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बैंककर्मी करेंगे राष्ट्रव्यापी हड़ताल, 8-9 जनवरी को बैंक सेवाएं रहेंगी ठप


नई दिल्ली. बैंककर्मियों की हड़ताल के कारण 8-9 जनवरी को देश भर में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहेगी, क्योंकि ऑल इंडिया बैंक इम्प्लाई एसोसिएशन (एआईबीईए) और बैंक इम्प्लाई फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीईएफआई) ने शनिवार को हड़ताल पर जाने की सूचना दी है। बैंक बड़ौदा ने शनिवार को एक नियामक फाइलिंग में कहा, "हमें भारत सरकार द्वारा सूचित किया गया है कि एआईबीईए और बीईएफआई ने इंडियन बैंक्स एसोसिएशन को 8 और 9 जनवरी को अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर जाने की सूचना दी है।"

बैंक ने कहा, "एआईबीईए और बीईएफआई द्वारा 8 और 9 जनवरी को हड़ताल करने से बैंक की शाखाओं/कार्यालयों में सेवाएं प्रभावित रहेगी।" इसी तरह की फाइलिंग में कहा, "एआईबीईए और बीईएफआई द्वारा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर किए जा रहे हड़ताल के कारण बैंक की सेवाएं प्रभावित रहेगी।"

इससे पहले, बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ विजया बैंक और देना बैंक के प्रस्तावित विलय के खिलाफ यूनियनों की हड़ताल के कारण 26 दिसंबर 2018 को देश भर में सरकारी बैंकों की शाखाओं में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हुई थीं।

उस समय हड़ताल का आह्वान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) द्वारा किया गया था, जो सभी नौ यूनियनों का अंब्रेला संगठन है, जिसमें ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कंफेडरेशन (एआईबीओसी), एआईबीईए, नेशनल कंफेडरेशन ऑफ बैंक इम्प्लाइज (एनसीबीई) और नेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स (एओबीडब्ल्यू) शामिल हैं।


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केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने अस्थाई कर्मियों को स्थाई करने व सुरक्षा कवरेज की मांग की


नई दिल्ली. श्रमिकों के प्रति शत्रुतापूर्ण आर्थिक और श्रम सुधारों के लिए एक के बाद एक सभी सरकारों को दोषी ठहराते हुए केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (सीजीयूज) के एक संयुक्त फोरम ने सोमवार को हरेक श्रमिक के लिए सामाजिक सुरक्षा कवरेज की मांग की और कहा कि सभी अनुबंध कर्मियों को स्थाई किया जाए। कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल ट्रेड यूनियंस (सीओएनसीईएनटी) में भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस), इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (आईएनटीयूसी), ट्रेड यूनियन कॉर्डिनेशन सेंटर (टीयूसीसी) और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (एनएफआईटीयू) शामिल है। यहां यूनियनों के राष्ट्रीय सम्मेलन में सरकार द्वारा रेलवे, रक्षा प्रतिष्ठानों, बैंकों और बंदरगाहों के निजीकरण के लिए उठाए जा रहे कदमों के खिलाफ लडऩे का संकल्प लिया गया।

बीएमएस के अध्यक्ष सी. के. साजी नारायणन ने यहां सम्मेलन में कहा, "इंप्लाई स्टेट इंश्यूरेंस कॉर्प (ईएसआईसी), और इंप्लाई प्रॉविडेंड फंड ऑर्गनाइजेशन (ईपीएफओ) के तहत हरेक कामगार को सार्वभौकिम सोशल सिक्युरिटी कवरेज मुहैया कराना चाहिए। योजनाओं में काम करनेवालों जैसे, आंगनवाड़ी, आशा, मिड-डे मिल कामगारों को सरकारी कर्मचारी घोषित करना चाहिए और तब तक उन्हें न्यूनतम 18,000 रुपए की मजदूरी देनी चाहिए।"

चार सीटीयूज के प्रतिनिधियों द्वारा हस्ताक्षरित मांगों के चार्टर में सभी कामगारों को स्थाई बनाने, सभी श्रम कानूनों को कड़ाई से लागू करने और सभी श्रेणियों में न्यूनतम मजदूरी देश भर में 18,000 रुपए करने की मांग की गई है।

उन्होंने मांगों के चार्टर में कहा, "सरलीकरण और संहिताकरण के नाम पर कामगारों के वर्तमान अधिकारों को छीना नहीं जाना चाहिए। रेलवे, कोयला, रक्षा, बैंकों, बंदरगाहों, हवाईअड्डों, बिजली, चाय और अन्य ऐसे क्षेत्रों के ज्वलंत मुद्दों का संबंधित मंत्रालयों द्वारा अलग-अलग समाधान किया जाना चाहिए।" उन्होंने इसके अलावा नीति आयोग में मजदूरों और किसानों के प्रतिनिधित्व की मांग की।


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महाराष्ट्र सरकार ने कर्मचारियों को दिया नए साल का तोहफा


मुंबई. वर्ष 2019 में होनेवाले आम चुनाव और विधानसभा चुनावों को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने 7वें वेतन आयोग को लागू करने की घोषणा करके सभी सरकारी कर्मचारियों को नए वर्ष का तोहफा दिया है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी के फैसले को मंजूरी दी गई, जिससे राज्य के करीब 17 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा, जबकि सरकारी खजाने पर 21,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

कई महीनों से लंबित यह फैसला 1 जनवरी 2019 से लागू किया जाएगा। हालांकि इसमें वेतन वृद्धि 1 जनवरी 2016 से की गई है अत: सभी कर्मचारियों के पिछले 36 महीनों का एरियर मिलेगा। नया वेतन कर्मचारियों के खाते में 1 फरवरी से आएगा।

