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Janmashtami 2017 पर होगा चमत्कार! यहां पर लड्डू गोपाल पलक झपकते ही पी जाते है पेप्सी और चाय


भोपाल। क्या कोई मूर्ति चाय पी सकती है। क्या कोई प्रतिमा बच्चों के जैसे दूध उगल सकती है। क्या किसी मूर्ति का आकार बढ़ सकता है। शायद नहीं, पर ऐसा होता है। हर साल भोपाल आने वाली इस मूर्ति का आकार दिनों दिन बढ़ रहा है और इस धातु की मूर्ति के मुंह पर यदि चाय, दूध या पेप्सी से भरा चम्मच लगाएंगे तो वो देखते ही देखते गायब हो जाता है।

mp.patrika.com Janmashtami 2017 के मौके पर बताने जा रहा है चमत्कारिक लड्डू गोपाल ( श्री कृष्ण ) के बारे में जो हर साल भोपाल आते हैं और अपनी इन मजेदार हरकतों से..

धातु के लड्डू गोपाल की एक मूर्ति हमेशा ही चर्चा में रहती है। कुछ माह पहले ही यह मूर्ति दो परिवारों के घर सप्ताह भरके लिए आई थी। लोगों का मानना है कि उन्होंने इस मूर्ति का आकार बढ़ते हुए देखा है। इतना ही नहीं इस मूर्ति को बच्चे की तरह दुलार दे रहे लोगों ने बताया कि यह लड्डू गोपाल अनोखे हैं। बच्चे की तरह सुबह-सुबह दूध उगल देते हैं और बढ़ों की तरह चाय सुड़क कर पी जाते हैं।

मेहमान बनकर आते हैं लड्डू गोपाल
भोपाल के ईश्वर नगर में लड्डू गोपाल की यह मूर्ति मेहमान बनकर आती है। लोगों के अनुसार यह चमत्कारिक प्रतिमा है। लड्डू गोपाल का आकर्षण इतना है कि इन्हें घर ले जाने वालों का तांता लगा रहता है। लड्डू गोपाल को पालने में झुलाने के लिए भी लोगों की भीड़ लग गई है। वे यहां कांग्रेस नेता ठाकुर ईश्वर सिंह चौहान के निवास पर हर साल अप्रैल में लाई जाती है। जो इनके घर मेहमान बनकर रहती है।

माखन-मिश्री कर जाते हैं चट
यह लड्डू गोपाल दही, दूध मक्खन, मिश्री सब खाते हैं। उन्हें लड्डू भी खिलाया जाता है। यह प्रतिमा एक के बाद एक भक्तों के निवास पर मेहमान बनकर पहुंचती है। कई भक्तों का नंबर दो-दो सालों में लगता है।

कई प्रदेश घूम चुके हैं लड्डू गोपाल
राजधानी के पंडित जगदीश शर्मा के अनुसार लड़्डू गोपाल की यह मूर्ति उत्तरप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के कई जिलों में भक्तों के निवास पर जा चुकी है। वहां तीन दिनों तक लाड़-प्यार से रखा जाता है उसके बाद दूसरे भक्त के पास चले जाते हैं।

मूर्ति का बढ़ रहा है आकार
भक्तों का कहना है कि कई धातुओं से मिलकर यह मूर्ति बनी है। इसका आकार भी लगातार बढ़ रहा है। भक्तों का भी मानना है कि हर साल इनका वजन बढ़ते हुए उन्होंने महसूस किया है।

बच्चों की तरह होता है दुलार
लड्डू गोपाल के साथ उनके भक्त एक बच्चे के समान ही व्यवहार करते हैं। लड्डू गोपाल को गर्मी हवा में घुमाना और गाय दिखाने भी ले जाया जाता है। बच्चे की तरह उन्हें खिलाया और पिलाया जाता है। लोरी सुनाकर उन्हें सुलाया जाता है।

यह भी खूबः दूध उगलते हैं चाय पी जाते हैं
लड्डू गोपाल के भक्त इस मूर्ति को चमत्कारिक मानते हैं। उनका कहना है कि जब सुबह-सुबह लड्डू गोपाल को उठाया जाता है और उन्हें बच्चों की तरह दूध पिलाया जाता है तो वह दूध उगल देते हैं। इसके बाद जब चाय पिलाई जाती है तो वह बडे़ ही शौक से पी जाते हैं। इसके बाद इन्हें दिन में नहलाया जाता है। मुकुट, मोरपंख, बांसुरी लगाकर उनका श्रंगार किया जाता है। शाम के बाद भजन गाकर बच्चे की तरह दिल बहलाया जाता है और रात को लोरिया गाकर बच्चे की तरह ही उन्हें सुलाया जाता है।

पूरी करते हैं पूरी करते हैं मुराद
लड्डू गोपाल के कानों में भक्त अपनी मुराद कहते हैं। लोगों का मानना है कि यह मुराद कुछ ही दिनों में पूरी हो जाती है। जो भी इच्छाएं उनके कानों में बोली जाती है, वह पूरी हो जाती है।

निसंतान वालों पर ज्यादा कृपा
माना जाता है कि जो लोग निःसंतान दंपती है। उन पर भगवान ज्यादा कृपा करते हैं। बाल गोपाल के बारे में कहा जाता है कि सभी निःसंतानों की मुराद वह सबसे पहले सुनते हैं। उन्होंने कई लोगों को संतान का आशीर्वाद दिया है।

सिवनी के परिवार की है यह मूर्ति
सिवनी के राजेश अर्चना जलज परिवार की है यह मूर्ति। सिवनी के जलज दंपती के साथ यह किस्सा बताया जाता है कि उनकी पत्नी अर्चना संतान नहीं होने पर वे लड्डू गोपाल की आराधना करती रहती थी। एक बार जब भाव-विभोर होकर भगवान से प्रार्थना करने लगी तो सपने में भगवान ने कहा कि मैं हूं। उसके बाद बाल रूप में जो लड्डू गोपाल स्वप्न में दिखते थे वही मूर्ति एक महात्मा ने उन्हें दे दी। इसके बाद जब वह मूर्ति स्थापित करने के प्रयास किए गए तो स्वप्न में दोबारा लड्डू गोपाल ने स्थापित करने से मना कर दिया। उसके बाद यह सिलसिला चल पड़ा। अब हर भक्त दो-चार दिनों के लिए लड्डू गोपाल को अपने घर ले जाता है और बच्चों की तरह देखभाल करता है।


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अगहन मास में ऐसे करें शंख की पूजा, महालक्ष्मी कर देगी मालामाल


सतना। अगहन मास की शुरूआत 15 नवंबर मंगलवार से हो गई है, जो 13 दिसंबर, मंगलवार तक रहेगा। धर्म ग्रंथों के अनुसार, ये महीने भगवान श्रीकृष्ण को बहुत प्रिय है। श्रीमद्भागवत के अनुसार, श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा है 'मासानां मार्गशीर्षोंहम्' अर्थात् सभी महिनों में मार्गशीर्ष श्रीकृष्ण का ही स्वरूप है। इस महीने में शंख की साधाना करने से श्रीकृष्ण के साथ ही लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं।

विष्णु पुराण में बताया गया है कि देवी महालक्ष्मी समुद्र की पुत्री है और शंख को लक्ष्मी का भाई माना गया है। इन्हीं कारणों से शंख की पूजा भक्तों को सभी सुख देने वाली गई है। ज्योतिष के अनुसार, यदि इस महीने में शंख से संबंधित कुछ विशेष उपाय किए जाएं तो धन से संबंधित अनेक समस्याएं समाप्त ही सकती हैं।

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मार्गशीर्ष मास का महत्व
समस्त महिनों में मार्गशीर्ष मास श्रीकृष्ण का स्वरूप है। मार्गशीर्ष माह के संदर्भ में कहा गया है कि इस माह का संबंध मृगशिरा नक्षत्र से होता है। इस माह की पूर्णिमा मृगशिरा नक्षत्र से युक्त होती है। जिस कारण से इस मास को मार्गशीर्ष मास कहा जाता है। इसके अतिरिक्त इस महीने को मगसर, अगहन या अग्रहायण माह भी कहा जाता है।

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नदी स्नान का विशेष महत्व
ज्योतिष के अनुसार, मार्गशीर्ष के महीने में स्नान एवं दान का विशेष महत्व होता है। श्रीकृष्ण ने गोपियां को मार्गशीर्ष माह की महत्ता बताई थी तथा उन्होंने कहा था कि मार्गशीर्ष के महीने में यमुना स्नान से मैं सहज ही प्राप्त हो जाता हूं अत: इस माह में नदी स्नान का विशेष महत्व माना गया है।

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इस तरह करें पूजा
- अगहन मास में मोती शंख में साबूत चावल भरकर रखें, बाद में इसकी पोटली बनाएं और तिजोरी में रख लें।
- अगहन मास में दक्षिणावर्ती शंख में दूध भरकर भगवान विष्णु का अभिषेक करें।
- भगवान विष्णु के मंदिर में शंख का दान करें, इससे भी धन संबंधित समस्याओं में लाभ होगा।
- जिस स्थान पर पीने का पानी रखते है वहां दक्षिणावर्ती शंख में गंगाजल भरकर रखें, इससे पितृदोष कम होगा।
- अपने पूजन स्थान पर दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना करें और रोज विधि-विधान से इसकी पूजा करें।
- दक्षिणावर्ती शंख में गंगाजल व केसर मिलाकर माता लक्ष्मी का अभिषेक करें, तो धन लाभ होगा।
- किसी पवित्र नदी में शंख प्रवाहित करें और माता लक्ष्मी से मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।
- पानी की टंकी में शंख रखें इससे घर में बरकत बढ़ती है और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
- एक सफेद कपड़े में सफेद शंख चावल व बताशे लपेटकर नदी में बहाएं। इससे शुक्र के दोष दूर होंगे।
- अगहन मास में रोज तुलसी के साथ दक्षिणावर्ती शंख की भी पूजा करें। शुद्ध घ्ज्ञी का दीपक लगाएं।

इनका कहना है:
श्रीमद्भागवत गीता में भगवान विष्णु ने अर्जुन से कहा था कि 'मासानां मार्गशीर्षोंहम्' अर्थात् सभी महिनों में मार्गशीर्ष मास श्रेष्ट है। ये महीना श्रीकृष्ण के नाम से जाना जाता है। भगवान विष्णु कार्तिक मास की एकादशी को जागते है। उसी दिन से विष्णु का मास   की शुरूआत हो जाती है।
- आचार्य जगन्नाथ मिश्रा, जोतिषाचार्य, वासुदेव संस्थान सरैया मानिकपुर (उप्र)

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अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में नहीं, जो इस गुरुद्वारे में है, जानें क्या



