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डिस्कॉम के भुगतान में देरी से 3 लाख करोड़ रुपए के निजी निवेश पर खतरा, भाजपा शासित राज्यों पर सबसे अधिक बकाया


नई दिल्ली। कई राज्यों द्वारा महीनों से बिजली भुगतान नहीं करने के बाद अब एक दर्जन से भी अधिक बिजली संयंत्रों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इन एक दर्जन से भी अधिक संयंत्रों पर 3 लाख करोड़ रुपए का निजी निवेश पर अब जोखिम बढ़ गया है। इन बिजली संयंत्रों की प्राप्ति पोर्टल के मुताबिक, जीएमआर और अडानी समूह की कंपनियों के अतिरिक्त सार्वजनिक क्षेत्र की एनटीपीसी को दिसंबर 2018 तक राज्यों को बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) से 41,730 करोड़ रुपए की वसूली करनी थी।


भाजपा शासित राज्यों में सबसे अधिक बकाया

करीब 42 हजार करोड़ रुपए का यह बकाया अब बढ़कर 60 हजार करोड़ रुपए का हो गया है। इनमें आधी से भी अधिक रकम स्वतंत्र उत्पादक इकाइयों को वसूलनी है। सभी राज्यों में सबसे अधिक बकाया उत्तर प्रदेश (6,497 करोड़ रुपए) और महाराष्ट्र (6,179 करोड़ रुपए) का है। ये दोनों राज्य भारतीय जनता पार्टी शासित प्रदेश हैं। अन्य राज्य भी बिजली उत्पादक कपंनियों को समय पर भुगतान नहीं कर रहे हैं। इन राज्यों में तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पंजाब शामिल हैं।


निजी कंपनियों को भुगतना पड़ रहा है खामियाजा

पोर्टल से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश अपने बकाये को चुकाने के लिए 544 दिन का समय लेता है वहीं महाराष्ट्र इसके लिए करीब 580 दिन का समय लेता है। पोर्टल पर दी गई जानकारी से पता चलता है कि महाराष्ट्र और तमिलनाडु पर पूरे बकाए का कुल 80 फीसदी रकम बकाया है। ये दोनों राज्य बिजली के सबसे प्रमुख उपभोक्ता हैं। टॉप 10 राज्यों की बात करें तो ये भुगतान के लिए 562 दिन का समय लेते हैं। सूत्रों ने कहा कि भुगतान में देरी की वजह से निजी क्षेत्र की बिजली कंपनियों के समक्ष कार्यशैली पूंजी का संकट पैदा हो रहा है।


किन कंपनियों का कितना बकाया

उत्तर प्रदेश की डिस्कॉम द्वारा 2,185 करोड़ रुपए के बिजली भुगतान न होने के कारण बजाज समूह की स्वामित्व वाली ललितपुट पावर जेनरेशन कंपनी अपने तीन हजार कर्मचारियों का भुगतान नहीं कर पा रही है। कंपनी के लिए एक बड़ी समस्या यह भी रही है कि वो पर्याप्त मात्रा में कोयले का भंडारण रखने में विफल रही है। दिसंबर 2018 तक, कुल 41,730 करोड़ रुपए के बकाए में अडानी समूह को 7,433.47 करोड़ रुपए और जीएमआर को 1,788.18 करोड़ रुपए का बकाया है। वहीं अन्य कंपनियों में सेम्बकॉर्प को 1,497.07 करोड़ रुपए और एनटीपीसी को 17,187 करोड़ रुपए का भुगतान करना है।

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कर्नाटक ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने आेला को दिया सोमवार तक का समय, नियमों के उल्लंघन पर मांगा जवाब


नर्इ दिल्ली। टैक्सी एग्रीगेटर ओला को नियमों का पालन करने के लिए कर्नाटक परिवहन विभाग ने सोमवार तक का समय दिया है और शहर में अवैध रूप से चल रही बाइक टैक्सियों के लिए अपने लाइसेंस को निलंबित करने के आदेश पर जवाब देने को कहा है। 18 मार्च के आदेश के अनुसार, ओला को निर्देश दिया गया था कि वह तुरंत अपनी सेवाएं बंद करे और आदेश मिलने के तीन दिनों के भीतर संबंधित प्राधिकरण को लाइसेंस सरेंडर करे। आपको बता दें कि शनिवार को भी ओला सेवाएं सामान्य रूप से चल रही थीं।

परिवहन आयुक्त वीपी इक्केरी ने द हिंदू के हवाले से कहा कि विभाग कैब एग्रीगेटर की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। एग्रीगेटर को शुक्रवार को आदेश मिला था और उन्हें नियमों का पालन करने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। विभाग ने एग्रीगेटर्स के नियमों के पालन के लिए आदेश जारी किया था और नियमों के अनुपालन के आधार पर इसे किसी भी समय रद्द किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विभाग कठोर कार्रवाई करने से पहले सभी कानूनी विकल्पों का पता लगाएगा, क्योंकि अदालत के सामने इस पर सवाल उठाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि ओला के पास सीधे स्वामित्व वाली कैब का एक छोटा बेड़ा है, जबकि अधिकांश टैक्सी ड्राइवरों के माध्मय से एक एमओयू के माध्यम से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा, 'हमें कोई कार्रवाई करने से पहले उनकी आजीविका पर विचार करना होगा क्योंकि इसका उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ेगा। हालांकि, हम एग्रीगेटर्स के प्रति किसी प्रकार की ढिलाई नहीं दिखा रहे हैं। '

5 मार्च को विभाग ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। आयुक्त ने कहा, “पिछले नोटिस का जवाब देते हुए, ओला ने कहा था कि उन्होंने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शहर में बाइक-टैक्सी सेवा शुरू की थी। उनका जवाब संतोषजनक नहीं था।

उन्होंने बिना किसी कानूनी मंजूरी के सेवा शुरू की थी।” विभाग ने फरवरी में ओला की लगभग 260 बाइक टैक्सियों को लगाया था। गुरुवार को, राज्य परिवहन प्राधिकरण, परिवहन आयुक्त के आदेश के आधार पर, राज्य में आरटीओ को नियमों को लागू करने और ओला कैब सेवा को रोकने के लिए कार्रवाई करने का निर्देश दिया।


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मिराज सिनेमा करेगी 200 करोड़ रुपए का निवेश, 90 स्क्रीन जोड़ने की है योजना


नर्इ दिल्ली। मल्टीप्लेक्स संचालित करने वाली कंपनी मिराज सिनेमा ने पूरे देश में अपनी पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए चालू वित्त वर्ष में 200 करोड़ रुपए के निवेश से स्क्रीन की संख्या बढ़ाकर 200 करने की योजना बनार्इ है।

कंपनी के प्रबंध निदेशक अमित शर्मा ने कहा कि अभी उनकी कंपनीे के पास 110 स्क्रीन है और वर्ष 2019-20 में 90 स्क्रीन जोड़ने की योजना है। इस पर 200 करोड़ रुपए का निवेश किया जायेगा। चालू वर्ष में 50 से 60 स्क्रीन जोड़ने का काम जारी है।

उन्होंने कहा कि महानगरों के साथ ही छोटे शहरों में भी उनकी कंपनी की पहुंच बढ़ी है। टियर 2 और टियर 3 शहरों में भी उनके स्क्रीन है। बड़े महानगरों में प्रीमियम ब्रांड मिराज मैक्सिमम शुरू किए गए हैं। देश के 14 राज्यों में 40 मल्टीप्लेक्स है जिसमें 110 स्क्रीन है।

शर्मा ने कहा कि दिल्ली एनसीआर में मिराज मैक्सिमम का सबसे बड़ा 86 फुट चौड़ा स्क्रीन शुरू किया गया है जहां फिल्म देखने का अनुभव एकदम अलग होता है। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हैदराबाद में कंपनी के 40 स्क्रीन है। केरल में भी विस्तार योजना चल रही है और बिहार में प्रवेश करने की तैयारी है।


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जेट एयरवेज की वजह से एक महीने में घट गई 13 लाख सीटें, यात्रियों के लिए बढ़ी मुश्किलें


