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शरीर को मजबूत बनाए रखने के लिए मिनरल्स हैं जरूरी


शरीर के लिए खनिज तत्त्व (मिनरल्स) अनिवार्य हैं। ये ऐसे तत्त्व होते हैं जिनका निर्माण शरीर स्वयं नहीं करता, इसकी पूर्ति हमें बाहरी स्रोतों से करनी पड़ती है।

इसलिए होती है जरूरत
हड्डियों के लिए कैल्शियम, त्वचा को जिंक, आंतों को कॉपर, फेफड़ों के लिए आयोडीन, हृदय को मैगनीशियम व अन्य अंगों को सेहतमंद रखने के लिए पोटेशियम, बोरोन, कोबाल्ट आदि खनिज पदार्थों की जरूरत होती है। इनकी कमी से थकान, आलस, चिड़चिड़ापन और पैरों में दर्द जैसे लक्षण होते हैं। जो आगे चलकर मधुमेह, हृदय रोग, मोटापा, कैंसर, जोड़ों के दर्द, सिरदर्द, दमा, अस्थमा, कमरदर्द, लकवा, अनिद्रा, पीलिया, टीबी, अल्सर, गैस, कब्ज, गंजापन और एसिडिटी का रूप ले सकते हैं।

शुद्धता का अभाव
फल व सब्जियों को उगाने के लिए आजकल पैस्टिसाइट्स का इस्तेमाल होता है। जिससे इनमें खनिज तत्त्वों की कमी हो जाती है। इसके अलावा पीने के पानी को फिल्टर करने की प्रक्रिया से भी इन तत्त्वों की कमी हो जाती है।

पूर्ति के लिए
इन खनिजों की पूर्ति के लिए नेचुरोपैथी में ठंडे पानी में मिनरल ड्रॉप दी जाती है। मरीज को देखने के बाद ही डॉक्टर इस ड्रॉप की बूंदें मरीज के लिए तय करते हैं। इसे लेने के बाद शरीर की सफाई होती है इसलिए पेशाब अधिक आता है।


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दिल-दिमाग दुरुस्त रखने के लिए खाएं फाइबर


रेशेदार भोजन का नियमित सेवन समय पूर्व मृत्यु की आशंका को 10 फीसदी कम कर देता है। शरीर के कई अंगों को फाइबर से फायदा होता है। रोजाना कम से कम 25 ग्राम फाइबर भोजन में होना चाहिए।

दिमाग :
रोजाना की डाइट में सात ग्राम फाइबर और जोड़ लेंगे तो ब्रेन स्ट्रोक का खतरा सात फीसदी कम हो सकता है।

दिल :
सात ग्राम फाइबर के सेवन से हार्ट डिजीज का खतरा नौ फीसदी कम हो जाता है क्योंकि फाइबर में कोलेस्ट्रॉल घटाने की शक्ति होती है।

कमर :
जो लोग 30 ग्राम या इससे ज्यादा फाइबर रोजाना डाइट में शामिल करते हैं उनकी कमर के आसपास का घेरा नहीं बढ़ता।

किडनी :
रोजाना 21 ग्राम से ज्यादा फाइबर से भरपूर डाइट लेने से किडनी स्टोन की आशंका को 22 फीसदी तक घटाया जा सकता है।

फेफड़े :
फाइबर से ब्रोंकाइटिस, अस्थमा एवं फेफड़े संबंधी कई रोगों का खतरा कम होता है।

प्रमुख स्रोत :
बादाम, टमाटर, ब्रोकली, पालक, दालें, राजमा, पॉपकॉर्न, अंजीर, नाशपाती, खजूर, खोपरा, अलसी के बीज, मूली और शकरकंदी आदि।


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5 गिलास दूध जितनी ताकत देती है 100 ग्राम सहजन


सहजन के फली और फूल से होने वाले स्वास्थ्य लाभ के बारे में तो सभी जानते हैं लेकिन इसकी पत्तियों में मौजूद पौष्टिक तत्वों के बारे में आपको शायद ही पता हो। विशेषज्ञों की मानें तो सहजन की पत्तियां इसके फल और फूलों की तुलना में अधिक पौष्टिक होती हैं।

पोषक तत्त्व हैं कई
महज 100 ग्राम सहजन की पत्तियों में 5 गिलास दूध के बराबर कैल्शियम होता है। वहीं, एक नींबू के रस की तुलना में इससे पांच गुना अधिक विटामिन-सी मिलता है। सहजन की पत्तियों में कैल्शियम और विटामिन-सी के अलावा प्रोटीन, पोटेशियम, आयरन, मैगनीशियम और विटामिन-बी कॉम्पलैक्स भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

इनमें भी लाभदायक
- हैजा, दस्त, पेचिश, पीलिया और कोलाइटिस रोगों में सहजन की पत्तियों का रस फायदेमंद होता है।
- गर्भवती महिला को इसकी पत्तियों का रस देने से डिलीवरी में आसानी होती है।
- सहजन की पत्तियों को पानी में उबाल लें। अब इस पानी को ठंडा होने पर पिएं। इससे कफ में आराम मिलता है।

ये भी हैं फायदे
सहजन की पत्तियां वैसे तो सभी आयु वर्ग के लिए लाभदायक हैं। लेकिन बच्चों व महिलाओं को विशेष लाभ होता है। इसमें कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। आयरन, मैगनीशियम, जिंक और विटामिन की उपलब्धता से शरीर में खून की कमी नहीं होती व मानसिक स्वास्थ्य सुधरता है। इन फलियों से कुपोषण भी दूर होता है। इनमें मौजूद जिंक डायबिटीज के मरीजों के लिए भी लाभकारी है। इसके अलावा हड्डियों में सूजन व दर्द में इसकी पत्तियों को पीसकर लेप करने से आराम मिलता है।

