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बजट 2019 को लेकर आर्इ बड़ी खबर, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस फेरबदल के दिए संकेत


नर्इ दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को 1 फरवरी को पेश होने वाले अंतरिम बजट में कुछ बड़े एेलान का संकेत दिया है। इसके संकेत मुताबिक, इस बार का बजट अंतरिम 'वोट-आॅन-अकाउंट' की बजाय पूर्ण बजट पेश कर सकते हैं। दरअसल, सरकार कर्इ आर्थिक चुनौतियों के मद्देनजर एेसा निर्णय कर सकती है। फाॅर्म सेक्टर को लेकर सरकार काफी चिंतित दिखार्इ दे रही है। हालांकि, इसको लेकर फिलहाल कुछ खास तस्वीर साफ नहीं हो पार्इ है।


न्यू याॅर्क से इंटरव्यू द्वारा की बात

गुरुवार को एक टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में वित्त मंत्री ने इस बात की तरफ इशारा किया है। इसके पहले कर्इ मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा था कि खराब स्वास्थ्य को देखते हुए वित्त मंत्री बजट करने में असमर्थ होंगे। बता दें कि हाल ही में वित्त मंत्री न्यू याॅर्क में रेगुलर मेडिकल चेक-अप के लिए गए थे जिसके बाद इस तरह के कयास लगाए जा रहे थे।


फार्म सेक्टर प्रमुख आर्थिक चुनौतियों में से एक

अर्थव्यवस्था की चुनौतियों काे देखते हुए वित्त मंत्री ने कहा, "अभी तक चुनावी साल में अंतरिम बजट पेश करने का ही चलन है। राष्ट्रहित को लेकर कर्इ आर्थिक मुद्दे ही यह तय करेंगे की इस बार के अंतरिम बजट में क्या होग।" उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों में से फार्म सेक्टर भी एक प्रमुख चुनौती है। गौरतलब है कि फार्म सेक्टर इसलिए भी सरकार के लिए चिंता का सबब बना हुआ है क्योंकि इससे देश की आधी आबादी जुड़ी हुर्इ है आैर इसके बावजूद भी जीडीपी में इसका योगदान पांचवे हिस्से का ही है। अंतरिम बजट को लेकर इस बात का भी कयास लगाया जा रहा है कि इस बार टैक्स दरों में भी कटौती हो सकती है।


ग्रोथ रेट को 8 फीसदी के पार रखने को लक्ष्य

सरकार का जोर फिस्कल प्रूडेंस पर है। खाद्य पदार्थों के दाम में लगातार कमी आ रही है। दाम में कमी किसानों की कमाई का संकेत है। प्रत्यक्ष कर को लेकर उन्होंने कहा कि डिजिटाइजेश अच्छा बदलाव रहा है। अतिरिक्त् आय को इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगाया गया है। उन्होंने कहा कि 7-7.5 फीसदी का ग्रोथ हमारे लिए पर्याप्त नहीं है आैर हमारा लक्ष्य 8 फीसदी ग्रोथ को पार करने पर होगा। कर्इ बैंकर्स का मानना है कि रेट कट करने मुफीद समय आ गया है। आपको बता दें कि भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) पर सवाल उठाया है। उनका मानना है कि इसमें कटौती से बैंकों का मुनाफा बढ़ेगा।


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पीएम मोदी की आयुष्मान योजना के मुरीद हुए बिल गेट्स, सोशल मीडिया पर की तारीफ


नई दिल्ली। साल 2018 में मोदी सरकार द्वारा लॉन्च की गई आयुष्मान भारत योजना की तारीफ माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स भी कर रहे हैं। उन्होंने तारीफ करते हुए कहा कि मुझे बहुत खुशी हो रही है कि पीएम मोदी की इस योजना का फायदा देश के लाखों लोग उठा रहे हैं। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बिल गेट्स की गेट्स फाउंडेशन भी काम कर रही है, जिससे लोगों का भला हो सके।


ट्वीट कर दी बधाई

बिल गेट्स ने सरकार की इस योजना के लिए ट्वीट कर बधाई दी। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए यह बधाई दी। साथ ही उन्होंने कहा कि इस योजना के 100 दिन पूरे हो गए हैं और मुझे ये देखकर खुशी हो रही है कि अब तक 6.85 लाख लोगों ने इस योजना का फायदा उठाया है। इसके साथ ही इस योजना का लाभ उठाने वाले लोगों की संख्या आए दिन बढ़ती ही जा रही है।

 

25 सितंबर को हुई थी लॉन्च

आपको बता दें कि इस योजना के बारे में पीएम मोदी ने पिछले साल बजट के समय बताया था और इसको दीन दयाल उपाध्याय जी की जयंती 25 सितंबर को लांच किया था। वहीं आयुष्मान भारत के सीईओ डॉ. इंदु भूषण ने जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार तक करीब 8.50 लाख लोग योजना का लाभ उठा चुके हैं।


देश की जनता को करना होगा जागरूक

वहीं वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी सोशल साइट्स के जरिए लोगों को बताया कि हमें इस योजना की जागरूकता को और अधिक बढ़ाना चाहिए, जिससे इस योजना का लाभ उठाने वालों की संख्या एक करोड़ तक पहुंच सके।

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नरेंद्र मोदी ने बनाया रिकॉर्ड, मनरेगा के लिए सबसे अधिक फंड किया आवंटित


नई दिल्ली। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को लेकर कई सालों से राजनीति होती आई है। जहां एक ओर केंद्र सरकार पर मनरेगा की राशि नहीं बांटने के आरोप लगते आए हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ प्रदेशों में मनरेगा की राशि शत-प्रतिशत बांटे जाने की खबरें आई हैं। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि मनरेगा के तहत 2,500 करोड़ रुपए की राशि केंद्र ने बंगाल को जारी नहीं की। वहीं सरकार ने दावा किया कि मध्य प्रदेश में मनरेगा की कुल राशि बांट दी गई है।


सरकार ने रिकॉर्ड बजट किया आवंटित

बीते वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनरेगा को कांग्रेस की नाकामी का जीता-जागता स्मारक भी बताया था। अब आम चुनावों से ठीक पहले सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए उसके लिए रिकॉर्ड बजट आवंटित किया है। केंद्र सरकार ने मंगलवार को बताया कि उसने मनरेगा के तहत 6000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि बांटी है जो किसी भी वित्त वर्ष में अब तक का रिकॉर्ड है। 6000 करोड़ रुपए आवंटित किए जाने के साथ ही मनरेगा के लिए कुल आवंटन 61 हजार 84 करोड़ रुपए हो गया है।


6084 करोड़ रुपए का हुआ अतिरिक्त आवंटन

बता दें मनरेगा ग्रामीण रोजगार योजना है जिसके तहत ग्रामीण इलाकों में लोगों को राशि मेहनताना के रूप में दी जाती है। 61 हजार 84 करोड़ रुपए अब तक आवंटित राशि में किसी वित्त वर्ष में सबसे अधिक है। इस संदर्भ में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा कि, 'भारत सरकार ने मनरेगा के तहत 6084 करोड़ रुपए का अतिरिक्त आवंटन किया है। इसके साथ ही 2018-19 में इस योजना के तहत कुल आवंटन 61 हजार 84 करोड़ रुपए हो गया है, जो अब तक का सबसे अधिक आवंटन है।'

