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शुरू हुआ बजट दस्तावेजों की छपाई का काम, 1 फरवरी को पेश होगा बजट


नई दिल्ली। नॉर्थ ब्लॉक में आज हलवा रस्म की गई है। हलवा रस्म के बाद से ही बजट से जुड़े डॉक्यूमेंट्स की प्रिंटिग का काम आधिकारिक रूप से शुरू हो जाता है। वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल, वित्त सचिव सुभाष गर्ग और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री पी. राधाकृष्णन की मौजूदगी में इस रस्म को किया गया। आपको बता दें कि वित्त मंत्री 1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश करेंगे।


प्रिटिंग में लगभग 100 लोग हैं शामिल

आपको बता दें कि करीब बजट की प्रिटिंग में लगभग 100 लोग शामिल हैं और ये सभी लोग बजट पेश होने तक नॉर्थ ब्लॉक में ही रहेंगे। इन लोगों को वहां से बाहर निकलने की अनुमति नहीं हैं। हलवा रस्म होने के बाद से ही इन सभी अधिकारियों को मंत्रालय में ही रहना पड़ता है और जब तक वित्त मंत्री संसद में बजट पेश नहीं कर देते, तब तक मंत्रालय का पूरा स्टाफ अपने परिवार से कटा रहता है। इसके साथ ही इन सभी कर्मचारियों को ईमेल, मोबाइल समेत किसी भी माध्यम से घरवालों से संपर्क करने की अनुमति भी नहीं होती है।

 

इन लोगों को होती है घर जाने की अनुमति

आपको बता दें कि बजट से जुड़े सभी डॉक्युमेंट्स को अधिकारियों के द्वारा तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले सभी कंप्यूटर्स को दूसरे नेटवर्क से डीलिंक कर दिया जाता है। बजट पर काम करने वाले सभी अधिकारी 2 से 3 हफ्ते नॉर्थ ब्लॉक में ही रहेंगे। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सिर्फ वित्त मंत्रालय के सीनियर ऑफिसर्स को ही घर जाने की अनुमति होती है।

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जानिए कितने तरह के होते हैं बजट, ऐसे होता है देश को फायदा और नुकसान


नई दिल्ली। 1 फरवरी को नरेंद्र मोदी सरकार अपने कार्यकाल का आखिरी और लोकसभा चुनाव से पहले अंतरिम बजट पेश करेगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली के इस बजट पर हर वर्ग की नजर है। चुनावी साल होने की वजह से हर कोई इसमें अपने लिए कुछ ना कुछ होने की उम्मीद कर रहा है। वित्त मंत्री अरुण जेटली भी लोकसभा चुनाव को देखते हुए अपने बजट से हर वर्ग को खुश करने के बारे में सोच रहे हैं। ऐसे में आज हम आपकों बजट से जुड़ी एक ऐसी खास बात बताने जा रहे हैं, जो आप नहीं जानते होंगे।

तीन तरह के होते हैं बजट

आपको बता दें कि जैसे आप हर महिने घर चलाने के लिए बजट बनाते हैं। ठीक वैसे ही सरकार भी हर साल अपना बजट तैयार करती है।आसान शब्दों में कहें तो इसमें सरकार की अनुमानित आमदनी और खर्च का पूरा लेखाजोखा होता है। बजट तीन तरह के होते हैं। संतुलित बजट, बचत का बजट (अधिशेष बजट) और घाटे का बजट।

ये होता है संतुलित बजट

संतुलित बजट - ये बजट सरकार की ओर से होने वाला खर्च आगामी वित्त वर्ष में होने वाली संभावित कमाई के बराबर होता है। बता दें कि ये बजट अपनी क्षमता के अनुसार खर्च करने पर आधारित होता है। ये बजट काफी सोच-समझकर संतुलित तरीके से तैयार किया जाता हैं। इसका सबसे बड़ा ये होता है कि देश की अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनी रहती है। इसके बाद आता है बचत का बजट यानी की अधिशेष बजट। इस तरह का बजट सरकार तब लेकर आती है जब सरकारी खर्च अपेक्षित सरकारी राजस्व से कम होता है। ऐसे समय में सरकार का जनता पर होने वाला खर्च टैक्स से मिलने वाले राजस्व की तुलना में कम होता है।

सरकार पर बढ़ता है बोझ

घाटे का बजट को भारत जैसे विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए अनुकूल माना जाता है।यह बजट मंदी के समय कारगर होता है। इससे बाजार में मांग बढ़ती है साथ ही विकास को भी बढ़ावा मिलता है। इससे बड़ी मात्रा में रोजगार भी पैदा किए जा सकते हैं। अक्सर इस तरह के बजट से सरकार और देश पर कर्ज का बोझ बढ़ता है।


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एटीएम कार्ड की चोरी और क्लोनिंग से अब नहीं होगा आपके पैसों को खतरा, बस करना होगा ये काम


नई दिल्ली। अब ग्राहक अपना एटीएम कार्ड केवल एक स्‍मार्टफोन के जरिए कंट्रोल कर सकते हैं। कंट्रोलिंग यानी वह ATM कार्ड को ब्‍लॉक, ऑन या ऑफ और ATM पिन जनरेट करने जैसे काम कर सकते हैं। यानी कार्ड की सिक्‍योरिटी का पूरा इंतजाम केवल स्‍मार्टफोन के माध्‍यम से किया जा सकता है। इसके बाद आपके एटीएम का सारा कंट्रोलिंग आपके हाथों में होगा। अगर आपका एटीएम कार्ड चोरी हो गया, क्लोनिंग हो गई या कहीं गिर भी गया तो चिंता की कोई बात नहीं हैं। क्योंकि बैंक ऐप के इस विशेष फीचर्स के जरिए आपना कार्ड खुद
कंट्रोलिंग कर सकेंगे।

ऐसे लगता है लाखों का चूना

एसबीआई केनरा बैंक, बैंक आफ बड़ौदा और आईसीआईसीआई जैसे कई ऐसे बैंक हैं जो अपने ग्राहकों को ये सुविधा दे रहे हैं। दरअसल देश में हर दिन साइबर क्राइम बढ़ता ही चला जा रहा है। ठग एटीएम कार्ड की क्लोनिंग के जरिए या धोखे से पासवर्ड मांगकर ग्राहकों को लाखों का चूना लगा रहे हैं। ऐसे में बैंक के इन ऐप के जरिए आप खुद धोखाधड़ी को काफी हद तक रोक सकते हैं।

