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करतारपुर में बोले इमरान- पाकिस्तान से चुनाव लड़ें सिद्धू तो जीत पक्की


नई दिल्ली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बुधवार को करतापुर कॉरिडोर का शिलान्यास किया। इस दौरान शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए इमरान ने सबसे पहले भारत से पहुंचे लोगों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मैं भारत से आए लोगों को स्वागत करता हूं। इमरान ने पंजाब सरकार में मंत्री और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू को विशेष धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि सिद्धू पाकिस्तान में दोस्ती और अमन चैन का पैगाम लेकर आए। अपने क्रिकेटर मित्र सिद्धू की तारीफ करते हुए पाक पीएम ने कहा कि उनकी लोकप्रियता का आलम यह है कि अगर पाकिस्तान से भी चुनाव लड़ें तो वह यहां से भी जीत जाएंगे।

 

सिख समुदाय में दिखाई दी खुशी

इस दौरान इमरान खान ने करतारपुर कॉरिडोर को लेकर जो खुशी सिख समुदाय में दिखाई दी है, वो बिल्कुल ऐसी है मानो मुसलमान जैसे मुस्लिम मदीना से 4 किलोमीटर दूर खड़े हों, लेकिन उस पार जा नहीं सकते। लेकिन अब सालों पुरान यह सपना पूरा हुआ है। इमरान खान ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच केवल एक मसला कश्मीर का है। अब जबकि इंसान चांद तक जा पहुंचा है, लेकिन हम एक मसले को नहीं निपटा पा रहे हैं। इमरान ने निकट भविष्य में यह मसला निपटने की आशा व्यक्त की। उन्होंने एक बार फिर दोहराते हुए कहा कि अगर हिंदुस्तान एक कदम आगे बढ़ाएगा तो हम दो कदम आगे बढ़ाएंगे।



सिद्धू पाकिस्तान में चुनाव लड़ लें तो वो जीत

इमरान खान ने कहा अगर सिद्धू पाकिस्तान में चुनाव लड़ लें तो वो जीत सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच अमन चैन के लिए हमें सिद्धू के प्रधानमंत्री बनने का इंतजार ना करना पड़े। आपको बता दें कि इससे पहले तत्कालीन पाक पीएम नवाज शरीफ ने यही बात पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के लिए कही थी। साल 1999 में वाजपेयी ने लाहौर यात्रा के दौरान जब दोनों देशों के बीच शांति पर जोरदार दिया था, तब पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा था कि ‘वाजपेयी जी, अब तो आप पाकिस्तान में भी चुनाव जीत सकते हैं।’’


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पाकिस्तान में #MeToo मुहिम हुई तेज, जद में आईं कई हस्तियां


इस्लामाबाद। विश्व भर में #MeToo मुहिम के तहत स्त्रियां अपने खिलाफ हुईं शोषण की बातों को बता रही हैं। जिसमें कई मशहूर शख्सियतों पर यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगे हैं। #MeToo कैंपेन अब भारत से होता हुआ पड़ोसी देश पाकिस्तान पहुंच गया है। यहां पर कई 'इज्जतदार' लोग 'बेनकाब' हुए हैं। जुनैद अकरम और फैजल ईधी पर महिला के साथ बदसलूकी के आरोप लगे हैं। बता दें कि जुनैद पाकिस्तान में बड़े कॉमेडियन हैं। अतंरराष्ट्रीय स्तर पर काफी मशहूर भी हैं। वहीं फैजल ईधी पाकिस्तान के एक बड़े समाजसेवक और व्यावसायी बेटे हैं। हालांकि उन दोनों ने खुद को पाक साफ बताते हुए अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया है।

#Metoo: पुरुषों के साथ भी ज्यादती, सैफ अली खान-अध्ययन सुमन समेत कई लोगों का छलका दर्द

पत्रकार के ट्वीट से तेज हुई मुहिम
9 अक्टूबर को टीवी एंकर और पत्रकार रूबैया अनम ने ट्वीट पोस्ट करके कहा, "कई महिलाएं एक जाने माने कॉमेडियन और सोशल मीडिया पर्सनालिटी द्वारा यौन उत्पीड़न के खिलाफ बोल रही है। उन्होंने दर्जनों लड़कियों से झूठ बोला साथ ही उनपर दबाव भई डाला। उनमें से कुछ लड़कियां मेरे पास मदद के लिए पहुंची। वह जानना चाहती थी कि उन्हें अब क्या करना चाहिए" हालांकि इस ट्वीट में उन्होंने जुनैद का नाम नहीं बताया। चोट खाईं महिलाएं खुद सोशल मीडिया पर आकर पाकिस्तान के स्टार कॉमेडियन जुनैद अकरम पर आरोप लगाने लगी। उनका नाम उजागर हो गया। एक लड़की ने आपबीती सुनाते हुए लिखा जुनैद अकरम ने मुझे होटल के कमरे में आमंत्रित किया। अगले दिन ट्रैवल एजेंसी की बस में जबरदस्ती मेरा हाथ पकड़ लोगों को ये दिखाने लगे कि मैं उनकी बहुत करीबी हूं। मैंने उनके बर्ताव की शिकायत ट्रैवल एजेंसी से भी की। अपने आरोपों पर सफाई देते हुए अकरम ने कहा कि आरोप बेबुनियाद हैं और मैं उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करूंगा।

ईधी फाउंडेशन के चेयरमैन पर लगे आरोप

पाकिस्तान के जाने माने समाज-सेवी/जन हितैषी स्वर्गीय अब्दुल सत्तार ईधी के बेटे और ईधी फाउंडेशन के चेयरमैन फैजल ईधी का नाम भी #MeToo में आया है। पूर्व पत्रकार उरूज जिया ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाय है। महिला पत्रकार उरूज ने एक के बाद एक कई ट्वीट किए। उरू ने लिखा, "पहली मुलाकात के बाद ही फैजल ने उनसे नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश शुरू कर दी। उन्होंने मेरा नंबर मांगा, जो मैेंने दे दिया, हालांकि उन्होंने पहली ही मुलाकात में जिस तरह मेरा हाथ पकड़कर खींचा तो हक्की बक्की रह गई। फिर फैजल ने जब तब आधी रात को मैसेज भेजने शुरू किये।" साथ ही उन्होंने बताया कि फैजल ने धमकी दी कि अगर मैं उनसे दोस्ती नहीं रखूंगी तो वो फंड रोक दिया जाएगा। मैंने तीखी प्रतिक्रिया दी। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि कोई इतना बड़ा शख्स, जो विवाहित और जिसके बच्चे हों, उम्र में कहीं ज्यादा बड़ा, वो ऐसा कर सकता है।" फैजल ने आरोपों का खंडन किया है।


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शपथ ग्रहण से पहले इमरान खान के लिए अच्छी खबर, इन दो पार्टियों ने किया समर्थन का ऐलान


इस्लामाबाद। पाकिस्तान में आम चुनाव के बाद सबसे ताकतवर पार्टी के रूप में उभरी पीटीआई पार्टी के अध्यक्ष के इमरान खान की शपथ ग्रहण की चर्चाएं मीडिया में छाई हुई है। इसी बीच इमरान खान के लिए एक और अच्छी खबर सामने आ रही है। दरअसल मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट-पाकिस्तान (एमक्यूएम-पी) ने देश में संघीय सरकार बनाने के लिए इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) को समर्थन देने की घोषणा की है।

एमक्यूएम-पी के समन्वयक ने की समर्थन की पुष्टि

मीडिया रिपोर्टों में इस संबंध में जानकारी छपी है। यही नहीं खुद एमक्यूएम-पी के समन्वयक खालिद मकबूल सिद्दीकी ने बुधवार को एक मीडिया हाउस के सामने इसकी पुष्टि की। वहां एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, 'हां, हम केंद्र में गठबंधन सरकार बनाने के लिए उनके (पीटीआई के) साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं।'

इस कारण लिया फैसला

सिद्दीकी ने आगे कहा कि पिछले अनुभवों को देखते हुए पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) का साथ नहीं देगी। पीपीपी सिंध में किसी को नहीं चाहती है। एमक्यूएम-पी संसद में सत्तारूढ़ पक्ष में पीटीआई के साथ बैठेगी। उन्होंने कहा, 'हमने विपक्ष के साथ बैठने के स्थान पर सत्ता पक्ष के साथ बैठने का फैसला किया है। विपक्ष के साथ बैठने से हमारे पक्ष के बारे में संदेह पैदा होगा और इसलिए एमक्यूएम-पी इस कदम पर आम सहमति से पहुंची है।'

