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जानवर नहीं, अंतरिक्ष में सीधे मानव को ही भेजेगा भारत


राजीव मिश्रा

बेंगलूरु. भारतीय मानव मिशन में प्रणालियों की जांच के लिए अंतरिक्ष में पहले कोई जानवर नहीं भेजा जाएगा जैसा कि अन्य देश करते आए हैं। भारत अपने पहले ही प्रयास में सीधे अंतरिक्ष यात्रियों को ही भेजेगा और ऐसा करने वाला वह विश्व का पहला देश होगा।
यहां 57 वें भारतीय वांतरिक्ष चिकित्सा सम्मेलन के पहले दिन इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन (आइएएम) के कमांडेंट एयर कोमोडोर अनुपम अग्रवाल ने कहा कि भारत विश्व का पहला ऐसा देश होगा जो अपने मानव मिशन के तहत सीधे अंतरिक्ष यात्रियों को ही भेजेगा। यह एयरोस्पेस मेडिसिन के लिए एक बड़ी चुनौती है लेकिन संस्थान देश की उम्मीदों पर खरा उतरेगा। उन्होंने कहा कि मानव मिशन बड़ी चुनौती होती है। खासकर अंतरिक्ष यात्रियों के लिए, जिन्हें एक छोटे से यान (गगनयान) में लंबे समय तक रहना होता है। इस छोटे से कैप्सूल में रहने के कारण उत्पन्न थकान या अलगाव जैसी स्थितियां बड़े प्रभाव डालती हैं।
अंतरिक्ष यात्रा पर निकलने वाले यात्रियों को ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ेगा। अंतरिक्ष की कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में रहने के लिए उन्हें सही ढंग से प्रशिक्षित करना होगा, जो कि एक बड़ी चुनौती है। परंतु आइएएम को विश्वास है कि वह प्रधानमंत्री द्वारा तय समय सीमा के भीतर इसे पूरा करेगा।
उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में यात्रियों का जीवन अनूठा होता है और प्रशिक्षण के दौरान उन चीजों को बारीकी से समझना होगा। अंतरिक्ष यात्रियों के चुनाव के लिए 12 से 14 महीने का समय लगेगा। लेकिन, एक बार जिन अंतरिक्ष यात्रियों का चुनाव होगा वे अगले दस वर्ष के लिए फिट होंगे। संस्थान चाहता है कि एक बार अंतरिक्ष यात्रियों का चुनाव हो जाए तो वह लंबे समय तक योग्य बने रहें क्योंकि उनके प्रशिक्षण आदि पर भारी खर्च होगा। अंतरिक्ष में एक छोटे से यान में रहने व अलगाव जैसी परिस्थितियों की वजह से छोटी-छोटी बातें भी बड़ा मुद्दा बन सकती हैं, जो किसी बड़ी समस्या को जन्म दे सकती है। इसलिए अंतरिक्ष यात्रियों के चुनाव में हर एक सूक्ष्म पहलू को ध्यान रखना होगा। उन्हें शारीरिक रूप से स्वस्थ होने के साथ ही मानसिक रूप से संतुलित होना चाहिए। यहां तक कि सांस्कृतिक रीति-रिवाज और उनके पसंद-नापसंद को भी ध्यान में रखना होगा। यह प्रक्रिया बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण है क्योंकि कोई भी देश इस बारे में कोई जानकारी साझा नहीं करता। आइएएम को भरोसा है कि वह इन सभी पहलूओं को ध्यान में रखकर सफलतापूर्वक यात्रियों का चुनाव करेगा।


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CM चंद्रबाबू बोले, रोबोट्स पर निर्भरता कम करने के लिए ज्यादा बच्चे पैदा करें लोग


हैदराबाद. जहां एक ओर केंद्र सरकार का स्वास्थ्य महकमा देश में बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए कई प्रकार के कोंट्रासेप्टिव तरीके लागू कर रहा है, वहीं आंध्रप्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू के विचार इनसे बिलकुल उलट हैं। उनके अनुसार इसके लिए हमें फैमिली प्लानिंग करते हुए ज्यादा बच्चे पैदा करने चाहिए। दरअसल, सीएम नायडू के पास रोबोट्स पर लोगों की आत्मनिर्भरता कम करने के लिए एक विशेष प्लान है।


हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान इस प्लान पर बोलते हुए मुख्यमंत्री नायडू ने कहा कि ‘वर्तमान समय में लोगों को रोबोट्स पर अपनी आत्मनिर्भरता कम करने के लिए ज्यादा बच्चे पैदा करने चाहिए।’ आगे उन्होंने ये भी कि ‘अभी तक मैं लोगों को फैमिली प्लानिंग के बारे में सलाह देता रहा हूं, लेकिन अब मैं लोगों से ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए कहता हूं।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि पढ़े लिखे लोगों के साथ यह बहुत बड़ी समस्या है। उन्हें लगता है कि ज्यादा बच्चे पैदा करना बहुत बड़ा और कठिन कार्य है। नायडू ने कहा कि यदि हमारी पूर्व की पीढिय़ों ने भी ऐसा ही सोचा होता तो आज हम यहां नहीं होते।’


आंध्रप्रदेश के सीएम चंद्रबाबू  नायडू का यह बयान उनके एक अस्पताल के दौरे के बाद आया। जहां सर्जन के मामूली हस्तक्षेप के साथ एक रोविंग रोबोट ने एक मरीज की सफल सर्जरी की थी। हालांकि उनका ऐसा कहना विपक्षी दलों को पसंद नहीं आया और सीएम उनके निशाने पर आ गए। 12 लाख युवाओं के लिए रोजगार सर्जन के बजाय उन्हें इस बात का डर है कि रोबोट्स और ऑटोमेशन तकनीक 70 फीसदी लोगों की नौकरियां खत्म कर देंगी। हालांकि चंद्रबाबू नायडू ने यह बात पहली बार नहीं कही है। वे इस संबंध में पहले भी लोगों को आगाह कर चुके हैं। पिछले साल भी आंध्रप्रदेश की जनसंख्या में आ रही गिरावट पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने जनता से ऐसी ही अपील की थी।


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ममता बनर्जी पर बीजेपी का जोरदार हमला, टीएमसी को बताया "टोटल ममता करप्शन" 


नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी और उनकी पार्टी पर जोरदार हमला बोला है। पार्टी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। साथ ही टीएमसी को "टोटल ममता करप्शन" करार दिया। बीजेपी ने मामले में कारवाई की मांग करते हुए मुख्यमंत्री बनर्जी से जवाब मांगा है।  बता दें कि नारद स्टिंग के मामले पर टीएमसी पर भ्रष्ट्राचार के आरोप लगे है। इस मामले में पार्टी के कई दिगग्ज नेता को जवाब देना पड़ रहा है। 

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ममता के साथ भतीजे अभिषेक पर ही मढ़ा आरोप 
बुधवार को भाजपा मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में वरिष्ठ नेता व मानव संसाधन व विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी पर भ्रष्टाचार के मामले में शामिल होने का आरोप लगाया। जावड़ेकर ने कहा कि वैदिक रियलिटी कंपनी के मालिक राजकिशोर मोदी वाम मोर्चा की सरकार के दौरान आईटी सिटी बनाने के लिए किसानों की जमीन हासिल करने में जुटा था। 2009 में ममता ने इसके खिलाफ आंदोलन करते हुए राजकिशोर को जेल भेजने की मांग की थी।

