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युद्धविराम के बावजूद गाजा में जारी है लड़ाई, इजराइल ने तेज किए हवाई हमले


गाजा। फिलिस्तीनी आतंकवादियों ने युद्ध विराम समझौते के बावजूद गाजा में नए रॉकेट हमले किए, जिससे इस क्षेत्र में एक बार फिर संघर्ष शुरू होने की आशंका जताई जा रही है। गाजा के इस्लामिक संगठन हमास ने सोमवार शाम को कहा कि इजराइल के आम चुनाव से दो हफ्ते पहले ही हिंसा भड़क गई है, जो एक सोची समझी साजिश है। उधर इजराइल की सेना ने देर रात मोर्टार फायर और गाजा से 30 नए रॉकेट हमलों की सूचना दी। इसके बाद इजराइल ने लगभग 15 नए ठिकानों पर हमला किया। इजराइल की सेना ने कहा कि हमास द्वारा ताजा हमले एक नई साजिश का हिस्सा है।

इजरायल ने तेज किए हवाई हमले

इजराइल ने कहा है कि वह इस हमले का मुंह तोड़ जवाब देगा। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने वाशिंगटन यात्रा दौरान संवाददाताओं से कहा कि हमास को यह जानने की जरूरत है कि हम उन्होंने कुचलने के लिए गाजा में घुसने और सभी आवश्यक कदम उठाने में संकोच नहीं करेंगे। उधर समाचार एजेंसी एएफपी ने दावा किया है कि मंगलवार रात के दौरान उत्तर से कई रॉकेट दागे गए हैं। इजराइल की सेना ने कहा कि हमलों के बाद 'हमास इस्माइल हनिया' के कार्यालय और दर्जनों अन्य गाजा पट्टी के स्थानों पर संघर्ष विराम समाप्त कर दिया गया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर अब भी युद्ध विराम जारी है। बता दें कि इजराइल की एयर स्ट्राइक गाजा से छोड़े गए एक लंबी दूरी के रॉकेट हमले की प्रतिक्रिया में थी। इस हमले से तेल अवीव के एक घर में सोमवार को सात लोग घायल हो गए थे।

संघर्ष का लंबा इतिहास

इजराइल ने ताजा हमलों की शुरुआत उस समय की जब नेतन्याहू वाशिंगटन में अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। हमास के प्रवक्ता फावजी बरहुम ने ताजा विवाद के लिए मिस्र को दोषी ठहराया है। इजराइल और हमास ने 2008 से तीन युद्ध लड़े हैं। माना जा रहा है कि नेतन्याहू 9 अप्रैल के चुनाव से पहले अप्रत्याशित परिणामों से बचना चाहते हैं, लेकिन उन्हें पूर्व सैन्य प्रमुख बेनी गैंट्ज़ के नेतृत्व वाले एक मध्यमार्गी राजनीतिक गठबंधन से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इसी के चलते उन्हें हमास को दृढ़ता से जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा। वाइट हाउस में नेतन्याहू ने कहा "इजरायल इस प्रचंड आक्रामकता का जबरदस्त तरीके से जवाब दे रहा है।" वहीं ट्रंप ने इजरायल के बचाव के अधिकार का समर्थन किया था। इजराइल के हमले में गाजा सिटी में हमास का आंतरिक सुरक्षा कार्यालय नष्ट हो गया है। हमास ने इजरायली हमलों के जवाब में सोमवार को दागे गए रॉकेटों की जिम्मेदारी ली थी। बता दें कि शनिवार को गाजा सीमा पर बड़े पैमाने पर फिलिस्तीनी विरोध प्रदर्शन की पहली वर्षगांठ आयोजित की गई है। इसको देखते हुए ताजा संघर्ष दुनिया भर में कौतुहल का केंद्र बना हुआ है।


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सऊदी अरब ने गोलान हाइट्स को मान्यता देने पर आपत्ति जताई, कहा-इस तरह से तथ्य नहीं बदल सकते


रियाद। सऊदी अरब ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कब्जे वाले गोलान हाइट्स पर इजरायल की संप्रभुता को मान्यता देने पर आपत्ति जताई है। सऊदी प्रेस एजेंसी द्वारा जारी एक बयान में मंगलवार को उसने कहा कि इस तरह के प्रयास करने से तथ्य नहीं बदलते हैं। इससे मध्य पूर्व में शांति प्रक्रिया और क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता पर महत्वपूर्ण नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। गौरतलब है अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को विवादित गोलन हाइट्स पर इजरायल की संप्रभुता को मान्यता देने से जुड़ी घोषणा पर हस्ताक्षर किए। इजरायल ने 1967 में इस सीमावर्ती क्षेत्र को सीरिया से छीन लिया था। वाइट हाउस में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ ट्रंप ने कहा कि यह फैसला लेने में काफी समय लग गया। अमरीका के इस क्षेत्र पर इजरायल के नियंत्रण को मान्यता देने से दशकों से इस मुद्दे पर चली आ रही अंतरराष्ट्रीय सर्वसम्मति बाधित हुई है।

सीरिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस कदम पर सीरिया ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। सीरिया ने कहा कि यह कदम उसकी संप्रभुता पर तीखा हमला है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विदेश मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा है कि सीरिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर एक तीखा हमला कर अमरीका के राष्ट्रपति ने सीरिया के गोलन क्षेत्र के विनाश को मान्यता दी है। उन्होंने कहा कि ट्रंप के पास इस कब्जे को जायज ठहराने का अधिकार और कानूनी शक्ति नहीं है।

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ओमान: अमरीकी सेना को बंदरगाह इस्तेमाल करने की इजाजत दी


