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अगले माह GST काउंसिल की बैठक में AAAR के नेशनल बेंच बनाने के प्रस्ताव पर हो सकती है चर्चा


नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल अगले महीने विभिन्न राज्यों में एएआर द्वारा पारित समान मुद्दों पर विरोधाभासी आदेशों से निपटने के लिए अपीलेट अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग ( AAAR ) की एक नेशनल बेंच स्थापित करने के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है। एएएआर के नेशनल बेंच का गठन का मूल उद्देश्य टैक्सपेयर्स को निश्चितता प्रदान करना है। सूत्रों ने बताया कि एएएआर की नेशनल बेंच की आइडिया को लेकर रिवेन्यू डिपार्टमेंट विचार कर रहा है। रिवेन्यू डिपार्टमेंट को भी यह लगता है कि जीएसटी काउंसिल के तहत अपने मौजूदा फार्म में एएआर की कार्यप्रणाली टैक्सपेयर्स को निश्चितता प्रदान करने में सक्षम नहीं है।

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राज्यों के एएआर में सामंजस्य बिठाने में मिलेगी मदद

इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने कहा, "इस बात की सहमति है कि एडवांस रूलिंग के लिए दूसरी अपीलेट अथॅारिटी का गठन हो। यह एक नेशनल बेंच होगा जो कि राज्यों के एएआर द्वारा फैसलों में सामंजस्य बिठाने को लेकर काम करेगा। अगले माह GST काउंसिल की होने वाली बैठक में हम इस प्रस्ताव को पेश करेंगे।" अलग-अलग राज्यों में AAR ने 470 आदेशों को पास किया है जबकि मार्च 2019 तक AAAR ने 59 मामलों को खत्म करने में कामयाब रहा है।

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करना होगा जीएसटी मामलों में कदलाव

एएआर द्वारा पास किए गए कुल आदेशों में से करीब 10 आदेश असंगत मामलों के रहे हैं। इसमें से कुछ मामलों को सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स ने सुलझाया है। अधिकारी ने आगे बताया कि दूसरी अपीलेट अथॉरिटी बनाने के लिए जीएसटी नियमों में बदलाव करना होगा। AAR की नेशनल बेंच की स्थापना से GST में निश्चितता लाने में मदद मिलेगी क्योंकि AAR द्वारा अलग-अलग शासनों ने उद्योग को एक विशेष व्यवसाय निर्णय के कर निहितार्थ के बारे में बताया। दस नेशनल बेंच के गठन के लिए राज्यों की सहमति की भी जरूरत होगी।

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पिछले साल ही जीएसटी काउंसिल की बैठक में होना था फैसला

वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में जुलाई 2018 को जीएसटी काउंसिल की एक बैठक में ही इस पर फैसला होना था। इस बैठक में राज्यों के वित्त मंत्रियों ने भी भाग लिया था। इस बैठके बाद काउंसिल कोई अंतिम फैसले पर नहीं पहुंच सका था। जीएसटी नियमों के तहत हर राज्य को अथॉरिटी फॉर एडवांस रूलिंग (एएआर) का गठन करना होता है जिसमें सेंट्रल टैक्स डिपार्टमेंट के अधिकाराी और राज्यों के प्रतिनिधी भी शामिल होते हैं।

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लोकसभा चुनाव में 2297 करोड़पतियों को देश की जनता ने दिया वोट, 60 के पास कोई संपत्ति नही


नई दिल्ली। रविवार यानी 19 मई को लोकसभा चुनाव 2019 का सातवां और आखिरी चरण हैं और इस आखिरी चरण में 59 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा जाएगा और इसमें पूर्वांचल की 13 सीटें शामिल हैं। सातवें चरण में 918 उम्मीदवारों को वोट डाले जाएंगे। एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ( ADR Report ) ने इस लोकसभा चुनाव में शामिल 8049 में से 7982 उम्मीदवारों के शापथपत्रों का विश्लेषण किया है, जिसमें से 19 फीसदी उम्मीदवारों पर अपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं, 13 फीसदी उम्मीदवारों पर गंभीर अफराधिक मामले दर्ज हैं। इसके अलावा इसमें 29 फीसदी करोड़पति उम्मीदवार शामिल हैं। आइए आज हम आपको बताते हैं कि इस बार के चुनाव में आप किस तरह के उम्मीदवारों को वोट करेंगे-


जानिए सातवें चरण के उम्मीदवारों की स्थिति

अगर हम सातवें चरण के चुनाव की बात करें तो संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ( ADR ) की रिपोर्ट के अनुसार इस चरण में 918 उम्मीदवार शामिल हैं, जिनमें से 909 उम्मीदवारों के हलफनामे के आधार पर विश्लेषण किया गया है। ADR के मुताबिक इस चरण में तकरीबन 278 करोड़पति कैंडिडेट मैदान में उतरे हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 40 अमीर प्रत्याशियों को कांग्रेस पार्टी ने टिकट दिया है। इसके बाद दूसरे नंबर पर सत्तारूढ़ बीजेपी है, जिसने 36 करोड़पति उम्मीदवारों को टिकट दिया है। हालांकि इस चरण में 715 उम्मीदवार निर्दलीय या अन्य श्रेणी के हैं। इनमें से 151 कैंडिडेट करोड़पति हैं।

 

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IMAGE CREDIT: election

19 फीसदी बढ़े अपराधिक मामले

लोकसभा चुनाव 2019 में विश्लेषित किए गए 7982 उम्मीदवारों में से 1500 उम्मीदवारों ने अपने ऊपर अपराधिक मामले घोषित किए हैं। वहीं, लोकसभा चुनाव 2014 में किए गए विलेश्षण के अनुसार 8205 में से 1404 उम्मीदवारों ने अपने ऊपर अपराधिक मामले घोषित किए थे। साल 2019 में इन उम्मीदवारों की संख्या में 19 फीसदी है।

 

13 फीसदी बढ़े गंभीर अपराधिक मामले

लोकसभा चुनाव 2019 में विश्लेषित किए गए 7982 उम्मीदवारों में से 1070 उम्मीदवारों ने अपने ऊपर गंभीर अपराधिक मामले घोषित किए हैं। वहीं, लोकसभा चुनाव 2014 में किए गए विलेश्षण के अनुसार 8205 में से 908 उम्मीदवारों ने अपने ऊपर गंभीर अपराधिक मामले घोषित किए थे। साल 2019 में इन उम्मीदवारों की संख्या में 13 फीसदी है।

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29 फीसदी करोड़पति उम्मीदवार हैं शामिल

लोकसभा चुनाव 2019 में विश्लेषित किए गए 7982 उम्मीदवारों में से 2297 करोड़पति उम्मीदवार शामिल हैं। वहीं, लोकसभा चुनाव 2014 में किए गए विलेश्षण के अनुसार 8205 में से 2217 उम्मीदवार करोड़पति थे। साल 2014 की तुलना में साल 2019 में इन उम्मीदवारों की संख्या में 2 फीसदी की बढ़ोत्तरी देखी गई है। 2014 में करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या 27 फीसदी थी जो अब 29 फीसदी हो गई है।


शून्य संपत्ति वाले उम्मीदवार

लोकसभा चुनाव 2019 में 60 उम्मीदवारों की संपत्ति शून्य थी। वहीं, अगर हम औसतन संपत्ति की बात करें तो इस बार चुनाव में कुल औसतन संपत्ति 4.14 करोड़ है।

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ट्रेड वार में बिगड़े ड्रैगन के हालात, चीन की अर्थव्यवस्था को हो सकता है भारी नुकसान


नई दिल्ली। अमरीका और चीन के बीच पिछले साल से ट्रेड वार चल रहा है और इस ट्रेड वॉर ( Trade War ) में चीन ( China ) को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हाल ही में अमरीका ने चीनी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा दिया है, जिसके बाद से चीन के हालात काफी खराब हो रहे हैं। चीन के एक बड़े अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि अमरीका के साथ व्यापार युद्ध में चीन के सकल घरेलू उत्पाद ( GDP ) को एक फीसदी का झटका लग सकता है।


चीन की अर्थव्यवस्था को होगा नुकसान

आपको बता दें कि चीन ने पहली बार यह बात स्वीकार की है कि अमरीका के टैरिफ बढ़ाने से चीन की अर्थव्यवस्था को काफी खतरा है। चीन ने कहा कि ट्रेड वॉर के कारण हमारी अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है। हांगकांग की मीडिया से मिली जानकारी के अऩुसार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ( सीपीसी ) के शीर्ष पोलित ब्यूरो की सात सदस्यीय स्थायी समिति के सदस्य वांग यांग के हवाले से कहा गया है कि चीन-अमरीका के बीच जारी ट्रेड वार से चीन की आर्थिक वृद्धि एक फीसदी नीचे आ सकती है।


