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Chaitra navratri 2019: नवरात्रि में 5 सर्वार्थ सिद्धि योग सहित बन रहे कई शुभ संयोग


हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। चैत्र मास में ही नवरात्रि भी पड़ती है, जो की इस बार 6 अप्रैल से शुरू होकर 14 अप्रैल तक रहेगी। नौ दिनों तक नवरात्रि इस बार कई विशेष संयोगों में आ रही है। पंडित रमाकांत मिश्रा ने बताया की इस साल चैत्र नवरात्रि में 5 सर्वार्थ सिद्धि, 2 रवि योग और रवि पुष्य योग का बहुत ही शुभ संयोग बन रहा है। माना जा रहा है की इस नवरात्रि विशेष फल की प्राप्ति के लिए मां की आराधना का बहुत ही उत्तम समय है। नवरात्रि में देवी के नौ रुपों की उपासना की जाती है।

chaitra navratri 2019

घट स्थापना मुहूर्त

6 अप्रैल, शनिवार से नवरात्र की शुरूआत होगी। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन अभिजीत मुहूर्त में 6 बजकर 9 मिनट से लेकर 10 बजकर 19 मिनट के बीच घट स्थापना बेहद शुभ रहेगा।

नवरात्रि के शुभ संयोग

6 अप्रैल- घट स्थापना रेवती नक्षत्र में
7 अप्रैल- सर्वार्थ सिद्धि शुभ योग द्वितीया
8 अप्रैल- कार्य सिद्धि रवि योग तृतीया
9 अप्रैल- सर्वार्थ सिद्धि यो चतुर्थी
10 अप्रैल-लक्ष्मी पंचमी योग पंचमी तिथि
11 अप्रैल- षष्ठी तिथि रवियोग
12 अप्रैल- सप्तमी तिथि सर्वार्थसिद्धि योग
13 अप्रैल- अष्टमी तिथि स्मार्त मतानुसार
14 अप्रैल-रवि पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि नवमी वैष्णव मतानुसार


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शीतला सप्तमी 2019: इस विधि से करें शीतला माता की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त


होली के सांतवे दिन शीतला सप्तमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं सुबह 4 बजे उठकर माता शीतला की पूजा करती हैं। सप्तमी के दिन महिलाएं मीठे चावल, हल्दी, चने की दाल और लोटे में पानी लेकर पूजा करती है। इस बार शीतला सप्तमी 27 मार्च को मनाई जाएगी। शीतला सप्तमी को उत्तरी भारत में बासौड़ा या बसोरा कहा जाता है। इस दिन शीतला माता की पूजा के समय उन्हें खास मीठे चावलों का भोग चढ़ाया जाता है। इन्हें पूजा से पहले रात में बनाया जाता है। इसी प्रसाद को घर में सभी सदस्य खाते है। इस दिन घर के सभी सदस्य ठंडा खाना खाते हैं। जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त....

शीतला सप्तमी का शुभ मुहूर्त

27 मार्च सुबह 06:28 से 18:37 तक

शीतला सप्तमी की पूजा विधि

शीतला सप्तमी के दिन सुबह सबसे पहले स्नान करें। इसके बाद शीतला माता की पूजा करें। स्नान और पूजा के वक्त 'हृं श्रीं शीतलायै नमः' का उच्चारण करते रहें।
माता को भोग में रात के बने गुड़ वाले चावल चढ़ाएं। व्रत में इन्हीं चावलों को खाएं।

शीतला सप्तमी का महत्व

शीतला माता ये व्रत रखने से बच्चों की सेहत अच्छी बनी रहती है। उन्हें किसी भी प्रकार का बुखार, आंखों के रोग और ठंड से होने वाली बीमारियां नहीं होती। इसके अलावा यह भी माना जाता है। शीतला सप्तमी के बाद बासी भोजन नहीं किया जाता है। यह बासी भोजन का खाने का आखिरी दिन होता है। इसके बाद मौसम गर्म होता है इसीलिए ताज़ा खाना खाया जाता है।

sheetla saptami 2019

शीतला सप्तमी की पूजा विधि

शीतला सप्तमी के दिन सुबह सबसे पहले स्नान करें। इसके बाद शीतला माता की पूजा करें। स्नान और पूजा के वक्त 'हृं श्रीं शीतलायै नमः' का उच्चारण करते रहें।
माता को भोग में रात के बने गुड़ वाले चावल चढ़ाएं। व्रत में इन्हीं चावलों को खाएं।

शीतला सप्तमी का महत्व

शीतला माता ये व्रत रखने से बच्चों की सेहत अच्छी बनी रहती है। उन्हें किसी भी प्रकार का बुखार, आंखों के रोग और ठंड से होने वाली बीमारियां नहीं होती। इसके अलावा यह भी माना जाता है। शीतला सप्तमी के बाद बासी भोजन नहीं किया जाता है। यह बासी भोजन का खाने का आखिरी दिन होता है। इसके बाद मौसम गर्म होता है इसीलिए ताज़ा खाना खाया जाता है।


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होली के दिन शाम के समय कर लें ये छोटा सा काम, घर में हमेशा रहेगी सुख-समृद्धि


देशभर में होली की धूम मची हुई है। इस मौके भारत के लगभग सभी हिस्सों में होली के रंग में लोग रंगे हुए हैं। रंगों से भरा यह त्यौहार बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन लोग आपस के बैर मिटाकर मिलकर यह त्यौहार मनाते हैं और एक दूसरे को मिठाई खिलाते हैं। जहां एक ओर सभी रंगों में रंगे रहते हैं होली खेलते हैं वहीं एक ओर कुछ लोग पूजा पाठ कर भगवान को प्रसन्न करते हैं और कुछ लोग उपाय कर उनकी समस्या का हल ढ़ूढते हैं। पंडित रमाकांत मिश्रा बताते हैं की होली पर्व की शाम को उपाय करने से व्यक्ति को मनचाही प्रगति मिलती है साथ ही घर में सालभर सुख-समृद्धि बनी रहती है। तो आइए जानते हैं वो अचूक उपाय...

holi upay

होली पर्व के दिन शाम को जरूर आजमाएं अचूक और सरल उपाय

किसी जातक को व्यापार में बहुत सी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है या फिर व्यवसाय में लगातार गिरावट आ रही है, तो होली के दिन शाम के समय पीले कपड़े में काली हल्दी, 11 गोमती चक्र, चांदी का सिक्का व 11 पीली कौड़ियां बांधकर 108 बार ॐ नमो भगवते वासुदेव नमः का जाप करें। इसके बाद में इसकी पोटली बनाकर घर में धन रखने के स्थान पर यह समस्त सामग्री एक साथ रख दें। इस प्रयोग से व्यवसाय में प्रगति आती है और घर में शांति और समृद्धि हमेशा बनी रहती है।


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Holi 2019: इन शहरों में भी मनाई जाती है अनोखी होली, देखने के लिए दूर-दूर से आते हैं लोग


देश में सभी त्यौहार कहीं ना कहीं किसी ना किसी जगह पर बहुत अनोखे तरीके से मनाए जाते हैं। इसी प्रकार होली का त्यौहार भी मथुरा-वृंदावन, बरसाने में बहुत ही अलग अंदाज से मनाई जाती है। लेकिन इन जगहों के बारे में सभी को जानकारी होगी पर इनके अलावा भी देश के कई शहर ऐसे हैं, जहां की होली अलग अलग तरीके से खेली व मनाई जाती है। कोई होलिका दहन के दिन होली मनाता है, कोई धुलेंडी के दिन तो कोई रंगपंचमी के दिन। हलांकि देशभर में इस त्योहार की धूम होलिका दहन के दिन से ही शुरू हो जाती है। तो आइए जानते हैं देशभर के शहरों के होली मनाने की परंपरा और यहां के खास अंदाज के बारे में...

 

barsane ki holi

1. बरसाने की लट्ठमार होली

बरसाने की होली तो पूरे विश्व में जानी जाती है। इसे देखने के लिए तो लोग दूर-दूर से आते हैं। ब्रज मंडल के बरसाने में बसंत पंचमी से ही होली की शुरुआत हो जाती है। फाल्गुन मास की नवमी से ही पूरा ब्रज रंगीला हो जाता है, लेकिन विश्वविख्‍यात बरसाने की लट्ठमार होली जिसे होरी कहा जाता है, इसकी धूम तो देखने लायक ही रहती है। देश-विदेश से लोग इसे देखने आते हैं। माना जाता है कि इसकी शुरुआत 16वीं शताब्दी में हुई थी। इस दिन होली खेलने के साथ-साथ वहां का लोकगीत 'होरी' गाया जाता है। जो की राधा-कृष्ण के आपसी की बातचीत पर आधारित गीत होता है।

होली के दिन कृष्ण के गांव नंदगांव के पुरुष बरसाने में स्थित राधा के मंदिर पर झंडा फहराने की कोशिश करते हैं लेकिन बरसाने की महिलाएं एकजुट होकर उन्हें लट्ठ से खदेड़ने का प्रयास करती हैं। इस दौरान पुरुषों को किसी भी प्रकार के प्रतिरोध की आज्ञा नहीं होती। वे महिलाओं पर केवल गुलाल छिड़ककर उन्हें चकमा देकर झंडा फहराने का प्रयास करते हैं। अगर वे पकड़े जाते हैं तो उनकी जमकर पिटाई होती है और उन्हें महिलाओं के कपड़े पहनाकर श्रृंगार इत्यादि करके सामूहिक रूप से नचाया जाता है।

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2. पंजाब, आनंदपुर साहिब की होला मोहल्ला होली

