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आईएलएंडएफएस मामला: एनसीएलएटी में पहुंची 100 याचिकाएं, कर्मचारी वर्ग ने डाली 50 फीसदी से ज्यादा


नई दिल्ली। राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) को प्रस्तावित आईएलएंडएफएस समाधान योजना के तहत निपटारे की मांग करते हुए तकरीबन 100 क्रेडिटर्स की ओर से याचिकाएं डाली गई ळैं। करीब 100 याचिकाओं में आईएएनएस की जानकारी के अनुसार, तकरीबन 50 फीसदी याचिकाएं कर्मचारी निधि, सेवानिवृत्ति निधि, ग्रेच्यूटी फंड और भविष्य निधि द्वारा दाखिल की गई हैं। इसका मतलब यह है कि यह कामकाजी कर्मचारी वर्ग की सेवानिवृत्ति की बचत राशि है। यह योजना सरकार द्वारा सौंपी गई थी। कॉरपोरेट समूहों और उनके पीएफ फंड, कर्मचारी फंड, एमएनसी, डाक निधि, बैंक, पीएसयू और कुछ पावर कंपनी समेत सिक्योर्ड व अनसिक्योर्ड क्रेडिटर्स की ओर से प्राप्त याचिकाएं मिली हैं।

अधिकांश याचिकाएं हालांकि कर्मचारी निधि व न्यास की ओर से दाखिल की गई हैं जो अपने निवेश को असुरक्षित मानते हुए समाधान रूपरेखा से सहारे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे लाखों अल्पकालिक, वेतनभोगी और भोलेभाले निवेशक प्रभावित हुए हैं। नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर निधि के प्रतिनिधि ने आईएएनएस से कहा, "हमें आईएलएंडएफएस में निवेश की गई अपने जीवनभर की कमाई की सुरक्षा के लिए सरकार की मदद की दरकार है। मौजूदा कानूनी संरचना सिक्योर्ड क्रेडिटर्स के प्रति पूर्वाग्रही है। सरकार को अब छोटे निवेशकों के हितों में कार्रवाई शुरू करनी चाहिए। हम सिक्योर्ड क्रेडिटर्स, बैंक और एमएनसी की तहत संगठित व शक्तिशाली नहीं हैं, जो अपने हिस्से के लिए लडऩे को तैयार हैं। लेकिन हम वेतनभोगी वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो बड़ी तादाद में निर्वाचक वर्ग हैं और अपने प्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की मांग करते हैं।"

आईएलएंडएफएस के प्रवक्ता से संपर्क करने पर उन्होंने इन बदनसीब कर्मचारी वर्ग के निवेशकों के समाधान पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। जाहिर है कि यह चुनावी साल है और कर्मचारी वर्ग मतदाता भी हैं, लेकिन कोई उनकी समस्या को लेकर जवाब देने को आगे नहीं आ रहे हैं, इसलिए यह संवदेनशील मसला अनियंत्रित बनता जा रहा है। आईएएनएस की जानकारी के अनुसार, कुछ फंड इस मसले पर राजनीतिक मदद भी तलाश रहे हैं और आईएलएंडएफएस संकट से प्रभावित लाखों मध्यमवर्गीय मतदाताओं के मसले को लेकर आंखें फेर लेना किसी भी राजनीतिक दल के लिए मुश्किल होगा।

एक फंड के प्रतिनिधि ने आईएएनएस को बताया, "सरकार ने क्रेडिटर के हितों व मूल्य की सुरक्षा के लिए एक नया बोर्ड नियुक्त किया। लेकिन अब तक छोटे क्रेडिटर्स की भागीदारी नहीं होने से समाधान रूपरेखा में सिर्फ बड़े व शक्तिशाली क्रेडिटर्स के लिए ही काम हो रहा है।" एनसीएलएटी की अगली सुनवाई 29 मार्च को होने वाली है। उधर, विपक्ष जनसमूह से जुडऩे का हर मौके की तलाश में है और खुद को उनके हितैषी के रूप में देख रहा है।


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इस साल भी नहीं लागू होगा अकाउंटिंग रूल, बैंकों के फंसे कर्ज से निजात पाने की उम्मीद टूटी


नई दिल्ली। भारत ने लगातार दूसरी बार कड़े अकाउंटिंग नियम को टाल दिया है। इस कदम के बाद देश को बैंकों को एक बार फिर 190 अरब डॉलर के फंसे कर्ज को रिकवर करने का मौका धूमिल हो गया है। बीते दिनों भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि इंडियन अकाउंटिंग स्टैंर्ड्डस नियम में बदलाव करने पर सरकार अभी भी विचार कर रही है। आरबीआई ने अपनी वेबसाइट पर इस संबंध में लिखा, " आगामी नोटिस तक इस प्रावधान को लागू करने में देर कर दी गई है।"


बैंकों को मिल सकता था बूस्ट

आईएफआरएस9 स्टैंर्ड्डस के आधार पर वित्तीय संकट को देखते हुए आगामी 1 अप्रैल से नए नियम को लागू करना था। फिच रेटिंग्स के अनुसार, यदि इस नियम को लागू कर दिया जाता तो 30 जून को समाप्त होने वाली आगामी वित्त विर्ष की पहली तिमाही में देश की सरकारी उधारकर्ताओं की संपत्ति में 1.1 ट्रिलियन रुपए का फायदा होता। इससे प्राइवेट बैंकों को भी एक ठोस पूंजी मिल सकती थी। बता दें कि सरकार ने पहले ही दो साल की अवधि में बैंकों में करीब 1.9 ट्रिलियन रुपए के कैपिटल इन्फ्युजन का प्लान बनाया है। ऐसे में बैंकों को एक बड़े बूस्ट मिलने को धक्का लगा है।


नियम में देरी से इस बैंकों पर नहीं पड़ेगा अधिक असर

पिछले साल अप्रैल में, आरबीआई ने अकाउंटिंग स्टैंडर्ड नियम लागू करना के प्लान को भी टाल दिया है। उस दौरान आरबीआई ने कारण बताया था कि इस नियम में कुछ कानूनी प्रावधानों के बारे में विचार करना है और साथ ही तैयारियों के लिए भी कुछ समय चाहिए होगा। हालांकि, विश्लेषकों ने कहा कि पिछले साल की तुलना में इस साल बैंकों पर इसका अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस नियम के तहत बैंकों को यदि इस बात की आशंका होती है उनका दिया हुआ कर्ज फंसने वाला है तो इससे बचने के लिए बैंक कुछ प्रावधान कर सकते हैं।

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डिजिटल इंडिया कैंपेन को झटका, नकदी के चलन में हुआ 19.44 फीसदी का इजाफा, 15 मार्च तक 21.41 लाख करोड़ पर पहुंची