ये हैं बैंकों के एप

ग्राहकों के लिए केनरा बैंक एम सर्व एप चल रहा है तो बैंक आफ बड़ौदा का एम कनेक्ट प्लस एप है। अब स्टेट बैंक एसबीआई क्विक ऐप लाया है। इन ऐप से रुपए निकाले या जमा नहीं किए जा सकते लेकिन खाताधारक अपने एटीएम कार्ड को मोबाइल से ही किसी भी समय ब्लाक या ऑन, ऑफ कर सकता है। एटीएम कार्ड जिस समय ऑन होगा, उसी समय उससे धन निकाला जा सकेगा। इसमें भी पांच ऑप्शन दिए हैं। इनमें से खाताधारक जो ऑप्शन चाहे उसे बंद कर सकता है, जो चाहे चालू रख सकता है। खाताधारक चाहे तो एटीएम बूथ, पोस मशीन, ऑनलाइन किसी भी तरह धन नहीं निकलेगा, चाहे कार्ड व पासवर्ड चोरी हो गए हों। इसके अलावा देश या विदेश जहां भी वह अपने कार्ड को जब चाहे बंद कर सकता है और जब चाहे चालू कर सकता है।

 

 


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6 महीने तक नहीं भरा GST रिटर्न, तो सरकार छीन सकती है ये अधिकार


नई दिल्ली। मोदी सरकार जीएसटी में होने वाली चोरी को रोकने के लिए एक अहम कदम उठाने जा रही है। दरअसल सरकार तकनीकी मदद से एक एस सिस्टम बनाने जा रही है। जो लगातार छह महिने तक जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं करने वाले कारोबारियों को ई-वे बिल जेनरेट नहीं करेगा।

लागू होगा ये नया नियम

अधिकारियों के मुताबिक सरकार के ऐसा करने का मकसद जीएसटी चोरी रोकना है। एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) ऐसा आइटी सिस्टम तैयार कर रहा है। यह सिस्टम तैयार हो जाने के बाद उन सभी कारोबारियों के लिए ई-वे बिल निकालना असंभव हो जाएगा, जिन्होंने लगातार दो तिमाहियों का जीएसटी रिटर्न फाइल नहीं किया होगा। आपको बता दें कि पिछले साल अप्रैल से दिसंबर के दौरान जीएसटी चोरी के लगभग 3626 मामले सामने आए थे।

ये होता है ई-वे बिल

टैक्स चोरी रोकने के लिए सरकार ने 1 अप्रैल 2018 को ई-वे बिल की सुविधा शुरू की गई थी। 50,000 रुपए से अधिक का सामान एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजे जाने के लिए ई-वे बिल सुविधा का उपयोग किया जा सकता है। राज्यों के भीतर ही इस सेवा को शुरू करने के लिए 15 अप्रैल से इसे लागू किया गया था।

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जानिए बजट पेश करने से पहले क्यों मनाई जाती है हलवा सेरेमनी, ये है वजह


नई दिल्ली। मोदी सरकार का कर्यकाल कुछ ही महीनों में पूरा होने को हैं। ऐसे में वित्त मंत्री अरुण जेटली इस सरकार का पहला अंतरिम बजट 1 फरवरी 2019 को पेश करेंगे। लेकिन बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री एक अहम परंपरा को निभाते हैं। इसके बाद ही बजट को संसद में पेश किया जाता हैं। ये है हलवा सेरेमनी इस सरेमनी में वित्त मंत्री हलवा बनाकर अपने विभाग में बांटते हैं। इसके बाद ही आधिकारिक तौर पर बजट छपाई के लिए भेजा जाता है।

इतने दिन पहले होती है हलवा सेरेमनी

बजट की छपाई से पहले हर साल वित्तमंत्री ये हलवा तैयार करते हैं। हलवा सेरेमनी में वित्तमंत्री अरुण जेटली के अलावा मुख्य वित्त सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन, वित्त मामलों के सचिव सुभाष गर्ग, राज्य वित्तमंत्री शिव प्रताप शुक्ला और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहते हैं। यह रस्म दिल्ली ने नॉर्थ ब्लॉक में हर साल मनाई जाती है। आमतौर पर हलवा सेरेमनी बजट से 10 दिन पहले होती है।

इसलिए मनाई जाती है हलवा सेरेमनी

आपको बता दें कि हलवा सेरेमनी को बजट दस्‍तावेजों की छपाई की शुरुआत से पहले मनाया जाता है। इस रस्‍म में एक बड़ी कढ़ाही में हलावा तैयार किया जाता है। इस हलवे को मंत्रालय के सभी कर्मचारियों के बाटा जाता है। इस हलवा सेरेमनी को मनाने के पीछे की मुख्य वजह यह है कि हर शुभ काम को करने से पहले कुछ मीठा खाना चाहिए। इसलिए ही बजट को प्रिंटिंग के लिए भेजने से पहले इस परंपरा को निभाया जाता है। साथ ही भारतीय परंपरा में हलवे को काफी शुभ भी माना जाता है।

कर्मचारियों को सारी दुनिया से कर दिया जाता है अलग

हलवा बांटे जाने के बाद वित्‍त मंत्रालय के ज्‍यादातर अधिकारी और कर्मचारियों को मंत्रालय में ही पूरी दुनिया से अलग रहना होता है। ये वे कर्मचारी होते हैं जो बजट की प्रिंटिंग करते हैं। बजट की छपने की प्रक्रिया के शुरू होने से लेकर बजट के संसद में रखे जाने तक इन अधिकारियों को किसी से भी संपर्क करने की इजाजत नहीं होती है। उन्हें फोन करने की भी इजाजत नहीं होती और किसी को उनसे मिलने की मंजूरी नहीं होती है।

 


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आयकर विभाग की सख्ती, एक छोटी सी गलती के लिए इस महिला को हो सकती है जेल


नई दिल्ली। आजकल आयकर विभाग काफी सख्ती से पेश आ रहा है। छोटी-छोटी गलतियों के लिए विभाग की ओर से लोगों को नोटिस जारी कर दिया जाता है। लोगों को जब से विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया है तब से सभी लोग चिंता में आ गए हैं। जारी किए गए इन नोटिस में जो धाराएं लगाई गई हैं। उनमें कई सालों की जाल का प्रावधान भी है।


महिला को सता रहा जेल जाने का डर

आपको बता दें कि हाल ही में एक महिला को नोटिस जारी किया गया है। ये नोटिस महिला को इसलिए जारी किया गया है क्योंकि उसने अपना टीडीएस देरी से जमा किया था। उस महिला को नोटिस मिलने के बाद से ही जेल जाने का डर सता रहा है। महिला को दिए गए नोटिस में 276बी और 278बी धाराओं का प्रावधान है। साथ ही महिला ने जानकारी देते हुए बताया कि उसने टीडीएस एख महीने की देरी से जमा किया था, लेकिन वित्त वर्ष के दौरान ही जमा करा दिया था फिर भी सरकार की ओर से उसे नोटिस भेजा गया है।


