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पहाड़ों पर ड्राइविंग करने जा रहे हैं तो इन बातों का रखें खास ध्यान


गर्मी के मौसम में लोग शहर छोड़कर पहाड़ों की तरह रुख करते हैं, अगर आप भी पहाड़ों पर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आपको पहाड़ों पर ड्राइविंग भी करनी होगी और इसके लिए आपको कुछ खास तैयारियां करनी होंगी क्योंकि समतल की अपेक्षा पहाड़ों पर ड्राइविंग ज्यादा मुश्किल होती है। आइए जानते हैं कि पहाड़ों पर ड्राइविंग करते वक्त आपको क्या सावधानियां बरतनी होंगी।

 

1. सबसे पहले कार की पूरी तरह जांच करवा लीजिए। इंजन व टायर पूरी तरह दुरुस्त होने चाहिए। इतना ही नहीं खासकर ब्रेक की जांच किसी विशेषज्ञ से करवाना सही होगा। अगर घिसे हुए टायर के साथ पहाड़ों की तरफ रुख किया तो संस्पेंशन की समस्या से घिर जाएंगे।

२ कोशिश कीजिए कि जब पहाड़ी इलाके में यात्रा करें तो रात के वक्त ड्राइविंग न करें। दिन में ड्राइविंग करें जो सुरिक्षत और चिंता रहित होगा।
3. कभी भी गियर को न्यूट्रल में न रखें। ईधन को बचाने के लिए इंजन को बंद रखें वरना इससे खतरा भी हो सकता है।
4. शहरों की तरह ताबड़तोड़ गाड़ी न चलाएं। पहाड़ी रास्तों पर पीछे से आने वाली गाडि़यों को पास दें और संभल कर चलें।
5. पहाड़ों में न दिखने वाले मोड़ आते हैं। ऐसा होने पर मोड़ आने से पहले ही हार्न बजाएं और अपनी खिड़की के शीशे को थोड़ा खुला रखें ताकि आपको दूसरों का हार्न सुनाई देता रहे।
6. पहाड़ी मोड़ों पर किसी भी सूरत में ओवरटेक करने की कोशिश न करें। ये जानलेवा हो सकता है।
7. पहाड़ों पर ड्राइविंग के दौरान संगीत को कुछ देर के लिए अवाइड करें तो बेहतर होगा। इसके चलते दूसरी गाडि़यों की आवाज आपको सुनाई नहीं देगी और अनहोनी हो सकती है।
8. गाड़ी जरूरत से ज्यादा लोग न बिठाएं वरना आपकी गाड़ी के लिए तो मुश्किल होगी ही साथ ही स्टियरिंग पर भी अतिरिक्त दबाव बना रहेगा जो तीखे मोड़ों पर खतरनाक साबित हो सकता है।
9. रास्ते में अगर बारिश हो जाए, हिमपात या भू-स्खलन की घटना घटे तो गाड़ी को सड़क किसी खुले व सुरक्षित स्थान पर रोक कर सही समय का इंतजार करें। ऐसे में गाड़ी बिलकुल न दौ़ड़ाएं।

11. सामने आती गाड़ी के हेडलाइट्स को न देखें। इससे एकाग्रता भंग होती है।
12. पहाड़ों पर पर गाड़ी पार्क करते हुए हैंड-ब्रेक का अवश्य प्रयोग करें।

13. गाड़ी को हमेशा पहले गियर में पार्क करें।
14. पहाड़ी ढ़लान पर ड्राइविंग करते समय ब्रेक का प्रयोग कम करके निचले गियर का प्रयोग करें। ब्रेक का आवश्यकता से अधिक प्रयोग ब्रेक-फेल का कारण बन सकता है।


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झिलिमिलाते तारों का देश नेपाल, जहां हर पल एक ख्वाब है, आनंद है, रोमांच है


