Patrika : Leading Hindi News Portal - State #educratsweb
HOME | LATEST JOBS | JOBS | CONTENTS | STUDY MATERIAL | CAREER | NEWS | BOOK | VIDEO | PRACTICE SET REGISTER | LOGIN | CONTACT US

Patrika : Leading Hindi News Portal - State

http://api.patrika.com/rss/state-news 👁 505

कब जागेंगे जिम्मेदार?


टिप्पणी
महेन्द्र त्रिवेदी
बाड़मेर शहर की सूरत बिगड़ी हुई है। शायद ही कोई चौराहा हो, जिसे देखकर सुकून मिल सके। नगर परिषद में बैठे अधिकारी व जनप्रतिनिधि संभवत: गहरी नींद में है, पता नहीं कब जागेंगे और अगर जाग भी गए तो कुछ करेंगे या फिर वहीं ढपली और अपनी वाली राग। कहते हैं ना कि पूत के पग पालने में दिख जाते हैं, कुछ वैसी ही हालत यहां के नगर परिषद की है। इस पूत के पग पालने में क्या ये तो जैसे जग जाहिर है। कारिंदों ने यहां क्या-क्या गलत नहीं किया है। कुछ भी जैसे बचा ही नहीं है। इनका डंडा भी यहां कमजोर पर ज्यादा चलता है। कार्रवाई के नाम पर कुछ करना है तो बस पॉलीथिन पकड़ लो या फिर ठेले वालों को हटा दो। उनको कौन हटाएगा जो सालों से सरकारी भूमि को जैसे खुद की मानकर जमे हैं, इन पर कुछ करने की बात पर तो जैसे सांप सूंघ जाता है। कार्मिक तो क्या करेंगे, अधिकारी भी एक दूसरे पर बात डालने की जुगत में लग जाते हैं। नतीजतन शहरवासी पीड़ा भुगत रहे हैं।
शहर की एकमात्र मुख्य सड़क की सफाई नगर परिषद से ठीक से नहीं हो रही हे, तो पूरे शहर की क्या करेंगे। महीनों हो गए, अब तो शायद एक साल से ज्यादा ही हो गया होगा, रेलवे स्टेशन के सामने की तरफ की रोड के बुरे हालात के। यहां गंदगी व कचरे में खड़े ठेले वाले परिषद के कारिंदे को नजर आते हैं, जिनको गाहे-बगाहे यहां से बेदखल जरूर कर दिया जाता है, लेकिन यहां फैली गंदगी शायद इन्हें नजर ही नहीं आती है। लंबे समय बाद भी यहां पूरी तरह सफाई नहीं हो पाई है।
शहर की ये कमियां कहीं उजागर न हो जाए, इसलिए नगर परिषद की साधारण बैठक को पिछले चार महीनों से टाला जा रहा है। पता है कि बैठक होगी तो मुद्दे उठेंगे और बात दूर तक जाएगी, शहर की बिगड़ी सूरत पर बात उठेगी और विकास की योजनाएं भी बतानी होगी। अब यहां तो एक दूसरे पर डालने और टांग खिंचाई से फुर्सत मिले तो कुछ सोचा जाए। जब कुछ सोचा ही नहीं और योजना का खाका भी नहीं खींचा तो बताएंगे क्या, इसलिए बैठक का किसी जिम्मेदार को पूछने पर यही जवाब आता है, तैयारी चल रही है, जल्द ही बैठक बुलाएंगे, लेकिन कब, इंतजार लम्बा ही हो गया है, अब तो शहर के वार्ड से चुने पार्षद ही साधारण बैठक बुलाने की मांग कर रहे हैं, जब शहर का आमजन मुद्दों को लेकर आगे आ गया तो फिर मुहं छिपाने की जगह नहीं मिलेगी, इसलिए जितना जल्दी हो चेत जाओ, नहीं तो जनता छोडऩे वाली नहीं है।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/state-news/when-will-awake-responsible-1-1862741/

जननी सुरक्षा की उड़ी धज्जियां- संभालने नहीं आया स्टाफ, वार्ड के गेट पर ही महिलाओं ने कराया प्रसव


जयपुर/ दौसा। दौसा में जननी सुरक्षा को लेकर सरेआम खिलवाड़ का मामला सामने आया है। अस्पताल स्टाफ के अस्पताल में मौजूद होने के बाद भी गर्भवती को नहीं संभाला गया। बाद में गर्भवती के साथ आई महिलाओं ने ही उसका प्रसव कराया।

 

दुष्कर्म मामले में किरोड़ी की गिरफ्तारी की उठाई मांग, बोले रमेश मीणा- गिरफ्तार नहीं होने पर करेंगे बड़ा आन्दोलन

 

हद तो तब हो गई, जब प्रसव कराने के बाद भी अस्पताल स्टाफ देरी से पहुंचा। इसे लेकर महिला के परिजनों ने विरोध भी दर्ज कराया है।

 

जब चला पीला पंजा तो ऐसे धराशाही हो गया अरमानों का भवन, तस्वीरें बयां कर रही गोपालपुरा की दास्तां

 

सज धज गए हैं गधे और घोडे, जयपुर में दो दिन चलेगा अनोखा गर्दभ मेला

 

मिली जानकारी के अनुसार लवाण गांव में रहने वाल गोरंती देवी को बीती शाम उसके परिजन प्रसव पीड़ा होने के बाद जिला अस्पताल दौसा लेकर आए थे। वहां जननी सुरक्षा वार्ड के बाहर ही गोरंती की तबियत बेहद खराब हो गई। परिजनों ने अस्पताल स्टाफ को वार्ड के बाहर आकर गोरंती को संभालने का अनुरोध किया, लेकिन स्टाफ बाहर नहीं आया।

 

अब नहीं चलेगा बहाना, देना होगा पानी के उपभोग का पूरा पैसा

 

250 साल से ज्यादा पुराने इन महलों की सुंदरता के आज भी हैं लोग कायल, सुरंग से निकलता था गुप्त द्वार

 

इस दौरान गोरंती के साथ आई महिलाओं ने ही उसका प्रसव कराया। गोरंती ने फ र्श पर ही बच्ची को जन्म दिया। बच्ची के जन्म के भी आधा घंटे बाद अस्पताल स्टाफ ने गोरंती और बच्ची को संभाला और बाद में उसे वार्ड में शिफ्ट किया गया।

 

कलयुगी बेटे ने कुल्हाड़ी से की मां की हत्या, शव को सूखे कुएं में डाला

 

चौथ माता मंदिर परिसर में बढ़ाई सुरक्षा व्यवस्था, अतिरिक्त जाब्ता लगाया...

 

13 बाद भी नहीं पूरा हो सका चंबल पेयजल परियोजना का काम- समीक्षा बैठक में सुराणा ने ली अधिकारियों की क्लास


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/state-news/woman-gave-birth-to-a-girl-at-hospital-gate-in-dausa-1853610/

आस्था की अर्थव्यवस्था


विशाल 'सूर्यकांत'

 

कहते हैं कि ये देश आस्था से चलता है। हर धर्म, हर मजहब के लोगों के लिए इस देश में आध्यात्म और धर्म के रास्ते एक मनोवैज्ञानिक संबल हमेशा से वजूद में रहा है। लेकिन जब आस्था का यही मनोवैज्ञानिक संबल, शोषण की शक्ल अख्तियार कर लें तब गुरमीत सिंह उर्फ बाबा राम रहीम जैसे चेहरे सामने आते हैं। मुद्दा ये हैं कि कैसे इस देश में, बाबा और फकीरों का चोला ओढ़ कर आस्थाओं का शोषण करने वाले लोग अपनी जगह बना लेते हैं...? मौजूदा दौर में ऐसे बाबाओं की बढ़ती फेहरिस्त देखकर वाकई हैरानी होती है।

 

 

एक नया सवाल भी जेहन में पैदा हो रहा है कि आखिर क्या वजह है इसकी ? क्या धर्म,महजब को निभाने के परम्परागत तरीके, परम्परागत संस्थान, लोगों को वो संबल,सांत्वना या विश्वास नहीं दे पा रहे हैं जो उन्हें चाहिए ? या आस्था से अपनी अर्थव्यवस्था बनाने वाले ज्यादा सुनियोजित तरीके से काम करते हैं। दरअसल, मुद्दा इसीलिए उठ रहा है अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की ओर से 14 उन लोगों के नाम जारी किए गए हैं, जिन्हें अखाड़ा परिषद फर्जी बाबा मानता है। इस खबर से निकल रहे हैं मुद्दों के कई सिरे, जिन पर बात होनी ज़रूरी है।

 

देखिए वीडियो- जिनमें कुछ बाबाओं की फेहरिस्त जारी अखाड़ा परिषद ने कर दी है नई शुरुआत...

धर्म से जुड़े कई पहलू इस चर्चा में आएंगे लेकिन यहां ये स्पष्ट करना जरूरी है कि इस बहस में उन कथित संतों,फक़ीर और धर्मगुरूओं की बात होगी, जो अपने कारनामों से विवादों में रहे हैं। इस पूरी बहस की शुरूआत करते हुए हम उन सभी संत,फकीर और धर्मगुरूओं के प्रति अपनी पूरी आस्थाा और श्रद्धा रखते हैं जो वाकई समाज सुधारक हैं, धर्म पारायण हैं और जिनकी बांतों से सदकर्म की प्रेरणा मिलती है, सर्वशक्तिमान में आस्था बढ़ती है। लेकिन धर्म के मुद्दे पर लगता है कि अब बहस जरूरी है...।

 

 

अखाड़ा परिषद ने जिन बाबाओं के नाम जारी किए हैं, उनमें - आसाराम बापू उर्फ आशुमल शिरमलानी, सुखबिंदर कौर उर्फ राधे मां, सच्चिदानंद गिरि उर्फ सचिन दत्ता, गुरमीत राम रहीम सिंह, ओमबाबा उर्फ विवेकानंद झा, निर्मल बाबा उर्फ निर्मलजीत सिंह, इच्छाधारी भीमानंद उर्फ शिवमूर्ति द्विवेदी, स्वामी असीमानंद,ओम नमः शिवाय बाबा, नारायण साईं, रामपाल, आचार्य कुशमुनि,वृहस्पति गिरी,मलखान सिंह के नाम शामिल है।

 

 

इन सभी का नाम विवादों के चलते सूर्खियों में रहा है। अखाड़ा परिषद को अब लगने लगा है कि अगर एक्शन नहीं लिया गया तो साधू-संतों से लोगों का विश्वास उठने लगेगा। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने फर्जी बाबाओं की लिस्ट जारी की है। इलाहाबाद में रविवार को इस संबंध में अखाड़ा परिषद की बैठक हुई थी। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी ने ऐसे बाबाओं की लिस्ट जारी की। अखाड़ा परिषद का दावा - ये बाबा धर्म के नाम पर फर्जी तरीके से लोगों को गुमराह कर रहे हैं।

 

देखिए वीडियो के इस हिस्से में, जहां ज्योतिषाचार्य डॉ.आचार्य महेन्द्र मिश्रा, कर्मकांडी पंडित जुगल किशोर शर्मा,समाजशास्त्री डॉ.प्रज्ञा शर्मा और वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र शर्मा के नजरिए से बाबाओं के तिलिस्म की क्या है वजह ?

