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पाक पीएम ने कहा- हमें जल्द मिल सकता है तेल व गैस का बड़ा भंडार, खस्ताहाल अर्थव्यवस्था से मिलेगी निजात


नई दिल्ली। आर्थिक रूप से खस्ताहाल पाकिस्तान के लिए बहुत जल्द की एक अच्छी खबर आ सकती है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि देश अरब सागर में बड़े पैमाने पर तेल एवं गैस भंडार खोज के करीब है और अगर ऐसा होता है तो यह 'जैकपाट' होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस खोज से नकदी संकट से जूझ रहे देश की आर्थिक समस्याओं का समाधान होगा।इमरान खान ने कहा कि तेल के अपतटीय क्षेत्र में खुदाई अंतिम चरण में हैं और यह बड़ी खोज हो सकती है।


पाक ने नहीं साझा किया खुदाई का ब्यौरा

पाक पीएम ने गत बृहस्पतिवार को कहा, "हम सभी यह प्रार्थना करते हैं कि पाकिस्तान को प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संशाधन मिले। हमारी उम्मीदें अपतटीय क्षेत्र में खुदाई से है जो एक्सोन मोबिल की अगुवाई वाला समूह कर रहा है।" उन्होंने कहा, "पहले ही तीन सप्ताह की देरी हो चुकी है लेकिन जो हमें संकेत मिल रहे हैं, उससे इस बात की मजबूत संभावना है कि हम अपने जल क्षेत्र में बड़ा भंडार खोजें। और अगर यह होता है पाकिस्तान एक अलग लीग में होगा।" कुछ अखबारों के संपादकों तथा वरिष्ठ पत्रकारों के साथ एक अनौपचारिक बातचीत में खान ने हालांकि अपतटीय क्षेत्र में खुदाई प्रक्रिया का ब्योरा साझा नहीं किया।


अंतरराष्ट्रीय तेल उत्खनन कंपनियों ने नहीं दिया है आधिकारिक बयान

एक्सोन मोबिल तथा अंतरराष्ट्रीय तेल उत्खनन कंपनी ईएनआई से भी इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। ये कंपनियां जनवरी से समुद्र के काफी गहराई (समुद्र के भीतर 230 किलोमीटर नीचे) वाले क्षेत्र में खुदाई कर रही हैं। इस क्षेत्र को केकरा-1 क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। इटली की ईएनआई तथा अमेरिकी तेल कंपनी एक्सोन मोबिल संयुक्त रूप से पाकिस्तान के अरब सागर क्षेत्र में गैस के लिये खुदाई कर रही है।


पिछले साल तेल भंडार होने के मिले थे संकेत

आतंकवाद के कारण पश्चिमी देशों की कई अन्य कंपनियां पाकिस्तान छोड़कर चली गयी थी। एक्सोन मोबिल करीब एक दशक बाद पाकिस्तान लौटी है। पिछले साल एक सर्वे में पाकिस्तानी जल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तेल भंडार होने के संकेत मिलने के बाद कंपनी यहां लौटी है। प्रधानमंत्री को भरोसा है कि अगर तेल भंडार खोजा जाता है, पाकिस्तान की कई आर्थिक समस्याएं दूर होंगी और उसके बाद देश की तरक्की को कोई नहीं रोक सकता। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिरता कायम करना सबसे बड़ी चुनौती है।

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देश के विदेशी पूंजी भंडार में इजाफा, 3.60 अरब डॉलर की हुर्इ बढ़ोतरी


नई दिल्ली। देश के विदेशी पूंजी भंडार में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। पिछले सप्ताह के मुकाबले 3.60 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, 15 मार्च को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी पूंजी भंडार 405.63 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जबकि उससे पिछले सप्ताह आठ मार्च को विदेशी पूंजी भंडार 402.03 अरब डॉलर था।

विदेशी पूंजी भंडार में विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति (एफसीए), स्वर्ण भंडार, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में भारत की आरक्षित निधि शामिल होती हैं।

विदेशी पूंजी भंडार से संबंधित आरबीआई के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़े शुक्रवार को जारी किए गए। इन आंकड़ों के अनुसार, एफसीए पिछले सप्ताह 3.54 अरब डॉलर बढ़कर 377.77 अरब डॉलर हो गया। वहीं, स्वर्ण भंडार 3.89 करोड़ डॉलर बढ़कर 23.40 अरब डॉलर हो गया।

एसडीआर के मूल्य में 59 लाख डॉलर का इजाफा हुआ, जिसके बाद इसका मूल्य 1.46 अरब डॉलर हो गया। आईएमएफ के पास आरक्षित निधि 1.21 करोड़ डॉलर बढ़कर 2.99 अरब डॉलर हो गई।


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लोकसभा चुनाव से पहले सरकार का बड़ा तोहफा, 16 लाख कर्मचारियों का बढ़ा वेतन


नर्इ दिल्ली। देश में लोकसभा चुनाव की हीट जबरदस्त है। पार्टियां अपने प्रत्याशियों का एेलान कर रही हैं। वहीं दूसरी आेर यूपी सरकार ने चुनाव से ठीक पहले राज्य के 16 लाख कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है। राज्य सरकार की आेर से कर्मचारियों के महंगार्इ भत्ते में 3 फीसदी का इजाफा कर दिया गया है। इस बढ़ोतरी के बाद कर्मचारियों का महंगार्इ 12 फीसदी हो गया है। सरकार की आेर से यह एेलान बुधवार को किया है।

एक जनवरी से मिलेगा कर्मचारियों को बढ़ा हुआ भत्ता
यूपी सरकार के वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव की आेर से जारी शासनादेश के अनुसार कर्मचारियों को बढ़ा हुआ भत्ता एक जनवरी 2019 से मिलेगा। जनवरी आैर फरवरी के भत्ते का भुगतान 31 मार्च को किया जाएगा। वहीं मार्च का बढ़ा हुआ सैलरी के साथ जुड़कर आएगा। इस आदेश के बाद कर्मचारियों के वेतन में एक हजार रुपए से लेकर 4 हजार रुपए के इजाफे का अनुमान है।