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7वां वेतन आयोग: इन कर्मचारियों को मिला बड़ा तोहफा, सरकार ने 1,241 करोड़ रुपए किए मंजूर


नई दिल्ली। शैक्षणिक संस्थानों में कार्यरत शिक्षक और अन्य एकेडमिक कर्मचारियों को केन्द्र सरकार ने बड़ी खुशखबरी दी है। 7वां वेतन आयोग के तहत मंगलवार को सरकार ने शिक्षकों को लाभ देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय (HRD) ने 1,241 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। इसके अतिरिक्त 68 लाख से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारी न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। अगली कैबिनेट बैठक में एनडीए सरकार इस संबंध में कुछ बड़े फैसले भी ले सकती है। कर्मचारियों को सरकार से उम्मीद है कि उन्हें 2019 लोकसभा चुनाव से पहले फायदा मिलेगा। सबसे पहले शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े कर्मचारियों को यह लाभ दिया गया।


केंद्रीय कर्मचारी कर रहे मांग

केंद्रीय कर्मचारी मांग कर रहे हैं कि उनकी न्यूनतम सैलरी में आठ हजार रुपए की बढ़ोत्तरी की जाए। फिलहाल उनकी 18,000 रुपए न्यूनतम सैलरी है, जिसे बढ़ाकर 26,000 रुपए महीना किए जाने की मांग कर्मचारी कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त फिटमेंट फेक्टर को भी 2.57 गुना से बढ़ाकर 3.68 गुना करने की उम्मीद जताई जा रही है। केन्द्र सरकार के एक नए फैसले के तहत उसके सभी स्थायी कर्मचारियों को हर साल कम से कम 20 दिनों की छुट्टी लेनी होगी, बजाए सेवानिवृति के समय उन्हें जमा करने के।


सरकार ने लिया ये बड़ा फैसला

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि, 'इससे राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित संस्थानों के कुल 29,264 शिक्षकों तथा अन्य शैक्षणिक कर्मियों को सीधे लाभ होगा। इसके अलावा, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के दायरे में आने वाले निजी कॉलेजों या संस्थानों के करीब 3.5 लाख शिक्षकों और शैक्षणिक र्किमयों को भी इस मंजूरी से लाभ मिलेगा। केन्द्र सरकार सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए बकाये के भुगतान हेतु इन संस्थानों द्वारा किए जाने वाले कुल अतिरिक्त खर्च के 50 फीसदी का वहन भी करेगी।'

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आस्था ही नहीं बल्कि बजट में भी सबसे ऊपर है कुंभ मेला, अब तक का सबसे महंगा कुंभ इस साल


नई दिल्ली। कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा मेला है। इस वर्ष मेले में 100 देशों से करीब 8 करोड़ से 12 करोड़ लोगों के हिस्सा लेने की संभावना है, जो स्पेन और जर्मनी की कुल आबादी है। उत्तर प्रदेश के फाइनेंस मिनिस्टर राजेश अग्रवाल ने बताया कि इस भव्य कार्यक्रम के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रद्धालुओं को बड़ी सौगात दी है। सरकार ने संगम सिटी इलाहाबाद में होने वाले कुंभ मेले के लिए इस बार 4200 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया है, जो अब तक का सबसे अधिक बजट आवंटन है और साल 2013 में महाकुंभ के लिए आवंटित बजट का तीन गुना है। 2013 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 1,214 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया था। इस वर्ष आवंटित किए गए बजट में केन्द्र सरकार की ओर से 2,200 करोड़ रुपए दिए जा रहे हैं। वहीं बात अगर 2013 की करें तो 2013 में केन्द्र सरकार द्वारा 1,142 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया था।

 

  साल 2019 साल 2013
बजट 4200 करोड़ रुपए 1,214 करोड़ रुपए
एरिया 32 sq km 19.36 sq km
श्रद्धालु 12 करोड़ (अनुमानित) 8.8 करोड़
बिजली 40,700 LED लाइट्स 22,000 LED लाइट्स
सुरक्षा 20,000-22,000 पुलिस कर्मी 12,500 पुलिस कर्मी

 

ये है दुनिया का सबसे बड़ा मेला

बता दें कुंभ मेले का वर्णन हिंदू माइथोलॉजी में भी मिलता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा मेला है जहां सबसे अधिक लोग जुटते हैं। करोड़ों लोग गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के पवित्र संगम पर स्नान करते हैं। अर्द्धकुंभ हर छह साल पर होती और कुंभ मेला प्रत्येक 12 साल पर। लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अर्द्धकुंभ को कुंभ और कुंभ को महाकुंभ नाम दिया है। इस वर्ष कुंभ मेले का बजट ही नहीं बल्कि एरिया, बिजली, सुरक्षा और इन्फ्रास्ट्रक्चर सहित बहुत कुछ बढ़ा है।

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इस मामले में अमरीका को भी पीछे छोड़ेगा भारत, दुनिया के लिए बनेगा मिसाल


नई दिल्ली। आने वाले कुछ ही सालों में भारत अमरीका को भी पीछे छोड़कर आगे निकल जाएगा। 2030 तक भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया के लिए मिसाल बन जाएगी। वहीं, चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर पहले स्थान पर आ जाएगा और भारत अमरीका को पीछे छोड़कर दूसरे नंबर पर पहुंच जाएगा।


अमरीका को पीछे छोड़ेगा भारत

ब्रिटिश फाइनेंसियल सर्विसेस फर्म स्टैंडर्ड चार्टर्ड पीएलसी ने रिपोर्ट जारी कर बताया कि आने वाले समय में चीन अमरीका को पीछे छोड़कर दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। वहीं, भारत दूसरे नंबर पर आ सकता है और चीन इन दो एशियाई दिग्गजों से पिछड़ते हुए लिस्ट में तीसरे स्थान पर आ जाएगा।


टॉप 5 में आ सकता है भारत

आपको बता दें कि आने वाले समय में दुनिया की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की लिस्ट में इंडोनेशिया के चौथे स्थान पर आने की उम्मीद है और तुर्की पांचवे स्थान पर खिसक सकता है।


7.8 फीसदी तक हो सकती है बढ़ोतरी

अर्थशास्त्रियों ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत की अर्थव्यवस्था में 2020 तक 7.8 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं 2030 तक चीन की आर्थिक ग्रोथ में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है और चीन की आर्थिक ग्रोथ बढ़कर 5 फीसदी तक पहुंच सकती है।


अर्थशास्त्रियों ने दी जानकारी

इसके साथ ही स्टैंडर्ड चार्टर्ड के अर्थशास्त्रियों ने जानकारी देते हुए बताया कि 2020 तक दुनिया की अधिकांश आबादी मध्यम वर्ग के आय वर्ग में चली जाएगी। वहीं चीन की अर्थव्यवस्था पर देश की आबादी की बढ़ती उम्र का भी असर तेजी से देखा जाएगा।