दरअसल, परम्परागत धार्मिक संस्थान और संगठनों से अलग इन बाबाओं के पनपने के पीछे कई धार्मिक और सामाजिक कारण हैं।

 

 

मसलन, इसीलिए पनपते हैं नए धार्मिक गुरू- 

 

सामाजिक-आर्थिक रुप से कमजोर की उपेक्षा।

समाज में सभी बराबरी का हक़ नहीं मिलता।

इंसान को दुत्कारा या धिक्कारा की परम्परा।

धर्मस्थानों में भी जाति,धर्म,पंथ,रंग-रूप को लेकर हीन भावनाएं।

परिवार की परेशानियों में आध्यात्मिक संबल की जरूरत।

गुरु से जुड़े लोगों के जरिए नया समाजिक परिवेश मिलता है।

ऐसे स्थानों पर अतीत को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता।

धर्मस्थान सिर्फ पूजा-पाठ और धर्म की व्याख्या तक सीमित हो गए।

नए दौर के धर्मगुरु सामाजिक और पारिवारिक बुराइयों में भी दखल रखते हैं।

सामाजिक संगठनों के जरिए राजनीति को प्रभावित करने की क्षमता।

सामाजिक सुरक्षा का भाव,अपनत्व मिलता है।

सुख-दुख का साथी बनने का आत्मिक और आध्यात्मिक भाव मिलता है।

 

 

गुरु गोविंद दोऊ खड़े,काके लागू पाय, बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताए...कबीर की इन पंक्तियों पर अमल जरूर करें लेकिन सद्गुरु को खोजना जरूरी है। आडम्बर,चमत्कार जीवन शैली का हिस्सा नहीं है। संत ऐसा चुनिए जो जीवन शैली बदले, जीने का सही सलीका सीखाए...सबसे बड़ा गुरू, आपके अपने कर्म है जो खूबियां और खामियां सीखाते हैं। किसी व्यक्ति के सद्कर्मों के प्रति आस्था रखना गलत नहीं, संत की सेवा भी गलत नहीं... लेकिन अपने भीतर सवालिया संस्कृति को भी जिंदा रखें ताकि आपकी आस्था से कोई खिलवा़ड़ न कर सके।

 

जुड़िए डिबेट के इस आखिरी हिस्से में, जहां फर्जी बाबाओं की रोकथाम के तरीकों पर हो रही है बात


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/state-news/patrika-tv-prime-time-debate-on-aastha-ki-arthvyavastha-1-1807631/

जयललिता की इच्छा पूरी : तमिलनाडु में फ्री सेट टॉप बॉक्स स्कीम शुरू


 चेन्नई . जे जयललिता भले ही इस दुनिया से चली गई हों, लेकिन उनकी इच्छाओं को पूरी करने में एआईएडीएम सरकारने पूरा जोर लगा दिया है। अम्मा की मंशा के अनुसार एक और फ्री स्कीम का श्रीगणेश किया है। इस बार तमिलनाडु सरकार ने फ्री सेट टॉप बॉक्स बांटाना शुरू किया है। एआईएडीएम सरकार ने सरकारी केबल टीवी कॉर्पोरेशन के कस्टमर्स के लिए फ्री सेट टॅाप बॉक्स देने की योजना का श्रीगण्ेाश किया है। फ्री सेट टॉप बॉक्स मुफ्त योजना देने वाला तमिलनाडु देश का पहला राज्य बन गया है।


सीएम के पलानीस्वामी ने सेट टॉप बॉक्स बांटने के साथ एमपीईजी-४ फारमेट के हाईटेक कंट्रोल रूम का उद्घाटन भी किया। इस कंट्रोल रूम से डिजिटल सिग्रल प्रसारित किए जाएंगे। जयललिता ने विधानसभा चुनाव के दौरान फ्री सेट टॉप बॉक्स उपलब्ध कराने का वादा किया था। सत्ताधारी पार्टी ने अपना लोकप्रिय वादा निभाया है।

चार्ज 125 रुपए प्रतिमाह
राज्य सरकार की संचालित तमिलनाडु अरासू केबल टीवी कारपोरेशन के करीब 70 लाख ग्राहक हैं। अब उन्हें 125 रुपए प्रतिमाह के चार्ज पर डिजीटल क्वालिटी में 180 चैनल उपलब्ध कराए जाएंगे। केंद्र सरकार ने इसी वर्ष अप्रैल में तमिलनाडु सरकार के केबल कारपोरेशन को डिजीटल पहुंच प्रणाली का लाइसेंस दिया था।

सबसे ज्यादा फ्री अम्मा योजनाएं
तमिलनाडु वह राज्य हैं जहां देश की सबसे ज्यादा फ्री स्कीम्स चलती हैं जिन्हें सरकार उपलब्ध कराती है। दिवंगत जयललिता ने मुख्यमंत्री बनने के बाद कई योजनाएं अम्मा नाम से शुरू की थीं। अब उनके कदमों पर चलते पलानीस्वामी सरकार भी यही कर रही है।

अम्मा मिनरल वाटर : 10 रुपए की पानी की बोतल सभी प्रमुख शहरों में रेलवे स्टेशनो और बस अड्डों पर मिलती है।

अम्मा फार्मेसी : प्रमुख अस्पतालों में अम्मा फार्मेसी खोली गई हैं जहां सस्ते दरों पर लोगों को दवाएं मिलती हैं।

अम्मा बेबी किट : नवजातों की जरूरत के 16 सामान होते हैं जो फ्री में दिए जाते हैं।

अम्मा सीमेंट : गरीब लोगों को सस्ते दर पर अपना माकन बनाने के लिए अम्मा सीमेंट दी जाती है।

अम्मा मोबाइल : राज्य के सभी सहायता समूहों को मुफ्त में अम्मा स्मार्ट फोन दिए गए हैं।

अम्मा कैंटीन : राज्य के सभी शहरों में सस्ते दर पर खाना और नाश्ता उपलब्ध कराने के लिए अम्मा कैंटीन।

अम्मा मिक्सर : गरीब औरतों को अम्मा मिक्सर मुफ्त में उपलब्ध कराया।

इनके अलावा यह भी... अम्मा टीवी, पंखे, बीज, नमक, चश्मा, लड़कियों को साइकिल, लैपटॉप, लड़कों को स्कूल बैग, किताबें, यूनिफार्म भी मुफ्त में दिए जाते हैं।

 

 


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/state-news/tamilnadu-distributes-free-set-top-boxes-1771652/

वोट नहीं वोटर की सोचो


-राजेंद्र शर्मा-

 

देश के कई हिस्सों में बीमारियों और कुपोषण से मरे हजारों बच्चों पर बेरुखी शर्मनाक....

 

 

आधुनिक युग में मैकाले को सर्वश्रेष्ठ नीतिज्ञ माना जाता है। मैकाले चाणक्य को सर्वश्रेष्ठ नीतिज्ञ मानते हैं। तो, चाणक्य ने शुक्राचार्य को सबसे बड़ा नीति शास्त्री माना। शुक्राचार्य ने अपने ग्रंथ शुक संहिता में कहा है 'नीतिवान् नहीं कोई राम समाना' यानी इस धरा पर राम के समान नीतिज्ञ कोई नहीं हुआ, न होगा। राम का जब राज्याभिषेक हुआ तब लक्ष्मण ने जिज्ञासावश नीति के संबंध में उनसे प्रश्न किया। इस पर राम ने कहा कि श्रेष्ठ राजा वही है जो अधिकारों की इच्छा न रखते हुए प्रजा के प्रति अपने कर्तव्य का पूर्ण समर्पण और सत्यनिष्ठा के साथ निर्वहन करे। साथ ही, उन्होंने कर्तव्य के बारे में बताया कि राजा यदि प्रजा के धन, स्त्री, जीवन, स्वास्थ्य और शांति की रक्षा न कर सके तो उसे राजा बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। नीति यही कहती है कि ऐसे राजा को तुरंत सिंहासन त्याग देना चाहिए। चाणक्य ने कहा प्रत्येक युग में श्रीराम की नीति अनुकरणीय है और हर काल में रहेगी। अलबत्ता, इसे कौन राजा मानता है और कौन नहीं, यह राजा की शुचिता और सत्यनिष्ठा पर निर्भर है।

 

 

देश के वर्तमान हालात में धन, स्त्री, जीवन और शांति की बात बाद में कभी करेंगे, फिलहाल बात करते हैं स्वास्थ्य की। तो, ताज़ा बानगी है, राजस्थान के जोधपुर यानी सनसिटी के उम्मेद अस्पताल की। जहां दो डॉक्टर ऑपरेशन थियेटर में एक सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान लड़ पड़े। परस्पर मवालियों वाली भाषा का इस्तेमाल किया। नतीजतन, एक नवजात का जीवन शुरू होने से पहले ही खत्म। इसी अस्पताल का पुराना रिकॉर्ड भी उजला नहीं रहा। यहां नवजात बच्चों को चूहे कुतर चुके हैं। तो, फरवरी 2011 में फंगसयुक्त ग्लूकोज लगने से एक दर्जन प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। इधर, राजस्थान की राजधानी जयपुर में प्रदेश के सबसे बड़े एसएमएस अस्पताल में स्वाइन फ्लू मरीज सत्तारूढ़ दल की विधायक कीर्तिकुमारी की हालत बिगडऩे पर उन्हें प्राइवेट अस्पताल ने जाया गया, मगर बचाया नहीं जा सका। जहां सत्तारूढ़ दल के विधायक की जान बचाने में अमला नाकाम हो जाए, वहां आमजन की स्थिति के बारे में तो सोचकर सिहरन दौड़ जाती है। निपटने की नाकामी के कारण स्वाइन फ्लू तो अब मौसमी रहा नहीं, तो बारहमासी कुपोषण भी कई घरों के चिराग बुझा चुका है।

कुपोषण से बुझ गए सैकड़ों चिराग...

 

एक ओर भारत एक सितंबर को राष्ट्रीय पोषाहार दिवस मना रहा है, वहीं दूसरी ओर राजस्थान और झारखंड में कुपोषण यानी मैल्नूट्रिशन भी मौत का सबब बना हुआ है। दोनों प्रदेशों में इसकी शिकार बड़े तौर पर सूबे की आदिवासी जनजातियां रही हैं। हाल ही में राजस्थान के आदिवासी बहुल बांसवाड़ा जिले में महज 53 दिनों में 81 नवजात कुपोषण के कारण काल के ग्रास बन चुके हैं। गत जुलाई माह में 50 बच्चे कुपोषण ने लील लिए। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। सन् 2002 में बारां जिले में सहरिया आदिवासी जनजाति के सैकड़ों लोग कुपोषण का शिकार हुए। फरवरी, 2016 तक के दो महीने में प्रदेश के 25 बच्चे कुपोषण के कारण काल के गाल में समा गए, तो उसी माह में बाड़मेर जिले में 11 चिराग इसी कारण बुझ गए। आदिवासी बहुल झारखंड की दास्तां तो और भी दर्दभरी है। वहां बीते दो महीनों में साै से ज्यादा बच्चों की सांसें मैल्नूट्रिशन के कारण बंद हो चुकी हैं। इनमें अकेले अगस्त महीने में करीब 55 घरों के दीपक बुझे हैं।

 

 

देश का सबसे बड़ा सूबा उत्तर प्रदेश भी स्वास्थ्य के प्रति जानलेवा लापरवाहियों से अछूता नहीं है। गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में पिछले तीन दिन में 61 के साथ ही अगस्त महीने में 290 बच्चों की मौत हो चुकी है। इनमें से 77 बच्चे इन्सेफ्लाइटिस वार्ड में काल कवलित हुए, तो 213 बच्चों की मौत नीओनेटल (नवजात शिशुरोग) आईसीयू में हुई। यहां जनवरी, 2017 से अगस्त के बीच 1250 बच्चे मारे जा चुके हैं। बताते चलें कि गोरखपुर सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कर्मक्षेत्र, चुनाव क्षेत्र और धर्मक्षेत्र है। यूपी की ही एक और बात कि दिसंबर, 2015 में नोएडा के जिला अस्पताल में भी जोधपुर के उम्मेद अस्पताल की तरह ही फंगसयुक्त ग्लूकोज की सप्लाई की गई थी। वक्त पर किसी कर्मचारी को पता चल गया, वर्ना हश्र भयानक हो जाता।

हुक्मरानों की बेरुखी...