2018 में कई लोगों के घर पहुंचा नोटिस

आयकर विभाग ने टीडीएस जमा न कराने वालों के खिलाफ नोटिस जारी किए हैं और इन नोटिस में तीन महीने से सात साल तक की सजा के प्रवधान हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक साल 2018 में हजारों लोगों को ये नोटिस भेजा गया है।


आईटी अधिकारियों को नोटिस भेजने का मिला टारगेट

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) के चेयरमैन सुशील चंद्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि टीडीएस जमा कराने में डिफॉल्ट करने वालों पर सीबीडीटी एक्शन प्लान के तहत महाभियोग चलाया जाए। साथ ही आईटी अधिकारियों को भी नोटिस भेजने का टारगेट दिया गया है।


नहीं होनी चाहिए ऐसी कार्रवाई

सरकार की ओर से वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए भी नोटिस जारी किए जा रहे हैं। वहीं, कई लोग इस कार्रवाई का विरोध भी कर रहे हैं। लोगों का मानना हैं कि टीडीएस के लिए सरकार को दंडात्मक कार्रवाई नहीं करनी चाहिए औऱ लोगों के पास नोटिस के बदले जवाब देने के लिए भी बहुत ही कम समय दिया गया है।

 

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दिसंबर तिमाही में 20 फीसदी बढ़ा HDFC बैंक का मुनाफा


नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर - दिसंबर तिमाही में एचडीएफसी बैंक (HDFC) के मुनाफे में साल-दर-साल आधार पर 20.32 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। कंपनी ने शनिवार को यह जानकारी दी। बम्बई स्टॉक एक्सचेंज में नियामकीय फाइलिंग में एचडीएफसी बैंक ने कहा कि वित्त वर्ष 2018-19 की तीसरी तिमाही में बैंक ने 5,586 करोड़ रुपए का मुनाफा दर्ज किया है, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 की समान अवधि में यह 4,642 करोड़ रुपए था। समीक्षाधीन अवधि में बैंक की कुल आय 26.02 फीसदी बढ़कर 30,811 करोड़ रुपए रही, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 की तीसरी तिमाही में यह 24,450 करोड़ रुपए थी।


शुद्ध ब्याज आय में हुई 22 फीसदी की वृद्धि

बैंक ने कहा, '31 दिसंबर 2018 को खत्म हुई तिमाही में बैंक शुद्ध ब्याज आय में 21.9 फीसदी की वृद्धि हुई, जो 12,576.8 करोड़ रुपए रही, जबकि 31 दिसंबर 2018 को खत्म हुई तिमाही में यह 10,314.3 करोड़ रुपए थी।' इसके साथ ही बैंक ने बताया कि उसकी बैलेंस शीट का आकार 31 दिसंबर 2018 को 11.68 लाख करोड़ रुपए था, जबकि 31 दिसंबर 2017 को यह 9.5 लाख करोड़ रुपए था।


ऋण कारोबार में तेजी का नतीजा

यह वृद्धि ऋण कारोबार में 23.7 फीसदी की तेजी का नतीजा है। इस दौरान बैंक की शुद्ध ब्याज मार्जिन 4.3 फीसदी रही। अक्टूबर-दिसंबर 2018 के दौरान बैंक की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) भी पिछले साल की इसी अ‍वधि के 1.29 फीसदी से बढ़कर 1.38 फीसदी हो गई। हालांकि बैंक का शुद्ध एनपीए आलोच्य अवधि के दौरान 0.42 फीसदी रहा। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 0.44 फीसदी पर था।

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20 हजार कैश से अधिक का किया लेनदेन तो मिलेगा सरकारी नोटिस, जारी हुआ नया फरमान


नई दिल्ली। अगर आप दिल्ली में प्रॉपर्टी खरीदने का मन बना रहे हैं तो पहले आईटी डिपार्टमेंट के नए फरमान के बारे में जरूर जान लें। दरअसल हाल ही में आई डिपॉर्टमेंट ने दिल्ली में प्रॉपर्टी खरीदने को लेकर नए नियमों को जारी किया हैं। जिसके तहत अब से कोई भी शख्स प्रॉपर्टी खरीदने के लिए 20,000 से ज्यादा का कैश लेनदेन नहीं कर सकेगा।

आयकर विभाग ने इसलिए उठाया ये कदम

आयकर विभाग के एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि इस समय आयकर विभाग दिल्ली में 2015 से 2018 के दौरान की गई रजिस्ट्रियों के बारे में पता कर रहा है। जिसमें 20 हजार से ज्यादा का कैश लेनदेन किया गया हैं। आयकर विभाग ने काले धन पर शिकंजा कसने के लिए इनकम टैक्स एक्ट की धारा 269एसएस में संशोधन किया था। ये 2015 से प्रभावी हो गया था। विभाग ने 1 जून 2015 से लेकर दिसंबर 2018 तक की रजिस्ट्रियों की बारीकी से जांच की है। ये जांच इसलिए की जा रही है ताकि 20 हजार से ज्यादा का लेनदेन करने वालों पर आयकर विभाग जुर्माना लगा सकें। साथ ही उनसे इस रकम के स्रोत के बारे में पूछताछ की जा सकें।

आयकर विभाग के नए नियम

आपको बता दें कि 1 जून 2015 से सीबीडीटी के जारी नए नियमों के मुताबिक जमीन खरीदने और बेचने के लिए 20 हजार से ज्यादा के कैश का इस्तेमाल नहीं कर सकेगें। उसके लिए चेक, आरटीजीएस (रियल टाइम ग्रॉस सैटलमेंट) के अतिरिक्त डिजिटल पेमेंट को ही वैध माना जाएगा। अगर कोई शख्स 20 हजार से ज्यादा का कैश लेनदेन करता है तो उस पर आयकर विभाग सेक्शन 271 डी के तहत कार्रवाई की जाएगी। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक आयकर विभाग अगले माहिने से नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर देगा। इसी के साथ आयकर विभाग 20 हजार से ज्यादा का कैश लेनदेन करने वालो पर जुर्माना लगाने की तैयारी भी कर रहा है।

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कैश डिपाॅजिट के लिए अब नहीं जाना होगा बैंक लगानी, एेस दो मिनटों में ही पूरा हो जाएगा आपका काम


नई दिल्ली। अधिकतर लोग एटीएम का इस्तेमाल कैश निकालने, मिनी स्टेटमेंट निकालने या बैलेंस चेक करने के लिए करते हैं, लेकिन यह एटीएम से मिलने वाली सुविधाओं का एक बेहद छोटा भाग है। एटीएम इनके अलावा भी और कई सुविधाएं देता है। बता दें कि बैंक के अलावा आप एटीएम से भी कैश जमा कर सकते हैं। आज हम आपको ऐसे ही तरीके के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके जरिए आप बिना बैंक जाए आसानी से एटीएम के जरिए कैश जमा करा सकते हैं।

