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पुरुषों के लिए सेहत का खजाना है ये एक चीज, रोजाना खाली पेट पीते ही बदल जाएगी काया


नई दिल्ली। आजकल के लाइफस्टायल में सेहत का ख्याल रखना बहुत जरूरी है, लेकिन समय की कमी के चलते इसकी अनदेखी होती है। ये दिक्कत पुरुषों को ज्यादा होती है। क्योंकि वो नौकरी करने और भागदौड़ के चक्कर में ध्यान नहीं रख पाते हैं। अगर आप भी इन्हीं में से एक हैं तो हम आपको एक ऐसा जादुई नुस्खा बताएंगे जिससे आपकी परेशानी दूर हो सकती है।

1.शारीरिक कमजोरी को दूर करने एवं तनाव से छुटकारा दिलाने के लिए बरगद के पत्ते का प्रयोग बहुत लाभकारी साबित होता है। इसमें मौजूद पौष्टिक तत्व शरीर को मजबूत बनाने में मदद करता हैं

2.अगर पुरुष बरगद से निकला हुआ दूध रोजाना खाली पेट एक चम्मच लेंगे तो इससे उनकी यंगनेस बढ़ेगी। साथ ही ये इनकी शारीरिक क्षमता को बढ़ाने में भी मदद करेगा।

3.ये त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद है। इसमें प्रचुर मात्रा में एंटी आॅक्सिटेंड तत्व होते हैं, जो स्किन की नमी बनाए रखते हैं। साथ ही त्वचा को पोषण प्रदान करता है। इसलिए बरगद की जड़ों को पीसकर इसे गुलाब जल में मिलाकर चेहरे एवं हाथ-पैर पर लगाने से झुर्रियां खत्म हो जाएंगी।

4.ये कील-मुहांसों और चकत्तों से छुटकारा दिलाने में भी कारगर है। इसकी जड़ को पीसकर बेसन और गुलाब जल के साथ मिलाकर लगाने से चेहरे की रंगत में भी निखार आता है।

5.बरगद बाल झड़ने की समस्या और असमय सफेद होने से भी बचाता है। इसके इस्तेमाल के लिए बरगद के सात-आठ पत्तों को जलाकर उसकी राख बना लें। अब इस राख को अलसी के तेल में मिलाकर बालों की जड़ों में लगाएं। ऐसा करने से हेयरफॉल, डैंड्रफ और रूखे बालों की समस्या से छुटकारा दिलाएगा।

6.ये दोबारा बाल उगाने में भी मदद करता है। इसके लिए बरगद के पत्तों की राख को जैतून के तेल में मिलाकर लगाने से बाल निकलने लगते हैं। इससे बालों का पतलापन भी खत्म होता है।

7.अगर किसी के दांतों में कीड़े लगे हो व दर्द होता हो तो इससे छुटकारा पाने के लिए बरगद के पेड़ से निकलने वाले दूध को रुई में भिगोकर प्रवाहित स्थान पर रखें। इससे दर्द जल्द ही ठीक हो जाएगा।

8.यदि किसी के दांत कमजोर है या मसूड़ों से खून निकलता है तो इससे छुटकारा पाने के लिए 10 ग्राम बरगद की छाल, कत्था और 2 ग्राम काली मिर्च बारीक पीसकर पाउडर बना लें। अब इस पाउडर से रोजाना ब्रश करें। इससे मुंह की बदबू और दांतों की सड़न दूर होगी।

9.ये बवासीर की शिकायत में भी असरदार है। इसके लिए बरगद के दूध में शक्कर मिलाकर रोजाना इसका एक चम्मच लें। ऐसा नियमित रूप से करने पर खून आने और दर्द की समस्या दूर हो जाएगी।

10.बरगद का उपाय चोट और घाव को भरने में भी असरदार है। इसके लिए बरगद के पत्तों को पीसकर दही में मिलाकर घाव पर लगाने से ये जल्दी भर जाएगा। साथ ही इससे कटे के निशान भी जल्दी ठीक हो जाते हैं।


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करवाचौथ के लिए अभी से करें तैयारी, ऐसे दिखें खूबसूरत


करवाचौथ के खास मौके पर विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं और जीवन भर इस दिन उपवास रखती हैं। इस साल यह त्योहार 28 अक्टूबर को है। इस मंगल दिवस पर हर महिला चाहती है कि वह अपने जीवन-साथी के सामने परफेक्ट दिखे। युवा, उद्यमी मेकअप आर्टिस्ट और ब्रश एन ब्लशर की संस्थापक कोमल अग्रवाल ने करवा चौथ पर उचित तरीके से मेकअप करने के कुछ टिप्स साझा किए हैं :

रेडिएंट स्किन : त्वचा को स्वस्थ रखने और इसमें चमक बनाए रखने के लिए यह बहुत जरूरी है कि आप अधिक से अधिक पानी पीएं। मुल्तानी मिट्टी के साथ शहद वाले घर में बने घरेलू पैक का इस्तेमाल करें। अपने रोजाना की डाइट में फल और हरी सब्जियां लें।

मेहंदी : मेहंदी मोहब्बत की पहचान है, क्योंकि इसके रंग की गहराई ये बताती है कि पति अपनी पत्नी को कितना प्यार करता है। अपने हाथों और पैरों को और अधिक सुंदर बनाने के लिए आप वैक्सिंग, मैनिक्योर, पेडिक्योर आदि भी करा सकती हैं। नाखूनों के लिए बहुप्रचलित नेल आर्ट की ओर भी आप रुख कर सकती हैं।

हेयर डू : आज बालों को रंगने का चलन है। अपने चेहरे के आकार और उसके टोन के हिसाब से बालों का रंग चुनें। आपके परिधान के मुताबिक आपका हेयरस्टाइल बन, ब्रेड, कर्ल आदि आकार वाला हो सकता है। उपयुक्त हेयर एक्सेसरीज का इस्तेमाल करके आप अपने हेयर स्टाइल में चार चांद लगा दे सकती हैं। साधारण और आंखों को भा जाने वाले लुक के लिए आप बालों को हल्का कर्ल कर सकती हैं या इसे सीधा रख सकती हैं।

आई मेकअप : रंगीन या सबका ध्यान खींचने वाले रंग के आई लाइनर का इस्तेमाल करें। आप डबल आई लाइनर का इस्तेमाल भी कर सकती हैं। पहले साधारण ब्लैक लाइनर का इस्तेमाल करें और फिर उसके ऊपर रंगीन लाइनर का। अगर आप वाकई आई शैडो का इस्तेमाल करना चाहती हैं तो फिर आप कच्चे रंग को चुनें या फिर उसके ऊपर भूरा या काले रंग का इस्तेमाल स्मूक के तौर पर करें। आंख के बीचो-बीच कुछ ऐसे रंग का इस्तेमाल करें जो सबका ध्यान खींचे।

चेहरे का मेकअप : चेहरे पर फाउंडेशन एकसार लगाएं जिससे कि आपका मेकअप ज्यादा भडक़ीला नहीं लगे। इसके बाद कॉम्पैक्ट पाउडर से टचअप करें।

होंठ : लिप्स यानी होंठ हमेशा ही आपके लुक को पूरा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मरून और लाल रंग की लिपिस्टिक का इस्तेमाल यहां न करें। किसी दूसरे मुख्य रंगों में से एक को चुनें, जैसे गहरा भूरा, बरगंडी ताकि आप कुछ अलग और आकर्षक लग सकें।


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मानसून में पैरों की यूं करें देखभाल


मानसून सीजन में कीचड़ से सने रास्तों, पानी से लबालब गलियों, आद्र्रता भरे ठंडे वातावरण तथा सीलन में पैरों को काफी झेलना पड़ता है। जूतों के चिपचिपे होने के कारण पैरों में दाद, खाज, खुजली तथा लाल चकत्ते पड़ जाते हैं। सौंदर्य विशेषज्ञ शहनाज हुसैन ने कहा कि मानसून के सीजन में पैरों के देखभाल की अत्याधिक आवश्यकता होती है। आप कुछ साधारण सावधानियों तथा आयुर्वेदिक उपचारों से पांव तथा उंगलियों के संक्रमण से होने वाले रोगों से बच सकते हैं। मानसून के मौसम में अत्याधिक आद्र्रता तथा पसीने की समस्या आम देखने में मिलती है। इस मौसम में पैरों के इर्द-गिर्द के क्षेत्र में संक्रमण पैदा होता है, जिससे दुर्गंध पैदा होती है।

पसीने के साथ निकलने वाले गंदे द्रव्यों को प्रतिदिन धोकर साफ करना जरूरी होता है, ताकि दुर्गंध को रोका जा सके और पैर ताजगी तथा स्वच्छता का एहसास कर सकें। उन्होंने कहा कि सुबह नहाते समय पैरों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पैरों को धोने के बाद उन्हें अच्छी तरह सूखने दें तथा उसके बाद पैरों की उंगलियों के बीच टैलकम पाउडर का छिड़काव करें।

अगर आप बंद जूते पहनते हैं तो जूतों के अंदर टेलकम पाउडर का छिड़काव कीजिए। बरसात के मौसम के दौरान स्लिपर तथा खुले सैंडिल पहनना ज्यादा उपयोगी होता है, क्योंकि इससे पांवों में हवा लगती रहती है तथा पसीने को सूखने में भी मदद मिलती है, लेकिन खुले फुटवियर की वजह से पैरों पर गंदगी तथा धूल जम जाती है, जिससे पांवों की स्वच्छता पर असर पड़ता है।