जनादेश का सम्मान

एमक्यूएम समन्वयक का कहना है, 'हम सभी के जनादेश का सम्मान करते हैं और चाहते हैं कि सभी हमें मिले जनादेश का सम्मान करें।' उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी गुरुवार को सर्वदलीय बैठक में हिस्सा नहीं लेगी। यह बैठक पाकिस्तान मुस्लिम लीग- नवाज ने 25 जुलाई को आम चुनाव में हुए कथित धांधली पर चर्चा करने के लिए बुलाई है।

इस विषय पर अभी भी संशय

एकक्यूएम-पी एमएनए और समन्वयक समिति के सदस्य अमीनुल हक ने कहा कि एकक्यूएम ने हालांकि प्रधानमंत्री के पद के लिए खान का समर्थन करने का निर्णय लिया है लेकिन उन्हें अभी भी यह निर्णय लेना है कि क्या वे सरकार में शामिल होकर कोई मंत्रालय संभालेंगे। इस संबंध में अंतिम निर्णय कुछ ही दिनों में लिया जाएगा।

बलूचिस्तान नेशनल पार्टी-मेंगल (बीएनपी-एम) से भी समर्थन

आपको बता दें कि गुरुवार को पीटीआई ने बलूचिस्तान नेशनल पार्टी-मेंगल (बीएनपी-एम) से भी समर्थन मांगा था। इस बीच, नईमुल हक और सरदार यार मुहम्मद रिंद की अगुवाई में पीटीआई प्रतिनिधिमंडल बीएनपी-एम के प्रमुख सरदार अख्तर जन मेंगल से समर्थन के लिए इस्लामाबाद में मिला। बैठक के बाद मेंगल ने कहा, 'मैं संघीय सरकार में शामिल होने के लिए निमंत्रण देने पर पीटीआई नेतृत्व का शुक्रगुजार हूं।'अपनी मांगों को रखते हुए मेंगल ने कहा कि उनकी मांग लापता लोगों की तलाश और चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को लागू करना है। उन्होंने कहा, 'अगर हमें हमारी मांगों का संतोषजनक जवाब मिला तो हम पार्टी (पीटीआई) का समर्थन करने के लिए तैयार हैं।' गौरतलब है कि पीटीआई संसदीय चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है लेकिन सरकार बनाने के लिए उसके पास पर्याप्त बहुमत नहीं है। इसीलिए उसे अन्य दलों पर निर्भर होना पड़ रहा है।


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पाकिस्तान: इमरान खान ने जाहिर की इच्छा, पीएम की शपथ लेने के लिए रखी ये बात


पाकिस्तान। पाकिस्तान के नए कप्तान इमरान खान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के लिए अपनी इच्छा जाहिर की है। पाक के तहरीक-ए-इंसाफ के प्रमुख इमरान खान ने अपनी इच्छा जाहिर करते जनता का आवाम के बीच प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने की ख्वाहिश जाहिर की है। यहीं नहीं इमरान के साथ पार्टी के सदस्यों ने भी किसी सार्वजनिक स्थान पर शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन करने के प्रस्ताव पर जोर दिया है।

वहीं इमरान खान ने बताया कि वह 11 अगस्त को पाकिस्तान के नये प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे। बता दें कि पाकिस्तान 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है। जाहिर है इमरान खान इस दिन देश के प्रधानमंत्री के तौर पर पाकिस्तान का झंडा फहराना चाहेंगे।

वहीं जानकारी है कि अभी तक डी चौक और परेड ग्राउंड का नाम शपथ ग्रहण समारोह के लिए सुझाया गया है। हांलाकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है।

बता दें कि पाकिस्तान में प्रधानमंत्री के शपथ का कार्यक्रम राष्ट्रपति भवन में होने का रिवाज है, जिसमें राष्ट्रपति निर्वाचित प्रधानमंत्री को पद और गोपनियता की शपथ दिलाता है।

आपको बता दें कि पाकिस्तान में 25 जुलाई को नेशनल असेंबली चुनाव हुए थे जिसमें पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। पीटीआई को चुनाव में 116 सीटों पर जीत मिली। वहीं पीएमएल-एन को 64 और पीपीपी को 43 सीटें मिलीं।

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में कुल 342 सीटें हैं, जिनमें से 272 पर सीधे चुनाव होते हैं। कोई भी पार्टी तभी सरकार बना सकती है जब उसके पास 342 में से 172 सीटे हों।

बता दें कि किसी एक पार्टी को अपने दम पर सरकार बनाने के लिए कम से कम 137 सदस्‍यों की जरूरत होगी। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में कुल 342 सदस्य हैं, जिनमें से 272 को आम चुनावों में सीधे तौर पर चुना जाता है, जबकि शेष 60 सीटें महिलाओं और 10 सीटें धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित हैं।


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पाकिस्‍तान चुनाव: एडब्‍लूपी के चुनावी गीत ने खुब बटोरी सुर्खियां, पार्टी ने की खुद को बदलने की मांग


नई दिल्‍ली। पाकिस्तान में सुबह से मतदान जारी है। इस बार मतदान में पहले की तुलना में लोगों की भागीदारी ज्‍यादा है। इससे पहले आम चुनाव के लिए हुए प्रचार के दौरान सभी पार्टियों ने नए-नए वादे और नारे गढ़े। लेकिन आवामी वर्कर्स पार्टी (एडब्‍लूपी) के गानों ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी और लोकप्रिय हुआ। एडब्‍लूपी का यह गाना उसका अधिकारिक गाना है। बता दें कि पाकिस्‍तान में उथल-पुथल के बीच यह चुनाव हो रहा है। कहा जा रहा है कि लोग मत किसी को भी डाले परिणाम सेना के हस्‍तक्षेप की वजह से पहले से ही तय हैं।

खुद को बताया मजदूरों की पार्टी
एडब्‍लूपी के सोशल मीडिया पेज पर नजर डालें तो इस पार्टी ने अपने पेज पर खुद को 'कामगारों यानी मजदूरों और गरीबों की पार्टी बताया है। इसके पीछे पार्टी का मकसद देशवासियों को एकजुट कर सामाजवादी और लोकतांत्रिक समाज की स्थापना करना है। ताकि सभी को जरूरी सुविधाएं नसीब हो और लोग अपने मानवीय अधिकारों को लाभ उठा सकें। साथ ही गरिमा के साथ जीवन जी सकें।

नवाजी की पार्टी पर हमला
यही कारण है कि अवामी वर्कर्स पार्टी ने अपने चुनावी अभियान के दौरान 'चेहरे नहीं समाज को बदलो' नाम से आधिकारिक चुनावी गीत जारी किया। पार्टी का यह गाना बेहद कर्णप्रिय और इसकी आवाज बहुत दमदार है। इस गाने के जरिए पार्टी ने लोगों से समाज में बदलाव लाने के लिए खुद को बदलने को कहा है। इन गाने में नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीन-नवाज पर सीधा हमला बोला गया है और लोगों से देश में भ्रष्टचारी शासन का खत्म करने का आह्वान किया गया है।

बदलाव लाने के लिए खुद को बदलने का ऐलान
यह म्यूजिक वीडियो इस्लामाबाद से पार्टी के उम्मीदवार अम्मार रशीद के अलावा पाकिस्तानी गायक और अर्थशास्त्री शहराम अजहर पर फिल्माया गया है। इसमें एक ओर जहां इमरान खान और आसिफ अली जरदारी जैसे पाकिस्तान के मशहूर नेताओं की विलासितापूर्ण जीवन तो दूसरी तरफ पाकिस्तानी नागरिकों के संघर्ष को दिखाया गया है। गाने की लाइनें कुछ इस तरह 'अब हम मैदान में उतरे हैं, नया समाज बनाएंगे. बगावत के ऐलानों को गली गली पहुंचाएंगे' है। इसके जरिये एडब्‍लूपी ने लोगों से नए समाज की स्थापना और आंदोलन की आवाज देश के हर कोने तक पहुंचाने की अपील की है।


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पाकिस्‍तान चुनाव: कहीं जरदारी अपने बेटे बिलावल की राह में रोड़ा तो नहीं!