मस्कत। ओमान ने रविवार को कहा कि उसने अमरीका के साथ एक समझौता कर उसके पोतों और लड़ाकू विमानों को अपने बंदरगाहों और हवाई अड्डों का इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार समझौते की रूपरेखा का मकसद ओमान और अमरीका के बीच सैन्य रिश्तों को मजबूत करना है। गौरतलब है कि ओमान में अमरीका अपना सैन्य बेस बनाना चाहता है। इसकी मदद से वह एशिया में अपना प्रभुत्व कायम करना चाहता है।

सुविधाओं का लाभ लेने की इजाजत

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह समझौता अमरीकी पोतों और विमानों को सल्तनत के कुछ बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर सुविधाओं का लाभ लेने की इजाजत देता है। इनमें खासतौर पर दक्कम बंदरगाह शामिल है। दक्कम बंदरगाह दक्षिणी ओमान में अरब सागर में स्थित है जो होर्मुज जलडमरू मध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से करीब 500 किलोमीटर दूर है। यह जलडमरू मध्य दुनिया भर में ऊर्जा की आपूर्ति के लिए अहम है।


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इज़राइल रॉकेट हमला: तेल अवीव में छह लोग हमले में घायल


येरुशलम। इजरायल के अधिकारियों ने कहा कि गाजा से दागे गए एक रॉकेट ने मध्य इजरायल में एक घर को निशाना बनाया, जिसमें छह लोग घायल हो गए। इजरायली सेना ने कहा कि यह हमला गाजा पट्टी से हुआ है। वह दागे गए रॉकेट की पहचान कर रही है। पुलिस का कहना है कि इस हमले के बाद एक घर में आग लग गई। इसमें करीब छह लोग घायल हो गए।

वाशिंगटन की यात्रा रद्द की

इजरायल में इस समय चुनाव का माहौल है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अगले महीने होने वाले मतदान में पांचवें कार्यकाल के लिए वोट मांगेंगे। रॉकेट हमले के बाद उन्होंने वाशिंगटन की अपनी यात्रा रद्द कर दी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने हमास के खिलाफ जबरदस्त कारवाई का आश्वासन दिया है। सोमवार की घटना की जिम्मेदारी का तत्काल दावा नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि इस हमले की वह कड़ी निंदा करते हैं और इसका करारा जवाब दिया जाएगा। गौरतलब है कि इजरायल और गाजा के खिलाफ बीते एक दशक से काफी तनाव हैं। माना जा रहा है कि यह हमला दोनों देशों के बीच काफी लंबे समय तक लड़ाई छेड़ सकता है।


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सीरिया में आईएसआई के खात्मे पर दुनिया भर में खुशी की लहर, ट्रंप ने आतंक के खिलाफ जंग जारी रखने को कहा


दमिश्क। सीरिया में आतंकी संगठन आईएसआई के सफाए को लेकर पूरी दुनिया ने खुशी जाहिर की है। सभी का कहना है कि आतंकवाद का खात्मा मानवता की भलाई के लिए जरूरी था। गौरतलब है कि सीरिया में अमरीकी समर्थित बलों ने शनिवार को घोषणा की कि उन्होंने सीरिया में इस्लामिक स्टेट के कब्जे वाले क्षेत्र के आखिरी गढ़ को मुक्त करा लिया है। उसने चरमपंथी समूह पर जीत का दावा किया और 2014 में घोषित ख़िलाफ़त का अंत किया। कुर्द नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस द्वारा पूर्वी सीरिया के बघौज गांव पर कब्जा किया गया। कई हफ्तों तक चली इस लड़ाई में हजारों लोग मारे जा चुके हैं।

आईएसआई के खिलाफ जंग जारी रहेगी: अमरीका

इस दौरान अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमरीका सशस्त्र समूह आईएसआई के खिलाफ जंग लड़ता रहेगा, जब तक कि वह अंततः पूरी तरह हार न जाए। ट्रंप ने कहा कि ये कायर फिर से नहीं आएंगे, वे सभी प्रतिष्ठा और शक्ति खो चुके हैं। उन्होंने कहा, वे हारे हुए हैं और हमेशा हारे रहेंगे। इस बीच, सीरिया के राज्य विभाग के अधिकारी विलियम रोएबक ने आईएसआई के निधन को
महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।

पांच साल तक अभियान चलाया

सीरिया को मुक्त कराने के लिए करीब पांच साल तक अभियान चलाया गया। इस दौरान एक लाख से अधिक बमों को हटाया गया। एक दिन पहले, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की कि इस्लामिक स्टेट के आतंकवादी अब सीरिया में किसी भी क्षेत्र पर नियंत्रण नहीं रखते हैं। बघौज में पत्रकारों ने शनिवार को मोर्टार और गोलियों की आवाज सुनने की सूचना दी, जो बघौज की ओर बढ़ रहे थे। इस दौरान हवाई हमले किए गए थे। एसडीएफ के प्रवक्ता कीनो गेब्रियल ने बताया कि बघौज के पास गुफाओं में छिपे हुए आईएस के लड़ाके थे और अभी भी इन पर कार्रवाई जारी थी।

 


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सीरिया में सेनाओं को मिली बड़ी कामयाबी, खत्म हुआ इस्लामिक स्टेट का वजूद


सीरिया। सीरिया में अमरीकी समर्थित बलों ने शनिवार को घोषणा की कि उन्होंने सीरिया में इस्लामिक स्टेट के कब्जे वाले क्षेत्र के आखिरी गढ़ को मुक्त करा लिया है। उसने चरमपंथी समूह पर जीत का दावा किया और 2014 में घोषित ख़िलाफ़त का अंत किया। कुर्द नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस द्वारा पूर्वी सीरिया के बघौज गांव पर कब्जा किया। कई हफ्तों तक चली इस लड़ाई में हजारों लोग मारे जा चुके हैं।