नई दिल्ली। पिछले एक महीने में एयरलाइन इंडस्ट्री में में काफी उथल पुथल मची हुई है। जबसे इथोपियन एयरलाइन का बोइंग विमान क्रैश हुआ है, जब से वो दिक्कतें और भी ज्यादा बढ़ गई हैं। आंकड़ों की मानें तो जेट एयरवेज द्वारा विमान सेवा हटा लेने से करीब एक महीने में 13 लाख सीटें कम हो गई हैं। जिससे यात्रियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। जिससे दुनिया में भारत की छवि को काफी चोट भी पहुंची है। क्योंकि घरेलू उड़ानों के मामले में भारत का बाजार काफी तेजी से आगे बढ़ रहा था। आंकड़ों की मानें तो फरवरी महीने में घरेलू उड़ानों की सीटें 1 करोड़ 47 लाख से घटकर 1 करोड़ 34 लाख रह गईं हैं। जिसकी सबसे बड़ी वजह जेट एयरवेज को माना जा रहा है।

इन एयरलाइन ने भी दिया झटका
जेट एयरवेज के अलावा देश बाकी एयरलाइंस की ओर से सीटें कम हुई हैं। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो भी मौजूदा समय में पायलटों की किल्लत से परेशान है। जिसका असर सीटों की कैपेसिटी पर पड़ रहा है। कंपनी ने पायलटों की कमी की वजह से रोजाना 1,300 में से 30 उड़ानें कम करने की घोषणा की हुई है। स्पाइसजेट ने अपने बोइंग 737 मैक्स विमानों को सेवा से हटा लिया। जिसकी वजह से सीटें पर असर पड़ा है। इससे पहले किंगफिशर के 69 विमानों के सेवा में हटने से सीटें कम होने की बात सामने आई थी। खास बात ये है कि उस वक्त के मुकाबले मौजूदा समय में सीटें ज्यादा कम हुई हैं। वहीं मौजूदा समय में जेट एयरवेज के 84 और स्पाइस जेट के 12 बोइंग विमान सेवा से बाहर हुए हैं।

इतना बढ़ गया किराया
जेट और स्पाइसजेट के विमानों के हटने से सीटों में 13 लाख तक की कमी आई है। जिसकी वजह से घरेलू उड़ानों का किराया 35 फीसदी से 100 फीसदी तक बढ़ गया है। जानकारों की मानें तो मौजूदा समय में जितनी सीटें कम हुई हैं उससे देश में बवाल मच जाना चाहिए था। लेकिन ऑफ सीजन होने के कारण माहौल थोड़ा ठीक है। लेकिन आने वाले दिनों में समर वैकेशंस पर लोगों के प्लान कैंसल हो सकते हैं। ऐसे में सरकार को जल्द ही जरूरी कदम उठाने पड़ेंगे। क्योंकि आने वाले दिनों में ऐसे ही हालात बने रहे तो बिजी रूट्स पर किराया 100 फीसदी से ज्यादा तक किराया बढ़ सकता है।


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चीनी फिल्म बाजार के 'दंगल' में भारतीय फिल्में बनी 'सुल्तान', करती हैं इतनी कमाई


नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों से देश में चीन को लेकर काफी गुस्सा है। चीन ने मसूद अहजर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के विरोध में अपना वीटो पॉवर का इस्तेमाल कर जता दिया कि वो भारत के नहीं बल्कि आतंक का साथ देने वाले मसूद अजहर के साथ है। जिसके बाद देश के व्यापारियों ने चीनी सामान का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है। लेकिन क्या आपको इस बात की जानकारी है कि अब चीन भी भारत के सबसे बड़े बाजारों में शुमार हो गया है। भारत की इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री ने पिछले तीन सालों में चीन में अपना वर्चस्व सा कायम कर लिया है। आज भारतीय फिल्में चीनी फिल्मों को टक्कर दे रही हैं। खास बात ये है कि 2018 में पूरी दुनिया में जिनती कमाई की उससे 600 करोड़ रुपए ज्यादा अकेले चीन में की है। आपको बता दें कि वर्ष 2018 में भारत में सभी भाषाओं की लगभग 1776 फिल्में बनी हैं, जिन्होंने लगभग 7 लाख करोड़ रुपयों की कमाई की है। इन फिल्मों के एक्सपोर्ट से इंडिसन फिल्म इंडस्ट्री को मौजूदा समय से जिस देश से सबसे ज्यादा कमाई हो रही हैं वो चीन है।

चीन में पिछले तीन सालों में इतनी रिलीज हुई भारतीय फिल्में
- 2016 में चीन में कुल 2 बॉलिवुड फिल्में रिलीज हुई थीं।
- 2017 में केवल एक ही फिल्म रिलीज हुई
- 2018 में चीन में बॉलिवुड की लोकप्रियता बढऩे से फिल्मों की संख्या बढ़कर 10 हो गई।
- चीन में सरकार की विदेशी फिल्मों के लिए पॉलिसी काफी सख्त हैं।
- 2018 में भातीय फिल्मों ने चीन में 1800 करोड़ रुपए का बिजनस किया है।
- दुनिया के बाकी हिस्सों में भारतीय फिल्मों ने मात्र 1200 करोड़ रुपये का बिजनस किया है।
- साल 2018 में बॉलिवुड की 60 फीसदी कमाई में केवल चीन का कमाल है।
- आमिर खान की 'दंगल' ने भारत में 300 करोड़ और चीन में 1300 करोड़ रुपए की कमाई की।

भारतीय फिल्मों का विदेशी बाजार बढ़ा
भारतीय फिल्मों का विदेशी बाजार लगातार बढ़ रहा है। अगर बात 2018 की करें तो विदेशों में भारत की कुल 332 फिल्में रिलीज हुई हैं। चीन के अलावा अमरीका, खाड़ी देश और ऑस्ट्रेलिया बॉलिवुड फिल्मों के बड़े बाजार बन गए हैं। अक्षय कुमार की 'गोल्ड' पहली हिंदी फिल्म है जो सऊदी अरब में रिलीज हुई थी। साल 2018 में अमेरिका में 44, खाड़ी के देशों में 35, इंग्लैंड में 12, चीन में 10 और ऑस्ट्रेलिया में कुल 9 भारतीय फिल्में रिलीज हुई थीं।


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देश के इस राज्य में 6 महीने के लिए बैन हुर्इ आेला सर्विस, जानिए क्यों


नर्इ दिल्ली। हुंदर्इ आैर किआ जैसी आॅटो कंपनी जिस आेला में 2000 करोड़ रुपए से ज्यादा का इंवेस्टमेंट कर रही है, उसी आेला को बड़ा झटका लगा है। देश के एक बड़े राज्य में आेला को 6 महीने के लिए बैन कर दिया है। उसका लाइसेंस भी रद कर दिया है। आेला देश की सबसे बड़ी प्राइवेट कैब प्रोवाइड कराने वाली कंपनी में से एक है। जिसमें हर रोज लाखों लोग सफर करते हैं। जिस राज्य में आेला पर बैन लगाया है वो राज्य काफी बड़ा है। एेसे में वहां के लोगों को आने वाले 6 महीने काफी परेशानी होने वाली है। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर वो कौन सा राज्य हैं आैर किस वजह से आेला पर बैन लगाया गया है।

देश के इस बड़े राज्य में लगा बैन
वो राज्य आैर कोर्इ नहीं बल्कि दक्षिणी भारत के सबसे बड़े राज्यों में से एक कर्नाटक है। जहां पर देश का आर्इटी हब कहा जाने वाला बेंगलुरू भी है। कर्नाटक सरकार के परिवहन विभाग ने 6 महीने के लिए आेला का लाइसेंस रद कर दिया है। ये कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि ओला ने राज्य के ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट से बिना परमीशन के बेंगलुरू में बाइक-टैक्सी की सर्विस शुरू कर दी थी। ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने 18 मार्च को ओला को नोटिस जारी कर कैब सर्विस को सस्पेंड करने के लिए कहा था। हालांकि ओला बेंगलुरू में अपनी सेवाएं दे रही है, लेकिन आम दिनों की तुलना में शुक्रवार को कैब सेवाएं कम रहीं। वहीं सरकार ने आेला के अलावा एनी टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के लाइसेंस को रद कर दिया है। अब कर्नाटक राज्य की सड़कों पर ओला कैब नहीं दिखार्इ देंगी।

ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट का नोटिस
कर्नाटक ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के नोटिस के अनुसार साल की शुरुआत में ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने कई आेला द्वारा संचालित बाइक जब्त की थीं। अधिाकारियों की जांच में पाया गया कि कंपनी की आेर से कर्नाटक ऑन डिमांड ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी एग्रीगेटर्स रूल्स, 2016 की धारा 11 (1) के तहत नियमों का उल्लंघन किया गया है। जिसकी वजह से ट्रांपपोर्ट डिपार्टमें कैब एग्रीगेटर के लाइसेंस को रद्द करने का निर्णय ले सकता है। नोटिस के अनुसार ओला को 15 फरवरी 2019 को नोटिस भेजा गया था। जिसमें कंपनी को जवाब देने कसे कहा गया था। ओला ने 3 मार्च को इसका जवाब दिया। नोटिस के अनुसार कंपनी का जवाब संतोषजनक नहीं था। साथ ही कंपनी ने एेसा कोर्इ सबूत नहीं दिया जिससे साबित होता है कि कंपनी की आेर से कोर्इ उल्लंघन नहीं हुआ। जिसके बाद ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की आेर से लाइसेंस रद करने का फैसला लिया है।

ओला ने रखा अपना पक्ष
वहीं दूसरी आेर ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के इस फैसले के बाद आेला कंपनी की आेर से बयान जारी हुआ है। आेला कंपनी के अनुसार कंपनी सभी कानूनों का पालन करती है। कंपनी ने नर्इ टेक्नोलाॅजी को आगे लाने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम आैर सहयोग किया है। वहीं कंपनी ने यह भी कहा कि वो एक हल तलाशने में जुटे हैं जिससे राज्य के हजारों ड्राइवर्स अपना काम जारी रख सके। कंपनी के अनुसार दूसरी कंपनियां गैर कानूनी तरीके से अपनी सेवाएं दे रही हैं। कंपनी ने यह भी जानकारी दी कि उसने अपनी कुछ समय पहले बाइक टैक्सी के प्रयोग रोक लगा दी थी। कंपनी के अनुसार की आेर से यह नोटिफिकेशन काफी दुखद है।

किआ आैर हुंदर्इ के साथ निवेश प्लान
आेला के लिए कर्नाटक में यह बैन बड़ा झटका इसलिए भी है क्योंकि कंपनी ने हाल ही में किआ आैर हुंदर्इ मोटर्स के साथ हाथ मिलाया है। दोनों आॅटो कंपनियों की आेर से आेला में करीब 2000 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया जाएगा। अब सरकार की इस कार्रवार्इ के चलते आेला की यह डील खटार्इ में भी पड़ सकती है। आेला के लिए दोनों कंपनियों से की गर्इ काफी बड़ी डील है। इससे कंपनी को काफी फायदा होगा।


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सबसे महंगा होगा आर्इपीएल का 12वां संस्करण, इस तरह से 8 टीमें करेंगी 44 हजार करोड़ की कमार्इ


नर्इ दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग यानी आर्इपीएल शुरू होने में महज एक दिन ही रह गया है। पिछले 11 सालों की तरह ही इस साल भी आप क्रिकेट के इस महाउत्सव का मजा लेने के लिए तैयार होंगे। आज हम आपको आर्इपीएल के इस 12वें संस्करण के बारे में बताने जा रहे हैं कि आखिर आर्इपीएल से फ्रेंचाइजी व बीसीसीआर्इ समेत कंपनियों की कैसे कमार्इ होती है। ग्लोबल वैल्यूएशन एंड काॅर्पोरेट फाइनेंस एडवाइजर कंपनी डफ एंड फेल्प्स ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक आर्इपीएल के 12वें संस्करण की ब्रैंड वैल्यू 630 करोड़ डाॅलर (करीब 44 हजार करोड़ रुपए) की है। पिछले साल की तुलना में यह रकम करीब 19 गुना अधिक है।


बिजनेस के लिहाज से तैयार किया गया आर्इपीएल का फाॅर्मेट

आर्इपीएल सिर्फ क्रिकेट ही नहीं बल्कि बिजनेस आैर एंटरटेनमेंट को एक अनोखा संगम है। साल 2008 में शुरू हुए आर्इपीएल की सफलता की कहानी का अंदाजा अाप इस बात से लगा सकते हैं कि कर्इ देशों में इसकी तर्ज पर टूर्नामेंट आयोजित किए जाने लगे हैं। आज भी बहुत से लोगों के लिए आर्इपीएल से होने वाली कमार्इ एक अबूझ पहेली बनी हुर्इ है। दरअसल, आर्इपीएल को क्रिकेट व एंटरटेनमेंट के साथ-साथ कुछ इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि कमार्इ का भी एक बेहतरीन जरिया बन सके। यही कारण है कि आर्इपीएल को वैल्यूएबल काॅमर्शियल प्राॅपर्टी के तौर पर विकसित किया गया। कंपनियां आर्इपीएल में विज्ञापन करती है। साथ ही प्राइवेट कंपनियों को आर्इपीएल में फ्रेंचाइजी खरीदने के लिए भी बुलाया गया। इन्हीं फ्रेंचाइजी से आर्इपीएल में पैसे जनरेट किया जाता है।


मीडिया रेवेन्यू से होती है बीसीसीअार्इ व फ्रेंचाइजी की भारी कमार्इ

आर्इपीएल एक एेसा प्लेटफाॅर्म है जहां खिलाड़ियों की जर्सी से लेकर स्टेडियम के हर एक कोने में विज्ञापन से भारी पैसा जनरेट किया जाता है। कर्इ बहुराष्ट्रीय कंपनियां इस खेल को स्पाॅन्सर करती हैं। भारत में क्रिकेट के लिए लोगों में पागलपन आैर आबादी को देखते हुए ये माॅडल कुछ एेसे तैयार किया गया है जिससे बाॅलीवुड इंडस्ट्री पर भी यह भारी पड़ता है। कर्इ लोग तो आर्इपीएल को बाॅलीवुड, काॅर्पोरेट व क्रिकेट का काॅकटेल भी कहते हैं। आर्इपीएल एक रेवेन्यू डिस्ट्रीब्युशन माॅडल पर काम करता है जिसमें भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआर्इ) ब्राॅडकास्टर व आॅनलाइन स्ट्रीमर से मोदी रकम वसूलता है। इस रकम में से अपनी फीस काटकर बीसीसीआर्इ आर्इपीएल टीम को बांटती है। इसका बंटवारा टीमों की रैंकिंग के आधार पर किया जाता है। एेसे में जो टीम टाॅप पर होती है, उसे सबसे अधिक मीडिया रेवेन्यू मिलता है। किसी भी आर्इपीएल टीम की कुल कमार्इ का एक बड़ा हिस्सा मीडिया रेवेन्यू से आता है।


स्पाॅन्सरशिप से होती है 20 से 30 फीसदी तक की कमार्इ

यूं तो ब्रांड स्पाॅन्सरशिप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी स्पोर्ट्स के लिए कोर्इ नर्इ बात नहीं है, लेकिन आर्इपीएल में इसके लिए भी आक्रामक रवैया अपनाया गया। टीम की क्रिकेट किट से लेकर स्टेडियम में किए गए स्पाॅन्सरशिप वाले विज्ञापनों से भी भारी कमार्इ की जाती है। स्पाॅनसर्स अपने ब्रैंड को प्रोमोट करने के लिए खिलाड़ियों के लिए भी कार्यक्रम आयोजित करते हैं। कुल कमार्इ में स्पाॅन्सरशिप से करीब 20 से 30 फीसदी का हिस्सा होता है। साथ ही चैंपियन बनने वाली टीम व रनर-अप टीम को भी प्राइज मानी दिया जाता है। यह प्राइज मनी खिलाड़ियों व टीम मालिकों के बीच में बांटा जाता है।