यह राज्य पहले कर चुके हैं एेलान
चुनाव से पहले सिर्फ यूपी सरकार ने ही इस तरह का एेलान नहीं किया है। इसकी शुरूआत कर्नाटक से हुर्इ थी।जब कुछ दिन पहले कांग्रेस आैर जेडीएस की गठबंधन वाली सरकार ने सरकारी डिग्री काॅलेजों आैर यूनिवर्सिटीज के लेक्चरों के लिए 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है। जिसके बाद सरकार के इस फैसले से प्रोफेसर की सैलरी 35 हजार रुपए से 57,700 रुपए प्रति माह हो गर्इ है।


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एनएसएसओ की रिपोर्ट में दावा, वित्त वर्ष 2012 से लेकर 2018 तक 2 करोड़ लोग हुए बेरोजगार


नई दिल्ली। भले ही केंद्र सरकार अपनी परियोजनाओं और घोषणाओं का जमकर प्रचार कर रही हो, लेकिन युवाओं को किए वादे पर सरकार पूरी तरह से विफल हुई है। पिछले दो सालों से बेरोजगारी को लेकर विपक्ष के निशाने पर रही केंद्र सरकार को एक और बड़ा झटका लगा है। एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वित्त वर्ष 2012 से लेकर 2018 तक 2 करोड़ लोग बेरोजगार हो गए हैं। सरकार ने अभी तक इस रिपोर्ट को उजागर नहीं किया है। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर किस संगठन की रिपोर्ट ने यह बात कही है।

दो करोड़ युवा हुए बेरोजगार
राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2011-12 से लेकर वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान पांच साल में देश में पुरुष कार्यबल में करीब दो करोड़ की कमी आई। एनएसएस की इस रिपोर्ट को हाल ही में सरकार ने दबा दिया। एनएसएसओ की आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) रिपोर्ट 2017-18 की समीक्षा में बताया गया है कि वर्ष 2017-18 के दौरान सिर्फ 28.6 करोड़ पुरुष देश में रोजगार में थे जबकि 2011-12 में 30.4 करोड़ पुरुष रोजगार में थे। यह समीक्षा अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।

कुछ ऐसी रही है स्थिति
भारत का पुरुष कार्यबल 1993-94 में 21.9 करोड़ था, जिसके बाद पहली बार इसमें कमी दर्ज की गई है। पुरुष कार्यबल 2011-12 दौरान बढ़कर 30.4 करोड़ हो गया जबकि 2017-18 में घटकर 28.6 करोड़ रह गया। पीएलएफएस की रिपोर्ट जुलाई 2017 से लेकर जून 2018 के बीच तैयार की गई। आपको बता दें कि 2014 में खुद नरेंद्र मोदी ने अपने चुनावी कैंपेन में युवाओं को हर साल करोड़ रोजगार देने का वादा किया था। लेकिन मौजूदा रिपोर्ट से केंद्र सरकार के सभी दावों को की पोल खुलती नजर आ रही है।


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पाकिस्तान की कंगाली: इमरान खान ने फैलाए हाथ तो चीन ने दिए 2.1 अरब डॉलर


नई दिल्ली। पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने घोषणा की है कि स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) चीन से 25 मार्च तक 2.1 अरब डॉलर का कर्ज प्राप्त करेगा। डॉन न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्रालय के प्रवक्ता खकान नजीब खान ने गुरुवार को कहा कि चीन सरकार द्वारा पाकिस्तान को मुहैया कराए जाने वाली कर्ज की सभी प्रक्रियागत औपचारिकताओं को पूरा कर लिया है और इस राशि को सोमवार 25 मार्च को एसबीपी के खाते में जमा कर दिया जाएगा।


नवंबर 2018 की बैठक में चीन किया था पैसे देने की बात

प्रवक्ता ने कहा कि इस कर्ज सुविधा से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा और भुगतान स्थिरता सुनिश्चित होगी। बीजिंग में चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग व पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के बीच नवंबर 2018 में हुई बैठक के बाद चीन ने कहा था कि वह इस्लामाबाद को उसके वर्तमान वित्तीय संकटों को दूर करने में मदद करने की पेशकश करने के लिए तैयार है और सहायता की शर्तों पर अभी भी चर्चा की जा रही है।


ट्रंप प्रशासन ने कहा - आतंकवाद पर पाक का बचाव न करे चीन

अमरीका में ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि पाकिस्तान का बचाव नहीं करना और इस्लामाबाद से आतंकवादियों पर कार्रवाई के लिए कहना चीन की जिम्मेदारी है। उन्होंने जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के प्रयास में चीन द्वारा अवरोध पैदा करने पर भी चिंता जताई। अमरीकी अधिकारी ने कहा, "हमारा मानना है कि चीन की यह जिम्मेदारी है कि वह पाकिस्तान का बचाव नहीं करे और साथ ही आतंकी संगठनों पर कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान का आह्वान करने में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ खड़ा हो। पुलवामा आतंकी हमले के बाद मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने का प्रयास किया गया था, लेकिन चीन ने इससे जुड़े प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 'तकनीकी रोक लगा दी थी।

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ईपीएफओ ने कहा- पिछले 17 महीनों में मिली 76.48 लाख लोगों को नौकरी, जनवरी में रहा 8.96 लाख का आंकड़ा


नई दिल्ली। नवरी माह में बीते नेट इंप्लॉयमेंट जेनरेशन बीते 17 महीनों के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। ईपीएफओ पेरोल डेटा के मुताबिक, जनवरी माह में 8.96 लाख लोगों को नौकरी मिली है। अप्रैल 2018 से ईपीएफओ पेरोल डेटा जारी करता है।, जिसमें सितंबर 2017 से डेटा के बारे में जानकारी दी गई है।


फॉर्मल सेक्टर में मिली 76.48 लाख नौकरियां

पिछले साल जनवरी माह की तुलना में इस साल जनवरी माह में इसमें 131 फीसदी की तेजी देखी गई है। पिछले साल जनवरी माह में 3.87 लाख लोगों को नौकरी मिली थी। सितंबर 2017 में, कुल 2,75,609 नौकरियों का सृजन हुआ था। सितंबर 2017 से लेकर जनवरी 2019 तक कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की सोशल सिक्योरिटी स्कीम के तहत 76.48 लाख लोगों ने इस स्कीम को सब्सक्राइब किया है। इससे यह बात साफ हो जाती है कि फॉर्मल सेक्टर में इन 17 महीनों में 76.48 लाख लोगों को नौकरी मिली है।