पंजाब के आनंदपुर साहिब में होली का त्यौहार 20 से 24 मार्च तक चलेगा। यह त्यौहार पंजाबी समुदाय का ये सबसे खास त्यौहार माना जाता है क्योंकि 1701 में होला मोहल्ला त्योहार की शुरुआत हुई थी। इस दिन रंग गुलाल के बीच अपने युद्ध कौशल को दिखता है साथ ही लोग कुश्ती, मार्शल आर्ट्स और तलवारों के साथ कई करतब दिखाते हैं।

3. उदयपुर, रजवाड़ा होली

होली के एक दिन पहले संध्या में उदयपुर शहर में खास आयोजन होते हैं। जिसे रजवाड़ा, शाही होली कहा जाता है। इसके नाम के अनुसार यह होली शाही अंदाज में मनाई जाती है। सिटी पैलेस में शाही निवास से मानेक चौक तक शाही जुलूस निकाला जाता है। इस जुलूस में घोड़े, हाथी से लेकर रॉयल बैंड शामिल होता है। उदयपुर की होली की धूम देखने कई लोग यहां आते हैं और होली के त्यौहार का आनंद लेते है। यहां की होली देखने के लिए विदेशी पर्यटक भी सिटी पैलेस की होली शामिल होने पहुंचते हैं। इस दौरान शाही परिवार गुलाल गोटे से रंग खेलता है।

 

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4. गोवा, होली की धूम

गोवा में पुर्तगाली और क्रिश्चयन कम्युनिटी वाले लोग होली का त्यौहार बड़ी धूम-धाम से मनाते हैं। यहां होली को शिगमोत्सव के नाम से जाना जाता है। यह त्योहार यहां पर दो सप्ताह तर मनाते हैं। गांव के देवी-देवताओं की पूजा करने के बाद पांच दिनों में जूलूस और झांकियां निकाली जाती हैं। रंग गुलाल खेला जाता है। जोकी फागोत्सव और होली दोनों का समावेश होता है।


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होलिका दहन पर 3 ग्रहों का दुर्लभ संयोग, इस दौरान करें ये काम बन जाएंगे बिगड़े काम


इस साल 20 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा वहीं 21 मार्च गुरुवार के दिन होली खेली जाएगी। पंडित रमाकांत मिश्रा ने बताया की इस बार होली पर बहुत ही शुभ संयोग बन रहे हैं। होलिका दहन के दिन बहुत ही दुर्लभ संयोग बन रहा है। पंडित जी बताते हैं की इस दिन शुभ मुहूर्त में किये गए हर कार्य व पूजा से अनिष्टता दूर होगी। ऐसा संयोग कई सालों बाद बनने जा रहा है क्योंकि इस बार देवगुरु बृहस्पति के बहुत ही शुभ प्रभावों में गुरुवार को होली मनेगी और यह योग सात सालों बाद बनने जा रहा है। वहीं इस संयोग में पूजा होने के बाद ही मान-सम्मान में भी वृद्धि होगी और राजनिति के दृष्टिकोण से भी यह बहुत शुभ माना जा रहा है।

holi dahan 2019

इस शुभ नक्षत्र में दहन होगी होली

यह होली पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में दहन की जाएगी। यह शुक्र का नक्षत्र है जो जीवन में उत्सव, हर्ष,आमोद-प्रमोद, ऐश्वर्य का प्रतीक है। होली उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में खेली जाएगी। यह नक्षत्र सूर्य का है। सूर्य आत्मसम्मान, उन्नति व आत्मप्रकाश का कारक है। इससे व्यक्ति को सालभर सूर्य की कृपा मिलेगी। वहीं, जब सभी ग्रह 7 स्थानों पर होते हैं तब वीणा योग का भी संयोग बनता है। रंगों की होली पर ऐसी स्थिति जीवन में बहार लेकर आती है।

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इस बार होली पर ये तीन ग्रह बनाएंगे शुभ संयोग

20 मार्च होलिका दहन के दिन इस बार 3 ग्रहों के साथ शुभ संयोग बनने जा रहा है। ये तीनों ग्रहा जातकों के जीवन को श्रेष्ठता से भर देंगे साथ ही खुशहाली भी लाएंगे। पंडित रमाकांत मिश्रा के अनुसार इस साल होलिका दहन के समय गुरु, सूर्य और शुक्र तीनों शुभ व श्रेष्ठ ग्रहों का शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन शुभ मुहूर्त में होलिका दहन करें, ये है शुभ मुहूर्त

होलिका दहन का यह है शुभ समय

20 मार्च की रात्रि 8.58 से रात 12.05 बजे।

भद्रा का समय

भद्रा पूंछ : शाम 5.24 से शाम 6.25 बजे तक।

भद्रा मुख : शाम 6.25 से रात 8.07 बजे तक।

अच्छे परिणामों के लिए होलिका दहन की पूजा में जरुर करें ये काम

1. होलिका दहन वाले दिन पूजा करने के बाद रक्षो रक्षोघ्न सूक्त का पाठ जरुर करें।

2. होलिका की तीन बार परिक्रमा करें।

3. होलिका में गेहूं,चना व पुआ-पकवान अर्पित करें।

4. होलिका दहने होने के बाद सुबह उसमें आलू, हरा चना पकाएं।

5. होलिका दहन में जौ व गेहूं के पौधे डालें।

6. शरीर में ऊबटन लगाकर उसके अंश भी डाला जाता हैं। ऐसा करने से जीवन में आरोग्यता और सुख-समृद्धि आती है।

7. होलिका दहन के दूसरे दिन नए कपड़े पहनकर भगवान को रंग-अबीर चढ़ाएं।


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Holi dahan 2019: होलिका दहन के दिन जरुर करें ये असरदार व अचूक उपाय, जल्द होगा शत्रुओं का नाश


भारतीय रसोई में हल्दी बहुत ही उपयोगी मानी जाती है। हल्दी को खाने में स्वाद के अलावा बहुत सी बीमारियों को ठीक करने के लिए भी काम में लिया जाता है। पर ये बहुत बहुत कम लोग जानते हैं की हल्दी को भोजन के अलावा तांत्रिक क्रियाओं यानी टोटको के लिए भी किया जाता है। हल्दी के टोटके बहुत ही कारगार होता हैं। जी हां, लेकिन हल्दी जो हल्दी हम भोजन में उपयोग लेते हैं वो हल्दी टोटकों में उपयोग नहीं ली जाती है। दरअसल हल्दी की ही एक प्रजाति काली हल्दी को धन व बुद्धि का कारक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार काली हल्दी के प्रयोग से सभी तरह के तंत्र प्रयोगों को आसानी से काटा जा सकता है। इसलिए तंत्र कियाओं व टोटकों में काली हल्दी का उपयोग किया जाता है। आइए जानते हैं काली हल्दी के असरदार टोटके....

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1. शत्रुओं से निजात पाने के लिए

होलिका दहन वाले दिन काली हल्दी को शुद्ध करके उस पर सिंदूर लगाएं और उसे काले रेशमी कपड़े में चार कौड़ी, आठ काली गुंजा के साथ बांधकर एक पोटली बना लें। इसके बाद उसे गुगल की धूप दिखाएं और घर के मुख्य द्वार की चौखट में इस प्रकार लगाएं कि वह बाहर से किसी को नजर न आए। इससे शत्रुओं का नाश होता है और साथ ही शत्रुओं द्वारा रक्षा भी होती है।

2. धन की वृद्धि के लिए

होलिका दहन के पहले पूजन करते समय शुभ सिद्ध मुहूर्त में काली हल्दी को शुद्ध करके, उस पर घी मिश्रित सिंदूर लगाएं और उसे चांदी की प्लेट में रखें। इसके बाद उसे गुगल की धूप दिखाएं और घी का दीपक जलाएं। मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद इसे एक लाल रेशमी कपड़े में चांदी के सिक्कों के साथ बांध दें। फिर तिजोरी में या जो भी घर में पैसे रखने की जगह है वहां उसे रख दें। इस प्रयोग से धन में वृद्धि होती है।

3. बिमारियों के न नाश के लिए

अगर कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा बीमार रहता है और सारे उपायों के बाद भी सही नहीं हो पा रहा है तो गुरुवार के दिन आटे के दो पेड़े बनाकर उसमें गीली चने की दाल के साथ गुड़ और थोड़ी सी पिसी काली हल्दी को दबाकर रोगी व्यक्ति के ऊपर से 7 बार उतार कर गाय को खिला दें। तुरंत आराम आ जाएगा।

4. आकर्षण शक्ति बढ़ाने के लिए

होली के दिन काली हल्दी को सिद्ध करने के लिए किसी भी शुभ मुहूर्त में शुद्ध करके गुगल की धूप दें। होली पूजन के समय उसे घिस कर उसका तिलक लगाएं। इस उपाय को करने से मनचाहा व्यक्ति आपकी तरफ आकर्षित होगा।

5. बिजनेस में फायदे के लिए

पीले कपड़े में काली हल्दी, 11 गोमती चक्र, एक चांदी का सिक्का तथा 11 कौड़िया बांधकर 108 बार "ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नमः" का जाप करें तथा इस पूरे सामान सहित पोटली को लॉकर या तिजोरी में रख दें। इससे खराब से खराब बिजनेस में भी फायदा होने लगता है।


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महाशिवरात्रि 2019: भगवान शिव के 51 नामों के स्मरण मात्र से मिल जाती है हर मनोकामना


महादेव देवों के देव कहे जाते हैं। उनकी भक्ति बहुत ही सरल और सहज होती है। भगवान शिव की भक्ति करने वालों को मनचाहा आशीर्वाद जल्द ही प्राप्त हो जाता है। इस दिन सभी शिवालयों में और हिंदू धर्म के सभी घरों में शिव जी की बड़ी श्रद्धा व विधि-विधान से पूजा-पाठ कर उन्हें प्रसन्न किया जाता है। लेकिन कभी-कभी कुछ स्थितियां ऐसी भी होती हैं, जिनमें हम पूजा नहीं कर पाते लेकिन शास्त्रों में माना गया है की यदि कोई व्यक्ति सच्चे भाव से भगवान शिव के नामों का स्मरण करता है तो उसको शिवलिंग पर जल चढ़ाने बराबर फल प्राप्त होता है। भगवान शिव के अनेकों नाम हैं लेकिन उनके 51 नामों का विशेष महत्व है।

mahashivratri 2019

शिवरात्रि के दिन इन नामों का स्मरण करने से शिव की कृपा सहज प्राप्त हो जाती है। आइए जानते है भगवान शिव के 51 प्रभावशाली नाम....