इन माध्यमों से भी होती है आर्इपीएल में मोटी कमार्इ

आर्इपीएल में होने वाली कमार्इ के अन्य माध्यमों में टिकट बिक्री, मर्चेंडाइज सेल्स आैर स्टाॅल किराया भी होता है। स्टेडियम में टिकट का दाम मालिक तय करते हैं। किसी भी आर्इपीएल टीम की कुल रेवेन्यू का 10 फीसदी हिस्सा टिकट बिक्री से आता है। भारतीय बाजार में खेल सामाग्री सालाना आधार पर 100 फीसदी की दर से बढ़कर 3 करोड़ डाॅलर का हो गया है। हर फ्रेंचाइजी अपनी टीम को प्रोमोट करने के लिए मर्चेंडाइज की बिक्री भी करते हैं। वहीं, मैच के दौरान फूड स्टाॅल काॅन्ट्रैक्ट आधार पर थर्ड पार्टी को दिए जाते हैं। हर एक मैच के लिए इन स्टाॅल्स को एक तय कीमत चुकानी होती है।

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सैमसंग का 5जी फोन 5 अप्रैल को बाजार में उतरेगा, इतनी होगी कीमत


नर्इ दिल्ली। अप्रैल के महीने में दुनिया का पहला 5जी स्मार्टफोन आ रहा है। सैमसंग अपने पहले 5जी स्मार्टफोन को रिलीज करेगा। खास बात तो ये है कि सैमसंग की आेर से इसकी डेट भी रिलीज कर दी गर्इ है। काफी दिनों से दुनिया के लोगों को 5जी स्मार्टफोन का इंतजार था। सैमसंग इस पर काफी दिनों से काम कर रहा था। सैमसंग ने कहा है कि वो 5 अप्रैल को अपना पहला स्मार्टफोन दुनिया के सामने रिलीज करेगा।

सैमसंग ने गुरुवार को कहा कि वह अपना पहला 5जी स्मार्टफोन अप्रैल के पहले सप्ताह में दक्षिण कोरिया में रिलीज करेगी। कंपनी के अनुसार, यह दुनिया में अगली पीढ़ी के नेटवर्क क्षमता से युक्त पहला मोबाइल फोन होगा। समाचार एजेंसी योनहैप की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण कोरियाई प्रौद्योगिकी दिग्गज कंपनी ने कहा कि बिना किसी पूर्व ऑर्डर कार्यक्रम के गैलेक्सी एस-10 का 5जी मॉडल पांच अप्रैल से बिक्री के लिए उपलब्ध होगा।

सैमसंग ने हालांकि फोन की कीमत के बारे में खुलासा नहीं किया लेकिन उद्योग के सूत्रों की माने तो घरेलू बाजार में इसकी कीमत करीब 15 लाख वॉन (1,332 डॉलर) आैर भारतीय रुपयों के अनुसार 92 हजार रुपए हो सकती है। सरकार द्वारा संचालित नेशनल रेडियो रिसर्च एजेंसी ने सोमवार को कहा कि गैलेक्सी एस-10 के 5जी मॉडल को सत्यापन परीक्षण में पास कर दिया गया है और दक्षिण कोरिया के बाजार में इसे उतारने की हरी झंडी मिल चुकी है।


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होली के इन मशहूर गानों ने तोड़ डाले कमाई के सारे रिकॉर्ड, रंग बरसे ने की इतनी कमाई


नई दिल्ली। होली में रंग-गुलाल, मिठाई, गुझिया और बॉलीवुड गानों का एक अलग ही स्थान होता है। बॉलीवुड की कई फिल्मों में होली का गाने दिखाए गए। दिलीप कुमार से लेकर रणबीर कपूर तक नेहोली के गाने पर लोगों की वाहवाही लूटी, तो वहीं फिल्म प्रोड्यूसर्स की भी जमकर कमाई हुई। 50 के दशक दिलीप कुमार की फिल्म आन में पर्दे पर पहली बार होली का गाना दिखाया गया। होली के गानों सेफिल्मों की सफलता जैसे जैसे बढ़ती गई वैसे वैसे बॉलीवुड ने इससे बंपर कमाई भी की। आइए आपको 5 ऐसी फिल्मों के बारे में बताते हैं जिनके होली सॉन्ग ने इन फिल्मों की कमाई में चार चांद लगा दिए।

रंग बरसे ने की 7 करोड़ की कमाई

होली नाम आते ही अगर कोई गाना दिल में आता है तो वो ये सिलसिला फिल्म का ‘रंग बरसे भीगे चुनर वाली’ होली पर फिल्माये गए इस गाने की सफलता का आलम यह है कि आज भी लोग होली का धमाल मतबल रंग बरसे ही मानते हैं। साल 1981 में यश चोपड़ा ने इस फिल्म को बनाया था। हालांकि कि फिल्म बहुत बड़ी हिट नहीं रही। फिल्म ने कुल 7 करोड़ की कमाई की। लेकिन फिल्म में होली का गाना मिल का पत्थर साबित हुआ।

ये जवानी है दिवानी

2013 में धर्मा प्रोडक्शन के बैनर तले आई फिल्म ये जवानी है दिवानी का गाना बलम पिचकारी जो तूने मुझे मारी ने यंगस्टर्स में धमाल मचा दिया था। 55 करोड़ की लागत से बनी इस फिल्म ने 310 करोड़ की कमाई की। फिल्म का गाना बलम पिचकारी 4 मिनट 49 सेंकेड का था। इस गाने का क्रेज इतना था कि यू ट्यूब पर इसे 17 करोड़ से ज्यादा हिट्स मिल चुके हैं। इस गाने में रणबीर और दीपिका होलीके रंग में सराबोर झूमते नजर आ रहे हैं।

3 करोड़ की शोले में होली का बड़ा योगदान

बॉलीवुड में होली और शोले फिल्म एक दूसरे के बिना पूरे नहीं हो सकते हैं। साल 1975 में बनी इस फिल्म ने कई रिकॉर्ड बनाए। इस फिल्म के किरदार, डॉयलाग्स, गाने से लेकर एक एक सीन आज भी दर्शक को याद हैं। अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, जया बच्चन, संजीव कुमार जैसे अभिनेताओं ने इस फिल्म के एक सीन को यादगार बना दिया। फिल्म का डायरेक्शन रमेश सिप्पी ने किया था। जबकि फिल्म के प्रोड्यूसर रमेश सिप्पी थे। शोले फिल्म को बनाने में 3 करोड़ की लागत लगी थी। जबकि साल 1975 में फिल्म ने 15 करोड़ की कमाई की थी।

होली खेले रघुवीरा अवध ने किया धमाल

2003 में अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी को लेकर डायरेक्टर रवि चोपड़ा ने फिल्म बागवान बनाई। इस फिल्म का गाना ‘होली खेले रघुवीरा अवध में’ ने खूब सुर्खिया बटोरीं। 5 मिनट 40 सेकेंड लंबे इस गाने अभिताभ अपने पूरे परिवार के साथ जमकर होली खेलते नजर आए। 2003 में फिल्म ने 12 करोड़ की कमाई की। फिल्म में अमिताभ के अलावा हेमा मालिनी, सलमान खान समेत कई सितारें मौजूद थे। फिल्म के इस गाने को यू ट्यूब पर भी 18 लाख से ज्यादा हिट्स मिल चुके हैं। फिल्म को डायरेक्ट रवि चोपड़ा ने किया था। जबकि फिल्म के प्रोड्यूसर बी आर चोपड़ा थे।