 

किसी ओर देश की जरा-जरा सी बात पर ट्वीट करने वाले हुक्मरानों की ओर से न तो गोरखपुर और न जोधपुर के लिए कोई हमदर्दी सामने आई। ऐसे मेें यह जानकर किसी शासन या शासक को शायद ही कोई फर्क पडऩे वाला है कि हाल ही में महाराष्ट्र और गुजरात में ही स्वाइन फ्लू से आठ सौ लोगों की सांसें थम चुकी हैं। राजस्थान में भी बीते आठ महीने में स्वाइन फ्लू से विधायक कीर्ति कुमारी समेत 86 की मौत हो चुकी है। इनमें से 81 तो गुजरे महज पांच महीने में काल कवलित हुए हैं। इस अवधि में 910 लोग स्वाइन फ्लू पॉजिटिव पाए गए हैं। यहां यह जानकारी जरूरी है कि गत मार्च माह तक राज्य में स्वाइन फ्लू से पांच मौत हुई थी। इसके बाद महज पांच महीने में 81 लोगों को स्वाइन फ्लू लील चुका है। इन मृतकों में पांच अन्य प्रदेशों के थे। स्वाइन फ्लू से सूबे में सर्वाधिक 21 मौत जयपुर में हुई, वहीं कोटा में 10 लोगों के लिए यह बीमारी काल बनकर आई। यहां सबसे ज्यादा गौरतलब बात यह है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की लगातार हो रही मौत के गंभीर प्रश्न को हल्के में लेते हुए कहते हैं कि कहीं ऐसा न हो कि लोग अपने बच्चे दो साल के होते ही सरकार के भरोसे छोड़ दें कि सरकार उनका पालन पोषण कर दे। इधर, राजस्थान में हमेशा की तरह हुक्मरान दावा कर रहे हैं कि स्वाइन फ्लू से निपटने के अस्पतालों में उचित इंतजाम किए जा चुके हैं और अब जांच रिपोर्ट सात घंटे में मिलेगी। इनसे कौन पूछे कि ऐसा करने से आपको पहले किसी ने रोका था क्या?

 

ऐसे नेताओं के लिए कबीर का यह दोहा प्रासंगिक है-
बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि।
हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि।।

 

 

तमाम बातों, तथ्यों, तर्कों पर गौर करने के बाद यही कहा जा सकता है कि जब भी कोई दुखांतिका हुई, सरकार की तरफ से लीपापोती के बयान आए। कुछ वक्त गुज़रा नहीं कि हालात वही ढाक के तीन पात। प्रसिद्ध व्यंग्यकार शरद जोशी ने कहा है न, 'होता वही है जो हुआ करता है' हकीकत है। फिर भी, उम्मीद है निरीह जनता को मुल्क के हुक्मरानों से कि कभी तो जागेगी उनकी संवेदना, कभी तो वे क्षुद्र राजनीति से ऊपर उठकर वोट के लिए नहीं वोट देने वालों के लिए सोचेंगे।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/state-news/article-on-child-death-in-india-1-1767594/

सीएम योगी के लिए फजीहत का सबब बन रहा उनका उठाया मुद्दा


वाराणसी. सीएम योगी आदित्यनाथ ने जिस मुद्दे को उठाया था वही मुद्दा अब उनके लिए फजीहत का सबब बनता जा रहा है। सीएम योगी ने जब यूपी की सत्ता संभाली थी तो उस समय एक नारा लगा था, जिसमे सर्मथकों ने कहा कि सारा यूपी डोल रहा है, योगी-योगी बोल रहा है। इसके बाद लोगों ने उत्साह के साथ सीएम योगी पर भरोसा जताया है, लेकिन अब लोगों को निराशा मिलने लगी है, जिसकी एक प्रमुख वजह गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कालेज में लगातार हो रही बच्चों की मौत है।
यह भी पढ़े:-पूरा हुआ पीयूष गोयल का निर्देश तो 15 सितम्बर तक कूड़ा मुक्त होगा पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र



सीएम योगी ने गोरखपुर का सांसद रहते हुए इंसेफलाइटिस का मुद्दा उठाया था। सीएम योगी ने खुद सदन में इंसेफलाइटिस के इलाज कराने की बात कही थी। उस समय भी बीमारी से बच्चों की मौत होती थी, लेकिन कालेज स्तर से इतनी लापरवाही नहीं बरती जाती थी, जितनी अब बरतने के आरोप लग रहे हैं। देश में पीएम मोदी सरकार बनने के बाद से ही गोरखपुर का दिन फिरने लगा था। सबसे पहले पीएम मोदी ने फर्टिलाइज कारखाना खोलने का ऐलान किया था फिर इंसेफलाइटिस की रोकथाम के लिए गोरखपुर को एम्स दे दिया गया है, उस समय कहा जा रहा था कि पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र को एम्स की अधिक दरकार है, लेकिन पीएम मोदी ने एम्स की सौगात गोरखपुर को दी है, जिसकी मुख्य वजह इंसेफलाइटिस है। इसके बाद यूपी में सीएम योगी सरकार बन गयी है और जिस तरह से बीआरडी कालेज में बच्चों की मौत हो रही है वह सीएम योगी के लिए फजीहत का सबब बन सकता है। यूपी की जनता में सीएम योगी की कार्यप्रणाली को लेकर अंसतोष होता जा रहा है, यदि बीजेपी ने जल्द ही लोगों के असंतोष को खत्म नहीं किया तो पार्टी को नुकसान उठाना तय है।
यह भी पढ़े:-काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव का हरियाली महोत्सव1 को 

सीएम योगी आये दबाव में दिया गलत बयान
सीएम योगी पर बीआरडी मेडिकल कालेज का प्रकरण गले की फांस बनता जा रहा है। बीआरडी मेडिकल कालेज में बच्चों की हो रही लगतार मौत से सीएम योगी भी बैकफुट पर आ गये हैं इसके चलते सीएम योगी ने विवादित बयान दे दिया है। सीएम योगी ने यह कहा दिया है कि मुझे लगता है कहीं ऐसा न हो कि लोग अपने बच्चे के दो साल के होते ही सरकार के भरोसे छोड़ दे, सरकार ही उनका पालन पोषण करे। बयान से साफ है कि सीएम योगी को उनके गृहनगर गोरखपुर से ऐसी चुनौती मिली है, जिसका जवाब वह देने में असमर्थ होते जा रहे हैं।
यह भी पढ़े:-राज्यपाल ने विद्यापीठ व पूर्वांचल विश्वविद्यालय के प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों का किया सम्मान


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/state-news/cm-yogi-disputed-statement-hindi-news-1-1763646/

VIDEO: राम रहीम को 20 साल की कैद, अब जेल में लगेगा बाबा का डेरा


विशाल 'सूर्यकांत'

 

अब जेल में ही लगेगा बाबा का डेरा...क़ानून ने किया सच्चा सौदा...जी हां, ये कानून ही तो है जिसकी बदौलत खुद को ईश्वरीय अवतार मानने वाला राम रहीम आज सींखचों के पीछे हैं वो भी पूरे बीस साल के लिए...राजनीतिक रसूख,धर्म का सहारा और ग्लैमर का भरपूर उपयोग ....डेरा सच्चा सौदा का प्रमुख गुरमीत सिंह उर्फ राम रहीम...बलात्कार के आरोप सिद्ध हो जाने के बाद दस साल की सजा भुगतेगा। राम रहीम के समर्थकों के उत्पात को देखते हुए रोहतक जेल में ही सीबीआई जज की स्पेशल कोर्ट लगी और यहां दो साध्वियों के साथ रेप केस में दस-दस यानि बीस साल की सजा सुना दी गई।

 

 

अपने आप में अनोखा इस लिहाज से क्योंकि ये मामला दीये और तूफान की लड़ाई से कम का नहीं है। इस लडाई में दीये की जीत हुई है, तूफान हारा है...इसीलिए आज का प्राइम टाइम डिबेट उन्ही के नाम समर्पित है,,,वाकई क्या गजब लडाई लड़ी होगी उन दो साध्वियों ने, उस सीबीआई अफसर सतीश डागर ने और फैसला देने वाले और जज साहब का शुक्रिया क्योंकि एक नई नजीर इस फैसले के जरिए बनी है...( देखिए इस वीडियो में किस रूप में देश में प्रमुख रही प्रतिक्रियाएं और स्टूडियो में मौजूद पैनल ने रखी राय, सवालों की फेहरिस्त के साथ प्रश्नकाल और पत्रिका प्राइम टाइम डिबेट फोकस...

रोहतक जेल में सीबीआई की विशेष अदालत लगी थी। दोनों पक्षों के वकीलों ने दस मिनट में अपनी बात रखी। जेल में चल रही विशेष कोर्ट के सामने सजा पर बहस के दौरान सीबीआई वकील ने उम्रकैद की मांग की। वहीं राम रहीम के वकील ने सामाजिक कामों का हवाला दिया। कहा गया कि राम रहीम समाज सेवी हैं। उन्होंने जन कल्याण के बहुत काम किए हैं - बचाव पक्ष के वकील

 

 

इसका संज्ञान लेते हुए नरमी बरती जानी चाहिए। जेल में वकीलों की बहस के बाद गुरमीत राम रहीम ने माफी मांगनी शुरु कर दी। राम रहीम की आंखों में आंसू आ गए और शरीर कांप रहा था। बार-बार डेरा के अच्छे कामों की दुहाई दे रहा था। कोर्ट रूम में गुरमीत राम रहीम के लजरते शब्द गूंजे 'क्षमा कर दें,हमनें समाज के लिए काफी काम किया है। वकीलों की सजा पर बहस के बाद जज ने सुनाया फैसला जिसमें दोनों साध्वियों के रेप के मामले में दस-दस साल की सजा सुनाई यानि अब 20 साल तक गुरमीत सिंह राम रहीम जेल में रहेंगे। सजा के ऐलान के बाद गुरमीत सिंह को जेल के कपड़े पहना दिए गए। जेल जाने के बाद अब कैदी 1997 बन गई गुरमीत राम रहीम की नई पहचान बन गई है। इस फैसले के खिलाफ़ वकील ने कहा हाईकोर्ट में अपील करेंगे। देखिए इस वीडियो में, कैसे साध्वियों ने अन्याय के खिलाफ न्याय की उम्मीद का एक दीया जलाया और तूफान के खिलाफ कैसे हासिल की जीत ...

 

- सजा सुनते ही फफक कर रोया राम रहीम

दरअसल, 2002 में दो महिला अनुयायियों की एक गुमनाम चिट्ठी पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट को मिली । जिसमें डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर यौन शोषण का आरोप लगाया। इसके बाद हाई कोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंपी। जांच 2007 में पूरी हुई और स्पेशल कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी गई। 2008 में राम रहीम के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए और सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने दोषी करार दिया। 25.08.2017 को बाबा राम रहीम को दोषी करार दिया। 28.08.2017 को दो साध्वियों के रेप के मामले में धारा 376,511 और 501 के तहत दस-दस साल की सज़ा सुनाई गई। राम रहीम के मामलों में अभी सज़ा का ये पहला मामला बना है। लेकिन अगर आरोपों की फेहरिस्त देखें तो गुरमीत सिंह का विवादों के पहले से नाता रहा है। मसलन,

 

 

- सिरसा में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या का आरोप

-डेरा के पूर्व मैनेजर रणजीत सिंह की हत्या के मामले में भी आरोप

-गुरु गोबिंद सिंह जैसी वेशभूषा को लेकर विवाद

-400 डेरा साधुओं को नपुंसक बनाने का मामला दर्ज

-हंसराज चौहान ने जुलाई 2012 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की

-निजी सेना को प्रशिक्षण का आरोप

-कॉमेडियन कीकू शारदा की गिरफ्तारी के लिए दबाव बनाया

 

 

...देखिए और पढ़िए कैसे एक गुमनाम चिठ्ठी ने 20 साल की जेल दिलाई

दरअसल, कानून से बड़ा कोई नहीं, लोकतंत्र में ये मिसाल वाकई बेहद अहम है। उम्मीद है कि इस पूरे मामले से जो पहलू सबक के रूप में निकल रहे हैं वो कई मामलों में मिसाल बनेंगे। हमारी पुलिस,हमारी जांच एजेंसियां, हमारे राजनेता और हम यानि आम जनता...देश ना तो अंधभक्ति से चलेगा और ना ही धर्मान्धता या कट्टरता से...देश संविधान से चलेगा..इस फैसले से इस बात को, इस इबारत को एक फिर पुख्ता रूप से लिख दिया है।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/state-news/ptrika-tv-prime-time-debate-on-judgement-of-gurmeet-ram-rahim-singh-1-1758390/