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रिपोर्ट में हुआ खुलासा

रिपोर्ट के मुताबिक वांग ने चीन में कारोबार कर रहे ताइवानी कारोबारियों के एक समूह के साथ गुरुवार को बातचीत के बातचीत में ट्रेड वार से हुए नुकसान की बात स्वीकार किया था। वांग ने उनसे कहा कि एक साल से चल रहे इस विवाद पर सरकार का आकलन है कि सबसे प्रतिकूल परिस्थिति में जीडीपी अनुमानित स्तर से एक फीसदी कम हो सकती है।


पिछले साल चीन की आर्थिक वृद्धि में आई गिरावट

हालांकि, उन्होंने इस बात पर कोई चर्चा नहीं कि इस स्थिति से निपटने के लिए चीन की योजना क्या है। बता दें कि पिछले साल चीन की आर्थिक वृद्धि दर गिरकर 6.8 फीसदी पर आ गई थी। सरकारी अनुमानों के अनुसार, इस साल यह 6.5 फीसदी से 6 फीसदी के बीच रह सकती है। इस बयान की महत्ता इससे समझे जा सकती है कि यह समिति ही एक तरह से चीन पर नियंत्रण करती है।

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US के प्रतिबंध के बाद भी भारत में नहीं होगी पेट्रोल-डीजल की कमी, अब से सऊदी से तेल आयात करेगा भारत


नई दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी इंडियन ऑयल कार्पोरेशन ( IOCL ) ने जानकारी देते हुए बताया कि ईरान से तेल आयात बंद होने के बाद भी भारत में पेट्रोल-डीजल के कारोबार और पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति पर कोई असर नहीं होगा। कंपनी ने कहा है कि ईरान से होने वाले आयात की कमी को दूर करने के लिए अमरीका से कच्चे तेल आयात का अनुबंध किया गया है। इस अनुबंध से भारत में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नही होगी।


सऊदी अरब से आयात करेंगे तेल

इसके साथ ही आईओसीएल ने जानकारी देते हुए बताया कि सऊदी अरब से अधिक तेल आयात किया जा रहा है। इससे ईरान आयात के बड़े हिस्से की भरपाई कर ली गई है। सउदी अरब से तेल खरीदने के कारण भारत में तेल की कमी को पूरा कर लिया जाएगा। कंपनी ने कहा कि हम सउदी अरब से तेल आयात करके भारत में पूर्ती करेंगे।


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कई देशों से आयात करेंगे तेल

इंडियन ऑइल के चेयरमैन संजीव सिंह ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि हमने वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति का अनुबंध किया है। कोई एक देश इसकी भरपाई नहीं कर सकता है, इसलिए हमने विभिन्न स्रोतों से इसकी व्यवस्था की है। हम अपने आपूर्ति स्रोतों के मामले में उचित विविधता रखते हैं। ईरान से होने वाले आयात की भरपाई के लिये हमने पूरी व्यवस्था कर ली है।


ईरान से किया जाता था सबसे ज्यादा तेल आयात

अमरीकी प्रतिबंध लागू होने के बाद ईरान से तेल आयात करने पर रोक लगा दी गई है। आपको बता दें कि देश में जितने कच्चे तेल का आयात होता है उसका दसवां हिस्सा ईरान से मंगाया जाता रहा है। 31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष 2018-19 में भारत ने ईरान से कुल मिलाकर 2.40 करोड़ टन कच्चे तेल की खरीदारी की गई थी। इसमें से 90 लाख टन तेल की खरीदारी इंडियन ऑइल ने की थी।


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1 मई को लगया गया था प्रतिबंध

1 मई से अमरीकी के द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के बाद से इंडियन ऑयल और दूसरी भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने ईरान से कच्चे तेल का आयात बंद कर दिया है। इस आयात के बंद होने के बाद से ही भारतने अन्य देशों से तेल का आयात करना शुरु कर दिया है। इसकी भरपाई के लिए आईओसीएल ने सउदी अरब से 56 लाख टन सालाना खरीद अनुबंध है। इसके ऊपर कंपनी को 20 लाख टन अतिरिक्त आयात का विकल्प उपलब्ध है।

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भारत के मुकाबले आधा हुआ पाकिस्तान का रुपया, बढ़ रही है पाकिस्तान की मुसीबत


नई दिल्ली। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो चुकी है। पाकिस्तानी सरकार को लगातार आर्थिक मदद के लिए आईएमएफ और वल्र्ड बैंक के सामने हाथ तक फैलाने पड़ रहे हैं। जिसकी वजह से पाकिस्तानी रुपए की स्थिति गिरती जा रही है। मौजूदा स्थिति यहां तक पहुंच चुकी है कि पाकिस्तान का रुपया भारतीय रुपए के मुकाबले आधा हो गया है। शुक्रवार को जहां भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 70 डॉलर था, तो वहीं पाकिस्तानी रुपया डॉलर 150 रुपए पहुंच गया। जानकारों की मानें तो मौजूदा समय में पाकिस्तानी रुपया अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।

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इस वजह से बढ़ रहा है पाकिस्तान में संकट
वास्तव में पाकिस्तान ने इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड से 6 अरब डॉलर के राहत पैकेज की डिमांड की थी, जिसे मंजूरी मिल चुकी है। खास बात ये है कि 1980 से अब तक पाकिस्तान को आईएमएफ की ओर से 12 बार राहत पैकेज दिया जा चुका है। अब उसे 13वीं बार राहत पैकेज दिया जाएगा। जिसकी वजह से पाकिस्तानी रुपए की साख में गिरावट का दौर देखने को मिल रहा है। इस सप्ताह पाकिस्तानी रुपया अपने निम्नतम स्तर पर आ गया। वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान ने राहत पैकेज के बदले किन शर्तों को पूरा करने वादा किया है, इन बातों की अटकलों की वजह निवेशकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। निवेशक पाकिस्तान में डॉलर की मात्रा पर्याप्त संख्या में ना होने के कारण भी काफी सहमे हुए हैं।

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पर्यटकों को डॉलर देना कम कर सकती है सरकार
पाकिस्तान की सरकार की ओर से इस स्थिति से निपटने के लिए एक कमेटी का गठन किया है। वहीं दूसरी ओर सरकार विदेश जाने वाले पाकिस्तानी लोगों को सीमित मात्रा डॉलर देने का ऐलान कर सकती है। मौजूदा समय में सरकार की ओर से ऐसे लोगों को 10,000 डॉलर दे रही है। जिसे 3,000 डॉलर किया जा सकता है। जिसके बाद पाकिस्तान आईएमएफके एक साल में 2 अरब डॉलर से ज्यादा की बचत होगी।

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विदेशी मुद्रा भंडार में भारी कमी
सोमवार यानी 20 मई को पाकिस्तान का केंद्रीय बैंक नई नीतिगत दरों का ऐलान करने वाला है। पाकिस्तान केंद्रीय बैंक के अनुसार 10 मई को समाप्त हुए सप्ताह में पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 13.80 अरब करोड़ डॉलर घटकर 8.846 अरब डॉलर बचा है। इस मतलब यह हुआ कि पाकिस्तान तीन महीने से भी कम की जरूरी सामग्री विदेशों से आयात कर सकता है। आपको बता दें कि पाकिस्तानी रुपए का भाव पिछले एक साल में 20 फीसदी से ज्यादा घट चुका है। वहीं पाकिस्तानी रुपया डॉलर के मुकाबले एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गई है।

 

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मोदी सरकार को मिल गई कालेधन की लिस्ट, लेकिन नाम उजागर करने से कर दिया इनकार


नई दिल्ली। मोदी सरकार ने स्विट्जरलैंड में काले धन को पकड़ा है लेकिन सरकार ने कालेधन को लेकर प्राप्त सूचनाओं के बारे में जानकारी देने इनकार कर दिया है। RTI के जवाब में वित्त मंत्रालय ने कहा कि अगर हम काले धन के बारे में जानकारी देते हैं तो इससे गोपनीयता खत्म हो जाएगी। सरकार ने गोपनीयता का हवाला देते हुए कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड ब्लैकमनी पर केस टु केस बेसिस पर जानकारियां साझा करते हैं, इसके मुताबिक जांच की जा रही है और यह प्रक्रिया अभी चल रही है।