नई दिल्‍ली। भारतीय राजनीति में जो स्‍थान राहुल गांधी का है वही स्‍थान पाकिस्‍तान की राजनीति में बिलावल भुट्टो का है। इस समय भारत में सभी की नजरें लोकसभा चुनाव को लेकर गांधी परिवार के युवराज राहुल गांधी पर टिकी हैं। कमोबेश पाकिस्तान में भुट्टो खानदान के चश्मो चिराग बिलावल भुट्टो की स्थिति भी वही है। इस बार बिलावल ट्रिपल-पी की तरफ से पीएम पद के उम्‍मीदवार हैं और चुनावी समर में व्‍यस्‍त हैं। हालांकि उनकी उम्‍मीद पीएम बनने की बहुत कम है लेकिन हंग असेंबली होने की स्थिति में वो पीएम पद के प्रबल दावेदार हो सकते हैं।

बेनजीर की तरह जनाधार पाने की जद्दोजहद
बिलावल भुट्टो सितंबर में 30 साल के हो जाएंगे। वर्तमान में वो पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के मुखिया हैं। उनके नेतृत्‍व में पार्टी पहली बार चुनावी समर में है। वह जनता के बीच उसी तरह का समर्थन और जनाधार पाने की जद्दोजहद कर रहे हैं जो उनकी मां और दो बार पाकिस्तान की पीएम रहीं बेनजीर भुट्टो को 2007 में निर्वासन से वतन वापसी पर मिला था। ट्रिपल-पी के नेताओं को उम्मीद है कि बिलावल को लोगों का समर्थन मिलेगा। पाक सीनेट में विपक्ष की नेता शेरी रहमान का कहना है कि हमें उम्मीद है कि बिलावल के नेतृत्व में हमारी चुनावी मुहिम से देश की बड़ी युवा आबादी जुड़ेगी और देश में बढ़ते चरमपंथ, कुशासन और लोकतंत्र विरोधी कदम को पटलने के लिए अपना समर्थन देगी।

सत्‍ता की राह में बाप का साया सबसे बड़ी बाधा
पाकिस्तान में इस बात को लेकर चर्चा जोरों पर है कि बिलावल की चुनावी मुहिम में उनके पिता और पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी फायदेमंद साबित होंगे या फिर एक बाधा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भ्रष्टाचार के बड़े आरोपों के कारण जरदारी की दागदार छवि से पार्टी को चुनावों में नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि उनके प्रतिद्वंद्वी और विपक्ष के नेता इमरान खान भ्रष्टाचार के मुद्दे को इस चुनाव में जोर शोर से उठा रहे हैं। कुछ लोग यह भी कहते हैं कि चुनावों के बाद क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी में गठबंधन हो सकता है।

असरदार भी साबित हो सकते हैं जरदारी
पाक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर पाकिस्‍तान में हंग असेंबली की स्थिति बनती है तो गठबंधन वार्ताओं के दौर में पूर्व राष्ट्रपति जरदारी अपने बेटे के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं। ये बात अलग है कि दोनों ही पार्टियां संभावित गठबंधन के बारे में अभी खुलकर बात नहीं करना चाहतीं। लेकिन इसकी संभावना से भी दोनों पाट्रियों के नेता इनकार नहीं करते हैं। पाकिस्‍तान के राजनीतिक विश्लेषक आमिर अहमद खान कहते हैं कि जरदारी चुनावी मुहिम से ज्यादा अपनी भूमिका चुनावों के बाद उभरने वाले परिस्थितियों में देखते हैं।
पीएमएल-एन के आसार कम
आपको बता दें कि अभी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन सत्ता में है। नवाज शरीफ को हटाए जाने के बाद शाहिद खाकान अब्बासी देश के पीएम पद पर हैं। पार्टी के चेयरमैन नवाज शरीफ के भाई शाहबाज शरीफ हैं। पीएमएल-एन की ओर वो पीएम पद के दावेदार हैं। 342 सदस्यों वाली नेशनल असेंबली में पार्टी के 188 सदस्य हैं। लेकिन शहबाज शरीफ के पीएम बनने की उम्‍मीद कम है। ऐसा इसलिए कि अभी तक के सर्वे में पीएमएल-एन को अपने दम पर बहुमत की उम्‍मीद कम है।


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पाकिस्‍तान चुनाव : किसकी जीत भारत के लिए मुफीद?


नई दिल्‍ली। कुछ देर बाद पाकिस्‍तान में चुनाव प्रचार समाप्‍त हो जाएगा। 25 जुलाई को वोट डाले जाएंगे। चुनाव परिणाम अगस्‍त के पहले सप्‍ताह में आने की उम्‍मीद है। लेकिन वहां के चुनाव परिणाम को लेकर भारत में भी चर्चा कम नहीं है। ऐसा इसलिए कि पिछले चार सालों में भारत-पाकिस्‍तान सरकार के संबंध अच्‍छे नहीं रहे हैं। इसलिए सबकी नजरें इस बात पर टिकी है कि वहां के लोग किस पार्टी के नेता को पीएम बनाने का निर्णय लेते हैं। राजनीतिक विश्‍लेषकों का कहना है कि अगर पीएमएल-एन और पीपीपी में किसी एक पार्टी को बहुमत मिलता है तो यह भारत के लिए ज्‍यादा मुफीद हो सकता है।

पीएमएल-एन की आई सरकार तो बनेगी बात
भारत के लिए यह चुनाव कम महत्वपूर्ण नहीं हैं, क्योंकि 2019 में यहां भी चुनाव होने हैं। भारत की करीबी नजर इसलिए भी है कि द्विपक्षीय रिश्ते अधिकतर सरकार की नीतियों पर चलते हैं। इस लिहाज से देखें तो पीएमएल-एन की जीत भारत के लिए सबसे मुफीद है। चुनाव परिणाम नवाज शरीफ की पीएमएल-एन के पक्ष में आए तो भारत को अपनी विदेश नीति में को खास बदलाव नहीं करना पड़ेगा। पाकिस्तान में जो भी राजनैतिक दल हैं उन सभी की तुलना में नवाज की पार्टी का रूख भारत के प्रति सबसे ज्‍यादा नरम रहा है। पीएम मोदी के साथ भी नवाज के रिश्ते नरम रहे हैं। हालांकि समय-समय पर वो कश्मीर का मुद्दा उठाकर भारत के प्रति कड़ा रूख अपनाने की बात भी कहते हैं।

पीटीआई से बढ़ेगी मोदी की चुनौतियां
इसके उलट इमरान खान की पार्टी सत्ता में आती है तो भारत के लिए द्विपक्षीय संबंधों में सुधार लाना चुनौतीपूर्ण होगा। ऐसा इसलिए कि इमरान खान का पाकिस्तानी सेना और नौकरशाहों के साथ नजदीकी रिश्ता है। ऐसे में उनकी जीत भारत के लिए कहीं भी मुफीद नहीं होगी। वेस्‍ट के स्‍कॉलर का झुकाव भी इमरान की तरफ है। इमरान खान के चुनावी भाषणों में कट्टरता दिखाई दे रही है। इमरान ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में पाकिस्तान को इस्लामिक कल्याणकारी राज्य बनाने की घोषणा की है जो वहां के कट्टरपंथी समूहों को खुश करने की एक कोशिश है। भारत से संबंधों की शुरुआत को लेकर उनका रवैया गर्मजोशी वाला नहीं है। न ही पार्टी के घोषणा पत्र में भारत-पाक संबंधों का जिक्र किया है।

बुरी नहीं बेनजीर की ट्रिपल-पी
नवाज की तरह पूर्व पीएम बेनजीर भुट्टो की पीपीपी की जीत को भारत के लिए अनुकूल माना जा सकता है। ऐसा इसलिए कि पूर्व पीएम भुट्टो की पार्टी ने अपने घोषणापत्र में भारत के साथ मजबूत संबंध रखने और बातचीत के जरिए आपसी विवादों को सुलझाने की घोषणा की है। भुट्टो ने पीएम रहते हुए संबंधों को सुधार के लिए कई कदम भी उठाए थे। इंदिरा के साथ जुल्फिकार भुट्टो का संबंध अच्‍छा रहा था। चूंकि बिलावल ने भी उच्‍च शिक्षा लंदन से हासिल की है, इसलिए माना जा रहा है कि वो लोकतांत्रिक राष्‍ट्र के साथ संबंधों में सुधार पर जोर देंगे। ओपिनियन पोल के जो नतीजे पड़ोसी मुल्क से आ रहे हैं उससे कहीं भी ये नहीं लगता कि पीपीपी इस चुनाव में सरकार बनाएगी।


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इस बार पाकिस्‍तान में इमरान खान सब पर भारी


नई दिल्‍ली। पाकिस्‍तान में नए पीएम के लिए 25 जुलाई को मतदान है। चुनाव प्रचार का आज अखिरी दिन है। पीएम पद के दावेदारों को लेकर रुझान भी आने लगे हैं। इसके बावजूद पाकिस्तान में इस बार पीएम कौन होगा इस बात को लेकर स्थिति स्‍पष्‍ट नहीं है। ऐसा इसलिए कि पाकिस्‍तान तहरीक ए इंसाफ पार्टी और पाकिस्‍तान मुस्लिम लीग-एन के बीच कांटे की टक्‍कर है। हालांकि पूर्व पाक पीएम नवाज शरीफ के जेल जाने की वजह से उनके समर्थक इमरान की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं। यही कारण है कि वहां के राजनीतिक विश्‍लेषक इमरान की संभावनाओं पर सबसे ज्‍यादा जोर दे रहे हैं।

पाक की 100 पार्टियां चुनावी मैदान में
पाकिस्तान के आम चुनाव में 100 से ज्यादा पार्टियां हिस्सा ले रही हैं। इमरान खान, नवाज शरीफ के भाई शहबाज शरीफ और बिलावल भुट्टो जरदारी की पार्टी के बीच टक्‍कर माना जा रहा है। इन तीनों के अलावा भी पाकिस्तान में कई ऐसे नेता हैं जिनकी पार्टियां देश के कुछ हिस्सों में मजबूत पकड़ रखती हैं। इन तीनों में से किसी एक को पूर्ण बहुमत न मिलने पर सरकार बनाने की चाबी इन्‍हीं क्षेत्रीय पार्टियों के हाथ में होगी। इसलिए यह जानना जरूरी हो जाता है कि पाकिस्‍तान का अगला पीएम कौन होगा?

