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क्रॉस कंट्री रेस में कृत्रिम पैर वाले बाइकर भी


कृत्रिम पैरों वाले दो मोटर साइक्लिस्ट विनोद रावत और अशोक मुन्ने दुनिया की सबसे ऊंची क्रॉस कंट्री इवेंट में भाग लेंगे। बाइक से हिमालय फतह करने का आगाज आठ अक्टूबर को लेह से शुरू होगा जो 14 अक्टूबर को कारगिल, जंसकार और लद्दाख सेक्टर से होते हुए गुजरेगी। रेस में 200 बाइकर्स हिस्सा लेंगे।

विनोद रावत जब छह साल के थे तब ट्रक की चपेट में आ गए। इस हादसे में इनका बायां पैर कट गया। 27 साल की उम्र में इन्हें कृत्रिम पैर जयपुर फुट लगाया गया था। इसके बाद ये चलने फिरने के साथ दौडऩे की प्रेक्टिस करने लगे। फिर इन्होंने बाइक चलानी सीखी। तब इन्हें अहसास हुआ कि ये भी वे सब काम कर सकते हैं जो एक सामान्य व्यक्ति करता है। 2004 में पहली बार मुंबई मैराथन में हिस्सा लिया और वह कर दिखाया जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। 2010 में लेह लद्दाख में बादल फटने की घटना के बाद इन्होंने स्थानीय लोगों की मदद के लिए मुंबई से लद्दाख तक बाइक से अभियान चलाकर 18 लाख रुपए का फंड जुटाया था।

अशोक मुन्ने 32 साल के हैं और नागपुर के रहने वाले हैं। 2008 में हुए एक ट्रेन हादसे में इन्होंने अपना दाहिना पैर गवां दिया। पैर खोने के बाद अस्पताल में इलाज के दौरान इन्होंने तय किया कि वे हार नहीं मानेंगे और दुनिया की सबसे ऊंची चोटी को फतह करेंगे। 2009 में कृत्रिम पैर लगा जिसके बाद 2012 में नेपाल के माउंट मेरा पहाड़ी की 22,227 फीट की ऊंचाई को फतह किया था।

इन्हें पहाड़ों पर चढ़ाई के साथ बाइकिंग, स्विमिंग, मार्शल आट्र्स और जिम्नास्टिक पसंद है। ये मानते हैं कि इंसान अगर कुछ ठान ले और उसे करने के लिए मेहनत करना शुरू कर दे तो उसकी सफलता तय है। रेस को पूरा कर दोनों लोग चाहते हैं कि उन लोगों को कुछ कर गुजरने के लिए प्रेरित किया जाए जिससे वे कुछ बेहतर कर सकें। इन दोनों लोगों की तमन्ना है कि जो भी लोग इस तरह की तकलीफ से गुजर रहे हैं उनके जीवन को सुधारना है जिससे स्थिति बेहतर हो सके।


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समुद्री तटों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए जन्नत है केरल


भारत के रमणीय स्थलों में शुमार होने के साथ साथ केरल को ‘गाॅडस् ओन कंट्री’ के खिताब से भी नवाजा गया है। दक्षिण भारत की सैर करने का प्लान है तो यह लोगों के सबसे पसंदीदा और लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है। दुनिया भर से बड़ी तादाद में लोग केरल जैसे खूबसूरत राज्य को देखने आते हैं। शांत समुद्र तट, सुहावना मौसम, हरे भरे हिल स्टेशन, दूर तक फैला समुद्र और आकर्षक वन्य जीवन इस धरती के आकर्षणों में से हैं।

नेशनल ज्योग्राफिक ट्रेवलर मैगजीन के अनुसार केरल ‘दुनिया के टाॅप दस पैराडाइज़’ और ‘50 प्लेसेस आॅफ लाइफटाइम’ में से एक है। केरल की खासियत ये है कि यहां समुद्र के साथ साथ आपको वन्यजीवन का भी भरपूर नजारा दिखेगा। इसलिए साल भर यहां घूमने के लिए लोग आते रहते हैं।

अगर आपको भी बैकवाटर का शौक है तो केरल में ये बखूबी पूरा हो सकता है। यहां समुद्र के शानदार किनारों पर केनोइंग कटमरैन सैलिंग, क्याकिंग, पैरा सैलिंंग, स्कूबा डायविंग, स्नोर्कलिंग और विंड सर्फिंग का लुत्फ उठा सकते हैं। केरल में बैकवाटर के जबरदस्त प्वाइंट है। कोल्लम बैकवाटर, अल्लेप्पी बैकवाॅटर, कोझीकोड बैकवाॅटर, कोचीन बैकवाॅटर, कासरगोड बैकवाॅटर आदि हैं जहां आप शानदार और रोमांचक बैकवाटर का मजा उठा सकते हैं।

घूमने लायक जगहें
यूं तो पूरा केरल की जन्नत की तरह दिखता है लेकिन यहां के मुख्य घूमने लायक हिल स्टेशन बहुत ज्यादा मनमोहक हैं। मुन्नार, रानीपुरम, देवीकुलम, पोनमुडी, इडुक्की, पायथल माला इत्यादि जगहों पर आप हरियाली से भरी प्राकृतिक संपदा का सुख ले सकते हैं। मीलों शांद समुंदर, खजूर के पेड़, चारों तरफ हरियाली और शांत साफ जलवायु आपको प्रोत्साहित करेगी कि आप यहां दोबारा आएं।

सी बीचेज
केरल में समुद्र तटों की भरमार है। मोती जैसे चमकते समुद्र के किनारे मस्ती करने के कई साधन है। यहां आपको हर तरह के समुद्र तट मिलेंगे, जैसे रेतीले, नारियल, चट्टानी या प्रामन्टोरी। हर तट की अपनी खासियत है। समुद्र के साफ नीले पानी के अलावा यहां आपको तरह तरह के सीफूड व्यंजन भी मिलेंगे जो आपकी यात्रा को यादगार बना देंगे।

यहां के कुछ मशहूर समुद्र तट हैं - चेराई बीच, बेकल बीच, कप्पड बीच, कोवलम बीच, धरमदम बीच, फोर्ट कोच्ची बीच, बेपोर बीच और अल्लपुज्झा बीच, चवक्कड बीच, मरारी बीच। ये तो कुछ ही बीच हैं वहां कदम कदम पर समुद्री बीच आपका रोमांच और नई तरह की खासियत से स्वागत करेंगे।

केरल का वन्यजीवन
केरल का वन्यजीवन बहुत ही अद्भुत है। यहां शानदार वाइल्ड लाइफ सेंचुरी भी है जहां समुद्री जल जीवों के साथ साथ पक्षियों और जानवरों की कई प्रजातियां देखने को मिलेंगी। अगर आप वाइल्ड लाइफ सेंचुरी देखने के शौकीन हैं तो आपको यहां चिन्नार वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, पेरियार टाइगर रिजर्व, थटटेकड पक्षी अभयारण्य, एराविकुलम नेशनल पार्क, इडुक्की वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, वायनाड वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और कुमारकोम पक्षी अभयारण्य हैं।

कैसे पहुंचे
केरल विमान यात्रा, रेल यात्रा और सड़क यात्रा, तीनों ही तरीकों से पहुंचा जा सकता है। केरल में तीन हवाई अड्डे हैं और करीब २०० रेलवे स्टेशन हैं जिनके लिए देश भर कनेक्टिविटी है। भारत के लगभग सभी शहरों से केरल के लिए रेल चलती हैं और आप चाहें तो दिल्ली से विमान जरिए भी केरल पहुंच सकते हैं। सड़क के जरिए यात्रा करनी हैं तो देश के किसी भी हिस्से से टेक्सी या बस द्वारा आप केरल पहुंच सकते हैं।

केरल आने के सबसे बेहतर समय अक्तूबर से मार्च है, यहां काफी ज्यादा बरसात होती है और आमतौर पर मौसम आद्र ही रहता है। यहां ज्यादा ठंड नहीं पड़ती लिहाजा आपको यहां सामान्य कपड़ों में ही रहना होगा


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पहाड़ों पर ड्राइविंग करने जा रहे हैं तो इन बातों का रखें खास ध्यान


गर्मी के मौसम में लोग शहर छोड़कर पहाड़ों की तरह रुख करते हैं, अगर आप भी पहाड़ों पर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आपको पहाड़ों पर ड्राइविंग भी करनी होगी और इसके लिए आपको कुछ खास तैयारियां करनी होंगी क्योंकि समतल की अपेक्षा पहाड़ों पर ड्राइविंग ज्यादा मुश्किल होती है। आइए जानते हैं कि पहाड़ों पर ड्राइविंग करते वक्त आपको क्या सावधानियां बरतनी होंगी।

 

1. सबसे पहले कार की पूरी तरह जांच करवा लीजिए। इंजन व टायर पूरी तरह दुरुस्त होने चाहिए। इतना ही नहीं खासकर ब्रेक की जांच किसी विशेषज्ञ से करवाना सही होगा। अगर घिसे हुए टायर के साथ पहाड़ों की तरफ रुख किया तो संस्पेंशन की समस्या से घिर जाएंगे।

२ कोशिश कीजिए कि जब पहाड़ी इलाके में यात्रा करें तो रात के वक्त ड्राइविंग न करें। दिन में ड्राइविंग करें जो सुरिक्षत और चिंता रहित होगा।
3. कभी भी गियर को न्यूट्रल में न रखें। ईधन को बचाने के लिए इंजन को बंद रखें वरना इससे खतरा भी हो सकता है।
4. शहरों की तरह ताबड़तोड़ गाड़ी न चलाएं। पहाड़ी रास्तों पर पीछे से आने वाली गाडि़यों को पास दें और संभल कर चलें।
5. पहाड़ों में न दिखने वाले मोड़ आते हैं। ऐसा होने पर मोड़ आने से पहले ही हार्न बजाएं और अपनी खिड़की के शीशे को थोड़ा खुला रखें ताकि आपको दूसरों का हार्न सुनाई देता रहे।
6. पहाड़ी मोड़ों पर किसी भी सूरत में ओवरटेक करने की कोशिश न करें। ये जानलेवा हो सकता है।
7. पहाड़ों पर ड्राइविंग के दौरान संगीत को कुछ देर के लिए अवाइड करें तो बेहतर होगा। इसके चलते दूसरी गाडि़यों की आवाज आपको सुनाई नहीं देगी और अनहोनी हो सकती है।
8. गाड़ी जरूरत से ज्यादा लोग न बिठाएं वरना आपकी गाड़ी के लिए तो मुश्किल होगी ही साथ ही स्टियरिंग पर भी अतिरिक्त दबाव बना रहेगा जो तीखे मोड़ों पर खतरनाक साबित हो सकता है।
9. रास्ते में अगर बारिश हो जाए, हिमपात या भू-स्खलन की घटना घटे तो गाड़ी को सड़क किसी खुले व सुरक्षित स्थान पर रोक कर सही समय का इंतजार करें। ऐसे में गाड़ी बिलकुल न दौ़ड़ाएं।

11. सामने आती गाड़ी के हेडलाइट्स को न देखें। इससे एकाग्रता भंग होती है।
12. पहाड़ों पर पर गाड़ी पार्क करते हुए हैंड-ब्रेक का अवश्य प्रयोग करें।

13. गाड़ी को हमेशा पहले गियर में पार्क करें।
14. पहाड़ी ढ़लान पर ड्राइविंग करते समय ब्रेक का प्रयोग कम करके निचले गियर का प्रयोग करें। ब्रेक का आवश्यकता से अधिक प्रयोग ब्रेक-फेल का कारण बन सकता है।


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प्राकृतिक खूबसूरती और वन्यजीव रोमांच का संगम गौताला अभ्यारण्य


अगर आप प्राकृतिक खूबसूरती के साथ साथ वन्यजीव रोमांच के शौकीन हैं तो आपको महाराष्ट्र में औरंगाबाद के निकट गौताला वन्यजीव अभयारण्य जरूर जाना चाहिए। यह एक रिजर्व वन्य क्षेत्र है, जो औरंगाबाद से लगभग 69 किमी की दूरी पर सह्याद्री की सतमाला और अजंता पर्वत श्रृंखलाओं के बीच बसा हुआ है। प्राकृतिक खूबसूरती और रोमांचक वन्यजीवन का आनंद लेने के लिए यहां लोग दूर-दूर से आते हैं और यहां के नजारो में खो जाते हैं। यहां खुलेआम घूमते जानवर और यहां की खूबसूरती लोगों का मन मोह लेती हैं। यहां शानदार झरने, पहाड़ , गुफाएं, झील, हरियाली और मंदिर भी हैं।

 

गरमी की अपेक्षा ठंड में यहां का मौसम बेहद शानदार हो जाता है क्योंकि छिपे हुए जानवर धूप में आते हैं और खुलेआम अभ्यारण्य में विचरण करते हैं जिन्हें देखने का सौभाग्य लोगों को मिलता है।