RTI में हुआ खुलासा

मीडिया की ओर दायर आरटीआई के जवाब में वित्त मंत्रालय ने कहा, ‘स्विट्जरलैंड से ब्लैकमनी पर प्राप्त जानकारियां गोपनीय प्रावधानों के दायरे में हैं।’ मंत्रालय से स्विट्जरलैंड से मिली ब्लैकमनी से संबंधित जानकारियां मांगी गई थी। इसमें कंपनियों और व्यक्तियों के नाम और उन पर हुई कार्रवाई के बारे में भी पूछा गया था।


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अग्रीमेंट पर 22 नवंबर 2016 को हुए थे हस्ताक्षर

इसमें कहा गया कि दोनों देशों के बीच वित्तीय खातों से जुड़ी जानकारियां ऑटोमैटिक साझा करने की सहमति है। इस अग्रीमेंट पर 22 नवंबर 2016 को हस्ताक्षर हुए थे। मंत्रालय ने कहा कि आवश्यक कानूनी प्रावधान किए जा चुके हैं और वहां मौजूद भारतीयों के खातों की जानकारियां 2019 से मिलने लगेंगी।


मंत्रालय ने दी जानकारी

मंत्रालय ने कहा कि इससे स्विट्जरलैंड में भारतीयों की बेनामी संपत्ति और कालेधन का पता लगाना आसान हो जाएगा। मंत्रालय ने यह भी कहा कि देश के भीतर और बाहर कितना कालाधन है, इसको लेकर कोई अनुमान मौजूद नहीं है।

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( इनपुट एजेंसी से भी )


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नई सरकार को मिलेगें मुसीबतों के उपहार, क्या झेल पाएगी इन सब का भार


नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 के छह चरण पूरे हो चुके हैं। सातवां चरण रविवार को पूरा हो जाएगा। उसके बाद 23 मई तारीख को इस बात का फैसला हो जाएगा कि आखिर देश में अगली सरकार किस पार्टी या गठबंधन की बनेगी। हमारा सवाल उससे आगे का है। क्योंकि सरकार किसी भी पार्टी या गठबंधन की बने उसे आने वाले दिनों में कई कसौटियों या यूं कहें कि चुनौतियों से गुजरना होगा। जिनपर देश की पूरी अर्थव्यवस्था टिकी हुई है। रोजगार, पेट्रोल और डीजल की कीमत , महंगाई दर , व्यापार घाटा आदि ऐसे तमाम चुनौतियां मुंह बाए खड़ी है नई सरकार के सामने। आइए आपको भी अपनी इस विशेष रिपोर्ट में बताते हैं कि यह चुनौतियां किस तरह की हैं...

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1. रोजगार 45 साल के निचले स्तर
यह एक ऐसा मसला है जिसपर विपक्ष कम से कम दो साल से सरकार से सवाल कर रहा है। लेकिन सरकार के पास कोई जवाब नहीं है। नई सरकार के सामने रोजगार की चुनौती सबसे बड़ी होगी। इसका एक कारण यह भी है क्योंकि अजीमजी प्रेमजी की हालिया रिपोर्ट यह बात सामने आई है कि देश में रोजगार 45 साल के निचले स्तर पर चला गया है। वहीं सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश में अप्रैल 2019 में रोजगार दर 7.6 फीसदी पहुंच गई है, जो 2016 के बाद सबसे ज्यादा है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी अपनी रिपोर्ट के हवाले से यह भी कहा है कि नोटबंदी के बाद से 2018 तक एक करोड़ 10 लाख लोगों ने रोजगार खो दिया है। यानि आने वाले दिनों में नई सरकार के सामने देश के युवाओं के लिए रोजगार देने की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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2. पेट्रोल और डीजल की कीमत
पेट्रोल और डीजल की कीमत देश की इकोनॉमी को सबसे ज्यादा इफेक्ट करती है। जो इंटरनेशनल मार्केट के उतार-चढ़ाव तय करती है। ऐसे समय में सरकार की सूझबूझ से ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर या कम किया जा सकता है। मौजूदा समय की बात करें तो इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। जाने आने वाले दिनों में और उपर पहुंच सकता है। वास्तव में ईरान वेनेजुएला पर अमरीकी प्रतिबंध की वजह से भारत को क्रूड ऑयल भरपूर मात्रा में नहीं मिल पा रहा है। वहीं ओपेक देशों ने भी क्रूड के उत्पादन में कटौती की हुई है। ऐसे में क्रूड ऑयल के दाम में इजाफा होने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमत देश की नई सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।

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3. महंगाई दर में इजाफा
नई सरकार के सामने महंगाई दर भी एक बड़ा सवाल होगा। हाल ही में सरकार की ओर से थोक और खुदरा महंगाई दर के आंकड़े पेश किए हैं। खुदरा मंहगाई दर छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। आंकड़ों की बात करें तो अप्रैल 2019 में देश में खुदरा महंगाई दर 2.92 फीसदी हो गई है। अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले महीने में यह दर 3 फीसदी के आसपास पहुंच जाएगी। वहीं थोक महंगाई दर (3.07 फीसदी) से देश को भले ही राहत मिली हो, लेकिन सब्जियों की थोक कीमतों में 40.65 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है। खाद्य पदार्थों की महंगाई बढ़कर 4.95 फीसदी हो गई है। इसके अलावा गैर खाद्य पदार्थों की महंगाई दर 2.83 फीसदी से बढ़कर 5.23 फीसदी हो गई है। ऐसे में नई सरकार के सामने इनको काबू में रखना बड़ी चुनौती होगी।

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4. व्यापार घाटा अपने उच्चतम स्तर पर
व्यापार घाटा, पहले आपको आसान भाषा में समझाने का प्रयास करते हैं कि आखिर ये होता क्या है। वास्तव में आयात यानी इंपोर्ट में इजाफा हो और निर्यात कम हो तो ऐसी स्थिति में उसे देश का व्यापार घाटा कहते हैं। देश की सरकारें यह कोशिश करती हैं कि जिस सामान को वो विदेशों से आयात करती हैं उसका प्रोडक्शन अपने ही देश में शुरू करें। ताकि आयात कम हो और निर्यात ज्यादा से ज्यादा किया जा सके। ताकि व्यापार घाटा कम हो सके। लेकिन ताजा आंकड़ों के अनुसार देश का व्यापार घाटा पांच महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। जो देश और उसकी नई सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में 26 अरब डॉलर का निर्यात और 41.4 अरब डॉलर का आयात हुआ, जिससे व्यापार घाटा 15.33 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। यह ट्रेड डेफिसिट का नवंबर, 2018 का उच्चतम स्तर है।

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5. जीडीपी की ग्रोथ
वहीं दूसरी ओर भारत की नई सरकार के सामने भारत की जीडीपी को बढ़ाने की चुनौती भी होगी। हाल ही में दुनिया की बड़ी आर्थिक एजेंसियों ने भारत की वित्तीय वर्ष 2019-20 में जीडीपी की अनुमानित दर को कम कर दिया है। पहले बात आईएमएफ की करें तो देश की जीडीपी 7.3 फीसदी तक रह सकती है। वहीं एशियाई विकास बैंक ने भारत की जीडीपी दर में 0.4 फीसदी की कटौती कर 7.2 फीसदी कर दिया है। वहीं रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी भारत की जीडीपी को 6.8 से 7.1 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। इससे पहले इन सभी एजेंसियों ने भारत की जीडीपी दर के 7.5 फीसदी या उससे आगे रहने का अनुमान लगाया था। ऐसे भारत की जीडीपी दर को तेजी से आगे ले जाने का दबाव नई सरकार के सामने होगा।

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ऑनलाइन कंसल्टिंग में पुरूषों के मुकाबले महिलाएं आगे, 18 से 25 साल के लोग हैं सबसे ज्यादा जागरूक


नई दिल्ली। आज के समय में कोई भी क्षेत्र हो या कोई भी काम महिलाएं किसी भी मायने में पुरूषों से कम नहीं है। समाज में आगे बढ़कर पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली महिलाएं आज हर क्षेत्र में नए मुकाम हासिल कर रही हैं। इसके साथ ही सरकार भी महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए समय-समय पर नई योजनाएं लेकर आती रहती है। पढ़ाई से लेकर राजनीति तक में महिलाओं ने अपना परचम लहराया है। इन सबके बाद ऑनलाइन कंसल्टिंग के क्षेत्र में भी महिलाओं ने पुरूषों को पीछे छोड़ दिया है।