अंतिम गढ़ बघौज़

एसडीएफ के प्रवक्ता मुस्तफा बाली ने कहा कि बघौज आजाद है और आईएस के खिलाफ सैन्य जीत हासिल की गई है। आईएस के अंतिम गढ़ बघौज़ में उग्रवादियों का अंत हो गया है, जो सीरिया और इराक के बड़े हिस्से में फैला है। लेकिन समूह सीरिया और इराक में बिखरी उपस्थिति और स्लीपर सेल बनाए रखता है। मिस्र के सिनाई प्रायद्वीप, अफगानिस्तान और अन्य देशों में आईएस से जुड़े लोगों के लिए खतरा बना हुआ है और समूह की विचारधारा ने तथाकथित लोन-वुल्फ हमलों को प्रेरित किया है।

पांच साल तक अभियान चलाया

सीरिया को मुक्त कराने के लिए करीब पांच साल तक अभियान चलाया गया। इस दौरान एक लाख से अधिक बमों को हटाया गया। एक दिन पहले, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की कि इस्लामिक स्टेट के आतंकवादी अब सीरिया में किसी भी क्षेत्र पर नियंत्रण नहीं रखते हैं। बघौज में पत्रकारों ने शनिवार को मोर्टार और गोलियों की आवाज सुनने की सूचना दी, जो बघौज की ओर बढ़ रहे थे। इस दौरान हवाई हमले किए गए थे। एसडीएफ के प्रवक्ता कीनो गेब्रियल ने बताया कि बघौज के पास गुफाओं में छिपे हुए आईएस के लड़ाके थे और अभी भी इन पर कार्रवाई जारी थी।


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क्राइस्टचर्च हमला: यूएई ने जताया आभार, बुर्ज खलीफा पर लगाई न्यूजीलैंड के पीएम की तस्वीर


रियाद। संयुक्त अरब अमीरात के उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशीद अल मकतूम ने शुक्रवार को क्राइस्टचर्च मस्जिद की गोलीबारी के बाद मुसलमानों के प्रति सहानुभूति के लिए न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न का आभार व्यक्त किया। इस हमले में दो मस्जिदों में कम से कम 50 लोग मारे गए। यूएई ने दुबई में दुनिया की सबसे ऊंची संरचना बुर्ज खलीफा पर न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री की छवि को प्रदर्शित किया है। राशीद अल मकतूम ने मुस्लिम समुदाय का समर्थन करने के लिए धन्यवाद संदेश भेजा।

 

कई मासूमों की मौत हो गई

यूएई के प्रधानमंत्री ने कहा कि वह न्यूजीलैंड के प्रति अभार प्रकट करते हैं। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल घड़ी में मुस्लिम समुदाय के साथ सहानुभूति प्रकट की। इस हमले में कई मासूमों की मौत हो गई। इसे भयावह हमले में नमाज के दौरान श्रद्धालुओं पर अंधाधुंध फायरिंग की गई। इस हमले में बांग्लादेश की क्रिकेट टीम बाल-बाल बची।


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इजरायल के खिलाफ गाजा में हिंसक विरोध प्रदर्शन, दो फिलिस्तीनियों की मौत


गाजा। सीमावर्ती शहर गाजा में फिलिस्तीन और इजराइल के बीच एक बार फिर संघर्ष भड़क उठा है। ताजा संघर्ष में दो फिलिस्तीनियों की मौत हो गई है और कम से कम 3 इजराइली सैनिक भी घायल हो गए है। फिलिस्तीन के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि रुक रुक कर जारी विरोध प्रदर्शनों में 62 फिलिस्तीनी नागरिक अब तक घायल हुए है। ताजा संघर्ष उस समय भड़का जब फिलिस्तीनी झंडे के साथ एक भीड़ में गाजा सिटी के पूर्व में सीमा पर लगाए गए कांटेदार तार की बाड़ पर चढ़ने की कोशिश की।

गाजा में हिंसक विरोध प्रदर्शन

फिलिस्तीनी अधिकारियों के अनुसार गाजा पट्टी में शुक्रवार के विरोध प्रदर्शन के दौरान इजरायली बलों द्वारा दो फिलिस्तीनियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता अशरफ अल-क़िदरा ने कहा कि गाजा पट्टी के पूर्व में इजरायली बाड़ के पास दो पुरुष प्रदर्शनकारियों को गोली मार दी गई। जिहाद हरारा नामक एक नागरिक को गाजा सिटी के पूर्व में गोली मारी गई जबकि केंद्रीय गाजा में अल-ब्यूरिज शरणार्थी शिविर के पास निदाल शाह नामक शख्स को मारा गया।

इजराइल ने किया बचाव

इजरायली सेना ने मौतों पर टिप्पणी नहीं की है, लेकिन कहा कि लगभग 9,500 दंगाई और प्रदर्शनकारी विभिन्न स्थानों पर एकत्र हुए और उन्होंने सैनिकों पर हमला कर दिया।इसके बाद इजराइल की जवाबी कार्रवाई में कुछ लोग घायल हुए। आपको बता दें कि शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने गाजा में नागरिक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इजराइल के अत्यधिक बल प्रयोग की निंदा की। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के चार सप्ताह के सत्र के अंतिम दिन जिनेवा में इजराइल की जवाबदेही पर एक प्रस्ताव पेश किया गया। यह प्रस्ताव पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन की ओर से लाया गया।

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इराक: नौका डूबने से 100 लोगों की मौत, मरने वालों में अधिकांश बच्‍चे और महिलाएं


