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विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप विकसित हो उच्च शिक्षा संस्थान : पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी


पूर्व राष्ट्रपति डॉ. प्रणव मुखर्जी ने रविवार को कहा कि देश के उच्च शिक्षा एवं तकनीकी संस्थानों को विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप विकसित करना होगा। डॉ. मुखर्जी ने श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में पटना विश्वविद्यालय के वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप देश के उच्च शिक्षा और तकनीकी संस्थानों को विकसित करना होगा। उच्च शिक्षा को रोजगार और कौशल-उन्नयन से जोड़कर ही देश के नवनिर्माण की वास्तविक परिकल्पना की जा सकती है।

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान से स्वयं को जोड़कर चलना होगा। यह संतोष की बात है कि बिहार और तेजी से प्रगति कर रहा है। बिहार की विकास दर आज राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा है। इस मौके पर बिहार के राज्यपाल एवं कुलाधिपति लालजी टंडन ने कहा कि राज्य में विश्वविद्यालयीय शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए कुछ ठोस और सार्थक कदम उन्होंने उठाए हैं। विश्वविद्यालयों में अकादमिक एवं परीक्षा कैलेंडर के अनुरूप समय पर नामांकन, परीक्षा का आयोजन, परीक्षाफल प्रकाशन तथा डिग्री-वितरण के लिए दीक्षांत समारोहों के आयोजन हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन सूचना प्रणाली (यूएमआईएस) इस वर्ष से लागू होने जा रहा है, जिससे छात्र एवं शिक्षक काफी लाभान्वित होंगे। कुलाधिपति ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों में रोजगारपरक वैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किए जा रहे हैं, जिनके द्वारा विद्यार्थियों को विश्वविद्यालयों से निकलते ही रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। भारतीय संस्कृति के अनुरूप 'दीक्षांत समारोह' के लिए नई परिधान-व्यवस्था कार्यान्वित कर दी गई है।

उन्होंने कहा, मुझे जानकर खुशी है कि पटना विश्वविद्यालय में पढऩे वाले स्टुडेंट्स में 50 प्रतिशत से अधिक छात्राएं हैं। पटना विश्वविद्यालय बिहार में महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक नया इतिहास रचने की ओर अग्रसर है। आज के दीक्षांत-समारोह में भी 80 प्रतिशत से अधिक 'गोल्ड मेडल' बेटियों को मिला है। यह पूरे राज्य के लिए गौरव की बात है। टंडन ने आगे कहा, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. मुखर्जी के बिहार आगमन से उच्च शिक्षा के विकास प्रयासों को गति मिलेगी। उनका मुझे काफी दिनों तक सौजन्य और साहचर्य मिला है। वे एक महान शिक्षाविद् हैं, उनके विद्वतापूर्ण उद्बोधन और उनके हाथों पटना विश्वविद्यालय के छात्रों को डिग्रियां प्राप्त होने से विश्वविद्यालय गौरवान्वित हुआ है। डॉ. मुखर्जी के दीक्षांत भाषण में दिए गए सुझावों के आलोक में राज्य में विश्वविद्यालयीय शिक्षा को विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप विकसित करने में पर्याप्त मदद मिलेगी। डॉ मुखर्जी वैसे कुछ महान व्यक्तियों में हैं, जिनपर देश गर्व कर सकता है।


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इस यूनिवर्सिटी में 2 साल की हुई फर्स्ट ईयर! 4 साल की डिग्री अब 6 साल में


जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय ने वर्ष 2017 में बीए बीएड और बीएससी बीएड का चार वर्षीय पाठ्यक्रम शुरू किया, लेकिन इस बैच के छात्र-छात्राएं अभी भी फर्स्ट ईयर में ही है। विश्वविद्यालय ने सितम्बर 2018 में वार्षिक परीक्षा तो करवा दी लेकिन परिणाम अब तक जारी नहीं किया। लिहाजा, 19 महीने बाद भी 2017 का बैच फर्स्ट ईयर में ही है। ताज्जुब की बात यह है कि 2018 का बैच भी आ गया। कागजों में दोनों ही फर्स्ट ईयर के बैच है। विवि में अध्ययन-अध्यापन की यही गति रही तो चार साल का स्नातक-बीएड पाठ्यक्रम छह साल में पूरा होगा।

बैचलर ऑफ एजुकेशन (बीएड) का चार वर्षीय पाठ्यक्रम दो वर्ष का करने के बाद राज्य सरकार ने वर्ष 2015 में डिग्री कोर्स व बीएड को मिलाकर चार साल का नया पाठ्यक्रम बीए बीएड/ बीएससी बीएड शुरू किया। शैक्षणिक सत्र 2017-18 से प्रदेश के कई जिलों के कॉलेज में बीए बीएड/बीएससी बीएड का चार वर्षीय पाठ्यक्रम शुरू हुआ। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के अधीन करीब छह कॉलेजों में यह कोर्स शुरू किया गया। यह पाठ्यक्रम शुरू करने के पीछे सरकार की मंशा थी कि शिक्षण क्षेत्र में कॅरियर बनाने वाले छात्र छात्राओं को स्नातक के बाद दो साल बीएड करने में नहीं लगे लेकिन जेएनवीयू के ढर्रे से यह पाठ्यक्रम छह साल में पूरा होता दिख रहा है।

जेएनवीयू में जुलाई 2017 में 4 वर्षीय पाठ्यक्रम का बैच शुरू हुआ था। फर्स्ट ईयर की वार्षिक परीक्षा 14 महीने बाद सितम्बर 2018 में हुई। इस परीक्षा का परिणाम जारी नहीं किया गया है। उधर 2018 बैच के भी जुलाई में प्रवेश हो गए। छात्रों ने बताया कि कागजों में वर्तमान में दोनों बैच फर्स्ट ईयर में है लेकिन दिखावे के लिए कई कॉलेज 2017 बैच के छात्र-छात्राओं को द्वितीय वर्ष की पढ़ाई करवा रहे हैं।


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12वीं पास के बाद ये विकल्प भी होंगे बेहतर साबित, यहां पढ़ें


career courses After 12th pass : कॅरियर और स्कोप को देखते हुए ज्यादातर बच्चे 12वीं कक्षा पास करने के बाद इंजीनियरिंग करने का प्लान बना करते हैं। इस फील्ड में भी इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग करने वालों की संख्या ज्यादा होती है। इसमें सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर दोनों की पढ़ाई होती है। इसमें दोनों ही क्षेत्र में जाने का मौका मिलता है। इस कैटेगरी में सरकारी और प्राइवेट सभी संस्थान नियुक्तियां निकालते हैं। जानें कहां और किस क्षेत्र में रोजगार पा सकते हैं।

इन क्षेत्रों में विकल्प
वैसे तो इंजीनियरिंग के बाद कई मल्टीनेशनल कंपनियों और कॉर्पोरेट में रोजगार के अवसर मिल जाते हैं। लेकिन कंट्रोल सिस्टम, टेलीकम्युनिकेशंस, डिफेंस, रेलवे, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज, ऑल इंडिया रेडियो, पोस्ट एंड टेलीग्राफ, नैनोटेक्नोलॉजी, डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स, कंजयूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट डिजाइन, वायरलेस कम्युनिकेशन आदि में भी काम करते हैं।

चयन प्रक्रिया
इसके लिए आयोजित होने वाली लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर निम्नलिखित प्रसिद्ध कंपनियों में भी अहम पदों पर काम कर सकते हैं।

यहां भी कर सकते हैं आवेदन
भारत संचार निगम लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड, इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन, भारत इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड आदि में मौके मिल सकते हैं। इसके साथ ही कई निजी मल्टी नेशनल कंपनियां हैं जिसमें मौके मिलते हैं।


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Top Career Courses : 12वीं के बाद बेहतर नौकरी के लिए इस प्रकार करें कोर्स का चयन, यहां पढ़ें


