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12वीं पास के बाद ये विकल्प भी होंगे बेहतर साबित, यहां पढ़ें


career courses After 12th pass : कॅरियर और स्कोप को देखते हुए ज्यादातर बच्चे 12वीं कक्षा पास करने के बाद इंजीनियरिंग करने का प्लान बना करते हैं। इस फील्ड में भी इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग करने वालों की संख्या ज्यादा होती है। इसमें सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर दोनों की पढ़ाई होती है। इसमें दोनों ही क्षेत्र में जाने का मौका मिलता है। इस कैटेगरी में सरकारी और प्राइवेट सभी संस्थान नियुक्तियां निकालते हैं। जानें कहां और किस क्षेत्र में रोजगार पा सकते हैं।

इन क्षेत्रों में विकल्प
वैसे तो इंजीनियरिंग के बाद कई मल्टीनेशनल कंपनियों और कॉर्पोरेट में रोजगार के अवसर मिल जाते हैं। लेकिन कंट्रोल सिस्टम, टेलीकम्युनिकेशंस, डिफेंस, रेलवे, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज, ऑल इंडिया रेडियो, पोस्ट एंड टेलीग्राफ, नैनोटेक्नोलॉजी, डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स, कंजयूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट डिजाइन, वायरलेस कम्युनिकेशन आदि में भी काम करते हैं।

चयन प्रक्रिया
इसके लिए आयोजित होने वाली लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर निम्नलिखित प्रसिद्ध कंपनियों में भी अहम पदों पर काम कर सकते हैं।

यहां भी कर सकते हैं आवेदन
भारत संचार निगम लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड, इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन, भारत इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड आदि में मौके मिल सकते हैं। इसके साथ ही कई निजी मल्टी नेशनल कंपनियां हैं जिसमें मौके मिलते हैं।


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Top Career Courses : 12वीं के बाद बेहतर नौकरी के लिए इस प्रकार करें कोर्स का चयन, यहां पढ़ें


Govt Jobs After 12th Pass देश में ही नहीं दुनिया भर में युवा वर्ग बेरोजगारी से त्रस्त हैं। बेरोजगारी के इस जमाने में नौकरी पाना उतना ही मुश्किल है जितना एक खिलाड़ी के लिए ओलिंपिक पदक हासिल करना होता है। सरकारी नौकरी के लिए युवाओं की कतार इतनी बड़ी होती है की एक पद के लिए हजारों की संख्या में आवेदन पत्र भरे जाते हैं। प्रत्येक राज्य में सरकारी नौकरियों के साथ ही प्राइवेट कंपनियों में भी हाल यही है। युवा नौकरी की तलाश में जाता है तो उसके पास सबसे पहले उस पद हेतु वांछनीय योग्यता होनी जरुरी है। शैक्षणिक योग्यता के साथ ही अनुभव भी मांगा जाता है। अच्छे संस्थान से पढ़ाई होने के साथ ही उत्तीर्णांक भी हाई होने चाहिए।


सरकारी नौकरी के लिए चयन प्रक्रिया
सरकारी नौकरी में जाने हेतु प्रत्येक युवा बहुत मेहनत और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करता है। सरकारी नौकरी में जाने के लिए शैक्षणिक योग्यता पूरी होने के साथ - साथ प्रतियोगी परीक्षा और साक्षात्कार की तैयारी होनी जरुरी है। 10वीं पास सरकारी नौकरी शुरू होती है जो डॉक्ट्रेट तक की उपाधि लेने वालों के लिए भी उपयुक्त जॉब सम्बंधित विभाग में निकलती है। 10वीं पास चपरासी से लेकर पुलिस कांस्टेबल की नौकरी के लिए योग्य होता है।

Govt Jobs After 12th Class
सरकारी नौकरी में जाने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए जानना बेहद दिलचस्प होगा की 12वीं के बाद सरकारी नौकरी में कैसे जाएँ। 12वीं पास के लिए सभी विभागों लिपिक और उसे समकक्ष पदों पर में सरकारी नौकरी के लिए आवेदन मांगे जाते हैं। योग्यता के तौर पर सिर्फ शैक्षणिक योग्यता ही नहीं मांगी जारी कुछ पदों के अनुरूप तकनिकी योग्यता भी मांगी जाती है।

career courses After 12th Pass : बारहवीं पास के बाद किये जाने वाले कोर्स की संख्या बहुत ज्यादा है मगर कुछ कोर्सेज ऐसे हैं जिनसे नौकरी पाने में बहुत आसानी होती है। प्रतियोगी परीक्षा सबसे अहम कड़ी होती है नौकरी हासिल करने की, लेकिन कुछ नौकरियां ऐसी भी हैं जिनमें कॉम्पिटिशन बहुत कम होता है। कॉम्पीटीशन कम होने का वांछनीय योग्यता होती है। कुछ कोर्सेज ऐसे होते हैं जिनके संस्था देश में गिने चुने हैं।

स्टेनोग्राफर की नौकरी सबसे आसानी से प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए आईटीआई में भी विषय की पढाई होती है। सभी विभागों में महत्वपूर्ण पद होता हैं स्टेनोग्राफर का। इसके लिए 12वीं पास होना आवश्यक है। स्टेनो एक शीघ्रलिपि की भाषा है जिसे वक्ता के वक्तव्य के समय काम लिया जाता हैं। सभी विभागों में स्टेनोग्राफर के पदों पर भर्ती जारी होती है। इसके बाद दूसरे नंबर पर पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान, इस भर्ती के लिए कम से योग्यता BLIS होना जरुरी है। स्नातक डिग्री लेने के बाद ओपन यूनिवर्सिटी से भी ग्रेजुएशन की डिग्री ली जा सकती है। प्रतियोगी परीक्षाओं में बहुत कम कॉम्पीटीशन है इस भर्ती में।


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JEE Main Exam 2019 : इस तरह करें तैयारी


National Testing Agency (NTA) 6 से 20 जनवरी तक JEE Main (I) exam 2019 आयोजित करेगी। इस अहम परीक्षा की तैयारी करना काफी मुश्किल माना जाता है। परीक्षा में काफी बदलाव देखने को मिलेंगे। इस बार परीक्षा की जिम्मेदारी National Testing Agency (NTA) की है। पहले, इसके आयोजन का जिम्मा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के पास था। परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी और साल में दो बार आयोजित होगी। हालांकि, परीक्षा में बेहतर करने के लिए स्टुडेंट्स को सख्त शिड्यूल का पालन करना होगा।

परीक्षा की तैयारी कैसे की जाए, इसके टिप्स हम आपको बताने जा रहे हैं :

-टाइमटेबल : नियमित रूप से प्रत्येेक दिन 5-6 घंटे पढ़ाई करें। हालांकि, बीच बीच में थोड़ी देर के लिए ब्रेक भी लेते रहें। इससे आप रिफ्रेस फील करेंगे और परीक्षा की तारीख पास आते आते पढ़ाई के घंटे भी बढ़ जाएंगे।

-अपने पाठ्यक्रम को जानें और परीक्षा पैटर्न का पालन करें : पूरे पाठ्यक्रम को जानना और परीक्षा पैटर्न को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। चूंकि यह सब कंप्यूटर पर होने जा रहा है, इसलिए स्टुडेंट्स को इसका अभ्यास करना चाहिए और स्पीड को बढ़ाना चाहिए।

-मॉक टेस्ट : अपनी गति और स्टीकता को जांचने के लिए नियमित मॉक टेस्ट देते रहें। प्रत्येक परीक्षा के बाद विस्तृत परीक्षण विश्लेषण करें।

-संदेह (Doubts) : अपने संदेह (Doubts) नियमित रूप से दूर करते रहें। अंतिम क्षणों तक के लिए उन्हें नहीं रखें और नियमित रूप से सभी प्रश्नों को हल करें।

-एनसीईआरटी : विशेष रूप से रसायन शास्त्र और न्यूनतम, प्रासंगिक, अध्ययन सामग्री के लिए एनसीईआरटी का संदर्भ लें।

-नोट्स : नियमित रूप से नोट्स बनाएं और उनका अध्ययन करते रहें। ऐसा करने से आपको याद करने में आसानी होगी।

-कोचिंग : अगर कोचिंग करने की सोच रहे हैं तो ऐसे इंस्टीट्यूट का चयन करें जो आपके घर के पास हो। इससे सफर और समय के बचत के साथ साथ तनाव भी दूर रहेगा।

-परीक्षा पाठ्यक्रम : JEE वेबसाइट से पाठ्यक्रम की जांच करें और केवल प्रासंगिक चीजों का ही अध्ययन करें। पूरे पाठ्यक्रम को भागों में विभाजित करें और प्रत्येक भाग को तय समय में पूरा करें।

-अपनी शक्तियों और कमजोरियों को विषय वार जानें

यह कभी नहीं करें
-अपने संदेहों को बढऩे नहीं दें

-एक विषय पर कई किताबों का अध्ययन नहीं करें

-अपने दोस्तों से प्रभावित होकर अप्रासंगिक किताबों का अध्ययन नहीं करें

-एक टॉपिक जरूरत से ज्यादा समय नहीं दें

-बिना समय सीमा के कोई परीक्षा नहीं दें

 


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CBSE Board Exam 2019: तीन हिस्सों में होगा क्लास 10 का English Communicative question paper


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की क्लास 10 की परीक्षाएं अगले साल फरवरी-मार्च में होंगी। परीक्षा शुरू होने में चंद महीने ही बचे हैं। इसके लिए स्टुडेंट्स ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे जाएंगे और कितने अंकों का होगा पेपर, इसके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं। इस आर्टिकल में हम आपको यह बताने जा रहे हैं कि क्लास 10 के English Communicative paper में किस तरह प्रश्न पूछे जाएंगे और कितने अंकों का होगा पेपर।

CBSE Class 10 : English Communicative परीक्षा पैटर्न
English Communicative प्रश्न पत्र कुल 80 अंकों का होगा। पेपर में तीन सेक्शन होंगे : रीडिंग, राइटिंग, ग्रैमर (व्याकरण) और लिटरेचर।

Section A : Reading
सेक्शन ए 20 अंकों का होगा। इसमें दो पैसेज आएंगे। एक पैसेज 8 अंकों का होगा, जबकि दूसरा पैसेज 20 अंकों का आएगा। इस सेक्शन के तहत स्टुडेंट को पैसेज को पढ़कर समझना होगा और पूछे गए प्रश्नों के जवाब देने होंगे। यहां महत्वपूर्ण बात यह होगी कि स्टुडेंट्स को इसे ध्यान से पढऩा होगा और विषय को समझना होगा।

