिस जन का, वैसा रूप हुआ मेरे मन का ।।
।। भार तुम्हारा मुझ पर होगा, वचन न मेरा झूठा होगा ।।
।। आ सहायता लो भरपूर, जो मांगा वो नहीं है दूर ।।
।। मुझमें लीन वचन मन काया , उसका ऋण न कभी चुकाया ।।
।। धन्य धन्य व भक्त अनन्य , मेरी शरण तज जिसे न अन्य ।।

 

इस उपाय को करते समय पूर्ण श्रद्धा और विश्वास का ध्यान रखें । जब तक पीले कागज पर पूरा लिखना न हो जाये तब तक अपने स्थान से उठना नहीं । इसके बाद आप देखेंगे की साई नाथ कैसे आपकी हर मनोकामना को पूरी कर देते हैं ।

sai baba

Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/dharma-karma/sai-baba-ke-chamatkari-upay-in-hindi-3989670/

इस सरल मगर शक्तिशाली उपाय से तुरंत कृपा करते हैं, भगवान श्रीकृष्ण, आज ही करें..


भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जप हो, उनकी कोई वंदना, स्त्रोत स्तुति या फिर उनके मनभावन भजन हो, पूरी श्रद्धा के साथ किया जाये तो वे शीघ्र ही प्रसन्न होकर कृपा कर देते हैं । भगवान श्री कृष्ण के स्त्रोतों में एक बहुत ही शक्तिशाली उपाय है जिसे कृपाकटाक्ष स्तोत्र कहा जाता हैं जिसकी रचना स्वयं भगवान आदि शंकराचार्य ने की हैं । इसका प्रभाव इतना हैं कि इसे करने के बाद किसी भी जप, पूजा पाठ की जरूर नहीं पड़ती केवल इस स्तोत्र का नित्य पाठ करने से भगवान श्रीकृष्ण सभी मनोकामना पूरी कर देते हैं ।

 

।। अथ श्रीकृष्ण कृपाकटाक्ष स्तोत्र ।।
1- भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं, स्वभक्तचित्तरंजनं सदैव नन्दनन्दनम् ।
सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं, अनंगरंगसागरं नमामि कृष्णनागरम् ॥
अर्थात– व्रजभूमि के एकमात्र आभूषण, समस्त पापों को नष्ट करने वाले तथा अपने भक्तों के चित्त को आनन्द देने वाले नन्दनन्दन को सदैव भजता हूँ, जिनके मस्तक पर मोरमुकुट है, हाथों में सुरीली बांसुरी है तथा जो प्रेम-तरंगों के सागर हैं, उन नटनागर श्रीकृष्णचन्द्र को नमस्कार करता हूँ ।

 

2- मनोजगर्वमोचनं विशाललोललोचनं, विधूतगोपशोचनं नमामि पद्मलोचनम् ।
करारविन्दभूधरं स्मितावलोकसुन्दरं, महेन्द्रमानदारणं नमामि कृष्ण वारणम् ॥
अर्थात– कामदेव का मान मर्दन करने वाले, बड़े-बड़े सुन्दर चंचल नेत्रों वाले तथा व्रजगोपों का शोक हरने वाले कमलनयन भगवान को मेरा नमस्कार है, जिन्होंने अपने करकमलों पर गिरिराज को धारण किया था तथा जिनकी मुसकान और चितवन अति मनोहर है, देवराज इन्द्र का मान-मर्दन करने वाले, गजराज के सदृश मत्त श्रीकृष्ण भगवान को मैं नमस्कार करता हूँ ।

 