Govt Jobs After 12th Pass देश में ही नहीं दुनिया भर में युवा वर्ग बेरोजगारी से त्रस्त हैं। बेरोजगारी के इस जमाने में नौकरी पाना उतना ही मुश्किल है जितना एक खिलाड़ी के लिए ओलिंपिक पदक हासिल करना होता है। सरकारी नौकरी के लिए युवाओं की कतार इतनी बड़ी होती है की एक पद के लिए हजारों की संख्या में आवेदन पत्र भरे जाते हैं। प्रत्येक राज्य में सरकारी नौकरियों के साथ ही प्राइवेट कंपनियों में भी हाल यही है। युवा नौकरी की तलाश में जाता है तो उसके पास सबसे पहले उस पद हेतु वांछनीय योग्यता होनी जरुरी है। शैक्षणिक योग्यता के साथ ही अनुभव भी मांगा जाता है। अच्छे संस्थान से पढ़ाई होने के साथ ही उत्तीर्णांक भी हाई होने चाहिए।


सरकारी नौकरी के लिए चयन प्रक्रिया
सरकारी नौकरी में जाने हेतु प्रत्येक युवा बहुत मेहनत और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करता है। सरकारी नौकरी में जाने के लिए शैक्षणिक योग्यता पूरी होने के साथ - साथ प्रतियोगी परीक्षा और साक्षात्कार की तैयारी होनी जरुरी है। 10वीं पास सरकारी नौकरी शुरू होती है जो डॉक्ट्रेट तक की उपाधि लेने वालों के लिए भी उपयुक्त जॉब सम्बंधित विभाग में निकलती है। 10वीं पास चपरासी से लेकर पुलिस कांस्टेबल की नौकरी के लिए योग्य होता है।

Govt Jobs After 12th Class
सरकारी नौकरी में जाने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए जानना बेहद दिलचस्प होगा की 12वीं के बाद सरकारी नौकरी में कैसे जाएँ। 12वीं पास के लिए सभी विभागों लिपिक और उसे समकक्ष पदों पर में सरकारी नौकरी के लिए आवेदन मांगे जाते हैं। योग्यता के तौर पर सिर्फ शैक्षणिक योग्यता ही नहीं मांगी जारी कुछ पदों के अनुरूप तकनिकी योग्यता भी मांगी जाती है।

career courses After 12th Pass : बारहवीं पास के बाद किये जाने वाले कोर्स की संख्या बहुत ज्यादा है मगर कुछ कोर्सेज ऐसे हैं जिनसे नौकरी पाने में बहुत आसानी होती है। प्रतियोगी परीक्षा सबसे अहम कड़ी होती है नौकरी हासिल करने की, लेकिन कुछ नौकरियां ऐसी भी हैं जिनमें कॉम्पिटिशन बहुत कम होता है। कॉम्पीटीशन कम होने का वांछनीय योग्यता होती है। कुछ कोर्सेज ऐसे होते हैं जिनके संस्था देश में गिने चुने हैं।

स्टेनोग्राफर की नौकरी सबसे आसानी से प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए आईटीआई में भी विषय की पढाई होती है। सभी विभागों में महत्वपूर्ण पद होता हैं स्टेनोग्राफर का। इसके लिए 12वीं पास होना आवश्यक है। स्टेनो एक शीघ्रलिपि की भाषा है जिसे वक्ता के वक्तव्य के समय काम लिया जाता हैं। सभी विभागों में स्टेनोग्राफर के पदों पर भर्ती जारी होती है। इसके बाद दूसरे नंबर पर पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान, इस भर्ती के लिए कम से योग्यता BLIS होना जरुरी है। स्नातक डिग्री लेने के बाद ओपन यूनिवर्सिटी से भी ग्रेजुएशन की डिग्री ली जा सकती है। प्रतियोगी परीक्षाओं में बहुत कम कॉम्पीटीशन है इस भर्ती में।


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हायरिंग में लें पुराने एम्प्लॉइज की मदद तो आगे बढ़ेगी कंपनी


आपका छोटा बिजनेस है या फिर बड़ा या फिर किसी स्टार्ट अप की शुरुआत आपने की है, आपको नए लोगों की, नई-नई स्किल्स की जरूरत हमेशा होती है। ऐसे में नए व्यक्ति को हायर करते समय आप उससे अलग-अलग तरह के सवाल पूछते हैं। उसके अनुभव और पर्सेनेलिटी को जानने की कोशिश करते हैं। इस दौरान आप अपनी कंपनी के पुराने एम्प्लॉइज की मदद ले सकते हैं। वह नए कैंडिडेट को बेहतर तरीके से परख सकते हैं। जानें कैसे-

कल्चर के मुताबिक है या नहीं
हर करंट एम्प्लॉई कंपनी के कल्चर के बारे में पूरी तरह से वाकिफ होता है। उसे उस कल्चर की अच्छाइयां और बुराइयां, दोनों पता होती हैं। इंटरव्यू लेते समय वह टेबल के दोनों साइड्स के बेनिफिट्स जानता है। उसे हायरिंग में शामिल करने से वह यह फैसला लेने में सक्षम होता है कि इंटरव्यू देने आया शख्स कंपनी के कल्चर और पोजिशन में फिट होगा या नहीं। वह दूसरे टीम मेट्स के साथ सामंजस्य बैठा पाएगा या नहीं। इसके बाद वह कैंडिडेट को चुनने या न चुनने का फैसला एम्प्लॉयर पर छोड़ देता है।

टीम में फिट होगा या नहीं
पुराने एम्प्लॉई को जब हायरिंग प्रोसेस में शामिल किया जाता है तो वह नए कैंडिडेट में देखता है कि वह पुरानी टीम के साथ फिट होगा या नहीं। अगर नया कैंडिडेट पुरानी टीम से अलग है और बदलाव के तैयार भी नहीं है तो उसका आना पुराने एम्प्लॉइज में विवाद की वजह बन सकता है जो कंपनी की सफलता के लिए सही नहीं है।

नए कैंडिडेट में स्पार्क है या नहीं
कोई भी कैंडिडेट हायरिंग मैनेजर से बात ही नहीं करता, बल्कि उस समय वह अपना वह होमवर्क प्रजेंट कर रहा होता है, जो वह कंपनी के बारे में करके आया है। जब आप हायरिंग प्रक्रिया में अपने पुराने एम्प्लॉइज को शामिल करते हैं तब वह नए कैंडिडेट्स का स्पार्क भी आंकते हैं।


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12वीं विज्ञान से उत्तीर्ण होने के बाद इंजीनियरिंग नहीं करना चाहते तो करें ये कोर्स


Top career courses 2019 अब इंजीनियरिंग की ओर छात्रों का क्रेज कम हो रहा है। इसी वजह से साइंस से 12वीं करने वाले छात्र भी इंजीनियरिंग की डिग्री नहीं लेना चाह रहे हैं। ऐसे में यदि आपने 12वीं कक्षा साइंस विषय पास कर ली है औ इंजीनियरिंग के अलावा कुछ और कोर्स करना चाहते हैं तो आपके पास कई सारे ऑप्शन हैं। इन कोर्सेज को करके आप इंजीनियरिंग के अलावा अलग-अलग तरह के काम कर सकते हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं उन्हीं कोर्सेज के बारे में जिन्हें करने के बाद अच्छा कॅरियर बना सकते हैं—


नैनो-टेक्नोलॉजी का कोर्स
ग्लोबल इनफॉर्मेशन इंक की रिसर्च के मुताबिक 2018 तक नैनो टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के 3.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। नैस्कॉम का कहना है कि 2015 तक इसका कारोबार 180 अरब डॉलर था जो अब बढ़कर 890 अरब डॉलर होने जा रहा है। इस वजह से इस फील्ड में 10 लाख प्रोफेशनल्स की जरूरत हो रही है। इस वजह से 12वीं के बाद आप नैनो टेक्‍नोलॉजी में बीएससी या बीटेक और उसके बाद इसी सब्‍जेक्‍ट में एमएससी या एमटेक करके इस फील्ड में अपना शानदार कॅरियर बना सकते हैं।


आयुर्वेद से बीएएमएस
12वीं कक्षा में सांइस विषय के साथ फिजिक्स और केमिस्ट्री के साथ बायॉलजी की पढ़ाई करने पर आप BAMS यानी बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन ऐंड सर्जरी कर सकते हैं। यह कोर्स साढ़े पांच साल का होता है जिसमें एक साल का इंटर्नशिप होता है। उसके बाद अच्छी जॉब पाकर कॅरियर बना सकते हैं।