Section B : Writing और Grammar
राइटिंग और ग्रैमर सेक्शन 30 अंकों का होगा। इस सेक्शन में कुल 5 प्रश्न पूछे जाएंगे जिनमें से दो राइटिंग सेक्शन को कवर करेंगे, जबकि तीन प्रश्न ग्रैमर पार्ट पर केंद्रित होंगे। राइटिंग पार्ट 18 अंकों का होगा, जबकि ग्रैमर से संबंधित प्रश्न 12 अंकों के होंगे। राइटिंग पार्ट में निबंध, लेटर और स्टोरी राइटिंग से संबंधित सवाल होंगे। ग्रैमर पार्ट में fill in the blanks, वाक्यों की पुन: व्यवस्था (sentence re-arrangement) और omission type सवाल पूछे जाएंगे।

Section C : literature
लिटरेचर सेक्शन 30 अंकों का होगा। इसमें चार सवाल पूछे जाएंगे और प्रत्येक प्रश्न में विकल्प होंगे। स्टुडेंट्स किसी भी विकल्प को छुनकर जवाद दे सकेंगे। लिटरेचर (साहित्य) से क्शन के लिए स्टुडेंट्स को विषयों को अच्छे से पढऩा होगा और साथ ही कविताओं, कथाओं और निर्धारित मूलग्रंथ और उनके लेखकों के नाम याद करने होंगे।


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इन उपायों को अपनाने से एग्जाम में मिलेगी सफलता


बहुत से स्टूडेंट्स और उनके अभिभावक अक्सर शिकायत करते हैं कि क्या करें दिन में 16-17 घंटे पढ़ते हैं फिर भी कुछ पल्ले ही नहीं पड़ा। जो पढ़ते हैं, भूल जाते हैं, जबकि दूसरे स्टूडेंट दिन में 10-12 घंटे या इससे कम समय पढ़कर भी मेरिट लिस्ट में आ जाते हैं। अगर आप भी इन शिकायती विद्यार्थियों या पेरेंट्स में शामिल हैं तो वक्त है अपने पढऩे-लिखने के तरीके में जरा बदलाव लाने का। रट्टा मार स्टाइल छोड़कर इनमें से जो उपाय आपको मुफीद लगें, उन्हें अपनाकर देखें। फर्क महसूस होगा।

स्टिकी नोट्स
कुछ खास चीजें ऐसी होती हैं, जिन्हें हम बार बार भूल जाते हैं। यह कुछ भी हो सकता है। किसी के लिए इतिहास में लिखी महत्वपूर्ण सन् और तारीखें याद करना मुश्किल हो जाता है तो किसी के लिए भूगोल में खास फसलों के लिए जरूरी तापमान या विशेष भौगोलिक स्थानों की ऊंचाई वगैरह। जबकि कुछ विद्यार्थी फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ के फार्मूलों को याद करने के लिए परेशान रहते है। ऐसी चीजों के लिए स्टिकी नोट्स बनाएं और अपनी स्टडी टेबल की सामने वाली दीवार या बेडरूम के साइड की दीवार पर एक जगह चिपकाएं। दिन में कई बार इन पर नजर पड़ेगी तो आपको इन्हें याद रखने में आसानी होगी।

सेकंड ओपिनियन
किसी विषय पर अच्छी पकड़ बनाने और उसे पूरी तरह समझने के लिए सिर्फ अपनी पाठ्य पुस्तक पढऩा काफी नहीं। उस विषय पर एकाध दूसरी किताबें भी पढ़ें, गूगल पर भी विषय की जानकारी लें और फिर अपने नोट्स बनाएं। अलग-अलग जगह से पढऩे पर विषय की विशद् जानकारी होती है और अनजाने में ही रिवीजन भी हो जाता है। सब्जेक्ट पर आपकी पकड़ भी बढ़ती है। आपके नोट्स भी दूसरे स्टूडेंट्स से बिल्कुल अलग बनते हैं। बात है एग्जामिनर की नजर में आप एवरेज स्टूडेंट्स से अलग नजर आएंगे तो नम्बर भी ज्यादा मिलेंगे।

लिख-लिखकर पढ़ें
कई बार हम चीजों को पढऩे के बाद सोचते हैं कि वे हमें याद हो गईं लेकिन वास्तव में ऐसा होता नहीं है। सिर्फ पढ़ लेने से चीजों को लम्बे समय तक याद रखना संभव नहीं होता। बेहतर यह होगा कि जो आप पढ़ते हैं, उसे एक दो दिन बाद अपनी कॉपी से अपनी भाषा में लिखने की आदत भी डालें। इससे तीन फायदे हैं। पहला यह कि विषय का रिवीजन हो जाता है। दूसरा यह कि आपका एक अलग नोट्स तैयार हो जाता है, जो किताबी भाषा से अलग होता है और तीसरा पढ़ते समय आप विषय को रटने की बजाय समझने की कोशिश करते हैं क्योंकि आपको वह लिखना होता है।

प्रजेंटेशन बनाएं
जब आप किसी चैप्टर को अच्छी तरह पढ़ लेने के बाद समझने लगते हैं कि अब आप इसमें से पूछा जाने वाला कोई भी प्रश्न आसानी से हल कर देंगे तो फिर इस काम को बाद के लिए न छोड़ें, उसी दिन अपनी एक नोटबुक में या फिर कम्प्यूटर पर पूरे चैप्टर से जुड़ा पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन बनाएं। फिर दो चार दिन बाद उन प्वाइंट्स को दोहराते हुए उन्हें इलेबोरेट करने की अपनी क्षमता का आकलन करें। इस तरह आप सही मायने में चैप्टर को आत्मसात कर पाएंगे।

कॉमिक स्ट्रिप ट्राई करें
अगर आप क्रिएटिव नेचर के हैं और अक्सर अपनी पेंसिल से ड्रॉइंग वगैरह करते रहते हैं तो अपनी इस कला का इस्तेमाल पढ़ाई लिखाई में करें। दिनभर में जो-जो पढ़ा, शाम को उसकी मुख्य मुख्य बातों को कॉमिक स्ट्रिप की तरह बनाएं। इससे रिवीजन होने के साथ-साथ आपको रेडी टू यूज पावर प्वाइंट्स भी मिल जाएंगे। इनका इस्तेमाल आप जब चाहें लास्ट मोमेंट टच के लिए कर सकते हैं।

छोटी पॉकेट डायरी रखें
कई बार आप अपनी स्टडी के बाद या पहले जब स्कूल-कॉलेज या कहीं और आने जाने के लिए यात्रा कर रहे होते हैं तो आपके दिमाग में अचानक विषय से जुड़ा कोई नया आयडिया क्लिक कर जाता है या दूसरों की बात सुनते-सुनते कोई नई जानकारी मिल जाती है। इन चीजों को तुरंत अपनी पॉकेट डायरी में नोट करने की आदत डालें। वरना बाद में भागदौड़ के दौरान आप इन्हें भूल जाएंगे। यह तरीका बेहद उपयोगी साबित होता है। आयडिया और सूचनाएं बार-बार नहीं मिला करते।


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अगर आप चाहती हैं कि आपके स्टुडेंट्स परीक्षा में अच्छा करें, तो अपनाएं ये टिप्स


आपने देखा होगा कि कुछ प्राइवेट ट्यूटर अपने इलाकों में काफी लोकप्रिय होते हैं और उनके पास पढऩे वालों की भीड़ लगी रहती है, वहीं कुछ के पास गिने-चुने स्टूडेंट ही आते हैं। यह अंतर सिर्फ इसलिए होता है कि कुछ ट्यूटर अपने स्टूडेंट्स को पढ़ाने के लिए कारगर टेक्नीक अपनाते हैं, जिससे उनके विद्यार्थियों का रिजल्ट बेहतर होता है। अगर आप भी चाहती हैं कि आपके स्टूडेंट्स एग्जाम में अच्छा परफॉर्म करें तो इन सुझावों पर अमल करके देखें।

स्टूडेंट्स को डिस्कस करने दें
किसी विषय पर पढ़ा लेने के बाद, आपके स्टूडेंट कितना समझे और कौन सी चीजें समझ में नहीं आईं, इसका पता लगाने के लिए ट्यूशन के अंतिम 15 मिनट स्टूडेंट्स के ग्रुप डिस्कशन के लिए रखें। उनमें से किसी एक को आज की पढ़ाई से जुड़े सवाल दूसरों से पूछने को कहें। इससे आप समझ जाएंगी कि आपके स्टूडेंट्स ने कितना ग्रहण किया और स्टूडेंट्स को यह तरीका रोचक भी लगेगा। आप डिस्कशन से बचने वाले स्टूडेंट्स को भी पहचान जाएंगी और उन पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगी।

फ्रेंडली बनें
किसी भी उम्र के विद्यार्थी हों, उन्हें सपाट चेहरे वाले कठोर स्वभाव के टीचर्स से पढऩा अच्छा नहीं लगता। अपने स्टूडेंट्स के साथ आपका व्यवहार दोस्ताना होना चाहिए, ताकि वे खुलकर अपनी समस्याओं को आपके साथ डिस्कस कर सकें। इतना ध्यान रखें कि वो आपको फ्रेंडली टीचर ही समझें, न कि अपना फ्रेंड।

लिखने को कहें
हफ्ते में दो-तीन दिन ऐसे रखें, जब आप बीते एक-दो दिन की पढ़ाई से जुड़े कुछ सवाल अचानक स्टूडेंट्स से पूछ लें और उन्हें अपनी नोटबुक में लिखने को कहें। इसके बाद उनकी नोटबुक चेक भी करें। आपको अपने स्टूडेंट्स की प्रोग्रेस का भी पता चलेगा और स्टूडेंट्स हर वक्त सजग रहेंगे और ज्यादा पढ़ेंगे। उनका रिजल्ट भी अच्छा होगा।

थोड़ा सा फन भी हो
पढ़ाई-लिखाई का माहौल बनाने के लिए जरा सी हंसी-मजाक भी जरूरी है ताकि स्टूडेंट्स का मूड फ्रेश होता रहे। लगातार कोर्स की बातें करते रहना जरूरी नहीं है। हर दिन एक छोटी सी प्रेरक कहानी, कुछ मजेदार संस्मरण हों तो स्टूडेंट्स जरा ताजगी महसूस करेंगे।

संवाद कायम रखें
आप दनादन पढ़ाती चली जा रही हैं और स्टूडेंट आपकी बात सुनते या नोट करते चले जा रहे हैं लेकिन बाद में आपके पास फीडबैक आता है कि टीचर क्या पढ़ाती है, कुछ समझ में ही नहीं आता। यह आपकी विफलता का बड़ा कारण हो सकता है। जो कुछ पढ़ाएं, बीच-बीच में उससे संबंधित सवाल जरूर पूछती रहें। तभी आपको पता चल सकेगा कि वे आपकी बात समझ रहे हैं या नहीं और तभी स्टूडेंट आपकी बात को गौर से सुनेंगे और समझेंगे।