भोपाल/होशंगाबाद। सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव द्वारा लिखित ऐतिहासिक गुरु ग्रंथ साहिब आज भी होशंगाबाद के मंगलवारा घाट स्थित गुरुद्वारा में सुरक्षित है। यह ग्रंथ शहर में वर्ष 1973 में एक परिवार को मिला था। बाद में इसी स्थान पर गुरुद्वारे का निर्माण किया गया।

देश भ्रमण के दौरान गुरुनानक होशंगाबाद में रुके थे। माना जाता है कि संभवत: इसी दौरान उन्होंने ग्रंथ यहां रखा था। कहा जाता है कि यह ग्रंथ स्वर्ण मिश्रित स्याही से लिखा गया है। इतने पुराने सिर्फ दो ग्रंथ और हैं, जो हुजूर साहिब नांदेड़ और पंजाब के कीरतपुर में सुरक्षित रखे गए हैं।

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इस संबंध में होशंगाबाद के सरदार राजपाल चड्ढा बताते हैं कि यह ग्रंथ उनके पिता सरदार जोगेन्द्रर सिंह चड्ढा और कुंदन सिंह चड्ढा को वर्ष 1973 में मंगलवारा घाट स्थित एक घर के कक्ष में एक संदूक में मिला था। उसके साथ एक कृपाण भी थी। इसके बाद ग्रंथ और कृपाण को संरक्षित करके गुरुद्वारा बनाया गया।

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पवित्र है यह ग्रंथ
गुरुद्वारे में सुरक्षित यह ग्रंथ ऐतिहासिक है। यह करीब 400 साल पुराना माना जाता है। ग्रंथ साहिब में कई समाज की वाणी के नाम दिए हुए हैं। इसमें हरि नाम 8344 बार, प्रभु 1371, गोविंद 473, ठाकुर 210, राम 2533, गोपाल 421, नारायण 85, अल्लाह 49, खुदा 12 वाहे गुरु 16, करतार 220 बार आया है। 1430 पन्नों वालों इस ग्रंथ में शब्दों, सवैयों और श्लोकों की संख्या 5 हजार 894 और 10 लाख 24 हजार अक्षर हैं, जिसमें 3 प्रमुख रागों की साक्षी वाणी है।

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इंटरनेट पर है पूरी जानकारी
मंगलवारा घाट स्थित गुरुद्वारे को इंटरनेट पर भी सर्च किया जा सकता है। इसमें गुरुद्वारे की फोटो को भी देखा जा सकता है।

2007 में हुआ था ऐतिहासिक घोषित
मध्यप्रदेश शासन ने वर्ष 2007 में गुरुद्वारे को ऐतिहासिक घोषित कर दिया था। इसमें तत्कालीन गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सचिव ने शासन से गुरु ग्रंथ साहिब के बारे में जानकारी दी। इसके बाद गुरुद्वारे को ऐतिहासिक घोषित किया गया।

भोपाल से होशंगाबाद गए थे गुरुनानक देव
माना जाता है कि बेटमा, इंदौर, भोपाल होते हुए होशंगाबाद आए थे। एक सप्ताह रुकने के बाद वे नरसिंहपुर, जबलपुर होते हुए दक्षिण दिशा की ओर गए थे। गुरुद्वारे के सूचना पटल पर इस बात का भी उल्लेख है कि प्राचीन नगर होशंगाबाद की स्थापना मालवा के राजा होशंगशाह ने की थी।

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14 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा, जानें क्यों सिख और हिन्दुओं के लिए है खास


हिन्दू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व है। यह पूर्णिमा 14 नवंबर को आ रही है। इसे त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन गंगा स्नान, नर्मदा स्नान, दीपदान और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। हिन्दू पंचांग के मुताबिक साल का 8वां माह कार्तिक माह होता है।

इस माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा कार्तिक पूर्णिमा कहलाती है। हर साल 15 पूर्णिमाएं होती हैं। जब अधिकमास अथवा मलमास आता है, तब इनकी संख्या 16 भी हो जाती है। सृष्टि के आरंभ से ही यह दिन बड़ा ही खास माना गया है। पुराणों में भी इस दिन स्नान, व्रत और तप, मोक्ष प्राप्त करने के लिए विशेष तिथि है।

mp.patrika.com आपको बताने जा रहा है कार्तिक पूर्णिमा का महत्व। मध्यप्रदेश से बहने वाली जीवनरेखा नर्मदा, ताप्ती, क्षिप्रा और बेतवा नदी में लोग स्नान करने के बाद गंगा की तरह स्नान का महत्व महससू करते हैं...।

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सिख धर्म के लिए भी है अहम
कार्तिक पूर्णिमा का का महत्व वैष्णव, शैव और सिख धर्म के लिए भी बढ़ा ही खास है। क्योंकि इस दिन सिख संप्रदाय के संस्थापक गुरु नानक देव का जन्म हुआ था। इसी दिन को प्रकाशोत्सव भी कहते हैं। इस तिथि को सिख सुबह स्नान कर गुरुद्वारों में जाकर गुरुवाणी सुनते हैं और नानक जी के बताए रास्ते पर चलने की सौगंध लेते हैं।

इसे गुरु पर्व भी कहा जाता है। भगवान विष्णु का प्रथम अवतार इसी तिथि को हुआ था। पहले अवतार में विष्णु मत्स्य यानी मछली के रूप में प्रकट हुए थे। विष्णु को यह अवतार वेदों की रक्षा, संसार में प्रलय के अंत तक सप्तऋषियों,अनाज और राजा सत्यव्रत की रक्षा के लिए लेना पड़ा था। इसी के बाद सृष्टि का निर्माण फिर से आसान हो पाया था।

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त्रिपुरासुर का संहार किया था शिव ने
पुराणों के मुताबिक इस तिथि को भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक असुर का वध किया था। इसके बाद देवगण भी बेहद प्रसन्न हो गए और वे शिवजी को त्रिपुरारी नाम से भी पुकारने लगे। यह नाम भोले के अनेक नामों में से एक है। इसलिए यह'त्रिपुरी पूर्णिमा' भी हैं।

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दान का है महत्व
कार्तिक पूर्णिमा का दिन कई वजहों से खास है। इस दिन गंगा स्नान, दीप दान और अन्य प्रकार के दान करने का समय होता है। इसी दिन क्षीरसागर का दान करने का भी महत्व है। इसके लिए 24 उंगल के बर्तन में दूध भरकर उसमें सोने या चांदी की मछली छोड़ी जाती है। यह उत्सव दीपोत्सव की तरह ही दीप जलाकर मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन कृतिका में शिवजी के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान रहता है।

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यह है पूजन विधि
1. हो सके तो इस दिन गंगा स्नान करना चाहिए। यह संभव नहीं हो पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। मध्यप्रदेश में नर्मदा, ताप्ति और क्षिप्रा पवित्र नदियों में प्रमुख हैं।
2.स्नान के बाद व्यक्ति को भगवान विष्णु की आराधना करना चाहिए।
3. इसी दिन व्यक्ति को उपवास भी रखना चाहिए अथवा एक समय ही भोजन करना चाहिए।
4. नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन और हो सके तो ब्राह्मणों को दान दें और उन्हें स्वादिष्ट भोजन कराना चाहिए।
5. शाम को चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए। तभी व्रत पूर्ण माना जाता है।

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होशंगाबाद में लगा भक्तों का मेला
होशंगाबाद में नर्मदा नदी और तवा नदी का संगम है। इसी स्थान पर कार्तिक मेला का आयोजन हर साल किया जाता है। जिसमें लाखों श्रद्धालु स्नान और दीपदान करने पहुंचते हैं। इस मेले में दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों समेत कई संस्थाओं के लोग भी पहुंचते हैं। यहां आकर्षक प्रदर्शनी भी लगाई जाती है। इसके अलावा नर्मदा नदी जहां जहां से भी गुजरती है उसके तटीय शहरों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। अमरकंटक, जबलपुर, होशंगाबाद, ओंकारेश्वर के घाटों पर भक्तों का मेला लग जाता है।


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सर्वार्थ सिद्धि योग में होगा तुलसी विवाह, ये कर सेकेंगे मांगलिक कार्य


खंडवा. देवउठनी एकादशी-ग्यारस इस बार दो दिन मनाई जाएगी। क्योंकि आज 10 को स्मार्त शैव एकादशी व्रत, कल 11 को वैष्णव निम्बार्काणाम प्रबोधनी एकादशी व्रत पर तुलसी विवाह होगा। हालांकि पंडि़तों के मुताबिक मनोवांछित फल प्राप्ती के लिए महिला-पुरुष को दोनों ही दिन उपवास रखना चाहिए। इसके साथ ही चार महीने का चातुर्मास समाप्त होगा। देवशयन काल समाप्त होते ही लोग गन्ने का मंडप सजाकर तुलसी व सालिगराम का विवाह करेंगे।

सराफा शीतला माता मंदिर के पंडित अंकित मार्केंडेय के मुताबिक 10 नवंबर देवउठनी एकादशी से विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्य के मुहूर्त शुरू होंगे। 11 नवंबर को भी एकादशी मनाई जाएगी। हालांकि विवाह मुहूर्त 16 नवंबर से ही शुरू होंगे। एकादशी तिथि 10 नवंबर को सुबह 11.21 बजे से एकादशी तिथि समाप्त 11 नवम्बर को 9.12 बजे तक रहेगी। इसके साथ ही मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।

शादियां 16 से अभी यह कार्य शुरू
देव उठनी एकादशी से मांगलिक कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे। हालांकि हर साल खोपड़ी ग्यारस पर शादियों के मुहूर्त होते हैं लेकिन इस बार नहीं है। वहीं 16 तारीक से शादियों के मुहूर्त है। हालांकि ग्यारस के बाद से मुंडन, वास्तु पूजन, ग्रह प्रवेश समस्त मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।

कब कौन सा श्रेष्ठ मुहूर्त
नवंबर में 16, 17, 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 28, 29, 30
दिसंबर में 1, 3, 8, 9, 12, 13, 14
जनवरी में 15, 17, 20, 22, 23
फरवरी में 1, 2, 11, 13, 14, 16, 21, 22, 28
मार्च में 4, 6, 10, 12, 13, 14

शरद ऋतु में इस बार ज्यादा विवाह
शरद ऋतु में इस साल 39 दिन ऐसे हैं जिनमें विवाह हो सकते हैं। इसमें सबसे अधिक योग इसी माह में हैं। नवंबर में 12 दिनों के शुभ मुहूर्त हैं। कुछ दिवसों में यदि विवाह का योग रात में नहीं बनता है तो दिन के वक्त ये कार्य पूरे हो सकते हैं।

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प्रजा से मिलने निकले राजा 'महाकाल', 14 को भी निकलेगी सवारी