ऐसे जमा करें एटीएम से पैसा

एटीएम से पैसा जमा करने के लिए आपको सबसे पहले अपने कार्ड को मशीन में डालना होगा। इसके बाद आपको अपना पिन नंबर टाइप करना होगा। फिर आपको जितनी भी रकम जमा करनी है उतनी रकम इंटर करना होगा। इंटर करने के बाद आपको कंफर्म करना होगा। इसके बाद जब प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, तो आपको कंफर्म का स्लिप मिल जाएगा।

बताना होगा बैंक अकाउंट नंबर

अगर आप बिना कार्ड के खाते में पैसा जमा करना चाहते हैं। तो आपको इसके लिए कैश डिपॉजिट मशीन में जाकर डिपॉजिट विदआउट कार्ड का ऑप्शन चुनना होगा। इसके बाद आगे की प्रक्रिया के लिए आपसे खाता नंबर पूछा जाएगा। अकाउंट नंबर बताने के बाद आपसे ये पूछा जाएगा कि आप कितनी रकम जमा करना चाहते हैं। इसके बाद आपको रकम इंटर करनी होगी। फिर आपको डिपॉजिट मशीन में कैश डालना होगा और थोड़ी देर तक इतंजार करना होगा। जब तक मशीन कैश को अंदर न खींच लें। इसके बाद जब प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, तो आपको कंफर्म का स्लिप मिल जाएगा।

 


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जेटली के पिटारे में महिलाओं के लिए ये हो सकता है खास, इससे पहले भी मिल चुकी है बड़ी सौगात


नई दिल्ली। मोदी सरकार 1 फरवरी 2019 को अपने कार्यकाल का आखिरी बजट पेश करने जा रही है। ऐसे में हर वर्ग के लोगों को मोदी सरकार के आखिरी बजट से काफी उम्मीदें हैं। साथ ही मोदी सरकार लोकसभा चुनाव को देखते हुए हर वर्ग के लिए कुछ ना कुछ खास ऐलान करने वाली है। ऐसे में महिलाओं को भी इस बात का इंतजार है कि सरकार अपने अंतरिम बजट में उनके लिए क्या खास लेकर आने वाली हैं। आइए जानते हैं मोदी सरकार ने इससे पहले महिलाओं को बजट में क्या-क्या खास तोहफे दिए हैं। साथ ही इस बार बजट सरकार के आखिरी बजट से क्या है महिलाओं की उम्मीदें।

2017 में महिलाओं को मिले ये खास तोहफे

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने पहले के बजट में अपना पिटारा खोलते हुए महिलाओं के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं। बात अगर साल 2017 के बजट की जाए तो सरकार ने इस साल के बजट में महिलाओं के लिए विभिन्न घोषणाएं की थी। सरकार ने इस साल बजट में महिलाओं के स्किल डेवलपमेंट पर फोकस था। साथ ही इसके लिए 1.84 लाख करोड़ रुपए का आवंटन भी किया गया था। वहीं गर्भवती महिलाओं की मदद के लिए 6000 रुपए देने का ऐलान किया था। इसके अलावा महिलाओं को आसानी से लोन उपलब्ध कराने को लेकर भी सरकार ने कदम उठाए थे। सरकार ने सस्ता लोन देने के लिए नेशनल हाउसिंग बैंक को 20,000 करोड़ की राशि देने की बात कही गई थी। साथ ही महिलाओं के लिए स्वास्थ्य उप केंद्रो में हेल्थ वैलनेस सेंटर बनाने को भी ऐलान किया था।

2018 में महिलाओं के लिए ये रहा खास

साल 2018 के बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कई बड़े ऐलान किए थे। इस साल के बजट में वित्त मंत्री ने कामकाजी महिलाओं से लेकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं तक के लिए अलग-अलग ऐलान किए थे। वित्त मंत्री नेगठित क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक अहम कदम उठाया था। बजट में कामकाजी महिलाओं को राहत देते हुए उनकी पीएफ मदद को पहले 3 साल 8 फीसदी करने का ऐलान किया। इससे पहले तक पुरुष और महिला दोनों के लिए यह मदद 12 फीसदी था। सरकार के इस कदम के बाद कामकाजी महिलाओं की सैलरी में बढ़ोतरी हो गई थी। इसके अलावा वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट में गरीबी रेखा से नीचे आने वाली महिलाओं को 8 करोड़ मुफ्त एलपीजी कनेक्शन बांटे जाने की भी घोषणा की थी।

महिलाओं की बजट से उम्मीद

अब बात अगर बात इस साल के बजट की जाए तो इस साल के बजट में महिलाओं को महिला सुरक्षा के अलावा भी कई और उम्मीदें लगा रखी हैं। इस बजट में महिलाओं को उनकी उच्च शिक्षा सस्ती की होने को उम्मीद है। इसी के साथ महिलाएं ये भी चाहती है कि इस बार बजट में महिलाओं के रोजगार पर खास ध्यान दिया जाए। साथ ही नया कारोबार शुरू करने के लिए सस्ते ब्याज पर ऋण भी उपलब्ध कराया जाए।


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बजट से जुड़ी ये दिलचस्प बातें नहीं जानते होंगे आप, इंदिरा गांधी ने निभार्इ थी अहम भूमिका


नई दिल्ली। 1 फरवरी को नरेंद्र मोदी सरकार अंतरिम बजट पेश करने जा रही है, जिसकी तैयारियां अंतिम चरण में है। ये बजट वित्त मंत्री अरुण जेटली का लगातार छठा और एनडीए सरकार का आखिरी बजट होगा। ऐसे में पत्रिका आपको बजट से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें बताने जा रहा है।


इस वर्ष पेश हुआ था भारत का 'ड्रीम बजट': साल 1997-98 के केंद्रीय बजट को 'ड्रीम बजट' कहा जाता है। ये बजट पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम द्वारा पेश किया गया था। इसको ड्रीम बजट इसलिए कहा जाता है क्योंकि उस वक्त कई आर्थिक सुधार किए गए थे। उनमें आयकर दरों में कमी, कॉर्पोरेट टैक्सों पर सरचार्ज हटाने और कॉरपोरेट टैक्स दरों में कमी करना शामिल था।


वित्त मंत्रालय का पदभार संभालने वाली इंदिरा गांधी हैं एकमात्र महिला: साल 1969 में वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वित्त मंत्रालय का पदभार संभाला। इंदिरा गांधी एकमात्र महिला हैं जिन्होंने वित्त मंत्रालय का पदभार संभाला।