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RRB Recruitment 2018: ऐसे करें एग्जाम की तैयारी, निश्चित रूप से मिलेगी सफलता


RRB Recruitment 2018: रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड जल्द ही ग्रुप डी की भर्ती परीक्षा आयोजित करवाने वाला है। बताया जा रहा है यह एग्जाम इस माह 17 सितंबर को करवाई जा सकती है। आपको बता दें आरआरबी ग्रुप डी लेवल 1 के 63,000 से अधिक पदों को भरने के लिए यह परीक्षा आयोजित करवाने जा रहा है।

रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट पर एग्जाम से 10 दिन पहले संबंधित डिटेल डाल दी जाएगी। ग्रुप डी के एडमिट कार्ड (RRB Admit Card) परीक्षा की तिथि से चार दिन पहले अपलोड किए जाएंगे। यानि अगर 17 सितंबर से एग्जाम शुरू होती है तो इसके एडमिट कार्ड 13 सितंबर को अपलोड कर दिए जाएंगे। इस परीक्षा में अब ज्यादा दिन शेष नहीं बचे है। आज हम आपको इस परीक्षा की तैयारी कैसे करें इसके बारे में कुछ महत्वपूर्ण टिप्स बताएंगे। अगर आप इन टिप्सों को ध्यान में रखते हुए तैयारी करेंगे तो निश्चित तौर पर आपको सफलता मिलेगी।


इन टॉपिक्स को ध्यान से पढ़ें
रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड जल्द ही ग्रुप डी एग्जाम में मैथमेटिक्स विषय से नंबर सिस्टम, बोडमास, डेसिमल्स, एलसीएम, एचसीएफ, रेशियो, परसेंटेज. टाइम एंड वर्क, टाइम एंड डिस्टेंस, प्रॉफिट एंड लॉस, जियोमेट्री और एलजेबरा आदि से जुड़े सवाल पूछे जाएगे। वहीं जनरल इंटेलिजेंस और रीजनिंग से एनोलोजीस, नंबर सीरीज, कोडिंग एंड डिकोडिंग, रिलेशनशिप्स, डाटा इंटरप्रीटेशन एंड सफीशियंसी, डॉयरेक्शन और क्लासिफिकेशन आदि से सवाल पूछे जाएंगे।

जनरल साइंस से फिजिक्स, केमिस्ट्री, अर्थ साइंसेज, लाइफ साइंसेज और न्यूट्रीशन आदि से जुड़ें सवाल पूछे जाएगे। जनरल अवेयरनेस से साइंस, टेक्नोलॉजी, स्पोर्ट्स, कल्चर, इतिहास और राजनीति आदि से सवाल इस परीक्षा में पूछे जा सकते है।

इन चीजों को रखें ध्यान
परीक्षा की तैयारी करते वक्त एक चीज का हमेशा ध्यान रखें। आप कभी अपने आपको दबाव में महसूस न करें। क्योंकि प्रेशर की वजह से हमसे आता हुए प्रश्न भी गलत हो जाता है। एग्जाम में मोबाइल और टीवी आदि से दूर रहें। ताकि आपको ध्यान इधर उधर डॉयवर्ट न हो।

पढ़ाई के दौरान जो टॉपिक आपको महत्वपूर्ण लगे उसे रजिस्ट्रर नोट कर लें। एग्जाम के अंतिम दिनों में उन्हें दोबारा रिवाइज कर लें।


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UPSC Civil Services Mains Exam 2018 की तैयारी करते वक्त फोलो करें ये टिप्स, गारंटी से मिलेगी सफलता


UPSC Civil Services Mains Examination 2018: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आज यानि शनिवार 14 जुलाई को यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2018 (UPSC Civil Services Preliminary Examination 2018) के नतीजे जारी किया जा चुका है। अभ्यर्थी अपना रिजल्ट यूपीएससी की आॅफिशियल वेबसाइट upsc.gov.in और upsconline.nic.in पर चेक कर सकते हैं। प्री एग्जाम के रिजल्ट के बाद अब बारी आती है UPSC Civil Services Mains Exam की। इस बात से हम—आप सभी वाकिफ है यह एग्जाम देश के सबसे कठिन एग्जाम्स में से एक है और इसमें सेलेक्ट होने वाले उम्मीदवारों का सीधे भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) समेत अन्य अखिल भारतीय सेवाओं के लिये अधिकारियों का चयन होता है।

अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है यूपीएससी मुख्य परीक्षा की तैयारी कैसे करें ? , तैयारी करते वक्त किन—किन बातों का ध्यान रखें। तो आइए जानते है कुछ महत्वपूर्ण टिप्स जो हमे UPSC Civil Services Mains Exam की तैयारी में हेल्प कर सकती है। UPSC Civil Services Mains Exam की संभावित डेट 1 अक्टूबर, 2018 है।

1. सिलेबस को अच्छे ढ़ंग से समझ ले
किसी एग्जाम की तैयारी में सबसे महत्वपूर्ण उसके सिलेबस को समझना होता है। UPSC Civil Services Mains Exam की तैयारी करते वक्त इस पेपर के सिलेबस को अच्छे ढंग से पढ़ लें। फिर एक Strategy बनाए और उसके अनुसार तैयारी करें।

2. न्यूज पेपर को नियमित पढ़नें की आदत डालें
कंरट अफेयर्स से जुड़ें सवालों की तैयारी में न्यूज पेपर एक अहम रोल अदा कर सकता है। इसलिए न्यूज पेपर को नियमित पढ़नें की आदत डालें। साथ ही पेपर में कंरट अफेयर्स से जुड़ी कोई Important Topic आता है उसे एक रजिस्ट्रर में नोट कर लें। यह एग्जाम के वक्त आपके बहुत काम आएगा।

3. NCERT की बुक्स पढ़ें
UPSC की परीक्षाएं छोटे-मोटे बदलावों को छोड़ कर अधिकांशत: एक ही पैटर्न पर चलती है। इन परीक्षाओं में सफल होने के लिए छात्रों को NCERT की किताबें खास तौर पर सोशल साइंस की किताबें जरूर पढ़ी जानी चाहिए। वैसे तो आप इन किताबों को स्कूली दिनों में पढ़ ही चुके होते है लेकिन फिर भी यूपीएससी की तैयारी के हिसाब से ये किताबें बहुत हेल्पफुल है।

4. पिछले कुछ वर्षो के पेपर सोल्व करें
UPSC Civil Services Mains Exam की तैयारी के वक्त आप पिछले 3-4 सालों के क्यूश्चन पेपर भी सोल्व करें। इन पेपर को सोल्व करने से आपको यह पता चल जाएगा कि इस एग्जाम में किस तरह के प्रश्न आते हैं। साथ ही आपको पेपर का स्टैंडर्ड भी पता चल जाएगा।

5. नोट्स बनाकर पढ़ाई करें
मैन एग्जाम की तैयारी करते वक्त जो भी टॉपिक आपको महत्वपूर्ण लगे उसका एक रजिस्ट्रर में नोट कर लें।
यह तैयारी के अंतिम चरण में रिविजन के दौरान आपको काम आएगी। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि किसी भी एक विषय को ज्यादा समय न दें। संतुलन बनाकर चलें, ताकि किसी एक विषय की तैयारी दूसरे विषय में बाधा न बने।

 


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करें एनडीए की तैयारी, सेना में बनाएं करियर


देश की सेवा करने का मौका हर किसी को नहीं मिलता। अगर आप भी थल सेना, वायु सेना या फिर नेवी में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो एनडीए की तैयारी करें। यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन साल में दो बार एनडीए के लिए एंट्रेंस परीक्षा आयोजित करवाती है। 12वीं पासं कर चुके कैंउिडेट्स ही इस परीक्षा में बैठ सकते हैं। आमतौर पर तो साइंस मैथ्स वाले स्टूडेंट्स के लिए ही ज्यादा अवसर होते हैं, लेकिन कॉमर्स और साइंस बायो पढऩे वाले स्टूडेंट्स के लिए भी कई पोस्ट उपलब्ध हैं। वहीं अगर आप ग्रेजुएट हैं तो कम्बाइंड डिफेंस सर्विस एग्जाम देकर सेना के तीन हिस्सों आर्मी, नेवी व एयर फोर्स में से किसी एक में कॅरिअर बना सकते हैं। इस साल 9 सितंबर को एनडीए में प्रवेश के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन होना है। इस एग्जाम में पास होने वाले स्टूडेंट्स को एसएसबी इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। इस तरह एडमिशन प्रक्रिया के जरिए 339 उम्मीदवारों को एनडीए और 44 को नेवल एकेडमी के लिए सलेक्ट किया जाएगा। इनमें से थल सेना के लिए 208, नौसेना के लिए 39 व वायु सेना के लिए 92 पोस्ट हैं। अगर आप एनडीए के जरिए देश सेवा में अपना कॅरिअर बनाना चाहते हैं तो आपको इस परीक्षा से जुड़े सभी अहम पहलुओं के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

पेपर पैटर्न

एनडीए एग्जाम कुल 900 मार्क्स का होता है। इसके दो पार्ट्स हैं - जनरल एबिलिटी और मैथेमेटिक्स। जनरल एबिलिटी के पेपर में 150 सवाल पूछे जाते हैं, यह 600 अंक के होते हैं। वहीं मैथ्स पेपर में 120 सवाल होते हैं जिनके 300 अंक के होते हैं। हर पार्ट के लिए 2.30 घंटे का समय दिया जाता है। इन दोनों पेपर्स को क्वालिफाय करने के बाद आपको एसएसबी इंटरव्यू फेस करना होता है जिसमें आपको फिजिकल, मेडिकल और पर्सनल इंटरव्यू से गुजरना होता है। यह इंटरव्यू भी 900 मार्क्स का होता है।

यह बनाएं स्ट्रैटजी

फिलहाल परीक्षा में दो महीने से भी कम समय रह गया है। एेसे में आपको अपनी तैयारी की सही स्ट्रैटजी और एक स्मार्ट स्टडी प्लान तैयार करना होगा। सही तैयारी की दिशा में सबसे पहला कदम अपने सिलेबस के अहम टॉपिक्स को जानना होता है। एनडीए की परीक्षा में सफल होने के लिए दोनों ही पेपर्स पर आपका कमांड होना जरूरी है। साथ ही आपको अपने इंटरव्यू की तैयारी भी लिखित परीक्षा के साथ ही शुरू कर देनी चाहिए।