उज्जैन. कार्तिक-अगहन मास में प्रतिवर्ष निकलने वाली महाकाल सवारियों की परंपरा इस वर्ष भी निभाई जा रही है। सोमवार 7 नवंबर को राजाधिराज भगवान महाकाल ने सावन की तर्ज पर दूसरी बार नगर भ्रमण कर भक्तों को दर्शन दिए। 

रामघाट पर जल से अभिषेक
सभा मंडप में पालकी पूजन प्रशासक रजनीश कसेरा ने किया। शाम 4 बजे मंदिर से सवारी शुरू हुई। पुलिस बल द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर के बाद सवारी मुख्य मार्गों से होकर शिप्रा तट रामघाट पहुंची, जहां पावन जल से जलाभिषेक पूजन व आरती उतारी गई। इसके बाद सवारी आगे बढ़ी। भगवान चंद्रमौलेश्वर फूलों से सजी हुई पालकी में विराजमान हो नगरवासियों को दर्शन देने ठाठ-बाट से निकले। इसके बाद शाम 6 बजे तक सवारी पुन: मंदिर पहुंची। 



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mahakal prosession at ujjain
अब कब निकलेंगी सवारियां
अन्य सवारियां 14, 21 तथा 28 नवंबर को निकलेंगी। हरि-हर मिलन की सवारी 12 नवंबर को रात 11 बजे महाकालेश्वर मंदिर से निकलेगी, जो गोपाल मंदिर पहुंचेगी। मंदिर व पुलिस प्रशासन द्वारा इस सवारी में रात 8 बजे बाद खतरनाक आतिशबाजी पर रोक लगाई गई है। समिति द्वारा सवारी की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी। अव्यवस्था फैलाने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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जानिए किस राशि के लिए है खास दिन, आज ही 6 वर्ष के हुए थे श्रीकृष्ण


जबलपुर। भगवान शिव का प्रिय दिन सोमवार और गोपाष्टमी का शुभ मुहूर्त। अद्भुत संयोग के चलते आज का दिन भी अति शुभ है। मान्यता है कि  गोपाष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गाय का पालन शुरू किया था। इस दिन से बेहद रोचक कथा भी जुड़ी है।

कहा जाता है कि इस दिन गाय की सेवा अति पुण्यकारी बताई गई है। गोपाष्टमी के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के छठे वर्ष में प्रवेश किया था। सोमवार को ही सूर्य उपासना का प्रमुख् छठ पर्व का समापन हुआ है। तो आइए जानते हैं भगवान शिव और कृष्ण की कृपा आज किस राशि पर है...

आज का राशिफल


मेष
व्यापार, कारोबार ठीक चलेगा। आर्थिक परिस्थिति में अनुकूलता का आभास होगा। वाहन, मकान आदि की खरीदी का योग बनेगा।

वृष
महत्वपूर्ण कार्यों में स्वयं सक्रिय होना आवश्यक है। उच्चाधिकारियों से विवाद की स्थिति को टालें। साझेदारी की समस्या का निराकरण होगा।

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मिथुन
रुपयों के लेनदेन में सावधानी रखें। संतान के कार्यों से समाज में आपकी आलोचना हो सकती है। वाहन तेज गति से न चलाएं।

कर्क
अवसर चूकने से निराशा होगी। चलते हुए कार्यों में अवरोध उत्पन्न होंगे। परिवारजनों से सामंजस्य बनाए रखें। अपव्यय होगा।

सिंह
व्यापार में नए प्रस्ताव समृद्धि के संकेत देंगे। आर्थिक प्रयासों में सफलता मिलने के योग हैं। प्रवास में लाभ मिलने की संभावना बनती है।

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कन्या
किसी पर अधिक विश्वास नहीं करें। अपने काम से काम रखें। राजकार्य अथवा शासन सत्ता से मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी। आलस्य न करें।

तुला
परिवार के सदस्यों की मदद रहेगी। यात्रा, प्रवास में लाभ मिलने की संभावना बनती है। आपकी बुद्धिमानी से सम्मान मिलेगा।

वृश्चिक
व्यापार में उन्नति होगी। रुका पैसा अचानक ही प्राप्त होगा। वाहन सावधानी से चलाएं। स्वाध्याय में रुचि बढ़ेगी। व्यापार अच्छा चलेगा।

धनु
अपने प्रयासों से प्रगति की ओर अग्रसर होंगे। कानूनी मामले आपके पक्ष में हल होंगे। व्यर्थ के दिखावे एवं आडंबरों से दूर रहें।

मकर
सामाजिक कामों में रुचि बढ़ेगी। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। परिवार में सुख-शांति रहेगी।

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कुंभ
व्यापार में नई योजनाएं बनेंगी। परिवार में खुशी, उत्साह का वातावरण रहेगा। जवाबदारी के कार्य पूर्ण सफलता के साथ पूरे होंगे।

मीन
प्रयास सार्थक होंगे। व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा में लाभ होने के योग हैं। ऋण की ओर ध्यान नहीं देना चाहिए। खान-पान में सावधानी बरतें।

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चंदन और पीले फूलों से करें शिव की उपासना, बनने लगेंगे बिगड़े काम


सोमवार को भगवान भोलेनाथ की पूजा की जाती है। यूं तो हर दिन ही भगवान शिव की अराधना और पूजा-अर्चना की जा सकती है लेकिन सोमवार के दिन उनकी अराधना करने से उनका आशीर्वाद तो मिलता ही है साथ ही भगवान शिव प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाओं को पूरी कर देते है। अगर भगवान शिव को प्रसन्न करना चाहते हो तो सोमवार को चंदन और पुष्प अर्पित करें।

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आस्था और विश्वास प्रार्थना करें तो जरूर मिलेगा फल
भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता माने जाते है। शिव भगवान को काल का भी काल अर्थात महाकाल कहा जाता है वे, कण-कण में समाए हुए हैं। भगवान शिव सभी भक्तों की मनोकामना पूरी करते है। अपने संकटों से निजात पाने लिए बस आस्था और विश्वास की जरूरत होती है।

भगवान भोलेनाथ को आंकड़े के पुष्प, बिल्वपत्र, चंदन, धतुरा इत्यादि प्रिय है, इसलिए भक्तों को इन्हीं सामग्रियों से पूजा करना चाहिए। यदि ये सामग्री उपलब्ध नहीं हो सकती है तो सिर्फ चंदन और पीले पुष्प से भी भगवान शिव की पूजा की जा सकती है। पूजा के साथ यदि शिव महिम्नास्त्रोत या फिर शिव चालीसा का भी पाठ किया जा सकता है। ये पाठ नहीं हो सके तो ऊं नम: शिवाय का जाप करना भी विशेष फलदायी होता है।

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यहां बताई जा रही शिव मंत्र स्तुति
शास्त्रों में बताई शिव पूजा से जुड़ी बातें उजागर करती हैं कि शिव भक्ति में मात्र शिव नाम स्मरण ही सारे सांसारिक सुखों को देने वाला है, विशेष रूप से शास्त्रों में बताए शिव उपासना के विशेष दिनों, तिथि और काल को तो नहीं चूकना चाहिए। इसी कड़ी में यहां बताई जा रही शिव मंत्र स्तुति, शिव पूजा व आरती के बाद बोलने से माना जाता है कि इसके प्रभाव से बुरे वक्त, ग्रहदोष या बुरे सपने जैसी कई परेशानियां दूर होती हैं- 


द: स्वप्नदु: शकुन दुर्गतिदौर्मनस्य,
दुर्भिक्षदुर्व्यसन दुस्सहदुर्यशांसि।
उत्पाततापविषभीतिमसद्रहार्ति,
व्याधीश्चनाशयतुमे जगतातमीशः।।


इस शिव स्तुति का अर्थ है कि संपूर्ण जगत के स्वामी भगवान शिव मेरे सभी बुरे सपनों, अपशकुन, दुर्गति, मन की बुरी भावनाएं, भूखमरी, बुरी लत, भय, चिंता और संताप, अशांति और उत्पात, ग्रह दोष और सारी बीमारियों से रक्षा करे, धार्मिक मान्यता है कि शिव, अपने भक्त के इन सभी सांसारिक दु:खों का नाश और सुख की कामनाओं को पूरा करते हैं।



ऐसे करें पूजा-अर्चना
सुबह स्नान के बाद शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश, नंदी बैल की पूजा करें। पूजा में मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें। पूजा के दौरान शिव के पचाक्षरी मंत्र 'ऊँ नमः शिवाय और गणेश मंत्र 'ऊँ गं गंणपते नमो नम:' बोलकर भी पूजा सामाग्री अर्पित कर सकते हैं। शिव लिंग पर सफेद फूल, बिल्वपत्र, सफेद वस्त्र और गणेश को सिंदूर, दुर्वा, गुड़ व पीले वस्त्र चढ़ाएं। सोमवार को शिव पूजा में कच्चा चावल चढ़ाने का विशेष महत्व है।

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लिंग पूजा का खास महत्व
सोमवार में शिव लिंग के साथ देवी पार्वती की पूजा की जाती है। पंडितों के अनुसार शिव लिंग पूजा से महिलाओं को मनचाहा वर मिलता है। प्राचीन शास्त्रों के अनुसार सोमवार के व्रत तीन तरह के होते हैं। सोमवार, सोलह सोमवार और सौम्य प्रदोष। सोमवार व्रत की विधि सभी व्रतों में समान होती है।

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ऐसे करें व्रत का पालन
व्रत करने वाले को दिन में एक बार भोजन करना चाहिए। सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में सोकर उठें। पूरे घर की सफाई कर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं। गंगा जल या पवित्र जल पूरे घर में छिड़कें। घर में ही किसी पवित्र स्थान पर भगवान शिव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

तीसरे पहर से व्रत प्रारंभ
सोमवार व्रत सूर्योदय से प्रारंभ कर तीसरे पहर तक किया जाता है। शिव पूजा के बाद सोमवार व्रत की कथा सुननी आवश्यक है। पहले सोमवार को व्रत रखकर श्रद्धालु शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। महादेव का विशेष श्रृंगार कर जलाभिषेक किया जाता है। इसके बाद भगवान को 56 भोग लगाए जाते हैं।

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शुभ मुहूर्तः देव उठेंगे तो बरसाएंगे कृपा, पूरे साल बजेंगी शहनाइयां



भोपाल। शादी-ब्याह कर घर बसाने वालों के लिए नया साल खुशखबर लेकर आ रहा है। इस साल की तुलना में वर्ष 2017 में विवाह मुहूर्तों की भरमार रहेगी। 2017 में पूरे साल विवाह के 78 शुभ मुहूर्त हैं। वर्ष 2016 की अपेक्षा 40 मुहूर्त अधिक हैं। मौजूदा साल में विवाह के करीब 48 शुभ मुहूर्त थे। अगले साल जनवरी से जुलाई तक हर माह विवाह मुहूर्त हैं।

