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अब बर्गर-नूडल्स के साथ कप, प्लेट और चम्मच भी खा सकेंगे लोग


दुनिया के सामने लोगों की हेल्दी लाइफ स्टाइल को लेकर सबसे बड़ी चुनौती है। फूड प्रोडक्ट्स व खाना परोसने के लिए इस्तेमाल हो रहा प्लास्टिक न सिर्फ हेल्थ के लिहाजा से खराब है, बल्कि दुनिया भर में इससे प्रदूषण भी बढ़ रहा है। दरअसल, प्लास्टिक न गलता है, न जलता है। यदि इसे जलाया जाता है, तो इससे निकलने वाला धुंआ सेहत के लिए ठीक नहीं होता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए दुनियाभर में प्लास्टिक से निजात पाने के लिए शोध किए जा रहे हैं। इसमें काफी हदतक वैज्ञानिकों को सफलता भी मिली है।

जी हां, प्लास्टिक के पैक में खाने-पीने की सामग्री परोसने के खतरों से निजात पाने के लिए दुनियाभर में लगातार शोध हो रहे हैं। वैज्ञानिक व उद्यमी इसके विकल्प तलाश रहे हैं। इन्हीं प्रयासों में हैदराबाद के नारायण पीसपति ने मोटे अनाज के आटे से खाने में इस्तेमाल होने वाला चम्मच बनाया है, जिसे खाना समाप्त करने के बाद थाली में रखने की जरूरत नहीं है। मतलब, चम्मच भी भोजन का हिस्सा ही है।

इसी तरह, ब्रिटेन के एक स्टार्ट-अप ने समुद्री शैवाल से पानी का बरतन यानी जलपात्र बनाया है। वहां के अखबार 'गार्जियन' की रपट में सोमवार को कहा गया कि यह प्लास्टि की वैश्विक समस्या का समाधान बन सकता है। यदि यह प्रयोग सफल रहा और इसमें कोई हानिकारक तत्व नहीं पाया गया, तो यह प्लास्टिक के बोतलबंद पानी की जगह लेगा और लोगों को प्लास्टिक के बोतल से निजात मिल जाएगी। गौरतलब है कि पिछले महीने बोतलबंद पानी में प्लास्टिक के सूक्ष्म कणों के मौजूद होने की बात सामने आई थी, जिससे उपभोक्ताओं की सेहत पर गंभीर खतरा होने की बात कही गई थी।

इसी तरह, दुनियाभर में ऐसे ही कई प्रयोग हो रहे हैं।

 

 plastic-packaging

इसी तरह ब्रिटेन की एक कंपनी ने पिछले साल सितंबर में समुद्री शैवाल से निर्मित पैकेजिंग सामग्री में बर्गर या नूडल को पैक करने की तरकीब निकाली थी। वहीं, न्यूयॉर्क की एक कंपनी ने एक ऐसा कप बनाया है, जिसे आप खा सकते हैं। यह समुद्री घास व शैवाल से निर्मित है। इतना ही नहीं, पोलैंड की एक कंपनी ने गेहूं की भूसी से प्लेट बनाया है, जिसे आप खा सकते हैं।

तो जिस तरह से दुनियाभर में प्लास्टिक से निजात पाने के लिए शोध किए जा रहे हैं, उससे तो यही लगता है कि जल्द ही वो दिन आएगा, जब खाने-पीने की चीजों के लिए इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक का अस्तित्व पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।


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कंप्यूटर से भी तेज दिमाग वाली थी ये महिला, लोग कहते थे ह्यूमन कंप्यूटर


दुनिया में शकुंतला देवी एक ऐसा नाम है जिसको चलता फिरता ह्यूमन कंप्यूटर कहा जाता है। शकुंतला दवी की विशेषता उनकी कैलकुलेशन करने की क्षमता थी जो एक कंप्यूटर से भी ज्यादा तेज थी। वो किसी भी तरह की कैलकुलेशन कंप्यूटर से भी तेज गति से करने के लिए जानी जाती है। उनका स्वर्गवास अप्रैल 2013 में हो गया लेकिन आज भी उनके जैसे दिमाग वाली महिला भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में दूसरी नहीं हुई।


शकुंतला देवी की सबसे खास बात ये थी कि वो गणित का बड़ा से बड़ा कैलकुलेशन मिनटों में हल कर देती थीं। इसके लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया था। उनके दिमाग की इस क्षमता की वास्तविकता पता करने के लिए कई बार उनका टेस्ट भी किया गया। लेकिन हर बार उन्होंने प्रत्येक टेस्ट पास कर अपने दिमाग को सबसे तेज होने का खिताब बनाए रखा। आज भी विज्ञान की दुनिया में शकुंतला देवी का दिमाग एक अजूबा और अबूझ पहेली है कि वो किस तरह कंप्यूटर और कैलकुलेटर से भी तेज गति से कैलकुलेशन करती थीं।

 

अनोखी है इस लड़की की लाइफस्टाइल , मोबाइल के साथ अपना हाथ भी करती है चार्ज

आज तक आपने लोगों को अपना मोबाइल, लैपटॉप या ब्लूटूथ चार्ज करते हुए ही देखा होगा। लेकिन क्या कभी ऐसी लड़की को देखा है इन चीजों के अलावा अपना हाथ ही चार्ज करती है। जब यह लड़की अपना हाथ चार्ज करती है तभी वो काम करता है। हम आपको इसी लड़की के बारे में बता रहे हैं। इस लड़की का नाम है एंजेल गिफ्रिया है जिसकी उम्र 28 साल है। दरअसल एंजेल के जन्म से ही बायां हाथ नहीं था। जब वो चार महीने की थी तब उसके माता-पिता ने डॉक्टरों की सलाह से उसके इलेक्ट्रिक हाथ लगवा दिया। यह ऐसा हाथ है तभी अच्छे से काम करता है जब उसें चार्ज किया जाता है। जैसे जैसे एंजेल बड़ी होती चली गई वैसे-वैसे उसके इलेक्ट्रिक हाथ को भी अपग्रेड किया जाता रहा। यह हाथ मोटोराइज्ड इलेक्ट्रिक है जिसका वो यूज कर रही है। एंजेल जब सुबह उठती है तो सबसे पहले वह अपना हाथ चार्ज करती है। क्योंकि उसके चार्ज होने के बाद ही वो काम करता है। एंजेल के माता-पिता का कहना है कि जब वो छोटी थी तब इलेक्ट्रिक बोर्ड की तरफ देखती थी तो वो समझ जाते थे कि वह अपना हाथ चार्ज करना चाहती है। उसका इलेक्ट्रिक हाथ चार्ज होने में लगभग 1 घंटे का समय लगता है और उसके बाद वो पूरा दिन काम करता है।


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दुबई से जुड़े इस राज को आजतक नहीं जानते होंगे आप


दुबई दुनिया के आलिशान शहरों में से एक है। भारत से बहुत से लोग काम करने के लिए और घूमने के लिए दुबई जाते रहते हैं। अगर आप भी दुबई जाने का प्लान बना रहे हैं तो आज हम आपको दुबई से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बता रहें हैं, जिन्हें आप आजतक नहीं जानते होंगे।