सर्वे में पीटीआई सबसे आगे
चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में कराए गए चुनावी सर्वे में इमरान की पार्टी की लोकप्रियता में लगातार इजाफा जारी है। एक ताजा सर्वे में इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ पार्टी को पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पीएमएल-एन से आगे बताया गया है जबकि एक अन्य सर्वे के मुताबिक वह पीएमएल-एन से सिर्फ थोड़ा ही पीछे हैं। पल्स कंसल्टेंट के राष्ट्रव्यापी सर्वे में हिस्सा लेने वालों में 30 प्रतिशत लोगों ने इमरान खान के हक में और 27 प्रतिशत लोगों ने अपनी पसंद पीएमएल-एन को बताया है। बिलावल भुट्टो के नेतृत्व में चुनावी मैदान में उतरी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी को सर्वे में सिर्फ 17 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला। इससे पहले गैलप पाकिस्तान के एक सर्वे में 26 प्रतिशत लोकप्रियता के साथ पीएमएल-एन को सबसे आगे बताया गया था। पीटीआई को 25 और पीपीपी को 16 प्रतिशत लोगों ने अपनी पहलली पसंद बताया था।

पीएम पद में तीन सबसे बड़े दावेदार


1.इमरान खान
पाकिस्तान को क्रिकेट का विश्‍वकप दिलाने वाले और पाकिस्‍तान तहरीक ए इंसाफ पार्टी के प्रमुख इमरान खान की स्थिति इस बार के आम चुनाव में सबसे मजबूत मानी जा रही है। इमरान खान 1996 में पहली बार राजनीति में उतरे थे। इसके एक साल बाद हुए आम चुनाव में उनकी पार्टी पीटीआई कोई भी सीट नहीं जीत सकी थी। 2008 के चुनाव में न उतरने का फैसला किया। 2013 के चुनाव के लिए इमरान ने एक रणनीति के तहत काम किया। उन्होंने तत्कालीन पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार का बिगुल फूंका। साथ ही अफगानिस्तान और पाकिस्तान के सीमाई इलाकों में अमरीकी ड्रोन हमलों का पुरजोर विरोध किया। इसका सीधा असर यह पड़ा की उनकी पार्टी 2013 के आम चुनावों में वोट प्रतिशत के लिहाज से दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में सरकार बनाने में भी कामयाब रही। उन्होंने 2013 में प्रधानमंत्री बने नवाज शरीफ के परिवार का नाम पनामा पेपर्स से सामने आने के बाद उनके खिलाफ सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ी। 2017 में इसी मामले के चलते शरीफ को पीएम पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया जिसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। नवाज शरीफ पर हुई अदालती कार्रवाई का श्रेय इमरान खान को भी दिया जाता है। नवाज शरीफ के खिलाफ भ्रष्टाचार की जंग का एक बड़ा फायदा इमरान को यह मिला कि महिलाओं और युवाओं का एक बड़ा हिस्सा उनके साथ जुड़ गया। यही कारण है कि इमरान पाकिस्‍तान में पीएम पद के सबसे प्रबल दावेदान बने हुए हैं।

2. शहबाज शरीफ
पीएमएल-एन के अध्यक्ष और पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ पूर्व प्रधानमंत्री शरीफ नवाज शरीफ के छोटे भाई हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नवाज शरीफ को राजनीतिक रूप से अयोग्य घोषित किए जाने के बाद पीएमएल-एन की बागडोर शहबाज शरीफ को सौंपी गई। पीएमएल-एन की तरफ से इस बार वही पीएम पद के दावेदान हैं। पकिस्तान की राजनीति में शहबाज शरीफ को राजनीतिक दांव-पेंच के लिहाज से एक कच्चा खिलाड़ी माना जाता है। ऐसा इसएिल कि नवाज शरीफ के रहते उन्हें कभी राजनीतिक दांव पेंच चलने और पंजाब से बाहर निकलने की जरूरत ही नहीं पड़ी। पंजाब की गद्दी भी उन्हें अपने बड़े भाई के जनाधार के चलते ही मिली। लेकिन शाहबाज शरीफ को पाकिस्तान में एक मजबूत प्रशासक के रूप में जाना जाता है। उन्हें पाकिस्तान में सबसे ज्यादा विकास कराने वाले मुख्यमंत्रियों में गिना जाता है। उन्होंने पिछले दो दशक में पंजाब में अरबों रुपए की परियोजनाओं के जरिए राज्य के बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक परिवहन की स्थिति में बड़े सुधार किए हैं। लाहौर, मुल्तान, इस्लामाबाद और रावलपिंडी में उनके द्वारा चलाई गई मेट्रो बस और ऑरेंज लाइन ट्रेन की पूरे देश में काफी चर्चा है। शहबाज इस चुनाव में पंजाब की सत्ता में वापसी करने में सफल हो सफल हो सकते थे लेकिन नवाज शरीफ के चुनावी राजनीति से दूर होने और इमरान खान जैसे मजबूत विपक्षी के चलते केंद्रीय स्तर पर उनके सफल होने को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं। इसके सबके बावजूद उनकी पार्टी पीटीआई को कड़ी टक्‍कर दे रही है।

3. बिलावल भुट्टो जरदारी
पीपीपी के मुखिया और पाकिस्तान की सबसे पुरानी पार्टी की कमान बिलावल भुट्टो जरदारी के हाथ में है। उम्र और अनुभव दोनों में वे प्रमुख प्रतिद्वंदियों से काफी छोटे हैं। 2007 में मां बेनजीर भुट्टो की हत्या के बाद उन्हें पीपीपी का मुखिया चुना गया था। तब उनकी उम्र केवल 19 साल थी। साल 2015 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सक्रिय रूप से राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेना शुरू किया है। इस चुनाव में बिलावल की सामने चुनौतियां ही चुनौतियां हैं। उन्हें एक ऐसी पार्टी को चुनाव लड़वाना है जो बेनजीर भुट्टो की मौत और उनके पिता के भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते जनाधार के मामले में अब तक सबसे कमजोर स्थिति में है। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के अलावा पार्टी की स्थिति कहीं भी संतोषजनक नहीं कही जा सकती। सिंध में भी पीपीपी के कई कद्दावर नेताओं के इमरान खान की पार्टी के साथ जाने से यहां भी पीपीपी की स्थिति पहले जैसी नहीं रह गई है। अभी तक के सर्वे में बिलावल भुट्टों तीसरे सबसे बड़े दावेदान बने हुए हैं। अगर अंतिम क्षण में समीकरण बदलता है तो वो किंगमेकर की भूमिका में भी आ सकता है। या खुद किंग बन सकते हैं।


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पाकिस्तान: सुरक्षा व्यवस्था की कमी के चलते नवाज-मरियम शरीफ को सिहाला रेस्ट हाउस शिफ्ट नहीं किया जाएगा


इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनकी बेटी मरियम नवाज शरीफ को सिहाला रेस्ट हाउस में शिफ्ट नहीं किया जाएगा। बता दें कि मरियम नवाज ने भी रेस्ट हाउस जाने से मना कर दिया है। खबरों के मुताबिक रेस्ट हाउस में स्थानांतरित ना करने का कारण हाई प्रोफाइल कैदियों के लिए उचित सुरक्षा व्यवस्था की कमी है। जवाबदेही अदालत ने शरीफ और उनकी बेटी को भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषी ठहराते हुए आदेश दिया था कि उन्हें लाहौर हवाईअड्डे पर हिरासत में लेने के बाद अदियाला जेल भेजा जाए और 13 जुलाई को अदालत के समक्ष पेश किया जाए। इस्लामाबाद के मुख्य आयुक्त ने सिहाला पुलिस प्रशिक्षण कॉलेज के अंदर स्थित सिहाला रेस्ट हाउस में नवाज, मरियम और पहले से ही अदिआला जेल में बंद उनके (मरियम के) पति कैप्टन सफदर अवान (सेवानिवृत्त) को स्थानांतरित करने का आदेश दिया था।