1. शिव- कल्याण स्वरूप
2. महेश्वर- माया के अधीश्वर
3. शम्भू- आनंद स्वरूप वाले
4. पिनाकी- पिनाक धनुष धारण करने वाले
5. शशिशेखर- सिर पर चंद्रमा धारण करने वाले
6. वामदेव- अत्यंत सुंदर स्वरूप वाले
7. विरूपाक्ष- विचित्र आंख वाले (शिव के तीन नेत्र हैं)
8. कपर्दी- जटाजूट धारण करने वाले
9. नीललोहित- नीले और लाल रंग वाले
10. शंकर- सबका कल्याण करने वाले
11. शूलपाणी- हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले
12. खटवांगी- खटिया का एक पाया रखने वाले
13. विष्णुवल्लभ- भगवान विष्णु के अति प्रिय
14. शिपिविष्ट- सितुहा में प्रवेश करने वाले
15. अंबिकानाथ- देवी भगवती के पति
16. श्रीकंठ- सुंदर कंठ वाले
17. सहस्राक्ष- हजार आंखों वाले
18. सहस्रपाद- हजार पैरों वाले
19. अपवर्गप्रद- कैवल्य मोक्ष देने वाले
20. अनंत- देशकालवस्तु रूपी परिछेद से रहित
21. तारक- सबको तारने वाले
22. परमेश्वर- सबसे परम ईश्वर।
23. भव- संसार के रूप में प्रकट होने वाले
24. शर्व- कष्टों को नष्ट करने वाले
25. त्रिलोकेश- तीनों लोकों के स्वामी
26. शितिकण्ठ- सफेद कण्ठ वाले
27. शिवाप्रिय- पार्वती के प्रिय
28. उग्र- अत्यंत उग्र रूप वाले
29. कपाली- कपाल धारण करने वाले
30. कामारी- कामदेव के शत्रु, अंधकार को हरने वाले
31. सुरसूदन- अंधक दैत्य को मारने वाले
32. गंगाधर- गंगा जी को धारण करने वाले
33. ललाटाक्ष- ललाट में आंख वाले
34. महाकाल- कालों के भी काल
35. कृपानिधि- करूणा की खान
36. भीम- भयंकर रूप वाले
37. परशुहस्त- हाथ में फरसा धारण करने वाले
38. मृगपाणी- हाथ में हिरण धारण करने वाले
39. जटाधर- जटा रखने वाले
40. कैलाशवासी- कैलाश के निवासी
41. कवची- कवच धारण करने वाले
42. कठोर- अत्यंत मजबूत देह वाले
43. त्रिपुरांतक- त्रिपुरासुर को मारने वाले
44. वृषांक- बैल के चिह्न वाली ध्वजा वाले
45. वृषभारूढ़- बैल की सवारी वाले
46. भस्मोद्धूलितविग्रह- सारे शरीर में भस्म लगाने वाले
47. सामप्रिय- सामगान से प्रेम करने वाले
48. स्वरमयी- सातों स्वरों में निवास करने वाले
49. त्रयीमूर्ति- वेदरूपी विग्रह करने वाले
50. अनीश्वर- जो स्वयं ही सबके स्वामी है
51. सर्वज्ञ- सब कुछ जानने वाले


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Mahashivratri 2019: अपार धन संपदा की प्राप्ति के लिए करें इस प्रकार के शिवलिंग की पूजा


महाशिवरात्रि का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन शिव जी को प्रसन्न करने के लिए विधि-विधान से पूजा-पाठ की जाती है। इस बार महाशिवरात्रि 4 मार्च, सोमवार को मनाई जाएगी। शिव जी के साथ-साथ इस दिन पार्वती माता का भी पूजन किया जाता है। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए रात भर पूजा की जाती है और उन्हें प्रसन्न कर मनचाहा वरदान पाने की इच्छा जताई जाती है। वैसे तो शिव जी जल्द ही सभी की मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं, लेकिन यदि आप महाशिवरात्रि पर विशेष अपनी मनोकामना के अनुसार शिवलिंग बनाकर पूजा करेंगे तो आपकी मनाकामना जल्द पूरी है। पंडित रमाकांत मिश्रा ने बताया की महाशिवरात्रि के दिन अलग-अलग कामना की पूर्ति के लिए अलग-अलग शिवलिंग की पूजा की जाती है। तंत्र क्रियाओं के लिए भी शिवलिंग के कई प्रकार के होते हैं। आइए जानते हैं किस कामना के लिए कौन से शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए.....

 

mahashivratri 2019

अकाल मृत्यु से बचने के लिए
यदि किसी व्यक्ति को अकाल मृत्यु का डर होता है तो ऐसे में शिवरात्रि के दिन दुर्वा को शिवलिंग के आकार में गूंथकर उसकी पूजा करें। ऐसा करने से अकाल मृत्यु का जर खत्म हो जाता है।

मोक्ष प्राप्ति के लिए
महाशिवरात्रि के दिन आंवले से बने शिवलिंग का रुद्राभिषेक करने से व्यक्ति को जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है। पाने के लिए व्यक्ति आंवले से बने शिवलिंग का रुद्राभिषेक करता है।

विशेष सिद्धि प्राप्त करने के लिए
यदि आप कोई विशेष सिद्धि प्राप्त करना चाहते हैं तो महाशिवरात्रि के दिन यज्ञ की भस्म से शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा करें।

संतान सुख पाने के लिए
जिन दंपति की संतान नहीं है वो लोग यदि संतान सुख पाना चाहने हैं। तो जौ, गेहूं और चावल को समान मात्रा में मिलाकर इस मिश्रित आटे से शिवलिंग बनाकर महाशिवरात्रि पर पूरी श्रद्धा से उसकी पूजा करें।

शत्रुओं का नाश करने के लिए
शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए महाशिवरात्रि के दिन लहसुनिया से बना शिवलिंग तैयार कर उसकी पूजा करें। इससे आपको शत्रुओं का नाश होगा।

दरिद्रता दूर करने के लिए
महाशिवारात्रि के दिन पीपल की लकडी से शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा करें, इस शिवलिंग की पूजा करने से दरिद्रता दूर होती है।

धन-संपदा पाने के लिए
सुख-समृद्धि की कामना के लिए सोने के शिवलिंग की पूजा की जाती है, सोने के शिवलिंग की पूजा करने से अपार धन संपदा की प्राप्ति होती है।


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महाशिवरात्रि 2019: शिव मंदिर में जाकर सबसे पहले करें ये काम, चुटकियों में पूरी होगी मनोकामना


महाशिवरात्रि पर देवों के देव महादेव की पूजा की जाती है। इस दिन भक्त उनसे अपनी मुरादों को पूरा करने का वरदान मांगते हैं। शिवरात्रि के दिन कुछ लोग घर में ही शिवलिंग बनाकर पूजा करते हैं, वहीं कुछ लोग मंदिर में जाकर उनसे अपनी इच्छापूर्ति का आशीर्वाद लेने जाते हैं। मंदिर में जाने शिव अभिषेक किया जाता है तो कोई बेलपत्र पंचामृत से शिव जी को स्नान कराकर उन्हें मनाता है। इन्हीं सब चीज़ों के बीच एक ऐसा उपाय भी है जिससे शिव जी तक आपकी सभी मनोकामना जल्द पहुंचती है। जी हां, इस एक अद्भुत उपाय से शिव जी आपकी मनोकामना जल्दि सुनकर उसे पूरे करेंगे। तो आइए जानते हैं क्या है वो उपाय.....

mahashivratri 2019

सभी जानते हैं भगवान शिव का वाहन नंदी है और हर शिव मंदिर में शिव के साथ नंदी विराजमान रहता है। शास्त्रों के अनुसार अगर मंदिर में जाकर नंदी के कान में चुपके से कोई मन्नत मांगी जाए तो ये मनोकामना जल्द ही पूरी हो जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं शिव तक मनोकामना पहुंचाने के लिए नंदी के कान में क्यों कही जाती है, तो आइए जानते हैं इसके पीछे का कारण.....