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अंतरिम बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली की सौगात, बढ़ सकती है आयकर छूट की सीमा


नई दिल्ली। मध्य वर्ग को राहत देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर दोगुनी कर सकते हैं। इस बार वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए टैक्स छूट 2.5 लाख रुपए से बढ़कर 5 लाख रुपए हो सकता है। साथ ही मेडिकल खर्चो और परिवहन भत्ते को भी फिर से बहाल कर सकते हैं। इससे नोटबंदी के कारण बेहाल मध्य वर्ग को थोड़ी राहत मिलेगी।


चुनावी वादों से भरपूर हो सकता है बजट

अंतरिम बजट में हालांकि बहुत अधिक मांगों को पूरा नहीं किया जा सकता है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार चुनावों को देखते हुए मध्य वर्ग को खुश करने की कोशिश करेगी। सरकारी सूत्रों ने के मुताबिक करों के स्लैब को सुव्यवस्थित करने की योजना बनाई गई है, जो किसी भी स्थिति में आगामी प्रत्यक्ष कर संहिता के अनुरूप होंगे। इसमें यह समस्या आ सकती है कि प्रत्यक्ष कर संहिता रिपोर्ट के आने से पहले आम बजट 28 फरवरी को आ जाएगा, जिससे रिपोर्ट जारी होने से पहले दरों से छेड़छाड़ इसे विवाद खड़े हो सकते हैं।


अलग-अलग वर्ग के टैक्सपेयर्स को साधने की होगी कोशिश

नए प्रत्यक्ष कर संहिता के दायरे में ज्यादा से ज्यादा कर निर्धारती (एसेसी) को कर के दायरे में लाने की कोशिश की जाएगी, ताकि अलग-अलग वर्गो के करदाताओं के लिए अधिक न्यायसंगत प्रणाली बनाई जाए, कॉर्पोरेट कर में कमी की जाए और व्यवसायों को प्रतिस्पर्धी बनाई जाए।


वर्तमान में कितना मिलता है छूट

वर्तमान में, 2.5 लाख रुपये की आय को निजी आयकर से छूट प्राप्त है, जबकि 2.5-5 लाख रुपये के बीच की सालाना आय पर 5 फीसदी कर लगता है, जबकि 5-10 लाख रुपये की सालाना आय पर 20 फीसदी और 10 लाख रुपये से अधिक की सालाना आय पर 30 फीसदी कर लगता है। जबकि 80 साल के अधिक की उम्र के नागरिकों को 5 लाख रुपये सालाना की आय पर कर छूट प्राप्त है। इसके अलावा पिछले साल 5 लाख रुपये की आय वालों के लिए सालाना 15,000 रुपये तक के मेडिकल खर्चो और 19,200 रुपये तक के परिवहन भत्तों को हटाकर उसकी जगह 20,000 रुपये की मानक कटौती लाया था। इसे भी वापस बहाल किया जा सकता है। हालांकि इससे बहुत अधिक फायदा तो नहीं होगा, लेकिन मध्य वर्ग का उत्साह बढ़ेगा।

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शुरू हुअा अमरीका में शटडाउन का असर, टेथर्स अनलिमिटेड के 20 फीसदी स्टाॅफ्स हुए छंटनी


नर्इ दिल्ली। अमरीका में सरकार की कामबंदी के कारण नकदी के संकट से जूझ रही अमरीकी कंपनी टेथर्स अनलिमिटेड इंक ने अपने 20 फीसदी कर्मचारियों की छटनी कर दी है। यह जानकारी विदेशी मीडिया की रिपोर्ट से मिली है। अंतरिक्ष क्षेत्र की इस कंपनी को नवाचारी अंतरिक्ष यान प्रणाली और अंतरिक्ष की फेब्रिकेशन सिस्टम पर काम करने के लिए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और डिफेंस रिसर्च एडवांस्ड प्रोजेक्ट्स एजेंसी (डीएआरपीए) से कई अनुबंध मिले थे।

 

कर्मचारियों को नहीं मिले पैसे

कंपनी के सीईओ रॉब हॉयट ने ग्रीकवायर को रविवार को एक ईमेल के जरिए बताया, "लेकिन टेथर्स अनलिमिटेड को पिछले तीन महीनें से किए गए कार्यो के लिए पैसे नहीं मिले हैं।" हॉयट ने कहा, "नासा और डीएआरपीए को दिए गए हमारे बिल की प्रक्रिया करने और उसे मंजूरी देने वाल सरकारी कर्मचारियों के अवकाश पर रहने के कारण हमें सितंबर से लेकर दिसंबर के बीच के अनके अनुबंध में किए गए काम के पैसे नहीं मिले हैं।"


अनिश्चित काल तक है शटडाउन

उन्होंने कहा, "इससे हमारी नकदी प्रवाह पर गंभीर प्रभाव पड़ा है, जिसके फलस्वरूप हमें 12 अच्छे इंजीनियरों और अपने कार्यबल के करीब 20 फीसदी कर्मचारियों की छुट्टी करनी पड़ी है।" अमरीका में सरकार की आंशिक कामबंदी अब तक की सबसे लंबी अवधि की कामबंदी बन गई है। इससे पहले तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल के दौरान 1995-96 के दौरान 21 दिनों तक गतिरोध बना रहा।Business News in Hindi

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आरक्षण के बाद पीएम मोदी के लिए सबसे बड़ी चुनौती, अब कैसे देगें नौकरी


नई दिल्ली। मोदी सरकार ने हाल ही में सर्वणों को आरक्षण का नया तोहफा दिया है, लेकिन सरकारी नौकरी में आए दिन हो रही कमी को भी हम अनदेखा नहीं कर सकते हैं। केंद्र सरकार, बैंकों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों में तेजी से कमी आ रही है।


आंकड़ों के अनुसार मिली जानकारी

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के आंकड़ों के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग की भर्तियों में भी गिरावट आई है। इसके साथ ही रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी), कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) में भी रिक्तियों में कमी आई है। एक तरफ जहां सरकारी नैकरी में कमी आ रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण वर्ग के लिए 10 फीसदी का आरक्षण दिया है, जिससे सर्वणों को भी आसानी से सरकारी नौकरी मिल सके।


2015 से लेकर अब तक आई काफी गिरावट

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन सालों में इन तीन मुख्य एजेंसियों द्वारा चयन और भर्ती की प्रक्रिया में कमी आ रही है। वित्त वर्ष 2017 से लेकर 2015 तक सरकारी नौकरियों की संख्या 1,13,524 से घटकर 1,00,933 हो गई। हालांकि, वित्तीय वर्ष 2017 में सीपीएसई द्वारा नियोजित लोगों की संख्या 11.31 लाख थी जो वित्तीय वर्ष 2016 में 11.85 लाख की तुलना में 4.5 फीसदी गिर गई थी।


आरबीआई ने दी जानकारी

भारतीय रिजर्व बैंक ने आंकड़ों जारी करते हुए बताया कि बैंकों में कुल रोजगार में लगभग 4.5% की वृद्धि हुई है, मुख्य रूप से अधिकारियों की भर्तियों में बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही क्लर्ककी नौकरी में भी एब बढ़ोतरी हुआ है। हालांकि वित्त वर्ष 2015 और वित्तीय वर्ष 2017 के बीच लगभग 8 फीसदी की गिरावट देखी गई है।