अगर आप गौताला जाने का प्लान बना रहे हैं तो यहां आने का सही समय अगस्त से फरवरी है। इस दौरान आप यहां के वन्यजीवन के साथ-साथ प्राकृतिक खूबसूरती का भी जी भरकर आनंद उठा सकते हैं।

क्या क्या देखने को मिलेगा

आपको गौताला अभ्यारण्य में पक्षियों और सरीसृपों की विभिन्न प्रजातियां देखने को मिलेंगी। जंगली जीवों की बात करें तो आप यहां चीतल, जंगली सूअर, बाइसन, भेड़िया, सांबर, तेंदुआ, सियार, लोमड़ी, बंदर, भौकने वाली हिरण, जंगली कुत्ता, जंगली बिल्ली भालू आदि को देख सकते हैं।


पक्षी देखने को शौकीन हैं तो विभिन्न पक्षी प्रजातियों को भी देख सकते हैं। कहते हैं कि यहां पक्षियों की 240 से ज्यादा प्रजातियां मौजूद हैं। जिनमें मोर, पार्ट्रिज, स्टॉर्क, क्रेन, स्पून बिल्स, बटेर, पोचार्ड और पेफौल आदि शामिल हैं।

नाइट लाइफ


अगर आप यहां कुछ दिन के लिए आना चाहते हैं तो पहले से ही वन विभाग को सूचित कर दें। यहां वन विभाग द्वारा नाइट लाइफ की बेहद शानदार सुविधा दी जाती है। आप सुबह और शाम के वक्त जंगल सफारी का लुत्फ ले सकते हैं और जंगल के मस्त नजारे देख सकते हैं। बारिशों में यहां खुद ब खुद कई झरने निकल पड़ते हैं जिनका आनंद सैलानी लेते हैं। आप यहां आराम से तीन से चार दिन बिता सकते हैं। शहर की भागदौड़ और प्रदूषण से दूर आप यहां फैमिली के साथ एक अच्छा और रोमांचक टाइम बिता सकते हैं।

अभयारण्य के नजदीक ही सीता खोरी वाटरफॉल, अंतूर किला, शिव मंदिर, पीतलखोरा गुफाएं हैं जिन्हें लौटते समय आप देख सकते हैं।

औरंगाबाद से गौताला की दूरी 69 किलोमीटर है। यहां का नजदीकी हवाईअड्डा औरंगाबाद एयरपोर्ट है। रेल मार्ग के लिए आप पचोरा/ चालीसगांव रेलवे स्टेशन के जरिए गौताला पहुंच सकते हैं और अगर ये विकल्प सही न लगे तो आप सड़क मार्ग से भी गौताला आ सकते हैं।


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झिलिमिलाते तारों का देश नेपाल, जहां हर पल एक ख्वाब है, आनंद है, रोमांच है


यात्रा वृतांत- शैलेंद्र तिवारी

नेपाल का नाम जेहन में आते ही एक गुदगुदी सी होती है, लगता है कि कुछ अपना सा है, कुछ जाना-पहचाना सा है। जब उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से लगी सीमा पर सोनौली बॉर्डर पार करते हैं तो बिना पासपोर्ट और वीजा के विदेश जाने का भ्रम सा होता है, लेकिन सीमा पार करने के बाद भी अपना होने का अहसास बरकरार रहता है। एक ऐसा देश जिसे अगर झिलिमिलाते तारों का देश कहें तो कुछ गलत नहीं होगा। सांझ होते ही पहाड़ों पर बने घरों के भीतर बिजली के बल्व जब जल उठते हैं तो सड़क से गुजरते समय ऐसा लगता है कि जैसे आसमान के तारे इन पहाड़ों के ऊपर और नीचे खुद उतर आए हैं, अपनी झिलमिल रोशनी से इस देश की रौनक को बढ़ा रहे हैं।

 

जब इस यात्रा पर निकला तो उम्मीद नहीं की थी कि यह शहर इतना खूबसूरत होगा, लेकिन जैसे ही सोनौली बॉर्डर से आगे बढ़ा तो आंखें खुली की खुली रह गईं। महज कुछ किलोमीटर पार करते ही सामने पहाड़ों की पूरी एक शृंखला नजर आ रही थी। हल्की सी चढ़ाई के साथ शुरू हुआ पोखरा की ओर जाने वाली सड़क का सफर। एक ओर आसमान को छूने की जिद करते पहाड़ तो दूसरी ओर पाताल में समा जाने का एहसास दिलाती गहराई। हर कदम पर एक रोमांच जो आपको प्रकृति और उसके जीवन के करीब लेकर पहुंच जाती है।

 

बुटवल से पाल्पा होते हुए पोखरा का यह सफर सिद्धार्थ राजमार्ग से होते हुए पूरा होता है। राजमार्ग के दोनों ओर नेपाल के शहर और गांव अपने भीतर प्राकृृतिक संपदा और नेपाली संस्कृति को समेटे हुए हैं। 188 किलोमीटर का यह सफर पूरा करने में करीब सात घंटे तक का समय लगा और करीब आधी रात को शहर के भीतर प्रवेश किया। शहर की सीमा के बाहर नेपाल पुलिस के सशस्त्र जवान इंतजार करते मिले। अनुमति और दूसरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आगे जाने का इशारा किया।

 

पोखरा ऐसा शहर है जहां देर रात अगर खाने की गुंजाइश तलाशी जाए तो मुश्किल है। हालांकि शुक्रवार और शनिवार की रात यहां के कुछ बाजार नो-व्हीकल जोन में तब्दील हो जाते हैं और देर रात दो बजे तक खुले रहते हैं। यह अपने आप में सुखद अहसास कराने वाले होते हैं। जहां आप लाइव संगीत का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा आप तरह-तरह के भारतीय व्यंजनों के साथ नेपाली स्वाद को भी चख सकते हैं। शहर में आने के बाद ऐसा लगता है कि जैसे प्रकृति ने स्वयं अपनी गोद में इस शहर को बसाया है। चारों ओर से पहाड़ और उसके बीच में बचे इस छोटे से प्राकृतिक शहर की तस्वीर को शब्दों में बयां कर पाना भी मुश्किल है।

 

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शहर में बने छोटे-छोटे होटल यहां आने वाले पर्यटकों को नेपाली संस्कृति का एहसास कराते हैं। हर दूसरा घर ही एक होटल जैसा है, जहां घर की महिलाएं ही मुख्य भूमिका में नजर आएंगी। इस शहर की सबसे बड़ी खासियत भी यही है कि यहां के कारोबार पर महिलाओं का कब्जा है। पुरुष यहां पर महिलाओं के पीछे ही नजर आते हैं...दुकान, होटल से लेकर हर जगह तक महिलाओं की भूमिका प्रभावी है।

 

दूसरे दिन की सुबह अगर मौसम साफ है तो यह आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। आपको अपने होटल के कमरे से हिमालय की पर्वत शृंखलाओं की चोटी माचापुच्छरे को साफ देख सकते हैं। यह आपके रोमांच को बढ़ाने के लिए काफी होगी। उसके बाद सफर की शुरुआत के लिए जरूरी है कि लोकल गाड़ी और ड्राइवर लिया जाए, जिससे शहर के बारे में ज्यादा बेहतर तरीके से भी जाना जा सकता है।

 

कुल मिलाकर सफर के दौरान एक बात का एहसास जरूर हो जाता है कि नेपाल भले ही पिछड़ा या गरीब देश कहा जाता हो लेकिन लोगों की व्यवहारिक जरूरतों को पूरा करने में यहां की सरकार जरूर प्रमुखता से काम कर रही है। जिस तरह से पहाड़ों के ऊपर बिजली और पानी पहुंचाने का काम किया है, यह वाकई में प्रशंसनीय है। हिंदुस्तान जैसे देश में जहां प्रचुर मात्रा में बिजली की उपलब्धता है, फिर भी कई गांव अब भी बिना बिजली के जी रहे हैं।

 

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फेवा ताल/बरही मंदिर
इस शहर की शुरुआत पर्यटकों की तरह ही फेवा ताल से ही होती है। पहाड़ों की गोद में बना ताल अपने किनारों पर समुद्र के बीच जैसा आनंद देता है। इसी ताल में बने छोटे से द्वीप पर बना हुआ है बरही मंदिर। कहा जाता है कि यह मंदिर आदि शक्ति दुर्गा का है, जिन्होंने यहां पर राक्षसों से देवों की रक्षा की थी। इस मंदिर का यहां पर बड़ा ही महत्व है। तालाब के बीचों-बीच बने इस मंदिर तक आने के लिए किनारे पर नावों का इंतजाम होता है और सौ नेपाली रुपए में यह आपको यहां तक लेकर आते हैं।

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विंध्यवासिनी मंदिर
यहां करीब दो घंटे का वक्त बिताने के बाद अगला पड़ाव विंध्यवासिनी मंदिर मिला, जो यहां के प्रमुख मंदिरों में शामिल है। कहा जाता है कि नेपाल के तत्कालीन राजा सिद्धी नारायण शाह मिर्जापुर से इन देवी को नेपाल लेकर गए थे और पोखरा में मंदिर बनाकर इनकी स्थापना की थी। यह मंदिर भी एक ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। मंदिर पर पहुंचकर हिंदू मंदिरों की भव्यता का एहसास किया जा सकता है। मंदिर में एक साथ दिए जलाने के लिए पीतल के दियों की एक लंबी कतार है, जो आपके भीतर एक शक्ति का संचार करती है। तो वहीं, पुरानी चौघट पर टंगे घण्टे आपको रोमांचित करते हैं।

 

गुफाएं/झरने
मंदिर से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर गुप्तेश्वर महादेव गुफा के साथ-साथ महेंद्र गुफा है, जो आपको जमीन के भीतर की पुरानी दुनिया से अवगत कराती हैं। बताती है कि एक जीवन और एक संस्कृति इन गुफाओं में किस तरह से रही होगी। तो वहीं सेति गंडकी नदी भी इस शहर के सौंदर्य को नया रूप देती हैं। जो गुफा जाने के रास्ते में ही मिलती है। सेति नदी को यहां पर वैसे ही पूजा जाता है, जैसे हिंदुस्तान में गंगा को। इस नदी की संस्कृति ठीक वैसी ही है जैसी कि नर्मदा की है। नर्मदा के पत्थरों को शिवलिंग के रूप में स्थापित किया जाता है, जबकि इस नदी के पत्थरों से भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम मिलते हैं। शहर के बीचों-बीच बना डेविड फॉल भी देखा जा सकता है। लोगों का कहना था कि किसी डेविड ने इसकी खोज आत्महत्या करके की थी। लेकिन डेविड के जाने के बाद आज यह महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित है। यहां पर बना छोटा सा बाजार भी आपको आकर्षित करेगा।

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सारंगकोट
गुफा, नदी और झरने देखने के बाद भी मन कुछ और ज्यादा पाने को बेताव हो जाता है। ऐसे में सबसे बेहतरीन जगह पहुंचे सारंगकोट। १६०० मीटर ऊंचाई से शहर और अन्नपूर्णा रेंज की पहाडिय़ों को देखना वाकई आनंदित करने वाला होता है। वैसे तो यहां से सूर्य का उदय देखा जाता है। लेकिन दिन भर में कभी भी यहां पर आकर यहां की ठंडी हवा को महसूस किया जा सकता है। यहां का तापमान पोखरा से दो से तीन डिग्री कम रहता है। हालांकि यहां पर आने के लिए आपको थोड़ी सी सीढिय़ां भी चढऩी पड़ेंगी, हालांकि यह ज्यादा नहीं हैं।

 

लेकिन ज्यादा उम्र के लोगों के लिए थोड़ा मुश्किल हैं। फिर भी यहां तक गाड़ी से भी आने का अपना रोमांच है। यहां से ही कुछ दूरी पर आनंद हिल की 1100 मीटर की ऊंचाई पर बने शांति स्तूफ को भी देखा जाना चाहिए। यहां से अन्नपूर्णा रेंज की पहाडिय़ों का पैनोरेमिक व्यू भी शानदार होता है। वहीं फेवा ताल और शहर भी आकर्षित लगते हैं। एडवेंचर स्पोट्र्स का आनंद लेने के लिए सारंगकोट सबसे बेहतरीन जगह है।

 

मुक्तिनाथ/अन्नपूर्णा सर्किट
अगर आपके पास वक्त है तो यहां से मुक्तिनाथ भी जाया जा सकता है। नेपाल में कहा जाता है कि चार धाम में मुक्तिनाथ, पशुपतिनाथ और केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम हैं। मुक्तिनाथ अन्नपूर्णा सर्किट के करीब है। पोखरा से यहां आने में सात से आठ घंटे का वक्त लगता है। लेकिन यहां से अन्नपूर्णा की बर्फीली पहाडिय़ों की ओर जाया जा सकता है। ट्रेकिंग का आनंद लेने वाले लोग यहां से आगे जाते हैं, जबकि बाकी लोग बर्फ देखकर यहीं से लौट जाते हैं। यहां आने वाले लोगों को एक दिन आने में और एक दिन जाने में जाया होता है, जबकि एक दिन का समय यहां रुककर बिताना ज्यादा सुकूनदेह होता है।