3- कदम्बसूनकुण्डलं सुचारुगण्डमण्डलं, व्रजांगनैकवल्लभं नमामि कृष्णदुर्लभम् ।
यशोदया समोदया सगोपया सनन्दया, युतं सुखैकदायकं नमामि गोपनायकम् ॥
अर्थात– जिनके कानों में कदम्बपुष्पों के कुंडल हैं, जिनके अत्यन्त सुन्दर कपोल हैं तथा व्रजबालाओं के जो एकमात्र प्राणाधार हैं, उन दुर्लभ भगवान कृष्ण को नमस्कार करता हूँ; जो गोपगण और नन्दजी के सहित अति प्रसन्न यशोदाजी से युक्त हैं और एकमात्र आनन्ददायक हैं, उन गोपनायक गोपाल को नमस्कार करता हूँ ।

sri krishna

4- सदैव पादपंकजं मदीय मानसे निजं, दधानमुक्तमालकं नमामि नन्दबालकम् ।
समस्तदोषशोषणं समस्तलोकपोषणं, समस्तगोपमानसं नमामि नन्दलालसम् ॥
अर्थात– जिन्होंने मेरे मनरूपी सरोवर में अपने चरणकमलों को स्थापित कर रखा है, उन अति सुन्दर अलकों वाले नन्दकुमार को नमस्कार करता हूँ तथा समस्त दोषों को दूर करने वाले, समस्त लोकों का पालन करने वाले और समस्त व्रजगोपों के हृदय तथा नन्दजी की वात्सल्य लालसा के आधार श्रीकृष्णचन्द्र को नमस्कार करता हूँ ।

 

5- भुवो भरावतारकं भवाब्धिकर्णधारकं, यशोमतीकिशोरकं नमामि चित्तचोरकम् ।
दृगन्तकान्तभंगिनं सदा सदालिसंगिनं, दिने-दिने नवं-नवं नमामि नन्दसम्भवम् ॥
अर्थात– भूमि का भार उतारने वाले, भवसागर से तारने वाले कर्णधार श्रीयशोदाकिशोर चित्तचोर को मेरा नमस्कार है। कमनीय कटाक्ष चलाने की कला में प्रवीण सर्वदा दिव्य सखियों से सेवित, नित्य नए-नए प्रतीत होने वाले नन्दलाल को मेरा नमस्कार है ।

 

6- गुणाकरं सुखाकरं कृपाकरं कृपापरं, सुरद्विषन्निकन्दनं नमामि गोपनन्दनं ।
नवीन गोपनागरं नवीनकेलि-लम्पटं, नमामि मेघसुन्दरं तडित्प्रभालसत्पटम् ।।
अर्थात– गुणों की खान और आनन्द के निधान कृपा करने वाले तथा कृपा पर कृपा करने के लिए तत्पर देवताओं के शत्रु दैत्यों का नाश करने वाले गोपनन्दन को मेरा नमस्कार है। नवीन-गोप सखा नटवर नवीन खेल खेलने के लिए लालायित, घनश्याम अंग वाले, बिजली सदृश सुन्दर पीताम्बरधारी श्रीकृष्ण भगवान को मेरा नमस्कार है।

 

7- समस्त गोप मोहनं, हृदम्बुजैक मोदनं, नमामिकुंजमध्यगं प्रसन्न भानुशोभनम् ।
निकामकामदायकं दृगन्तचारुसायकं, रसालवेणुगायकं नमामिकुंजनायकम् ।।
अर्थात– समस्त गोपों को आनन्दित करने वाले, हृदयकमल को प्रफुल्लित करने वाले, निकुंज के बीच में विराजमान, प्रसन्नमन सूर्य के समान प्रकाशमान श्रीकृष्ण भगवान को मेरा नमस्कार है। सम्पूर्ण कामनाओं को पूर्ण करने वाले, वाणों के समान चोट करने वाली चितवन वाले, मधुर मुरली में गीत गाने वाले, निकुंजनायक को मेरा नमस्कार है।

 