जनवरी में कुल 8,96,516 लोगों को मिली नौकरी

जनवरी 2019 में ईपीएफओ में कुल 8,96,516 ने एनरोल किया है, जोकि सितंबर 2017 के बाद सबसे अधिक है। हालांकि, ईपीएफओ के इस पेरोल डेटा से यह बात भी सामने आती है कि दिसंबर माह में 7.03 लाख लोगों को नौकरी मिली है। ईपीएफओ ने सितंबर 2017 से दिसंबर 2018 के बीच के डेटा को रिवाइज भी किया है। इस दौरान 72.32 लाख के कुल आंकड़े में 6.6 फीसदी की गिरावट हुई और यह 67.52 लाख रहा। इस डेटा के मुताबिक, मार्च 2018 में नौकरियों के आंकड़ों में गिरावट दर्ज की गई है। ईपीएफओ ने इसका कारण वित्तीय वर्ष के अंतिम महीना होने की वजह बताया है।


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चालू वित्त वर्ष में पूरा हुआ विनिवेश का लक्ष्य, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ट्वीट कर दी जानकारी


नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष में सरका के लिए एक राहत भरी खबर आई है। सरकार ने अपने विनिवेश लक्ष्य को पूरा कर लिया है। साथ ही अब सरकार की झोल में विनिवेश लक्ष्य से 5 हजार करोड़ रुपए अधिक आए हैं। चालू वित्त वर्ष में सरकार ने अब तक 85 हजार करोड़ रुपए जुटा लिए हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसके बारे में अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ट्वीट कर जानकारी दी है।

सरकार ने ऐसे जुटाए 24 हजार करोड़ रुपए

वित्त मंत्री ने अपने ट्वीट में लिखा, "चालू वित्त वर्ष में 80 हजार करोड़ रुपए के लक्ष्य को सरकार ने पूरा कर लिया है। आज विनिवेश रिसिप्ट 85 हजार करोड़ रुपए के आंकड़े को छू लिया है।" आपको बता दें कि सीपीएसई ईटीएफ के माध्यम से सरकार को 9,500 करोड़ रुपए मिले हैं। वहीं, आईसी-पीएफसी डील से भी सरकार 14,500 करोड़ रुपए जुटाया है। सरकार ने अगले वित्त वर्ष में विनिवेश का लक्ष्य 90,000 करोड़ रुपए रखा है। इसके बारे में अंतरिम बजट पेश करते हुए पीयूष गोयल ने भाषण में जानकारी दी थी।

 

 


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चुनाव से पहले मोदी सरकार को झटका, फिच ने घटार्इ देश की आर्थिक वृद्घि दर


नई दिल्ली। फिच रेटिंग्स ने अगले वित्त वर्ष (2019-20) के लिए देश की आर्थिक विकास दर का पूर्वानुमान 7 प्रतिशत से घटाकर 6.80 फीसदी कर दिया है। एजेंसी ने अपने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में वित्त वर्ष 2020-21 में 7.10 फीसदी विकास दर का अनुमान जताया है।

इससे पूर्व फिच ने पिछले साल दिसंबर में चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 7.8 फीसदी से घटाकर 7.2 फीसदी कर दिया था। एजेंसी ने कहा कि भारत की विकास दर जुलाई-सितंबर तिमाही में 7 प्रतिशत और अप्रैल-जून तिमाही में 8 प्रतिशत की ऊंचाई पर रहने के बाद लगातार दो तिमाहियों में थोड़ी कमजोर पड़ गई और अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 6.6 प्रतिशत रही। रिपोर्ट के मुताबिक विनिर्माण क्षेत्र और कुछ हद तक कृषि क्षेत्र की गतिविधियों की रफ्तार घटने से विकास दर सुस्त पड़ी है। एजेंसी ने वैश्विक जीडीपी की वृद्धि दर का अनुमान भी कम किया है। एजेंसी ने वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर का पूर्वानुमान 2018 के लिए 3.3 प्रतिशत से घटाकर 3.2 प्रतिशत और 2019 के लिए 3.1 प्रतिशत से घटाकर 2.8 प्रतिशत कर दिया।

ब्याज दर में चौथाई फीसदी कटौती की उम्मीद
फिच ने मूल ब्याज दर (बेस रेट) के अनुमान में भी बदलाव किया है। आसान वैश्विक मौद्रिक परिस्थितियां तथा महंगाई दर सीमित दायरे में रहने का हवाला देते हुए रिजर्व बैंक द्वारा मूल दर (रेपो रेट) में 0.25 फीसदी की एक और कटौती किए जाने की उम्मीद जताई है।

73 तक जा सकता है रुपया
फिच के मुताबिक डॉलर के मुकाबले रुपया दिसंबर 2019 तक 72, जबकि दिसंबर 2020 तक 7& रुपए प्रति डॉलर के स्तर तक जा सकता है। इसने कहा कि वित्तीय और मौद्रिक नीतियां वृद्धि दर को बढ़ावा देने वाली हैं और आरबीआइ ने भी पिछले महीने रेपो दर 0.25 प्रतिशत घटाई है।


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बीजेपी में शामिल हुए टीम इंडिया के पूर्व ओपनर गौतम गंभीर हैं करोड़ों रुपयों के मालिक


नई दिल्ली। आज टीम इंडिया के पूर्व ओपनर और बेहतरीन बल्लेबाज गौतम गंभीर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। टी20 और वल्र्ड कप 2011 के फाइनल में अहम भूमिका निभाने वाले गौतम गंभीर अब केंद्रीय राजनीति की सियासी पिच पर अपनी नई पारी की शुरूआत करेंगे। जानकारों की मानें तो वो नई दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़ सकते हैं। मौजूदा समय में नई दिल्ली लोकसभा सीट से मीनाक्षी लेखी सांसद हैं। शायद ही आपको पता होगा कि गौतम गंभीर देश के सबसे अमीर क्रिकेटर्स में से एक हैं। उनके पास करोड़ों रुपयों की संपत्ति है। आइए आपको भी बताते हैं कि गौतम गंभीर के पास कितनी संपत्ति है।