20 करोड़ की फिल्म ने कमाए 66 करोड़

माना जाता है कि शाहरूख खान को बॉलीवुड में स्थापित करने में डर फिल्म का बहुत बड़ा योगदान रहा है। इस फिल्म में उनके निगेटिव रोल को इतना पंसद किया कि वो रातों रात स्टार बन गए। फिल्म ने भी उस समय 66 करोड़ की कमाई कर नए रिकॉर्ड बनाए। जबकि डर फिल्म की लागत केवल 20 करोड़ रुपए थई। वहीं फिल्म में होली वाला गाना ‘अंग से अंग लगाना’ आज भी लोग बड़े चाव से सुनते हैं।फिल्म के डायरेक्टर यश चोपड़ा ने होली के सीन पर कुछ ज्यादा ही मेहनत की थी। इसलिए ये सीन आज भी दर्शकों के जहन में है।

 

 

 

 


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ज्यादा कैलोरी वाली मिठाई की जगह होली पर ये सेहतमंद विकल्प चुनें


नई दिल्ली। बिना खाने के भारतीय त्योहार अधूरे हैं। खासकर होली पर तो कैलोरी से भरपूर खाने की भरमार होती है। इस त्योहार पर मिठाइयों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है, क्योंकि यह त्योहार बसंत के आगमन पर मनाया जाता है। तली हुई गुजिया, मीठी पूरन पोली, चाशनी में डूबे मालपुए और भांग की ठंडाई होली के पारंपरिक व्यंजन हैं।
इस साल अपने मेहमानों को पारंपरिक ‘मुँह मीठा’ में सेहतमंद मिठाई परोसिए। नीचे स्नैपडील पर कुछ सेहतमंद विकल्पों की सूची दी गई है:

1. नटराज सुपर सेवर पैक

वास्तविक मूल्य: 1053 रु.
आॅफर मूल्य: 722 रु.

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2. नटराज खट्टी-मीठी स्लाईस्ड क्रेनबरी

वास्तविक मूल्य: 1125 रु.

आॅफर मूल्य: 639 रु.

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3. ग्रो क्रैकर्स काश्मीरी ब्राउन वाॅलनट्स

वास्तविक मूल्य: 985 रु.
आॅफर मूल्य: 519 रु.

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4. रोस्टा ट्रेल

वास्तविक मूल्य: 550 रु.
आॅफर मूल्य: 411 रु.

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5. प्राकृतिक खजूर

वास्तविक मूल्य: 999 रु.
आॅफर मूल्य: 645 रु.

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ये आहार शक्कर के विकल्प हैं, जिनमें कम कैलोरी है। इनमें प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स और डायटरी फाईबर भरपूर हैं।


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स्पाइसजेट खरीद सकता है जेट एयरवेज के 50 ग्राउंडेड विमान, यह है सबसे बड़ा कारण


नई दिल्ली। वित्तीय संकट से जूझ रही जेट एयरवेज के पट्टेदारों ने इसके बोइंग विमानों को स्पाइसेट को बेचने की पेशकश की है। एक सूत्र ने कहा, उद्योग के जानकार के मुताबिक, पट्टेदारों की ओर से 50 विमानों को ड्राई लीज नियमों के तहत बेचने की पेशकश की गई है। ये पट्टेदार जेट को विमानों को बेचने में सक्षम हैं, क्योंकि बकाया राशि को नहीं चुकाया गया है।

इस पेशकश पर स्पाइसजेट ने आशावादी ढंग से प्रतिक्रिया दी है, जिसे सरकार के सुरक्षा प्रतिबंधों की वजह से अपने 12, 737 मैक्स 8 विमानों को खड़ा करना पड़ा है। एक सूत्र ने कहा, "50 विमानों के साथ पट्टेदारों (सभी जेट के विमान) ने स्पाइसजेट के साथ संपर्क साधा है। वे जेट के वित्तीय झमेले से बाहर निकलने के लिए बेकरार हैं।"

वित्तीय संकट से जूझ रही जेट एयरवेज ने अपने लीज देने वालों का बकाया नहीं चुकाया है, जिस वजह से विमानन कंपनी लगातार अपने विमानों का परिचालन बंद कर रही है। कंपनी ने अब तक अपने 40 से अधिक विमान खड़े कर दिए हैं।

विमानन नियामक, नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने मंगलवार दोपहर को कहा कि जेट एयरवेज के पास उड़ान के लिए केवल 41 विमान ही है और इसके इस बेड़े के आकार में और अधिक कमी हो सकती है। डीजीसीए ने यहां जेट एयरवेज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद यह जानकारी दी। डीजीसीए के एक बयान के मुताबिक, "डीजीसीए ने संचालन, उड़ान योग्यता, यात्रियों की सुविधा पर जेट एयरवेज के संचालन की समीक्षा की।"

बयान के मुताबिक, "बेड़े में यात्रा संचालन के लिए विमानों की मौजूदा उपलब्धता 41 है और इसी वजह से 603 घरेलू उड़ानों और 382 अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों को रद्द कर दिया गया है। हालांकि यह एक स्थिर स्थिति नहीं है और आने वाले दिनों में स्थिति और विकट हो सकती है।"

बयान के अनुसार, डीजीसीए ने विमानन कंपनी को नागर विमानन नियमों (सीएआर) के प्रावधानों का पालन करने के लिए कहा है, जिसके अंतर्गत यात्रियों को समय पर सूचित करना, मुआवजा देना, रिफंड और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक उड़ान मुहैया कराना है।

बयान के अनुसार, "डीजीसीए यह सुनिश्चित कर रहा है कि बेड़े में मौजूद सारे विमान, चाहे वह संचालित हो रहे हो या खड़े हों, उसका रखरखाव स्वीकृत रखरखाव कार्यक्रमों (एएमपी) के तहत हो।" विमान नियामक संस्था ने जेट को यह भी निर्देश दिए कि पायलट/चालक दल का सदस्य/विमान रखरखाव इंजीनियरों में से किसी भी प्रकार के तनाव के शिकार कर्मचारियों से काम नहीं कराया जाए।


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डीजीसीए ने की जेट एयरवेज के उड़ानों की समीक्षा, कहा - और कम हो सकती है उड़ रहे विमानों की संख्या


नई दिल्ली। वित्तीय संकटों का सामना कर रही जेट एयरवेज को अब इसक परिणाम परिचालन पर भी दिख रहा है। मंगलवार को डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने बताया कि जेट एयरवेज अपने कुल 119 विमानों में से केवल 41 का ही परिचालन कर रही है, जोकि उसकी मूल क्षमता का केवल एक तिहाई हिस्सा है। बता दें कि कर्ज की बोझ से परेशान जेट एयरवेज अपने प्रमुख हिस्सेदार एतिहाद एयरवेज से डील करने की प्रयास में है। एतिहाद एयरवेज ने भी इस बात के संकेत दिए हैं कि वो जेट एयरवेज में और अधिक निवेश नहीं करेगी।


कम हो सकती और उड़ रहे विमानों की संख्या

इस बाबत मंगलवार को डीजीसीए ने जेट एयरवेज के परिचालन और यात्रियों की सुविधाओं समेत कई बातों की समीक्षा की है। डीजीसीए ने कहा कि जेट एयरवेज की कुल 41 विमान परिचालन में है। कंपनी 603 घरेलू उड़ान व 382 अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों को रद्द कर दिया है। डीजीसीए ने आगे कहा कि स्थिति गंभीर है आने वाले दिनों में जेट उड़ रहे विमानों की संख्या और भी घटा सकती है। आपको बता दें कि जेट एयरवेज पर एक अरब डॉलर यानी 6,895 करोड़ रुपए से भी अधिक का कर्ज है। यही कारण है कि यह विमान कंपनी बैंकों, सप्लायरों व कर्मचारियों को समय पर भुगतान नहीं कर पा रही है। इनमें से कुछ ने तो कंपनी के साथ लीज डील को भी खत्म कर दिया है।