पार्ट ए : इंग्लिश

जनरल एबिलिटी में 150 सवाल होते हैं, यह सवाल इंग्लिश और जनरल नॉलेज के सेक्शन्स में बंटे होते हैं। इनके जरिए आपकी बेसिक इंग्लिश स्किल्स और सामान्य ज्ञान व आईक्यू लेवल को परखा जाता है। अगर आपकी बेसिक स्किल्स अच्छी हैं तो आप इस पेपर में अच्छा स्कोर कर सकते हैं।

इसके लिए आपको ग्रामर के बेसिक रूल्स की जानकारी होना और मजबूत रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन और वोकैबलरी जरूरी है। तैयारी के समय को टॉपिक्स के हिसाब से बांटें और सभी टॉपिक्स को पर्याप्त समय दें।

पार्ट बी : जनरल नॉलेज

जनरल नॉलेज के सेक्शन में 400 मार्क्स के 100 सवाल होते हैं। यहां पूछे जाने वाले सवाल साइंस से लेकर इंडियन हिस्ट्री, फिजिक्स, ज्योग्राफी, केमिस्ट्री और करंट ईवेंट से जुड़े होते हैं। इसमें स्पोर्ट्स, राजनीति, फाइनेंस, बैंकिंग, टैक्स, आरबीआई, आर्ट्स, अवॉर्ड्स, लिटरेचर जैसे क्षेत्रों से जुड़े करंट ईवेंट‌्स के सवाल भी शामिल होते हैं। नियमित रूप से अखबार पढ़ना और न्यूज चैनल देखना आपकी जनरल नॉलेज को मजबूत बनाएगा।

फिजिक्स और केमिस्ट्री के लिए 12वीं की किताबोंं से मदद ले सकते हैं। बायोलॉजी, ज्योग्राफी, हिस्ट्री, पॉलिटिकल साइंस और इकोनॉमिक्स के लिए 10वीं क्लास की किताबें पढ़ें। फिजिक्स में टॉपिक्स के कॉन्सेप्ट एकदम क्लीयर रखें। केमिस्ट्री में एलिमेंट्स, कम्पाउंड्स और मिक्चर्स के क्लासिफिकेशन की बेसिक नॉलेज जरूरी है।

मैथेमेटिक्स एग्जाम

एनडीए परीक्षा के लिए पेपर वन में पूछे जाने वाले सवाल मैथ्स के कई खास टॉपिक जैसे कैल्कुलस, डिफरेंशियल इक्वेशन, ट्रिग्नोमेट्री, एल्जेब्रा, मैट्रिक्स एंड डिटरमिनेंट, एनालिटिकल ज्योमेट्री, स्टैटिस्टिक्स से जुड़े होते हैं। इस पेपर से एग्जामिनर आपकी मैथ्स स्किल्स और सवालों को हल करने में आपकी गति और एक्यूरेसी को चेक करता है। सबसे पहले बेसिक्स को क्लीयर करें। फॉर्मूला, मैथड और कैल्कुलेशन्स को शुरुआत से मजबूत बनाएं। 10वीं और 12वीं की किताबों को पढ़ना फायदेमंद होता है।

कम समय में ज्यादा सवाल हल करने के लिए कॉन्सेप्ट‌्स की समझ व प्रैक्टिस जरूरी है। इसके लिए ज्यादा से ज्यादा सैंपल पेपर सॉल्व करें और मॉक टेस्ट दें। जरूरी फॉर्मूलों के नोट्स पहले दिन से तैयार करें। इस परीक्षा में 150 मिनट में मैथ्स के 120 सवाल सॉल्व करने होते हैं। इसलिए आपको सवालों की श्रेणी को ध्यान में रखते हुए प्रभावी टाइम मैनेजमेंट स्ट्रैटजी अपनानी होगी। यहां मेंटल मैथ्स पर जोर देना एक अच्छा तरीका हो सकता है क्योंकि इनमें से ज्यादातर सवाल आप मानसिक रूप से सॉल्व करते हैं जिसमें समय कम खर्च होता है।

इंटरव्यू की तैयारी

लिखित एग्जाम पास करने के बाद आपको सर्विस सलेक्शन बोर्ड के इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। यह आपकी इंटेलिजेंस और पर्सनैलिटी को परखने के लिए लिया जाता है। इंटरव्यू पूरे 900 मार्क्स का है और आपका ओवरआॅल स्कोर इस पर निर्भर करता है। इसकी तैयारी लिखित परीक्षा के साथ ही शुरू कर दें। इंटरव्यू में आपके अंदर आॅफिसर जैसी क्वालिटीज जैसे कि जिम्मेदार रवैया, परिस्थिति को समझकर रिएक्ट करना, टीमवर्क आदि को परखा जाता है। ऐसे में सेल्फ कॉन्फिडेंस बेहद जरूरी है। अपने शहर की जानकारी के साथ देश के इतिहास, राजनीति और सेना से जुड़ी डिटेल्ड नॉलेज आपको होनी चाहिए। अपनी फिजिकल फिटनेस पर ध्यान दें।


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ऐसे करें UPSC Mains Exam की तैयारी, निश्चित रूप से मिलेगी सफलता


साल 2018 की यूपीएससी प्री परीक्षा का परिणाम अगले माह तक जारी हो सकता है। प्री में सफल होने वाले स्टूडेंट्स मेंस पेपर की तैयारी करेंगे। इस परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों का चयन IAS, IPS और IFS के पदों पर किया जाएगा। वैसे एक तरह से यह देश की सबसे कठिन एग्जामों में से एक है और इसमें सफल होने के लिए छात्रों को बहुत मेहनत की आवश्यकता होती है।

लेकिन ऐसा भी नहीं है कि ढ़ंग से मेहनत करने के बाद अभ्यर्थी को सफलता नहीं मिले। आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे है, जिनको फोलो करके आप इस परीक्षा में सफल हो सकते है। पहली बार में यूपीएसी की परीक्षा के पास करने वाली 2015 की यूपीएससी टॉपर रहीं टीना डाबी ने तैयारी के कुछ टिप्स बताए हैं। आपको बता दें टीना ने महज 22 साल की उम्र में पहली बार में यूपीएससी की परीक्षा पास की थी। इसके अलावा हाल ही में उन्हें 'प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया गोल्ड मेडल' अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है।

इन टिप्स को करें फोलो

— टीना का कहना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है। इसे हासिल करने के लिए आपको शुरुआत से कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।
— आपको शुरुआत से अपने गोल फिक्स करना होगा और फिर उसके हिसाब से अपना टाइम टेबल सेट करना होगा।
— टीना का मानना है कि जीवन में हार-जीत तो चलती रहती है। असफलता से कभी घबराना नहीं चाहिए। एक तरह से असफलता इंसान को आगे बढ़ने के लिए और मजबूत बनाती है।
— किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए इंसान के अंदर धैर्य और अनुशासन का होना भी बहुत जरूरी है। ये दोनों चीजें आपको इस परीक्षा के दौरान बहुत काम आएगी।
— यदि आप किसी विषय के नोट्स बनाकर पढ़ाई करते हो तो यह आपकी तैयारी को बेस्ट फार्मूला है। वहीं
टीना का भी मानना है कि ये एक साइंटिफिक फैक्ट है जब आप अपने हाथ से लिखकर कुछ याद करते हैं तो वह आपको लंबे समय तक याद रहता है।
— करंट जीके के लिए अभ्यर्थी को नियमित अखबार पढ़ना चाहिए, साथ ही कुछ समय तक न्यूज चैनल भी देखने चाहिए। पेपर बढ़ते वक्त यदि आपको यह लगता है यह चीज इंपोर्टटेंट है तो उसे अंडरलाइन कर लें।

— इन सभी छोटी-छोटी टिप्स को यदि आप फोलों करेंगे तो इसे आपको यूपीएससी एग्जाम्स की तैयारी में बहुत हेल्प मिलेगी।


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tips and tricks : इन आसान ट्रिक्स से सॉफ्टवेयर बनाना हुआ आसान


इंजीनियर. एआई ने कस्टम डिजिटल प्रोडक्ट बनाने के लिए दुनिया के पहले मानव-सहायता युक्त एआई बिल्डर की भारत में लॉन्च करने की घोषणा कर दी है। बिल्डर असेंबली-लाइन अप्रोच काम में लेता है। यह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) और दुनिया के बेहतरीन डिजाइनर्स और डवलपर्स की क्राउड सोस्र्ड टीम का कॉम्बिनेशन ऑफर करता है। यह डिजिटल प्रोडक्ट्स को दोगुनी तेजी और पारंपरिक सॉफ्टवेयर डवलपमेंट की लागत के मुकाबले एक तिहाई से भी कम कीमत पर तैयार करने में मदद करता है।

इनोवेशन्स तक आसान पहुंच
एआई सेवाओं और उपायों का सशक्त मंच डवलपर्स और भागीदारों द्वारा किए जाने वाले इनोवेशन्स को तेज रफ्तार और ज्यादा आसान पहुंच वाला बनाता है। जनवरी 2012 में अपनी स्थापना से लेकर अपने संसाधनों से चल रही इंजीनियर.एआई ग्लोबल कंपनी है। इसका मुख्यालय सैन फ्रांसिस्को है और दिल्ली व लंदन में इसके कार्यालय हैं। बिल्डर को सबसे पहले चुनिंदा भागीदारों के लिए बीटा में लॉन्च किया गया था जिनमें रैपापोर्ट, इरोज तथा वर्जिन यूनाइट के साथ-साथ पोप्क्सो, ड्रापिट व फंडआरएक्स जैसी छोटी और मंझोली कंपनियां भी शामिल हैं।

मानवीय रचनात्मकता बढ़े
सीरियल एंटरप्रोन्यर्स सचिन देव दुग्गल और सौरभ धूत द्वारा स्थापित कंपनी इस मकसद से बनाई गई थी कि हर कोई बिना कोडिंग की जानकारी के अपने सपनों को साकार कर सके और किसी भी विचार-अवधारणा को बिना समय, धन या संसाधन की बर्बादी के वास्तविक रूप दिया जा सके, जो लोगों को आगे बढऩे में मदद कर सके।

बिना कोडिंग के बनाएं एप
इंजीनियर.एआई के सह-संस्थापक सचिन देव दुग्गल बताते हैं कि बिल्डर सॉफ्टवेयर तैयार करने की प्रक्रिया को रीडिजाइन करता है, ताकि कोई भी व्यक्ति अपने आइडिया को एप के रूप में साकार कर सके। यह कोड डिजाइन के इर्द-गिर्द गढ़े गए रहस्यों को मिटाता है और इनोवेटर्स को पारदर्शिता और नियंत्रण देता है। इससे काम में काफी आसान हो गई है।

पांच चरणों में सॉफ्टवेयर तैयार
बिल्डर सहज ज्ञान युक्त मंच है जो किसी को भी सिर्फ पांच आसान चरणों में सॉफ्टवेयर तैयार करने के लिए आवश्यक जटिल कोड को असेम्बल करने में मदद करता है-