दिनभर की थकान के बाद घर पहुंचने पर ठंडे पानी में थोड़ा सा नमक डालकर पांवों को अच्छी तरह भिगोइए तथा उसके बाद पांवों को खुले स्थान में सूखने दीजिए। बरसात के गर्म तथा आद्र्रता भरे मौसम में पांवों की गीली त्वचा की वजह से 'एथलीट फूट' नामक बीमारी पांवों को घेर लेती है। यदि प्रारंभिक तौर पर इसकी उपेक्षा हो तो यह पांवों में दाद, खाज, खुजली जैसी गंभीर परेशानियों का कारण बन जाती है। यह बीमारी फंगस संक्रमण की वजह से पैदा होती है। इसलिए अगर उंगलियों में तेज खारिश पैदा हो रही हो, तो तत्काल त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लीजिए।

मानसून में पांवों की देखभाल के लिए घरेलू उपचार :

फूट सोक : बाल्टी में एक चौथाई गर्म पानी, आधा कप खुरखुरा नमक, दस बूंदे नीबू रस या संतरे का सुंगधित तेल डालिए। यदि आपके पांव में ज्यादा पसीना निकलता है तो कुछ बूंदें टी-ऑयल को मिला लीजिए, क्योंकि इसमें रोगाणु रोधक तत्व मौजूद होते हैं तथा यह पांव की बदबू को दूर करने में मदद करती है। इस मिश्रण में 10-15 मिनट तक पांवों को भिगोकर बाद में सुखा लीजिए।

फूट लोशन : 3 चम्मच गुलाब जल, 2 चम्मच नींबू जूस तथा एक चम्मच शुद्ध ग्लिसरीन का मिश्रण तैयार करके इसे पांव पर आधा घंटा तक लगाने के बाद पांव को ताजे साफ पानी से धोने के बाद सुखा लीजिए।

ड्राइनेस फूट केयर : एक बाल्टी के चौथाई हिस्से तक ठंडा पानी भरिए तथा इस पानी में दो चम्मच शहद एक चम्मच हर्बल शैम्पू, एक चम्मच बादाम तेल मिलाकर इस मिश्रण में 20 मिनट तक पांव भिगोइए तथा बाद में पांव को ताजे स्वच्छ पानी से धोकर सुखा लीजिए।

कुलिंग मसाज आयल : 100 मिली लीटर जैतून तेल, 2 बूंद नीलगरी तेल, 2 चम्मच रोजमेरी तेल, 3 चम्मच खस या गुलाब का तेल मिलाकर इस मिश्रण को एयरटाइट गिलास जार में डाल लीजिए। इस मिश्रण को प्रतिदिन पांव की मसाज में प्रयोग कीजिए। इससे पांवों को ठंडक मिलेगी और यह त्वचा को सुरक्षा प्रदान करके इसे स्वस्थ्य रखेगा।


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बारिश के मौसम में खुद को यूं बनाएं फैशनेबल


देश के कई राज्यों में मॉनसून अपने चरम पर है। झमाझम बारिश के बीच शहर की सड़कें जब जलमग्न और कीचड़मय हो जाती हैं, तब खुद को फैशनेबल बनाए रखना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे समय में इन नायाब नुस्खों को अपनाकर आप बन सकते हैं फैशनेबल।

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* डार्क एंड शेडी : जल्दबाजी में फैसला लेने से पहले, थोड़ा रुकें। बरसात के मौसम में फेमस नेवी ब्लू, ब्लैक और ग्रे के साथ डार्क शेड्स फैशन का जलवा बिखेरने के लिए आवश्यक है। यह शेड्स डिफॉल्ट रूप से बारिश के दौरान हमारे आसपास की उदासी को दूर करते हैं।

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* न्यू-ऐज केप : जैकेट कपड़े का एक टुकड़ा से कहीं अधिक है, सही मायने में यह एक स्टेटमेंट है। क्या आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जो कूल हो मगर उसने कभी जैकेट नहीं पहनी हो। अगर आप वाकई किसी को जानते हैं तो यकीन मानें कि वह कूल नहीं सकता। इस सीजन में एक सिंपल लेकिन अच्छा जैकेट (खासतौर पर हुड के साथ) यानी अपना सुपरहीरो चुनें। भीगने से बचें और और इसे पहनकर लाजवाब भी दिखें।

* ऐक्सेसरीज : बारिश में या बारिश के बाद भी चलना काफी पीड़ादायक हो सकता है! आप लोगों के सामने बे ढंगे की तरह से फिसलना नहीं चाहेंगे। बारिश के दौरान चाहे फॉर्मल हो या समारोह, सही फुटवियर आपके लुक के पूरक हो सकते हैं। गीले इलाकों में जरूरी ग्रिप के लिए उपयुक्त सोल वालेे जूते चुनें। अगर यह वेदर-रेसिस्टेंट मैटीरियल से बना हो तो उससे बेहतर और कुछ नहीं हो सकता।

* ज्यादा कुछ न करें : सिंपल बने रहें, बिंदास दिखें और स्केटिंग रिंक में उतरें। किसी नौसिखिए की तरह दिखने की बजाय सड़क को ही अपना रैंप बना डालें।


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एयरकूल्ड और एयरकंडीशंड घर बना रहें हैं हमें बीमार, जानिए कैसे?


शीशे से बंद एयरकंडीशनिंग वाले घर और दफ्तर भले ही आरामदायक महसूस होते हों, लेकिन ये आपकी हड्डियों को खोखला बना रहे हैं। आधुनिक जीवन शैली की प्रतीक माने जाने वाले ऐसे घर और दफ्तर न केवल ताजा हवा, बल्कि धूप से भी लोगों को वंचित करते हैं, जिस कारण शरीर में विटामिन-डी की कमी होती है और हड्डियां कमजोर होती हैं।

वरिष्ठ अस्थि शल्य चिकित्सक डॉ. राजू वैश्य ने देश के अलग-अलग शहरों में जोड़ों में दर्द एवं गठिया (अर्थराइटिस) के एक हजार मरीजों पर अध्ययन कर पाया कि ऐसे मरीजों में से 95 प्रतिशत मरीजों में विटामिन-डी की कमी होती है और इसका एक मुख्य कारण पर्याप्त मात्रा में धूप न मिलना है, जो विटामिन-डी का मुख्य स्रोत है। दरअसल विटामिन-डी का मुख्य स्रोत सूर्य की रोशनी है, जो हड्डियों के अलावा पाचन क्रिया में भी बहुत उपयोगी है। व्यस्त दिनचर्या और आधुनिक संसाधनों के कारण लोग तेज धूप नहीं ले पाते। खुले मैदान में घूमना-फिरना और खेलना भी बंद हो गया। इस कारण धूप के जरिए मिलने वाला विटामिन-डी उन तक नहीं पहुंच पाता।

जब भी किसी को घुटने या जोड़ में दर्द होता है, तो उसे लगता है कि कैल्शियम की कमी हो गई है, जबकि विटामिन-डी की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता। अगर कैल्शियम के साथ-साथ विटामिन-डी की भी समय पर जांच करवा ली जाए तो आर्थराइटिस को बढऩे से रोका जा सकता है।

बचपन में खानपान की गलत आदतों व कैल्शियम की कमी के कारण आर्थराइटिस के अलावा ऑस्टियोपोरोसिस की भी संभावना बहुत अधिक होती है। ऑस्टियोपोरोसिस में कैल्शियम की कमी के कारण हड्डियों का घनत्व एवं अस्थि मज्जा बहुत कम हो जाता है। साथ ही हड्डियों की बनावट भी खराब हो जाती है, जिससे हड्डियां अत्यंत भुरभुरी और अति संवेदनशील हो जाती हैं। इस कारण हड्डियों पर हल्का दबाव पडऩे या हल्की चोट लगने पर भी वे टूट जाती हैं।

सबसे ज्यादा चिंता की बात है कि वर्तमान पीढ़ी कम कैल्शियम वाला आहार और विटामिन-डी की अपर्याप्त मात्रा ले रही है, जिससे उनमें हड्डियों का घनत्व कम और हड्डियां कमजोर हो रही हैं। अमेरिकन सोसाइटी फॉर बोन एंड मेडिकल रिसर्च में पेश किए गए एक शोधपत्र में बताया गया है कि प्रतिदिन केवल एक पेय पदार्थ जैसे कोला पीने वाली महिलाओं की तुलना में प्रतिदिन तीन कोला पीने वाली महिलाओं के कूल्हे की हड्डियों का घनत्व 2. 3 से 5.1 प्रतिशत तक कम पाया गया।

बड़ी उम्र में होने वाले इस रोग से बचपन में ही बचाव किया जा सकता है। अगर बच्चों को खासकर किशोरावस्था में प्रतिदिन 1200 से 1300 मिलीग्राम कैल्शियम दिया जाए तो वे इस बीमारी से बच सकते हैं। लेकिन आंकड़ों के अनुसार, आम तौर पर बच्चे 700 से 1000 मिलीग्राम कैल्शियम का ही सेवन करते हैं।


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हर लड़की में जरूर छुपे होते हैं ये खास गुण


हर इंसान में कई सारे अलग-अलग गुण होते हैं। हर व्यकि्त का स्वभाव भिन्न होता है। इसी तरह हर लड़की में कई सारे गुण होते हैं। लड़कियां में एक खासीयत होती है कि वो चाहे तो पलभर में ही किसी को इम्प्रेस कर सकती हैं। लेकिन ज्यादातर लड़कियां अपने इन गुणों को सामने नहीं लातीं। तो हम आपको उन गुणों के बारे में बता रहे हैं जिनको लड़कियां हमेशा छुपा कर ही रखती हैं।