नई दिल्ली। नोटबंदी से डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिलने के केंद्र सरकार के दावे एक बार फिर हवा होते दिख रहे हैं। 15 मार्च 2019 तक प्रचलन में मौजूद नकदी (करेंसी इन सर्कुलेशन) नोटबंदी से पहले की तुलना में 19.44 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 21.41 लाख करोड़ रुपए के रेकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है।

नकदी के चलन में इजाफा
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआर्इ) के आंकड़ों के मुताबिक नोटबंदी से पहले 4 नवंबर, 2016 तक 17.97 लाख करोड़ रुपए मूल्य की मुद्रा प्रचलन में थी। यह अब 19.44 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 21.41 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। यह दर्शाता है कि वित्तीय प्रणाली में नकदी वापस आ गई है। आरबीआइ के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार डिजिटल लेनदेन में वृद्धि के बावजूद, पिछले एक वर्ष में प्रचलन में मुद्रा (नकद राशि) की तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक की वृद्धि हुई है। बीते मार्च 2018 में ये राशि 18.29 लाख करोड़ रुपए थी।

डेबिट कार्ड से इतना हुआ ट्रांजेक्शन
आरबीआर्इ के आंकड़ों के मुताबिक, एटीएम और पॉइंट ऑफ़ सेल (पीओएस) टर्मिनलों के जरिए डेबिट कार्ड का लेनदेन जनवरी 2017 में 2,00,648 करोड़ रुपए था। वहीं जनवरी 2018 में ये बढ़कर 2,95,783 करोड़ और जनवरी 2019 में 316,808 करोड़ रुपए हो गया। 3.16 लाख करोड़ रुपए का लेनदेन डेबिट कार्ड से हुआ, जबकि एटीएम के माध्यम से 2.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई।

जनवरी 2017 में आई थी 9 लाख करोड़ की कमी
नवंबर 2016 में 500 रुपए और 1,000 रुपए के पुराने नोटों पर प्रतिबंध लगाने के बाद जनवरी 2017 में प्रचलन में मुद्रा में लगभग 9 लाख करोड़ रुपए की गिरावट आई थी. हालांकि इसके बाद से ही वित्तीय प्रणाली में नकद राशि लगातार बढ़ रही है। भले ही सरकार और आरबीआइ ने कम नकदी (लेस कैश), भुगतान का डिजिटलीकरण और विभिन्न लेनदेन में नकदी के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने जैसे कई कोशिशें की हों।

कई वजहों से बढ़ती है नकदी
बैंकरों के अनुसार, आमतौर पर चुनावों से पहले वित्तीय प्रणाली में नकदी बढ़ जाती है। मानसून के बाद भी नकदी की मांग भी बढ़ जाती है क्योंकि रबी सत्र की बुआई के बाद अक्टूबर में कटाई शुरू होती है, इसलिए नकदी की आवश्यकता होती है। इसके अलावा त्योहार के समय भी नकद राशि बढ़ जाती है क्योंकि ऐसे समय पर लोग सोना, वाहन जैसी महंगी चीजें खरीदते हैं।

वापस आए थे हजार, 500 के 99.3 फीसदी नोट
आरबीआइ को नोटबंदी के बाद 500 और 1000 रुपए के नोटों के कुल 15.310 लाख करोड़ रुपए प्राप्त हुए। यह राशि नोटंबदी के समय प्रचलन में रही 15.317 लाख करोड़ रुपए की राशि का 99.3 फीसदी है। बता दें कि सरकार ने नोटबंदी के पीछे नकद राशि को कम करने, जाली नोटों और काले धन खत्म करने का कारण बताया था. हालांकि आरबीआइ के आंकड़े बताते हैं कि मौजूदा समय में नकद राशि नोटबंदी के पहले की स्थिति से भी ज्यादा है।


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होली के दिन देश इस दिग्गज नेता का हुआ निधन, परिवार के लिए छोड़कर गए हैं करोड़ों की संपत्ति


नई दिल्ली। आज सुबह देश के बड़े नेता का कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। जी हां, ये नेता कोई और नहीं बल्कि तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) के विधायक कनगराज थे। सुलूर के विधायक कनगराज सत्ताधारी पार्टी के बड़े नेताओं में शुमार होते थे। 2016 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने करीब 35 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी। वैसे साउथ के नेताओं के पास संपत्ति और रुपयों की कोई कमी नहीं होती है। कनगराज के पास भी रुपयों-पैसों की कोई कमी नहीं थी। आइए आपको भी बताते हैं कि अपनी मौत के बाद अपने परिवार के लिए कनगराज कितनी संपत्ति छोड़कर गए हैं।

विधायक चुनाव आयोग को बता थी इतनी संपत्ति
कनगराज ने 2016 में सुलूर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। उन्होंने इस दौरान चुनाव आयोग को अपनी संपत्ति का ब्यौरा भी दिया था। जिसमें उन्होंने अपनी कुल संपत्ति 3,09,65,632 रुपए बताई थी। जिसके तहत उन्होंने अपने हाथों में कैश 2,40,500 रुपए बताया था। जबकि उनकी पत्नी के पास 1,69,000 रुपए कैश था। कनगराज और उनकी पत्नी के पास कुल 8 बैंक अकाउंट थे। इन आठों बैंक अकाउंट में कुल 18,81,131.55 रुपए थे। खास बात है कि कनगराज और उनकी पत्नी के पास एक भी पर्सनल कार नहीं थी।

एक लाख की पॉलिसी और पौने दस लाख का सोना और चांदी
देश नेताओं में नया चलन शुरू हुआ है। कुछ नेताओं के एफिडेविट को देखकर यह बात सामने आई है कि उन्होंने अपनी एलआईसी भी करवाई हुई है। ऐसा ही कुछ कनगराज के एफिडेविट को भी देखकर भी सामने आया है। उन्होंने भी अपनी एक लाख रुपए की एलआईसी कराई हुई थी। साउथ के नेताओं को सोना और चांदी के आभूषणों का भी शौक होता है। ऐसा ही शौक कनगराज को भी था। कनगराज के पास 2.25 लाख रुपए के सोने के आभूषण थे। वहीं उनकी पत्नी 7,50,000 के सोने के जेवरात हैं।

2.40 करोड़ रुपए की एग्रीकल्चर लैंड
कनगराज को किसानी का भी शौक रखते हैं। ऐसा हम नहीं बल्कि उनका संपत्ति का एफिडेविट बता रहा है। एफिडेविट के अनुसार कनगराज के पास 2.40 करोड़ रुपए की लैंड है। वहीं मकानों की बात करें तो उनके पास दो मकान हैं। जिनकी कीमत 36,00,000 रुपए हैं। आपको बता दें कि इन प्रॉपर्टी की कीमत 2016 के हिसाब से है। करीब तीन सालों में मार्केट रेट के हिसाब से कीमत में इजाफा लाजिमी है।