डॉकप्राइम.कॉम ने हासिल किया नया मुकाम

आपको बता दें कि ईटेकएसेज़ मार्केटिंग एंड कंसल्‍टिंग प्राइवेट लिमिटेड 6 महीने पहले अपना नवीनतम हेल्‍थकेयर उपक्रम डॉकप्राइम.कॉम का बाजार में उतारा था, जिससे कि लोगों को असानी से ऑनलाइन कंसल्टिंग की सुविधा मिल सके। डॉकप्राइम.कॉम ने महज 6 महीनों में ही एक नया रिकॉर्ड बनाया है। डॉकप्राइम.कॉम पर प्रति माह 1 मिलियन यूनिक विजिटर्स विजिट करते हैं। इस प्लेटफॉर्म की खास बात यह है कि आप इसकी मदद से घर में बैठे ही फ्री में चिकित्सा परामर्श ले सकते हैं। पिछले 6 महीनों में 51 फीसदी महिलाएं और 49 फीसदी पुरूषों ने इस प्लेटफॉर्म का यूज किया है।


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युवाओं में तेजी से बढ़ रहा इस प्लेटफॉर्म का क्रेज

प्रिवेंटिव हेल्‍थकेयर पैकेज और डायग्नोस्टिक लैब में अपॉइंटमेंट के लिए कैशलेस सेवाएं प्रदान करने वाला यह प्‍लेटफॉर्म तेजी से युवाओं की पसंद बन रहा है। डॉकप्राइम पर आने वाले यूनिक विजिटर्स में सबसे ज्यादा 18-25 साल तक के युवा शामिल हैं। 18 से लेकर 25 साल तक के युवाओं में इस बेवसाइट का क्रेज काफी देखा गया है। इनकी संख्या 52 फीसदी है। यह प्लेटफॉर्म सभी के लिए काफी मददगार शामिल हो रहा है। इस प्लेटफॉर्म की मदद से लोगों को फ्री में अच्छी सलाह मिल रही है, जिसके कारण यह लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है।


60 साल के लोगों में भी बढ़ रहा इंटरनेट का प्रयोग

इसके अलावा अगर हम 25 से 40 साल तक के युवाओं की बात करें तो उनकी संख्या 40 फीसदी है। 25 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में भी इंटरनेट का क्रेज तेजी से बढ़ता जा रहा है। आज के समय में सभी लोग इंटरनेट पर पूरी तरह से आश्रित हो गए हैं। बिना इंटरनेट के लोगों के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इसके अलावा 40 से 60 साल वालों की बात करें तो उसमें भी 14 फीसदी लोगों ने हमारे प्लेटफॉर्म पर आकर ऑनलाइन डॉक्टर की सलाह ली है। आज के समय में घर बैठे अच्छे डॉक्टर की सलाह मिल जाना काफी अच्छा प्रयास है। आश्चर्य की बात यह है कि 40 वर्ष और इससे अधिक उम्र वाले ऐसे लोग जो इंटरनेट का अधिक इस्तेमाल नहीं करते, वो भी अब ऑनलाइन जाकर एक डॉक्टर से परामर्श लेना पंसद करने लगे हैं।


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छोटे शहरों के लोग भी कर रहे प्रयोग

विजिटर ट्रैफ़िक के विश्लेषण से खास बात यह सामने आती है कि बड़े शहरों के अलावा छोटे शहरों के लोगों के द्वारा भी इसको काफी पसंद किया जा रहा है, जहां 40 फीसदी विजिटर का ट्रैफिक नई दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई जैसे शहरों से आता है। वहीं पुणे, लखनऊ, पटना और जयपुर जैसे शहरों से भी 15 फीसदी का विजिटर ट्रैफ़िक आया है। इससे यह संकेत मिलता है कि छोटे शहरों में रहने वाले आम लोगों के बीच डिजिटल सेवाओं का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसमें पुरुषों और महिलाओं की लगभग बराबर हिस्‍सेदारी रही है, जिसमें करीब 53 फीसदी पुरुष और 47 फीसदी महिलाओं ने इस वेबसाइट का उपयोग किया।


डॉकप्राइम.कॉम के सीईओ ने दी जानकारी

इस उपलब्धि पर डॉकप्राइम.कॉम के सीईओ आशीष गुप्‍ता ने कहा, “भारत में जिस तरह लोग बीमारियों का इलाज कराते हैं, उसमें सुधार की तत्काल आवश्यकता है। हम यह मानते हैं कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए इसकी आसान उपलब्धता और कम कीमत सबसे अहम पहलू होंगे। डॉकप्राइम.कॉम द्वारा हासिल किए गए इस मुकाम ने साबित किया है कि डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले सभी आयु वर्ग के लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं चाहिए और तुरंत चाहिए। इसमें डिजिटल माध्यमों का अधिक इस्तेमाल करने वाले लोग शामलि हैं, जिन्हें अपने पसंद के माध्यम पर सेवाएं चाहिए। महिलाएं जो अपने स्वास्थ्य को नज़रअंदाज़ करती हैं या डिजिटल सेवाओं का अधिक इस्तेमाल ना करने वाले 40 वर्ष के आयु वर्ग वाले लोग, जिन्हें नियमित रूप से भरोसेमंद एवं अच्छी क्वालिटी की चिकित्सा सेवाएं चाहिए।”


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2019 में 10 मिलियन का टारगेट करेंगे पूरा

उन्होंने आगे कहा कि, “एक मिलियन यूनिक विजिटर्स का यह पड़ाव हमारी प्रतिबद्धता साबित करता है। इसके साथ ही पिछले 6 महीनों में हमारे निरंतर प्रयासों ने अविश्वसनीय परिणाम पेश किए हैं और अब हमारा लक्ष्‍य 2019 के अंत तक 10 मिलियन यूनिक विजिटर्स के आंकड़े को पार करने का है।” वर्तमान में डॉकप्राइम.कॉम पर 25000 डॉक्‍टर और 5000 डायग्‍नॉस्टिक लैब्‍स जुड़ चुके हैं और इसका लक्ष्‍य देश के 100 से अधिक शहरों के 1,00,000 डॉक्‍टरों और 20,000 लैब्‍स तक अपना नेटवर्क फैलाना है। वर्तमान में, यहां देश के 34 शहरों में स्थित डॉक्टरों और लैब्‍स से अपॉइंटमेंट बुक किया जा सकता है।


क्या है डॉकप्राइम.कॉम

डॉकप्राइम.कॉम पॉलिसीबाजार ग्रुप का नवीनतम प्लेटफॉर्म है, जिसका लक्ष्य भारतत में स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने के तौर तरीके को पूरी तरह से बदलना है। यह प्लेटफॉर्म मरीजों को डॉक्टरों से तत्काल जोड़ने का काम करते है। इस प्लेटफार्म पर आपको स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम आपके लिए हमेशा उपलब्ध रहती है और आप इस प्लेटफॉर्म पर चैट एवं फोन के द्वारा मुफ्त परामर्श ले सकते हैं। इसके अलावा यहां पर आपको डॉक्टर अपॉइंटमेंट और लैब अपॉइंटमेंट की बुकिंग पर भी छूट मिल जाती है। इसके अलावा जल्द ही आपको यहां ओपीडी सब्सक्रिप्शन का विकल्प मिलेगा, जिसमें ग्राहकों को असीमित परामर्श एवं टेस्ट की सुविधा मिलेगी। कंपनी द्वारा मासिक आधार पर 1,00,000 लोगों को मुफ्त चिकित्सा परामर्श प्रदान की जा रही है और 2019 तक प्रतिदिन 50,000 मेडिकल कंसल्टेशन का लक्ष्य रखा गया है।

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अप्रैल में निर्यात 0.64 फीसदी बढ़ा, आयात में हुआ 4.48 फीसदी का इजाफा


नई दिल्ली। बीते महीने अप्रैल में देश से व्यापारिक वस्तुओं के निर्यात में पिछले साल के मुकाबले 0.64 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि देश का आयात पिछले साल के मुकाबले 4.48 फीसदी बढ़ गया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2019 में व्यापारिक उत्पादों का निर्यात 26.07 अरब डॉलर रहा जबकि पिछले साल इसी महीने में देश से 25.91 अरब डॉलर मूल्य के व्यापारिक उत्पादों का निर्यात हुआ था।