यात्रा वृतांत- शैलेंद्र तिवारी

नेपाल का नाम जेहन में आते ही एक गुदगुदी सी होती है, लगता है कि कुछ अपना सा है, कुछ जाना-पहचाना सा है। जब उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से लगी सीमा पर सोनौली बॉर्डर पार करते हैं तो बिना पासपोर्ट और वीजा के विदेश जाने का भ्रम सा होता है, लेकिन सीमा पार करने के बाद भी अपना होने का अहसास बरकरार रहता है। एक ऐसा देश जिसे अगर झिलिमिलाते तारों का देश कहें तो कुछ गलत नहीं होगा। सांझ होते ही पहाड़ों पर बने घरों के भीतर बिजली के बल्व जब जल उठते हैं तो सड़क से गुजरते समय ऐसा लगता है कि जैसे आसमान के तारे इन पहाड़ों के ऊपर और नीचे खुद उतर आए हैं, अपनी झिलमिल रोशनी से इस देश की रौनक को बढ़ा रहे हैं।

 

जब इस यात्रा पर निकला तो उम्मीद नहीं की थी कि यह शहर इतना खूबसूरत होगा, लेकिन जैसे ही सोनौली बॉर्डर से आगे बढ़ा तो आंखें खुली की खुली रह गईं। महज कुछ किलोमीटर पार करते ही सामने पहाड़ों की पूरी एक शृंखला नजर आ रही थी। हल्की सी चढ़ाई के साथ शुरू हुआ पोखरा की ओर जाने वाली सड़क का सफर। एक ओर आसमान को छूने की जिद करते पहाड़ तो दूसरी ओर पाताल में समा जाने का एहसास दिलाती गहराई। हर कदम पर एक रोमांच जो आपको प्रकृति और उसके जीवन के करीब लेकर पहुंच जाती है।

 

बुटवल से पाल्पा होते हुए पोखरा का यह सफर सिद्धार्थ राजमार्ग से होते हुए पूरा होता है। राजमार्ग के दोनों ओर नेपाल के शहर और गांव अपने भीतर प्राकृृतिक संपदा और नेपाली संस्कृति को समेटे हुए हैं। 188 किलोमीटर का यह सफर पूरा करने में करीब सात घंटे तक का समय लगा और करीब आधी रात को शहर के भीतर प्रवेश किया। शहर की सीमा के बाहर नेपाल पुलिस के सशस्त्र जवान इंतजार करते मिले। अनुमति और दूसरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आगे जाने का इशारा किया।

 

पोखरा ऐसा शहर है जहां देर रात अगर खाने की गुंजाइश तलाशी जाए तो मुश्किल है। हालांकि शुक्रवार और शनिवार की रात यहां के कुछ बाजार नो-व्हीकल जोन में तब्दील हो जाते हैं और देर रात दो बजे तक खुले रहते हैं। यह अपने आप में सुखद अहसास कराने वाले होते हैं। जहां आप लाइव संगीत का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा आप तरह-तरह के भारतीय व्यंजनों के साथ नेपाली स्वाद को भी चख सकते हैं। शहर में आने के बाद ऐसा लगता है कि जैसे प्रकृति ने स्वयं अपनी गोद में इस शहर को बसाया है। चारों ओर से पहाड़ और उसके बीच में बचे इस छोटे से प्राकृतिक शहर की तस्वीर को शब्दों में बयां कर पाना भी मुश्किल है।

 

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शहर में बने छोटे-छोटे होटल यहां आने वाले पर्यटकों को नेपाली संस्कृति का एहसास कराते हैं। हर दूसरा घर ही एक होटल जैसा है, जहां घर की महिलाएं ही मुख्य भूमिका में नजर आएंगी। इस शहर की सबसे बड़ी खासियत भी यही है कि यहां के कारोबार पर महिलाओं का कब्जा है। पुरुष यहां पर महिलाओं के पीछे ही नजर आते हैं...दुकान, होटल से लेकर हर जगह तक महिलाओं की भूमिका प्रभावी है।