कर्मचारियों के तीन साल का एरियर जो करीब 10,000 करोड़ रुपए का है वह कर्मचारियों के प्रोविडेंड फंड खातों में पांच किश्तों में आएगा। एक अधिकारी ने कहा कि कर्मचारी पिछले 14 महीनों के महंगाई भत्ते (डीए) के भी हकदार होंगे।

आधिकारिक अनुमानों के मुताबिक, श्रेणी चार के कर्मचारियों का वेतन करीब 4,000-5,000 रुपए बढ़ेगा, जबकि श्रेणी 3 के कर्मियों के वेतन में 5,000 रुपए से 8,000 रुपए तक की बढ़ोतरी होगी, श्रेणी 2 और श्रेणी 1 के अधिकारियों के वेतन में 9,000 रुपए से 14,000 रुपए तक की बढ़ोतरी होगी। राज्य सरकार ने संशोधित वेतनमान के मद में वित्त वर्ष 2018-19 के बजट में 10,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।


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कश्मीर में कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा रद्द


जम्मू. जम्मू एवं कश्मीर सरकार ने स्वास्थ्य बीमा आवंटन में अनियमितता की रपट के बाद अपने कर्मचारियों के लिए ग्रुप मेडिक्लेम इंश्योरेंस पॉलिसी रद्द करने के आदेश दिए। यह आदेश 31 दिसंबर की मध्यरात्रि से लागू होगा। प्रदेश सरकार द्वारा दिए गए आदेश में कहा गया है कि सभी सरकार कर्मचारियों की ग्रुप मेडिक्लेम इंश्योरेंस पॉलिसी के लागू होने के संबंध में नौ सितंबर को जारी आदेश संख्या 406-एफडी 2018 को रद्द/वापस किया जाता है।

सरकार ने सभी आरेखण व संवितरण अधिकारियों को उक्त तिथि के बाद कर्मचारियों के वेतन से बीमा के लिए किसी प्रकार की कटौती नहीं करने के आदेश दिए हैं। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने पॉलिसी आवंटन की प्रक्रिया की जांच करने के आदेश दिए हैं।

इतना ही नहीं इससे पहले ही राज्यपाल ने जम्मू और कश्मीर के कर्मचारियों और सेवानिवृत कर्मचारियों के स्वास्थ्य बीमा के लिए रिलायंस जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड को दिए ठेके को रद्द करने की अनुमति दे दी थी। इसके साथ ही इस मामले में हुई अनियमित्ताओं की जांच के आदेश भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) को दे दिए गए थे।

गौरतलब है कि राज्यपाल सत्यपाल मलिक इस योजना को रद्द करने की घोषणा कुछ दिनों पहले एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में कर चुके थे। उनका कहना था कि इसकी टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार हुआ है और शुरुआती जांच में यह बात सामने आने पर इसे रद्द किया जा रहा है। बता दें कि जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनने के एक महीने के बाद सत्यपाल मलिक ने मुख्यमंत्री सामूहिक स्वास्थ्य बीमा योजना को लागू करने की अनुमति दी थी। इस योजना की शुरुआत में भी विपक्षी दलों ने रिलायंस को ठेका देने में धांधली होने का आरोप लगाया था। यहां तक कि उस समय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी जम्मू और कश्मीर में अनिल अंबानी की कंपनी को ठेका दिए जाने पर केंद्र सरकार को निशाना बनाया था।


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NPS में सरकारी योगदान बढ़कर हुआ 14 फीसदी,18 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को फायदा


नई दिल्ली. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हाल ही कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत आने वाले अपने कर्मचारियों के लिए अपना योगदान बढ़ाने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने एनपीएस में अपनी हिस्सेदारी मूल वेतन के मौजूदा 10 फीसदी से बढ़ाकर 14 फीसदी करने का फैसला किया है। हालांकि, न्यूनतम कर्मचारी योगदान 10 फीसदी बना रहेगा।

सरकार ने कहा कि इस कदम से संचित राशि में बढ़ोतरी से 18 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को फायदा होगा। इस कदम से बिना किसी अतिरिक्त बोझ के सेवानिवृत्ति के बाद अधिक पेंशन का भुगतान मिलेगा और ऐसे समय में जब जीवन प्रत्याशा बढ़ रही है, इससे बुजुर्ग लोगों को सुरक्षा मिलेगी।

इसमें कहा गया कि एनपीएस में सरकार के योगदान में की गई वृद्धि से सरकारी खजाने पर 2019-20 में 2,840 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पडऩे का अनुमान है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने यह फैसला 6 दिसंबर को लिया था, लेकिन अगले दिन राजस्थान में चुनाव होने की वजह से इसकी घोषणा नहीं की थी।

केंद्र सरकार की सेवा में एक जनवरी 2004 को या इसके बाद शामिल होने वाले नए लोगों को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत शामिल किया गया है।


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यूएसटी ग्लोबल ने अपने कर्मचारियों को खुद के विचारों पर काम करने की दी हरी झंडी


तिरुवनंतपुरम. यूएसटी ग्लोबल ने अपनी रणनीति के हिस्से के तौर पर नए स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने का फैसला लिया है। यूएसटी ग्लोबल ने अपने कर्मचारियों को खुद के विचारों पर काम करने की हरी झंडी दी है। यूएसटी ग्लोबल राज्य में आईटी क्षेत्र में सबसे बड़ी नियोक्ता है। यूएसटी-ग्लोबल आईटी कंपनियों में एक है जिसने सबसे पहले यहां 1999 में टेक्नोपार्क कैंपस में अपना केंद्र खोला। यूएसटी-ग्लोबल में 22,000 कर्मचारी हैं और इसमें से 9000 से ज्यादा इसके दो केंद्रों तिरुवनंतपुरम व कोच्चि में काम करते हैं।