गौतम गंभीर के पास है इतनी संपत्ति
गौतम गंभीर 20 मीलियन डॉलर है। अगर इसे भारतीय रुपयों में देखा जाए तो 137.33 करोड़ रुपए है। गौतम गंभीर देश के 10 सबसे अमीर क्रिकेटर्स में शामिल हैं। इससे पहलेे बीसीसीआई और आईपीएल में फ्रेंचाइजी से कांट्रैक्ट के रूप में काफी रुपए मिले हैं। बीसीसीआई के कांट्रैक्ट में वो हमेशा से लिस्ट ए के क्रिकेटर्स रहे हैं। आईपीएल में भी वो केकेआर को दो बार खिताब दिला चुके हैं। वहीं दिल्ली डेयरडविल्स के भी कप्तान रहे हैं।

विज्ञापनों से भी होती है कमाई
राजनीति में कदम रख चुके गौतम गंभीर विज्ञापनों से भी कमाई करते हैं। किसी भी ब्रांड को एंडोर्स करने के लिए गौतम गंभीर करीब 5 करोड़ रुपए लेते हैं। वहीं वो फिल्मों में भी नजर आ चुके हैं। सलमान खान और अक्षय कुमार की फिल्म मुझसे शादी करोगी में गौतम गंभीर की झलक दिखाई दी थी। उसमें उनके साथ हरभजन सिंह, आशीष नेहरा, मोहम्मद कैफ, पार्थिव पटेल भी नजर आए थे।

दिल्ली के पॉश इलाके में है घर
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि गौतम गंभीर का घर दिल्ली के पॉश इलाके में है। जिसकी कीमत करोड़ों रुपयों में हैं। वहीं उन्होंने पर्सनल इंवेस्टमेंट भी किया है। जिसकी रकम करीब 90 करोड़ रुपए का है। वहीं वो कई लग्जरी गाडिय़ों के भी मालिक हैं। गौतम गंभीर के पोर्शे जैसी गाड़ी है। जानकारी के अनुसार उनके पास तीन गाडिय़ां है। जिनकी कीमत करीब दो करोड़ रुपए है।


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चीन को भारत का दो टुक जवाब, बेल्ट एंड रोड फोरम में देश नहीं होगा शामिल


नई दिल्ली। बीजिंग में भारत के राजदूत विक्रम मिश्री ने चीन को झटका देते हुए कहा है कि भारत चीन के बेल्ट एंड रोड पहल का हिस्सा नहीं हो सकता है, क्योंकि इसमें इसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के अहम सरोकारों को नजरंदाज किया गया है।

बीजिंग अप्रैल में दूसरे बेल्ट एंड रोड फोरम का आयोजन करने वाला है। चीन में भारत के राजदूत विक्रम मिश्री ने चीन की सरकारी मीडिया को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि नई दिल्ली कार्यक्रम का विरोध करते हुए दूसरी बार इससे अलग रहेगा।

चीन की बेल्ट एंड रोड पहल का मकसद सड़कों, राजमार्गो, समुद्री मार्गो, व पत्तनों के विशाल नेटवर्क के जरिए यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोडऩा है। इसकी अहम परियोजनाओं में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) भी शामिल है, जो जम्मू-कश्मीर से गुजरता है।

नई दिल्ली ने 2017 में यह कहते हुए बेल्ट एंड रोड फोरम में हिस्सा नहीं लिया था कि इससे उसकी क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन होता है। चीन के ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में मिश्री ने भारत का रुख स्पष्ट किया। उनसे पूछा गया था कि नई दिल्ली ने बेल्ट एंड रोड पहल की संकल्पना को जटिल क्यों बना दिया है।

उन्होंने कहा, "सही बात यह है कि हमरा कोई गुप्त नजरिया नहीं है और बीआरआई पर हमारा रुख स्पष्ट व एकनिष्ठ है और हमने संबंधित प्राधिकरणों को इस संबंध में बता दिया है।" मिश्री ने कहा, "भारत संपर्क मजबूत करने के लिए वैश्विक आकांक्षा को साझा करता है और यह हमारे आर्थिक व कूटनीतिक पहलों का अभिन्न हिस्सा है।"

उन्होंने कहा, "हम खुद अपने क्षेत्र और उससे बाहर संपर्क की कई परियोजनाओं पर कई देशों व अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ काम कर रहे हैं।" उन्होंने कहा, "हालांकि हमारा मानना है कि संपर्क परियोजनाएं अवश्य अंतर्राष्ट्रीय मानकों, सुशासन व नियमों के आधार पर सार्वभौमिक रूप से मान्य हों।"


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पूरे 50 करोड़ की होली, यहां से होती है पूरे देश में रंग और गुलाल की सप्लाई


नई दिल्ली। यूं तो होली प्यार, रंग, उल्लास का त्योहार है। लेकिन क्या आपको पता है कि होली पर जो रंग और गुलाल का खर्च है वो कितना है। आपको जानकर हैरानी होगी केवल ब्रज में ही पूरे देश में मनायी जाने वाली होली के पूरे ख्च का 60 फीसदी हिस्सा यहीं से होता है। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश का मथुरा, हाथरस और ब्रज गुलाल बनाने का सबसे बड़ा केंद्र है।

सालभर में बनता है 15 हजार टन गुलाल

सदियों से रंग और गुलाल हाथरस में बनते आ रहे हैं। आपको बता दें कि यहां सालभर में करीब 15 हजार टन रंग और गुलाल बनाए जाते हैं। एक आंकलन के आधार पर इसका कुल कारोबार 50 करोड़ से भी ज्यादा का होता है। यही का बना हुआ गुलाल और रंग दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, राजस्थान समेत पूरे देश में सप्लाई होता है।

मंदिरों में होती है सबसे ज्यादा डिमांड

आपको बता दें कि घरों से ज्यादा गुलाल मंदिरों में इस्तेमाल किया जाता है। केवल मथुरा के मंदिरों की बात करें तो अलग-अलग मंदिरों में करीब 500 टन गुलाल उड़ाया जाता है। गौरतलब है कि मथुरा में देश-दुनिया से पहुंचने वाले भक्तों को रंग-गुलाल में सराबाेर करने के लिए सभी बड़े मंदिरों ने करीब 10 टन गुलाल खर्च कर डालते हैं।

 


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दुनियाभर में सबसे सस्ता शहर है चेन्नई, जानिए किस शहर में रहने के लिए आपको चुकानी होगी मोटी रकम