 

दूसरे दिन की सुबह अगर मौसम साफ है तो यह आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। आपको अपने होटल के कमरे से हिमालय की पर्वत शृंखलाओं की चोटी माचापुच्छरे को साफ देख सकते हैं। यह आपके रोमांच को बढ़ाने के लिए काफी होगी। उसके बाद सफर की शुरुआत के लिए जरूरी है कि लोकल गाड़ी और ड्राइवर लिया जाए, जिससे शहर के बारे में ज्यादा बेहतर तरीके से भी जाना जा सकता है।

 

कुल मिलाकर सफर के दौरान एक बात का एहसास जरूर हो जाता है कि नेपाल भले ही पिछड़ा या गरीब देश कहा जाता हो लेकिन लोगों की व्यवहारिक जरूरतों को पूरा करने में यहां की सरकार जरूर प्रमुखता से काम कर रही है। जिस तरह से पहाड़ों के ऊपर बिजली और पानी पहुंचाने का काम किया है, यह वाकई में प्रशंसनीय है। हिंदुस्तान जैसे देश में जहां प्रचुर मात्रा में बिजली की उपलब्धता है, फिर भी कई गांव अब भी बिना बिजली के जी रहे हैं।

 

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फेवा ताल/बरही मंदिर
इस शहर की शुरुआत पर्यटकों की तरह ही फेवा ताल से ही होती है। पहाड़ों की गोद में बना ताल अपने किनारों पर समुद्र के बीच जैसा आनंद देता है। इसी ताल में बने छोटे से द्वीप पर बना हुआ है बरही मंदिर। कहा जाता है कि यह मंदिर आदि शक्ति दुर्गा का है, जिन्होंने यहां पर राक्षसों से देवों की रक्षा की थी। इस मंदिर का यहां पर बड़ा ही महत्व है। तालाब के बीचों-बीच बने इस मंदिर तक आने के लिए किनारे पर नावों का इंतजाम होता है और सौ नेपाली रुपए में यह आपको यहां तक लेकर आते हैं।

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विंध्यवासिनी मंदिर
यहां करीब दो घंटे का वक्त बिताने के बाद अगला पड़ाव विंध्यवासिनी मंदिर मिला, जो यहां के प्रमुख मंदिरों में शामिल है। कहा जाता है कि नेपाल के तत्कालीन राजा सिद्धी नारायण शाह मिर्जापुर से इन देवी को नेपाल लेकर गए थे और पोखरा में मंदिर बनाकर इनकी स्थापना की थी। यह मंदिर भी एक ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। मंदिर पर पहुंचकर हिंदू मंदिरों की भव्यता का एहसास किया जा सकता है। मंदिर में एक साथ दिए जलाने के लिए पीतल के दियों की एक लंबी कतार है, जो आपके भीतर एक शक्ति का संचार करती है। तो वहीं, पुरानी चौघट पर टंगे घण्टे आपको रोमांचित करते हैं।

 

गुफाएं/झरने
मंदिर से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर गुप्तेश्वर महादेव गुफा के साथ-साथ महेंद्र गुफा है, जो आपको जमीन के भीतर की पुरानी दुनिया से अवगत कराती हैं। बताती है कि एक जीवन और एक संस्कृति इन गुफाओं में किस तरह से रही होगी। तो वहीं सेति गंडकी नदी भी इस शहर के सौंदर्य को नया रूप देती हैं। जो गुफा जाने के रास्ते में ही मिलती है। सेति नदी को यहां पर वैसे ही पूजा जाता है, जैसे हिंदुस्तान में गंगा को। इस नदी की संस्कृति ठीक वैसी ही है जैसी कि नर्मदा की है। नर्मदा के पत्थरों को शिवलिंग के रूप में स्थापित किया जाता है, जबकि इस नदी के पत्थरों से भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम मिलते हैं। शहर के बीचों-बीच बना डेविड फॉल भी देखा जा सकता है। लोगों का कहना था कि किसी डेविड ने इसकी खोज आत्महत्या करके की थी। लेकिन डेविड के जाने के बाद आज यह महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित है। यहां पर बना छोटा सा बाजार भी आपको आकर्षित करेगा।