नई दिल्‍ली। इराक की टिगरिस नदी में एक नौका डूबने से करीब 100 लोगों की मौत हो गई है। मरने वालों में अधिकांश महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। बता दें कि नौका पर 200 से ज्‍यादा लोग सवार थे। दुर्घटना के कारणों का अभी तक पता नहीं लग सका है।

55 लोगों को बचाने में मिली कामयाबी
यह दुर्घटना मोसुल शहर के टिगरिस नदी की है। जानकारी के मुताबिक नौका सवाल 200 लोगों में से किसी को भी तैरना नहीं आता था। ये सभी लोग घूमने के लिए एक टूरिस्ट आइलैंड पर जा रहे थे। इस हादसे में बचाव दल ने 55 लोगों को बचा लिया। मरने वालों में कम से कम 19 बच्चे और 61 महिलाएं शामिल हैं।

चेतावनी पर ध्‍यान न देना पड़ा महंगा
बताया गया है कि अधिकारियों ने पर्यटकों को टिगरिस नदी में जलस्‍तर के बढ़ने को लेकर चेतावनी जारी की थी। अधिकारियों ने पर्यटकों बताया था कि मोसुल बांध का द्वार खुला होने के कारण नदी का जल-स्तर बढ़ गया है। चेतावनी की सूचना को दरकिनार करते हुए नौका चलाने वाले पर्यटकों को घुमाने के लिए टिगरिस नदी में ले गए।


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हेट स्पीच के खिलाफ सऊदी अरब का रवैया सख्त, किंग सलमान की सहयोगी देशों से अपील


दुबई। सऊदी किंग सलमान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हेट स्पीच के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की अपील की है। सऊदी किंग सलमान ने नस्लवादी बयानबाजी को अपराध घोषित करने के लिए दुनिया के कई देशों से अपील की है। सऊदी अरब ने न्यूजीलैंड में दो मस्जिदों पर बीते शुक्रवार को हुए आतंकवादी हमले के मद्देनजर दुनिया भर में ऐसे घृणास्पद भाषणों पर रोक लगाने का आग्रह किया है। आपको बता दें कि इस हमले में 50 लोग मारे गए।

किंग सलमान की अपील

सऊदी किंग ने नफरत भड़काने वालों से सहनशीलता का आग्रह किया। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक के दौरान, किंग सलमान ने नफरत को भड़काने वाले लोगों से सहिष्णु होने की अपील की।उन्होंने कहा कि धर्म शांति बनाए रखने के लिए बने हैं न कि हिंसा के लिए। सऊदी मंत्रिपरिषद ने क्राइस्टचर्च हमले में मारे गए लोगों के परिवारों और न्यूजीलैंड के लोगों और सरकार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। सऊदी प्रेस एजेंसी के एक बयान में सूचना मंत्री तुर्क बिन अब्दुल्ला अल शबाना ने कहा कि कैबिनेट ने आतंकवादी हमले की निंदा दोहराई। इस मीटिंग में बोलते हुए किंग ने कहा, "हम सभी धर्मों के लिएसम्मान को प्रोत्साहित करते हैं, और हम आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले सभी घृणित भाषणों की निंदा करते हैं। हमारी अपील है कि ऐसे लोगों को अपराधी घोषित कर दिया जाए।

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सीरिया में कार बम विस्फोट, फ्री सीरियन आर्मी के कई जवानों की मौत


दमिश्क। सीरिया में एक कार के अंदर जबरदस्त विस्फोट हुआ है । विस्फोट में फ्री सीरियन आर्मी के कई जवानों की मौत हो गई है। पुलिस का कहना है कि हमले को वाईपीजी/ पीकेके आतंकवादियों ने निर्देशित किया होगा। स्थानीय मीडिया सूत्रों ने कहा है कि सीरिया में विद्रोहियों द्वारा नियंत्रित जाराबुलस शहर में बम से लदी एक गाड़ी में विस्फोट हुआ, जिसमें कई सरकारी सेना के कई जवानों की मौत हो गई। सीरिया राज्य मीडिया की खबरों में बताया जा रहा है कि इस हमले में फ्री सीरियन आर्मी के कम से कम 11 जवान मारे गए हैं।

सीरिया में कार बम विस्फोट

वाईपीजी / पीकेके नियंत्रित बलों ने विस्फोटकों से भरी एक कार में ब्लास्ट कर दिया। बताया जा रहा है कि विस्फोट रिमोट के द्वारा किया गया।विस्फोट उस समय हुआ जब तुर्की समर्थित फ्री सीरियन आर्मी जाराबुलस शहर की ओर बढ़ रही थी। जिस समय यह हादसा हुआ सीरियन आर्मी यूफ्रेट्स शील्ड ऑपरेशन क्षेत्र में थी। सुरक्षा इकाइयों ने समाचार एजेंसी अनादोलु को बताया कि हमले की संभावना पहले से जताई जा रही थी क्योंकि इस इलाके में पहले से कई आतंकवादी संगठन सक्रिय थे। आपको बता दें कि 2016 में तुर्की के नेतृत्व वाले ऑपरेशन यूफ्रेट्स शील्ड के हिस्से के रूप में जाराबुलस को आतंकवादियों से मुक्त करा लिया गया था।

सीरिया में हिंसा का दौर

2016 के बाद से उत्तर-पश्चिमी सीरिया में सरकारी सेना और विद्रोहियों के बीच हिंसा का दौर जारी है। तुर्की के यूफ्रेट्स शील्ड और ओलिव में वाईपीजी आतंकवादियों के साथ कई झड़पों के बाद सरकारी बलों ने इस इलाके को अपने कब्जे में ले लिया। इस इलाके का कब्ज़ा मिलने के बाद सीरिया के इस इलाके में अब लोगों का वापस आना शुरू हो गया है। विस्फोट की ताजा घटना के बाद अब इस बात पर एक बार फिर अटकलें लगने लगी हैं कि क्या इस इलाके को फिर से आबाद किया जा सकेगा।