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पहले खूंखार कैदियों को स्थानांतरित करने की थी खबर

अदियाला जेल के अधिकारी के हवाले से आई रिपोर्ट के अनुसार, शरीफ को रेस्ट हाउस में स्थानांतरित नहीं करने के बाद यह संकेत मिला था कि तीन बार देश के सर्वोच्च पद पर रहने वाले शरीफ और उनकी बेटी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वहां बंद खूंखार कैदियों को प्रांत में कहीं और स्थानांतरित करने पर विचार किया जा रहा था। शनिवार को शरीफ, मरयम और सफदर अवान अपने अधिवक्ताओं से मिले। स्थानीय मीडिया के सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस दौरान उनके बीच प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई। बता दें कि शरीफ के अधिवक्ता ख्वाजा हारिस और उनकी बेटी के अधिवक्ता अमजद परवेज हैं। परवेज ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, "पूर्व प्रधानमंत्री को लगता है कि उन्हें जो सुविधाएं मिलनी चाहिए, वे उन्हें नहीं मिल रही हैं।" मरयम के अधिवक्ता ने सफदर के बारे में बात करते हुए कहा, "उन्हें दिल की बीमारी है.. लेकिन वे कारावास से मिलने वाली सुविधाओं के अतिरिक्त कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं चाहते।" गौरतलब है कि गुरुवार को अदिआला जेल में पिता-पुत्री और उनके अधिवक्ताओं के बीच की पूर्व नियोजित बैठक जेल अधिकारियों ने रद्द कर दी। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने कहा कि रेस्ट हाउस शरीफ परिवार के लिए सुरक्षित नहीं है। रेस्ट हाउस में छह कमरे हैं, सभी कमरों में एयर कंडीशनर, आरामदायक बिस्तर और वाशरूम हैं, लेकिन कोई बाउंड्री वॉल नहीं है। अदियाला जेल के अधिकारियों ने कहा कि शरीफ को रेस्ट हाउस में स्थानांतरित नहीं किए जाने का एक प्रमुख संकेत यह है कि अधिकारी पूर्व प्रधानमंत्री और उनकी बेटी की उचित सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रांत में कहीं और खतरनाक कैदियों को स्थानांतरित करने पर विचार कर रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि मरयम को सिहाला रेस्ट हाउस में स्थानांतरित करने का दो-तीन बार प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने वहां रहने से साफ इनकार कर दिया।


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पाकिस्तान: कारोबारी ने कहा- 'क्योंकि हम यौन उत्पीड़न का समर्थन करते हैं', मचा बवाल


लाहौर। पाकिस्तान में जहां आम चुनावों को लेकर सरगर्मी हैं। वहीं लोग एक कारोबारी की तरफ से महिलाओं के ऊपर की गई अभद्र टिप्पणी को लेकर खासे नाराज नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर अपने गुस्से का भी इजहार कर रहे हैं। दरअसल पाकिस्तान में एक फिल्म रिलीज हुई है। फिल्म का नाम है 'तीफा इन ट्रबल'। फिल्म को शानदार ओपनिंग भी मिली है। इससे पहले 'तीफा इन ट्रबल' का प्रीमीयर हुए। जिसमें कई हस्तियों ने शिरकत की। आयोजन के बाहर प्रदर्शन भी हुआ। बता दें कि प्रदर्शनकारी सिंगर और एक्टर अली जफर के खिलाफ प्रदर्शन करने पहुंचे थे। गौरतलब है कि अली जफर पर मॉडल मीशा शाफी ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है।

'हम यौन उत्पीड़न का समर्थन करते हैं'
फिल्म प्रीमीयर में केसेरिया नाम की कंपनी के क्रिएटिव डायरेक्टर वलीद जमां अपनी पत्नी के साथ पहुंचे। जब प्रदर्शनकारियों ने वलीद जमां से पूछा कि आप यहां क्यों आए हैं। अली जफर और मीशा के मुद्दे पर वलीद ने उनकी राज जानने चाहिए। फेसबुक पर लाइव वीडियो के दौरान उनसे ये सवाल पूछा गया। वलीद ने हैरानी भरा जवाब देते हुए कहा कि, "...क्योंकि हम यौन उत्पीड़न का समर्थन करते हैं"। वलीद की ये अभद्र टिप्पणी कैमरे में भी कैद हो गई। इस वाकये के बाद वहां मौजूद महिला प्रदर्शनकारियों ने वलीद को भला-बुरा कहना शुरू कर दिया।

वहीं सोशल मीडिया पर एक बार फिर से महिला के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को लेकर बहस छिड़ गई है। सोशल मीडिया पर जहां लोग वलीद के इस बयान की निंदा करते हुए। उनके ब्रांड को बॉयकॉट करने की बात कर रहे हैं वही कुछ ऐसे भी हैं जो वलीद के बयान को मजाकिया अंदाज में कही गई बात बता रहे हैं। फिर में विरोध करने वाली की तादाद ज्यादा है। वैसे सोशल मीडिया पर बवाल मचने के बाद वलीद ने पूरे मामले पर माफी मांग ली।

बता दें कि फिल्म में अली जफर मुख्य भूमिका में हैं। उनपर मॉडल मीशा शाफी ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। जिसके बाद अली जफर ने मीशा के खिलाफ पाकिस्तानी मुद्रा के अनुसार 100 करोड़ रुपए का मुकदमा ठोंका है।


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पाकिस्तान में आम चुनाव: कैसे और किस तरह होती हैं पड़ोसी देश में वोटिंग, क्या है चुनावी परिदृश्य


इस्लामाबाद।पाकिस्तान में आम चुनाव 25 जुलाई को होने हैं। देश की संसद के निचले सदन कौमी असेम्बली की 272 सीटों के लिए 25 जुलाई को वोट डाले जाएंगे। इसके साथ ही पाकिस्तान की प्रांतीय विधानसभाओं के लिए भी वोट डाले जायेंगे। पाकिस्तान की 342 सदस्यीय कौमी असेम्बली की 70 सीटें आरक्षित होती हैं जिनमें 60 महिलाओं के लिए और 10 अल्पसंख्यकों के लिए होती हैं।

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ऐसी हैं नेशनल असेम्बली

पाकिस्तान में पंजाब सबसे बड़ा प्रांत है। इसके बाद सिंध दूसरा बड़ा राज्य है। चुनाव में इन दोनों प्रांतो की भूमिका प्रमुख होती है। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली का कार्यकाल पांच साल का होता है। नेशनल असेंबली में कुल 342 सीटें हैं, इनमें से 272 सीटों पर चुनाव होते हैं जबकि 70 सीटें आरक्षित हैं। इन सीटों में पाकिस्तान के पंजाब से 141 सीट, सिंध से 61 सीट, खैबर-पख्तूनख्वा से 39 सीट, बलूचिस्तान से 16 सीट, फाटा नामक केंद्र शासित आदिवासी क्षेत्र से 12 सीट और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र इस्लामाबाद से ३ सीटें होती हैं। नेशनल असेम्बली में बहुत पाने के लिए किसी भी पार्टी को 137 सीटें पानी होती हैं।

10 करोड़ वोटर, 107 राजनीतिक दल

पाकिस्तान में कुल रजिस्टर्ड वोटरों की संख्या 10 करोड़ के आसपास है। देश में कुल 107 रजिस्टर्ड राजनीतिक पार्टियां हैं लेकिन सक्रिय रूप से 30 दल ही चुनावों में हिस्सा ले रहे हैं। इन चुनावों में 3765 उम्मीदवार हिस्सा ले रहे हैं। व्यस्त मताधिकार से होने वाली वोटिंग के लिए कुल 85,000 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं। देश के कुल वोटरों में में 96.28% मुसलमान, 1.59% ईसाई और 1.6% हिंदू हैं। गौर तलब है कि पाकिस्तान जैसे इस्लामिक राज्य में भी सभी धर्म के लोगों को जम्हूरियत में शामिल होने के अधिकार हैं।

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तीन प्रमुख पार्टियों के बीच मुकाबला