ऐसे करें प्रयोग
इसकी पत्तियों का प्रयोग सब्जी या सांभर में और रस को पानी में उबालकर काढ़े के रूप में किया जाता है।


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61 की उम्र में 10 किमी. दौड़ता व 3-4 घंटे एक्सरसाइज करता हूं : पुनीत


61 की उम्र जहां अक्सर लोग फिटनेस को लेकर कुछ नया करने की हिम्मत नहीं करते हैं वहीं, महाभारत धारावाहिक के दुर्योधन ने 24 किलो वजन कम कर खुद को फिट किया है। वे अभी 4-5 किलो वजन और कम करना चाहते हैं। पुनीत माह में एक बार चीट डे करते हैं। जो जी में आता है वह खाते-पीते हैं। उनकी टेबल पर सभी पसंदीदा चीजें होती हैं। उसदिन खाते समय खुद को कोसते नहीं हैं। पत्रिका हैल्थ टीम से रमेश कुमार सिंह ने उनसे उनकी फिटनेस को लेकर विशेष बातचीत की।
सवाल : 40 के बाद लोगों का वजन तेजी से क्यों बढ़ता है?
जवाब : चालीस की उम्र के बाद कसरत व खानपान की उतनी ही जरूरत होती है जितनी की 18-20 साल की उम्र में। इस उम्र में मेटाबॉलिज्म (भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया) धीमा होने लगता है। कैलोरी खर्च नहीं हो पाती है जो फैट के रूप में शरीर में जमने लगती है। यह पहले शरीर के मध्य भाग में फिर हाथ-पैरों में जमना शुरू हो जाता है जो बीमारियों की वजह बनता है। व्यायाम करेंगे तो मेटाबॉलिज्म सक्रिय रहेगा।
सवाल : डाइट में आप क्या खाते हैं। प्रोटीन की जरूरत कैसे पूरी करते हैं?
जवाब : हिन्दुस्तानी व्यंजन खाने से बेहतर कुछ भी नहीं है। यह दुनिया का सबसे संतुलित आहार है। मैं कीटो डाइट फॉलो करने के साथ कुछ चीजें और लेता हूं। अभी जो डाइट ले रहा हूं उसमें प्रोटीन बहुत जरूरी है। इसके लिए दही, पनीर, रागी का आटा व चना ज्यादा प्रयोग करता हूं। सप्ताह में एक से दो बार नॉनवेज भी खाता हूं।
सवाल : आपने 61 की उम्र में वजन घटाया, इसके पीछे क्या कारण रहे?
जवाब : मेरी लम्बाई छह फीट तीन इंच है और वजन 123 किलोग्राम था। महाभारत प्ले के मंचन के लिए मैं खुद को फिट नहीं पा रहा था। इसलिए मैंने 24 किलो वजन घटाया। ये गलत धारणा है कि केवल जवानी में खूब खाना व कसरत जरूरी है, जबकि 60 की उम्र में भी कसरत व खाना उतना ही जरूरी है।
सवाल : 60 साल के बाद एक्सरसाइज करनी चाहिए?
जवाब : उम्र तो सिर्फ नंबर गेम है। इसे दिमाग में न लाएं। मैं २४ साल का महसूस करता हूं। मेरा मानना है कि जब तक जिंदा हैं तब तक एक्सरसाइज करनी चाहिए। शरीर के साथ मानसिक फिटनेस जरूरी है। मैं एक्सरसाइज के अलावा कुंडलिनी जागृत करने के लिए योग करता हूं। फिटनेस के लिए मांइड, बॉडी, सोल तीनों के लिए योग, ध्यान व व्यायाम जरूरी है।
सवाल : युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे?
जवाब : युवा मसल्स बनाने के लिए जिम में स्टेरॉयड आधारित चीजें न लें। उन्हें समझना चाहिए कि घोड़ा भी तो शाकाहारी है। वह मसल्स के लिए जाना जाता है। संतुलित आहार जमकर लें और एक्सरसाइज करें। मसल्स बनाने के लिए यदि सप्लीमेंट्स लेना चाहते हैं तो हैल्थ एक्सपर्ट से सलाह लें।


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सेहत का खजाना है कच्ची हल्दी, हाेते हैं बहुत फायदे


अच्छे स्वास्थ्य के लिए कच्ची हल्दी का इस्तेमाल बेहद लाभदायक माना जाता है। हल्दी एंटीऑक्सीडेंट, एंटीकैंसर और रक्तविकार दूर करती है। कफ व पित्त का शमन करती है। यही वजह है कि इसे रसोई की शान कहा जाता है। आइए जानते हैं इसके फायदाें के बारे में :-

- कच्ची हल्दी के कसैले रस से मालिश करने पर दांत और मसूड़े मजबूत होते हैं। सूजन दूर होकर दांतों के कीड़े भी खत्म हो जाते हैं।

- खांसी में कफ की समस्या होने पर एक गिलास गर्म दूध में एक-चौथाई चम्मच हल्दी मिलाकर पीना फायदेमंद होता है।

- ऑस्टियोपोरोसिस में रात को सोने से पहले 10 ग्राम कच्ची हल्दी या हल्दी की 1 इंच लंबी कच्ची गांठ को 1 गिलास दूध में उबालें। ठंडा होने पर पिएं।

