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शरीर की खोई ताकत को जागृत करता है गिलोय, जानिए इसके अन्य फायदे


भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्वति में गिलोय को एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। गिलोय में मौजूद गुणों के चलते इसे छोटे से लेकर बड़े रोग में औषधि के रूप में काम में लिया जाता है। हालांकि इसके प्रयोग को लेकर आपको सावधानी बरतनी चाहिए। गिलोय कहां और किस आधार पर उगा है यह भी इसके इस्तेमाल को विशेष बनाता है। आइए यहां जानते हैं कि गिलोय को किन रोगों में औषधि के रूप में प्रयोग किया जा सकता है और किस तरह के गिलोय का किस रोग में प्रयोग किया जाता है:

प्रयोग विधि ...
पोषक तत्त्व : लोकमान्यता है कि गिलोय जिस पेड़ के पास मिलती है और यदि उसे आधार बना ले तो उसके गुण इसमें आ जाते हैं। लेकिन हर कोई गिलोय उत्तम नहीं। बिना सहारे उगी गिलोय व नीम चढ़ी गिलोय श्रेष्ठ औषधि है। इसकी छाल, जड़, तना और पत्तों में एंटीऑक्सीडेंट्स, कैल्शियम, फॉस्फोरस, प्रोटीन और अन्य न्यूट्रिएंट्स होते हैं।
फायदे : प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध है। संक्रामक रोगों के अलावा बुखार, दर्द, मधुमेह, एसिडिटी, सर्दी-जुकाम, खून की कमी पूरी करने, कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के अलावा रक्त शुद्ध करने व शारीरिक व मानसिक कमजोरी दूर करती है।

गिलोय बेल के रूप में व इसका पत्ता पान के पत्ते की तरह दिखता है। आयुर्वेद में इसे अमृता, गुडुची, चक्रांगी आदि नाम से भी जाना जाता है।

गिलोय के पत्ते को साबुत चबाने के अलावा इसके डंठल के छोटे टुकड़े का काढ़ा बनाकर भी पी सकते हैं। इसे अन्य जड़ीबूटी के साथ मिलाकर भी प्रयोग करते हैं। गिलोय का सत्व 2-3 ग्राम, चूर्ण 3-4 ग्राम और काढ़े के रूप में 50 से 100 मिलीलीटर लिया जा सकता है।

छोटे बच्चों को विशेषज्ञ के निर्देशानुसार ही यह दें। यदि किसी रोग (मधुमेह, त्वचा संबंधी ब्लड प्रेशर, बुखार, प्रेग्नेंसी व अन्य ) के लिए नियमित दवा ले रहे हैं तो प्रयोग से पूर्व विशेषज्ञ से पूछ लें वर्ना अन्य दवा के साथ मिलकर शायद यह काम न करे। - वैद्य शंभू शर्मा, वनौषधि विशेषज्ञ


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जीरे के फायदे: जानिए इसके स्वास्थ्य से जुड़े फायदे


भोजन को खुशबू व स्वाद देने के साथ जीरा सेहत को भी संवारता है। कई शोध के अनुसार पिसा जीरा लेने से शरीर में वसा का अवशोषण कम होता है जिससे वजन कम होने में मदद मिलती है। जानते हैं इसके अन्य फायदे...


दुरुस्त हृदय
हृदय की धडक़नें सामान्य रखने व हार्ट अटैक से बचाव करने के अलावा स्मरण शक्ति बढ़ाने, खून की कमी दूर करने, पाचनतंत्र ठीक कर गैस व ऐंठन से निजात दिलाता है।


चर्बी घटाए
दो बड़े चम्मच जीरा एक गिलास पानी में भिगोकर रातभर के लिए रख दें। सुबह इसे उबाल लें और गर्मा-गर्र्म चाय की तरह पीएं। बचा हुआ जीरा चबा लें। रोज ऐसा करने से चर्बी कम होती है।

मजबूत बाल
रातभर जीरे को पानी में भिगोएं। शैंपू करने के बाद बालों को इस पानी से धोने से पोषण मिलता है।