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सारंगकोट
गुफा, नदी और झरने देखने के बाद भी मन कुछ और ज्यादा पाने को बेताव हो जाता है। ऐसे में सबसे बेहतरीन जगह पहुंचे सारंगकोट। १६०० मीटर ऊंचाई से शहर और अन्नपूर्णा रेंज की पहाडिय़ों को देखना वाकई आनंदित करने वाला होता है। वैसे तो यहां से सूर्य का उदय देखा जाता है। लेकिन दिन भर में कभी भी यहां पर आकर यहां की ठंडी हवा को महसूस किया जा सकता है। यहां का तापमान पोखरा से दो से तीन डिग्री कम रहता है। हालांकि यहां पर आने के लिए आपको थोड़ी सी सीढिय़ां भी चढऩी पड़ेंगी, हालांकि यह ज्यादा नहीं हैं।

 

लेकिन ज्यादा उम्र के लोगों के लिए थोड़ा मुश्किल हैं। फिर भी यहां तक गाड़ी से भी आने का अपना रोमांच है। यहां से ही कुछ दूरी पर आनंद हिल की 1100 मीटर की ऊंचाई पर बने शांति स्तूफ को भी देखा जाना चाहिए। यहां से अन्नपूर्णा रेंज की पहाडिय़ों का पैनोरेमिक व्यू भी शानदार होता है। वहीं फेवा ताल और शहर भी आकर्षित लगते हैं। एडवेंचर स्पोट्र्स का आनंद लेने के लिए सारंगकोट सबसे बेहतरीन जगह है।

 

मुक्तिनाथ/अन्नपूर्णा सर्किट
अगर आपके पास वक्त है तो यहां से मुक्तिनाथ भी जाया जा सकता है। नेपाल में कहा जाता है कि चार धाम में मुक्तिनाथ, पशुपतिनाथ और केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम हैं। मुक्तिनाथ अन्नपूर्णा सर्किट के करीब है। पोखरा से यहां आने में सात से आठ घंटे का वक्त लगता है। लेकिन यहां से अन्नपूर्णा की बर्फीली पहाडिय़ों की ओर जाया जा सकता है। ट्रेकिंग का आनंद लेने वाले लोग यहां से आगे जाते हैं, जबकि बाकी लोग बर्फ देखकर यहीं से लौट जाते हैं। यहां आने वाले लोगों को एक दिन आने में और एक दिन जाने में जाया होता है, जबकि एक दिन का समय यहां रुककर बिताना ज्यादा सुकूनदेह होता है।

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काठमांडू
कुछ दिन पोखरा में बिताने के बाद सीधे कार को काठमांडू की ओर मोड़ दिया। सुबह आठ बजे सफर की शुरुआत हुई। रात में हुई हल्की बारिश का एहसास अभी भी दिखाई दे रहा है। पहाड़ बादलों के भीतर असलाए हुए हैं। ऐसा लग रहा है कि जैसे पहाड़ भी रजाई ओढ़कर अलसाए हुए हैं। रास्ता पिछले रास्ते से आसान है। सड़कें कम घुमावदार हैं और चढ़ाई भी शुुरुआती सफर में नजर नहीं आ रही है। लेकिन चारों तरफ पहाड़ जरूर सफर को मजेदार बना रहे हैं। कैमरे और आंखों के बीच में जिद है कि कौन बेहतरीन पलों को अपने भीतर कैद कर ले। सफर में साथ-साथ चलती मर्सयांग्दी नदी आनंदित करती है।