रोमांटिक होना हर लड़की के अंदर छुपा होता है। हर लड़की को रोमांस करना पसंद होता है।लेकिन अधिकतर लड़कियां खुद को अन रोमांटिक ही बताती हैं। ऐसा इसलिए ताकी लोगों को लगे कि वह बेहद शरीफ और शर्मीली लड़़की है। लड़कियों में किफायती या कहें कि पैसों को बचाने के आदत होती है। लड़कियों में पैसे बचाने का एक खास गुण होता है। लेकिन दूसरों के पैसे खर्च कराने में ये सबसे आगे रहती हैं। लड़कियों को पार्टी करना भी बहुत पसंद है। लड़कियों को पार्टी में जाना और देर रात तक घूमना बहुत अच्छा लगता है। लेकिन ये हमेशा यही कहती हैं कि उन्हें देर रात पार्टी में जाना पसंद नहीं है। हर लड़की के अंदर एक तेज-तर्रार महिला छिपी होती है। लड़कियां उनके साथ गलत करने वालों को सबक सिखाना जनती हैं।


हर लड़की एक अंदर दया भाव और ममता होती है। छोटे बच्चों को देखते ही वो इनको प्यार करने लगती हैं। दिल पिघल जाता है। लेकिन ये हमेशा यही कहती हैं कि बच्चे पसंद नहीं हैं। लड़कियां में अात्म विश्वास की कोई कमी नहीं होती। इस लिए लड़किया आपना हर काम खुद ही कर सकती हैं।लेकिन ये दुनिया की नजरों में कमजोर बने रहना चहाती हैं ताकि उन्हें कोई काम स्वयं न करना पड़े। दूसरों को सामने ये अबला बन जाती हैं ताकि इनका काम आसानी से हो जाए। लड़कियां कभी आसानी से किसी की भी तारीफ नहीं करतीं। ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसा करके वो खुद को कमतर साबित नहीं करना चाहती। उन्हें हर चीज सिर्फ अपनी ही अच्छी लगती है।


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जानिए ज्यादा उम्र की महिलाओं को क्यों पसंद करते हैं लड़के


नए जमाने के नए लड़के अब कमसिन आदाओं वाली और नखरे दिखाने वाली लड़किओं को ज्यादा पसंद नहीं करते। नए जमाने के नए लड़के अपने से बड़ी उम्र की औरतों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। इसके पीछे के कारण भी कुछ अजब हैं। तो आइये हम आपको बताते हैं कि कम उम्र के लड़के ज्यादा उम्र वाली लड़कियों को क्यों पसंद करते थे।

हर लड़का अपनी पत्नी में अपनी मां जैसी महिला को ढूढता है। हर लड़का चाहता है कि उसकी पत्नी उसकी मां की तरह हो। उसकी पत्नी मां की तरह ही उसकी निस्वार्थ भाव से प्यार करे और उसका ध्यान रखे। लड़के से बड़ी उम्र की महिलाएं अपने पति और परिवार का ज्यादा ध्यान रखती हैं। बड़ी उम्र की महिलाएं परेशान पति को इमोशनल सपोर्ट करती है। जबकि कम उम्र की लड़कियों से ये सपोर्ट मिल पाना मुश्किल है। इसलिए मर्द बड़ी उम्र की महिलाओं को ज्यादा पसंद करते हैं।

बड़ी उम्र की महिलाएं आम तौर पर अपने रिश्तों और कर्तव्यों प्रति ईमानदार रहती हैं और अपने पति को पूरी तरह से प्यार करती हैं। क्योंकि ज्यादा उम्र की महिल के पास कई तरह के तजुर्बे कर चुकी होती हैं इसलिए वो रिश्तों का महत्व समझती हैं। लड़के चाहते हैं कि उसकी पत्नी आत्मनिर्भर हो घर चलाने में उसका साथ दे सके, जॉब करती हो। ऐसी महिलाएं पति की जेब पर भारी नहीं पड़ती। इसी लिए लड़के ज्यादा उम्र की कामकाजी महिलाएं ही पसंद करते हैं।

हर लड़का चाहता है कि उसकी पत्नी जिम्मेदार हो। घर और बाहर के कामों को वह उसका हाथ बटाएं। लड़के ऐसी महिलाओं को ज्यादा पसंद करते हैं, क्योंकि घर की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ लड़कों के ऊपर ही नहीं रहती। ज्यादा उम्र की लड़कियां आत्मविश्वास से भरपूर होती हैं। बड़ी उम्र की लड़कियों की खास बात ये होती है कि उनमें आत्मविश्वास भरपूर होता है। जिन महिलाओं की शादी देर से होती है उन्होंने जीवन के तमाम अनुभव अकेले ही लिए होते हैं।इस लिए आत्मविश्वास इनमें अधिक देखा जाता है। एक शोध में भी कहा गया है कि देर से शादी करने वाली औरतों की शादी कम उम्र वाली औरतों की अपेक्षा लंबे समय तक चलती है। इसके पीछे अनुभव का बहुत बड़ा हाथ है।


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हर दुल्हन की पहली पसंद होते हैं इन कलर के लहंगे


वैसे तो दुल्हन के लहंगे का पारंपरिक रंग लाल ही होता है लेकिन फैशन के दौर में लहंगे के रंग बदलने लगे हैं। अगर आप अपनी शादी में नए रंगों के साथ एक्सपेरिमेंट करने के मूड में हैं तो आप लाल रंग के लहंगे के अलावा किसी अन्य रंग का लहंगा भी पहन सकती हैं। लेकिन शादी के लंहगे में लाल रंग सदाबाहर रहेगा इसकी जगह कोई नहीं ले सकेगा। इंडियन शादियों में लाल रंग कभी भी चलन से बाहर नहीं हो सकता। कई ऐसे रंग हैं जिन्हें दुल्हन अपने शादी खास मौके पर पहनना पसंद करेगी। तो आइए आपको बताते हैं कि लाल रंग के लहंगे के अलावा किस रंग के लंहगे दुल्हन की पहली पसंद होते हैं, ऐसे ही कुछ टॉप सदाबहार ब्राइडल रंग।

मिडनाइट ब्लू दुल्हन के लहंगे के लिए एक परफैक्ट रंग है, यह रंग ब्राइडल लुक को रॉयल होने का एहसास करवाता है। इस रंग का प्रयोग दुल्हन गोल्ड और सिल्वर रंग दोनों के साथ कर सकती हैं। इनके अलावा यह सफेद, लाल, ऑरेंज, गुलाबी और क्रीम रंगों के साथ भी खूबसूरत नजर आता है। तो आप अपने ब्लू रंग के लहंगे को इन रंग के साथ मैच करके अपनी शादी की दिन एक खूबसूरत रॉयल लुक पा सकती हैं।

गुलाबी रंग लड़कियों का सबसे पसंदीदा होता है, और अगर लड़कियों की शादी की लंहगा ही गुलाबी हो तो बता ही कुछ अलग होगी।गुलाबी रंग की अपनी एक अलग ही पहचान है। लड़कियां अपनी शादी पर गुलाबी रंग के पेस्टल शेड से लेकर नियॉन शेड तक को काफी पसंद कर रही हैं। गुलाबी रंग के गहरे शेड्स पर आमतौर पर सिल्वर ज्वेलरी अच्छी लगेगी, जबकि गुलाबी रंग के हल्के शेड्स पर गोल्ड ज्वेलरी काफी आकर्षक लगेगी।

गोल्डन रंग हमेशा से ही रॉयल रंग रहा है। दुल्हन हमेशा से ही गोल्ड की ज्वेलरी आदि पहनती आईं हैं। गोल्डन रंग का लहंगा भी आप पहन सकती हैं। सही टेक्स्चर में गोल्ड का चुनाव कर आप एक रॉयल लुक पा सकती हैं। इसके अलावा शादियों में लाल रंग कभी भी चलन से बाहर नहीं हो सकता। यदि आप इस सदाबहार ब्राइडल रंग से अपनी खूबसूरती पर चार चांद लगाना चाहती हैं तो लंबी ट्रेल स्कर्ट के साथ पीठ की ओर पहने गए नेकपीसेस को ट्राई करें। रेड और गोल्डन रंग के लहंगा पहनकर आप एक शानदानर ब्राइडल लुक पा सकती हैं।


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शादी के लिए लड़की देखने जाएं तो ध्यान रखें इन बातों का


अगर आप शादी के लिए पहली बार किसी लड़की को देखने या उसके घर वालों से मिलने के लिए जा रहे हैं तो इस दौरान आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। जब आप लड़की देखने जाएंगे तो लड़की और उसके घर वालों को आप से कुछ उम्मीदें होगीं। आपकी हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी, आपको निर्णायक नजरों से देखा जाएगा। ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखें इससे आप लड़की और उसे घर वालों को पसंद आएंगे।

लड़की से मिलने से पहले लड़की और उसके घरवालों के बारे में पूरी जानकारी ले लें और उनकी पसंद और नापसंद के बारे में थोड़ा बहुत जान लें, इससे अच्छा इंप्रेसन पड़ेगा। लड़की के घर के बच्चों का नाम पहले ही पता कर लें इससे लोगों पर इंप्रेस होगें। लड़की से मुलाकात के दौरान कपड़ा ऐसा पहने जिसमें कि आप पूरी तरह सहज हों।कपड़े ज्यादा टाइट, रंग-बिरंगे न हों। ज्यादा फैशन के चक्कर में ना पड़ें जो आप की बॉडी पर अच्छा लगे वो कपड़े पहनकर मुलाकात करें। इससे आपके अंदर आत्मविश्वास बना रहेगा।