अमेरिका-मुख्यालय स्थित ईकाई के चीफ पीपुल ऑफिसर मनु गोपीनाथ ने आईएएनएस से कहा कि उनकी कंपनी के कार्यालय 26 देशों में हैं, यहां यह टेक्नोपार्क कैंपस में स्थित है, जहां से सभी महत्वपूर्ण संचालन हो रहे हैं।

कंपनी के वार्षिक सम्मेलन में भाग लेने के लिए केरल आए गोपीनाथ ने कहा, "आज वह स्थिति आ गई है कि हमारी कंपनी में नई नौकरियां अब लंबे समय तक नहीं सृजित होंगी, ऐसे में हमने स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने व अप्रत्यक्ष तरीके से हमारी प्रणाली से जोडऩे का फैसला किया है।"


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Report: अमेरिका में नौकरी के लिए 'बेस्ट प्लेस' नहीं रहा फेसबुक


सैन फ्रांसिस्को. डाटा सेंधमारी से जुड़े मामलों और इस साल स्टॉक गिरने के बीच प्रौद्योगिकी कंपनी-फेसबुक ने अमेरिका में सर्वश्रेष्ठ कार्यस्थल होने का खिताब खो दिया है वहीं, एप्पल ने शीर्ष रोजगारप्रदाता कंपनियों की सूची में ऊंची छलांग लगाई है। बुधवार को प्रकाशित हुई प्रमुख रोजगार वेबसाइट-ग्लासडोर की वार्षिक रिपोर्ट में अमेरिका में 100 सर्वश्रेष्ठ कार्यस्थलों की सूची के अनुसार, बोस्टन की कंसल्टिंग कंपनी-बेन एंड कंपनी शीर्ष पर चुनी गई है।

ग्लासडोर वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, फेसबुक अब सातवें स्थान पर पहुंच गया है वहीं, एप्पल 84वें स्थान से छलांग लगाकर 71वें स्थान पर पहुंच गया है। 2017 में फेसबुक जहां अमेरिका में सर्वश्रेष्ठ कार्यस्थल था वहीं प्रौद्योगिकी कंपनी एप्पल 2016 के अफने 36वें स्थान से फिसलकर 2017 में 84वें स्थान पर पहुंच गया था। ई-कॉमर्स कंपनी एमेजन हालांकि शीर्ष 100 कंपनियों में स्थान पाने में नाकाम रही।

वहीं दूसरी तरफ एप्पल पिछले वर्ष के 84वें स्थान से छलांग लगाते हुए इस वर्ष 71वें स्थान पर पहुंच गई है। सॉफ्टवेयर जाएंट-माइक्रोसॉफ्ट ने भी इस सूची में अपने स्थान में सुधार किया है। वह 39वें से 34वें स्थान पर पहुंच गई है। ग्लासडोर की सूची ऐसे समय में आई है जब विभिन्न मीडिया रिपोट्र्स के अनुसार, फेसबुक के कर्मचारी अन्य कंपनियों में नौकरी तलाश रहे हैं।


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मांगें नहीं मानी गईं, तो बीमा एजेंट करेंगे देशव्यापी आंदोलन


नई दिल्ली. ऑल इंडिया जनरल इंश्योरेंस एजेंट एसोसिएशन के बैनर तले देशभर के बीमा एजेंटों ने अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन किया। एसोसिएशन के राष्ट्र्रीय महासचिव अनिरूद्ध दासगुप्ता ने कहा, "1972 से लेकर 2018 तक इंश्योरेंस एजेंटों का कमीशन नहीं बढ़ाया गया, इसलिए हमारी मांग है कि एजेंटों का कमीशन बढ़ाया जाए, वहीं इंसेटिव और अतिरिक्त सुविधा का पैसा एजेंटों को डेढ़ से दो वर्ष बाद दिया जाता है, जिससे इंश्योरेंश एजेंट उसका सही इस्तेमाल नहीं कर पाते।"

इंश्योरेंस एडवाइजर फोरम के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी गोयल ने कहा, "हमारी लम्बे समय से मांग है कि सीनियर सीटिजन को सस्ते में बीमा मिलना चाहिए और इन्श्योरेस एंजेटों का पर्सनल एक्सीडेंट पॉलिसी भी कंपनियों की ओर से होना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि बीमा एजेंट कड़ी मेहनत कर ग्राहकों तक पहुंचते हैं और उनको विभिन्न बीमाओं की जानकारी देकर उन्हें लाभवान्वित करते हैं, लेकिन बीमा कंपनियों की लापरवाही और अड़यि़ल रवैये के कारण वे स्वयं सुरक्षित नहीं हैं।

गोयल ने कहा कि इसलिए बीमा एजेंट की मांगों को पूरा करने के लिए सरकार बीमा कंपनियों को निर्देशित करे और एजेंटों के जीवन एवं हित को सुरक्षित रखे। उन्होंने कहा कि अगर बीमा एजेंटों की मांगें नहीं मानी जाएंगी तो, बीमा एजेंट देशव्यापी आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।


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रिपोर्ट में खुलासा: कर्मचारियों की दक्षता में निवेश कम होने से फेल होती ऑटोमेशन तकनीक


मुंबई। मौजूदा कार्यबल को अतिरिक्त कौशल से संपन्न बनाने पर निवेश कम होने के कारण ज्यादातर कारोबारों में दुनिया में हो रहे ऑटोमेशन का लाभ नहीं मिल रहा है। यह बात बुधवार को एक नई रिपोर्ट में कही गई। फ्रांस की प्रमुख प्रौद्योगिकी सेवा कंपनी केपजेमिनी का विचार मंच केपजेमिनी रिसर्च इंस्टीटूट की एक रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश कंपनियों (58 फीसदी) में ऑटोमेशन के क्षेत्र में कार्यकारी अधिकारियों की उत्पादकता में वृद्धि का वांछित लक्ष्य पूरा नहीं हो रहा है।