सरसों तेल की मालिश से थकान दूर
सर्दियों में सरसों के तेल की मालिश बहुत गुणकारी होती है। इससे शरीर में रक्तसंचार बढ़ता है व थकान दूर होती है। भारत में हुई कई रिसर्च के अनुसार नवजात शिशु एवं प्रसूता की मालिश इसी तेल से करनी चाहिए। इस तेल को पैरों के तलवे में लगाने से थकान तुरंत मिटती है व नेत्रज्योति बढ़ती है। दाद, खाज, खुजली जैसे चर्म रोग से निजात मिलती है। तेल से मालिश गठिया में भी राहत देती है।


जम्हाई लेने से दिमाग रहता है कूल
न्यूस्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार जम्हाई के दौरान गहरी सांस लेने से भीतर आने वाली हवा बे्रन को कूल करती है। साथ ही जबड़ों की स्ट्रेचिंग होने से दिमाग की तरफ रक्तसंचार बढ़ता है। रात में बे्रन-बॉडी का टेम्प्रेचर दिन की तुलना में अधिक होने से ज्यादा जम्हाई आती है।

वेज सूप-सलाद से तन और मन खुश
डायटीशियन निखिल चौधरी के अनुसार डिप्रेशन से राहत में कुछ चीजें मददगार हैं। प्रीबायोटिक व फाइबर युक्त दही, कांजी के पानी व अचार से पेट को हैल्दी बैक्टीरिया मिलते हैं। अंकुरित बींस, अनाज, सूखे मेवे, कच्ची सब्जियां, सलाद, सूप, फल आदि भी तन-मन को सुकून देते हैं।


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नीम के पत्तों से घटेगी शुगर, दूर होगा संक्रमण और दर्द


डायबिटीज मुख्य रूप से कफ दोष बढऩे से होती है। रोग के इलाज के दौरान आयुर्वेद में इस दोष को संतुलित करते हैं। नीम इस रोग में किसी औषधि से कम नहीं है। यह संक्रमण व त्वचा संबंधी रोगों से बचाने के साथ शरीर में बढ़ते शुगर को रोकने, खून साफ करने व पेट से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने में मददगार है।


नीम का काढ़ा : बढ़ती शुगर को कम करने के लिए नीम का काढ़ा पी सकते हैं। इसके लिए एक मुट्ठी नीम के ताजा पत्तों को पानी से धो लें। इन्हें 2 गिलास पानी में डालकर उबालें। पानी आधा गिलास रहने पर छान लें। पानी की इस मात्रा को दो भागों में बांटकर दिन में दो बार पीएं।

ध्यान रखें : यदि आपका शुगर लेवल ज्यादा रहता है तो दवाओं के साथ नीम भी लें। साथ ही अपना शुगर लेवल हर 2-3 माह में चेक कराएं। ध्यान रखें कि गर्भवती महिला और ऐसी महिलाएं इसे न लें जो ब्रेस्टफीड कराती हैं।

नहाने में भी प्रयोग
बाहरी तौर पर यदि त्वचा से जुड़ी कोई समस्या या संक्रमण हो तो नीम की कुछ पत्तियों का उबला पानी नहाने के पानी में डालकर नहानें की आदत डालें।

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आप नीचे दिए गए फलों का भी उपयोग कर सकते हैं। फलों को उनके गुणों के अनुसार डाइट में शामिल किया जा सकता है।

आम
फायबर और विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में होने के कारण फलों का राजा कहा जाता है आम। हड्डियों को मजबूत बनाने के अलावा यह शरीर के तापमान को सही बनाए रखता है। इसे नियमित खाने से तनाव नहीं रहता।

कीवी
विटामिन-सी भरपूर मात्रा में होने के कारण कीवी शरीर में मौजूद कीटाणु और बैक्टीरिया को नष्ट करने का काम करती है। रक्त की पूर्ति करने में भी यह उपयोगी है। इसमें डायट्री फाइबर होता है जो भूख बढ़ाने में मददगार है।