जब हम शादी जैसे अहम फैसले के लिए किसी लड़की से पहली बार मिलते हैं तो हम हड़बड़ाहट में बहुत कुछ बोल जाते हैं।याद रखें पहली ही मुलाकात में खुद से जुड़ी सारी बातें न करें, इससे बचने के लिए सोच समझकर ही बोलें। कहीं ऐसा ना हो कि आपकी किसी बात का मतलब ससुराल वाले गलत निकाल लें।सबसे आत्मविश्वास के साथ मिलें। आपके बैठने और चलने का तरीका आत्मविश्वास से भरा होना चाहिए। इससे लड़की के घर वालों के मन में आपके दमदार व्यक्तित्व की छवि बनेगी।

सबके साथ बैठकर अपने फोन को बार-बार चैक न करें। लेकिन फोन को भूल भी ना जाएं हो सकता है आपका कोई जरूरी मैसेज या कॉल आ रही हो। या फिर आपकी होने वाली पत्नी माहौल को हल्का बनाने के लिए आपको कुछ जोक्स भेज रही हों या फिर आप से कुछ बाते कहना चाहा रही हो जो बातें सबके सामने नहीं कह सकती। इसलिए नोटिफिकेशन पर नजर रखिए। आपको लोग बहुत ही निर्णायक ढंग से देखेंगे और सवाल पूछेंगे। ऐसे में शांति से उनके सवालों का जवाब दें। ऊपर बताई गई इन बातों का ध्यान रखेंगे तो आप सबको बहुत पसंद आएंगे और बाकी की चीजें भी अच्छी ही होंगी।


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जाने कैसे रखें प्लांट्स का ख्याल


समर सीजन में लोग घरों को इस तरह डेकोरेट करने की कोशिश करते हैं, ताकि घर ठंडक का अहसास देने के साथ दिखने में भी कूल-कूल फील दे, लेकिन इस सीजन में प्लांट्स का रखरखाव करना भी एक मुश्किल टास्क होता है, लिहाजा घर को डेकोरेट करने के साथ उनके प्रिजर्वेशन का भी पूरा ध्यान रखना पड़ता है। इन दिनों शहरवासी भी अपने घरों में कूल लुक देने के लिए डिफरेंट प्लांट्स लगा रहे हैं। शहर की नर्सरीज में अब शहरवासियों की आवाजाही बढऩे लगी है। ऐसे कई प्लांट्स हैं, जो आपके घर को कूल लुक देने में आपकी मदद कर सक ते है। पत्रिका प्लस के जरिए जाने एक्सपर्ट की राय और अपने आशियाने को बनाएं ब्यूटीफुल और कूल।

लगाए ये फ्लॉवर्स और प्लांट्स
राजस्थान यूनिवर्सिटी (RU) के उद्यान और नर्सरी विभाग के ऑफिसर इंचार्ज राम अवतार शर्मा ने बताया कि घरों को खूबसूरत बनाने के लिए क्रोटोनस, रोज,पेनका, होली हॉक, गुडहल, बेलिया बेगन, जेसमीन और सिब्रा जैसे फ्लार लगा सकते हैं। इसी तरह प्लांट्स की बात करें, तो क्रोटोन, डिकेनवेकिया, पाम , फोलिएज, पैनाकाज, और पोनिसिटिया के जरिए घर की रौनक बढ़ा सकते हैं।

छोटे गार्डन्स पर फोकस
शहर में अब छोटे गार्डन्स पर फोकस बढऩे लगा है। लोग जहां किचन गार्डन और टेरेस गार्डन के प्रति इंटरेस्ट दिखा रहे हैं। वहीं विंडो गार्डन और हैंगिंग प्लांट्स के जरिए भी घर को खूब सूरत बनाने की कोशिश की जा रही है।

कै से करें बचाव
-धूप से बचाने के लिए ग्रीन नेट कर्टेन का यूज करें।

-अल्टरनेट डेज पर पौधों को पानी दें।

-पौधों की गुण वत्ता बढ़ाने के लिए फर्टिलाइजर का उपयोग करें।

-पाम के लिए तेज धूप हानि कारक है।

Herbs
तुलसी , मिंट, चाइव, डिल और फेनल जैसी हब्र्स के जरिए भी जहां घरों की खूब सूरत बढ़ाने के साथ उपयोग में भी ली जा सकती है।


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जानिए लाल और मीठा तरबूज पहचानने के सही तरीके


तरबूज का नाम आते ही दिमाग में तरो-ताजगी का अहसास होने लगता है। गर्मियों के शुरुआत होते हैं हम तरबूज के मार्केट में आने का बेसब्री से इंतजार करने लगते हैं। तरबूज में पानी सबसे ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। तरबूज शरीर को हाइड्रेट रखता है आपके शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता और आपके वजन को भी कम करने में मदद करता है। गर्मियों के सीजन में तरबूज कई तरह की बीमारियों से बचाता है। लेकिन एक अच्छे, मीठे, लाल और स्वादिष्ट तरबूज की पहचान कर पाना हर किसी के बस की बात नहीं होती। तरबूज अगर मीठा न हो तो सारा स्वाद खराब हो जाता है। तो हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बता रहे हैं जिससे लाल और मीठा तरबूज खरीदने में मदद मिलेगी।


पीले दाग वाला तरबूज अच्छा होता है। जब भी कभी आप तरबूज खरीदने तो उसपर पड़े पीले दाग देखना न भूलें। कई लोग पूरा हरा तरबूज खरीद लेते हैं और समझते हैं कि हरा तरबूज अच्छा होता है, लेकिन हरा तरबूज कई बार अंदर से कच्चा निकलता है और लाल नहीं होता। तरबूज पर दिखने वाले पीले दाग इस बात की ओर इशारा करते हैं कि तरबूज को खेतों में धूप में अच्छे से पकने का समय मिला है।


भारी तरबूज भी अंदर से अच्छा निकलता है। तरबूज खरीदते वक्त दो एक ही साइज के तरबूजों को हाथ में लेकर दोनों का भार देख लें, आपको जिस तरबूज का भार ज्यादा लगे उसे ही खरीदें, क्योंकि जो तरबूज लाल और मीठा होगा वो हमेशा भारी होता है। अगर पीले दाग वाले तरबूज नहीं मिल रहे तो गहरे हरे रंग के तरबूज को खरीदना चाहिए। ध्यान रखें जो तरबूज देखने में भद्दे लग रहे हैं वो खरीदे क्यों कि चमकदार दिखने वाले तरबूज हमेशा अंदर से कच्चे निकलते हैं। जबकि भद्दे दिखने वाले तरबूज ज्यादा रसीले और मीठे होते हैं। ओवल शेप का तरबूज हमेशा अच्छा और मीठा होता है। जबकि दूसरे शेप के तरबूज कच्चे होते हैं।


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गर्मी में झुलसी त्वचा की यूं करें देखभाल


गर्मियों के मौसम में चिलचिलाती धूप तथा यूवी रेडिएशन की वजह से त्वचा में नमी कम हो जाती है, जिस वजह से त्वचा रूखी, मुरझाई तथा बेजान हो जाती है और त्वचा का रंग सामान्य से ज्यादा गहरा या काला हो जाता है। इस समय सूर्य की किरणों से त्वचा के बचाव के लिए सनस्क्रीन का लेप काफी प्रभावी माना जाता है। इसके अलावा टोपी पहनना, छाता लेकर चलना तथा दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक घर में रहना वैकल्पिक उपाय माने जाते हैं। अगर आपको भरी दोपहर में घर से निकलना ही पड़े तो सूर्य की गर्मी से बचाव करने वाली सनस्क्रीन बाजार में उपलब्ध है। सूर्य की गर्मी तथा वायु प्रदूषण से चेहरे पर कील -मुहांसे, छाइयां, काले दाग, ब्लैकशेड तथा पसीने की बदबू की समस्या हो जाती है।

कैसे झुलसती है त्वचा
सूर्य के सीधे प्रभाव में आने से त्वचा में मेलेनिन की मात्रा बढ़ जाती है जो कि त्वचा की रंगत को प्रभावित करती है। मेलेनिन वास्तव में सूर्य की हानिकारक अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से त्वचा की रक्षा करता है। मेलेनिन जब त्वचा के निचले हिस्सों में पैदा होने के बाद इसके ऊपरी बाहरी हिस्सों तक पहुंचता है तो त्वचा की रंगत काली पड़ जाती है।

सूर्य की गर्मी से झुलसी त्वचा की रंगत को दुबारा हल्की रंगत में लाने के लिए त्वचा के अनुरूप फेशियल स्क्रब का उपयोग कर सकते हैं। यदि आपकी त्वचा शुष्क हो तो सप्ताह में मात्र एक बार ही स्क्रब का उपयोग करना चाहिए, लेकिन तैलीय त्वचा में इसका उपयोग दोहरा सकते हैं।

स्क्रब को त्वचा पर आहिस्ता से गोलाकार स्वरूप में उंगलियों के सहारे लगाना चाहिए तथा कुछ समय बाद इसे ताजे सादे पानी से धो डालना चाहिए। इससे त्वचा की मृत कोशिकाएं हट जाती हैं जिससे त्वचा में निखार आ जाता है।

रसोई में रखे उत्पादों से आसानी से स्क्रब बनाया जा सकता है। वास्तव में रसोई में रखेे अनेक उत्पादों को झुलसी त्वचा को ठीक करने के लिए सीधे तौर पर लगाया जा सकता है।