8- विदग्ध गोपिकामनो मनोज्ञतल्पशायिनं, नमामि कुंजकानने प्रवृद्धवह्निपायिनम् ।
किशोरकान्ति रंजितं दृगंजनं सुशोभितं, गजेन्द्रमोक्षकारिणं नमामि श्रीविहारिणम् ।।
अर्थात– चतुर गोपिकाओं की मनोज्ञ तल्प (मनरूपी शय्या) पर शयन करने वाले, कुंजवन में बढ़ी हुई विरह अग्नि को पान करने वाले, किशोरावस्था की कान्ति से सुशोभित अंग वाले, अंजन लगे सुन्दर नेत्रों वाले, गजेन्द्र को ग्राह से मुक्त करने वाले, श्रीजी के साथ विहार करने वाले श्रीकृष्णचन्द्र को नमस्कार करता हूँ ।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/dharma-karma/sri-krishna-kripa-kataksha-stotra-benefits-3989156/

21 जनवरी 2019 पौष पूर्णिमा- जाने व्रत विधि एवं शुभ मुहूर्त


हिन्दू धर्म में पूर्णिमा एवं अमावस्या तिथि का अत्यधिक महत्व माना जाता हैं, हिन्दू धर्म ही नहीं अन्य धर्मो में भी इन तिथियों को विशेष रूप से माना जाता हैं । कृष्ण पक्ष में अमावस्या तिथि तो शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा तिथि हर माह आती हैं । जिस दिन आकाश में चंद्रमा का आकार पूर्ण होता हैं, उस दिन को पूर्णिमा कहा जाता हैं, एवं जिस दिन चंद्रमा आसमान में बिल्कुल दिखाई न देता वह रात अमावस्या कहलाती हैं । शास्त्रों के अनुसार हर माह की पूर्णिमा पर कोई न कोई त्यौहार अवश्य होता हैं । लेकिन पौष और माघ माह की पूर्णिमा का महत्त्व सबसे अत्यधिक माना गया हैं । इस दिन किये किये गये जप,तप, व्रत, दान व तीर्थ स्नान का पुण्य कई गुणा प्राप्त होता हैं ।

 

पौष पूर्णिमा मुहूर्त
पौष पूर्णिमा व्रत 21 जनवरी 2019 दिन सोमवार को हैं । इस पूर्णिमा को पवित्र माह माघ का स्वागत करने वाली मोक्षदायिनी पूर्णिमा कही जाती हैं ।
1- पूर्णिमा तिथि का आरंभ - 20 जनवरी 2019 को दोपहर 2 बजकर 19 मिनट से होगा ।
2- पूर्णिमा तिथि समापन- 21 जनवरी 2019 को सुबह - 10 बजकर 46 मिनट पर हो जायेगा ।

 

पौष पूर्णिमा का महत्व
पौष माह की पूर्णिमा मोक्षदायनी पूर्णिमा भी कहलाती हैं, क्योंकि इसी दिन से माघ महीने में किए जाने वाले स्नान की शुरुआत भी हो जाती है । मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन ब्राह्ममुहूर्त में जो कोई भी पवित्र नदियों में स्नान करता है वह मनुष्य मोक्ष का अधिकारी हो जाता हैं, वह जन्म-मृत्यु के चक्कर से मुक्त हो जाता है । इस दिन जरूरत मंदों को दान करने से जीवन खुशियों से भर जाता हैं । अगर इस दिन स्नान करने के बाद गीले शरीर से सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाये तो व्यक्ति का जीवन सूर्य के समान प्रखर व तेजस्वी होता हैं ।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/dharma-karma/paush-purnima-2019-date-3988821/

शाकम्भरी पूर्णिमा के दिन ऐसा करने से भरा रहेगा अन्न व धन का भंडार


समस्त लोकों का भरण-पोषण करने वाली, अन्न एवं धन के भंडार भर देने वाली, फल, फूलों की वर्षा करने वाली, और तरह-तरह की अन्य भोजन सामग्रियां सभी देवी देवताओं, मनुष्यों, सकल जीव चराचर को अपने हाथ से बांटने वाली आद्य शक्ति माता शाकम्भरी ही हैं । साल 2019 में 21 जनवरी सोमवार के दिन शाकम्भरी पूर्णिमा हैं, इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ माता के इस शक्तिशाली स्तुति का पाठ करने से जीवन में किसी भी प्रकार के अन्न के साथ धन की कमी भी नहीं रहती हैं ।