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आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोलियम उत्पादन, इलेक्ट्रानिक वस्तुओं और कार्बनिक व अकार्बनिक रसायनों और दवाइयों व फर्मास्युटिकल्स के निर्यात में आलोच्य महीने में वृद्धि दर्ज की गई। भारत ने अप्रैल 2019 में 41.40 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं का आयात किया जबकि पिछले साल इसी महीने में देश का आयात 39.63 अरब डॉलर था।

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तेल आयात में अप्रैल में 9.26 फीसदी की वृद्धि हुई। बीते महीने भारत ने 11.38 अरब डॉलर का तेल आयात किया, जबकि पिछले साल इसी महीने देश का तेल आयात 10.41 अरब डॉलर था। व्यापारिक वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात अप्रैल 2019 में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 1.34 फीसदी बढ़कर 44.06 अरब डॉलर हो गया। वहीं कुल आयात पिछले साल के मुकाबले 4.53 फीसदी बढ़कर 52.83 अरब डॉलर हो गया।

 

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अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल पर छा सकता है संकट, दुनिया का सबसे बड़ा अरबपति ऐसे खड़ी कर रहा मुसीबत


नई दिल्ली। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump ) ने हाल ही में चीन के खिलाफ एक बयान में इस बात की तरफ इशारा किया था कि एक बार फिर वो सरकार बनाने में कामयाब रहेंगे। राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन के साथ ट्रेड डील को लेकर एक ट्वीट में कहा था कि चीन बड़ी चालाकी से मौजूदा ट्रेड डील का टालने का प्रयास कर रहा है, लेकिन मेरे दूसरे कार्यकाल में उनके लिए परिस्थितियां और भी बुरी होने वाली हैं। ऐसे में बेहतर होगा कि चीन जल्द से जल्द इस मामले को सुलझा ले। आपको बता दें कि अमरीका में अगला राष्ट्रपति चुनाव होने में अब करीब डेढ़ साल बचा है।

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राष्ट्रपति के तौर पर क्या रही है ट्रंप की उपलब्धि

नवंबर 2016 में राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप की सबसे बड़ी उपलब्धियों की बात करें तो इसमें अमरीकी इक्विटी बाजार में तेजी और रोजगार के बढ़ते मौके रहे हैं। हालांकि, इक्विटी बाजार में इस तेजी के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक अर्थव्यवस्था जैसे कई अन्य साकारात्मक कारण भी रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ रोजगार के मोर्चे पर ट्रंप प्रशासन के कार्यकाल को देखें तो नवंबर 2016 से लेकर अब तक करीब 40 लाख लोगों के लिए रोजगार का सृजन हुआ है। व्हाइट हाउस की आधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त जानकारी के मुताबिक इतिहास में पहली बार सबसे अधिक रोजगार के अवसर मिले हैं। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 4 लाख नौकरियों के अवसर के साथ बीते तीन दशक में इस सेक्टर में सबसे अधिक ग्रोथ रेट दर्ज की जा रही है। अमरीका की आर्थिक ग्रोथ की बात करें तो पिछली तिमाही में यह 4.2 फीसदी रही है।


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कैसे बेजोस डोनाल्ड ट्रंप के लिए खड़ी कर सकते हैं मुसीबतें

अगले साल नवंबर माह में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले राष्ट्रपति ट्रंप के लिए दुनिया के सबसे बड़े अरबपति और अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस ( Jeff Bezos ) मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। दरअसल, जेफ बेजोस की कंपनी अमेजन अब ऑटोमेटिक मशीन की मदद से डिलिवर किए जाने वाले सामानों की पैकिंग करेगी। पहले इस काम के लिए हजारों लोग काम करते थे। हालिया समय में अमेजन ने अपने कई कामों के लिए मशीन का उपयोग करना शुरू कर दिया है। अमेजन के इस कदम से इन नौकरियों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अमेजन अपने दर्जनों वेयरहाउसेज में ऐसी मशीन इंस्टॉल कर रहा है, जिसके बाद करीब 24 तरह के काम करने वाले कर्मचारियों की छुट्टी हो सकती है। कंपनी ने कहा है की ऐसी एक मशीन को लगाने के लिए 10 लाख डॉलर खर्च आ रहा है जिसे वो आने वाले दो सालों में रिकवर कर लेगी।

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रोजगार का मुद्दा बन सकता है परेशानियों का सबब

हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया था कि अमेजन अपने कर्मचारियों से कह रहा कि आप अपनी जॉब छोड़ दें और हम आपको खुद का डिलिवरी बिजनेस शुरू करने में मदद करेंगे। कंपनी ने यह बात इसलिए कही है क्योंकि वह अमरीका में ऑर्डर किए गए सामानों की डिलिवरी सिस्टम को पहले से और भी तेज करना चाहता है। दूसरी तरफ, दुनियाभर के अर्थशास्त्रियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी होने की तरफ इशारा किया है। आर्थिक मंदी के दौर रोजगार की समस्या ट्रंप के लिए परेशानियों का सबब बन सकता है, क्योंकि अमरीकी राष्ट्रपति के चुनाव में ट्रंप के लिए एजेंडे में रोजगार का मुद्दा प्रमुख होगा। ऐसे में यह भी देखना दिलचस्प होगा कि अमेजन के इन दो बड़े कदमों से राष्ट्रपति ट्रंप के अगले कार्यकाल के सपने को झटका तो नहीं लग रहा।


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थोक महंगाई दर से सरकार को मिली राहत, अप्रैल में घटकर 3.07 फीसदी पर पहुंची


नई दिल्ली। थोक कीमतों पर आधारित देश की वार्षिक महंगाई दर अप्रैल में घटकर 3.07 प्रतिशत रही। यह मार्च में 3.18 फीसदी थी। थोक महंगाई के कम होने का सबसे बड़ा कारण मैन्यूफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की कीमतों में कमी को माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर सब्जियों की थोक कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। आपको बता दें कि इससे पहले आई खुदरा महंगाई दर में इजाफा देखने को मिला है। खुदरा महंगाई दर छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।

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सब्जियों के थोक दामों में हुआ इजाफा
मंगलवार को जारी थोक महंगाई के आंकड़ों के अनुसार सब्जियों की कीमतों में 40.65 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है। मार्च के महीने में सब्जियों की थोक महंगाई दर 28.13 फीसदी थी। वहीं दूसरी ओर अप्रैल के महीने में खाद्य पदार्थों की महंगाई बढ़कर 4.95 फीसदी हो गई है। मार्च के महीने में यही 3.89 फीसदी थी। इसके अलावा गैर खाद्य पदार्थों की महंगाई दर 2.83 फीसदी से बढ़कर 5.23 फीसदी हो गई है। मैन्यूफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई दर की बात करें तो मार्च के मुकाबले कम होकर 1.72 फीसदी पर आ गई है।

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खुदरा महंगाई दर में हुआ है इजाफा
वहीं इससे पहले सोमवार को अप्रैल माह की खुदरा महंगाई दर के आंकड़े सामने आए थे। जिसके खाद्य पदार्थों की कीमतों में इजाफा होने के कारण खुदरा महंगाई 2.92 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई, जो 6 महीने उच्चतम स्तर है। वहीं मार्च के महीने में खुदरा महंगाई दर का आंकड़ा 2.86 फीसदी। आपको बता दें कि जून में आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी की बैठक होगी। जिसमें खुदरा महंगाई दर पर फैसला लिया जाएगा। अभी आरबीआई ने खुदरा महंगाई को 4 फीसदी पर बनाए रखने का आदेश दिए हुए हैं।

 

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पलटवार की तैयारी में चीन, 1 जून से अमेरिकी वस्तुओं पर बढ़ाएगा शुल्क


नई दिल्ली। चीन ने साफ कर दिया है कि वह अमरीका से आयातित 60 अरब डॉलर की वस्तुओं पर एक जून से आयात शुल्क में इजाफा करेगा। अमरीका द्वारा चीनी वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ाने पर पलटवार करते हुए चीन ने यह फैसला लिया है।

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चीन के वित्त मंत्रालय के हवाले से सीएनबीसी की एक रिपोर्ट में कहा गया कि बीजिंग एक जून से आयात शुल्क 10 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी करेगा। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को चीन से आयातित 200 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं पर आयात शुल्क 10 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी करने का फैसला लिया।