ये लोग नहीं हैं शामिल

आपको बता दें कि इन एजेंसियों के लिए उपलब्ध आंकड़ों में राज्य सरकार, वित्तीय संस्थान, विश्वविद्यालय, वैधानिक और स्वायत्त निकायों और यूपीएससी और एसएससी के बाहर के मंत्रालयों और विभागों द्वारा सीधे किए गए भर्ती शामिल नहीं हैं।

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ढाई लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, मोदी सरकार ने दिया ये खास तोहफा


नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव को देखते हुए मोदी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा ऐलान किया है। आरक्षण देने के बाद अब सरकार कर्मचारियों को ट्रांसफर की सुविधा देने जा रही है। अब आपको नौकरी करने के लिए अपने घर से दूर रहने की कोई जरूरत नहीं है। अब आप अपने घर और गांव जहां चाहें वहां रहकर नौकरी कर सकते हैं।


ढाई लाख लोगों को मिलेगी सुविधा

आपको बता दें कि सरकार ग्रामीण डाक सेवकों के लिए ये सुविधा लेकर आई है। लिमिटेड ट्रांसफर की सुविधा पर कमलेश चंद्र समिति पहले भी कई बार सिफारिश कर चुकी है, जिसको अब मोदी सरकार ने स्वीकार कर लिया है। सरकार के इस फरमान से देश में मौजूद ढाई लाख से ज्यादा कर्मचारियों को इसका फायदा होगा।


महिलाओं को मिलेगा दो बार ट्रांसफर

सरकार ने जानकारी देते हुए बताया कि पुरूष डाक सेवकों को केवल एक बार ट्रांसफर मिलेगा वहीं, महिलाओं को दो बार ट्रांसफर की सुविधा मिलेगी। नौकरी करने वाले सरकारी कर्मचारी अपनी इच्छा और सुविधा के हिसाब से ट्रांसफर ले सकते हैं। कर्मचारी अपने घर, गांव के आसपास या कहीं भी ट्रांसफर ले सकते हैं।


पुलिस केस या कोर्ट केस वाले लोगों का नहीं होगा ट्रांसफर

ट्रांसफर लेने के लिए आपको कुछ शर्तों का पालन करना होगा। आपकी नौकरी की न्यूनतम अवधि जीडीएस पद पर नियमित रुप से तीन साल होनी चाहिए। अगर आपके नियमित रूपसे तीन साल नहीं है तो आपको इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पाएगा। इसके साथ ही ट्रांसफर लेने के लिए आपके पास सभी डॉक्यूमेंट का होना भी अनिवार्य है। वहीं, जिन लोगों के खिलाफ कोई पुलिस केस या कोर्ट केस होगा वो लोग इसका लाभ नहीं उठा पाएंगें।

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इन 12 गांव के किसान अब हो जाएंगे मालामाल, करना होगा बस ये काम


नई दिल्ली। अब दिल्ली और यूपी के किसानों को पैसों के लिए बिल्कुल भी परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अब यहां रहने वाले किसानों के अच्छे दिन आने वाले हैं। अक्षरधाम से खेकड़ा तक बनने वाले नए हाईवे से सैकड़ों किसान मालामाल होंगे। ये हाईवे भारत माला परियोजना के तहत दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर के पास (दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे) बनने वाला है। इस हाईवे से सैकड़ों किसानों को फायदा मिलेगा।


लोगों को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी

इस हाईवे के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो जाएगी। इस हाईवे को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे और दिल्ली-सहारनपुर हाईवे से जोड़ने के लिए बनाया जा रहा है। इस हाईवे को बनाने के लिए NHAI लोनी के 12 गांव के किसानों की जमीन का अधिग्रहण करेगी। इसके साथ ही इस हाईवे के बनने के बाद लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।


बनेगी एलिवेटेड रोड

इस हाईवे में करीब 12 किलोमीटर की एलिवेटेड रोड बनाई जाएगी। इस रोड की दिल्ली में लंबाई 14.7 किलोमीटर और यूपी में इसकी लंबी 17.5 किलोमीटर है। इस रोड में छह किलोमीटर की एलिवेटेड रोड होगी। इस हाईवे के लिए जनवरी में टेंडर निकाल लिया है। इस टेंडर पर मार्च से काम भी शुरू हो जाएगा।


किसानों को जमीन के बदले मिलेगा मुआवजा

इस हाईवे को बनाने के लिए 12 गांव का अधिग्रहण होगा। इसकी सूची भी तैयार कर ली गई है और उसको प्रशासन को भी भेज दिया जाएगा। भूमि लेने के बदले में सरकार किसानों को मुआवजा देगी। मुआवजा देने के लिए सरकार ने दो पैरामीटर बनाए हैं, जिसमें शहरी क्षेत्र में दो गुना और देहात क्षेत्र में चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। इसमें लोनी देहात, हकीकतपुर, सैदुलाबाद, पावी सदकपुर,शादाबाद दुर्गावली, अगरोला, मिलक बामला,मंडौला और नानू गांव के किसान शामिल है। यहां के किसानों को मुआवजे के रुप में मोटी रकम दी जाएगी।


बनेगा टोल प्लाजा

आपको बता दें कि इस हाईवे का टोल प्लाजा लोनी में बनाया जाएगा। इसके लिए सरकार ने पहले से जमीन लेकर रखी है औ र टोल बनाने पर मंथन चल रहा है। एनएचएआई ने इस बारे में जिलाधिकारी को भी अवगत करा दिया है।

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7वां वेतन आयोग: चुनाव से पहले 68 लाख कर्मचारियों का बढ़ने जा रहा है वेतन, इतनी हो जाएगी सैलरी


नई दिल्ली। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछड़े सवर्णों को बड़ी सौगात दी थी। पिछड़े सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देकर सरकार ने उन्हें बड़ी खुशखबरी दी थी। अब मोदी सरकार बहुत जल्द एक और बड़ी सौगात दे सकती है। अगली कैबिनेट मीटिंग में सरकार सातवें वेतन आयोग पर बड़ा फैसला ले सकती है। उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार 68 लाख केंद्रीय कर्मचारियों की वेतन वृद्धि समेत कई मांगों पर फैसला सुना सकती है।


सरकार ले सकती है ये अहम फैसला

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से पता चला कि मोदी सरकार की अगली मंत्रिमंडल बैठक में सातवें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम सैलरी को 18,000 रुपए से बढ़ाकर 21,000 रुपए की जा सकती है। इससे 68 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी। दरअसल सरकार काफी समय से केंद्रीय कर्मचारियों की मांगों पर विचार कर रही है और जल्द ही उन्हें बढ़ी हुई सैलरी की सौगात दे सकती है। अगर ऐसा होता है तो चुनाव से पहले यह सरकार का सभी केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ा ताेहफा होगा।