माइक्रोबायोलॉजी का कोर्स
माइक्रोऑर्गैनिजम की स्टडी और उसके एप्लीकेशन से संबंधित इस कोर्स में नंबर और टेस्ट दो प्रोसेस के आधार पर एडमिशन ले सकते हैं। सरकारी नौकरी के अलावा फार्मा, रिसर्च, फूड प्रॉडक्ट्स, ऐग्रिकल्चर सेक्टर्स में जॉब्स हैं। फॉर्मा और फूड ऐंड बेवरेज इंडस्ट्री में माइक्रोबायॉलजिस्ट की काफी मांग हैं।


स्पेस साइंस में कोर्स
यह बहुत बड़ा फील्ड है जिसमें कॉस्मोलॉजी, स्टेलर साइंस, प्लैनेटरी साइंस, एस्ट्रोनॉमी जैसे कई फील्ड्स शामिल हैं। बेंगलुरु स्थित IISC में इसके लिए 3 साल की बीएससी और 4 साल के बीटेक से लेकर पीएचडी तक के कोर्सेज कराए जाते हैं।


एस्ट्रो-फिजिक्स का कोर्स
आपकी रुची सितारों और गैलेक्‍सी में हैं तो 12वीं के बाद एस्ट्रो-फिजिक्स में रोमांचक कॅरियर बना सकते हैं। इसके लिए आपको 5 साल के रिसर्च ओरिएंटेड प्रोग्राम (एमएस इन फिजिकल साइंस) और 4 या 3 साल के बैचलर्स प्रोग्राम (बीएससी इन फिजिक्स) में एडमिशन ले सकते हैं। एस्ट्रोफिजिक्स में डॉक्टरेट करने के बाद स्टूडेंट्स इसरो जैसे रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन में साइंटिस्ट बन सकते हैं।


एनवायर्नमेंटल साइंस में कोर्स
इस कोर्स में पर्यावरण पर इंसानी गतिविधियों से होने वाले असर का अध्ययन किया जाता है। इसमें इकोलॉजी, डिजास्टर मैनेजमेंट, वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट, पॉल्यूशन कंट्रोल जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं।

डेयरी साइंस में कोर्स
भारत डेयरी प्रोडक्शन के क्षेत्र में अहम देश है। डेयरी टेक्नोलॉजी या डेयरी साइंस के तहत मिल्क प्रोडक्शन, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, स्टोरेज और डिस्ट्रिब्यूशन की जानकारी दी जाती है। अभी कुछ इंस्टीट्यूट डेयरी टेक्नोलॉजी में दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स भी ऑफर करते हैं।


रोबोटिक साइंस कोर्स
रोबोटिक साइंस का फील्ड काफी तेजी से बढ़ रहा है। इस फील्ड में ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, एडवांस्‍ड रोबोटिक्स सिस्टम. कम्प्यूटर साइंस से स्नातक कर चुके स्टूडेंट्स आ सकते हैं।


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12वीं के बाद सस्ते और आसान कोर्स के जरिए सँवारे अपना करियर


Best career course after 12th - अक्सर 12वीं पास करने के बाद युवाओं में एक बेहतर और अच्छी सैलरी वाला करियर चुनने की मुशि्कल होती है। कुछ बच्चों के 12वीं में कम मार्कस आते हैं जिससे वो कोई अच्छा कोर्स नहीं कर पाते, कुछ बच्चों के सामने महंगे कोर्सों की फीस न दे पाने की समस्या होती है। वो महंगे कोर्सों की फीस नहीं दे सकते। लेकिन आप टेंशन न लें हम आपको कुछ एेसे Best career course after 12th के बारे में बता रहे हैं, जिनकी फीस कम है और इन्हें करने के बाद आपको नौकरी भी जल्दी मिल जाती है और सैलरी भी मोटी मिलती है। इन कोर्सों को करने के बाद आप अपना स्टार्टअप भी शुरू कर सकते हैं।

जिम इंस्‍ट्रक्‍टर का कोर्स -

आप जिम इंस्‍ट्रक्‍टर का कोर्स कर सकते हैं । क्यों कि फिटनेस को लेकर लोग अब ज्यादा जागरूक होने लगे हैं। नए जिम खुल रहे हैं। जिम में इंस्‍ट्रक्‍टर एक बेहतर करियर ऑप्‍शन है। 6 से 8 महीने के कोर्स में आप किसी भी बड़े जिम में ट्रेनर इंस्‍ट्रक्‍टर बन सकते हैं या अपना जिम खोल सकते हैं।

योगा के कोर्स -

स्वस्थ रहने के लोग अब योग करने को ओर ज्यादा ध्यान देने लगे हैं। योग के प्रति लोगों में जागरुकता बढ़ी है। आप योग को करियर के तौर पर चुन सकते हैं। आपको इसके लिए कोर्स के साथ प्रैक्‍टिस की भी बहुत जरूरत होगी। 12वीं के बाद छोटा सा कोर्स करके इसमें आप योग टीचर बनकर अच्छी सैलरी की जॉब कर सकते हैं।

इंटीरियर डिजाइनिंग का कोर्स -

आपको अगर रचनात्मक कार्य करना अच्छा लगता है तो आप इंटीरियर डिजाइनिंग का कोर्स कर सकते हैं। आपक मन डिजाइनिंग, पेंटिंग में मन लगता है तो आप इंटीरियर डिजाइनिंग में डिप्‍लोमा कर सकते हैं। डिप्‍लोमा शॉट टर्म कोर्स के रूप में आपको जल्‍द ही अच्छी कमाई का मौका दे देगा। इंटीरियर डिजाइनिंग में आप अपना काम भी शुरू कर सकते हैं।

कंप्यूटर प्रोग्रामिंग -

अगर आपकी रुचि कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, वेबसाइट, सॉफ्टवेयर या ऐप बनाने में है तो आप डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं। शॉर्ट टर्म कोर्स कम पैसे में होगा जॉब लगना भी आसान है।


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SAIL Recruitment 2019 : विभिन्न पदों के लिए 9 फरवरी तक करें आवेदन, ऐसे होगा चयन


Steel Authority of Indian Limited ने नोटिफिकेशन जारी कर इच्छुक और योग्य उम्मीदवारों से 153 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 19 जनवरी से आधिकारिक वेबसाइट पर शुरू हो गई है। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 9 फरवरी तक चलेगी।

SAIL Recruitment 2019 : रिक्ति विवरण
कुल रिक्तियों की संख्या : 153

-Operator cum Technician (Trainee)

-Attendant cum Technician

-Blaster, Jr. Staff Nurse (Trainee)

-Fire Engineer

-Pharmacist (Trainee)

-Jr. Medical Technologist Trainee

SAIL Recruitment 2019 : जरूरी तारीखें
-ऑनलाइन आवेदन करने की शुरुआत : 19 जनवरी, 2019

-ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि : 9 फरवरी, 2019

-ऑनलाइन फीस अदा करने की अंतिम तिथि : 9 फरवरी, 2019

-लिखित परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी करने की तिथि : वेबसाइट पर उपलब्ध करवा दिए जाएंगे

-लिखित परीक्षा की संभावित तारीख : एडमिट कार्ड पर दी जाएगी तिथि

SAIL Recruitment 2019 : ऐसे करें आवेदन
-SAIL की आधिकारिक वेबसाइट www.sail.co.in पर लॉग इन करें

-आवेदन करने से पहले उम्मीदवार यह सुनिश्चित करलें की वे इन पदों के लिए योग्य हैं या नहीं

SAIL Recruitment 2019 : चयन प्रक्रिया
Fire Engineer : योग्य उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा में शामिल होना होगा। इसकी सूचना एडमिट कार्ड में दे दी जाएगी। लिखित परीक्षा के आधार पर उम्मीदवारों को शॉर्ट लिस्ट किया जाएगा जिसके बाद उन्हें SAIL website के जरिए साक्षात्कार के लिए सूचित कर दिया जाएगा। लिखित परीक्षा में मिले अंक और इंटरव्यू के अंकों का प्रतिशत 80:20 होगा।

अन्य पदों के लिए चयन प्रक्रिया
योग्य उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा में शामिल होना होगा। इसकी सूचना एडमिट कार्ड में दे दी जाएगी। जो उम्मीदवार लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण होंगे, उन्हें SAIL website के कॅरियर पेज के जरिए साक्षात्कार के लिए सूचित कर दिया जाएगा। लिखित परीक्षा के लिए अंकों का वेटेज 100 प्रतिशत होगा। Trade test/skill test केवल क्वालिफाइंग नेचर का होगा।