यात्रियों को मिले मुआवज व रिफंड

डीजीसीए ने एयरलाइन को निर्देश दिया है कि सीएआर के प्रासंगिक प्रावधानों का पालन करते हुए जहां भी लागू हो, वहां वो यात्रियों को समय पर जानकारी, मुआवजा, रिफंड या वैकल्पिक उड़ानों के बारे व्यवस्था करे। इन डेटा को डीजीसीए लगातार मॉनिटर भी कर रहा है। नागर विमानन महानिदेशालय यह भी सुनिश्चित कर रही है कि सभी विमान (परिचालन और खड़े किए गए विमान) को अप्रुवड मेंटेनेंस प्रोग्राम (एएमपी) के मुताबिक उनको मेंटेन हो रहा है या नहीं। डीजीसीए ने यह भी कहा कि ऐसे पायलट, केबिन क्रु और ग्राउंड स्टाफ, जो किसी भी तरह के तनाव की शिकायत कर रह हैं, उन्हें ड्यूटी पर नहीं लगाया जाना चाहिए।

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सरकार ने बैंकों से कहा- जेट एयरवेज को दिवालिया होने से बचाएं


नई दिल्ली। जेट एयरवेज मामले में केंद्र सरकार ने सरकारी बैंकों से कहा है कि वो जेट एयरवेज को दिवालिया होने से बचा लें। न्यूज एजेंसी थॅामसन रॉयटर्स ने कहा के मुताबिक सरकार आगामी चुनाव से ठीक पहले सरकार बैंकों को इसलिए आदेश दिया है ताकि बेरोजगारी जैसी समस्या एक बार उसकार खेल न बिगाड़ दे। पहले भी वित्त मंत्रालय ने भारतीय स्टेट बैंक की अध्यक्षता वाले बैंकों के समूह से जेट की वित्तीय हालत को लेकर लगातार अपडेट मांगती रही है। बीते कुछ महीनों में ही सरकार ने कंपनी के रिवाइवल प्लान के तहत साप्ताहिक तौर पर अपडेट मांगा है। बैंकों ने सरकार से इस बाबत सलाह भी मांगे हैं।


सरकार ने कहा- अपने स्टेक को डेट से इक्विटर में कन्वर्ट करें

इस मामले पर सूत्रों ने कहा कि वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने लगातार कंपनी की वित्तीय हालत के बारे में जानाकरी मांगी है। इसके पहले जेट एयरवेज और बैंकों से इस मामले से जुड़़ी कोई जानकारी वित्त मंत्रालय द्वारा नहीं मांगी गई थी। मंत्रालय ने सरकारी बैंकों से कहा है कि वो जेट एयरवेज में अपने स्टेक को डेट से इक्विटी में कन्वर्ट करने का प्रयास करें। सरकार ने यह प्रयास इसलिए किया है ताकि देश के टैक्सपेयर का रकम फंस न जाए और जेट एयरवेज दिवालिया ने हो सके।


बैंकों व कर्मचारियों तक को नहीं दे सकती है पेमेंट

सरकार ने इस बात के भी संकेत दिए हैं कि उसकी 49 फीसदी की हिस्सेदारी वाली नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ) की मदद से जेट में कुछ स्टेक खरीदा जा सकता है। करीब 70 हजार करोड़ रुपए की कर्ज में डूबी जेट एयरवेज संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। कंपनी ने बैंकों को, सप्लायर्स, कर्मचारी व एयरक्राफ्ट लीजर्स को पेमेंट नहीं दे सकी है। कुछ लीजर्स ने तो अपने डील को टर्मिनेट भी करने लगी हैं।

 


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कैट ने देशभर में जलाई चीनी सामान की होली, व्यापारियों को बताया देश का 'आर्थिक चौकीदार'


नई दिल्ली। चीन द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चौथी बार मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने पर वीटो का उपयोग करने और लंबे अर्से से पाकिस्तान की मदद करने पर व्यापारियों के सबसे बड़े संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के आह्वान पर मंगलवार को दिल्ली सहित देश विभिन्न राज्यों में व्यापारी संगठनो ने 1500 से अधिक स्थानों पर चीनी वस्तुओं की होली जलाई। साथ संगठन ने चीन के बने सामान का बहिष्कार करने का संकल्प लिया। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा की व्यापारी देश की अर्थव्यवस्था के चौकीदार हैं और भारत में चीन के व्यापार को और अधिक पनपने नहीं दिया जाएगा। वहीं दूसरी आेर कुछ दुकानदारों आैर व्यापारियों ने चीनी के बहिष्कार को निराधार बताया है। उनका मानना है कि देश में 90 फीसदी बाजार चीनी सामानों पर निर्भर है। एेसे में चीनी सामान का बहिष्कार या बिक्री पर रोक कैसे लगार्इ जा सकती है।

व्यापारियों ने की सरकार से अपील
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा की चीन की पाकिस्तान समर्थित हरकतों से देश के व्यापारी बेहद नाराज है। परोक्ष रूप से चीन भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान की मदद करता है। उनकी सरकार से मांग की कि अब चीन चीन से हो रहे व्यापार पर कुछ आर्थिक प्रतिबंध लगाने चाहिए। चीन से ज्यादातर सामान में खिलोने, त्योहारी वस्तुएं, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, मोबाइल, हार्डवेयर, बिजली का सामान, दैनिक उपयोग की वस्तुएं आदि ज्यादातर आयात होती हैं, जिनमें बहुत अधिक तकनीक नहीं होती है। सस्ता होने के कारण उपभोक्ता चीन का माल खरीदता है। आपको बता दें कि पिछले साल चीन से देश में 53878.06 मिलियन डॉलर की वस्तुओं का आयात किया गया था।

Cait Protest

देश के घरेलू व्यापार को दें बढ़ावा
कैट ने कहा कि देश के घरेलू व्यापार को बढ़ावा और पैकेज दिया जाए तो घरेलू स्तर पर चीन से अच्छा माल कम दाम पर बना सकते हैं। सरकार इस के लिए एक पैकेज की घोषणा करे जिससे देश के व्यापारी और उद्यमी चीनी माल का मुकाबला कर सकें। चीन से आयात होने वाली वस्तुओं पर कम से कम 300 से लेकर 500 फीसदी की कस्टम ड्यूटी लगा देनी चाहिए, जिससे चीन से आयात होने वाले सामान में कमी आए।

शुरू होगा राष्ट्रीय अभियान
वहीं दूसरी ओर कैट चीनी वस्तुओं के बहिष्कार का एक राष्ट्रीय अभियान शुरू कर रहा है, जिसमें व्यापारियों को समझाया जाएगा कि किस प्रकार चीनी सामान बेचकर हम परोक्ष रूप से पाकिस्तान द्वारा आतंकी गतिविधियां चलाने में उसकी मदद कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं के बीच भी एक चेतना अभियान चलाया जाएगा, जिसमें उनको चीनी सामान खरीदने से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी जाएगी। साथ ही आग्रह किया जाएगा कि चीनी सामान का बहिष्कार करे। कैट इस अभियान में किसान, लघु उद्यमी, उपभोक्ता, ट्रांसपोर्ट, हॉकर्स, महिला उद्यमी और अन्य वर्गों के राष्ट्रीय संगठनों को जोड़कर एक संयुक्त अभियान चलाएगा।

90 फीसदी बाजार चीनी सामान पर निर्भर
वहीं दूसरी ओर कुछ व्यापारी और दुकानदार कैट के चीनी सामान के बहिष्कार से असहमत नजर आ रहे हैं। दिल्ली सदर बाजार के कुछ व्यापारियों का कहना है कि पहले भारत को चीन का सामान आयात करना बंद करना होगा। कैट के विरोध के बाद भी कई दुकानदारों और फेरीवालों ने चीन का सामान बेचना जारी रखा हुआ है। व्यापारियों ने कहा देश में 90 फीसदी बाजार चीनी सामानों पर चलता है। ऐसे में चीनी सामान का बहिष्कार या बंद करना काफी मुश्किल है। व्यापारियों ने यह भी कहा कि त्योहारों पर पहले सामान का स्टॉक कर लिया जाता है। अगर देश चीन के सामान का आयात कर रहा है तो उनके पास भी चीनी सामान बेचने का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। दुकानदारों ने कहा कि हर कोई कम लागत का सामान खरीदना पसंद करता हैै। ऐसे में चीनी सामान की बिक्री को बंद करना काफी मुश्किल है।


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मार्च के पहले पखवाड़े तक 273.47 लाख टन चीनी का उत्पादन, इस्मा ने दी जानकारी