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कुर्द विद्रोहियों के खिलाफ एकजुट हुए तुर्की और ईरान, हवाई और जमीनी हमले शुरू


तेहरान। कुर्द विद्रोहियों के खिलाफ तुर्की और ईरान एकजुट हो गए हैं। तुर्की और ईरान में सोमवार देर शाम एक संयुक्त अभियान की घोषणा की। तुर्की के आंतरिक मंत्री का कहना है कि तुर्की और ईरान ने 'कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी' के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाने का फैसला किया है।

एकजुट हुए तुर्की और ईरान

तुर्की और ईरान ने तुर्की की पूर्वी सीमा पर कुर्द विद्रोहियों के खिलाफ एक संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया है। तुर्की के आंतरिक मंत्री सुलेमान सोयलू ने कहा कि सोमवार को इस अभियान का पहला चरण शुरू हुआ जिसमें कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) के ठिकानों को निशाना बनाया। सुलेमान सोयलू ने कहा, "सुबह 8:00 बजे तक हमने अपनी पूर्वी सीमा पर कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) के ठिकानों को निशाना बनाने के उद्देश्य से एक ऑपरेशन शुरू किया।" आपको बता दें कि इससे पहले भी तुर्की ने 6 मार्च को सुनियोजित हमले की बात कही थी। इसके विपरीत ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी इरना ने कहा कि ईरानी सेना इस आक्रामक अभियान में शामिल नहीं थीं।

संयुक्त अभियान शुरू

आपको बता दें कि कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) को कई देश आतंकी समूह की संज्ञा देते हैं। अंकारा और कई पश्चिमी देशों द्वारा "आतंकवादी संगठन" माने जाने वाला पीकेके खाड़ी देशों के कुर्द अल्पसंख्यकों के लिए स्वायत्तता की मांग करता है। पीकेके ने तीन दशकों से अधिक समय तक तुर्की राज्य का मुकाबला किया है। इस संघर्ष में अब तक हजारों लोग मारे गए हैं। यह समूह तुर्की और उत्तरी इराक में अपने बैनर के तहत काम करता है, और सीरिया में पीपुल्स प्रोटेक्शन यूनिट्स के रूप में। आपको बता दें कि पीकेके और अंकारा के बीच शांति वार्ता 2015 में बंद हो गई थी। अंकारा ने रूस के साथ-साथ सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद के मुख्य समर्थक ईरान को भी कुर्दों के खिलाफ कार्रवाई को राजी कर लिया है।

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यमन: हौथी विद्रोहियों का खुलासा, अगर यूएन बीच में नहीं आता तो इस्तेमाल करते यह खतरनाक मिसाइल


अदन। यमन के हौथी समूह ने कहा कि वे अपनी बैलिस्टिक क्षमताओं का निर्माण कर रहे थे और उनकी सेना रियाद और अबू धाबी पर हमला करने के लिए तैयार थी। मगर बंदरगाह शहर होदेइडा में एक यूएन शांति सौदा लागू किया गया। इसके बाद उन्हें पीछे हटना पड़ा। हौथी सेना के एक प्रवक्ता याहा सरिया ने मीडिया से बातचीत में कहा कि समूह के पास मिसाइलों का भंडार है और समूह सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को भी टक्कर दे सकता है। उन्होंने कहा कि हौथी के पास खुफिया जानकारी थी कि दुश्मन होदेइदाह पर कब्जा करने की तैयारी कर रहा था। इस दौरान वह किसी भी मुसीबत से लड़ने को तैयार थे। सरिया ने कहा कि बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन को रणनीतिक विकल्प बनाया गया था। ताकि सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन के हवाई हमलों का जवाब दिया जा सके।

यूएन से चाहता है अधिक गारंटी

सऊदी-नीत गठबंधन ने हौथी के साथ समझौते पर पिछले दिसंबर में स्टॉकहोम में हस्ताक्षर किए थे। हौथी का आरोप है कि सऊदी ने इस समझौते को तोड़ दिया है। वे शांति योजना के पहले चरण होदेइदाह के बंदरगाह से हटने में विफल रहे। हौथी का कहना है कि वे यूएन से अधिक गारंटी चाहते हैं कि दूसरा पक्ष उनकी वापसी का फायदा नहीं उठाएगा। दोनों पक्ष होदेइदाह में युद्ध विराम और सेना की वापसी पर सहमत हो गए हैं, कैदियों की अदला-बदली और मानवीय गलियारों को फिर से खोलने के लिए भी राजी है।


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ईरान: अमरीकी नौसेना अधिकारी को जानकारी सार्वजनिक करने पर मिली दस साल की सजा


वाशिंगटन। अमरीकी नौसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी को अपने देश के नेता का अपमान करने और निजी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करने के लिए ईरानी जेल में 10 साल की सजा सुनाई गई है। माइकल वाइट को बीते साल जुलाई में कथित तौर पर मशहद शहर में एक ईरानी महिला से मिलने के दौरान गिरफ्तार किया गया था। ईरान ने जनवरी में गिरफ्तारी की पुष्टि की थी।

कहीं आरोप राजनीति से प्रेरित तो नहीं

शनिवार को वकील मार्क ज़ैद ने कहा कि वाइट को सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनी का अपमान करने के लिए दो साल और एक तस्वीर पोस्ट करने के लिए 10 साल की सजा सुनाई गई थी। ईरानी अधिकारियों ने आरोपों का विवरण जारी नहीं किया है। अधिकारी का परिवार और विदेश विभाग अभी भी यह निर्धारित करने की कोशिश कर रहे थे कि क्या आरोप राजनीति से प्रेरित थे या एक आपराधिक अभियोजन के परिणाम थे। वाइट, डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद के दौरान गिरफ्तार होने वाला पहला अमरीकी नागरिक है।