चरण 1 - किसी विचार-अवधारणा के साथ शुरुआत करें।

चरण 2 - बताए गए फीचर्स में से चुनें या अपनी तरफ से जोड़ें। एआई 'बिल्ड कार्ड' जोड़ेगा जो अधिकतम मूल्य और अनुमानित डिलीवरी तिथि तय करता है।

चरण 3 - बिल्डर की सॉफ्टवेयर तैयार करने की प्रक्रिया एआई को पहले से मौजूद कॉम्पोनेन्ट की लाइब्रेरी का लाभ उठाने और अनूठे कॉम्पोनेन्ट के लिए क्राउड सोस्र्ड ग्लोबल टीम का प्रबंधन करने में मदद करती है।

चरण 4 - यह पहले दी गई गारंटी के मुताबिक आवश्यकता अनुरूप जल्द और बेहद सस्ता उत्पाद मुहैया करवाता है।

चरण 5 - यह मंच मौजूदा फंक्शनैलिटी सुनिश्चित करने के लिए आपके उत्पाद को होस्ट और अपग्रेड कर सकता है।


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Exam Preparation Tips किसी भी परीक्षा में असफल होने के पीछे ये होती हैं ख़ास वजह, जरूर पढ़ें


Competitive exam preparation tips बोर्ड परीक्षा और या प्रतियोगी परीक्षा, सभी अपनी जगह लाइफ के लिए अच्छी अहमियत रखते हैं। देखा जाए तो बोर्ड परीक्षा में अभिभावकों की लापरवाही भी बच्चों पर भारी पड़ती है। बच्चों के द्वारा की गई गलतियों को नजरंदाज करना और उनके द्वारा मांगी गई सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाना भी उनकी पढ़ाई में बाधक बनती है। ऐसा ही प्रतियोगी परीक्षा में देखने को मिलता है। बच्चे द्वारा 5 साल की तैयारी के बावजूद सरकारी नौकरी के लिए चयन न हो पाना या प्रतियोगी परीक्षा में उत्तीर्ण न हो पाना शर्म की बात तो है ही लेकिन इसके पीछे की वजह न जानकर किस्मत को दोष देना शायद गलत होगा।

 

असफलता के कारण Reason Of Fail in Competitive exam
बोर्ड एग्जाम में बच्चों द्वारा स्कूल के अलावा घर पर भी पढाई की जाती है और उन पर अभिभावक की निगरानी हमेशा ही रहती है। बच्चे का मन पढ़ाई में कितना लग रहा है इसकी जाँच उसके रिपोर्ट कार्ड से पता की जा सकती है। टेस्ट से लेकर अर्द्धवार्षिक परीक्षा तक प्राप्तांक में गिरावट के पीछे का रहस्य जानना चाहिए। अभिभावक अपने बच्चे रिपोर्ट कार्ड के साथ घर पर बच्चे का स्वभाव और रूचि को जरूर पहचानें। स्कूल में उसके दोस्त कौन और कैसे हैं? बच्चे में लव अफेयर के कारण चिड़चिड़ापन देखने को मिलता है और उसका सीधा असर Exam Result पर पड़ता है। बच्चे को स्कूली शिक्षा तक मोबाइल के साथ-साथ दिखावे वाली सुविधाओं से दूर रखना चाहिए।

 

Competitive Exam Preparation Tips In Hindi
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी गांव से शहर की ओर आते हैं। शहर वाले भी खुद के घर पर तैयारी न करके पुस्तकालय ज्वाइन करते हैं। कोचिंग संस्था और कॉलेज में 70 प्रतिशत अभ्यर्थी पढ़ाई के प्रति इच्छुक है और 30 प्रतिशत वो अभ्यर्थी है जिनके अभिभावक उन्हें जबरदस्ती पढ़ाई के लिए भेज रहे हैं। उन 30 प्रतिशत अभ्यर्थियों के लिए कहना गलत होगा की वो पढाई नहीं करते, क्योंकि उनकी पढ़ाई के प्रति रुचि नहीं है। उदाहरण के लिए किसी बच्चे की रूचि तकनिकी,सिंगिंग, गेम, एथलेटिक्स में है और अभिभावक चाहते हैं वो डॉक्टर बनें तो मुमकिन नहीं है। मगर कुछ बच्चे पढ़ाई के लिए गाँव से आते हैं और शहर की चकाचौंध में पागल हो जाते हैं, घरवालों द्वारा मासिक खर्चा भेजा जाता है जिसे अपने शौक पर खर्च कर दिया जाता है। 40 प्रतिशत अभ्यर्थी लव अफेयर में अपनी पढ़ाई से दुरी बना लेते हैं और वो एक ही कोर्स को पूरा करने में सालों लग जाते हैं। कॉलेजों में पेपर अंतिम वर्ष तक पास नहीं हो पाते। अभ्यर्थी/विद्यार्थी परीक्षा की संस्था में प्रवेश के साथ ही नए दोस्त बनाता है। दोस्त जिस प्रकार के होंगे आपको बदल देंगे चाहे वो अच्छे हो या बुरे। घरवाले बच्चे का एडमिशन करवाने के साथ ही नौकरी के सपने देखने लगते है मगर बच्चा किस दिशा में जा रहा इसका आंकलन वो नहीं करते।

 

ऐसे करें प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी How To Prepare for competitive exam
प्रतियोगी पपरीक्षा की तैयारी के समय लव अफेयर से दूर रहें। अपना एक क्रियाकलापों का टाइम टेबल बना लें। पढ़ाई के लिए जब घर से निकले हैं तो अपना पूरा ध्यान पढ़ाई में ही लगाएं, करियर बनने के बाद एन्जॉय करने का समय बहुत होगा। जो सपना लिए आप गाँव या शहर से कोचिंग तक पहुंचे हो उसे पूरा करने की ठान लें। कोचिंग और परीक्षा तैयारी के समय में दोस्ती से जितनी हो सके दुरी बना लें, क्योंकि करियर बनने के बाद जहाँ मर्जी समय व्यतीत कर सकते हैं। अभिभावक व्यस्त दिनचर्या में से कुछ समय निकालकर बच्चे को संभालते रहें और संस्था में बच्चे की तैयारी का जायजा अवश्य लेवें। जिस प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं उसका पाठ्यक्रम देखकर संबंधित विषय की पस्तकें खरीदें, याद रहें विस्तृत विषय का अध्ययन परीक्षा के लिए बेहतर होगा। परीक्षा पैटर्न से संबंधित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन करने चाहिए क्योंकि किसी परीक्षा मार्क्स कम आए हैं तो किसी परीक्षा में चयन भी हो सकते हैं। सामान तैयारी में सभी परीक्षा देनी चाहिए। भाग्य को 10 प्रतिशत और मेहनत को 90 प्रतिशत अंक देकर तैयारी करनी चाहिए।


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कॉलेज, कोचिंग और स्टूडेंट्स, लव-लस्ट-अफेयर्स और ब्लैकमेलिंग


देश और दुनिया में घटित हो रही घटनाओं से हम सभी वाकिफ हैं, ऐसा हमारे साथ भी हो सकता है लेकिन इस बात से हम दूर रहते हैं। परिवार के सभी जागरूक सदस्यों को उन बच्चों पर नजर रखनी चाहिए जो स्कूल, कॉलेज या कोचिंग में जा रहे हैं। देखा जाए तो पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव से कोई भी महफूज नहीं है लेकिन स्वयं को और परिवार को इन सब मुसीबतों से बचाने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। स्कूल में जा रहे छोटे बच्चों के साथ अध्यापक कहीं गलत हरकत तो नहीं कर रहे। बच्चों को स्कूल से आने के बाद उनसे स्कूल में पढ़ाई और अन्य घटना के बारे में जरूर पूछे, अध्यापक का रवैया जरूर जानने की कोशिश करें।

ऐसे पहचानें
बच्चों के बारे में जानना बेहद ही आसान है। अभिभावक अपने बच्चे की मानसिकता और व्यवहार को देखें और उसके पीछे की वजह को जानने की कोशिश करें। बच्चे की पढ़ाई में रुचि कम और उत्तीर्णांक में गिरावट कैसे हो रही है। बच्चा स्कूल/ कॉलेज जा रहा है या पढ़ाई का नाम लेकर कहीं दूसरी जगह तो नहीं जा रहा। देखा जाए तो अभिभावक को हफ्ते या महीने में कुछ दिन निकालकर बच्चे के आने और जाने के बारे में जानना चाहिए। बच्चे के घर से निकलकर स्कूल जाने तक रास्ते में होने वाली सभी एक्टिविटी को नोट करें। परीक्षा में कम अंक आना और स्वभाव में चिड़चिड़ापन होना लव अफेयर की शुरुआत या निशानी हो सकती है। बच्चों को स्कूल लाइफ में अगर मोबाइल फ़ोन से दूर रखा जाए तो अच्छा रहता है।

कॉलेज/कोचिंग लाइफ
कॉलेज या कोचिंग में जाने वाले स्टूडेंट्स लव अफेयर में फंस जाते हैं और पढ़ाई से दूरी बनाने लगते हैं कुछ विद्यार्थी राजनीति को करियर के तौर पर चुन लेते हैं। कॉलेजों में अक्सर जूनियर और सीनियर में कोई फासला नहीं होता लेकिन वही सीनियर पास-आउट होने के बाद पढ़ाने लगते हैं। अपनी हम उम्र के विद्यार्थियों को पढ़ाना और वहीं पर प्रेम प्रसंग चलाना शिक्षक की मर्यादा को लांछन लगाता है। अभिभावकों को कॉलेज शिक्षक और कॉलेज में बच्चे की एक्टिविटी को ध्यान रखना चाहिए। किसी भी अनहोनी के लिए बच्चे के साथ-साथ अभिभावक भी जिम्मेदार होता है। अपनी बेटी/बेटे को शिक्षा के लिए आजादी देनी चाहिए लेकिन यह भी नहीं होना चाहिए हम लापरवाह हो जाएं।

ऐसी तमाम घटनाएं देखने को मिलती है
आए दिन अखबारों में हम पढ़ते हैं, "मध्य प्रदेश में कोचिंग संचालक और अध्यापक ने छात्रा का अपहरण कर लिया", "उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में शिक्षक ने छात्रा को बनाया था हवस का शिकार, गर्भवती होने पर हुआ खुलासा"। ये तो कुछ ही उदाहरण हैं जो समाज के सामने आए, हमारे आसपास ऐसे बहुत से मामले हैं जिनमें छोटी स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक जांच के घेरे में आ चुके हैं। यही नहीं बच्चे हॉस्टल में भी सुरक्षित नहीं है। हॉस्टल लाइफ में वार्डन द्वारा छात्राओं को शिकार बनाने की भी कई घटनाएं सामने आई हैं तो छात्राओं द्वारा रातभर हॉस्टल से गायब रहने की भी घटनाएं आम बात लगने लगी हैं।