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1.5 करोड़ रुपए का है मामला 
ममता के सत्ता में आने के बाद बदले घटनाक्रम में उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी लीप्स एंड बाउंड्स नामक कंपनी के डायरेक्टर बने। इस कंपनी के पंजीकरण का पता 30बी हरीश चटर्जी मार्ग था जो ममता का निवास है। इसके बाद राजकिशोर जिसके खिलाफ तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने आंदोलन किया, उसने अपनी दूसरी कंपनी ग्रीनटेक आईटी से अभिषेक की कंपनी को 1.5 करोड़ रुपए दिए। ग्रीनटेक की बैलेंसशीट में भी इसका जिक्र है और लीप्स एंड बाउंड्स ने भी इसे दर्शाया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ममता को इसका जवाब देना होगा।

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दार्जिलिंग में बंदी का 49वां दिन, लूट और आगजनी के बीच बीती रात 


दार्जिलिंग\नई दिल्ली। अलग गोरखालैंड की मांग पर दार्जिलिंग में जारी अनिश्चितकालीन बंदी आज 49वें दिन भी जारी रहा। इधर बंद के बीच मंगलवार की रात को कुछ लोगों ने ट्वॉय ट्रेन स्टेशन के नजदीक खाद्य सामग्री और सब्जी से भरे वाहन को फूंक दिया। इसका आरोप गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (गोजमुमो) समर्थकों पर लगाया गया है। दूसरी ओर गोजमुमो नेताओं ने आरोप को झूठा बताया है। गोरखा जन मुक्ति मोर्चा की ओर से बुलाए गए बंदी के कारण इस पहाड़ी क्षेत्र में जन-जीवन बुरी तरह से प्रभावित है।

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ऐसे हुई लूट की घटना 
पुलिस के अनुसार कुछ लोग रात में मिनी ट्रक पर खाद्य सामग्री और सब्जी लाद कर पहाड़ी क्षेत्र में जा रहे थे। दार्जिलिंग ट्वॉय ट्रेन स्टेशन के नजदीक गोजमुमो समर्थकों ने वाहन को रोक लिया। चालक समेत वाहन पर सवार लोगों को नीचे उतार कर मारा-पीटा और वाहन में आग लगा लगा दी। घटना की खबर पाकर बड़ी संख्या में पुलिस और दमकलकर्मी पहुंचे। दमकलकर्मियों ने आग बुझाई। उधर बिजनबाड़ी पंचायत कार्यालय में मंगलवार रात आग लगा दी गई। अहम कागजात जल कर राख हो गए।

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रोजमर्रा के सामानों की हो रही है कमी 
अलग गोरखालैण्ड राज्य की मांग को लेकर पिछले डेढ़ महीने से दार्जिलिंग में लगातार बंद चल रहा है। बुधवार को 49वें दिन दुकान-बाजार बंद रहे। सडक़ों पर कम वाहन निकले। लोग अपने घरों में दुबके रहे। लागातार बंद से दार्जिलिंग के पहाड़ी क्षेत्र में खाद्य संकट उत्पन्न हो गया है। गोजमुमो समर्थक और कुछ स्वयंसेवी संस्था के लोग रोजमर्रा के सामान जैसे सब्जी, चावल-दाल, नमक वगैरह उपलब्ध करा रहे हैं।

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सिरफिरे आशिक ने देवर-भाभी पर पेट्रोल डाल लगाई आग


उत्तर प्रदेश में जौनपुर जिले के मडिय़ाहूं कोतवाली क्षेत्र में एक सिरफिरे ने देवर-भाभी के ऊपर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इस घटना में दोनों गम्भीर रुप से झुलस गए। इसके बाद परिजनों ने दोनों को पास ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने मामला दर्जकर आरोपी की तलाश में जुट गई।



पुलिस ने बताया कि बुधवार को रजमलपुर गांव निवासी आंसू मौर्य का देवर श्याम जीत मौर्य मंगलवार को उसके मायके आया था। रात में खाना करने के बाद दोनों घर के बाहर सो गए। 



उसी गांव का निवासी आंसू के कथित प्रेमी अनिल पटेल ने रात में देवर-भाभी के ऊपर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। जिससे दोनों गंभीर रुप से झुलस गए। परिजनों ने दोनों को मड़यिाहूं के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। 


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मेडिकल कॉलेज ने पूछे वर्जिनिटी और पत्नियों की संख्या जैसे सवाल, कर्मचारी हैरान


बिहार की राजधानी पटना के इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस ने अपने कर्मचारियों से घोषणा पत्र में बहुत ही आपत्तिजनक सवाल पूछे गए हैं। सवालाें काे लेकर सभी कर्मचारी हैरान हैं। जानकारी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में कर्मचारियों को भरने के लिए दिए एक घोषणा पत्र में मैरिटल स्टेटस, वर्जिनिटी आैर पत्नियों की संख्या सवाल किए गए हैं।



कर्मचारियों से उनके मैरिटल स्टेटस में पूछा जा रहा है कि क्या वे वर्जिन/बैचलर/ विडो हैं। इस फॉर्म में पत्नियों की संख्या भी पूछी गई है। इसी तरह घोषणा पत्र में कई आपत्तिजनक विकल्प दिए गए हैं जिसमें से एक है मैं शादीशुदा हूं और मेरी केवल एक जीवित पत्नी है।



दूसरी आेर महिला कर्मचारियों को घोषणा पत्र में  मैं विवाहित हूं और मेरे अलावा मेरे पति की और कोई जीवित पत्नी नहीं है जैसे विकल्प दिए गए हैं। इस फॉर्म में एक अन्य विकल्प मैं विवाहित हूं और मेरी एक से अधिक पत्नी है/ मैं ऐसे शख्स की विवाहिता हूं जिसकी मेरे अलावा एक और जीवित पत्नी है चुनने को दिया गया है।


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शैलेश कुमार यादव: नौकरी छोड़ सांसद पत्नी मीसा भारती की पार्टी साधने में जुटे


बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती की शादी 1999 में शैलेश कुमार यादव से हुई थी। शादी के समय शैलेश इन्फोसिस में काम करते थे। शैलेश यादव और मीसा भारती के बारे में एक खास बात यह है कि शादी से पहले दोनों ही कभी नहीं मिले थे। अब शैलेश और मीसा की दो बेटियां दुर्गा (12) व गौरी (7) हैं। शैलेश के पिता एक रिटायर्ड बैंक कर्मी हैं।



चर्चा में

सीबीआई, ईडी के छापों में पत्नी मीसा भारती के साथ बेनामी संपत्ति मामले में फंसे।



इंजीनियरिंग के बाद एमबीए

पटना के पास बिहटा में जन्मे शैलेश ने बड़ौदा से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने लखनऊ स्थित एक कॉलेज से मैनेजमेंट का कोर्स किया। एमबीए की पढ़ाई के बाद शैलेश ने आईसीआईसीआई बैंक में असिसटेंट मैनेजर के रूप में नौकरी शुरू कर दी। इसके बाद उन्होंने इन्फोसिस कंपनी ज्वॉइन कर ली। 



राजद : सोशल मीडिया विंग बनाई

ड्डशैलेश ने राजद के चुनावी अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पेशे से इंजीनियर शैलेश ने इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के कुछ युवकों को जोड़कर सोशल मीडिया पर राजद के लिए चुनावी अभियान चलाया। शैलेश ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के पटना स्थित आवास पर एक आईटी कंट्रोल रूम बनाया था। इसके माध्यम से पूरा चुनावी कैंपेन संचालित किया गया था।