देश नहीं शहर है दुबई

दुबई संयुक्त अरब अमीरात का एक शहर है। दुनिया में बहुत से लोग सोचते हैं कि दुबई कोई देश है या फिर संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी है, लेकिन ये सच नहीं है। दुबई रेगिस्तान के क्षेत्रों में आता है, इसलिए यहां आपको रेगिस्तान बहुत अधिक मात्रा में नजर आएगा। अब कुछ वर्षों में यहां पर बहुत ज्यादा बदलाव आने लगा है, ऊंची-ऊंची इमारतें बनने लगी हैं।

दुबई के कुछ खास कानून
दुबई में शराब पूर्णतया बैन नहीं है, लेकिन इसको खरीदने के लिए अनुमति लेना जरूरी होता है। यहां आने वाले यात्री शराब पी सकते हैं, होटल, बार और रेस्टोरेंट्स में शराब मिल सकती है। सार्वजनिक जगहों पर शराब नहीं पी सकते हैं और शराब पीकर गाड़ी भी नहीं चलाई जा सकती है।

दुबई में समलैंगिकता पर पूर्णतया प्रतिबंध है। ऐसा करने पर कड़ी सजा दी जाती है।

ड्रग्स पर पूर्णतया प्रतिबंध लगा हुआ है, ड्रग्स का इस्तेमाल करना और उसकी तस्करी करने वाले को कड़ी सजा दी जाती है।

एक महिला होटल के कमरे में सिर्फ अपने पति के साथ रुक सकती है, अगर एक महिला अन्य किसी पुरुष के साथ होटल में रुकती है तो इसके लिए दोनों को कड़ी सजा दी जाती है।

दुबई दुनिया के उन देशों में से एक है, जहां पर आपको सबसे ज्यादा साफ-सफाई नजर आएगी। अगर यहां कोई थूकता हुआ या गंदगी फैलाता हुआ नजर आएगा तो उसे कड़ी सजा के साथ जुर्माना देना होगा।

दुबई की सड़कों पर जरूरत से ज्यादा तेज या जरूरत से ज्यादा धीरे वाहन चलाने पर सजा और जुर्माना देना पड़ता है।


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अनोखी है इस लड़की की लाइफस्टाइल, मोबाइल के साथ अपना हाथ भी करती है चार्ज


आज तक आपने लोगों को अपना मोबाइल, लैपटॉप या ब्लूटूथ चार्ज करते हुए ही देखा होगा। लेकिन क्या कभी ऐसी लड़की को देखा है इन चीजों के अलावा अपना हाथ ही चार्ज करती है। जब यह लड़की अपना हाथ चार्ज करती है तभी वो काम करता है। हम आपको इसी लड़की के बारे में बता रहे हैं। इस लड़की का नाम है एंजेल गिफ्रिया है जिसकी उम्र 28 साल है।


दरअसल एंजेल के जन्म से ही बायां हाथ नहीं था। जब वो चार महीने की थी तब उसके माता-पिता ने डॉक्टरों की सलाह से उसके इलेक्ट्रिक हाथ लगवा दिया। यह ऐसा हाथ है तभी अच्छे से काम करता है जब उसें चार्ज किया जाता है। जैसे जैसे एंजेल बड़ी होती चली गई वैसे-वैसे उसके इलेक्ट्रिक हाथ को भी अपग्रेड किया जाता रहा। यह हाथ मोटोराइज्ड इलेक्ट्रिक है जिसका वो यूज कर रही है। एंजेल जब सुबह उठती है तो सबसे पहले वह अपना हाथ चार्ज करती है। क्योंकि उसके चार्ज होने के बाद ही वो काम करता है। एंजेल के माता-पिता का कहना है कि जब वो छोटी थी तब इलेक्ट्रिक बोर्ड की तरफ देखती थी तो वो समझ जाते थे कि वह अपना हाथ चार्ज करना चाहती है। उसका इलेक्ट्रिक हाथ चार्ज होने में लगभग 1 घंटे का समय लगता है और उसके बाद वो पूरा दिन काम करता है।


एंजेल के माता-पिता का कहना है की कुछ समय पहले वो टेक्सास में एक प्रोग्राम में शामिल हुए थे जहां अचानक उसके हाथ की चार्जिंग खत्म हो गई जिसको तुरंत चार्ज करने के लिए वो दौड़ पड़ी। परन्तु जहां पर इलेक्ट्रिक सॉकेट था वहां पहले से ही किसी का फोन चार्ज हो रहा था जिससे एंजेल को काफी परेशानी हुई थी। इसके अचानक से उसे दीवार की पिछली तरफ लगा एक सॉकेट नजर आया और वो वहां दौड़कर गई। इसके बाद अपना हाथ चार्ज किया। जब भी एंजेल के हाथ की बैटरी कम होने लगती थी, तो उसके हाथ में लगी बीप बज उठती थी। माता-पिता का कहना है कि एंजेल के लिए मोबाइल चार्ज करना उतना जरूरी नहीं था, जितना उसका हाथ चार्ज करना था। इसे लेकर वह कई बार परेशान भी हो जाती है।


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पलभर में करोड़पति बना ये दुकानदार, अकाउंट में आए 9,99,99,999 रुपए


यह कहावत तो आपने सुनी ही होगी कि देने वाला जब भी देता है छप्पर फाड़ के देता है। यह कहावत हाल ही में दिल्ली के जहांगीरी में रहने वाले विनोद दुकानदार के लिए खरी उतरी है। अचानक से यह दुकानदार करोड़पति बन गया क्योंकि इसे बैंक अकाउंट में करोड़ों रुपये आ गए। यह दुकनदार नॉर्थ वेस्ट दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके का रहने वाला है। इस दुकानदार के खाते में अचानक 9 करोड़ से ज्यादा रुपये आए जिसके बारे में जानकर इसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।


विनोद के मोबाइल फोन पर अचानक से 9 करोड़ 99 लाख 99 हजार 999 रुपये करोड़ रुपए का मैसेज आया। इसके बाद इसने एटीएम से अपने बैंक अकाउंट का मिनी स्टेटमेंट निकाला तो उसमें भी 9,99,99,999.00 रुपए लिखे हुए आए। इसके बाद दुकानदार डर गया लेकिन उसका अकाउंट सीज हो गया है। इसके बाद दुकानदार ने बैंक में जाने की बजाए मीडिया का सहारा लिया ताकी उन पर कोई मामला दर्ज न हो जाए।


इस मामले में बैंक की तरफ से की जांच रही है की यह कोई कलेरिकल मिस्टेक है या कोई बैंक की दूसरी मिस्टेक की वजह से ऐसा हुआ है या असलियत में कोई इतनी बड़ी रकम उसके खाते में कहां से आया है।

 

विनोद दिल्ली के जहांगीरपुरी में रहते हैं और अपनी छोटी सी मोबाइल की दुकान चलाते हैं। विनोद का जहांगीर पुरी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में बैंक में अकाउंट है। इस बड़ी रकम के आने पहले उनके खाते में 10 से 12 हजार रुपये ही होते थे और हमेशा इतना ही बैलेंस रहता था। लेकिन हाल ही में अचानक से इनके खाते में बैंक खाते में 9,99,99,999.00 रुपए आने से उनको भी आश्चर्य है।


विनोद के पास जब इतनी बड़ी रकम का मैसेज अपने मोबाइल फोन पर आया तो वो चौक गए और विश्वास नहीं हुआ। इसके अलावा संडे की छुट्टी होने के कारण वो बैंक में न जाकर सीधे ATM में गए ATM में जाकर इन्होंने अपने खाते की मिनी स्टेटमेंट निकाला।


