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चुटकी बजाते बढ़ेगी आपकी याददाश्त, एक बार पढ़ते ही याद हो जाएगा सब कुछ, जानिए कैसे


लर्निंग स्किल ऐसी स्किल है जिससे न केवल सीखने की क्षमता विकसित होती है बल्कि इससे कॉन्फिडेंस का लेवल भी बढ़ता है। इस स्किल को डवलप करके एकेडमिक लेवल पर आसानी से सफलता पाई जा सकती है। देखा जाए तो लर्निंग स्किल 4C's यानी क्रिटिकल थिंकिंग, क्रिएटिव थिंकिंग, कॉलेबैरेटिंग और कम्यूनिकेशन से मिलकर बनी है। इसलिए इन बातों पर फोकस करके ही लर्निंग स्किल को डवलप किया जा सकता है। दरअसल क्रिटिकल थिंकिंग से आपमें किसी भी टॉपिक को गहराई से समझने की क्षमता विकसित होती है। इसी तरह क्रिएटिव थिंकिंग में आप चीजों को खुले दिमाग से विचार करते हैं। साथ ही सोचने-समझने की क्षमता में तेजी से सुधार आता है। जानिए ऐसी ही कुछ टिप्स के बारे में जो आपके लर्निंग स्किल्स को चमत्कारी ढंग से बढ़ा सकती हैं।

नोट्स बनाएं
लर्निंग स्किल को इंप्रुव करने के लिए क्लास में नोट्स बनाने की आदत बनाएं। नोट्स बनाने के लिए दो कलर के पेन का यूज करें। इससे जब भी अपनी नोटबुक को खोलते हैं तो आपका फोकस सबसे पहले महत्वपूर्ण टॉपिक की ओर जाता है। नोट्स बनाने की आदत से मेमोरी लेवल बढ़ता है। इसका फायदा एग्जाम में भी मिलता है।

ग्रुप में अध्ययन करें
ग्रुप में अध्ययन करने से भी लर्निंग स्किल को बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए आप अधिकतम पांच लोगों का ग्रुप बनाएं। साथ ही नियमित अध्ययन के लिए समय और टॉपिक तय करें। इस तरह स्टडी करने से डिस्कशन के दौरान टॉपिक के कंसेप्ट्स तो क्लीयर होते ही हैं साथ ही अलग-अलग नजरिए के कारण लर्निंग स्किल भी बढ़ती है।

मेमोरी को डवलप करें
लर्निंग स्किल को विकसित करने के लिए मेमोरी को तेज करना भी जरूरी है। इसके लिए कई तरह की तकनीक का उपयोग किया जा सकता है। कठिन चीजों को याद रखने के लिए शॉर्टकट तरीका निकालें। बड़े शब्दों को याद करने के लिए उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ें। साथ ही बार-बार दोहराने की आदत भी विकसित करें।

पहले से तैयारी रखें
क्लास में या ग्रुप में आप जिस भी टॉपिक का अध्ययन करेंगे, उसे पहले से पढ़कर रखें। यदि आप टॉपिक को पहले से पढ़ते हैं तो आपको समझने में आसानी रहेगी। साथ ही आपके कंसेप्ट्स भी क्लीयर हो जाएंगे। इससे आपकी लर्निंग स्किल बढ़ेगी।

ब्रेक भी लेना है जरूरी
कभी भी लंबे समय तक लगातार अध्ययन नहीं करें क्योंकि इससे मस्तिष्क में थकान महसूस होने लगती है। ऐसे में कुछ भी समझना आसान नहीं होता है। इसलिए पढ़ाई के बीच में 5 से 10 मिनट तक का रेस्ट करना जरूरी है। इससे दिमाग भी रिफ्रेश हो जाता है।

मल्टीटॉस्क न बनें
यदि आपको अपनी लर्निंग स्किल को डवलप करना है तो कभी भी मल्टीटॉस्कर न बनें। आप जिस समय पढ़ाई कर रहे हैं, उस समय अन्य कोई काम नहीं करें क्योंकि जब आपका ध्यान दो-तीन जगह पर होता है तो आप चीजों को ठीक से समझ नहीं पाते हैं। इससे आपकी लर्निंग स्किल में भी गिरावट आने लगती है।

खुद का लें टेस्ट
लर्निंग स्किल को डवलप करने के लिए आप स्वयं के लिए प्रैक्टिस सेट बनाएं। इसके लिए आप जब भी टॉपिक पढ़े, उसके बाद उससे संबंधित प्रश्न बनाएं। इन प्रश्नों को कागज में अलग से लिखें और टॉपिक खत्म होने के बाद इन प्रश्नों का उत्तर लिखें। इससे अध्ययन में संबंधित सभी बातें फिर से स्मरण हो जाती हैं। साथ ही लर्निंग स्किल भी बढ़ती है।


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शादी होते ही ऐसे बदल जाती है कुंवारी लड़कियों की जिंदगी, जानिए क्या हैं ये बदलाव


शादी किसी दवा से कम नहीं। जिंदगी से अकेलापन गायब करने के साथ आप आस-पास बिखरी खुशियों को अपना नया ठिकाना बना लेती हैं। पर जैसे किसी भी दवा के साइड इफेक्ट्स होते हैं, ठीक वैसे ही शादीशुदा जिंदगी के भी कुछ साइड इफेक्ट्स होते हैं। हर चीज शेयर करने के साथ-साथ ढेरों जिम्मेदारियां और अपेक्षाएं शादी के साथ जुड़ जाती हैं। आपकी जिंदगी अब सिर्फ आपकी नहीं रही, उसके साथ एक और व्यक्ति जुड़ जाता है। बस यही बात आपकी जिंदगी को बदल डालने के लिए काफी है।

बदलाव और जिम्मेदारियां इस नई जिंदगी का हिस्सा बन जाती हैं। शादी के बाद जिंदगी कैसे बदलती है, आइए इस बारे में जरा खुलकर बात करें और जानें कि किस तरह आप अपनी शादीशुदा लाइफ को और अधिक अच्छा बना सकती हैं। यहां दिए गए प्रत्येक सुझाव को आप अमल में लाकर अपनी लाइफ को खूबसूरत बना सकती हैं और हमेशा प्रसन्नचित रह सकती हैं।

इग्नोर न करें
अपने रिश्ते में मेरे टाइम और हमारे टाइम के अर्थ को समझें और उसे अपनी जिंदगी में अपनाने की कोशिश करें। जैसे आपको यह पसंद नहीं है कि बात-बात में कोई आपको टोके, ठीक वैसे ही आपके पति को भी आपकी यह आदत पसंद नहीं आती होगी। शादी दो लोगों को जिंदगी भर के लिए साथ लाती है। पर इस बात को हमेशा याद रखना जरूरी है कि रिश्ता कोई भी हो उसे फलने-फूलने के लिए स्पेस की जरूरत होती है। अपने इस रिश्ते में इस स्पेस की कटौती कभी भी न करें। आप अपने दोस्तों से शादी के बाद कम मिल पाती हैं तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आपके पति भी अपने दोस्तों से मिलने न जाएं।

बन जाएंगी व्यावहारिक
वो दिन गए, जब आप इस एटिट्यूड के साथ जिंदगी जीती थीं कि कोई मेरे बारे में क्या सोचता है, उससे क्या फर्क पड़ता है। शादी के बाद आपको सिर्फ एक रिश्ता ही नहीं, कई रिश्तों को एक साथ सींचना सीखना होता है। यकीन मानिए, धीरे-धीरे आप अपने इन नए रिश्तों को सहेजने में एक्सपर्ट हो जाएंगी। स्थिति के मुताबिक आप खुद को ढालना सीख जाएंगी।

फ्रेशनेस गायब
शादी से पहले आपके खाली वक्त का पलड़ा हमेशा ऊपर रहता था और जिम्मेदारियों वाला हमेशा नीचे। पर अब स्थितियां पूरी तरह से उल्टी हो चुकी हैं। अब अगर आप देर रात किसी के यहां से लौटी हैं तो आपको अगली सुबह उठकर घर के कामकाज और सुबह के नाश्ते की चिंता भी करनी होगी। आप पर जिम्मेदारियों का बोझ अचानक से बढ़ जाएगा।

अब अपने लिए वक्त नहीं
शादी शेयरिंग का दूसरा नाम है। खुशियां, वॉर्डरोब, राज, खाना और यहां तक कि समय, शादी के बाद आपको अपने साथी के साथ यह सब कुछ शेयर करने के लिए पहले से आप दोनों को तैयार रहना होगा। यह एक अच्छी बात है, पर यह बात तय मानिए कि आपको कभी-कभी कुछ वक्त अकेले बिताने के लिए भी तरसना पड़ेगा। उन दिनों की कमी खूब खलेगी, जब आप चुपचाप टीवी के सामने बैठकर अपना मनपसंद प्रोग्राम देखा करती थीं या फिर दोस्तों के साथ दिन भर शॉपिंग किया करती थीं।

धैर्य रखना सीखें
बात-बात में गुस्सा होना, बात-बात में सामने वाले से बातचीत बंद कर देना, शादी से पहले भले ही आपके इस स्वभाव से आपकी जिंदगी पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता था। पर शादी के बाद स्थितियां ऐसी नहीं रहने वालीं। अपनी जिंदगी से तनाव को दूर रखने के लिए आप धीरे-धीरे धैर्य रखना सीख जाएंगी। बात-बात में गुस्सा करना बंद कर देंगी, क्योंकि इससे अब आपके साथी की जिंदगी भी प्रभावित होने लगेगी।

बातों में हम सबसे पहले
अब आपकी बातों में मैं कम और हम ज्यादा होगा। आपका सोचने का दायरा और जिंदगी को जीने का नजरिया दोनों बदल जाएगा। धीरे-धीरे ही सही, पर शादी के बाद छोटी-छोटी चीजों पर परेशान होने की जगह आप उसके बड़े फायदे के बारे में सोचना शुरू कर देंगी। जैसी ही एक दूसरा और सबसे खास व्यक्ति आपकी जिंदगी में प्रवेश करेगा, आप उसकी जरूरतों और खुशियों के मुताबिक सामंजस्य बिठाना शुरू कर देंगी। यह नई जिंदगी कुछ ही वक्त में आपको दूसरे के बारे में सोचना सिखा जाएगी और आपको कम स्वार्थी बना जाएगी। ऐसे में आपको अपनी जिम्मेदारियों और सेहत दोनों का बराबर ध्यान रखना होगा।


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ये ऐप रखेगा आपके बच्चों का ध्यान, हर वक्त बताएगा, क्या हो रहा है उनके साथ


अगर आप अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं तो आपके लिए अमरीका की टेक्नोलॉजी कंपनी ने एक ऐसा ऐप तैयार किया है जो स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा का पूरा खयाल रखेगा। स्कूलों में आए दिन होने वाली गोलीबारी की घटनाओं, बच्चों के गुम होने और दूसरे तरह की आपराधिक घटनाओं से बच्चों को होने वाले खतरों से बचाया जा सकेगा। इससे अभिभावकों को उस वक्त परेशान नहीं होना पड़ेगा जब उनका बच्चा स्कूल या किसी दूसरे काम से बाहर गया होगा। ‘मॉम आइएम ओके’ ऐप की मदद से माता-पिता बच्चों की रह गतिविधि पर नजर रख सकेंगे।

एप से बच्चे की हर पल की सूचना मिलेगी माता-पिता को
बच्चे के पास जिस फोन में ऐप होगा उससे माता-पिता को लगातार सूचना मिलती रहेगी। ऐप सवाल पूछेगा कि क्या आपका बच्चा सुरक्षित है। परिवारीजन सवाल का जवाब नहीं देते हैं तो ऐप में रजिस्टर्ड दूसरे नंबर पर अलर्ट मैसेज जाने लगेगा। यहां से भी कोई जवाब नहीं मिलने पर सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट चला जाएगा। ऐप में जियोफेंसिंग तकनीक का प्रयोग किया गया है।

बस ने रास्ता भी बदला तो भी पता चल जाएगा पैरेंट्स को
इसके तहत बच्चा जब अपने निर्धारित क्षेत्र से इधर-उधर जाता है तो इसकी सूचना भी अभिभावकों को मिलेगी। जैसे बच्चा जिस कैब या बस से स्कूल जा रहा है और अचानक से रास्ता बदल लिया तो अभिभावकों को अलर्ट मैसेज जाने लगेंगे। इस ऐप का सबसे अधिक फायदा बच्चों के अपहरण की घटनाओं को रोकने में मिलेगा।

पुलिस को भी फायदा
साइकोलॉजिस्ट और चाइल्ड डेवलपमेंट एक्सपर्ट लिजा डैमोर का मानना है कि समय के साथ पूरी दुनिया में असुरक्षा की स्थिति पैदा हो रही है। बच्चों की सुरक्षा के लिए इस तरह के ऐप फायदेमंद है और इसके प्रयोग से किसी को परहेज नहीं करना चाहिए। ऐप बच्चों और अभिभावकों के भीतर डर और भय को खत्म करने का काम करेगा।


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इन पांच उपायों में से एक को भी आजमा कर आप हरा सकते हैं मौत को, जानिए कैसे


हर वर्ष दुनिया भर में लगभग 1.75 करोड़ लोगों की हार्ट अटैक तथा ह्रदय से जुड़ी अन्य बीमारियों के चलते मृत्यु हो जाती है। वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के अनुसार लगभग करीब 67 लाख लोगों की मौत स्ट्रोक से होती है जबकि कोरोनरी हृदय रोग के कारण 74 लाख लोग अपनी जान गंवाते हैं। इस तरह मौत के सबसे बड़े कारणों में दिल की बीमारियां प्रमुख कारण बन गई है। हैल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार आप अपनी डेली लाइफस्टाइल में केवल पांच चीजों पर ध्यान दे कर अपने आप को तथा अपने परिवार को सुरक्षित कर सकते हैं।

नियमित रूप से व्यायाम करना
अपने दिल को स्वस्थ रखने के लिए, प्रत्येक दिन व्यायाम करना महत्वपूर्ण है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि धमनियों में लचीलापन रहे, 30-45 मिनट की अवधि के लिए किसी भी शारीरिक गतिविधि के रूप में दैनिक व्यायाम महत्वपूर्ण है। अध्ययनों से पता चला है कि तेज चलने से कुछ वयस्कों की जीवन अवधि में लगभग दो घंटे जुड़ सकते हैं। जीवनशैली में कुछ बदलाव जैसे एलेवेटर के बदले सीढिय़ों से चढऩा, पार्किंग स्थल के अंतिम भाग में पार्किंग करना और अपने दोपहर भोजन के समय में से थोड़ी देर के लिए कार्यालय से ब्रेक लेकर पैदल चलने से न केवल शरीर को दुरुस्त रखने में मदद मिलती है बल्कि स्वस्थ जीवन की एक आदत भी बनती है।

स्वास्थ्यवर्धक आहार
यह एक अच्छी तरह से स्थापित तथ्य है कि सही और स्वास्थ्य वर्धक आहार स्वस्थ हृदय और स्वस्थ जीवन जीने की कुंजी है। लेकिन, हम में से अधिकांश इसे अनदेखा करते हैं। व्यक्ति जो खाता है, वह सीधे उसके दिल को प्रभावित करता है। इसलिए हरे और पत्तेदार सब्जियों का सेवन सुनिश्चित करें, चीनी और गैस युक्त पेय से परहेज करें, जितना संभव हो मीठे पेय पदार्थों को पानी से बदल दें और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और परिष्कृत आटे का सेवन स्वस्थ जीवन और स्वस्थ दिल के लिए कम करें।

शरीर का वजन नियंत्रित रखें
अत्यधिक शरीर के वजन दिल के लिए खतरनाक है। वजन पर नजर रखें क्योंकि यह उच्च कोलेस्ट्रॉल की संभावना को बढ़ाता है, जिससे मधुमेह, धमनी रोग का खतरा और रक्तचाप हो सकता है। बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) पर भी नजर रखें और इसे उचित स्तर तक बनाए रखें।

धूम्रपान और शराब पर नियंत्रण रखें
धूम्रपान और शराब के सेवन से हृदय रोग होने का जोखिम बढ़ेगा। इन आदतों को रक्तचाप बढ़ाने के लिए जाना जाता है, जिसके कारण दिल की धडक़न अनियमित होती है और स्ट्रोक्स होते हैं। इतना ही नहीं, यह दिल की सामान्य क्रियाकलाप में व्यवधान पैदा करता है। इसलिए, यह सलाह दी जाती है कि दोनों का सेवन न करें या इसे कम करते करते खत्म करें। यह करना कठिन हो सकता है लेकिन प्रयास के लायक है।

तनाव से बचें
ऐसे कई अध्ययन हुए हैं जिन्होंने स्थापित किया है कि तनाव दिल की समस्याओं का सबसे बड़ा कारण है। इससे दर्द और तकलीफ हो सकती है, चिंता और अवसाद की भावनाएं पैदा हो सकती हैं, और आपकी ऊर्जा कम कर सकता है। तनाव को दूर रखने का प्रयास करें। काम के अलावा अन्य गतिविधियों की तलाश करें जो तनाव के स्तर को नीचे रखने में मदद करें। एक शौक या एक सकारात्मक आत्म-चर्चा करें, संगीत सुनें या अच्छी किताब पढ़ें या ध्यान करें। इन तकनीकों ने तनाव कम करने और काम और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद की है।


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सिंगल मॉम है तो ऐसे करें बच्चों की परवरिश, बन जाएगी हैप्पी फैमिली


मां का आंचल पकड़कर उनके चारों तरफ घूमना और डगमगाकर गिर जाना। घबराकर मां का हमें गोद में उठा लेना और खुद कराहते हुए हमारी चोट पर मरहम लगाना। हमारे खाना न खाने पर खुद भी भूखे सो जाना। हमारे खिलौनों को सजाना-नहलाना। जीवनभर मां के ढेरों रूप हमें अपनी ममता में संजोए रखते हैं।

मीरा ने जब रोहित से शादी की थी, तो उसकी आंखों में बहुत से सपने थे। लेकिन सृष्टि के जन्म के बाद जैसे रोहित पूरी तरह ही बदल गया। वह तीनों की जिम्मेदारी उठाने में खीजने लगा। मीरा ने उससे कहा भी कि वह जॉब करके उसकी मदद करेगी, लेकिन रोहित को यह मंजूर न था। हर छोटी-छोटी बात पर वह चिल्लाने लगा। मीरा ने अपने रिश्ते को संभालने की काफी कोशिश की। लेकिन हद तो तब हो गई, जब उसने मीरा पर हाथ उठाना भी शुरू कर दिया। एक दिन मीरा ने फैसला किया कि वह रोहित के साथ अब और नहीं निभा सकती। आज मीरा के तलाक को पांच साल हो गए हैं और वह सृष्टि के साथ बेहद खुश है। लेकिन फिर भी उसे कहीं न कहीं अकेलेपन और खालीपन का अहसास होता है।

यह दास्तां सिर्फ मीरा की नहीं है। ऐसी बहुत-सी महिलाएं हैं, जो तलाकशुदा या विधवा होने के कारण बतौर सिंगल पैरेंट अपना जीवन बिताती हैं। भले ही वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हों और पुरूष के साए के बिना अपना जीवन जी रही हों, लेकिन इन सबके बीच अपने जीवन का खालीपन उन्हें काफी खलता है। एक तरफ उन्हें अपने बच्चों को हर तरह से संभालना होता है, दूसरी ओर खुद को भी संभालना पड़ता है।

ऐसे में जरूरी है कि दोनों में एक तरह का संतुलन हो। घर की जरूरतें पूरी करने में कहीं ऐसा न हो कि आप बच्चों को समय और प्यार देना भूल ही जाएं। फिर ऐसा भी न हों कि बच्चों का ख्याल रखते-रखते आप खुद को पूरी तरह उपेक्षित कर दें। विभिन्न अध्ययनों में देखा गया है कि सिंगल मॉम के बच्चे मानसिक बीमारियों या पढ़ाई-लिखाई में पिछड़ेपन के शिकार ज्यादा होते हैं। इसकी वजह है कि ऐसे बच्चों के पास सपोर्ट की कमी होती है। सिंगल मॉम होना कोई गुनाह नहीं। बस कुछ खास बातों पर ध्यान देकर सिंगल मॉम अपने बच्चों की सही परवरिश कर सकती हैं।

सिखाएं जवाब देना
अक्सर सिंगल मॉम लोगों के क्रूर और अनचाहे सवालों से अपनी संतान को बचाने में खुद को असहाय पाती हैं। दूसरे बच्चे जब पूछते हैं कि तुम्हारे पिता कहां हैं या तुम्हारे पापा तुम्हारे साथ क्यों नहीं रहते या स्कूल के फंक्शन्स में या पैरेंट-टीचर मीटिंग में वे क्यों नहीं आते, तो ऐसे में बच्चे असहज हो उठते हैं। अगर सिंगल मॉम शुरू से ही बच्चों को कहानी-किस्सों या उदाहरण के माध्यम से स्थिति स्पष्ट कर दें। तो बच्चों के लिए ऐसे सवालों का जवाब देना आसान हो जाएगा। बच्चा खुद को कॉन्फिडेंट महसूस करने लगता है।

मन में भर दें विश्वास
अपने बच्चे को कभी बेचारा महसूस न होने दें और न ही बात-बात में आज तेरे पापा होते तो...या भूल कर भी बिन बाप की औलाद ऐसी ही होती हैं जैसे जुमलों का इस्तेमाल न करें। अपने बच्चे के मन में विश्वास भर दें कि वे दूसरे बच्चों से किसी भी तरह से कम नहीं हैं। दूसरा व्यक्ति भी उसे हीन महसूस करवाने की कोशिश करे, तो दृढ़तापूर्वक कह दें कि हम जैसे हैं, बिल्कुल ठीक हैं और जीवन का आनंद उठा रहे हैं।

परिजनों से अच्छे संबंध
अपने ससुराल पक्ष या पीहर पक्ष से संबंध मृदु और सुदृढ़ रखें, ताकि आपके बच्चे को दादा-दादी या नाना-नानी, चाचा-चाची या मामा-मामी और परिवार के दूसरे बच्चों का साथ मिल सके। उनका मार्गदर्शन और साथ पाकर पारिवारिक वातावरण में पल-बढ़कर वे एक अच्छा इंसान बन सकेंगे। समय-समय पर खास दोस्तों, परिजन या सोसाइटी के लोगों के साथ बच्चे को मिलने-जुलने दे। पिकनिक पर या घूमने-फिराने भी ले जाएं।

परफेक्शनिस्ट न बनें
कई सिंगल मॉम जरूरत से ज्यादा जिम्मेदारी का बोझ लेकर चिड़चिड़ी हो जाती हैं। बच्चे की छोटी-सी कमी या गलती को बेहद गंभीरता से लेती हैं। बात-बात में टोकने से दोनों में दूरियां बढऩे लगती हैं। संबंधों में खटास आ जाती है। इसलिए परफेक्ट बनने-बनाने की कोशिश में न रहें।


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युवा लड़कियों को पसंद है शादी में इस एक चीज की खास फरमाईश करना, जानिए क्या हैं


संगीत का जादू हर किसी पर जल्दी चल जाता है। शादी के किसी भी फंक्शन के अलावा यदि शादी के बाद भी कपल के बीच रोमांस बढ़ाने की बात हो तो संगीत ही ऐसी चीज हो जो हर पल को खुशनूमा बना सकता है। संगीत, भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे बेहतरीन जरिया कहलाता है।

आस पड़ोस में शादी ब्याह का पता ही अक्सर बैंड बाजों और गानों की आवाज से चलता है। बारात भी तडक़ते व भडक़ते गानों के बिना अधूरी सी लगती है। पहले के जमाने में भी हर अवसर के लिए निश्चित गानें होते थे वैसे ही आज भी नए गानों की सूची तैयार कर ली जाती है। नए ट्रेंड की बात करें तो हाल ही रिलीज हो रही बॉलीवुड फिल्मों में ऐसे गानों को शामिल किया जाता है जिन्हें किसी न किसी समारोह के लिए चुना जा सके। महिला संगीत, हल्दी रस्म आदि में भी डीजे की फरमाइश की जाती है। ताकि आए गए मेहमानों के अलावा दोस्तों के साथ मस्ती मजाक किया जाए।

गायकों की भी होती है बुकिंग
नए ट्रेंड की बात करें तो आजकल गानों का चयन करने से लेकर सूची तैयार करना और म्यूजिक सिस्टम के बारे में सोचने का समय कम ही लोगों के पास होता है। ऐसे में ऐसे लोगों को हायर किया जाता है जो शादियों में गाना गाने से लेकर इंस्ट्रूमेंट बजाने का भी करते हैं। सामूहिक व एकल हर तरह के प्रोफेशल्स मिल सकते हैं। इनकी खास बात होती है कि ये हर मौके के अनुसार नए व पुराने हर तरह के गानों को तैयार कर लाते हैं और फरमाइश के अनुसार गाते व बजाते हैं। ये ट्रेंड प्रोफेशल्स होते हैं।

मैशअप सॉन्ग की भी बढ़ रही है डिमांड
वेडिंग सीजन में नए म्यूजिक ट्रेंड में मैशअप सॉन्गस काफी सुनने में आ रहे हैं। इसमें पुराने और नए गानों को इस तरह से आपस में जोड़ा जाता है कि माहौल शादी का हो जाए और मौके के अनुसार गाना फिट हो जाए। जैसे कि विदाई के लिए बाबुल की दुआ और दिन शगना दा, को आपस में जोडक़र भावुक गाना तैयार किया जाता है। वहीं मेहंदी रस्म में मेहंदी वाले सभी गानों का मैशअप सॉन्ग तैयार कर प्ले कर दिया जाता है।

हर फ्लेवर के तरानों का होता संगम
शादी का मतलब केवल तडक़ भडक़ गानों से ही नहीं है, हर राज्य के अनुसार तो इनका चयन होता ही है। आजकल पंजाबी, राजस्थानी और रैप म्यूजिक को हर वर्ग प्ले करना पसंद कर रहा है। कई जगहों पर मेलोडी म्यूजिक भी प्ले किया जाता है जो बेहद सिंपल और सोभर महसूस कराता है। इसमें गाना तो प्ले होता है लेकिन केवल म्यूजिक के साथ। उसके बोल उसमें से गायब कर दिए जाते हैं।

खास बात यह है कि आजकल हर ओकेशन के लिए गाने हैं जिन्हें प्ले कर उस मौके का यादगार बनाया जा सकता है। यदि गानों का चयन नहीं कर पा रहे हैं या इस सिस्टम को अरेंज करने में दिक्कत हो रही है तो आप वेडिंग प्लानर के जिम्मे इस काम को छोड़ सकते हैं। वे अपने स्तर पर केवल गानें ही नहीं बल्कि लाइव परफॉर्मेंस तक रेडी रखते हैं। महिला संगीत के लिए रिश्तेदारों के गु्रप के अलावा दुल्हन की भी डांस परफॉर्मेंस तैयार करते हैं।


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हर किसी पंडित से न पूछें ये प्रश्न वरना जिंदगी बर्बाद होते देर नहीं लगेगी, जानिए क्यों


वैसे तो शादी ब्याह संपन्न करने की जिम्मेदारी बड़ों की होती है और वे इसके लिए बेहद अनुभवी भी होते हैं। लेकिन कई बार ये जिम्मेदारी युवा ले लेते हैं या फिर ऐसे पंडित से सलाह लेते हैं जो पैसे कमाने की सोच रस्मों-रिवाजों को संपन्न कराते हैं। सोच समझकर निर्णय लें।

अनुभव का ध्यान रखें
शादी होने के बाद अक्सर सुनने में आता है कि ये रस्म ऐसे होती है या वैसे होती है। ऐसे में इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि जो भी पंडित शादी की रस्मों को संपन्न कर रहा है वह अनुभवी होना चाहिए। इस बात की पुष्टि करने से शादी में यदि किसी प्रकार की समस्या आ भी रही होगी तो वे अच्छी सलाह देने में मदद करते हैं।

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धोखाधड़ी से करें बचाव
अक्सर कुछ लोग झूठे पंडित बनकर लोगों को लूटने का काम भी करते नजर आते हैं। इसलिए शादी की रस्मों को संपन्न करने की जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को दें जो विश्वसनीय होने के साथ ही रीति-रिवाजों को अच्छे से निभाए। कुछ पंडित गैर जरूरी सामानों की सूची बनाकर, सामान लेकर गायब ही हो जाते हैं, इसलिए इस बात का ध्यान जरूर रखें।

जानकार से सलाह लेना भी होता है फायदेमंद
शादी ब्याह के मामलों में जितना हो सके किसी जानकार या परिजनों के जानकार पंडित से रस्मों को संपन्न करा लेना चाहिए। वर्ना अनजाने में कई बार पंडित आधी अधूरी रस्मों को निभाकर चले जाते हैं। कई बार कुछ पंडित वर या वधु में अनेक दोष बताकर उन्हें दूर करने के लिए बेमतलब के तरीके बता जाते हैं। ऐसे में अनुभवी व ज्ञानी पंडित से ही शादी संबंधी सलाह लें।


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शादी में बड़ी खास होती हैं ये रस्में, इन्हें पूरा करने के बाद ही घर में आती है सुख-समृद्धि


शादी में ढेरों रीति रिवाज देखने को मिल जाते हैं। इसमें हाथ पैरों पर मेहंदी लगाने से लेकर शरीर पर हल्दी का लेप, अग्नि के चारों ओर फेरे लेना, सगाई की अंगूठी पहनना, हाथों में चूडिय़ां आदि पहनना आदि खास है। पौराणिक रूप से देखा जाए तो इन रस्मों के भी कुछ अहम मतलब हैं जिन्हें जानना जरूरी है।

हाथों में चूडिय़ां पहनना
लाल, हरी, पीली, नीली आदि कई रंगों की चूडिय़ां व चूड़े दुल्हन की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। अलग-अलग समुदाय के अनुसार कांच, लाख और दूसरी तरह की चूडिय़ां खासतौर पर पहनी जाती है। कई जगहों पर सोने व चांदी की चूडिय़ां भी पहनी जाती हैं। पौराणिक दृष्टि से देखा जाए तो हाथों में पति के नाम की चूडिय़ां पहनते हैं। कहते हैं कि चूडिय़ों का चटकना या झडऩा, पति पर किसी विपदा आने का संकेत होता है। इसलिए महिला को ध्यानपूर्वक चूडिय़ां पहनने की सलाह दी जाती है।

सगाई की अंगूठी पहनना
सगाई वाले दिन वर-वधु एक दूसरे को बाएं हाथ की चौथी अंगुली यानी अनामिका अंगुली में अंगूठी पहनाते हैं। इस रस्म से दोनों परिवारों के लिए यह सुनिश्चित हो जाता है कि यह लडक़ा अब हमारी लडक़ी का हुआ और लडक़ी सिर्फ हमारे लडक़े की हुई।

हल्दी रस्म है अहम
पहले की बात करें तो हल्दी रस्म कब पूरी हो गई पता ही नहीं चलता था। लेकिन अब लोग खासतौर से इस दिन को प्लान करते हैं। ज्वैलरी पहनकर दुल्हन तैयार होती है। इस दिन खासतौर पर सभी रिश्तेदार और दोस्त दुल्हन और दूल्हे के शरीर पर हल्दी का लेप लगाते हैं। परम्परा के अनुसार शादी से पहले हल्दी का लेप लगाने से चेहरे की रंगत बढ़ती है व वर-वधु दोनों बुरी नजर से बचे रहते हैं।

हाथ-पैर पर मेहंदी लगाना
दोनों हाथ और पैरों पर भरी-भरी मेहंदी नवविवाहित जोड़े की पहचान मानी जाती है। यह परंपरा भारत के हर कोने में अपनाया जाता है। परम्परा के अनुसार शादी से पहले दूल्हा और दुल्हन दोनों को हाथ-पैरों पर मेहंदी लगाना शुभ होता है। मान्यता के अनुसार हाथों व पैरों में लगी मेहंदी का रंग जितना गहरा चढ़ेगा, वर-वधु के बीच उतना ही गहरा प्यार होता है।

माथे पर बिंदी लगाना
परम्परागत नहीं वैज्ञानिक दृष्टि से अहम होता है भौहों के बीच बिंदी लगाना। इस स्थान को आज्ञा चक्र माना जाता है और यहां बिंदी लगाने से मन शांत रहता है व तनाव कम होता है। बढ़ती जिम्मेदारियों के चलते मन पर नियंत्रण होना बेहद जरूरी है। शादी में अग्नि के फेरे लेने का भी महत्व है। परम्परा के अनुसार सात फेरे के दौरान लिए गए वचन के लिए अग्नि को साक्षी माना जाता है।

मांग में सिंदूर भरना
सनातन धर्म के अनुसार मांग में सिंदूर भरना शादीशुदा होने का प्रतीक है। शादी के दिन दूल्हा, दुल्हन की मांग में सिंदूर भरकर उसे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करता है। इस दिन के बाद दुल्हन हमेशा मांग में सिंदूर भरती है। पति की लंबी उम्र के लिए मांग में नियमित सिंदूर लगाया जाता है। कई क्षेत्रों में इसका खास महत्व होता है। सिंदूर, सुहाग के लिए किये जाने वाले 16 श्रृंगारो में से एक है।


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ऑफिस में आजमाएं ये टिप्स तो होगा प्रमोशन, एम्प्लॉई भी मानेंगे आपकी हर बात


दफ्तर ऐसी जगह है जहां आप भले ही दिन का एक तिहाई समय बिताते हों, पर यह वह समय होता है, जब दिमाग ज्यादा सक्रिय रहता है और इसी कारण यह दिनभर का सबसे प्रोडक्टिव समय भी माना जाता है। ऐसे में ऑफिस का इंटीरियर ऐसा होना चाहिए कि कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मदद करे। जानिए किन उपायों को अपनाकर ऑफिस प्रोडक्टिव बनाया जा सकता है।

लाइट का संतुलन
लाइट कर्मचारियों के मूड पर सबसे अधिक प्रभाव डालती है और इसलिए इसका खास ध्यान रखा जाना चाहिए। डेस्क के पास लाइट 300-400 लक्स की होनी चाहिए और अगर एलईडी लाइट लगी हो तो और भी बेहतर होता है। लाइटिंग के दौरान अधिक फोकस चमक और विजन पर होना जरूरी है, इससे कर्मचारियों को आंखों में जलन भी नहीं होती और बिना आंखों पर जोर डाले वह ज्यादा काम कर पाते हैं। लाइट को इस तरह प्लान करके भी लगाना चाहिए कि वह बाहर से आने वाली गर्मी और रोशनी का भी संतुलन बनाने में सक्षम हों।

स्वच्छ फर्श
ऑफिस का फर्श साफ और सुरक्षित होना चाहिए। फर्श को ज्यादातर कड़क और नरम फर्श में बांटा जाता है। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि फर्श थर्मल प्रतिरोधी व ज्वलनशील हो, साथ ही फर्श ऑफिस में होने वाले शोर को भी सोख लेने में सक्षम हो ताकि काम ज्यादा बेहतर तरीके से हो सके। इसके अलावा इसे साफ करना आसान हो और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए, फर्श में कम कार्बन फुटप्रिंट होना चाहिए।

रंगों का सही मिश्रण
रंग न केवल मूड पर प्रभाव डालते हैं, बल्कि ऑफिस के माहौल, मौसम के असर, प्रोडक्टिविटी और व्यवहार पर भी कारगर होता है। ऑफिस के लिए हमेशा हल्के रंग जैसे नीला, सफेद, हल्का हरा, हल्का पीला आदि इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

आरामदायक फर्नीचर
एर्गोनोमिक फर्नीचर (कार्यस्थल के लिया बनाया गया खास फर्नीचर) को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए। काम करने वाली टेबल का साइज पर्याप्त होना चाहिए, कंप्यूटर, स्टेशनरी आदि आने के बाद भी कुछ जगह खाली होनी चाहिए। 4 फीट बाय 2 फीट की टेबल प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने के लिए सबसे उचित मानी जाती है।

चलने की जगह
ऑफिस के अंदर चलने और खड़े होने के लिए खुली जगह होना बहुत जरूरी है। कोरिडोर, बालकनी, और बाकी खुली जगह का साइज पर्याप्त होना जरूरी है। कोरिडोर और खुली जगह इस तरह की हो कि वहां से वेंटिलेशन सही होने के साथ ज्यादा भीड़ या आपातकाल के समय में कोई दिक्कत न उत्पन्न हो। खुली जगह ऑफिस को सुंदर और मजेदार भी बनती है, जो प्रोडक्टिविटी पर सीधा असर डालती है।


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देश-विदेश घूम कर भी कमा सकते हैं लाखों, जानिए क्या है ट्रैवल ब्लॉगिंग


नई-नई जगहों को एक्सप्लोर करना हर किसी को भाता है, लेकिन ट्रैवल से भी महत्वपूर्ण यह होता है कि ट्रिप के एडवेंचर एक्सपीरियंस को शेयर किया जाए। सोशल मीडिया के चलते अब लोग अपनी एक्सप्लोर की हुई जगहों की जानकारी को सबके साथ शेयर कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि युवाओं में इन दिनों ट्रैवल ब्लॉगिंग का ट्रेंड बढऩे लगा है।

इन दिनों जहां फूड, फैशन और गेजेट ब्लॉगिंग को लेकर यंगस्टर्स का रुझान देखने को मिल रहा है, वहीं अब ट्रैवल इंस्टाग्रामर और ब्लॉगर्स की संख्या भी बढ़ रही है। अपने ट्रिप को शानदार बनाने के लिए ट्रेवल ब्लॉगर्स पैकिंग से लेकर प्रिवेंशन तक सारी प्लानिंग बारीकी से करते हैं। जैसे कि क्लाइमेट कंडीशन को ध्यान में रखकर कपड़ों का चयन करना। लोकल फूड के बारे में जानकारी रखना और विजित करने वाली जगह के बारे में पूरी डिटेल अपने पास रखना।

बढ़ा ग्रुप ट्रैवल का चलन
जहां कुछ समय पहले ट्रेवल ब्लॉगिंग सिर्फ लोगों को प्लेसेज और मॉन्यूमेंट्स की नॉलेज देता था। वहीं अब ट्रैवल ब्लॉगर्स और इंस्टाग्रामर्स एक कदम आगे बढक़र लोगों को ग्रुप ट्रैवल के लिए इन्वाइट करने लगे हैं। इन ग्रुप ट्रिप इन्वाइट के लिए ट्रैवल एजेसियां भी इंस्टाग्रामर और ब्लॉगर की हैल्प करती हैं। एक्सपट्र्स ने बताया कि अब विभिन्न स्टेट्स के टूरिज्म डिपार्टमेंट्स ब्लॉगर्स के लिए डिफरेंट एक्टिविटीज करवा रहे हैं। और कई ट्रिप के लिए ब्लॉगर्स को स्पॉन्सरशिप भी दी जा रही है। शहर के इंस्टाग्रामर्स से हमने उनके अनुभवों को जाना।

दोस्त के साथ करती हूं ट्रैवल
ब्लॉगर शिवानी शर्मा ने बताया कि उन्होंने जोधपुर से लेकर नागालैंड तक का सफर तय किया है। इस दौरान लोकल लोगों से मिलना, जगहों की हिस्ट्री जानना और लोकल फूड ट्राई करने में काफी मजा आया।

रिसर्च करना जरूरी
ब्लॉगर नेहल नायर का कहना है कि कम्फर्टेबल ट्रैवल के लिए आप जहां जाने वाले हैं, उस जगह के बारे में पूरी रिसर्च करके जाएं। जैसे कि क्लाइमेट, फूड, ट्रांस्पोर्ट, लोकल लेंगवेज के बारे में आपको जानकारी होनी चाहिए।

अपने कंफर्ट का ध्यान रखें
ब्लॉगर निधि अग्रवाल ने कहा कि एक ट्रैवल ब्लॉगर को कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है। मैं ट्रैवलिंग के दौरान फर्स्ट एड किट, वाटर बॉटल, कंफर्ट ड्रेसिंग और स्पोर्ट्स शूज प्रिफर करती हूं। साथ ही ब्लॉगर होने के नाते एक नोटबुक, कैमरा भी अपने पास रखती हूँ।

जरूरी नहीं लॉन्ग ट्रिप चुनें
पिछले चार साल से ट्रैवल ब्लॉगिंग कर रहे कपल रजनी और योगेश ने बताया कि उन्होंने कई रोड ट्रिप पूरे किए हैं। योगेश का कहना है कि जरूरी नहीं है कि ट्रैवल ब्लॉगर बनने के लिए लॉन्ग ट्रिप्स को ही चुनें, बल्कि वीकेंड ट्रिप्स भी प्लान किए जा सकते हैं।


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लाइफ पार्टनर के साथ ऐसे बनाएं हनीमून ट्रिप का प्लान, होंगे इतने सारे फायदे


वैसे दिल की बात कहने और स्नेह जताने के लिए कोई खास समय या मौसम नहीं होता। लेकिन मानसून ऐसा परफेक्ट मौसम माना जाता है जिसमें आप अपने प्रिय और नजदीकी के लिए कुछ खास कर सकते हैं। यदि कपल न्यूली मैरिड है तो भी आप इस मौसम में हनीमून प्लान कर सकते हैं और कोई डेस्टिनेशन घूमने के लिए लिहाज से सोच सकते हैं।

मूवी देखने का बनाएं प्लान या आउटिंग करें
पार्टनर के साथ समय बिताने का सबसे अच्छा तरीका होता है आउटिंग करना। इसके लिए कहीं बाहर जाने का प्लान बना सकते हैं। इस मौसम में खुशनूमा माहौल और ठंडी हवाओं के बीच आपसी लगाव बढ़ता है। न्यूली मैरिड कपल हैं तो आप पार्टनर के साथ कोई अच्छी मूवी देखने के अलावा घर से बाहर डिनर या लंच करना प्लान कर सकते हैं। कपल को यदि घूमना और राइडिंग पसंद है तो आप हल्की बौछारों के बीच बाइक राइडिंग के दौरान रोमांचक जगहों को विजिट कर सकते हैं।

भारत में कई जगह ऐसी हैं जहां बारिश के मौसम में वातावरण काफी खुशनुमा और आनंदमयी हो जाता हैै। इस हरियाली भरे मौसम में आप दोनों कई यादगार पलों को फोटो के रूप में संजो कर रख सकते हैं। आउटिंग के दौरान कुछ बातों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी होता है। जैसे कि सिंपल बैगेज के बजाय प्लास्टिक बैग कैरी करें वर्ना सामान भीग सकता है। अपने साथ फस्र्ट एड किट भी रखें, बारिश में दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे रेनकोट भी कैरी कर सकते हैं जिन्हें राइडिंग के दौरान पहनें। साथ ही सुरक्षा के हिसाब से हेल्मेट और अन्य बातों का ध्यान रखें।

बारिश की बौछारों का आनंद लें और खेल खेलें
अपने करीबी के अलावा आप दोनों भी किसी रेन पार्टी में जाकर या ऐसी जगह जहां का लुक अच्छा हो वहां हल्की बौछारों के बीच रेन डांस कर सकते हैं। घर के टेरेस पर भी आप गर्मागर्म पकौड़े और चाय की चुस्की का मजा साथ ले सकते हैं। न्यूली मैरिड कपल के तौर पर ये पल आपके लिए यादगार होने के साथ ही रोमांटिक भी हो सकते हैं। बचपन के दिनों के अलावा फिलहाल के दिनों को अच्छा बनाने के लिए आप इंडोर या आउटडोर गेम्स को अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं। खेल-खेल में दोनों के बीच आपसी लगाव बढ़ेगा। सुहावने मौसम में आप पार्टनर के साथ लॉन्ग वॉक के लिए भी जा सकते हैं।

मानसून में खास रहेगा हनीमून ट्रिप
अक्सर लोग बारिश के मौसम में बीमार या परेशान होने की सोच से घूमने या हनीमून ट्रिप को टाल दिया करते हैं। लेकिन गौर करें तो यह ऐसा मौसम हैं जब आउटिंग के साथ हनीमून ट्रिप की अच्छी और आकर्षक फोटो को क्लिक कर वेडिंग एल्बम को खास व यादगार बना सकते हैं। किसी एडवेंचरस जगह पर ट्रिप प्लान कर आप टैंट में रहने के साथ ही बोनफायर के आसपास कपल डांस प्लान कर सकते हैं।

बारबेक्यू का भी प्लान कर सकते हैं। इसमें कुछ भी सेकते हुए हल्की सी खुशबू टेस्ट को और बढ़ा देगी साथ ही आप एक दूसरे के साथ समय भी बिता सकते हैं। पत्नी के लिए यदि आप गर्मागर्म कोई टेस्टी डिश बनाते हैं तो उसे काफी अच्छा लगेगा और उसे खास महसूस कराएगा। रेनकोट पहनकर आप अपने पार्टनर के साथ हनीमून के दौरान शॉपिंग भी कर सकते हैं। चाय की चुस्कियों का मजा भी आप ले सकते हैं।


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कार खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान तो आसानी से बचेंगे 1,50,000 रुपए तक


कार की खरीदारी एक अहम फैसला है और सभी खरीदारों के लिए यह उनके जीवन में मील का पत्थर होता है। कई ग्राहक कार खरीदने से पहले पूरी तरह से शोध करते हैं जो सभी जरूरतों पर खरा उतरे साथ ही उसकी लागत भी कम हो। इसके अलावा ग्राहक उन डीलरों का भी पता लगाते हैं, जो उनकी पसंदीदा मॉडल पर फ्रीबीज के साथ अधिकतम छूट भी दे रहा हो। कुछ बहुत ही छोटी-छोटी बातों का ध्यान रख कर आप नई कार खरीदते वक्त लगभग 20,000 रुपए से 1,50,000 रुपए तक की बचत कर सकते हैं।

जब बात कार का बीमा कराने की आती है तो ग्राहकों को उत्साह का वही स्तर नहीं होता है और आखिरकार ग्राहक वह बीमा खरीद लेता है जो महंगा होता है और उसकी जरूरतों के अनुरूप भी नहीं होता है।

एक प्रमुख इंश्योरेंस वेबसाइट के मुख्य व्यवसाय अधिकारी (जनरल इंश्योरेंस) तरुण माथुर का कहना है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि तथ्य यह है कि बीमा परिदृश्य में व्यापक परिवर्तन हुआ है और ग्राहक अपनी जरूरतों के हिसाब से बीमा खरीदते हैं, लेकिन यही बात कार के बीमा के लिए सही नहीं है। क्योंकि इसे ग्राहक डीलरशिप पर खरीदता नहीं है, बल्कि उसे कार के साथ ही बेच दिया जाता है। इसलिए कार खरीदते वक्त उसके बीमा विकल्पों पर भी ध्यान देना चाहिए।

माथुर बताते हैं, ''कार का बीमा डीलरशिप पर भी खरीदा जा सकता है और ऑनलाइन भी खरीदा जा सकता है। लेकिन लोग कार के साथ ही डीलरशिप पर इसलिए खरीदना पसंद करते हैं, क्योंकि यह झंझटमुक्त होता है। हालांकि यह बात थोड़ी सच भी है। लेकिन आपको पता होना चाहिए कि अगर आप डीलरशिप पर बीमा खरीदते हैं तो उसकी कीमत कहीं अधिक चुकाते हैं। कई मामलों में तो यह 5,000 से लेकर 35,000 रुपये तक ज्यादा होता है, जो कि कार की कीमत के हिसाब से तय होता है।"

उन्होंने कहा, ''उदाहरण के लिए डीलर एक मिड-साइज की सिडान गाड़ी जो 1.6 लीटर इंजनवाली हो, उसके बीमा के लिए 35,000 रुपये तक का शुल्क लेते हैं। हालांकि जब आप ऑनलाइन सर्च करते हैं उसी कार का बीमा आपको करीब 26,000 रुपये में मिल जाएगा। अगर आप किसी 2.2 लीटर इंजन वाले एसयूवी का बीमा डीलरशिप पर कराते हैं तो वह आपको 60,000 से 70,000 रुपये के बीच मिलेगा, जबकि ऑनलाइन वही बीमा आपको 45,000 रुपये में मिल सकता है।"

कई डीलर आपको उन्हीं से बीमा खरीदने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। वे बताते हैं कि अगर आप उनसे बीमा नहीं खरीदेंगे तो आपको कैशलेस गैराज की सुविधा नहीं मिलेगी या फिर वे कहते हैं कि कार की कीमत में ही बीमा की रकम भी शामिल है और यह आपको कार के साथ मुफ्त दी जा रही है। जबकि यह सच नहीं है।

भारतीय बीमा नियामक प्राधिकरण (IRDAI) ने इस संबंध में नियम बनाए हैं और कोई भी डीलर आपको कैशलेस सुविधा देने से इनकार नहीं कर सकता, अगर आपके बीमाधारक ने उससे इस संबंध में समझौता किया हो। यहां तक कि कार की वारंटी भी बीमा कंपनी द्वारा की जाती है और डीलर की इसमें कोई भूमिका नहीं होती है कि वारंटी में क्या कवर होगा या क्या कवर नहीं होगा।

माथुर ने बताया, ''कई बार ऐसा देखा गया है कि डीलरशिप से बीमा करवाने पर बिना जरूरत वाले एड ऑन पैकेज भी ग्राहकों को थमा दिए जाते हैं, जबकि उसकी जरूरत और प्रयोग अलग होती है। उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति अगर बाढ़ प्रभावित/संभावित इलाके में नहीं रहता है तो उसे बीमा में इंजन प्रोटेक्टर एड ऑन लेने की जरूरत नहीं है। इसी प्रकार से की और लॉक रिप्लेसमेंट को बीमा में शामिल करने पर उसकी लागत बढ़ जाती है, जबकि कई ग्राहक इसे कवर नहीं करवाना भी पसंद करेंगे। डीलरशिप पर इस तरह का विकल्प ग्राहकों को नहीं मिल पाता है।"

उन्होंने कहा, ''जब आप खुद या आपके परिवार के सदस्य गाड़ी चलाने वाले हैं तो पेड ड्राइवर लीगल लाइबिलिटी कवर बीमा में शामिल करवाने की कोई जरूरत नहीं है। इसी प्र्रकार से अगर आप या आपके परिवार के सदस्य के पास पर्याप्त पर्सनल एक्सिडेंट बीमा पॉलिसी या आकस्मिक अक्षमता के साथ जीवन बीमा पॉलिसी है तो कार पॉलिसी के साथ अन-नेम्ड पैसेंजर कवर लेने की जरूरत नहीं है।"

कार डीलर से कार का बीमा खरीदने से पहले एक और महत्वपूर्ण कारक पर आपको ध्यान देना चाहिए कि डीलर आपको 'नो क्लेम बोनस' (एनसीबी) का लाभ नहीं देगा, जो बीमाकर्ता क्लेम नहीं लेने पर बीमे की रकम में छूट देते हैं। लगातार पांच साल तक क्लेम नहीं लेने पर यह छूट 50 फीसदी तक मिलती है।

माथुर ने कहा, ''कुछ डीलर अपने यहां से नवीनीकरण में छूट का ऑफर देते हैं और कहते हैं कि उनके यहां से बीमा खरीदने पर यह ऑफर मिलेगा, जबकि यह ऑफर बीमा कंपनी देती है न कि डीलर, इसलिए आप जहां से भी बीमा खरीदेंगे एनसीबी का लाभ जरूर मिलेगा। यहां तक कि आप किसी दूसरी कंपनी का भी बीमा खरीदते हैं तो भी आपको एनसीबी का लाभ मिलेगा।"

कार खरीदने का आपके पास एक ही विकल्प है कि आप डीलर से खरीदें, लेकिन कार का बीमा खरीदने का आपके पास कई विकल्प हैं, इसलिए इसे खरीदने से पहले इस बारे में आप पर्याप्त शोध कर लें। कौन सा बीमा आपको लेना चाहिए, किस कंपनी का बेहतर ऑफर है। इससे आप कम कीमत में ही सही बीमा खरीद सकेंगे।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि नया कार खरीदने के बाद जब तक कार आपके पास नहीं आती है, उससे पहले उसका बीमा कैसे करवाएं। पहली बार बीमा खरीदने वालों के लिए यह एक कठिन सवाल है, जबकि वास्तविकता यह है कि इसकी प्रक्रिया काफी आसान है। आपको केवल यह करना है कि अपने डीलर से इंजन, चेसिस नंबर, खरीद तिथि और आरटीओ की जानकारी ले लें। इतना विवरण बीमा पॉलिसी लेने के लिए पर्याप्त है। एक बार बीमा खरीद लेने पर आप उसका विवरण कार डीलर को दे सकते हैं, जिसके बाद वह आपके कार का आरटीओ में पंजीकरण करवाएगा।

कार खरीदते समय यह जरूर ध्यान रखें कि बीमा विकल्पों का ऑनलाइन पता लगाएं और ज्यादा से ज्यादा बचत करें। यहां तक कि आप पारंपरिक तरीके से बीमा खरीद रहे हैं, फिर भी एक बार ऑनलाइन सर्च जरूर कर लें, ताकि आपको पता चले कि बीमा की सही कीमत कितनी होनी चाहिए। साथ ही आप कई सारे गैर-जरूरी एडऑन को भी हटा सकेंगे और पैसों की बचत कर सकेंगे।


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‘मोमो चैलेंस’ के बाद आया ‘फिटनेस चैलेंज’, युवा ऐसे कर रहे हैं पूरा


भारतीय युवाओं में फिटनेस को लेकर अवेयरनैस बढ़ रही है। यही वजह है कि उनकी लाइफस्टाइल में भी परिवर्तन देखने को मिल रहा है। इन दिनों फिटनेस के नए ट्रेंड डवलप हो रहे हैं और इसी में शामिल हो गया है एक नया ट्रेंड- फिटनेस डेज चैलेंज। मसलन, 30 डेज चैलेंज, 60 डेज चैलेंज और 100 डेज चैलेंज। इन चैलेंजेज के जरिए युवा निश्चित समय में अपना वेट रिड्यूस करने और शेप्ड बॉडी पर फोकस कर रहे हैं। क्या आपने भी इस तरह का कोई चैलेंज लिया है? यदि हां, तो पत्रिका आपको एक्सपर्ट के जरिए बताएगा कि आपको इन चैलेंज को सक्सेसफुली कम्प्लीट करने के लिए क्या करना चाहिए। आइए जानते हैं इससे जुड़े कुछ फैक्ट्स और सजेशंस...

कॉर्डियो एक्सरसाइज है बेस्ट
एक प्राइवेट कंपनी में काम करने वाली आशिमा का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में उनकी लाइफस्टाइल में बदलाव आए थे। इसके चलते उन्होंने काफी वेट गेन कर लिया, लेकिन अब उन्होंने 30 डेज चैलेंज लिया है। इसमें मुझे तीन से पांच किलो वजन कम करना है। फिटनेस एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि आपके पास जिम जाने के लिए समय नहीं है तो आप घर पर ही एक घंटा सुबह और शाम को कॅार्डियो, सूर्य नमस्कार और वॉक करें। फिटनेस एक्सपर्ट मनीषा पारीक ने बताया कि डेज चैलेंजेज को पूरा करने के लिए सबसे पहले लाइफस्टाइल चेंज करना जरूरी है। सनराइज से पहले जागने और वॉक करने से काफी फायदा होगा।

यदि मेडिकली फिट नहीं हैं तो सिर्फ एक घंटा वॉक भी किया जा सकता है। इसके साथ ही मन को नकारात्मक भावों से दूर रखें तो 30 डेज चैलेंज आसानी से पूरा किया जा सकता है। यदि आप रात 11 बजे तक सोने चले जाते हैं तो फैट परसेंटेज नहीं बढ़ेगा।

20 मिनट की मॉडर्न एक्सरसाइज
फिटनेस एक्सपर्ट चंद्रप्रकाश सैनी ने बताया कि हर बॉडी अलग तरीके से रिएक्ट करती है। इसलिए बॉडी के अनुसार स्ट्रेंथ और एक्सरसाइज पर ध्यान देना चाहिए। फिटनेस चैलेंज के लिए रुटीन में घर पर 20 मिनट की एक्सरसाइज की जा सकती है। हालांकि योगा सबसे कारगर होता है, लेकिन सूर्य नमस्कार के साथ मॉडर्न एक्सरसाइज में हाफ स्केट्स, ओवरहैड प्रेस, बाइसाइकिल, फ्रंट प्लैंक, क्रंचेज जैसी एक्सरसाइज की जा सकती है।

रेनबो की तरह हो कलरफुल डायट
डायटीशियन डॉ. अंजलि फाटक का कहना है कि वेट रिडक्शन या फिटनेस चैलेंज से पहले बॉडी कंपोजिशन एनालिसिस होना जरूरी है। पहले बॉडी की आइडल स्थिति जान लें। फिर महीनेभर में दो से तीन किलो तक के चैलेंज को आसानी से पूरा किया जा सकता है। डॉ. अंजलि का कहना है कि हमें हैल्दी वेट लॉस पर फोकस करना चाहिए। वेट रिडक्शन में डायट का रोल 80 प्रतिशत और 20 प्रतिशत फिजिकल एक्टिविटी का होता है। ऐसे में डायट में पूरी तरह से किसी भी चीज को बंद नहीं करना है। आपकी डायट रेनबो की तरह कलरफुल होनी चाहिए।

जीरा वाटर, मेथीदाना क्लींजिंग और मेटाबॉलिज्म बढ़ाने में कारगर होता है। डायट में प्रोटीन के लिए विभिन्न तरह के स्प्राउट्स, मोठ, मूंग, राजमा, लोबिया का इस्तेमाल कर सकते हैं। रोजाना एक गिलास दूध कैल्शियम, प्रोटीन और हार्मोनल बैलेंस में मदद करता है। यह याद रखना है कि भूखा नहीं रहना है। इसलिए मील की फ्रीक्वेंसी सही होनी चाहिए। फ्रूट्स, वेजिटेबल, ’यूस और ट्रेडिशनल फूड्स पर फोकस होना चाहिए। आर्टिफीशियल शुगर और जिमिंग के लिए मील सप्लीमेंट्स व कार्बोनेटेड बेवरेज से काफी नुकसान हो सकता है। इसलिए ’यादा से ’यादा पानी और आठ से दस घंटे की नींद लेना बेहद जरूरी है। एक हैल्दी डायट से लोगों ने छह महीने में 26 किलो तक वेट रिड्यूस किया है।

डेली 20 मिनट तक ये एक्सरसाइज

  • सूर्य नमस्कार
  • हाफ स्केट्स
  • ओवरहैड प्रेस
  • बाइसाइकिल
  • फ्रंट प्लैंक
  • क्रंचेज

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अब आया प्री वैडिंग पैकेज का ट्रेंड, छह महीने पहले ही शुरु हो जाते हैं ग्रूम-ब्राइड सेशन


सॉफ्टवेयर इंजीनियर अजय शर्मा की शादी को अभी लगभग छह महीने बाकी हैं, लेकिन वे अभी से ही अपनी ग्रूमिंग पर काम कर रहे हैं। उन्होंने एक नामी सैलून से छह महीने का प्री वेडिंग पैकेज लिया है। वहीं उनकी लाइफ पार्टनर बनने जा रहीं अनीता भी स्पेशल दिखने के लिए ग्रूमिंग टिप्स ले रही हैं। यह कहानी देश में तेजी से डवलप हो रहे ट्रेंड की है, जिसे प्री ग्रूम सेशन के नाम से जाना जा रहा है।

दरअसल पहले जहां ब्राइड और ग्रूम अपने लुक को डवलप करने के लिए एक महीने पहले से कवायद शुरू करते थे, अब वही लुक और लाइफ स्टाइल में बदलाव के लिए छह महीने पहले का समय लेने लगे हैं। यंगस्टर्स के इस एक्साइमेंट को देखते हुए अब मेट्रो सिटीज के सैलून्स भी उनके लुक से लेकर उनकी स्टाइलिंग के लिए स्पेशल पैकेज और सेशन देने लगे हैं। छह महीने के सेशन में कपल्स को हेयरस्टाइल से मेकअप और फूड से लेकर वेडिंग क्लोथ तक के सलेक्शन में उनकी मदद करते हैं। इस पैकेज में सैलून की ओर से डाइटीशियन, मेकअप आर्टिस्ट और फैशन डिजाइनर जैसे लोगों की एडवाइज और हैल्प दी जाती है। सैलून्स से मिली जानकारी के अनुसार यंग कपल्स अब प्री ग्रूम सेशन में काफी इंटरेस्ट लेने लगे हैं।

गर्ल्स का ज्यादा इंटरेस्ट
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बॉयज भी इनमें इंटरेस्ट लेने लगे हैं, लेकिन ओवरऑल गर्ल्स का इंटरेस्ट ज्यादा है। गर्ल्स ग्रूम के साथ इन सेशंस को अटेंड करती हैं। सैलून एक्सपर्ट मीनाक्षी सोलंकी ने बताया कि इन सेशंस में ब्राइड और ग्रूम दोनों का फोकस नैचुरल और रिफ्रेशिंग लुक होता है, इनमें स्किन को लेकर काफी ध्यान देने हैं। वहीं यंगस्टर्स का कहना है कि उन्होंने इन सेशन को इसलिए ऑप्ट किया है, क्योंकि इसके जरिए उन्हें एक पूरी टीम मिलती है और हर तरह के एक्सपर्ट की सलाह से आप अपने आप को डवलप करते हैं।

हैल्थ और वैल्थ दोनों तरह से इस तरह के सेशन फायदेमंद है। आरिफ खान ने बताया कि उन्हें इस सेशन में डॉक्टर्स से लेकर हेयरस्टाइलिस्ट की एडवाइज मिल रही हैं। भव्य शर्मा ने बताया कि मेरी स्किन में पिगमेंटेशन की समस्या थी, लिहाजा मैंने इस सेशन को ऑप्ट किया। इसमें फूड से लेकर स्टाइलिंग की टिप्स एक्सपर्ट की ओर से दी जा रही है।

मैरिड सेलिब्रिटी कपल्स पर भी फोकस
एक्सपर्ट का कहना है कि सिक्थ मंथ प्री ग्रूम सेशन में यंगस्टर्स को हैल्थ और ग्रूमिंग से जुड़े सभी आस्पेक्ट को बताया जाता है। इन सेशन में यंगस्टर्स का फोकस हाल ही शादी के बंधन में बंध चुके सेलिब्रिटी जैसे अनुष्का-विराट, सोनम और आनंद पर भी रहता है। कपल्स उनकी ही तरह अपनी ग्रूमिंग भी चाहते हैं।


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ऑनलाइन सोशल मीडिया पर आजमाएं ये टिप्स तो बन जाएंगे हजारों फॉलोवर्स


सोशल मीडिया पर आप अपना प्रोफाइल फोटो इस तरह का चुनते हैं, जो अच्छा दिखे, सबसे अलग हो और लोगों के दिमाग में पहली ही नजर में बैठ जाए। लेकिन किसी फोटोग्राफ को आप खुद कैसे आंक सकते हैं? हो सकता है कि जो फोटोग्राफ आपको बेहतर लगता हो वह दूसरे लोगों को उतना अच्छा नहीं लगे। ऐसे में आप कुछ टूल्स की मदद लेकर इसकी जांच कर सकते हैं और अपने लिए अच्छा प्रोफाइल फोटो चुन सकते हैं।

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लामेम
मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के इंजीनियर्स ने ऐसा टूल तैयार किया है जो आपके फोटो को एडवांस एल्गॉरिद्म के आधार पर परखता है और यह बताता है कि इस फोटो के याद रखे जाने की संभावना कैसी है। जो फोटो को मेमोरेबल आधार पर जितने ज्यादा अंक मिलेंगे वह फोटो आपका सबसे अच्छा प्रोफाइल फोटो होगा। इस वेबसाइट को यहां देखें-
https://goo.gl/bnHHyh

फोटोफीलर
यदि आपको मशीनी नतीजों पर भरोसा नहीं है और आप समझदार वोटर्स से आपके फोटो का आकलन करवाना चाहते हैं तो फोटोफीलर वेबसाइट आपके लिए है। इस फोटो टेस्टिंग टूल की मदद से आप अपना टारगेट ग्रुप चुन सकते हैं और चाहें तो अपनी पहचान भी गोपनीय रख सकते हैं। इस वेबसाइट का लिंक है-
Uhttps://goo.gl/ac7yJQ

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ट्रेंडी कवर
यदि आप फेसबुक कवर पर अपना फोटो इस्तेमाल करने की जगह कोई शानदार ट्रेंडी कवर चाहते हैं तो यह वेबसाइट आपके लिए बहुत ही उपयोगी है। इस वेबसाइट को देखें-
Uhttps://goo.gl/N8S2DK

बाइटेबल
यदि आप फेसबुक प्रोफाइल कवर पर वीडियो टेम्पलेट लगाना चाहते हैं तो उसके लिए इस वेबसाइट की मदद लें-
Uhttps://goo.gl/AJJohz


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बच्चों को आज्ञाकारी बनाना चाहते हैं तो आजमाएं ये टिप्स, हर हाल में होगा फायदा


आज सभी अभिभावक ये जानना चाहते हैं कि वो अपने बच्चों की बढ़ती स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की आदत को कैसे सही करें। चाइल्ड साइकेटिस्ट्स के अनुसार बच्चों को न केवल स्मार्टफोन की लत वरन सोशल मीडिया से बचाना भी काफी जरूरी है। इसके लिए वो कई सुझाव देते हैं जिनकी मदद से पैरेंट्स अपने बच्चों को अपने करीब ला सकते हैं और तकनीक के बढ़ते प्रयोग से बचा सकते हैं। उम्मीद है कि ये टिप्स आपको अपने बच्चों के साथ बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद करेगी और अभिभावकों को इससे काफी फायदा होगा।

मुद्दे को समझें
एक खबर चली ‘हैव स्मार्टफोन डिस्ट्रॉयड ए जनरेशन’ (क्या स्मार्टफोन एक पीढ़ी को खत्म कर रहे हैं)। हेडलाइन भयानक थी। लेख में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया को भावनात्मक तनाव से जोड़ा गया था। उदाहरण के तौर पर एक ८वीं क्लास का बच्चा हफ्ते में दस घंटे से अधिक सोशल मीडिया का इस्तेमाल करता है तो इसका असर उसकी खुशी पर पड़ेगा ही।

स्विच से दूर रहें
हमारी सलाह है डिवाइस फ्री डिनर प्लान करें यानि रात के खाने के वक्त कोई मोबाइल या दूसरा गैजेट पास न रखें। खाने की टेबल पर जब बैठें तो ऐसा कोई उपकरण न हो जिसमें ऑन और ऑफ का स्विच हो। आप ऐसा करते हैं तो परिवार और बच्चों के बीच जो बातचीत का दौर शुरू होगा वह संतुष्टि और खुशी का भाव देगा।

शो के बारे में बात करें
नेटफ्लिक्स शो देखना अच्छा है लेकिन अभी ये ताजा मसला है। यह तय करना होगा कि क्यों। अगर हां तो किन शर्तों के साथ। निर्णय लेने के लिए खुद को तैयार करें। इससे आप शो के बारे में बच्चों से बात कर सकते हैं और उन्हें उस शो से क्या सीखना है, बता सकते हैं।

बच्चों को समय दें
हमने सोचना शुरू कर दिया है कि कैसे स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ने कॉलेज कैंपस को बदल दिया है। बच्चे की कॉलेज लाइफ के साथ आप भी समय दें ताकि उसे लगे कि आपका सहयोग कर रहे हैं।

योजना बनाने में मदद लें
आप अमरीकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के फैमिली मीडिया प्लान को पढ़े तथा उसे समझें। इससे आपको पता चलेगा कि कैसे लोग अलग-अलग मीडिया में उलझते जा रहे हैं। बड़ी बात यह है कि एक ही सांचें में सबको नहीं ढाला जा सकता है। ऐसे में उनके बताए प्लान आपके परिवार के लिए विशेष फायदेमंद हो सकते हैं।


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इसलिए नहीं सुनते बच्चे अपने माता-पिता की बात, जानिए क्या है समाधान


अमरीका और ब्रिटेन की तरह अब भारत में भी तेजी से न्यूक्लियर परिवार की अवधारणाएं बढ़ रही हैं। ऐसे अभिभावकों के सामने बच्चें की परवरिश सबसे बड़ी चुनौती होती है। लेकिन अक्सर समझाने के बाद भी बच्चे अभिभावकों की बात नहीं सुनते। आखिर क्यों किशोर-किशोरियां और छोटे बच्चे माता-पिता की बातों पर ध्यान नहीं देते?

वे कौन-से कारक हैं जो इन्हें ऐसा करने से रोकते हैं? अलग-अलग देशों में संस्कृति और पारिवारिक व्यवस्था कैसी भी हो, परिवारों में बच्चों का ऐसा ही व्यवहार नजर आ रहा है। कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय के बाल रोग चिकित्सक प्रो. नील रोजस ने बच्चों की आदतों का अध्ययन किया है। उनका कहना है कि यह बच्चे के बाहरी मस्तिष्क में चल रही प्रक्रिया के कारण होता है। जिसमें बच्चे के मस्तिष्क को यह संदेश मिलता है कि उसके आस-पास के लोगों को उसकी ज्यादा परवाह करनी चाहिए। नील के मुताबिक इस दिमागी प्रक्रिया का सही अनुपात ही तय करता है कि बच्चा हमारी बात पर ध्यान देगा या नहीं।

‘डिस्ट्रैक्टेड’ किताब की लेखिका मैगी जैक्सन का कहना है कि हमारे आस-पास के उपकरणों से भी हमारे बच्चों का संघर्ष लगातार चलता है। हम अपने स्मार्टफोन, लैपटॉप और टीवी शो में इस कदर उलझे रहते हैं कि बच्चों की ओर ध्यान ही नहीं देते। हमें तब भी किसी ईमेल या वाट्स एप मैसेज की आशंका रहती है जब यह स्विच ऑफ होते हैं। जैक्सन कहती हैं ऐसे व्यवहार का मतलब है कि आप अपने बच्चों से दूर हो रहे हैं।

ऐसे करें ध्यानाकर्षित
बच्चों के सामने हमेशा सचेत रहें। उनकी बात को तवज्जो दें। घर में गैजेट्स के इस्तेमाल की समय-सीमा तय करें। अपने बच्चों को उनके नाम से बुलाएं, उनसे नजरें मिलाकर बात कहें। बच्चों से उनकी सलाह मांगे। बिना भाषण दिए समझाएं और उनके सुझाव भी मानें।

40 फीसदी अमरीकी परिवारों में अलग-अलग भोजन करने का चलन हैं। वहीं पूरे दिन का मात्र १६ फीसदी समय ही परिवार के सदस्य एक कमरे या हॉल में होते हैं लेकिन यहां भी वो एक-दूसरे से संवाद नहीं करते। व्यस्त माता-पिता, रुटीन लाइफ और बच्चों को न सुनना भी इसकी एक बड़ी वजह है।


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इस राखी पर बहनें दें अपने भाई को ये उपहार तो भाई हो जाएंगे निहाल


इस बार 26 अगस्त को रक्षाबंधन (राखी) का त्यौहार मनाया जाएगा। राखी का त्योहार भाई-बहन के बीच के अनूठे प्यार, तकरार, हंसी जैसे यादगार पलों के जश्न का प्रतीक है। राखी पर आमतौर पर भाई अपनी बहनों को उपहार देते है, लेकिन क्यों न इस राखी परंपरा से हटकर बहन अपने प्यारे भाई को कुछ उपहार में देकर उसे हैरान कर दे। उपहार ऐसा हो जिसे देकर आप अपने प्यारे भाई को अहसास दिला सकती हैं कि वह आपके लिए कितनी अहमियत रखता है।

(1) कई लोग बचपन से प्लेन में उड़ान भरने या उड़ते प्लेन को निहारने के बड़े शौकीन होते हैं। अगर आपका भाई उनमें से एक है तो आप उसे सरप्राइज गिफ्ट के तौर पर माइक्रोलाइट प्लेन का अनुभव करा सकती हैं।
(2) अगर आपके भाई को ब्रांडेड चीजें पसंद हैं तो आप उसे उसकी पसंद की लक्जरी लेबल की कोई चीज गिफ्ट कर सकती हैं।
(3) आजकल की युवा पीढ़ी को पढ़ाई और नौकरी की तलाश में घर से दूर दूसरे शहर जाकर रहना पड़ता है, ऐसे में उन्हें खर्च का बंदोबस्त करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, तो इस बार जिम्मेदार बहन बनते हुए भाई को गिफ्ट में सुपरमार्केट्स से खरीदारी का वाउचर दे दीजिए, यकीन मानिए अगर वह जिदंगी भर के लिए आपको शुक्रिया न भी कहे तो भी लंबे अरसे तक जरूर आपका शुक्रगुजार जरूर होगा।
(4) टेस्टी फूड भी एक बेहतर विकल्प है। आप चाहे तो अपने भाई के पसंदीदा व्यंजन या पेय पदार्थ का वाउचर उसे गिफ्ट कर सकती हैं। आजकल टी वाउचर गिफ्ट करना भी चलन में है और आपका प्यारा भाई निश्चित रूप से आपसे ऐसा गिफ्ट पाकर बेहद खुश होगा।
(5) आप चाहे तो अपने भाई को कही बाहर घूमने के लिए टूर पैकेज भी बुक करवा सकती है। यह प्लेस आसपास का कोई दर्शनीय स्थल हो सकता है या फिर आपके बजट के अनुसार कोई दूसरा स्थान, जहां आपका भाई जाना पसंद करें।


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अपनी राशि अनुसार पहनें डिजाइनर मंगलसूत्र तो मैरिड लाइफ हो जाएगी खुशहाल


शादीशुदा महिलाओं के लिए ज्वैलरी में सबसे खास मंगलसूत्र होता है। यह सुहाग का प्रतीक और पति की लंबी उम्र व सुरक्षा के लिए पहना जाता है। असल में इसकी पहचान धागे में पिरोए गए बारीक काले दाने जैसे मोतियों की माला से हो जाती है। लेकिन आधुनिकता की बात करें तो फैशन के चलते इसके पेंडेंट और डिजाइन में काफी समय से एक्सपेरिमेंट देखने को मिल रहे हैं। उदाहरण के लिए कई बॉलीवुड एक्ट्रेस भी नए तरह के मंगलसूत्र पहने दिखाई दी हैं।

ट्रेंडी का बढ़ रहा क्रेज
केवल रस्म रिवाज के चलते ही नहीं बल्कि शादी के बाद दुल्हन को मंगलसूत्र पहनने का काफी क्रेज होता है। आजकल ऐसे मंगलसूत्र का क्रेज बढ़ गया है जिन्हें दुल्हन अपनी पसंद के अनुसार डिजाइन करवाती हैं। इनमें पति-पत्नी या केवल पति के नाम का लॉकेट काफी चलन में है। इसके अलावा कई जगहों पर कपल की फोटो वाले मंगलसूत्र काफी चलन में है। डिजाइनर मंगलसूत्र की बात करें तो गोल्ड के अलावा प्लैटिनम और डायमंड से अलग-अलग आकार व डिजाइन में मिलने वाले मंगलसूत्र ट्रेंड में हैं। हाल ही कुछ बॉलीवुड अभिनेत्रियों से मंगलसूत्र के नए डिजाइन चलन में आए हैं। जिसमें खासतौर पर सोनम कपूर और आशका गोरडिया जैसी अभिनेत्रियों ने इस टे्रडिशनल फैशन में कुछ नया ट्राई किया है। ट्रेंड में आजकल ऐसे मंगलसूत्र भी हैं जिन्हें महिलाएं गले में पहनने के बजाय कलाई पर बांध लेती हैं। खासतौर से वर्किंग बाइड इस तरह के विकल्प को अपनाती हैं।

राशि के हिसाब से मंगलसूत्र
हाल ही अभिनेत्री सोनम कपूर ने बिजनेसमैन आनंद अहूजा से शादी रचाई। इस मौके पर उनकी राशि अनुसार डिजाइन हुआ मंगलसूत्र भी चर्चा में रहा। इसमें खास बात यह थी कि इसमें दोनों कपल की राशि चिह्न थे। सोनम के मंगलसूत्र में सबसे बीच में एक हीरा और कुछ काले मोतियों के बाद दाएं व बाएं दोनों के राशि चिह्न थे। इसी के साथ सोनम ने शादी के बाद फैशन लिस्ट में कलाई पर पहना जाने वाला ब्रेसलेटनुमा मंगलसूत्र भी पहना जिसमें काले मोती वाले मंगलसूत्र के अलावा एक चेन भी पहनी थी जिसमें बीच में आंख बनी थी। इससे पहले ब्रेसलेटनुमा मंगलसूत्र को शिल्पा शेल्टी भी पहन चुकी हैं। इसके अलावा डिजाइनर मंगलसूत्र में वी शेप ज्यादा पसंद किए जाते हैं। साथ ही डायमंड और गोल्ड से तैयार इस ज्वैलरी की डिमांड ज्यादा है।

शब्दों को बनवाएं डिजाइनर
टेलीविजन एक्ट्रेस आशका गोरडिया ने भी हाल ही अपने नए तरह के मंगलसूत्र के साथ अपनी फोटो शेयर कर काफी सुर्खियां बटोरी हैं। उनके मंगलसूत्र की खास बात रही है कि काले मोतियों के बीच न तो कोई हीरा था और न ही कोई आकृति। बल्कि उन मोतियों के बीच स्टाइलिश तरीके से घुमावदार त्रिशूल पर सत्यम शिवम सुंदरम लिखा हुआ था और आखिर में डमरू की आकृति बनी हुई थी। इंटरनेट पर भी यह मंगलसूत्र काफी चर्चा में रहा। इसके अलावा कुछ दुल्हन इस तरह के मंगलसूत्र में ओम नम: शिवाय और जय माता दी जैसे स्लोगन भी लिखवा रही हैं। मार्केट में इन दिनों ब्राइड ऑर्डर पर भी इस ज्वैलरी को तैयार करवा रही हैं।


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इंटरनेट पर अब बच्चे कार्टून नहीं, बल्कि सर्च करते हैं ये, आप भी जान कर हैरान हो जाएंगे


बीते एक दशक में ऑनलाइन शॉपिंग ने खरीदारी का तरीका ही बदल कर रख दिया है। यही कारण है कि ये युवाओं को सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। बड़ों के बाद अब इस सूची में बच्चे भी शामिल हो गए हैं। दरअसल, ऑनलाइन शॉपिंग में बच्चों की बढ़ती रुचि को देखते हुए कंपनियां अब उनके अनुसार ऑफर ला रही हैं। ये खरीदारों की एक नई पीढ़ी है जिसे बड़ी रिटेल कंपनियां काफी संजीदगी से ले रही हैं।

स्मार्टफोन की सुलभता और इंटरनेट की सुविधा के चलते बच्चे और किशोर पहले से कहीं ज्यादा ऑनलाइन सर्फिंग करने लगे हैं। रिटेलर्स भी मुनाफा कमाने के लिए नए बाजारों पर अपना ध्यान लगा रहे हैं। ऑनलाइन शॉपिंग ने एक फायदेमंद बाजार की संभावनाओं को सच कर दिखाया है। ऑनलाइन मार्केटिंग के जरिए अब कंपनियां अपने उत्पाद सीधे युवाओं को बेच रही हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि टीवी पर विज्ञापन देकर सामान बेचने के दिन अब लद गए। इसकी बजाय कंपनियां अब स्नैपचैट, यू-ट्यूब और ऐसी ही दूसरी मोबाइल एप्स के जरिए सीधे बच्चों और किशोरों से संवाद कायम कर रही हैं।

स्कूली सत्र होता गोल्डन टाइम
ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों के लिए बच्चों का नया स्कूल सैशन गोल्डन पीरियड से कम नहीं होता। इस समय ये बच्चे सबसे ज्यादा शॉपिंग करते हैं। राष्ट्रीय खुदरा संघ में खुदरा और उपभोक्ता विभाग की निदेशक कैथरीन कुलेन ने कहा कि बच्चे इन दिनों फोन पर जमकर खरीदारी कर रहे हैं जिससे घर का बजट भी प्रभावित हो रहा है। इसलिए बड़े रिटेलर्स भी इन ‘छोटे ग्राहकों’ पर अब विशेष ध्यान दे रहे हंै। क्योंकि ये नन्हे ग्राहक उनके मुनाफे का एक अहम हिस्सा हैं।

बच्चों के लिए हानिकारक
कमर्शियल फ्री चाइल्डहुड कैम्पेन के निदेशक जोश गोलिन का कहना है कि व्यस्क होने के नाते हम विज्ञापनों के जाल से बच सकते हैं। लेकिन बच्चों के लिए ये बुहत मुश्किल है। जो विज्ञापन वे देख रहे हैं उसकी उन्हें समझ नहीं है। ऑफर का लालच देकर कंपनियां सीधे बच्चों के मोबाइल तक पहुंच बना रही हैं। इससे न केवल गोपनीयता के बारे में सवाल खड़े होते हैं बल्कि उन विज्ञापनों का बच्चों पर पडऩे वाले प्रभाव पर भी प्रश्नचिन्ह लगाती है।

एक सर्वे के अनुसार 10-12 साल के अमरीकी बच्चों के पास स्मार्टफोन है। यही नहीं 95 फीसदी बच्चों के पास किशोर होने तक स्मार्टफोन उपलब्ध होगा जो आने वाले समय में ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों के नए खरीददारों के रूझान को बताएगा।


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