माँ ब्रह्माणी नमो नमः
हे रुद्राणी नमो नमः
सकराय वासिनी नमो नमः
शाकम्भरी माँ नमोस्तुते

मात सताक्षी नमो नमः
दुर्गम विनाशी नमो नमः
हे सुख-राशि नमो नमः
शाकम्भरी माँ नमोस्तुते

 

संकट हारिणि नमो नमः
कष्ट निवारिणी नमो नमः
माँ भव तारिणी नमो नमः
शाकम्भरी माँ नमोस्तुते

हे जग जननी नमो नमः
कामना पूर्णि नमो नमः
सौम्य रूपणी नमो नमः
शाकम्भरी माँ नमोस्तुते

 

हे परमेश्वरी नमो नमः
त्रिपुर सुंदरी नमो नमः
हे विश्वेश्वरि नमो नमः
शाकम्भरी माँ नमोस्तुते

दुर्गा रूपेण नमो नमः
लक्ष्मी रूपेण नमो नमः
विद्या रूपेण नमो नमः
शाकम्भरी माँ नमोस्तुते

 

भुवन वंदिनी नमो नमः
द्वारा निकन्दिनि नमो नमः
सिंह वाहिनी नमो नमः
शाकम्भरी माँ नमोस्तुते

शक्ति-स्वरूपा नमो नमः
हे भव-भूपा नमो नमः
अनन्त अनूपा नमो नमः
शाकम्भरी माँ नमोस्तुते

 

अति सुख दायिनी नमो नमः
करुणा नयनी नमो नमः
हे वर दायनी नमो नमः
शाकम्भरी माँ नमोस्तुते

मंगल करनी नमो नमः
अमंगल हरणी नमो नमः
अभया वरणी नमो नमः
शाकम्भरी माँ नमोस्तुते

 

सुर धाम निवासिनी नमो नमः
हे अविलासिनि नमो नमः
दैत्य विनाशिनी नमो नमः
शाकम्भरी माँ नमोस्तुते

शैल पुत्री नमो नमः
ब्रह्म-चारिणी नमो नमः
चन्द्रघंटा नमो नमः
शाकम्भरी माँ नमोस्तुते

 

माँ कुष्मांडा नमो नमः
स्कन्द माता नमो नमः
हे कात्यायिनी नमो नमः
शाकम्भरी माँ नमोस्तुते

कालरात्रि नमो नमः
हे महागौरी नमो नमः
सिद्धिदात्री नमो नमः
शाकम्भरी माँ नमोस्तुते

 

हे करुणामयी नमो नमः
हे ममतामयी नमो नमः
भक्त-वत्सला नमो नमः
शाकम्भरी माँ नमोस्तुते

माँ ब्रह्माणी नमो नमः
हे रुद्राणी नमो नमः
सकराय वासिनी नमो नमः
शाकम्भरी माँ नमोस्तुते


*************


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/dharma-karma/shakambari-purnima-2019-date-3988453/

सालों बाद पहले चन्द्रग्रहण पर बन रहा ऐसा महासंयोग, यह उपाय भर देगा सबकी झोली, 21 जनवरी 2019


आगामी 21 जनवरी 2019 सोमवार के दिन जो चंद्रग्रहण लगने जा रहा हैं, ज्योतिषों के मुताबिक साल के पहले चंद्रगृहण को कई सालों बाद एक बड़ा महासंयोग बनने जा रहा है । अगर इस दिन जो कोई भी थोड़े बहुत उपाय कर लेंगे उनकी सभी मनोकामनाएं पूर हो सकती हैं । ऐसी मान्यता हैं की ग्रहण काल के दौरान देवी देवताओं की प्रतिमाओं को स्पर्श करना, पूजा पाठ करना, भोजन करना और शयन करना आदि कर्म वर्जित माने गये है । जाने चंद्रग्रहण पर ऐसा करें जो आपकी झोली हमेशा के लिए भर जायेंगी, या ऐसा क्या नहीं करें जिससे किसी तरह का अशुभ हो सकता है ।