देवउठनी एकादशी के साथ ही विवाह मुहूर्त शुरू हो जाएंगे। मार्च माह में 4 मार्च को ही शुभ मुहूर्त है। हालांकि, 15 मार्च के पहले विवाह के 4 मुहूर्त हैं, लेकिन होलाष्टक के कारण कई लोग इन मुहूर्तों में शादियां नहीं करते हैं।

पं. धर्मेंद्र शास्त्री ने बताया कि देवउठनी एकादशी 11 नवम्बर को मनाई जाएगी, लेकिन सूर्य के तुला राशि में होने के कारण शुभ मुहूर्त 16 नवम्बर से ही प्रारंभ होंगे। 


कब-कब लगेगा विराम
पं.जगदीश शर्मा के अनुसार 15 दिसम्बर से 14 जनवरी तक धनु राशि के सूर्य अर्थात खरमास में होने से विवाह आदि शुभ कार्यों पर विराम लगा रहेगा। 14 मार्च से 17 अप्रैल तक भी मीन राशि के सूर्य अर्थात खरमास में होने से विवाह आदि कार्य नहीं होंगे।

dev uthani ekadashi
मई-जून में जमकर होंगी शादियां
वर्ष 2016 में मई और जून में शुक्र अस्त होने से विवाह मुहूर्त नहीं थे, लेकिन अगले साल दोनों महीनों में जमकर शादियां हैं। मई में 16 दिन और जून में करीब 17 दिन विवाह के मुहूर्त रहेंगे। मई और जून में शादियों का खास सीजन माना जाता है।

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12 साल बाद छठ पर्व पर बना अद्भुत संयोग, जानिए अर्घ्य का शुभ समय


इंदौर। दीपावली के समापन के पश्चात देश के अन्य राज्यों की तरह मध्य प्रदेश एवं मालवांचल के विभिन्न क्षेत्रों में रह रहे हजारों, लाखों अप्रवासी बिहार, उत्तर प्रदेश एवं  अन्य पूर्वोत्तर के परिवारों के बीच लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की तैयारियाँ जोरों से चल रही हैं।

इस वर्ष कार्तिक शुक्ल षष्ठी को खास संयोग बनने के कारण छठ महापर्व का विशेष महत्व है। विद्वान् पंडितों के अनुसार इस वर्ष छठ महापर्व का पहला अर्घ्य रविवार को होने तथा चंद्रमा के गोचर में रहने से सूर्य आनंद योग का दुर्लभ संयोग लगभग 12 वर्षों के बाद बन रहा है, जिसके कारण लंबे समय से बीमार चल रहे व्यक्ति का स्वास्थ्य बेहतर होगा और संतान की भी प्राप्ति होगी।

चार-दिवसीय छठ महापर्व की शुरुआत  4 नवंबर (शुक्रवार) को  नहाय खाय से होगी।  इसके अंतर्गत,  छठ  उपासक  अपने-अपने  घरों  की  सफाई  करने  के  पश्चात  पूर्ण  पवित्रता के साथ  घर में  बने शुद्ध शाकाहारी कद्दू, चने की दाल, चावल एवं अन्य  शाकाहारी  पदार्थों से बना भोजन  ग्रहण करेंगे।


छठ  पर्व  के  दूसरे  दिन  शनिवार (5 नवंबर) कार्तीक  शुक्ल  पंचमी को खरना का आयोजन होगा।  इस दिन व्रतधारी दिन भर का उपवास रखने के बाद शाम को गन्ने के रस में बने हुए चावल की खीर के साथ दूध, चावल का पि_ा और घी चुपड़ी रोटी का प्रसाद भगवान सूर्य को भोग लगाने के पश्चात  भोजन करेंगे।  तत्पश्चात शुरू होगा व्रतधारियों द्धारा 36 घंटे  निर्जला उपवास।  छठ पर्व के तीसरे दिन  6 नवंबर (रविवार) को अस्ताचलगमी सूर्य को व्रतधारियों द्वारा जलकुण्ड में खड़े रह कर अघ्र्य दिया जाएगा तथा  छठ महापर्व का समापन  7  नवंबर (सोमवार) को व्रतियों द्वारा उगते हुए सूर्यदेव को अघ्र्य देने के पश्चात होगा।

80 से अधिक स्थानों पर देंगे अघ्र्य
पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष भी शहर में  बसे  बिहार, उत्तर प्रदेश एवं अन्य पूर्वोत्तर  क्षेत्रों के लोगो द्धारा 80  से अधिक स्थानों पर सूर्यदेव को अध्र्य दिया जाएगा।  शहर में छठ महापर्व का मुख्य आयोजन विशेष रूप से  स्कीम नंबर 54 (विजय नगर ), स्कीम नंबर  78, तुलसी नगर, सुखलिया,  श्याम नगर,  बाणगंगा, पिपलियापाला, समर पार्क, निपनिया, एरोड्रोम क्षेत्र में, सिलिकॉन सिटी, राउ इत्यादि जगहों पर किया जा रहा है।


पूर्वोत्तर सांस्कृतिक संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर जगदीश सिंह, महासचिव एवं विद्यापति परिषद् के सचिव के  के  झा, प्रदेश सचिव अजय कुमार झा, उपाध्यक्ष निर्मल दुबे, पूर्वोत्तर सांस्कृतिक संस्थान के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अमजद खान, सादिक खान, मूसा भाई ने जानकारी देते हुए कहा कि दिवाली  की तैयारियों के साथ ही शहर में फैले छठ आयोजन समितियों  द्धारा छठ घाटों की सफाई शुरू कर दी गई है।  

आसान नहीं होता छठ महापर्व का उपवास
छठ पर्व या छठ कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है। सूर्योपासना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से पूर्वी भारत के बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। छठ उत्सव के केंद्र में छठ व्रत है जो एक कठिन तपस्या की तरह है।

यह प्राय: महिलाओं द्वारा किया जाता है किंतु कुछ पुरुष भी यह व्रत रखते हैं। व्रत रखने वाली महिला को परवैतिन भी कहा जाता है। चार दिनों के इस व्रत में व्रती को लगातार उपवास करना होता है। भोजन के साथ ही सुखद शैय्या का भी त्याग किया जाता है।

पर्व के लिए बनाए गए कमरे में व्रती फर्श पर एक कंबल या चादर के सहारे ही रात बिताई जाती है। इस उत्सव में शामिल होने वाले लोग नए कपड़े पहनते हैं। पर व्रती ऐसे कपड़े पहनते हैं, जिनमें किसी प्रकार की सिलाई नहीं की होती है। महिलाएं साड़ी और पुरुष धोती पहनकर छठ करते हैं। 'शुरू करने के बाद छठ पर्व को सालों साल तब तक करना होता है, जब तक कि अगली पीढ़ी की किसी विवाहित महिला को इसके लिए तैयार न कर लिया जाए। घर में किसी की मृत्यु हो जाने पर यह पर्व नहीं मनाया जाता है।'

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इंदौर में भी है शिर्डी वाले का धाम, 45 साल से लग रही भक्तों की भीड़


इंदौर. अगर शिर्डी वाले सांई बाबा के भक्तों की संख्या का कोई रिकार्ड रखा जाए तो इंदौर टॉप फाइव में ही शुमार होगा। इंदौर से शिर्डी आने-जाने वाले यात्रियों की रोज की संख्या हजारों में है। जो नहीं जा पाते, उनके लिए उतना ही अद्भुत और अलौकिक मंदिर छत्रीबाग में मौजूद है। यहां करीब 45 साल पुराने इस मंदिर के प्रति लोगों में अगाध श्रद्धा है।

लोग इसे शिर्डी के प्रतिनिधि मंदिर के रूप में ही पूजते है। यहां हर गुरुवार को शाम के समय श्रद्धालुओं का मजमा लगता है। गुरुवार को सांई बाबा का दिन माना जाता है। इस लिहाज से हफ्ते के इस दिन शाम सात बजे भव्य आरती का आयोजन किया जाता है।

मंदिर के संचालन ट्रस्ट में शामिल वीरेंद्र उपाध्याय बताते हैं कि लोग इस मंदिर से भी भावनात्मक रूप से उसी तरह जुड़े हैं, जैसे शिर्डी वाले मंदिर से। ट्रस्ट भी इंदौर और शिर्डी दोनों जगह अपने पारमार्थिक कार्य चला रहा है। 

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सांई भक्त निवास
इंदौर शहर सांई भक्त निवास के नाम से शिर्डी में इंदौर और मप्र के यात्रियों के लिए रूकने की उत्तम व्यवस्था है। मंदिर से सिर्फ आधा किमी दूर इस भक्त निवास में केवल 300 रुपए देकर ठहरा जा सकता है। अगर यहां ग्रुप जाए तो उसके लिए बड़े हॉल है। इसका किराया 1250 रुपए है।

शिर्डी में इतने कम किराए में होटल, लॉज भी नहीं मिलते हैं। सबसे अच्छी सुविधा यह है कि शिर्डी जाने के इच्छुक लोग कमरों की बुकिंग छत्रीबाग मंदिर से ही कर सकते हैं। ट्रस्ट सालभर स्वस्थ्य शिविर, रक्तदान शिविर जैसी गतिविधियां संचालित करता है।



यह है व्रत की विधि:-

1. यह व्रत 1, 9, 11 या 21 गुरूवार को करने से इच्छुक फल की प्राप्ति होती है।

2. इस व्रत को साईंबाबा का नाम लेकर आरंभ करना चाहिए। चाहे स्त्री हो या पुरूष यह व्रत कोई भी कर सकता है।

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3. पूजन विधि प्रारंभ करने से पहले आसन पर पीला कपडा बिछाकर साईंबाबा की तस्वीर उस पर रखें।

4. इसके पश्चात तस्वीर पर चंदन व कुम-कुम लगाकर पीले फूल या हार चढाऐं और भोग लगाऐं। 

sai baba

5. इसके बाद व्रत कथा पढें और साईंबाबा की आरती करें।

6. पूजा के पश्चचात हर गुरूवार को साईंबाबा के मंदिर अवश्य जाऐं।

7. इस व्रत को आप फलाहार लेकर भी कर सकते हैं।

8. इस व्रत के उद्यापन के वक्त गरीबों को भेजन करवाऐं और अपने पडोसियों व सगे-संबंधियों को यथाशक्ति अनुसार व्रत कथा की पुस्तक भेंट दें।

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शुभमंगल का प्रतीक है स्वास्तिक, मध्य में बसते हैं भगवान विष्णु


रतलाम। भारतीय संस्कृति में लंबे समय से स्वास्तिक को शुभ व लाभ के साथ मंगल का प्रतीक माना जाता है। जब भी कोई नए कार्य की शुरुआत करते है, तब सबसे पहले स्वास्तिक का चिन्ह बनाते है व उसकी पूजन होती है। ज्योतिषी आनंद त्रिवेदी के अनुसार संस्कृत में स्वास्तिक का शाब्दिक अर्थ बेहतर या श्रेष्ठ होता है।