- मुंह में छाले होने पर एक गिलास पानी में थोड़ी हल्दी मिलाकर कुल्ला करें।

- कच्ची हल्दी की गांठ को अच्छी तरह भूनकर पीस लें। मिश्रण से दर्द वाले दांत की मालिश करें, आराम मिलेगा।

- हल्दी, नमक व सरसों का तेल मिलाएं। दांतों को मजबूत बनाने के लिए इसकी दांतों व मसूड़ों पर मसाज करें।

- पुरानी खांसी या अस्थमा के लिए आधा चम्मच शहद में एक-चौथाई चम्मच हल्दी मिलाकर चाटने से लाभ होता है।

- कच्ची हल्दी की सब्जी बनाकर खाने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।


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चटख रंगों वाले फल और सब्जियां खाएं, राेगाें पर लगाम लगाएं


कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने भी कुदरती सुपर फूड्स को कैंसर, डायबिटीज व दिल की बीमारियों की रोकथाम में कारगर पाया है। शोधकर्ताओं के अनुसार सुपरफूड्स में एंटी ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर पॉलीफेनॉल नामक तत्व होता है, जो कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं का तेजी से खात्मा करता है। नींबू जैसे खट्टे फल शरीर में बनी अतिरिक्त वसा को जला देते हैं और वजन बढ़ने नहीं देते। चटख रंग के फल और सब्जियों को नेगेटिव कैलोरी फूड भी कहा जाता है क्योंकि इनमें मौजूद पानी और फाइबर की मात्रा से शरीर का फैट कम होता है व शरीर स्वस्थ्य रहता है।

एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर
एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर खाद्य पदार्र्थो को 'सुपरफूड्स' कहते हैं क्योंकि इनमें रोग प्रतिरोधकता, याददाश्त और सुंदरता को बढ़ाने का राज छिपा है। डाइट विशेषज्ञ के अनुसार, हमारी रोज की डाइट में कुदरती रंगीन खाद्य पदार्थ शामिल होने से शरीर को एंटीऑक्सीडेंट्स अपने आप मिल जाते हैं। इन फलों व सब्जियों में पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो रोगों से बचाव करने के अलावा उम्र बढऩे की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं।

जितना रंगीन उतना ही टेस्टी और हैल्दी
रंगीन फल या सब्जियों में बीटा-कैरोटीन, विटामिन बी समेत विभिन्न पोषक तत्व अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञ आनंद कुमार के अनुसार सभी फलों एवं सब्जियों में पोषक तत्व होते हैं, चाहे वह हरी हो या फिर किसी और चटख रंग की। जो फल जितना रंगीन होगा, वह उतना ही स्वास्थ्यवर्धक भी होगा।

ध्यान रखें ये बातें
किसी भी सब्जी या फल को प्रयोग में लाने से पहले उसे अच्छी तरह से धो लें क्योंकि कई बार रसायनों के प्रयोग से भी फलों व सब्जियों को चमकदार व उनका आकार बढ़ाया जाता है। जब भी लौकी, तुरई या कद्दू खरीदें तो इन्हें कटवाकर देख लें अगर इसमें बीज दिखाई ना दें तो समझ लें कि ऑक्सीटॉक्सिन कैमिकल का प्रयोग हुआ है। पपीते को 3-4 घंटे पानी में रखने के बाद साफ कपड़े से पौंछकर खाएं या फ्रिज में रखेंं।

कुदरती चटकीले रंग

चटख हरा: हरी व पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मैथी, पुदीना, धनिया, शिमला मिर्च, ककड़ी, फलियां आदि।
चटख लाल: अनार, सेब, तरबूज चुकंदर, टमाटर, आलू बुखारा, लाल शिमला मिर्च आदि।
चटख नारंगी: पपीता, आम, मौसमी, संतरा, गाजर आदि।
चटख नीला/बैंगनी: बैंगन, ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी और चेरी आदि।
चटख पीला: नींबू, बैर , मक्का आदि ।


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#HOLI - होली पर एेसे रखें खाने-पीने का ध्यान


होली के दिन हम दोस्तों, रिश्तेदारों या पड़ोसियों के घर जाते हैं और जमकर खाते हैं। इससे अक्सर फूड पॉइजनिंग की समस्या हो जाती है। इससे बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

पेट संबंधी समस्या -
त्योहार के दिनों में मिठाइयां काफी समय पहले से ही बन जाती हैं। लंबे समय से बनी होने की वजह से इनमें सूक्ष्म बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं जो फूड पॉइजनिंग का कारण बनते हैं। कई बार लोग रंग लगे हाथों से ही पकवान खा लेते हैं जिससे रंगों का कैमिकल पेट में जाकर गड़बड़ी करता है। बाजार में बनाई जाने वाली गुंजिया और अन्य पकवानों में आमतौर पर एक ही तेल का इस्तेमाल किया जाता है। जिससे खाद्य पदार्थ में ट्रांस फैट इक्कठा होने लगता है और मोटापा बढ़ता है। त्योहार के दिन लोग एक साथ अधिक मात्रा में दूध ले लेते हैं इसलिए इन्हें आवश्यकतानुसार गर्म करते रहें। संभव हो तो घर का बना दही और पनीर इस्तेमाल करें।

चाय-कॉफी की अधिकता -
होली के दिन एक घर से दूसरे घर पहुंचते ही चाय या कॉफी का कप तैयार मिलता है, ज्यादा चाय या कॉफी पीने से एसिडिटी की समस्या होने लगती है और भूख मर जाती है। कुछ लोग इस दौरान मीठे से तो परहेज करते हैं लेकिन नमकीन ज्यादा खाते हैं जिससे कैलोरी की मात्रा व कोलेस्ट्रोल लेवल भी बढ़ जाता है। दिनभर तला-भुना खाने के बाद शाम को हल्का भोजन कर सकते हैं। गर्भवती महिलाओं, फीडिंग मदर व बुजुर्गों को तली-भुनी और मसाले वाली चीजों से परहेज करना चाहिए।