 

वहीं, कुछ दूरी पर जाने के बाद नदी के बहाव को पलटते देखना भी एक अलग ही अनुभव होता है। नदी के किनारों पर वाटर स्पोट्र्स के कई सेंटर नजर आए, जहां युवाओं की उत्साही टोली पानी की धार में जूझ रही थी। आगे मनकामना देवी का मंदिर १३०२ मीटर की ऊंचाई पर बना हुआ है। हालांकि यहां तक पहुंचने के लिए रोप-वे (नेपाली इसे केवल कार भी कहते हैं) से जाना ही विकल्प है। मेरे लिए यह अब तक का सबसे बड़ा रोप-वे सफर था, जिसका रोमांच शब्दों में नहीं बयां किया जा सकता है।

 

यह वह अनुभव था, जिसे सिर्फ महसूस ही किया जा सकता है। यहां से आगे बादलों के भीतर धंसे हुए पहाड़ नजर आ रहे हैं और इसके साथ ही सड़क घुमावदार हो गई है। एहसास होने लगा है कि हम काठमांडु के करीब आ गए हैं। ये घुमावदार सड़क काठमांडु में जाकर ही ठहरती है। हालांकि यहां आने के लिए पोखरा से सीधे विमान सेवा भी उपलब्ध है, जो हर आधे घंटे में उड़ान भरती है। तकरीबन आधे घंटे के सफर में आप काठमांडू पहुंच सकते हैं। जबकि सड़क मार्ग से यह वक्त छह से सात घंटे का भी हो सकता है।

 

श्री पशुपतिनाथ
काठमांडु आकर सबसे पहले त्रिभुवन एयरपोर्ट के सामने एक होटल में नेपाली खाने का आनंद लिया और उसके बाद यहां के सबसे प्रमुख आकर्षण बाबा श्री पशुपतिनाथ के दर्शन करने रवाना हो गए। एयरपोर्ट से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर बाबा का दरबार है, जिसका एहसास सड़क से ही हो जाता है। ठेठ नेपाली आर्किटेक्ट में बना यह मंदिर आज भी अपनी वास्तुकला को बचाने में कामयाब है। यह मंदिर हिंदुओं की आस्था का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां पर भारत से सबसे ज्यादा पर्यटक पहुंचते हैं। चार मुखों में यहां पर भगवान शिव विराजे हुए हैं और मंदिर के ठीक पीछे बागमती नदी बह रही है, जिसे यहां पर बनारस की गंगा जैसा आध्यात्मिक संस्कार मिलता है। यहां पर भी गंगा की तर्ज पर बागमती नदी की आरती होती है और मंदिर के ठीक पीछे घाटों पर विश्राम घाट भी बने हुए हैं। मान्यता है कि यहां पर अंतिम संस्कार करने से आत्मा का परमात्मा से मिलन हो जाता है। मंदिर की संस्कृति आपको आकर्षित करेगी, यहां पर आमतौर पर हिंदू मंदिरों में नजर आने वाले पंडे-पुजारियों की भीड़ नहीं होगी। न ही मंदिर के भीतर प्रसाद और फूल माला की ज्यादा दुकानें नजर आएंगी। शिव का स्वरूप ही यहां पर सबसे बड़ा आनंद है।

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बौद्धनाथ/स्वयंभूनाथ
शिव से आत्मसात होने के बाद यहां पर बुद्ध भी अपनी संस्कृति को समेटकर बैठे हैं। बौद्धनाथ और स्वयंभूनाथ दोनों ही स्तूप बौद्ध धर्म को मानने वालों का सबसे बड़ा केंद्र है। काठमांडु के पूर्व में बना बौद्धनाथ स्तूप दुनिया के सबसे बड़े स्तूपों में शामिल है। जबकि स्वयंभूनाथ स्तूप की अपनी आस्था है। स्वयंभूनाथ के बारे में कहा जाता है कि इस स्तूप के चारों ओर बनी आंखें भगवान बुद्ध की मानी जाती हैं जो चारों ओर देख रही हैं और लोगों के कल्याण के लिए रास्ता दिखा रही हैं। स्वयंभूपुराण में इस जगह को लेकर कई तथ्य बताए गए हैं।