ज्योतिषी त्रिवेदी ने बताया कि 5 नवंबर को लाभ पंचमी व 11 नवंबर को देवउठनी ग्यारस के दिन घर के मुख्य दरवाजे सहित मंदिर में स्वास्तिक बनाना चहिए। न सिर्फ हिंदु धर्म बल्कि इसे अन्य समाज में भी पवित्र माना गया है। स्वास्तिक सकारात्मक उर्जा का प्रतिक है। यही वो कारण है जब इसको शुभ कार्य करने से पहले बनाया जाता है।


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दो प्रकार के मिलते हैं दो प्रकार के स्वास्तिक 
ज्योतिषी त्रिवेदी के अनुसार रतलाम के बाजार में दो प्रकार के स्वास्तिक मिल रहे है। एक दांया व एक बांया। दाहिना स्वास्तिक नर का तो बांया स्वास्तिक नारी का प्रतिक माना गया है। स्वास्तिक की खड़ी रेखा सृष्टि की उत्पत्ती का प्रतीक है तो आड़ी रेखा सृष्टि के विस्तार की। इसका मध्य बिंदु विष्णु की नाभि का कमल माना गया है। इसके चार बिंदु चार दिशा का प्रतिक है।

इस तरह बनाए स्वास्तिक
ज्योतिषी त्रिवेदी के अनुसार घर या कार्यालय के साथ पूजन के लिए बने मंदिर में ब्रह मुहूर्त में केसर, कुमकुम, सिंदुर आदि को तेल में मिलाकर स्वास्तिक बनाए। ये करने से जिंदगी के साथ घर में भी शुभ परिवर्तन होता है।

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दीपावली के अगले दिन मनाया जाता है गोवर्धन पर्व, यह है पूजा विधि


ग्वालियर। दीपावली के अगले दिन आने वाला गोवर्धन पर्व इस बार 31 अक्टूबर को है। दरअसल दीवाली के अगले दिन गोवर्धन की पूजा की जाती है| हिन्दू शस्त्रों में लिखा गया है की गाएं लक्ष्मी जी का स्वरूप हैं।

जिस प्रकार मां लक्ष्मी हमें धन वैभव सुख समृद्धि प्रदान करती हैं| ऐसे ही गाएं भी हमें और हमारे जीवन की रक्षा करती हैं।जैसे गाय का दूध निरोगी माना जाता है इसके सेवन से कोई बीमारी नहीं होती और हमारी बुद्धि भी तेज होती है, उसी प्रकार गाय का गोबर जो पहले खाना और भोजन पकाने के काम भी आता था और गायों का बछड़ा बड़ा होकर खेत में हल जोतने के काम आता था।

साथ ही अनाज के उत्पादन में भागीदारी देता। आज गोबर से गैस बनाकर रसोई घर में प्रयोग की जाती है द्वापरयुग में देवराज इंद्र की पूजा की जाती थी|

 

एक दिन गोकुल में सभी गांव वाले इंद्र देव की पूजा में व्यस्त है तब छोटे से बाल गोपाल ने अज्ञानता वश पूछा की “ मैया ये किसकी पूजा कर रही हो” तब माता ने बड़े से प्यार से बेटे को बताया कि “हम देव राज इंद्र की पूजा कर रही है ताकि वो हमारी पूजा से प्रसन्न हो कर बारिश करे जिससे हमारी फसले अच्छी होगी और अच्छी फसल होने से हमारे गांव में सुख और समृद्धि आएगी'.......


तब भगवान् कृष्ण ने कहा की हमें गाय की पूजा करनी चाहिए न की इंद्र देव की उनकी इस बात से देव राज इंद्र नाराज हो गए और गुस्से में उन्होंने गोकुल में आंधी तूफान और वर्षशुरू कर दी तब गोकुल निवासियों को बचाने के लिए भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की अपने हाथ की सबसे छोटी उंगली पर उठा लिया | 

सारे जानवर गांव वाले गोवर्धन पर्वत के नीचे आ गये तब उन्होंने अपने शेषनाग को बोला की वह अपना पूरा फन फैलाकर बारिश को आने से रोके सात दिन बारिश नहीं रुकी | तब इंद्र देव को अपनी गलती का अहसास हुआ की ये कोई आम मनुष्य नहीं हैं। ये तो स्वयं विष्णु जी का अवतार हैं। उसके बाद इंद्र देव ने भगवान कृष्ण जी से माफ़ी मांगी और तभी से गोवर्धन की पूजा शुरू हो गई | उस दिन के बाद से अन्न कूट और पूरी के प्रसाद से गोरधन को भोग लगाया जाता है।

पूजा करने की विधि :
इस दिन ब्रह्म महूर्त में स्नान करने के बाद गाय का गोबर लाएं। जिस स्थान पर आप को गोवर्धन की पूजा करनी है उस स्थान को अच्छी तरह से साफ़ कर लें। फिर उस स्थान पर कृष्ण भगवान की आकृति या गोवर्धन बना लें|

अगर आपके घर में गाय, भैस, बैल, है तो सुबह सवेरे उन्हें स्नान करा कर उनके गले में नई घंटी और रस्सी बांधनी चाहियें और उनका तिलक करके गुड़, चावल और मिठाई खिलाने के बाद आरती उतारे |और शाम को प्रसाद के लिए खीर, हलुवा, पूरी, और अन्न कूट (सभी सब्जियों को मिला कर बनाई हुई) की सब्जी बनाएं| और शाम को घर के सभी पुरुष और बच्चे मिल कर गोवर्धन बाबा की पूजा करते| 

पूजा की थाली में देशी घी का दीया, धूप, अगरबत्ती, बताशे, एक कटोरी में हलुवा , एक कटोरी में खीर, एक कटोरी में पंचामृत ( गंगा जल, दूध, शहद, दही, तुलसी के पत्ते, शक्कर) एक कटोरी में अन्नकूट की सब्जी और पूरी ले| एक जल का लोटा , और अपने हाथो में खील लेले| 

उसके बाद गोवर्धन बाबा के चारो तरफ
सात बार घूमें और परिवार का मुखियां ओर दूसरे हाथ में खील को बिखेरते हुए चलेऔर एक हाथ में लोटा के जल से धार बनाते हुए सात बार परिक्रमा करें|

गोवर्धन की सुंडी (नाभि) में एक दीया जलाया जाता है फिर उनको खीर, पूरी , हलुवे का और सब्जी का भोग लगायें| फिर परिवार के सभी सदस्य प्रसाद ग्रहण करे | और इस दिन को विश्वकर्मा दिवस के रूप में मनाया जाता है| इस दिन सभी फक्ट्री और कारखाने जो जिस भी व्यवसाय में वो सब बंद रहते है और वे सब उस दिन अपने औजारों की पूजा करते है | गोवर्धन का त्यौहार मनाने से घर में सुख, समृद्धि और सम्पन्नता आती है।

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राशिफल: इन राशियों पर प्रसन्न हैं माता महालक्ष्मी, ऐसे करें स्वागत


रविवार, 30 अक्टूबर को दीपावली पर्व है। इस दिन प्रीति और लुम्बक नाम के योग बन रहे हैं। 1 शुभ और 1 अशुभ योग बनने से 12 राशियों के लिए दिन मिला-जुला रहेगा। इनके प्रभाव से कुछ राशियों को फायदा और धन लाभ होगा साथ ही कोई अच्छी खबर भी मिल सकती है।

परिवार के साथ दिन बीतेगा। बड़े लोगों से मुलाकात होगी। वहीं अशुभ योग के प्रभाव से दौड़-भाग में दिन बीतेगा। फालतू खर्चा और टेंशन भी रहेगी। कुछ लोग गलत फैसले ले सकते हैं। इस तरह 12 में से 6 राशियों के लिए दिन शुभ और अन्य 6 राशि वालों के लिए अशुभ रहेगा।


मेष:- जीवन साथी का सहयोग व सानिघ्य मिलेगा। रुपए पैसे के लेन देन में सावधानी रखें। भौतिक दिशा में प्रगति होगी। प्रतिष्ठा के प्रति सचेत रहें। कोई महत्वपूर्ण निर्णय न लें।

वृष:- जीवन साथी का सहयोग व सानिध्य मिलेगा। भाग्यवश कुछ ऐसा होगा जिसकी आपको एक लम्बे समय से प्रतीक्षा थी। क्रोध व भावुकता में लिया गया निर्णय कष्टकारी होगा। धार्मिक प्रवृत्ति में वृद्धि होगी।

मिथुन:- मुश्किल हालात में परिवार का साथ मिलेगा। विरोधी अड़चने खड़ी करने की कोशिश करेंगे। प्रॉपर्टी खरीदने का मन बनेगा। प्रतियोगी परीक्षा में सफलता मिलने के आसार हैं।
   
कर्क:- आप भावुकता मे आकर कोई गलत फेसला ले बेठेगें। मांगलिक खर्च की रुपरेखा बनेगी भाग-दोड की अधिकता से आप आलस्य अनुभव करेगें।
   
सिंह:- राजनैतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति होगी। आर्थिक क्षेत्र में किए गए प्रयास सफल होंगे। व्यावसायिक योजना सफल होगी। कार्यक्षेत्र में व्यवधान आ सकते हैं। भाग्यवश कुछ ऐसा होगा जिसका आपको लाभ मिलेगा।

कन्या:- सूझबूझ के साथ काम करें , मुश्किलें आसान होगीं। युवाओं को कॅरिअर मे बड़ी सफलता मिल सकती हैं। राजकीय मामलेम पक्ष मेम हल हो सकते हैं। प्रियजन से मुलाकात सुखद रहेगी।

तुला:- मनचाहा काम मिलेगा। प्रियजन की बेरुखी से दुख होगा। रुका काम फिर शुरु होगा। कारोबारी यात्रा से भारी मुनाफा होगा। जमीन के लेने-देने में सतर्क रहें।

वृश्चिक:- पारिवारिक जीवन सुखमय होगा। धन, पद, प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। व्यावसायिक योजना में प्रगति होगी। प्रभाव तथा वर्चस्व में वृद्धि होगी। प्रणय संबंध मधुर होंगे। व्यर्थ की उलझनें रहेंगी। प्रियजन भेंट संभव।

धनु:- कारोबारी यात्रा में अनुकूल सौदे हो सकते हैं। सपने साकार करने का समय हैं।जीवनसाथी के सहयोघ से इच्छित लक्ष्य हासिल कर लेंगे। धार्मिक यात्रा योग हैं।
 
मकर:- पारिवारिक जीवन सुखमय होगा। संतान के दायित्व की पूर्ति होगी। स्थानान्तरण व परिवर्तन की दिशा में किया गया प्रयास सफल होगा। शासन सत्ता का सहयोग मिलेगा। वाणी पर नियंत्रण रखें।