दुनियाभर के 400 बड़े संगठनों के 800 कार्यकारी अधिकारियों और 1,200 कर्मचारियों के सर्वेक्षण पर आधारित अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि 50,000 या उससे अधिक कुशल कार्यबल वाले उद्यमों में उन उद्यमों के मुकाबले नौ करोड़ डॉलर की बचत हो सकती है जिनमें कर्मचारी व अधिकारियों को अतिरिक्त कौशल बढ़ाने की दिशा में काम नहीं होता है।

केपजेमिनी इन्वेंट के प्रबंध निदेशक (पीपल एंड आर्गेनाइजेशन प्रैक्टिस) क्लॉडिया क्रमनेर्ल ने कहा, "बहुत सारी बड़ी कंपनियों में प्रशिक्षण कार्यक्रम का अभाव है और वे पूरी उत्पादकता का लाभ लेने की दिशा में कार्य नहीं कर रही हैं।"

अध्ययन में शामिल 37 फीसदी प्रतिभागियों ने ऑटोमेशन योजना शुरू करने की वजह के बारे में पूछे जाने पर कहा कि इससे कार्यबल की उत्पादकता बढ़ती है और गुणवत्ता में सुधार होता है। लेकिन 58 फीसदी कार्यकारी अधिकारियों और 54 फीसदी कर्मचारियों ने कहा कि ऑटोमेशन से उनके संगठन में अब तक उत्पादकता में सुधार नहीं आया है।


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डीटीसी हड़ताल पर परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने बैजल पर साधा निशाना


नई दिल्ली. दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने अनिवार्य सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) लगाए जाने के बावजूद दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के संविदा कर्मियों की हड़ताल में हस्तक्षेप नहीं करने पर बुधवार को उप राज्यपाल अनिल बैजल को आड़े हाथों लिया। परिवहन मंत्री ने ट्वीट किया, "मैं डीटीसी हड़ताल के मामले में पिछले दो दिनों से राज्यपाल से बात करने और उनसे मिलने की कोशिश कर रहा हूं।"

मंत्री ने उप राज्यपाल से 'उनके लिए थोड़ा वक्त' निकालने का अनुरोध करते हुए कहा कि एस्मा लगाए जाने के बावजूद डीटीसी संविदा चालक और कंडक्टर पिछले 10 दिनों से हड़ताल पर हैं। नजफगढ़ के विधायक ने कहा कि उन डीटीसी कर्मचारियों को 'गुंडे धमका रहे हैं जो अपनी ड्यूटी कर रहे हैं।' उन्होंने कहा, "अधिकांश संविदा कर्मचारी ड्यूटी करना चाहते हैं लेकिन (गुंडों के) डर के कारण ऐसा करने में असमर्थ हैं।" गहलोत ने कहा कि 'गुंडों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करके दिल्ली पुलिस हड़ताल को बढ़ावा दे रही है।' मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी मंत्री के ट्वीट पर प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा, "उप राज्यपाल का दिल्ली पुलिस को निर्देश देने और एस्मा का (उचित) कार्यान्वयन सुनिश्चित करना संवैधानिक कर्तव्य है।"

आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख ने ट्वीट किया, "ज्यादातर कर्मचारी काम में शामिल होना चाहते हैं। उन्हें भाजपा के गुंडों द्वारा रोका जा रहा है। पुलिस एस्मा के बावजूद कार्रवाई नहीं कर रही है। उप राज्यपाल मिलने से इनकार कर रहे हैं।" उन्होंने कहा, "उप राज्यपाल मंत्री से क्यों नहीं मिल रहे हैं? उप राज्यपाल पुलिस को काम करने का निर्देश क्यों नहीं दे रहे हैं? भाजपा फिर से उप राज्यपाल का दुरुपयोग कर रही है और दिल्लीवासियों को परेशान कर रही है?"

डीटीसी बस सेवाओं को परिवहन के एक अनिवार्य हिस्से के रूप में देखते हुए उप राज्यपाल ने शनिवार को डीटीसी संविदा कर्मियों की हड़ताल पर एस्मा लगाया था, जो छह महीने की अवधि के लिए किसी भी हड़ताल को रोकता है। एस्मा लगाए जाने और न्यूनतम मजदूरी बहाल किए जाने के बावजूद, डीटीसी संविदा चालकों और कंडक्टरों ने अपनी हड़ताल जारी रखी है। इनमें से पांच अनिश्चतकालीन भूख हड़ताल पर हैं


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किसानों को मिले सामाजिक सुरक्षा


ज्ञान रंजन पांडा, लोकनीति मामलो के जानकार

वैश्विक भुखमरी सूचकांक यानी ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीएचआइ) 2018 की रिपोर्ट में 119 देशों में भारत 103वें स्थान पर है। हम बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और म्यांमार की तुलना में काफी नीचे हैं? पड़ोसी देशों में हम केवल अफगानिस्तान और पाकिस्तान से बेहतर हैं। हैरत इस बात की है कि गरीबी उन्मूलन के कई वर्षों के लगातार नीतिगत हस्तक्षेप के बाद हम ऐसी स्थिति में आ गए हैं। निश्चित रूप से अब यह आत्मनिरीक्षण का विषय बन गया है।