 

ग्रहणकाल में इतना जरूर करें-

1- इस बार साल के पहले चंद्रग्रहण पर विशेष महासंयोग बनने के कारण मीठी चीजों का दान करने से सभी की खाली झोली भर सकती हैं ।
2- चंद्रग्रहण वाले दिन किसी पवित्र तीर्थ नदी में स्नान कर तील से बनी मिठाई का दान गरीबों को करें । धन की समस्या दूर हो जायेंगी ।
3- संभव हो सके तो किसी शिव मंदिर में गाय के घी का दान करें ।
4- ग्रहण के समय अपने इष्ट देव के मंत्र का मानसिक जप करना चाहिए, इससे अद्वतीय पुण्यफल की प्राप्ति होती हैं ।
5- 10- ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरतमंदों को वस्त्रदान से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता हैं ।

chandra grahan

ग्रहण काल में ऐसा भूलकर भी नहीं करे-


1- शास्त्रों के अनुसार चन्द्रग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक नरक में वास करता है ।
2- चन्द्र ग्रहण में तीन प्रहर (9) घंटे पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए । लेकिन बूढ़े, बालक और रोगी डेढ़ प्रहर (साढ़े चार घंटे) पूर्व तक कुछ भी खा, पी सकते है ।
3- ग्रहणकाल में स्पर्श किये हुए वस्त्र आदि की शुद्धि के बाद में उन्हें उपयोग करना चाहिए । ग्रहण समाप्त होने के बाद वस्त्रसहित स्नान करना चाहिए ।


4- ग्रहण के दिन जमीन न खोदे, पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ने चाहिए । बाल तथा वस्त्र नहीं निचोड़ने चाहिए व दांत भी नहीं मांजना चाहिए ।
5- ग्रहण के समय ताला खोलना, सोना, मल-मूत्र का त्याग, मैथुन और भोजन – ये सब कार्य वर्जित हैं एवं ग्रहण के समय कोई भी शुभ व नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए ।
6- ग्रहण के समय सोने से रोगी, लघुशंका करने से दरिद्र, मल त्यागने से कीड़ा, स्त्री प्रसंग करने से और उबटन लगाने से व्यक्ति कोढ़ी होता है ।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/dharma-karma/chandra-grahan-2019-dates-3988102/

परीक्षा शुरू होने से पहले विद्यार्थी कर लें ये उपाय, मनचाही सफलता पाने से कोई नहीं रोक सकता


जैसे ही परीक्षा परीक्षा शरू होने वाली होती हैं पढ़ने वाले बच्चें घबराने लगते हैं । ज्योतिष शास्त्र में विद्यार्थियों की सफलता के ऐसे उपाय बताये गये हैं जिन्हें करने से बच्चों को मनचाही सफलता मिलने लगती हैं । इन उपायों को करने में ज्यादा समय भी बर्बाद नहीं होता, इसे करने के बाद जो विद्यार्थी परीक्षा में जितने अंक प्राप्त करने की इच्छा करता हैं उन्हें उतने ही अंक मिल जाती हैं, और उपाय के बाद जो पढ़ोगे वह हमेशा याद रहेगा, कभी भी भुलेंगे । अगर आप भा परीक्षा में मनचाही सफलता चाहते हो तो इन उपायों में से किसी भी एक उपाय को जरूर करें ।

 

भगवान श्री गणेश जी विद्या बुद्धि व विवेक के देवता कहे जाते हैं और उनकी शरण में जो भी जिस भी उद्देश्य से जाता हैं उनकी वह इच्छा वे पूरी कर देते हैं, पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को अपनी मेहनत का फल भी भरपूर मिलता हैं । विद्यार्थी गणेशजी की कृपा पाने के लिए अपने पढ़ने के टेबल पर गणेश जी के इस उपाय को जरूर करें, यदि छात्र साल भर की पढ़ाई का परिणाम परीक्षा के बाद सफलता हासिल करने के इच्छुक है तो यह उपाय उनके लिए राम बाण साबित हो सकता हैं ।