भगवान शिव तपस्वी हैं और वे हमेशा समाधि में रहते हैं। ऐसे में उन तक हमारे मन की बात नहीं पहुंच पाती। इस स्थिति में नंदी ही हमारी मनोकामना शिवजी तक पहुंचाते हैं। इसी मान्यता के चलते लोग नंदी को लोग अपनी मनोकामना कहते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, शिलांद नाम के एक मुनि थे, जो ब्रह्मचारी थे। वंश समाप्त होता देख उनके पितरों ने उनसे संतान उत्पन्न करने को कहा। शिलांद मुनि ने संतान भगवान शिव की प्रसन्न कर अयोनिज और मृत्युहीन पुत्र मांगा। भगवान शिव ने शिलाद मुनि को ये वरदान दे दिया। एक दिन जब शिलांद मुनि भूमि जोत रहे थे, उन्हें एक बालक मिला। शिलाद ने उसका नाम नंदी रखा।

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एक दिन मित्रा और वरुण नाम के दो मुनि शिलाद के आश्रम आए। उन्होंने बताया कि नंदी अल्पायु हैं। यह सुनकर नंदी महादेव की आराधना करने लगे। प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और नंदी का अपना गणाध्यक्ष भी बनाया। भगवान शिव और पार्वती ने सभी गणों के समक्ष गणों के अधिपति के रूप में नंदी का अभिषेक करवाया। उसके बाद ही भगवान शिव ने नंदी को वरदान दिया कि जहां उनका निवास होगा वहां नंदी भी विराजमान होंगे और जो भी व्यक्ति नंदी की पूजा कर उनके कान में अपनी मनोकामना कहेगा उसकी वो मनोकामना पूरी होगी। इसी वजह से अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए लोग नंदी के कान में अपनी इच्छा व्यक्त करते हैं और नंदी उनकी कामना को पूरी करते हैं।


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फाल्गुन माह शुरु, इस तीन राशियों की किस्मत का चमकेगा सितारा, होगी धनवर्षा


फाल्गुन माह रंगों का महीना कहा जाता है। इस माह में रंगों की बहार होती है क्योंकि होली का त्यौहार इसी माह में आता है। फाल्गुन का महीना अपने साथ खुशियां और हर्षोल्लास भरा होता है। फाल्गुन मास हिंदू पंचांग का अंतिम माह होता है और यह माह समाप्त होते ही हिंदू वर्ष भी समाप्त हो जाता है। इसके बाद हिंदू नववर्ष यानी चैत्र प्रारंभ हो जाता है। नववर्ष प्रारंभ होते ही महीने त्यौहारों की धूम शुरु हो जाती है। वहीं दूसरी ओर रंगों के इस माह में कुछ राशियों की किस्मत खुलने वाली है। तो आइए जानते हैं किस राशि के लिए क्या लाया है फाल्गुन मास.....

 

falgun maas 2019

मेष राशि:
फाल्गुन माह इस राशि के जातकों के लिए बहुत ही खास रहेगा। इस दौरान प्रेमियों को बहुत से अवसर मिलेंगे। प्रेमी जीवन के लिहाज से यह माह उत्तम रहेगा।

वृषभ राशि:
आपकी राशि के लिए फाल्गुन मास यूं तो कुछ खास लेकर नहीं आया है लेकिन इस माह आप जो भी कार्य करेंगे उसमें आपको निश्चित ही सफलता मिलेगी।

मिथुन राशि:
फाल्गुन माह आपके लिए मौज-मस्ती से भरा रहेगा। व्यापार संबंधि सभी परेशानियां हल होंगी और कार्यक्षेत्र में व्यस्तता बनी रहेगी।

कर्क राशि:
फाल्गुन माह कर्क राशि के जातकों के लिए बहुत ही भाग्यशाली सिद्ध हो सकता है और इस माह में आर्थिक लाभ जरुर होगा।

सिंह राशि:
इस राशि के जातकों के लिए इस माह कुछ खास नहीं होगा। आपको इस दौरान कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। सावधान रहें।

कन्या राशि:
इस राशि के जातकों के जीवन में भरपुर खुशियां आएंगी। इसके अलावा किसी शुभ समाचार के मिलने से मन प्रसन्न और उमंगों से भरा रहेगा।

तुला राशि:
तुला राशि के जातकों के लिए फाल्गुन मास बहुत खुशिया लेकर आया है, कार्यक्षेत्र में अपने प्रमोशन या तरक्की का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं उन्हें इस माह सफलता मिल जाएगी।

वृश्चिक राशि:
वृश्चिक राशि के जातकों का पूरा महीना मित्रों व परिवारजनों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में व्यतीत होगा। इसी वजह से इस राशि के जातक पूरे माह व्यस्त रहेंगे।

धनु राशि:
धनु राशि के जातकों के जीवन में फाल्गुन माह बहुत कुछ नया लेकर आएगा। इस दौरान आपकी खुशियों में इजाफा होगा साथ ही आपको अचानक धन की प्राप्ति भी हो सकती है।

मकर राशि:
मकर राशि के जातकों के लिए फाल्गुन मास मिलाजुला रहेगा, इनके जीवन में ना ज्यादा खुशिया आएगी ना ही दुख। माह रहेगा सामान्य

कुंभ राशि:
फाल्गुन माह कुंभ राशि के जातकों के लिए यात्रा के योग लेकर आया है। इस दौरान आप उल्लास में खोए रहेंगे, इस माह में आप किसी धार्मिक यात्रा पर जरुर जाएंगे।

मीन राशि:
फाल्गुन माह में मीन राशि के जातकों को रोजगार के सुनहरे अवसरों की प्राप्ति होगी। जिससे पूरे माह मन में प्रसन्नता रहेगी।


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महाशिवरात्रि 2019: शिवलिंग पर चढ़ा दें ये एक चीज़, 1 करोड़ कन्याओं के कन्यादान के बराबर मिलेगा फल


हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि बहुत ही पवित्र त्यौहार माना जाता है। इस दिन सभी शिव भक्त महादेव की भक्ति व आराधना में लीन रहते हैं। पुराणों के अनुसार इस दिन महादेव को उनके पसंद की सभी वस्तुएं अर्पित की जाती है। इनसे वे जल्दि प्रसन्न हो जाते हैं। उन्हीं वस्तुओं में से एक है बेलपत्र, कहा जाता है की बिल्वपत्र शिव अभिषेक व शिव पूजन में सबसे प्रथम स्थान रखता है। ऋषियों द्वारा कहा गया है की बिल्व पत्र भोलेनाथ को अर्पित करने से व्यक्ति को 1 करोड़ कन्याओं के कन्यादान का फल प्राप्त होता है। भगवान शिव को प्रतिदिन यदि बिल्वपत्र चढ़ाने में असमर्थ्य हैं तो महाशिवरात्रि, सावन माह, प्रदोष व्रत में जरुर ही चढ़ाना चाहिए। इससे आपको पुण्य फल की प्राप्ति के साथ-साथ पापों से मुक्ति भी मिलती है। यदि किसी कारणवश बिल्वपत्र उपलब्ध न हो तो स्वर्ण, रजत, ताम्र के बिल्वपत्र बनाकर भी पूजन कर सकते हैं। इसके अलावा भी बिलपत्र कई जगह लाभकारी होता है। विशेष फल पाने के लिए ऐसे करें बेलपत्र अर्पित....

mahashivratri 2019

1. शिवलिंग पर बिल्वपत्र चढ़ाने से पहले पत्तियों पर चंदन या अष्टगंध से ॐ, शिव पंचाक्षर मंत्र या शिव नाम लिखकर चढ़ायें। इससे व्यक्ति की दुर्लभ कामनाओं की पूर्ति हो जाती है।

2. कालिका पुराण के अनुसार चढ़े हुए बिल्व पत्र को सीधे हाथ के अंगूठे एवं तर्जनी यानी अंगूठे के पास की उंगली से पकड़कर उतारना चाहिए।

3. वहीं बिल्वपत्र को चढ़ाते समय सीधे हाथ की अनामिका यानी रिंग फिंगर एवं अंगूठे का प्रयोग करना चाहिए।

4. बेल का वृक्ष हमारे यहां संपूर्ण सिद्धियों का आश्रय स्थल माना गया है इसलिए इस वृक्ष के नीचे स्तोत्र पाठ या जप करने से अनंत गुना फल की प्राप्ति होती है और शीघ्र सिद्धि की प्राप्ति होती है।

5. बिल्वपत्र के सेवन से अनेकों रोगों से मुक्ति मिलती है।

6. बिल्वपत्र के वृक्ष के दर्शन व स्पर्श से ही कई प्रकार के पापों का शमन हो जाता है।

7. इस दिन भूलकर भी ना तोड़े बिल्वपत्र

8. लिंगपुराण के अनुसार बिल्वपत्र को तोड़ने के लिए चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या, संक्रांति काल एवं सोमवार को निषिद्ध माना गया है। इस दिन बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिए।


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संकष्टी गणेश चतुर्थी: मेष, कन्या, धनु और मीन राशि सहित सभी राशिअनुसार गणेश जी को प्रसन्न


माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी व्रत रखा जाता है। चतुर्थी व्रत भगवान श्री गणेश को समर्पित होता है। इस बार संकष्टी चतुर्थी का व्रत 22 फरवरी, शुक्रवार के दिन है। संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणपति जी का विधि-विधान से पूजन करने पर सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और साथ ही सभी कष्ट भी दूर हो जाते हैं। पंडित रमाकांत मिश्रा बताते हैं की गणेश जी को इस दिन राशि अनुसार उपाय व पूजा कर जल्द ही प्रसन्न किया जा सकता है। साथ ही संकष्टी गणेश चतुर्थी के दिन गणेश पूजा के साथ-साथ व्यक्ति की सभी समस्याएं दूर होकर रोग, आर्थिक समस्या, भय, नौकरी, व्यवसाय, मकान, वाहन, विवाह, संतान, प्रमोशन आदि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए जानते हैं किस राशि वाले जातक को कौन सा उपाय व किस तरह पूजा करना चाहिए....