देश में 'गरीबी हटाओ' के राजनीतिक नारे बहुत बने, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से गरीबों की संख्या में दिन पर दिन इजाफा होता ही चला गया। ऐसा भी नहीं कि सरकार ने देश में गरीबी के हालात से निजात दिलाने के प्रयास नहीं किए हों। सरकार की ओर से जो प्रयास हुए वे पर्याप्त नहीं रहे। देश में गरीबी दर लगभग दस साल की अवधि में 55 से घटकर 28 फीसदी के स्तर पर आ गई।

गरीबी बहुआयामी अवधारणा है। इसे भोजन और पोषण के सीमित व्याख्यान और विश्लेषण तक सीमित नहीं होना चाहिए। गरीबी में ग्रामीण-शहरी विभाजन भी महत्त्वपूर्ण है। पांच भारतीयों में से लगभग एक गरीब है और हर पांच गरीब लोगों में से चार ग्रामीण इलाकों में रहते हैं। ग्रामीण इलाकों में अधिकतर लोग कृषि और इससे संबंधित व्यवसाय से ही जुड़े रहते हैं। किंतु इसके साथ ही हमें यह भी समझना होगा कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कही जाने वाली कृषि, आजीविका के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने में नाकाम रही है।

देश तेजी से जलवायु परिवर्तन का केंद्र बन रहा है। भारतीय कृषि और इसकी उत्पादकता पर जलवायु परिवर्तन का हमला देश के लिए एक चुनौती है, उसको नकारा नहीं जा सकता। सामाजिक सुरक्षा योजना किसानों के लिए अपर्याप्त प्रतीत होती है, भले ही इस संबंध में सरकार ने प्रभावी हस्तक्षेप किया हो। सरकार ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, नीम लेपित यूरिया, परम्परागत कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, राष्ट्रीय कृषि बाजार, प्रधानमंत्री फसल बीमा जैसी कई नई पहल की है। इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कृषक समुदाय के लिए अच्छा परिणाम ला सकती है।

मोटे तौर पर यह जरूरी है कि देश को यदि गरीबी से निजात दिलानी है तो इस बात का इंतजाम करना होगा कि सरकार की ओर से दी जाने वाली मदद गरीबों तक पहुंचे और औपचारिक आय के लिए अवसरों में कोई कमी ना रहे।

(केंद्रीय विश्वविद्यालय, अजमेर में अध्यापन)

 


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मप्र: कांग्रेस ने लगाया 'सिल्वर टच' कंपनी के कर्मचारियों पर सरकारी भवन से भाजपा का चुनाव प्रचार करने का आरोप


भोपाल. मध्यप्रदेश की कांग्रेस इकाई ने 'सिल्वर टच' नामक कंपनी की गतिविधियां राजधानी की एक सरकारी इमारत से चलाने का आरोप लगाते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से शिकायत की है। शिकायत में कहा गया है कि इस कंपनी का अमला भाजपा के लिए चुनाव प्रचार कर रहा है। कांग्रेस की मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा के नेतृत्व में मंगलवार को कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वी. एल. कांता राव को शिकायत सौंपी।

शिकायत में कहा गया है कि संविदा नियुक्ति पर तैनात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रमुख सचिव एस.के. मिश्रा के मार्गदर्शन में 'सिल्वर टच' कंपनी के कर्मचारी सरकारी भवन में बैठकर भाजपा के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं। यह कंपनी ट्विटर, इंस्टाग्राम, फेसबुक और वाट्सएप पर संदेश भेजने का काम कर रही है।

शिकायत में कहा गया है कि मिश्रा संविदा नियुक्ति पर हैं और वह जन संपर्क विभाग के प्रमुख सचिव के साथ जनसंपर्क विभाग के उपक्रम माध्यम के प्रबंध संचालक भी हैं। वह भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि मिश्रा को माध्यम के कार्यपालक संचालक मंगला प्रसाद मिश्रा का पूरा साथ मिल रहा है। मंगला प्रसाद के खिलाफ ईओडब्ल्यू में मामला भी दर्ज है। इसके अलावा 'सिल्वर टच' के प्रमुख तुषार पांचाल का नाम पहले 'फेक न्यूज' (फर्जी खबर) के एक मामले में आ चुका है, और इसी कंपनी से जुड़ा व्यक्ति कुमार सौरभ फर्जीवाड़े के एक मामले में गिरफ्तार हो चुका है।

कांग्रेस का आरोप है कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में इलेक्टॉनिक मीडिया की मॉनीटरिंग के लिए उप संचालक राजेश बेन को तैनात किया गया है। बेन पर आरोप है कि उन्होंने आचार संहिता लागू होने से पहले जनसंपर्क विभाग में रहते हुए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को करोड़ों रुपए के सरकारी विज्ञापन दिए हैं और अब निर्वाचन कार्यालय में बैठकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को प्रभावित करने में जुटे हैं। कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मांग की है कि माध्यम में पदस्थ एमडी, ईडी के मोबाइल फोन नंबर और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त कर विभिन्न पहलुओं की जांच कराई जाए।

 


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बिहार में सरकारी सेवकों और पेंशनधारियों का महंगाई भत्ता 2 फीसदी बढ़ा


पटना। बिहार सरकार ने सरकारी सेवकों और पेंशनधारियों को दिवाली का तोहफा देते हुए महंगाई भत्ता और दो बढ़ाया। यहां मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में महंगाई भत्ता सात प्रतिशत से बढ़ाकर नौ प्रतिशत किया गया। यह बढ़ोतरी इसी साल के जुलाई महीने से ही प्रभावी होगा। मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय के प्रधान सचिव संजय कुमार ने पत्रकारों को बताया कि मंत्रिपरिषद की इस बैठक में कुल 25 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। उन्होंने बताया कि बैठक में बिहार में विधवा और तलाकशुदा महिलाओं को पारिवारिक पेंशन योजना का लाभ दिए जाने का भी निर्णय लिया गया है। इसका लाभ 25 वर्ष से ज्यादा उम्र की महिलाओं को मिलेगा।