दिखी लोकतंत्र के दो स्तंभों की ताकत


राजेंद्र शर्मा/ जयपुर। तीन तलाक, निजता और बाबा राम रहीम मामले में न्यायपालिका और पत्रकारिता की ताकत आई सामने ऐसा वीक एंड होगा शायद किसी ने सोचा नहीं था। न तत्काल तीन तलाक के समर्थकों ने, न निजता पर सुप्रीम कोर्ट के अधिकार पर सवाल उठाने वाली केंद्र सरकार ने और न ही डेरा सच्चा सौदा के बाबा राम रहीम ने। खासकर, उन्होंने तो ऐसी कल्पना की ही नहीं होगी, जो लोकतंत्र के तीसरे और चौथे स्तंभ पर संदेह करने लगे थे।

 

वाकई यह सप्ताह न्यायपालिका और पत्रकारिता पर विश्वास को और मजबूत कर गया। इस हफ्ते तीन बड़े फैसले आए, दो सर्वोच्च अदालत के और एक पंचकुला की सीबीआई कोर्ट का। तीनों फैसलों में न्यायपालिका की शक्ति तो सामने आई ही, कलम की ताकत भी सबको माननी पड़ी। असहिष्णुता से शुरू हुई बहस को अभिव्यक्ति की आजादी और आखिरकार निजता के अधिकार तक पहुंचाने वाली प्रेस ही थी। तीन तलाक के मुद्दे को भी मीडिया ने आम किया। जब ये मसले सर्वोच्च अदालत में पहुंचे तो क्या हुआ देखें-

 

तीन तलाक
सुप्रीम कोर्ट ने न्याय की शानदार नज़ीर पेश की। केंद्र सरकार ने तो शरियत के तीनों तरह के तलाक को ही रद्द करने, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को अवैध ठहराने इत्यादि का आग्रह किया था। अदालत ने इसे नहीं माना। सिर्फ तत्काल तीन तलाक यानी वॉट्स एप, फोन, कागज पर या फिर पत्नी को तलाक-तलाक-तलाक बोल किस्मत के भरोसे छोडऩे वाली तलाक पर ही रोक लगाई। बाकी तलाक के तरीकों पर कोई टिप्पणी तक नहीं की।

 

निजता मौलिक अधिकार
निजता मौलिक अधिकार मामले में जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया तो सरकार ने जवाब दिया कि कानून बनाना कोर्ट का काम नहीं, संसद का है। इतना ही नहीं, 'मोदीनीत' सरकार ने यह भी दलील दी कि राज्य की कल्याण योजनाओं के हित में निजता का अधिकार मायने नहीं रखता, तो कोर्ट ने कहा मानवाधिकारों के सबसे बुरे उल्लंघन के समर्थन में यही दलील दी जाती रही है, जबकि गरीब राजनीतिक अधिकार नहीं महज़ आर्थिक विकास चाहते हैं। और आधार कार्ड के डेटा पर सरकार की इस दलील पर कि आधार खतरा या शरीर पर अधिकार नहीं, अदालत ने स्पष्ट किया कि यह दावा तब किया जा रहा है, जब पर्सनल डेटा लीक हो रहा है। सरकार पहले डाटा सुरक्षा के कड़े उपाय सोचे। साथ ही, अदालत ने कहा-निजता यानी प्राइवेसी को मान्यता देना संविधान बदलना नहीं है।

राम रहीम रेप केस
पंचकुला की सीबीआई कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाफ चल रहे यौन उत्पीडऩ के मामले में फैसला सुना दिया है। स्पेशल जज जगदीप सिंह ने फैसला सुनाते हुए राम रहीम को दोषी करार दिया। अब इस मामले में सजा 28 अगस्त को सुनाई जाएगी। जब फैसला सुनाया जा रहा था, तब बाहर खड़े ताकत दिखाते लाखों समर्थकों की हमदर्दी काम न आई और राम रहीम जज जगदीप सिंह के सामने हाथ जोड़े खड़ा था। जब दोषी करार दिया गया, घुटनों के बल बैठ गया आंखों से आंसू छलक पड़े। ये उन आंसुओं का शायद सूद भी नहीं थे, जो यौनशोषण की शिकार और बाद में प्रताडि़त होते वक्त इस कथित बाबा की शिष्याओं की आखों से बरसे होंगे। और तो और, राम रहीम के समर्थकों के हिंसा फैलाने पर कोर्ट ने राम रहीम की सारी संपत्ति जब्त करने का आदेश देकर जता दिया कि कानून और देश से बड़ा कोई नहीं।

 

पत्रकार ने किया था राम रहीम का पर्दाफाश
राम रहीम पर न सिर्फ रेप का, अपितु एक पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या का भी आरोप है। रामचंद्र के बेटे अंशुल को अपने पिता के कत्ल के मामले में इंसाफ का इंतजार है। दरअसल रामचंद्र ने अपने अखबार में 30 मई 2002 के अंक में राम रहीम के खिलाफ साध्वी के साथ रेप का मामला उजागर किया था। दरअसल पत्रकार ने जो चिट्ठी अपने अखबार में छापी थी, वह तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, चीफ जस्टिस पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट सहित कई लोगों को भेजी गई थी।

 

अज्ञात महिला की इस चिट्ठी पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए सिरसा के डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज को इसकी जांच कराने का आदेश दिया, जिसके बाद जज ने यह जांच सीबीआई को सौंपी। फिर दिसंबर 12, 2002 को सीबीआई की चंडीगढ़ यूनिट ने इस मामले में धारा 376, 506 और 509 के तहत मामला दर्ज करते हुए जांच शूरू की। इससे पूर्व 24 अक्टूबर 2002 में रामचंद्र की हत्या उनके घर पर ही गोली मारकर कर दी गई।

 

राम रहीम और सियासत का गठजोड़
वर्ष 2014 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में राम रहीम का समर्थन लेने के लिए बीजेपी के बड़े नेताओं ने उनसे मुलाकात हुई बताई जाती है। इस मुलाकात के बाद डेरा ने बीजेपी को हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी को समर्थन देने का एलान किया था। डेरा के इतिहास में यह पहली बार था कि डेरा ने किसी राजनीतिक दल का खुलकर समर्थन किया था। बाद में, लोकसभा चुनाव में भी डेरा ने बीजेपी को सपोर्ट किया। कई बड़े राजनीतिक दल और उनके नेता बाबा राम रहीम के डेरे पर आशीर्वाद लेते नजर आए हैं। कांग्रेस के नेता भी इस कथित बाबा का आशीर्वाद लेने जाते रहते हैं। बताते हैं २००७ के चुनाव ने डेरा ने अंदरूनी तौर पर कांग्रेस को सपोर्ट किया था।

 

कार्यपालिका सवालों के घेरे में
बहरहाल, समूचे देश को प्रभावित करने वाले इन तीनों ही मामलों में न्यायपालिका और पत्रकारिता की ताकत सामने आई, तो कार्यपालिका यानी सरकार की भूमिका तीनों ही मामलों में गड़बड़ ही दिखी और वह सवालों के घेरे में आ गई। जहां निजता और तीन तलाक के मामले में सरकार की निष्पक्षता पर सवाल उठने की गुंजाइश रह गई, वहीं राम रहीम के मामले में तो लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बिगडऩे की वजह ही सरकार की अदूरदर्शिता रही। इसके कारण देश के कई हिस्सों में हिंसा भड़क गई और निर्दोषों को बलि देनी पड़ी।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/state-news/judiciary-and-journalism-in-democracy-1751298/

अंधभक्ति VS कानून की सख्ती...


विशाल सूर्यकांत


अंधभक्ति और कानून की सख्ती....इन दो शब्दों के बीच कानून-व्यवस्था के बूरे दौर से गुजर रहे हैं हरियाणा और पंजाब....और उसके साथ ही राजस्थान और दिल्ली भी। मुद्दा है राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद हुई हिंसा का...हिंसक आंदोलन की आंच कई राज्यों तक फैल चुकी है। एक और कोर्ट का फैसला है तो दूसरी ओर अंधभक्ति की इंतहा ...। सीबीआई कोर्ट ने 15 साल पुराने मामले में एक धर्मगुरु को दोषी करार दिया और समर्थक इस कदर हिंसक हो गए कि अब तक 28 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की ख़बरें सामने आ रही है और ये आंकडा बढ़ भी सकता है,सैंकडों लोग घायल हैं। भारी पैमाने पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। हिंसा फैला रहे एक हजार से ज्यादा डेरा समर्थकों को हिरासत में लिया गया है। मगर सबसे अहम पहलू ये कि ना सड़क पर,ना पूर्वानुमान में और ना ही इरादों में,कहीं सरकारें नजर आ रही है।

 

 

पंजाब,हरियाणा में पूर्ण बहुमत से चुनी गई सरकारें घुटने टेके हुई नजर आ रही है। फैसला आने से पहले ही पुलिस,प्रशासन इस कदर नाकारा साबित हुआ कि लाखों समर्थक एक-एक कर करीब पांच लाख की तादाद में जुट गए और सरकार आंखे मूंदे बैठे रही। सरकार को बैकफुट पर आता देख हाईकोर्ट सक्रिय हुआ और कानून-व्यवस्था की सारी कमान अपनी मॉनिटरिंग में ले ली। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आज दिए दूसरे बड़े निर्देश में डेरे की संपत्ति जब्त कर नुकसान की भरपाई करने के निर्देश दिए हैं।

 

 

इसे सरकारों की नाकामी क्यों ना मानी जाए जब हाईकोर्ट चेता रहा था, जब धारा 144 लागू होने का असर नहीं दिख रहा था, जब रामपाल और जाट आंदोलन की हिंसक घटनाएं सामने थी, जब 800 गाड़ियों के काफिले में राम रहीम कोर्ट पहुंच थे...ये तमाम परिस्थितियां कुछ संकेत दे रही थी। शुक्रवार को हुई भयावह हिंसा से कई सवाल उठे हैं। मसलन, दोषी बाबा पर इतना बवाल क्यों ? ये अंधभक्ति है या कानून से ऊपर होने का गुमान ? क्या सरकारें सख्त फैसलों से डरती है ? क्या धर्म और राजनीति के मेल का नतीजा है ? .क्यों सरकारें बैकफुट आई, क्यों हाईकोर्ट को आगे आना पड़ा ? देश को कैसे गुरु-चेले चाहिए उपदेशक,सुधारक या हिंसक?