इस निर्णय की भी हो सकती है घोषणा

मोदी सरकार की अगली मंत्रिमंडल बैठक में ग्रेड 1 से 5 तक के केंद्रीय कर्मचारियों का वेतन बढ़ाए जाने का फैसला लिया जाएगा। बता दें ग्रेड 1 से 5 तक 68 लाख केंद्रीय कर्मचारी आते हैं। मौजूदा समय में ग्रेड 1 से 5 के केंद्रीय कर्मचारियों का वेतन 18,000 रुपए है, जिसे बढ़ा कर 21,000 रुपए किया जा सकता है। इसके अलावा बैठक में एक और बड़ा निर्णय लेने की उम्मीद जताई जा रही है। वेतन वृद्धि के अलावा फिटमेंट फैक्ट को 3.68 फीसदी किए जाने की उम्मीद है। मौजूदा समय में फिटमेंट फैक्ट 2.57 फीसदी है।

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नए साल में अमेजन की पहली बंपर सेल, इन प्रोडक्ट्स पर मिलेगी भारी छूट


नई दिल्ली। अमेजन एक बार फिर आपके लिए great indian sale लेकर आया है। ये सेल 20 जनवरी से 23 जनवरी तक चलेगी। इस सेल में आपको कैशबैक ऑफर्स के साथ कई चीजें काफी कम दामों में मिलेंगी। साथ ही अगर आपके पास HDFC बैंक का एटीएम कार्ड है तो आपको 10 फीसदी का कैशबैक ऑफर पेमेंट के टाइम पर ह मिल जाएगा।


10 करोड़ से भी ज्यादा प्रोडक्ट्स की होगी सेल

आपको बता दें कि अगर आपके पास अमेजॉन प्राइम मेंबरशिप है तो आप 19 जनवरी को दोपहर 12 बजे से ही खरीदारी कर सकते हैं। इस सेल में आपको 10 करोड़ से भी ज्यादा प्रोडक्ट्स भारी छूट पर मिलेंगे। इसके साथ ही अगर आप पहली बार ऑर्डर कर रहे हैं तो आपको फ्री होम डिलीवरी की सुविधा भी मिलेगी।


आधे से भी कम दाम में मिलेंगे सामान

इस सेल में इलेक्ट्रानिक गैजेट्स पर भारी छूट मिल रही है। इसके साथ ही स्मार्टफोन पर नो-कॉस्ट ईएमआई के साथ-साथ एक्सचेंज ऑफर भी मिल रहा है। इस सेल में लैपटॉप, हेडफोन्स, कैमरा और हार्ड ड्राइव समेत कई अन्य प्रोडक्ट पर 60 फीसदी तक की छूट मिल रही है। वहीं घर के सामान पर भी 50 फीसदी तक की छूट मिल रही है।


OnePlus 6T पर है खास ऑफर

इस सेल में आपको OnePlus 6T पर शानदार ऑफर मिल रहा है। इसके साथ ही Redmi Y2 और Huawei Nova 3i भी ग्राहकों को कम दाम में मिल रहा है। इसके साथ ही आपको कई अन्य कंपनियों के फोन भी काफी कम दाम में मिल जाएंगे।

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भारत से उठा विदेशियों का भरोसा, केवल 9 दिन में ही निकाल लिए 3600 करोड़ रुपए


नई दिल्ली। विदेशी निवेशकों ने जनवरी के नौ कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजारों से 3,600 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी निकासी की है। देश में निवेश करने की उनकी धारणा काफी सावधानी भरी दिख रही है। जबकि इससे पहले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने नवंबर और दिसंबर माह में कुल 8,584 करोड़ रुपये का निवेश किया था।


आंकड़ों के अनुसार

डिपॉजिटरीज के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एक से 12 जनवरी के बीच कुल नौ कारोबारी दिवसों में एफपीआई ने 3,677 करोड़ रुपये की निकासी की है। हालांकि समीक्षावधि में उन्होंने 1,872 करोड़ रुपये ऋण बाजार में निवेश किए हैं।


किसी भी नतीजे पर पहुंचने के लिए जल्दबाजी ठीक नहीं

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर इंडिया के शोध विभाग में वरिष्ठ विश्लेषण प्रबंधक हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘हो सकता है कि यह साल के लिए अच्छी शुरुआत ना हो, लेकिन किसी नतीजे पर पहुंचने के लिए यह जल्दबाजी होगी। हालांकि विदेशी निवेशकों का रुख भले ही सावधानी भरा है, लेकिन यह भारत के प्रति उनके सकारात्मक रुख का ही संकेत करता है।’’


ये साल उतार-चढ़ाव भरा रहेगा

ऑनलाइन निवेश मंच ग्रो के मुख्य परिचालन अधिकारी हर्ष जैन ने कहा कि ब्याज दरों में वृद्धि और डॉलर में अस्थिरता के चलते 2019 काफी उतार-चढ़ाव भरा साल रहने वाला है, लेकिन लघु अवधि की राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद भारतीय बाजार में विकसित अर्थव्यवस्थाओं की अपेक्षा उतना उतार-चढ़ाव नहीं होगा।


(ये कॉपी भाषा से ली गई है।)

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डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका संभाल सकती हैं विश्व बैंक की कमान


नर्इ दिल्ली। जिम योंग किम के बाद डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप विश्व बैंक की अगली अध्यक्ष बन सकती हैं। बिजनेस इनसाइडर ने अपनी एक रिपोर्ट में इसके बारे में जानकारी दी है। हाल ही में जिम योंग किम ने अपना कार्यकाल खत्म होने से ठीक 3 साल पहले ही अचानक विश्व बैंक के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इवांका ट्रंप को विशेष सलाहकार नियुक्त करने बाद उनपर पर पहले ही अपनी शक्तियों का दुरूपयोग करने का आरोप लग चुका है। हालांकि बाद में इवांक ट्रंप बिना किसी सैलरी के ही इस पद पर काम करने के लिए तैयार हो गर्इं।


कैसे होता है विश्व बैंक के अध्यक्ष का चुनाव

गत सोमवार को किम ने अपने पद से इस्तीफ देने की घोषणा कर दी है। अपने इस्तीफे को लेकर उन्होंने कहा कि वो विश्व बैंक की अलोचनाआें को आैर वैश्विक विकास के लिए विश्व बैंक की मदद न करने को लेकर निराश हैं। विश्व बैंक के अध्यक्ष की नियुक्ति बैंक बोर्ड करता है। इसके लिए वोटिंग शेयर इस आधार पर तय होता कि किस देश ने विश्व बैंक में सबसे अधिक पैसा लगाया है। वर्तमान में अमरीका ने विश्व बैंक में सबसे अधिक पैसा लगाया है आैर साल 1945 में इसकी स्थापना के बाद से ही अमरीकन उम्मीदवार को ही विश्व बैंक की कमान दी जाती रही है। हालांकि चीन हमेशा ही अमरीकी उम्मीदवारों पर उंगलियां खड़ी करता रहा है। चूंकिं, विश्व बैंक में सबसे बड़े शेयरहोल्डर अमरीका आैर यूरोपियन देश होते हैं, एेसे में अध्यक्ष की नियुक्ति में इनका ही वर्चस्व रहता है।