पपीता
कमजोर कोशिकाओं को ताकत देने का काम करते हैं पपीते के गुण। साथ ही जो लोग वजन घटाने में लगे होते हैं वे यदि रोजाना 100 ग्राम पपीता खाने से लाभ होगा। लिवर को सेहतमंद रखने के लिए इसे खा सकते हैं।


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अचार बनाने का तरीका और अचार के फायदे


मेरी रसोई में स्वाद भरने वाले सदाबहार अचार का बेहद खास ही स्थान है। डाइनिंग टेबल पर जब भी तीखे, लाजवाब, खट्टे-मीठे, चटपटे अचार पर नजर जाती है तो चखने के लिए स्वत: ही हाथ बढ़ जाता है। बिना अचार के खाने का स्वाद अधूरा लगता है।

स्वास्थ्यप्रद भी हैं अचार
अचार भोजन के प्रति अरुचि को दूर करते हैं व भूख भी बढ़ाते हैं। अचार में मेथी, सौंफ, हींग, राई, हल्दी, अदरक आदि पाचक पदार्थ पड़ते हैं, जो भोजन को पचाने में सहायक होते हैं। ये पेट में बनने वाली वायु का नाश करते हैं। लगभग सभी अचार विशेष रूप से नींबू, आंवला आदि विटामिन सी से भरपूर होते हैं। इनके सेवन से शरीर में विटामिन सी की पूर्ति होती है। हमारी आतों में पाए जाने वाले कृमियों का नाश करने में अचार सहायक होते हैं।

अचार टिप्स और कैसे रखें सुरक्षित
आम का अचार बनाते समय फांकों में नमक, हल्दी लगाकर रखें व ऊपर से एक चम्मच चीनी भी डाल दें। जब फांकें पानी छोड़ दें, तभी अचार बनाएं।
अचार बनाते समय व बरसात के दिनों में बीच-बीच में धूप दिखाएं।
अचार में हमेशा आयोडाइज्ड नमक इस्तेमाल करें। अचार हमेशा साफ, सूखे हाथों व सूखे चम्मच से निकालें।
पिसे मसालों का इस्तेमाल न करके खड़े मसाले डालें।
अचार के बचे मसाले का उपयोग परांठे, पूड़ी, पुलाव में करें।

जानिए रसाई संबंधी और टिप्स

भूरी चीनी यानी ब्राउन शुगर आजकल सभी इस्तेमाल करते हैं। इसे कडक़ होने से या फिर उसमें गांठें पडऩे से बचाने के लिए उसमें संतरे के छिलके डाल दें। अब चीनी को छिलके सहित एअरटाइट कंटेनर में पैक करें और फिर साफ-सूखी जगह पर स्टोर करें। भूरी चीनी नरम बनी रहेगी और न ही इसमें इकट्ठा होकर गांठें बनेंगी।

जब कभी प्याज को कैरेमलाइज करना पड़ता है तो अक्सर प्याज जल ही जाती है। अगर आप प्याज को अच्छी तरह से भूरा करना चाहती हैं तो उस पर चुटकी भर बेकिंग सोडा डाल दें। प्याज न केवल अच्छी तरह कैरेमलाइज होगी, बल्कि काफी जल्दी भी हो जाएगी।


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जड़ी बूटियों की रानी तुलसी, जानिए इसके नुस्खों का प्रयोग


आयुर्वेद में जड़ीबूटियों की रानी कही जाने वाली तुलसी कई गुणों से युक्त है। यह शरीर के लिए अंदरुनी व बाहरी दोनों रूपों में फायदेमंद है। मौसमी व त्वचा संबंधी रोगों के अलावा इसके पत्ते रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में उपयोगी हैं। इसकी खास बात है कि यह व्यक्ति की तासीर के अनुसार काम कर सकती है। तुलसी एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल, एंटीपायरेटिक, एंटीसेप्टिक एंटीऑक्सीडेंट और एंटीकैंसर गुणों से भरपूर है। जानते हैं वनौषधि विशेषज्ञ वैद्य शंभू शर्मा से इसके प्रयोग के बारे में-