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सीरिया: 8 साल के युद्ध में 3 लाख से अधिक लोगों की मौत, ताजा आंकड़ों से सामने आई बदहाली की तस्वीर


बेरुत। सीरिया में आठ साल के युद्ध में 1,12000 नागरिकों सहित 3 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार मृतकों में 21,000 से अधिक बच्चे और 13,000 महिलाएं थीं। आपको बता दें कि 15 मार्च, 2011 को दक्षिणी शहर दारा में अभूतपूर्व सरकार विरोधी प्रदर्शन के बाद सीरिया में संघर्ष भड़क गया। उसके बाद पूरे सीरिया में प्रदर्शन फैल गए और इसे क्रूरता से दबाने की कोशिशों के बीच विदेशी शक्तियों और उग्रवादी समूहों में सशस्त्र संघर्ष शुरू गया।

युद्ध के खौफनाक आंकड़े

ब्रिटेन स्थित सीरियन ऑब्जर्वेटरी ने सितंम्बर में कुल मृतकों की संख्या 360,000 के आसपास अनुमानित की थी। निगरानी समूह ने कहा कि मरने वालों में सीरिया विद्रोहियों और सरकारी सैनिकों की संख्या 1,25000 से अधिक है। इसमें विद्रोहियों और कुर्द लड़ाकों की संख्या लगभग 67,000 है। हमले में लगभग 66,000 जिहादी मारे गए हैं जो मुख्य रूप से इस्लामिक स्टेट (आईएस) समूह और हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) जैसे अल-कायदा के सहयोगी संगठनों के सदस्य हैं।

बदहाल है सीरिया

रूस और ईरान जैसे शक्तिशाली सहयोगियों के समर्थन से राष्ट्रपति बशर अल असद ने राजनीतिक अस्तित्व की अपनी लड़ाई जीत ली है, लेकिन देश खंडित है और बदहाल हालात में है। बड़े पैमाने पर रूसी हस्तक्षेप के बाद असद अब सीरिया के क्षेत्र के लगभग दो-तिहाई हिस्से को नियंत्रित कर रहे है, लेकिन अब भी प्रमुख क्षेत्र उनके शासन के नियंत्रण में नहीं हैं।इसमें कुर्द नेतृत्व वाले लड़ाकों द्वारा रखे गए तेल-समृद्ध उत्तर-पूर्व का इलाका भी शामिल है।

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इजराइल और हमास में भड़का संघर्ष, रॉकेट अटैक के जवाब में गाजा पट्टी पर हवाई हमला


तेल अवीव। मध्य-पूर्व में एक बार फिर से संघर्ष भड़क उठा है। इजराइल ने तेल अवीव पर हुए रॉकेट हमलों के बाद गाजा पट्टी पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। तेल अवीव शहर पर रॉकेट हमले के जवाब में शुक्रवार तड़के इजराइली युद्धक विमानों ने दक्षिणी गाजा पट्टी में आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया। इसके बाद दोनों पक्ष हिंसा के एक नए दौर में पहुंच गए हैं। रॉकेट हमले के बाद इजराइल सैन्य गार्डस ने जमीन पर मोर्चा संभाल लिया। 2014 के युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब इजराइल ने हवाई हमलों का सहारा लिया है। इजराइल के मुख्य सैन्य प्रवक्ता जनरल रोनेन मैनेलिस ने कहा कि सेना को गुरुवार की रात कई रॉकेट हमलों की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि अधिकारी अभी भी यह निर्धारित करने की कोशिश कर रहे हैं कि कितने रॉकेट दागे गए है। आपको बता दें कि हमास के पास रॉकेटों और मिसाइलों का एक बड़ा शस्त्रागार है।

गाजा पट्टी पर हवाई हमला

गुरुवार देर रात तेल अवीव को रॉकेट से निशाना बनाया गया । हालांकि हमले से कोई क्षति नहीं हुई, लेकिन इसके बाद इजराइल और हमास के बीच संघर्ष विराम टूट गया। हालांकि हमास ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, जबकि इजराइल का दावा है कि हमले हमास ने ही किए हैं। इस ताजा घटना ने हमास और इजराइल के बीच एक नए संकट को जन्म दिया है।प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सैन्य प्रमुख और अन्य शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ एक आपातकालीन बैठक बुलाई। इसके कुछ ही समय बाद इजरायली युद्धक विमानों ने दक्षिणी और मध्य गाजा में हमास के ठिकानों पर हमला किया। विस्फोट इतने शक्तिशाली थे कि कुछ हमलों से गाजा पट्टी से 15 मील दूर गाजा सिटी में भी इसका धुआं देखा जा सकता था। इजराइल के युद्धक विमानों को गाजा सिटी के ऊपर आसमान में घूमते हुए देखा जा सकता है।