सर्विंग प्लेट-
मेहमानों और खुद की सेहत का ध्यान रखने के लिए सर्विंग प्लेट में लो कैलोरी वाली मिठाइयां जैसे रसगुल्ला, बंगाली मिठाई और घर पर बनी हुई मावे की मिठाई रख सकते हैं। कोल्ड ड्रिंक, चाय या कॉफी की जगह ठंडाई, मिल्क शेक, शर्बत या नींबू पानी का प्रयोग कर सकते हैं। नमकीन व पकौड़ी के स्थान पर इडली, खमन या ढोकला प्रयोग करें।


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होली स्पेशल : थाली भी बनाएं रंगीन, मिलेंगे पूरे पोषक तत्व


होली पर सबसे ज्यादा गुजिया, कचौरी, नमक-शकरपारा व ठंडाई का प्रयोग होता है। इसका सेहत पर विपरीत असर पड़ता है। ये अधिक कैलोरी के साथ पाचन तंत्र पर भी गलत प्रभाव डालती हैं। ऐसे अपनी थाली रंगीन कर पूरे पोषक तत्व पा सकते हैं।
हरा : हरी व पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, पुदीना, धनिया, शिमला मिर्च, मैथी, ककड़ी, फलियां आदि।
लाल : अनार, सेब, तरबूज चुकंदर, आलू बुखारा, लाल शिमला मिर्च आदि।
नारंगी : पपीता, आम, मौसमी, संतरा, गाजर आदि।
नीला/बैंगनी : बैंगन, ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी और चेरी आदि।
पीला : नींबू, बेर, मक्का आदि ।
ये गलतियां नहीं करेंगे तो मिलेंगे पूरे विटामिन्स

  • कड़ाही में सब्जियां व अन्य चीजें पकाते समय ढंक कर रखें।
  • सब्जी व फल काटकर न धोएं, विटामिन बी, सी नष्ट हो जाते हैं।
  • खाने की चीजों को फ्रिज में ४ डिग्री पर व फ्रोजन फूड फ्रीजर में रखें।
  • सब्जी कम पानी में पकाएं। इससे पोषक तत्व कम नष्ट होंगे।
  • भोजन ज्यादा न पकाएं। इससे पोषक तत्व नष्ट हो सकते हैं।
  • कटी सब्जी ज्यादा देर पानी में न भिगोएं। पोषक तत्व नष्ट होते हैं।
    - वैशाली सोनी, न्यूट्रीशनिस्ट, बीकानेर

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होली स्पेशल : घर बनाएं कम कैलोरी व आसानी से पचने वाले पकवान


होली पर सबसे ज्यादा गुजिया, कचौरी, नमक-शकरपारा व ठंडाई का प्रयोग होता है। इसका सेहत पर विपरीत असर पड़ता है। कुछ ऐसे तरीके जिनका प्रयोग करने से पकवान में स्वाद के साथ पूरे पोषक तत्व भी मिलेंगे। इस मौसम में पानी की ज्यादा जरूरत होती है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। पाचन क्रिया अच्छी रहती है। इसके लिए नींबू, पानी ले सकते हैं। फू्रट ज्यूस भी सर्व कर सकते हैं। जिसे समय-समय पर लेते रहें।
गुजिया ऐसे बनाएं : गुजिया बनाने के लिए सामान्यत: स्टफिंग के साथ मैदे के मोयन से कवरिंग की जाती है। इसके बाद खौलते तेल या घी में फ्राइ करते हैं। गुजिया की पोषकता बनी रहे इसके लिए पहले स्टफिंग को अच्छे से पका लें। मैदे की बजाय आटे के मोयन का प्रयोग करें। स्टफिंग भरकर गुजिया ओवन में डालें। हल्का तेल या घी स्पे्र कर बेक करें। ओवन नहीं है तो गैस ओवन का प्रयोग कर सकते हैं। मावा घर पर बनाएं तो बेहतर है। बाजार के मावा की गुणवत्ता जांच लें।
गुलाब जामुन, रसगुल्ले : गुलाब जामुन बनाते समय खोया का प्रयोग करें। कम तेल या घी और धीमी आंच में पकाएं। इसका आकार छोटा रखेंगे तो यह जल्द पकेंगे। गुलाब जामुन की अपेक्षा रसगुल्ला ज्यादा पौष्टिक है। इसे और स्वादिष्ट बनाने के लिए रसमलाई की तरह बना सकते हैं। बिना मलाई के दूध से रबड़ी बना लें। इसके बाद इसमें केसर व इलायची डालें। इसके बाद इसे सर्व करें। यह पौष्टिकता से भरपूर होता है। इसमें ट्रांसफैट भी नहीं होता है। लेकिन ध्यान रखें कि कुछ भी अधिक मात्रा में खाना अच्छा नहीं होता है।

- मेधावी गौतम, डायटीशियन, जयपुर


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होली स्पेशल : ऐसे बनाते हैं कम कैलोरी वाली कचौरी


होली पर प्राकृतिक रंग व गुलाल हो और मुंह मीठा करने को घर के बने पोषक तत्वों से भरपूर व सुपाच्य पकवान मिल जाएं तो त्योहार की खुशी दोगुनी हो जाती है। डीप फ्राइ की बजाय सेमी फ्राइ करें, इससे पोषकता बची रहेगी।