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एसबीआई करने जा रहा है 6,169 करोड़ की एनपीए परिसंपत्ति की नीलामी


नई दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) विभिन्न चूककर्ताओं से वसूली के लिए अगले 10 दिनों में 6,169 करोड़ रुपए की गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) की नीलामी करेगा। देश का सबसे बड़ा बैंक उन चूककर्ताओं की वित्तीय परिसंपत्तियों की नीलामी करता है, जिन्होंने बकाए का भुगतान नहीं किया है।

बैंक ने संपत्तियों की सूची
बैंक 22-30 मार्च के दौरान इनकी नीलामी एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (एआरसी), बैंकों, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (एनबीएफसी) और एफआई को करेगा। परिसंपत्तियों की सूची बैंक ने पहले ही नीलामी के लिए दे दी है। बिक्री के लिए रखी गई परिसंपत्तियों का संचित मूल्य 6,169 करोड़ रुपए है और वास्तविक प्राप्ति आरक्षित मूल्य और खरीददारों की बोलियों के आचार पर होगी।

इस तरीख को इन संपत्तियों की होगी नीलामी
- 22 मार्च को बिक्री के लिए रखी जाने वाली परिसंपत्तियों में जैल इन्फ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड, कमाची इंडस्ट्रीज लिमिटेड, पैरेंटल ड्रग्स की परिसंपत्तियां शामिल हैं।
- 26 मार्च को बैंक इंडिया स्टील, कॉरपोरशन और जय बालाजी इंडस्ट्रीज व अन्य कुछ कंपनियों की परिसंपत्ति बिक्री के लिए रखेगा।
- 29 मार्च को बैंक यशस्वी यार्न, सुमिता टेक्स स्पिन, शेखावती पोली यार्न लिमिटेड व शाकुंभरी स्ट्रॉ की परिसंपत्तियां बेचेगा।


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नहीं बदलेगा IDBI बैंक का नाम, RBI ने खारिज किया प्रस्ताव


नई दिल्ली। बैंकिंग क्षेत्र के नियामक रिजर्व बैंक ने आईडीबीआई बैंक का नाम बदलने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी एलआईसी द्वारा आईडीबीआई बैंक में सरकार की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी के अधिग्रहण के बाद बैंक का नाम बदलने का प्रस्ताव किया गया था।

ये होना था नाम

आईडीबीआई बैंक के निदेशक मंडल ने पिछले महीने बैंक का नाम बदलकर एलआईसी आईडीबीआई बैंक या एलआईसी बैंक करने का प्रस्ताव किया था। भारतीय जीवन बीमा निगम के अधिग्रहण के बाद निदेश मंडल ने बैंक का नाम बदलने का प्रस्ताव दिया था। आईडीबीआई बैंक ने नियामकीय सूचना में कहा, ‘‘निदेशक मंडल ने 19 मार्च 2019 को हुई बैठक में आरबीआई से मिली सूचना पर गौर किया। सूचना में कहा गया है कि केंद्रीय बैंक आईडीबीआई बैंक लि. का नाम बदलने के आग्रह को स्वीकार करने में असमर्थ है।’’

हालांकि, बैंक ने यह नहीं बताया कि नियामक ने किन कारणों से नाम बदलने के प्रस्ताव को खारिज किया है। उल्लेखनीय है कि इस महीने की शुरूआत में आरबीआई ने आईडीबीआई बैंक को सरकारी बैंक की जगह निजी क्षेत्र के बैंक में वर्गीकृत कर दिया। इसका कारण एलआईसी द्वारा आईडीबीआई बैंक में बहुलांश हिस्सेदारी का अधिग्रहण है। पिछले साल अगस्त में मंत्रिमंडल ने बैंक के प्रवर्तक के रूप में एलआईसी को आईडीबीआई बैंक में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी के अधिग्रहण की मंजूरी दी थी।


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होली से बंद हो गए हैं बैंक, अपने काम को पूरा कराने के लिए 25 मार्च तक करना होगा इंतजार


नई दिल्ली। आज यानि 20 मार्च से देश के कई राज्यों में बैंकों की छुट्टियां शुरू हो गई हैं। 24 माचर््तक किसी ना किसी वजह से देश के कई हिस्सों में बैंक बंद रहेंगे। जिसकी वजह से आपको कई परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। वहीं दूसरी ओर बैंकों के बंद होने से एटीएम में नकदी की दिक्कत भी हो सकती है। इससे पहले एटीएम में कैश खत्म हो जाए आप आज ही अपनी जेबों को रुपयों से भर लें। अब आपको बैंक से संबंधित कामों को पूरा कराने के 25 मार्च तक का इंतजार करना होगा।

ये पांच दिन बंद रहेंगे बैंक
20 मार्च को होलिका दहन है, जिसकी वजह से यूपी, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर, असम, उत्तराखंड में बैंकों की छुट्टी रहती है।
21 मार्च को धुलेंडी है, जिसके वजह से पूरे देश में छुट्टी रहती है, तो जाहिर है बैंक भी बंद रहेंगे।
22 मार्च को बिहार दिवस है, जिसके कारण बिहार में बैंक बंद रहेंगे।
23 मार्च को चौथा शनिवार है, जिस दिन बैंक बंद रहते हैं।
24 मार्च को रविवार होने के कारण बैंकों का बंद रहना स्वाभाविक है।
25 मार्च को मध्य प्रदेश में किसी-किसी जगह पर रंगपंचमी की छुट्टी होती है, मतलब वहां 25 मार्च यानी सोमवार को भी छुट्टी रहेगी।


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एआईबीईए ने कहा-सार्वजनिक हित के खिलाफ है आईडीबीआई बैंक को निजी श्रेणी में डालना


नर्इ दिल्ली। अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से आईडीबीआई बैंक को निजी ईकाई की श्रेणी में रखने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। आरबीआई को बुधवार को लिखे एक पत्र में एआईबीईए के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने आरबीआई के फैसले पर यूनियन के विरोध के बारे में अवगत कराया।

वेंकटचलम ने कहा, "आईडीबीआई व आईडीबीआई बैंक को सार्वजनिक क्षेत्र के तहत बैंक बनाया गया था। कॉरपोरेट्स के अत्यधिक फंसे कर्ज की वजह से बैंक को वसूली में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और परिणामस्वरूप इसके वित्तीय प्रदर्शन पर असर पड़ रहा है।"

उनके अनुसार, यह विडंबना है कि आरबीआई उधार लेने वालों निजी क्षेत्र के कॉरपोरेट के खिलाफ कार्रवाई की बजाय यह सूचना का अधिकार (आरटीआई), केंद्रीय सर्तकता आयोग (सीवीसी) और अन्य से बचाकर आईडीबीआई बैंक को फिर से वर्गीकृत कर रहा है। आरबीआई ने हाल में आईडीबीआई को निजी क्षेत्र के बैंक के रूप में वर्गीकृत किया है।