मीसा से शादी के बाद छोड़ दी थी नौकरी

शैलेश यादव के पिता रामबाबू पथिक सार्वजनिक क्षेत्र के एक बैंक में कार्यरत थे। अब वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं। शैलेश और मीसा की शादी लालू यादव के करीबी रामवचन राय ने कराई थी। शादी के कुछ दिनों बाद ही शैलेश ने नौकरी छोड़ दी थी। उसके बाद वे अपना बिजनेस करने लगे।


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मुख्य न्यायधीश जेएस खेहर को डॉक्टरों ने रक्तदान करने के लिए मना, आज करेंगे आखिर बार रक्तदान


नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश जगदीश खेहर को डॉक्टरों ने रक्तदान देने से मना कर दिया है। बता दें कि न्यायधीश खेहर हर तीन महीने में 2011 से लगातार एम्स में रक्तदान करते आ रहे हैं। लेकिन अब डॉक्टरों की मनाही की वजह से अब वह रक्तदान नहीं कर पाएंगे। बुधवार यानी आज खेहर आखिरी बार रक्तदान करेंगे।

पूरी उम्र किया है रक्तदान
न्यायधीश खेहर ने अपनी पूरी उम्र में रक्तदान किया है। लेकिन अब उनके रक्तदान धर्म में एक रूकावट आ गई है। खेहर चाहते हैं कि वह पूरी उम्र इसी तरह रक्तदान करते रहे लेकिन उनके डॉक्टरों ने उनकी उम्र को देखते हुए उन्हें रक्तदान करने से मना किया है।  हालांकि खेहर जब 60 साल के थे तब भी डॉक्टरों ने उन्हें रक्तदान करने से मना किया था। लेकिन खेहर रूके नहीं और फिर भी रक्तदान करते गए। अब जब खेहर 65 साल के हो गए हैं तो डॉक्टरों ने हाथ खड़े करते हुए उन्हें रक्तदान करने से  मना कर दिया है। बतां दे कि खेहर 27 अगस्त को 65 साल का होते ही वह सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश पद से रिटायर हो जाएंगे। 

स्वस्थ व्यक्ति हर 90 दिनों में दे सकता है रक्त 
मेडिकल नियमों के मुताबिक एक स्वस्थ व्यक्ति हर 90 दिनों के बाद रक्तदान कर सकता है। नियमों के मुताबिक रक्तदान केवल 18 साल से 60 साल उम्र के लोग ही कर सकते हैं। साथ ही जो रक्तदान कर रहा है उसका वजन 45 किलो से कम नहीं होना चाहिए।  

बिना वीआईपी ट्रीटमेंट पहुंचते है खेहर
जस्टिस खेहर को जानकार बताते हैं कि खेहर की कार हर 90 दिनों में एम्स के बाहर आकर खड़ी हो जाती है और वह बिना किसी वीआईपी ट्रीटमेंट के बिना के ही एम्स पहुंचते हैं। खेहर के स्टाफ के लिए यह काफी चुनौतीपूर्ण होता है कि खेहर बिना पॉयलट कार और भारी-भरकम सुरक्षा के निर्धारित समय पर पहुंच जाएं।

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बाजार में आ गया 'नकली' अंडा, प्लास्टिक से है तैयार



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ट्रेन में छुपकर बना रहा था लड़की का वीडियो, पकड़े जाने पर बताया इसलिए बना रहा था...


हाल ही में मुंबई में एक शमर्नाक घटना सामने आई थी, जिसमें लड़की को देखकर युवक ट्रेन में ही गलत काम कर रहा था। लड़की ने बहादुरी का परिचय दिया आैर युवक के इस अश्लील कारनामे का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। एेसा ही एक आैर मामला सामने आया है। घटना पश्चिम बंगाल  की है। 



कोलकाता के हावड़ा-मालदा इंटरसिटी ट्रेन में युवक छुपकर लड़की का वीडियो बना रहा था। तभी लड़की की दोस्त ने उसे वीडियाे बनाते देख लिया। लड़की ने हिम्मत दिखार्इ आैर उससे माेबाइल छीन लिया। कोलकाता की रहने वाली सतरूपा चक्रवर्ती ने इस घटना का वीडियो फेसबुक पर अपलोड किया है। 



सतरूपा ने लिखा कि पिंटू मंडल नाम का शख्स जो उस ट्रेन का नियमित पैसेंजर है। अक्सर वह लड़कियों के वीडियो बनाता है। उस दिन वो उसकी सहेली का वीडियो बना रहा था। जब उसने उसे अपनी सहेली का वीडियो बनाते देखा तो उसका फोन छीन लिया, लेकिन फोन लॉक था। 



जब उससे पासवर्ड मांगा ताे उसे बताने से मना कर दिया। बहुत बहस के बाद उसने आखिर वीडियाे बनाने की बात स्वीकार की। उसने कहा कि उसे लड़की के शरीर पर बना टैटू पसंद आ गया, इसलिए वीडियो बनाया। उसने लड़कियों को धमकी दी कि अगर हिम्मत है तो उसे पुलिस के हवाले करके दिखाए।




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इधर नहीं थम रही किसानों की आत्महत्या की घटनाएं, उधर सांसदों के वेतन में हो गई 400 प्रतिशत की बढ़ोतरी


सांसदों के वेतन-भत्तों का मामला मंगलवार को लोकसभा में उठाया। भाजपा सांसद वरूण गांधी ने कहा कि सांसद पिछले एक दशक में अपने वेतन-भत्ते चार सौ प्रतिशत तक बढ़ा चुके हैं। जबकि ब्रिटेन की संसद के सदस्यों के वेतन-भत्ते इसी अवधि में मात्र 13 प्रतिशत बढ़ाए गए हैं। 



वरूण ने सदन से अपील की कि कम से कम मौजूदा संसद की अवधि तक सांसद विशेषाधिकार छोड़ दें और सांसदों के वेतन-भत्तों के लिए संसद से बाहर एक स्वतंत्र निकाय बनाया जाए।



शून्यकाल में वरूण गांधी ने यह मामला उठाते हुए कहा कि देश में पिछले एक साल में 18 हजार किसानों ने आत्महत्या की है। हाल ही तमिलनाडु के किसानों ने राजधानी दिल्ली में आकर अपनी पीड़ा सरकार के समक्ष जाहिर करने के लिए स्वयं का मूत्र तक पी लिया। इसके बावजूद तमिलनाडु विधानसभा ने अपने विधायकों का वेतन 19 जुलाई को एक विधेयक पारित कर दोगुना कर लिया। 



वरूण ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की केबिनेट की प्रथम बैठक का हवाला देते हुए कहा कि नागरिकों की पीडा को देखते हुए उन्होंने छह माह तक वेतन नहीं लेने का निर्णय किया था। उडीसा विधानसभा सदस्य ने भी उस जमाने में 45 रूपए प्रतिदिन के स्थान पर मात्र 25 रूपए प्रतिदिन लिए। 



वरूण गांधी ने ब्रिटेन की संसद की तर्ज पर एक स्वतंत्र प्राधिकरण गठित करने का सुझाव दिया और कहा राजकोष से स्वयं के वित्तीय संकलन को बढ़ाने की आधिकारिता हथियाना प्रजातांत्रिक नैतिकता के अनुरूप नहीं है।



वरूण ने संसद के कामकाज पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि मात्र 50 प्रतिशत बिल संसदीय समितियों से जांच के बाद पारित किए गए हैं और 41 प्रतिशत बिल सदन में चर्चा के बिना ही पारित कर दिए गए। 