-दिनभर बाहर रहने पर शाम को चेहरे पर कुछ समय तक बर्फ के टुकड़ों को रखिए। इससे सनबर्न से हुए नुकसान से राहत मिलेगी तथा त्वचा में नमी बढ़ेगी।

-चेहरे पर टमाटर का पेस्ट लगाने से भी गर्मियों में झुलसी त्वचा को काफी सुकून मिलता है।

-सनबर्न के नुकसान को कम करने के लिए चेहरे को बार बार ताजे, साफ तथा ठंडे पानी से धोइए।

-गुलाब जल में तरबूज का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने के 20 मिनट बाद ताजे पानी से धो डालने से सनबर्न का असर खत्म हो जाएगा।

-एक चम्मच शहद में दो चम्मच नींबू का रस मिलाइए तथा आधा घंटा बाद ताजे साफ पानी से धो डालिए। इसे प्रतिदिन चेहरे पर लगाइए।

-तैलीय त्वचा से झुलसी त्वचा को राहत प्रदान करने के लिए खीरे की लुगदी को दही में मिलाइए और इस मिश्रण को 20 मिनट बाद ताजे स्वच्छ पानी से धो डालिए।

-सूर्य की किरणों से झुलसी त्वचा पर कॉटनवूल की मदद से ठंडा दूध लगाएं। इससे त्वचा को न केवल राहत मिलेगी, बल्कि त्वचा कोमल बनकर निखरेगी। लंबे समय तक इसका उपयोग करने से त्वचा की रंगत में निखार आएगा।

-मुट्ठी भर तिल को पीसकर इसे आधे कप पानी में मिला लीजिए तथा दो घंटे तक मिश्रण को कप में रखने के बाद पानी को छानकर इससे चेहरा साफ कर लीजिए, झुलसी त्वचा में फायदा होगा।


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तंत्र की खामियों से उपज है नीरव मोदी


एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश में भ्रष्टाचार खत्म करने की बात कर रहे हैं तो दूसरी तरफ देश के एक प्रमुख बैंक में 11400 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया है। लोग अभी ठीक से समझ भी नहीं पाए थे कि हीरों का व्यवसाय करने वाले नीरव मोदी ने इतनी बड़ी रकम के घोटाले को अंजाम कैसे दिया कि रोटोमैक पेन कम्पनी के मालिक विक्रम कोठारी के भी 5 सरकारी बैंकों के लगभग 500 करोड़ का लोन लेकर फरार होने की खबरें आने लगीं हैं।

हो सकता है कि आने वाले दिनों में ऐसे कुछ और मामले सामने आएँ। क्योंकि कुछ समय पहले तक बैंकों में केवल खाते होते थे जिनमें पारदर्शिता की कोई गुंजाइश नहीं थी और ई बैंकिंग तथा कोर बैंकिंग न होने से जानकारियाँ भी बाहर नहीं आ पाती थीं।

लेकिन अब अन्तराष्ट्रीय स्तर पर बैंकों के लिए मौद्रिक नीतियों का निर्धारण करने वाला बैंक आँफ इंटरनेशनल सैटलमेन्ट ने बैंकों में पारदर्शिता के लिए कुछ नियम बनाए हैं जिनके कारण बैंकों के सामने अपने खातों में पारदर्शिता लाने के सिवा कोई चारा नहीं बचा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के भी इस साल जनवरी में सूचना देने के अपने फार्मेट में बदलाव करने से इस घोटाले का मार्च तक सामने आना वैसे भी लगभग निश्चित ही था। ऐसा नहीं है कि देश के किसी बैंक में कोई घोटाला पहली बार हुआ हो।

नोटबंदी के दौरान बैंकों में जो हुआ वो किसी से छिपा नहीं है, आम आदमी बाहर लाइनों में खड़ा रहा और अन्दर से लेने वाले नोट बदल कर ले गए। इसी प्रकार किसी आम आदमी या फिर किसी छोटे मोटे कर्जदार के कर्ज न चुका पाने की स्थिति में बैंक उसकी सम्पत्ति तक जब्त करके अपनी रकम वसूल लेते हैं लेकिन बड़े बड़े पूंजीपति घरानों के बैंक से कर्ज लेने और उसे नहीं चुकाने के बावजूद उन्हें नए कर्ज पे कर्ज देते जाते हैं। नीरव मोदी के मामले में, पीएनबी जो कि कोई छोटा-मोटा नहीं देश का दूसरे नम्बर का बैंक है, ने भी कुछ ऐसा ही किया।

नहीं तो क्या कारण है कि २०११ से नीरव मोदी को पीएनबी से बिना किसी गैरेन्टी के गैरकानूनी तरीके से बिना बैंक के साफ्टवेयर में एन्टरी कर लेटर आँफ अन्डरटेकिंग (एलओयू) जारी होते गए और इन ७ सालों से जनवरी २०१८ तक यह बात पीएनबी के किसी भी अधिकारी या आरबीआई की जानकारी में नहीं आई? हर साल बैंकों में होने वाले ऑडिट और उसके बाद जारी होने वाली ऑडिट रिपोर्ट इस फर्जीवाड़े को क्यों नहीं पकड़ पाई?

क्यों इतने बड़े बैंक के किसी भी छोटे या बड़े अधिकारी ने इस बात पर गौर नहीं किया कि हर साल बैंक से एलओयू के जरिये इतनी बड़ी रकम जा तो रही है लेकिन आ नहीं रही है? यहाँ यह जानना रोचक होगा कि बात एक या दो एलओयू की नहीं बल्कि १५० एलओयू जारी होने की है। इससे भी अधिक रोचक तथ्य यह है कि एक एलओयू ९०- १८० दिनों में एक्सपायर हो जाता है और अगर कोई कर्ज दो साल से अधिक समय में नहीं चुकाया जाता तो बैंक के ऑडिटर्स को उसकी जानकारी दे दी जाती है तो फिर नीरव मोदी के इस केस में ऐसा क्यों नहीं हुआ?

इतना ही नहीं एक बैंक का चीफ विजिलेन्स अधिकारी बैंक की रिपोर्ट बैंक के मैनेजर को नहीं बल्कि भारत के चीफ विजिलेन्स कमिशन को देता है लेकिन इस मामले में किसी भी विजिलेन्स अधिकारी को ७ सालों तक पीएनबी में कोई गड़बड़ दिखाई क्यों नहीं दी? इसके अलावा हर बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टरस की टीम में एक आरबीआई का अधिकारी भी शामिल होता है लेकिन उन्हें भी इतने साल इस घोटाले की भनक नहीं लगी?

आश्चर्य है कि जनवरी २०१८ में यह घोटाला सामने आने से कुछ ही दिन पहले नीरव मोदी को इस खेल के खत्म हो जाने की भनक लग गई जिससे वो और उसके परिवार के लोग एक-एक करके देश से बाहर चले गए? लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि नीरव मोदी को नीरव मोदी बनाने वाला कौन है? क्या कोई किसान या फिर आम आदमी नीरव मोदी बन सकता है? जवाब तो हम सभी जानते हैं। ऐसा नहीं है कि हमारे देश के बैंकों में कर्ज देने का सिस्टम न हो लेकिन कुछ मुठ्ठी भर ताकतों के आगे पूरा सिस्टम ही फेल हो जाता है।

जिस प्रकार पीएनबी के तत्कालीन डिप्टी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी सिंगल विंडो आँपरोटर मनोज खरात को गिरफ्तार किए जाने के बाद यह जानकारी सामने आई है कि पीएनबी के कुछ और अफसरों की मिलीभगत से इस घोटाले को अंजाम दिया गया, यह स्पष्ट है कि सारे नियम और कानून सब धरे के धरे रह जाते हैं और करने वाले हाथ साफ करके निकल जाते हैं क्योंकि आज तक कितने घोटाले हुए, कितनी जाँचे हुईं, अदालतों में कितने मुकदमे दायर हुए, कितनों के फैसले आए? कितने पकड़े गए? कितनों को सजा हुई?

आज जो नाम नीरव मोदी है कल वो विजय माल्या था। दरअसल आज देश में सिस्टम केवल बैंकों का ही नहीं न्याय व्यवस्था समेत हर विभाग का फेल है इसलिए सिस्टम पस्त लेकिन अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। जीवन में आगे बढ़ने के लिए शार्ट कट्स को चुनने वाला हर शख्स आज नीरव मोदी बनने के लिए तैयार बैठा है लेकिन जब तक सिस्टम के अन्दर बैठा व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह ईमानदारी से करेगा वो उसे नीरव मोदी नहीं बनने देगा।

इसलिए नीरव मोदी जैसे लोग जो इस देश के अपराधी हैं, उस आम आदमी के गुनाहगार हैं जिनकी गाढ़ी मेहनत की कमाई से इस राकम को वसूला जाएगा, उससे अधिक दोषी तो सिस्टम के भीतर के वो लोग हैं जो नीरव मोदी जैसे लोगों को बनाते हैं। इसलिए जब तक इन नीरव मोदी के "निर्माताओं" पर कठोर कार्यवाही नहीं की जाएगी देश में नए चेहरों और नए नामों से और नीरव मोदी पैदा होते रहेंगे।

डॉ नीलम महेंद्र


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Experts Advice: शादी के दिन मेकअप की इन बड़ी गलतियों को ऐसे करें अवॉइड


शादी के दिन हर लड़की की खूबसूरत दिखने की और सबके आकर्षण का केंद्र बनने की ख्वाहिश होती है। इस दिन सबसे अच्छा दिखने के लिए ज्यादा मेकअप की लीपापोती नहीं करें और किसी भी तरह के तनाव से भी दूर रहने की कोशिश करें। 'यूरो क्रोमा इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्मेटोलाजी' के सह-संस्थापक नलिन वर्मा और सौंदर्य विशेषज्ञ पुनीति ने इस संबंध में ये सुझाव दिए हैं...