 

students success


1- विद्यार्थी अपनी पढ़ाई की टेबल पर थोड़े से चावल के ढेरी बनाकर उसके उपर एक पुजा वाली सुपारी में कलावा लपेट कर गणेश जी के प्रतिक के रूप में स्थापित करें । गणेश जी का मुख पूर्व या उत्तर या उत्तर पूर्व ही होना चाहिए ।
2- अपनी प्रिय पुस्तकें और कलम भी वहां गणेश जी के पास दाहिनी ओर रखें दें ।


3- वे पुस्तकें भी गणेश प्रतिमा के सामने रखें जो आपको कठिन लगती हो ।
4- अब वहीं गणेश प्रतिके के सामने कुर्सी पर सामने बैठ जायें, और 5 मिनट का ध्यान करने के बाद गणेश जी के इस छोटे से सरल मंत्र का 108 बार जप करें ।
गणेश महामंत्र ।। ॐ गं गणपतये नमः ।।


5- मंत्र जप के तुरंत बाद गणेशजी का ध्यान करते हुये पढ़ाई शुरू करें, अब आप जो भी पढ़ेंगे वह आपको याद होने लगेगा ।
6- विद्यार्थी हर दिन अपनी पढ़ाई से पूर्व गणेश जी का ध्यान करते हुए 7 बार गणेश जी के नाम का उच्चारण करके ही पढ़ाई शुरू करें ।
7- जिन बच्चों का पढ़ाई में बिलकुल भी मन नहीं लगता हो ऐसे बच्चे गणेश मंदिर में शाम के समय या अपने घर में ही श्रीगणेश चालीसा का पाठ करें ।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/dharma-karma/ganesh-puja-for-students-success-in-exam-3984226/

धन प्राप्ति के रास्ते में आने वाली बाधा को चीर देता हैं यह उपाय- बुधवार को करें


धन प्राप्ति के रास्ते में आने वाली बाधा को चीर देता हैं यह उपाय- बुधवार को करें

शास्त्र में बुधवार का दिन गणेश जी जो विघ्नाहर्ता हैं कि कृपा पाने का दिन बताया गया हैं । अगर किसी के जीवन में बार बार धन प्राप्ति के मार्ग में बाधायें आ रही हो तो केवल बुधवार के गणेश के मंदिर में जाकर इस छोटे मगर चमत्कारी उपाय को एक बार जरूर कर लें । इस उपाय को करते ही करने वाला कुछ ही दिनों में लखपति करोड़पति बन सकता हैं । श्री गणेश जी सभी बाधाओं को दूर कर देते हैं । ध्यान रहे इस उपाय को करते वक्त किसी से भी बात नहीं करें और बार बार अपने स्थान से जब तक उपाय न हो जाय उठना भी नहीं है ।

 

1- बुधवार के दिन एक नारियल जटा वाला गीला लें और उसे सिंदूर कपड़े में लपेट कर किसी भी गणेश मंदिर मे जाकर गणेश जी के चरणों में रखते हुए अपनी मनोकामना को 11 बार मन ही मन उच्चारण करें । इस उपाय के बाद पैसों की समस्या हमेशा के लिए दूर हो जायेगी ।

 

2- बुधवार के दिन सुबह एवं शाम को गणेश मंदिर में जाकर ऊँ गं गणपतये नमः इस मंत्र का जप 108 बार करने के बाद गणेश जी की आरती एवं गणेश चालीसा का पाठ करें । धन आवक में आ रही बाधायें हमेशा के लिए दूर हो जायेगी ।

 