उन्होंने कहा कि 1952 में सदन की 123 बैठक होती थी जो अब 75 से भी कम हो गई हैं। जहां तक निजी क्षेत्र से सांसदों के वेतन की तुलना का प्रश्न है तो निजी क्षेत्र में काम करने वाले स्वयं के हित के लिए काम करते हैं जबकि हम देश सेवा के लिए कार्य करते हैं। 


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चंडीगढ़ के हर्षित को नहीं मिला 1.44 करोड़ का ऑफर, गूगल ने खबर को बताया गलत


चंडीगढ़। चंडीगढ़ प्रशासन ने कहा कि वह शिक्षा विभाग की ओर से हर्षित शर्मा पर गूगल में जॉब पर की गई आधिकारिक घोषणा की जांच करेगा। हाल में 29 जुलाई को चंडीगढ़ के शिक्षा विभाग ने  घोषणा की थी कि हर्षित शर्मा का गूगल में बतौर ट्रेनी के तौर पर चुना गया है। साथ में हर्षिक का पैकेज हर महीने 4 लाख रुपये का होगा।  हर्षित शर्मा कुरुक्षेत्र का रहने वाला है । अभी उसने सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-33 से अपना स्कूल पूरा किया है। घोषणा में कहा गया था कि हर्षित को गूगल ने बतौर ग्राफिक डिजाइनर के पद पर सिलेक्ट किया है। साथ ही हर्षित की ट्रेनिंग खत्म होने के बाद उसका पैकेज हर महीने 12 लाख रुपये का हो जाएगा। 

गूगल ने कहा हमने कोई ऑफर नहीं दिया
गूगल के प्रवक्ता ने कहा कि हमारे पास इस बात की कोई सूचना ही नहीं है कि हमने हर्षित शर्मा को कोई ऑफर दिया है। गूगल ने कहा कि हमने ऐसा कोई ऑफर किसी को नहीं दिया। बता दें कि मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक 16 वर्षीय किशोर हर्षित शर्मा की काफी चर्चा की जा रही थी। हर्षित के बारे में दावा किया जा रहा था कि उसे गूगल की तरफ से सालाना 1.44 करोड़ रुपये की सैलरी पर डिजाइनर बनने का ऑफर मिला है। यूटी शिक्षा विमाग के सेकेट्ररी ने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा की गई घोषणा मेरे नोटिस में नहीं की गई। मैंने डायरेक्टर से भी कहा था कि इस बात की पहले जांच करें। स्कूल शिक्षा के डायरेक्टर रूबिनदरजीत सिंह बरार ने कहा मुझे याद है कि स्कूल की प्रिंसिपल ने मुझे अपने स्कूल के लड़के की उपलब्धि पर मुझे सूचित किया था। लेकिन मैंने मीडिया को दी गई प्रेस रिलीज  नहीं देखी थी। इस पूरे वाक्या के लिए स्कूल की प्रिंसिपल जिम्मेदार है।  हालांकि जब इस संबंध में स्कूल की प्रिंसिपल इंद्रा बेनीवाल से पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'यह लड़का इसी साल हमारे स्कूल से पास आउट हुआ है और उसने स्कूल में आकर यह जानकारी दी थी कि उसे गूगल की तरफ से ऐसा ऑफर मिला है। हर्षित ने वॉट्सऐप पर अपने रिक्रूटमेंट का ऑफर लेटर भी भेजा था लेकिन वह बाद में मुझसे गलती से डिलीट हो गया।'

हर्षित के दादा ने कहा किसी ने किया गंदा मजाक 
इसी बीच हर्षित और उसके परिजन अपने घर से गायब हैं। हर्षित के दादा प्रेम चंद शर्मा ने कहा कि किसी उनके साथ बहुत ही गंदा मजाक किया है। उन्होंने बताया कि कुछ दिनों पहले हर्षित को उसके फोन पर उसके सिलेक्शन का मैसेज आया था। जब उसने वापिस उस नंबर पर कॉल की तो वह नंबर पहुंच से बाहर था। जब हमने हर्षित के स्कूल वालों से पूछा तो वह हर्षित की उपलब्धि के लिए उसे बधाई देने लगे थे। हमें नहीं पता था कि यह सब फेक था। हालांकि हर्षित के फेसबुक पेज पर लिखा है कि वह कैलिफोर्निया में रहता है और गूगल में काम करता है। हालांकि गूगल ने बताया कि वह किसी स्कूल के छात्र को रिक्रूट नहीं करता है।
 
 
 

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कहीं संघ की नाराजगी ताे नहीं पानगढिय़ा के इस्तीफे की वजह? किसानों पर आयकर लगाने के सुझाव से विवादाें में थे


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पसंदीदा अर्थशास्त्री और नीति आयोग के पहले उपाध्यक्ष अरविंद पानगढिय़ा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका कहना है कि वे दोबारा अकादमिक जगत में लौटना चाहते हैं।



मगर उनके अचानक आए इस्तीफे से साफ है कि सरकार से उनके कुछ अहम मामलों पर मतभेद थे। इससे पहले प्रधानमंत्री की पसंद के एक और अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने भी कह दिया था कि वे रिजर्व बैंक के गवर्नर के पद पर दूसरे कार्यकाल के लिए तैयार नहीं हैं और दोबारा अकादमिक जगत में जाना चाहते हैं। 



इस राय पर विवाद

नीति आयोग ने सुझाव दिया था कि किसानों पर भी आयकर लगना चाहिए। विवाद हुआ तो वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कृषि पर कर लगाने की स्थिति नहीं है।  



तब जिक्र नहीं

पिछले दिनों पत्रिका से  बातचीत में उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के काम की तारीफ की थी। तब उन्होंने कार्यकाल बीच में ही छोडऩे की इच्छा नहीं जताई थी।



इसे मेरा इस्तीफा नहीं माना जाए: पानगढिय़ा

राजस्थान निवासी पानगढिय़ा  ने कहा कि इसे मेरा इस्तीफा नहीं माना जाए। कोलंंबिया यूनिवर्सिटी ने मेरी छुट्टी बढ़ाने से मना कर दिया था। इस संबंध में दो महीने से प्रधानमंत्री से संपर्क में था। उनकी सलाह पर यूनिवर्सिटी को यह अनुरोध किया था कि वह मेरी छुट्टी बढ़ा दें। मगर वे तैयार नहीं हुए। इसके बाद मेरे सामने दो ही विकल्प थे या तो मैं वहां से इस्तीफा दूं या फिर अपनी मौजूदा जिम्मेदारी से मुक्त हो जाऊं। चूंकि यूनिवर्सिटी में मेरा कार्यकाल जीववपर्यंत है।



जानिए कौन है अरविंद पानगढिय़ा

अरविंद पानगढिय़ा का जन्म 30 सितंबर 1952  काे हुआ।



अरविंद पानगढिय़ा प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़े।



नीति आयोग में आने से पहले कोलंबिया यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर थे, वापस वहीं जा रहे हैं।



एशियन डेवलपमेंट बैंक के चीफ अर्थशास्त्री भी रहे।



यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड में सेंट्रल फॉर इंटरनेश्नल इकॉनोमिक्स में भी प्रोफेसर रहे।



आईएमएफ, विश्व व्यापार संगठन के साथ काम किया है।



महत्वपूर्ण सुझाव और फैसले...

आयोग ने दिल्ली-मुम्बई और दिल्ली-कोलकाता रूट पर हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट के लिए 18,000 करोड़ रुपए के निवेश को मंजूरी दी।

पेट्रोल-डीजल कारों का रजिस्ट्रेशन लॉटरी सिस्टम से।

ज्यूडिशियल परफॉर्मेंस इंडेक्स बने।

2024 से एक साथ और 2 चरण में हो लोकसभा-विधानसभा चुनाव।



संघ था नाराज!