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मेष राशि:
मेष राशि वालों को 'वक्रतुण्ड' रूप में गणेश जी की आराधना करनी चाहिए और गुड़ का भोग लगाना चाहिए। इसके साथ ही भगवान गणेश को लगाए हुए भोग को स्वयं ना ग्रहण करें और सभी लोगों में बांट दें।

वृषभ राशि:
वृषभ राशि वालों को गणेशजी के 'शक्ति विनायक' रूप की आराधना करना चाहिए और घी मिश्री का भोग लगाएं। इसके साथ ही आपकी राशि वाले जातक इस दिन गणेश मंदिर में शुद्ध घी का दोमुखी दिया लगाएं और केसर का टीका लगाएं।

मिथुन राशि :
मिथुन राशि वाले गणेशजी की आराधना 'लक्ष्मी गणेश' के रूप में करें और मूंग के लड्डू का भोग लगाएं। इसके साथ ही इस दिन किसी गरीब व्यक्ति को काला कंबल दान दें, काम सुचारू चलेगा।

कर्क राशि:
कर्क राशि वालों को 'वक्रतुण्ड' रूप में गणेशजी की पूजा करना चाहिए और मोदक का भोग लगाएं। इसके साथ ही उन्हें सफेद चंदन का तिलक लगाएं और बुजुर्गों को कुछ भेंट करें।

सिंह राशि:
सिंह राशि वालों को 'लक्ष्मी गणेश' रूप में गणेशजी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए और चतुर्थी के दिन गणेश जी को किशमिश का भोग लगाएं। इसके साथ ही इस दिन आप लाल रंग का रुमाल अपने पास रखें इससे आपके सभी रुके कार्य पूरे होंगे।

कन्या राशि:
कन्या राशि के लोग संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेशजी के 'लक्ष्मी गणेश' रूप की आराधना करें। इसके साथ ही उन्हें सुखे मेवे का भोग लगाएं। इसके साथ ही इस दिन तुलसी की माला पहनें।

तुला राशि:
तुला राशि वाले लोगों को 'वक्रतुण्ड' रूप में गणेशजी की पूजा करना चाहिए और 5 नारियल का भोग लगाएं। इसके साथ ही गणेशजी के मंदिर में शुद्ध घी का दीया दिन में 11 बजे के पूर्व जिस किसी दिन मन करें लगाकर आएं।

वृश्चिक राशि:
वृश्चिक राशि वाले जातक को संकष्टी चतुर्थी के दिन 'श्वेतार्क गणेश' रूप की पूजा करनी चाहिए और गणेश जी को लाल फूल अर्पित करना चाहिए। इसके अलावा इस दिन केले के पेड़ की पूजा करें और जल चढ़ाएं। कभी भी नशा न करें।

धनु राशि:
धनु राशि के जातक इस दिन 'ॐ गं गणपते मंत्र' का जप करना चाहिए और बेसन के लड्डुओं का भोग लगाना चाहिए। इसके साथ ही इस दिन पीले वस्त्र के आसन पर गणेशजी को ईशान कोन में विराजमान कर उनके समक्ष गुरुवार को घी का शुद्ध दीपक लगाएं।

मकर राशि:
मकर राशि के जातकों को चतुर्थी के दिन 'शक्ति विनायक' गणेश की आराधना करना चाहिए और इलायची व लौंग अर्पित करना चाहिए। इसके अलावा गणेश, लक्ष्मी या विष्णु मंदिर में पीले फूल चढ़ाएं।

कुंभ राशि:
कुंभ राशि वालों को भी 'शक्ति विनायक' गणेशजी की पूजा करना चहिए और मंत्र की एक माला रोज जपना चाहिए। इसके अलावा ध्यान रखें कि आपके यहां से कोई भूखा न जाएं और भोजन में कभी भी ऊपर से नमक न डालें।

मीन राशि:
मीन राशि वाले जातक 'हरिद्रा गणेश' की पूजा करना चाहिए और पूजा के दौरान शहद और केसर का भोग लगाएं। इसके अलावा गणेश मंदिर में प्याऊ के लिए पैसा दान करें।


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संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणपति को चढ़ाएं ये 4 चीज़, जरुर ही पूरी होगी मनोकामना


माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी व्रत रखा जाता है। चतुर्थी व्रत भगवान श्री गणेश को समर्पित होता है। इस बार संकष्टी चतुर्थी का व्रत 22 फरवरी, शुक्रवार के दिन रखा जाएगा। संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणपति जी का विधि-विधान से पूजन करने पर सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और साथ ही सभी कष्ट भी दूर हो जाते हैं। पंडित रमाकांत मिश्रा बताते हैं की सकट चौथ के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और अपने पुत्र की सफलता व उनकी लंबी आयु की कामना करती है। संकष्‍टी चतुर्थी के दिन शाम को चंद्रमा को शहद, रोली, चंदन और रोली मिश्रित दूध से अर्घ्‍य दें। इस दिन महिलाएं चंद्र दर्शन के बाद व्रत तोड़ती हैं। लेकिन शाम के समय गणेश जी का पूजन करते समय उन्हें चार चीज़ें जरुर अर्पित करें और गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए करें ये 4 आसान से उपाय....

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1. लाल फूल
भगवान गणेश के सिर पर लाल गुड़हल का फूल चढ़ाएं और सूखने पर उसे अपने पर्स में रख लें। ऐसा करने से यह आपकी हर विपत्ति में ताकत बनेगा।

2. दूर्वा
संकष्टी चतुर्थी के दिन 11 दूर्वा पत्तियां श्री गणेश के पेट पर चिपकाएं। धन संबंधी सारे मामले सुलझ जाएंगे और घर में आय के नए रास्ते खुल जाएंगे।

3. मोदक
संकष्टी चतुर्थी के दिन श्री गणेश को 4 मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। इन चारों में से एक उनके पास रखा रहने दें। दूसरा गणेश मंदिर में चढ़ा दें, तीसरा किसी बच्चे को दें और चौथा स्वयं खा लें। ये उपाय करने से धन प्राप्ति के योग बन जाते हैं।

4. सिंदूर
शीघ्र ही मनोवांछित फल पाने के लिए श्री गणेश को संकष्टी चतुर्थी के दिन हल्दी मिश्रित सिंदूर उनके चरणों में रखें। क्योंकि गणपति जी को सिंदूर बहुत प्रिय है।


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महाशिवरात्रि 2019: अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए रात को जरुर करें ये चमत्कारी पाठ, शिव जी जल्द होंगे प्रसन्न


महाशिवरात्रि इस बार 04 मार्च, सोमवार के दिन पड़ रही है। पुराणों के अनुसार सोमवार और महाशिवरात्रि दोनों ही दिन शिव जी को प्रसन्न करने के लिए उत्तम हाने जाते हैं। इस दिन पूर्ण श्रद्धा से किए हुए हर उपाय कारगार सिद्ध होते हैं। इस दिन शिव मंदिरों में भक्तों का भारी भीड़ रहती है। इस दिन शिवलिंग पर बेल-पत्र चढ़ाना, उपवास तथा रात्रि जागरण किया जाता है। रात्रि जागरण करना एक विशेष कर्म माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान शिव का विवाह हुआ था, इसलिए रात्रि में शिवजी की बारात निकाली जाती है और जागरण कर विधि-विधान से पूजा की जाती है। पंडित रमाकांत मिश्रा के अनुसार महाशिवरात्रि को रात्रि के समय शिव महिमा स्त्रोत पढ़ने से शिव जी जल्दि प्रसन्न हो जाते हैं और मनचाहा आशीर्वाद प्रदान करते हैं, ये है शिव महिमा स्त्रोत

 

 

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शिव महिम्न स्तोत्रम्

महिम्नः पारं ते परमविदुषो यद्यसदृशी
स्तुतिर्ब्रह्मादीनामपि तदवसन्नास्त्वयि गिरः
अथाऽवाच्यः सर्वः स्वमतिपरिणामावधि गृणन्
ममाप्येष स्तोत्रे हर निरपवादः परिकरः।।

अतीतः पंथानं तव च महिमा वाङ्मनसयोः
अतद्व्यावृत्त्या यं चकितमभिधत्ते श्रुतिरपि
स कस्य स्तोत्रव्यः कतिविधगुणः कस्य विषयः
पदे त्वर्वाचीने पतति न मनः कस्य न वचः।।

मधुस्फीता वाचः परमममृतं निर्मितवतः
तव ब्रह्मन् किं वागपि सुरगुरोर्विस्मयपदम्
मम त्वेतां वाणीं गुणकथनपुण्येन भवतः
पुनामीत्यर्थेऽस्मिन् पुरमथन बुद्धिर्व्यवसिता।।

तवैश्वर्यं यत्तज्जगदुदयरक्षाप्रलयकृत्
त्रयीवस्तु व्यस्तं तिस्रुषु गुणभिन्नासु तनुषु
अभव्यानामस्मिन् वरद रमणीयामरमणीं
विहन्तुं व्याक्रोशीं विदधत इहैके जडधियः।।

किमीहः किंकायः स खलु किमुपायस्त्रिभुवनं
किमाधारो धाता सृजति किमुपादान इति च
अतर्क्यैश्वर्ये त्वय्यनवसर दुःस्थो हतधियः
कुतर्कोऽयं कांश्चित् मुखरयति मोहाय जगतः।।

अजन्मानो लोकाः किमवयववन्तोऽपि जगतां
अधिष्ठातारं किं भवविधिरनादृत्य भवति
अनीशो वा कुर्याद् भुवनजनने कः परिकरो
यतो मन्दास्त्वां प्रत्यमरवर संशेरत इमे...।।