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JEE Main में इन चार स्टूडेंट्स को मिले 99.99 परसेंटाइल, जानिए इनके स्टडी सीक्रेट्स


शनिवार को अचानक आए JEE Main 2019 Exam के नतीजे ने स्टूडेंट्स को चौंका दिया। महज सात दिनों के अंदर ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने JEE Main का रिजल्ट जारी कर दिया। जबकि 31 जनवरी को परिणाम आना प्रस्तावित था। जानकारी के अनुसार, जयपुर के स्टूडेंट्स ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 99 प्लस परसेंटाइल और 300 प्लस स्कोर हासिल किए हैं। शहर के आदित्य शर्मा ने 99.998, गौरव कृष्ण गुप्ता ने 99.997, निर्मल अग्रवाल ने 99.994, माधव मित्तल ने 99.991 स्कोर हासिल किया है। इनके साथ ही 25 से ज्यादा स्टूडेंट्स ने 99 प्लस परसेंटाइल हासिल की है।

मार्क्स घोषित नहीं किए
हालांकि एनटीए ने स्टूडेंट्स के मार्क्स घोषित नहीं किए हैं, लेकिन ओएमआर शीट जारी करने के बाद से ही स्टूडेंट्स अपने मार्क्स सही किए हैं, लेकिन उनकी परसेंटाइल स्कोर कम है। एक्सपट्र्स के अनुसार, एनटीए ने नॉर्मलाइजेशन को स्पष्ट नहीं किया है। साथ ही स्टूडेंट्स को कई सवालों में गफलत हुई थी, लेकिन उसके बारे में क्लैरिटी नहीं दिखी।

मैंने 12 जनवरी को एग्जाम दिया था। पेपर ओवरऑल मॉडरेट था। एक सवाल का चैलेंज भी भेजा था। आदित्य का कहना है कि 15 दिनों में एक्यूरेसी की प्रेक्ट्सि की। साथ ही 2009 के बाद के पेपर्स से मदद मिली। पिता डॉ. लोकेन्द्र एसएमएस में प्रोफेसर और मां बीना कालाडेरा कॉलेज में प्रोफेसर हैं।
- आदित्य

11 जनवरी को मॉर्निंग शिफ्ट में एग्जाम दिया। JEE Main में NCERT से अच्छा स्कोर कर सकते हैं। साथ ही बेसिक कॉन्सेप्ट पता होने चाहिए। मुझे एनटीए के ऑनलाइन प्रेक्टिस पेपर्स का फायदा मिला। मैं दो सवाल चैलेंज करना चाहता था, जिसका कोई भी आंसर सही नहीं था, लेकिन एनटीए ने इसे क्लेम करने का ऑप्शन ही नहीं दिया। पिता गोविंद बिजनेसमैन और मां उर्मिला हाउसवाइफ हैं।
- निर्मल अग्रवाल

10 जनवरी को पहली शिफ्ट में एग्जाम था। मैंने दो सवालों को चैलेंज किया था। NCERT के एक्सट्रा टॉपिक्स की भी प्रिपरेशन की थी, जिसका मुझे फायदा मिला। पिता बी. के. गुप्ता सचिवालय में ओएसडी और अंजू मित्तल गवर्नमेंट लेक्चरार हैं।
- गौरव कृष्ण गुप्ता

मैंने 12 जनवरी को मॉर्निंग शिफ्ट का एग्जाम दिया था। पेपर का लेवल आसान था। फ्रैंड्स से एग्जाम का पैटर्न पता चला तो टॉपिक्स का आइडिया लग गया। साथ ही पिछले साल के पेपर टाइमर लगाकर हल किए। पिता डॉ. मुकेश मित्तल एसएमएस और डॉ. स्वाति बंसल जनाना हॉस्पिटल में कार्यरत हैं।
- माधव मित्तल


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JEE Main (II) : फरवरी में इस तारीख से शुरू होगी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया


JEE Main 2019 का पहला एडिशन पूरा हो चुका है और JEE Main 2019 का दूसरा एडिशन अप्रेल में शुरू होगा। एग्जाम के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 8 फरवरी से शुरू होगी। यह पहला मौका है जब स्टुडेंट्स को दो बार परीक्षा में बैठने की इजाजत दी गई है और बेहतर स्कोर करने वाले स्टुडेंट्स को इंजीनियरिंग में एडमिशन दिया जाएगा।

JEE main (II) रजिस्ट्रेशन विंडो 7 मार्च तक खुली रहेगी। उम्मीदवार 8 मार्च तक इमेजेस अपलोड कर आवेदन शुल्क जमा कर सकते हैं। JEE Main 2019 exam करवाने की जिम्मेदारी NTA के पास रहेगी। उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं या फिर पहले JEE main score के आधार पर एडमिशन ले सकते हैं, जिसका परिणाम घोषित किया जा चुका है।

उम्मीदवारों की रैंक पर NTA
NTA ने जारी अपने बयान में कहा कि जनवरी 2019 और अप्रेल 2019 में परीक्षा में मिले NTA Scores के आधार पर उम्मीदवारों की रैंकिंग जारी की जाएगी। अप्रेल में होने वाली कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) 6 से 20 तारीख तक चलेगी।

JEE Main result 2019 : इतने बच्चों का हुआ था रजिस्ट्रेशन
Paper 1 के लिए कुल 9 लाख 29 हजार 198 उम्मीदवारों का रजिस्ट्रेशन हुआ था।


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लिपिक ग्रेड द्वितीय भर्ती परीक्षा : आरक्षित सूची के 917 अभ्यर्थियों को जल्द मिलेगी नियुक्ति


मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पहल पर लिपिक ग्रेड द्वितीय भर्ती परीक्षा 2013 की आरक्षित सूची के वंचित 917 अभ्यर्थियों को अब जल्द ही नियुक्ति मिलेगी। गहलोत ने गुरुवार को आरक्षित सूची के इन अभ्यर्थियों को विभाग आवंटन करके शीघ्र नियुक्ति दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी। इस निर्णय से लम्बे समय से नियुक्ति की मांग कर रहे इन अभ्यर्थियों को राहत मिली है।

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अब इन अभ्यर्थियों को सम्बन्धित विभागों द्वारा नियुक्ति-पत्र जारी किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि लिपिक ग्रेड द्वितीय भर्ती परीक्षा 2013 में आरक्षित सूची में चयनित इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया पिछले कई महीनों से लंबित थी। यह प्रकरण गहलोत की जानकारी में आने पर उन्होंने इन बेरोजगार युवाओं को तत्काल राहत प्रदान किए जाने के लिए सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिए।

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इन विभागों में निकली हैं सरकारी नौकरियां, इसी सप्ताह करें अप्लाई


इस सप्ताह SBI, RBI तथा ONGC सहित कई अन्य सरकारी कंपनियों में भी नौकरियों के लिए नोटिफिकेशन निकाले गए हैं। आप भी इन नौकरियों के लिए अप्लाई कर सकते हैं। जानिए ऐसी ही कुछ भर्तियों की डिटेल्स के बारे में...

एसबीआई
पद- स्पेशलिस्ट ऑफिसर
पद संख्या- कुल 31 पद
अंतिम तिथि- 31 जनवरी, 2019
https://sbi.co.in

आरबीआई
पद- जूनियर इंजीनियर
पद संख्या- कुल 24 पद
अंतिम तिथि- 27 जनवरी, 2019
www.rbi.org.in

एनवीएस
पद- प्रिंसिपल, असिस्टेंट आदि
पद संख्या- कुल 251 पद
अंतिम तिथि- 14 फरवरी, 2019
https://navodaya.gov.in

बीईसीआईएल
पद-यंग प्रोफेशनल, आईटी कंसल्टेंट
पद संख्या- कुल 14 पद
अंतिम तिथि- 31 जनवरी, 2019
www.becil.com

एफएसीटी
पद- टेक्नीशियन (डिप्लोमा) आदि
पद संख्या- कुल 155 पद
अंतिम तिथि- 23 जनवरी, 2019
http://fact.co.in

राष्ट्रीय महिला आयोग
पद- जूनियर टेक्नीकल एक्सपर्ट
पद संख्या- कुल 10 पद
अंतिम तिथि- 23 जनवरी, 2019
ncw.nic.in

ओएनजीसी
पद- असिस्टेंट टेक्नीशियन आदि
पद संख्या- कुल 309 पद
अंतिम तिथि- 27 जनवरी, 2019
www.ongcindia.com