कुंभ:- परीक्षा में सफलता को लेकर चिंतित रहेंगे नए प्रस्ताओं को आगे बढकर स्वीकारें , लाभ मिलेगी। कार्ययोजना में बदलाव संभव हैं। मित्र से उपहार मिलेगा।

मीन:- दाम्पत्य जीवन प्रभावित हो सकता है। व्यावसायिक मामलों में आशातीत सफलता मिलेगी। रुके हुए कार्य सम्पन्न होंगे। मनोरंजन के अवसर प्राप्त होंगे। उपहार व सम्मान का लाभ मिलेगा।



कलियुगाब्द...............5118
विक्रम संवत्.............2073
शक संवत्................1938
रवि......................दक्षिणायन 
मास.........................कार्तिक
पक्ष..........................कृष्ण
तिथि........................अमावस्या
रात्री: 11:07 पश्चात प्रतिपदा 
तिथि स्वामी................ विश्वदेव 
नित्यदेवी....................चित्रा
सूर्योदय ...............06:34:41पर
सूर्यास्त ...............06:01:26पर
नक्षत्र...................चित्रा
प्रात: 09:02 पश्चात स्वाति
योग.........................प्रीति
रात्री: 09:59 पश्चात आयुष्मान
करण.......................चतुष्पदा
प्रात: 09:53 पश्चात  नागव
ऋतु....................शरद
दिन.........................रविवार
चन्द्र राशि ..................तुला  
सूर्य राशि...................तुला

आंग्ल मतानुसार:-
30 अक्टूबर 2016 ईस्वी 
अभिजीत मुहूर्त:-
प्रात:-11:55 -12:41 शुभ
राहू काल:- सायं:-04:36 - 06:01 अशुभ
दिशाशूल:- पश्चिमदिशा:- आवश्यक हो तो दलिया या घी का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें । 

चौघडिया:- 
चौघडिया का फल:- शुभ,अमृत व लाभ श्रेष्ठ शुभत्व।
चर मध्यम फल देने वाली है।
प्रात: चाल   08:01 - 09:26 शुभ
प्रात: लाभ   09:26 - 10:52 शुभ
प्रात: अमृत 10:52 - 12:18 शुभ
दोप: शुभ  01:44 - 03:10 शुभ
सायं: शुभ  06:01 - 07:36 शुभ
सायं: अमृत 07:36 - 09:10 शुभ
शुभ अंक..................3
शुभ रंग ....................गुलाबी
आज का मंत्र:-
।।ॐ महालक्ष्मै नमः।।

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लक्ष्मी पूजन विधि:  ऐसे करें दिवाली पूजन, बरसेगी महालक्ष्मी की कृपा


जबलपुर.  दीपों के त्योहार के लिए क्या आम क्या ख़ास सभी तैयार हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार दीपावली का त्योहार बिना लक्ष्मी पूजन के अधूरा है। अपने पाठकों के लिए इसीलिए हम महालक्ष्मी पूजन की सम्पूर्ण पूजन विधि बता रहे हैं और कब है पूजन का शुभ मूहूर्त...



दीपावली पूजन विधि व मुहूर्त:- 

शुभ दिवाली तिथि         :    30 अक्तूबर 2016, रविवार
लक्ष्मी पूजन मुहूर्त         :    सायं 07:00 से 08:34 बजे तक
प्रदोष काल                   :    सायं 06:02 से 08:34
वृषभ काल                   :    सायं 07:00 से रात्रि 09:00 बजे तक
अमावस्या तिथि प्रारंभ   :    रात्रि 08:40 बजे, 29 अक्तूबर 2016 
अमावस्या तिथि समाप्त  :    रात्रि 11:08 बजे, 30 अक्तूबर 2016
 
पूजन सामग्री:  
महालक्ष्मी पूजन में रोली, , कुमकुम, चावल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, गूगल धुप , दीपक, रुई, कलावा (मौलि), नारियल, शहद, दही, गंगाजल, गुड़, धनिया, फल, फूल, जौ, गेहूँ, दूर्वा, चंदन, सिंदूर, घृत, पंचामृत, दूध, मेवे, खील, बताशे, गंगाजल, यज्ञोपवीत, श्वेत वस्त्र, इत्र, चौकी, कलश, कमल गट्टे की माला, शंख, लक्ष्मी व गणेश जी का चित्र या प्रतिमा, आसन, थाली, चांदी का सिक्का, मिष्ठान्न, 11 दीपक इत्यादि वस्तुओं को पूजन के समय रखना चाहिए।  

पूजा की विधि
दीप स्थापना: सबसे पहले पवित्रीकरण करें। आप हाथ में पूजा के जलपात्र से थोड़ा-सा जल ले लें और अब उसे मूर्तियों के ऊपर छिड़कें। साथ में मंत्र पढ़ें। इस मंत्र और पानी को छिड़ककर आप अपने आपको पूजा की सामग्री को और अपने आसन को भी पवित्र कर लें।

ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि:।।

अब पृथ्वी पर जिस जगह आपने आसन बिछाया है, उस जगह को पवित्र कर लें और मां पृथ्वी को प्रणाम करके मंत्र बोलें: 

पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग ऋषिः सुतलं छन्दः कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥ 
ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।
त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्‌॥
पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः

अब आचमन करें
हाथों को धो लें
ॐ हृषिकेशाय नमः 

आचमन आदि के बाद आंखें बंद करके मन को स्थिर कीजिए और तीन बार गहरी सांस लीजिए। यानी प्राणायाम कीजिए क्योंकि भगवान के साकार रूप का ध्यान करने के लिए यह आवश्यक है। फिर पूजा के प्रारंभ में स्वस्तिवाचन किया जाता है। उसके लिए हाथ में पुष्प, अक्षत और थोड़ा जल लेकर 
स्वतिनः इंद्र वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए परम पिता परमात्मा को प्रणाम किया जाता है। फिर पूजा का संकल्प किया जाता है। संकल्प हर एक पूजा में प्रधान होता है। 

संकल्प: आप हाथ में अक्षत लेकर, पुष्प और जल ले लीजिए। कुछ द्रव्य भी ले लीजिए। द्रव्य का अर्थ है कुछ धन। ये सब हाथ में लेकर संकल्प मंत्र को बोलते हुए संकल्प कीजिए कि मैं अमुक व्यक्ति अमुक स्थान व समय पर अमुक देवी-देवता की पूजा करने जा रहा हूं, जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हों। 
 
सबसे पहले गणेशजी व गौरी का पूजन कीजिए। उसके बाद वरुण पूजा यानी कलश पूजन करनी चाहिए। हाथ में थोड़ा सा जल ले लीजिए और आह्वान व पूजन मंत्र बोलिए और पूजा सामग्री चढ़ाइए। फिर नवग्रहों का पूजन कीजिए। हाथ में अक्षत और पुष्प ले लीजिए और नवग्रह स्तोत्र बोलिए। इसके बाद भगवती षोडश मातृकाओं का पूजन किया जाता है।

हाथ में गंध, अक्षत, पुष्प ले लीजिए। 16 माताओं को नमस्कार कर लीजिए और पूजा सामग्री चढ़ा दीजिए। 16 माताओं की पूजा के बाद रक्षाबंधन होता है। रक्षाबंधन विधि में मौलि लेकर भगवान गणपति पर चढ़ाइए और फिर अपने हाथ में बंधवा लीजिए और तिलक लगा लीजिए। अब आनंदचित्त से निर्भय होकर महालक्ष्मी की पूजा प्रारंभ कीजिए। 

पूजन विधि:  सर्वप्रथम गणेश और लक्ष्मी का पूजन करें। 
ध्यान: भगवती लक्ष्मी का ध्यान पहले से अपने सम्मुख प्रतिष्ठित श्रीलक्ष्मी की नवीन प्रतिमा में करें।
दीपक पूजन: दीपक जीवन से अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर जीवन में ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक है। दीपावली के दिन पारिवारिक परंपराओं के अनुसार तिल के तेल के सात, ग्यारह, इक्कीस अथवा इनसे अधिक दीपक प्रज्वलित करके एक थाली में रखकर कर पूजन करने का विधान है। 

उपरोक्त पूजन के पश्चात घर की महिलाएं अपने हाथ से सोने-चांदी के आभूषण इत्यादि सुहाग की संपूर्ण सामग्रियां लेकर मां लक्ष्मी को अर्पित कर दें। अगले दिन स्नान इत्यादि के पश्चात विधि-विधान से पूजन के बाद आभूषण एवं सुहाग की सामग्री को मां लक्ष्मी का प्रसाद समझकर स्वयं प्रयोग करें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा सदा बनी रहती है। 

अब श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें। 

पूजा के दौरान हुई किसी ज्ञात-अज्ञात भूल के लिए श्रीलक्ष्मी से क्षमा-प्रार्थना करें।

न मैं आह्वान करना जानता हूँ, न विसर्जन करना। पूजा-कर्म भी मैं नहीं जानता। हे परमेश्वरि! मुझे क्षमा करो। मन्त्र, क्रिया और भक्ति से रहित जो कुछ पूजा मैंने की है, हे देवि! वह मेरी पूजा सम्पूर्ण हो। यथा-सम्भव प्राप्त उपचार-वस्तुओं से मैंने जो यह पूजन किया है, उससे भगवती श्रीलक्ष्मी प्रसन्न हों। भगवती श्रीलक्ष्मी को यह सब पूजन समर्पित है.... 

आरती: जय गणेश 
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।।
एक दंत दयावंत चार भुजाधारी ।
माथे पर तिलक सोहे, मुसे की सवारी ।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।।
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा ।
लड्डुवन का भोग लगे, संत करे सेवा ।।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।।
अंधन को आंख देत, कोढ़ियन को काया ।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ।।
सुर श्याम शरण आये सफल कीजे सेवा ।। जय गणेश देवा
जय गणेश जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।।



आरती:  जय लक्ष्मी माता
ॐ जय लक्ष्मी माता मैया जय लक्ष्मी माता 
तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता....
उमा, रमा, ब्रम्हाणी, तुम जग की माता 
सूर्य चद्रंमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता....
दुर्गारूप निरंजन, सुख संपत्ति दाता 
जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि सिद्धी धन पाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता....
तुम ही पाताल निवासनी, तुम ही शुभदाता 
कर्मप्रभाव प्रकाशनी, भवनिधि की त्राता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता....
जिस घर तुम रहती हो, ताँहि में हैं सद्गुण आता 
सब सभंव हो जाता, मन नहीं घबराता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता....
तुम बिन यज्ञ ना होता, वस्त्र न कोई पाता 
खान पान का वैभव, सब तुमसे आता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता....
शुभ गुण मंदिर, सुंदर क्षीरनिधि जाता 
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता....
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता 
उर आंनद समाता, पाप उतर जाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता....
स्थिर चर जगत बचावै, कर्म प्रेर ल्याता 
तेरा भगत मैया जी की शुभ दृष्टि पाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता....
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता,
तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता....