बहूगुणी होने के कारण तुलसी के पत्ते ही नहीं बल्कि इसकी टहनी, फूल, बीज आदि को आयुर्वेद और नैचुरोपैथी पद्धति में भी इलाज के लिए प्रयोग में लेते हैं।

फायदे : संक्रमण, चेहरे की चमक व इम्युनिटी बढ़ाने, त्वचा रोगों, सर्दी, जुकाम, खांसी, सिरदर्द, चक्कर आना व कई बड़े रोगों के इलाज में भी उपयोगी है।

उपयोग : तुलसी के पत्तों को पानी से निगलने के अलावा काढ़ा बनाकर भी पी सकते हैं। चाय आदि में भी पत्तियां उबाल लें। इसकी पत्तियों को चबाना नहीं चाहिए।

 

तुलसी के गुणों और इसे काम लेने के तरीकों के बाद आपको बताते हैं कि कैसे आप गैस्ट्रिक की समस्या से निजात पा सकते हैं:

दिन में 6 बार थोड़ा-थोड़ा भोजन करें

डायटीशियन संगीता मिश्र के अनुसार कब्ज , गैस्ट्रिक व ब्लोटिंग की मूल वजह नाश्ता व डिनर को मेन मील की तरह लेना व दिनभर भूखे रहना या तलीभुनी चीजें खाना है। ऐसे में 6 मील रूल यानी दिन में 6 बार थोड़ा-थोड़ा भोजन करें। इनमें फल व सब्जियां भरपूर खाएं। सुबह नाश्ते के बाद स्नैक्स और फिर 12 से 1 बजे के बीच लंच लें। 3-4 बजे चाय के साथ हल्का-फुल्का स्नैक्स लें और फिर 6 बजे सूखे मेवे ले सकते हैं। डिनर सोने से २ घंटे पहले यानी 8 से 9 के बीच कर लेना चाहिए। मेन मील के बाद ग्रीन टी पी सकते हैं।

पेट के कीड़े मारे हरसिंगार
हरसिंगार के कुछ पत्तों का दो चम्मच रस निकालकर उसमें थोड़ी मिश्री मिलाकर बच्चों को दें। छोटे बच्चे हैं तो एक चम्मच पिलाएं। इससे पेट के कीड़े मरते हैं। - आचार्य बालकृष्ण


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Tulsi benefits : धूम्रपान छोड़ना है तो आजमाएं तुलसी का ये उपाय, जानिए और फायदे


अगर आप धूम्रपान करना छोड़ना चाहते हैं और लाख कोशिशों के बाद भी इस आदत से छुटकारा नहीं मिल रहा है तो आपके लिए एक जोरदार घरेलू तरीका। तुलसी के पत्तों के इस्तेमाल से आप अपनी धूम्रपान की आदत को बॉय—बॉय कह सकते हैं।

— तुलसी के पत्ते में एंटी स्ट्रेस एजेंट पाए जाते हैं। माना जाता है कि ये एंटी स्ट्रेस एजेंट आपके तनाव और मानसिक असंतुलन को ठीक करते हैं। ऐसे में जब भी आपको स्मोकिंग करने की इच्छा हो तो आप तुलसी के पत्ते चबाएं। थोड़ी ही देर में आपके मुंह में तुलसी की सुगंध फैल जाएगी। इसके कुछ देर बाद आपकी स्मोकिंग की इच्छा दम तोड़ती दिखेगी। ऐसा लगातार करन से कुछ ही दिनों में आप स्मोकिंग को अलविदा कह देंगे।

— आपको याद होगा कि देश में कुछ साल पहले चिकनगुनिया का रोग महामारी की तरह फैल गया था। इस दौरान इस रोग के लिए उपलब्ध दवाईयों को लेकर गंभीर संकट पैदा हो गया था। इसी बीच एक आयुर्वेदिक नुस्खा भी सामने आया। इसमें बताया गया कि तुलसी के पत्तों का काढा बनाकर पीने से यह रोग मिट जाता है और फिर कभी सामने नहीं आता है। तुलसी और चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल कर यह काढा बनाया जा सकता है। इस काढे को सुबह—सुबह पीना लाभकारी होता है।