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काठमांडू
कुछ दिन पोखरा में बिताने के बाद सीधे कार को काठमांडू की ओर मोड़ दिया। सुबह आठ बजे सफर की शुरुआत हुई। रात में हुई हल्की बारिश का एहसास अभी भी दिखाई दे रहा है। पहाड़ बादलों के भीतर असलाए हुए हैं। ऐसा लग रहा है कि जैसे पहाड़ भी रजाई ओढ़कर अलसाए हुए हैं। रास्ता पिछले रास्ते से आसान है। सड़कें कम घुमावदार हैं और चढ़ाई भी शुुरुआती सफर में नजर नहीं आ रही है। लेकिन चारों तरफ पहाड़ जरूर सफर को मजेदार बना रहे हैं। कैमरे और आंखों के बीच में जिद है कि कौन बेहतरीन पलों को अपने भीतर कैद कर ले। सफर में साथ-साथ चलती मर्सयांग्दी नदी आनंदित करती है।

 

वहीं, कुछ दूरी पर जाने के बाद नदी के बहाव को पलटते देखना भी एक अलग ही अनुभव होता है। नदी के किनारों पर वाटर स्पोट्र्स के कई सेंटर नजर आए, जहां युवाओं की उत्साही टोली पानी की धार में जूझ रही थी। आगे मनकामना देवी का मंदिर १३०२ मीटर की ऊंचाई पर बना हुआ है। हालांकि यहां तक पहुंचने के लिए रोप-वे (नेपाली इसे केवल कार भी कहते हैं) से जाना ही विकल्प है। मेरे लिए यह अब तक का सबसे बड़ा रोप-वे सफर था, जिसका रोमांच शब्दों में नहीं बयां किया जा सकता है।

 

यह वह अनुभव था, जिसे सिर्फ महसूस ही किया जा सकता है। यहां से आगे बादलों के भीतर धंसे हुए पहाड़ नजर आ रहे हैं और इसके साथ ही सड़क घुमावदार हो गई है। एहसास होने लगा है कि हम काठमांडु के करीब आ गए हैं। ये घुमावदार सड़क काठमांडु में जाकर ही ठहरती है। हालांकि यहां आने के लिए पोखरा से सीधे विमान सेवा भी उपलब्ध है, जो हर आधे घंटे में उड़ान भरती है। तकरीबन आधे घंटे के सफर में आप काठमांडू पहुंच सकते हैं। जबकि सड़क मार्ग से यह वक्त छह से सात घंटे का भी हो सकता है।

 

श्री पशुपतिनाथ
काठमांडु आकर सबसे पहले त्रिभुवन एयरपोर्ट के सामने एक होटल में नेपाली खाने का आनंद लिया और उसके बाद यहां के सबसे प्रमुख आकर्षण बाबा श्री पशुपतिनाथ के दर्शन करने रवाना हो गए। एयरपोर्ट से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर बाबा का दरबार है, जिसका एहसास सड़क से ही हो जाता है। ठेठ नेपाली आर्किटेक्ट में बना यह मंदिर आज भी अपनी वास्तुकला को बचाने में कामयाब है। यह मंदिर हिंदुओं की आस्था का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां पर भारत से सबसे ज्यादा पर्यटक पहुंचते हैं। चार मुखों में यहां पर भगवान शिव विराजे हुए हैं और मंदिर के ठीक पीछे बागमती नदी बह रही है, जिसे यहां पर बनारस की गंगा जैसा आध्यात्मिक संस्कार मिलता है। यहां पर भी गंगा की तर्ज पर बागमती नदी की आरती होती है और मंदिर के ठीक पीछे घाटों पर विश्राम घाट भी बने हुए हैं। मान्यता है कि यहां पर अंतिम संस्कार करने से आत्मा का परमात्मा से मिलन हो जाता है। मंदिर की संस्कृति आपको आकर्षित करेगी, यहां पर आमतौर पर हिंदू मंदिरों में नजर आने वाले पंडे-पुजारियों की भीड़ नहीं होगी। न ही मंदिर के भीतर प्रसाद और फूल माला की ज्यादा दुकानें नजर आएंगी। शिव का स्वरूप ही यहां पर सबसे बड़ा आनंद है।

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बौद्धनाथ/स्वयंभूनाथ
शिव से आत्मसात होने के बाद यहां पर बुद्ध भी अपनी संस्कृति को समेटकर बैठे हैं। बौद्धनाथ और स्वयंभूनाथ दोनों ही स्तूप बौद्ध धर्म को मानने वालों का सबसे बड़ा केंद्र है। काठमांडु के पूर्व में बना बौद्धनाथ स्तूप दुनिया के सबसे बड़े स्तूपों में शामिल है। जबकि स्वयंभूनाथ स्तूप की अपनी आस्था है। स्वयंभूनाथ के बारे में कहा जाता है कि इस स्तूप के चारों ओर बनी आंखें भगवान बुद्ध की मानी जाती हैं जो चारों ओर देख रही हैं और लोगों के कल्याण के लिए रास्ता दिखा रही हैं। स्वयंभूपुराण में इस जगह को लेकर कई तथ्य बताए गए हैं।

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थमेल
नेपाली संस्कृति, आर्किटेक्ट दरबार चौराहा पर नजर आ रहा था। लेकिन असली नेपाल देखने के लिए थमेल पहुंचना जरूरी था। वहां पहुंचकर आनंद भी आया। जाना कि आखिर कैसे आज भी पुराना काठमांडु थमेल में जीवित है। थमेल भी ऐसी ही जगह है जहां पर आपको पुराना नेपाली शहर नजर आएगा। इसकी खूबसूरती आपको आनंदित कर देगी।

 

यहां की दुकानों में आपको नेपाली संस्कृति को समेटे हुआ सामान नजर आएगा। यहां के गर्म कपड़े और कढ़ाईदार सामान आकर्षित करेंगे। तो कुल मिलाकर आपको नेपाल का यह सफर आनंद से भर देगा। काठमांडु से भारत वापसी के लिए सड़क मार्ग के जरिए वापस सोनौली बॉर्डर आया जा सकता है या फिर बिहार के रक्सौल बॉर्डर के जरिए भी वापसी की जा सकती है। इसके अलावा सीधे हवाई मार्ग से वापसी के लिए त्रिभुवन एयरपोर्ट हमेशा तैयार है।

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क्या करें-
- नेपाल की यात्रा के दौरान कुछ चीजों का हमेशा ध्यान रखें कि अगर आप सड़क मार्ग से सफर कर रहे हैं तो रास्ते में जाम की संभावना बनी रहती है। ऐसे में आपकी गाड़ी के भीतर हमेशा खाने का सामान और पर्याप्त मात्रा में पानी जरूर होना चाहिए।
- यहां की सबसे खूबसूरत अगर कोई याद आपके साथ आएगी तो यह पूरा देश ही मोबाइल वाई-फाई नजर आता है। यहां की बसों से लेकर ढाबों और रेस्टोरेंट पर आपको फ्री वाई-फाई की सुविधा का बोर्ड जरूर नजर आएगा।
- नेपाल बॉर्डर पर अगर आप अपनी गाड़ी के साथ जा रहे हैं तो बॉर्डर पर बने चेकपोस्ट पर अपनी गाड़ी की एंट्री के साथ टैक्स जमा कराने की प्रक्रिया जरूर पूरी कर लें। बेहतर हो कि वहां पर मौजूद एजेंट का सहारा ले लें, जिससे आपका काम जल्दी हो जाएगा। फिर भी आप इसके लिए एक घंटे का समय मानकर चलें। टैक्स तय समय से एक या दो दिन ज्यादा का लें तो बेहतर रहेगा। कई बार जाम में गाड़ी फंसने पर आप परेशानी में नहीं आएंगे, क्योंकि अगर आपका टैक्स समय खत्म होने के बाद आप पकड़े जाते हैं तो नेपाल पुलिस आप पर भारी जुर्माना कर सकती है।
- यहां पर भारतीय करेंसी स्वीकार है, लेकिन फिर भी बेहतर होगा कि आप अपने साथ नेपाली करेंसी भी लेकर चलें। यह आप बॉर्डर पर भी एक्सचेंज कर सकते हैं। इसके अलावा स्थानीय दुकानदार/होटल संचालक भी करेंसी एक्सचेंज कर देते हैं।
- खरीददारी करते समय जरूर पूछें कि आपको भाव नेपाली करेंसी में बताए जा रहे हैं या भारतीय करेंसी में। वैसे, पूरे नेपाल में मोलभाव होता है, ऐसे में आप मोलभाव भी कर सकते हैं।
- अगर सड़क मार्ग से सफर कर रहे हैं तो बेहतर होगा ज्यादा रात होने के बाद सुरक्षित जगह पर सफर को रोक दें। यह आपके लिए सुरक्षित रहेगा।

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हवाई सफर में खो जाए सामान, तो इन बातों का रखें ख्याल


समय बचाती है हवाई यात्रा। आपको दूर जाना है और ट्रेन में ज्यादा समय लगने वाला है तो आप हवाई जहाज से जाने का विकल्प चुनते हैं। लेकिन आजकल हवाई जहाज से यात्रा करने वालों को सामान खो जाने की भारी समस्या का सामना करना पड़ता है। यात्रा में सामान खो जाए तो यात्रा का आधा मजा वहीं खतम हो जाता है। यह दुर्घटना आए दिन किसी न किसी यात्री के साथ हो जाती है। एयरलाइन अपने नियमानुसार अनुसार खोए सामान का कुछ प्रतिशत ही हर्जाना देती है पर अक्सर सामान चोरी हो जाने के कारण लेने के देने पड़ जाते हैं। समय और पैसा तो नष्ट होता ही है। हवाई यात्रा करने से पहले और उड़ान के समय कुछ बातों को ध्यान में रखें।

लगेज हो लाइट
सफर में अपने साथ उतना ही सामान हो जितना जरूरी हो। भारी लगेज उठाने में परेशानी होती है। इनमें कीमती चीजें- कैमरा, लैपटॉप, जरूरी दस्तावेज, जेवर, पासपोर्ट आदि बंद करके चेकइन ना करें। ये जरूर है कि सामान खो जाने पर एअर लाइन्स आपको मुआवजा जरूर देगी लेकिन वो पर्याप्त नहीं होता। इसलिए कम ही सामान साथ रखें ये जरूरी है।

महंगी चीजें ना ले जाएं
सबसे पहले तो अपने साथ महंगी और कीमती चीजें साथ ना रखें। अगर इन्हें ले जाना भी पड़े तो बैग में रखकर चैकइन ना करें। इन चीजों को हैंड बैग में रखकर विमान में अपने साथ ले जाया जा सकता है। इससे सामान खोएगा नहीं और दूसरा आपको सामान के आने का बेल्ट पर इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

बैग या सूटकेस अलग रंग का हो
एअरपोर्ट पर सामान ले जाने वाले बैग या सूटकेस दूसरों से अलग तरह के हों ये ध्यान रखें। ताकि बेल्ट पर आपको अपने सामान की पहचान जल्दी और आसानी से हो सके। इससे आप बैग चोरों से बच भी पाएंगे। शरीफ से नजर आने वाले चोर दूसरों के बैग आसानी से पार कर ले जाते हैं क्योंकि काले-नीले रंग के कॉमन कलर्स पर ध्यान नहीं जाता और आपका सामान आप तक पहुंचने से पहले ही चोरों के हाथ लग जाता है। ऐसे में अलग रंग होने पर आपका ध्यान सामान पर विशेष रूप से बना रहेगा। अपने लगेज पर कुछ आकर्षक रंग की पट्टिका, बेल्ट या रिबन लगाकर अलग लुक दे सकते हैं ताकि उसे दूर से ही पहचान पाएं।

सूटकेस सामान्य ही हो
हवाई सफर में चोरों को महंगे और कीमती सूटकेस अट्रैक्ट करते हैं। इसलिए लैदर के बड़े आकार वाले कीमती नजर आने वाले सूटकेस लेकर ना जाएं। इनके चोरी होने की ज्यादा संभावनाएं रहती हैं। चोरों को उनमें कीमती सामान होने की आशंका रहती है और वो विशेष रूप से इन्हें ही उड़ाना चाहते हैं।

जब चोरी हो जाए सामान
इतनी सावधानियां बरतने के बावजूद अगर आपका बैग चोरी हो जाए तो तुरंत बैगेज क्लेम काउन्टर पर चले जाएं। इससे बैग चोर को जल्दी पकड़े जाने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। एयरलाइन्स सामान्यत: एक निर्धारित समय सीमा के अंदर ही सामान खो जाने की शिकायत दर्ज कर सकती हैं। यदि उस समय सीमा के बाद शिकायत की जाती हैं तो हर्जाने की उम्मीद कम रह जाती है।