इनसे रहें सावधान
बच्चों को स्कूल या कॉलेज ले जाने वाले वाहन और उसके चालक के बारे में पुख्ता जानकारी रखें। अपहरण और रेप की घटनाओं में भी कई मामले वाहन चालकों के आए हैं। अभिभावकों द्वारा बच्चों से वाहन चालक की गतिविधि के बारे में भी जानकारी लेनी चाहिए। पडोसी छात्र के साथ अपनी बिटिया को स्कूल या कॉलेज भेजने में थोड़ी सावधानी बरतें। जिस कॉलेज में आपकी बेटी पढ़ाई कर रही है उस कॉलेज में कोई गलत गतिविधियां तो नहीं हो रही। इसी तरह की छोटी-छोटी लेकिन महत्वपूर्ण सावधानियां रखकर हम अपने बच्चों को सुरक्षित रख सकते हैं।


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RPF Exam Preparation Tips रेलवे सुरक्षा बल भर्ती परीक्षा की ऐसे करें तैयारी, शत-प्रतिशत मिलेगी सफलता


RPF Exam Preparation Tips रेलवे में बम्पर भर्तियों और देश में बेरोजगारी प्रतिशत को देखते हुए प्रतियोगी परीक्षा में अपना स्थान सफलता के कॉलम में दर्ज करवाना ही अपने आप में एक चुनौती से कम नहीं। परीक्षा पास करना खुद अभ्यर्थी के लिए एक पदक जितने जैसा हैं। रेलवे की भर्ती में देश भर से एकत्रित आवेदनों की संख्या एक करोड़ से ऊपर जाने लगी हैं। हाल ही ग्रुप डी में आवेदनों की संख्या को देखें तो रेलवे सुरक्षा बल की भर्ती में भी आवेदन की संख्या एक करोड़ के करीब जा सकती है। RPF Syllabus की बात करें तो रेलवे पुलिस स्पेशल फोर्स और उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा के लिए भी पाठ्यक्रम समान हैं।


RPF ने करीब 9500 रिक्तियों के लिए भर्ती की अधिसूचना जारी की है और योग्यताधारी उम्मीदवार 1 जून से आवेदन पत्र भर सकते हैं। अभ्यर्थी आवेदन करने के साथ ही अपनी पढ़ाई पाठ्यक्रम अनुरूप करना शुरू कर देवें। रेलवे द्वारा परीक्षा का कार्यक्रम एक महीने पहले जारी किया जाता हैं। परीक्षा ऑनलाइन माध्यम से CBT आधारित होगी। RPF exam date के लिए अभ्यर्थियों को बोर्ड के नोटिफिकेशन का इंतजार करना होगा।

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RPF Syllabus 2018
रेलवे पुलिस बल की भर्ती परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) को पास करना होगा। इस लिखित परीक्षा में 120 प्रश्न पूछे जायेंगे जिन्हें हल करने के लिए 90 मिनट की का समय दिया जायेगा। अभ्यर्थी को रफ कार्य के लिए पेपर भी मुहैया करवाया जायेगा। प्रत्येक सही उत्तर के लिए 1 अंक दिया जाएगा और प्रत्येक गलत उत्तर के लिए नकारात्मक अंकन किया जायेगा। गलत उत्तर के लिए 1/3 के तहत नेगेटिव मार्किंग की जाएगी।


RPF General Knowledge : 50 Marks
अभ्यर्थियों को सामान्य जागरूकता की भाग की तैयारी के लिए भारतीय इतिहास, सामान्य राजनीति, भारतीय संविधान, कला और संस्कृति, भूगोल, अर्थशास्त्र जैसे सभी विषयों को पढ़ लेना चाहिए। नवीनतम समसायिकी से भी प्रश्न पूछे जायेंगे जो देश-विदेश के घटनाक्रम और देश में संचालित नवीनतम योजनाओं पर आधारित होंगे।


गणित : 35 Marks
दसवीं कक्षा तक के पाठ्यक्रम में आने वाली गणित विषय से भी प्रश्न पूछे जायेंगे। संख्या प्रणाली, दशमलव भिन्न और अंशों, सरलीकरण, प्रतिशत, लाभ और हानि,बट्टा, औसत, अनुपात-समानुपात, उम्र, ल.स.- म.स, समय-चाल-दुरी, सरलीकरण और ब्याज पर आधारित प्रश्न होंगे। गणित विषय में प्रश्न प्रथम कक्षा से लेकर दसवीं कक्षा तक के पाठ्यक्रम से लिए जाएंगे। आयु गणना और बारम्बारता सारणी भी दी जा सकती है।

 

रीजनिंग : 35 Marks
अभ्यर्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषय और प्रश्न पत्र का वो भाग है जिसे भाग्य के साथ न जोड़कर खुद की तैयारी और मेहनत के साथ हल करके पुरे मार्क्स हासिल किये जा सकते हैं। श्रृंखला, वर्णमाला श्रृंखला, कोडिंग डिकोडिंग, एनालॉजी, दिशानिर्देश, संख्या रैंकिंग, अंकगणितीय तर्क, घड़ियों और कैलेंडर, रक्त संबंध, क्यूब्स और पासा, दर्पण छवियां, एम्बेडेड आंकड़े इत्यादि। प्रश्न पत्र के इस भाग में अभ्यर्थी को संयम रखना होगा और प्रश्न को धैर्य के साथ दो बार पढ़ना होगा। हल करने के बाद भी उत्तर की जांच करनी होगी, इसके लिए प्रश्न को उत्तर की जांच के जरिये बनाना होगा। उदाहर के लिए रिलेशन वाले प्रश्न में, घडी-कैलेंडर वाले प्रश्न आदि में।

सबसे जरुरी बात अभ्यर्थियों को ध्यान में रखनी चाहिए की सामान्य ज्ञान थोड़ा डिफिकल्ट और उम्मीद से कहीं दूर है लेकिन गणित, रीजनिंग, और तर्क शक्ति खुद की मेहनत के अनुरूप मार्क्स देगी। अतः सबसे पहले प्राथमिकता प्रश्न पत्र के उस भाग को देवें जिनकी तैयारी करने पर उस भाग के पुरे मार्क्स हासिल किए जा सके। सामान्य ज्ञान और


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ऐसे करें Rajasthan police constable exam की तैयारी, शत प्रतिशत मिलेगी कामयाबी


Rajasthan police constable Re-exam राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल सामान्य/ऑपरेटर, वाहन चालक, बैंड, घुड़सवार आदि के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए थे। भर्ती के लिए पहले विज्ञापन में पदों की संख्या 5300 के करीबन थी जिसे 13142 पदों के रूप में बदल दिया गया। भर्ती के लिए पुनः आवेदन प्रक्रिया शुरू की गई। इसबार राज्य में विधानसभा चुनाव को देखते हुए और बेरोजगारी के चलते यवाओं में भर्ती न खुलने पर रोष को देखते हुए सभी सरकारी नौकरियों में आयुसीमा बढ़ा दी गई। राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती में आयुसीमा में छूट दी गई।

 

ऐसे करें राजस्थान पुलिस कांस्टेबल परीक्षा की तैयारी
राजस्थान पुलिस कांस्टेबल परीक्षा ऑनलाइन माध्यम से ली जानी थी लेकिन आयोजन के पहले चरण में ही असफल रही, ऑनलाइन परीक्षा में हैकिंग और अंगूठे के क्लोन जैसी घटनायें देखने को मिली। विभाग ने राजस्थान पुलिस परीक्षा को रद्द कर दिया और पुनः परीक्षा की घोषणा कर दी। राजस्थान पुलिस पुनः परीक्षा अगले महीने या अगस्त महीने के मध्य तक आयोजित की जा सकती है। राजस्थान पुलिस परीक्षा के लिए दोबारा से प्रवेश पत्र जारी किये जायेंगे। परीक्षा ऑफलाइन माध्यम से आयोजित की जाएगी।.

 

Rajasthan Police Exam Preparation Tips
राजस्थान पुलिस कांस्टेबल लिखित परीक्षा 75 अंकों की होगी। 30 अंकों के प्रश्न गणित और रीजनिंग से सम्बंधित पूछे जायेंगे। 15 अंकों के सामान्य विज्ञान और कम्प्यूटर तकनिक शिक्षा से सम्बंधित प्रश्न पूछे जायेंगे। 30 अंकों के राजस्थान सामान्य ज्ञान से सम्बंधित प्रश्न पूछे जायेंगे। सभी प्रश्न बहुविकल्पीय होंगे। गलत उत्तर के लिए नकारात्मक अंकन होगा। अभ्यर्थी को परीक्षा के समय तनाव बिलकुल नहीं रखना चाहिए। सामान्य ज्ञान अनंत है किसी भी जगह से पूछा जा सकता है। सबसे पहले अभ्यर्थी रीजनिंग और गणित को चुनें और उसके बाद सामान्य विज्ञान और अंत में सामान्य ज्ञान। क्योंकि रीजनिंग और गणित सबसे ज्यादा समय लेती है इसलिए जिन अभ्यर्थियों की अच्छी तैयारी है वो रीजनिंग और गणित सबसे पहले चुनें। सामान्य ज्ञान में सबसे कम समय लगता है इसलिए उसे समय की उपलब्धता के अनुसार चुनें। ओएमआर शीट भरते समय ये जरूर ध्यान रखें की पहले किसी भी पार्ट को हल कर लेवें और बाद में ओएमआर शीट भरें। कई बार जल्दबाजी में प्रश्न सही से नहीं पढ़ा जाता और गलत भरा जाता है। किसी भी प्रश्न के उत्तर में तुक्के नहीं लगाएं अगर कन्फर्म सही है तो ही विकल्प चुनें क्योंकि नकारात्मक अंकन से परिणाम प्रभावित होगा।


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इंटर्नशिप करने से पहले जान लें ये खास बातें


प्रोफेशनल पढ़ाई के इस दौर में नौकरी से पहसे इंटर्नशिप करना बहुत जरूर होता है। क्यों कि आप जिस प्रोफेशन में जाना चाहते हैं उसमेें आपको जॉब तभी मिलेगी जब आप उस प्रोफेशन के बारे में पहले से जॉब वर्क की नॉलेज रखते होंगे। ऐसे में पढ़ाई करने के दौरान और उसके बाद इंटर्नशिप करना बेहद जरूरी होता है। इस लिए हम आपको कुछ टिप्स बता रहे हैं जिससे आपको अच्छी इंटर्नशिप मिल सकती है।