-दुल्हन के बेहतर लुक का मुख्य मकसद पूरा लुक सिंपल रखते हुए भी बेहद खूबसूरत दिखना होता है, जैसा कि भारतीय दुल्हनें भारी कपड़ों और गहनों से लदी होती हैं, तो ऐसे में मेकअप नैचुरल रखना ही बेहतर होगा।

-अगर आप एक परंपरागत दुल्हन का लुक चाहती हैं, तो सिंदूरी, लाल, कोरल रेड, गहरे लाल और गहरे गुलाबी रंग की लिपस्टिक लगाएं। पेस्टल या न्यूड रंगों के लिप कलर के इस्तेमाल से बचें।

- आंखों या होंठ में से किसी एक को हाईलाइट करें न कि दोनों को। आजकल नए ब्राइडल मेकअप स्टाइल चलन में हैं। समारोह के हिसाब से होंठों को लिप ग्लॉस से शाइनी लुक दें या मैट लिपस्टिक का इस्तेमाल करें।

- गालों पर ब्लश लगाने के लिए गुलाबी, लाल और नारंगी रंग के ब्लश ज्यादातर दुल्हनों की पसंद होते हैं।

- आंखों की बरौनियों को बेहतर लुक देने के लिए मस्कारा बढिय़ा विकल्प है।

- टिकाऊ मेकअप के लिए शुरुआत अपने चेहरे को अच्छी तरह से साफ करने से करें और फिर चेहरे को अच्छे से पोंछ लें और यह सुनिश्चित कर लें कि चेहरे पर कहीं तेल या कोई गंदगी का निशान तो नहीं रह गया है।

- भारतीय दुल्हनों को आंखों पर मेकअप कराना पसंद है, क्योंकि यह उनकी लाल, गहरे गुलाबी या हरे लहंगे, घाघरा या भारी साडिय़ों के ऊपर जंचता है, तो अगर आप बिना कोई जोखिम लिए आंखों के मेकअप को लेकर प्रयोग करना चाहती हैं, तो इन रंगों के परिधानों का चयन करें।

- पलकों पर सुनहरे या हल्के गुलाबी शेड वाले आईशैडों का इस्तेमाल करें और स्मोकी लुक के लिए बाहरी हिस्से पर थोड़ा सा चारकोल शैडो का इस्तेमाल कर सकती हैं।

- भौंह के बोन्स पर आप चाहें, तो सिल्वर के बजाय गोल्डन आईशैडो का इस्तेमाल कर सकती हैं।

- अगर आप मेकअप आर्टिस्ट की मदद से तैयार होने की योजना बना रही हैं, तो फिर आप उन्हें स्पष्ट कर दें कि आपकी जरूरत क्या है या आप कैसी दिखना चाहती हैं। पहले से ही उन्हें बता देने से आपको मनचाहा लुक पाने में मदद मिलेगी। अगर मेकअप आर्टिस्ट नया है, तो शादी समारोह से पहले आप एक बार उससे मेकअप कराकर जरूर देख लें, ताकि बाद में किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं हो।

- शादी के मौके पर आप तनाव से जितना दूर रहे, उतना ही आपके लिए अच्छा होगा। शादी की तैयारी व व्यस्तता के चलते ऐसा करना मुश्किल है, लेकिन तनाव आपके चेहरे की सारी चमक छीन सकता है और आपकी खूबसूरती में कहीं न कहीं कमी नजर आएगी।

- तनाव या पर्याप्त नींद नहीं आने से अगर आंखें सूज जाती हैं, तो सूजन कम करने के लिए कैमोमाइल टी बैग का प्रयोग करें, क्योंकि आम टी बैग के इस्तेमाल से त्वचा पर दाग पड़ सकता है।


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ऐसे लड़कों को एक ही झटके में छोड़ देती हैं उनकी गर्लफ्रेंड


अब वो जमाना नहीं रहा, जब बॉयफ्रेंड के गलत होने पर भी लड़की उसे छोडऩे के बारे में सौ बार सोचती थी। अब जमाना पूरी तरह से बदल गया है। जी हां, बॉयफ्रेंड की गलत हरकत को लड़की न नंजरअंदाज करती है, ना ही उसे छोडऩे हिचकिचाती है। दरअसल, किसी भी रिश्ते में विश्वास एक मजबूत कड़ी होती है। जब ये कड़ी टूटती है, तो रिश्ते बिखर जाते हैं। लेकिन यहां बात सिर्फ विश्वास की नहीं, बल्कि लड़कों की हरकतों से है...उनकी गंदी बातों से है...उनके रवैये से है। अक्सर लड़के ऐसी भूल कर बैठते हैं, जिसके चलते उनकी गर्लफ्रेंड उन्हें हमेशा हमेशा के लिए छोड़ के चली जाती है। यदि आप चाहते हैं कि आपकी गर्लफ्रेंड आपको छोड़ के न जाए, तो आप अपनी आदतों को दुरुस्त कर लें। बेशक, आपकी पार्टनर आपको बेइंतहा प्यार करती है, लेकिन पता नहीं कब आप कुछ ऐसा कर जाएं, जो उसे आपको छोडऩे के लिए मजबूर कर दे। अब सवाल यह उठता है कि आखिर वो कौन-सी वहजें हैं...बातें हैं, जिनके चलते बेइंतहा प्यार करने के बावजूद लड़कियां अपने बॉयफ्रेंड्स को एक ही झटके में छोड़ देती हैंं...यहां पेश हैं वो खास बातें, खास लड़कों के लिए...


- अपनी गर्लफ्रेंड को अहमियत देना कम न करें। उन्हें यह फील न होने दें कि उनकी कोई इम्पॉर्टेंस नहीं है। यदि आप कोई डिसीजन अकेले लेते हैं, तो यह बात आपकी गर्लफ्रेंड को चुभ सकती है।

- लड़के अपनी गर्लफ्रेंड्स को कितना महंगा गिफ्ट देते हैं, यह बात मायने नहीं रखती...बल्कि यह मायने रखता है कि लड़के अपनी पार्टनर के साथ क्वॉलिटी टाइम बिता रहें या नहीं.. उनके लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं या नहीं...यदि ऐसा नहीं है, तो रिश्ते में दूरी आना निश्चित है।

- अक्सर लड़के अपनी पार्टनर को अपनी जरूरतों के हिसाब से प्यार जताते हैं, जबकि महिला मित्र की जरूरतों को तवज्जो नहीं देते। ऐसे लड़कों से लड़कियां दूर होने लगती हैं, यहां तक लड़कों के इस रवैये के चलते वो उन्हें छोड़ भी देती हैं।
-ज्यादातर लड़के अपनी गर्लफ्रेंड्स से बातें छिपाने में माहिर होते हैं और जब सच्चाई सामने आती हैं, तो सब कुछ खत्म हो जाता है। लड़कों की ये सबसे बड़ी कमजोरी है, जो उन्हें अपनी पार्टनर से अलग कर देती है।

- जो लड़के अपनी गर्लफ्रेंड की तुलना दूसरी लड़कियों से करते हैं उनकी गर्लफ्रेंड को ये बात बुरी लगती है। एक-दो बार तो ये सब ठीक लगता है, लेकिन बार-बार ऐसा करने वाले लड़कों से उनकी पार्टनर दूरी बनाने में समय नहीं लगाती हैं।

- हर लड़की को अपनी तरीफ सुनना अच्छा लगता है और वो अपने पार्टनर से इस बात की आशा भी करती है। खासकर, कुछ ऐेसे मौके होते हैं, जैसे- जब कुछ नया पहनें, कुछ नया करें...। यदि लड़के ऐसा नहीं करते या ऐसा करने से बचते हैं, तो यह आपके रिश्ते में दरार ला सकता है। तो फिर देर किस बात की...यदि आप अपने पार्टनर की तरीफ नहीं करते, तो अब से ही शुरू कर दें अन्यथा यह आपके लिए निगेटिव भी हो सकता है। वैसे भी तरीफ करने में कौन-सा पैसा खर्च करना पड़ता है...वो आपसे जिस बात के लिए प्रशंसा चाह रही है...कर दो।


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डिजाइनर्स रीडवलप कर रहे हैं पुराने स्टाइल के वर्क, लहंगे में फिर चमकने लगा सलमा सितारा


वेडिंग सीजन में फिर से फैशन में सलमा सितारा वर्क लौट कर आया है। कई सालों से इस कला के कलाकारों को काम नहीं मिल रहा था, पर अब यह फिर से फैशन इंडस्ट्री में नए बदलावों के साथ आ रहा है। यंगस्टर्स खास तौर पर वेडिंग में सलमा सितारा वर्क के मॉडर्न स्टाइल को पसंद कर रहे हैं। सिटी डिजाइनर्स ने हैंडमेड वर्क पर प्रयोग करते हुए सलमा-सितारा वर्क का ट्रेंड ला दिया है। यह वर्क स्टाइल जरदोज के साथ फिर से लोगों की पसंद बना है। चमकीले धागे को बारीक सुई में लपेट, कपडे़ पर करिश्मा बनने की कला को जरदोजी कहा गया है और इस तरह के नए डिजाइन के वर्क मार्केट में खास असर छोड़ रहे हैं।