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DIWALI पर जल्दी प्रसन्न होते हैं बजरंगबली, आज भी है 'हनुमान जयंती'


हनुमानजी की जयंती दो बार मनाई जाती है, यह कम ही लोग जानते हैं। इस हनुमान जयंती को भी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन बजरंगबली की पूजा विशेष फलदायी होती है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि हनुमान जयंती साल में दो बार क्यों मनाई जाती है...।

mp.patrika.com आपको बताने जा रहा है कि दीपावली के एक दिन पहले हनुमान जयंती क्यों मनाई जाती है।  क्यों बजरंगबली को सिंदूर का चोला चढ़ाया जाता है....।


दिवाली के एक दिन पहले मेष लग्न में हनुमान जी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाने की परंपरा है। लोग इसे श्रद्धाभाव से मनाते हैं। इस दिन महाबली की पूजा करने से बिगड़े काम बन जाते हैं और कृपा बरसती है। 

यही नहीं दीपावली पर बजरंग बली का पूजन करने से सभी मनोकामना पूरी होती है। व्यक्ति की हर जगह विजय प्राप्त होती है। बजरंग बली को भोलेनाथ का अवतार माना गया है। वे अनंत सूर्य से भी तेज प्रकृति के स्वामी हैं।


इस दिन क्या करें
1. भक्तों को कठिन व्रत, पूजन या अनुष्ठान, जबकि निःस्वार्थ प्रेम की आशा होती है। नरक चौदस के दिन और दीपावली के दिन भगवान का सच्चे प्रेम से स्मरण करें।
2. पंचमुखी हनुमान की प्रतिमा का षोडशोपचार अथवा पंचोपचार से पूजन करें। 
3. कीर्तन, श्री अखण्ड रामायण का पाठ कराना चाहिए।
4. हनुमान चालीसा का पाठ करें। इस तरह सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाएगी।
5. जिनकी कुंडली में मंगल दोष, शनि दोष राहु-केतू, सूर्य दोष आदि हों तो उन्हें भी इस दिन बजरंगबली की आराधना करना चाहिए।
6. इस दिन भगवान को चोला चढ़ाने से वे बेहद प्रसन्न होते हैं।
7.महिलाएं भी अक्षय पुण्य के लिए भगवान की आराधना करती हैं।
8. विद्यार्थियों को विद्या की प्राप्ति भी होती है। उनका पढ़ाई में मन लगता है।

यह है हनुमानजी को सिंदूर चढ़ाने की कथा
सिंदूर चढ़ाने के पीछे की विशेष कथा है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक एक दिन की बात है जब हनुमान जी ने सीता माता को मांग में सिंदूर लगाते हुए देख लिया था। इस पर उनकी जिज्ञासा हुई कि माता आप यह क्या कर रही हैं, अपनी मांग में सिंदूर क्यों लगा रही हैं। इस पर सीता माता ने कहा कि इससे मेरे स्वामी श्रीराम की आयु और सौभाग्य बढ़ जाता है। यह सुनकर बजरंगबली बेहद उत्साहित हो गए और उन्होंने सोचा कि एक चुटकीभर सिंदूर से भगवान श्रीराम की आयु और सौभाग्य बढ़ जाता है तो क्यों न मैं पूरे शरीर पर ही सिंदूर लगाउंगा तो मेरे श्रीराम हमेशा-हमेशा के लिए अमर जो जाएंगे और उनकी कृपा मुझ पर बनी रहेगी।


तो पूरे शरीर पर लगा लिया सिंदूर
इसके बाद हनुमानजी गए और पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया। यह नजारा देख सीतामाता भी भाव विभोर हो उठी।


तो हनुमान को मिला अमर होने का वरदान
दीपावली के दिन पहले हनुमानजी की भक्ति से माता  सीता बेहद प्रसन्न हो गईं। उन्होंने हनुमान को अमर रहने का वरदान दिया था। तभी से दीपावली पर भी हनुमान जी की जयंती मनाई जाने लगी। क्योंकि उन्हें अमर होने का वरदान इसी दिन मिला था।

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7 अंक वालों, लक्ष्मी मां को गुड़ व धनिये का भोग लगाएं


जन्म : 01, 10, 19, 28
कार्य को टालने की आदत से जमीनों के कामकाज में महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट हाथ से निकल सकते हैं। नौकरी में होने वाले अदृश्य हमलों का पूरे जोश के साथ सामना करना होगा। 
अनुकूलता के लिए- सूर्योदय से पूर्व स्नान और ध्यान करें। 

जन्म : 2, 11, 20, 29
कारोबार के लिए मुश्किल से मिले ऋण का उपयोग घर की अनावश्यक जरूरतों में लगने के कारण मन चिंतित रहेगा। हालांकि उत्साह के कारण कार्यक्षमता में वृद्धि होगी।
अनुकूलता के लिए- कोई भी कार्य बुजुर्गों की सलाह से ही करें।


जन्म : 3, 12, 21, 30
समूह में रहकर किए गए कार्यों में सफल रहेंगे। मन विचलित रहने से कार्यालय के महत्वपूर्ण कामों में गलती की आशंका को देखते हुए थोड़े दिन के लिए ठहराव दें। 
अनुकूलता के लिए- बहते हुए जल में स्नान करें। 


जन्म : 4, 13, 22, 31
तेजी-मंदी के कारोबार में सौदों को लंबे समय के लिए अटकाकर रखना अपने हित में रहेगा। भाग्य की प्रबलता उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ऊंचाई तक लेकर जाएगी।
अनुकूलता के लिए- सरस्वती देवी को गुलाब के पुष्प की माला चढ़ाएं। 

जन्म : 5, 14, 23
अथक प्रयासों के कारण रुका हुआ पैसा वापस मिलने लगेगा। कामकाज के लिहाज से शुरुआत थोड़ी फीकी रहेगी, किंतु धीरे-धीरे गति आने लगेगी।
अनुकूलता के लिए- हनुमान चालीसा का विधिवत पाठ करें।

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जन्म : 6, 15, 24
- व्यस्तता से भरी जिंदगी के कारण घर बैठे मिले सत्संगों का लाभ उठाने से वंचित रह जाएंगे।  हठधर्मिता के कारण परोपकार के कार्यों में बनी प्रतिष्ठा धूमिल हो सकती है।
- अनुकूलता के लिए- घर में सुगंधित द्रव्य का छिड़काव करें। 

Numerology

जन्म : 7, 16, 25
काल-परिस्थिति को देखते हुए नौकरीपेशा व्यक्तियों को नौकरी में आए परिवर्तनों का समय रहते लाभ लेना चाहिए। अतिरिक्तआय के चक्कर में फर्ज से विमुख न हों। 
अनुकूलता के लिए- लक्ष्मी मां को गुड़ व धनिये का भोग लगाएं।

जन्म : 8, 17, 26
स्वास्थ्य के प्रति गंभीरता भरी सोच के कारण किसी बड़े रोग से बचे रहेंगे। कोर्ट कचहरी के मामलों में उलझने के कारण अपने मूल्यवान समय का सदुपयोग नहीं कर पाएंगे। 
अनुकूलता के लिए- तुलसी के समीप घी का दीपक प्रज्ज्वलित करें।

जन्म : 9, 18, 27
नए व्यक्तियों से मेलमिलाप के कारण कुछ सौदे हाथ लग सकते हैं। किसी नई योजना के लिए चल रहा ऋण संकट दूर होने से मन में उत्साह का संचार होगा।
अनुकूलता के लिए- घर में पितरों के नाम से धूप दें।

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#Diwali: महाकाल की 'पुजारियों' पर बरसी कृपा, मिला दिवाली का तोहफा


उज्जैन. ज्योतिर्लिंग श्रीमहाकालेश्वर मंदिर जिस विधान से संचालित हो रहा है, उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। हाई कोर्ट की युगल पीठ ने 2013-14 में एकल पीठ के फैसले को गुरुवार को निरस्त करते हुए यह आदेश दिए हैं।

फैसला आते ही मानों पुजारियों को दिवाली का तोहफा मिल गया। मंदिर संचालन में अनियमितता और गड़बड़ी के  आरोप को लेकर लगाई जनहित याचिका को कोर्ट ने इस आदेश के साथ निराकृत किया।

पूर्व का आदेश
अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्यमित्र भार्गव के मुताबिक महाकाल मंदिर संचालन प्रक्रिया में गड़बड़ी, अनियमितताओं, पंडितों की नियुक्ति और ऑडिट सहित अन्य मुद्दों को लेकर 2013-14 में याचिका दायर की गई थी। जस्टिस एनके मोदी ने इसे जनहित याचिका के रूप में लेते हुए मंदिर का पुराना विधान बदलते हुए सरकार को नया विधान बनाने के आदेश दिए थे। उन्होंने माना था कि मंदिर संचालन में गड़बडिय़ां हैं, जिन्हें सुधारने की जरूरत है।

इस फैसले के खिलाफ मंदिर प्रशासन समिति ने युगल पीठ में अपील दायर की थी। इसकी सुनवाई के दौरान 2015 में उज्जैन के वीरेंद्र शर्मा तथा सारिका गुरु ने अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर कर मंदिर संचालन की गड़बडिय़ों व नियुक्तियों को मुद्दा बनाया था। मंदिर प्रशासन की अपील और शर्मा व सारिका की याचिका पर तीन सप्ताह पहले अंतिम बहस हुई, जिस पर गुरुवार को आदेश आया है।


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युगल पीठ का आदेश
- वर्तमान कानून व्यवस्था ठीक चल रही है, इसमें कोई दिक्कत नहीं है।
- ऑडिट पर आपत्ति को लेकर मंदिर प्रशासन तत्काल और सही निराकरण करे।
- मंदिर में पंडितों की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1986 में दिए आदेश मुताबिक हो।

इन्होंने की पैरवी
पुजारियों की तरफ से सत्यनारायण व्यास, कुटुंबले व अशोक गर्ग एडवोकेट थे, तो सुदर्शन जोशी मंदिर की ओर से। वहीं पुष्प मित्र भार्गव शासन की ओर से पैरवी कर रहे थे। डबल बैंच में पीके जायसवाल और विवेक रुसिया ने फैसला सुनाया। बड़ी संख्या में पंडे-पुजारी फैसले के समय मौजूद थे।

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धनतेरस पर विशेष मूहुर्त में करें मंत्रों का जाप, सालभर नहीं आएगी दरिद्रता


भोपाल। पांच दिनी दीपोत्सव का आगाज कल यानी शुक्रवार से हो रहा है, पर कई ज्योतिषियों का कहना है कि 27 अक्टूबर यानी गुरुवार शाम से ही विशेष मुहूर्त शुरू हो जाएंगे, जो दीपावली तक बने रहेंगे। खरीदारी करते वक्त इन विशेष मुहूर्त और उनके समय का ख्याल रखेंगे तो आप पर लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसेगी।

प्रकांड ज्योतिषाचार्य डॉ. कामेश्वर उपाध्याय ने अगले पांच दिन चलने वाले दीपोत्सव के कुछ विशेष समय बताएं हैं, जो विशेष फलदायी हैं। आइए जानते हैं इन विशेष मुहूर्त और समय को...