इनके नाम है सबसे ज्यादा बजट पेश करने का रिकॉर्ड: पूर्व वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने अब तक सबसे अधिक बजट पेश किए हैं। देसाई के नाम संसद में सबसे ज्यादा बजट पेश करने का रिकार्ड है। इतना ही नहीं, साल 1964 और 1968 में 29 फरवरी को मोरारजी देसाई ने अपने जन्मदिन पर केंद्रीय बजट पेश किया था, वे ऐसा करने वाले एकमात्र वित्त मंत्री हैं। बता दें मोरारजी देसाई वित्त मंत्री के साथ-साथ देश के प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने 10 बार केंद्रीय बजट संसद में पेश किया था। देसाई के बाद सबसे ज्यादा बजट पेश करने में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम का नाम आता है जो नौ बार संसद में बजट पेश कर चुके हैं। उनके बाद नाम आता है पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का, जिन्होंने वित्त मंत्री बनने के दौरान आठ बार संसद में बजट पेश किया था।


गोपनीयता में किया जाता है बजट का काम: जो अधिकारी बजट तैयार करते हैं वो देश-दुनिया से पूरी तरह कट कर नॉर्थ ब्लॉक में रहते हैं और बजट का दस्तावेज तैयार करते हैं। यानी इन कर्मचारियों से ना कोई मिल सकता और ना ही इन कर्मचारियों को किसी से बात करने की इजाजत होती है। बजट का काम अत्यंत गोपनीयता में किया जाता है।


हलवा सेरेमनी की परंपरा: बजट पेश करने से करीब 10-12 दिन पहले 'हलवा सेरेमनी' का आयोजन होता है। इस सेरेमनी में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मीठे पकवान के रूप में हलवा तैयार किया जाता है, जो खुद वित्त मंत्री की तरफ से बनवाया जाता है। कहते हैं किसी भी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से पहले मीठा खाना चाहिए, इसलिए बजट तैयार करने से पहले 'हलवा सेरेमनी' का आयोजन किया जाता है।

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इन अहम सेक्टरों पर रहेगी खास नजर, बजट में बड़ी घोषणाएं संभव


नई दिल्ली। 1 फरवरी को मोदी सरकार अपना अंतिम बजट पेश करने जा रही है। देश की जनता को सरकार के अंतरिम बजट से काफी उम्मीदें हैं। सरकार के पास ये आखिरी मौका है देश की जनता को लुभाने का क्योंकि कुछ समय बाद ही लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। हालांकि, जेटली के पिटारे से इस बार क्या-क्या निकलेगा यह तो 1 फरवरी को ही पता चलेगा। इस बजट में देश के अलग-अलग सेक्‍टर को राहत की उम्‍मीद है।


रियल एस्‍टेट को उम्‍मीद

आने वाले बजट से रियल एस्टेट सेक्टर के लोगों को काफी उम्मीदें हैं। बजट 2019 में घर खरीदारों के लिए टैक्स छूट में थोड़ी और राहत की उम्‍मीद है। वहीं सुपरटेक के चेयरमैन आर के अरोड़ा ने जानकारी देते हुए बताया कि मोदी सरकार ने रियल एस्टेट सेक्‍टर कई अहम फैसले लिए हैं, लेकिन स्टाम्प ड्यूटी अभी भी बनी हुई है। हम लोग चाहते हैं कि सरकार इस स्टाम्प ड्यूटी को हटा दे और इस सेक्टर को भीउद्योग का दर्जा दे।


आईटी कंपनी में हो सकता है बड़ा बदलाव

लोगों का मानना है कि आने वाले अंतरिम बजट में आईटी कंपनियों को राहत मिल सकती है। पिछले लंबे समय से आईटी कंपनियों का प्रदर्शन ज्यादा अच्छा नहीं रहा है। वहीं, साल 2018 की दूसरी छमाही के बाद इन कंपनियों में इजाफा देखा गया था।


कृषि सेक्टर

आपको बता दें कि कृषि सेक्टर में पिछले काफी सालों से संकट में है क्योंकि ज्यादा उत्पादन के कारण फसलों की कमतों में कमी आ गई है। वहीं तीन राज्यों में हुए चुनाव में हार के बाद बजट में सरकार किसानों को नया तोहफा दे सकती है। मोदी सरकार किसानों के लिए राहत पैकेज और कृषि कर्ज माफी जैसे एलानों करने पर विचार कर रही है।


आयकर स्लैब में बदलाव संभव

लोगों का मानना है कि आने वाले बजट में टैक्स नियमों में भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में पीएम मोदी ने बताया कि टैक्स ढांचे में बदलाव की गुंजाइश है। वहीं लोगों को उम्मीद है कि आयकर स्लैब में छूट की सीमा को 2.5 लाख से बढ़ाकर 4 लाख रुपये किया जा सकता है।


रक्षा क्षेत्र के लिए दे सकते हैं बड़ी रकम

साल 2019 में आने वाले अंतरिम बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए भी लोगों को उम्मीदें हैं। इस बजट में रक्षा क्षेत्र को भी प्राथमिकता के दायरे में रखे जाने की उम्मीद है।


आने वाले बजट से देश की जनता को काफी उम्मीदें हैं क्योंकि ये मोदी सरकार का आखिरी बजट है। इस बजट की स्पीच भी काफी खास होने वाली है। अंतरिम बजट संसद के संयुक्त सत्र में पेश किया जाएगा। इसके साथ ही आम टैक्सपेयर वर्ग को भी सरकार कुछ नई सौगात दे सकती है।


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बजट भी हुआ डिजिटल, इस राज्य में पहली बार पेश हुआ था डिजिटल बजट


नई दिल्ली। चुनावी साल में देश का अंतरिम बजट पेश होने में अब कुछ दिन ही बचे हैं। 1 फरवरी को पेश होने वाला ये बजट वित्त मंत्री अरुण जेटली का लगातार छठा बजट और एनडीए सरकार का आखिरी बजट होगा। इस बजट में देश के अलग-अलग सेक्‍टर को राहत मिलने की उम्‍मीद है। चुनावों के पहले आने वाले इस अंतरिम बजट में किसानों, मिडिल क्लास और एक्साइज ड्यूटी पर कई प्रावधान आ सकते हैं, लेकिन डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करना इस बजट की सबसे बड़ी चुनौती होगी। सरकार लंबे समय से देश को पूरी तरह डिजिटल बनाने का सपना देखती आई है। उम्मीद है कि अंतरिम बजट में सरकार इस दिशा में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय सुना सकती है।