यूं आया बदलाव
साल 2000 में रेशम का काम ज्यादा होता था, लेकिन इस समय चांदला का काम ज्यादा चल रहा है। लखनऊ की जरी और जरदोजी का इस्तेमाल आमतौर पर लहंगों, साडिय़ों और सलवार सूट में ही होता है। लेकिन अब गाउन, जैकेट, शर्ट, पर्स और यहां तक कि जूतों के ऊपरी हिस्से में इस्तेमाल होने वाली जरी-जरदोजी की मांग बढ़ रही है। जरदोजी में कई तरह के काम किए जाते हैं, जैसे- रेशम में काम, करदाना मोती, कोरा नकसीस, सादी कसब आदि।
सादे कपड़े पर मोती रेशम के धागे से डिजाइन बनाया जाता है। वक्त के साथ चिकन पर भी जरदोजी के काम होने लगे हैं, जो विश्व प्रसिद्ध है। बनारसी साडि़यों पर भी जरदोजी के काम की मांग अब ज्यादा बढ़ गई है।

रीडवलपिंग पर फोकस
शहर में पुराने हैंडवर्क स्टाइल को रीडवलप करने का चलन बढ़ गया है। लोगों के पास पुराने स्टाइल के वर्क का कलेक्शन मौजूद है, जिन्हें नई डिजाइन के साथ तैयार करने में डिजाइनर्स काफी मेहनत कर रहे हैं। इस काम के लिए कई पुश्तैनी कारीगरों की मदद ली जा रही है, जिसके तहत इनकी ऑरिजिनल खूबसूरती को बरकरार रखा जा सके। यह वर्क लहंगे के साथ साडि़यों और सूट्स में भी सबसे ज्यादा यूज हो रहे हैं। कुछ डिजाइनर्स इस तरह के स्टाइल्स को फैशन शोज में भी डिस्प्ले कर चुके हैं।

-रीना भंडारी, डिजाइनर


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गोद लिए बच्चों पर अभिभावकों का अत्याचार, पढ़ें दिल दहलाने वाली सच्ची घटनाएं


मध्य प्रदेश के धार में रहने वाले हुकुम सिंह की तीन बेटियां थीं। वंश चलाने के ख्याल से उसकी पत्नी संजना ने उसे दूसरी शादी की सलाह दी। दूसरी पत्नी बनकर लक्ष्मी घर में आई। लेकिन इस बीच पहली पत्नी के एक बेटा हो गया। बड़े प्यार से उसका नाम रखा गया जयदीप। लेकिन इधर संजना के लिए पति का प्यार और लगाव लक्ष्मी से बर्दाश्त नहीं होता था। उसे लगता था कि जयदीप ही उसकी परेशानी की असली वजह है।

वह सोच ही थी कि बेटा न होने की वजह से ही हुकुम ने उससे शादी की थी, अब अगर बेटा न रहा, तो वह संजना पर ध्यान देना छोड़ देगा और सिर्फ उसे प्यार करेगा। एक दिन लक्ष्मी करीब डेढ़ साल के जयदीप को अपने कमरे में ले गई और उसके मुंह में कपड़ा ठूंस कर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने जब तलाशी ली, तो बच्चे की लाश उसके कमरे में मिली। लाश छुपाने के लिए उसने उस पर वजनी फर्शी और बिस्तर रख दिए थे। रात में वह लाश ठिकाने लगाने वाली थी। यह सच्ची घटना है। भरोसा नहीं होता कि महज जलन की वजह से किसी ने एक मासूम को मौत के घाट उतार दिया।

शर्मसार करती हैं ये घटनाएं...
कैसे कोई कर सकता है किसी मासूम पर अत्याचार? छोटे-से बच्चे की हत्या? क्या ममता नहीं जागती होगीे? हाथ नहीं कांपते होंगे? अंतरआत्मा धिक्कारती नहीं होगी? पिछले महीने घटी इन घटनाओं पर एकबारगी तो भरोसा नहीं होता...

गोंदा, झारखंड
तीन बेटियां होने के बावजूद एक दंपती ने खुद को नि:संतान बताते हुए एक दो साल का लडक़ा गोद लिया। एक दिन पड़ोसन ने देखा कि मासूम बच्चे को वे लोग मोमबत्ती से जला रहे हैं। उसने पुलिस को बताने की धमकी दी, तो उसके साथ भी मारपीट की गई। उसने पुलिस को बच्चे पर अत्याचार की सूचना दी। पालक पिता इस बात से इनकार कर रहा है, लेकिन यह भी साफ नहीं कर पा रहा कि उसने नि:संतान होने का झूठ क्यों बोला। बताया गया कि पालक बाप ने गोद लेने की प्रक्रिया में पड़ोसन को डरा-धमका कर कानून के सामने अपनी बहन के तौर पर पेश भी किया था।

टेक्सास, अमरीका
विदेश में रहने वाले भारतीय दंपती ने एक बच्ची को गोद लिया। एक रात को तीन साल की वह बच्ची गायब हो गई। बाद में उसका शव घर से दूर एक सुरंग में मिला। बताया गया कि दूध न पीने की सजा के तौर पर उसके पालक पिता ने उसे रात के तीन बजे बाहर खड़ा कर दिया था। बात नहीं मानने पर उसने बच्ची को जबरन दूध पिलाने की कोशिश की थी, जिसे सांस रुकने की वजह से बच्ची की मौत हो गई थी। लापरवाही कहें या कोई बुरा इरादा, बच्ची की जान चली गई।

समझनी होगी रिश्तों की अहमियत
कैसे स्वार्थ के चलते कोई उन बच्चों की जान ले या उनसे सौतेला व्यवहार कर सकता है, जिन्हें वह मां या बाप पुकारता है! मासूम बच्चों के साथ बुरा करने के बाद कैसे लोगों को नींद आती है? क्या उनमें इंसानियत बिल्कुल नहीं बचती? जबकि इंसानियत हर चीज से बड़ी है। रिश्तों की खूबसूरती उन्हें निभाने में है। फिर वह सगे हों या सौतेले या गोद लिए हुए। रिश्तों की अहमियत समझनी होगी।

खून के रिश्ते ही सब कुछ नहीं होते। इंसानियत भी कोई चीज होती है। ममता तो एक ऐसा भाव है, जो बच्चों के लिए खुद-ब-खुद उमड़ आता है। बच्चे तो बच्चे ही हैं।

दत्तक बच्चे का हक छीनना अपराध

सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट गुंजन चौकसे बताती हैं कि हिन्दू एडॉप्शन एंड मेंटीनेंस एक्ट, 1956 की धारा 20 के तहत बच्चों को गोद लेने वाले अभिभावकों से बड़े होने तक भरण-पोषण पाने का अधिकार है। सभी मामलों में भरण-पोषण में भोजन, कपड़े, रहने की जगह, शिक्षा और चिकित्सकीय सुविधा और इलाज शामिल है। इस एक्ट के मुताबिक, बच्चों को गोद लेने वाले परिवार में जैविक बच्चों की तरह सारे अधिकार मिलेंगे, लेकिन वे अपने जैविक परिवार में संपत्ति समेत सारे अधिकार खो देंगे। हिन्दू एडॉप्शन एंड मेंटीनेंस एक्ट, 1956 के मुताबिक ही हिन्दू समेत बौद्ध, जैन, सिक्ख धर्मों में गोद लेने के नियम लागू होते हैं। इसके अलावा दो कानून द गार्जियन एंड वाड्र्स एक्ट, 1890 और द जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन) एक्ट, 2000 (2006 में संशोधित) और हैं। ये सभी धर्मों पर लागू होते हैं। इन एक्ट का उल्लंघना करना अपराध की श्रेणी में आता है।

सौतेले बच्चों के लिए नया कानून
15 जनवरी 2017 को सेंट्रल एडॉप्शन रीसोर्सेज अथॉरिटी ने एडॉप्शन रेगुलेशन, 2017 बनाया। 16 जनवरी से प्रभावी इस रेगुलेशन के तहत गोद लेने की प्रक्रिया की मॉनिटरिंग भी की जाएगी। इसके नियम जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन) एक्ट, 2015 से लिए गए हैं। पहले भारत में ऐसा कोई कानून नहीं था, जो सौतेले माता या पिता और सौतेले बच्चे के बीच कानूनी संबंध की व्याख्या करता हो। सौतेले बच्चे का सौतेले माता या पिता की संपत्ति पर भी कोई अधिकार नहीं होता। इसके अलावा बच्चा भी अपने सौतेले माता या पिता की वृद्धावस्था में उनकी देखभाल करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं होता। अब नए रेगुलेशन के तहत सौतेले बच्चे को मां-बाप राष्ट्रीय दत्तक संस्था के जरिए गोद ले सकते हैं। इस तरह वे उनके साथ अपने संबंध को कानूनी रूप दे सकते हैं। नए नियम के तहत रिश्तेदार भी बच्चों को गोद ले सकेंगे।


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मुंहासों को यूं रखें दूर


नई दिल्ली। मुंहासे होना आम समस्या है और इससे छुटकारा पाने के लिए अधिकांश युवतियां टूथपेस्ट, नींबू आदि लगाती है, जो त्वचा को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मुंहासा प्रभावित हिस्से को छूना भी नहीं चाहिए। विशेषज्ञों ने मुंहासों से छुटकारा पाने के लिए ये सुझाव दिए हैं :