पाकिस्तान के चुनावों में नवाज़ शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग- नवाज सबसे महत्वपूर्ण दल है। भ्रष्टाचार के आरोपों में बर्खास्त नवाज शरीफ फिलहाल अपनी बेटी मरियम के साथ जेल में बंद हैं। इन चुनावों में शरीफ की अनुपस्तिथि के चलते पूरा दारोमदार उनके भाई शाहबाज पर है। पाकिस्तान में दूसरा बड़ा दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) है। इस वक़्त पार्टी के मुखिया बिलावल भुट्टो जरदारी पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टों के बेटे हैं। इसके अलावा क्रिकेटर से नेता बनें इमरान खान की पाकिस्तान तहरीके-ए-इंसाफ (पीटीआई) भी इन चुनावों में एक महत्वपूर्ण दल है। हालांकि अब तक यह पार्टी चुनावों में अच्छा प्रद्रशन नहीं कर पाई है।लेकिन इस बार पार्टी को उमीदें अधिक हैं।


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आर्थिक बदहाली के कगार पर पहुंचा पाकिस्तान, डैम बनाने के लिए लगाएगा 30 रुपए का चंदा


इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पास डैम बनाने के लिए पैसे नहीं हैं। पानी की घोर समस्या से जूझ रहा पाकिस्तान अब डैम बनाने के लिए चंदा लगाएगा। पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश साकिब निसार ने पाकिस्तान सरकार की अक्षमता और अयोग्यता के चलते पाकिस्तान में दो डैम बनाने के लिए लोगों से चंदा देने की अपील की है। चीफ जस्टिस ने विदेशों में रह रहे पाकिस्तानी मूल के लोगों से भी चंदा देने की अपील की है। लोगों को चंदा देने के लिए प्रेरित करते हुए चीफ जस्टिस ने 10 लाख रुपये के चंदा देने की घोषणा की है।

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पानी के संकट से जूझ रहा है पाकिस्तान

हाल ही में विश्व स्वस्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट में पाकिस्तान को उन देशों की सूची में रखा गया है जो जल संकट से बुरी तरह जूझ रहे हैं। पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने देश में जल संकट से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सरकारों की अनिच्छा और उनकी अक्षमता को देखते हुए आम जनता को आगे आना होगा। पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने बांधों के निर्माण की प्रगति के लिए जल विद्युत विकास प्राधिकरण के भीतर एक समिति बनाई है।

क्या कहा पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के नाम एक बैंक खाता खोला जाएगा जिसमें सभी दान एकत्र होंगे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में यह भी कहा गया है कि जो लोग इस कारण के लिए दान करते हैं उनके आय के स्रोतों के बारे में नहीं पूछा जाएगा।चीफ जस्टिस निसार अहमद ने डैम के लिए चंदा इकट्ठा करने की तुलना भारत के साथ 1965 की लड़ाई के समय सरकार द्वारा इकट्ठे किए गए चंदे से करते हुए कहा कि डैम बनाने के लिए लोग वैसा ही जुनून और जोश दिखाएं।

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वित्त मंत्रालय ने खोला दान खाता, लोगों ने की निंदा

सुप्रीम कोर्ट की घोषणा के बाद वित्त मंत्रालय ने एक दान खाता खोल दिया है। लेकिन चंदे के पैसे से डैम बनाने की कवायद को कई पाकिस्तानी नागरिक शर्मनाक बता रहे हैं और उन्होंने इसकी निंदा की है। आम पाकिस्तानियों का कहना है की जिस तरह से चंदे के पैसे से डैम बनाने की कवायद चल रही है, उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि पाकिस्तान आर्थिक कंगाली के कगार पर है। लोगों का कहना है कि इस तरह कि कोशिशों से आने वाली पीढ़ियों के लिए यह एक बहुत ही खतरनाक उदाहरण साबित होगा। लोगों का कहना है कि देश में आधारभूत ढांचे का निर्माण ऐसे जुगाड़ वाली तरकीबों से नहीं किया जाता।


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पाकिस्तान: पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी का दावा, चुनाव में पीएमएल (नवाज) जीती तो शाहबाज शरीफ होंगे पीएम


लाहौर। पाकिस्तान के आम चुनाव में पीएमएल(नवाज गुट) को अगर जीत मिलती है तो शाहबाज शरीफ देश के अगले प्रधानमंत्री बनेंगे। पाकिस्तान के एक अखबार ने पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी के हवाले से यह दावा किया है।शाहबाज शरीफ पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के अध्यक्ष नवाज शरीफ के छोटे भाई हैं।

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पीएमएल नवाज में कोई मतभेद नहीं

शाहिद खाकन अब्बासी ने पीएमएल में किसी भी तरह के बिखराव की खबरों से इन्कार किया है। उन्होने कहा कि पीएमएल में मतभेद की खबरें बेबुनियाद हैं। बता दें कि पिछले साल जुलाई में पनामा पेपर लीक मामले में नवाज शरीफ के दोषी ठहराए जाने के बाद शाहिद खाकन अब्बासी पाकिस्तान के पीएम बने थे। बता दें की शाहबाज शरीफ पकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ के भाई हैं। जून 2013 से मई 2018 तक पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री रहे शाहबाज इस समय पीएमएल-एन के अध्यक्ष हैं।

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पीपीपी के साथ कोई गठबंधन नहीं

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के साथ गठबंधन की संभावना से इंकार करते हुए शहीद खाकन अब्बासी ने कहा कि हमारे अनुभव इस गठबंधन को लेकर बहुत अच्छे नहीं रहे हैं। इसलिए इस बात कि संभावना बहुत कम है कि पीपीपी के साथ कोई गठबंधन होगा।

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गलत तरीके से फंसाया गया नवाज को

नवाज शरीफ को सजा देने के सवाल पर अब्बासी ने कहा कि उनके खिलाफ गलत तरीके से मुकदमा चलाया गया है। बता दें कि भ्रष्टाचार के एक मामले में शरीफ को दस, उनकी बेटी मरियम को सात और दामाद सफदर को एक साल की सजा सुनाई गई है ।


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पाकिस्‍तान: नवाज और मरियम से नहीं मिल सका उनका परिवार, गुरुवार तक करना पड़ेगा इंतजार


इस्‍लामाबाद। गिरफ्तारी के तीसरे दिन यानी रविवार को भी पाक के पूर्व पीएम नवाज शरीफ और उनकी बेटी मरियम को प्रशासन ने कोई रियायत नहीं दी। यहां तक परिवार के सदस्‍यों को गिरफ्तारी के तीसरे दिन भी नहीं मिलने दिया गया। मुलाकात को लेकर जेल प्रशासन को रुख सख्‍त है। हालांकि उन्‍हें बी श्रेणी की सुविधा हालिस है लेकिन मुलाकात के लिए गुरुवार और शुक्रवार का दिन तय होने के कारण जेल प्रशासन ने परिवार के किसी भी सदस्‍य को मिलने की इजाजत नहीं दी है। बताया जा रहा है कि परिवार के सदस्‍यों को इसके लिए गुरुवार तक का इंतजार करना पड़ेगा।

घर का खाना मंगाने की इजाजत
पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के चीफ नवाज शरीफ को घर से पका हुआ खाना और कपड़े मंगाने की इजाजत अदालत से मिली हुई है। अदालत के निर्णय के अनुसार उनका स्टाफ शनिवार और रविवार को खाना और कपड़ा लेकर जेल पहुंचा था। नवाज शरीफ के रिश्तेदारों और स्टाफ मेंबर्स ने उनसे मिलने की कोशिश की लेकिन जेल प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी। अब नवाज शरीफ के वकील ख्वाजा हारिस सोमवार को कोर्ट में जमानत याचिका दायर करेंगे। उसके बाद देखना होगा कि 25 जुलाई को पाकिस्तान में होने वाले आम चुनाव से पहले नवाज शरीफ परिवार को राहत मिलती है या उन्हें आगे भी जेल में वक्त बिताना पड़ेगा।

रावलपिंडी जेल में बंद हैं नवाज
आपको बता दें कि शुक्रवार को पाकिस्‍तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ, उनकी बेटी मरियम और दामाद सफदर को लाहौर एयरपोर्ट पर उतरते ही एनएबी ने उन्‍हें गिरफ्तार कर लिया था। उसके बाद से पाकिस्‍तान के तीनों नेता एक साथ रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं। 13 जुलाई की रात से पूरा परिवार इस जेल की चारदीवारी में कैद है । जानकारी के मुताबिक सोमवार तक उन्हें यहीं रहना पड़ेगा। सोमवार को ही उनकी जमानत याचिका दायर शीर्ष अदालत विचार करेगी।


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पाकिस्तान: मुश्किल में इमरान खान, हेलीकॉप्टर के अवैध इस्तेमाल मामले में जारी हुआ समन