नई दिल्ली। देशभर की चीनी मिलों में चालू गन्ना पेराई सत्र के दौरान मार्च के पहले पखवाड़े तक चीनी का उत्पादन 273.47 लाख टन हुआ है जोकि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले तकरीबन छह फीसदी अधिक है। चीनी मिलों का संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) द्वारा सोमवार को जारी उत्पादन आंकड़ों के अनुसार, चालू गन्ना पेराई सत्र 2018-19 (अक्टूबर-सितंबर) में 15 मार्च तक देशभर में 273.47 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 258.20 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। इस प्रकार पिछले साल के मुकाबले इस साल अब तक चीनी का उत्पादन 15.27 लाख टन यानी 5.91 फीसदी अधिक है।


इस्मा की रिपोर्ट के अनुसार, चालू सत्र में 527 चीनी मिलों में गन्नों की पेराई शुरू हुई थी, जिनमें 154 मिलों ने पेराई बंद कर दी है और 373 मिलों में पेराई का कार्य 15 मार्च तक जारी था। महाराष्ट्र में 15 मार्च तक 100.08 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में महाराष्ट्र की चीनी मिलों ने 93.84 लाख टन चीनी का उत्पादन किया था। उत्तर प्रदेश में चालू सत्र में इस महीने के पहले पखवाड़े तक 84.14 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 84.39 लाख टन हुआ था।


देश के तीसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक प्रदेश कर्नाटक में 15 मार्च तक 42.52 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 35.10 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। तमिलनाडु में 15 मार्च तक 5.40 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। पिछले साल मार्च के पहले पखवाड़े तक प्रदेश की चीनी मिलों ने 4.33 लाख टन चीनी का उत्पादन किया था। गुजरात की चीनी मिलों ने पिछले साल के 9.10 लाख टन के मुकाबले इस साल 9.80 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। आंध्रप्रदेश में इस साल 15 मार्च तक 6.5 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है जबकि पिछले साल 6.40 लाख टन हुआ था। मार्च के पहले पखवाड़े तक बिहार में 6.65 लाख टन, उत्तराखंड में 2.95 लाख टन, पंजाब में 5.45 लाख टन, हरियाणा में 4.90 लाख टन और मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में 4.75 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है।

(नोटः यह खबर न्यूज एजेंसी फीड से प्रकाशित की गर्इ है। पत्रिका बिजनेस ने इसमें हेडलाइन के अतिरिक्त कोर्इ अन्य बदलाव नहीं किया है।)

 


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Essar Steel के टेकओवर के लिए NCLT ने ArcelorMittal को दी मंजूरी, बैंकों को मिल सकेगा 42 हजार करोड़ का फंसा कर्ज


नई दिल्ली। दिवालिया हो चुकी एस्सार स्टील को 42 हजार करोड़ रुपए में टेकओवर करने के लिए आर्सेलरमित्तल को सोमवार को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल (एनसीएलटी) से मंजूरी मिल गई है। लक्ष्मी मित्तल की अगुवाई वाली स्टील कंपनी को कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (सीओसी) को रकम जमा करने का आदेश भी दिया जा चुका है। एनसीएलटी ने आर्सेलरमित्तल द्वारा रकम रोकने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही अहमदाबाद एनसीएलटी ने भारत के सबसे बड़े दिवालिया मामलों में से एक का रिजॉल्युशन प्लान को पूरा कर लिया है।


शुक्रवार को मंजूरी पर रोक लगाने की बात आई थी सामने

गत शुक्रवार को, एनसीएलएटी ने दिवालिया कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया था जिसमें एस्सार स्टील के लिए आर्सेलरमित्तल मंजूरी पर रोक लगा दिया गया था। इसके लिए फाइनेंशियल एंड ऑपरेशनल क्रेडिटर्स को अलग-अलग बिड बांटने के लिए नया प्लान दिया गया था। मीडिया रिपोट्र्स के अनुसार, इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 27 मार्च को होने वाली है।


कई महीनों की लंबी सुनवाई के बाद अंतत: फैसला

कर्ज में डूबी एस्सार स्टील कर चार मुख्य क्रेडिटर्स में एडेलवाइज एआरसी, भारतीय स्टेट बैंक, आईडीबीआई बैंक और आईसीआईसीआई बैंक हैं। एस्सार स्टील के निदेशकों ने एनसीएलटी के उस बात को चुनौती दी थी जिसमें 54,389 करोड़ रुपए देने की बात कही गई थी। गत 8 मार्च को, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल ने 42 हजार करोड़ रुपए में आर्सेलर मित्तल द्वारा बिड की मंजूरी दी थी। यह मंजूरी कई महीनों की सुनवाई के बाद हुई थी। आपको बता दें कि एस्सार स्टील उन 12 नए लंबे मामलों में से एक है जिन्हें इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत समय से पहले ही पहचान लिया गया था।

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बीच में फंसी जेट-एतिहाद डील, बैंकों ने भी कंपनी को निकलने की दी सलाह


नई दिल्ली। जेट एयरवेज को बचाने की डील अब बीच में फंस गई है क्योंकि कंपनी को कर्ज देने वाले बैंकों ने जेट की साझेदारी कंपनी एतिहाद एयरवेज को कुछ शर्तें मानने के लिए कहा है। अगर कंपनी ये शर्ते नहीं मानेगी तो उसको बाहर निकाल दिया जाएगा, जिससे किसी नए निवेशक को इसमें शामिल किया जाए।


बैंको ने दी चेतावनी

आपको बता दें कि बैंकों ने कंपनी को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर कंपनी सभी शर्तें मंजूर नहीं करेगी तो उसे बाहर निकल जाना चाहिए ताकि किसी नए निवेशक को लाया जा सके। इस समय जेट एयरवेज काफी घाटे में चल रही है और कंपनी की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं।


150 रुपए प्रति शेयर में बेच सकती है हिस्सेदारी

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि वह 150 रुपए प्रति शेयर के भाव पर कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेच सकती है। वहीं, एक सूत्र ने बताया कि हो सकता है कि दबाव बनाने के लिए ऐसा किया जा रहा हो, लेकिन सरकार और नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इनवेस्टमेंट फंड ( एनआईआईएफ ) नाराज हैं।


NIIF जेट में निवेश करने को है तैयार

इसके साथ ही जानकारी मिली है कि इस समय एनआईआईएफ जेट का साथ देने के लिए तैयार है। NIIF जेट के साथ कारोबार को आगे बढ़ाना चाहती है। वहीं, अगर एतिहाद अपने हिस्से के शेयर ऑफर करती है तो उसके लिए खरीदार कहां से आएगा?’ आपको बता दें कि एतिहाद के पास जेट एयरवेज के 24 फीसदी शेयर हैं।


पिछले सप्ताह देखी गई थी गिरावट

आपको बता दें कि पिछले सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर जेट के शेयरों में 0.8 फीसदी की गिरावट देखी गई थी, जिसके बाद कंपनी के शेयर 234.95 रुपए पर बंद हुए थे। वहीं, जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल ने एंप्लॉयीज से 18 मार्च तक कंपनी को बचाने की पक्की योजना का वादा किया था। इससे पहले बैंकरों और एतिहाद के मैनेजमेंट ने अपनी राय रखी थी।


कंपनी ने वादे को नहीं किया पूरा

एतिहाद ने जानकारी देते हुए बताया कि उनकी एक टीम इस हफ्ते प्लान पर बातचीत के लिए मुंबई आ रही है और इश समय हालात यह हैं कि जेट एयरवेज को बचाने के लिए एतिहाद के साथ डील टूटने की कगार पर है। एतिहाद ने कंपनी से वादा किया था कि 750 करोड़ रुपए लगाए, लेकिन कंपनी ने अपने वादे को पूरा नहीं किया।

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मनोहर पर्रिकर ने देश के 49,300 करोड़ रुपए बचाने के लिए उठाया ये कदम, एयर डिफेंस सिस्टम में किया बड़ा बदलाव