अप्रैल माह के मध्य तक विश्व बैंक को मिलेगा नया अध्यक्ष

अमरीकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट के प्रवक्ता के मुताबिक, विश्व बैंक के अध्यक्ष पद के लिए कर्इ उम्मीदवारों का नाम प्रस्तावित है। उन्होंने कहा, "हम अमरीकी नाॅमिनी के आंतरिक रिव्यू शुरू करने वाले हैं। हम सभी गवर्नर्स के साथ मिलकर नए अध्यक्ष का चुनाव करेंगे।" गत गुरुवार को ही विश्व बैंक ने अगले माह के शुरुआत तक नए अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवारों की नाॅमिनेशन लेने की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा कर चुका है। बुल्गारिया की नेता आैर यूरोपियन यूनियन के पूर्व कमिश्नर क्रिस्टेलिना जाॅर्जिवा अगले अध्यक्ष की नियुक्ति तक विश्व बैंक की अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी। अप्रैल माह के मध्य में विश्व बैंक के नए अध्यक्ष की नियुक्ति हो जाएगी।


कर्इ मौकों पर अमरीका प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं इवांका

अपने मौजूदा भूमिका में, इवांका कर्इ अहम मौकों पर भी अमरीका का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। G20 सम्मेलन भी अपने पिता की जगह इवांका ही गर्इं थी। इस बैठक में ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेस मे के बगल में इवांका बैठीं थी। ट्रंप ने उन अफवाह को खारिज कर दिया है जिसमें इवांका को यूनाइटेड नेशन्स के अंबेसडर नियुक्त किए जाने की बात की गर्इ थी। फिलहाल निक्की हैले यूनाइटेड नेशन्स की अंबेसडर हैं आैर कयास लगाया रहा है कि बहुत जल्द ही वो अपने पद से इस्तीफा दे सकती हैं। साल 2017 में इवांका ने विश्व बैंक के साथ मिलकर महिला उद्यमियाें के लिए 1 अरब डाॅलर (करीब 70 अरब डाॅलर) जमा इकट्ठा किया था।
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सवर्णों को आरक्षण के बाद, अब सरकार ने दिए ये दो बड़े फायदे


नई दिल्ली। 2019 लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने देश की जनता को नया तोहफा दिया है। मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को सरकारी नाैकरी और शिक्षा में 10 फीसदी तक का आरक्षण देने की घोषणा की थी, लेकिन अब सरकार ने गरीब सवर्णों को पेट्रोल पंप और कुकिंग गैस एजेंसी आवंटित करने का भी विचार किया है।


मिलेंगे पेट्रोल पंप और कुकिंग गैस एजेंसी

अब देश के पिछड़े सवर्णों को बिल्कुल भी परेशान होने की जरूरत नहीं हैं, क्योंकि मोदी सरकार पिछड़े सवर्णों को पेट्रोल पंप और कुकिंग गैस एजेंसी आवंटित करेगी। इसके साथ ही सरकारी अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि, 'यह कंपनियां केंद्र सरकार की आरक्षण नीति का अनुसरण करेंगी।'


देश के इन राज्यों में है अलग है आरक्षण की नीति

आपको बता दें कि पहले इस तरह का आवंटन में 22.5 फीसदी हिस्सा एससी और एसटी का होता था और 27 फीसदी हिस्सी ओबीसी के लिए होता था और पूरे देश में लगभग 50.5 फीसदी लोग सामान्य श्रेणी में आते हैं, लेकिन देश के कुछ राज्यों में आरक्षण का प्रतिशत अलग है। इसमें अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नगालैंड और मिजोरम शामिल हैं। देश के इन राज्यों में आरक्षण की बंटवारा अलग हिसाब से होता है।


जल्द ही विधेयक को मिलेगी मंजूरी

एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि ‘नए पारित कानून के अधिसूचित होने के बाद ईडब्ल्यूएस श्रेणी को 10 फीसदी आरक्षण (खुदरा दुकानों के आवंटन में) देने का औपचारिक प्रस्ताव उचित समय पर शुरू किया जाएगा।' लेकिन अभी तक पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से इस पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है। जल्द ही इस विधेयक को राष्ट्रपति की भी मंजूरी मिल जाएगी और इसको अधिसूचित किया जाएगा।

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कुंभ मेले में डुबकी लगाने के साथ-साथ लाइव आरती देखने का उठा सकेंगे लुत्फ, आपके लिए ऐसे खास होगा कुंभ मेला


नई दिल्ली। भारत की दिग्गज मोबाइल फोन कंपनियां वोडाफोन आइडिया, भारती एयरटेल और रिलायंस जियो इंफोकॉम कुंभ मेले में आने वाले 130 मिलियन लोगों को लुभाने की योजना बना रही हैं। कुंभ मेले का आयोजन 15 जनवरी से शुरू हो रहा है। यह देश का सबसे बड़ा महापर्व है। इसमें सभी लोगों के लिए विशेष सेवाओं और योजनाओं की व्यवस्था की गई है। इस महापर्व का आयोजन दो महीने तक चलेगा।


RFID का होगा प्रयोग

कुंभ मेले में सभी इंफोकॉम कंपनियां ने फोन में एक स्पेशल ऑफर दिया जा रहा है, जिसे रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) टैग के नाम से जानते हैं। इसकी मदद से कुंभ मेले में बिछड़े हुए लोगों का पता लगाया जा सकता है।


लाइव प्रोग्राम भी देख सकेंगे

इन फोन की मदद से आप कुंभ में होने वाले सभी प्रोग्राम की लाइव स्ट्रीमिंग भी देख सकते हैं। इसके अलावा भक्तों को लुभाने के लिए आकर्षित स्टेज बनाया गया है औऱ स्टेज पर होने वाले सभी कार्यक्रम को आप आसानी से लाइव देख सकेंगे। स्टेज पर धार्मिक प्रवचन, भक्ति गीत जैसे विशष कार्यक्रम होंगे, जिनका आनंद आप कहीं भी बैठकर ले सकते हैं। फिलहाल कुंभ मेले का आयोजन 15 जनवरी को शुरू हो जाएगा और यह आयोजन 4 मार्च तक चलेगा।


टीवी का भी उठा सकेंगे लुत्फ

इंफोकॉम कंपनियों के इस स्मार्टफोन की मदद से लोग आसानी से टीवी का भी आनंद उठा पाएंगे। इसके साथ ही कस्बों और गांवों के लोगों के बीच इस नई टेक्नोलॉजी का भी विस्तार होगा। इसके साथ ही 4जी फीचर फोन के जरिए लोगों को बस, ट्रेन, आपातकालीन सुविधाएं, लोकेटर, दिन में होने वाले कार्यक्रम और कैंप के बारे में भी सारी जानकारी मिलेगी।


स्वास्थ्य और शिक्षा का भी रखा जाएगा ध्यान

आपको बता दें कि इस क्षेत्र में बढ़ रही प्रतियोगिताओं को देखते हुए कंपनियों ने अपने टैरिफ की राशि को कम कर दिया है। इसके साथ ही कंपनियों ने अपने प्लान में लोगों के खेल, मनोरंजन, स्वास्थ्य और शिक्षा का विशेष ध्यान रखा है क्योंकि इससे लोगों को आसानी से लुभाया जा सकता है।