संघ परिवार के संगठन उनके काम-काज और नीतियों की आलोचना करते रहे। भारतीय मजदूर संंघ और स्वदेशी जागरण मंच जैसे संगठनों ने खुल कर उनकी नीतियों को भारत के प्रतिकूल बताया है। हालांकि पनगढ़िया के इस्तीफे पर संघ के संगठनों ने कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की है। 


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अब टी-20 अंदाज़ में पढ़ें खबरें, यहां जानें 2 अगस्त की ताज़ा और रोचक खबरें


सीमा विवाद के बीच फिर आया जिनपिंग का बयान, कहा- चीनी सेना हर हमले को कर देगी नाकाम


बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मंगलवार को कहा कि चीन किसी को भी अपने क्षेत्र के एक टुकड़े को भी अलग करने और अपनी संप्रभुता को नष्ट करने की इजाजत नहीं देगा। शी ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की 90वीं वर्षगांठ के मौके पर ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल में अपने संबोधन में सेना को मुकाबले के लिए हमेशा तैयार रहने को कहा।



उन्होंने कहा कि चीनी सेना कभी आक्रमण नहीं करेगी, लेकिन उन्हें भरोसा है कि यह सभी तरह के आक्रमणों को परास्त कर देगी। शी ने कहा कि हम किसी भी व्यक्ति, किसी संगठन, किसी राजनीतिक दल को कभी और किसी भी तरह चीनी क्षेत्र का एक भी टुकड़ा अलग नहीं करने देंगे। उनका कहना कि किसी को यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि हम अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और विकास के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले परिणामों को स्वीकार कर लेंगे।



ध्यान हो कि रविवार को चीनी राष्ट्रपति शी ने इनर मंगोलिया में एक परेड के दौरान चीनी सेना को संबोधित करते हुए कहा था कि पीएलए आक्रमणकारी दुश्मनों को शिकस्त देने में सक्षम है। चीन का कई देशों से कई क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर विवाद रहा है। हालांकि, उसने दो देशों भारत और भूटान को छोड़कर सभी 14 देशों से अपने विवादों का निपटारा कर लिया है।



गौरतलब है कि चीन, भारत के अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है और उसे दक्षिणी तिब्बत कहता है। वहीं, भारत पश्चिमी क्षेत्र में अक्साई चीन पर अपना दावा जताता है, जो चीन के नियंत्रण में है। भारत और चीन के बीच दशकों पुराने विवादों में डोकलाम को लेकर एक नया विवाद जुड़ गया है, जहां दोनों देशों की सेना के बीच टकराव की स्थिति है।



सिक्किम स्थित डोकलाम, चीन और भूटान के बीच विवादित स्थान है। भूटान का सहयोगी भारत इस पर भूटान का अधिकार मानता है। तो वहीं चीनी राष्ट्रपति का बयान एक बार फिर ऐसे समय पर आया है जबकि दोनों देशों सीमा विवाद को लेकर पिछले कई दिनों से तनाव जारी है। चीन चाहता है कि भारत, डोकलाम से अपनी सेना वापस बुला ले। वहीं, भारत चाहता है कि डोकलाम से भारतीय और चीनी दोनों सेनाएं एक साथ हटें।



इधर घर का वास्तुदोष दूर किया, और उधर IPS दिनेश एमएन को कोर्ट ने किया बरी!

जयपुर। आईपीएस दिनेश एमएन के कोर्ट से बरी होने के बीच एक रोचक बात निकल कर आई है। जानकारी के मुताबिक़ दिनेश एमएन ने जयपुर स्थित गांधी नगर में दूसरे सरकारी क्वार्टर में डेढ माह पहले ही गृह प्रवेश किया है। सूत्रों ने बताया कि सुनवाई से पहले उन्होंने घर का वास्तुदोष दूर करवाया। यहां तक की मुम्बई से आने पर पंडितों ने उनको घर के पीछे के गेट से प्रवेश करने की सलाह दी थी। आईपीएस दिनेश एमएन मुम्बई से लौटने पर पीछे के गेट से सबके साथ अंदर पहुंचे। एयरपोर्ट और घर पर आईपीएस एमएन से मिलने बड़ी सख्या में पुलिस अधिकारी और जवान भी पहुंचे।



उधर, आईपीएस दिनेश एमएन के ससुर कर्नाटक में एडीजी पद से रिटायर्ड हुए हैं। सास लक्ष्मी और ससुर कीम्पईया अभी जयपुर आए हुए हैं। सासु मां ने पत्रिका संवाददाता से विशेष बातचीत में कहा कि उन्हें पता था उनका बेटा बरी होगा। भगवान पर भरोसा था। उनके चेहरे पर आठ साल पहले मिले गम को कोर्ट के एक निर्णय ने खुशी में बदल दिया। 



सास लक्ष्मी ने कहा कि दिनेश एमएन को परिवार सहित शिव मंदिर ले जाऊंगी। बेटा सच्चा और ईमानदार है। गौरतलब है कि 26 नवम्बर 2005 में सोहराबुद्दीन एनकाउंटर के मामले में दिनेश एमएन सात साल जेल में भी रहकर आए हैं। पुलिस विभाग में सबसे तेज तर्रार आईपीएस दिनेश एमएन 1995 बैच के आईपीएस हैं।



आनंदपाल एनकाउंटर पर नए डीजीपी अजीत सिंह का बयान, कहा- फर्जी नहीं थी मुठभेड़


जयपुर। डीजीपी बनने के बाद मंगलवार को पुलिस मुख्यालय में अजीत सिंह ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर पर बड़ा बयान दिया है। प्रदेश के नए डीजीपी ने कहा कि आनंदपाल का एनकाउंटर 100 प्रतिशत सही है। इसमें एक फीसदी भी संदेह का सवाल नहीं है। 



उन्होंने कहा कि मुझे भी मुठभेड़ की जगह जाने का मौका मिला, घटना स्थल का मुआयना किया, तब जाकर यह कह रहा हूं। एक सवाल के जबाव में उन्होंने कहा कि आनंदपाल एनकाउंटर की सीबीआई जांच होनी भी चाहिए थी। क्योंकि इससे लोगों का संदेह भी दूर हो जाएगा। 



साथ ही आनंदपाल के अलावा सोहराबुद्दिन एनकाउंटर मामले से जुड़े दिनेश एमएन को मुम्बई कोर्ट का बरी करने के निर्णय पर डीजीपी सिंह ने कहा कि पुलिस महकमे के लिए यह खुशी की बात है। 



कोर्ट के निर्णय पर कुछ नहीं कहेंगे, बस इतना है कि दिनेश एमएन राजस्थान पुलिस के कर्मठ और दबंग अफसर हैं। पुलिस की प्राथमिकता में उन्होंने कहा कि पुलिस का पहला उद्देश्य यह रहेगा कि आमजन की सुरक्षा बेहतर हो। इसके साथ हीं सड़क दुर्घटना हो या हत्या या फिर अन्य किसी हादसे में होने वाली मौत के आंकड़ों को कम करना होगा।



गौरतलब है कि आनंदपाल को राजस्थान पुलिस ने एक मुठभेड़ में मार गिराया था, जिसके बाद मुठभेड़ को फर्जी करार देते हुए मामले की सीबीआई जांच के लिए काफी दिनों तक विरोध प्रदशर्न जारी रहा। जिसके बाद अब नए डीजीपी अजीत सिंह ने पदभार संभालने के बाद एनकाउंटर पर अपनी बात रखी। 