भेल, भोपाल
पद- ट्रेड अप्रेंटिस
पद संख्या- कुल 573 पद
अंतिम तिथि- 31 जनवरी, 2019
www.bhelbpl.co.in

एनपीसीआईएल
पद- साइंटिफिक असिस्टेंट आदि
पद संख्या- कुल 324 पद
अंतिम तिथि- 31 जनवरी, 2019
https://npcilcareers.co.in

जीकेसीआईईटी
पद- प्रोफेसर, ट्रेनर, असोसिएट आदि
पद संख्या- कुल 19 पद
अंतिम तिथि- 8 फरवरी, 2019
www.gkciet.ac.in

एम्स, जोधपुर
पद- एलडीसी, यूडीसी, डीईओ
पद संख्या- कुल 37 पद
अंतिम तिथि- 27 जनवरी, 2019
www.aiimsjodhpur.edu.in

आईआईटीएम
पद- साइंटिस्ट-बी
पद संख्या- कुल 9 पद
अंतिम तिथि- 11 फरवरी, 2019
www.tropmet.res.in

इंडियन नेवी
पद- कमीशन ऑफिसर
पद संख्या- कुल १०२ पद
अंतिम तिथि- 1 फरवरी, 2019
www.joinindiannavy.gov.in

जीआरएसई
पद- अप्रेंटिस
पद संख्या- कुल 200 पद
अंतिम तिथि- 22 जनवरी, 2019
grse.in

बीएमआरसी
पद- जूनियर इंजीनियर आदि
पद संख्या- कुल 174 पद
अंतिम तिथि- 2 फरवरी, 2019
english.bmrc.co.in


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अधिकारी, नेताओं के बच्चे पढ़ेेंगे सरकारी स्कूलों में !


केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने गुरुवार को अधिकारियों और नेताओं से अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूल और अस्पतालों की सेहत में तभी सुधार होगा जब अधिकारियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे और वे अपने परिजनों का इलाज सरकारी अस्पतालों में करवाएंगे। डॉ. सिंह जनकपुरी स्थित सूरजमल स्मारक शिक्षा संस्था की ओर से 'ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा-वर्तमान स्थिति, चुनौतियां एवं समाधान' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय विचार गोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने देश के सभी सरकारी अफसरों और नेताओं से आह्वान करते हुए कहा कि वे सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की हालत सुधारने में अपनी भूमिका का निर्वहन करें।

उन्होंने कहा, यह तभी संभव हो पाएगा जब अधिकारी, नेता, प्रभावी और उंचे पदों पर बैठे लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढाएंगे और अपने परिजनों का इलाज सरकारी अस्पतालों में कराएंगे। गोष्ठी में डॉ. सत्यपाल सिंह के अलावा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर वेद प्रकाश, प्रवर्तन निदेशालय के पूर्व निदेशक कर्नल सिंह, विचार गोष्ठी समिति के अध्यक्ष कप्तान सिंह ने भी ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की स्थिति पर अपने विचार रखे।

वक्ताओं ने कहा कि चंढीगढ़ में स्थानीय अफसरों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढते हैं, जिससे वहां स्कूलों की बुनियादी सुविधाएं बेहतर हुई है। इसके अलावा इन स्कूलों के परीक्षा परिणाम भी बेहतर हुए है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर शिक्षक ड्यूटी से नदारद रहते हैं जो चिंतनीय है। इस अवसर पर संस्था की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों पर कराए सर्वेक्षण की रिपोर्ट की एक पुस्तिका का भी विमोचन भी किया किया।


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ऐसे बनें शानदार सेल्समैन, मिलेगा शानदार कमीशन भी, कमाएंगे लाखों


दुनिया भर में जितने भी सेल्सपीपुल हैं, वे अपने आपको कभी सेल्सपीपुल या सेल्सपर्सन के रूप में प्रोजेक्ट नहीं करते। इसके उलट वे कस्टमर के सामने यह शो करते हैं कि वे इस फील्ड के एक्सपर्ट हैं। इसलिए अगर आप भी सेलिंग बिजनेस में हैं तो फिर जो बेचते हैं, उसमें एक्सपर्ट हो जाएं। आइए जानते हैं कि किन तरीकों को अपनाकर आप बेहतर सेल्सपर्सन बन सकते हैं -

सेल्सपर्सन की तरह सोचना बंद करें
यदि आप अपने प्रोस्पेक्ट में एक्सपर्ट होना चाहते हैं तो फिर सबसे पहले आपको ‘सेल्सी’ बनने से बचना होगा। इसका मतलब है कि आपको सेल्सपर्सन की तरह सोचने से बचना होगा। जब आप सेल्सपर्सन की तरह से सोचते हैं तो फिर अपने प्रोडक्ट या सर्विस की कमियों के बारे में सोचना बिल्कुल बंद कर देते हैं। याद रखें कि आपको सिर्फ प्रोडक्ट बेचने पर ही ध्यान नहीं देना बल्कि अपने कस्टमर को सुनना भी है। इससे आपके प्रॉडक्ट की गुणवत्ता सुधरती जाएगी और कस्टमर उसे खुद-ब-खुद आपके प्रोडक्ट को हाथों-हाथ लेने लगेगा और उसकी डिमांड बढ़ती चली जाएगी। इस तरीके से आपकी कंपनी की सेल्स बढ़ती जाएगी।

डॉक्टर का माइंडसेट अपनाएं
सेल्सपर्सन के बजाय आप एक डॉक्टर की तरह से सोचना शुरू करें। आपने कभी किसी डॉक्टर को यह कहते नहीं सुना होगा कि मेरे पास इलाज का एकदम नया प्रॉसीजर है और मैं उसे आपको बताने से खुद को रोक नहीं पा रहा हूं। इसके बजाय डॉक्टर आपकी सारी बातें ध्यान से सुनकर आपके मर्ज को समझने की कोशिश करता है और उसके बाद ही दवाई लिखता है। आपको भी चाहिए कि सबसे पहले अपने कस्टमर्स की जरूरतों को जानें।

चुनौतियां बताएं और जानें
अगर आप किसी चीज को सफलता पूर्वक बेचना चाहते हैं तो उसके लिए जरूरी है कि कस्टमर आपसे खुलकर बात करें। ऐसा करने के लिए सबसे पहले उसके सामने उन चुनौतियों का जिक्र करें, जो आपने फेस की हैं। इसके बाद उससे पूछें कि क्या उसने भी अपने जीवन में ऐसी ही किसी चुनौती का सामना किया है। उसकी चुनौती जानकर आप उसे हल करने का रास्ता भी सुझा सकते हैं। इससे कस्टमर खुश होगा और वह आपसे जरूर कुछ खरीदेगा।

सेल की जरूरत न बताएं
बिजनेस के दौरान एक ऐसा भी वक्त आता है, जब आपको अपने बिल्स चुकाने के लिए सेल का सहारा लेना ही पड़ता है लेकिन किसी भी सेल के दौरान कस्टमर को यह नहीं लगना चाहिए कि सेल आपके फायदे के लिए लग रही है, बल्कि उसे यह लगना चाहिए कि सेल से आप उसे फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए सेल के दौरान आप पूरी तरह से रिलेक्स रहें और कॉन्फीडेंट दिखाई दें। आपके इस व्यवहार से भी कस्टमर आपकी ओर आकर्षित होंगे और आपके प्रोडक्ट की सेल बढ़ेगी जो आपको आपके लक्ष्य तक ले जाएगी।

15 पर्सेंट का रूल समझें
एक सेल्सपर्सन को हमेशा यह याद रखना चाहिए कि किसी भी बातचीत में 15 पर्सेंट से ज्यादा फायदा नहीं होता। जब भी अपने प्रोस्पेक्ट से बात करना शुरू करते हैं तो बातचीत पूरी तरह से आपके नियंत्रण में नहीं रहती। कस्टमर या प्रोस्पेक्ट सवाल उठाते हैं, आप उनके सवालों के दौरान अपनी बॉडी लैंग्वेज इस तरह की रखें कि कस्टमर को लगे कि आप उसकी बात ध्यान से सुन रहे हैं। इससे कस्टमर आपको एक्सपर्ट समझेगा और आपके प्रोडक्ट को जरूर खरीदना चाहेगा।


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खुशखबर ! इस प्रदेश में खुलेगा आयुर्वेद विश्वविद्यालय