इस राज्य में पेश हुआ था डिजिटल बजट

डिजिटल इंडिया का सपना साकार करने की दिशा में भारत सरकार डिजिटल बजट पेश करने के बारे में विचार कर रही है। इसका मुख्य कारण सुरक्षा है। लेकिन अगर डिजिटल बजट साइबर हैकिंग का शिकार हो गया तो भारतीय अर्थव्यवस्था बर्बादी की कगार पर भी पहुंचाई जा सकती है। यही कारण है कि बजट को सफेद कागज पर काली स्याही से छापा जाता है, ताकि सब स्पष्ट दिखाई दे। बता दें भारत में उत्तराखंड में सबसे पहले डिजिटल बजट पेश किया गया था।


देश को डिजिटल बनाने में बड़ा कदम

अगर इस वर्ष भारत सरकार डिजिटल बजट पेश करती है तो ये निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धि होगी और देश को पूर्ण रूप से डिजिटल बनाने में एक बड़ा कदम होगा। उत्तराखंड के बाद साल 2018 में असम ने भी ई-बजट पेश किया था। डिजिटल इंडिया भारत सरकार की एक पहल है जिसके तहत सरकारी विभागों को देश की जनता से जोड़ना है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिना कागज के इस्तेमाल के सरकारी सेवाएं इलेक्ट्रॉनिक रूप से जनता तक पहुंच सकें। इस योजना का एक उद्देश्य ग्रामीण इलाकों को हाई स्पीड इंटरनेट के माध्यम से जोड़ना भी है।

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नए एटीएम कार्ड का नया फीचर, जरूरी नहीं होगा पासवर्ड या ओटीपी


नई दिल्ली। बैंकों ने हाल ही में पुराने कार्ड बंद कर नए एटीएम कार्ड जारी किए हैं। इसी के साथ बैंकों ने ग्राहकों को सुविधा देने के लिए नए कार्ड में कई नए फीचर भी जोड़े हैं। बैंकों ने हाल ही में जो एटीएम कार्ड जारी किए है उसमे एक बड़ा बदलाव किया है जिसके बाद आप अगर आप एटीएम मशीन में कार्ड डालने के बाद उसे जब तक नहीं निकाल सकते जब तक एटीएम से आपके पैसे नहीं निकल जाते। बैंकों ने कार्ड में ऐसे ही कई और भी कई बदलाव किए हैं।

बैंक लेकर आए नए फीचर

बैंकों ने इस साल के शुरू होते ही बड़ी संख्या में वीजा, मास्टरकार्ड और अमेरिकन एक्सप्रेस कंपनी नए कॉन्टैक्टलेस डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स जारी किए हैं। इन बैंकों में एसबीआई, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, एक्सिस और आईडीबीआई जैसे बैंक शामिल हैं। बैंकों ने इन कार्ड को जारी करने से पहले इनमें कई नए फीचर भी जोड़े हैं। जिसके तहत अगर ग्राहक मॉल या दुकानों में दो हजार रुपए तक की शॉपिंग के लिए किसी भी तरह के पिन कोड या ओटीपी की जरूरत नहीं होती। बस कार्ड को पेमेंट मशीन से टच करने पर ही पेमेंट हो जाता है। साथ ही अगर ग्राहक चाहे तो बैंक के ऐप के जरिए अपने कार्ड की लिमिट को बढ़ा या घटा सकते हैं।

बैंकों का दावा सुरक्षित है कार्ड

कार्ड की सुरक्षा को लेकर बैंकों का कहना है कि इस नई सुविधा से कार्ड आपके हाथों में ही रहता है और क्लोनिंग का खतरा नहीं रहता है। इसी के साथ ही बैंक तीन गुना तेज पेमेंट का दावा भी कर रहे हैं। इतना ही नहीं बैंकों
ने ग्राहकों को विश्वास दिलाने के लिए विज्ञापनों और वेबसाइट्स के जरिए इस नए फीचर को सुरक्षित बताना शुरू कर दिया है।

ज्यादा पेमेंट के लिए पिन और OTP जरूरी

आपको बता दें कि बैंकों ने इन सभी नए कार्ड्स पर एक खास निशान बनाया है। साथ ही उस मशीन पर भी खास निशान बना होता है जिनके जरिए ग्राहक पेमेंट करते हैं। ग्राहकों को इस मशीन पर करीब 4 सेंटीमीटर की दूरी पर कार्ड रखना या दिखाना होता है और फिर ग्राहकों के खाते से पैसे कट जाते हैं। कार्ड को स्वाइप या डिप करने की जरूरत नहीं होगी और न ही पिन एंटर करना होगा। लेकिन ग्राहक इस कार्ड के जरिए सिर्फ 2 हजार की ही शॉपिंग कर सकते हैं। अगर ग्राहक इससे ज्यादा की शॉपिंग करना चाहते है तो उन्हें इसके लिए ओटीपी या पासवर्ड की जरूरत पड़ेगी।

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बजट में पूरा हो सकता है सस्ते घर का सपना, मोदी सरकार कर सकती है ऐलान


नई दिल्ली। साल 2019 में पेश होने वाले बजट में कई बड़ी घोषणाएं होने की संभावना है। मोदी सरकार घर खरीदने वालों के लिए बजट में नया तोहफा लेकर आ सकती है। अगर आप भी नया घर लेने का प्लान बना रहे हैं तो इंतजार कर लीजिए।हो सकता है आने वाले बजट में आपको कुछ तोहफा मिल जाए।


कम आय वालों का पूरा होगा सपना

आपको बता दें सरकार लो इनकम ग्रुप वालों के लिए सस्ते घर मुहैया कराने का प्रबंध कर रही है। सरकार अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम में बदलाव करने का विचार कर रही है, जिससे घरों के दामों में गिरावट आएगी और कम आय वाले लोग आसानी से घर खरीद पाएंगे।


नए साल में भी दिया था तोहफा

इससे पहले मोदी सरकार नए साल में भी घर खरीदारों को तोहफा दे चुकी है। सरकार ने मिडल क्लास के लोगों की क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम की अवधि एक साल के लिए बढ़ा दी है। वहीं इस साल पेश होने वाले बजट में सरकार घर खरीदने वालों के लिए घर का एरिया भी बढ़ाने को मंजूरी दे सकती है।


8 लाख तक के लोन पर मिलेगा फायदा

आपको बता दें कि सरकार के द्वारा किए जाने वाले अफोर्डेबल हाउसिंग नियमों में होने वाले बदलाव से सभी को फायदा होगा। इसमें हुए बदलाव से आप 80 वर्ग मीटर के घर को भी लोन इंटरेस्ट सब्सिडी के लिए क्लेम कर पाएंगे। इसके साथ ही पहले आपको 6 लाख रुपए तक के लोन पर सब्सिडी मिलती थी, लेकिन अब आपको ये फायदा 8 लाख रुपए के लोन पर मिलेगा।