नई दिल्ली। इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट के 2019 के विश्वव्यापी निर्वाह व्यय (कॉस्ट आफ लिविंग) सर्वेक्षण के मुताबिक पेरिस, सिंगापुर और हांगकांग दुनिया के सबसे महंगे शहरों में शामिल हैं। जबकि, रहने के लिहाज से दिल्ली, चेन्नई और बेंगलुरू सबसे सस्ते शहरों में शामिल हैं। 'सीएनएन' ने सालाना सर्वेक्षण के हवाले से कहा कि सूची में शीर्ष पर (महंगे होने की दृष्टि से) तीन शहर पेरिस, सिंगापुर और हांगकांग हैं।


133 शहरों का हुआ सर्वे

इस सर्वे में 133 शहरों में 150 चीजों की कीमत का आंकलन किया गया। स्विट्जरलैंड का ज्यूरिख चौथे स्थान पर है। स्विट्जरलैंड का ही जेनेवा और जापान का शहर ओसाका पांचवे स्थान पर हैं। दक्षिण कोरिया का सियोल, डेनमार्क का कोपेनहेगन और अमेरिका का न्यूयॉर्क संयुक्त रूप से सातवें स्थान पर हैं।


कौन शहर है दुनिया में सबसे सस्ता

सबसे महंगे शहरों में 10वा स्थान अमरीका के लॉस एंजिल्स और इजरायल के तेल अवीव का है। दुनिया के सबसे सस्ते शहरों में कराकस (वेनेजुएला), दमिश्क (सीरिया), ताशकंद (उज्बेकिस्तान), अलमाटी (कजाकिस्तान), कराची (पाकिस्तान), लागोस (नाइजेरिया), ब्यूनस आयर्स (अर्जेटीना) और भारत के शहर बेंगलुरू, चेन्नई और दिल्ली शामिल हैं।

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सांख्यिकी डेटा को लेकर 108 अर्थशास्त्रियों को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दिया जवाब


नई दिल्ली। सांख्यिकी डेटा पर चिंता व्यक्त करने वाले 108 अर्थशास्त्रियों को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जवाब दे दिया है। उन्होंने कहा कि इसमें से अधिकतर 'आदतन विपरीत सोच के' हैं। वित्त मंत्री की तरफ से यह जवाब ठीक एक दिन बाद आया है जब 131 चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने डेटा क्वालिटी को राजनीतिक प्रभाव गलने के आरोप को सामने आकर सिरे से खारिज कर दिया था।

ट्विटर पर वीडियो जारी कर दिया जवाब

वित्त मंत्री ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट में कहा, "कुछ दिन पहले ही 108 तथाकथित अर्थशास्त्रियों ने एक बयान जारी कर सांख्यिकी डेटा पर सवाल उठाया था। मैंने उन सभी की बातों को के बारे में जाना और पाया कि इसमें से करीब 70 फीसदी आदतन विपरीत सोच के' हैं। ये सरकार के उन आलोचकों में से है जिन्होंने बीते पांच सालों में सरकार के खिलाफ कई मेमोरेन्डम दाखिल किए हैं। इसमें अधिकतर मेमोरेन्डम राजनीति से प्रेरित हैं और अर्थव्यवस्था से इनका कोई लेना-देना नहीं है।"


क्या था अर्थशास्त्रियों का आरोप

गौरतलब है कि अर्थशास्त्रियों की तरफ से यह लेटर जीडीपी आंकड़ों को रिवाइज करने और एनएसएसओ द्वारा रोजगार डेटा छुपाने के संबंध में थे। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने कहा, "उन्होंने अपने लेटर में जो भी कहा उनमें उनकी तरफ से लगाए गए आरापों के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं है। हालांकि वित्त वर्ष 2011-12 के लिए रिवाइज किए गए जीडीपी डेटा के बारे में जानकारी दी गई है। साथ ही एनएसएसओ द्वारा रोजगार डेटा को पब्लिश न किए जाने का जिक्र है।" वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार बड़े स्तर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कर रही है। ऐसे में रोजगार की कमी को लेकर सरकार के खिलाफ कैंपेन चलाना सही नहीं है।
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खत्म हुई जीएसटी काउंसिल की 34वीं बैठक, घर खरीदारों को मिली ये खुशखबरी


नर्इ दिल्ली। वस्तु एवं सेवा काउंसिल (जीएसटी काउंसिल) की 34वीं बैठक पूरी हो चुकी है। काउंसिल ने इस बैठक में घर खरीदारों को एक बड़ा तोहफा दिया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, जीएसटी ? काउंसिल ने 1 अप्रैल से अंडर कंस्ट्रक्शन पर 5 फीसदी की जीएटसटी लागू कर दिया है। इसके साथ अब अंडर कंस्ट्रक्शन पर आइटीसी के बिना 5 फीसदी जीएसटी लागू होगा। साथ ही नए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट पर भी जीएसटी काउंसिल ने एक अप्रैल से 5 फीसदी का जीएसटी लागू कर दिया है।


हालांकि, मौजदू प्रोजेक्ट्स के लिए काउंसिल ने इस बात की छूट दी है कि वो वर्तमान दर के हिसाब से ही जीएसटी दें और आइटीसी लें। यदि वो नया जीएसटी चुकाना चाहते हैं तो इसके लिए उन्हें आइटीसी नहीं मिलेगा। बता दें कि इसके पहले गत 24 फरवरी को हुई बैठक में अंडर कंस्ट्रक्शन फ्लैट पर जीसटी को घटाकर 5 फीसदी व किफायती घरों पर जीएसटी को घटाकर 1 फीसदी कर दिया था। इसके लिए नई दरें आगामी एक अप्रैल से प्रभावी होंगी। वर्तमान में, अंडर कंस्ट्रक्शन प्राॅपर्टी या रेडी-टू-मूव फ्लैट पर के भुगतान पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के साथ 12 फीसदी जीएसटी लगता है। सस्ते मकानों की 8 फीसदी की दर से जीएसटी देय है।

 


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गोवा के नए सीएम प्रमोद सावंत को है गाड़ियों और गोल्ड का शौक, इतनी है उनके पास संपत्ति