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थमेल
नेपाली संस्कृति, आर्किटेक्ट दरबार चौराहा पर नजर आ रहा था। लेकिन असली नेपाल देखने के लिए थमेल पहुंचना जरूरी था। वहां पहुंचकर आनंद भी आया। जाना कि आखिर कैसे आज भी पुराना काठमांडु थमेल में जीवित है। थमेल भी ऐसी ही जगह है जहां पर आपको पुराना नेपाली शहर नजर आएगा। इसकी खूबसूरती आपको आनंदित कर देगी।

 

यहां की दुकानों में आपको नेपाली संस्कृति को समेटे हुआ सामान नजर आएगा। यहां के गर्म कपड़े और कढ़ाईदार सामान आकर्षित करेंगे। तो कुल मिलाकर आपको नेपाल का यह सफर आनंद से भर देगा। काठमांडु से भारत वापसी के लिए सड़क मार्ग के जरिए वापस सोनौली बॉर्डर आया जा सकता है या फिर बिहार के रक्सौल बॉर्डर के जरिए भी वापसी की जा सकती है। इसके अलावा सीधे हवाई मार्ग से वापसी के लिए त्रिभुवन एयरपोर्ट हमेशा तैयार है।

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क्या करें-
- नेपाल की यात्रा के दौरान कुछ चीजों का हमेशा ध्यान रखें कि अगर आप सड़क मार्ग से सफर कर रहे हैं तो रास्ते में जाम की संभावना बनी रहती है। ऐसे में आपकी गाड़ी के भीतर हमेशा खाने का सामान और पर्याप्त मात्रा में पानी जरूर होना चाहिए।
- यहां की सबसे खूबसूरत अगर कोई याद आपके साथ आएगी तो यह पूरा देश ही मोबाइल वाई-फाई नजर आता है। यहां की बसों से लेकर ढाबों और रेस्टोरेंट पर आपको फ्री वाई-फाई की सुविधा का बोर्ड जरूर नजर आएगा।
- नेपाल बॉर्डर पर अगर आप अपनी गाड़ी के साथ जा रहे हैं तो बॉर्डर पर बने चेकपोस्ट पर अपनी गाड़ी की एंट्री के साथ टैक्स जमा कराने की प्रक्रिया जरूर पूरी कर लें। बेहतर हो कि वहां पर मौजूद एजेंट का सहारा ले लें, जिससे आपका काम जल्दी हो जाएगा। फिर भी आप इसके लिए एक घंटे का समय मानकर चलें। टैक्स तय समय से एक या दो दिन ज्यादा का लें तो बेहतर रहेगा। कई बार जाम में गाड़ी फंसने पर आप परेशानी में नहीं आएंगे, क्योंकि अगर आपका टैक्स समय खत्म होने के बाद आप पकड़े जाते हैं तो नेपाल पुलिस आप पर भारी जुर्माना कर सकती है।
- यहां पर भारतीय करेंसी स्वीकार है, लेकिन फिर भी बेहतर होगा कि आप अपने साथ नेपाली करेंसी भी लेकर चलें। यह आप बॉर्डर पर भी एक्सचेंज कर सकते हैं। इसके अलावा स्थानीय दुकानदार/होटल संचालक भी करेंसी एक्सचेंज कर देते हैं।
- खरीददारी करते समय जरूर पूछें कि आपको भाव नेपाली करेंसी में बताए जा रहे हैं या भारतीय करेंसी में। वैसे, पूरे नेपाल में मोलभाव होता है, ऐसे में आप मोलभाव भी कर सकते हैं।
- अगर सड़क मार्ग से सफर कर रहे हैं तो बेहतर होगा ज्यादा रात होने के बाद सुरक्षित जगह पर सफर को रोक दें। यह आपके लिए सुरक्षित रहेगा।