2022 तक सभी को मिलेगा घर

सरकार ने कहा कि 2022 तक सभी वर्गों के लोगों का घर बनाने के सपने को हम पूरा करेंगे। हाउसिंग फॉर ऑल योजना के तहत 2022 तक ग्रामीण क्षेत्र में 2 करोड़ घरों के निर्माण का लक्ष्य है। शहरी विकास मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकारों का साथ ने मिलने की वजह से ये योजना अभी अपने लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है।


पीएम आवास योजना में लाखों को मिल चुका है फायद

वहीं पीएम आवास योजना के तहत अभी तक देशभर में लगभग 13 लाख 24 हजार 851 लोगों को घर मिल चुका है और उन्होंने वहां रहना भी शुरू कर दिया है। इसके साथ ही 13 लाख 59 हजार 137 घरों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। वहीं, 14 हजार 424 प्रोजेक्ट को मंजूरी भी मिल चुकी है।

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लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार के लिए आई बुरी खबर, देश का कर्ज 49 फीसदी बढ़ा


नई दिल्ली। मोदी सरकार आने वाले लोकसभा चुनाव को जीतने के लिए हर मुमकिन कोशिश करने में लगी हुई है। लोकसभा चुनाव को देखते हुए ही मोदी सरकार हर तरफ अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का बखान करती रहती है। लेकिन मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान एक ऐसी मुसीबत बढ़ गई है जो आने वाले समय में ना सिर्फ आम जनता के लिए परेशानियां खड़ी करने वाली है, बल्कि आने वाली सरकार के लिए भी मुसीबत बढ़ाने वाली है। दरअसल मोदी सरकार के कार्यकल में देश पर कर्ज में 49 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

इतना बढ़ा सरकार का कर्ज

हाल ही में केंद्र सरकार के कर्ज रिपोर्ट का 8वां संस्करण जारी हुआ है, जिसके अनुसार मोदी सरकार के कार्यकाल में सरकार पर कर्ज 49 फीसदी तक बढाकर 82 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। जबकि वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक जून 2014 में सरकार पर कुल कर्ज 54.09 करोड़ रुपए था। जोकि सितंबर 2018 में बढ़कर 82.03 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान पब्लिक डेट में 51.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जिसके बाद ये 48 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 73 लाख करोड़ रुपए हो गया है। पब्लिक डेट में हुई इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह इंटरनल डेट में 54 फीसदी की बढ़ोतरी है। जो कि बढ़कर लगभग 68 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई है।

52 लाख करोड़ रुपए हुआ मार्केट लोन

मोदी सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल के दौरान मार्केट लोन में लगभग 47.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जिसके बाद ये 52 लाख करोड़ रुपए हो गया है। जबकि जून 2014 तक गोल्ड बॉन्ड के जरिए कोई कर्ज नहीं लिया गया था। इसके अलावा गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम से जुटाए गए कर्ज का आंकड़ा 9,089 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। केंद्र सरकार ने सरकारी कर्ज पर जारी स्टेटस रिपोर्ट में भारत सरकार के कुल कर्ज की
सारी जानकारी दी है। जिसके बाद वित्त मंत्रालय का कहना है कि सरकार वर्ष 2010-11 से ही सरकारी कर्ज पर वार्षिक स्टेटस रिपोर्ट जारी कर रही है। इस रिपोर्ट में सरकार के फाइनेंशियल डेफिसिट फाइनेंसिंग ऑपरेशन का पूरा ब्योरा मौजूद है।

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5600 करोड़ रुपए के NSEL स्कैम ने लिया नया मोड़, मुख्य वित्तीय अधिकारी गिरफ्तार


नई दिल्ली। 5600 करोड़ रुपए के नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (NSEL) स्कैम में नया मोड़ आ गया है। मामले में पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी शशिधर कोटियन को गिरफ्तार कर लिया गया है। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने पूछताछ के बाद कोटियन को गिरफ्तार किया।


28 जनवरी तक की पुलिस हिरासत में कोटियन

इस संदर्भ में एक अधिकारी ने कहा कि कोटियन को घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया गया है और शुक्रवार को उसे अदालत के सामने पेश भी किया जा चुका है, जिसके बाद अदालत ने उसे 28 जनवरी तक की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इस दौरान मामले में नए तथ्य सामने आने की उम्मीद है। घोटाले के बाद करीब 13,000 इन्वेस्टर्स को भारी घाटा हुआ था, जिसके बाद उन्होंने सरकार से कंपनी के बंद करने की मांग की थी। बता दें एनएसईएल घोटाला 2013 में सामने आया था, जो एक भुगतान संकट के मामले से जुड़ा है।


13 हजार निवेशकों का नुकसान होने का दावा

इस मामले में 13 हजार निवेशकों ने नुकसान होने का दावा भी किया था। घोटाला सामने आने के बाद सरकार ने एक्सचेंज को बंद करने का आदेश दिया था। इसके बाद 7 मई 2014 को फाइनेंशियल टेक (एफटीआईएल) के प्रमोटर जिग्नेश शाह को गिरफ्तार किया गया था, जो फिलहाल बेल पर हैं। शाह एमसीएक्स स्टॉक एक्सचेंज के भी ग्रुप चीफ एग्जीक्यूटिव थे। सेबी और एफएमसी ने जिग्नेश शाह और उनके सहयोगी जोसेफ मैसी को देश में कोई भी वित्त एक्सचेंज चलाने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। दरअसल एनएसईएल स्पॉट कमोडिटी एक्सचेंज है। इसके बारे में बहुत कम लोग जानते थे। दूसरे एक्सचेंज के उलट इसे गवर्न करने के लिए नियम नहीं बने थे। एक्सचेंज को चलाने वाले इस खामी का फायदा उठाते थे।

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286 साल पुरानी है बजट के 'लाल बैग' की परंपरा, 1868 की इस रोचक घटना को आज भी किया जाता है याद


नई दिल्ली। 1 फरवरी को पेश होने वाले अंतरिम बजट पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं। ये वित्त मंत्री अरुण जेटली का छठा बजट होगा। ऐसे में हर कोई जानना चाहता है कि वित्त मंत्री के पिटारे से क्या कुछ निकलेगा। आप हर साल देखते होंगे कि जिस दिन बजट पेश किया जाता है उस दिन वित्त मंत्री संसद में लाल बैग लेकर आते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वित्त मंत्री हमेशा लाल रंग का बैग ही क्यों लेकर आते हैं और इसकी परंपरा कितनी पुरानी है। आज पत्रिका आपको इस 'लाल बॉक्स' के बारे में तमाम महत्वपूर्ण बातें बताने जा रहा है।