खैबर पख्तूनख्वा। पाकिस्तान में इस वक्त सियासी उठापठक जारी है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनकी बेटी मरियम नवाज भ्रष्टाचार के एक मामले में जेल में बंद हैं। इस बीच उनके प्रतिद्वंदी तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के चीफ इमरान खान को हेलीकॉप्टर केस में समन जारी किया गया है। इमरान खान को ये समन राष्ट्रीय उत्तरदायित्व ब्यूरो (NAB) ने जारी किया है। इमरान खान पर सरकारी हेलीकॉप्टर का अवैध इस्तेमाल करने का आरोप है।

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क्या है मामला?
राष्ट्रीय उत्तरदायित्व ब्यूरो ने केपी सरकार के हेलीकॉप्टरों के कथित अवैध इस्तेमाल की जांच शुरू की है, जिससे राष्ट्रीय खजाने को नुकसान पहुंचाया गया है।बता दें कि केपी ( खैबर पख्तूनख्वा ) के पूर्व मुख्यमंत्री परवेज खान खट्टक भी इसी मामले में अप्रैल में ब्यूरो की टीम के सामने पेश हुए थे। इस साल फरवरी में केपी सरकार ने सफाई दी थी कि सरकार के हेलीकॉप्टर किसी निजी कार्यक्रम के लिए उपयोग नहीं हुए थे। पीटीआई ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि मंत्री और सरकारी अधिकारियों ने हेलीकॉप्टर का आधिकारिक दौरे के लिए इस्तेमाल किया था। 4 फरवरी 2018 को जारी तत्कालीन प्रांतीय सरकार ने कहा था कि," पिछले साढ़े चार साल में इन हेलीकॉप्टर्स का इस्तेमाल 39 अवसरों पर हुआ। करीब 75 उड़ाने इन हेलीकॉप्टर्स ने भरी, जिसके ईंधन का खर्चा इन साढ़े चार साल में करीब 2.1 मिलियन रुपए यानी 21 लाख रुपए आया था। पीटीआई चीफ इमरान खान ने विभिन्न आयोजनों में हिस्सा लेने, योजनाओं और विश्वविद्यालयों जैसे कई प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया था। गौरतलब है कि इमरान खान की पार्टी की हेलीकॉप्टर के कथित अवैध इस्तेमाल को लेकर लगातार आलोचना हो रही है। फरवरी में एनएबी के अध्यक्ष ने केपी के डीजी को जांच का निर्देश दिया था। बता दें कि 65 साल के इमरान खान पर उनकी पूर्व पत्नी रेहम खान अभी भी लगातार हमला बोल रही हैं।


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नवाज की गिरफ्तारी के लिए लाहौर और इस्‍लामाबाद एयरपोर्ट पर पहरा सख्‍त,10 हजार पुलिसकर्मी तैनात


इस्‍लामाबाद। देर शाम को पाकिस्‍तान में लैंडिंग करते ही पूर्व पीएम नवाज शरीफ और उनकी बेटी मरियम को नेशनल एकाउंटैबिलिटी ब्‍यूरो (एनएबी) गिरफ्तार कर लेगा। दूसरी तरफ लाहौर और इस्‍लामाबाद एयरपोर्ट पर पाकिस्‍तान मुस्लिम लीग-नवाज के कार्यकर्ताओं के जोरदार विरोध को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों का सख्‍त पहरा है। ताकि परिंदा भी पर न मार सके। बताया जा रहा है कि अबु धाबी से जैसे ही नवाज और मरियम दोनों में से किसी एक एयरपोर्ट पर लैंड करेंगे उन्‍हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहां से हेलीकॉप्‍टर के माध्‍यम से दोनों को जेल ले जाने की तैयारी है। आपको बता दें कि हाल ही में पाक सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में नवाज शरीफ और मरियम को दोषी करार दिया था। यही कारण है कि उन्‍हें एयरपोर्ट पर लैंड करते ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

गिरफ्तारी के लिए 16 लोगों की टीम
नवाज शरीफ और मरियम की गिरफ्तारी के लिए 16 लोगों की टीम बनाई है। दो हेलिकॉप्‍टर की व्‍यवस्‍था है। इनमें से एक हेलिकॉप्टर लाहौर और दूसरा इस्‍लामाबाद एयरपोर्ट पर स्‍टैंड बाय में है। सुरक्षित गिरफ्तारी और जेल तक सुरक्षित तरीके से पहुंचाने के लिए हवाई अड्डे पर 10 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। लाहौर पुलिस ने हवाईअड्डे की ओर जाने वाली शहर की सड़कों पर कंटेनर रख दिया है। गाड़ी चालकों के लिए एक संकरा रास्ता छोड़ा गया है जहां जांच के लिए पुलिस तैनात की गई है।

पीएमएलएन के 300 कार्यकर्ता गिरफ्तार
पाकिस्तान में प्रशासन ने पाकिस्तान मुस्लिम लीग - नवाज (पीएमएल - एन) कार्यकर्ताओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर कारवाई शुरू की है। पीएमएल-एन के प्रवक्ता मरियम औरंगजेब ने बताया कि पुलिस ने करीब 300 कार्यकर्ताओं, जिनमे से ज्यादातर लाहौर के हैं को गिरफ्तार किया है। ताकि वो अपने नेताओं के स्वागत के लिए हवाई अड्डे नहीं पहुंच सके। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर पीएमएल-एन कार्यकर्ताओं के खिलाफ कभी कारवाई नहीं की गई। यहां तक कि मार्शल लॉ के दौरान भी नहीं।

एनएबी करेगा गिरफ्तार
नेशनल अकाउंटबिलिटी ब्यूरो (एनएबी) के चेयरमैन जावेद इकबाल ने नवाज शरीफ और मरियम की हवाई अड्डे पर गिरफ्तारी के लिए हर संभव कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। दोनों नेताओं की गिरफ्तारी के लिए एक 16 सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया गया है। कैबिनेट डिवीजन ने दो हेलीकॉप्टर अलॉट किए हैं, जिसके जरिए नवाज और उनकी बेटी मरियम को जेल भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि एक हेलीकॉप्टर लाहौर हवाई अड्डे पर होगा जबकि दूसरा इस्लामाबाद में होगा। दोनों में से किसी भी हवाई अड्डे पर उतरने पर पिता-बेटी को गिरफ्तार किया जाएगा।


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पाकिस्तान में चुनावी रैली के पास बड़ा धमाका, चार लोगों की मौत और 14 घायल


नई दिल्ली। पाकिस्तान में बम धमाके की बड़ी खबर सामने आई है। यह धमाका शुक्रवार को बन्नू में जमियत-ए-उलेमा इस्लाम (एफ) के अक्रम खान दुर्रानी के काफिले के पास हुआ। हमले में चार लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। वहीं, धमाके में अक्रम खान दुर्रानी किसी तरह बच निकले। बता दें कि दो दिन पूर्व पाकिस्तान के पेशावर शहर में एक चुनावी बैठक में हुए संदिग्ध आत्मघाती विस्फोट में अवामी नेशनल पार्टी (एएनपी) के नेता हारून बिल्लौर सहित कई लोग मारे गए थे।

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एमएमए टिकट पर चुनाव लड़ रहे अक्रम खान दुर्रानी

आपको बता दें कि बन्नू में मुत्ताहिदा मजलिस-ए-अमल (एमएमए) की एक चुनावी रैली का आयोजन किया गया था। गुरुवार को रैली स्थल के पास हुए विस्फोट में चार लोग मारे गए और 14 घायल हो गए। पाक मीडिया के अनुसार यह हमला जमीयत-ए-उलेमा इस्लाम-फजल के अक्रम खान दुर्रानी को निशाना बनाकर किया गया था। दुर्रानी बन्नू से एमएमए टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। शुरुआती जानकारी में पता चला है कि हमले में 14 लोग घायल हो गए हैं। घायल लोगों को एम्बुलेंस और पुलिस वाहनों में हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

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विस्फोट रैली स्थल से करीब 50 मीटर दूर उस जगह हुआ

जानकारी के अनुसार यह विस्फोट रैली स्थल से करीब 50 मीटर दूर उस जगह हुआ जहां 40 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। बता दें कि दुर्रानी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ अध्यक्ष इमरान खान के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। देश में चुनाव से पूर्व यह दूरी हिंसात्मक बड़ी घटना है। इससे पहले पेशावर के पास याकातुत में एक आत्मघाती हमले के दौरान आवामी लीग के नेता हारून बिलौर समेत 22 लोगों की मौत हो गई थी।

 


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लंदन से अबु धाबी पहुंचे नवाज शरीफ और मरियम, एनएबी के अधिकारी कर सकते हैं गिरफ्तार


नई दिल्‍ली। पाकिस्तान के पूर्व पीएम और पीएमएल के पूर्व अध्‍यक्ष नवाज शरीफ अपनी बेटी मरियम नवाज के साथ लंदन से अबु धाबी पहुंच गए हैं। इस समय दोनों को अबु धाबी एयरपोर्ट के लाउंज में रोककर रखा गया है। बताया जा रहा है कि मरियम और नवाज को पाक सरकार ने अबूधाबी एयरपोर्ट पर ही गिरफ्तार करने की योजना बनाई है। इस बात की संभावना ज्‍यादा है कि उन्‍हें अबु धाबी एयरपोर्ट पर ही गिरफ्तार कर लिया जाए। अगर ऐसा होता है तो अबु धाबी से उनके साथ नेशनल अकाउंटैबिलिटी बोर्ड (एनएबी) के अधिकारी भी विमान से लाहौर पहुंचेंगे। आपको बता दें कि पहले पाक सरकार की योजना लाहौर एयरपोर्ट पर गिरफ्तार करने की थी।

पार्टी के नेताओं से मिले
अबु धाबी एयरपोर्ट पर उतरने के बाद पूर्व पीएम नवाज शरीफ और उनकी बेटी मरियम नवाज लंदन में मुलाकात कर चुके हैं। पीएमएलएन के कुछ नेताओं से अबु धाबी एयरपोर्ट पर भी मिलने की सूचना है। आपको बता दें कि नवाज और मरियम को आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार जैसे आरोपों के एक केस में हाल ही में पाक सुप्रीम कोर्ट ने नवाज को 10 साल और मरियम को सात साल की सजा सुनाई थी। इसलिए पाक सरकार ने उन्‍हें गिरफ्तार करने की योजना तैयार की है।

नवाज के पोते और नाती लंदन में गिरफ्तार
इससे पहले गुरुवार को लंदन में नवाज शरीफ के घर के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोगों से नवाज शरीफ के पोते और मरियम नवाज के बेटे जुनैद सफदर प्रदर्शनकारियों से भिड़ गए। मरियम नवाज के बेटे और हुसैन नवाज यानी नवाज शरीफ के बेटे के बेटे को लंदन पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इन पर प्रदर्शनकारियों के समूह के साथ मारपीट करने का आरोप है। मरियम के बेटे के मुताबिक एक शख्स ने शरीफ परिवार को गाली दी तो उनकी उस शख्स से बहस हो गई जो बाद में ये बहस हाथापाई में बदल गई।


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कुलभूषण जाधव मामले में पाकिस्तान आईसीजे में दायर करेगा दूसरा काउंटर


नई दिल्ली। पाकिस्तान को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में 17 जुलाई को भारतीय राष्ट्रीय कुलभूषण जाधव के संबंध में अपना दूसरा काउंटर जवाब दाखिल करेगा। पिछले साल अप्रैल में पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने कुलभूषण जाधव को मौत की सजा सुनाई थी। जिसके बाद भारत ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में अपील की थी। कुलभूषण जाधव पर भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के लिए जासूसी करने और पाकिस्तान के खिलाफ विध्वंसक गतिविधियों में कथित भागीदारी का आरोप है।

पाकिस्तान का दूसरा काउंटर

17 अप्रैल को हेग स्थित आईसीजे में भारत द्वारा दायर याचिका के जवाब में पाकिस्तान का यह दूसरा काउंटर होगा। 23 जनवरी को आईसीजे ने इस मामले में काउंटर दाखिल करने के लिए पाकिस्तान और भारत दोनों को समय दिया था। पाक मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शुरुआती चरण में आईसीजे में इस मामले में पाकिस्तान का पक्ष रखने वाले शीर्ष वकील खवर कुरेशी ने पिछले हफ्ते मामले के बारे में प्रधान मंत्री नासीरुल मुल्क को विस्तार से बताया। पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल खालिद जावेद खान और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस बैठक में भाग लिया। बता दें कि कुरेशी द्वारा ही काउंटर जवाब का मसौदा तैयार किया गया है। दूसरा काउंटर जमा होने के बाद, आईसीजे सुनवाई के लिए एक तारीख नीयत करेगा जो अगले वर्ष होने की संभावना है।

आईसीजे ने लगाई है फांसी पर रोक

बता दें कि 48 वर्षीय जाधव को पाकिस्तान सैन्य न्यायालय से फांसी मिलने के बाद बाद भारत ने पिछले साल मई में आईसीजे का दरवाजा खटखटाया था। 18 मई 2017 को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने जाधव की फांसी पर रोक लगा दी। भारत ने पाकिस्तान पर जाधव मुद्दे पर वियना सम्मेलन का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में पाकिस्तान ने 13 दिसंबर को अपने काउंटर स्मारक के माध्यम से आईसीजे को बताया कि 1963 का वियना सम्मेलन केवल वैध आगंतुकों के लिए लागू होता है, गुप्त रूप से आये जासूसों के लिए नहीं।

 

क्या है कुलभूषण जाधव मामला

पाकिस्तान का दावा है कि ईरान से पाकिस्तान के लिए जासूसी के लिए दाखिल होने के बाद जाधव को 3 मार्च 2016 को सुरक्षा बलों ने बलूचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार कर लिया था। जबकि भारत का कहना है कि जाधव को ईरान से अपहरण कर लिया गया था जहां नौसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वह अपने व्यापारिक हितों के लिए रह रहे थे।


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नवाज शरीफ के दामाद को भेजा गया जेल, गिरफ्तारी में रूकावट डालने वालों पर हुआ मामला दर्ज


इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के दामाद रिटायर्ड कैप्टन मोहम्मद सफदर अवान को जेल भेज दिया गया है। सफदर को सोमवार को कड़ी सुरक्षा के बीच रावलपिंडी की अदियाला जेल भेजा गया। इससे पहले उन्हें राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) ने एक रियल एस्टेट भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किया था। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जेल अधिकारियों ने बताया कि सफदर अवान की जेल में चिकित्सकीय जांच की गई और उन्हें बाद में बी श्रेणी के कैदियों की बैरक में भेज दिया गया।

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जेल जाने से पहले की रैली
बता दें कि सफदर अवान दोषी करार दिए जाने के बाद शुक्रवार को कथित तौर पर भूमिगत हो गए थे। इसके एक दिन बाद वह रावलपिंडी में दिखाई दिए और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) की एक रैली का नेतृत्व किया।
रैली मेें उनके साथ उनकी पार्टी के समर्थक भी साथ रहे। काले रंग की जीप में मोहम्मद सफदर अपने समर्थक का अभिनंदन करते हुए नजर आए। समर्थकों ने सफदर के समर्थन में नारेबाजी भी की। समर्थक "देखो-देखो कौन आया, शेर आया, शेर आया। चलो नवाज चलो, हम तुम्हारे साथ हैं" जैसे नारे लगाते हुए दिखे। मीडिया से बात करते हुए सफदर ने कहा कि," आज हमें फैसला करना है कि देश कैसे चलाया जाएगा।" उन्होंने कहा, "मैं लोकतंत्र के आधार पर नींव स्थापित करने के लिए आत्मसमर्पण कर रहा हूं। साथ ही उन्होंने कहा कि नवाज शरीफ इस देश के 22 करोड़ लोगों के साथ लड़ रहे हैं।" बता दें कि सफदर के समर्थकों के भारी विरोध के बीच भ्रष्टाचार रोधी अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार किया। राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) ने रविवार को बयान में अवान को एक दोषी बताया और मीडिया से उन्हें बढ़ावा देने से परहेज करने को कहा, क्योंकि इससे अराजकता बढ़ सकती है। अधिकारियों ने कहा कि उनकी मदद करने वालों को कड़ी कार्रवाई का सामना करना होगा। इस बयान के बाद एनएबी अधिकारियों ने उनकी गिरफ्तारी में बाधा डालने को लेकर अवान व दूसरे पीएमएल-एन के नेताओं के खिलाफ एक मामला दर्ज किया है।

क्या है मामला?

पाकिस्तान की एकाउंटिबिलिटी कोर्ट ने नवाज शरीफ को भ्रष्टाचार के मामले में 10 साल की सजा सुनाई है। उनकी बेटी मरियम नवाज को 7 साल की सजा और दामाद कैप्टन सफदर को एक साल की सजा दी है। ये सजा लंदन के एवियन फील्ड में 4 फ्लैट के मामले में मिली है। इस फैसले के बाद अब मरियम और सफदर का राजनीतिक भविष्य दांव पर लग गया है। गौरतलब है कि नवाज शरीफ और उनके तीन बच्चों के खिलाफ जवाबदेही अदालत में भ्रष्टाचार के चार मामले चल रहे हैं।


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