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आज ही से करें खरीदारी
इस वर्ष धनतेरस की तिथि भले ही गुरुवार से लग रही हो, लेकिन पर्व शुक्रवार को ही मनाया जाएगा। इस बार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी 27 अक्टूबर शाम 5.12 से 28 अक्टूबर की शाम 6.17 बजे तक रहेगी। इसके बावजूद 28 को उदयकाल में त्रयोदशी मिलने व सायंकाल में त्रयोदशी की उपलब्धता के कारण धनतेरस का पर्व शुक्रवार को ही मनाया जाएगा।


dhanteras 2016



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पूजन के लिए ये समय श्रेष्ठ
पूजन के लिए गोधूलि बेला व वृष लग्न शुभकाल हैं। ऐसे में 28 अक्टूबर को गोधूलि बेला शाम 5.45 बजे शुरू हो रही है। वृष लग्न का योग होने से रात 8.30 बजे तक पूजन का शुभ मुहूर्त है। 28 अक्टूबर को धन्वंतरि पूजा व धनतेरस है, क्योंकि शुक्रवार को सूर्योदय व सूर्यास्त दोनों ही त्रयोदशी तिथि में हैं।

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सालभर मां लक्ष्मी की पानी है कृपा, तो घर पर ही करें ये तंत्र क्रिया


उज्जैन. दीपावली हिंदू धर्म का बड़ा त्योहार है। यह और भी कई कारणों से खास है। तंत्र शास्त्र के अनुसार दीपावली पर यदि कोई भी तंत्र क्रिया या उपाय किया जाए, तो बहुत जल्द शुभ फल मिलता है।

ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया राशि अनुसार तंत्र उपाय और भी प्रभावी होते हैं। यदि धन संबंधी या अन्य कोई समस्या है तो दीपावली पर घर में ही छोटे उपाय कर छुटकारा पा सकते हैं।

मेष राशि वाले यह करें उपाय
- दीपावली की रात लाल चंदन और केसर घिसकर उससे रंगा हुआ सफेद कपड़ा यदि अपने गल्ले अथवा तिजोरी में बिछाएंगे तो उससे समृद्धि में वृद्धि तथा आकस्मिक धनहानि का अवसर नहीं आएगा।
- धनतेरस के दिन शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर तेल का दीपक जलाएं। उसमें दो काली गुंजा डाल दें तो वर्ष भर आर्थिक परेशानी नहीं होगी। रुका धन भी जल्दी ही मिल जाएगा।
- मेष राशि वाले दीपावली की रात स्फटिक या कमलगट्टे की माला से इस मंत्र का जप करें- ऊँ ऐं क्लीं सौ:

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वृषभ राशि यह करें, तो होगा लाभ
- यदि बहुत पैसा कमाने के बावजूद भी उसे सेविंग नहीं कर पा रहे हैं तो दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन के साथ-साथ कमल के पुष्प का भी पूजन करें तथा बाद में इसको लाल कपड़े में बांधकर धन स्थान यानी तिजोरी या लॉकर में रखें।
- दीपावली की रात गाय के घी के दो दीपक जलाकर उन्हें किसी एकांत स्थान पर अपनी मनोकामना बताते हुए रख आएं। शीघ्र ही हर मनोकामना पूरी होगी।
- दीपावली की रात स्फटिक या कमलगट्टे की माला से इस मंत्र का जप करें- ऊँ ऐं क्लीं श्रीं

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मिथुन राशि वालों के लिए यह है उपाय
- यदि धन की कमी से जूझ रहे हैं तो दीपावली के रात लक्ष्मी-गणेश पूजन करते समय दक्षिणावर्ती शंख की पूजा करके उसे धन स्थान पर रखें। इससे आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।
- यदि कर्ज से परेशान हैं तो लक्ष्मी पूजन के बाद गणेशजी की प्रतिमा को हल्दी की माला पहनाएं। इससे परेशान समाप्त होगी।
- दीपावली की रात स्फटिक या कमलगट्टे की माला से इस मंत्र का जप करें- ऊँ क्लीं ऐं स:

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कर्क राशि वाले पीपल के नीचे जलाएं दीपक
- धनतेरस के दिन शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे तेल का पंचमुखी दीपक जलाएं।
- दीपावली के दिन पीला त्रिकोणाकृति का झंडा विष्णु मंदिर में ऊंचाई वाले स्थान पर इस प्रकार लगाएं कि वह लहराता रहे तो अगली दिवाली तक भाग्य चमक उठेगा।
- दीपावली की रात स्फटिक या कमलगट्टे की माला से इस मंत्र का जप करें- ऊँ क्ली ऐं श्रीं

सिंह राशि वाले गाय के घी का दीपक लगाएं
- दीपावली की रात घर के मुख्य दरवाजे पर गाय के घी का दीपक जलाकर रखें। यदि वह सुबह तक जलता रहे तो समझें कि अगली दिवाली तक आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा साथ ही मान-सम्मान भी बढ़ेगा।
- यदि शत्रु परेशान कर रहे हैं तो दीपावली की शाम को पीपल के पत्ते पर अनार की कलम से गोरोचन के द्वारा शत्रु का नाम लिखकर भूमि में दबा दें।
- दीपावली की रात स्फटिक या कमलगट्टे की माला से इस मंत्र का जप करें- ऊँ ह्रीं श्रीं सौं:

कन्या राशि वाले लाल रुमाल में नारियल बांधें
- यदि धन संबंधी समस्या है तो दीपावली की रात लाल रुमाल में नारियल बांधकर अपने गल्ले अथवा तिजोरी में रखें। धन लाभ होने लगेगा। इसके अलावा धनतेरस के दिन दो कमलगट्टे की माला माता लक्ष्मी के मंदिर में दान अर्पित करें।
- यदि नौकरी संबंधी कोई समस्या है तो धनतेरस से लेकर दीपावली तक रोज मीठे चावल कौओं को खिलाएं। इससे समस्या का निदान होगा।
- दीपावली की रात स्फटिक या कमलगट्टे की माला से इस मंत्र का जप करें- ऊँ श्रीं ऐं सौं


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तुला राशि वाले बड़ के पत्ते पर सिंदूर से यह लिखें
- यदि व्यवसाय में घाटा हो रहा है तो आप दीपावली के दिन बड़ के पेड़ के पत्ते पर सिंदूर व घी से ऊँ श्रीं श्रियै नम: मंत्र लिखें और इसे बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें।
- लक्ष्मी की विशेष कृपा के लिए दीपावली की सुबह स्नान आदि नित्य कर्म के बाद किसी लक्ष्मी मंदिर में जाकर 11 नारियल अर्पित करें।
- दीपावली की रात स्फटिक या कमलगट्टे की माला से इस मंत्र का जप करें- ऊँ ह्रीं क्लीं श्रीं

वृश्चिक राशि : धन की इच्छा है तो पेड़ लगाएं 
- इस राशि के लोगों को यदि धन की इच्छा है तो वे दीपावली के दिन घर के बगीचे या बरामदे में केले के दो पेड़ लगाएं तथा इनकी देखभाल करें। परंतु इनके फल का सेवन न करें।
- यदि परिवार में अशांति है तो दीपावली की रात नाग केसर का फूल लाकर घर में कहीं छिपा दें। जहां उसे कोई देख न सके। परिवार में शांति का वातावरण हो जाएगा। 
- दीपावली की रात स्फटिक या कमलगट्टे की माला से इस मंत्र का जप करें- ऊँ ऐं क्लीं सौ:

धनु राशि वाले पान के पत्ते पर रोली से यह लिखें
- इस राशि के लोग धन प्राप्ति के लिए दीपावली के दिन पान के पत्ते पर रोली से श्रीं लिख कर अपने पूजा स्थान पर रखे तथा रोज इसकी पूजा करें।
- यदि किसी बीमारी से परेशान हैं तो दीपावली की रात चंद्रमा को अघ्र्य दें और बीमारी के निवारण के लिए प्रार्थना करें। अमावस्या होने से चांद दिखाई नहीं देगा तो भी अघ्र्य दें।
- दीपावली की रात स्फटिक या कमलगट्टे की माला से इस मंत्र का जप करें- ऊँ ह्रीं क्लीं सौ:

मकर राशि वाले आक की रुई का दीपक लगाएं
- यदि धन रुका है तो दीपावली की रात आक (आंकड़े) की रुई का दीपक घर के ईशान कोण में जलाएं। इससे रुका धन मिल जाएगा।
- यदि विवाह में बाधा आ रही है तो दीपावली के दिन विष्णु की पूजा करें और पीला वस्त्र, पीली मिठाई अर्पित करें।
- दीपावली की रात स्फटिक या कमलगट्टे की माला से इस मंत्र का जप करें- ऊँ ऐं क्लीं सौ:

कुंभ राशि वाले खीर बनाएं
- जीवन साथी के साथ नहीं बनती है तो दीपावली के दिन खीर बनाएं। इसका भोग लक्ष्मी को लगाएं और स्वयं भी खाएं। इससे दांपत्य जीवन में मधुरता आएगी।
- धन प्राप्ति के लिए दीपावली की रात नारियल के कठोर आवरण में घी डालकर लक्ष्मीजी के समक्ष दीपक जलाएं। यह दीपक रात भर जलने दें।
- दीपावली की रात स्फटिक या कमलगट्टे की माला से इस मंत्र का जप करें- ऊँ ह्रीं ऐं क्लीं श्रीं

मीन राशि वाले पैर से मिटा दें शत्रु का नाम
- यदि शत्रु पक्ष से परेशानी है तो दीपावली की रात कर्पूर के काजल से शत्रु का नाम लिखकर अपने पैर से मिटा दें। शत्रु आपको परेशान नहीं करेंगे।
- धन लाभ के लिए दीपावली के दिन किसी लक्ष्मी मंदिर में जाकर कमल के फूल, नारियल अर्पित करें तथा सफेद मिठाई का भोग लगाएं। इससे धन की समस्या समाप्त होगी।
- दीपावली की रात स्फटिक या कमलगट्टे की माला से इस मंत्र का जप करें- ऊँ ह्रीं क्लीं सौ:

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