कचौरी व नमक पारा
तली आलू व प्याज की स्टफिंग वाली कचौरी खूब खाते हैं। इसे पौष्टिक बनाने के लिए अंकुरित दालों की स्टफिंग कर सकते हैं। इसमें फाइबर व प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है जो पौष्टिक होने के साथ पाचन भी सही रखेगा। चोकरयुक्त आटा मिलाकर नमक पारा बनाएं और गुजिया की तरह ही बेक करें। इससे ट्रांसफैट लेने से बच जाएंगे।
बनाएं ठंडाई: ठंडाई में चीनी का प्रयोग ज्यादा होता है। सामान्यत: होली के दिन लोग दो से चार गिलास तक पीते हैं। मिठास के लिए चीनी की बजाय शहद व गुड़ मिला सकते हैं। शहद में एक स्टार्ची फाइबर भी होता है। यह मिश्रण शरीर में रक्त शर्करा का स्तर संतुलित रखता है। गुड़ में आयरन व पाचक एंजाइम्स पाए जाते हैं। ठंडाई सर्व करते समय गुलाब के पत्ते व अनार के दाने भी डाल सकते हैं।
फ्रूट कस्टर्ड व चाट : होली के दिन फू्रट चाट सर्व कर सकते हैं। तीन-चार तरीके के फल अनार-मौसमी-संतरा व सेब अंगूर पपीता लेकर अच्छे से चॉप करें। इसमें नमक, नींबू व चाट मसाला मिला कर सर्व करें। इसमें फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट व विटामिन भी मिलेगा। इसके अलावा दूध, कस्टर्ड पाउडर मिलाकर फू्रट कस्टर्ड बनाएं। यह मालपुआ व गुलाब जामुन से बेहतर ऑप्शन है।

— मेधावी गौतम, डायटीशियन, जयपुर


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सूजी से बना हैल्दी ब्रेकफास्ट, आपकाे दिनभर रखेगा एनर्जेटिक


हैल्दी ब्रेकफास्ट के लिए सूजी का प्रयोग हलवा, इडली या उपमा के तौर पर किया जाता है। खाने में हल्की व सुपाच्य सूजी गेहूं से बनी होती है। कई जगहों पर इसे रवा के नाम से भी जाना जाता है।आइए जानते हैं इसके फायदों के बारे में -

ऊर्जा का स्रोत :
सुबह इससे बना नाश्ता करने से पूरे दिन शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। नाश्ते में इसके साथ यदि सब्जियों का भी प्रयोग किया जाए तो यह अधिक पौष्टिक हो जाती है।

हृदय संबंधी रोगों में :
सूजी दिल के लिए भी अच्छी है। हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कम करने के साथ हार्टअटैक से भी बचाती है व रक्तसंचार को सही रखती है।

पाचनतंत्र दुरुस्त :
इसमें मौजूद फाइबर पाचनक्रिया को दुुरुस्त रखने में मददगार है। इसमें कैल्शियम, सेलेनियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम जैसे कई मिनरल्स होते हैं जो पाचनतंत्र को सही रखने के लिए जरूरी हैं।

इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक :
इसमें पाया जाने वाला सेलेनियम शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करता है। यह कई तरह के इंफेक्शन से बचाता है साथ ही प्रतिरोधक तंत्र को अनेक प्रकार की बीमारियों से लडऩे के लिए तैयार करता है।

एनीमिया में लाभकारी :
सूजी में पर्याप्त मात्रा में आयरन होता है। इससे शरीर में खून की कमी नहीं होती व विभिन्न अंगों को भरपूर एनर्जी मिलती रहती है।

मजबूत नर्वस सिस्टम :
इसमें मौजूद फॉस्फोरस, जिंक, मैग्नीशियम नर्वस सिस्टम को सही रखने में मदद करते हैं। साथ ही प्रोटीन की भरपूर मात्रा त्वचा व मांसपेशियों के लिए लाभकारी है।

डाइट रहेगी नियंत्रित :
सूजी की थोड़ी सी मात्रा खाने से ही पेट भर जाता है व जल्दी भूख नहीं लगती। ऐसे में ओवरईटिंग से बचा जा सकता है। ।


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सेहतमंद रहने के लिए इस तरह राेज खाएं 10 बादाम


जंकफूड, अधिक तलेभुने खाद्य पदार्थ व बाजार में बिकने वाले तरह-तरह के सॉफ्टड्रिंक्स के कारण आजकल कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या हर आयुवर्ग के लोगों में आम है। कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढऩे से सबसे ज्यादा खतरा हृदय संबंधी रोगों का होता है। ऐसे में व्यायाम व संतुलित आहार के साथ यदि नियमित रूप से बादाम खाने की आदत डाली जाए तो सेहतमंद रहा जा सकता है।आइए जानते हैं बादाम के फायदाें के बारे में :-

कई बीमारियों में लाभकारी :
बादाम में प्रोटीन, हृदय के लिए जरूरी अच्छा वसा, विटामिन-ए, ई व डी, राइबोफ्लेविन, फाइबर, कैल्शियम आदि कई खनिज मौजूद होते हैं। रोजाना बादाम खाने से हृदय से जुड़ी परेशानियां, हाई बीपी, अधिक यूरिक एसिड बनने की समस्या व कई अन्य बीमारियों में फायदा होता है। कई शोधों के अनुसार हार्टअटैक, कोरोनरी हार्ट डिजीज, धमनियों में ब्लॉकेज जैसे हृदय संबंधी रोगों की आशंका को कम करने के लिए बादाम को सहायक माना गया है।