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि सरकार उप्र के अंदर जितने भी एलोपैथ के मेडिकल कॉलेज हैं, उनके लिए एक अलग से चिकित्सा विश्वविद्यालय दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर लखनऊ में स्थापित करने जा रही है। यह कार्य अंतिम चरण में है। योगी ने कहा, हमने प्रदेश में अलग से एक आयुर्वेद विश्वविद्यालय बनाने के लिए भी योजना बनाई है, जिसके लिए इस बार बजट में प्रावधान करेंगे। मुख्यमंत्री शविनार को आयुष मंत्रालय की ओर से मोतीझील लॉन-3 में आयोजित आयुर्वेद पर्व और प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि औषधियों के माध्यम से सिद्धि प्राप्त की जा सकती है और औषधि ही आयुर्वेद का मार्ग है। यह आयुर्वेद महासम्मेलन इस मार्ग का आधुनिक संदर्भ में अन्वेषण करके समाज के समक्ष रखने में संकोच न करे। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के लिए हमारी सरकार ने एक बहुत बड़ा कार्यक्रम प्रारंभ किया है। उन्होंने कहा, मैं समझता हूं कि आयुर्वेद के लिए जो कार्य वर्तमान सरकार प्रदेश में कर रही है, वह प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से ही संभव हुआ है।

योगी ने कहा कि प्रदेश में 100 स्थानों पर वेलनेस सेंटर की कार्रवाई चल रही है। यदि प्रत्येक वेलनेस सेंटर में आयुर्वेद के चिकित्सक जिम्मेदारी लेकर कार्य करें तो बहुत अच्छे परिणाम आ सकते हैं। देश में आयुष मंत्रालय बनने के बाद तमाम नई संभावनाएं बनी हैं। देश में मेडिकल टूरिज्म की जो आधारशिला बनी वह आयुर्वेद की वजह से बनी थी। योग के साथ आयुर्वेद का साथ ही इसे आगे बढ़ा सकता है।

योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व देश के कई अन्य हिस्सों में आयुर्वेद को लेकर अपार संभावनाएं हैं। किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने में आयुर्वेद महत्वपूर्ण भूमिका अदाकर सकता है। हर्बल गार्डन से वे अपनी आय कई गुना बढ़ा सकते हैं। इसके लिए ठोस कार्ययोजना आज तक नहीं बनी। ऐसी कार्ययोजना बनाई जाए जिससे किसान की आय तो बढ़े ही आम आदमी का विश्वास आयुर्वेद पर मजबूत हो। कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद यशो नाइक ने आयुर्वेद विश्वविद्यालय के लिए 10 करोड़ रुपये देने की घोषणा की।

समरोह में केंद्रीय आयुष विभाग मंत्री श्रीपद यशो नाईक, औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना, एमएसएमई मंत्री सत्यदेव पचौरी, आयुष मंत्री धर्मपाल सैनी, सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी मौजूद रहे।


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इस तरह टूट रहे महात्मा गांधी, कस्तूरबा के सपने


महात्मा गांधी के जन्म के 150वें साल को लेकर केंद्र और राज्य सरकार सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा कई समारोह आयोजित कर उन्हें याद किया जा रहा है और उनके बताए गए रास्ते पर चलने के संकल्प लिए जा रहे हैं। गांधी और कस्तूरबा के सपने मगर यहां टूट रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी विभिन्न मंचों से बिहार सरकार के गांधी के बताए मार्गों पर चलने की बात कहते रहे हैं, लेकिन पश्चिम चंपारण जिले के 'भीतिहरवा गांधी आश्रम' के आस-पास के ग्रामीणों द्वारा गांधी और कस्तूरबा के सपने को साकार करने की कोशिश की जा रही है।

ये लोग एक स्कूल को मान्यता नहीं मिलने से परेशान हैं। अब इस स्कूल की छात्राओं ने मुख्यमंत्री को खुला पत्र लिखकर आंदोलन करने की घोषणा कर दी है। जाने-माने गांधीवादी एस एन सुब्बाराव कहते हैं कि 27 अप्रैल, 1917 को महात्मा गांधी मोतिहारी से नरकटियागंज आए थे और फिर पैदल ही शिकारपुर और मुरलीभहरवा होकर भीतिहरवा गांव पहुंचे थे। उस दौरान कस्तूरबा ने महिला शिक्षण के काम को गांधी जी के चंपारण से चले जाने के बाद छह महीने तक जारी रखा था। कस्तूरबा के प्रयत्नों को देखकर ग्रामीण इतने प्रभावित हुए कि उनकी स्मृति को बनाए रखने के लिए उनके द्वारा शुरू की गई परंपरा को आज तक मिटने नहीं दिया। आज भी उस परंपरा को समृद्ध करने में यहां के लोग जुटे हुए हैं।

स्थानीय लोग बताते हैं कि पश्चिम चंपारण जिला मुख्यालय बेतिया से करीब 25 किलोमीटर दूर भीतिहरवा स्थित गांधी आश्रम के आस-पास के दर्जनों गावों की लड़कियों की शिक्षा के लिए कोई स्कूल नहीं था। ग्रामीण किसानों की आर्थिक स्थिति इतनी बेहतर नहीं है कि वे अपनी बेटियों को पढऩे के लिए बेतिया या नरकटियागंज भेज सकें।

उनकी इस विवशता को महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी ने सौ साल पहले जानकर लड़कियों के लिए शिक्षण का काम शुरू कर दिया था। स्थानीय ग्रामीणों कस्तूरबा गांधी की स्मृति में एक स्कूल की स्थापना के लिए अपनी जमीन सरकार को दान दी। स्थानीय लोगों की जमीन पर कस्तूरबा की स्मृति में कन्या विद्यालय बना भी दिया गया।

कस्तूरबा कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय के सचिव दिनेश प्रसाद यादव बताते हैं कि ग्रामीणों के जमीन देने के बावजूद स्कूल के भवन आदि के लिए कहीं से जब कोई राशि नहीं मिली, तब ग्रामीणों ने अपने सहयोग से स्कूल भवनों का निर्माण शुरू करा दिया। वे बताते हैं कि दीपेंद्र बाजपेयी के नेतृत्व में स्थानीय पढ़े-लिखे युवक स्कूल में नि:शुल्क अध्यापन शुरू कर दिया। इसके बाद स्कूल संचालन के लिए एक समिति बनाई गई।

दिनेश बताते हैं, आज ग्रामीण अपने पूर्वजों के सपनों को पंख दे दिए हैं। आज स्कूल में न केवल लड़कियां पढ़ रही हैं, बल्कि उनकी संख्या में लगातार इजाफा भी हो रहा है। वे कहते हैं कि इन लड़कियों को शिक्षा तो दे दी जाती है, मगर उन्हें सुविधा नहीं दे पाते। इन छात्राओं के साथ सबसे बड़ी समस्या इनके परीक्षा फॉर्म भरने की है। स्कूल की मान्यता नहीं है, जिस कारण यहां की छात्राओं को परीक्षा फॉर्म भरने में परेशानी होती है।

गांधी की 'कर्मभूमि' भितिहरवा की बेटियां अपने तीन सूत्री मांगों को लेकर अब आंदोलन करने के मूड में है। कस्तूरबा कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय (+2) की छात्राओं ने मुख्यमंत्री को एक खुला पत्र लिखकर स्कूल की अविलंब मान्यता दिलवाने की मांग की है। छात्राओं ने पोशाक, छात्रवृत्ति, साइकिल सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है।

स्कूल में कार्यरत बाल संसद की प्रधानमंत्री कौशकी कुमारी ने बताया, हमारे विद्यालय में 400 लड़कियां नि:शुल्क पढ़ाई कर रही है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने के बावजूद सरकार के तरफ से आज तक विद्यालय को कोई सहयोग नहीं मिला है। इस कारण लड़कियां अभाव में बीच में ही पढ़ाई छोड़ रही है। बालिकाओं की उच्च शिक्षा के लिए पूरे प्रखंड में यही एक शिक्षण संस्थान है। सरकार की उदासीनता के कारण आज हम छात्राएं मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।