नई दिल्ली। सोमवार को पूरे दिन इसी बात को लेकर चर्चा रही कि बीजेपी किसे सीएम पद पर आसीन करेगी। कई नाम छनकर आते रहे। अंत में मुहर लगी प्रमोद सावंत की। प्रमोद सावंत तो मनोहर के शिष्य जैसे रहे। जब प्रमोद सावंत के बारे में जानने की कोशिश की तो कई बातें पता चली जो आपको भी हैरान कर देंगी। गोवा के नए सीएम को गाडिय़ों को बेहद शौक है। साथ सोने के आभूषण भी उन्हें काफी भाते हैं। अगर उनकी कुल संपत्ति के बारे में बात करें तो पौने तीन करोड़ रुपए की संपत्ति है। आइए आपको भी बताते हैं प्रमोद सांवत के बारे में, जिन्हें जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।

इतनी है कुल संपत्ति
गोवा के नए सीएम प्रमोद सांवत को मनोहर पर्रिकर का काफी करीबी माना जाता था। इसलिए उन्हें इस पद के लिए सबसे योग्य भी माना गया। 2017 में उन्होंने गोवा के चुनावों में संकुएलिम विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। उन्होंने चुनाव में इलेक्शन कमीशन को एफिडेविट दिया था। उसमें उन्होंने अपनी कुल संपत्ति 2,78,98,739 रुपए बताई थी। उन्होंने उस अपने हाथों में कैश 30,000 रुपए दिखाया था। जबकि अपनी पत्नी सुलक्षणा सावंत के हाथों में 15 रुपए दिखाया था। वहीं गोवा के नए सीएम प्रमोद सावंत और उनकी पत्नी के बैंक खातों में कुल 5,10,403 रुपया था।

मनोहर पर्रिकर नक्शे कदम पर सावंत
गोवा के पूर्व सीएम मनोहर पर्रिकर से सीख लेकर प्रमोद और उनकी पत्नी दोनों ने एलआईसी पॉलिसी ली हुई है। अगर पहले बात प्रमोद की करें तो उन्होंनेे 10,45,000 रुपए का इंश्योरेंस कराया हुआ है। वहीं उनकी पत्नी सुलक्षणा सावंत ने 15,00,000 रुपए की एलआईसी ली हुई थी। आपको बता दें कि मनोहर पर्रिकर ने एलआईसी की 55 लाख रुपए की पॉलिसी ली हुई थी। वहीं उन्होंने 3 लाख रुपए का पेंशन प्लान लिया हुआ था।

प्रमोद सावंत को है गाडिय़ों का शौक
सीएम प्रमोद सांवत को गाडिय़ों का शौक है। उनके पास एक दो नहीं बल्कि चार गाडिय़ां हैं। उनके पास दो टाटा टिपर ट्रच, एक इनोवा और एक मारुति सुजूकी स्विफ्ट है। वहीं उनकी पत्नी के पास करीब साढ़े सात लाख रुपए की आस्टा है। पति-पत्नी को ज्वेलरी का भी काफी शौक है। प्रमोद सावंत की एफिडेविट के अनुसार 1,80,000 रुपए का गोल्ड है। वहीं उनकी पत्नी के पास 11,00,000 लाख रुपए की ज्वेलरी है।

किसानी से भी करते हैं कमाई
प्रमोद सावंत किसानी से कमाई करते हैं। उनके पास दो एग्रीकल्चर लैंड है। एक का एरिया करीब 50 हजार स्क्वायर फीट और दूसरा 2966 एकड़ की लैंड है। इन दोनों लैंड की कुल कीमत 62,00,000 रुपए है। वहीं 15 लाख रुपए की नॉन एग्रीकल्चर लैंड भी है। प्रमोद सांवत के पास तीन मकान हैं। जिनकी कीमत 85,50,200 रुपए है। जमीनों के यह रेट 2017 के हैं। 2019 में लैंड की कीमतों के बढऩे की संभावना है।


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भविष्य निधि कर्मचारी को रिश्वत लेते पकड़ा गया, सीबीआर्इ ने दी जानकारी


नर्इ दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के एक प्रवर्तन अधिकारी को नागपुर में एक व्यक्ति से 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। आरोपी की पहचान एबी पहाडे के रूप में हुई है। उस पर भ्रष्टाचार रोकथाम (संशोधन) अधिनियम 2018 के तहत प्रासंगिक धाराओं में आरोप लगाए गए हैं और उसे विशेष सीबीआई अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।


एजेंसी के अनुसार, शिकायतकर्ता क्षेत्र में विभिन्न बिजली की कंपनियों को ठेके पर मजदूरों की आपूर्ति करता है और कर्मचारियों के लिए नियमित तौर पर ईपीएफओ नागपुर कार्यालय में भविष्य निधि (पीएफ) का भुगतान करता है। पहाडे ने उसके कार्यालय का दौरा किया और उससे बीते पांच सालों के विभिन्न रिकॉर्ड की मांग की, जिसे जांच के लिए दिया गया था। बाद में जब शिकायतकर्ता ने पीएफ ऑडिट की स्थिति के बारे में जानकारी के लिए पहाडे से उनके दफ्तर गया तो अधिकारी ने कथित तौर पर सात साल के ऑडिट को बिना किसी बाधा के मंजूरी देने के लिए 350,000 रुपये के रिश्वत की मांग की।


शिकायतकर्ता के रिश्वत देने से इनकार करने के बाद पहाडे ने कहा कि वह रकम के बारे में चर्चा व बातचीत के लिए उसके दफ्तर आएंगे। इसके बाद पहाडे कटौती करने पर सहमत हुए और 300,000 में मामले को निपटाने के लिए तैयार हो गए। इसकी पहली किस्त 50,000 रुपये थी। ठेकेदार की शिकायत के बाद सीबीआई ने जाल बिछाया और पहाडे को रिश्वत लेते हुए दबोच लिया।

(नोटः यह खबर न्यूज एजेंसी फीड से प्रकाशित की गर्इ है। पत्रिक बिजनेस ने हेडलाइन के अतिरिक्त कोर्इ अन्य बदलाव नहीं किया है।)


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इंडियन एयरलाइंस के लिए 43 विमानों की खरीदा का मामला, 234 करोड़ रुपए के लेनदेन पर केंद्रीत र्इडी की पूछताछ


नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कॉरपोरेट लॉबिस्ट दीपक तलवार से पूछताछ के दौरान गुप्त रूप से धन के लेन-देन के अनेक मामलों के बीच उनको दो बैंक खातों में मिली 234 करोड़ रुपये की राशि की पुष्टि करवाना चाहती है। फ्रांस की कंपनी एयरबस से 2005 में इंडियन एयरलाइंस के लिए 43 विमानों की खरीद के लिए कथित तौर पर संपर्क स्थापित करने में शामिल दीपक तलवार इस समय तिहाड़ जेल में हैं। ईडी के एक जांचकर्ता ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर एक न्यूज एजेंसी काे बताया कि जांच एजेंसी सोमवार से तलवार से पूछताछ शुरू करेगी और विशेष जोर उनके एयरबस से उनकी विभिन्न कंपनियों के खाते में लिए गए पैसे पर होगा। एजेंसी के अनुसार, तलवार को उद्योग व अन्य कुछ विदेशी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए ये पैसे मिले थे।


र्इडी को है इस बात की तलाश

एजेंसी उस लिंक की भी तलाश में है, जिसके जरिए तलवार के खाते में प्राप्त धन नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधिकारी समेत अन्य सरकारी कर्मचारियों के खाते में हस्तांतरित किया गया, जिन्होंने 2004 में अपने पद का दुरुपयोग करके करीब 70,000 करोड़ रुपये की लागत से नेशनल एयरलाइंस के लिए 111 विमान खरीदने का फैसला किया। उसमें प्रफुल्ल पटेल संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री थे। ईडी के अधिकारी ने कहा, "हमारे पास पहले से ही 100 से अधिक विशिष्ट प्रश्न हैं, जिनसे पैसे की लेन-देन की पोल खोलने में मदद मिलेगी।"


आॅफ में एअर इंडिया के 2000-01 की रिपोर्ट का जिक्र

उन्होंने कहा, "दिल्ली की एक अदालत द्वारा शुक्रवार को तलवार से जेल परिसर में पूछताछ की अनुमति मिलने के शीघ्र बाद इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई।" तलवार इस समय न्यायिक हिरासत में हैं और अदालत ने ईडी को उनसे सोमवार से शुक्रवार तक सुबह नौ बजे से शाम छह बजे के बीच जेल परिसर में पूछताछ करने की इजाजत दी है। तलवार से नागरिक उड्डयन मंत्रालय के उन नौकरशाहों के नाम पूछे जाएंगे, जो अन्य सरकारी अधिकारियों के साथ साजिश में शामिल थे। इससे पहले कुछ विमान खरीदने के प्रस्ताव थे, लेकिन धन के अभाव में उन प्रस्तावों को कार्यरूप प्रदान नहीं किया गया। ऑफ एअर इंडिया की 2000-01 की रिपोर्ट का जिक्र किया गया है कि एयरलाइंस सिर्फ पट्टे पर विमान लेगी।


कैग की रिपोर्ट से सामने आर्इ थी ये जानकारी

पूर्व की इंडियन एयरलाइंस (आईएएल) द्वारा फरवरी 2006 में विमान के अधिग्रहण के बारे में नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने 17 अगस्त, 2011 को अपनी रिपोर्ट में पाया कि आईएएल ने अनुमानित 8,399.60 करोड़ रुपये की लागत से 43 विमानों (सीएफएम इंजिन के साथ) की खरीद के लिए एयरबस से करार किया था। अधिकारी ने बताया कि कथित तौर पर एअर इंडिया ने शुरुआत में सिर्फ 24 विमान खरीदने की योजना बनाई थी और इंडियन एयरलाइंस ने 43 विमान।


तलवार से ये सवाल भी किए जाएंगे कि किस तरह एअर इंडिया के कर्मचारियों ने अपने पद का दुरुपयोग किया और बोइंग (अमरीकी कंपनी) और एयरबस से 111 विमान खरीदने का ऑर्डर दिया, जिनकी लागत ब्याज भुगतान समेत 67,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 2017 में अपने एफआईआर में जिक्र किया है कि इस प्रकार की महत्वाकांक्षी खरीद के ऑर्डर आवश्यकताओं का अध्ययन, आवश्यक पारदर्शिता के बिना दिए गए, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। ईडी तलवार के खिलाफ धन शोधन के कई अन्य मामलों की भी जांच कर रहा है। तलवार को 30 जनवरी को संयुक्त अरब अमीरात से प्रत्यर्पित किया गया था।


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विदेशी मुद्रा भंडार सात माह के उच्चतम स्तर पर, इतनी हुर्इ बढ़ोतरी


नर्इ दिल्ली। देश का विदेशी मुद्रा भंडार गत आठ मार्च को समाप्त सप्ताह में लगातार चौथी साप्ताहिक तेजी दर्ज करता हुआ 2.58 अरब डॉलर बढ़कर सात माह से अधिक के उच्चतम स्तर 402.04 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

गत एक मार्च को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 2.56 अरब डॉलर बढ़कर 401.77 अरब डॉलर पर रहा था। इससे पहले गत 22 फरवरी को समाप्त सप्ताह में यह 94.47 करोड़ डॉलर बढ़कर 399.21 अरब डॉलर पर और 15 फरवरी को समाप्त सप्ताह में 15 करोड़ दो लाख डॉलर बढ़कर 398.27 अरब डॉलर रहा था।

रिजर्व बैंक द्वारा शुक्रवार को जारी विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़ों के अनुसार, आठ मार्च को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार तीन अगस्त 2018 के बाद के उच्चतम स्तर पर रहा है। आठ मार्च को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 1.67 अरब डॉलर बढ़कर 374.23 अरब डॉलर पर पहुंच गयी।

स्वर्ण भंडार भी 1.16 अरब डॉलर बढ़कर 23.37 अरब डॉलर पर पहुंच गया। आलोच्य सप्ताह में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास आरक्षित निधि 1.66 करोड़ डॉलर घटकर 2.98 अरब डॉलर और विशेष आहरण अधिकार 81 लाख डॉलर की गिरावट के साथ 1.45 अरब डॉलर पर आ गया।


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डीजल कम करेगा देश की महंगाई, 'सरकार' ने यह योजना बनाई