एटीएम से निकाले गए मिनी स्टेटमेंट के अनुसार भी उनके खाते में 9,99,99,999.00 रुपए आए थे इसके बाद विनोद ने अपने खाते को फिर रीचेक करना चाहा कि क्या कुछ इससे निकलता भी है या नहीं जब इन्होंने अपने खाते से कुछ पैसे निकालने की कोशिश की तो वो सफल नहीं हो सके क्योंकि हाथों-हाथ उनका खाता सीज हो चुका था।

 

हालांकि अब बैंक इस बारे में जांच कर रहा है की यह कोई क्लेरिकल मिस्टेक है या किसी सॉफ्टवेयर की गलती की वजह से ऐसा हुआ है जिसकी वजह से उनके खाते में इतने रूपये आए हैं। हालांकि यह जांच के बाद ही पता चल पाएगा। लेकिन इतना जरूर है कि जब किसी के पास इतने पैसे अकाउंट में अपने आप आ जाते हैं तो उनको जवाब देना पड़ता है।


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ये है दुनिया की सबसे महंगी चॉकलेट, कीमत 6.18 लाख रूपए


आपने अभी तक आपने महंगी से महंगी चॉकलेट के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या कभी ऐसी चॉकलेट के बारे में भी सुना है जिसकी कीमत लाखों रूपयों में होगा। मार्केट में महंगी चॉकलेट्स के नाम पर 400 से 500 रुपये या 1000 रुपए तक की चॉकेट्स बिकती है। इसके अलावा भारत में सबसे महंगी चॉकलेट की बात जाए तो 'कैडबरी फ्रुट मिल्क एंड नट' सबसे महंगी चॉकलेट है। इस चॉकलेट की कीमत करीब 2200 रुपये है। लेकिन अब एक ऐसी चॉकलेट भी आ चुकी है जिसकी कीमत लाखों में है।


इस महंगी चॉकलेट को पुर्तगाल के ओबिडोस में दुनिया की सबसे महंगी चॉकलेट के तौर पर प्रदर्शित किया गया है। कंपनी ने इस चॉकलेट की कीमत लगभग 7,728 यूरो (9,489 डॉलर) यानी करीब 6 लाख 18 हजार 400 रूपये।


इस चॉकलेट की इतनी ज्यादा कीमत होना इसका गोल्ड में कवर किया जाना है। इस चॉकलेट पर लगाया गया यह गोल्ड खाने लायक यानी एडीबल गोल्ड है। इाकरे 1000 बॉनबॉन चॉकलेट के लिमिटेड एडीशन के तौर पर लाया गया है। इस चॉकलेट में दुनिया के सबसे महंगे मसालों का यूज किया गया है। इसमें मेडागास्कर से लायी गई व्हाइट ट्रफल, वेनीला और गोल्ड फ्लेक्स यूज किए गए हैं।


आपको जानकर हैरानी होगी कि इस चॉकलेट की सिक्योरिटी के लिए दो गार्ड भी लगाए गए। इस चॉकलेट को बनाने वाले पुर्तगाल के डेनियल गोम्स का कहना है की गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने इसको सबसे महंगी चॉकलेट होने का सर्टिफिकेट दिया है। इससे पहले सबसे महंगी चॉकलेट होने का रिकॉर्ड 250 डॉलर की कीमत वाली `लॉ मेडेलीन ऊ ट्रफ` के नाम था। इसको फ्रिट्ज निप्शिड्ट ने बनाया था और 5,500 स्वारॉवक्सी क्रिस्टल से सजाया गया था।

 

इस चॉकलेट की प्रदर्शनी में हिस्सा लेने आए लोगों ने भी कीमत पर हैरानी जताई। इस चॉकलेट के लिए कई लोगों का कहना है की यह पैसे की फिजूलखर्ची है। लेकिन चॉकलेट के कई शौकीन लोगों के लिए यह अपने आप में एक टेस्टी आश्चर्य है।


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यहां पर है गजब का कानून! छुट्टी नहीं लेने पर लगता है जुर्माना


नौकशरीपेशा लोग आमतौर पर काम के बीच छुट्टी लेने के लिए कई तरह के बहाने ढूंढते रहते हैं। लोग अपने हिस्से के अलावा भी ज्यादा से ज्यादा छुट्टियां लेने की सोचते रहते हैं। ऐसे में कई लोगों की ज्यादा छुट्टियां लेने पर सैलेरी तक काट ली जाती है। लेकिन फ्रांस जैसा इस दुनिया में एक ऐसा देश भी है जहां इसका ठीक उलटा होता है। इस देश में छुट्टी नहीं लेने पर कर्मचारियों पर जुर्माना तक लगाया जा सकता है।

 

इस बारे में हाल ही में एक घटना सामने आई है जिसको लेकर कोई भी चौंक सकता है। फ्रांस के एक बेकर पर हाल में ही 3600 डॉलर यानी करीब 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस जुर्माने की पीछे की वजह है उसका छुट्टी नहीं लेना था। भले ही यह जानकर आपको अटपटा लगे लेकिन यह सच है। फ्रांस में एक ऐसा कानून है जिसके तहत छुट्टी नहीं लेने वाले पर कर्मचारियों पर जुर्माना लगता है।

 

41 वर्षीय सेड्रिक वाइव्रे पर आरोप था कि उन्होंने पिछले साल की गर्मियों से अब तक कोई भी छुट्टी नहीं ली थी। ऐसा करके उन्होंने वहां का लेबर कानून तोड़ा है। जिसने सप्ताह में एक दिन की भी छुट्टी लिये बिना ही सातों दिन बेकरी को खुला रखा। इस व्यक्ति ने ऐसा टूरिस्ट की बढ़ती संख्या को देखते हुये पूरे सप्ताह अपनी बेकरी को खोल कर रखा था। जबकि फ्रांस के लोकल लेबर लॉ के अनुसार छोटे बिजनेसमैन सप्ताह में सिर्फ 6 दिनों तक ही काम कर सकते हैं।

 

इस सीजन के दौरान सेड्रिक और उसके कर्मचारियों ने सातों दिन देर रात तक भी काम किया। हालांकि कुछ लोगों ने सेड्रिक का फेवर करते हुये इस नियम के खिलाफ भी सहमति जताई है। लोगों का मानना है कि इस नियम से बिजनेस को नुकसान होता है। इसके साथ ही लगभग 500 लोगों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर करते हुए सेड्रिक को सातों दिन बेकरी खोलने की पेटीशन दायर की है।


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इस मॉन्क के पास है गजब की कला! महज एक सुई से तोड़ देता है कांच


दुनिया में एक से बढ़कर एक कलाकार भरे पड़े हैं जो अपने कारनामों से सबको चौंकाते रहते हैं। ठीक ऐसा ही एक कलाकार और सामने आया है जो महज एक सुई से मोटे कांच को तोड़ सकता है। भले ही यह मुश्किल लगे लेकिन इस शाओलिन मॉन्क के लिए यह बहुत ही सरल काम है। यह शाओलिन मॉन्क ऐसा कारनामा करके दिखाता है जिसको देखने वाले हैरान रह जाते हैं। इस शाओलिन मॉन्क के इस कारनामे की खबर और उसका वीडियो सोशल मीडिया में जबरदस्त वायरल हो रहे हैं।

 


72 शाओलिन सीक्रेट आर्ट में से एक है जिसको सीखने में करीब 10 साल का समय लगता है। द स्लो मो गाइज के नाम से यू-ट्यूब पर मेंबर्स ने तीन शाओलिन मॉन्क को बुलाया जिन्होंने यह कारनामा कर दिखाया। इन सभी बौद्ध भिक्षुओं ने महज एक सुई के सहारे कांच को तोडकर सबको चौंका दिया।