— तुलसी में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का गुण होता है। खासकर सर्दी, खांसी और जुकाम में यह फायदेमंद साबित होती है। जुकाम होने पर आप तुलसी के पत्तों की चाय बनाकर पी सकते हैं। इससे जरूर फायदा मिलेगा।


— यौन रोगों के उपचार में भी तुलसी का उपयोग किया जाता है। पुरुषों की शारीरिक कमजोरी को दूर करने में तुलसी के बीज फायदेमंद होते हैं। यौन दुर्बलता और नपुंसकता में भी तुलसी के बीज फायदा पहुंचाते हैं।

— तुलसी के पत्ते पीसकर उसका लेप लगाने से कील—मुंहासे से भी निजात पाई जा सकती है। अगर चेहरे पर केवल एक मुंहासा हो तो उस पर भी हल्का तुलसी का लेप लगाएं, दूसरे ही दिन यह गायब हो जाएगा।


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मुंह में ऐसे भरें तेल, चेहरा रहेगा बेदाग सेहत रहेगा दुरुस्त


आयुर्वेद में दांतों, जीभ और मुंह के अंदर वाले हिस्से को स्वस्थ रखने के लिए ऑयल पुलिंग करने की सलाह दी जाती है। ऐसा लगभग 3 हजार से ज्यादा वर्षों से किया जा रहा है। इस ऑयल पुलिंग कई अन्य फायदे भी हैं। कुछ खास तेल से ही इसको किया जाता है। 



ऐसे किया जाता है ऑयल पुलिंग  


तिल, जैतून या नारियल के तेल को मुंह में लेकर 10-15 मिनट के लिए घुमाया जाता है। इसके बाद जब तेल पतला हो जाता है तो इसे थूककर मुंह की अच्छी तरह से सफाई कर ली जाती है। 



ऑयल पुलिंग के समय बरती जाने वाली सावधानी



इसे करते समय ध्यान रखें कि तेल निगले नहीं क्योंकि 15 मिनट की प्रक्रिया में मुंह में मौजूद तेल में बैक्टीरिया, वायरस व विषाक्त पदार्थ बढ़ जाते हैं। साथ ही ध्यान रखें कि सुबह के समय खाली पेट तेल से कुल्ला करने से ज्यादा फायदा होता है। इसे करने के बाद आप नमक से दांतों और मसूढ़ों की मसाज भी कर सकते हैं। 



इससे होने वाले लाभ 



ऑयल पुलिंग से मुंह के बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा दांतों की सेंसिविटी कम होने के साथ-साथ इससे सिरदर्द, ब्रोंकाइटिस, दांतदर्द, अल्सर, पेट, किडनी, आंत, हार्ट, लिवर, फेफड़ों के रोग और अनिद्रा से भी राहत मिलती है। साथ ही बैक्टीरिया के बाहर निकलने से पाचनक्षमता भी दुरुस्त होती है।


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तुलसी से दूर करें दांतों का पीलापन, जानें कुछ असरदार नुस्खे


जयपुर। दिन में दो बार ब्रश और साफ-सफाई से दांत चमकदार व मजबूत बने रहते हैं। गुटखा, पान, तंबाकू, सिगरेट, शराब आदि दांतों की चमक खत्म करने के साथ इनकी जड़ों को भी कमजोर करते हैं। यदि आप दांतों के पीलेपन से परेशान हैं तो अपनाएं ये घरेलू नुस्खे...