इंटर्नशिप के लिए आवेदन करने से पहले ही सारी प्लानिंग कर लें। अगर आप अपनी पसंदीदा कंपनी में इंटर्नशिप करना चाहते और काम सीखना चाहते हैं तो आपको हमेशा उस कंपनी के बारे में अपडेट रहना होगा। उस कंपनी की वेबसाइट और सोशल मीडिया पेज को देखते रहने से आपको उस कंपनी से जुड़ी सारी जानकारी मिलती रहेगी।

अगर आप किसी कंपनी में इंटर्नशिप के लिए अप्लॉय कर रहे हैं तो आपको उस कंपनी के बारे में सबकुछ पहले से ही पता कर लेना चाहिए। आप अगर किसी कंपनी के लिए अप्लाई करने की चाह रखते हैं तो वहां आपसे कंपनी से जुड़े सवाल पूछे जा सकते हैं। ऐसे में उस कंपनी का बैकग्राउंड आपको जरूर पता होना चाहिए। इससे आपको फायदा मिलेगा।

नौकरियां और इंटर्नशिप कवर लेटर और रिज्यूमे के दम पर मिलती है। ऐसे में किसी जानकार या फिर विशेषज्ञ की मदद से अपना रिज्यूमें और कवर लेटर तैयार करें। याद रखें रिज्यूमे में खुद से जुड़ी सभी जानकारियां सही व सटीक होनी चाहिए। कोई भी गलत जानकारी न लिखें।

इस बात का ध्यान रखें कि रिज्यूमे में स्पेलिंग और ग्रामर की गलतियां बिल्कुल न करें। स्पेलिंग और ग्रामर की गलतियों से रिज्यूमे पर फर्क पड़ सकता है। आप अपना ब्यौरा सही ग्रामर व स्पेलिंग में लिखें। इंटर्नशिप के दौरान हमेेशा पॉजिटिव रहें, इंटर्नशिप के बाद पॉजिटिव रहने पर नौकरी की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।


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सेल्फ हेल्प - अपना थीम्ड कैफे शुरू करने के लिए अपनाएं ये खास टिप्स


बहुत से लोगों का यह सपना होता है कि वह अपना खुद का एक थीम्ड कैफे खोलें। हालांकि, हर किसी का यह सपना पूरा नहीं होता और अगर होता भी है तो वह इसमें सफल नहीं हो पाते। अगर आप भी ऐसा करना चाहते हैं तो आपको अपने सपने को हकीकत में बदलने के लिए कुछ खास प्रैक्टिकल स्टेप्स लेने होंगे, तभी आप सफल हो सकेंगे। जानिए कि किन स्टेप्स को अपनाकर आप सफल हो सकते हैं -

बिजनेस आइडिया
जब भी आप अपना थीम्ड कैफे खोलने के बारे में सोचें, तब उसके लिए एक ऐसा आइडिया सोचें जो लोगों की समझ में आए और जो उनसे संबंधित हो। अगर आपका आइडिया आपके टारगेट कस्टमर्स से मेल खाता हुआ होगा और उन्हें पसंद आएगा तो यकीनन आपका थीम्ड कैफे सफलता हासिल करेगा। वहीं, अगर आपका आइडिया आपके कस्टमर्स से संबंधित ही नहीं होगा और उनकी समझ में ही नहीं आएगा तो वह कैफे को नहीं अपनाएंगे या दोबारा नहीं आएंगे।

कुछ काम खुद करें
अपना थीम्ड कैफे खोलने से पहले आपको यह पता कर लेना चाहिए कि कौन से ऐसे काम हैं जिन्हें आप खुद कर सकते हैं और कौन से ऐसे काम हैं जिनके लिए आपको दूसरों को हायर करने की जरूरत पड़ेगी। शुरुआत में आप जितने काम खुद करेंगे, उतना बेहतर रहेगा क्योंकि शुरू में आपके पास बजट की कमी होती है और खुद काम करने से यादा से यादा पैसा बचा सकेंगे जिससे भविष्य में मदद मिलेगी।

मदद भी जरूर लें
माना कि आप शुरुआत में अपने थीम्ड कैफे के यादा से यादा काम खुद करना चाहेंगे और स्टाफ हायर नहीं करना चाहेंगे लेकिन आप इन कामों के लिए मदद तो ले ही सकते हैं। जरूरी नहीं है कि आप सभी कामों को खुद अकेले करते रहें। इनके लिए आप अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों की मदद ले सकते हैं। इससे आपको नए आइडियाज भी मिलेंगे और अपने कैफे के काम के दौरान आप अकेले भी नहीं पड़ेंगे।

लॉजिस्टिक्स का ध्यान रखें
थीम्ड कैफे खोलते समय आपको लॉजिस्टिक्स का भी ध्यान रखना होता है। इसमें जगह लीज पर लेना, फूड और बेवरेज डिस्ट्रीब्यूटर ढूंढना, मेन्यू बनाना, प्रिंटर्स ढूंढना, किचन के बर्तन खरीदना, सर्विंग वेयर ढूंढना, उस जगह को डिजाइन करना और सजाना, सेल्स सिस्टम के पॉइंट को इंस्टॉल करना आदि शामिल होते हैं। हर बिजनेस की तरह थीम्ड कैफे के भी कुछ मुश्किल पॉइंट्स होते हैं जिन्हें एक निश्चित ऑर्डर में करना होता है जैसे ऑक्यूपेंसी पर्मिट, मेन्यू लिखना, ट्रेनिंग पूरी करना आदि। इसके बाद आप सफलता की ओर बढऩे लगते हैं।

बजट का सही इस्तेमाल करें
अपना थीम्ड कैफे खोलने के लिए आपको फंड्स की जरूरत होगी। इसके लिए आप अपने परिवार और दोस्तों से मदद ले सकते हैं। हालांकि आपको इन फंड्स का इस्तेमाल सावधानी और समझदारी से करना होगा ताकि आप कम बजट में भी अपने सभी जरूरी काम पूरे कर सकें। इसके लिए आप कुछ काम खुद भी कर सकते हैं ताकि बजट बच जाए और आप दूसरी चीजों के लिए उसे इस्तेमाल कर सकें। बाद में आप कैंपेनिंग के जरिए भी अपने थीम्ड कैफे के लिए बजट की व्यवस्था कर सकते हैं। आपको बजट का बहुत सोच-समझकर इस्तेमाल करना होगा।


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6 मई को होगा NEET Exam 2018: इन टिप्स के आधार पर करें परीक्षा की तैयारी


देशभर में नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस एग्जाम लेने वाले सीबीएसई ने NEET Exam 2018 के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। इसके बाद अब परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है।NEET Exam देश के कठिन परीक्षाआें में से एक मानी जाती है।यदि आप एंट्रेंस परीक्षा में सफल होना चाहते हैं तो हम आपको बता रहे हैं इस एग्जाम से संबंधित एेसे टिप्स जिनके आधार पर आप अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं।

 

 

 

 

ऐसे करें NEET Exam 2018 की तैयारी

- सीबीएसई ने NEET के सिलेबस में कोई बदलाव नहीं किया है इस परीक्षा का आयोजन पहले की तरह ही हो रहा है।

- इस साल सभी नीट की परीक्षा देने वाले सभी उम्मीदवारों के लिए एक ही प्रश्न पत्र दिया जा रहा है।

- पहले नीट परीक्षा में आवेदन करने के लिए आधार कार्ड या आधार नंबर को अनिवार्य कर दिया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई को आदेश देते हुए कहा कि वह इस परीक्षा के लिए आधार नंबर को अनिवार्य न बनाएं।

- NEET Exam 2018 की तैयारी के लिए एनसीईअारटी की किताबों से पढाइर् करें। फिजिक्स, केमेस्ट्री और बायोलोजी की किताबों को पहले अच्छी तरह से पढ़कर तैयारी करें।

- नीट 2017 के टेस्ट पेपर पढ़ें और उन सवालों को करें जो पिछले साल के पेपर में आए थे।

- जिन विषयों में आप कमजोर हैं उन पर ज्यादा ध्यान दें।

- नीट की प्रतियोगिता का स्तर बहुत ज्यादा होता है। ऐसे में आप इस परीक्षा में सफल होने के लिए खुद को पॉजिटिव रखें।

 


NEET व JEE के छात्र इस रणनीति के साथ करें तैयारी

- नीट के सिलेबस पर गौर किया जाए तो जितना महत्वपूर्ण 12वीं का सिलेबस है, उतना ही महत्वपूर्ण 11वीं का सिलेबस भी है, पिछले वर्ष 11वीं से 352 अंकों के सवाल पूछे गए थे, वहीं 12वीं से 368 अंकों के सवाल थे, आकड़ों को देखे तो परीक्षार्थी के नीट पास होने में 11वीं के सिलेबस की भूमिका लगभग आधा होती है।

 

- मेडिकल व इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा पास करने में जीतना महत्वपूर्ण सेलेबस का अध्ययन है उतना ही महत्वपूर्ण रणनीति नर्मिाण का। सही समय, सही रणनीति परीक्षा पास कराने में मददगार होती है।

 

- नीट की परीक्षा में सवालों को हल करने के लिए समय काफी कम होता है, इसलिए कम समय में ज्यादा सवाल हल करने के लिए शॉर्टकट तरीके को अपनाने की अभी से प्रेक्टिस करें, मॉक टेस्ट देते समय, शॉर्टकट तरीकों की भी प्रेक्टिस ज्यादा से ज्यादा करें इससे आप नर्धिारित समय में सभी सवालों को हल कर सकेंगे।


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इस बार ऐसा होगा UPSE CAPF की परीक्षा का पैटर्न, ऐसे करें तैयारी


यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSE) ने सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) के 398 पदों पर भर्ती निकाली है जिसके लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ये भर्तियां CAPF, BSF, CRPF, CISF, ITBP और SSB के लिए की जा रही हैं। कमीशन की ओर से इन पदों पर आवेदन की अंतिम तारीख 21 मई 2018 रखी गई है। इनके लिए परीक्षा की तारीख 12 अगस्त 2018 रखी गई है।

 

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ऐसे करें आवेदन

- सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट Upsc.Gov.In पर जाएं।

- इसके बाद उम्मीदवार आधिकारिक सूचना को ध्यान से पढ़ें।

- इसके बाद ऑनलाइन आवेदन पर क्लिक करें और फिर सभी आवश्यक जानकारियां भरें।

- इसके बाद चाहे गए सभी डॉक्यूमेंट्स, फोटो और हस्ताक्षर अपलोड करें।

- इसके बाद आवेदन फीस भरें।

- इसके बाद ऑनलाइन आवेदन फार्म सब्मिट करें।

- फिर उस आवेदन का प्रिंटआउट जरूर लें।

 