CM नीतीश की बढ़ी मुश्किलें- हत्या मामले में दायर याचिका पर सुनवाई को तैयार SC


नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बिहार विधान परिषद की सदस्यता को रद्द करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका में आरोप लगाया गया है नीतीश ने चुनाव के वक्त दिए हलफनामे में अपने खिलाफ आपराधिक मामले को कथित तौर पर छिपाया।



न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अमिताव रॉय और न्यायमूर्ति ए.एम.खानविलकर ने वकील एम.एल.शर्मा की ओर से दाखिल उस याचिका पर सुनवाई की सहमति दे दी, जिसमें मामले को लेकर जेडीयू के नेता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।



इसके अलावा याचिका में कहा गया है कि नीतीश कुमार के खिलाफ एक आपराधिक मामला चल रहा है, जिसमें साल 1991 में बाढ़ लोकसभा उपचुनाव से पहले उन्हें एक स्थानीय कांग्रेस नेता सीताराम सिंह की हत्या और चार अन्य को घायल किए जाने के मामले में आरोपी बनाया गया है। तो वहीं याचिका में बिहार के मुख्यमंत्री की विधानपरिषद की सदस्यता निर्वाचन आयोग के 2002 के आदेश के मुताबिक रद्द करने की मांग की गई है।



वकील शर्मा ने कहा कि नीतीश कुमार के खिलाफ आपराधिक मामले की बात जानने के बावजूद निर्वाचन आयोग ने सदन की उनकी सदस्यता रद्द नहीं की और आज की तारीख तक वह संवैधानिक पद पर बने हुए हैं।



अरविंद पनगढ़िया ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा


नर्इ दिल्ली। नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अपने इस फैसले से पनगढ़िया ने पीएमआे को भी अवगत करा दिया है। हालांकि अभी तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। बताया जा रहा है कि पीएम माेदी फिलहाल असम के बाढ़ग्रस्त इलाकों के दौरे पर हैं। एेसे में पीएम ही उनके इस्तीफे पर लौटेने के बाद ही कोर्इ फैसला लेंगे। बता दें कि पीएम मोदी ने योजना आयोग को खत्म कर नीति आयोग की शुरूआत की थी। अरविदं पनगढ़िया को नीति आयोग का पहला उपाध्यक्ष बनाया गया था।



देश के जाने माने अर्थशास्त्री के रूप में अरविंद पनगढ़िया को जाना जाता है। जानकारी के मुताबिक पनगढ़िया की योजना एक बार फिर शिक्षण क्षेत्र में लौटने की है। वे 31 अगस्त तक नीति आयोग में अपने पद पर काम करते रहेंगे। पनगढ़िया को पीएम मोदी की पसंद माना जाता है। उन्हें उन्हें 5 जनवरी 2015 को पीएम मोदी ने नीति आयोग का उपाध्यक्ष चुना था। इससे पहले वे कोलंबिया विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के तौर पर कार्य कर रहे थे।



अरविंद पनगढ़िया को लेखन का भी शौक है। पनगढ़िया की 2008 में आर्इ पुस्तक इंडिया द इमरजिंग जाइंट बेस्ट सेलर रह चुकी है। इसके साथ ही उन्होंने कर्इ आैर पुस्तकें भी लिखी हैं। उन्हें मार्च 2013 में भारत सरकार ने पदम विभूषण से नवाजा। वे एशियार्इ विकास बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री भी रह चुके हैं।



साथ ही आर्इएमएफ आैर वर्ल्ड बैंक में भी काम कर चुके हैं। पनगढ़िया को आर्थिक उदारीकरण का समर्थक माना जाता है। साथ ही उन्हें पीएम माेदी का भी समर्थक माना जाता है। ये भी समझा जाता है कि मोदी सरकार ने एयर इंडिया को बेचने का निर्णय पनगढ़िया की सलाह पर ही लिया है।



जयपुर के हैं पनगढ़िया

अरविंद पनगढ़िया जयपुर के रहने वाले हैं। उनकी शुरुआती पढ़ार्इ भी जयपुर में ही हुर्इ आैर यहीं से उन्होंने ग्रेजुएशन किया। बाद में वे पीएचडी के लिए अमरीका गए। जहां उन्होंने न्यूजर्सी स्थित प्रिंसटन विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में डाॅक्टरेट की। बाद में वे काेलंबिया विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बन गए। 


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बाल काटने की खबरों से पहले मंकी मैन आैर मुंहनोचवा ने भी खूब डराया, जानिए उन घटनाआें के बारे में


राजस्थान के कर्इ जिलों में महिलाआें के बाल काटने की खबरें आने के बाद लोगों में दहशत है। अब एेसी ही खबरें देश के अन्य इलाकों से भी आ रही हैं। हालांकि करीब एक दशक से ज्यादा वक्त पहले भी इस तरह की खबरें खूब सामने आर्इ थीं जब मंकी मैन आैर मुंहनोचवा के आतंक ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया था। हालांकि आज न मंकी मैन की चर्चा है आैर न ही मुंहनोचवा की कोर्इ खबर है। उस दौर में ये अफवाहें इतनी प्रबल थीं कि हर शख्स के पास उस तरह की घटनाआें की एक अलग कहानी थी। टीवी चैनल्स से लेकर अखबारों के पन्ने एेसी कहानियाें से भरे पड़े थे। हालांकि वक्त गुजरने के साथ वे खबरें बंद हो गर्इ आैर इसी के साथ बंद हो गया वो आतंक। क्या बाल काटने की घटनाएं भी उसी तरह से बंद हो जाएंगी? ये बड़ा सवाल है। हालांकि हमें उन घटनाआें के बारे में जरूर जानना चाहिए जो अचानक से चर्चा में आर्इ आैर अचानक ही चर्चा से बाहर हो गर्इं।




मंकी मैन की दहशत
आपको याद होगा जब दिल्ली में मंकी मैन का आतंक छाया था। यहां तक की एक फिल्म में भी उसका बाकायदा जिक्र किया गया। सन 2001 के मर्इ में मंकी मैन का आतंक इस कदर दिल्ली वालों के जेहन में था कि वे लाठी-डंडे लेकर घरों के बाहर पहरा लगाते नजर आए थे। साथ ही बहुत से लोगों ने छतों पर सोने के बजाय गर्मी में कमरों में सोना शुरू कर दिया था। इसके साथ ही मंकी मैन के हमले की एक-दो नहीं बल्कि कर्इ खबरों की शक्ल में सामने आए थे। उस वक्त कुछ लोगों को इन अफवाहों के चलते हाथ तक धोना पड़ा था, जिसके बारे में सुनकर लोग आैर दहशत से भर उठे थे। कल्पना करने वालों ने उसे एेसे बंदर के रूप में परिभाषित किया जो लंबी छलांग लगाता है, बड़े नाखून रखता है आैर कभी भी किसी पर हमला कर देता है। यहां तक की इसके लिए जादू से पाकिस्तानी साजिश तक को जिम्मेदार ठहराया गया था।




मुंहनोचवा का आतंक
उत्तर प्रदेश में भी अफवाह की एेसी खबरों ने 2000 में जमकर बवाल काटा था। शुरुआत में लोमड़ी जैसा कोर्इ जानवर है जिसके पंख है। वह रात के अंधेरे में हमला करता है आैर लोगों का मुंह नोच लेता है। बाद में शरीर के ऊपर का हिस्सा लोमड़ी का आैर नीचे का हिस्सा मनुष्य का बताया गया। बस लोगों ने इन घटनाआें को सच मान लिया आैर ये सब मुंहनोचवा के आतंक के रूप में सामने आया। कुछ लोगों के चेहरे पर चोट आैर खरोंच के निशान भी मिले थे।  हालांकि कुछ वक्त बाद ये घटनाएं अपने-अपने समाप्त हो गर्इं।