सावचेत बने रहें
जब आप बेल्ट पर से अपना सामान उठाते हैं तो अपने दूसरे बैग और लगेज की निगरानी बराबर रखें। हो सके तो अपने सामान की ट्राली अपने साथ वाले व्यक्ति या बच्चों को सौंप दें। ऐसा करने से भी सामान सुरक्षित रहेगा।

कनेक्टिंग फ्लाइट से बचें
बाहर जाते समय कोशिश करें कि दूसरे शहर की सीधी फ्लाइट लेें। कनेक्टिंग फ्लाइट में उड़ान के चेंज होने से भी कई बार सामान दूसरी फ्लाइट में चला जाता है या फिर चोरी हो सकता है। जितनी ज्यादा कनेक्टिंग उड़ानें हम लेते हैं सामान खोने की संभावनाएं भी उतनी ही बढ़ जाती हैं।

जानकारी और सुरक्षा जरूरी
टिकट बुक करवाते समय एअर लाइन्स से बीमा जरूर करवाएं। सामान्य रूप से यात्रा में सामान खोने पर पांच से आठ प्रतिशत तक का व्यय ही चुकाया जाता है। पर अच्छा यही है कि इस विषय में नवीनतम जानकारी एअरलाइन से ले ली जाय। जब सामान हमारा है तो सुरक्षा हमसे बेहतर और कौन कर सकता है। एक बार सामान खो जाए तो कुछ भी अपने हाथ में नहीं रहता। सुरक्षा में चूक ना हो इसी का ध्यान रखा जाना ज्यादा बेहतर होगा।


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Travel Tips In Hindi लास्ट मिनट ट्रैवल डील्स के खास टिप्स


Travel Tips In Hindi क्या आप हॉलीडे पर कहीं घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं और आपके पास इसके लिए समय नहीं है? अब आपको टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। जानते हैं कि आप कैसे खास तरीकों से अंतिम समय में अच्छी ट्रैवल डील्स प्राप्त कर सकते हैं-

यदि आप लास्ट मिनट में अच्छी ट्रैवल डील्स प्राप्त करना चाहते हैं तो आपको कुछ खास बातों पर ध्यान देना चाहिए। इनसे आपका सफर भी अच्छा बन सकता है।


देरी से होटल बुकिंग के लिए एप्स Hotel Booking apps
अगर आपको वेबसाइट्स पर अच्छा होटल नहीं मिल पाता है तो आप लास्ट मिनट ट्रैवल एप काम में ले सकते हैं। इससे आपको शहर ेमें अपनी पसंद का होटल मिल सकता है। इन एप्स में लास्ट मिनट कीज, होटल्स अराउंड यू, रूम्सटूनाइट और नाइटस्टे खास हैं। ये गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध हैं और होटल्स की विस्तृत रेंज पेश करते हैं। आपको बजट, प्रीमियम और बुटिक की रेंज मिल जाती है। एप इंस्टॉल करने से पहले चेक कर लें कि वह आपके शहर के लिए काम करता हो।

वैकल्पिक तरीकों पर ध्यान दें
लास्ट मिनट में बेस्ट डील प्राप्त करने के लिए होटल्स के बजाय होम रेंटल्स, बेड एंड ब्रेकफास्ट या होमस्टे का विकल्प चुन सकते हैं। कुछ ट्रैवल एग्रीगेटर्स जैसे यात्रा और मेकमाईट्रिप होमस्टे की खास कैटेगिरी देते हैं। एयरबीएनबी डॉट कॉम और होमस्टे जैसी वेबसाइट लोकल एकोमोडेशन के लिए बेहतरीन हैं। यहां लास्ट मिनट में रुकने का गारंटेड ऑप्शन मिलता है।

अंतिम समय तक निगाह रखें travel summer vacation sale
लास्ट मिनट फ्लाइट डील्स प्राप्त करने के लिए बेस्ट उपलब्ध फ्लाइट की बुकिंग के बाद भी अपनी तलाश जारी रखनी चाहिए। वेबसाइट, एग्रीगेटर और एप पर कीमत कम होने पर अलर्ट प्राप्त करने के लिए सबसे पहले खुद को रजिस्टर करें। यह देख लें कि आपकी पुरानी बुकिंग पर कोई कैंसिलेशन चार्ज न हो। चूंकि ज्यादातर एयरलाइन्स खाली सीट्स को अंतिम कुछ दिनों में भरने की कोशिश करती है, इसलिए आपको अच्छी डील मिल सकती है। आपको इनका फायदा उठाना चाहिए।

Travel summer vacation sale ट्रैवल साइट्स की मदद लें
यदि आपने महीनों पहले से पर्याप्त रिसर्च नहीं की है तो आपको बेस्ट ट्रैवल एग्रीगेटर वेबसाइट्स पर जाना चाहिए। इनमें से ज्यादातर होटल्स, फ्लाइट्स और पैकेज के लिए लास्ट मिनट या लाइव डील सेक्शन ऑफर करते हैं। उदाहरण के लिए एक्सपीडिया आने वाले सप्ताहों के लिए होटल पैकेज ऑफर करता है। इसी तरह से क्लीयरट्रिप इलेवंथ आवर होटल डील्स ऑफर करता है। अन्य अच्छी डील्स, सेल्स और ऑफर्स के लिए आप गोआईबीबो, मेकमाईट्रिप या ईजीगो1 पर जा सकते हैं। यहां पर थोड़ी सी रिसर्च करने पर अच्छे ऑफर मिल सकते हैं।

फ्लेक्सिबल बनें
लास्ट मिनट होटल और फ्लाइट डील्स के लिए जरूरी है कि आप अपने प्लान को लेकर फ्लेक्सिबल रहें। यदि आप ट्रैवल की तारीखें, फ्लाइट की टाइङ्क्षमग, एयरपोट्र्स को लेकर फ्लेक्सिबल रहेंगे तो फायदा होगा। किसी जाने-पहचाने और व्यस्त एयरपोर्ट से कम जाने-पहचाने एयरपोर्ट पर शिफ्ट हो जाते हैं तो फ्लाइट मिलने के चांस बढ़ जाते हैं। अगर आप ट्रैवल एग्रीगेटर साइट स्काईस्कैनर पर फ्लाइट्स चेक कर रहे हैं तो यदि आप 'एड नियरबाई एयरपोट्र्सÓ या 'एवरीव्हेयरÓ को अपनी डेस्टिनेशन के तौर पर चुनते हैं तो आपको कई विकल्प मिल जाते हैं।


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चारधाम यात्रा: अप्रैल में कब खुलेंगे गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट, यहां जानें


उत्तराखंड में गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए 'अक्षय तृतीया' के पावन अवसर पर 18 अप्रैल को खोले जाएंगे। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। ज्योतिषी और पुजारियों के अनुसार, यमुनोत्री धाम का कपाट वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ अपराह्न् 12.15 मिनट पर खुलेगा, जबकि गंगोत्री धाम का कपाट अपराह्न् 1:15 मिनट पर खोले जाएंगे। मंदिर समिति के सचिव कृतेश्वर उनियाल ने कहा कि यह निर्णय एक बैठक में लिया गया।

बता दें कि शुक्रवार को यमुना जयंती के उत्सव पर्व पर मां यमुना के मायके खरखली में यमुनोत्री मंदिर समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया। दरअसल, चारधाम यात्रा के प्रथम धाम यमुनोत्री धाम के कपाट उदघाटन का शुभ मुहूर्त निकाला गया। मंदिर समिति के सचिव कृतेश्वर उनियाल ने बताया कि मां यमुना की डोली शीतकालीन प्रवास खरसाली (खुशीमठ) से सुबह नौ बजे खरसाली से मां यमुना की डोली शनि देव की अगुवाई में सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ यमुनोत्री धाम के लिए प्रस्थान करेंगी, जो दोपहर 11 बजे यमुनोत्री धाम पहुंचेगी।

अक्षय तृतीया के पर्व पर सिद्ध योग व अभिजीत मुहूर्त में वैदिक मंत्रोचारण एवं विधिवत पूजा अर्चना के साथ दोपहर 12:15 बजे पर यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। गंगोत्री धाम के कपाट भी इसी दिन 1:15 बजे पर श्रद्धालुओं के दर्शन खोलें जाएंगे। इस मौके पर मौजुद पुरुषोत्तम उनियाल, जय प्रकाश, बागेश्वर प्रसाद,यमुनोत्री मंदिर समिति के उपाध्यक्ष जगमोहन, कोषाध्यक्ष श्याम सुंदर, जय प्रकाश, वेद प्रकाश आदि मौजूद थे।

 

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यमुनोत्री धाम...
चार धामों में से पहला धाम यमुनोत्री का है। यमुना का उद्गम मात्र एक किमी की दूरी पर है। यहां बंदरपूंछ चोटी (6315 मी) के पश्चिमी अंत में फैले यमुनोत्री ग्लेशियर को देखना अत्यंत रोमांचक है। गढ़वाल हिमालय की पश्चिम दिशा में उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री चार धाम यात्रा का पहला पड़ाव है। यमुना पावन नदी का स्रोत कालिंदी पर्वत है। तीर्थ स्थल से एक किमी दूर यह स्थल 4421 मी. ऊंचाई पर स्थित है। दुर्गम चढ़ाई होने के कारण श्रद्धालू इस उद्गम स्थल को देखने से वंचित रह जाते हैं। यमुनोत्री का मुख्य मंदिर यमुना देवी को समर्पित है। पानी के मुख्य स्रोतों में से एक सूर्यकुंड है, जो गरम पानी का स्रोत है।

गंगोत्री धाम...
गंगोत्री से 19 किलोमीटर दूर3,892 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गौमुख गंगोत्री ग्लेशियर का मुहाना तथा भागीरथी नदी का उद्गम स्थल है। कहते हैं कि यहां के बर्फिले पानी में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं। गंगोत्री से यहां तक की दूरी पैदल या फिर टट्टुओं पर सवार होकर पूरी की जाती है। चढ़ाई उतनी कठिन नहीं है तथा कई लोग उसी दिन वापस भी आ जाते है। गंगोत्री में कुली एवं टट्टु उपलब्ध होते हैं। प्रत्येक वर्ष मई से अक्टूबर के महीनों के बीच पतित पावनी गंगा मैया के दर्शन करने के लिए लाखों श्रद्धालु तीर्थयात्री यहां आते है। यमुनोत्री की ही तरह गंगोत्री का पतित पावन मंदिर भी अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर खुलता है और दीपावली के दिन मंदिर के कपाट बंद होते है।


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जहां रफ्तार है, तो रोमांच और रोमांस भी, जानें अमेरिका की इस खूबसूरत जगह के बारे में


अपने शानदार कैसीनो, बेहतरीन होटलों और अनूठे लाइफस्टाइल के लिए दुनिया भर में लास वेगास चर्चित है, लेकिन यहीं पर एक जगह ऐसी भी है, जो दुनियाभर के लिए आकर्षण का केंद्र है। वह है नेवादा। जी हां, नेवादा क्षेत्रफल के लिहाज से संयुक्त राज्य अमेरिका का सातवां सबसे बड़ा और जनसंख्या के लिहाज से 34वां बड़ा राज्य है। नेवादा की खासियत है यहां की विशालकाय, एकांत और बेहतरीन चमचमाती सड़कें। अब आप सोचेंगे कि भला सड़कें भी देखने की कोई चीज है। आपका सोचना भी अपनी जगह सही है, लेकिन जब आप नेवादा को देखेंगे, तो खुद ब खुद आपको इसकी खूबसूरती का अंदाजा लग जाएगा।

बता दें कि नेवादा में सड़क यात्रा के लिए 6 अविश्वसनीय राजमार्ग हैं। अगर आप सिर्फ लास वेगास के लिए नेवादा जाने की योजना बना रहे हैं, तो कैसीनो के इस शानदार शहर के अलावा आपको अनंत सरीखी दिखतीं नेवादा की लुभावनी और सर्पीली सड़कों पर जरूर यात्रा करनी चाहिए। इन सड़कों के माध्यम से आप अमेरिका के इस सुंदर प्रांत की अकल्पनीय दुनिया देख सकते हैं।

नेवादा में अमेरिकी की सबसे एकांत सड़क है, जहां से गुजरना किसी बहादुरी से कम नहीं। नेवादा में पांच से अधिक ऐसे राजमार्ग हैं, जिनका निर्माण एक परियोजना के तहत किया गया है। ये राजमार्ग शानदार तरीके से बनाए गए हैं और इन पर यात्रा करना एक अद्भुत अनुभव प्रदान करता है, जहां रफ्तार के साथ-साथ रोमांच है, तो रोमांस भी...यकीनन ये सड़कें आपको अमेरिका के लिए दिल में प्यार भर देंगी। तो आइए चलते हैं नेवादा की रोमांचक यात्रा पर और जानते हैं कुछ रोचक बातें....