नई दिल्ली। देश में महंगाई कम करने के लिए डीजल का सहारा लिया जा रहा है। यह बात हम अपनी तरफ से बिल्कुल भी नहीं कह रहे हैं। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के आंकड़े अपने आप बता रहे हैं। 8 मार्च से लेकर 17 मार्च तक डीजल के दाम में लगातार कटौती देखने को मिली है। जबकि पेट्रोल के दाम में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। यह बात हम इसलिए भी कह रहे हैं कि इन्हीं दिनों के बीच खुदरा और थोक महंगाई के आंकड़े भी जारी हुए हैं। जो बढ़े हुए आए हैं। यह बात सभी को पता है कि डीजल का सीधा कनेक्शन महंगाई से है। अगर डीजल के दाम बढ़ेंगे तो वस्तुओं के दाम अपने आप बढ़ जाएंगे। ऐसे में डीजल की कीमतों कम कर पेट्रोल के दामों को बढ़ाया जा रहा है।

डीजल है महंगाई कम करने का फार्मूला
एजेंल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसीडेंट अनुज गुप्ता का कहना है कि देश में पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल और डीजल की कीमतों के बदलाव का ट्रेंड देखने को मिल रहा है उसका सीधा मतलब यही निकाला जा सकता है कि देश में महंगाई को कंट्रोल करने के लिए ऐसा किया जा रहा है। देश में चुनाव शुरू होने वाले हैं। अगर देश में महंगाई बढ़ेगी तो चुनावों में देश के लोगों को नया मुद्दा मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि डीजल की कीमत को कम करके पेट्रोल के दाम को बढ़ाया जा रहा है। पेट्रोल का असर उत्पादों की कीमतों पर नहीं पड़ता है। लेकिन डीजल के दाम बढऩे से देश के उत्पादों की कीमतों पर डायरेक्ट असर पड़ता है।

पेट्रोल जितना बढ़ा, डीजल उतना कम हुआ
आईओसीएल से मिली जानकारी के अनुसार देश की राजधानी में पेट्रोल के दाम में 46 पैसे प्रति लीटर की कटौती हुई है। जबकि डीजल की कीमत में 47 पैसे प्रति लीटर दाम कम हुए हैं। यह दाम 8 मार्च से 17 मार्च तक के बीच का आंकड़ा है। आठ मार्च को नई दिल्ली में पेट्रोल के दाम 72.24 रुपए प्रति लीटर था। जबकि आठ मार्च को डीजल के दाम 67.54 रुपए प्रति लीटर थे। अगर 17 मार्च के पेट्रोल की कीमत की बात करें तो 72.71 रुपए प्रति लीटर है। वहीं डीजल के दाम 67.08 रुपए प्रति लीटर है।

यह आए थे महंगाई के आंकड़े
गुरुवार को सरकार की ओर से फरवरी माह की थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए थे। आंकड़ों के अनुसार ईंधन, बिजली एवं प्राथमिक वस्तुओं की कीमतें बढऩे से फरवरी महीने में थोक महंगाई दर बढ़कर 2.93 फीसदी पर पहुंच गई थी। वहीं इससे दो दिन पहले खुदरा महंगाई दर के आंकड़ों को जारी किया गया था। फरवरी में खुदरा महंगाई बढ़कर 2.57 फीसदी पर पहुंच गई। जनवरी में यह 1.97 फीसदी थी।औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर जनवरी में घटकर 1.7 फीसदी हो गई थी। एक साल पहले समान महीने में यह 7.5 फीसदी थी।


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ट्रेड वॉर से अमरीका को हुआ 54,600 करोड़ रुपए का नुकसान, इस रिपोर्ट में सामने आई बात


नई दिल्ली। जिस चीन के साथ अमरीका अपने संबंधों को मधुर करने में जुटा है। उसी चीन ने अमरीका को ट्रेड वॉर के दौरान अरबों रुपयों का नुकसान पहुंचाया है। अपने आपको दुनिया का टैरिफ मैन कहलवाने वाले अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा झटका है। यह खुलासा अमरीकी विश्वविद्यालयों के इकोनॉमिस्ट के दल ने अपनी स्टडी में किया है।

इन लोगों ने की है स्टडी
यह स्टडी यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया बर्कले, कोलंबिया यूनिवर्सिटी, येल यूनिवर्सिटी तथा यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया ऐट लॉस एंजेलिस (यूसीएलए) के अर्थशास्त्रियों के एक दल की गई है। जिसे नेशनल ब्यूरो ऑफ इकनॉमिक रिसर्च ने पब्लिश भी किया है। स्टडी करने वालों के अनुसार उन्होंने ट्रंप की कार्रवाई के अल्पकालिक नतीजों का विश्लेषण करने के बाद पाया कि ट्रेड वॉर से लक्षित देशों से अमरीका के आयात में 31.5 फीसदी और निर्यात में 11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। अध्ययन में यह भी जानकारी मिली कि महंगे आयात की वजह से उपभोक्ताओं और उत्पादकों को सालाना 68.8 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।

अमरीका को 54,600 करोड़ रुपए का नुकसान
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा छेड़े गए ट्रेड वॉर से साल 2018 में अमरीकी अर्थव्यवस्था को 54,600 करोड़ रुपए (7.8 अरब डॉलर) का नुकसान हुआ है। शोधकर्ताओं ने कहा, 'ट्रेड वॉर से अमरीकी अर्थव्यवस्था को कुल मिलाकर 7.8 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.04 फीसदी है।' यह नुकसान अमरीका के लिए काफी बड़ा हैै।

अमरीका ने चीन और युरोपीय देशों पर लगाया था कर
खुद को 'टैरिफ मैन' करार देने वाले ट्रंप ने व्यापार घाटा कम करने के लिए अपने चुनावी अभियान और राष्ट्रपति बनने के बाद अनुचित ट्रेडेड इंपोट्र्स पर लगाम और फ्री ट्रेड अग्रीमेंट पर फिर से विचार करने का संकल्प लिया था। डोनाल्ड ट्रंप ने अमरीकी मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को फायदा पहुंचाने के लिए संरक्षणवादी ट्रेंड एजेंडे को अपनाया है। वाशिंगटन तथा पेइचिंग दोनों ही महीनों तक इस ट्रेड वॉर में उलझे रहे और एक दूसरे के खिलाफ टैरिफ लगाते रहे हैं। ट्रंप ने यूरोपीय संघ और अन्य ट्रेडिंग पार्टनर्स से आयात पर भी टैरिफ लगाया, जिसका यूरोपीय संघ ने पुरजोर विरोध किया।


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