3- एक सवा फिट लाल कलावा लेकर गणेश मंदिर में जायें एवं श्री गणेश जी के चरणों का सिंदूर कलावें में 7 जगह लगाकर उनके चरणों में ही रख दें । अब ऊँ श्रीगणेशाय नमः का 108 बार मन ही मन जप करें । जप पूरा होने के बाद उस लाल कलावा को उठाकर उसमें जप किये मंत्र का 21 बार उच्चारण करते हुए सात जगहों पर गठान लगाकर अपने गले या दाहिने हाथ में बांध लें । इस उपाय जीवन भर पैसों की कमी नहीं हो ।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/dharma-karma/budhwar-ganesh-ji-ke-dhan-upay-in-hindi-3983571/

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत, संतान प्राप्ति में आने वाली बाधाएं हो जाती हैं दूर


नये साल में पुत्रदा एकादशी 17 जनवरी 2019 दिन गुरुवार को है, पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही पौष पुत्रदा एकादशी कहा जाता हैं । शास्त्रोंक्त मान्यता हैं कि इस दिन व्रत उपवास रखकर संतान प्राप्ति की कामना से भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाये तो निसंतानों को संतान की प्राप्ति और इसके प्रभाव से संतान की रक्षा भी होती हैं । जाने इस व्रत का विधान और विधि विधान ।

 

पूजन विधि
1- पुत्रदा पौष एकादशी के पूर्ण शुद्ध होकर संतान प्राप्ति की मनोकामना के हाथ में जल व अक्षत लेकर व्रत करने का संकल्प लें ।
2- इस दिन भगवान श्राकृष्ण के बाल गोपाल रूप की पूजा संतान प्राप्ति के लिए करें, एवं पूरे दिन उपवास रहकर शाम को दीप दान भी करें ।


3- पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने वाले व्रत से पूर्व यानी दशमी के दिन एक ही वक्त वह भी सात्विक भोजन करके उसी दिन से द्वादशी तिथि तक संयमित और ब्रह्मचर्य के नियम का पालन करना चाहिए ।
4- पंचामृत से भगवान विष्णु का स्नान कराके षोडशोपचार पूजन करना चाहिए ।


5- व्रत के अगले दिन गरीबों को भोजन कराकर, दान-दक्षिणा देना चाहिए ।
6- संतान प्राप्त के लिए पति-पत्नी दोनों ही सूर्योदय के समय भगवान श्री कृष्ण के बाल गोपाल रूप की उपासना एवं उनके मंत्र का जप करना चाहिए ।


7- इस संतान प्राप्ति मंत्र की 11 माला का जप अवश्य करना चाहिए । ये जप दोनों पति पत्नी मिलकर ही करे ।
8- मंत्र जप पूरा होने के बाद हवन कुंड़ में आम, गुलर, बेल व पलाश की समिधाओं में अग्निकुंड़ में 108 आहुति गाय के घी की देने से संतान प्राप्ति के प्रबल योग बन जाते हैं ।

 

पुत्रदा एकादशी व्रत मुहूर्त

1- एकादशी तिथि 17 जनवरी 2019 को सूर्योदय से पूर्व ही शुरू हो जायेगी ।
2- एकादशी तिथि का समापन 17 जनवरी 2019 को रात 11 बजकर 34 मिनट पर हो जायेगा
3- व्रत तोड़ने का समय 18 जनवरी को सुबह 7 बजकर 18 मिनट से सुबह ही 9 बजकर 23 मिनट तक ।

pausha putrada ekadashi

Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/dharma-karma/pausha-putrada-ekadashi-2019-in-hindi-3982998/

मकर संक्रांति के दिन भगवान राम भी करते थे ये काम- हर मनोकामना हो जाती थी पूरी


मकर संक्रांति का दिन उनकी पूजा आराधना का दिन होता जिनसे इस सृष्टि का संचालन सुचारू रूप से चलायमान हो रहा हैं यानी की धरती के प्रत्यक्ष भगवान सूर्य नारायण । शास्त्रों में कहा गया हैं सूर्य देव के प्रातः दर्शन कर जल चढ़ाने से मनुष्य के जीवन में सफलता, शांति और शक्ति की प्राप्ति होती हैं । भगवान राम रोज तो सूर्य देव की आराधना करते ही थे लेकिन खासकर मकर संक्रांति के दिन राम जी सूर्यदेव की पूजा उपासना, मंत्र जप आदि करने के बाद सूर्यदेव की इस स्तुति व आरती को करते ही थे, जिससे भगवान सूर्य नारायण प्रसन्न होकर हर मनोकामना पूरी कर देते थे । आप जरूर करें मकर संक्रांति के दिन इस स्तुति को जरूर करें, मनोकामनाएं हो जायेंगी पूरी ।