सीमित मात्रा में खाएं :
कुछ लोगों का मानना है कि मोटे लोगों को बादाम व अन्य ड्राईफ्रूट्स नहीं खाने चाहिए, इससे उनमें वजन और बढ़ जाता है। ऐसा नहीं है सीमित मात्रा में इसे कोई भी खा सकता है। सामान्यत: छोटे बच्चों को 5 व किशोरों और वयस्कों को रोजाना 10-12 बादाम अपनी डाइट में शामिल करने चाहिए। मोटापा, किडनी संबंधी समस्या व डायबिटीज के मरीज विशेषज्ञ की सलाह से इनकी मात्रा को डाइट में शामिल करें।

ध्यान रहे :
बादाम के छिलके में प्रचुर मात्रा में फाइबर पाया जाता है। साथ ही यह विटामिन-बी का बेहतर स्रोत है। कुछ लोग इसकी तासीर गर्म मानते हैं और इसे भिगोकर व छीलकर खाते हैं। ऐसे में इसका पूरा फायदा नहीं मिल पाता। इसलिए बादाम को बिना भिगोए ऐसे ही खाएं।


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मां बनने के बाद की कमजाेरी जड़ से दूर करता है ये पौष्टिक आहार


डिलीवरी के बाद मांओं को कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कब्ज, कमजोरी, शरीर में दर्द आदि से बचने और सेहत को बेहतर बनाने के लिए दादी-नानी प्रसूता को कई तरह की पोषक चीजें खिलाती हैं।आइए जानते हैं इनके बारे में -

खजूर के लड्डू :
खजूर में फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो कब्ज को दूर करता है। इसमें मौजूद आयरन खून बढ़ाने में मददगार है। इसे खाने से थकान व कमजोरी कम होती है।

सौंफ का पानी :
प्रसव के बाद पाचन प्रक्रिया सही रखने के लिए सौंफ का पानी फायदेमंद है।

गोंद के लड्डू :
खाने वाली गोंद, मूंग की दाल, सोयाबीन का आटा और ड्राईफ्रूट्स को मिलाकर लड्डू बनाएं। इनसे मां के शरीर को प्रोटीन व अन्य पोषक तत्त्व मिलेंगे।

अजवाइन का परांठा : गेहूं से बना अजवाइन का परांठा फाइबर का अच्छा स्रोत है। इससे गर्भाशय की समस्याएं ठीक होती हैं साथ ही पाचनक्रिया दुरुस्त रहती है।

व्यायाम जरूरी :
सेहतमंद रहने के लिए खानपान के साथ नियमित हल्की एक्सरसाइज करें। इससे मांसपेशियां लचीली व हड्डियां मजबूत होती हैं।


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जड़ी-बूटियां जाे प्रोस्टेट की तकलीफ से देती हैं राहत


प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने व पेशाब संबंधी परेशानियों में आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां फायदेमंद हो सकती हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।

कचनार :
यह प्रोस्टेट सहित शरीर में होने वाली सभी प्रकार की गांठों की सूजन और दर्द को दूर करने में उपयोगी है। कचनार की छाल का चूर्ण आधे से एक चम्मच की मात्रा में या इसकी छाल का काढ़ा 50-50 मिलिलीटर की मात्रा में सुबह-शाम लें।

पुनर्नवा :
शरीर में रक्त की वृद्धि करके व रसायन (टॉनिक) गुणों के कारण यह शरीर का नव निर्माण करती है इसलिए इसे पुनर्नवा कहते हैं। प्रोस्टेट, मूत्र प्रणाली व शरीर की सूजन को दूर करने में यह जड़ी-बूटी काफी उपयोगी है।

गोखरू :
यह प्रोस्टेट और मूत्र मार्ग के संक्रमण को दूर करने में लाभकारी है। इससे पेशाब खुलकर आता है। यह मूत्राशय की पथरी को टुकड़े-टुकड़े कर पेशाब के रास्ते से बाहर निकाल देता है। गोखरू का काढ़ा 50-50 मिलिलीटर की मात्रा में या 3-6 ग्राम चूर्ण की मात्रा को सुबह-शाम पानी से लें।

नाेट - काेर्इ भी इलाज डाॅॅॅक्टर की सलाह से लें।


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जानिए यूनानी में 'जुब्न' यानी दूध का महत्व क्या होता है


यूनानी चिकित्सा में दूध यानी 'जुब्न' को कई रोगों में प्रयोग किया जाता है। दूध से हड्डियां व मांसपेशियां मजबूत होती हैं। दूध एक संतुलित आहार है जिससे शरीर में ठंडक व तरावट रहती है और तनाव दूर होकर स्फूर्ति बढ़ती है। जानते हैं इसके बारे में-

बकरी का दूध : शरीर में किसी भी प्रकार की सूजन या जलन की समस्या में इसे पीने से लाभ होता है। टीबी के इलाज के लिए इसे पीने की सलाह दी जाती है।

ऊंटनी का दूध : इसमें लौह तत्व और विटामिन-सी अधिक मात्रा में होते है। साथ ही अन्य विटामिन और मिनरल्स होने से यह रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है। डायबिटीज के मरीजों को इसे नियमित रूप से पीना चाहिए। टीबी, आंखों के अल्सर, कैंसर, एलर्जी और ऑटिज्म के इलाज में भी इसका प्रयोग किया जाता है।