* कई बार आंतरिक असंतुलन खासकर हार्मोन की वजह से मुंहासे निकलते हैं। आंतरिक समस्या से मुंहासे होने पर रक्त की जांच व अल्ट्रासाउंड से पता चल जाता है।

* मुंहासों से बचने के लिए संतुलित व स्वास्थ्यपरक आहार जैसे फलों, सब्जियों का सेवन करें।

* कई लोगों का मानना होता है कि मुंहासे त्वचा के अधिक तैलीय होने के कारण निकलते हैं और वे कठोर साबुन या स्क्रब का इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं। सच्चाई यह है कि ज्यादा

ड्राई स्किन मुंहासों को और बढ़ावा दे सकते हैं।

* स्क्रब से मुंहासों में सूजन व लालिमापन आने की संभावन बढ़ जाती है और चेहरे में जलन महसूस हो सकती है।

* मुंहासों के उपचार में तीन से लेकर छह महीने तक का समय लग सकता है। लोग अपना धैर्य खोने लगते हैं और नींबू, टूथपेस्ट या लहसुन का इस्तेमाल करते हैं, जो मुंहासों वाली त्वचा

को और नुकसान पहुंचा सकते हैं।

* चेहरे को रोजाना दो-तीन बार धोएं, अगर त्वचा में पर्याप्त मात्रा में मॉइश्चराइजर है तो फिर यह अपना ऑयल बाहर नहीं निकालता है, ऐसे में मुंहासे होने की संभावना नहीं होती है।

* अपनी त्वचा को नियमित रूप से मॉइश्चराइज करें, जिससे त्वचा में नमी बनी रहे, अगर बारिश हो रही हो तो नॉन-वाटर बेस्ड मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें, जिससे भीगने पर भी

मॉइश्चराइजर त्वचा से पूरी तरह से नहीं निकले।

* बैक्टीरिया को दूर रखने के लिए चेहरे पर कुछ क्रीम आदि लगाते समय अपने हाथ जरूर धो लें। प्रभावित हिस्से को लगातार छूने से बैक्टीरिया के फैलने की संभावना होती है, जिससे

और मुंहासे निकल सकते हैं।

* टी (चाय) ट्री तेल जीवाणु रोधी और एंटी फंगल होता है और यह तैलीय त्वचा के लिए उपयुक्त होता है। मुंहासों से बचने के लिए इस तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है।


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सफल होना है तो सीखें नए कौशल, जानें तीन चुनौतियां


जीवन में सफल होना चाहते हैं तो इसकी बहुत आसान सी चाबी है और वह चाबी है, निरन्तर कुछ न कुछ नया सीखते रहना। चूंकि सीखना एक निरन्तर और सतत प्रक्रिया है ऐसे में हर शख्स इसके लिए प्रयास करता है। सीखने के लिए धैर्य लगन की आवश्यकता होती है। लेकिन इसके अलावा भी कुछ है जिस पर आप पार पा लें तो सीखने की सीढ़ीयां फटाफट चढ़ते चले जाएंगे। तो आइए जानते हैं सीखने में आड़े आने वाली तीन कमियों को-

कितना सीखें, जितना सीखा वही बहुत- अक्सर लोग यह कहते पाए जाते हैं कि ज्ञान अथाह है। वाकई ज्ञान अथाह है और जैसे-जैसे हम किसी चीज के बारे में सीखना शुरू करते हैं उसके नए नए दायरे सामने आते चले जाते हैं। हर दायरा हमें ज्ञान की एक नई दुनिया में ले जाता है। ऐसे में व्यक्ति अन्ततः थक कर सोचने लगता है कि कितना सीखें, जितना सीखा वही बहुत हुआ।

असफलता के कारण विमुखता- अक्सर लोग सीखने में विफल होने पर निराश हो कर सीखना छोड़ देते हैं। जैसे यदि आप शतरंज खेलना सीखेंगे तो आप शुरुआत में बार बार हारेंगे, फिर जब थोड़ा सीख जाएंगे तो भी आप हारेंगे। वास्तव में आपको लगेगा कि आप कितना भी अच्छा खेलना सीख लेंगे आप हारेंगे ही। ऐसा होता भी है। ऐसा केवल खेलों में ही नहीं बल्कि भाषाओं, अकादमिक विषयों में भी होता है। कई बार बीच के छोटे रास्ते भी होते हैं जब आप बार बार असफल नहीं होते और छोटी सफलताएँ अर्जित करने लगते हैं, पर तब आप वास्तव में ज्यादा सीख नहीं रहे होते हैं।

अनिश्चय की स्थिति - मानव अनिश्चय की स्थितियों को पसंद नहीं करता। अधिकांशतया हम हर बात में पहले से निश्चित परिणाम पाना चाहते हैं। हम अनिश्चय से डरते हैं पर जब आप एक नए कौशल को सीखने के लिए आगे बढ़ते हैं तो परिणाम पूरी तरह से अनिश्चित होता है। आप नई सीखी चीजों को भूल जाते हैं, आपको नई बातें समझ नहीं आतीं। और जब आपको लगता है कि आपने कुछ सीख लिया है आप उसका अभ्यास करने जाते हैं तो परिणाम नकारात्मक आता है। और आपको लगता है कि आपने कुछ नहीं सीखा। और आप सीखना छोड़ देते हैं।


तो यह तो थीं वो तीन बातें जिन पर पार लेंगे तो आप आसानी से नई चीजें सीख लेंगे और जीवन में एक कामयाब शख्स बन कर पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवाएंगे।


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ट्रैवलिंग का है शौक तो खुद को रखें फिट, ये बातें साबित होंगी मददगार


ट्रिप पर जाना हर किसी को पसंद होता है। हो भी क्यों नहीं, ट्रिप यानी बहुत सारी मस्ती, खाना-पीना, सैर-सपाटा आदि। हालांकि, इस दौरान आप तमाम बातों का ध्यान रखती हैं जैसे खर्चे का हिसाब, सभी प्रकार की सुविधाएं, अपने सामान का ख्याल आदि, लेकिन क्या आप इस दौरान अपनी सेहत के बारे में सोचती हैं। क्या आप कोई भी ट्रिप प्लान करते समय इन बातों पर ध्यान देती हैं कि आपको खुद को फिट कैसे रखना है? अगर नहीं, तो बता दें कि यह बहुत जरूरी है। ये कुछ चीजें आपको ट्रैवलिंग के दौरान फिट रहने में मदद कर सकती हैं -




वर्कआउट जरूर करें

आजकल अधिकतर अच्छे होटलों में जिम की सुविधा होती है। ऐसे में जब आप कहीं घूमने जाएं तो वर्कआउट जरूर करें। अगर आपके होटल में जिम न हो, तब भी आप पुशअप्स, स्केव्ट्स, पावर योगा आदि कर सकती हैं। भले ही आप यह सब कुछ मिनटों के लिए ही करें लेकिन ट्रिप के दौरान एक्सर्साइज को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें।




ज्यादा से ज्यादा वॉक करें

जब भी आप किसी जगह घूमने जाएं तो, कोशिश करें कि जितना ज्यादा हो सके, उतना वॉक करें। होटल के आसपास की जगहों पर किसी वाहन से जाने के बजाय पैदल चलकर जाएं। सिर्फ दूर की जगहों के लिए ही वाहनों का सहारा लें। वॉकिंग करने से आपकी सेहत भी बनी रहेगी और आप उस जगह को करीब से बेहतर तरीके से जान भी पाएंगी। 




सीढ़ियां चढ़ें

ट्रिप के दौरान आप खुद को फिट रखने के लिए सीढिय़ां भी चढ़ सकती हैं। अगर आपका होटल रूम ग्राउंड फ्लोर के बजाय किसी और मंजिल पर है, तो लिफ्ट की जगह सीढिय़ों से कमरे तक जाएं। ऐसे ही उस जगह की खास जगहों पर भी आप सीढिय़ों का ही इस्तेमाल करें। आप रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड आदि जगहों पर भी सीढिय़ों का ही प्रयोग करें।




दौड़ भी लगाएं

आप सोच रही होंगी कि दौडऩे से तो आप थक जाएंगी और मस्ती कैसे करेंगी, तो चलिए अपनी दौड़ को थोड़ा मजेदार बना दीजिए। आप अपने बच्चों के साथ या जिसके साथ भी आप घूमने गई हैं, उसके साथ किसी तय स्थान तक रेस लगा सकती हैं। इसमें आपको मजा भी आएगा और आप दौड़ लगाकर खुद को फिट भी रख पाएंगी।




ज्यादा न खाएं

घूमने के साथ-साथ खाने का अपना अलग ही मजा होता है और जब आप किसी नई जगह जाती हैं, तो आप वहां के खाने का स्वाद भी जरूर चखना चाहती हैं। यह सही है लेकिन इस दौरान याद रखें कि स्वाद के चक्कर में ज्यादा बिल्कुल न खाएं। साथ ही, कोशिश करें कि फास्ट फूड न खाएं। खुद को ओवरईटिंग से बचाने की कोशिश जरूर करें।




डांस का मजा लें

अगर आपको डांस पसंद है तो ट्रिप के दौरान खुद को फिट रखने का यह ऐसा तरीका है जिसमें आपको मजा भी आएगा। आप अपने दोस्तों के साथ या परिवार के साथ डांस कर खूब मस्ती कर सकती हैं। वैसे भी डांस बहुत ही अच्छी एक्सर्साइज है। इससे ट्रिप पर आपके दोनों काम हो जाएंगे - आप मस्ती भी करेंगी और फिट भी रहेंगी।


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