286 साल पुराना है लाल बैग का इतिहास

बजट पेश करते समय वित्त मंत्री का संसद में लाल बैग के साथ आने की परंपरा 286 साल पुरानी है। साल 1733 में पहली बार ब्रिटिश वित्तमंत्री रॉबर्ट वॉलपोल ने बजट पेश करने के दौरान देश के आर्थिक लेखे-जोखे से जुड़े तमाम कागजात एक चमड़े के थैले में लेकर आए थे, जिसे फ्रेंच भाषा में बोजेट या बुगेट का नाम दिया गया था। इसके बाद 1860 में चांसलर ग्लैडस्टोन ने लकड़ी का बॉक्स बनवाकर उस पर लाल चमड़ा लगवाया और महारानी विक्टोरिया का मोनोग्राम भी छापवाया। तब से सभी वित्त मंत्रियों ने बजट दस्तावेज सदन में लाने के लिए उसी बॉक्स का इस्तेमाल किया। बात अगर भारत की करें तो 18 फरवरी 1860 को वायसराय की परिषद में जेम्स विल्सन ने भारत का पहला बजट पेश किया था। जेम्स विल्सन को ही भारतीय बजट के संस्थापक के रूप में जाना जाता है।


151 साल पहले हुई थी ये रोचक घटना

इस लाल बॉक्स से जुड़ी एक रोचक कहानी है भी है, जो 151 साल पुरानी है। ये बात है वर्ष 1868 की जब चांसलर वार्ड हंट बजट पेश करने संसद पहुंचे और हाउस ऑफ कामंस में भाषण शुरू करने के लिए उन्होंने बॉक्स खोला तो उसमें से दस्तावेज गायब थे। बॉक्स खाली देखकर चारों ओर सन्नाटा छा गया। इसके बाद उन्होंने एक कर्मचारी को अपने दफ्तर भेजा और मेज पर रखे सारे कागजात उठा लाने को कहा। इसके बाद चांसलर ने अपना भाषण शुरू किया।

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1 फरवरी को पेश होगा अंतरिम बजट, जानें कैसे आम बजट से है अलग


नई दिल्ली। संविधान में 'बजट' शब्द का जिक्र नहीं है। जिसे बोलचाल की भाषा में आम बजट कहा जाता है उसे संविधान के आर्टिकल 112 में एनुअल फाइनेंशियल स्टेटमेंट कहा गया है, जो अनुमानित प्राप्तियों और खर्चों का उस साल के लिए सरकार का विस्तृत ब्योरा होता है। वित्त मंत्री अरुण जेटली 1 फरवरी को अंतरिम बजट (Interim Budget) पेश करने जा रहे हैं। ये जेटली का लगातार छठा केंद्रीय बजट होगा। अंतरिम बजट के बाद चुनाव के बाद नई सरकार पूर्ण बजट पेश करेगी। ऐसे में कई लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा होगा कि आखिर अंतरिम बजट और पूर्ण बजट में अंतर क्या होता है। पत्रिका आपको बताएगा कि आखिर अंतरिम बजट और आम बजट होता क्या है।


क्या होाता है अंतरिम बजट ?

अंतरिम बजट वो बजट होता है जो सरकार के कार्यकाल के आखिरी साल में आम चुनाव से ठीक पहले पेश किया जाता है। इस समय सरकार को अपना खर्च चलाने के लिए रकम चाहिए होती है। इसके लिए सरकार को कंसोलिडेटेड फंड से रकम लेने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होती है। लोक सभा चुनाव से ठीक पहले पेश हो रहे इस बजट से सभी को बड़ी उम्मीदें हैं। अंतरिम बजट में आमतौर पर टैक्स से जुड़े बड़े एलान नहीं होते हैं ताकि आने वाली सरकार पर बोझ न पड़े। हालांकि ऐसा करने पर कोई रोक भी नहीं है। 1 फरवरी को पेश होने वाला अंतरिम बजट नरेंद्र मोदी सरकार के लिए काफी अहम होगा क्योंकि सरकार आम चुनावों से पहले इसमें लोकप्रिय योजनाओं का एलान कर सकती है। अंतरिम बजट को वोट ऑन अकाउंट (Vote on Account) के साथ-साथ लेखानुदान मांग और मिनी बजट भी कहा जाता है। बता दें वोट ऑन अकाउंट के जरिए सीमित अवधि के लिए सरकार के जरूरी खर्च को मंजूरी मिलती है।


क्या है आम बजट ?

अंतरिम बजट के बाद चुनाव के बाद नई सरकार पूर्ण या आम बजट पेश करती है। आम बजट में सरकार की आर्थिक नीति की दिशा दिखाई देती है। इसमें मंत्रालयों को उनके खर्चों के लिए पैसे का आवंटन होता है। बड़े तौर पर इसमें आने वाले साल के लिए कर प्रस्तावों का ब्योरा पेश किया जाता है। इसके साथ ही यह रकम कहां से आएगी, इसके प्रस्ताव भी बजट में बताए जाते हैं। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने 2014 में अंतरिम बजट पेश किया था, जिसके बाद केंद्र में भाजपा की सरकार बनी और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जुलाई में पूर्ण बजट पेश किया। मोदी सरकार ने फरवरी के अंत में बजट पेश करने की परंपरा खत्म कर दी थी।

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RBI ने इस सरकारी बैंक पर लगा दिया 1 करोड़ तक का जुर्माना, जानिए आप पर कैसे पड़ेगा असर


नई दिल्ली। नियमों का पालन ना करने पर आरबीआई ने बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र पर 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। बैंक पर ये जुर्माना केवाईसी नियमों के उल्लंघन और फ्रॉड क्लासिफिकेशन नॉर्म्स को पूरा न करने के कारण लगाया गया है। आरबीआई ने खुद इस जुर्माने की जानकारी दी है।

आरबीआई ने लगाया 1 करोड़ रुपए का जुर्माना

बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र पर लगे इस 1 करोड़ रुपए का जुर्माने पर आरबीआई का कहना है बैंक पर यह जुर्माना नियामकीय जरूरतों को पूरा नहीं करने की वजह से लगाया गया हैं। साथ ही आरबीआई ने यह भी साफ कर दिया है कि बैंक पर लगे इस जुर्माने से ग्राहकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ने वाला है। आरबीआई का यह भी कहना है कि इसकी वजह से ग्राहके के किसी भी ट्रांजेक्शन या ग्राहकों का बैंक के साथ किसी एग्रीमेंट पर कोई असर नहीं होगा।

पहले भी बैंक में लगा था जुर्माना

आपको बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब आरबीआई ने बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र पर जुर्माना लगाया हो। इससे पहले भी आरबीआई बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र पर जुर्माना लगा चुकी है। आरबीआई ने बीते साल भी बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र पर 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। उस समय आरबीआई ने ये जुर्माना एक खाते में हुई धोखाधड़ी का पता लगाने में बैंक की तरफ से हुई देरी को लेकर लगाया था।


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