लाभ : दूध में कैल्शियम, प्रोटीन, पोटेशियम, फॉस्फोरस और विटामिन-ए, बी-12, डी जैसे तत्व मौजूद होते हैं। यूनानी चिकित्सा में दूध के औषधीय गुणों की वजह से इसे कई रोगों में वर्षों से प्रयोग किया जा रहा है। इससे हड्डियां व मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। यह एक संतुलित आहार है जिससे शरीर में स्फूर्ति बढ़ती है। बढ़ते हुए बच्चों, गर्भवती व फीड कराने वाली महिलाओं के लिए यह अत्यंत लाभकारी होता है। यह शरीर से विषैले पदार्थों को भी बाहर निकालता है।

सावधानियां : आमतौर पर बच्चे से लेकर बड़ा 250 मिली. से 500 मिली. दूध एक दिन में पी सकता है। लेकिन यह व्यक्ति की शारीरिक संरचना और उम्र पर निर्भर करता है कि उसे कितनी मात्रा में दूध की आवश्यकता है। इसलिए विशेषज्ञ की राय जरूरी है। स्वस्थ व्यक्ति एक बार में एक ही तरह का दूध पिएं। यदि विशेषज्ञ रोग के निदान के लिए मरीज को दवा के रूप में कोई अन्य दूध पीने की सलाह दे तो वह दो प्रकार का दूध पी सकता है। भोजन के तुरंत बाद व खट्टी चीजों के साथ दूध का प्रयोग न करें।

कुछ लोगों के शरीर में छोटी आंत 'लैक्टोस' (पचाने वाला एंजाइम) ज्यादा नहीं बना पाती, इससे उन्हें अपच की शिकायत हो जाती है। इसे 'लैक्टोस इंटोलरेंस' कहते हैं। ऐसे में विशेषज्ञ दूध में छोटी इलायची उबालकर पीने की सलाह देते हैं।


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सेहत काे नहीं लगता उबाला हुआ दूध, ये है सही तरीका


आमतौर पर हम दूध को उबाल आने तक गर्म करते हैं लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी तरह उबाला गया दूध सेहत के लिहाज से उतना फायदेमंद नहीं होता। इसके पूरा लाभ के लिए इसे पाश्च्युरीकृत करके पीना चाहिए।

वजह : दूध में 'केसीन' एवं 'वे' दो तरह के प्रोटीन, विटामिन (ए, डी, ई, के) और कैल्शियम होते हैं। जब हम दूध को उबाल आने तक गर्म करते हैं तो इससे विटामिन व कैल्शियम की मात्रा नष्ट हो जाती है। साथ ही दोनों प्रोटीन अवस्था बदल लेते हैं। इससे दूध में इनका असर घट जाता है।

ऐसे करें पाश्च्युरीकृत :
दूध निकलने के बाद उसे 72 डिग्री सेल्सियस पर करीब 15 सेकंड तक गर्म करना चाहिए यानी दूध में उबाल आने के कुछ मिनट पहले ही उसे उतार लें और तुरंत किसी ठंडे स्थान पर रखें। गर्म करके ठंडा कर देने से दूध पाश्च्युरीकृत हो जाता है। पाश्च्युरीकृत दूध में उसके पौष्टिक गुण तो रहते ही हैं, सूक्ष्माणु (जीवाणु-कीटाणु) भी नहीं पनपते।

ध्यान रहे :
दूध निकाले जाने के बाद आधे घंटे तक ही सुरक्षित रहता है। उसके बाद उसमें तेजी से सूक्ष्माणु पनपने लगते हैं। इसलिए निकाले जाने के बाद दूध को जितनी जल्दी हो सके पाश्च्युरीकृत करना चाहिए। यदि किसी वजह से दूध को गर्म नहीं कर सकते हैं तो उसे फौरन किसी ठंडे स्थान पर रखें। इससे उसमें सूक्ष्माणु पनपने का खतरा कम हो जाएगा।

पनीर का पानी :
पनीर बनाने के बाद अधिकतर लोग उसके पानी को फेंक देते हैं, एेसा नहीं करना चाहिए। इस पानी में प्रचुर मात्रा में 'वे' प्रोटीन होता है। यह रोग प्रतिरोधक तंत्र, हड्डियों व मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसे दो से तीन घंटे में प्रयोग कर लेना श्रेष्ठ होता है। अनेक देशों में इसे दवाएं बनाने के लिए काम में लिया जाता है।


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सावधान! एक इंच से ज्यादा बड़ा अंकुरण तो न खाएं स्प्राउट


मूंगफली, गेहूं, मोठ, चना, उड़द, बाजरा, ज्वार, सोयाबीन व दाना मेंथी को अंकुरित किया जा सकता है। अंकुरण के लिए इन्हें साफ कर दोगुने पानी में छह से आठ घंटे पानी में भिगोएं। इसके बाद सूती कपड़े में बांधकर रख दें। आठ-दस घंटे में अंकुरित हो जाएगा। ताजा ही खाएं। एक इंच से बड़ा अंकुरण न खाएं। इसमें हानिकारक तत्व बढने लगते हैं।
पाचन में सुधार आता : अंकुरित अनाज में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन ए, बी, सी, ई, फॉस्फोरस, आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम, जिंक हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। इससे पाचन में सुधार आता है। शरीर में ऊर्जा को बढ़ाता है। यह एंटी एजिंग, फर्टिलिटी में फायदेमंद है।
विटामिन सी युक्त चीजें लें : विटामिन सी युक्त चीजें नींबू, धनिया, टमाटर, प्याज भी मिलाएं। इससे पाचन सही रहेगा।
पित्त ज्यादा बनता हो तो प्रयोग न करें : ऐसे लोग जिनका पाचन खराब रहता हो, एसिडिटी, पित्त ज्यादा बनता हो, कच्ची डकारें आती हों वह इसे न लें। नियमित खाने से नई रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद मिलती है। कॉलेस्ट्रॉल को कम करने में मददगार है। विषैले तत्वों को बाहर निकालता है।
- डॉ. किरण गुप्ता, वरिष्ठ चिकित्सक, प्राकृतिक चिकित्सालय, जयपुर