अमेरिका की सबसे एकान्त सड़क...
जैसा कि नाम से पता चलता है, यह राजमार्ग शोर से दूर, शांत और खूबसूरत है। इसके अलावा, कार्सन सिटी से ईली तक की यह तीन दिन की सड़क यात्रा में बहुत से स्थान देखने को मिलते हैं। जैसे चर्चिल वाइनयार्डस, पक्षियों को देखने के लिए बहुत खूबसूरत क्षेत्र- स्टिलवॉटर नेशनल वाइल्ड लाइफ रफ्यूज। 600 फुट ऊंची रेत के टीले से बना सैन्ड माउन्टेन रिक्रयेशन एरिया, जो सड़क के किनारे बंजारों और फोटोग्राफरों से घिरा हुआ है, यात्रा एक प्रमुख आकर्षण है। फिर आता है मिडलीगेट स्टेशन, मॉन्स्टर बर्गर का घर, जिसे आप बिना देखे नहीं रहना चाहेंगे, क्योंकि इतना स्वादिष्ट बर्गर आपने कभी भी नहीं खाया होगा। स्पेन्सर हॉट स्प्रिंग्स में प्राकृतिक रूप से गरम पानी में जमीन के नीचे पूल में खुद को भिगोएं। देश के सबसे खूबसूरत और एकान्त पार्कों में से एक-ग्रेट बेसिन नेशनल पार्क के साथ अपनी अद्भुत सड़क यात्रा समाप्त करें ।

 

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फ्री-रेंज आर्ट हाईवे

इस सड़क यात्रा पर आपको कुछ अनोखे और बड़े पैमाने पर ऐसी फ्री-रेंज कला देखने को मिलेंगी, जो आपने पहले कभी नहीं देखी होंगी। लास वेगास से तोनोपाह तक की अपनी दो दिवसीय यात्रा की शुरुआत बड़े पैमाने पर रंगीन पब्लिक आर्टवर्क, सात जादुई पहाड़ों की यात्रा से करें, जिसमें पेन्ट किये गये, स्थानीय पत्थरों से बने 30 से 35 फीट ऊंचे सात फ्लोरोसेंट टोटेम शामिल हैं।

गोल्डवेल ओपन एयर संग्रहालय और राइलाइट घोस्ट टाउन का भी एक चक्कर लगाएं। यह संग्रहालय, सात जीवन से बड़ी मूर्तियों और अच्छी तरह से संरक्षित राइलाइट के खंडहरों का घर है। कुछ अद्भुत पारंपरिक अमेरिकी व्यंजनों के लिए मिस्पाह होटल के अंदर पिटमैन कैफे और कुछ बारबेक्यू और ब्रियरी क्र्राफ्ट बियर के लिए टोनोपाह ब्रूइंग कंपनी और ब्रियरी क्राफ्ट बियर जाएं। केन्द्रीय नेवादा के समृद्ध इतिहास के बारे में जानने के लिए, टोनोपाह ऐतिहासिक खनन पार्क और केन्द्रीय नेवादा संग्रहालय के साथ इस यात्रा की समाप्ति करें।

 

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ग्रेट बेसिन राजमार्ग

वेगास से एली के लिए यह पांच दिवसीय यात्रा में अमेरिका के इससे अधिक अद्भुत अनुभव नहीं जोड़े जा सकते हैं। वैली ऑउ फायर स्टेट पार्क के साथ अपनी यात्रा शुरू करें और इस क्षेत्र की घाटियों के बीच से जाती ट्रेल्स की खोज करते हुए पेट्रोग्लीफ्स-प्राचीन रॉक कला के बारे में जानें।

मछली पकडऩे और लंबी पैदल यात्रा के लिए केशरे-रयान स्टेट पार्क और बीवर डैम स्टेट पार्क पर जाएं। अगले दिन तंग सिल्टस्टोन घाटियों की खोज के लिए कैथ्रेडल गोर्ज स्टेट पार्क जाएं। फिर पियोचे शहर में, पुराने जेल और पुराने हवाई ट्रामवे को देखने के लिए मिलियन डॉलर कोर्ट हाउस और ***** हिल कब्रिस्तान देखने जाएं।

वार्ड चारकोल ओवन स्टेट पार्क में फोटो खिंचवाने के अवसर को न जाने दें, जिसमें मधुमक्खियों के छत्तों के आकार के ओवन होते हैं, जिसमें 1870 के अंत में लकड़ी का कोयला बनाया जाता था। एली के दो सबसे बड़े सामुदायिक कार्यक्रमों व्हाइट पाइन फायर और आईस शो, और द ग्रेट बाथटब रेस के मेजबान, केव लेक स्टेट पार्क जरूर जाएं। फिर तारों को देखने के लिए अपनी प्रमुख स्थिति के लिए प्रसिद्ध ग्रेट बेसिन नेशनल पार्क के साथ अपनी सड़क यात्रा समाप्त करें ।

 

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एक्सट्राटेरेस्टियल हाईवे (अलौकिक राजमार्ग)

लास वेगास से तोनोपाह तक की दो दिन की यात्रा एलियन्स, अंतरिक्ष-यानों, यूएफओ और क्षेत्र 51 की कहानियों के बारे में है, जैसे राष्ट्रीय परमाणु परीक्षण म्यूजियम में प्रसिद्ध एरिया 51 के बारे में जानें, ईटी फ्रेश जर्की के मस्त विदेशी म्यूरल के साथ फोटो खिचाएं, एलियन रिसर्च सेंटर उपहार की दुकान और लिटिल ए'ले'इन, सड़क के किनारे की एक दुकान, जिसमें एक बार, रेस्तरां और एक मोटल भी है, पर रुकें। अपनी यात्रा की समाप्ति टोनोपाह के ऐतिहासिक खनन पार्क और सेंट्रल नेवादा संग्रहालय के साथ करें।

 

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बर्नर बायवे

रेनो शहर में बर्नर बुटीक्स में जाकर और बर्निंग मैन की आत्मा के बारे में जानने के साथ रेनो से ब्लैक रॉक डेजर्ट तक अपनी यात्रा शुरू करें। द जेनरेटर में कलात्मक चित्र बनाएं और एक रचनात्मक समुदाय का हिस्सा बनें। पिरामिड झील तक अवश्य ड्राइव करें क्योंकि यह मार्ग राज्य के सबसे अच्छे प्राकृतिक मार्गों में से एक है। ब्रूनोस कंट्री क्लब में खाना खाएं और अनजाने जंगल परि²श्य के अनुभव के लिए गुरु रोड और ब्लैक रॉक डेजर्ट के साथ अपनी यात्रा पूरी करें।

 

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द रूबीज रूट

एल्को में अपनी यात्रा शुरू करें, जो अपने चरवाहा और खेती की परंपराओं के लिए जाना जाता है। लैमोइल कैन्यन सीनिक बायवे के ऊपरी भाग में हाइकर्स के लिए कई ट्रेल्स हैं। इसके अलावा सर्दियों के दौरान, रूबी पर्वत हेली-अनुभव पर हेली स्कीइंग के लिए लमोइले के छोटे समुदाय की यात्रा करें। अगले दिन आश्चर्यजनक सुंदर ²श्यों, मछली पकडऩे, नौकायन और वन्य जीवन देखने के लिए एंजेल झील, जर्बिज और रूबी झील राष्ट्रीय वन्यजीव अभ्यारण की यात्रा करें।

नेवादा के पास आपको देने के लिए इसके अलावा भी काफी कुछ है। यह अमेरिका के सबसे दुर्गम राज्यों में से एक है, लेकिन यहां के कई शहर ऐसे हैं, जहां की जीवनशैली बेहतरीन है और अमेरिका के दूसरे प्रांतों के लोग भी यहां आकर रहना चाहते हैं। नेवादा जितना वीरान दिखता है, उतना है नहीं। लास वेगास इसका प्रतिनिधित्व करता है तो वहां तक जाने के लिए बनाई गईं बेहतरीन सड़कें यहां आने वालों के मन में रोमांच और रोमांस भर देती हैं।


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यदि आप कहीं घूमने जा रहे हैं, तो इन बातों का जरूर रखें ध्यान


जब हम कहीं घूने जाते हैं या यात्रा पर होते हैं, तो अक्सा खाने-पीने को लेकर लापरवाह हो जाते हैं। इस दौरान हम कुछ ऐसे फूड्स खा लेते हैं, जिन्हें हमें खासतौर से अवॉइड करना चाहिए। दरअसल, हम जब कहीं घूमने जाते हैं, तो आमतौर पर जंकफूड को अवॉइड नहीं कर पाते। वैसे भी जंकफूड का अपना अलग मजा होता है। जैसे,
ट्रेन या बस में बैठकर चिप्स, स्नैक्स या कोल्ड ड्रिंक के साथ समोसे खाने का लुत्फ लेना किसे नहीं पसंद।

लेकिन अगर हम आपसे ये कहें कि इसकी जगह में आप कुछ ऐसा खाएं, जो हेल्दी भी हो और टेस्टी भी, तो जाहिर सी बात है आप इसे चुनना पसंद करेंगे, क्योंकि बाजार में मिलने वाले जंकफूड से कई सारी पेट संबंधी समस्याएं घेर लेती हैं, जो आपके घूमने का मजा किरकिरा कर देती हैं।
इसलिए अगर आप ट्रैवल के दौरान भी फिट और दुरुस्त रहना चाहते हैं, तो यहां बताई गईं बातों पर जरूर अमल करें...यकीनन, आपका सफर शानदार और यादगार होगा...।


-आप रास्ते में खाने के लिए छिलका उतारकर खाए जाने वाले फल अपने साथ रख सकते हैं, क्योंकि इनको काटने और धोने की जद्दोजहद नहीं करनी पड़ती है। जैसे केला और संतरा जैसे फल आपको विटामिन, कार्बोहाइड्रेट्स और फाइबर प्रोवाइड कराने के साथ रास्ते भर आपकी एनर्जी के लेवल को मेंनटेन करके रखते हैं।
-अगर कहीं कुछ चटपटा खाने का मन कर रहा है, तो मूंगफली खा सकते हैं। चटनी, नमक और मूंगफली का स्वाद आपको पीजा और समोसे के स्वाद से कहीं ज्यादा बेटर लगेगा। इसमें प्रोटीन की मात्रा भरपूर रहती है। इसके अलावा ये आपके इंसुलिन के लेवल को भी मेनटेन करके रखेगा।

- आप अच्छी क्वॉलिटी के दही को भी प्राथमिकता दे सकते हैं, क्योंकि इसमें कई तरह के पोषक तत्व और कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है।
- बाजार में बिकने वाली नमकीन की जगह बेक स्नैक्स को अपने साथ रखें। जैसे भुने चने, चिड़वा और मुरमुरे। इनकी लाइफ भी काफी होती है और हेल्दी भी होते हैं।
-अगर आप इन कुछ टिप्स पर ध्यान देकर यात्रा करते हैं, तो यकीनन आपको इंफेक्शन, डिहाइड्रेशन और स्टमक इंफेक्‍शन जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा और घूमने-फिरने का मजा भी किरकिरा नहीं होगा।


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ट्रेवल एण्ड टूरिज्म इंडस्ट्री में बूम लाने के लिए ये टैक्स कम कर सकती है सरकार


भारत सरकार अगले महीने के केंद्रीय बजट में यात्रा और पर्यटन पर लगने वाले करों में कटौती करने और 210 अरब डॉलर के यात्रा और पर्यटन क्षेत्र में अधिक प्रोत्साहन देने की योजना बना रही है। सरकारी सूत्रों का दावा है कि यह कदम आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और अधिक रोजगार मुहैया कराने के लिए उठाया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार सरकार का यह कदम दुनिया के दूसरे सबसे अधिक आबादी वाले देश में घरेलू पर्यटन के बूम को बढ़ा सकता है। देखने में आया है कि पिछले साल की अपेक्षा इस साल भारत के पयर्टन क्षेत्र में 10 प्रतिशत की वृद्घि हुर्इ है जोकि पिछले साल केवल 8 प्रतिशत ही थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यटन भारत में 40 लाख लोगों को रोजगार देता है और इससे एक दशक में आैर 10 लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद हैं।

 

एक शीर्ष वित्त मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए बजट में उपायों की घोषणा की जा सकती है। साथ ही कहा कि वित्त मंत्री अरुण जेटली होटल के टैरिफ पर 28 प्रतिशत कर कम करने के पक्ष में हैं। आैर पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए कदम उठाने जा रहे हैं।

सरकार अगर यात्रा और पर्यटन पर लगने वाले करों में कटौती के विचार पर अमल करती है तो कर्इ बडी कंपनियों को इससे लाभ कि उम्मीद है। इन कंपनियों में इंडिगो एयरलाइंस, जेट एयरवेज और होटल श्रृंखला जैसे ताजमहल आैर ओबेराय शामिल हैं।

इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर (आईएटीओ) के अध्यक्ष प्रणब सरकार ने कहा, भारत पर्यटकों को होटल के कमरे और यात्रा पर 30 प्रतिशत कर का भुगतान करना पडता है। जबकि सिंगापुर, थाईलैंड और इंडोनेशिया में यह कर लगभग 10 प्रतिशत ही होता है।

एक अन्य सरकारी अधिकारी के अनुसार सरकार का यह कदम पर्यटन के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाएगा। साथ नए होटलों में निवेश पर आयकर में छूट को बढ़ाएगा।


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पर्यटन क्षेत्र भारत के शीर्ष 10 उद्योगों में शामिल : पीयूष तिवारी


भारत में कुछ साल पहले तक पर्यटन को अवकाश गतिविधि माना जाता था, जो केवल समाज के आर्थिक रूप से सुरक्षित वर्ग तक ही सीमित थी। लेकिन आय के स्तर में वृद्धि, बेहतर बुनियादी ढांचे, बेहतर साधन संचार और यात्रा के साथ रहने में आसानी ने भारत में पर्यटन को बढ़ावा दिया है। आज, पर्यटन और आतिथ्य सेवा देश के शीर्ष 10 सबसे बड़े सेवा उद्योगों में से एक है।

भारत पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) के वाणिज्यिक और विपणन निदेशक पीयूष तिवारी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, ‘‘आय के स्तर में वृद्धि, बेहतर बुनियादी ढांचे, बेहतर साधन संचार और यात्रा में आसानी ने भारत में पर्यटन को बढ़ावा दिया है। आज, पर्यटन और आतिथ्य सेवा देश के शीर्ष 10 सबसे बड़े सेवा उद्योगों में से एक है।’’

आईटीडीसी के निदेशक ने कहा, ‘‘भारत ने पिछले वर्ष पर्यटन क्षेत्र में अपनी रैंकिंग में बड़ी प्रगति की है। यात्रा और पर्यटन प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक (टीटीसीआई), 2015 में भारत का स्थान 52वां था जबकि 2017 की टीटीसीआई रिपोर्ट में भारत को 40वां स्थान दिया गया है। 2013 में भारत का स्थान 65 और 2011 में 68 था।’’

साल 2017 को पर्यटन क्षेत्र में सबसे सफल वर्ष करार देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2016-17 में पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले लगभग 6.32 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जिसके फलस्वरूप इस साल आईटीडीसी का कुल कारोबार 495.14 करोड़ रुपये का रहा।’’

पर्यटन क्षेत्र में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘हाल ही में, सरकार ने पर्यटन को भारतीय अर्थव्यवस्था का एक स्तंभ बनाने के लिए पिछले तीन सालों में कई निर्णायक कदम उठाए हैं। जिनमें 161 देशों से आने वाले आगंतुकों को वीजा जारी करने की योजनाएं, उड़ान क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को लागू करना, हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 10 अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में 24 घंटे सातों दिन टोल फ्री बहुभाषी जानकारी मुहैया कराना, डिजिटल भुगतान के लिए प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है। इन कदमों ने यात्रा और पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने का काम किया है और देश के समग्र आर्थिक विकास में वृद्धि को बढ़ावा दिया है।’’

बदलते वक्त में युवाओं की पर्यटन के क्षेत्र में भागीदारी के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘‘वर्तमान युवा पीढ़ी की पर्यटन परि²श्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका है और उनकी भागीदारी पर्यटन को हर तरीके से बढ़ा सकती है। वास्तव में युवा पीढ़ी की क्षमता को जानते हुए प्रधानमंत्री लोगों को देश को जानने और विविधता को समझने के लिए अपनी ‘मान की बात’ रेडियो कार्यक्रम में प्ररित कर चुके हैं। ’’

आईटीडीसी के निदेशक ने कहा, ‘‘भारत में सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन स्मारकों का एक असाधारण, विशाल और विविध समंदर है। देश में पुरातात्विक स्थलों के रूप और अवशेषों में भारतीय विरासत अद्भुत है और यह तथ्य कि ये स्मारक जीवित रहने की यादें हैं, हजारों सालों के स्वर्णकालीन ऐतिहासिक युग और स्वतंत्रता-पूर्व लड़ाई के गवाह हैं। देश के नागरिकों की आंखों में इनके लिए एक विशेष सम्मान होना चाहिए। ये स्मारक साहस, विकास और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का प्रतीक हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सामान्य तौर पर सरकार द्वारा भारत के नागरिक और विशेषकर छात्रों के बीच जागरूकता फैलाने और विरासत के संरक्षण के बारे में विज्ञापन देकर कई सेमिनार हर साल आयोजित किए जाते हैं, जहां छात्रों को न केवल बुनियादी कदमों के बारे में बताया जाता है बल्कि लोगों को सक्रिय भागीदारी के बारे में प्रोत्साहित किया जाता है। सम्मेलनों में यह बताया जाता है कि देश के नागरिक होने के नाते हमारे स्मारकों की रक्षा के लिए हम जिम्मेदार हैं।’’

तिवारी ने कहा, ‘‘हमें स्मारकों को संरक्षित रखने और अपनी आनी वाली पीढ़ी को दिखाने की जरूरत है कि हमारे पूर्वजों ने संस्कृति के विकास में क्या योगदान दिया। हमारी ओर से किया गया थोड़ा प्रयास एक बड़ा बदलाव ला सकता है जो देश के अतीत, वर्तमान और भविष्य की पीढिय़ों को बना सकता है ताकि विश्व को भारत पर गर्व हो सके।’’

आईटीडीसी के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘संगठन आतिथ्य और पर्यटन उद्योग में अपनी स्थापना के समय से अग्रणी रहा है। देश की सरकारी नीतियों और आर्थिक परिवर्तन के साथ साथ समय अंतराल पर आईटीडीसी ने खुद को विभिन्न परि²श्यों में साबित किया है, चाहे वो आतिथ्य सत्कार की बात हो या फिर पर्यटन क्षेत्र में भागीदारी की।’’


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Goa tourism : गोवा जाने का है प्लान तो अपनाएं टिप्स, पीक सीजन में भी भरी रहेगी जेब


Goa tourism : सुनहरें समुद्र तट, रोमांचकारी वॉटर स्पोर्ट्स, जीवंत नाइटलाइफ़, तरह-तरह के समुद्री खाने आैर छोटे-छोट टापूआें के लिए मशहूर गोवा देश का एक फेमस होलीडे डेस्टिनेशन है। जहां हर साल देशी विदेशी पर्यटकों का तांता लगा रहता है।


सर्दियों के मौसम में गोवा का पर्यटन अपने चरम पर होता है। इस मौसम में देशी-विदशी पर्यटकों की भरमार होती है। गोवा आए हुए पर्यटक यहां होने वाले फेस्टीवल्स काे पूरा एंजाय करते है। आैर पर्यटकों के इस पीक सीजन में गोवा में रहना, खाना,शॉपिंग, ट्रेवल करना काफी मंहगा हो जाता है, क्योंकि पीक सीजन होने के कारण हर चीज मंहगी हो जाती है।


लेकिन अगर आप सर्दियों में परिवार के साथ गोवा में छुट्टियों का बिताने का प्लान बना रहे हैं तो हम आपको बताते हैं कुछ एेसी टिप्स जो आपको बजट ट्रेवलर के तौर पर काफी मदद करेंगी आैर आप गोवा में परिवार के साथ छुट्टियां का पूरा मजा ले सकेंगे।

अपनाएं ये टिप्स--
कैब की बजाय ले टू-व्हीलर
पीक सीजन में गोवा में घूमने के लिए निजी कैब और टैक्सियों को किराए पर लेना एक बहुत महंगा मामला साबित हो सकता है। इसलिए अगर आप पीक सीजन गोवा घूमना चाहते हैं तो सबसे अच्छा तरीका है स्कूटर या बाइक को किराए पर लेना जो कि आपके बजट में आसानी से मिल जाएंगे। और कहने की जरूरत नहीं है कि भारतीय और अंतरराष्ट्रीय ड्राइवरों के लिए गोवा की सड़कें अच्छी और सुरक्षित हैं।

समुद्र तट पर मिल जाते है सस्ते गेस्टहाउस
पीक सीजन में बजट यात्रियों के लिए गोवा में आवास विकल्पों की कोई कमी नहीं है। आप अपने बजट के मुताबिक बीच पर बने हुए सस्ते होटल,झोपडी,गेस्टहाउस और बैकपैकर हॉस्टल में से किसी का भी चुनाव कर एक आरामदायक आवास ले सकते हैं। इसके अलावा, अगर आप इनको पहले से बुक करते हैं, तो यह कीमतों के मामले में भी बेहतर काम कर सकता है।

छोटे से झोंपड़ीनुमा रेस्तरां में भी मिलेगा स्वादिष्ट व्यंजन
ये कहने की जरूरत नहीं है कि खाने के मामले में गोवा में किसी वैरायटी की कमी नहीं है। यहां बजट ट्रेवलर के लिए अच्छे रेस्तरां के पर्याप्त विकल्प हैं। और आश्चर्य की बात नहीं है कि यहां किसी छोटी झोंपड़ी में, आप एक सस्ती कीमत पर एक जायकेदार मल्टी-व्यंजन मेनू पसंद कर सकते हैं। इतना ही नहीं कम दामों पर इन शाक्स और रेस्तरां में होने वाली पार्टियों का भी मजा ले सकते हैं।

पिस्सू बजार से करें खरीददारी
अगर आप खरीददारी के शौकिन है तो गोवा के फेमस स्थानीय पिस्सू बाजारों से कई तरह की सस्ती खरीददारी कर सकते हैं। यहां के पिस्सू बाजार में आपको कपडे, लेदर के सामान,इलेक्ट्रॉनिक्स, सजावटी सामान आैर स्थानीय उत्पाद काफी सस्ती कीमतों पर मिल जाते हैं। अगर आप भावतोल करने में तेज है तो आपका ये कौशन आपको काफी फायदा दिला सकता है।

अब आपने जब गोवा जाने का मन बना ही लिया है तो इन टिप्स पर जरूर गौर कीजिएगा। काफी फायदा मिलेगा, साथ ही पीक सीजन में भी कम बजट में आप परिवार के साथ छुट्टियाें का पूरा मजा लेगें।


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Auli Resort : अपनी प्राकृतिक सुंदरता से बरबस ही दुनियाभर के पर्यटकों को अपनी आेर खींच लाता है आैली


उत्तराखण्ड में 5-7 किलोमीटर में फैला छोटा सा स्की-रिसोर्ट आैली अपनी प्राकृतिक सुंदरता से बरबस ही दुनियाभर के पर्यटकों को अपनी आेर खींच लाता है। स्की-रिसोर्ट आैली 9,500-10,500 फीट की ऊँचाई पर बना होने के कारण वहां से आसपास के प्राकृतिक नजारे बेहद सुंदर नजर आते हैं। देवदार के पेडों की महक यहाँ की ठंडी और ताजी हवाओं में महसूस की जा सकती है।


बर्फ से खेलते हैं पर्यटक
औली में प्रकृति ने अपने सौन्दर्य को खुल कर बिखेरा है। बर्फ से ढकी चोटियों और ढलानों को देखकर दिल खुश हो जाता है। यहाँ पर कपास जैसी मुलायम बर्फ पड़ती है और पर्यटक खासकर बच्चे इस बर्फ में खूब खेलते हैं।

जिंदादिल लोगों के लिए है खास जगह
जिंदादिल लोगों के लिए औली बेहद खास जगह है। यहाँ पर बर्फ गाड़ी और स्लेज आदि की व्यवस्था नहीं है। यहाँ पर केवल स्कीइंग और केवल स्कीइंग की जा सकती है। इसके अलावा यहाँ पर अनेक सुन्दर दृश्यों का आनंद भी लिया जा सकता है। नंदा देवी के पीछे सूर्योदय देखना एक बहुत ही सुखद अनुभव है। नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान यहाँ से 41 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा बर्फ गिरना और रात में खुले आकाश को देखना मन को सकून पहुंचाने वाला होता है।

सिखने को मिलती है स्की

यहाँ पर स्की करना सिखाया जाता है। गढ़वाल मण्डल विकास निगम ने यहाँ स्की सिखाने की व्यवस्था की है। मण्डल द्वारा 7 दिन की नॉन-सर्टिफिकेट और 14 दिन की सर्टिफिकेट ट्रेनिंग दी जाती है। यह ट्रेनिंग हर वर्ष जनवरी-मार्च में दी जाती है। मण्डल के अलावा निजी संस्थान भी ट्रेनिंग देते हैं। यह पर्यटक के ऊपर निर्भर करता है कि वह कौन सा विकल्प चुनता है। स्की सीखते समय सामान और ट्रेनिंग के लिए रू.500 देने पड़ते हैं। इस फीस में पर्यटकों के लिए रहने, खाने और स्की सीखने के लिए आवश्यक सामान आदि की आवश्यक सुविधाएं दी जाती हैं।