आरबीआर्इ ने दिया था प्राइवेट का दर्जा
कुछ दिन पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने आईडीबीआई बैंक को प्राइवेट बैंक का दर्जा दिया गया था। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम ने आईडीबीआई बैंक का अधिग्रहण किया है। आरबीआर्इ ने एक सर्कुलर में कहा था कि आईडीबीआई बैंक को रेगुलेटरी मकसद से प्राइवेट बैंक की श्रेणी में रखा गया है। इस बैंक में एलआईसी के 51 फीसदी हिस्सेदारी हासिल कर लेने के बाद इस साल 21 जनवरी से यह फैसला लागू हो गया है। उसके बाद से बैंक के कर्मचारी भी काफी रोष में हैं।


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चुनाव से पहले सरकार के लिए चुनौती, वित्त वर्ष 2018-19 में नहीं पूरा हो सकेगा टैक्स कलेक्शन का लक्ष्य


नई दिल्ली। चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार को एक बड़ा झटका लग सकता है। दरअसल, चालू वित्त वर्ष के लिए प्रत्यक्ष कर का लक्ष्य 12 लाख करोड़ रुपए रखा गया था, लेकिन अब वित्त वर्ष 2018-19 में केवल कुछ दिन ही बचे हैं। ऐसे में सरकार प्रत्यक्ष कर का अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पाएगी। इस बात पर अधिक जानकारी देते हुए सूत्रों ने कहा, "11.5 लाख करोड़ रुपए के लक्ष्य पूरा करने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा, लेकिन हमें उम्मीद है कि यह पूरा हो जाएगा। हालांकि, 12 लाख करोड़ रुपए का लक्ष्य पूरा करना संभव नहीं होगा।"


सरकार से सबसे अहम सवाल

सरकार को उम्मीद थी कि यदि प्रत्यक्ष कर का लक्ष्य पूरा होता है तो अप्रत्यक्ष कर पर भी इसका साकारात्म असर देखने को मिल सकता है। चालू वित्त वर्ष में चंद दिन ही बचे होने के कारण अब सरकार को लिए प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष कर का लक्ष्य पूरा करना आसान नहीं होगा। लक्ष्य से कम प्रत्यक्ष कर जमा होने के कारण अब सरकार पर भी एक अहम सवाल खड़ा हो सकता है। अब सरकार के लिए सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या वो चालू वित्त वर्ष में 3.4 फीसदी के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लक्ष्य को भी पूरा कर पाएगी या नहीं।


कम है दर टैक्स कलेक्शन की दर

इस मामले के संबंध में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "प्रत्यक्ष कर के माध्यम से 11.5 लाख करोड़ रुपए के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार का कलेक्शन रेट 14.8 फीसदी होना चाहिए। वर्तमान में, टैक्स कलेक्शन की दर इससे भी कम है। 12 लाख करोड़ रुपए के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार को 20 फीसदी की दर से टैक्स कलेक्ट करना होगा। सरकार के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण बात यह है कि मार्च में ही चालू वित्त वर्ष खत्म हो जाएगा, 1 अप्रैल से नया वित्त वर्ष शुरू हो जाएगा।"


अंतरिम बजट में सरकार ने रिवाइज किया था लक्ष्य

गौरतलब है कि सरकार ने पहले प्रत्यक्ष कर के माध्यम से 11.5 लाख करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा था जिसे बाद में 2019-20 के लिए अंतरिम बजट में इसे 50 हजार करोड़ रुपए और अधिक बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपए कर दिया था। पिछले सप्ताह ही आर्थिक मामलों के सचित सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा था, "प्रत्यक्ष कर पर, हम लक्ष्य को पूरा करने के रास्ते पर हैं। लेकिन अप्रत्यक्ष कर को लेकर हम शायद यह लक्ष्य पूरा नहीं कर पाएंगे।"

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153 सांसदों की संपत्ति में 142 फीसदी का उछाल, शत्रुघ्न सिन्हा की संपत्ति में सबसे ज्यादा इजाफा


नई दिल्ली। वर्ष 2014 में फिर से निर्वाचित हुए 153 सांसदों की औसत संपत्ति में 142 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है, और यह प्रति सांसद औसतन 13.32 करोड़ रुपए रही है। इस सूची में शत्रुघ्न सिन्हा, पिनाकी मिश्रा और सुप्रिया सुले शीर्ष पर हैं। इलेक्शन वाॅच और एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के अनुसार, पांच सालों में (2009 से 2014) 153 सांसदों की औसत संपत्ति वृद्धि 7.81 करोड़ रुपए रही।

स्वतंत्र सार्वजनिक शोध समूहों ने 2014 में फिर से निर्वाचित हुए 153 सांसदों द्वारा सौंपे गए वित्तीय विवरणों की तुलना की है। अध्ययन में पाया गया है कि इन सांसदों की वर्ष 2009 में औसत संपत्ति 5.50 करोड़ रुपए थी, जो दोगुना से ज्यादा बढ़कर औसतन 13.32 करोड़ रुपए हो गई।

सांसदों में सर्वाधिक संपत्ति वृद्धि भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की हुई। वर्ष 2009 में उनकी संपत्ति लगभग 15 करोड़ रुपए थी, जो 2014 में बढ़कर 131 करोड़ रुपए हो गई।

बीजू जनता दल (बीजद) के पिनाकी मिश्रा की संपत्ति 107 करोड़ रुपए बढ़कर 137 करोड़ रुपए हो गई।

संपत्ति वृद्धि के मामले में तीसरा स्थान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की सुप्रिया सुले का है। 2009 में उनकी संपत्ति 51 करोड़ रुपए थी, जो 2014 में बढ़कर 113 करोड़ रुपए हो गई।

इस मामले में शीर्ष 10 सांसदों में शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल छठे स्थान पर और भाजपा के वरुण गांधी 10वें स्थान पर हैं। वरुण ने 2009 में अपनी संपत्ति चार करोड़ रुपए बताई थी, जो 2014 में बढ़कर 35 करोड़ रुपए हो गई।

पार्टी के स्तर पर भाजपा के 72 सांसदों की संपत्ति में 7.54 करोड़ रुपए की औसत उछाल हुई, जबकि कांग्रेस के 28 सांसदों की संपत्ति में औसतन 6.35 करोड़ रुपये की उछाल दर्ज की गई।

शीर्ष नेताओं में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की संपत्ति 2009 के दो करोड़ रुपए से बढ़कर 2014 में सात करोड़ रुपए हो गई।


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पीएम-किसान योजना के लाभ से 67.82 लाख किसान वंचित, कहीं आपका तो नहीं है नाम


नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा कि 67.82 लाख से ज्यादा किसान सीधा लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) योजना से वंचित रह जाएंगे क्योंकि पश्चिम बंगाल, सिक्किम और दिल्ली ने अपना ब्योरा पीएम-किसान पोर्टल पर अपलोड नहीं किया है। इन तीनों प्रदेशों के अलावा, मध्यप्रदेश, राजस्थान, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और लक्षद्वीप में निधि का हस्तांतरण पात्र किसानों को नहीं किया गया है क्योंकि अपलोड किए गए आंकड़ों की जांच व निधि जारी करने की मांग नहीं की गई है।

सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अगर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) के तहत 1,342 करोड़ रुपये की पहली किस्त प्राप्त की गई होती तो प्रदेश के 67.11 लाख किसानों में से प्रत्येक को 2,000 रुपये मिले होते। इसी प्रकार, सिक्किम में 55,090 और दिल्ली में 15,880 किसानों को योजना के तहत उनकी निधि क्रमश : 11 करोड़ रुपये और तीन करोड़ रुपये से उनका हिस्सा नहीं मिल पाया।

नरेंद्र मोदी सरकार ने अंतरिम बजट में किसानों के लिए सालाना 6,000 रुपये की सीधी आय सहायता की घोषणा की। पीएम किसान सम्मान निधि योजना की यह रकम दो हेक्टेयर यानी पांच एकड़ से कम जोत की जमीन वाले 12.5 करोड़ छोटे व सीमांत तीन किस्तों में प्रदान की जाएगी।

प्रथम चरण में वित्त वर्ष 2018-19 की समाप्ति से पहले प्रत्येक किसान को 2,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा। सिंह ने बताया कि 33 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा 4.71 करोड़ किसानों के विवरण अपलोड किए गए हैं और जांच के बाद उनमें से 3.11 करोड़ को पात्र पाया गया है।

उन्होंने बताया कि प्रथम किस्त का हस्तांतरण करीब 2.75 करोड़ किसानों को किया जा चुका है और 22 लाख अतिरिक्त किसानों को हस्तांतरित करने की मांग की गई है। उन्होंने बताया कि प्रदेशों को 1.65 करोड़ लाभार्थियों के विवरण शुद्धि के लिए वापस भेजा गया है, जो अब तक लंबित है।


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IDBI बैंक का नाम बदलने के समर्थन में नहीं है आरबीआई, सूत्रों से मिली जानकारी


नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक आईडीबीआई बैंक का नाम बदलने के पक्ष में नहीं है। आरबीआई ने उस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया है जिसमें आईडीबीआई बैंक का नाम बदलने की बात कही गई है। सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी है। बता दें कि आईडीबीआई बैंक के निदेशक मंडल ने बीते माह ही आईडीबीआई बैंक का नाम बदलकर एलआईसी आईडीबीआई बैंक या एलआईसी बैंक रखने को प्रस्ताव दिया है।


गौरतलब है कि भारतीय जीवन बीमा निगम के अधिग्रहण के बाद ही बैंक के निदेशक मंडल का नाम बदलने का प्रस्ताव दिया था। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय बैंक आईडीबीआई बैंक का नाम बदलने के पक्ष में नही है। इसके लिए आईडीबीआई निदेशक मंडल ने एलआईसी आईडीबीआई बैंक लिमिटेड नाम को तरजीह दिया था। वहीं दूसरे विकल्प के तौर पर एलआईसी बैंक लिमिटेड नाम दिया था।


बता दें कि आरबीआई के अलावा में नाम में बदलाव के लिए कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, शेयरधारकों, शेयर बाजार समेत अन्य से भी मंजूरी की जरूरत होती है। उल्लेखनीय है कि गत जनवरी माह में सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी एलआईसी ने आईडीबीआई बैंक में नियंत्रणकारी 51 फीसदी हिस्सेदारी का अधिग्रहण प्रक्रिया पूरा कर लिया। बीते साल ही अगस्त में मंत्रिमंडल ने बैंक के प्रवर्तक के रूप में एलआईसी को आईडीबीआई बैंक में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी के अधिग्रहण की मंजूरी दी थी।
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26 मार्च को RBI गवर्नर करेंगे बैठक, अर्थव्यवस्था को देंगे रफ्तार


नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ( rbi ) के गवर्नर शक्तिकांत दास आर्थिक गतिविधियों को तेजी देने तथा ब्याज दर पर चर्चा करने के लिए 26 मार्च को उद्योग मंडलों और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। सूत्रों ने इसकी जानकारी दी है। सूत्रों ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति चार अप्रैल को अगले वित्त वर्ष की पहली बैठक करने वाली है।


सूत्रों ने दी जानकारी

समिति की बैठक से ठीक पहले दास यह मुलाकात परामर्श प्रक्रिया को विस्तृत बनाने के लिए कर रहे हैं। समिति की आगामी बैठक इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि उसके चंद दिन बाद 11 अप्रैल को आम चुनाव के पहले चरण का मतदान होने वाला है। सूत्रों ने कहा कि नीतिगत बैठक से पहले परामर्श के लिये यह मुलाकात मुंबई में होगी।


ऑल इंडिया बैंक डिपॉजिटर्स को भी बैठक में बुलाया

गवर्नर ने बैठक के लिए व्यापार संगठनों और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के अलावा ऑल इंडिया बैंक डिपॉजिटर्स एसोसिएशन को भी बुलाया है। दास ने पिछले साल दिसंबर में रिजर्व बैंक के गवर्नर का पद संभालने के बाद ही कहा था कि वह सरकार समेत सभी संबंधित पक्षों को साथ लेकर चलेंगे। वह उद्योग मंडलों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, बैंक अधिकारियों, सरकारी प्रतिनिधियों और रेटिंग एजेंसियों से मुलाकात करते रहे हैं।

( ये न्यूज एजेंसी से ली गई है। )

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साइबर सुरक्षा के लिए PNB को किया गया सम्मानित, मिला ये खास खिताब


नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र के पंजाब नेशनल बैंक ( Pnb ) को साइबर सुरक्षा के लिए सम्मानित किया गया है। बैंक ने शनिवार को एक बयान में इसकी जानकारी दी। बैंक ने कहा कि उसके मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी ( CISO ) टी.डी.विरवानी को छठे सालाना डायनामिक सीआईएसओ शिखर सम्मेलन में 'चैंपियन सीआईएसओ' के खिताब से सम्मानित किया गया।

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10 करोड़ से ज्यादा लोगों को सुविधा देता है PNB

आपको बता दें कि यह सम्मेलन साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में काम करने वालों को सम्मानित करता है। इस संदर्भ में बैंक ने कहा कि, 'पीएनबी 10 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं को त्वरित, सुरक्षित और सुदृढ़ बैंकिंग सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। यह पुरस्कार इस विश्वास को और मजबूत करता है कि पीएनबी सही दिशा में काम कर रहा है।'