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अमरीका के इस फैसले पर चीन पलटवार करने के मूड में है। चीन के इस फैसले की खबर आने के कुछ समय पहले अमरीकी राष्ट्रपति ने ट्वीट के जरिए कहा, "चीन को पलटवार नहीं करना चाहिए। इससे उसे और नुकसान ही होगा।"

 

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डोलाल्ड ट्रंप ने चीन को दी नए आयात शुल्क लगाने की चेतावनी


नई दिल्ली। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग को चेतावनी देते हुए कहा कि ट्रेड वाॅर का खात्मा करने की दिशा में करार करने में विफल रहने पर चीन को भारी नुकसान झेलना पड़ेगा।

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ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन और बीजिंग के बीच करीब साल भर से चल रही व्यापार जंग समाप्त करने के लिए अगर करार नहीं होता है तो चीन को काफी बुरी तरह नुकसान झेलना पड़ेगा।

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ट्रंप ने एक ट्वीट के जरिए कहा, "मैं खुलेआम राष्ट्रपति शी और चीन में अपने कई दोस्तों को कहता हूं कि अगर आप करार नहीं करते हैं तो चीन को बुरी तरह नुकसान उठाना पड़ेगा क्योंकि कंपनियों को चीन को छोड़कर अन्य देशों की तरफ जाने को बाध्य होना पड़ेगा। चीन में खरीद करना काफी महंगा हो जाएगा। आपको बड़ा करार करना था जो पूरा होने वाला था, लेकिन आप पीछे हट गए।"

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उनका यह बयान शुक्रवार को अमरीका द्वारा चीन से आयातित 200 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं पर आयात शुल्क 10 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी किए जाने के बाद आया है।

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अमरीका ने आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला दोनों देशों के बीच व्यापारिक वार्ता विफल होने के बाद लिया। ट्रंप ने एक अन्य ट्वीट की श्रंखला में चीन को चेतावनी देते हुए कहा कि उसके द्वारा आयात शुल्क पर पलटवार करने की सूरत में बीजिंग को उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

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छह महीने के उच्चमत स्तर पर पहुंची खुदरा महंगाई दर,अप्रैल माह में हुई 2.92 फीसदी


नई दिल्ली। देश में लोकसभा चुनाव 2019 के 6 चरणों का मतदान पूरा हो चुका है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बड़ा झटका देने वाली खबर सामने आई है। अप्रैल महीने में खुदरा महंगाई दर में इजाफा हुआ है। खास बात ये है कि खुदरा महंगाई दर छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। अप्रैल के महीने में खुदरा महंगाई दर 2.92 फीसदी दर्ज की गई थी, जबकि इससे पिछले महीने मार्च में खुदरा महंगाई दर 2.86 फीसदी दर्ज की गई थी। ऐसे में आने वाले अंतिम चरण के मतदान में बीजेपी को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। आपको बता दें कि सातवें चरण के चुनाव में वाराणसी में भी मतदान होना है। जहां से नरेंद्र मोदी प्रत्याशी के रूप में खड़े हुए हैं।

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लगातार तीन महीने से बढ़ रही है खुदरा महंगाई दर
अगर बात बीते तीन महीने की बात करें तो खुदरा महंगाई दर में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। अगर बात फरवरी की करें तो खुदरा महंगाई दर 2.57 फीसदी थी। जबकि मार्च के महीने में यह बढ़कर 2.86त्न दर्ज हुई थी। ताज्जुब की बात तो ये है कि पिछले कुछ महीनों से आरबीआई अपनी मौद्रिक समीक्षा बैठक में रेपो रेट में कटौती कर रहा हैं। जिसमें महंगाई पर भी ध्यान केंद्रित रखता है, लेकिन जिस तरह से महंगाई दर में इजाफा हो रहा है वो ठीक नहीं है।

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आखिर क्यों बढ़ रही है महंगाई
जानकारों की मानें तो जब से क्रूड ऑयल के प्रोडक्शन में आई है और ईरान और वेनेजुएला पर अमरीकी प्रतिबंध लगा है। तभी से क्रूड ऑयल के दामों में इजाफा देखने को मिला है। जिसकी वजह से घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमत में इजाफा देखने को मिला है। जिसका असर मालभाड़ें पर देखने को मिल रहा है। डीजल के दाम बढऩे के कारण देश में सामान पर पडऩे वाले भार के कारण खुदरा महंगाई दर में इजाफा देखने को मिला है।

 

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सभी दुकानों पर क्यूआर कोड से भुगतान हो सकता है जरूरी


नई दिल्ली। मोदी सरकार सभी दुकानदारों के लिए पर क्यूआर कोड से भुगतान लेने को अनिवार्य कर सकती है, यूपीआई के माध्यम से नकदी रहित भुगतान किया जा सके। इससे फुटकर पैसे न होने जैसी समस्या से निजात के साथ ही ग्राहकों को वस्तु एवं सेवाकर ( जीएसटी ) में की जाने वाली कटौतियों का भी फायदा ठीक ढंग से मिल जाएगा। केंद्र सरकार इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है।

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पूरे देश में होगा लागू
मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि हम दुकानदार और ग्राहक दोनों के फायदे के बारे में विचार कर रहे हैं। चुनाव से पहले ही जीएसटी परिषद इस योजना को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे चुकी है। अब नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोर्शन ऑफ इंडिया ( एनपीसीआई ) के साथ इसपर इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने को लेकर विचार-विमर्श चल रही है।

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हालांकि इस व्यवस्था को शुरुआत में एक सीमित कीमत तक के भुगतान के लिए लागू करने का ही प्रस्ताव है। इसके अलावा यह केवल विक्रेता और ग्राहक के बीच (बीटूसी) ट्रांजेक्शन के लिए होगी। बाद में इसे बड़े और अन्य प्रकार के भुगतानों पर भी लागू किया जा सकता है। इससे नकदी के प्रचलन को घटाने में भी मदद मिलेगी।

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चीन भी अपना रहा है ऐसी ही व्यवस्था
कई देशों ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ाने और चूक रहित बनाने के लिए क्यूआर कोड प्रणाली को लागू किया है। हाल ही में चीन ने भी इस बारे में निर्देश जारी किए हैं। हमारे यहां भी कई महीने से केंद्र और राज्य सरकार योजना बना रही थी कि डिजिटल पेमेंट को कैसे बढ़ाया जाए।

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जीएसटी संग्रह में भी होगी आसानी
इससे जीएसटी के संग्रह में भी आसानी होने की उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक जीएसटी काउंसिल इसका एक पायलट प्रॉजेक्ट चलाना चाहती थी, लेकिन पश्चिम बंगाल इसके पक्ष में नहीं था। उसका तर्क था कि यह ग्रामीण जनता के हितों के खिलाफ है। अब वित्त मंत्रालय इसपर काम कर रहा है।

 

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पाकिस्तान को मिली बड़ी राहत, IMF ने दी 6 अरब डॉलर के राहत पैकेज की मंजूरी


नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था की खस्ताहाल से जूझ रहे पाकिस्तान ( Pakistan ) को अब अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ( International Monetary Fund ) से बड़ी राहत मिली है। IMF से मिलने वाली 6 अरब डॉलर की राहत पैकेज के लिए अब मंजूरी मिल गई है। आईएमएफ ने कहा है कि पाकिस्तान को यह रकम तीन साल की अवधि में दिया जाएगा। इसका मतलब है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ( Imran Khan ) की सरकार को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष तीन साल में कुल 6 अरब डॉलर की रकम देगी ताकि वो अपने कर्ज चुका सके और अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सके। इसके बारे में पाकिस्तान के वित्त सलाहकार ने जानकारी दी।

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पाकिस्तान को 22वां राहत पैकेज

बता दें कि कई महीनों तक लगातार प्रयासों के बाद पाकिस्तान यह डील हासिल करने में कामयाब हुआ है। इसी के साथ यह पाकिस्तान का 22वां राहत पैकेज भी है। वित्त सलाहकार ने कहा कि देश पर विदेशी कर्ज 90 अरब डॉलर से भी अधिक बढ़ गया है और बीते पांच सालों में निर्यात ग्रोथ भी निगेटिव हो गया है। पाकिस्तानी वित्तीय सलाहकार अब्दुल हफीज शेख ने कहा, "पाकिस्तान को आईएमएफ से 6 अरब डॉलर का राहत पैकेज मिलेगा। इसके अतिरिक्त हमें विश्व बैंक और एशिया डेवलपमेंट बैंक से भी 2 से 3 अरब डॉलर की रकम मिलेगी। यह रकम आगामी दो से तीन सालों के बीच मिलेगी।"