आभासी वास्तविकता का भी मिलेगा अनुभव

इसके साथ ही 14 साल तक की उम्र के लोगों के लिए आभासी वास्तविकता का अनुभव भी कराया जाएगा, जिससे लोगों को उस कुंभ मेले में न होकर भी वहां होने का अनुभव मिल सकेगा। वहीं, वरिष्ठ लोगों के लिए वोडाफोन की ओर से आरएफआईडी टैग लगाए गए हैं।


एयरटेल टीवी ने बनाया कुंभ चैनल

देश के दूसरे सबसे बड़े ऑपरेटर भारती एयरटेल ने अपने एयरटेल टीवी ऐप पर एक विशेष कुंभ चैनल बनाया है, जो भक्तों को इस घटना से डिजिटल रूप से जोड़ने का काम करता है। ऑपरेटर ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्राहक किसी भी स्थान पर बैठकर सभी प्रोग्राम को आसानी से देख सकेंगे। अभी तक इसके 342 मिलियन ग्राहक हैं।


कुंभ मेला बना कंपनियों के लिए अच्छा प्लेटफॉर्म

कुंभ मेले में सभी कंपनियां ऑपरेटरों को अपने नए उत्पादों को बाजार में लाने के लिए एक अच्छा प्लेटफॉर्म साबित हो सकता है। इसमें सभी को अपने प्रोटक्ट बेचने की अनुमति है। रिलायंस जियो इन्फोकॉम के आज के समय में 262.75 मिलियन ग्राहक हैं। जियो अपने सभी ग्राहकों की सुविधा के लिए 4 जी फीचर फोन लेकर आया है, जिसके माध्यम से तीर्थयात्रियों के लिए कई नई सेवाओं की शुरुआत की जा रही है। इसमें घटना की जानकारी, ट्रेनों और बसों की स्थिति, आपातकालीन हेल्पलाइन और मार्गों के अलावा अपने Jio टीवी और रेडियो ऐप के लिए भक्ति सामग्री शामिल हैं। साथ ही समाचार अलर्ट और लोकेटर भी है।


2019 कुंंभ मेले में इस दिन होंगे शाही स्नान

14-15 जनवरी 2019: मकर संक्रांति (पहला शाही स्नान)
21 जनवरी 2019: पौष पूर्णिमा
31 जनवरी 2019: पौष एकादशी स्नान
04 फरवरी 2019: मौनी अमावस्या (मुख्य शाही स्नान, दूसरा शाही स्नान)
10 फरवरी 2019: बसंत पंचमी (तीसरा शाही स्नान)
16 फरवरी 2019: माघी एकादशी
19 फरवरी 2019: माघी पूर्णिमा
04 मार्च 2019: महा शिवरात्रि

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लोकसभा चुनाव से पहले मोदी की सियासी चाल, वोटर्स को लुभाने के लिए खोला पिटारा


नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव निकट हैं। ऐसे में हर पार्टी वोटर्स को लुभाने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। बीते दिनों बीजेपी (BJP) ने भी इस दिशा में कई कदम उठाए हैं। 2018 में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत के बाद बीजेपी वोटर्स को लुभाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। किसानों की मदद से लेकर नौकरी में आरक्षण देने तक भारतीय जनता पार्टी ने अनेक प्रयास किए हैं। आइए जानते हैं बीजेपी द्वारा की गई अहम घोषणाओं के बारे में।


सवर्णों को आरक्षण

हाल ही में मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10 फीसदी का आरक्षण देने का फैसला किया है। इससे समाज के हर वर्ग को आगे आने का मौका मिलेगा। सरकार ये आरक्षण उन सवर्णों को देगी जिनकी सालाना आय आठ लाख रुपए से कम है। मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के तहत अनुसूचित जाति (SC) को 15 फीसदी, अनुसूचित जनजाति (ST) को 7.5 फीसदी और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 फीसदी आरक्षण दिया जाता है।


किसानों को बड़ी राहत

भारत में किसानों की दिक्कतों का मुद्दा लंबे समय से चलता आ रहा है। किसानों की मदद करने का वादा हर पार्टी करती है। मोदी सरकार ने भी इस दिशा में कदम उठाए हैं। किसानों को राहत पैकेज के लिए पीएम मोदी तीन विकल्पों पर विचार कर रही है ताकि फसल की कम कीमतों के कारण नुकसान झेल रहे किसानों की मदद की जा सके। किसानों को प्रत्यक्ष भुगतान, न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत पर फसल बेचने वाले किसानों को मुआवजा और ऋण माफी पर मोदी सरकार कई अहम कदम उठा सकती है।


व्यापारियों को सौगात

10 जनवरी को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसीटी) काउंसिल की हुई बैठक में छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत दी गई। सरकार द्वारा 40 लाख रुपए तक की सालाना बिक्री करने वाले व्यापारों को जीएसटी से छूट दी जाएगी। ये बदलाव एक अप्रैल से प्रभावी होगा। इससे पहले 40 लाख रुपए तक की सालाना बिक्री करने वालों को ही छूट मिलती थी।


ई-कॉमर्स सेक्टर में बड़ा बदलाव

ई-कॉमर्स सेक्टर की बात करें तो खुदरा और अन्य छोटे कारोबारियों की शिकायतों के बाद मोदी सरकार ने 26 दिसंबर को इनके लिए भी एक बड़ी घोषणा की थी। इसके तहत ई-कॉमर्स कंपनियों को उन फर्म्स के उत्पादों को बेचने से प्रतिबंधित कर दिया है जिसमें संबंधित कंपनी की हिस्सेदारी है। इससे अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियां प्रभावित होंगी। ये नियम एक फरवरी से लागू होगा।


टैक्स के मोर्चे पर बड़ा फैसला

सिर्फ किसानों, सवर्णों और ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए ही नहीं बल्कि टैक्स के मोर्चे पर भी मोदी सरकार ने अहम घोषणा की है, जिसके बाद 20 से ज्यादा वस्तुएं सस्ती हो गई हैं। आम लोगों को राहत देते हुए 22 दिसंबर को रोजमर्रा के कई उत्पादों पर लगने वाले सेल्स टैक्स में कटौती की गई थी। सरकार के इस फैसले से मध्यवर्ग और कारोबारियों को बड़ी राहत मिली है।


प्याज किसानों को दोगुना इंसेटिव

28 दिसंबर को मोदी सरकार ने एक और बड़ी घोषणा की थी। सरकार ने प्याज का निर्यात करने वाले किसानों को मिलने वाले इंसेटिव को दोगुना कर दिया है। हालांकि इससे सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ा है। इससे पहले किसानों को 5 फीसद तक का इंसेटिव दिया जाता था जिसे बढ़ाकर 10 फीसद कर दिया गया है।

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लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार कर सकती है इस योजना का एेलान, हर माह घर बैठे आएगी इतनी रकम