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सबसे विश्वसनीय बैंकों में से एक है PNB

इसके साथ ही पीएनबी ने कहा कि हमारा बैंक देश के सबसे विश्वसनीय बैंकों में से एक है। बैंक ने बयान में कहा कि उसने दिव्यांगों के आर्थिक विकास और उनके रोजगार में वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए एनएचएफडीसी ( NHFDC ) के साथ समझौता किया है।

 

यह खबर न्यूज एजेंसी फीड से प्रकाशित की गर्इ है। पत्रिका बिजनेस ने इसमें हेडलाइन के अतिरिक्त कोर्इ बदलाव नहीं किया है।

 

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IDBI Bank के निजीकरण का विरोध कर रहे कर्मचारी, 30 मार्च को करेंगे भूख हड़ताल


नई दिल्ली। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ( rbi ) ने एक सर्कुलर जारी कर आईडीबीआई बैंक ( IDBi Bank ) को निजी क्षेत्र के बैंक की श्रेणी में रख दिया था। पहले आईडीबीआई बैंक सरकारी बैंक था। लेकिन अब ये बैंक प्राइवेट बैंक हो गया है। केंद्रीय बैंक के इस कदम के बाद बैंक के कर्मचारी इस फैसले के खिलाफ हो गए हैं और उन्होंने अपनी मांग रखी है।

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भूख हड़ताल करेंगे IDBI बैंक के कर्मचारी

बैंक के निजीकरण के विरोध में द ऑल इंडिया आईडीबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन ( AIIDBIOA ) ने एक दिवसीय भूख हड़ताल का ऐलान किया है। उन्होंने वेतन और सेवा की सुरक्षा के साथ दूसरे राष्ट्रीयकृत बैंक में शिफ्ट करने की मांग की है। इस संदर्भ में AIIDBIOA के सचिव एवी विट्ठल की ओर से बैंकिंग सचिव राजीव कुमार, रीजनल लेबर कमिश्नर (सेंट्रल) और चीफ लेबर कमिश्नर (सेंट्रल) को भेजे गए पत्र में 30 मार्च को भूख हड़ताल करने की बात कही गई है। इतना ही नहीं, पत्र में कर्मचारियों ने ट्रांसफर को लेकर आने वाली समस्याओं को दूर करने के लिए IDBI Bank और AIIDBIOA के बीच एक द्विपक्षीय समझौता करने की भी मांग रखी है।

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इसलिए हुआ था बैंक का निजीकरण

आपको बदा दें कि आरबीआई ने ये कदम भारतीय जीवन बीमा निगम ( LIC ) के आईडीबीआई बैंक में बहुलांश हिस्सेदारी के अधिग्रहण के बाद उठाया। एलआईसी ने संकट में फंसे आईडीबीआई बैंक में नियंत्रणकारी 51 फीसदी हिस्सेदारी का अधिग्रहण जनवरी में पूरा किया था। आईडीबीआई बैंक को आरबीआई के तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई रूपरेखा के अंतर्गत रखा गया है। यह कंपनियों को दिए जाने वाले कर्ज और शाखा विस्तार, वेतन वृद्धि और अन्य नियमित गतिविधियों पर रोक लगाता है।

 

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रिजर्व बैंक ने जारी किए नए दिशानिर्देश, कहा - बाजार दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाना होगा सख्त कदम


नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ( rbi ) ने शुक्रवार को बाजार भागीदारों द्वारा मूल्य संवेदनशील सूचना का वित्तीय साधनों में दुरुपयोग रोकने के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। रिजर्व बैंक ने अधिसूचना जारी करते हुए कहा है कि बाजार भागीदार चाहे वह स्वतंत्र रूप से कारोबार करते हैं अथवा मिलकर काम करते हैं, वह किसी बेंचमार्क दर अथवा संदर्भ दर की गणना के साथ साठगांठ की मंशा से कोई कार्रवाई नहीं करेंगे।


जारी किए दिशानिर्देश

इसके साथ ही दिशानिर्देश में कहा गया है कि कोई भी बाजार भागीदार किसी खास दर अथवा संदर्भ दर को ध्यान में रखते हुए एकाधिकार की मंशा से कोई सौदा नहीं करेगा। रिजर्व बैंक के ये दिशानिर्देश शुक्रवार को प्रभावी हो गए हैं। रिजर्व बैंक ने कहा है कि कोई भी भागीदार बाजार में ऐसी मंशा के साथ साठगांठ करते हुये पाया गया तो उसे बाजार में एक अथवा एक से अधिक साधनों में एक महीने तक के लिए भागीदारी से रोका जा सकता है।


आरबीआई ने दी जानकारी

रिजर्व बैंक ने हालांकि कहा है कि उसके ये निर्देश मान्यता प्राप्त शेयर बाजारों में किए गए सौदे पर लागू नहीं होंगे। इसके साथ ही उसके निर्देश बैंकों और केन्द्र सरकार पर मौद्रिक नीति, वित्तीय नीति तथा अन्य सार्वजनिक नीति के उद्देश्यों को पाने में किये जाने वाले प्रोत्साहनों पर लागू नहीं होंगे।

( ये न्यूज एजेंसी से ली गई है। )

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SBI की नई सुविधा, अब बिना डेबिट कार्ड के भी ATM से निकाल पाएंगे पैसे


नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने अपने ग्राहकों को एक बड़ी खुशखबरी दी है। एसबीआई ने शुक्रवार को कहा कि अब ग्राहक बिना डेबिट कार्ड के भी एटीएम (ATM) से पैसे निकाल पाएंगे। इससे लोगों को अपने पास डेबिट कार्ड रखने की जरूरत नहीं होगी। इस नई सुविधा का लाभ उठाने के लिए ग्राहक अब अपने मोबाइल ऐप पर वन-टाइम पासवर्ड (OTP) जेनरेट कर सकते हैं। इस ओटीपी के जरिए ही ग्राहक बैंक के एटीएम से पैसे निकाल सकेंगे।

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फिलहाल 16,500 ATM में उपलब्ध होगी सर्विस

इस संदर्भ में एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि यह सर्विस अभी 16,500 एटीएम में उपलब्ध होगी। बाकी दूसरे एटीएम में थोड़े-बहुत अपग्रेड के बाद देशभर में स्थित कुल 60,000 एटीएम में इस सुविधा को अगले 3 से 4 महीने में उपलब्ध करा दिया जाएगा। इस प्रॉजेक्ट के दूसरे चरण में ज्यादा कैश डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट्स के लिए बैंक को टेक्नॉलजी इंटीग्रेट करनी होगी। हालांकि इस सिस्टम के जरिए लेन-देन की लिमिट फिलहाल 10,000 रुपए तय की गई है और ग्राहक एक दिन में इस तरह के दो ट्रांजैक्शन कर सकते हैं।