- नीम नेचुरल एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर है। रोजाना नीम के दातून से दांत साफ करने पर दांत संबंधी रोग नहीं होते व पीलापन भी दूर हो जाता है।





- तुलसी में दांतों का पीलापन दूर करने की क्षमता पाई जाती है। तुलसी के पत्तों को धूप में सुखा लें। इसके पाउडर को टूथपेस्ट में मिलाकर ब्रश करने से दांत चमकने लगते हैं।





- बेकिंग सोडा से पीले दांतों को सफेद बनाना अच्छा घरेलू तरीका है। ब्रश करने के बाद थोड़ा सा बेकिंग सोडा लेकर दांतों को साफ करें। इससे दांतों पर जमी पीली परत धीरे-धीरे साफ हो जाती है।





- संतरे के छिलके और तुलसी के पत्तों को सुखाकर पाउडर बना लें। ब्रश करने के बाद इस पाउडर से दांतों पर हल्के से रोजाना मसाज करें।





- नमक में 2-3 बूंद सरसों का तेल मिलाकर दांत साफ करने से पीलापन दूर हो जाता है व दांत चमकने लगते हैं।





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किचन को रखें बैक्टीरिया फ्री, परिवार रहेगा फिट


अपने परिवार को इंफेक्शन फ्री वातावरण देने के लिए उसकी शुरूआत अपनी किचन से करनी चाहिए। हैल्दी फूड अगर हैल्दी एनवायरमेंट में बनें तो परिवार की सेहत फिट होगी। किचन को बैक्टीरिया फ्री बनाएं।



किचन की स्‍लैब साफ करना :
जब आप खाना बना लें तो अपनी किचन की स्लैब को साफ कर दें। इसके लिए आपको एक मुलायम कपड़ा और नींबू के रस की आवश्यकता होती है जिससे कि पट्टी की दुर्गंध जाएगी।



गैस स्टोव को साफ करना :

गैस स्टोव को भी रोजाना साफ करना जरूरी है। यदि खाना पकाते समय गैस पर कुछ गिर जाये तो इसे तुरंत साफ कर दें। इससे आपके गैस पर खाने की बदबू नहीं रहेगी।



माइक्रोवेव को साफ करना :
इस्तेमाल करते ही माइक्रोवेव को साफ करना भी आवश्यक है। इससे माइक्रोवेव में खाने की सुगंध नहीं होगी और तेल के निशान भी हट जाएंगे। माइक्रोवेव को साफ करने के लिए एक मुलायम कपड़े में बेकिंग सोडा और नमक लें।



सिंक को साफ करना :

सिंक में डिश साफ करने के बाद सिंक में थोड़ा सेंधा नमक दाल दें। नमक पर काला सिरका भी बुरका दें और एक ब्रश से आराम से सिंक की सफाई करें। सिरके से आटे की गंध चली जाएगी और नमक से दाग हट जाएँगे।


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एंटीबॉयोटिक है घर में लगी तुलसी, जानें और भी फायदे


तुलसी की पत्तियां कई बीमारियों का इलाज करती हैं। कैंसर जैसे लाइलाज रोग में असरकारक है, तो जुकाम, खांसी व सांस की तकलीफ में भी बहुत फायदा देती है।

तुलसी के तेल से सिर में मालिश करने से यह सिर में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है। क्योंकि यह बालों और त्वचा पर भी अच्छा प्रभाव छोड़ती है।

मुंह पर एक्ने होने पर तुलसी की पत्तियों को पीसकर लेप बनाकर 20-25 मिनट तक लगा सकते हैं। इससे मुहांसे पैदा करने वाले बैक्टीरिया खत्म होते हैं। इसीलिए तुलसी की पत्तियों को एंटीबॉयोटिक बूटी भी कहा जाता है।

बालों की मजबूती के लिए गरम जैतून के तेल में तुलसी का तेल गरम करके दोनों को मिलाकर आवश्यकतानुसार बालों में हल्के हाथ से मालिश करना चाहिए। तुलसी और आंवला पीस कर सिर पर लगाने से रूसी की समस्या भी खत्म होती है।
-तबस्सुम खान नौरीन

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मसालों से स्वाद ही नहीं, सेहत भी सुधारें


मिर्च, नमक, हल्दी, धनिया, जीरा, राई के अलावा अजवाइन, दालचीनी, पुदीना, मीठा नीम पत्ता और तुलसी आदि ऐसे पदार्थ हैं जो रोगों पर सीधे प्रभाव दिखाते हैं। 

पुदीना: बढ़ती है प्रतिरोधक क्षमता
पुदीना में रोसमारिनिक एसिड होता है। यह ऑक्सीडेंट एलर्जी मिटाता है। नहाने के पानी में पुदीने की पत्तियां डालकर स्नान करने से तनाव से मुक्ति मिलेगी। पुदीना मुंह के बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है। इससे दांतों की उम्र बढ़ती है और जीभ साफ होती है। यह ब्लड प्यूरीफाई करने का काम भी करता है। 

इससे महिलाओं को मासिक धर्म के समय होने वाले दर्द से राहत मिलती है। पुदीने में  कैल्शियम, फॉस्फोरस, विटामिन सी, डी, ई और विटामिन डी होते हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। अरोमाथैरेपी में तनाव घटाने व मस्तिष्क को स्फूर्ति प्रदान करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। इसमें मौजूद फायटो कैमिकल कई किस्म के कैंसर का खतरा घटाता है।

ऐसे लें: पुदीने की चटनी बनाएं, इसे रायते, सूप या सलाद में प्रयोग कर सकते हैं। इसे जूस या जलजीरे में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। चावल या पुलाव में भी पुदीने से स्वाद बढ़ा सकते हैं। 

मीठा नीम: सिरदर्द में आराम
जर्नल ऑफ प्लांट फूड्स फॉर न्यूट्रीशन के एक अध्ययन के अनुसार मीठा नीम ब्लड शुगर का लेवल घटाता है। मधुमेह रोगियों के अलावा जो लोग वजन घटाना चाहते हैं उन्हें भी इनका प्रयोग करना चाहिए। इसे कढ़ी पत्ता भी कहते हैं। 

ऐसे लें: दस्त होने पर शहद के साथ मीठा नीम खाने से आराम मिलता है। खाने में इन पत्तियों का इस्तेमाल करने से पाचन प्रक्रिया दुरुस्त होती है। पुलाव, सब्जी या सांभर आदि में इन्हें डाल सकते हैं। इसके पत्तों को पीसकर माथे पर लगाने से सिरदर्द में आराम मिलता है।

अजवाइन: पाचन क्षमता में बढ़ोतरी
अजवाइन में थायमोल रसायन होता है जो पाचन क्षमता बढ़ाता है। यह खांसी, कफ और पेट संबंधी रोगों में काफी फायदेमंद होती है। 

ऐसे लें: अजवाइन को उबालकर पीने या इसे पान के पत्ते में लपेटकर चबाने से अपच की समस्या दूर होती है। अजवाइन बच्चेदानी को भी साफ करती हैै। गुड़ के साथ अजवाइन की टॉफी बनाएं और चबाएं, कफ से जमी रुकावट खुल जाएगी। 

अस्थमा रोगी के लिए यह लाभप्रद है। पतले कपड़े में बंधी अजवाइन को सूंघने से सिरदर्द दूर होता है। इसके रस में दो चुटकी काला नमक मिलाकर लें और बाद में गर्म पानी पी लें, खांसी में आराम मिलेगा। अजवाइन खाने से मुंंह से दुर्गंध नहीं आती। 

अजवाइन डालकर परांठें या पुड़ी बनाएं इससे भूख खुलती है। अजवाइन को भूनकर पीस लें और इससे सप्ताह में दो-तीन बार दांत साफ करें। दांत मजबूत और चमकदार होंगे। दांतों में दर्द होने पर अजवाइन को पानी में उबालकर पानी को गुनगुना कर लें। इस पानी से गरारे करें, दांत दर्द में आराम मिलेगा। 