मुंबर्इ में भी मंकी मैन
दिल्ली के अलावा मुंबर्इ में भी मंकीमैन की दहशत रही। लोगों को जख्मी करने की खबरों से लोग दहल उठे थे। मुंबर्इ में एक बार जोर-शेार से मंकी मैन का शोर उठा लेकिन फिर कहां दब गया किसी को नहीं पता।




मुंह सुअर जैसा, धड़ महिला जैसा
2014 में अचानक ये अफवाह फैली की जयपुर जंतुआलय में एक विचित्र जीव है, जिसका शरीर महिला का है और मुंह जंगली सुअर जैसा है। बस फिर क्या था। अजीबोगरीब जानवर को लेकर उड़ी अफवाह से जयपुर जंतुआलय में बड़ी संख्या में लोग उमड़े। जंतुआलय प्रशासन लोगों को इस अफवाह के बारे में बताते-बताते थक गया, लेकिन लोग कुछ मानने को तैयार नहीं हुए। हालांकि इस अफवाह के चलते जंतुआलय प्रशासन की कमार्इ में जबरदस्त इजाफा हुआ।


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देश के कोने-कोने से आ रही हैं महिलाआें के बाल काटने की खबरें, मनोविज्ञान की नजर में ये है सच


राजस्थान में महिलाआें के बाल कटने का जो सिलसिला शुरू हुआ था वो अब दूसरे राज्यों तक जा पहुंचा है। बाल काटने की खबरों की अब जैसे बाढ़ आ गर्इ है। राजस्थान के बाद अब हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश आैर मध्यप्रदेश से भी इस तरह की कर्इ खबरें सामने आ रही हैं। इस दौरान कर्इ महिलाएं बेहोश भी हो गर्इं। हालांकि मनोविज्ञान इस मामले को एक अलग धरातल पर ले जाता है आैर इसे अफवाह करार देता है, जिसे लोग सच मान लेते हैं। इसके कारण ही वो स्थिति पैदा होती है जिसके चलते हर कोर्इ इसकी चपेट में आ जाता है। मनोविज्ञान का मानना है कि मौखिक या फिर कुछ अन्य जरियों से ये अफवाहें लोगों तक पहुंचती है आैर हर कोर्इ इसे सच मानने लगता है।





मनोविज्ञान में इस तरह की घटनाआें को मास हिस्टीरिया आैर मास सोशियोजेनिक इलनेस कहते हैं। इसमें लोग अपना पूरा ध्यान एक तरह के काल्पनिक घटनाक्रम पर फोकस कर देते हैं आैर इसी के चलते भ्रामक स्थिति पैदा होती है, जिसके बाद पूरा का पूरा समाज इस तरह की घटनाआें को सच मान लेता है।





इस तरह की घटनाआें के इतने बड़े पैमाने पर फैलने का भी एक अलग कारण है। ये घटनाएं अचानक से इतनी बड़ी संख्या में लोगों को ले लेती हैं क्योंकि इन्हें काफी संवेदनशील बनाकर पेश किया जाता है। बहुत ही मामूली या फिर सामान्य सी बात को बेहद भावुक आैर काल्पनिक कथाआें के साथ नया आकार दिया जाता है। साथ ही इन बातों को नमक मिर्च के साथ पेश किया जाता है। इसके चलते एक आम आदमी खुद को बचा नहीं पाता है आैर इस तरह की घटनाआें को सच मानकर खुद भी अफवाहों के साथ बहने लगता है।





एेसी अफवाहों में कुछ लोग अपना उल्लू भी सीधा करने लगते हैं आैर इनके चलते भी एेसी अफवाहों को बल मिलता है। एेसी ही घटना करौली के एक निजी अस्पताल में सामने आर्इ जहां पर एक महिला सफार्इकर्मी ने छुट्टी के लिए खुद के बालों की चोटी काट ली। हालांकि ये पूरा मामला सीसीटीवी में कैद हो गया आैर महिला पकड़ी गर्इ।





अगर हम देखें तो कुछ सालों पहले मंकी मैन आैर मुंह नोचवा जैसी अफवाहें इसी तरह से फैली थी। उस वक्त लोग घरों के बाहर पहरा देने आैर छत पर सोने के बजाय बंद कमरों में सोने लगे थे। हालांकि वक्त गुजरने के साथ ये अफवाहें इस तरह से बंद हो गर्इ जैसे कभी थी ही नहीं। आज उनकी चर्चा तक नहीं है।

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पाकिस्तानी बाॅर्डर से शुरू हुआ बाल काटने की खबरों का सिलसिला पहुंचा दिल्ली तक, बड़ा सवाल- कौन है इसके पीछे


राजस्थान में महिलाआें के बाल काटे जाने की खबरें लगातार आ रही हैं। प्रदेश के बाड़मेर, जैसलमेर जैसे पाकिस्तान से लगते सरहदी जिलों से निकलीं बाल काटने की खबरें अब अन्य जिलों से होती हुर्इ हरियाणा होते हुए दिल्ली तक पहुंच चुकी है। महिलाआें के बाल काटने की खबरों ने दहशत फैला दी है। किसी ने इसे तंत्र मंत्र से जोड़कर देखा तो कोर्इ इस तरह की घटनाआें को अदृश्य शक्तियों का काम मान रहा है। वहीं कर्इ लोग इसे पाकिस्तान की साजिश भी करार दे रहे हैं।




राजस्थान में इस तरह की खबरें आना भी बंद नहीं हुर्इ थी कि अब देश के अलग-अलग हिस्सों से एेसी खबरें आने लगी हैं। राजस्थान के बाद अब हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश आैर मध्यप्रदेश  जैसे राज्यों में भी इस तरह की एक-दो नहीं बल्कि कर्इ घटनाएं सामने आर्इ हैं।




यहां तक की साइबर सिटी के नाम से मशहूर गुड़गांव में भी चोटी काटने के कर्इ मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि अभी तक गुड़गांव में सिर्फ एक महिला ने थाने में शिकायत दर्ज करार्इ है। इस तरह की घटनाआें ने पुलिस को भी परेशान कर दिया है आैर पुलिस इसे असामाजिक तत्वों का हाथ मानकर आगे बढ़ रही है।




उधर, हरियाणा के ही मेवात क्षेत्र में पिछले दो सप्ताह में एेसी एक-दो नहीं बल्कि कम से कम 15 मामले सामने आ चुके हैं। जहां पर महिलाआें की चोटी काटी गर्इ हैं। इसके चलते लोगों में दहशत है आैर महिलाएं घर के बाहर खाट डालकर साेने की बजाय अंदर कमरों में सो रही हैं। यहां पर महिलाआें की चोटी काटने के साथ ही उनके शरीर पर त्रिशूल आैर सिंदूर के निशान होने की बात भी सामने आ रही हैं।




मध्यप्रदेश के पहाड़गढ़ अौर कैलारस में भी इस तरह के तीन मामले सामने आ चुके हैं, जिनके चलते लोग झाड़-फूंक में जुटे हैं। यहां पर भी किसी ने भी पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं करार्इ है।