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इस टेक्नॉलजी से उपलब्ध होंगे 10 लाख से ज्यादा कैश पॉइंट्स

इसके साथ ही कुमार ने कहा कि अगले एक साल में करीब 10 लाख से ज्यादा कैश पॉइंट्स इस टेक्नॉलजी से उपलब्ध होने की उम्मीद है। एक बार सभी एटीएम में इस टेक्नॉलजी के इंटीग्रेट होने के बाद, हम इस टेक्नॉलजी के सभी वेंडर कैश पॉइंट्स, पॉइंट ऑफ सेल (POS) डिवाइसेज और माइक्रो-एटीएम में भी लागू करेंगे। इतना ही नहीं, ये नई सुविधा डेबिट कार्ड से ज्यादा सुरक्षित होगी क्योंकि इसमें धोखाधड़ी करना मुश्किल होगा। इससे ग्राहक संभावित डेबिट कार्ड चोरी, क्लोनिंग और दूसरी धोखाधड़ी से बच सकेंगे।

 

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अरुण जेटली को GST काउंसिल के लिए दिया अवॉर्ड


नई दिल्ली। देश के दो सबसे बड़े राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस (INC) हमेशा से एक दूसरे पर निशाना साधते आए हैं। जहां कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी करने का कोई मौका व्यर्थ नहीं जाने देते, वहीं नरेंद्र मोदी भी उनको करारा जवाब देते हैं। लेकिन दिल्ली में आयोजित चेंजमेकर अवॉर्ड्स में लोगों को एक अलग नजारा देखने को मिला। अवॉर्ड सेरेमनी में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को एक खास अवॉर्ड से नवाजा।

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मनमोहन सिंह ने जेटली को इस अवॉर्ड से नवाजा

दिल्ली में चेंजमेकर अवॉर्ड्स का आयोजन किया गया था, जहां जीएसटी (GST) काउंसिल को 'चेंजमेकर ऑफ द ईयर अवार्ड' दिया गया। बतौर जीएसटी काउंसिल के चेयरमैन, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस अवॉर्ड को रिसीव किया। इतना ही नहीं, अरुण जेटली को ये अवॉर्ड खुद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दिया। पूर्व पीएम डॉ मनमोहन सिंह इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। जब GST काउंसिल की ओर से जेटली अवॉर्ड लेने आए तो मंच पर जोरदार नजारा देखने को मिला।

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GST काउंसिल को इसलिए दिया गया अवॉर्ड

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जीएसटी को लागू करने के तरीके पर बेहद हमलावर रहे हैं और जीएसटी की तुलना वो गब्बर सिंह टैक्स से कर चुके हैं, वहीं ये अवॉर्ड जीएसटी काउंसिल को 'वन नेशन वन टैक्स' की दिशा में काम करने के लिए दिया गया। बता दें कि जीएसटी काउंसिल ने संघवाद के सिद्धांतों पर काम करते हुए अलग-अलग राजनीतिक दलों को एक छतरी के नीचे लाया और जीएसटी को पूरे देश में सफलतापूर्वक लागू करवाया।


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आईएलएंडएफएस बांड में डूबे सेना बीमा निधि के 210 करोड़ रुपए


नई दिल्ली। पूर्व सैनिक के कल्याण की अहम निधि आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड (एजीआईएफ) की 210 करोड़ रुपए की राशि टॉक्सिक ILFS बांड में फंस गई है। मतलब जनरल से लेकर जेसीओ और जवान सभी रैंक की बीमा किस्तों की करोड़ों की रकम डूबने का खतरा बना हुआ है। हाल ही में, भारतीय सेना के अधिकारियों ने आईएलएंडएफएस के नए बोर्ड से मिलकर इस समस्या के समाधान की मांग की। इस बात का कोई सीधा जवाब नहीं मिला कि दायित्व कौन लेगा। आर्इएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार आईएलएंडएफएस किसी भी सवाल का जवाब देने से भी इनकार कर दिया है।

जब आर्इएएनएस ने सेना के पीआरओ लेफ्टिनेंट कर्नल मोहित वैष्णव सवालों की एक प्रतावली भेजी गई और उनसे आईएएनएस ने बात भी की, लेकिन वह दो में से किसी का भी जवाब नहीं दे पाए। इस विषय में सेना के खुद के साहित्य और फंड की रचना से यहां एजीआईएफ की प्रवेशिका मिलती है। सोल्जर्स सेकंड लाइफ के बैनर के तहत एजीआईएफ की व्याख्या संक्षिप्त है।

परिपक्वता लाभ : सदस्यों की जमा राशि के साथ ब्याज और बोनस का भुगतान एक सैनिक की सेवानिवृत्ति पर किया जाता है। किसी सदस्य की मृत्यु होने पर परिक्वता की राशि का भुगतान मृत्यु लाभ के साथ उसके अगले रिश्तेदार को किया जाता है। 15 साल की सेवा के बाद कोई सदस्य अपने बच्चों की शिक्षा/ विवाह के लिए परिपक्वता लाभ का 50 फीसदी निकाल सकता है। इसके अलावा, मकान की मरम्मत या सेवानिवृत्ति के अंतिम दो साल के दौरान वाहन के लिए परिपक्वता राशि का 90 फीसदी निकाल सकता है।

बीमा : सेवा के दौरान मृत्यु होने वाले सैन्यकर्मियों के परिवारों को बीमा लाभ 50 लाख रुपये अधिकारियों को और 25 लाख रुपये जेसीओ/ओआर को प्रदान किया जाता है। वहीं, मासिक राशि क्रमश: 5,000 रुपये और 2,500 रुपये है।

विस्तारित बीमा : आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड एक्सटेंडेड इंश्योरेंस स्कीम में सैनिकों को सेवा से मुक्त होने पर बीमा कवर प्रदान की जाती है। इसमें अधिकारियों को छह लाख रुपये और अधिकारी से नीचे के रैंक के सैन्यकर्मियों को तीन लाख रुपये सेवानिवृत्ति के बाद 26 साल के लिए या 75 साल की उम्र तक के लिए प्रदान किए जाते हैं। पूर्व सैनिक की मृत्यु हाने पर उनके परिवार द्वारा यह राशि प्राप्त की जाती है। हाल ही में इस बीमा राशि में संशोधन करके इसे अधिकारी व अधिकारी से नीचे के रैंक वालों के लिए क्रमश: 10 लाख रुपये और पांच लाख रुपये कर दिया गया है। यह उनके लिए है जो इस स्कीम में एक जनवरी 2014 के बाद शामिल हुए हैं।