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एंटीऑक्सीडेंट के लिए करें इन चीजों काे सेवन


एंटीऑक्सीडेंट एक ऐसा तत्व होता है जो शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने और उनके नकारात्मक प्रभाव को कम करता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता को मजबूत बनाता है। यह विटामिन-सी,ए व ई, सेलेनियम और बीटा कैरोटीन जैसे तत्वों के रूप में शरीर में मौजूद रहता है। एंटीऑक्सीडेंट कैंसर, हृदय रोगों, ब्लड प्रेशर, अल्जाइमर और दृष्टिहीनता के खतरे को कम कर बढ़ती उम्र के प्रभाव को रोकता है। यह विषाक्त पदार्थों को नष्ट कर कोशिकाओं को मृत होने से भी बचाता है। जानते हैं यह किनमें भरपूर मात्रा में पाया जाता है।

लहसुन : यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है जो कैंसर और हृदय रोगों से लड़ने में मददगार है।
टमाटर : इसमें मौजूद ग्लूटाथियोन एंटीऑक्सीडेंट रोग प्रतिरोधी तंत्र को मजबूत करता है।
लौंग : वर्ष 2009 में हुए शोध के अनुसार लौंग को एंटीऑक्सीडेंट का सबसे बढि़या स्रोत माना गया क्योंकि यह अम्लता की अधिकता को कम करने का काम करती है। बड़ी इलायची से भी इसकी खुराक पा सकते हैं।
अखरोट : इसे कैंसर से लड़ने के लिए सबसे प्रभावी एंटीऑक्सीडेंट माना गया है।
राजमा : बींस प्रजाति के खाद्य पदार्थों में राजमा प्रमुख दस एंटीऑक्सीडेंट्स में से एक है जो हृदय रोगों के खतरे को कम करता है। इसी तरह अनार, केला, रसबेरी और ब्लूबेरी आदि में भी पर्याप्त मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट तत्त्व होते हैं।


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जान लें दूषित भोजन से होने वाली बीमारियों के लिए घरेलू नुस्खे


दूषित जल व खराब खानपान की वजह से कई तरह के रोग जन्म लेते हैं। आइए जानते हैं रसोई के ऐसे मसालों व अन्य चीजों के बारे में जो दूषित भोजन के सेवन से होने वाली बीमारियों में लाभकारी हो सकते हैं।

दस्त : एक गिलास गर्म पानी को ठंडा कर उसमें एक चम्मच चीनी, एक नींबू का रस व एक चुटकी नमक डालकर घोल बनाएं। दिन में 5-6 बार पीने से दस्त से राहत मिलेगी। 100 ग्राम दही में आधा चम्मच ईसबगोल की भूसी व दो चुटकी हल्दी मिलाकर एक खुराक बनाएंं। इसे 3-4 बार लेने से दस्त बंद हो जाएंगे।

हैजा : एक गिलास नींबू पानी में एक चुटकी नमक मिलाकर थोड़ी-थोड़ी देर के अंतराल में पीने से शरीर में पानी की कमी पूरी होती है।
आधा कप प्याज के रस में एक चम्मच पुदीने का रस मिलाकर 2-2 चम्मच 5-7 बार पीने से हैजा में लाभ होता है।

उल्टी : छाछ में भुनी हींग और थोड़ा नमक मिलाकर पीने से उल्टी में आराम मिलता है। नारियल का पानी पीने से भी उल्टी नहीं आती।
जोड़ों में दर्द : 250 मिलिलीटर दूध में लहसुन की 5-6 कलियां डालकर उबालें। हल्का गर्म छानकर पीने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।


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संपूर्ण आहार है केला, जानें इसके फायदों के बारे में


आयुर्वेद के अनुसार पके केले में कैल्शियम के अलावा एक अन्य गुणकारी तत्त्व व फॉस्फोरस आदि भी होते हैं। यह मस्तिष्क की क्षमता को बढ़ाता है। आइये जानते हैं केले के फायदों के बारे में...

गर्भावस्था, प्रौढ़ावस्था में केला कैल्शियम की कमी को दूर करता है। यह मस्तिष्क की क्षमता को विकसित करता है। साथ ही गर्भावस्था के दौरान होने वाले शिशु के लिए भी लाभकारी है।

इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन और खनिज तत्व, विटामिन ए, सी, डी व आयरन, पोटेशियम, मैग्नीशियम, सोडियम आदि खनिज होने के कारण यह पौष्टिक व संतुलित आहार है। इससे पाचनक्रिया दुरुस्त होती है व रक्त में वृद्धि होती है।

पढ़ने वाले छात्रों के लिए केला बहुत शक्तिवर्धक है। केले में प्रोटीन की मात्रा कम होती है। इसलिए केला खाने के बाद दूध अवश्य पीना चाहिए।

केला संपूर्ण आहार है। खाने के वक्त यदि दो केले खा लिए जाएं तो उस वक्त के खाने की पूर्ति हो जाती है।
डिप्रेशन, हृदयघात व कैंसर जैसी बीमारियों में केला खाना लाभकारी है। चमकते दांतों के लिए दो हफ्ते तक केले के छिलके के अंदरुनी भाग से दांत साफ करें। इसमें मौजूद फॉस्फोरस मस्तिष्क की क्षमता को विकसित करता है।


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