 


इंसानों जैसे चेहरे वाला डॉगी इंटरनेट पर वायरस
अभी तक आपने पालतू जानवरों के बारे में एक से बढ़कर अनोखी बातें सुनी हैं जो काफी दिलचस्प होती हैं। ठीक वैसी ही खबर हम भी आपको बताने जा रहे हैं जो एक अनोखी डॉगी की है। यह डॉगी अपनी सूरत को लेकर पूरी दुनिया में मशहूर हो चुका है और इसकी तस्वीरें इंटरनेट पर खूब वायरल हो रही है। वैसे तो कुत्तों की कई प्रजातियां होती हैं जिनकी अपनी-अपनी खासियत होती है। लेकिन यह डॉगी सबसे अलग तरह का है जिसकी सूरत हूबहू इंसानों जैसी है जिसको देखकर हर कोई हैरान रह जाता है।

 

योगी नाम का यह डॉगी अमेरिका के मैसचूसिट्स में रहने वाली चैंटल डेसजार्डिन का है जिसकी हूबहू इंसानों जैसी सूरत है। चैंटल के दोस्त ने रेडिट पर इस डॉगी का एक फोटो शेयर किया जो वायरल हो गया। इसके बाद यह डॉगी रातोंरात स्टार बन गया। इस डॉगी फोटो इतना वायरल हुआ कि चैंटल के घर मीडिया भी पहुंच गया। इसके बाद चैंटल ने मीडिया को बताया कि वो उसे एक सामान्य डॉगी की तरह ही देखती थीं लेकिन जब सोशल मीडिया पर लोगों ने उसकी तुलना इंसानों से की तो वह भी आश्चर्यचकित रह गईं।


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भारत में है एशिया का सबसे स्वच्छ गांव, सड़क पर थूकने पर भी है बैन


भारत गांवों का देश है। भारत के ये अनेकों गांव अलग—अलग तरह के रिति रिवाज और अनोखी परंपराओं वाले हैं। हालांकि स्वच्छता को लेकर अब गांवों में काफी सक्रियता आ चुका है। लेकिन भारत में एक गांव ऐसा भी है जो कई सालों से लगातार अपनी स्वच्छता के लिए भारत ही नहीं बल्कि पूरे एशिया में मशहूर है। यह गांव भारत के मेघालय राज्य में स्थित है। इस गांव का नाम मावलिन्नांग है। यह गांव मेघालय की राजधानी शिलांग और भारत-बांग्लादेश बॉर्डर से 90 किलोमीटर दूर स्थित है। मावलिन्नांग को एशिया के सबसे स्वच्छ गांव का खिताब मिला हुआ है।

 

उत्तर-पूर्व भारत में यह गांव अपनी स्वच्छता के बल पर पूरे विश्व के मानचित्र पर अपनी एक अलग पहचान रखता है। इस गांव की जनसंख्या लगभग 500 लोगों की है। इस छोटे से गांव में करीब 95 खासी जनजातीय परिवार रहते हैं। स्वच्छता के लिए मशहूर मावलिन्नांग गांव में पॉलीथीन पर पूरी तरह से रोक है। इतना ही नहीं बल्कि यहां सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर थूकना मना है।

 

इस गांव के रास्तों पर जगह-जगह कूड़े फेंकने के लिए बांस के कूड़ेदान लगाए हुए हैं। इस गांव के रास्तों के दोनों ओर फूल-पौधे की क्यारियां और स्वच्छता का निर्देश देने वाले बोर्ड भी लगे हुए हैं। इस गांव के हर परिवार का एक न एक सदस्य यहां की सफाई में रोज भाग लेता है। इसके अलावा यदि कोई ग्रामीण स्वच्छता अभियान में भाग नहीं लेता है तो उसे घर में खाना नहीं मिलता।

 

मावलिन्नांग गांव की एक और खास बात ये है यह मातृसत्तात्मक है। इसी वजह से यहां की औरतों को ज्यादा अधिकार प्राप्त हैं और गांव को स्वच्छ रखने में वो अपने अधिकारों का काफी प्रयोग करती हैं। मावलिन्नांग के लोग कंक्रीट के मकान की बजाए बांस से बने मकानों रहना ज्यादा पसंद हैं। स्वच्छता के लिए मशहूर मावलिन्नांग को देखने के लिए हर साल पर्यटक भारी संख्या में आते हैं। अपनी स्वच्छता और नियोजन के लिए मावल्यान्नॉंग गांव को भगवान का अपना बगीचा (God’s Own Garden) के नाम से भी जाना जाता है।


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इंसानों जैसे चेहरे वाला है ये डॉगी, इंटरनेट पर वायरस हुई फोटोज


अभी तक आपने पालतू जानवरों के बारे में एक से बढ़कर अनोखी बातें सुनी हैं जो काफी दिलचस्प होती हैं। ठीक वैसी ही खबर हम भी आपको बताने जा रहे हैं जो एक अनोखी डॉगी की है। यह डॉगी अपनी सूरत को लेकर पूरी दुनिया में मशहूर हो चुका है और इसकी तस्वीरें इंटरनेट पर खूब वायरल हो रही है। वैसे तो कुत्तों की कई प्रजातियां होती हैं जिनकी अपनी-अपनी खासियत होती है। लेकिन यह डॉगी सबसे अलग तरह का है जिसकी सूरत हूबहू इंसानों जैसी है जिसको देखकर हर कोई हैरान रह जाता है।


योगी नाम का यह डॉगी अमेरिका के मैसचूसिट्स में रहने वाली चैंटल डेसजार्डिन का है जिसकी हूबहू इंसानों जैसी सूरत है। चैंटल के दोस्त ने रेडिट पर इस डॉगी का एक फोटो शेयर किया जो वायरल हो गया। इसके बाद यह डॉगी रातोंरात स्टार बन गया। इस डॉगी फोटो इतना वायरल हुआ कि चैंटल के घर मीडिया भी पहुंच गया। इसके बाद चैंटल ने मीडिया को बताया कि वो उसे एक सामान्य डॉगी की तरह ही देखती थीं लेकिन जब सोशल मीडिया पर लोगों ने उसकी तुलना इंसानों से की तो वह भी आश्चर्यचकित रह गईं।

यहां निकला अंडे में अंडा ! 95 साल से चल रहा मुर्गी फार्म भी हैरान
अभी तक यह पहेली अनबूझी ही है कि पहले मुर्गी आई या अंडा! लेकिन हाल ही में इन्हीं से जुड़ी एक और चौंकाने वाली खबर आई है जिसके बारे में जानकर हर कोई हैरान है। इस बार मुर्गी का एक ऐसा अंडा सामने आया है जिसके बारे में जानने वाले के भी कान खड़े हो जाते है। यह अंडा ऑस्ट्रेलिया के क्वीन्सलैंड में एक एग फार्मर को मिला।

अंडे के अंदर अंडा
ऑस्ट्रेलिया के स्टॉगमैन्स एग्स फार्म में मुर्गी द्वारा दिया गया अंडा सामान्य अंडे के मुकाबले तीन गुना बड़ा है। जब किसान ने उस बड़े अंडे को फोड़ा तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं। क्योंकि इस बड़े अंडे के अंदर से एक और छोटा अंडा निकला जो सामान्य अंडे के बराबर का है। किसान अपनी यह स्टोरी सोशल मीडिया पर शेयर की है जो जबरदस्त वायरल हो रही है।