 

।। अथ सूर्य स्तुति ।।


जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन ।।
त्रिभुवन - तिमिर - निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन ॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन ।।

सप्त-अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी ।
दु:खहारी, सुखकारी, मानस-मल-हारी ॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन ।।

 

सुर - मुनि - भूसुर - वन्दित, विमल विभवशाली ।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली ॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन ।।

सकल - सुकर्म - प्रसविता, सविता शुभकारी ।
विश्व-विलोचन मोचन, भव-बन्धन भारी ॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन ।।

 

कमल-समूह विकासक, नाशक त्रय तापा ।
सेवत साहज हरत अति मनसिज-संतापा ॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन ।।

नेत्र-व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा-हारी ।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी ॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन ।।

सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै ।
हर अज्ञान-मोह सब, तत्त्वज्ञान दीजै ॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन ।।

***********************

 

।। सूर्य देव की आरती ।।

ऊँ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान ।
जगत् के नेत्र स्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा ।
धरत सब ही तव ध्यान, ऊँ जय सूर्य भगवान ।।

सारथी अरूण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी ।।
अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटी किरण पसारे। तुम हो देव महान ।।
ऊँ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान ।।

ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते ।।
फैलाते उजियारा जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान ।।
ऊँ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान ।।


***************


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/dharma-karma/makar-sankranti-surya-dev-aarti-in-hindi-3978712/

SHARE THIS


Subscribe via Email


Explore Jobs/Opportunities
Jobs Jobs / Opportunities / Career
Haryana Jobs / Opportunities / Career
Bank Jobs / Opportunities / Career
Delhi Jobs / Opportunities / Career
Sarkari Naukri Jobs / Opportunities / Career
Uttar Pradesh Jobs / Opportunities / Career
Himachal Pradesh Jobs / Opportunities / Career
Rajasthan Jobs / Opportunities / Career
Scholorship Jobs / Opportunities / Career
Engineering Jobs / Opportunities / Career
Railway Jobs / Opportunities / Career
Defense & Police Jobs / Opportunities / Career
Gujarat Jobs / Opportunities / Career
West Bengal Jobs / Opportunities / Career
Bihar Jobs / Opportunities / Career
Uttarakhand Jobs / Opportunities / Career
Punjab Jobs / Opportunities / Career
Admission Jobs / Opportunities / Career
Jammu and Kashmir Jobs / Opportunities / Career
Madhya Pradesh Jobs / Opportunities / Career
Explore Articles / Stories
Education
Government Schemes
News
Career
Admit Card
Bihar
State Government Schemes
Study Material
Technology
DATA
Public Utility Forms
Travel
Sample Question Paper
Exam Result
Employment News
Scholorship
Syllabus
Festival
Business
Wallpaper
Explore more
Main Page
Register / Login
Like our Facebook Page
Follow on Twitter
Subscrive Our Newsletter Via Nuzzle
Get Updates Via Rss Feed
Sarkari Niyukti
Free Online Practice Set
Latest Jobs
Feed contents
Useful Links
Photo
Video
Post Jobs
Post Contents
Supremedeal : India Business Directory
Find IFSC Code
Find Post Office / Pincode
Contact us
Best Deal

Disclaimer: we only provide job information. we are not associated with any job website. Although we take extreme care for accuracy of the information provided, but you must check the authenticity of the website before applying for the job. We are not responsible for your operation , once you leave our website and apply thereafter. Please recheck the genuineness of the job website from yourself also.

Copyright © 2018. Website template by WebThemez.com