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आईएमएफ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स से मिलनी है मंजूरी

अब्दुल हफीज शेखन ने आगे कहा, "राजकोषीय घाटा 20 अरब डॉलर के पार जा चुका है और बीते दो सालों में फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व 50 फीसदी तक लुढ़क चुका है। इस प्रकार हमारे सालाना भुगतान में 12 अरब डॉलर का गैप बढ़ गया है। हमारे पास इतनी क्षमता नहीं है कि हम इसका भुगतान कर सकें।" आईएमएफ ने कहा कि नीतियों के मुद्दों पर सहमत हुई है जिसे 39 महीनों के एक्सटेंडेड फंड अग्रीमेंट के तहत 6 अरब डॉलर का सपोर्ट दिया जाएगा। आईएमएफ की तरफ पाकिस्तान के दौरे पर गए प्रमुख प्रतिनिधी रैमिरेज रिगो ने कहा, "हमारा प्लान है कि घरेलू व बाहरी असंतुलन को सपोर्ट कर सकें, कारोबारी माहौल को बढ़ा सकें, संस्थाओं को मजबूत कर सकें।" हालांकि, यह समझौता अभी स्टाफ के स्तर पर हुआ है। इसे औपचारिक मंजूरी मिलना बाकी है। अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद वाशिंगटन में आईएमएफ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स इस समझौते को मंजूरी देगा, जिसके बाद ही पाकिस्तान को आर्थिक मदद का रास्ता पूरी तरह साफ हो पाएगा।

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कांग्रेस ने दो Tweet पर खर्च कर डाले 6.8 लाख रुपए, जानिए Twitter की जंग में कौन है किस पर भारी


नई दिल्ली। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र अब लोकसभा चुनाव 2019 के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। इसी के साथ देश की सबसे पुरानी पाॅलिटिकल पार्टी ने Twitter Ads के लिए सबसे अधिक खर्च किया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ( INC ) ने छठें चरण के मतदान से ठीक पहले दो Tweet को प्रोमोट करने के लिए करीब 6.8 लाख रुपए खर्च की है। इन दो Tweets में कांग्रेस ने एक Tweet को हिंदी में और एक Tweet को अंग्रेजी में ट्वीट किया है। अपने इस सोशल मीडिया कैंपेन के लिए कांग्रेस ने #Dilliwithcongress का इस्तेमाल किया है। हिंदी में पोस्ट किए गए एक वीडियो का नाम 'भक्त का चश्मा' दिया गया है। भारतीय जनता पार्टी के उन समर्थकों पर तंज कसा है जो भाजपा को समर्थन देते हैं।

कौन है किसपर भारी

अब इन दोनों ट्वीट के साथ ही कांग्रेस ने भाजपा की कुल ट्विटर कैंपेन की तुलना में पांच गुना खर्च किया है। बता दें कि गत मार्च के बाद से भाजपा ने अब तक इसके लिए 1.4 लाख रुपए खर्च किए हैं। ये आंकड़े Twitter Ads Transparency Centre पर लिस्ट किए गए हैं। इसे भारत में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले लाया गया ताकी चुनाव के समय राजनीतिक पार्टियों द्वारा कुल खर्च के बारे में पता लगाया जा सके। कुल मिलाकर उम्मीद के मुताबिक, भाजपा की ट्वीट की तुलना में कांग्रेस के इन दोनों Tweets का इंप्रेशन बेहतर रहा है। लेकिन दिलचस्प बात है कि प्रति रुपए इंप्रेशन के लिहाज से देखें तो भाजपा को इसमें फायदा हुआ है। बताते चलें कि भाजपा के Twitter फाॅलोवर्स जहां एक करोड़ हैं, वहीं कांग्रेस के Twitter फाॅलोवर्स की संख्या केवल 50 लाख ही है।


फेसबुक की तुलना में किसने कितना किया खर्च

Facebook जैसे दूसरे सोशल मीडिया की तुलना में राजनीतिक पार्टियों के लिए Twitter अभी भी कुछ खास कैंपेनिंग प्लेटफाॅर्म के तौर पर नजर नहीं आ रहा है। भाजपा ने अब तक फेसबुक पर इस साल चुनाव कैंपेन में कुल 3.6 करोड़ रुपए खर्च कर दिया है। फेसबुक की तुलना में भाजपा ने Twitter कैंपेन के लिए केवल 0.4 फीसदी ही खर्च किया है। वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस ने फेसबुक पर कैंपेन के लिए 91 लाख रुपए खर्च किए हैं। इस तुलना में कांग्रेस ने अपने ट्विटर कैंपेन के लिए केवल 7.5 फीसदी ही खर्च किया है।

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नेता भी नहीं हैं पीछे

तमिलनाडु की तमिलनाडू यूथ पार्टी ( Tamil Nadu Youth Party ) तीसरी और अंतिम राजनीतिक पार्टी है, जिसने पाॅलिटिकल एडवर्टाइजर्स के तौर पर Twitter पर रजिस्टर किया है। इस पार्टी ने फेसबुक के अपने आधिकारिक पेज पर कोई ऐड नहीं जारी किया है। नेताआें की बात करें तो केवल 8 ही नेताआें ने ट्विटर पर खुद को एडवर्टाइजर्स के तौर पर रजिस्टर किया है। दोनों राजनीतिक पार्टियों की तरह ही इन नेताआें ने भी ट्विटर ऐड कैंपेन में काफी कंजूसी की है। इस प्लेटफाॅर्म पर सबसे अधिक खर्च करने वाले नेता में ओड़िशा के बिजू जनता दल के नवीन पटनायक रहे हैं। इस लिस्ट में बीजेपी के कुल 4 उम्मीदवार हैं।


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जानिए साल 2004 से लेकर 2018 तक चुनावी चंदे का हाल, कौन सी पार्टी हुई मालामाल और कौन हुआ कंगाल


नई दिल्ली। क्या आपको ये बात पता है कि राजनीतिक पार्टियों के पास चुनाव लड़ने के लिए इतना पैसा कहां से आता है। अगर नहीं तो आज हम आपको बताते हैं कि ये पार्टियां कहां से इतनी कमाई करती हैं। देश मे चुनाव और पारदर्शिता पर काम करने वाली संस्था एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानी ADR की रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार चुनावी चंदे से राजनीतिक पार्टियों की चांदी हो गई है। इसमें सबसे आगे बीजेपी है। जहां एक तरफ आम आदमी की कमाई में 5 से 10 फीसदी की बढ़ोतरी हो रही है वहीं, हमारे देश की राजनीतिक पार्टियों की आमदनी में हर साल लगभग 400 से 500 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो रही है। साल 2014 के बाद से राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले चंदे की बाढ़ सी आ गई है। पार्टियों का चंदा चौगुनी गति से बढ़ रहा है।


2004 से लेकर 2017 तक कैसा रहा पार्टियों के चंदे का हाल

एडीआर ( ADR ) से मिली जानकारी के अनुसार साल 2015-16 के मुकाबले 2016-17 में राजनीतिक पार्टियों को मिले चुनावी चंदे में 368 फीसदी की बढ़त हुई है, जिसमें सबसे ज्यादा फायदा पीएम मोदी की पार्टी को मिला है। नेशनल पार्टीज की टोटल डोनेशन 2015-16 के मुकाबले 2016-17 में 102 करोड़ रुपए से 421.26 करोड़ पहुंच गई, यानी इसमें सीधा-सीधा 368 फीसदी का इजाफा हुआ है। बीजेपी को 2015-16 में 76.85 करोड़ रुपए का चंदा मिला था, जो अगले साल बढ़कर 515 करोड़ रुपए हो गया है। यानी इसमें सीधा-सीदा 590 फीसदी का इजाफा हुआ है। वहीं, साल 2017-18 में कुल चंदे का 86 फीसदी बीजेपी के खाते में गया है। 2016-17 में तृणमूल कांग्रेस के चंदे में 231 फीसदी, सीपीएम के चंदे में 190 फीसदी और कांग्रेस के चुनावी चंदे में 105फीसदी की बढ़त देखने को मिली है।

 