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उफ! ये गर्मी: भारत में ज्यादातर तीन टंगड़ी वाले पंखे ही क्यों चलते हैं? वजह बेहद दिलचस्प है


गर्मी ने दस्तक दे दी है। पंखे, कूलर और एसी धीरे-धीरे रफ्तार पकडऩे लगे हैं। लेकिन यहां हम बात करेंगे सेलिंग फैन की, जिसका घर-घर प्रशंसक(फैन) है। जी हां, चाहे घर में कूलर चले या एसी, कमरों के ऊपर बेचारे तीन टंगड़ी वाले फैन की सांसें बराबर चलती रहती हैं। इसे सुकून या इसके कलेजे में ठंडक तभी पहुंचती है, जब बिजली (गुल) मेहरबान होती है। आजकल सेलिंग फैन में भी काफी एक्सपेरिमेंट देखने को मिल रहे हैं। इनकी पंखियों को बेहद स्टाइलिश लुक देने में लगी हुई हैं कंपनियां। खैर, पंखियों को चाहे कितना भी स्टाइलिश बना दो, उनका काम तो सिर्फ ठंडक देना ही है। फिर बात चाहे देसी पंखे की हो और विदेशी पंखे की...।

यह बात तो लेागों को पता ही होगी कि पंखे की पत्तियां एक निश्चित एंगल तक बैंड होती हैं, जो हवा देने का काम करती हैं। अब जरो सोचिए कि सबसे ज्यादा हवा कौन-सा पंखा देगा, तीन पत्ती वाला या चार पत्ती वाला। बता दें कि तीन पत्ती वाली देसी फैन है, जबकि चार पत्ती वाला विदेशी फैन। यहां सवाल यह भी उठता है कि भारत मेंं 99 प्रतिशत तीन पत्ती वाले पंखे ही क्यों चलते हैं और विदेशों में चार पत्ती वाले पंखे? वैसे आपने इस बारे में कभी सोचा भी नहीं होगा कि पंखे में तीन और चार पत्ती वाले क्यों होते हैं? बेशक, आपने पंखें की पत्तियों की संख्या पर गौर किया न हो, लेकिन इनकी कम या ज्यादा पत्तियां होने के पीछे ठोस वजह है।

दरअसल, अमेरिका जैसे ठंडे देशों में 4 पत्ती वाले पंखे एयर कंडीशनर (एसी) के सप्लीमेंट के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं, जिनका मकसद एसी की हवा को पूरे कमरे में फैलाना होता है। चूंकि 4 पत्ती वाले पंखे 3 पत्ती वाले पंखे की तुलना में धीमे चलते हैं, इसलिए इनकी वजह से यह काम आसान हो जाता है। ऐसे में यदि भारत में चार पत्ती वाले पंखे इस्तेमाल होने लगे, तो यहां गर्मी में लोगों का जीना मुहाल हो जाएगा। वैसे भी भारत में पंखा का मतलब ज्यादा से ज्यादा हवा दे। तीन पत्ती वाला फैन हल्का होता है और चलने में इसकी रफ्तार तेज होती है और इससे हवा भी तेज मिलती है। वैसे अब भारत में भी पंखे को एसी के सप्लीमेंट के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा है...। ऐसे में आप अपने एसी वाले कमरे में ४ पत्ती वाला फैल लगवा सकते हैं...यह धीमा चलेगा और इससे बिजली भी ज्यादा खपत नहीं होती।


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गजब तरह से 2 देशों में बंटा है ये गांव, लोगों के पास है एकसाथ म्यांमार और भारत की नागरिकता


अभी तक आपने कई ऐसे गांवों के बारे में सुना होगा जिनके बारे में चौंकाने वाले किस्से और कहानियां होती है। ठीक ऐसा ही एक गांव भारत की उत्तर-पूर्व सीमा पर स्थित नगालैंड राज्य के मोन जिले में भी है जिसके बारे में जानकर हर कोइ हैरान रह जाता है। इस गांव का नाम लोंगवा है जो अपनी अजीबोगरीब लोकेशन के कारण चर्चा में बना रहता है। इस गांव से जुड़ी सबसे रोचक बात यह है कि यह गांव अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा में आधा भारत में और आधा म्यांमार में स्थित है।


आज पूरी दुनिया में इंसानों ने अपने आप को सरहदों के बीच बांट लिया है जिसमें वो अपनी—अपनी हद में रहते हैं। लेकिन इस समय एक गांव ऐसा भी है जहां सरहदें मायने नहीं रखती है। यह गांव भारत की सरहद पर बसा है। इसमें सबसे खास बात ये है इस गांव में रहने वाले लोगों के पास दो देशों की नागरिकता प्राप्त है।


यह भारत की उत्तर-पूर्व सीमा में स्थित नगालैंड राज्य के मोन जिले का है जिसको लोंगवा कहा जाता है। इस गांव को भारत और म्यांमार दोनों की आधी—आधी नागरिकता प्राप्त है। यानी इस गांव के लोगों के पास दोनों ही देशों के नागरिकता है। इसका मतलब वो भारत के नागरिक होने के साथ ही म्यांमार के भी नागरिक हैं। यहां पर घर इस तरह से बसे हुए हैं की लोगों परिवारों का खाना तो म्यांमार में बनता है लेकिन उनको आराम करने के लिए भारत में आना होता है। यही खूबी इस गांव को सबसे अलग और अनोखा बनाती है।


इसमें आश्चर्य वाली बात ये है की गांव के मुखिया का एक बेटा म्यांमार की सेना में सैनिक है। इस गांव में देश के नाम पर टकराव और तनाव बिल्कुल भी नहीं दिखाई देता। इस गांव के लोग बेहद शालीन हैं और दोनों देशों से प्यार करने वाले हैं। ऐसे में यह गांव पूरी दुनिया को अमन और चैन का संदेश देने का एक उदाहरण बन रहा है।


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गरीब किसान की 3 बेटियों ने किया गजब का काम, तीनों ही सेना में लेफ्टिनेंट पद हुई भर्ती


प्रचीन समय से लेकर आज तक बेटी किसी भी मुकाम पर बेटों से कमतर नहीं रही है चाहे हालात कैसे भी हों। इसका ताजा उदाहरण हाल ही में एक गरीब किसान की तीन बेटियां है जो अपने दम पर सबके लिए प्ररेणा बन चुकी है। रोहतक के रहने वाले किसान प्रताप सिंह के तीन बेटियां है और ये तीनों ही सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर भर्ती हुई है। इन तीनों बेटियों ने प्रत्येक चुनौति का सामना करते हुए यह कठिन मुकाम हासिल किया है।


खेती कर बेटियों को पढ़ाया
इनमें से प्रताप सिंह की दो सगी बेटियां है और एक कजन सिस्टर है। उनके माता-पिता को अपनी बेटियों की इस उपलब्धि पर गर्व है। प्रताप सिंह किसान मूल रूप से झज्जर के रहने वाले हैं। उन्होंने खेती करके ही अपनी बेटियों को पढ़ा-लिखा कर इस मुकाम पर पहुंचाया है। इन बहादुर बेटियों को आर्मी मेडिकल में भर्ती होने के बाद अलग-अलग जगह नियुक्ति मिली है। इनमें से एक बेटी को तमिलनाडू के वैलिंगटन में, दूसरी को यूपी के आगरा में और तीसरी को उत्तराखंड के रानीखेत में नियुक्ति दी गई है।