नई दिल्ली। सोमवार को बीमारी से लड़ते हुए गोवा के सीएम मनोहर पर्रिकर का निधन हो गया है, जिसके बाद सभी लोग गम में डूबे हुए हैं। आज हम आपको मनोहर पर्रिकर के ऐसे काम के बारे में बताते हैं, जिसके कारण देश के एयर डिफेंस प्लांस में बदलाव हुआ था। इसके साथ ही आने वाले समय में एयर डिफेंस सिस्टम्स की खरीद पर देश के करदाताओं का 49,300 करोड़ रुपए बचने की उम्मीद है।


15 वर्ष के टर्म प्लान की समीक्षा का दिया आदेश

आपको बता दें कि रूस के एस400 लॉन्ग रेंज मिसाइल शील्ड की कीमत को जानने के बाद उन्होंने 2027 तक नए एयर डिफेंस सिस्टम्स की खरीद के लिए 15 वर्ष के टर्म प्लान की समीक्षा का आदेश दिया। एस400 की खासियत के बारे में आपको बताए तो यह मिसाइल चुपके से प्रहार की फिराक में आ रहे विमानों और मिसाइलों को 380 किमी की दूरी से ही मार गिराने में सक्षम है।


हाल ही में पूरी हुई समीक्षा

आपको बता दें कि पर्रिकर के आदेश पर इस समीक्षा को शुरू कर दिया गया था, जो हाल ही में जाकर पूरी हुई है। इसको पूरा करने के लिए एयर फोर्स ने तकनीकी अध्ययन भी किया था, जिसके बाद ही इसको पूरा किया जा सका था।


एयर डिफेंस सिस्टम्स मूल्यांकन का दिया आदेश

इसके साथ ही उन्होंने दुनिया में उपलब्ध सभी एयर डिफेंस सिस्टम्स का मूल्यांकन करने का भी आदेश दिया गया था, जिसको आदेशानुसार पूरा किया गाय। कुछ सीनियर अधिकारियों ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस समीक्षा प्रक्रिया में कम दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम्स की खरीद घटाने पर सर्वसहमति बनी है।


सूत्रों से मिली जानकारी में हुआ खुलासा

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एयर फोर्स की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में तय हुआ कि एस400 के 100 मध्यम एवं 100 छोटी दूरी के सिस्टम्स कम खरीदे जाएं। वहीं, एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि 'अध्ययन में स्पष्ट हो गया कि हमें बहुत कम संख्या में शॉर्ट रेंज सिस्टम्स की जरूरत है।


सबसे महंगा डिफेंस सिस्टम है

आपको बता दें कि एस400 के पांच सिस्टम्स की लागत 6.1 अरब डॉलर ( करीब 427 अरब रुपए ) होने का अनुमान है। इससे पहले भारत ने कभी भी इतना महंगा एयर डिफेंस सिस्टम नहीं खरीदा था। हालांकि, प्रति वर्गफुट कवरेज एरिया के लिहाज से देखें तो यह अभी दुनिया में उपलब्ध किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के मुकाबले सस्ता है।

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लगातार बढ़ रही है फेसबुक की परेशानी, अब डेटा मामले को छिपाने के मामले में आया जांच के घेरे में


नर्इ दिल्ली। अमरीका के संघीय अभियोजक अब यह जांच कर रहे हैं कि क्या डेटा मामले में फंसे फेसबुक के शीर्ष अधिकारियों को ब्रिटिश राजनीतिक कंसल्टिंग कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका की डेटा चोरी की जानकारी थी। द गार्जियन में रविवार को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, संघीय अभियोजक उन दावों की जांच कर रहे हैं, जिनके अनुसार, फेसबुक ने कैंब्रिज एनालिटिका से अपने संबंधों पर पर्दा डाल दिया था।


रिपोर्ट के अनुसार, "विश्लेषकों ने ये दावे भी सुने हैं कि कैंब्रिज एनालिटिका के ट्रंप का प्रचार शुरू करने के ठीक बाद 2016 की गर्मियों में फेसबुक के कार्यालय में फेसबुक के बोर्ड सदस्य और उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मार्क जुकरबर्ग के विश्वस्त तथा कैंब्रिज एनालिटिका के व्हिसल ब्लोवर क्रिस्टोफर के बीच एक बैठक हुई थी।" फेसबुक लंबे समय से इससे इंकार कर रहा है कि उसे अमरीका में 2016 में हुए राष्ट्रपति चुनाव के लिए ब्रिटिश राजनीतिक कंसल्टेंसी कंपनी द्वारा फेसबुक से लगभग 8.7 करोड़ लोगों के निजी विवरण चुराने के बारे में जानकारी थी।


फेसबुक के एक प्रवक्ता ने द न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा, "हम जांचकर्ताओं का सहयोग कर रहे हैं और इस जांच को गंभीरता से ले रहे हैं।" दिसंबर 2018 में, वाशिंगटन डीसी के शीर्ष अभियोजक ने कैंब्रिज एनालिटिका मामले में फेसबुक की भूमिका के लिए इसे सजा दिलाने के लिए कंपनी पर मामला दर्ज किया था। अमेरिका प्रतिभूति और विनिमय आयोग, संघीय व्यापार आयोग तथा न्याय विभाग भी फेसबुक की जांच कर रहे हैं।

(नोटः यह खबर न्यूज एजेंसी फीड से प्रकाशित की गर्इ है। पत्रिक बिजनेस ने इसमें हेडलाइन के अतिरिक्त कोर्इ अन्य बदलाव नहीं किया है।)

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भारत में यात्रियों से सबसे अधिक दुर्व्यवहार करते हैं एयरलाइन स्टाफ, इन बातों की भी होती है सबसे अधिक परेशानी


नई दिल्ली। हवाई यात्रियों द्वारा उड़ान के दौरान उनको होने वाले परेशानियों के बारे में जानकारी सामने आई है। सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के मुताबिक, हवाई यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी एयरलाइन स्टाफ के व्यवहार से होती है। वहीं, दूसरे नंबर हवाई यात्रियों को होने वाली परेशानी में उनका सामान खोना है। यात्रियों का सामान सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CPGRAM) के दौरान होती है।


इन शिकायातों की रही भरमार

सिविए एविएशन मंत्रालय के मुताबिक, यात्रियों से ढंग से व्यवहार न करने के कुल 3,524 मामले सामने आए हैं। वहीं सामान खोने को लेकर कुल 1,822 मामले सामने आए हैं। यात्रियों द्वारा हवाई सेवा को लेकर जो तीसरी सबसे बड़ी समस्या रही वो टिकटिंग/किराया/रिफंड को लेकर रही। इनके कुल 1,011 मामले सामने आए।


11 साल पहले किया गया था स्थापित

बता दें कि CPGRAM एक ऑनलाइन सिस्टम है जिसका मूल उद्देश्य यात्रियों की तरफ से की गई शिकायतों को सही समय पर सुलझाना है। यह मंत्रालय, डिपार्टमेंट या केंद्रीय बैंक की संस्थाओं की मदद से पूरा किया जाता है। इसे केंद्र सरकार ने 2007-08 में स्थापित किया था।


हालांकि, विमान कंपनियों के आधार पर मिलने वाले कुल शिकायतों को लेकर कोई डेटा CPGRAM के पास नहीं होता है। पिछले साल ही, सिविल एविएशन मंत्रालय ने पार्लियामेंटरी स्टैंडिंग कमेटी को जानकारी दिया था कि यात्रियों द्वारा की गई शिकायतों को व्यवस्थित सिस्टम के तहत निपटारा किया जाता है। हालांकि, बीते 21 दिसंबर को ही इस कमेटी ने कहा था कि मंत्रालय को इस व्यवस्था मेें अधिक हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है। कमेटी ने कहा था की मंत्रालय को इस बात का भी ध्यान देना चाहिए कि क्या यात्रियों की समस्य को सही समय पर निपटाया जा रहा है या नहीं। साथ ही यदि कोई विमान कंपनी ऐसा नहीं करती तो इसके लिए उसे दंडित भी किया जाना चाहिए।

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