अब लोगों में इस कदर दहशत है कि महिलाएं घर के आगे मेंहदी आैर सिंदूर के छापे लगाकर इस आफत से बचने का तरीका ढूंढ रही है। साथ ही महिलाआें को खुले बाल या चोटी की बजाय जूड़ा बनाकर सोने की भी सलाह दी जा रही है। इस तरह की घटनाआें के सामने आने के बाद हर कोर्इ ये पूछ रहा है कि इन घटनाआें के पीछे कौन है आैर एेसी घटनाआें की बाढ़ कैसे आ गर्इ है।




महिलाआें की चोटी काटने को लेकर वायरल हो रहे मैसेजेज में इसे पाकिस्तानी साजिश भी करार दिया जा रहा है। कर्इ मैसेज में इसके लिए अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं।


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बिहार: CM नीतीश की बढ़ी मुश्किलें- हत्या मामले में दायर याचिका पर सुनवाई को तैयार SC


सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बिहार विधान परिषद की सदस्यता को रद्द करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका में आरोप लगाया गया है नीतीश ने चुनाव के वक्त दिए हलफनामे में अपने खिलाफ आपराधिक मामले को कथित तौर पर छिपाया।



न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अमिताव रॉय और न्यायमूर्ति ए.एम.खानविलकर ने वकील एम.एल.शर्मा की ओर से दाखिल उस याचिका पर सुनवाई की सहमति दे दी, जिसमें मामले को लेकर जेडीयू के नेता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।



इसके अलावा याचिका में कहा गया है कि नीतीश कुमार के खिलाफ एक आपराधिक मामला चल रहा है, जिसमें साल 1991 में बाढ़ लोकसभा उपचुनाव से पहले उन्हें एक स्थानीय कांग्रेस नेता सीताराम सिंह की हत्या और चार अन्य को घायल किए जाने के मामले में आरोपी बनाया गया है। तो वहीं याचिका में बिहार के मुख्यमंत्री की विधानपरिषद की सदस्यता निर्वाचन आयोग के 2002 के आदेश के मुताबिक रद्द करने की मांग की गई है।



वकील शर्मा ने कहा कि नीतीश कुमार के खिलाफ आपराधिक मामले की बात जानने के बावजूद निर्वाचन आयोग ने सदन की उनकी सदस्यता रद्द नहीं की और आज की तारीख तक वह संवैधानिक पद पर बने हुए हैं।


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लालू का पलटवार, नीतीश को बताया रजानीति का पलटूराम- कहा, तेजस्वी से डर गए


बिहार में राजद और जेडीयू के बीच का घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। राजद प्रमुख लालू यादव ने बिहार सीएम नीतीश कुमार पर पलटवार करते हुए उन्हें राजनीति सबसे बड़ा पलटूराम करार दिया। साथ ही कहा कि नीतीश हमेशा से सत्ता के लालची रहे हैं। नीतीश कुमार के सवालों का जवाब देते हुए लालू ने कहा कि वह तेजस्वी यादव के अच्छे कामों से डर गए थे। और बहाना बना बीजेपी के साथ जाकर मिल गए। 



पत्रकारों से बातचीत के दौरान नीतीश पर हमलावर लालू यादव ने कहा कि उन्होंने ने ही नीतीश कुमार को जेपी आंदोलन के दौरान राजनीति आगे लेकर आए थे। और उनके शुरुआती राजनीतिक जीवन में अहम भूमिका निभाते हुए उनकी मदद की थी। उनका कहना कि नीतीश को हमेशा राजद ने बचाया, लेकिन नीतीश ने हमारा इस्तेमाल किया। 



लालू यादव ने नीतीश पर निशाना साधते हुए कहा कि सभी को मालूम है कि नीतीश का चरित्र कैसा है। साथ ही उन्होंने नीतीश के उस दावे को भी गलत करार दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि नीतीश ने लालू यादव को छात्रसंघ चुनाव में वोट दिलवाया था। उन्होंने कहा कि मैं नीतीश कुमार से अधिक लोकप्रिय नेता रहा, और अपने दम पर चुनाव में जीत हासिल की। 


इतना ही नहीं लालू ने यह भी कहा कि छपरा चुनाव जीतने के बाद नीतीश कुमार छात्र नेता थे। उनको नहीं भूलना चाहिए कि बार-बार चुनाव हारने के बाद कैसे वो मेरे पास आए थे। लेकिन अब बीजेपी के मिलकर वो भगवा बोली बोल रहे हैं। साथ ही कहा कि पिछले चुनाव में मेरे कारण राजद का वोट जेडीयू में गया। और नीतीश कुमार को इतनी अधिक सीटें आई। 



गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नई सरकार के गठन के बाद चुप्पी तोड़ते हुए लालू यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव के आरोपों को लेकर कई सवाल खड़े किए थे। जिसके बाद मंगलवार को लालू यादव ने नीतीश पर पलटवार करते हुए उन्हें सत्ता का लोभी करार दिया। 


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अरविंद पनगढ़िया ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा, शिक्षण के क्षेत्र में लौटेंगे


नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अपने इस फैसले से पनगढ़िया ने पीएमआे को भी अवगत करा दिया है। हालांकि अभी तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। बताया जा रहा है कि पीएम माेदी फिलहाल असम के बाढ़ग्रस्त इलाकों के दौरे पर हैं। एेसे में पीएम ही उनके इस्तीफे पर लौटेने के बाद ही कोर्इ फैसला लेंगे। बता दें कि पीएम मोदी ने योजना आयोग को खत्म कर नीति आयोग की शुरूआत की थी। अरविदं पनगढ़िया को नीति आयोग का पहला उपाध्यक्ष बनाया गया था।





देश के जाने माने अर्थशास्त्री के रूप में अरविंद पनगढ़िया को जाना जाता है। जानकारी के मुताबिक पनगढ़िया की योजना एक बार फिर शिक्षण क्षेत्र में लौटने की है। वे 31 अगस्त तक नीति आयोग में अपने पद पर काम करते रहेंगे। पनगढ़िया को पीएम मोदी की पसंद माना जाता है। उन्हें उन्हें 5 जनवरी 2015 को पीएम मोदी ने नीति आयोग का उपाध्यक्ष चुना था। इससे पहले वे कोलंबिया विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के तौर पर कार्य कर रहे थे।





अरविंद पनगढ़िया को लेखन का भी शौक है। पनगढ़िया की 2008 में आर्इ पुस्तक इंडिया द इमरजिंग जाइंट बेस्ट सेलर रह चुकी है। इसके साथ ही उन्होंने कर्इ आैर पुस्तकें भी लिखी हैं। उन्हें मार्च 2013 में भारत सरकार ने पदम विभूषण से नवाजा। वे एशियार्इ विकास बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री भी रह चुके हैं। साथ ही आर्इएमएफ आैर वर्ल्ड बैंक में भी काम कर चुके हैं।



पनगढ़िया को आर्थिक उदारीकरण का समर्थक माना जाता है। साथ ही उन्हें पीएम माेदी का भी समर्थक माना जाता है। ये भी समझा जाता है कि मोदी सरकार ने एयर इंडिया को बेचने का निर्णय पनगढ़िया की सलाह पर ही लिया है।





जयपुर के हैं पनगढ़िया
अरविंद पनगढ़िया जयपुर के रहने वाले हैं। उनकी शुरुआती पढ़ार्इ भी जयपुर में ही हुर्इ आैर यहीं से उन्होंने ग्रेजुएशन किया। बाद में वे पीएचडी के लिए अमरीका गए। जहां उन्होंने न्यूजर्सी स्थित प्रिंसटन विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में डाॅक्टरेट की। बाद में वे काेलंबिया विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बन गए।


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