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ऐसा होगा एग्जाम पैटर्न
सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (असिस्टेंट कमांडेंड) के पदों पर उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा के द्वारा किया जाएगा। CAPF के पदों के लिए UPSC की ओर से दो पेपर लिए जा रहे हैं।


एग्जाम पेपर का समय
पेपर 1: सुबह 10 बजे से दोपहर 12 pm तक होगा।

पेपर-II: दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक होगा।


पेपर 1: इस पेपर में जनरल एबिलिटी और इंटेलिजेंस- इस पेपर में ऑब्जेक्टिव (Multiple Answers) सवाल पूछे जाएंगे। पूछे जाने वाले सवाल हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषा में होंगे। यह पेपर 250 का नंबर का होगा।


पेपर-II: इस पेपर में जनरल स्टडीज, निबंध और कॉम्प्रिहेंसन के सवाल पूछे जाएंगे। यह पेपर 200 अंकों का होगा। परीक्षार्थियों को एस्से लिखने के लिए हिन्दी और अंग्रेजी भाषा का ऑप्शन दिया जाएगा। इसमें परीक्षार्थी जिस भाषा में आसानी महसूस करें, उसी भाषा में जवाब दे सकते हैं।


रिजल्ट की तारीख
इस परीक्षा का रिजल्ट पेपर होने के 2 महीने बाद जारी किया जाएगा। इसका रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया जाएगा।


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बच्चों के दिल से निकालें रिजल्ट का डर


हर साल एग्जाम रिजल्ट के बाद बच्चों की खुदकुशी की कई खबरे सुनने को मिलती हैं। बच्चों के इस कदम के पीछे कुछ हद तक अभिभावक भी जिम्मेदार होते हैं। क्या वजह है कि हम बच्चों पर माक्र्स को लेकर इतना दबाव बढ़ा देते हैं कि वे खुदकुशी की कगार तक पहुंच जाते हैं? दरअसल हमने ही उनके दिमाग में यह भर दिया है कि परीक्षा में अच्छे नंबर नहीं आए तो जीवन में सफलता नहीं मिलने वाली। क्या आपको याद हैं कि आपके बोड्र्स में कितने नंबर आए थे? क्या आपने हर एंट्रेस एक ही बार में पास कर लिया था? क्या आपके पास कॅरियर को लेकर हमेशा एक ही विकल्प था? जरा सोचिए...

जल्द ही बोर्ड्स के रिज्लट आने शुरू हो जाएंगे। अब हाल कुछ ऐसा है कि इन दिनों हर पेरेंट अपने बच्चों को हर हालत में टॉप पर देखना चाहता है। यह भी सही है कि लाखों बच्चों में से कुछेक विद्यार्थी ही टॉपर हो सकते हैं। परीक्षा परिणामों में बच्चों के बहुत ज्यादा नंबर नहीं आने पर घर में मातम का वातावरण बन जाता है। बच्चों को अच्छे नंबर लाने के बावजूद डांट खानी पड़ती है और वो भी तब जब, उन्हें पेरेंट्स के थोपे गए विषयों का चयन करना पड़ा था। घर में उपजा यही दबाव बच्चों के भविष्य पर एक गंभीर प्रश्न चिह्न लगा देता है। जबकि हमें कभी अपने पेरेंट्स की इच्छाओं को ढोना नहीं पड़ा था। ऐसे में आप स्वयं ना जाने कब और कैसे खाते-पीते, मौज-मस्ती करते-करते शिक्षित और संस्कारी बन गए। याद कीजिए अपने बोड्र्स की मार्कशीट्स। आप लाख याद करने की कोशिश करेंगे, आपको याद नहीं आएगा कि आपको कितने नंबर मिले थे। तो फिर यही बात अपने बच्चों के लिए भी लागू क्यों नहीं करते। असल जिंदगी में देखा जाए तो माक्र्स शीट्स में बहुत ही अच्छे नंबर से बड़ी कुछ और चीजें हैं।

पहले बनें बच्चों के दोस्त

बच्चे खुदकुशी जैसा कदम कैसे उठा लेते हैं? असल में वे पेरेंट्स से कभी कह ही नहीं पाते कि उनके मन में क्या चल रहा है। आपको सबसे पहले अपने बच्चों का सच्चा मित्र बनना है, जिससे बच्चे आपके सामने अपनी समस्या, अपनी खुशी और अपने विचार खुलकर रख सकें। भय का भाव इस खुलेपन को समाप्त करता है और बच्चा हर बात छिपाना शुरू करके अंदर ही अंदर घुटना शुरू हो जाता है और कई बार यह घुटन कुंठा और फिर अवसाद की वजह बन जाती है। बच्चों के साथ बैठने से ही उनकी रुचि, योग्यता व सामथ्र्य को समझा जा सकता है। बच्चों को भ्रमित होने से बचाने के लिए पेरेंट्स को सजग मार्गदर्शक की भूमिका निभानी चाहिए। याद रखिए, एक अच्छे पेरेंट को अच्छा शिक्षक भी बनना आवश्यक है। बच्चों का सुशिक्षित होना अनिवार्य है लेकिन इससे भी अधिक जरूरी है कि वे अच्छे संस्कारों से युक्तहों तथा उनमें मानवीय मूल्यों को समझने का सामथ्र्य हो। उसे सफलता का अर्थ जीतने, उपलब्धियां अर्जित करने, सम्मान प्राप्त करने, प्रशंसा हासिल करने से न लेने दें।

बच्चों को रचनात्मक बनाएं

रचनात्मकता की प्रवृत्ति बच्चों को अपने माता-पिता और परिवार से मिलती है। यह प्रवृत्ति जीवन के प्रति दृष्टिकोण को व्यापक बनाती है और निराशा के वातावरण को दूर कर आशा की किरण जगाती है। रचनात्मक व्यक्ति समाज में महत्वपूर्ण स्थान अर्जित करने में सफल तो हो ही जाता है।

बड़ी सोच में है बड़ा जादू

बड़ी सोच में बड़ा जादू माना जाता है। यही कहा जाता है कि महान सोचें और महान बनें। सकारात्मक सोच के साथ गलतियों से सबक लेकर पुन: सफलता प्राप्त करने का प्रयास शुरू कर दें तो सफलता दूर नहीं रह सकती। सकारात्मक विचारों को प्रोत्साहित करना हर पेरेंट का दायित्व है और इसके लिए यह आवश्यक है कि उसमें स्वयं सकारात्मकता का भाव हो। सुदृढ़ इच्छाशक्ति से ही बच्चे बहुमुखी प्रतिभा के साथ अपने जीवन में प्रगति कर सकते हैं। पेरेंट्स का बच्चों के प्रति आत्मविश्वास बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होता है।

समय प्रबंधन करना सिखाएं

समय का सदुपयोग करने की प्रवृत्ति बचपन से ही पेरेंट्स अपने बच्चों में डालकर उनका भविष्य भविष्य संवार सकते हैं। आज के दौर में जब बच्चों की दिनचर्या बहुत ज्यादा अस्त-व्यस्त है, ऐसे में पेरेंट्स को ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत होती है।

पहले बच्चे को जानें

प्रत्येक बच्चा बुद्धि, योग्यता, क्षमता आदि की दृष्टि से दूसरे बच्चों से अलग होता है। बच्चे की क्षमता के अनुरूप उसका लक्ष्य निर्धारण करना चाहिए। कई पेरेंट्स बच्चों को अंधी दौड़ में दौड़ा देते हैं और बच्चे दौड़ते-दौड़ते चौराहे पर दिशा भ्रमित हो जाते हैं। दोष सडक़ पर डाल दिया जाता है। यह दोष सडक़ का नहीं, सही दिशा नहीं देने का है। बच्चों की इच्छा शक्ति ?, उनकी योग्यता, उनकी प्राथमिकता इत्यादि के आधार पर ही लक्ष्य का निर्धारण किया जाना उचित है। लक्ष्य निर्धारण के बाद लक्ष्य के प्रति संकल्पबद्ध होकर कार्य करने की प्रेरणा देकर हम अपनी उचित भूमिका का निवर्हन कर सकते हैं। बच्चों के साथ विचार-विमर्श कर अल्पकालीन और दीर्घकालीन कार्य योजना बनाएं। इसके साथ ही मार्ग में आने वाली समस्याओं को चिह्नित कर उनके समाधान के तरीकों पर भी मंथन किया जाना आवश्यक है। हर पेरेंट की आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियां अलग-अलग हो सकती है। एक अच्छा पेरेंट वही माना जाता है, जो बच्चों को हीनता की भावना से मुक्त रखे। देखा जाए तो वर्तमान परिवेश में पेरेंट्स की जिम्मेदारी, कत्र्तव्य, समझ और उनकी सोच की व्यापकता बढ़ गई है। वे अपने पेरेंट्स की तुलना में अधिक शिक्षित, अर्थ संपन्न एवं अपने बच्चों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। अपने एक या दो बच्चों के पालन-पोषण व उनकी परवरिश में अपनी सारी ऊर्जा लगा देते हैं। इसके बावजूद उनके मन में असंतोष का भाव बना रहता है, असंतोष का यह भाव हटा दें।

विकल्पों की दें जानकारी

निर्णय लेने की क्षमता जीवन के हर पहलू में आवश्यक है। प्रत्येक व्यक्ति को हर पल हर स्थान पर किसी न किसी प्रकार का निर्णय लेना होता है। अनेक अवसरों पर अनेक विकल्प मौजूद होते हैं और इन विकल्पों में से सही विकल्प को चुनना ही सही निर्णय होता है। बच्चों को अनेक विकल्पों के बारे में समुचित जानकारी देकर उन्हें सही विकल्प चुनने के लिए सामथ्र्यवान बनाना प्रत्येक पेरेंट की जिम्मेदारी है। बच्चों में सीखने की प्रवृत्ति तभी विकसित हो सकती है, जब हम सभी बचपन से ही इसके प्रति गंभीर हों। सीखने की प्रवृत्ति भी एक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ होनी चाहिए। सीखने की यह प्रवृत्ति यदि पेरेंट्स में हो तो स्वाभाविक रूप से यह बच्चों में भी बढ़ती जाती है। अच्छी बातों को सीखकर जीवन को सार्थक मोड़ दिया जा सकता है, जबकि विध्वंसात्मक गतिविधियों को सीखकर जीवन को नारकीय मोड़ पर डाला जा सकता है। बच्चों का चंचल होना स्वाभाविक है। उनकी चंचलता बनाए रखकर एकाग्रता बढ़ाने के प्रति पेरेंट्स को गंभीर होना चाहिए। एकाग्रचित होकर बच्चे किसी भी कार्य पूरा कर सकते हैं।


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