बैठक में पर्यटन विभाग के होटल पाटलिपुत्र अशोक, पटना का भारत पर्यटन विकास निगम लिमिटेड, नई दिल्ली से बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड को 13 करोड़ 50 हजार रुपए की क्रय राशि के साथ सशत्र्त हस्तांतरण करने की भी स्वीकृति दी गई। प्रधान सचिव कुमार ने बताया कि पटना सहित राज्य के कई बड़े शहरों में 'मिस्ट टेक्नोलॉजी' युक्त अग्निशमन मोटरसाइकिल के संचालन पर भी मुहर लगा दी गई है।


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मप्र में अध्यापकों के 'शिक्षक' बनने का सपना रहा अधूरा


भोपाल। मध्यप्रदेश में अध्यापकों के शिक्षक बनने का सपना अधूरा रह गया, राज्य सरकार ढाई लाख अध्यापकों कई माह से लुभाती आई और शिक्षा विभाग में संविलियन का लॉलीपॉप दिखाती आई, मगर अध्यापकों के हाथ खाली ही रहे। आचार संहिता लागू होने के कारण अध्यापकों के शिक्षा विभाग में संविलियन की प्रक्रिया रोक दी गई है। राज्य सरकार ने 30 सितंबर तक अध्यापकों के शिक्षा विभाग में संविलियन (मर्ज) करने का फैसला लिया था, मगर यह समय पर नहीं हो पाया। गोयाकि, छह अक्टूबर को आचार संहिता लागू हो गई थी और उसके बाद राज्य की लोक शिक्षण आयुक्त जयश्री कियावत ने एक आदेश जारी कर संविलियन की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।

आयुक्त कियावत ने संयुक्त संचालक, जिला शिक्षाधिकारियों को आदेश जारी कर कहा है कि छह अक्टूबर को प्रदेश में विधानसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है, भर्ती अधिनियम-2015 के अंतर्गत अध्यापक संवर्ग के व्यक्तियों की नवीन शैक्षणिक संवर्ग में नियुक्ति संबंधी प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से स्थगित की जाती है।

आयुक्त के इस आदेश से प्रदेश के ढाई लाख अध्यापकों का शिक्षक बनने का सपना अधूरा रह गया। अध्यापकों में सरकार के रवैए को लेकर खासी नाराजगी है, हर तरफ से सवाल उठ रहे हैं कि सरकार की संविलियन की जब मंशा ही नहीं थी तो क्यों उन्हें बीते कई सालों से लुभाया जा रहा था। अध्यापक अपने को छला महसूस कर रहे हैं।

वर्तमान में अध्यापक नगरीय निकाय और पंचायतों के अधीन आते हैं, यह शिक्षा विभाग के कर्मचारी नहीं है। राज्य सरकार ने अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन कर उन्हें शिक्षक बनाने का ऐलान किया था, मगर घोषणा पूरी नहीं हो पाई।


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कार्यस्थल पर कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बनाई गई रणनीति


UN launches mental health strategy संयुक्त राष्ट्र। कार्यस्थल की मानसिक परेशानी दूर करने के मकसद से संयुक्त राष्ट्र ने एक रणनीतिक मुहिम शुरू की है, जिसके तहत कर्मचारियों की तंदुरुस्ती का विशेष ध्यान रखा जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मंगलवार को इस मुहिम के आगाज पर कहा, "चिंता, तनाव, मानसिक आघात के बाद पैदा होने वाले तनाव व घबराहट और अन्य परिस्थितियों से जूझने वाले संयक्त राष्ट्र के कर्मचारी अलग-थलग और लज्जित महसूस करते हैं, क्योंकि उनकी मदद को कोई नहीं आता है।"

समाचार एजेंसी 'सिन्हुआ' के अनुसार, उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर करीब एक-चौथाई लोग रुग्णावकाश लेते हैं और अशक्यता पेंशन का यह प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा, "संयुक्त राष्ट्र अपने कर्मचारियों को बेहतर तरीके से मदद कर सकता है और करना चाहिए और इसके लिए एक नई रणनीति के साथ हमने कदम बढ़ा दिया है।"

उन्होंने कहा कि सदमे को कम करना शीर्ष प्राथमिकता है, क्योंकि जब तक सदमा दूर नहीं होगा, तब तक कर्मचारी मदद मांगने के लिए या अपनी भावना का इजहार करने के लिए तैयार नहीं होंगे। उन्होंने कहा, "यह रणनीति एक-दूसरे का ध्यान रखने की जरूरतों को भी रेखांकित करती है। साथ ही, इसमें खिन्न सहकर्मियों से संपर्क करने की आवश्यकता बताई गई है।" उन्होंने कहा कि सहकर्मियों को ऐसा तरीका अपनाना चाहिए, ताकि ऐसे लोगों को सहारा मिले, न कि उनपर अपना निर्णय देना चाहिए। उन्होंने कहा, "मानसिक बीमारी की चेतावनी के संकेतों के संबंध में हमें खुद को शिक्षित करने की जरूरत है।"


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21 सूत्री मांगों को लेकर उप्र सरकार को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की चेतावनी


लखनऊ। उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती पर लगी रोक हटाने सहित उनकी 21 सूत्री मांगों को स्वीकार नहीं किया, तो वे सांसदों और विधायकों के आवासों का घेराव करेंगे और धरना देंगे। उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रामराज दुबे एवं उप महामंत्री सुरेश सिंह यादव ने यहां वाणिज्यकर भवन में बुधवार को एक बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष दुबे ने कहा, "पूरे प्रदेश में चरणबद्ध आंदोलन गेट मीटिंग के माध्यम से चलाया जा रहा है, लेकिन सरकार की तरफ से 21 सूत्री मांग-पत्र पर अभी तक कोई वार्ता और कोई सुनवाई नहीं की गई है।"