त्रयी साङ्ख्यं योगः पशुपतिमतं वैष्णवमिति
प्रभिन्ने प्रस्थाने परमिदमदः पथ्यमिति च
रुचीनां वैचित्र्यादृजुकुटिल नानापथजुषां
नृणामेको गम्यस्त्वमसि पयसामर्णव इव।।

महोक्षः खट्वाङ्गं परशुरजिनं भस्म फणिनः
कपालं चेतीयत्तव वरद तन्त्रोपकरणम्
सुरास्तां तामृद्धिं दधति तु भवद्भूप्रणिहितां
न हि स्वात्मारामं विषयमृगतृष्णा भ्रमयति।।

ध्रुवं कश्चित् सर्वं सकलमपरस्त्वध्रुवमिदं
परो ध्रौव्याऽध्रौव्ये जगति गदति व्यस्तविषये
समस्तेऽप्येतस्मिन् पुरमथन तैर्विस्मित इव
स्तुवन् जिह्रेमि त्वां न खलु ननु धृष्टा मुखरता।।

तवैश्वर्यं यत्नाद् यदुपरि विरिञ्चिर्हरिरधः
परिच्छेतुं यातावनिलमनलस्कन्धवपुषः
ततो भक्तिश्रद्धा-भरगुरु-गृणद्भ्यां गिरिश यत्
स्वयं तस्थे ताभ्यां तव किमनुवृत्तिर्न फलति।।

अयत्नादासाद्य त्रिभुवनमवैरव्यतिकरं
दशास्यो यद्बाहूनभृत-रणकण्डू-परवशान्
शिरःपद्मश्रेणी-रचितचरणाम्भोरुह-बलेः
स्थिरायास्त्वद्भक्तेस्त्रिपुरहर विस्फूर्जितमिदम्।।

अमुष्य त्वत्सेवा-समधिगतसारं भुजवनं
बलात् कैलासेऽपि त्वदधिवसतौ विक्रमयतः
अलभ्यापातालेऽप्यलसचलितांगुष्ठशिरसि
प्रतिष्ठा त्वय्यासीद् ध्रुवमुपचितो मुह्यति खलः।।

यदृद्धिं सुत्राम्णो वरद परमोच्चैरपि सतीं
अधश्चक्रे बाणः परिजनविधेयत्रिभुवनः
न तच्चित्रं तस्मिन् वरिवसितरि त्वच्चरणयोः
न कस्याप्युन्नत्यै भवति शिरसस्त्वय्यवनतिः।।

अकाण्ड-ब्रह्माण्ड-क्षयचकित-देवासुरकृपा
विधेयस्याऽऽसीद् यस्त्रिनयन विषं संहृतवतः
स कल्माषः कण्ठे तव न कुरुते न श्रियमहो
विकारोऽपि श्लाघ्यो भुवन-भय-भङ्ग-व्यसनिनः।।

असिद्धार्था नैव क्वचिदपि सदेवासुरनरे
निवर्तन्ते नित्यं जगति जयिनो यस्य विशिखाः
स पश्यन्नीश त्वामितरसुरसाधारणमभूत्
स्मरः स्मर्तव्यात्मा न हि वशिषु पथ्यः परिभवः।।

मही पादाघाताद् व्रजति सहसा संशयपदं
पदं विष्णोर्भ्राम्यद् भुज-परिघ-रुग्ण-ग्रह-गणम्
मुहुर्द्यौर्दौस्थ्यं यात्यनिभृत-जटा-ताडित-तटा
जगद्रक्षायै त्वं नटसि ननु वामैव विभुता।।

वियद्व्यापी तारा-गण-गुणित-फेनोद्गम-रुचिः
प्रवाहो वारां यः पृषतलघुदृष्टः शिरसि ते
जगद्द्वीपाकारं जलधिवलयं तेन कृतमिति
अनेनैवोन्नेयं धृतमहिम दिव्यं तव वपुः।।

रथः क्षोणी यन्ता शतधृतिरगेन्द्रो धनुरथो
रथाङ्गे चन्द्रार्कौ रथ-चरण-पाणिः शर इति
दिधक्षोस्ते कोऽयं त्रिपुरतृणमाडम्बर विधिः
विधेयैः क्रीडन्त्यो न खलु परतन्त्राः प्रभुधियः।।

हरिस्ते सहस्रं कमल बलिमाधाय पदयोः
यदेकोने तस्मिन् निजमुदहरन्नेत्रकमलम्
गतो भक्त्युद्रेकः परिणतिमसौ चक्रवपुषः
त्रयाणां रक्षायै त्रिपुरहर जागर्ति जगताम्।।

क्रतौ सुप्ते जाग्रत् त्वमसि फलयोगे क्रतुमतां
क्व कर्म प्रध्वस्तं फलति पुरुषाराधनमृते
अतस्त्वां सम्प्रेक्ष्य क्रतुषु फलदान-प्रतिभुवं
श्रुतौ श्रद्धां बध्वा दृढपरिकरः कर्मसु जनः।।

क्रियादक्षो दक्षः क्रतुपतिरधीशस्तनुभृतां
ऋषीणामार्त्विज्यं शरणद सदस्याः सुर-गणाः
क्रतुभ्रंशस्त्वत्तः क्रतुफल-विधान-व्यसनिनः
ध्रुवं कर्तुं श्रद्धा विधुरमभिचाराय हि मखाः।।

प्रजानाथं नाथ प्रसभमभिकं स्वां दुहितरं
गतं रोहिद् भूतां रिरमयिषुमृष्यस्य वपुषा
धनुष्पाणेर्यातं दिवमपि सपत्राकृतममुं
त्रसन्तं तेऽद्यापि त्यजति न मृगव्याधरभसः।।

स्वलावण्याशंसा धृतधनुषमह्नाय तृणवत्
पुरः प्लुष्टं दृष्ट्वा पुरमथन पुष्पायुधमपि
यदि स्त्रैणं देवी यमनिरत-देहार्ध-घटनात्
अवैति त्वामद्धा बत वरद मुग्धा युवतयः।।

श्मशानेष्वाक्रीडा स्मरहर पिशाचाः सहचराः
चिता-भस्मालेपः स्रगपि नृकरोटी-परिकरः
अमङ्गल्यं शीलं तव भवतु नामैवमखिलं
तथापि स्मर्तॄणां वरद परमं मङ्गलमसि

मनः प्रत्यक् चित्ते सविधमविधायात्त-मरुतः
प्रहृष्यद्रोमाणः प्रमद-सलिलोत्सङ्गति-दृशः
यदालोक्याह्लादं ह्रद इव निमज्यामृतमये
दधत्यन्तस्तत्त्वं किमपि यमिनस्तत् किल भवान्।।

त्वमर्कस्त्वं सोमस्त्वमसि पवनस्त्वं हुतवहः
त्वमापस्त्वं व्योम त्वमु धरणिरात्मा त्वमिति च
परिच्छिन्नामेवं त्वयि परिणता बिभ्रति गिरं
न विद्मस्तत्तत्त्वं वयमिह तु यत् त्वं न भवसि।।

त्रयीं तिस्रो वृत्तीस्त्रिभुवनमथो त्रीनपि सुरान्
अकाराद्यैर्वर्णैस्त्रिभिरभिदधत् तीर्णविकृति
तुरीयं ते धाम ध्वनिभिरवरुन्धानमणुभिः
समस्त-व्यस्तं त्वां शरणद गृणात्योमिति पदम्।।

भवः शर्वो रुद्रः पशुपतिरथोग्रः सहमहान्
तथा भीमेशानाविति यदभिधानाष्टकमिदम्
अमुष्मिन् प्रत्येकं प्रविचरति देव श्रुतिरपि
प्रियायास्मैधाम्ने प्रणिहित-नमस्योऽस्मि भवते।।

नमो नेदिष्ठाय प्रियदव दविष्ठाय च नमः
नमः क्षोदिष्ठाय स्मरहर महिष्ठाय च नमः
नमो वर्षिष्ठाय त्रिनयन यविष्ठाय च नमः
नमः सर्वस्मै ते तदिदमतिसर्वाय च नमः।।

बहुल-रजसे विश्वोत्पत्तौ भवाय नमो नमः
प्रबल-तमसे तत् संहारे हराय नमो नमः
जन-सुखकृते सत्त्वोद्रिक्तौ मृडाय नमो नमः
प्रमहसि पदे निस्त्रैगुण्ये शिवाय नमो नमः।।

कृश-परिणति-चेतः क्लेशवश्यं क्व चेदं
क्व च तव गुण-सीमोल्लङ्घिनी शश्वदृद्धिः
इति चकितममन्दीकृत्य मां भक्तिराधाद्
वरद चरणयोस्ते वाक्य-पुष्पोपहारम्।।

असित-गिरि-समं स्यात् कज्जलं सिन्धु-पात्रे
सुर-तरुवर-शाखा लेखनी पत्रमुर्वी
लिखति यदि गृहीत्वा शारदा सर्वकालं
तदपि तव गुणानामीश पारं न याति।।

असुर-सुर-मुनीन्द्रैरर्चितस्येन्दु-मौलेः
ग्रथित-गुणमहिम्नो निर्गुणस्येश्वरस्य
सकल-गण-वरिष्ठः पुष्पदन्ताभिधानः
रुचिरमलघुवृत्तैः स्तोत्रमेतच्चकार।।