 

गजब का है ये भारतीय दिव्यांग तीरंदाज ! दांतों से तीर चलाकर जीत चुका है कई मेडल

यह कहावत अभिषेक थावरे पर खरी उतरती है की मेहनत और लगन के बल कुछ भी हासिल किया जा सकता है। इस लाइन पर खरे उतरने वाले अभिषेक भारत के पहले ऐसे तीरंदाज हैं जो हाथों की बजाए दांतों से तीर चलाते हैं। अभिषेक पोलियोग्रस्त हैं और इसका उन्हें तक चला जब उन्होंने होश संभाला। लेकिन अभिषेक ने पोलियो से हार नहीं मानी और 8वीं क्लास में पढ़ते हुए एथलेटिक्स में हिस्सा लेने लगे। उनकी मेहनत और लगन रंग लाई जिसके बूते पर वो इंटर स्कूल नेशनल लेवल के एथलीट बन गए। अभिषेक स्कूल अपने स्कूल के समय में ही 5 किलोमीटर, 10 किलोमीटर की रेस में कई मेडल जीत चुके हैं। सबकुछ अच्छा चलते हुक अभिषेक की किस्मत ने 26 अक्टूबर 2010 को एकबार फिर धोखा दिया। क्योंकि उन्हें एक "नी-इन्जरी'' हो गई जिसके बाद उनके जीवन में ठहराव आ गया। इसके बाद अभिषेक लगातार 2 साल तक परेशान रहे और लगभग निराश हो चुके थे। लेकिन उसके बाद संदीप गवई ने उन्हें प्रेरणा दी और फिर से उन्होंने आगे बढ़ने का मन बनाया।


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यहां निकला अंडे में अंडा ! 95 साल से चल रहा मुर्गी फार्म भी हैरान


अभी तक यह पहेली अनबूझी ही है कि पहले मुर्गी आई या अंडा! लेकिन हाल ही में इन्हीं से जुड़ी एक और चौंकाने वाली खबर आई है जिसके बारे में जानकर हर कोई हैरान है। इस बार मुर्गी का एक ऐसा अंडा सामने आया है जिसके बारे में जानने वाले के भी कान खड़े हो जाते है। यह अंडा ऑस्ट्रेलिया के क्वीन्सलैंड में एक एग फार्मर को मिला।

 

अंडे के अंदर अंडा
ऑस्ट्रेलिया के स्टॉगमैन्स एग्स फार्म में मुर्गी द्वारा दिया गया अंडा सामान्य अंडे के मुकाबले तीन गुना बड़ा है। जब किसान ने उस बड़े अंडे को फोड़ा तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं। क्योंकि इस बड़े अंडे के अंदर से एक और छोटा अंडा निकला जो सामान्य अंडे के बराबर का है। किसान अपनी यह स्टोरी सोशल मीडिया पर शेयर की है जो जबरदस्त वायरल हो रही है।

 

गजब है इस चायवाले की इनकम! चाय बेचकर एक महीने में कमाता है 12 लाख

 

176 ग्राम का अंडा
फार्मर ने इस अंडे को फोड़ने पहले तौल कर भी देखा था जिसमें इसका वजन 176 ग्राम का निकला। इसका मतलब यह सामान्य अंडे से तीन गुना बड़ा और भारी था। मुर्गी के एक सामान्य अंडे का वजन 58 ग्राम होता है और आकार में छोटा होता है। जब स्टॉकमैन्स एग्स के मालिक स्कॉट स्टॉकमैन ने स्टाफ के सामने इस बड़े अंडे को फोड़ा तो किसी को भी अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ की इसके अंदर से एक और सामान्य अंडा निकलेगा।

 

इस नदी में सालभर बहता है उबलता हुआ गर्म पानी, लोग चावल पकाकर खाते हैं

 

आश्चर्यजनक घटना
किसान का कहना है की जब हमने अंडे को फोड़ा तो लग रहा था कि इसके अंदर से 4 जर्दी निकलेंगी। स्टॉकमैन्स एग्स फार्म का कहना है की उन्होंने पहली बार 176 ग्राम का अंडा देखा था। वो यह मुर्गी फार्म 1923 से फार्म चला रहे हैं लेकिन इतना बड़ा अंडा पहली बार देखा जिसने सबको आश्चर्य में डाल दिया।


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यहां पर आया गजब का कानून! 2 पत्नियां रखने पर सरकार देगी मकान भत्ता


संयुक्त अरब अमीरात ने एक अजीब कानून शुरु किया है जिसके तहत दो पत्नियां रखने पर सरकार कई तरह की सुविधाएं दे रही है। यहां की सरकार ने दो पत्नियां रखने वाले लोगों के लिए अतिरिक्त मकान भत्ता देने की घोषणा की है।

 

इस देश में अविवाहित लड़कियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने लोगों को दूसरी शादी करने को प्रोत्साहित करने के लिए यह स्कीम जारी की है। UAE के बुनियादी ढांचा विकास मंत्री डॉ. अब्दुल्ला बेलहैफ अल नुईमी ने फेडरल नेशनल कौंसिंल (FNC) के सत्र के दौरान यह घोषणा की है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने यह निर्णय लिया है कि दो पत्नियां रखने वाले सभी लोगों को शेख जायद हाउसिंग कार्यक्रम के तहत मकान भत्ता दिया जाएगा।

 

उनके मुताबिक असल में यह दूसरी पत्नी के लिए मकान भत्ता होगा। यह एक पत्नी वाले परिवार को पहले से मिल रहे मकान भत्ते के अतिरिक्त होगा। मंत्री ने कहा कि दूसरी पत्नी के लिए भी उसी तरह के रहन-सहन की व्यवस्था होनी चाहिए, जैसा कि पहली बीवी के लिए होता है।

 

मंत्री ने कहा कि मकान भत्ता देने से लोग दूसरी शादी करने को प्रोत्साहित होंगे और UAE में अविवाहित महिलाओं की संख्या घटेगी। मंत्रालय यह चाहता है कि दूसरी बीवी को भी पहले बीवी की तरह ही मकान मिले।

 

गजब है इस चायवाले की इनकम! चाय बेचकर एक महीने में कमाता है 12 लाख
अभी तक आपने चाय वालों के बहुत ही चर्चे सुने होंगे जो आश्चर्य में डाल देने वाले होते हैं। ऐसा ही एक और वाकया सामने आया है जिसके बारे में सुनकर हर कोई हैरान है। यह चाय वाला चाय बेचकर इतनी कमाई कर रहा है जितनी बड़े—बड़े बिजनेसमैन भी नहीं करते है। इतना ही बल्कि यह चायवाला कोई आम चायवाला नहीं बल्कि महाराष्ट्र का सबसे अमीर चायवालाहै। यह चायवाला एक महीने में 12 लाख रुपए कमाता है। आपको बता दें कि यह शख्स पुणे के नवनाथ येवले हैं जिनकी येवले टी स्टॉल नाम से बहुत फेमस टी स्टाल है। इस टी स्टाल पर एक दिन में हजारों कप चाय बिकती है।


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एक विमान की हुई ऐसी इमरजेंसी लैंडिंग कि वजह जानकर आप हंस-हंंसकर लोटपोट हो जाएंगे