शुल्कः

स्की करने के लिए व्यस्कों से रू. 475 और बच्चों से रू. 250 शुल्क लिया जाता है। स्की सीखाने के लिए रू. 125-175, दस्तानों के लिए रू. 175 और चश्मे के लिए रू. 100 शुल्क लिया जाता है। 7 दिन तक स्की सीखने के लिए भारतीय पर्यटकों से रू. 4,710 और विदेशी पर्यटकों से रू. 5,890 शुल्क लिया जाता है। 14 दिन तक स्की सीखने के लिए भारतीय पर्यटकों से रू. 9,440 और विदेशी पर्यटकों से रू. 11,800 शुल्क लिया जाता है।

ठहरने का है पूरा इंतजाम
आैली में कई डीलक्स रिसोर्ट भी हैं। यहाँ पर भी ठहरने का अच्छा इंतजाम है। पर्यटक अपनी इच्छानुसार कहीं पर भी रूक सकते हैं। बच्चों के लिए भी औली बहुत ही आदर्श जगह है। यहाँ पर पड़ी बर्फ किसी खिलौने से कम नहीं होती है। इस बर्फ से बच्चे बर्फ के पुतले और महल बनाते हैं और बहुत खुश होते हैं।

जाने का सही समय
औली जाने के लिए सबसे अच्छा मौसम जनवरी-मार्च का है। इस समय यहाँ पर बर्फ पड़ती है। यह समय स्की करने के लिए बिल्कुल ठीक समय है।


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पर्यटकों से गुलजार हुआ चमोली


Tourist Place chamoli : उत्तराखंड के चमोली में इन दिनों हुर्इ बर्फबारी ने जिले के पर्यटन को चारचांद लगा दिए हैं। सर्दी के मौसम में भी बर्फीले नजारों के शौकिन पर्यटकों से चमोली जिला गुलजार हो गया है।

बर्फबारी से ढ़की इन चोटियां को देखने के लिए देशी-विदशी पर्यटकों का तांता लगा रहता है। चमोली जनपद में नंदा देवी, नीलकंठ, हाथी घोड़ा पालकी, त्रिशूल, कामेट, घांघरिया आदि पर्वत श्रृंखलाएं इन दिनों बर्फ से ढ़की हुर्इ हैं। जिन्हें देखने के लिए पर्यटक बरबस ही खींचा चला जाता हैं।


चमोली की प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को अपनी ओर हमेशा से ही आकर्षित करती रही है। पूरे चमोली जिले में कई ऐसे मंदिर है जो हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। चमोली में ऐसे कई बड़े और छोटे मंदिर है तथा ऐसे कई स्थान है जो रहने की सुविधा प्रदान करते हैं। इस जगह को चाती कहा जाता है। चाती एक प्रकार की झोपड़ी है जो अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है। चमोली मध्य हिमालय के बीच में स्थित है। अलकनंदा नदी यहाँ की प्रसिद्ध नदी है जो तिब्बत की जासकर श्रेणी से निकलती है। चमोली का क्षेत्रफल 3,525 वर्ग मील है।

जोशीमठ में संचालित हिमालयन ट्रै¨कग एजेंसी के प्रबंधक संजय कुंवर का कहना है कि लार्ड कर्जन ट्रैक पर इन दिनों पर्यटकों की अच्छी खासी चहलकदमी हो रही है। उन्होंने बताया कि इस ट्रैक के अलावा देहलीसेरा में भी काफी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं।

चामोली में की प्रसिद्घ स्थलः
बद्रीनाथ- बद्रीनाथ देश के प्रमुख धार्मिक स्थानों में से एक है। यह चार धामों में से एक धाम है। श्री बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। इसकी स्थापना आदि शंकराचार्य ने की थी। इसके बाद इसका निर्माण दो शताब्दी पूर्व गढ़वाल राजाओं ने करवाया था। बद्रीनाथ तीन भागों में विभाजित है- गर्भ गृह, दर्शन मंडप और सभा मंडप।

तपकुण्ड-अलखनंदा नदी के किनार पर ही तप कुंड स्थित कुंड है। इस कुंड का पानी काफी गर्म है। इस मंदिर में प्रवेश करने से पहले इस गर्म पानी में स्नान करना जरूरी होता है। यह मंदिर प्रत्येक वर्ष अप्रैल-मई माह में खुलता है। सर्दियों के दौरान यह नवम्बर के तीसर सप्ताह में बंद रहता है। इसके साथ ही बद्रीनाथ में चार बद्री भी है जिसे सम्मिलित रूप से पंच बद्री के नाम से जाना जाता है। यह अन्य चार बद्री- योग ध्यान बद्री, भविष्य बद्री, आदि बद्री और वृद्धा बद्री है।

हेमकुंड साहिब-हेमकुंड को स्न्रो लेक के नाम से भी जाना जाता है। यह समुद्र तल से 4329 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां बर्फ से ढके सात पर्वत हैं, जिसे हेमकुंड पर्वत के नाम से जाना जाता है। इसके अतिरिक्त तार के आकार में बना गुरूद्वारा जो इस झील के समीप ही है सिख धर्म के प्रमुख धार्मिक स्थानों में से एक है। यहां विश्‍व के सभी स्थानों से हिन्दू और सिख भक्त काफी संख्या में घूमने के लिए आते हैं। ऐसा माना जाता है कि गुरू गोविन्द सिंह जी, जो सिखों के दसवें गुरू थे, यहां पर तपस्या की थी। यहां घूमने के लिए सबसे अच्छा समय जुलाई से अक्टूबर है।


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स्टोरीज ऑफ डेजर्ट में दिखेगा मरुस्थल का जीवन चित्रण


भारतीय कला एवं संस्कृति की छवि को प्रर्दशित करते 'स्टोरीज ऑफ डेजर्ट' (मरुभूमि की कहानियां) समारोह में राजस्थान के ग्रामीण आकर्षण-थार का सांसारिक जीवन, मरुभूमि के लोगों का सरल जीवन, क्षेत्र के खूबसूरत रंग, यहां के गीत और संगीत तथा कई लोगों के लिए कौतूहल बनी यहां की खुशबू की झलक देखने को मिलेगी।

इस कार्यक्रम के तहत जाने-माने इतिहासकार और लेखक विलियम डेलरिंपल भारत की 'अतुलनीय महक संस्कृति' पर परिचर्चा करेंगे। एक समय यह विश्व में काफी प्रसिद्ध हुआ करती थी लेकिन अब यह संस्कृति लगभग विलुप्त हो चुकी है।

'स्टोरीज ऑफ डेजर्ट' का आयोजन सहपीडिया और रूपायन संस्थान द्वारा 2 दिसंबर को किया जाएगा।

रूपायन संस्थान के सचिव और दिवंगत कोमल कोठारी के पुत्र कुलदीप कोठारी ने कहा, ज्यादातर लोगों के लिए राजस्थान की छवि शाही जीवनशैली और आलीशान किलों के रूप में बनी हुई है और वे यहां की ऐतिहासिक इमारतों तथा संस्थानों से ही वाकिफ हैं। लेकिन अरनाझरना दुनिया को राजस्थान की इससे इतर भी एक अलग तस्वीर दिखाने का एक प्रयास है- जिसमें घुमंतू गड़रियों, थार की पृष्ठभूमि में लोक गायकों, शिल्पकारों की जीवनशैली, उनके गीतों, मिथकों एवं मान्यताओं, दैनिक इस्तेमाल की वस्तुओं की झलक मिलती है जो विश्व के इस हिस्से की विशेषता है।

सहपीडिया की कार्यकारी निदेशक डॉ. सुधा गोपालाकृष्णन ने कहा, महान मौखिक इतिहासकार कोठारी और विख्यात कथाकार देथा ने एक सराहनीय बौद्धिक भागीदारी की है। रूपायन का संग्रहालय और इसका संग्रहण कार्य इस विषय के प्रति इसके जज्बे और इसके अथाह ज्ञान को दर्शाता है।

'स्टोरीज ऑफ डेजर्ट' में प्रवेश नि:शुल्क रखा गया है लेकिन इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य है। इसके पास जोधपुर , पौउटा स्थित रूपायन संस्थान के कार्यालय या 15 ए.डी. बेकरी के सभी आउटलेट्स तथा दिल्ली स्थित सहपीडिया कार्यालय पर उपलब्ध हैं। पंजीकरण कराना संभव है और पास पहले आओ पहले पाओ के आधार पर जारी किए जा रहे हैं। यह कार्यक्रम 2 दिसंबर अपराह्न 3.30 बजे से शुरू होगा।


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घूमने के लिए पूरी दुनिया में बेस्ट है सैन फ्रांसिस्को, इन जगहों को देख आप भी ललचा जाएंगे


सैन फ्रांसिस्को अपने लज़ीज खाने, गोल्डन गेट ब्रिज, पियर 39 और बहुत सारे प्रसिद्ध आकर्षणों के लिए जाना जाता है। यदि आप यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आप अपनी इस यात्रा का पूरा-पूरा आनंद उठाएं, तो सैन फ्रांसिस्को के चाइनाटाउन में ज़रूर जाएं। सैन फ्रांसिस्को का चाइनाटाउन एक अनूठे सांस्कृतिक मेले जैसा है, जिसे आप कभी नहीं भूलेंगे। उत्तरी अमेरिका में यह सबसे पुराना और दूसरा सबसे बड़ा चाइनाटाउन है। इस एक दिन की यात्रा के दौरान सैन फ्रांसिस्को के चाइनाटाउन के खाने, इतिहास, खरीदारी वगैरह का मज़ा लें।

ड्रेगन्स गेट
यह एक ऐतिहासिक द्वार की मेहराब है, जहां से शहर के नज़दीकी चाइनाटाउन में प्रवेश किया जा सकता है। 1970 में इसे पड़ोस के दक्षिणी प्रवेश के माध्यम के रूप में बनाया गया था। यह अनूठा ड्रेगन्स गेट पूरी तरह से चीनी शैली में बनाया गया थाः पत्थरों से, लकड़ी से नहीं। यह और गोल्डन ड्रेगन स्‍ट्रीटलाइट, दोनों ही आगंतुकों को ऊपर ग्रांट एवेन्यू की दुकानों तक ले जाते हैं।

ग्रेट ईस्टर्न रेस्तरां
यहां आपको लगभग हर जगह शू-माई की ठेलागाड़ी चलती मिलेंगी, जिनसे आपकी सांसें और यहां की गलियां स्वादिष्ट व्यंजनों की महक से सराबोर हो जाती हैं। लेकिन, जब आप इस जगह की यात्रा करें तो ग्रेट ईस्टर्न रेस्तरां में असली चीनी व्यंजन दिम सम का स्वाद ज़रूर लें। यह रेस्तरां अपने किफायती खानपान के लिए जाना जाता है। वे कई प्रकार की पकौड़ियां और मीठी डबलरोटियां बनाते हैं, जिनसे आपका पेट भी भर जाएगा और जेब पर ज्यादा बोझ भी नहीं पड़ेगा।

चीनी संस्कृति केन्द्र
चीनी संस्कृति केन्द्र एक प्रमुख सामुदायिक, गैर-लाभार्थ संगठन है, जिसे चीनी संस्कृति संघ के प्रचालन केन्द्र के रूप में 1965 में स्थापित किया गया था। यहां आश्चर्य का विषय यह है कि पिछले 50 वर्षों में चाइनाटाउन में किस तरह से प्रवासी आबादी ने आकर यहां की कला-संपदा के साथ-साथ अपने जीवन को भी संवारा है। हिल्टन की तीसरी मंज़िल पर स्थित सीसीसी की प्रदर्शनियों में रास्तों पर पनपी कला से लेकर अग्रणी एवं उन्नत छाया-चित्रकारी देखने को मिलती है और यहां पर प्रवेश निःशुल्क है।

अमेरिका की चीनी ऐतिहासिक संस्था
इस संग्रहालय में तस्वीरों और कलाकृतियों के जरिए अमेरिका में चीनी प्रवासियों के अनुभव दिखाए गए हैं। जूलिया मॉर्गन द्वारा परिकल्पित इस ऐतिहासिक भवन में स्थापित अमेरिका की चीनी ऐतिहासिक संस्था केवल 5 डॉलर के शुल्क के बदले सैन फ्रांसिस्को के बाहर की संस्कृति एवं इतिहास में चीनी-अमेरिकी योगदानों की अनमोल जानकारी देती है और अगर आप किसी सप्ताहांत के दौरान वहां रुकते हैं तो आपको एक वैवाहिक चाय उत्सव भी देखने को मिलेगा। पूर्व-सलाहः अमेरिका की चीनी ऐतिहासिक संस्था केवल संग्रहालय की ही नहीं बल्कि आस-पड़ोस की सैर भी करवाती है।

चाइनाटाउन की पतंग-दुकान
ग्रांट एवेन्यू सभी प्रकार की जड़ी-बूटियों और सस्ते गहनों की दुकानों से सजा है, लेकिन चाइनाटाउन की पतंग-दुकान वहां से थोड़ा हटके है। इस रंगबिरंगी ऐतिहासिक दुकान में उत्सवी छटा वाली कई तरह की पतंगें, फेंग शुई वस्तुएं और सजावटी सामान मिलते हैं। बिल्कुल, ड्रेगन पतंगों और हाथ से बनी अनमोल वस्तुओं के लिए यह सबसे बढ़िया दुकान है, लेकिन आपको यहां आईपैड के आवरण और अनूठी वस्तुएं भी मिल जाएंगी। और ये रात में 8:30 बजे तक खुली रहती हैं, इसलिए आप देर से भी वहां जा सकते हैं।

गोल्डन गेट फॉर्चून कुकी कारखाना
इस ऐतिहासिक बेकरी में हाथ से बनी सितारा कुकीज़ एक छोटी-सी खुली रसोई में बनाई जाती हैं और इन्हें बनते हुए निःशुल्क देखा जा सकता है। कुकी का यह कारखाना चाइनाटाउन में एक छोटी एवं संकरी गली में स्थित है, जहां आसपास कोई पार्किंग नहीं है। इनके पकने से अंदर बड़ी ही भीनी-भीनी खुशबू आती है। यह इतनी छोटी जगह है कि 10 से ज्यादा लोग अंदर फंस से जाते हैं। पर्यटन गतिविधियों से जुड़े यहां के स्थानीय लोग भी गोल्डन गेट फॉर्चून कुकी कंपनी की तारीफ करते नहीं थकते, जो सन् 1962 से कुकीज़ का उत्पादन कर रही है। एक बार ज़रूर जाएं और यह देखकर अपनी जिज्ञासा शांत करें कि आटा सख्त होने से पहले वे किस तरह से सितारा कुकीज़ तैयार करते हैं।

आर एण्ड जी लाउंज
यह प्रसिद्ध कैंटोनीज़ भोजनालय एक बुनियादी तलघर में बनाया गया है और ऊपर के रूम अधिक सामान्य हैं। चूंकि चाइनाटाउन के कुछ विशाल बैंकेट हॉल बंद हो गए, इसलिए 225 सीटों वाला यह तीन-मंज़िला लाउंज अस्तित्व में आया, जो भूखे-प्यासे लोगों को लिची मार्टिनी और नमक-मिर्च से सराबोर केकड़े परोसता है। आर एण्ड जी लाउंज छोटा, पर व्यवस्थित है, जहां विस्तृत, परंपरागत व्यंजनों को सर्वाधिक अमेरिकी रंग में रंगी पसंदों से संतुलित करते हुए परोसा जाता है।
 
लि पो कॉकटेल लाउंज
एक प्राचीन कवि के नाम पर बना यह 77 वर्ष पुराना कुंड है, जो अपनी चीनी कॉकटेल माई ताई और गोलाकार बार के पीछे स्वर्ण बुद्धा के लिए प्रसिद्ध है। जी हां, यह पूर्वी तड़क-भड़क से सराबोर है, लेकिन एक ऐसी संस्था है जो सैन फ्रांसिस्को के शीर्ष धनियों में शुमार है।

यूएत ली
यह देर रात तक खुला रहने वाला कैंटोनीज़ सीफूड रेस्तरां है (सप्ताह में पांच रातों में सुबह 3 बजे तक खुला रहता है), जिसे चाइनाटाउन की रात की राजधानी माना जाता है। दिनभर अधेड़ उम्र के लोगों के जमघट के बाद, यहां क्लब के बच्चे आकर जमा होते हैं और फिर रात में जागने के शौकीन यहां पर व्यंजनों का लुत्फ उठाते हैं। व्यंजनों पर हरीभरी सजावट उन्हें और भी पौष्टिक बना देती है। इसलिए, सैन फ्रांसिस्को के जगप्रसिद्ध चाइनाटाउन में ज़रूर रुकें और अपनी जिज्ञासु इच्छाएं लज़ीज व्यंजनों के स्वाद तथा अद्भुत नज़ारों का आनंद लेते हुए पूरी करें।


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उत्कल एक्सप्रेस हादसा...सुबह प्रभु ने कहा, आज ही तय करो जवाबदेही, रात तक आठ अफसरों पर गाज


 नई दिल्ली। पहली बार किसी ट्रेन हादसे को लेकर रेल मंत्रालय ठोस एक्शन मोड में दिखा है। शनिवार को बेपटरी हुई पुरी से हरिद्वार जा रही उत्कल एक्सप्रेस हादसे को लेकर रविवार को सुबह 11: 11 बजे रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने रेलवे बोर्ड के चेयरमेैन को पहली नजर में मिले सबूतों के आधार पर रविवार शाम तक जबावदेही तय करने के निर्देश दिए थे। अपराह्न 3:00 बजे तक ही रेलवे ने बता दिया कि हादसे के पीछे दिल्ली डिविजन के इंजीनियरिंग विभाग की घोर लापरवाही थी। रात होते-होते  8 अधिकारियों पर कार्रवाई भी कर दी गई। 4 अधिकारी निलंबित किए गए, 3 को छुट्टी पर भेजा गया और 1 अफसर का ट्रांसफर किया गया है। उत्तर रेलवे ने सीनियर डिविजनल इंजीनियर और उनके मातहत काम करने वाले तीन कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया। इनके अलावा उत्तर रेलवे के चीफ ट्रैक इंजीनियर का ट्रांसफर कर दिया गया है। डीआरएम दिल्ली और जीएम उत्तर रेलवे को छुट्टी पर भेज दिया गया है। इसी तरह रेलवे बोर्ड के सदस्य, इंजीनियरिंग को भी छुट्टी पर भेज दिया गया है।

लापरवाही, चूक, रेल संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का केस
इससे पहले रेलवे पुलिस ने अपराह्न 3:30 बजे लापरवाही, चूक, रेल संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला भी दर्ज कर लिया। प्रभु ने घटना की जांच के आदेश शनिवार को ही दे दिए थे। वहीं रेलवे इस बात की भी जांच करेगा कि क्या ट्रैक पर बिना इजाजत के काम चल रहा था। ट्रैफिक के सदस्य मोहम्मद जमशेद ने कहा कि रेलवे कमिश्रर, सुरक्षा अपनी विस्तृत जांच के बाद बताएंगे कि ट्रैक पर किस तरह का मरम्मत चल रहा था या फिर कहीं सुरक्षा नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ था। अगर ऐसा हुआ तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। शनिवार को हुए हादसे में पुरी से हरिद्वार जा रही उत्कल लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। जबकि 90 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा भी घटनास्थल पहुंचे।


कासगंज में एक मालगाड़ी बेपटरी
यूपी के कासगंज में रविवार को एक मालगाड़ी बेपटरी हो गई। हादसे में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। बिहार के किशनगंज के बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए मिट्टी लेकर यह मालगाड़ी जा रही थी। एक बोगी उतर गई, जिससे 100 मीटर ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गया।


ऑडियो क्लिप से भी लापरवाही का खुलासा
रेल हादसे जुड़ा एक ऑडियो सामने आया है, जिसमें घटनास्थल से कुछ दूरी पर तैनात गेटमैन और एक रेलवे वर्कर की बातचीत है। गेटमैन बता रहा है कि पटरी पहले से टूटी थी, लेकिन उस पर सही से काम नहीं किया जा रहा था। जो पटरी काटी गई थी, उसे जोड़ा नहीं गया और ऐसे ही छोड़ दिया गया। वहां काम करने वाले वर्कर्स अपनी मशीन भी वहीं छोडक़र चले गए। जिस वक्त हादसा हुआ, जून‍ियर इंजीन‍ियर (जेई) ने अपना फोन बंद कर लिया। ऑडियो क्लिप में गेटमैन बता रहा है कि पटरी जोड़ी नहीं गई थी और ट्रेन के आने का वक्त हो गया था। ऐसे में सुरक्षा के लिए न कोई सिग्नल दिया गया और न ही लाल झंडा लगाया गया। ऑडियो सामने आने पर मोहम्मद जमशेद ने कहा कि इसकी जांच होगी।


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अगर बच्चों के साथ कर रहे हैं यात्रा तो इन बातों का ध्यान रखें


बच्चों के साथ ट्रैवल करना आसान नहीं होता। बच्चों के साथ घूमने जाने के लिए आपको जरूरत से ज्यादा सामान पैक करना पड़ता है, हर तरह की इमर्जेंसी सिचुएशन व जरुरतों के लिए भी तैयार रहना पड़ता है। बच्चे के साथ सफर करते वक्त इन खास टिप्स का ध्यान रखें...

1. बच्चे के साथ सफर के दौरान एक्सट्रा कपड़े, डायपर और दवाईयां रखना ना भूलें क्योंकि आप नहीं जानतीं की कब उनकी अचानक जरूरत पड़ जाएं।

2. हमेशा अपने साथ इमर्जेंसी कॉन्टैक्ट की लिस्ट तैयार रखें ताकि जरूरत पडऩे पर आप उनका इस्तेमाल कर सकें।

3. नए वातावरण में घुलने मिलने में बच्चों का थोड़ा समय लगता है। जैसे ही आप अपने डेस्टिनेशन पर पहुंचे तुरंत अपना सामान अनपैक करें और बच्चों के खिलौने, कपड़े वगैरह निकालकर उनके सामने रख दें ताकि उन्हें सामान्य महसूस हो।  

4. अपने बच्चे के फेवरिट खिलौने और किताबें रखना ना भूलें। ऐसा करने से ना सिर्फ बच्चे बोर हो जाएंगे। उन्हें चिड़चिड़ापन भी महसूस होगा।

5. सिर्फ मां को ही बच्चों का ध्यान नहीं रखना है। पिता के साथ ही घर के दूसरे सदस्यों के पास भी बच्चे को छोड़े ताकि आपको भी रिलैक्स होने का थोड़ा समय मिल जाए और बच्चे भी कुछ अलग करने का आनंद उठा सकें।

6. ज्यादातर बच्चे खाने के मामले में बहुत परेशान करते हैं। लिहाजा बच्चे का पसंदीदा स्नैक पैक करना ना भूलें ताकि उसे अगर बाहर का खाना पसंद ना आए तो आपके कुछ ऑप्शन हो।

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मॉनसून के मौसम में करें केरल की सैर


केरल आम दिनों में जितना खूबसूरत दिखता है, मॉनसून के सीजन में उसकी प्राकृतिक खूबसूरत कई गुणा बढ़ जाती है। बारिश के मौसम में केरल में चारों तरफ हरियाली, बैकवॉटर्स, ठंडी हवा और बादलों से ढका सूर्यास्त रहता है जो इसे रोमांस का सीजन बना देता है। ऐसे में अगर आप मॉनसून के सीजन में कहीं घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं तो केरल जाएं-

जुलाई से सितंबर के बीच केरल में वॉटर स्पोर्ट्स का सीजन रहता है। इस दौरान अलप्पुजा के बैकवॉटर्स में स्नेक बोट रेस का आयोजन होता है। इनमें सबसे फेमस है नेहरू ट्रोफी बोट रेस जिसका आयोजन हर साल अगस्त के दूसरे सप्ताह में होता है। इन रेस का सबसे बड़ा आकर्षण होता इसकी बोट्स जो करीब 30 मीटर लंबी और सांप की आकृति की होती हैं।

मॉनसून के सीजन में ही यहां 10 दिनों तक फसलों का त्योहार ओनम मनाया जाता है। इस दौरान केले के पत्तों पर बेहद टेस्टी वेजिटेरिअन खाना सर्व किया जाता है। आप चाहें तो किसी लोकल रेस्तरां में जाकर भी इस खाने का लुत्फ उठा सकते हैं। 

केरल में एक से बढ़कर एक स्पा और वेलनेस सेंटर्स हैं। ऐसे में अपनी सभी समस्याएं और स्ट्रेस भूलने के लिए आप इन वेलनेस सेंटर्स का प्रयोग कर सकते हैं। आयुर्वेद में भी इस बात का जिक्र है कि मॉनसून का ठंडा और सुहावना मौसम शरीर के कायाकल्प के लिए उपयुक्त है। आप इन वेलनेस सेंटर्स में बुकिंग करवा कर स्पा, ऑयल बेस्ड थेरपी, योग और बैलेंस डायट का फायदा उठा सकते हैं जिससे आपका तन और मन दोनों ताजगी का अनुभव करेंगे।

केरल के वयनाड स्थित खूबसूरत पहाड़, प्लांटेशन, रेनफॉरेस्ट और वॉटरफॉल किसी का भी दिल जीत सकते हैं। खासतौर पर बारिश के मौसम में तो इस जगह की खूबसूरती देखते ही बनती है। साथ ही वयनाड का टूरिज्म डिपार्टमेंट भी हर साल जुलाई में वार्षिक मॉनसून कार्निवल का आयोजन करता है जिसमें गांव की सैर, रेन ट्रेक और लोकल स्पोर्ट्स जैसे मड फुटबॉल और तीरंदाजी शामिल है।

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