उप-महामंत्री सुरेश सिंह यादव ने बताया, "गरीब परिवारों के बच्चे किसी तरह हाईस्कूल तथा इंटर पास कर चतुर्थ श्रेणी की नौकरी पा जाते थे, लेकिन चतुर्थ श्रेणी की भर्ती पर रोक लगाकर सरकार ने ये नौकरियां भी उनसे छीन ली है। हम केंद्र एवं राज्य सरकार से पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग करते हैं।"

उन्होंने कहा, "नेता एक बार सांसद एवं विधायक तथा विधान परिषद एवं राज्यसभा सदस्य बन जाता है, तो वह आजीवन पेंशन पाने का हकदार होता है। लेकिन राज्य कर्मचारी 60 वर्ष की आयु तक सेवा देता है, लेकिन सरकार ने उसकी पेंशन बंद कर उसके बुढ़ापे का सहारा छीन लिया है।" दोनों कर्मचारी नेताओं ने कहा कि यदि महासंघ की 21 सूत्री मांग-पत्र पर सरकार ने जल्द विचार नहीं किया तो समस्त प्रदेश के सांसदों, विधायकों, विधान परिषद एवं राज्यसभा सदस्यों के आवासों पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी धरना-प्रदर्शन करेंगे।


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AIBEA: नवंबर में होने वाली बैंकों की 5 दिवसीय हड़ताल पर संशय


चेन्नई. अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर नवंबर के अंत में बैंकों की पांच दिवसीय हड़ताल के लिए सर्कुलर जारी करने से इनकार किया है। एक शीर्ष अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने यह भी कहा कि बंैक संघों ने भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है, जिसमें बैंककर्मियों के वेतन को परिचालन लाभ और रिटर्न ऑन एसेट्स (आरओए) से लिंक कराने के लिए कहा गया था, क्योंकि मात्र छह बैंक ही अधिक वेतन देने में सक्षम होंगे।

एआईबीईए के महासचिव सी.एच. वेंकटचलम ने आईएएनएस को बताया, "हमने यूनाइटेड फोरम फॉर बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के आह्वान पर पांच दिवसीय हड़ताल के लिए सर्कुलर जारी नहीं किया है।" उन्होंने कहा, "कुछ अराजक तत्वों ने एक कोरे कागज पर संघ का लेटरहेड और मेरे हस्ताक्षर कट पेस्ट किए हैं और बीच में गलत संदेश जोड़ दिया है।"

रविवार को सोशल मीडिया पर एआईबीईए का एक पत्र जारी हुआ था जिसमें कहा गया था कि यूएफबीयू ने 26 से 30 नवंबर तक पांच दिवसीय हड़ताल करने का निर्णय लिया था। आईबीए के छह फीसदी वेतन वृद्धि के प्रस्ताव पर नौ बैंक संघों की शीर्ष संस्था यूएफबीयू के निर्णय पर उन्होंने कहा कि संघ इससे सहमत नहीं थे। उन्होंने कहा कि यूएफबीयू की हालिया बैठक में आईबीए के प्रस्ताव पर विचार किया गया और इस पर सहमति नहीं बनी।

 


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अपनी मांगों को लेकर मोदी सरकार को घेरने की तैयारी में केंद्रीय कर्मचारी, जानें क्या हैं मांंगें


दिल्ली। आने वाले समय में मोदी सरकार की मुश्किलें बढऩे वाली हैं। इसकी वजह है सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों में विसंगतियां, पुरानी पेंशन स्कीम और न्यूनतम वेतन। खबर है कि रेलवे और केंद्रीय कर्मचारी सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों में विसंगतियों, पुरानी पेंशन स्कीम व न्यूनतम वेतन आयोग की मांग को लेकर दिसम्बर में संसद सत्र के दौरान देशभर में केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी में जुट गए हैं। इसके तहत एक ओर जहां बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है, वहीं रेलवे कर्मचारी संगठन देशभर में ट्रेनों को रोककर देशव्यापी प्रदर्शन करने की योजना बना रहा है।

दरअसल, केंद्रीय कर्मचारी काफी लंबे समय से सातवें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम वेतन को कम से कम 26000 किए जाने और पुरानी पेंशन योजना को लागू करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन इस पर केंद्र सरकार जरा भी सकारात्मकता नहीं दिखा रही है। ऐसे में दिसम्बर में संसद सत्र के दौरान एक देशव्यापी आंदोलन करने की योजना पर काम किया जा रहा है। यह कहना है नेशनल जॉइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (NJCA) के संयोजक शिव गोपाल मिश्रा का। मिश्रा ने कहा कि यदि इसके बाद भी बात नहीं बनती, तो फिर मांग पूरी करवाने के लिए दूसरा रास्ता अख्तियार किया जाएगा यानी देशभर में रेल कर्मचारी स्ट्राइक करने पर मजबूर होंगे।

हालांकि, शुरुआत में केंद्रीय कर्मचारी छोटे-छोटे प्रदर्शनों करके अपनी मांगों को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास करेंगे। चूंकि, अगले दो महीनों में पांच राज्यों में चुनाव हैं, ऐसे में केंद्रीय कर्मचारी राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव व लोकसभा चुनाव के करीब आने पर सरकार पर और दबाव बढ़ाएंगे। केंद्रीय कर्मचारियों की मांगों में सबसे महत्वपूर्ण मांगें न्यूनतम वेतन को 16000 से बढ़ाकर 26000 किए जाने, फिटमेंट फार्मूले को बदले जाने व पुरानी पेंशन स्कीम को जल्द से जल्द लागू किया जाना है। खैर, अब देखना यह है कि केंद्रीय कर्मचारियों का आंदोलन सरकार पर दबाव बनाने में कामयाब होता है या नहीं...सरकार इस आंदोलन को किस तरह से हैंडल करती है? लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि आंदोलन देशव्यापी होगा, जिसका असर सरकार पर यकीनन होगा, ऐसे में कर्मचारियों को खुशखबरी मिलना लगभग निश्चित है।