केस का फैसला बाबा के लिए आया। मगर, आफत जनता के सिर आई। राम रहीम के समर्थन में जुटे लाखों भक्त जुटे और सुरक्षा चाक-चौबंद करने के लिेए किस रूप में व्यवस्था करनी पड़ी उसे समझिए कि स्टेडियम खाली करवाया गया। पंचकुला में सीबीआई कोर्ट को जाने वाले रास्तों की बैरिकेटिंग करवाई गई। लेकिन इसके बावजूद पास में कई सरकारी दफ्तरों के सामने डेरा समर्थकों का हुजूम जमा होने लगा।

 

 

सरकार फिर भी नहीं चेती और हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस ने केंद्र को आदेश दिया कि तुरंत सख्त कदम उठाएं। पंचकुला में हजारों डेरा समर्थकों के पहुंचने पर हरियाणा पुलिस को फटकार लगाई। स्थिति को काबू में रखने के लिए 72 घंटों के लिए हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में इंटरनेट बंद रखा गया है। इसके बावजूद हिंसा का ये घटनाक्रम चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया।

 

- देखिए इस वीडियो में हिंसा को लेकर किस रूप में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस

डेरा और बाबा राम रहीम से जुड़े विवादों की लिस्ट पर ज़रा ग़ौर कीजिए -
-----------------------------------------------------------------------
साल 2001 - साध्वी के साथ यौन शोषण का मामला

साल 2002 - पत्रकार रामचंद्र की हत्या का आरोप

साल 2003 - डेरा की प्रबंधन समिति के सदस्य रणजीत सिंह हत्याकांड

साल 2007 - गुरु गोबिंद सिंह के लिबास पर सिखों से विवाद

साल 2010 - डेरा के पूर्व मैनेजर फकीर चंद की गुमशुदगी की मामला

साल 2012 - डेरे के 400 साधुओं को नपुंसक बनाने का आरोप

--------------------------------------------------------------------------------
पढ़िए वो मामला जिसमें बाबा गुरमीत राम रहीम पर लगे थे आरोप-
--------------------------------------------------------------------------------


.पंचकुला में सीबीआई की विशेष अदालत ने दिया फैसला

बलात्कार के मामले में बाबा दोषी करार

डेरा प्रमुख बाबा राम रहीम के खिलाफ साध्वी यौन शोषण समेत दो हत्या के केस चल रहे हैं

एक गुमनाम पत्र के जरिये साध्वी ने डेरा प्रमुख पर यौन शोषण सहित कई संगीन आरोप लगाए थे

हाईकोर्ट ने इसका संज्ञान लेते हुए सितंबर 2002 में सीबीआई जांच के आदेश दिए

सीबीआई ने 31 जुलाई 2007 को आरोप पत्र दाखिल किया

डेरा प्रमुख को अदालत से जमानत तो मिल गई,लेकिन केस सीबीआई अदालत में चला

आज फैसले में अदालत ने दोषी करार दिया.सोमवार को सजा सुनाएगी अदालत

ऐसा है बाबा का रसूख़-


बाबा गुरमीत राम रहीम के रसूख को इस रूप में समझिए कि 700 एकड में उनका आश्रम फैला है। 23 की उम्र में बने डेरा प्रमुख राम रहीम के करोड़ो भक्त होने का दावा किया जाता है। 15 अगस्त, 1967 को राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के गुरुसर मोदिया में जाट सिख परिवार में जन्म हुआ और 23 सितंबर, 1990 को शाह सतनाम सिंह में गुरमीत राम रहीम सिंह को अपना वारिस बनाया।

 

 

डेरा सच्चा सौदा का सर न सिर्फ पंजाब और हरियाणा बल्कि विदेशों में भी फैला है। बाबा गुरमीत राम रहीम लग्जरी गाडियों के काफिले में चलते हैं। काले शीशे और काले रंग की एक जैसी गाड़ियों का एक काफिला बाबा के साथ चलता है। वे जब भी कहीं रुकते हैं तो उनकी गाड़ियों को टैंट से ढंक दिया जाता है। बाबा गुरमीत राम रहीम दावा कर चुके हैं कि उन्होंने विराट कोहली को गुरुमंत्र दिया,जिसके बाद उनका बल्ला चल निकला। बाबा का दावा है कि विराट के साथ शिखर धवन,आशीष नेहरा,जहीर खान,यूसुफ पठान ने भी टिप्स लिए हैं। आखिर कोई कैसे आम इंसान से बन जाता है गॉड मैन, देखिए डिबेट के इस हिस्से में, जहां समाजशास्त्री डॉ.प्रज्ञा शर्मा और मनोवैज्ञानी डॉ. पारूल पारीक बता रही हैं कि बाबा और समर्थकों का मनोविज्ञान और समाजशास्तर के लिहाज से उनके चरित्र का विश्लेषण...

 

- देखिए एक सार्थक बहस के निष्कर्ष इस वीडियो में...गुरू बनाम गुरु घंटाल...

देश के विवादित धर्मगुरुओं की फेहरिस्त में कई नाम है। एक दौर में सभी ने लोकप्रियता का ऐसा चरम हासिल किया कि पूजे जाने लगे लेकिन फिर किरदार में ऐेसे नए आयाम सामने आए कि आज कई विवादों से घिरे हैं, कई जेल में विचाराधीन मामलों में फंस चुके हैं और कई तो आरोप सिद्ध होने के बाद जेल में सजायाफ्ता जीवन जी रहे हैं।

 

संत आसाराम
राधे मां
निर्मल बाबा
स्वामी नित्यानंद
संत स्वामी भीमानंद
चन्द्रास्वामी
बाबा रामपाल
स्वामी परमानंद
स्वामी ज्ञान चैतन्य
स्वामी सदाचारी
ज़ाकिर नाईक

 

 

दरअसल , इस देश में धर्मगुरुओं की एक विरासत सदियों से चली आई है...लेकिन मौजूदा दौर में, प्राचीन धर्मगुरूओं जैसा भेष और आधुनिक परिवेश ऐसा घालमेल दिखता है कि आप कन्फ्यूज हो जाएंगे कि ये संन्यासी हैं या अद्भुत गृहस्थ जीवन ...। तन पर कपड़ों लेकर लग्जरी गाडियां तक,आम भक्त से लेकर वीआईपी भक्त तक, जो डेरों में बैठते हैं लेकिन कई राज्यों की राजनीति को प्रभावित करने का रसूख रखते हैं...जो दरबार लगाते हैं और राजनीति पार्टियों के नेताओं को समर्थन के लिए हर चुनाव में अपनी शरण में बुलाते हैं...आलीशान आश्रम,हेरारकी सिस्टम से जुड़े चेले-चपाटे और शान-ओ-शौकत भरी जिंदगी...ये आजकल के धर्मगुरुओं की पहचान बन रही है। याद रखें कि ये कहते हुए हम कतई सभी साधू-संत और महात्माओं पर टिप्पणी नहीं कर रहे...बहुत से सदाचारी और सच्चे धर्मगुरु हैं जिनसे आस्थाएं जु़डती है।

 

 

लेकिन इन आदर्श स्थितियों के बीच ऐसे लोग पनप रहे हैं जो आस्थाओं का शोषण करने वाले बन बैठे है। हरियाणा में जो हुआ वो क्या रोका नहीं जा सकता था, कैसे कोई धर्मगुरु राज्य से ज्यादा ताकतवर हो सकता है ? अकूत संपत्ति और सैंकड़ों एकड के आश्रमों कैसी संस्कृति पनप रही है, इस पर सरकारों की, जांच एजेंसियों की नजर क्यों नहीं पड़ी। वोट बैंक की राजनीति ने राजनीतिक सरकारों को कभी ऐसा करने का साहस नहीं दिया। मगर,देश को विश्वगुरु बनाने के लिए हमें देश के भीतर कैसी गुरु और चेला संस्कृति पनपानी है ये तय करना होगा।

 

 

हाईकोर्ट ने जिस रूप में इस मामले में अपनी भूमिका निभाई है वो वाकई तारीफ-ए-काबिल है। क्योंकि अगर हाईकोर्ट से वक्त पर एक्शन से हिंसा पर काफी हद तक लगाम लगी, संपत्ति जब्त करने के निर्देश हिंसक आंदोलनकारियों के हौंसले जरूर पस्त करेगा। सोमवार को जब फैसला सुनाया जाएगा, हरियाणा,पंजाब,राजस्थान,दिल्ली जैसे राज्यों में एक बार सरकारों को कानून-व्यवस्था की अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा। ये स्थिति वाकई चिंताजनक है।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/state-news/ptrika-tv-prime-time-debate-on-gurmeet-ram-rahim-singh-verdict-1-1749622/

अमित शाह की इस खास रणनीति को मिलता पीएम मोदी का साथ, बीजेपी को होता लाभ


वाराणसी. वर्ष 2014 में हुए संसदीय चुनाव में बीजेपी को बड़ी जीत मिली है इसके बाद भी यह सिलसिला थमा नहीं है। बीजेपी ने पहले देश की सत्ता पर कब्जा किया है और फिर राज्यों में भी तेजी से भगवा सरकारे बन रही है। देश की राजनीति में आये बदलाव की वजह पीएम मोदी की छवि व अमित शाह की रणनीति मानी जा रही है। फिलहाल बीजेपी ने संसदीय चुनाव 2019 के लिए बढ़त बना ली है यदि विरोधी दल सही ढंग से अपनी भूमिका नहीं निभा पाते हैं तो बीजेपी को रोकना आसान नहीं होगा।
यह भी पढ़े:-अखिलेश यादव को हिरासत में लिए जाने पर भड़के सपाई, पीएम के संसदीय क्षेत्र मे दिखायी ताकत 


बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अभी से संसदीय चुनाव 2019 की रणनीति बना ली है और उसी अनुसार कार्य करने में जुट गये हैं। दूसरी तरफ विपक्षी दलों का हाल बेहाल है। सपा, कांग्रेस, बसपा जैसे दल अभी तक यह तय नहीं कर पाये हैं कि उन्हें संसदीय चुनाव अकेले लडऩा है या फिर गठबंधन करके। बीजेपी ने तैयारी के मामले में विरोधी दलों पर बढ़त बना ली है। अमित शाह को ऐसे ही नहीं बीजेपी का चाणक्य कहा जाता है। अमित शाह ने उन सीटों पर भी बीजेपी को जीत दिलायी है, जहां पर पार्टी का खाता तक नहीं खुलता था इसकी मुख्य वजह विरोधी दलों में सेंधमारी है। बीजेपी सूत्रों की माने तो पार्टी इस रणनीति पर अभी भी काम कर रही है। अमित शाह जानते हैं कि पीएम नरेन्द्र मोदी जैसा नेता की लहर में भी प्रत्याशी नहीं जीतता है तो फिर दूसरे दल के जीतने वाले प्रत्याशी पर दांव लगाना सही होता है। वर्ष 2014 संसदीय व यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में बीजेपी ने यही दांव खेला था और अब ऐसे सीटों की सूची बनायी गयी है जहां पर संसदीय चुनाव 2019 में बीजेपी की जीतने की संभावना है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि इन सीटों पर बीजेपी दूसरे दल के प्रत्याशियों को तोड़ कर कमल के निशान पर चुनाव लड़ाये।
यह भी पढ़े:-चोटी कटवा को पकड़ कर पुलिस को सौंपा, फोरेंसिक जांच में होगा खुलासा 

बीजेपी ने पहले ही दिये हैं प्रत्याशियों के बदलने के संकेत
सदन में अनुपस्थित रहने वाले बीजेपी सांसदों के प्रति पीए मोदी ने नाराजगी जतायी है और बीजेपी ने यह तक कहा है कि कई लोग के टिकट काट कर अपको दिया गया था और संसदीय चुनाव 2019 में अनुपस्थित रहने वालों सांसदों को हिसाब लिया जायेगा। इससे साफ हो जाता है कि संसदीय चुनाव 2019 aaमें बीजेपी अपने कई सांसद का टिकट काट कर नये चेहरे या फिर दूसरे दल से आये नेताओं को प्रत्याशी बना सकती है। फिलहाल तैयारी व रणनीति की बात की जाये तो बीजेपी अपने विरोधियों से आगे निकल चुकी है।
यह भी पढ़े:-प्रशंसनीय कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों का हुआ सम्मान 


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/state-news/amit-shah-new-plan-to-win-parliamentary-election-2019-win-hindi-news-1-1727576/

देश को आजाद कराने में शहीद हो गए थे ये गुमनाम हीरो


मुरादाबाद। आज हम भारत की आजादी का जश्न मना रहे हैं। भारत के 125 करोड़ लोग तिरंगा फहराकर भारत की आजादी के जश्न में डूबे हैं। एक बार आजाद मुल्क में सांस लेकर हम उन शहीदों को याद करेंगे, जिनकी कुर्बानियों से हमको आजादी मिली। उसके लिए हमारे पूर्वजों ने कितनी ही कुर्बानियां दीं। उसमे से हमें कुछ कुर्बानी याद हैं और कुछ इतिहास के पन्नों में गुम हो गईं। ऐसी ही कुछ गुम कुर्बानियों के बारे में हम आपको बता रहे हैं।