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घूमने के लिए पूरी दुनिया में बेस्ट है सैन फ्रांसिस्को, इन जगहों को देख आप भी ललचा जाएंगे


सैन फ्रांसिस्को अपने लज़ीज खाने, गोल्डन गेट ब्रिज, पियर 39 और बहुत सारे प्रसिद्ध आकर्षणों के लिए जाना जाता है। यदि आप यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आप अपनी इस यात्रा का पूरा-पूरा आनंद उठाएं, तो सैन फ्रांसिस्को के चाइनाटाउन में ज़रूर जाएं। सैन फ्रांसिस्को का चाइनाटाउन एक अनूठे सांस्कृतिक मेले जैसा है, जिसे आप कभी नहीं भूलेंगे। उत्तरी अमेरिका में यह सबसे पुराना और दूसरा सबसे बड़ा चाइनाटाउन है। इस एक दिन की यात्रा के दौरान सैन फ्रांसिस्को के चाइनाटाउन के खाने, इतिहास, खरीदारी वगैरह का मज़ा लें।

ड्रेगन्स गेट
यह एक ऐतिहासिक द्वार की मेहराब है, जहां से शहर के नज़दीकी चाइनाटाउन में प्रवेश किया जा सकता है। 1970 में इसे पड़ोस के दक्षिणी प्रवेश के माध्यम के रूप में बनाया गया था। यह अनूठा ड्रेगन्स गेट पूरी तरह से चीनी शैली में बनाया गया थाः पत्थरों से, लकड़ी से नहीं। यह और गोल्डन ड्रेगन स्‍ट्रीटलाइट, दोनों ही आगंतुकों को ऊपर ग्रांट एवेन्यू की दुकानों तक ले जाते हैं।

ग्रेट ईस्टर्न रेस्तरां
यहां आपको लगभग हर जगह शू-माई की ठेलागाड़ी चलती मिलेंगी, जिनसे आपकी सांसें और यहां की गलियां स्वादिष्ट व्यंजनों की महक से सराबोर हो जाती हैं। लेकिन, जब आप इस जगह की यात्रा करें तो ग्रेट ईस्टर्न रेस्तरां में असली चीनी व्यंजन दिम सम का स्वाद ज़रूर लें। यह रेस्तरां अपने किफायती खानपान के लिए जाना जाता है। वे कई प्रकार की पकौड़ियां और मीठी डबलरोटियां बनाते हैं, जिनसे आपका पेट भी भर जाएगा और जेब पर ज्यादा बोझ भी नहीं पड़ेगा।

चीनी संस्कृति केन्द्र
चीनी संस्कृति केन्द्र एक प्रमुख सामुदायिक, गैर-लाभार्थ संगठन है, जिसे चीनी संस्कृति संघ के प्रचालन केन्द्र के रूप में 1965 में स्थापित किया गया था। यहां आश्चर्य का विषय यह है कि पिछले 50 वर्षों में चाइनाटाउन में किस तरह से प्रवासी आबादी ने आकर यहां की कला-संपदा के साथ-साथ अपने जीवन को भी संवारा है। हिल्टन की तीसरी मंज़िल पर स्थित सीसीसी की प्रदर्शनियों में रास्तों पर पनपी कला से लेकर अग्रणी एवं उन्नत छाया-चित्रकारी देखने को मिलती है और यहां पर प्रवेश निःशुल्क है।

अमेरिका की चीनी ऐतिहासिक संस्था
इस संग्रहालय में तस्वीरों और कलाकृतियों के जरिए अमेरिका में चीनी प्रवासियों के अनुभव दिखाए गए हैं। जूलिया मