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Lunar eclipse 2019: 21 जनवरी को चंद्रग्रहण, इन राशियों को रहना होगा सावधान वरना हो सकता है भारी नुकसान


21 जनवरी को चंद्रग्रहण लगेगा, चंद्रग्रहण पूर्णिमा के दिन पड़ता है और इस बार खग्रास चंद्रगहण 20 जनवरी की रात को लगेगा जोकी 21 जनवरी की सुबह तक रहेगा। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा लेकिन इसके बावजूद इसका प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ग्रहण भारत में दिखाई दे या नहीं दे इसका प्रभाव सभी जीव पर देखने को मिलता है। सूर्य ग्रहण हो या चंद्रग्रहण इसका परिणाम जरुर देखने को मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के बाद स्नान और दान पूण्य का महत्व माना जाता है, इससे सर्वश्रेष्ठ फल की प्राप्ति होती है। लेकिन ग्रहण के बाद गेहूं, धान, चना, मसूर दाल, गुड़, चावल,काला कम्बल, सफेद-गुलाबी वस्त्र, चूड़ा, चीनी, चांदी-स्टील की कटोरी में खीर का दान करने से विशेष फल की प्रप्ति होती है। वहीं पंडित रमाकांत मिश्रा ने बताया की ग्रहण का वैदिक ज्योतिष में अत्यधिक महत्व माना गया है, इसके साथ ही ग्रहण का सभी राशियों पर प्रभाव भी पड़ने वाला है। आइए जानते हैं किस राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा....

chandra grahan 2019

मेष राशि: ग्रहण पड़ने से इस राशि के जातकों के भाग्य में वृद्धि होगी व पराक्रम से भरपूर लाभ मिलेगा। लाभ मिलने के साथ-साथ खर्च भी बढ़ेगा।

वृषभ राशि: ग्रहणकाल के दौरान पेट की समस्या हो सकती है। जितना परिश्रम करेंगे उतना लाभ मिलेगा, धन वृद्धि के योग बन रहे हैं।

मिथुन राशि: ग्रहणकाल के वक्त अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें, तीव्र वाणी से नुकसान झेलना पड़ सकता है। शत्रु एवं रोग से तकलीफ मिल सकती है। दंपत्य में परेशानियां आ सकती है।

कर्क राशि: चंद्रग्रहण आपके लिए कष्टकारी साबित हो सकता है। यह अपके स्वास्थ्य को प्रभावित करेगा। आपको विद्या वृद्धि, मनोबल कमजोर व भाग्य में वृद्धि होगी।

सिंह राशि: ग्रहणकाल के दौरान आपको धन वृद्धि के योग बन रहे हैं। इसके साथ ही वाहन सुख भी प्राप्त होगा। तबीयत खराब हो सकती है सतर्क रहें।

कन्या राशि: चंद्रग्रहण आपके लिए दांपत्य में तकलीफें लेकर आएगा, क्षणिक समय के लिए तनाव हो सकता है। कुलमिलाकर आपके लिए यह समय बहुत ही कष्टकारी साबित होगा।

तुला राशि: आपकी राशि के लिए ग्रहणकाल बहुत ही शुभ रहने वाला है। आर्थिक लाभ प्राप्त होगा और धन, पराक्रम में वृद्धि होगी। शत्रु पर विजय प्राप्त होगी।

वृश्चिक राशि: चंद्रग्रहण आपके लिए शुभ साबित होगा। इस दौरान आपको धन, बुद्धि एवं विद्या में वृद्धि होगी। अपने गुस्से को कंट्रोल करें व वाणी में तीव्रता ना लाएं।

धनु राशि: इस दौरान आपको दाम्पत्य में तनाव या अवरोध हो सकता है। लेकिन धैर्य से काम लें। इसके अलावा पेट व पैर की समस्या हो सकती है। आंतरिक शत्रु बढ़ सकते हैं।

मकर राशि: चंद्रग्रहण के समय आपको दांपत्य में तनाव महसूस होगा। वहीं फिजूल खर्च में वृद्धि होगी। इसके अलावा मन अशांत रहेगा। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही ना बरतें, पैर में कष्ट हो सकता है।

कुंभ राशि: ग्रहणकाल में आपकी आय में वृद्धि होगी साथ ही साथ आपके मान-सम्मान में भी वृद्धि होगी। विद्याध्ययन में अवरोध पैदा हो सकते हैं। रोग एवं शत्रुओं का समना करना पड़ सकता है।

मीन राशि: ग्रहणकाल के दौरान क्रोध में वृद्धि होगी, धैर्य रखें। सम्मान एवं परिश्रम में अवरोध उत्पन्न होगा लेकिन आय में वृद्धि होगी। मानसिक चिंता बनी रहेगी जिसके कारण मन अशांत रहेगा।


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ग्रहणकाल के दौरान गर्भवती महिलाएं अपने पास रखें ये एक चीज़, नहीं पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव


21 जनवरी, सोमवार को साल का पहला चंद्रग्रहण पड़ने वाला है। चंद्रग्रहण से पहले ही जनवरी के पहले सप्ताह में साल का पहला सूर्यग्रहण पड़ा था। जनवरी महीने में यह दूसरा और पूर्ण चंद्रग्रहण पड़ने जा रहा है। जो की साल का पहला चंद्रग्रहण होगा। यह चंद्रग्रहण बहुत ही खास माना जा रहा है क्योंकि यह सुपर ब्लड मून होगा। भारत में चंद्रगहण का दृष्य नहीं है, लेकिन फिर भी इसका असर मनुष्य व सभी जीवों पर पड़ता है। ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों का विशेष ध्यान रखा जाता है। ज्योतिषाचार्यों द्वारा ग्रहण काल के दौरान गर्भवती स्त्रियों को घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जाती है। क्योंकि ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा काफी ज्यादा रहती है, जिससे गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान पहुंच सकता है। आइए जानते हैं गर्भवती महिलाओं को किन सावधानियों को रखना चाहिए....

chandragrahan

ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं इन बातों का रखें ध्यान

1. ग्रहणकाल के दौरान गर्भवती महिलाओं को वैसे तो घर से बाहर निकलना निकलने की अनुमती नहीं दी जाती लेकिन इसके बावजूद यदि बाहर निकलना जरुरी हो तो अपने गर्भ पर चंदन और तुलसी के पत्तों का लेप कर लें। उसके बाद निकलें।

2. ग्रहणकाल में सबसे ज्यादा सावधानी गर्भवती महिलाओं को रखनी चाहिए। इस दौरान गर्भस्थ शिशु पर ग्रहण काल का असर विपरीत पड़ सकता है। इसलिए अपने पास हमेशा नारियल रखना चाहिए। ऐसा करने से गर्भवती महिला पर वायुमंडल से निकलने वाली नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव नहीं पड़ेगा।

3. ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं चाकू, कैंची और सुई का बिल्कुल भी प्रयोग न करें। न ही कोई अन्य कार्य करें। ग्रहण से बचने के लिए सिर्फ भगवान की शुभ आराधना करें।

4. ग्रहणकाल में अन्न, जल ग्रहण नहीं करना चाहिए।

5. ग्रहणकाल के दौरान भगवान का नाम लें इसके आलावा कोई दूसरा कार्य ना करें।


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बुध का मकर राशि में प्रवेश, 3 राशि वालों के प्रभाव में होगी जबरदस्त वृद्धि


ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि का कारक ग्रह माना जाता है। कुंडली में बुध की स्थिति बहुत महत्वपूर्ण होती है और ज्योतिष में ग्रहों की चाल राशि में बहुत ही बदलाव लाती है। ग्रहों का बदलाव राशियों में जीवन में कई बदलाव लाता है। वहीं बुध ग्रह का राशि परिवर्तन इस माह यानी 20 जनवरी को होने जा रहा है। पंडित रमाकांत मिश्रा के अनुसार बुध ग्रह 20 जनवरी को रात 8:54 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस राशि में बुध 7 फरवरी तक गोचर करेंगे। बुध के इस राशि परिवर्तन से सभी राशियों में भारी उथल-पथल मच जाएगी। कुछ राशियों के लिए यह परिवर्तन बहुत ही अच्छा साबित होगा। वहीं कुछ राशियों के लिए सामान्य तो कुछ के लिए बुरा रहेगा। आइए जानते हैं किन राशियों के दिन पलटने वाले हैं और मालामाल होने वाले हैं....

rashi parivartan

मेष राशि
इस राशि में बुध 10वें भाव में गोचर करेंगे। इससे आपका कार्यक्षेत्र प्रभावित होगा और आपके प्रभाव में वृद्धि होगी। नौकरी में अधिकारी आपके काम की प्रशंसा करेंगे। कुलमिलाकर आपके कार्यक्षेत्र के लिए शुभ साबित होगा। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। साथी ही व्यापार में अत्यधिक लाभ प्राप्त होगा।

वृषभ राशि
आपकी राशि में बुध 9वें भाव में गोचर करेगा, जिससे आपका आर्थिक पक्ष प्रभावित होगा। इस गोचर से आपको नौकरी में प्रमोशन मिलेगा। इससे अपने कार्यस्थल पर सहयोगियों से पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा। व्यापार में जरुर ही लाभ प्राप्त होगा। दांपत्य जीवन में आपसी प्रेम और सामंजस्य बढ़ेगा।

मिथुन राशि
आपकी राशि में बुध 8वें भाव में गोचर करेगा। यह गोचर आपकी सेहत को प्रभावित करेगा, जिसके कारण आपको स्वास्थ्य संबंधित दिक्कतें आ सकती है। आर्थिक मामलों में लाभ प्राप्त होगा और शुभ समाचार मिल सकते हैं। जीवनसाथी के साथ आपके रिश्ते और अधिक मजबूत और मधुर होंगे।

कर्क राशि
आपकी राशि में बुध 7वें भाव में गोचर करेगा। यह गोचर आपके लिए सामान्य रहेगा। इस दौरान साझेदारी के काम में प्रगति होगी, नई साझेदारी भी लाभप्रद रहेगी। विदेश से कोई शुभ समाचार मिल सकता है। जीवनसाथी का पूर्ण सहयोग मिलेगा।

सिंह राशि
आपकी राशि में बुध 6वें भाव में गोचर करेगा। इससे आपके कार्य में उन्नति के योग बन रहे हैं। इसके साथ ही आपको कार्य के अनुसार परिणाम प्राप्त होंगे। धन का निवेश संभलकर करें, नुकसान की आशंका है। सेहत से संबंधित समस्याएं भी आ सकती है। इस दौरान आप कम और सोच-समझकर बोलें।

कन्या राशि
आपकी राशि में बुध 5वें भाव में गेचर करेंगे। बुध का यह गोचर आपके लिए लाभकारी साबित होगा। सबसे ज्यादा इस राशि के विद्यार्थियों के लिए लाभकारी रहेगा। विदेश जानें के पूरे योग बन रहे हैं। कन्या राशि वे जातकों के लिए यह अच्छा समय है। कार्यक्षेत्र में उन्नति के अवसर मिलेंगे एवं धनलाभ मिल सकता है।

तुला राशि
आपकी राशि में बुध 4थे भाव में गोचर करेगा। यह गोचर आपके लिए बहुत शुभ साबित होगा। इस दौरान आपको समाज में मान-सम्मान प्राप्त होगा साथ ही आपका भाग्य में भी बदलाव होगा। विदेश यात्रा हो सकती है। वाणी और क्रोध पर संयम रखने की जरुरत है वरना नुकसान झेलना पड़ सकता है। घर या कार्यक्षेत्र में कुछ बदलाव हो सकता है।

वृश्चिक राशि
आपकी राशि में बुध 3रे भाव में गोचर करेगा। छोटे भाई-बहनों को लेकर आपकी चिंता बढ़ सकती है। व्यापार में प्रगति होगी। आप लाभ के लिए जोखिम उठाने के लिए भी तैयार रहेंगे। आपके प्रयास सफल होंगे, कामयाबी मिलेगी।

मकर राशि
आपकी राशि में बुध का गोचर होने वाला है। इस गोचर के दौरान आपको सामाजिक व अन्य जगहों पर मान-सम्मान और पद प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। आपके दुश्मनों से आपकी जीत हासिल होगी। कार्यक्षेत्र में प्रमोशन, वेतन में वृद्धि, अधिकार और प्रभाव क्षेत्र में इजाफा होगा। कोर्ट-कचहरी के मामलों में के फैसले आपके पक्ष में आ सकते हैं।

कुंभ राशि
आपकी राशि में बुध 12वें भाव में गोचर करेंगे। यह समय विघार्थियों के लिए अनुकूल रहेगा, सफलता मिल सकती है। शुभ और समाचार परिणाम आपको प्राप्त होंगे। परिवार का पूरा सहयोग मिलेगा। आपको अचानक लाभ होगा। मन में नए विचार आ सकते हैं। आमदनी में वृद्धि की संभावना नजर आ रही है।

मीन राशि
आपकी राशि में बुध 11वें भाव में गोचर करेंगे। इस दौरान आपको पैसों से संबंधित हर फैसला सोच-विचार करना होगा। नया घर या वाहन खरीद सकते हैं। जीवनसाथी के साथ ज्यादा वक्त गुजार पाएंगे। इस समय आप एक दूसरे के साथ एख बहुमूल्य समय व्यतीत कर पाएंगे। कारोबार में प्रगति होगी।


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यदि अचानक आपकी जेब से गिर जाए पैसे, तो समझ लें आपके साथ होने वाला है ये


हिन्दू शास्त्रों के अनुसार कुछ ऐसे संकेत होते हैं जो हमारे कार्य के बारे में हमें शुभ व अशुभ संकेत देते हैं। शास्त्रों में अचानक हुई चीज़ें यदि कार्य की शुरुआत में घटित होती है तो वे हमारे कार्यों के सफलहोने व असफल होने की ओर ईशारा करती है। शास्त्रों में वास्तुशास्त्र बहुत ही महत्वपूर्ण और प्रमुख शास्त्र है। आजकल सभी लोग वास्तु को प्रमुख मानते हैं, घर बनवाने से पहले सभी वास्तु सलाहकार से सलाह जरुर लेते हैं, इसके अलावा कौन सी चीज़ कहां रखनी है किसका शुभ असर पड़ेगा और किसका नहीं यह भी वास्तु के अनुसार जाना जा सकता है। लेकिन क्या आपको पता है वास्तुशास्त्र में कुछ शुभ संकेत होते हैं, जिनके अचानक व्यक्ति के साथ होना बहुत ही शुभ माना जाता है। तो आइए जानते हैं कौन से हैं वो शुभ संकेत...

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1. वास्तुशास्त्र के अनुसार माना जाता है की यदि कोई भी व्यक्ति किसी काम के लिए घर से बाहर निकल रहा है और अचानक उसकी जेब से पैसे गिर जाते हैं, तो यह बहुत ही शुभ शगुन होता है। कहा जाता है की ऐसा होने का मतलब है की आप जिस भी किसी काम के लिए जा रहे हैं वो काम पूरा हो जाएगा। शुभ कार्य पर जाते समय जेब या हाथ से पैसों का गिरना शुभ माना जाता है।

2. वास्तुशास्त्र के अनुसार यदि कभी कपड़े बदलते समय जेब से पैसे गिर जाएं तो, यह भी बहुत ही शुभ संकेत होता है। क्योंकि कपड़े बदलते समय जेब से पैसे गिरना तरक्की का संकेत माना जाता है। माना जाता है कि आने वाले समय में व्यक्ति को रोजगार या व्यवसाय में तरक्की मिलने वाली है।

3. वास्तुशास्त्र के अनुसार माना जाता है की किसी भी व्यक्ति को पैसे देते समय यदि आपके हाथ से पैसे गिर जाते हैं तो यह धन वृद्धि का संकेत होता है। वास्तुशास्त्र में अच्छा शगुन माना जाता है।


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21 जनवरी को साल का पहला चंद्रग्रहण, इन जगहों पर दिखेगा इसका नज़ारा


साल 2019 का पहला चंद्रग्रहण 21 जनवरी सोमवार को पड़ने वाला है। इससे पहले सूर्य ग्रहण जनवरी के पहले हफ्ते में पड़ चुका है। वहीं जनवरी महीने में यह दूसरा और पूर्ण चंद्रग्रहण पड़ने जा रहा है। जो की साल का पहला चंद्रग्रहण होगा। यह चंद्रग्रहण बहुत ही खास माना जा रहा है क्योंकि यह सुपर ब्लड मून होगा। वैज्ञनिक दृष्टि से इस दिन चंद्रमा बाकी दिनों की अपेक्षा 14 फीसदी बड़ा और 30 फीसदी चमकीला दिखाई देता है और चंद्रमा का रंग लाल भी होता है।

कब से कब तक है चन्द्र ग्रहण
यह चंद्र ग्रहण पूर्ण चंद्र ग्रहण है। जो कि 21 जनवरी को लग रहा है। यह चंद्र ग्रहण बारतीय समयानुसार रात्रि 09:03:54 से 12:20:39 बजे तक रहेगा।

 

chandragrahan 2019

कहां-कहां दिखेगा चंद्रग्रहण
खास बात ये है कि चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। 21 जनवरी को पड़ने वाला चंद्रग्रहण न्यूयार्क, लॉस एंजिलेस, लंदन, शिकागो, एथेंस, पेरिस, मास्को, ब्रेसेल्स और वाशिंगटन डीसी, अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी-दक्षिणी अमेरिका और मध्य प्रशांत में ही नज़र आएगा।

इन लोगों पर पड़ेगा चंद्रग्रहण का असर
इस चंद्र ग्रहण का प्रभाव पुष्य नक्षत्र और कर्क राशि के लोगों पर पड़ने वाला है। इसलिए इस चंद्र ग्रहण के बुरे असर को कम करने के लिए कर्क राशि और पुष्य नक्षत्र में जन्में लोगों को सावधानी बरतनी होगी। साथ ही हम आपको ये भी बता दें कि ये चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा परंतु मध्य प्रशांत क्षेत्र, उत्तरी/दक्षिणी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका में जरूर नजर आएगा।


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kumbh 2019: सबसे कठिन है खूनी नागा साधु बनने की प्रक्रिया, रातभर ऐसे होती है परीक्षा


नागा साधुओं की दुनिया बहुत ही रहस्यमयी होती है। इनके बारे जानने की उत्सुकता सभी लोगों के मन में हमेशा होती है। ये सवाल तो हर किसी के मन में होता है की आखिर नागा साधु कैसे बनते हैं उनका जीवन कैसा होता है। यही सवाल सभी के मन में जिज्ञासा पैदा करते हैं। तो आपको बता दें की नागा साधु दो प्रकार के होते हैं, एक साधू बर्फानी नागा साधु कहलाते हैं और एक साधु खूनी नागा साधु होते हैं। दोनों में ही बहुत अंतर होता है। चाहे इनकी दिक्षा की बात हो या फिर इनकी अग्निपरीक्षा की बात हो। आइए जानते हैं नागा साधुओं से जुड़ी कुछ खास बातें...

kumbh 2019 khooni naga sadhu

यहां होती है नागा साधुओं की दीक्षा

परंपरा अनुसार नागा साधुओं को अखाड़े में शामिल करने के पहले दिक्षा दि जाती है और दिक्षा सिर्फ हरिद्वार और उज्जैन में आयोजित होने वाले कुंभ में ही होती है। लेकिन किसकी दिक्षा उज्जैन में होगी और किसकी हरिद्वार में यह तो अखाड़ा ही सुनिश्चित करता है। अखाड़ा अपने स्तर से जांच करता है जिसके अनुसार यह तय किया जाता है की व्यक्ति की हरिद्वार में दीक्षा होगी या उज्जैन में, प्रक्रिया अनुसार हरिद्वार में दीक्षा लेने वाले साधुओं को बर्फानी नागा साधु कहा जाता है और उज्जैन में दीक्षा लेने वाले साधुओं को खूनी साधु कहा जाता है। खूनी नागा साधु अपने साथ अस्त्र व शस्त्र लिए होते हैं। वे साधु सैनिक की तरह धर्म की रक्षा करता है और जरुरत पड़ने पर धर्म की रक्षा के लिए खून भी बहा सकते हैं।

khooni naga sadhu

अखाड़ों में बनाए जाते हैं 5 गुरु

दीक्षा के साथ ही अखाड़ों के भीतर उनके 5 गुरु बनाए जाते हैं। उनको भस्‍म, भगवा और रुद्राक्ष जैसी 5 चीजें धारण करने को दी जाती हैं। उन्‍हें संन्‍यासी के तौर पर जीवनयापन करने की शपथ दिलाई जाती है। ब्रह्मचर्य की परीक्षा के साथ ही व्‍यक्ति का मुंडन कराना होता है। और उसे 108 बार क्षिप्रा नदी में डुबकी लगानी होती है। इसके बाद खूनी नागा साधु बनने की प्रक्रिया में उन्हें रातभर ओम नम: शिवाय का जप करना होता है। जप के बाद अखाड़े के महामंडलेश्‍वर विजया हवन करवाते हैं और जप के बाद दोबारा उन्हें क्षिप्रा नदी में 108 डुबकियां लगवाई जाती हैं। स्‍नान के बाद अखाड़े के ध्‍वज के नीचे उससे दंडी त्‍याग करवाया जाता है। इस प्रक्रिया में वह नागा साधु बन जाते हैं।


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कुंभ में जा रहे हैं तो स्नान के बाद इस वृक्ष के जरूर करें दर्शन, वरना नहीं मिलेगा पुण्य


प्रयाग में कुंभ मेला लगने वाला है इसी साथ मकर संक्रांति के दिन पहला शाही स्नान होगा। शाही स्नान कर पुण्य पाने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं सिर्फ स्नान से आपको पूरा फल प्राप्त नहीं होता है। जी हां, मान्यताओं के अनुसार स्नान के बाद वृक्ष के दर्शन करने से पूर्ण फल प्राप्त होता है। पौराणिक कथाओं के अऩुसार माना जाता है की प्रयाग में स्नान के बाद जब तक अक्षय वट वृक्ष का पूजन व दर्शन नहीं किए जाते तब तक व्यक्ति को स्नान का लाभ प्राप्त नहीं होता। यह वृक्ष मुगल सम्राट अकबर के किले के अंदर बने पातालपुरी मंदिर में स्थित है। कहा जाता है की यह अक्षय वट वृक्ष मंदिर का सबसे पुराना मंदिर है। हिंदू धर्म के अलावा अक्षय वट का संबंध जैन और बौद्ध धर्म में भी माना जाता है। क्योंकि बुद्ध धर्म के अनुसार भगवान बुद्ध ने कैलाश पर्वत के निकट प्रयाग के इसी अक्षय वट का एक बीज बोया था। वहीं जैन धर्म की मान्यताओं के अऩुसार उनके तीर्थंकर ऋषभदेव ने अक्षय वट के नीचे तपस्या की थी। इसलिए इस स्थान व वृक्ष का बहुत महत्व माना जाता है।

 

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किंवदंती है कि भगवान राम और सीता ने वन जाते समय इस वट वृक्ष के नीचे तीन रात तक निवास किया था। अकबर के किले के अंदर स्थित पातालपुरी मंदिर में अक्षय वट के अलावा 43 देवी-देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित हैं। मुगलों ने एक बार इस वृक्ष को जला दिया था, क्योंकि लोग इस वृक्ष की पूजा करने किले में आने लगे थे, जो मुगलों को पसंद नहीं था। इस किले में एक सरस्वती कूप बना हुआ है, जिसके लिए कहा जाता है की सरस्वती नदी यही से जाकर गंगा और यमुना से मिलती थी। वृक्ष के पास ही एक तालाब भी था जिसमें लोग मोक्ष प्राप्ति के लिए यहां वृक्ष पर चढ़कर तालाब में छलांग लगा देते थे। फिलहाल यह जगह बंद कर दी गई है। कहा जाता है कि मान्यता है कि इस वृक्ष के नीचे जो भी इच्छा व्यक्त की जाती थी वो पूरी होती थी।

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एक अन्य मान्यता के अऩुसार
पौराणिक कथाओं के अनुसार जब एक ऋषि ने भगवान नारायण से ईश्वरीय शक्ति दिखाने के लिए कहा था। तब ऋषि ने कुछ देर के लिए पूरे संसार को जलमग्न कर दिया थ, हालांकि थोड़ी देर बाद ही उन्होंने पानी को गायब भी कर दिया था। लेकिन इस दौरान सभी चीज़ें पानी में समा गई थी, सिर्फ वट वृक्ष का ऊपरी भाग दिखाई दे रहा था। इसलिए इस वृक्ष का बहुत महत्व माना जाता है। कहा जाता है की प्रयाग में स्नान करने के बाद इस वृक्ष के दर्शन जरुर करना चाहिए। वरना पूण्यफल की प्राप्ति नहीं होती है।


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शनिवार के दिन करें रोटी का यह छोटा उपाय, शनि दोषों से मिलेगी मुक्ति


ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यूं तो हर ग्रह की महादशा और अंतर्दशा राशियों पर चलती रहती है। जिसके उच्छे व बुरे दोनों परिणाम देखने को मिलते हैं व्यक्ति के जीवन में, लेकिन लोगों को अगर किसी ग्रह की महादशा से सबसे ज्यादा डर लगता है तो वह है शनि की महादशा। शनिदेव को न्याय के देवता कहा जाता है, माना जाता है की वे मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। जिन लोगों की कुंडली में शनि शुभ दृष्टि नहीं रखते उन लोगों को महादशा के दौरान बहुत सी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। परंतु ज्योतिषशास्त्र में व्यक्ति की सभी परेशानियों का हर भी होता है ये बात भी सही है। तो यदि आप भी शनि दोषों व महादशा से मुक्ति पाना चाहते हैं तो ये उपाय कर सकते हैं। आइए जानते हैं....

shani upay

1. शनि दोषों से मुक्ति पाने के लिए
जीवन में शनि पीड़ा है या फिर राहु-केतु की अड़चनें हो तो रोटी का यह उपाय आपके लिए कारगार साबित हो सकता है। इन सभी ग्रहों की अशुभता को दूर करने के लिए रात के समय बनाई जाने वाली अंतिम रोटी पर सरसों का तेल लगाकर काले कुत्ते को खिला दें। आपके बिगड़े काम बनने लगेंगे।

2. करियर में आ रही बाधाएं दूर करने के लिए
यदि आपके करियर में आपको रूकावटों का सामना करना पड़ रहा है तो आप यह उपाय गुरुवार और रविवार को कर सकते हैं। कटोरदान की नीचे से तीसरे नंबर की रोटी लें, तेल की कटोरी में अपनी बीच वाली अंगुली और तर्जनी यानी पास वाली बड़ी अंगुली को एक साथ डुबोएं अब उस रोटी पर दोनों अंगुलियों से एक साथ लाइन खींचें। अब इस रोटी को बिना कुछ बोले दो रंग के कुत्ते को डाल दें।

3. सुख-शांति व समृद्धि के लिए
घर में सुख-शांति के लिए कुछ आसान उपाय करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। इसके लिए आपको हर दिन प्रथम रोटी के चार बराबर भाग करें और इन चारों भागों को एक-एक कर क्रमश: गाय को, दूसरा काले कुत्ते को, तीसरा कौए को और चौथा चौराहे पर रख दें। ऐसा करने से घर में सुख शांति बनी रहेगी और समृद्धि आएगी।


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मकर संक्रांति 2019: भीष्म पितामह ने देह त्यागने के लिए क्यों चुना था मकर संक्रांति का दिन, जानें इस दिन का महत्व


हिंदू धर्म में कई त्यौहार मनाए जाते हैं। उन सभी विशेष त्यौहारों में से एक है मकर संक्रांति, जो की हर साल जनवरी माह में मनाया जाता है। इस त्यौहार को भारत के हर राज्य में अपने अलग अंदाज और अलग परंपरा के साथ मनाते हैं। कहीं इसे मकर संक्रांति कहा जाता है तो कहीं लोहड़ी, कहीं पोंगल और कहीं इसे अत्तरायन कहकर मनाया जाता है। इस बार यह पर्व देशभर में 15 जनवरी को मनाया जाएगा। मान्यताओं के अनुसार इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता हैं जिसे मकर संक्रांति कहा जाता है। हिंदू धर्म में इस दिन से सभी शुभ कार्य व मांगलिक कार्य शुरु हो जाते हैं। इसलिए इस दिन दान, स्नान और तिल, गुड़ का विशेष महत्व माना जाता है।

makar sankranti 2019

भीष्म पितामह ने इसलिए चुना था मकर संक्रांति का दिन

यह बात बहुत कम लोग जानते हैं की महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति का ही दिन चुना था। क्योंकी मकर संक्रांति का ही वह दिन था जब गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं। शास्त्रों में यह समय देवताओं का दिन दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि कहा जाता है। मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने से गरम मौसम की शुरुआत होती है। यही कारण है की संक्रांति मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस दिन दान पूण्य के साथ-साथ तिल गुड का सेवन किया जाता है और इसके साथ ही जनेऊ भी धारण करने की भी परंपरा है। तथा जो भी लोग जरुरत मंद हो उन्हे भोजन अवश्य कराना चाहिए और भोजन कराने के बाद कुछ चीज दान करनी चाहिए।


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Kumbh 2019: कुंभ की शान है ये 13 अखाड़े, अपने इष्टदेवताओं के साथ लगाते हैं आस्था की डुबकी


विश्व के सबसे बड़े धार्मिक मेले कुंभ का आयोजन देश के 4 प्रमुख शहरों हरिद्वार, प्रयागराज, नासिक और उज्जैन में किया जाता है। इन शहरों में प्रत्येक 12 सालों में विशेष ज्योतिषीय योग बनने पर कुंभ मेला लगता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार देवासुर संग्राम के समय इन 4 स्थानों पर ही अमृत की बूंदे गिरी थीं। आस्था के इस मेले में आपको कहीं साधु भव्य पंडाल में, तो कहीं खुले आसमान में धूनी लगाए साधना में लीन दिखाई देंगे। यह कुंभ दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला कहलाता है। इससे अच्छा धार्मिक व आध्यात्मिक मेला आपको कहीं नहीं मिल सकता। कुंभ में पवित्र डुबकी लगाने तीर्थयात्रियों के साथ-साथ कई साधू-संत भी आते हैं और आनंद तो तब आता है जब डुबकी लगाने पहुंचती है शंकराचार्य की सेना जो की अपने आराध्य के साथ पहुंचती है। कहते हैं ये सेना साधू-संतों के 13 अखाड़े अपने-अपने इष्टदेवताओं के साथ डुबकी लगाते हैं। आइए जानते हैं साधू-संतों के 13 अखाड़ों के बारे में और कौन है इनमें सबसे पड़ा अखाड़ा...

Prayag Kumbh Mela 2019

शैव संन्यासी संप्रदाय के 7 अखाड़े

1. श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी- दारागंज प्रयाग (उत्तर प्रदेश)
महानिर्वाणी अखाड़े में लगभग 6,000 साधु हैं। इनके इष्टदेव कपिल महामुनि हैं।

2. श्री पंच अटल अखाड़ा- चैक हनुमान, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
अटल अखाड़े में लगभग 700 साधुओं की संख्या है। इस अखाड़े के इष्टदेव आदि गणेश हैं।

3. श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी- दारागंज, प्रयाग (उत्तर प्रदेश)
निरंजनी अखाड़े में लगभग 10,000 साधू हैं। जिनके इष्टदेव कार्तिकेय भगवान हैं।

4. श्री तपोनिधि आनंद अखाड़ा पंचायती- त्रंब्यकेश्वर, नासिक (महाराष्ट्र)
आनंद अखाड़े के इष्टदेव सूर्य देवता है।

5. श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा- बाबा हनुमान घाट, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
कुंभ मेले में जूना अखाड़े सबसे बड़ा अखाड़ा है, इसमें तकरीबन चार लाख साधुओं शामिल हैं। इस अखाड़े के इष्टदेव दत्तात्रेय हैं।

6. श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा- दशाश्वमेघ घाट, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
इस अखाड़े में करीब 12,000 साधू हैं। अखाड़े के इष्टदेव श्री गणेश भगवान हैं।

7. श्री पंचदशनाम पंच अग्नि अखाड़ा- गिरीनगर, भवनाथ, जूनागढ़ (गुजरात)
इस अखाड़े में करीब 3,000 हजार साधू हैं। ये इष्टदेव के रूप में माता गायत्री एवं अग्नि की पूजा करते हैं।

बैरागी वैष्णव संप्रदाय के 3 अखाड़े

8. श्री दिगंबर अनी अखाड़ा- शामलाजी खाकचौक मंदिर, सांभर कांथा (गुजरात)
इस अखाड़े के इष्टदेव बालानंद स्वामी हैं। श्री दिगंबर अखाड़े में महिला संत नहीं होती हैं। इस अखाड़े के साधु इष्टदेव बालानंद स्वामी को पूजते हैं।

9. श्री निर्वानी आनी अखाड़ा- हनुमान गादी, अयोध्या (उत्तर प्रदेश)
इस अखाड़े के साधू उर्ध्वपुंड तिलक लगाते है। इस अखाड़े के इष्ट देवता हनुमान जी हैं।

10. श्री पंच निर्मोही अनी अखाड़ा- धीर समीर मंदिर बंसीवट, वृंदावन, मथुरा (उत्तर प्रदेश)
इस अखाड़े में लगभग 15 हजार साधु हैं। इस अखाड़े के इष्टदेवता हनुमान जी हैं।

उदासीन संप्रदाय के 3 अखाड़े

11. श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा- कृष्णनगर, कीटगंज, प्रयाग (उत्तर प्रदेश)
इस अखाड़े में करीब 20,000 साधु हैं। जो की इष्टदेव के रुप में पंचदेव (गोलासाहिब) को पूजते हैं।

12. श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन- कनखल, हरिद्वार (उत्तराखंड)
अखाड़े में करीब 5,000 साधु हैं और अखाड़े के साधु इष्टदेव के रुप में पंचदेव की पूजा करते हैं।

13. श्री निर्मल पंचायती अखाड़ा- कनखल, हरिद्वार (उत्तराखंड)
इस अखाड़े के साधू गुरूग्रंथ् साहिब की पूजा करते हैं। इस अखाड़े की स्थापना गुरू गोविंद जी के सहयोगी वीरसिंह जी ने की थी


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बुधवार के दिन भगवान कुबेर की पूजा कर बोल दें ये शब्द, धन धान्य से भर जाएगा भंडार


बहुत सारा पैसा, सुख शांति और खुशहाली सब लोग चाहते हैं। लेकिन कभी कभी हमारे भाग्य में वो सब कुछ नहीं होता जो हम चाहते हैं। कई बार हमारी इच्छाएं अधूरी भी रह जाती है। इस सब के कई कारण होते हैं। लेकिन इनके उपाय भी जरुर होते हैं। भगवान की पूजा-पाठ और उनकी आराधना तो हम करते ही है, लेकिन यदि पूजा सही दिन या भगवान को समर्पित दिन की जाए तो बहुत ही अच्छा होता है। जैसे श्री गणेश जी की आराधना के लिए बुधवार का दिन बहुत अच्छा माना जाता है। इसके साथ ही यदि आपको धन संबंधित कोई परेशानी है तो आप इस दिन गणेश जी के साथ-साथ कुबेर की पूजा भी करें। जी हां, क्योंकि गणेश जी रिद्धि-सिद्धि प्रदान करते हैं तो कुबेर जी धन के देवता है। बुधवार के दिन इन्हें प्रसन्न करने के लिए पूजा करने के बाद दो शब्द बोलने से कुबेर जल्दी प्रसन्न होते हैं। तो आइए जानते हैं कुबेर जी के सामने कौन से शब्द बोलना चाहिए।

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माना जाता है की जिस किसी व्यक्ति को भगवान कुबेर की कृपा प्राप्त हो जाती है उसे कभी भी धन संबंधि परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है। इसलिए भगवान कुबेर की कृपा प्राप्त करने के लिए उनके सामने एक मंत्र बोलने से पैसों से संबंधित परेशानियां हल हो जाती है। इस मंत्र का वर्णन रावण संहिता में भी मिलता है। लेकिन मंत्र का जाप आपको पूर्ण रुप से निश्छल होकर ही करना होगा। इसके लिए आपका मन शुद्ध होना चाहिए और आपके मन में पूरी श्रृद्धा होनी चाहिए। यदि आप अपने मन में छल, कपट, क्रोध लेकर जप करेंगे तो यह आपके लिए कोई फल प्राप्ति नहीं होगी। क्योंकि इन अवगुणों के होने से ये मंत्र कारगर सिद्ध नहीं होता है। आइए जानते हैं कुबेर मंत्र...

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवाणाय, धन धन्याधिपतये।
धन धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा ।।

ध्यान रखें की जब भी आप इस मंत्र का जप करेंगे उस वक्त धन लक्ष्मी कौड़ी को अपने पास रखें, इस मंत्र का नियमित रूप से तीन माह तक जाप करें और तीन माह के जाप के बाद धन लक्ष्मी कौड़ी को अपने तिजोरी में रख दें। घर में पैसों की तंगी से छुटकारा जरुर मिलेगा।


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मकर संक्रांति 2019: मकर संक्रांति पर इन 4 राशियों पर रहेगी सूर्यदेव की नज़र, जानें क्या होगा इसका असर


मकर संक्रांति सूर्य देवता को समर्पित पर्व होता है। इस दिन सूर्य गोचर अनुसार मकर राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने से अन्य सभी राशियों पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। इस साल मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। पंडित रमाकांत मिश्रा बताते हैं की वैसे तो मकर संक्रांति 14 जनवरी शाम 7 बजकर 50 मिनट से शुरू हो जाएगी क्योंकि इस समय सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर लेंगे। लेकिन इस बार ग्रहों की स्थिति कुछ अलग बनी हुई है जिसके अनुसार मकर राशि में केतु बैठे हुए हैं और वहीं पर सूर्य का गोचर होगा। ज्योतिष के अनुसार माना गया है की सूर्य और केतु आपस में शत्रु ग्रह हैं। इस स्थिति में कुछ राशियों पर इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा और कुछ के लिए शुभ रहेगा। तो आइए जानते हैं किन 4 राशियों पर सूर्य की नज़र पड़ने वाली है और उसका क्या असर पड़ेगा।

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मेष राशि
इस राशि के जातकों के लिए सूर्य उनके दसवें घर में गोचर करेगा। सूर्य के इस गोचर से आपको नौकरी में मान प्रतिष्ठा प्राप्त होगी, वही व्यवसाय में अत्यधिक धन लाभ मिलेगा। इसके अलावा आपको समाज में मान-सम्मान प्राप्त होगा। सूर्य से लगातार प्रगति, वरचस्व और अत्यधिक लाभ प्राप्त करने के लिए पिता और वरिष्ठजनों से मेलजोल बनाकर रखना होगा।

वृषभ राशि
इस राशि के जातकों के लिए सूर्य का गोचर नौंवे भाव में गोचर करेगा। सूर्य के इस गोचर से व्यक्ति को सुख-समृद्धि और संपन्नता प्राप्त होगी। यह गोचर आपकी राशि के लिए बहुत ही शुभ रहने वाला है, इस दौरान आपको हर क्षेत्र में अपार सफलता मिलेगी। अगर आप नया वाहन लेने का मन बना रहे हैं तो यह समय आपके लिए उत्तम है। आपका भाग्य आपका पूरा साथ देगा और आपको मेहनत का पूरा फल मिलेगा।

मिथुन राशि
इस राशि में सूर्य आपके अष्टम भाव में गोचर करने जा रहे हैं। इस परिवर्तन में वजह से आपका पराक्रम भंग हो सकता है और साथ ही यह मुमकिन है कि भाई-बहनों के साथ कुछ मनमुटाव की स्थिति आ जाए। दांपत्य जीवन में थोड़ी कड़वाहट घुल सकती है।

कन्या राशि
इस राशि में सूर्य का गोचर बहुत अच्छा साबित होगा। इस समय आपको सभी कार्यों में सफलता मिलने की संभावना है। शिक्षा और प्रतियोगिता जैसे क्षेत्रों में सफलता के पूर्ण योग बने हुए हैं, आप जिन कार्यों को अपने हाथ में लेंगे, वे सभी समय पर पूर्ण हो जाएंगे। समाज के प्रतिष्ठित लोगों के साथ आपके अच्छे संबंध बनेंगे।


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यदि आपके घर में भी नहीं पहुंच पाता सूर्यदेव का प्रकाश, तो करें ये उपाय


साक्षात भगवान के रुप में सूर्यदेव ही एकमात्र देवता है, सूर्यदेव के हम प्रत्यक्ष दर्शन कर सकते हैं। यह बात तो सब जानते हैं की सूर्य के बिना मानव जीवन का कोई अस्तित्व नहीं है। शास्त्रों के अनुसार माना जाता है की सूर्य को जल चढ़ाने से जीवन में सकारात्मकता आती है और पॉजिटिव एनर्जी मिलती है। सूर्य की किरणें मनुष्य को विटामिन डी के साथ-साथ रोगों से लड़ने की क्षमता भी प्रदान करता है। इसके अलावा ज्योतिष शास्त्र में भी सूर्य ग्रह बहुत जरुरी होते हैं। यदि किसी कुंडली में अशुभ हैं तो वह व्यक्ति की तरक्की में बाधाएं उत्पन्न करता है। इसलिए सूर्य ग्रह को प्रसन्न करने के लिए लोग कई तरह के उपाय करते हैं। जिनमें सबसे असरदार उपाय माना जाता है। प्रातःसूर्योदय होने के बाद सूर्य को जल चढ़ाना। लेकिन आजकल के घर या फ्लैट ऐसे होते हैं, जिनमें धूप या सूर्य की किरणें ना पहुंच पाती। इसके लिए ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कुछ उपाय बताए गए हैं। जिन लोगों के घर में सूर्य की किरणें नहीं पहुंच पाती वो ये उपाय कर सकते हैं....

 

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1. घर की पूर्व दिशा में सूर्यदेव की सात घोड़ों के रथ पर सवार फोटो लगाना चाहिए। इससे घर में सकारात्मकता बनी रहती है।

2. सूर्य की प्रतिमा पढ़ने वाले बच्चों के कक्ष में रखने से बच्चे की एकाग्रता प्रबल होती है।

3. वहीं रसोई घर में तांबे की सूर्यदेव की प्रतिमा लगाने से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।

4. घर के मंदिर में तांबे की सूर्य प्रतिमा लगाने से घर-परिवार पर सूर्यदेव की कृपा बनी रहती है।

5. जिन घरों में सूर्यदेव का प्रकाश ठीक से नहीं पहुंच पाता है, वहां सूर्यदेव की तांबे की प्रतिमा लगानी चाहिए।

6. घर में जहां कीमती वस्तुएं रखी हों, वहां तांबे की सूर्य प्रतिमा लगाने से कभी पैसों की कमी नहीं होती।


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एक छोटी सी कलम बन सकती है आपकी आर्थिक समस्या का कारण, जानिए कैसे


शास्त्रों के अनुसार कुछ चीज़ों का करना हमारी आर्थिक परेशानियों का कारण बन जाती है। हर कई बार जाने-अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं जो हमारे लिये दुर्भाग्य, मानसिक अशांति और पैसों की तंगी लाती है। हांलाकि हम ये सब कुछ सोच समझकर नहीं करते लेकिन फिर भी हम वो गलतियां कर देते हैं। जैसे मानव आदत हो गई है की जरुरत पड़ने पर किसी की मदद लेना और हम जरुरत पड़ने पर किसी दूसरे की चीज़ों का इस्तेमाल कर लेते हैं। लेकिन क्या आपको पता है दूसरों से ली हुई कुछ चीज़ें हमें आर्थित संकटों में डाल सकती है। जी हां, वास्तु शास्त्र के अऩुसार दूसरों की चीज़ों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। जिनमें से 6 चीजों को तो गलती से भी इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए। क्योंकि यही आपकी आर्थिक, मानसिक और बुरे समय का कारण बन सकती है। तो आइए जानते हैं किन 6 चीज़ों का भूलकर भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

 

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1. यदि आप किसी दूसरे व्यक्ति का इस्तेमाल करते हैं तो यह बात हमेशा याद रखें की भूल से भी इसका इस्तमाल ना करें, क्योंकि वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा करने से व्यक्ति को पैसों का नुकसान झेलना पड़ता है।

2. मानसिक परेशानियों के कई कारण हो सकते हैं, इसका एक कारण किसी दूसरे का बिस्तर इस्तेमाल करना भी हो सकता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार कभी भी किसी दूसरे के बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए। इससे व्यक्ति को मानसिक परेशानी और आर्थिक हानि होती है।

3. वास्तुशास्त्र के अनुसार कभी किसी दूसरे व्यक्ति के कपड़े और जूतों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इससे उसके बुरे प्रभाव आप पर पड़ने लगते हैं।

4. वास्तुशास्त्र के अनुसार कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति का पेन कभी अपने पास नहीं रखना चाहिए। यदि आप किसी काम के लिए पेन इस्तेमाल कर रहे हैं तो याद रहे की तुरंत ही उसे लौटा दें। क्योंकि दूसरे की पेन आपकी आर्थिक समस्याएं उत्पन्न कर सकती है।

5. वास्तुशास्त्र के अनुसार कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति की घड़ी को नहीं पहनना चाहिए। क्योंकि हो सकता है जिस इंसान की घड़ी आप पहन रहे हैं, उसका बुरा समय चल रहा हो और वो आपके ऊपर आ सकता है।


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लगातार 40 दिन तक शिव मंदिर में चढ़ाएं 5 मूली, संतान की इच्छा जल्द होगी पूरी


शादी के बाद सुखी जीवन और अच्छी संतान हर व्यक्ति चाहता है। हर पुरुष और स्त्री के मन में मां-पिता बनने की ख्वाहिश होती है। लेकिन दुख तब होता है जब संतान सुख प्राप्त नहीं होता। इसके लिए व्यक्ति बहुत से उपाय करता है। संतान प्राप्ति के लिए व्यक्ति हर संभव प्रयास करता है। लेकिन इसके बावजूद भी व्यक्ति नाकाम रहता है, तो अगर आप भी संतान के लिए बहुत प्रयास कर चुके हैं तो इस उपाय को जरुर आज़माएं। इन उपाय को करने से आपकी जिंदगी खुशियों से भर जाएगी। आइए जानते हैं वो खास उपाय...

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1.यदि आपको बहुत इलाज के बाद भी संतान सुख नहीं मिल पा रहा है तो आप लगातार 40 दिनों तक पांच मूली शिव मंदिर में चढ़ाएं। ध्यान रहे की इन्हें मंदिर में चढ़ाने से पहले रविवार की रात को महिला के सिरहाने मूलियों को रख दें। इसके बाद सोमवार की सुबह से उन्हें मंदिर में चढ़ाना शुरु करें। इस उपाय को करने से जल्द ही संतान सुख की प्राप्ति होती है।

2.अगर आप गुणवान और बुद्धिमान संतान पाना चाहते हैं, तो आप चावल और सुपारी का टोटका कर सकते है। इस कारगार उपाय को शकुवार के दिन करना है। आपको बरगद के पत्ते पर कुमकुम से स्वास्तिक बनाना है, इसके बाद उस पर एक सुपारी और थोड़े चावल रखकर किसी मंदिर में चढ़ा दें। इससे आपकी संतान समेत कई इच्छाएं पूरी हो जाएगी।

3.कई बार मेडिकल प्राब्लम्स के अलावा कुंडली के दोषों के कारण भी संतान प्राप्ति में समस्याएं होती है। जैसे ज्योतिष के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में पांचवे घर में राहु होता है उन लोगों को संतान सुख नहीं मिल पाता है। लेकिन इसका समाधान भी मौजूद है, इससे छुटकारा पाने के लिए आप घर के मुख्य दरवाजे के नीचे चांदी का एक पत्र रख दें। समस्या खत्म हो जाएगी।

4.गुरुवार के दिन पांच कौड़ी लेकर इसे अभिमंत्रित कर लें। अब इसे महिला की कमर पर पीले धागे के साथ बांध दें। ऐसा करने से जल्द ही गोद भर जाएगी।

5.वहीं गुरुवार के दिन गेंहू के आटे की गोलियां बनाकर उसमें चने की दाल और थोड़ी हल्दी भरकर गाय को खिला दें, ऐसा करने से बृहस्पति देव प्रसन्न हो जाते हैं। निसंतान दंपतियों को संतान सुख प्राप्त हो जाता है।

6.संतान सुख की प्राप्ति के लिए श्रावण नक्षत्र में काल अरंड की जड़ का उपाय भी प्रभावशाली साबित होता है। इस नक्षत्र में स्त्री को ये जड़ अपनी कमर व बाजू पर बांधन चाहिए। ऐसा करने पर भगवान शिव की आप पर कृपा होगी और आपकी सूनी गोद जल्द भर जाएगी।

7.इसके अलावा बुधवार के दिन कान्हा जी के बाल रुप की मूर्ति लेकर आएं और उनकी प्रतिदिन पूजा करें। इसके साथ ही उन्हें माखन मिश्री का भोग लगाएं। प्रसाद थोडा खुद खाएं एवं बचा हुआ प्रसाद पक्षियों को खिला दें। ऐसा नियमितरूप से करें, सूनी गोद जल्द भर जाएगी।


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सोते समय भूलकर भी इस चीज़ को ना रखें अपने पास, मानसिक अशांति का होता है कारण


सुकून की नींद सभी चाहते है। क्योंकि अच्छी नींद और अच्छे सपने सब देखना चाहते हैं। लेकिन कुछ लोगों को रात को अच्छे से नींद नहीं आती है और अगर नींद आती भी है तो उन्हें डरावने सपने दिखाई देते हैं। जिससे घबरा कर उनकी नींद खुल जाती है। दरअसल इन बातों के पीछे कई कारण होते हैं जिनमें सबसे महत्वपूर्ण कारण वास्तुदोष का कारण। अक्सर लोगों को नींद नहीं आती क्योंकि उनके दिमाक में कई उलझने चलती रहती है और कई चींताएं बनी रहती है और अच्छी नींद आने के लिए दिमाग का शांत होना बहुत जरुरी होता है। लेकिन शायद हम ये नहीं जानते हैं की हमारी कई परेशानियों का कारण हम खुद होते हैं। जैसे हम सोते समय अपने सिरहाने कुछ ऐसी चीज़ें रखते हैं जिनसे वास्तुदोष उत्पन्न होता है और हमें डरावने सपने आते हैं। तो इन चीज़ों को कभी अपने सिरहाने रखकर नहीं सोना चाहिए...

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1. वास्तुशास्त्र के अनुसार रात को सोते समय अपने तकिए के नीचे कभी कोई दवा या पर्स को रखकर नहीं सोना चाहिए, इससे वास्तुदोष उत्पन्न होता है और नींद में खलल पड़ता है।

2. वास्तुशास्त्र के अनुसार रात को साते समय अपने सर के पास कभी भी पानी भरकर नहीं रखना चाहिए। यह वास्तुदोष का एक बड़ा कारण होता है, जिसके कारण नींद में बाधा उत्पन्न होती है।

3. इसके अलावा कभी भी चाबियों का गुच्छा भी तकिए के नीचे रखकर नहीं सोना चाहिए, ये चीजें तकिए के नीचे होने से वास्तुदोष उत्पन्न होता है, जो व्यक्ति की मानसिक अशांति का कारण बनता है और नींद खराब करता है।


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सूर्य ग्रहण 2019: 6 जनवरी सुबह सात बजे तक ना करें ये काम, हो सकता है बड़ा नुकसान


6 जनवरी रविवार को साल का पहला सूर्य ग्रहण पड़ने वाला है। हालांकि यह आंशिक सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। भारतीय समयानुसार शाम 5:04 बजे से रात के 9:18 बजे तक रहेगा। इस सूर्य ग्रहण की अवधि 4 घंटे 14 मिनट तक रहेगी। पंडित रमाकांत मिश्रा बताते हैं की सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई दे या नहीं लेकिन इसका प्रभाव सभी जीवों पर पड़ेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहणकाल में गंगा स्नान या नदी में स्नान करने से सौ अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। इसके आलावा ग्रहणकाल के दौरान जाप करने से भी बहुत अच्छा होता है। कुछ कार्य ऐसे भी होते हैं जिन्हें करने से सूर्य ग्रहण का असर कम हो जाता है।साथ ही कुछ कार्यों को करने की ग्रहणकाल में मनाही होती है। आइए जानते हैं ग्रहण में किन कार्यों को कभी नहीं करना चाहिए.....

 

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ग्रहणकाल में करें ये जरुरी काम

  • शुभ एवं नए कार्य की शुरुआत न करें।
  • ग्रहणकाल के दौरान भगवान की आराधना करनी चाहिए।
  • ग्रहणकाल के दौरान मंत्रों का जाप करें, इससे कई गुना लाभ मिलता है।
  • ग्रहण के पहले और बाद में दोनों समय स्नान करना चाहिए।
  • ग्रहण के खत्म होने के बाद गरीबों को दान जरुर देना चाहिए।

ग्रहणकाल के दौरान कभी ना करें ये काम

  • ग्रहण के समय मूर्ति स्पर्श व मूर्ति पूजा नहीं करना चाहिए।
  • गर्भवती महिलाओं को काटने, बुनने व सिलने का कार्य नहीं करना चाहिए।
  • ग्रहण के दौरान शुभ एवं नए कार्य की शुरुआत नहीं करना चाहिए।
  • ग्रहणकाल के दौरान यात्रा नहीं करना चाहिए।

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शनि अमावस्या आज, शनि दोषों से मुक्ति पाने के लिए शाम को करें ये उपाय


शनि अमावस्या पर शनिदेव की पूजा-आराधना का विधान माना जाता है। इस दिन शनिदोषों से मुक्ति पाने का बहुत ही अच्छा समय होता है। ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक न्याय के देवता शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनि अमावस्या का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। शनैश्चरी अमावस्या को शनिदेव के लिए कुछ आसान उपाय करने से शनिदेव की क्रूर दृष्टि का प्रभाव कम होता है। इसलिए इस दिन लोग व्रत,उपवास और उपाय करते हैं। इसके अतिरिक्त पंडित रमाकांत मिश्रा बताते हैं की शनि अमावस्या पर शनि के प्रभावों को कम करने के लिए दान भी किया जाता है। आइए जानते हैं किन उपायों को करने से शनि के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिलती है...

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1. अमावस्या के दिन शनि मंदिरों में शनि की वस्तुओं का दान करें, काले तिल, काली उड़द, काली राई, काले वस्त्र, लौह पात्र तथा गुड़ का दान इन चीज़ों से शनि शांत होते हैं।

2. शनि की प्रसन्नता के लिए उड़द, तेल, इन्द्रनील, तिल, कुलथी, भैंस, लोहा, दक्षिणा और श्याम वस्त्र दान करें।

3. शनि अमावस्या की शाम को पीपल के पेड़ के चारों तरफ 7 बार कच्चा सूत लपेटें, इस समय शनि के किसी मंत्र का जप करते रहें।

4. शनि अमावस्या के दिन अपने हाथ की नाप का 19 हाथ काला धागा माला बनाकर पहनें।

5. शनि अमावस्या के दिन काले घोड़े की नाल या नाव की सतह की कील का बना छल्ला मध्यमा में धारण करें।

6. अमावस्या की शाम को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक प्रज्ज्वलित करें तथा ज्ञात अज्ञात अपराधों के लिए क्षमा मांगें।


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Vastu tips for money: इस दिशा में रखें दीपक की लौ, खींचा चला आएगा पैसा


भारत में वास्तुशास्त्र का बहुत महत्व माना जाता है। आजकल लगभग हर घर वास्तु के अनुसार ही बनवाया जाता है। वहीं सनातन धर्म देखें तो हर कार्य को शुरु करने से पहले दीपक जलाया जाता है। क्योंकि इसका विशेष महत्व माना जात है। दीप जलाकर भगवान की पूजा आराधना की जाती है। हिंदू धर्म में हर त्यौहार, हर शुभ कार्य व लगभग हर घर में सुबह शाम दिपक जलाया जलाने की परंपरा है। लेकिन क्या आप जानते हैं वास्तुशास्त्र में भी दीपक जलाना अच्छा माना जाता है। वास्तु में दीपक जलाने व उसको रखने के लिए कई नियम बताए गए हैं। कहा जाता है की इन नियमों का पालन करने से व्यक्ति को कई प्रकार के लाभ होते हैं। जिनसे वह अपने इच्छा अनुसार कई मनोकानाएं पूरी करना सकता है। इसलिए दीपक जलाते समय सिर्फ दीपक ही नहीं बल्कि उसकी लौ का भी ध्यान रखना होगा। आइए जानते हैं की लौ किस दिशा में रखनी चाहिए और उससे क्या लाभ मिलेगा...

 

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पूर्व दिशा - इस दिशा में दीपक की लौ रखने से व्यक्ति की आयु में वृद्धि होती है।

पश्चिम दिशा- इस दिशा में दीपक की लौ रखने से व्यक्ति का दु:ख कभी कम नहीं होता, बढ़ता ही है।

उत्तर दिशा- इस दिशा में दीपक की लौ रखने से धनलाभ होता है।

दक्षिण दिशा- इस दिशा में दीपक की लौ रखने से हानि होती है। हानि सिर्फ धन ही नहीं व्यक्ति की भी हो सकती है। तो ध्यान रहे इस दिशा में कभी दीपक की लौ ना रखें।

दीपक जलाते समय करें इस मंत्र का जाप, मिलेगा जल्दी परिणाम

दीपज्योति: परब्रह्म:
दीपज्योति: जनार्दन:
दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नमोस्तुते...
शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुखं सम्पदां
शत्रुवृद्धि विनाशं च दीपज्योति: नमोस्तुति...


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शनि अमावस्या 2019: साल की पहली शनि अमावस्या पर शनिदेव बरसाएंगे कहर, इन 5 राशियों को हो सकता है बड़ा नुकसान


ज्योतिष गणना के अनुसार इस साल 3 शनि अमावस्या पड़ेगी। इस साल की पहली अमावस्या 5 जनवरी को पड़ रही है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार न्याय के देवता शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनि अमावस्या का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। शनैश्चरी अमावस्या के दिन शनि की पूजा-अर्चना, साधना के लिए महत्वपूर्ण, वांक्षित फलदायक माना जाता है। माना जाता है की इस दिन लोग शनि दोषों से मुक्ति और शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती के प्रभावों को कम करने के लिए शनि मंदिर जाकर पूजा अर्चना करते हैं। पंडित रमाकांत मिश्रा बताते हैं की अमावस्या शक्रवार यानी 4 जनवरी की रात 4:58 बजे से लग जाएगी जोकी रविवार 6 जनवरी को सुबह 6:58 बजे तक रहेगी।

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पंडित जी बताते हैं की जिन लोगों को पर शनि की दृष्टि पहेगी वे लोग शनि अमावस्या के दिन स्नान दान श्राद्ध जैसे कर्म कर सकते हैं। शनि अमावस्या पर शनिदेव की विधि विधान से पूजा करने पर सुख समृद्धि प्राप्त होती है और शनि ग्रह के दोषों से निजात मिलता है। इसके अलावा शनि अमावस्या का दिन पितृ दोष की शांति और कालसर्प दोष के निवारण के लिए भी मंगलकारी होता है।

वहीं पं.मिश्रा के अनुसार वृषभ और कन्या राशि पर शनि की ढ़ैया चल रही है और वृश्चिक, धनु और मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव है। इस दौरान शनि अमावस्या पर इन राशियों के जातकों को कठिन समय का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा आप पर शनि बहुत कहर बरपा सकते हैं, जिसके चलते आपको कोई बड़ा नुकसान या अप्रत्याशित घटनाओं का सामना करना पड़ेगा।


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