अहरहरनवद्यं धूर्जटेः स्तोत्रमेतत्
पठति परमभक्त्या शुद्ध-चित्तः पुमान् यः
स भवति शिवलोके रुद्रतुल्यस्तथाऽत्र
प्रचुरतर-धनायुः पुत्रवान् कीर्तिमांश्च।।

महेशान्नापरो देवो महिम्नो नापरा स्तुतिः
अघोरान्नापरो मन्त्रो नास्ति तत्त्वं गुरोः परम्

दीक्षा दानं तपस्तीर्थं ज्ञानं
योगादिकाः क्रियाः
महिम्नस्तव पाठस्य कलां
नार्हन्ति षोडशीम्।।

कुसुमदशन-नामा सर्व-गन्धर्व-राजः
शशिधरवर-मौलेर्देवदेवस्य दासः
स खलु निज-महिम्नो भ्रष्ट एवास्य रोषात्
स्तवनमिदमकार्षीद् दिव्य-दिव्यं महिम्नः।।

सुरगुरुमभिपूज्य स्वर्ग-मोक्षैक-हेतुं
पठति यदि मनुष्यः प्राञ्जलिर्नान्य-चेताः
व्रजति शिव-समीपं किन्नरैः स्तूयमानः
स्तवनमिदममोघं पुष्पदन्तप्रणीतम्।।

आसमाप्तमिदं स्तोत्रं पुण्यं गन्धर्व-भाषितम्
अनौपम्यं मनोहारि सर्वमीश्वरवर्णनम्

इत्येषा वाङ्मयी पूजा श्रीमच्छङ्कर-पादयोः
अर्पिता तेन देवेशः प्रीयतां मे सदाशिवः।।

तव तत्त्वं न जानामि कीदृशोऽसि महेश्वर,
यादृशोऽसि महादेव तादृशाय नमो नमः

एककालं द्विकालं वा त्रिकालं यः पठेन्नरः
सर्वपाप-विनिर्मुक्तः शिव लोके महीयते

श्री पुष्पदन्त-मुख-पंकज-निर्गतेन
स्तोत्रेण किल्बिष-हरेण हर-प्रियेण
कण्ठस्थितेन पठितेन समाहितेन
सुप्रीणितो भवति भूतपतिर्महेशः।।


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महाशिवरात्रि 2019: इस दिन भगवान शिव को भूलकर भी ना चढ़ाएं ये चीज़, वरना हो जाएंगे नाराज़


देवी-देवताओं की पूजा में हम कई तरह की सामग्रियों का उपयोग करते हैं जिनसे भगवान को प्रसन्न किया जा सके। हिंदू धर्म के अनुसार महादेव को प्रसन्न करने के लिए उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। यूं तो सोमवार के दिन शिव जी का दिन माना जाता है लेकिन इसके अलावा साल में एक बार आने वाली महाशिवरात्रि को भी शिव जी आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है। इसलिए इस दिन सभी लोग बड़ी धूम-धाम से शिव आराधऩा करते हैं व विधि-विधान से शिव अभिषेक करते हैं। इस बार महाशिवरात्रि 4 मार्च, सोमवार के दिन पड़ रही है। इस दिन शिव जी को प्रसन्न करने के लिए सभी घरों व मंदिरों में पूजा करते हैं।

mahashivratri 2019

सभी देवों में भोलेनाथ बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं व जल्दी वरदान भी देते हैं। लेकिन शिव जी जितना जल्दी प्रसन्न होते हैं उतना ही जल्दी क्रोधित भी हो जाते है और भगवान शिव का रौद्र रूप काफी भयभीत करने वाला होता है। महादेव को भांग, धतूरे का चढ़ावा बहुत पसंद है, पर कुछ ऐसी वस्तुएं भी हैं जिनका उपयोग शिव आराधना के दौरान वर्जित माना गया है। शिवपुराण के अनुसार शिव भक्तों को कभी भी शिव जी को तुलसी, हल्दी और सिंदूर सहित ये उन्य वस्तु नहीं चढ़ाना चाहिए। आइए जानते हैं कौन सी हैं वो वस्तुएं....

mahashivratri 2019

1. कुमकुम या सिंदूर
सिंदूर, विवाहित स्त्रियों का गहना माना गया है। सिंदूर या कुमकुम हिंदू महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए लगाती हैं। जैसा की हम जानते हैं कि भगवान शिव विध्वंसक के रूप में जाने जाते हैं इसलिए शिवलिंग पर कुमकुम नहीं चढ़ाया जाता है।

2. हल्दी ना चढ़ाएं
शिवजी के अतिरिक्त लगभग सभी देवी-देवताओं को पूजन में हल्दी गंध और औषधि के रूप में प्रयोग की जाती है। शिवलिंग पर हल्दी कभी नहीं चढ़ाई जाती है क्योंकि यह महिलाओं की सुंदरता को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होती है। और शिवलिंग भगवान शिव का प्रतीक है।

3. तुलसी की पत्ती
वैसे तो तुलसी की पत्तियां पूजा में काम आती है, लेकिन भगवान शिव की पूजा के लिए नहीं करना चाहिए। कहा जाता है की भगवान शिव ने जालंधर नामक राक्षस का वध किया था और जालंधर की पत्‍नी वृंदा तुलसी का पौधा बन गई थी। इसलिए वृंदा ने भगवान शिव की पूजा में तुलसी के प्रयोग वर्जित है।

4. शंख से जल
भगवान शिव की पूजा में शंख का उपयोग वर्जित होता है। दैत्य शंखचूड़ के अत्याचारों से देवता परेशान थे। भगवान शंकर ने त्रिशुल से उसका वध किया था, जिसके बाद उसका शरीर भस्म हो गया। शंखचूड़ के भस्म से ही शंख की उत्पत्ति हुई थी। यही कारण है की शिवजी की पूजा में शंख का उपयोग नहीं किया जाता और शिव जी को कभी भी शंख से जल अर्पित नहीं किया जाता है।

5. नारियल का पानी
शिवलिंग पर नारियल अर्पित किया जाता है लेकिन इससे अभिषेक नहीं करना चाहिए। इसलिए शिव पर नारियल का जल नहीं चढ़ाना चाहिए। भगवान शिव की पूजा में नारियल प्रयोग नहीं किया जाता है और नारियल को लक्ष्‍मी का रूप माना गया है, इसलिए भगवान शिव को छोड़कर सभी शुभ कार्यों में नारियल का प्रयोग होता है।

6. केतकी के फूल
पौराणिक कथा के अनुसार केतकी फूल ने ब्रह्मा जी के झूठ में साथ दिया था, जिससे नाराज होकर भोलनाथ ने केतकी के फूल को श्राप दिया। शिव जी ने कहा कि शिवलिंग पर कभी केतकी के फूल को अर्पित नहीं किया जाएगा। इसी श्राप के बाद से शिव को केतकी के फूल अर्पित किया जाना अशुभ माना जाता है।


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Mahashivratri 2019: महाशिवरात्रि पर करें 3 बेलपत्र का यह चमत्कारी उपाय, मिलेगी सुख-शांति और समृद्धि


महाशिवरात्रि का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन शिव जी को प्रसन्न करने के लिए विधि-विधान से पूजा-पाठ की जाती है। 2019 में महाशिवरात्रि 4 मार्च को मनाई जाएगी। शिव जी के साथ-साथ इस दिन पार्वती माता का भी पूजन किया जाता है। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए रात भर पूजा की जाती है और उन्हें प्रसन्न कर मनचाहा वरदान पाने की इच्छा जताई जाती है। वैसे तो शिव जी जल्द ही सभी की मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं लेकिन यदि आप महाशिवरात्रि पर विशेष उपाय करेंगे तो शिव जी का वरदान आपको जरुर प्राप्त होगा। तो आइए जानते हैं शिवरात्रि के दिन किन उपायों को करना चाहिए....

 

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1. महाशिवरात्रि के दिन तीन बेलपत्र लें उन पर सफेद या पीले चंदन से ऊं नमः शिवाय लिखें। इसके बाद बेलपत्र पर एक मुखी रुद्राक्ष रखकर शिवलिंग पर अर्पित कर दें। इस उपाय को करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।

2. जो लोग शिवरात्रि पर किसी बिल्व वृक्ष के नीचे खड़े होकर खीर और घी का दान करते हैं, उन्हें महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ऐसे लोग जीवनभर सुख-सुविधाएं प्राप्त करते हैं और कार्यों में सफल होते हैं।

3. शिवपुराण के अनुसार बिल्व वृक्ष महादेव का रूप हैं। इसलिए इसकी पूजा करें। फूल, कुमकुम, प्रसाद आदि चीज़ें विशेष रूप से चढ़ाएं। इसकी पूजा से जल्दी शुभ फल मिलते हैं। शिवरात्रि पर बिल्व के पास दीपक जलाएं।

4. जल में केसर मिलाएं और ये जल शिवलिंग पर चढ़ाएं। इस उपाय से विवाह और वैवाहिक जीवन से जुडी समस्याएं खत्म होती हैं।

5. जल चढ़ाते समय शिवलिंग को हथेलियों से रगड़ना चाहिए। इस उपाय से किसी की भी किस्मत बदल सकती हैं।


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महाशिवरात्रि 2019: शिवलिंग स्थापना करने से पहले रखें इन बातों का खास ध्यान


महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान शिव की पूजा की जाती है। कहा जाता है की इस दिन शिव जी की पूजा पूरी रात की जाती है और उन्हें प्रसन्न किया जाता है। इस साल महाशिवरात्रि का पर्व 4 मार्च को मनाया जाएगा। शिव जी की इस दिन विशेष मुहूर्त में पूजा की जाती है और सभी शिव भक्त इस दिन व्रत भी रखते हैं। शिव जी को प्रसन्न करने के लिए पूजा-अर्चना के लिए घरों में शिवलिंग की स्थापना भी की जाती है। लेकिन शिवलिंग की स्थापना करने से पहले कुछ नियमों का पालन करना बहुत ही जरुरी होता है, वरना भोलेनाथ आप से नाराज़ भी हो सकते हैं। आइए जानते हैं शिवरात्रि के दिन शिवलिंग स्थापना करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है.....