तेल अवीव पर रॉकेट हमले का जवाब

इजराइली सेना ने कहा है कि वह गाजा में "आतंकी साइटों" को निशाना बना रही है। इससे अधिक उसने कोई और जानकारी नहीं दी है। उधर फिलिस्तीनी मीडिया ने कहा कि सत्तारूढ़ हमास समूह के नौसैनिक ठिकानों पर हमला हुआ है। फिलहाल हताहतों के बारे में तत्काल कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। बता दें कि इजराइल और हमास के बीच लम्बे समय से दुश्मनी है। दोनों ने तीन युद्ध लड़े हैं। 2007 में इस्लामिक आतंकवादी समूह ने गाजा पर कब्जा कर लिया था। बता दें कि इजराइल और हमास के बीच आखिरी लड़ाई और हमास ने अपना आखिरी युद्ध 2014 में लड़ा था। उसके बाद तब छोटे-छोटे झगड़े छिटपुट रूप से होते रहे है। गौरतलब है कि इजराइल में एक महीने से भी कम समय में राष्ट्रीय चुनाव होने वाले है। नेतन्याहू को एक बार फिर वहां की सत्ता संभालने की उम्मीद है, लेकिन हमास के उग्रवादियों के खिलाफ अप्रभावी रहने पर उन्हें विरोधियों की भारी आलोचना का सामना करना पड़ा सकता है। उधर हमास ने गाजा में शुरू हुई कठोर परिस्थितियों के लिए इजराइल की सार्वजनिक आलोचना की है।

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खशोगी की आड़ में अमरीका ने साधा निशाना, सऊदी अरब पर मानवाधिकार उल्‍लंघन का आरोप


नई दिल्‍ली। दुनिया भर के देशों में मानवाधिकारों को लेकर जारी अमरीकी वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि सऊदी अरब में बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों का उल्‍लंघन जारी है। कांग्रेस की इस रिपोर्ट में सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी की हत्‍या में सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्‍मद बिन सुल्‍तान (एमबीएस) की भूमिका को स्‍वीकार किया है। अमरीकी कांग्रेस ने माना है कि खगोशी की हत्‍या कराने में एमबीएस का हाथ था।

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खशोगी शाही शासन के खिलाफ लिखते थे कॉलम
रिपोर्ट में खाशोगी के बारे में कहा गया है कि वो वर्जीनिया में स्‍व निर्वासित जीवन जी रहे थे। उन्‍होंने सऊदी क्राउन प्रिंस एमबीएस और शाही शासन के खिलाफ वाशिंगटन पोस्‍ट में कुछ कॉलम लिखे थे। अक्‍टूबर में उनकी हत्‍या की वजह से ही अमरीका और सऊदी अरब में मतभेद को बढ़ावा मिला था। इसके अलावा कम से कम 20 प्रमुख महिला एक्टिविस्‍ट की गिरफ्तारी, अहिंसक अपराधों के लिए फांसी, कैदियों को जबरन गायब करना और अत्‍याचार करना जैसे मानवाधिकारों के उल्‍लंघन का रिपोर्ट में जिक्र है।

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पहली बार महिलाओं को मिला चुनाव लड़ने का अधिकार
रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि शाही नियम पहले की तुलना में कम सख्‍त हैं। कुछ मामलों में नरम रवैया भी शाही शासन ने अख्तियार किया है। पहली बार महिलाओं को मत देने और स्‍थानीय निकायों में बतौर प्रत्‍याशी चुनाव लड़ने का अधिकार दिया गया है।

शाही शासन रिपोर्ट को तथ्‍यहीन बताया
हालांकि सऊद अरब की सरकार ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है। शाही शासन ने बताया है कि कुछ मामलों में कांग्रेस की रिपोर्ट तथ्‍यों पर आधारित नहीं है।

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मध्‍य पूर्व में अहम साथी
दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन का रुख जमाल खशोगी व शाही शासन के सख्‍त रवैये को लेकर नरम है। ट्रंप प्रशासन सऊदी सरकार के खिलाफ सख्‍त कदम नहीं उठाना चाहता है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि सऊदी अरब मध्‍य पूर्व में अमरीका का महत्‍वपूर्ण साथी है। इसलिए मामले को तूल देना अमरीकी हित में नहीं है।


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ईरान: सर्वोच्च नेता का अपमान करने की सजा, महिला वकील को 38 साल की जेल


तेहरान। ईरान में एक महिला मानवाधिकार कार्यकर्ता को सर्वोच्च नेता का अपमान करने की अनोखी सजा दी गई है। ईरानी मानवाधिकार वकील नसरीन सोतौदेह को 38 साल जेल और 148 कोड़े मारने की सजा सुनाई गई है। उनके परिवार ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस बात की जानकरी दी है। अगर जेल के दौरान सोतौदेह का व्यवहार ठीक नहीं रहा तो उन्हें 10 साल की अतिरिक्त जेल का सामना करना पड़ सकता है। इस समय सोतौदेह जेल में बंद हैं। ईरान की इस मानवाधिकार वकील के पति को भी छह साल की सजा दी गई है।

महिला को 38 साल की जेल

ईरान में एक महिला मानवाधिकार कार्यकर्ता नसरीन सोतौदेह को 38 साल जेल की सजा सुनाई गई है। उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ अपराध करने ईरान के सर्वोच्च नेता का अपमान करने के लिए दोषी ठहराया गया था। आपको बता दें कि नसरीन सोतौदेह मानवाधिकार रक्षकों, असंतुष्टों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रसिद्ध हैं। यह देश में नकाब अनिवार्य किए जाने के खिलाफ आंदोलन चला चुकी हैं। सोतौदेह के पति रेजा खानदान ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि उन्हें मूलतः 33 साल की जेल और 148 कोड़े मारने की सजा सुनाई गई है। लेकिन वह पांच साल जेल की सजा पहले ही भुगत रही हैं इसलिए कुल सजा अब 38 साल की है।

सजा पर उठे सवाल

राज्य मीडिया ने इस मामले में जज मोहम्मद मोघिसे का हवाला देते हुए कहा कि सोतौदेह को सात साल जेल की सजा सुनाई गई है। हालांकि इस बाबत आ रही रिपोर्टों से यह बात गलत साबित हो रही है। इस बीच एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ईरानी मानवाधिकार वकील को सजा देने के फैसले की निंदा की। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपने बयान में कहा, "नैशिन सोतौदेह ने अपना जीवन महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने और मौत की सजा के खिलाफ बोलने के लिए समर्पित किया है। यह पूरी तरह से अपमानजनक है कि ईरान के अधिकारी मानवाधिकारों के काम के लिए उन्हें दंडित कर रहे हैं।" आपको बता दें कि पिछले जून में सोतौदेह को तेहरान में गिरफ्तार किया गया था। 2010 में उन्हें कई आरोपों में 11 साल जेल की सजा सुनाई गई थी।