अशक्तता कवर : यह उनके लिए है जो घायल या बीमार होने के कारण समय से पहले सेवा से अशक्त होकर बाहर हो जाते हैं। शतप्रतिशत अशक्तता वाले अधिकारियों और जेसीओ/ओआर को क्रमश: 25 लाख रुपये और 12.5 लाख रुपये की राशि मिलेगी। अशक्तता का स्तर 20 फीसदी तक होने तक क्रमश: यह राशि अपेक्षाकृत कम होती जाती है।

एजीआईएफ छात्रवृत्ति योजना : अधिकारियों, जेसीओ और ओआर के बच्चों को आर्मी वेलफेयर एजुकेशनल सोसायटी (एडब्ल्यूईएस) के 12 संस्थानों में 40,000 रुपये सालाना की एजीआईएफ छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।

सेना ने जानकारी देने से किया था इनकार
सेना ने आईएएनएस को पूर्व में इस बात की जानकारी देने से मना कर दिया कि सेना कल्याण निधि का पैसा आईएलएंडएफएस बांड में लगा होगा। सेना ने कहा, "सूचित किया जाता है कि भारतीय सेना की कल्याण निधि का निवेश मौजूदा नीति के आधार पर सिर्फ राष्ट्रीयकृत, अनुसूचित बैंकों व पीएसयू में किया जाता है। कथित तौर पर आर्मी बेटल केजुअल्टी वेलफेयर फंड और आर्मी सेंट्रल वेलफेयर फंड से कोई निवेश आईएलएंडएफएस बांड में नहीं होता है। इस आलेख का झूठा, निराधार और दुर्भावनापूर्ण के तौर खंडन किया जाता है।"

पुख्ता है रिपोर्ट
आईएएनएस अपनी रिपोर्ट पर कायम है। पूर्व के आलेख को अब सही ठहराया जाता है। आईएएनएस को पता चला कि सैन्य बल के कुछ वर्ग, मुख्यरूप से सेना ने अपनी निधि की राशि अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एएए रेटेड आईएलएंडएफएस बांड में निवेश किया। भारतीय सेना की तीन विशिष्ट निधियां हैं जिनमें देशवासी योगदान दे सकते हैं- आर्मी वेलफेयर फंड बेटल केजुअल्टी (सियाचीन हिमस्खलन और पठानकोट/उरी की घटना के बाद 2016 में गठित), आर्मी सेंट्रल वेलफेयर फंड और पैराप्लेजिक रिहैबिलिटेशन सेंटर पुणे। देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैन्य बल के सदस्यों/परिवारों के लिए इनमें योगदान दिया जाता है। यह अब तक ज्ञात नहीं है कि क्या इन फंडों का निवेश विषाक्त बांड में किया गया।

सरकार आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड स्कीम में बिल्कुल धन नहीं देती है। एजीआईएफ द्वारा जनरल और जवानों को प्रदत्त बीमा कवर और कवर की अवधि की तुलना इस प्रकार है :

जनरल की संख्या : 350 (लगभग)

मासिक किस्त : 5,000 रुपये

सालाना किस्त : 60,000 रुपये

लेफ्टिनेंट जनरल बीमा कवर 60 साल तक

सीओएएस बीमा कवर 62 साल तक

सालाना योगदान : 60,000 रुपये

जनरल द्वारा सालाना योगदान : 60,000 रुपये जिसे 350 से गुना करने पर यह राशि दो करोड़ और 10 लाख रुपये होती है।

जवानों की संख्या : 13,00,000 (लगभग)

सालाना योगदान : 30,000 रुपये

जवानों का कुल सालाना योगदान : 30,000 रुपये को 13,00,000 से गुना करने पर 3,900 करोड़ रुपये

ये आंकड़े सिर्फ एक साल के हैं। बड़ा सवाल यह है कि इस निधि पर कौन नजर रख रहा है। अगर यह विशाल राशि विषाक्त आईएलएंडएफएस बांड में फंसती है तो कौन इसका दायित्व लेगा इसका जवाब नहीं है। अगर सैन्य प्राधिकरण आसन्न समस्या को मानना शुरू करेगा तो पहला कदम उठाया जाएगा।


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चुनाव खत्म होने तक सरकार की ओर से बैंकों को नहीं मिलेगी मदद, अपने आप करना होगा रुपयों का इंतजाम


नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अपनी विनियामक व संवृद्धि संबंधी पूंजी की जरूरतों के लिए खुद पूंजी जुटानी होगी क्योंकि अगली सरकार बनने तक बैंकों के लिए किसी प्रकार का नया पुनर्पूजीकरण नहीं हो सकता है। यह बात शुक्रवार को आधिकारिक सूत्रों ने बताई।

वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि सरकार ने किसी प्रकार आखिरी आकस्मिक के लिए बफर के तौर पर करीब 5,000 करोड़ रुपये की रकम रखी है, क्योंकि बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक और विजया बैंक की विलयित संस्था में रकम डालने की संभावना है।

जनवरी में सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुनर्पूजीकरण के लिए 41,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की मंजूरी संसद से मिली थी। पहले से ही 65,000 करोड़ रुपये के बजट को मिलाकर कुल पुनर्पूजीकरण का पैकेज चालू वित्त वर्ष में 1,06,000 करोड़ रुपये का हो चुका है।

अंतरिम बजट 2019-20 में सरकार ने बैंक के पूंजी के लिए धन प्रदान नहीं किया है। सूत्रों ने बताया कि बैंकों को साख वृद्धि को प्रोत्साहन देने के लिए धन की आवश्यकता हो सकती है और वे बाजार से पूंजी जुटा सकता है या जुलाई में पूर्ण बजट आने का इंतजार कर सकता है। सरकार ने फरवरी में 12 पीएसबी के लिए 48,239 करोड़ रुपये के पुनर्पूजीकरण बांड को मंजूरी प्रदान की थी।

नवीनतम पुनर्पूजीकरण बांड की मुख्य रूप से चार श्रेणियां हैं- खराब कर्ज से निपटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) फ्रेमवर्क के तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले बैंक, गैर-पीसीए बैंक जो पीसीए के तहत जाने के करीब हैं, पीसीए से बाहर निकले हुए बैंक और पीसीए बैंक जिन्हें न्यूनतम विनियामक पूंजी मानकों को पूरा करने की आवश्यकता है।

इलाहाबाद बैंक और कॉरपोरेशन बैंक पहले ही पीसीए से बाहर हो चुके हैं। गैर-पीसीए बैंकों में पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक, सिंडिकेट बैंक और आंध्रा बैंक शामिल हैं। पीसीए से बाहर होने वाले बैंक जिन्हें पीसीए से बाहर रहने के लिए मदद की जरूरत है उनमें बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र आते हैं। सेंट्रल बैंक, यूनाइटेड बैंक, यूको बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक पीसीए बैंक हैं जिन्हें न्यूनतम विनियामक पूंजी मानकों को पूरा करने के लिए मदद की आवश्यकता है।


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