इंसान के फिजकली स्वभाव में कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जो बेहद कुदरती होती हैं। इसी में एक है गैस्टिक प्रॉब्लम...। सलमान खान की फिल्म दबंग का वह संवाद तो बच्चे-बच्चे बोलते हैं...सलमान ने भी इसे बेहद फनी अंदाज में बोला था-'छेदी सिंह, हम तुम पर इतने छेंद करेंगे कि कन्फ्यूज हो जाओगेे कि सांस कहां से लें और पादे कहां से...। खैर, ये बात तो फिल्म की हो गई, लेकिन असल जिंदगी में यह बेहद नेचुरल है। इस नेचुरल क्रिया पर कुछ लोग ठहाके लगाकर हंस लेते हैं, तो कुछ समझदार जानते हैं कि ये नेचुरल बात है। इस नेचुरल क्रिया को लेकर हाल ही एक विमान पर हंगामा खड़ा हो गया। हंगामा भी ऐसा बरपा कि विमान की इमरजेंसी लैंडिंग तक करवानी पड़ी।

यह वाकया पिछले माह का है। दरअसल, दुबई से नीदरलैंड्स जा रहे एक विमान में मौजूद एक यात्री को गैस्टिक प्रॉब्लम थी और वो विमान में लगातार गैस छोड़ता रहा। लेकिन उस शख्स को इस बात का अंदाजा नहीं था कि उसका पादना उसके लिए मुसीबत बन जाएगा। विमान में सवार बाकी यात्रियों ने उस शख्स के खिलाफ धावा बोल दिया। यात्रियों ने इतना हंगामा मचाया कि आखिरकार विमान को ऑस्ट्रिया के विएना शहर में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी।

मजेदार बात यह रही कि 'न्यूयॉर्क पोस्ट' ने इस घटना को 'फार्ट अटैक' के टाइटल से खबर छापी। खबर के मुताबिक, ये मामला सस्ती विमान सेवा कही जाने वाली ट्रांसेविया एयरलाइन का है। विमान में चार यात्रियों के बीच हुई कहासुनी जब बात बिगडऩे के हद तक पहुंच गई, तो पायलट ने इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला किया। वहीं, 'यूके एक्सप्रेस' ने खबर छापी कि दोनों महिलाओं को दूसरे यात्रियों की राय लेने के बाद ही उतारा गया। ऑस्ट्रिया पुलिस ने उन्हें अरेस्ट कर लिया, लेकिन किसी भी कानून के तहत मामला नहीं बन पाने के कारण उन्हें छोड़ दिया गया।

दो में से एक लड़की, 25 साल की नोरा लाचेब नीदरलैंड में लॉ की स्टूडेंट है। उसने कहा है कि विमान कंपनी के इस रवैये को कोर्ट में चुनौती देगी। जब यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हुई, तो लोगों ने इसे नेचुरल कहते हुए यहा भी कहा कि इसका मजाक नहीं बनाना चाहिए। इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर यह भी कहा कि इसके लिए इमरजेंसी लैंडिंग कराना कोई हल नहीं था...उन यात्रियों को इस तरह विमान से उतारना ठीक नहीं था...क्रू मेंबर्स चाहते, तो कोई रास्ता निकाल सकते थे।


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गजब है इस चायवाले की इनकम! चाय बेचकर एक महीने में कमाता है 12 लाख


अभी तक आपने चाय वालों के बहुत ही चर्चे सुने होंगे जो आश्चर्य में डाल देने वाले होते हैं। ऐसा ही एक और वाकया सामने आया है जिसके बारे में सुनकर हर कोई हैरान है। यह चाय वाला चाय बेचकर इतनी कमाई कर रहा है जितनी बड़े—बड़े बिजनेसमैन भी नहीं करते है। इतना ही बल्कि यह चायवाला कोई आम चायवाला नहीं बल्कि महाराष्ट्र का सबसे अमीर चायवालाहै। यह चायवाला एक महीने में 12 लाख रुपए कमाता है। आपको बता दें कि यह शख्स पुणे के नवनाथ येवले हैं जिनकी येवले टी स्टॉल नाम से बहुत फेमस टी स्टाल है। इस टी स्टाल पर एक दिन में हजारों कप चाय बिकती है।

 

नवनाथ का कहना है की पुणे में चाय ब्रेड का आइडिया उन्हें 2011 में आया था। इसके बाद येवले टी हाउस के संस्थापक नवनाथ की पहचान इतनी बढ़ गई है कि अब वो इस चाय ब्रैंड को दुनियाभर में पॉपुलर करने की सोच रहे हैं। येवले का कहना है की शहर में उनके दो आउटलेट हैं और एक दिन में वो करीब 3000-4000 से ज्यादा कप चाय बेचते हैं। इसस हर महीने इनकी इनकम 10 से 12 लाख तक हो जाती है।

 

येवले का कहना है की 2011 में उन्हें चाय को एक ब्रैंड की तरह स्थापित करने का आइडिया आया। लेकिन पुणे में कोई भी अच्छा चायवाला नहीं था इसलिए उन्होंने चार साल तक चाय पर स्टडी की और उसके बाद अच्छी गुणवत्ता से चाय ब्रैंड बनाया। आज उनके हर टी स्टाल पर करीब 10-14 लोग काम करते हैं।

 

गजब! हाईवे पर 55 साल की ये महिला 20 साल से कर रही है ट्रकों के पंक्चर ठीक

दिल्ली की शांति देवी ऐसी महिला हैं जो मिनटों में गाड़ियों के टायर बदलकर पंक्चर ठीक कर देती हैं। वो बड़ी कुशलता से बड़े-बड़े ट्रकों के टायर को भी पलक झपके बदल देती हैं और उनके पंक्चर भी ठीक कर देती हैं। 55 साल की शांति देवी इस उम्र में भी रोजाना लगभग 12 घंटे काम करती हैं। वो पिछले 20 साल से नेशनल हाइवे 4 पर लगे संजय गांधी नगर ट्रांसपोर्ट डिपो (आजादपुर मंडी) में पंक्चर ठीक कर रही हैं।


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गजब का है ये भारतीय दिव्यांग तीरंदाज ! दांतों से तीर चलाकर जीत चुका है कई मेडल


यह कहावत अभिषेक थावरे पर खरी उतरती है की मेहनत और लगन के बल कुछ भी हासिल किया जा सकता है। इस लाइन पर खरे उतरने वाले अभिषेक भारत के पहले ऐसे तीरंदाज हैं जो हाथों की बजाए दांतों से तीर चलाते हैं।

पोलियो के बावजूद बने एथलीट
अभिषेक पोलियोग्रस्त हैं और इसका उन्हें तक चला जब उन्होंने होश संभाला। लेकिन अभिषेक ने पोलियो से हार नहीं मानी और 8वीं क्लास में पढ़ते हुए एथलेटिक्स में हिस्सा लेने लगे। उनकी मेहनत और लगन रंग लाई जिसके बूते पर वो इंटर स्कूल नेशनल लेवल के एथलीट बन गए।

जीत चुके हैं कई मेडल
अभिषेक स्कूल अपने स्कूल के समय में ही 5 किलोमीटर, 10 किलोमीटर की रेस में कई मेडल जीत चुके हैं। सबकुछ अच्छा चलते हुक अभिषेक की किस्मत ने 26 अक्टूबर 2010 को एकबार फिर धोखा दिया। क्योंकि उन्हें एक "नी-इन्जरी'' हो गई जिसके बाद उनके जीवन में ठहराव आ गया। इसके बाद अभिषेक लगातार 2 साल तक परेशान रहे और लगभग निराश हो चुके थे। लेकिन उसके बाद संदीप गवई ने उन्हें प्रेरणा दी और फिर से उन्होंने आगे बढ़ने का मन बनाया।