बाल संसद की एक छात्रा कहती हैं कि 20 नवंबर, 2017 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विद्यालय को मान्यता दिलाने का आश्वासन दिया था, लेकिन मुख्यमंत्री शायद अपना वादा भूल गए हैं। उन्हें याद दिलाने के लिए 30 जनवरी को गांधी आश्रम के मुख्यद्वार पर एक दिवसीय अनशन कर सांकेतिक विरोध किया जाएगा। छात्राओं ने कहा, अगर उनकी मांगों को सरकार ने नहीं माना तो 2 अक्टूबर से हम सभी छात्राएं अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगी। इस स्कूल में आने वाले सभी लोग स्कूल की प्रशंसा करते नहीं थकते। लोग कहते हैं कि स्थानीय लोगों ने अपने परिश्रम से गांधी के सपने को पूरा करने के लिए कोशिश तो की ही, मगर रूठी है सरकार ही।


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Competition Exams GK Questions: GK में पूछे जाते हैं ये सवाल, जान लें इनके उत्तर


रोजमर्रा के जीवन में हमारे साथ कई वैज्ञानिक घटनाएं घटती हैं, जिन्हें हम नजरअंदाज कर देते हैं या फिर हमें उनका पता ही नहीं चलता। अक्सर competition exam में कुछ ऐसी ही चीजों पर सवाल पूछे जाते हैं जिनके बारे में हमें पता नहीं होता। हम ऐसी ही कुछ रोजमर्रा की चीजों से जुड़ी General Knowledge तथा वैज्ञानिक तथ्यों के बारे में यहां जानेंगे।

प्रश्न - (1) बोआओ फोरम क्या है?
बोआओ फोरम एशिया (बीएफए) व्यापारिक सहयोग और विमर्श का फोरम है, जिसे दावोस के वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम के तर्ज पर गठित किया गया है। इसका मुख्यालय चीन के हैनान प्रांत के बोआओ में है। सन् 2001 से यहां एशिया की सरकारों और उद्योगों के प्रतिनिधियों का सम्मेलन हो रहा है। यह फोरम क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के इरादे से गठित किया गया है। इसे शुरू करने का विचार मूलत: फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल वी रैमोस, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री बॉब हॉक और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री मोरीहीरो होसोकावा का था। इसका उद्घाटन 27 फरवरी, 2001 को हुआ था। इसके लिए चीन ने खासतौर से पहल की। इसकी शुरूआत 26 देशों की भागीदारी के साथ हुई थी। इस वक्त इसके 29 सदस्य देश हैं, जिनमें भारत भी शामिल हैं। इससे जुड़े संगठन की पहली बैठक 12-13 अप्रेल 2002 को हुई। हाल में 8 से 11 अप्रेल 2018 को फोरम का सालाना सम्मेलन हुआ। बोआओ फोरम में आर्थिक एकीकरण के अलावा सामाजिक और पर्यावरणीय-प्रश्नों पर भी विचार किया जाता है। यह फोरम एक तरह से चीन और वैश्विक-व्यापार के बीच की कड़ी बना।

प्रश्न - (2) जनहित याचिका क्या है?
जनहित याचिका भारतीय न्याय-व्यवस्था की अवधारणा है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक हित के लिए न्यायिक-सहायता लेना है। इसे संसदीय नियमों से नहीं बनाया गया है, बल्कि भारतीय अदालतों ने जनता को ताकतवर बनाने के उद्देश्य से तैयार किया है। जस्टिस पीएन भगवती और जस्टिस वीआर कृष्ण अय्यर शुरुआती जज थे, जिन्होंने जनहित याचिकाओं को विचारार्थ स्वीकार किया। धीरे-धीरे इसकी व्यवस्था बनती गई। जनहित याचिकाओं के दुरुपयोग के मामले भी सामने आए हैं। सत्तर और अस्सी के दशक भारत में न्यायिक सक्रियता का दौर था। इस दौर में हमारी अदालतों ने सार्वजनिक हित में कई बड़े फैसले किए।

दिसम्बर 1979 में कपिला हिंगोरानी ने बिहार की जेलों में कैद विचाराधीन कैदियों की दशा को लेकर एक याचिका दायर की। इस याचिका के कारण जस्टिस वीआर कृष्ण अय्यर की अदालत ने बिहार की जेलों से 40,000 ऐसे कैदियों को रिहा करने का आदेश दिया, जिनके मामले विचाराधीन थे। सन् 1981 में एसपी गुप्ता बनाम भारतीय संघ के केस में सात जजों की बेंच में जस्टिस भगवती भी एक जज थे। उन्होंने अपने फैसले में दूसरी बातों के अलावा यह भी लिखा कि अदालत सार्वजनिक हित में मामले को उठाने के लिए अदालत औपचारिक याचिका का इंतजार नहीं करेगी, बल्कि कोई व्यक्ति एक चिट्ठी भी लिख देगा तो उसे सार्वजनिक हित में याचिका मान लेगी। इसमें न्यायिक शुल्क जमा किए बगैर सुनवाई हो सकती है।

प्रश्न - (3) कीप से किसी बोतल में लिक्विड डालते समय वह कीप में इकट्ठा हो जाता है और नीचे न बह पाने के कारण कीप को उठाना पड़ता है, क्यों?
जैसे-जैसे तरल बोतल में घुसता है, वह बोतल में कैद हवा को दबाता है। थोड़ी देर बाद बोतल में हवा का दाब इतना ज्यादा हो जाता है कि वह ऊपर के कीप में भरे तरल के भार को संभाल सके। कीप को उठाने पर बोतल में दबी हवा बाहर निकल जाती है और लिक्विड नीचे चला जाता है।

प्रश्न - (4) आपने बर्फ की सिल्ली से धुआं उठते देखा होगा। यह क्या है?
यह धुआं गैस नहीं बल्कि वाष्प है जो बर्फ की ठंड के कारण उसके आस-पास जम जाती है। बर्फ के आस-पास की हवा ज्यादा ठंडी होने पर उससे वाष्प पानी की बूंदों में बदलकर हवा के झोंके से धुएं की तरह लगती है।


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युवाओं को कॉलेज तक पहुंचाने की मुहिम


भारत और दूसरे देशों में ही नहीं अमरीका में भी ऐसे हजारों बच्चे हैं जो स्कूली शिक्षा खत्म करने के बाद कॉलेज का मुंह तक नहीं देख पाते हैं। अमरीकी संस्था अमरीकन टैलेंट इनीशिएटिव (एटीआइ) की रिपोर्ट के अनुसार हर साल हजारों बच्चे जो सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों से शिक्षा पूरी करते हैं वे आर्थिक तंगी की वजह से स्नातक की डिग्री लेने के लिए कॉलेज नहीं जा पाते।

स्नातक की पढ़ाई पूरी न होने से बच्चों का कॅरियर खराब हो रहा है बल्कि देश के होनहार युवा चाहकर भी उसके लिए कुछ करने की स्थिति में नहीं हैं। इस रिपोर्ट के आने के बाद देश के कुछ चुनिंदा कॉलेजों और विश्वविद्यालयों ने ऐसे बच्चों को दाखिला देने का बीड़ा उठाया है जिससे वे शिक्षा ग्रहण कर अपने सपने को साकार कर सकें। मेंबर्स ऑफ अमरीकन टैलेंट इनीशिएटिव की मदद से 2015-16 में पास हुए 7,291 बच्चों को दाखिला देने की प्रक्रिया शुरू हुई है। एटीआई का लक्ष्य 70 फीसदी बच्चों को स्नातक की पढ़ाई पूरी करवाना है।

एटीआइ का लक्ष्य 70 फीसदी बच्चों को स्नातक की पढ़ाई पूरी करवाना है। इसके लिए उसने देशभर के अलग-अलग कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और संस्थानों से हाल ही करार भी किया है। एटीआइ का मकसद समाज में एकरूपता स्थापित करना है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को चिन्हित कर उन्हें बेहतर ढंग से शिक्षित करना है।

(वाशिंगटन पोस्ट से विशेष अनुबंध के तहत)


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स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं तो पहले करें ये प्लानिंग फिर बनेंगे करोड़पति


नब्बे फीसदी स्टार्ट अप तो शुरू होते ही फेल होने के लिए हैं, यह बात आपने जरूर सुनी होगी। हालांकि यह बात हमेशा सच नहीं होती और नब्बे स्टार्ट अप फेल नहीं होते। फेल होने वाले स्टार्ट अप की संख्या इससे काफी कम होती है लेकिन यह भी सच की किसी भी बिजनेस की शुरुआत में बहुत सारी मेहनत लगती है और इसमें रिस्क भी बहुत होता है। इसी रिस्क और मेहनत की वजह से कुछ आइडिया मूर्तरूप लेने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।