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8 वर्षों बाद पिछड़ा भारत, सऊदी अरब बना हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार


रियाद । 8 वर्षों के बाद सऊदी अरब ने भारत को हथियारों के सबसे बड़े आयातक के रूप में विस्थापित कर दिया है। स्वीडिश थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसारभारत 2014-18 में प्रमुख हथियारों का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार था। विश्व में हथियारों की बिक्री का कुल 9।5 प्रतिशत हिस्सा भारत को जाता है। यह मूल्यांकन पांच साल की अवधि (2014-2018) के लिए किया गया। इससे पहले की अवधि के लिए भारत पहले नंबर पर था। उस समय हथियारों की खरीद में इसका हिस्सा 13 प्रतिशत था।

सऊदी बना हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार

2009-13 और 2014-18 के बीच भारत के आयात में 24 प्रतिशत की कमी आई है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से लाइसेंस के तहत उत्पादित हथियारों की डिलीवरी में देरी के कारण भारत की रैंकिंग में गिरावट आई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की स्थिति दुनिया के कई देशों से बेहतर है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पांच साल की ब्लॉक अवधि (2011-2015) में पांच सबसे बड़े निर्यातक अमरीका, रूस, फ्रांस, जर्मनी और चीन थे। बताया गया है कि अमरीका और रूस अब तक के सबसे बड़े निर्यातकों में से हैं। हथियारों के कुल वैश्विक व्यापार में इनका हिस्सा क्रमशः 36 फीसदी और 21 फीसदी का है।

तेजी से पांव पसार रहा है चीन

रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि चीन जो अब हथियारों का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है, अपने हथियार बेचने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश का सहारा ले रहा है। इन दोनों देशों का 2014-2018 से बीजिंग के हथियार निर्यात में 53 प्रतिशत हिस्सा था। चीन ने बड़ी मात्रा में हथियार मंगाए भी हैं। एसआईपीआरआई रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के वर्षों में चीन की स्वदेशी हथियारों की उत्पादन क्षमताओं में तेजी से विकास हुआ है। इसके बावजूद चीन 2014-18 में दुनिया का छठा सबसे बड़ा हथियार आयातक था।

पाकिस्तान को नहीं मिल रहे हथियार

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2009-13 की तुलना में 2014-18 में हथियारों के आयात में पाकिस्तान ने 39% की गिरावट दर्ज की है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि अमरीका, पाक को सैन्य सहायता प्रदान करने या हथियार बेचना कम कर दिया है।हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है, "पाकिस्तान में अमरीकी हथियारों का निर्यात गिर गया है। पाकिस्तान ने इसके बजाय अन्य आपूर्तिकर्ताओं की ओर रुख किया है। उदाहरण के लिए, 2018 में उसने तुर्की से चार फ्रिगेट और 30 लड़ाकू हेलीकॉप्टरों का ऑर्डर दिया। इसके अलावा पाकिस्तान, चीन से हथियार खरीदने लगा है।"


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अमरीका समर्थित सीरियाई सेना ने इस्‍लामिक स्‍टेट के आखिरी गढ़ पर बोला हमला


नई दिल्‍ली। अमरीका समर्थित सीरियाई सेना ने पूर्वी सीरिया में इस्लामिक स्टेट के कब्जे वाले आखिरी गढ़ पर भी हमला बोल दिया है। शुरुआती हमले के बाद पश्चिम समर्थित लड़कों को बघौज गांव केे इस कैंप में प्रवेश करने मेें सफलता मिली हैैै। यह इलाका बहुत बड़ा है। जानकारों का कहना है कि काफी संख्या में कट्टर जिहादी लड़ाके इस इलाके में हो सकते हैं।

बघौज को खलीफा से मुक्‍त करना हमारा मकसद
अमरीका समर्थित सेना की ओर से कहा गया है कि कुछ दिनों से यहां पर किसी तरह की हलचल नहीं दिखाई दी है। यही वजह है कि आईएस के इस अंतिम ठिकाने पर हमला बोलने के लिए हमें विवश होना पड़ा । बता दें कि इस हमले का मकसद पूर्वी सीरिया के इस क्षेत्र में स्‍व घोषित खलीफा की पकड़ को समाप्‍त करना है। बताया जाता है कि इस स्‍व-घोषित खलीफा ने सीरिया और इराक के एक-तिहाई क्षेत्र में कब्‍जा जमा लिया था।

गढ़ को मुक्‍त कराने तक जारी रहेगा संघर्ष
सीरियन डेमोक्रैटिक फोर्सेज (एसडीएफ) के प्रवक्ता मुस्तफा बाली ने कहा है कि उनके लड़ाके सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गठबंधन सेनाओं ने इस्लामिक स्टेट के ठिकानों पर टैकों से भी हमला किया। बड़ी संख्या में आतंकवादियों की मौत हुई है। मुस्‍तफा बाली ने बताया है कि ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा जब तक बघौज को आतंकवादियों से मुक्त नहीं करा लिया जाता। माना जा रहा है कि इस इलाके में बड़ी संख्या में इस्लामिक स्टेट समूह के लड़ाके हो सकते हैं जो घेराबंदी करके बैठे पश्चिम समर्थित लड़ाकों को कड़ी टक्कर दे सकते हैं।


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