ADR report

इन पार्टियों को मिला सबसे ज्यादा चंदा

इसके अलावा अगर हम ग्राफ में देखें तो साल 2004-05 में कॉरपोरेट कंपनियों के माध्यम से औसतन 62 करोड़ रुपए का दान मिल था जोकि साल 2017-18 में 422 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। देश की राष्ट्रीय राजनीतिक दल की बात करें तो सबसे ज्यादा चंदा भाजपा, कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP), बहुजन समाज पार्टी (BSP), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) को मिला है। आप ग्राफ में देख सकते हैं कि साल 2004 से लेकर साल 2017 तक चंदे में किस तरह की बढ़ोतरी देखने को मिली है। साल 2014 में अब तक का सबसे ज्यादा चंदा दिया गया है। 2014 की बात करें तो इस साल 573 करोड़ रुपए का चंदा दान किया गया।

 

ADR report

बीजेपी-कांग्रेस में कौन आगे

अगर हम बीजेपी और कांग्रेस की तुलना करें तो हम इस ग्राफ में देख सकते हैं कि साल 2004 से लेकर 2014 तक बीजेपी को 350 करोड़ रुपए का चंदा मिला है। वहीं, कांग्रेस को 233 करोड़ का चंदा मिला है। अगर साल 2015 की बात करें तो बीजेपी को 408 करोड़ और कांग्रेस को 128 करोड़ रुपए का चंदा मिला है, लेकिन वहीं अगर हम साल 2018 की बात करें तो इस साल कांग्रेस को काफी कम चंदा मिला है। 2018 में जहां बीजेपी को 400 करोड़ का चंदा मिला है। वहीं कांग्रेस को सिर्फ 19 करोड़ का चंदा मिला है।

 

ADR report

कहां से मिलता है चंदा

आपको बता दें कि राजनीतिक दलों को कई जगह से चंदा मिलता है, जिसमें सबसे ज्यादा चंदा इलेक्टोरल बॉन्ड से मिलता है। आपको बताते हैं कि पार्टियां चंदा लेने के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल करती हैं। चंदे का सबसे पहला सोर्स वॉलेंट्री यानी अपनी इच्छा से दिया जाने वाला फंड है। कई लोग पार्टियों को अपनी मर्जी से चंदा देते हैं। कैश में मिलने वाले चंदे की लिमिट 2000 है, जिसके कारण कंपनियां इळेक्टोरल बॉन्ड का इस्तेमाल करती हैं। इसके अलावा लोकल बिजनेसमैन और कॉन्ट्रैक्टर सीधे उम्मीदवार को कैश या फिर बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर कर देते हैं। सबसे ज्यादा चंदा इलोक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से ही दिया जाता है।

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डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को दी धमकी, कहा - मेरे दूसरे कार्यकाल में भारी पड़ेगा ट्रेड डील


नई दिल्ली। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ( Donald Trump ) ने चीन को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अमरीका ( America ) से उसे अभी ही डील पूरी करनी होगी, क्योंकि मेरे दूसरे कार्यकाल में चीन ( China ) के लिए इस डील को लेकर अग्रीमेंट बहुत महंगा पड़ेगा। बता दें कि दोनों देशों के बीच इस ट्रेड वॉर ( Trade War ) की वजह से भारी टैरिफ ( Trade Tarrif ) चुकाना पड़ रहा है। इसके साथ ही दुनिया को इस बात की आशंका है कि ट्रेड वॉर की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो सकता है।

यह भी पढ़ें - अब टोल प्लाजा पर गलत लेन में लगने पर देनी होगी दोगुनी फीस, NHAI लाने जा रही नया नियम

बीजिंग में एक बार फिर होगी दोनों देशों की बैठक

चीन और अमरीका के बीच दो दिवसीय बैठक गत शुक्रवार को समाप्त हो चुकी है। इस बैठक के बाद चीन ने कहा कि बीजिंग में दोनों के देशों के प्रतिनिधी एक बार फिर बैठक करेंगे। हालांकि, अभी तक इस बैठक की तारीख तय नहीं हो पाई है। चीन ने अपनी तरफ से जोर देते हुए कहा है कि वो मौलिक मुद्दों से समझौता नहीं करेगा।

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डोनाल्ड ट्रंप ने क्या किया ट्वीट

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक ट्वीट में कहा, मुझे लगता है कि चीन को हालिया बातचीत के बाद यह लगता है कि 2020 के में होने वाले अगले चुनाव के बाद तक वो इसे टाल सकते हैं। वो सोचते हैं कि चीन किस्मत वाला है और डेमोक्रेट पार्टी के जीत के साथ उनकी किस्मत बदल सकती है। तब तक तो उन्हें अमरीका को 500 अरब डॉलर प्रति वर्ष का भुगतान तो करना पड़ेगा।

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दूसरे कार्यकाल में भारी पड़ सकती है उसकी चतुराई

ट्रंप ने आगे कहा, "उनके लिए परेशानी यही है कि उन्हें पता है कि मैं फिर से जीतने वाला हूं। (अमरीकी इतिहास में सबसे बेहतर अर्थव्यवस्था और रोजगार जैसे कई कारणों से) ऐसे में मेरे दूसरे कार्यकाल में चीन के लिए यह डील और भी भारी पडऩे वाला है। उनके लिए चतुराई यही होगी कि अभी ही इस डील पर समझौत कर लें।" ट्रंप ने पहले ही चीन पर यह आरोप लगाया है कि व्यापार वार्ता में उसने अपनी प्रतिबद्धता से इनकार किया है। गत शुक्रवार को ही अमरीका ने शुक्रवार को चीन से आयात होने वाले सामानों पर 200 अरब डॉलर का नया आयात शुल्क लागू किया है। इसके साथ ही चीन पर कुल टैरिफ 10 फीसदी से बढ़कर 25 फीसदी हो गया है।

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अब टोल प्लाजा पर गलत लेन में लगने पर देनी होगी दोगुनी फीस, NHAI लाने जा रही नया नियम


नई दिल्ली। हाईवे पर गाड़ी चलाने वाले लोगों के लिए सरकार नया नियम लाने जा रही है। इस नए नियम के बाद आपको टोल प्लाजा पर डबल टोल देना पड़ेगा। आपको बता दें कि अक्सर नॉन फास्टटैग यूजर भी टोल प्लाजा पर लंबी-लंबी लाइन से बचने के लिए FasTag (फास्टैग) वाले बूथ पर चले जाते थे, लेकिन अब से अगर आपने ऐसा किया तो आप पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। इसलिए अब हाइवे पर गाड़ी चलाने के दौरान आपको अपनी ही लेन में चलना होगा।


वाहन चालक की जेब पर पड़ेगा असर

टोल प्लाजा पर वाहनों की आवाजाही को लेकर सरकार ने ये नया नियम बनाया है। अब से यदि कोई भी टोल प्लाजा पर FasTag (फास्टैग) लेन से अपनी गाड़ी निकालते हैं तो आपकी मुश्किलें बढ़ सकती है। इस लेन से अब केवल वही वाहन निकल सकेंगे जिन में फास्टैग (FasTag) डिवाइस लगी होगी। बिना फास्टैग डिवाइस वाली गाड़ियां यदि इस लेन में आती हैं तो उन्हें दोगुनी फीस देनी पड़ेगी।


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जल्द जारी हो सकता है सर्कुलर

सरकार के इस फैसले के बाद फास्टैग वाली गाड़ियों को काफी राहत मिलेगी। अब उन लोगों को लंबी-लंबी लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। आपको बता दें कि केंद्र सरकार जल्द ही इसका सर्कुलर जारी कर सकती है। आपको बता दें कि कई बार लोग गलत लेन में प्रवेश कर जाते हैं जिससे विवाद और जाम की समस्या बढ़ जाती है। इस जाम की समस्या को कम करने के लिए सरकार ने ये नया नियम बना रही है। हालांकि अभी इस नियम को लागू नहीं किया गया है, लेकिन केंद्र सरकार जल्द ही इसका सर्कुलर जारी कर सकती है। इस नए नियम के बारे में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा जल्द ही घोषणा कर दी जाएगी।


क्या है FASTag

आपको बता दें कि FASTag फास्टेग एक डिवाइस है जिसे गाड़ियों में लगाया जाता है। इसके लिए सभी टोल प्लाजा पर एक अलग लेन बनी हुई है। यह रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक पर आधारित है। अगर आफकी गाड़ी में ये टेक्नोलॉजी लगी है तो टोल बूथ से गुजरने पर अपने आप ही रिकॉर्ड दर्ज हो जाएगा। टोल का किराया सीधे बैंक खाते से काट लिया जाता है जो कि FASTag से जुड़ा हुआ है। इसके चलते ड्राइवर को टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ता है।

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