तुलसी: तनाव होगा गुडबाय
तुलसी में तनावमुक्ति की क्षमता है। जो लोग कामकाजी व्यस्तता के कारण तनाव में रहते हैं, उन्हें 3-4 तुलसी के पत्ते चबाने चाहिए। तुलसी रक्त से यूरिक एसिड का स्तर घटा देती है जो किडनी स्टोन का मुख्य कारण है। तुलसी के रस को शहद के साथ छह माह तक रोज पीने से किडनी में मौजूद स्टोन गलने लगता है। तुलसी में मौजूद तत्व ट्यूमर की ओर पहुंचने वाले रक्त को रोक लेते हैं जिससे ब्रेस्ट व मुंह के कैंसर की ग्रोथ रुक जाती है। तुलसी के पत्ते साथ रखें और स्मोकिंग की चाह हो तो इन्हें चबा लें। 

ऐसे लें: चाय में तुलसी के पत्तों का प्रयोग कर सकते हैं। एक कप चाय में इसकी तीन से चार पत्तियों का प्रयोग कर सकते हैं। शरीर टूट रहा हो या जब लग रहा हो कि बुखार आने वाला है तो पुदीने का रस और तुलसी का रस बराबर मात्रा में मिला लें। इसमें थोड़ा गुड़ मिलाकर पीने से आराम मिलता है। दांतों में कीड़ा लग गया हो तो तुलसी के रस में देसी कर्पूर मिलाएं और रुई में भिगोकर दांत पर लगाने से आराम मिलता है। 

दालचीनी: मधुमेह में राहत
डायबिटीज केयर जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार टाइप टू डायबिटीज रोगी दालचीनी की चाय पिएं। 

ऐसे लें: पेट में गैस होने पर शहद और दालचीनी चूर्ण का प्रयोग करें। अगर मुंह से दुर्गंध आती हो तो दालीचीनी का एक टुकड़ा दिन में दो बार चूसें। दांतों में कीड़े न लगे इसके लिए दालचीनी पाउडर को पानी में मिलाकर गरारे करें। दालचीनी के पाउडर में नींबू मिलाकर पेस्ट बना लें, अब इसे चेहरे पर लगाएं इससे कील मुहांसों की समस्या दूर होगी। अगर बाल गिरते हों तो शहद में दालचीनी पाउडर को मिलाकर बालों में लगाएं और इसे 10-15 मिनट के बाद धो लें, बाल झडऩा बंद हो जाएंगे। दालचीनी पेस्ट का लेप माथे पर करने से सिरदर्द में आराम  मिलता है। 

- वैद्य ओ.पी. दुबे, इंदौर

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पान के पत्तों में छिपा हैं सर्दी-जुकाम का रामबाण इलाज


हवन व पूजा-पाठ आदि में इस्तेमाल होने वाले पान के पत्तों में प्रोटीन, कार्बाेहाइड्रेट, टैनिन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयोडीन व पोटेशियम जैसे मिनरल्स प्रचुर मात्रा में होते हैं।

सर्दी-जुकाम में इनका उपयोग आयुर्वेदिक इलाज के रूप में किया जा सकता है।

हल्दी का टुकड़ा सेंककर पान पत्ते में डालकर खाने से लाभ होगा।

रात में तेज खांसी चलती हो तो पान के पत्ते में अजवाइन व मुलैठी का टुकड़ा डालकर खा सकते हैं।

बच्चों को सर्दी-जुकाम हो तो एक पत्ते पर हल्का गर्म सरसों का तेल लगाकर बच्चों के सीने पर रखने से आराम मिलता है।

2-3 पत्तों के रस में शहद मिलाकर दिन में दो बार लेने से लाभ होगा। बच्चों को आधा चम्मच रस ही दें।

ये न करें उपयोग 
हालांकि चरक संहिता में बतौर माउथ फ्रेशनर इलायची, लौंग, जावित्री के साथ पान पत्ता खाना बताया गया है। लेकिन जिन्हें टीबी, पित्त संबंधी रोग, नकसीर, त्वचा व गले में रूखापन, आंखों से जुड़ी समस्या या बेहोशी जैसी बीमारियां हों तो वे पान के पत्तों का उपयोग न करें। 
- वैद्य बनवारी लाल गौड़

Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/gharelu-nuskhe/benefits-of-betel-leaves-in-cough-417948/

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