अब आपका आइडिया बहुत अच्छा है, यूनिक है, आपने प्लानिंग भी बहुत अच्छी ही की है, आप मेहनत और रिस्क से किसी भी तरह से घबरा भी नहीं रहे हैं लेकिन आपकी मामूली गलती की वजह से बिजनेस फेल जाता है। ऐसे में या तो आपका स्टार्ट अप फेल जाता है और आप दूसरों के लिए उदाहरण बन जाते हैं और या फिर दूसरों के विफल उदाहरण से सबक लेकर खुद के स्टार्ट अप को सफलता की नई ऊंचाइयों पर पहुंचा सकते हैं। अपने स्टार्ट अप को शुरुआत से ही मजबूती प्रदान करने के लिए आपको कुछ गलतियां करने से बचना होगा। आइए जानते हैं कि ऐसी ही कुछ गलतियों के बारे में -

पूरी प्लानिंग नहीं
एक बिजनेस की शुरुआत के लिए एक आइडिया ही काफी होता है लेकिन इसे बनाए रखने के लिए प्लानिंग बहुत जरूरी होती है। कुछ लोगों को प्लानिंग करना काफी मुश्किल लग सकता है लेकिन अगर आप सही प्लानिंग नहीं करेंगे तो यह अंधेरे में तीर मारने जैसा होगा। सॉलिड प्लानिंग अकेला ऐसा महत्त्वपूर्ण स्टेप है, जिससे भविष्य में सफलता मिलेगी। अत: आपके पास क्लीयर स्टेप्स होने जरूरी हैं।

विफलता का डर
आपने भले ही तय कर लिया हो कि आप डरेंगे नहीं लेकिन यह भी उतना ही सच है कि आज भी विफलता का डर लोगों पर सबसे ज्यादा हावी होता है। लोग यह मानते हैं कि विफल हो गए तो सफलता नहीं मिलेगी लेकिन देखा जाए तो विफलता ही सफलता की कुंजी है। अपनी विफलता को सकारात्मक लेना सीखें। दुनिया के बहुत से सफल एंटरप्रेन्योर्स, बिजनेस की शुरुआत में विफल हुए थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वह विफलता के डर से उबरे और अपनी तमाम गलतियों से सीख ली।

अकेले सब कुछ करने की चाहत
एक दिन में केवल 24 घंटे होते हैं और सच्चाई यही है कि आप अकेले सब कुछ नहीं कर सकते। अहंकार स्टार्ट अप ड्रीम का सबसे बड़ा दुश्मन है। रिक्रूटमेंट, मैनेजमेंट, लीगल, फाइनेंस एंटरप्रेन्योर्स के लिए समस्या खड़ी कर सकते हैं। इन सबके लिए ऐसे लोगों को ढूंढें, जो इन कामों में माहिर हों। आप सारे एम्प्लॉइज को मैनेज नहीं कर सकते और फिर धीरे-धीरे शॉर्टकट ढूंढने लगते हैं। आपका एचआर प्रभावित होने लगता है। इसका नतीजा यह होता है कि आपकी कंपनी सभी के लिए दुस्वप्न बन जाती है और आप सफलता के बजाय विफलता प्राप्त करते हैं।

पैसे को सब कुछ मानना
स्टार्टअप ओनर्स के पास एक बड़ा विजन होता है। वह इसके जरिए भारी पैसा कमाना चाहते हैं। इसलिए वह प्रॉडक्ट के लिए सही मार्केट खोजने और यूजर बेस बनाने की बजाय पैसा कमाने को तवज्जो देते हैं। अगर वह पैसा कमाने में सफल हो जाते हैं तो वह मान लेते हैं कि उनका बिजनेस सफल है लेकिन याद रखें कि हर साल बहुत पैसे वाले स्टार्ट अप भी फेल हो जाते हैं। अगर आप वास्तविक रूप में सफल होना चाहते हैं तो आपको मार्केट में लंबे समय तक टिकने पर जोर देना चाहिए तभी आप अपनी मंजिल को हासिल कर सकेंगे।

परफेक्शन का इंतजार
परफेक्शन के इंतजार ने बहुत से स्टार्ट अप्स को विफल कर दिया है। यदि आपके पास एक किलर आइडिया है तो फिर आप यह जरूर चाहते हैं कि आप इसे दुनिया के सामने सबसे अच्छे यानी परफेक्ट रूप से सामने लाया जाए। हालांकि, आपका शुरुआत से ही परफेक्शन का इंतजार करना बेमानी है। याद रखें कि आपका बिजनेस शुरुआत से ही परफेक्ट नहीं होगा, परफेक्ट बनाने के लिए आपको दिन-रात इस पर मेहनत करनी होगी, तभी सफलता मिलेगी।

मार्केटिंग नहीं करना
एक बिजनेस एक लोगो से कहीं बढक़र होता है। आपका ब्रांड बहुत अच्छा हो लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि आपको मार्केटिंग की जरूरत हर वक्त रहती है। याद रखें कि मौजूदा बजट को डवलपमेंट पर ही खर्च न करें, बल्कि कुछ बिजनेस की मार्केटिंग के लिए भी बचा कर रखें। दुनिया को जानने दें कि आपका बिजनेस क्या है।

सही टीम नहीं चुनना
सही टीम ढूंढना भी मुश्किल हो सकता है, इसलिए एंटरप्रेन्योर्स या छोटे बिजनेस ओनर्स को ऐसे पोटेंशियल कैंडिडेट्स को चुनना चाहिए, जो कंपनी के लिए सही हों। गलत टीम चुनने से न केवल पैसों का नुकसान होता है बल्कि इससे दूसरे एम्प्लॉयर्स का मोरल भी नीचे गिरता है। ऐसी टीम चुनें, जो पूरी ईमानदारी से अपनी राय आपको दे और आपका बिजनेस आगे बढ़ाए। हमेशा याद रखें कि एक सही और बेहतरीन टीम ही आपको सफलता दिलाएगी।

आधे-अधूरे प्रयास
बिजनेस की शुरुआत करनी है तो आपको पैशन और धैर्य की जरूरत होती है। यह चीजें नहीं होने पर आपकी जिंदगी से कई चीजें दूर हो सकती हैं। आपको चाहिए कि आप बिजनेस को समय दें और लक्ष्य की राह में आने वाली सभी चुनौतियां का सामना पूरी शिद्दत के साथ करें। अपनी समस्याओं को पूरे मन से सुलझाने का प्रयास करें।


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JEE Main Exam 2019 के नतीजे जारी, यहां करें चेक और डाउनलोड़


नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन मेन (JEE Main 2019) परीक्षा के 1 पेपर का रिजल्ट जारी कर दिया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने चार स्कोर जारी किए हैं। इसमें पहला सेक्शन स्कोर, दूसरा ओवरऑल जेईई मेन्स एनटीए स्कोर है। JEE Main n Exam 2019 का रिजल्ट बोर्ड की अधिकारिक वेबसाइट Jeemain.Nic.In या nta.ac.in पर जाकर चेक किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि JEE Main Exam में लगभग 8.75 लाख से अधिक छात्रों ने परीक्षा दी थी, इनमें से 15 उम्मीदावारों ने 100 पर्सेटाइल हासिल किया है। अपुष्ट खबरों के अनुसार JEE Main Exam 2 के रिजल्ट को भी बहुत जल्दी ही जारी किया जा सकता है।

रिजल्ट कैसे चैक करें-
Step 1 - रिजल्ट चैक करने के लिए सबसे पहले बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट nta.ac.in ओपन करें।
Step 2 - यहां होमपेज पर नीचे दिए गए Public Notice JEE(Main) January-2019 Results लिंक पर क्लिक करें।
Step 3 - इस लिंक पर क्लिक करने पर एक नया पेज ओपन होगा। वहां पर आपको JEE (Main) January 2019 NTA Score पर क्लिक करें।
Step 4 - इससे एक नया पेज ओपन होगा जहां पर आपको Application Number, जन्मतिथि तथा सिक्योरिटी पिन सब्मिट कर Login पर क्लिक करें। इससे आपका रिजल्ट दिखाई देगा।
Step 5 - दिखाई गए इस रिजल्ट को आप डाउनलोड़ कर प्रिंट ले सकते हैं अथवा मेल कर सकते हैं।


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