सूफी अम्बा प्रसाद

सूफी अम्बा प्रसाद के पिता गोविंद प्रसाद भटनागर मुरादाबाद के अगवानपुर के रहने वाले थे। 1835 में वह शहर के कानून गोयन मोहल्ले में आकर रहने लगे थे। यहां आकर उन्होंने अपना छापा खाना यानी अखबार चलाने के लिए प्रिंटिंग मशीन लगाई। माना जाता है क‍ि सूफी अंबा प्रसाद का जन्म 1858 में हुआ था। उनको हिंदी, उर्दू, फारसी का बहुत अच्छा ज्ञान था। 1887 में उन्होंने सितारे हिंद अखबार निकाला था। 1890 में जमा-बुल-उलूम नाम से पत्रिका शुरू की थी। अखबार और पत्रिका दोनों उर्दू में थीं। अखबार के माध्यम से वह लोगों को आजादी की लड़ाई के लिए प्रेरित करते थे। अंग्रेजों को यह बात अच्छी नहीं लगी और अंबा प्रसाद की गिरफ्तारी के लिए अंग्रेज दबिश देने लगे। अंग्रेजों से बचने के लिए वो 1905 में मुरादाबाद से पंजाब निकल गए। इनकी मृत्यु ईरान में हुई थी, जहां आज भी ईरान में उनकी मजार पर मेला लगता है। कानून गोयन में आज भी छापा खाना है।

शहीद हुए कई गुमनाम

सन् 1930 में नमक सत्याग्रह आंदोलन चलाने के लिए मुरादाबाद के टाउनहाल पर हजारों की संख्या में लोग एकत्र हुए थे। अंग्रेजों ने इन आंदोलनकारियों को ति‍तर-बितर करने के लिए गोली चलवा दी, जिसमें मदन मोहन, रहमत उल्लाह, लतीफ अहमद, नजीर अहमद और चार गुमनाम लोग शाहिद हो गए। इसके विरोध में जामा मस्जिद पर सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।

नहीं पता चला शहीदों का

9 अगस्त 1942 को मुरादाबाद जिले के लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके विरोध में 10 अगस्त को राम मोहन लाल के नेतृत्व में एक जुलूस निकाला जा रहा था। पान दरीबा पर जुलूस निकाल रहे लोगों को ति‍तर-बितर करने के लिए अंग्रेज डीएम वा पुलिस कप्तान ने गोली चलवा दी, जिसमें मोती लाल, मुमताज खां, झाऊलाल, राम प्रकाश और 11 वर्षीय जगदीश शाहिद हो गए। सैकड़ों घायल आंदोलन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था। सैकड़ों शहीदों का अता-पता तक नहीं चला, जिसके विरोध में कांकाठेर व मछरिया रेलवे स्टेशन जला दिया गया। शहीदों की याद में है पान दरीबा पर शहीद स्मारक बना हुआ है।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/state-news/independence-day-2017-story-of-unknown-heroes-of-moradabad-1717898/

स्वतंत्रा दिवस: देश के लिए सबक था 1962 का चीन से युद्ध, अब पंगा लेना पड़ सकता है महंगा


वीरेंद्र शर्मा, ग्रेटर नोएडा. डोकलाम को लेकर चीन और भारत की सेनाएं आमने-सामने आ गई है। चीन ने 1962 के युद्ध से भारत को सबक लेने की नसीहत भी दी है। चीन की घुसपैठ को देखते हुए भारत ने भी सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी है। सेना के पूर्व अफसरों की मानें तो 1962 में चीन ने धोखा देकर पीछे से वार किया था। यह युद्ध भारत के लिए सबक था। तभी भारत ने उसके बाद में पाकिस्तान को युद्ध में हराया था।

यह भी पढ़ें- 'हम पहले मुस्लिम हैं भारतीय बाद में, मदरसों पर तिरंगा नहीं फहराएंगे'

रिटायर्ड लेफ्टीनेंट कर्नल जगवीर सिंह ने बताया कि एक तरफ जहां चीन ने उस दौरान हिंदू-चीनी भाई-भाई का नारा दिया था। वहीं पीठ पीछे छूरा घोपा था। उन्होंने बताया कि उस दौरान भारत के पास में हथियार कम थे। साथ कुछ सैनिक सामने से लड़े तो पीछे से भी पहुंच गए थे और उन्होंने सभी संचार के माध्यम को ध्वस्त कर दिया था। जिसकी वजह से सैनिकों को काफी दिक्कत हुई थी। युद्ध के दौरान सैनिकों को मदद नहीं मिल सकी थी। जिसकी वजह भी भारत को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। वहीं रिटायर्ड कर्नल सोम शर्मा ने बताया कि देश पूरी तरह सक्षम है।

अब बदल गए हैं हालात

लेफ्टीनेंट कर्नल जगवीर सिंह ने बताया कि 1962 युद्ध में भले ही भारत को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन 1965 और 71 में हुए युद्ध में पाकिस्तान को सबक सिखाया था। उन्होंने बताया कि अब हालात बदल चुके हैं। सेना अत्याधुनिक हत्यारों से लैस है। देश में हाईटेक असहलों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि भारत की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई दे रही है, जबकि चीन लगातार बयानबाजी कर रहा है। उन्होंने बताया कि युद्ध करना चीन भी नहीं चाहता है। उसे भी मालूम है कि युद्ध होने से उसका भी भारी नुकसान होगा।

Retired Colonel Javagir Singh

सरकार भी रही जिम्मेदार

इसके लिए सरकार भी जिम्मेदार रही है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस सरकार ने जवानों के हित में कोई ठोस कदम नहीं उठाए। मोदी सरकार ने जवानों के हित में कई कदम उठाए हैं। जवानों की सोच में परिवर्तन आया है। सर्जिकल स्ट्राइक कर बॉर्डर पर तैनात जवानों ने अपनी शौर्य का परिचय दिया है।

राष्टपति कर चुके है सम्मानित

रिटायर्ड लेफ्टीनेंट कर्नल जगवीर सिंह ग्रेटर नोएडा के एडब्ल्यूएचओ सोसाइटी में रहते है। इन्होंने 1965 और 1971 की लड़ाई लड़ी है। 1971 में उन्हें तत्कालीन राष्टपति वीवी गिरी ने महावीर चक्र देकर सम्मानित किया था।

Retired Colonel Javagir Singh

Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/state-news/war-of-china-1962-soldiers-condition-independence-day-special-story-news-in-hindi-1715530/

1947 इंडिया पार्टिशन: अगर सरदार पटेल न होते, तो जिंदा भारत न आ पाते- देखें वीडियो


मुजफ्फरनगर। विभाजन या बंटवारा किसी देश, भूमि या सीमा का नहीं होता है। विभाजन तो लोगों की भावनाओं का हो जाता है। विभाजन का दर्द वे ही अच्छी तरह जानते है, जिन्होंने इसको सहा है। हम बात कर रहे हैं 1947 में हुए बंटवारे की। इसमें लोगों को जो दर्द मिला है, वो आज भी सालता है। हम आपको बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आए कुछ ऐसे लोगों से मिलवाते हैं, जो आज भी उन दिनों को भुला नहीं पाए हैं।

 

 बहुत खराब थी स्थिति

बंटवारे का दर्द झेल रहे प्रकाशलाल ने बताया, उस समय उनकी उम्र 17 साल थी, जब वो पाकिस्‍तान से यहां आए थे। उस समय बहुत खराब स्थिति थी। सारी गाड़‍ियां रोक दी गई थी। पटेल की मेहरबानी से वो यहां पहुंचे थे। रोते हुए उन्‍होंने कहा, बंटवारे के बाद रातो-रात कत्‍लेआम शुरू हो गया था। मेरा बहुत बड़ा परिवार था। मेरे परिवार के कई लोग काफिले के साथ मारे गए थे। हम पाकिस्‍तान से निकलकर अमृतसर आए थे। बंटवारे में हमारा सब कुछ छिन गया था। वो मंजर यादकर आज भी रोना आता है। वहीं, किशनलाल ने बताया, बंटवारे से पहले उनका परिवार पाकिस्‍तान के गुजरात जिले में था। सेना ने ट्रेनों नें बैठाकर हमें यहां भेजा। जालंधर के बाद हम हरियाणा और फिर खतौली आ गए। उस समय मारकाट बहुत ज्‍यादा हुई। 

 

दंगाई बनाने लगा निशाना

1947 में जब भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ, उस समय जमुना देवी की उम्र पंद्रह साल थी। वो पाकिस्‍तान में जिला डेरा गाजी खां में रहती थीं। बंटवारे का वह मंजर आज भी उनके जेहन में ताजा है। जिक्र करते ही आंखाें में आंसू छलक पड़ते हैं। वह कहती हैं, राजनीति के बिसात पर बैठे सियासतदानाें की वजह से हजारों जानें चली गईं। दोनों देशों के बीच ऐसे नफरत के बीज बो दिए गए, जिसकी खाई आज तक नहीं भर पाई। वो बताती हैं, बंटवारे के बाद पाकिस्तान में हालात बेहद खराब हो गए थे। पाकिस्तान सरकार ने घोषणा की कि जिस हिंदू परिवार को हिंदुस्तान जाना है, वह जा सकता है। यह घोषणा होते ही दंगाई हमारे परिवाराें को निशाना बनाने लगे। एक ही दिन तीन गाड़ियां हिंदुस्तान के लिए रवाना हुईं। दंगाइयों ने ट्रेनें लूट लीं। बहू-बेटियों को उठा ले गए। हमारे परिवार को भी दंगाइयों ने निशाना बनाना शुरू कर दिया। किसी तरह छुपते-छुपाते अपने घर की इज्जत को उनके पिता ने बचाई। कई रात इधर-उधर भटकते रहे। फिर हिंदुस्तान सरकार ने हिंदुओं को लाने की मुहिम शुरू की। जमुना देवी का पूरा परिवार किसी तरह ट्रक में बैठकर 48 घंटे की लंबी यात्रा के बाद मुदफ्फरगढ़ पहुंचा। काफिले के साथ भारत की सेना चल रही थी। इसकी वजह से दंगाइयों ने ट्रक को निशाना नहीं बनाया। हालात इस कदर खराब हो गए थे कि ट्रेन की पटरियों को उखाड़ दिया जा रहा था। उसके बाद 6 महीने अटारी और 7 महीने रेवाड़ी के सरकारी कैंप में रहने के बाद तत्कालीन सरकार के पलवल में दिए गए 25 गज के मकान में रहने के बाद 1950 में जमुना देवी का परिवार मुजफ्फरनगर आ गया। तब से अब तक जमुना देवी मुजफ्फरनगर में रह रही हैं।

 

 पांच दिन तक पानी भी नहीं मिला

जोर से बोलने पर सुनने वाली लक्ष्‍मी देवी ने बताया, मेरे पिता जी वैद्य थे। बंटवारे के समय हम खाली हाथ आए थे। यहां से मदद मिली। जब हम निकले तब 36 घंटे दंगे होता रहा। पूरा का पूरा माेर्चे में कत्‍ले आम किया गया। मरने वालों की कोई गिनती नहीं थी। मालगाड़ी से हमें लाया गया। लालामूसा स्‍टेशन पर गाड़ी रोक दी गई। हमें मारने की तैयारी की थी। पांच दिन तक भूखा रखा गया। पानी भी नहीं मिला। फिर पटेल की वजह से हम अमृतसर पहुंचे। उस समय उनकी उम्र 15 साल थी। जो गांव में थे सब मारे गए। दंगाई आ गए तो बताया क‍ि भारतीय सेना आ गई। जब सब वहां पहुंचे तो दंगाइयों ने सबको मार गया। मिहाली जिले में ये सब हुआ था। जब बंटवारा हुआ था, तब मेरी शादी को तीन माह हुए थे। बंटवारे की सोच कर जल्‍दी शादी कर दी गई थी।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/state-news/1947-india-partition-stories-in-hindi-1715152/

स्वतंत्रा दिवस स्पेशल: नोएडा के इस गांव में शहीदों ने ली थी पनाह, फिर बनाये थे अंग्रेजों पर हमले के लिए बम


नितिन शर्मा, नोएडा. देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले क्रांतिकारियों ने नोएडा के नलगढ़ा गांव को अपना ठिकाना बनाया था। उस समय दिल्ली के नजदीक होने के कारण इस गांव में बना विजय सिंह पथिक आश्रम आजादी के दीवानों के लिए महफूज जगह बन गया था। अंग्रेजी सेना पर हमला करने के बाद क्रांतिकारी यहां आसानी से छिप जाते थे। बीहड़ क्षेत्र होने की वजह से अंग्रेजी सेना का यहां पहुंचना संभव नहीं था।

शहीद भगत सिंह व चंद्रशेखर आजाद आश्रम में बम बनाते थे। गांव में बिखरी निशानियां आज भी इसकी गवाही देती है। असेंबली पर फेंका गया बम भी यहीं बनाया गया था। उन्हीं की मदद करने वाले और चेंद्रशेखर आजाद के गौत्र के परिवार के लोग आज भी इस गांव में बसते हैं।

 

नोएडा के इस गांव में शहीदों ने ली थी पनाह, फिर बनाये थे बम

चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, सुखदेव व भगत सिंह जैसे महान क्रांतिकारियों ने भी यहां पनाह ली थी। भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और उनके साथियों ने दिल्ली के नजदीक होने के कारण नलगढ़ा को अपना ठिकाना बनाया था। इन सब में उनका साथ यहां रहने वाले सिंधू परिवार के ही करैनल सिंह ने दिया था। करैनल सिंह कर्नल थे। इसके साथ ही सुभाष चंद्र बोष का स्पीच पढ़ते थे। उनका परिवार आज भी यहां रहता है। उनके बेटे की पत्नी मनजीत कोर ने बताया कि चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु आैर सुखदेव वह यहां तीन वर्ष तक छिपकर रहे। अंग्रेज सेना पर हमला करने की रणनीति बनाने के अलावा आंदोलन को सहीं रास्ता देने के लिए भी योजना बनार्इ गर्इ थी।बम बनाने के लिए बारूद व अन्य सामग्रियों को जिस पत्थर पर रखकर मिलाया जाता था। वह ऐतिहासिक पत्थर आज भी गांव में मौजूद है। पत्थर में दो गढ्ढे हैं, जिसमें बारूद को मिलाया जाता था। इन निशानियों को ग्रामीणों ने सहेज कर रखा गया है। अब इस पत्थर को लोगों ने गांव के बीच मौजूद गुरूद्घारे में रखा है।

 

पत्थर से लेकर पुरानी तस्वीर आैर अन्य सामान भी है इसका गवाह

मनजीत कोर ने बताया कि नलगढ़ा में उस समय जगल हुआ करता था। यह गांव दिल्ली के पास होने की वजह से ही भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु आैर सुखदेव ने इसको अपना अड्ड बनाया था। वे सभी यहां जंगल में पत्ते व पेड़ पर लगे फल खाकर गुजारा करते थे। इसके साथ ही दिन- रात यहां बारूद आैर हथ गोले बनाने में जुटे रहते थे। जिस पत्थर पर वह सब लोग बारूद पीसते थे। वह पत्थर आज भी गांव में मौजूद है। इस पर पत्थर एक सतह घिसे जाने की वजह से बहुत ही प्लेन हो गर्इ है। इसके साथ ही इसमें दो बड़े छेद भी है। जिनमें बारूद को पीसा जाता था। इतना ही नहीं मनजीत कौर के पास उस समय के फोटों भी मौजूद है।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/state-news/nalgarh-village-of-noida-freedom-fighter-independence-day-2017-special-story-hindi-1713026/

अपने तिरंगे की ऊंचाई ने बढ़ाई देश की शान, जानिए सबसे बड़ा तिरंगा है कहां


भोपाल। हर देश का अपना एक राष्ट्र ध्वज होता है। यह उस देश की आजादी और उसकी आन, बान और शान का प्रतीक होता है। इसमें देश की नागरिकों की गहरी आस्था होती है। भारत की आजादी का भी प्रतीक है तिरंगा।

 

राष्ट्रीय ध्वज का सबसे ऊपरी केसरिया रंग बलिदान का प्रतीक माना गया है, जबकि सफेद रंग राष्ट्र की शांति, शुद्धता और ईमानदारी का प्रतीक है, वहीं हरा रंग विश्वास, ऊर्वरता, खुशहाली, समृद्धि और प्रगति को दर्शाता है। इसके बीच में स्थिति अशोक चक्र की 24 तिलियां पूरे 24 घंटों को दर्शाती है। यह हिन्दू धर्म के 24 धर्म ऋषियों को भी दर्शाती है।

mp.patrika.com आपको गणतंत्र दिवस के मौके पर बताने जा रहा है देश का वह प्रतीक जो कई प्रदेशों में बड़े ही शान से लहरा रहा है। जो अपने आप में विश्व में सबसे ऊंचे होने के लिए प्रसिद्ध हैं तो कुछ सबसे बड़े होने के लिए जाने जाते हैं।

MP की राजधानी में है 235 फीट ऊंचा तिरंगा

मध्यप्रदेश मंत्रालय के सामने सरदार वल्लभ भाई पटेल पार्क में 90 फीट लंबा,60 फीट चौड़ा और 235 फीट ऊंचा तिरंगा है। 27 मई 2015 को फहराया गया था। राजधानी भोपाल में यह झंडा पहाड़ी पर होने की वजह से दूर-दूर से देखा जा सकता है। शाम को इस झंडे को देखने के लिए बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं और देशभक्ति के प्रतीक चिह्न इस झंडे के साथ सेल्फी लेते हैं।

एक नजर में
1. तेलंगाना 303 फीट
2. रांची – 293 फीट
3. लखनऊ- 270 फीट
4. रायपुर – 269 फीट
5. फरीदाबाद– 250 फीट
6. भोपाल- 235 फीट
7. कनाट प्लेस दिल्ली- 207 फीट

यह भी है खास

-भोपाल शहर में फहराया गया तिरंगा तेज हवा में कई बार फट चुका है।
-झंडे को सिलवाने के लिए प्लेन से मुंबई भी भेजा जा चुका है।
- इस तिरंगे को उतारने के लिए करीब 30 आदमी चाहिए होते हैं।
- ये तिरंगा दुनिया का पांचवा सबसे बड़ा झंडा है।
- इसकी लागत खंभे समेत करीब 1 करोड़ रुपए है।
- तिरंगे की कीमत डेढ़ लाख रुपए है।
- इसका आकार 60 गुणा 90 फीट का है।
- पोल की ऊंचाई 235 फीट है।
- विश्व का सबसे बड़ा झंडा सउदी अरब में है, लेकिन ये तिरंगा नहीं है। ये जेद्दा में लगा है।
उसका आकार 110 गुणा 165 फीट है और ऊंचाई 558 फीट।
-फरीदाबाद का झंडा लिमका बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज है।

यहां है विश्व का सबसे ऊंचा और बड़ा झंडा

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने 24 जनवरी 2016 को रांची के पहाड़ी मंदिर पर विश्व का सबसे ऊंचा और सबसे बडा़ तिरंगा फहराया था। यह तिरंगा 66 फीट लंबा, 99 फीट चौड़ा है
और इसे 293 फीट ऊंचे खंभे पर फहराया गया है।

यहां हैं देश का दूसरा सबसे ऊंचा झंडा

फरीदाबाद के टाउन  पार्क में देश का दूसरा सबसे ऊंचा झंडा फहराया गया था। यह 250 फीट ऊंचा है। इसका वजन 48 किलोग्राम है। यह कनाट प्लेस के ध्वज से 17 किलो ज्यादा वजनदार है।

लखनऊ में लहराता है 270 फीट ऊंचा झंडा

उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में 22 नवंबर को 270 फीट ऊंचा तिरंगा फहराया गया। जनेश्वर मिश्र उद्यान में में लगाया गया है। यह पालीएस्टर फ्रैब्रिक से तैयार किया गया था। यह झंडा 194 गुणा 129.33 फीट है। इसका वजन 209 किलोग्राम है। यह झंडा इतना बड़ा है कि इसका नाम लिम्का बुक आफ रिकार्ड में भी दर्ज है।

यहां से सबसे बड़े आकार का झंडा

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में देश का सबसे बड़े आकार का तिरंगा 30 अप्रैल को फहराया गया था। 105 फीट लंबा और 70 फीट चौड़ा झंडा तेलीबांधा इलाके में फहराया गया है। इसकी ऊंचाई 269 फीट है।

तेलंगाना में भी लहराता है तिरंगा

आंध्र प्रदेश से अलग होने के बाद नया राज्य बना तेलंगाना ने अपनी दूसरी सालगिरह के मौके पर 92.35 मीटर ऊंचा राष्ट्र ध्वज फहराया। यह तिरंगा हैदराबाद की हुसैन सागर तालाब के पास संजीवया उद्यान में फहराया गया है।

दिल्ली के कनाट प्लेट लगा 207 फीट का झंडा

दिल्ली के कनाट प्लेस स्थित सेंट्रल गार्डन में देश का सबसे बडा़ तिरंगा फहराया गया था। यह तिरंगा साठ फीट चौड़ा और 90 फीट लंबा है। तिरंगे की ऊंचाई 207 फीट है।

लाहौर से नजर आएगा यह तिरंगा
अटारी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर देश का सबसे ऊंचा तिरंगा लहराएगा, जो पाकिस्तान के लाहौर से भी नजर आएगा। यह 350 फीट ऊंचा रहेगा जो देशभर में सर्वाधिक ऊंचा होगा। इसको बनाने की तैयारी दिसंबर अंत में शुरू हो गई थी। इसकी लागत करीब साढ़े चार करोड़ रुपए आएगी।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/state-news/largest-and-highest-national-flag-in-world-1693630/

नशे में टल्ली महिला का हाई वोल्टेज ड्रामा- बीच सड़क पर पुलिसवाले को करने लगी KISS


आधी रात को शराब के नशे में टुल्ल मैडम ने हाई वोल्टेज ड्रामा किया। मैडम के सिर पर नशा इस कदर चढ़ा था कि उसने बीच सड़क पर पुलिसवाले को किस करना शुरू कर दिया। पुलिस ने महिला को संभाला और फिर नशा कम होने पर घर जाने दिया। तो वहीं महिला की गाड़ी का ड्रंक एंड ड्राइव मामले में चालान काटा गया है। 



घटना बुधवार रात करीब 12 बजे महानगर के चिंगड़ीघाटा मोड़ के पास की है। जहां 38 वर्षीय महिला अपनी कार में एक आदमी और एक महिला दोस्त के साथ लेट नाइट पार्टी कर घर लौट रही थी। महिला नशे में चूर थी। कहीं जा रही थी। कार वह खुद चला रही थी। 



महिला ने पहले डिवाइडर को टक्कर मारी और जब एक ओला चालक उनकी मदद करने पहुंचा तो मैडम ने उसके चेहरे और शरीर के विभिन्न हिस्सों को नाखून से खरोच दिया। पास में ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड का जवान पहुंचा तो सड़क पर लड़खड़ाते चल रही महिला ने पुलिसवाले को किस करना शुरू कर दिया। 



इसके बाद स्थिति को कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने एक स्थानीय महिला की मदद ली। नशे में धुत महिला और दो अन्य साथियों को पुलिस थाने ले जाया गया। जिसके बाद तीनों को नशे में ड्राइविंग और रैश ड्राइविंग के केस में गिरफ्तार किया गया है। 



पुलिस के मुताबिक महिला के गाड़ी पर प्रेस का स्टीकर लगा हुआ था। तो वहीं गाड़ी में सवार अन्य समेत महिला कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट की रहने वाली है। सभी नाईट पार्टी से लौट रहे थे।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/state-news/drunk-woman-kiss-policeman-after-getting-into-accident-in-kolkata-2638490/

मुंबई एयरपोर्ट से लश्कर-ए-तैयबा के संदिग्ध आतंकी सलीम खान गिरफ्तार


लश्कर-ए-तैयबा के एक संदिग्ध, सलीम मुकीम खान को मुंबई हवाईअड्डे से गिरफ्तार कर लिया गया। वह पिछले नौ वर्षों से फरार था। एक अधिकारी ने सोमवार को कहा कि उत्तर प्रदेश एटीएस और महाराष्ट्र एटीएस द्वारा एक संयुक्त अभियान चलाया गया। खान से यहां पूछताछ की जा रही है।



खान 2008 से ही वांछित था और उसके खिलाफ एक लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। खान को उस समय गिरफ्तार कर लिया गया, जब वह किसी अज्ञात स्थान से मुंबई पहुंचा। वह उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में बांदीपुर पुलिस थानांतर्गत आने वाले गांव, हथगांव का निवासी है।



जांचकर्ताओं ने कहा कि लुकआउट नोटिस के आधार पर खान को मुंबई हवाईअड्डे से गिरफ्तार किया गया। उत्तर प्रदेश एटीएस को सूचित किया गया, जिसने आगे की जांच के लिए एक टीम को मुंबई भेजा।



रामपुर में सीआरपीएफ शिविर पर 2008 में किए गए हमले के लिए गिरफ्तार किए गए दो आतंकियों ने पुलिस से कहा कि खान ने पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद में स्थित एक आतंकी शिविर में प्रशिक्षण ले रखा था। जांचकर्ताओं के अनुसार, वह पाकिस्तानी आईएसआई एजेंट आफताब का आका भी था, जिसे फैजाबाद में गिरफ्तार किया गया। खान आफताब को धन भेजता था।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/state-news/suspected-let-terrorist-arrested-from-mumbai-airport-2630426/

पहले की फेसबुक पर लड़की से दोस्ती, फिर शादी के नाम पर डेढ़ साल तक करता रहा शारीरिक शोषण


दिल्ली में फेसबुक पर दोस्त बनाना एक लड़की के लिए दुखद साबित हुआ। जहां लड़की को उसके फेसबुक दोस्त ने शादी का झांसा देकर उसके साथ लगातार डेढ़ साल तक शारीरिक संबंध बनाता रहा। लव सेक्स और धोखे से जुड़ी ये वारदात दक्षिणी दिल्ली के वसंत कुंज की है। तो वहीं पीड़िता के शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। 



दरअसल, डेढ़ साल पहले 26 साल की एक युवती की दोस्ती रोहित नाम के लड़के से फेसबुक के जरिए हुई। जिसके बाद कुछ दिनों की ये दोस्ती आपसी बातचीत के दौरान प्यार में तब्दील हो गई। जिसके बाद दोनों प्रेमी युगल की तरह घर से बाहर मिलने लगे। मुलाकात का फायदा उठाकर लड़के ने लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाने की मांग कर दी।



शारीरिक संबंध की मांग को लड़की ने खारिज कर दिया। जिसके बाद लड़के ने मामले को संभालते हुए युवती से शादी का वादा किया। फिर जब लड़की युवक के झांसे में आते दिख गई तो उसने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए हामी भरवा ली। इसके बाद आरोपी युवक लगातार युवती के साथ शारीरिक संबंध बनाता रहा। लेकिन वह शादी की बात को अक्सर टाल देता था। इसी दौरान लड़की गर्भवती भी हो गई, लेकिन उसने लड़की का गर्भपात करा दिया। 



मामले को लेकर तब खुलासा जब लड़की को पता लगा कि आरोपी युवक का संबंध किसी और लड़की से भी है। जिसके बाद लड़की को समझ आया कि झूठे प्रेमजाल में फांसकर युवक उसके साथ लगातार डेढ़ साल तक बलात्कार करता रहा। इस रिश्ते आहत लड़की ने फिर मामले की शिकायत पुलिस को कर दी। जिसके बाद पुलिस ने मामले पर संज्ञान लेते हुए आरोपी लड़के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। 



फिलहाल पुलिस आरोपी युवक की तलाश में जुटी है। जो कि मामले की शिकायत के बाद से ही फरार है।


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/state-news/friendship-with-the-girl-through-facebook-raped-pretext-of-marriage-2627520/

कॉलेज में नहीं था शिक्षक, तो DM की पत्नी बेटियों का भविष्य संवारने के लिए बन गईं टीचर


वैसे तो कई प्रशासनिक अधिकारी किसी जिले में अपनी कमान संभालते हैं और फिर अपना कार्यकाल पूरा कर किसी दूसरे जगह के लिए चले जाते हैं। लेकिन यहां रुद्रप्रयाग में एक ऐसा हाकिम देखने को मिला जो अपनी ड्यूटी के साथ समाज के प्रति अपनी संवेदनशालता को लेकर भी उतना ही सजग दिखा। जिले की सरकारी राजकीय छात्रा इंटर कॉलेज की दशा को देख डीएम मंगेश घिल्डियाल ने ऐसा कि लोगों के लिए वह खास बन गए। 



दरअसल, डीएम मंगेश यहां इंटर कॉलेज में रुटीन दौरा के तौर पर गए थे। लेकिन वहां जाने के बाद उन्हें पता लगा कि स्कूल में विज्ञान विषय पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक नहीं है। इसके बाद समाधान खोजने निकले डीएम ने खुद अपनी पत्नी से इस बारे में बातचीत की। उनकी पत्नी ऊषा घिल्डियाल जो खुद पंतनगर यूनिवर्सिटी से प्लांट पैथलॉजी में पीएचडी कर रखी है। मंगेश ने उन्हें स्कूल में साइंस पढ़ाने को कहा। और पत्नी भी उनकी बात मान गई। 



और उसके बाद डीएम मंगेश ने फैसला लिया कि जब तक कन्या इंटर को नया साइंस टीचर नहीं मिल जाता है। तब तक उनकी पत्नी इस स्कूल में बच्चों को पढ़ाएंगी। इस बारे जब मंशेल से बातचीत हुई तो उन्होंने कहा कि वह रुटीन दौरा पर स्कूल गए थे। लेकिन देखा कि टीचर की समस्या के कारण कुछ बच्चे दूसरी जगहों पर दाखिला लेने को विवश थे। जिसे लेकर उन्होंने अपनी पत्नी से बातचीत की और उनकी पत्नी ने भी उनके फैसले का स्वागत किया। 



साल 2011 बैच के आईएएस मंगेश घिल्डियाल ने इस बारे में हालांकि किसी को बताने से साफ मना कर रखा था, लेकिन इस तरह की समाजिक संवेदना से जुड़ी बाते किसी ना किसी जरिए लोगों तक पहुंच ही जाती है। तो वहीं मंगेश यूपीएएसी की परीक्षा में पूरे देश में चोथी रैंक हासिल की है। उन्होंने बताया कि स्कूल में टीचर की कमी को देखते हुए शासन स्तर पर जल्द ही शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया शुरु की जाएगी। 


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/state-news/rudraprayag-district-magistrate-wife-usha-ghildiyal-teaching-in-science-to-college-grils-2625795/

पीएम मोदी को लेकर आपस में भिड़े दूल्हा-दुल्हन, रिश्ता जुड़ने से पहले ही टूटा


वैसे तो समाज में कई ऐसे नजदीकी दोस्त या रिश्तेदार मिल जाते हैं, जिनकी राजनीतिक विचारधारा एक दूसरे से मेल नहीं खाती है। बावजूद इसके वो एक साथ तालमेल बिठा कर चलते हैं। लेकिन यहां एक ऐसा मामला सामने सामने आया है, जिसे जानने के बाद आपको हैरानी होगी। दरअसल एक सरकारी कार्यालय में कार्यरत लड़की और एक कारोबारी लड़की ने आपसी राजनीतिक विचारधारा मेल नहीं खाने के कारण अपनी शादी तक तोड़ ली। 



मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर का है, जहां लड़का और लड़की पीएम मोदी और उनकी आर्थिक पॉलिसी को लेकर बहस करने लगे। और फिर उस बहस ने परिवार बसने से पहले ही उजाड़ दिया। अपनी शादी को लेकर उत्साहित लड़का और लड़की अपनी शादी को अंतिम रुप देने के लिए परिजनों के साथ एक स्थान पर इक्कठा हुए। तभी शादी के खर्चे को लेकर दोनों आपस में भिड़ गए। और बात देश की अर्थव्यव्स्था तक जा पहुंची। फिर क्या लड़का पीएम मोदी के खिलाफ एक भी शब्द सुनना नहीं चाहता था, और लड़की देश की खस्ता हालत के लिए प्रधानमंत्री को ही कसूरवार ठहरा रही थी। 



दोनों के बीच बात इतनी अधिक बढ़ गई कि लड़के ने कहा कि अगर शादी करनी है तो मेरी बात माननी पड़ेगी। इस बात पर लड़की और भड़क गई। इतना सबकुछ होने के बाद भी मामला शांत नहीं हुआ। इसी बीच लड़के ने आवेश में आकर सभी परिवार वालों के सामने लड़की से शादी करने की बात को इनकार कर गया। 



भले ही यह कहानी फिल्मी लगती हो, लेकिन सच में ऐसा हुआ है। जहां कानपुर निवासी राजेश (काल्पनिक नाम) अपनी शादी के लिए घरवालों के साथ मंदिर में लड़की देखने गया। जहां उसकी बहस लड़की से हो गई। और पीएम मोदी राजनीतिक विचारधारा के टकराव के कारण दोनों ने शादी से इनकार कर दिया। इस बीच दोनों के परिजनों ने भी समझाया, लेकिन वे दोनों राजी नहीं हुए। 


Click here to Read full Details Sources @ https://www.patrika.com/state-news/bride-and-groom-call-off-wedding-because-of-fight-over-pm-modi-economy-police-2625196/

SHARE THIS


Subscribe via Email


Explore Jobs/Opportunities
Jobs Jobs / Opportunities / Career
Haryana Jobs / Opportunities / Career
Bank Jobs / Opportunities / Career
Delhi Jobs / Opportunities / Career
Sarkari Naukri Jobs / Opportunities / Career
Uttar Pradesh Jobs / Opportunities / Career
Himachal Pradesh Jobs / Opportunities / Career
Rajasthan Jobs / Opportunities / Career
Scholorship Jobs / Opportunities / Career
Engineering Jobs / Opportunities / Career
Railway Jobs / Opportunities / Career
Defense & Police Jobs / Opportunities / Career
Gujarat Jobs / Opportunities / Career
West Bengal Jobs / Opportunities / Career
Bihar Jobs / Opportunities / Career
Uttarakhand Jobs / Opportunities / Career
Punjab Jobs / Opportunities / Career
Admission Jobs / Opportunities / Career
Jammu and Kashmir Jobs / Opportunities / Career
Madhya Pradesh Jobs / Opportunities / Career
Explore Articles / Stories
Education
Government Schemes
News
Career
Admit Card
Bihar
State Government Schemes
Study Material
Technology
DATA
Public Utility Forms
Travel
Sample Question Paper
Exam Result
Employment News
Scholorship
Syllabus
Festival
Business
Wallpaper
Explore more
Main Page
Register / Login
Like our Facebook Page
Follow on Twitter
Subscrive Our Newsletter Via Nuzzle
Get Updates Via Rss Feed
Sarkari Niyukti
Free Online Practice Set
Latest Jobs
Feed contents
Useful Links
Photo
Video
Post Jobs
Post Contents
Supremedeal : India Business Directory
Find IFSC Code
Find Post Office / Pincode
Contact us
Best Deal

Disclaimer: we only provide job information. we are not associated with any job website. Although we take extreme care for accuracy of the information provided, but you must check the authenticity of the website before applying for the job. We are not responsible for your operation , once you leave our website and apply thereafter. Please recheck the genuineness of the job website from yourself also.

Copyright © 2018. Website template by WebThemez.com