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पुरानी पेंशन को लेकर यूपी कर्मचारियों का योगी सरकार के खिलाफ हल्लाबोल


लखनऊ. कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी-पुरानी पेंशन बहाली मंच की ओर लखनऊ के ईको गार्डेन में आयोजित आंदोलन में कर्मचारी-शिक्षक नई नई पेंशन स्कीम का विरोध तो करेंगे, साथ ही में नई पेंशन स्कीम के तहत हुए 57 सौ करोड़ के घोटालें का खुलासा भी करेंगे। सोमवार को प्रस्तावित महारैली के स्थल का रविवार को मंच के नेता डॉ. दिनेश चंद शर्मा, हरिकिशोर तिवारी, शिवबरन सिंह तिवारी, इं. जी.एन. सिंह आदि ने दौरा किया।

निरीक्षण के बाद मंच के अध्यक्ष डॉ. शर्मा ने बताया कि कर्मचारियों व अधिकारियों की संख्या को देखते हुए चार और टीमें बनाई गई है, जो अचानक पडऩे वाली जरूरतों को देखेगी। वहीं मंच के संयोजक हरिकिशोर तिवारी ने बताया कि महारैली में नई पेंशन स्कीम के तहत हुए 57 सौ करोड़ के घोटालें का खुलासा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि देश के हर प्रांत में किन राज्यों में कितनी राशि नई पेंशन स्कीम के तहत एकत्र कर उसकी कितनी धनराशि शेयर बाजार में लगाई गई, इसका खुलासा भी किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि नई पेंशन स्कीम में कर्मचारियों के साथ बड़ा धोखा किया जा रहा है। इसका प्रमाण 31 मार्च, 2017 को जारी भारत सरकार के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में सामने आ चुका है, जिसमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017-18 का 700 करोड़ रुपए का अंशदान जमा ही नहीं किया गया।

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि यह महारैली पुरानी पेंशन बचाओ आंदोलन का शंखनाद साबित होगी। इसके बाद अन्य प्रांतों की राजधानियों में इसकी पुनरावृत्ति के बाद राष्ट्रव्यापी आंदोलन के लिए केंद्र और राज्य कर्मचारी एकजुट होकर दिल्ली कूच करेंगे। मीडिया प्रभारी मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि महारैली को रेलवे के बड़े नेता कामरेड शिवगोपाल मिश्रा के साथ मंच के संयोजक हरिकिशोर तिवारी, अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद शर्मा व अन्य संबोधित करेंगे।


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रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस, दशहरे से पहले खाते में आएंगे पैसे


रेलवे कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है। भारतीय रेलवे द्वारा अपने क्लास 3 और क्लास 4 कर्मचारियों को दीवाली का बोनस दिया जा रहा है। रेलवे कर्मचारियों को यह बोनस इस बार 78 दिन का दिया जा रहा है। जिसके अनुसार उनके खाते में 17950 रूपए का बोनस आ रहा है। रेलवे की ओर से कहा गया है कि यह बोनस रेलवे कर्मचारियों को दशहरा से पहले दिया जा रहा है।

 

 

 

सीलिंग लिमिट बढ़ाने से ज्यादा बना बोनस
आॅल इंडिया रेलवे मैन्स फैडरेशन के एसजी मिश्रा व एजीएम एम माथुर के मुताबिक बोर्ड की ओर से कर्मचारियों को पहले 75 दिन का बोनस दिया जा रहा था, लेकिन बाद में 78 में दिन का बोनस देने का निर्णय किया गया। इसके लिए अलग से सप्लीमेंट्री बिल पास करके एक ही दिन में कर्मचारियों के बैंक खातों में बोनस का पैसा डाला जा रहा है। यह बोनस उत्पादकता के आधार पर दिया जा रहा है। पिछले साल सीलिंग की लिमिट 3500 रूपए से बढ़ाकर 7000 रूपए की गई थी जिस वजह से बोनस का पैसा बढ़ा है।

 


इतना बोनस बंटेगा
आपको बता दें कि जयपुर रेल मंडल में क्लास 3 व क्लास 4 के लगभग 10000 कर्मचारी हैं जिनको इस बोनस का लाभ मिलेगा। इस लिहाज से जयपुर रेल मंडल में 17.95 करोड़ रूपए बोनस के रूपए में बांटे जा रहे हैं।

 


राज्य व अन्य केंद्रिय कर्मचारियों को भी बोनस
गौरतलब है कि हर साल राज्य और केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को दीवाली बोनस देती है। ऐसे में माना जा रहा है कि रेलवे के बाद केंद्र व राज्य सरकारे भी जल्द ही अपने कर्मचारियों को आकर्षक बोनस का तोहफा देने वाली हैं।

 

1 से ज्यादा नए कर्मचारी
साल 2019 से रेलवे को 1 लाख से ज्यादा कर्मचारी मिलने वाले हैं। गौरतलब है कि रेलवे की ओर से ग्रुप डी और ग्रुप के 1 से पदों की भर्ती की जा रही है। इन भर्तियों के लिए परीक्षाओं का आयोजन किया जा रहा है। माना जा रहा है कि इन परीक्षा को जल्द से जल्द पूरा करके सफल उम्मीदवारों को नए साल की शुरूआत में नियुक्तियां दे दी जाएंगी।


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