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इस बार महाशिवरात्रि पर यदि आप अपने घर में शिवलिंग की स्थापना करने वाले हैं तो आपको इन बातों का ध्यान रखना बहुत जरुर है

1. शिवलिंग की स्थापना करते समय आपका मुख दक्षिण दिशा में रखें। शिवलिंग को अंधेरे वाली जगह पर बिलकुल भी स्थापित ना करें।

2. एक बार घर में शिवलिंग की स्थापना होने के बाद नियमित रुप से शिवलिंग का अभिषेक करें। यदि नियमित पूजा नहीं किया जाता है तो इस स्थिति में घर के सदस्यों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

3. शिवलिंग की स्थापना करने के बाद पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें और उन्हें बेलपत्र चढ़ाएं।

4. इसके बाद भगवान शिव के सबसे प्रमुख महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।

5. महामृत्युंजय मंत्र जाप के बाद अंत में शिव जी की आरती करें व उन्हें भोग लगाएं।


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Mahashivratri 2019: महाशिवरात्रि पर इन राशियों पर बरसेगी महादेव की कृपा, होगा जबरदस्त आर्थिक लाभ


हिंदू पंचांग के अनुसार यूं तो हर महीने शिवरात्रि मनाई जाती है लेकिन इसके अलावा साल में एक महाशिवरात्रि आती है, जिसका बहुत अधिक महत्व माना जाता है। इस दिन शिव जी को प्रसन्न करने के लिए विधि-विधान से पूजा-पाठ की जाती है। इस बार महाशिवरात्रि 4 मार्च को मनाई जाएगी। शिव जी के सा-साथ इस दिन पार्वती माता की भी पूजा की जाती है। इस बार शिव जी की कृपा कुछ राशियों पर विशेष रुप से बरसेगी। पंडित रमाकांत मिश्रा के अनुसार कुछ राशि के जातकों के लिए शिवरात्रि खुशियां और धन लाभ के योग लेकर आ रही है। आइए जानते हैं इस बार महाशिवरात्रि किन राशियों के लिए खुशियों से भरी रहेगी....

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वृषभ राशि
इस राशि के जातकों के लिए महाशिवरात्रि बहुत ही लाभप्रद रहेगी। शिव जी की विशेष कृपा से आपको खूब तरक्की और आय के नए स्त्रोत प्राप्त होंगे। इस दौरान आपके सभी रुके कार्य पूर्ण होंगे और मनचाही सफलता भी आपको मिलेगी। अतः शिवरात्रि का दिन आपके लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होगा।

मिथुन राशि
इस राशि के जातकों के लिए महाशिवरात्रि आर्थिक दृष्टि से लाभप्रद रहेगी। इस शुभ योग में आपको धन वृ्द्धि व व्यवसाय में लाभ दिलाएगी। नौकरी पेशा लोगों के लिए भी इस समय बहुत अवसर होंगे, जिनका लाभ उठा सकते हैं।

तुला राशि
तुला राशि के जातकों के लिए भी इस बार की महाशिवरात्रि सकारात्मक परिणाम लेकर आ रही है। इस राशि के जातकों के लिए व्यापार में लाभ के योग बन रहे हैं, वहीं जो लोग काफी दिनों से बेरोजगार चल रहे हैं उन्हें रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

धनु राशि
धनु राशि के जातकों को महाशिवरात्रि से लाभ होगा, जो जातक अपना व्यवसाय प्रारंभ करना चाहते हैं उनके लिए ये समय उचित है, अभी प्रारंभ किए गए व्यापार से आगे चलकर लाभ होगा।


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बसंत पंचमी के दिन बन रहा रवि सिद्धि का महासंयोग, बच्चों को जरुर कराएं अक्षर ज्ञान


बसंत पंचमी के दिन विद्यार्थी, संगीतकार और लेखक विशेष रुप से देवी सरस्वती की पूजा करते हैं। मां सरस्वती को वाणी, स्वर और विद्या की देवी कहा जाता है। इस दिन नन्हे बच्चों को अक्षर अभ्यास कराया जाता है, माना जाता है की इस दिन अक्षर अभ्यास करवाने से बच्चों की बुद्धि कुशाग्र होती है। मां सरस्वती जी का आशीर्वाद उन्हें मिलता है। प्राचीन काल में बालकों को बसंत पंचमी के दिन से ही शिक्षा देना शुरु किया जाता था, इसलिए इस दिन का महत्व विद्या व ज्ञान के क्षेत्र में अधिक माना जाता है। इस बार बसंत पंचमी पर्व 10 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा। वहीं पंडित रमाकांत मिश्रा के अनुसार बसंत पंचमी के दिन अबूझ नक्षत्र और रविसिद्धि का महासंयोग बन रहा है। पूजन के समय अबूझ नक्षत्र का भी संयोग बना है। पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 6.40 बजे से दोपहर 12.12 बजे तक है।

basant panchami

सरस्वती पूजा पर मंत्र दीक्षा, नवजात शिशुओं का विद्या आरंभ भी किया जाता है। इस तिथि पर मां सरस्वती के साथ गणेश, लक्ष्मी और पुस्तक-लेखनी की पूजा अति फलदायी मानी जाती है। सरस्वती ब्रह्म की शक्ति के रूप में भी जानी जाती हैं। इस दिन मां सरस्वती की नदियों की देवी के रूप में भी पूजा की जाती है।

इस दिन जरुर लिखवाएं बच्चों से अक्षर

बसंत पंचमी के दिन बच्चों से काले रंग की पट्टी व चाक का पूजन करवाएं। बहुत छोटे बच्चों से चावल से भरी थाली पर अंगुली से इन 3 में से कोई एक अक्षर लिखवाएं। इस दिन सरस्वती स्वरूपा कलम व पुस्तक का पूजन करना चाहिए। इसके बाद सरस्वती के मूल मंत्र श्री ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा से देवी का पूजन व स्मरण करें। इसके साथ ही जो लोग अपने बच्चे को उच्च शिक्षा में सफल होता देखना चाहते हैं, वे पंचमी वाले दिन बच्चे के हाथ से किसी ब्राह्मण को वेदशास्त्र का दान करवाएं।


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बसंत पंचमी के दिन करें ये उपाय, बच्चे हो जाऐेंगे शार्प माइंडेड


माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को सरस्वती की पूजा के दिन रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन को बसंत पंचमी पर्व कहा जाता है। इस बार बसंत पंचमी 10 फरवरी को मनाया जाएगा। बसंत पंचमी के दिन विद्यार्थी, संगीतकार और लेखक विशेष रुप से देवी सरस्वती की पूजा करते हैं और इनके अलावा भी लोग अपने घरों में भी सरस्वती जी की पूजा-अर्चना करते हैं। मां सरस्वती को वाणी, स्वर और विद्या की देवी कहा जाता है। इस दिन नन्हे बच्चों को अक्षर अभ्यास कराया जाता है, माना जाता है की इस दिन अक्षर अभ्यास करवाने से बच्चों की बुद्धि कुशाग्र होती है। मां सरस्वती जी का आशीर्वाद उन्हें मिलता है। प्राचीन काल में बालकों को बसंत पंचमी के दिन से ही शिक्षा देना शुरु किया जाता था, इसलिए इस दिन का महत्व विद्या व ज्ञान के क्षेत्र में अधिक माना जाता है। आइए जानते हैं क्या है बसंत पंचमी की अन्य मान्यताएं....

basant panchami

1. बसंत पंचमी के दिन बच्चों से काले रंग की पट्टी व चाक का पूजन करवाएं। बहुत छोटे बच्चों से चावल से भरी थाली पर अंगुली से इन 3 में से कोई एक अक्षर लिखवाएं। इस दिन सरस्वती स्वरूपा कलम व पुस्तक का पूजन करना चाहिए। इसके बाद सरस्वती के मूल मंत्र श्री ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा से देवी का पूजन व स्मरण करें। इसके साथ ही जो लोग अपने बच्चे को उच्च शिक्षा में सफल होता देखना चाहते हैं, वे पंचमी वाले दिन बच्चे के हाथ से किसी ब्राह्मण को वेदशास्त्र का दान करवाएं।

 

basant panchami

2. बसंत पंचमी के दिन 6 माह तक के बच्चों को पहली बार अन्न चखाने की भी परंपरा निभाई जाती है। इसमें बच्चे को पहली बार अन्न खिलाया जाता है, जिसे अन्न प्राशन संस्कार कहा जाता है। इस दिन दूध पीते बच्चे को नए कपड़े पहनाकर, चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर और उस पर बच्चे को बैठाकर मां सरस्वती की आराधना करके चांदी के चम्मच से खीर खिलाएं। बच्चे की जीभ पर ऐं, श्री या ॐ लिखें। वसंत पंचमी पर छोटे बच्चों को अक्षर अभ्यास करवाने से वह कुशाग्र बुद्धि का होता है। इस दिन माता-पिता अपने बच्चे को गोद में लेकर चांदी या अनार की कलम से शहद से बच्चे की जीभ पर ऐं, श्री या ॐ लिखें। इसके बाद सरस्वती का पूजन करें।


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