नर्इ दिल्ली। अगर केंद्र सरकार यूनिवर्सल बेसिक इनकम की योजना लाती है तो बहुत जल्द आपके खाते में सरकार पैसे देगी। अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि सरकार गरीबी रेखा के नीचे के लोगों को सब्सिडी की बजाय अब प्रति माह 2,500 रुपए की रकम देने पर विचार कर रही है। केंद्र सरकार के पहले इस योजना को सिक्किम राज्य में भी शुरू करने की बात की जा रही है। सिक्किम में सत्तारूढ़ पार्टी यानी डेमोक्रेटिक फ्रंट ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस योजना को लेकर जनता से वादा भी किया है।


यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम काे लेकर भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर के कर्इ देशाें में भी में चर्चा हो चुकी है। बीते कुछ सालों में भारत में भी इसे लागू करने के लिए कर्इ बार बहस हो चुकी है। सरकाराें को इस योजना को लागू करने के पीछे दलील है कि इससे गरीबी को कम किया जा सकता है। उनका कहना है कि भारत के हर नागरिक को हर माह एक तय रकम मिलनी चाहिए। चाहें वो देश की आया में किसी तरह से योगदान दे रहा हो या नहीं।


क्या है यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम

इस स्कीम के तहत सरकार देश के हर नागरिक को प्रतिमाह एक तय रकम देगी, भले ही वह किसी प्रकार से देश के आर्थिक-सामाजिक, भौगोलिक सांचे में आता हो। इसके लिए उन्हें अपने आर्थिक हालात को साबित करने की जरूरत नहीं होगी। सरकार इस रकम को महंगार्इ दर के आधार पर तय करेगी। साथ ही अगर कोर्इ व्यक्ति इस योजना का फायदा उठाकर आमदनी का कोर्इ दूसर जरिया बनाता है तो सरकार उसपर टैक्स लगाकर इसके फायदे को नियंत्रण भी करेगी।


कैसे दिया जा सकता है फायदा

यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम के तहत बेसिक इनकम को 5 भागों कमें बांटा जा सकता है। इसमें पहला भाग 'मियादी' होगा जिसे एक निश्चित अंतराल पर दिया जाएगा। दूसरा भाग होगा 'कैश पेमेंट', जिसे वाउचर या एेसे किसी भी जरिए की जगह कैश पेमेंट दिया जाएगा। तीसरा भाग प्रति व्यक्ति के आधार पर होगा, जिसे हर परिवार को दिए की जगह हर व्यक्ति को दिया जाएगा। चौथा हो यूनिवर्सल यानी सभी के लिए आैर पांचवा होगा बिना किसी शर्त के आधार पर। इसपर कर्इ जानकारों का कहना है कि लोगों को जब प्रति माह एक तय रकम दी जाएगी तो वो काम करने से बचेंगे आैर देश का प्रोडक्शन भी प्रभावित होगा।


आर्थिक सर्वेक्षण में हो चुका है इस योजना के बारे में जिक्र

साल 2016-17 के आर्थिक सर्वेक्षण में भी इस योजना के बारे में बात की गर्इ थी। उस दौरान तत्कालीन आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा था कि यह स्कीम बाकी सभी योजनाआें को रिप्लेस कर सकता है। उनका कहना था कि गरीबों के लिए कर्इ योजनाएं चलती हैं लेकिन उनतक सभी योजनाआें को पूरा लाभ नहीं मिल पाता।


मध्य प्रदेश में प्रयोग के तौर पर किया गया था लागू

इस योजना को मध्य प्रदेश में भी कुछ समय के लिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया गया था। मध्य प्रदेश में सेल्फ एम्प्लाॅएड वुमन्स एसोसिएशन आैर यूनिसेफ ने जून 2011 से नवंबर 2012 तक लोगों को किसी शर्त के बिना ही पैसे दिए थे। इस योजना के बाद आर्थिक सर्वेक्षण में दावा किया गया था कि लोगों के पास पैसे आने से वो पहले से भी अधिक प्रोडक्टिव हुए हैं। एेसे में आगामी लोकसभी चुनाव से पहले सरकार इस स्कीम को लागू करने को लेकर गंभीर है। संभंव है कि देश कुछ जिलों में सरकार इस योजना को पाइलट प्रोजेक्ट के तौर पर घोषणा कर सकती हैै।
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शटडाउन से अमरीकी अर्थव्यवस्था से लेकर निवेशकों तक पर खतरे का साया, जेरोम पावेल ने कहा - आगे भी दिखेगा दुष्प्रभाव


नर्इ दिल्ली। अमरीकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पावेल ने गुरुवार को कहा कि अगर 'शटडाउन' लंबी अवधि के लिए जारी रहता है तो निश्चित ही इसका दुष्प्रभाव अर्थव्यवस्था पर दिखार्इ देगा। द इकोनाॅमिक क्लब आॅफ वाॅशिंगटन डीसी को दिए गए एक इंटरव्यू में पावेल ने कहा कि शटडाउन की वजह से कुछ डेटा सही समय पर अपडेट नहीं हो पा रहे हैं, इससे अमरीकी अर्थव्यवस्था का आउटलुक कुछ साफ नहीं हो पा रहा व नीतियां बनाने में भी जटिलताएं आ रही हैं।


नहीं अपडेट हो पर रहे महत्वपूर्ण आंकड़े

पावेल ने कहा, "अगर यह लंबे समय तक चलता रहा तो हमारे लिए अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर साफ नहीं हो पाएगी।" अमरीकी डिपाॅर्टमेंट आॅफ काॅमर्स के अंतर्गत आने वाले द ब्यूरो आॅफ इकोनाॅमिक एनलिसिस (बीर्इए) ने शटडाउन की वजह से डेटा अपडेट करना बंद कर दिया है। बीर्इए अमरीका के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) समेत कर्इ जरूरी मापदंडो की गणना करता है। इसमें एक खास डेटा संकलन 'पर्सनल कंज्म्पशन एक्सपेंडीचर प्राइस इंडेक्स' (व्यक्तिग उपभोग खर्च मूल्य सूचकांक) भी है जो कि अमरीकी महंगार्इ दर मापने के लिए काफी महत्वपूर्ण मांना जाता है।


अमरीकी निवेशकों के लिए भी परेशानी

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार डेटा, मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन आैर हाउसिंग समेत कर्इ तरह के डेटा की निगरानी करने वाली यूनाइटेड स्टेट्स सेंसस ब्यूरो ने फेड फंडिंग न होने से डेटा अपडेट करना बंद कर दिया है। सरकार ही नहीं बल्कि निवेशकों के लिए जरूरी डेटा की अनुपस्थिति में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वो अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन के आधार पर ही निवेश करने का फैसला लेते हैं।


अार्थिक आंकड़ों पर दिख रहा है असर

फेड चेयरमैन ने इस बात की भी चेतावनी दी है कि यदि शटडाउन की अवधि आगे आैर भी बढ़ती है तो आर्थिक आंकड़ों पर भी इसका दुष्प्रभाव साफ नजर अाएगा। बता दें कि मेक्सिको बाॅर्डर को लेकर दोनों अमरीकी राष्ट्रीय दलों में मतभेद हैं। इस मामले को अभी तक 20 दिन पूरे हो चुके हैं आैर भविष्य में इसके समाधान निकलने के कोर्इ आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

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