दांतों से तीर खींचना शुरू किया
अभिषेक को गवई ने तीरंदाजी में हाथ आजमाने की सलाह दी। लेकिन पोलियोग्रस्त होने के कारण अभिषेक के दाएं हाथ और कंधे में इतनी ताकत नहीं थी कि वे उससे तीर खींचकर चला पाएं। लेकिन इस समस्या से का समाधान उन्होंने अपने दांतों को बनाया। ऐसा करने वाले अभिषे भारत के पहले तीरंदाज हैं।

तीर खींचने में इतनी लगती है ताकत
धनुष से तीर खींचे में लगने वाली ताकत को ''पुल वेट'' या ''पाउन्डेज'' कहा जाता है। धनुष से एकबार तीर खींचने में लगभग 50 किलो पाउन्डेज की ताकत लगती है। यह ताकत लगाना बड़े-बड़े तीरंदाजों के लिए भी काफी मुश्किल भरा काम होता है। इस काम को अभिषेक बहुत ही आसानी से कर लेते हैं। अभिषेक के जीवन का लक्ष्य अब 2020 के टोक्यो पैरालंपिक में सिर्फ भारत को रिप्रजेंट करते हुए देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है।


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Watch: लाइव शो के दौरान Radio Jockey प्रॉक्टर ने दिया बच्चे को जन्म


जहां प्रसव पीड़ा के दौरान महिलाएं हॉस्पिटल की ओर भागती हैं, वहीं प्रॉक्टर नाम की एक महिला ने अपने प्रसव के लिए रेडियो स्टेशन को चुना। बेशक, ये बात हैरान कर देने वाली लगे, लेकिन इस महिला का जुनून ही कुछ ऐसा था कि वह अपने बच्चे को हॉस्पिटल की बजाय रेडियो स्टेशन में जन्म देने का फैसला किया। जैसे ही रेडियो स्टेशन वालों को प्रॉक्टर की इस इच्छा के बारे में पता चला, वैसे ही रेडियो स्टेशन में डिलेवरी की सारी तैयारियां कर ली गईं। जी हां, ये मामला अमेरिका के सेंट लुईंस के 'द आर्क' स्टेशन का है, जहां एक रेडियो आरजे ने लाइव शो के दौरान बच्चे को जन्म दिया है।

बता दें कि यह वाकया पिछले माह का है। प्रॉक्टर को जब प्रसव पीड़ा शुरू हुई, तो उन्हें तुरंत रेडियो स्टेशन लाया गया। गोयाकि, रेडियो स्टेशन में प्रसव के सारे इंतजाम आनन-फानन में किए गए, क्योंकि बच्चे की डिलीवरी दी गई डेट से पहले ही हो गई, इसलिए उन्हें अचानक ही शो की तैयारी करनी पड़ी।

Little Jedi.

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प्रॉक्टर ने ऐसा सिर्फ इसलिए किया, क्योंकि वो चाहती थीं कि अपने जीवन के इस कीमती पल को श्रोताओं के साथ बांटें। प्रॉक्टर के अनुसार, मेरे लिए यह अनुभव बेहद शानदार था। ये मेरे जीवन का सबसे सुखद अनुभव था। प्रॉक्टर ने कहा कि बच्चे को लाइव शो में जन्म देना 'मेरे काम का ही एक विस्तार था, जो मैं हर दिन करती हूं। मैं अपनी जिंदगी के हर पहलू को अपने श्रोताओं को साथ शेयर करती हूं। '

गौरतलब है कि प्रॉक्टर ने बच्चे का नाम जेमसन रखा है। यह नाम श्रोताओं की रायशुमारी के बाद रखा गया। प्रॉक्टर के को-होस्ट ने शो को एक जादुई और यादगार लम्हा बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के शो की उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह का लम्हा फिर कभी जीवन में नहीं आएगा। कुछ चीजें जीवन में सिर्फ एक बार ही होती हैं। फिलहाल, प्रॉक्टर रेडियो स्टेशन से दूर रहेंगी। मैटरनिटी लीव के बाद वो दोबारा शो से जुड़ेंगी।


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रंगों से खेलना सेहत के लिए है अच्छा, जानिए ये वैज्ञानिक कारण


भारतवर्ष में होली का त्यौंहार रंग और गुलाल लगाकर हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। एक ओर जहां होली मनाने के पीछे कई धार्मिक कारण हैं वहीं, रंगो से होली खेलने के पीछे भी कई वैज्ञानिक कारण छिपें हैं जिनका सीधा सा मतलब शरीर की सेहत को लेकर निकलता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक गुलाल या अबीर शरीर की त्वचा के लिए कई तरह से काम करते हैं। ये चीजें त्वचा को उत्तेजित करते हैं। ये त्वचा की पोरों में समाकर शरीर के आयन मंडल को मजबूती देते हैं और स्वास्थ्य को बेहतर करते हैं। रंगो से होली खेलने के पीछे कई वैज्ञानिक कारण भी हैं जिन्हें जानकर आपको हैरानी होगी। हालांकी बहुत ही कम लोग इन कारणों को जानते हैं।

 

होली का त्यौंहार हर साल ऐसे समय में आता है जब मौसम में बदलाव के कारण लोग उनींदे और आलसी से होते हैं। ठंडे मौसम के गर्म रुख करने के कारण शरीर का कुछ थकान और सुस्ती महसूस करने लगता है।शरीर की इस सुस्ती को दूर भगाने के लिए ही लोग फाग के इस मौसम में जोर से गीत गाते हैं। इसी कारण इस मौसम में बजाया जाने वाला संगीत भी तेज होता है जिससे शरीर में नई उर्जा मिलती है।


होली पर शरीर पर ढाक के फूलों से तैयार किया गया रंगीन पानी, विशुद्ध रूप में अबीर और गुलाल डालने से शरीर को सुकून और ताजगी देता है। रंगो से होली खेलने के पीछे कई वैज्ञानिक कारण भी हैं। गुलाल औऱ अबीर से त्वचा की सुदंरता में निखार भी आता है।

 

इस नदी में सालभर बहता है उबलता हुआ गर्म पानी, लोग चावल पकाकर खाते हैं

भारत समेत दुनिया के कई देशों में कई तरह की नदियां हैं जिनके बारे में अजब-गजब बाते हैं। जैसे कोई नदी बहुत लंबी होती है तो कोई बहुत चौड़ी यानी किसी का पानी बिल्कुल साफ होता है तो किसी का मटमैला। इन सभी नदियों में सूर्योदय से पहले गर्म और सूर्योदय के बाद ठंडा पानी मिलता है। लेकिन इस दुनिया में एक ऐसी अनोखी नदी भी है जिसमें 24 घंटे और साल के 365 दिन उबलता हुआ पानी बहता है। यह नदी दक्षिण अमरीका के अमेजन बेसिन में स्थित है जिसको बॉयलिंग रिवर के नाम से भी जाना जाता है। इस अनोखी नदी की खोज आंद्रेज रूजो ने साल 2011 में की थी। इस उबलते हुए पानी की नदी की लंबाई 6.4 किलोमीटर, चौड़ाई 82 फीट और गहराई 20 फीट है।


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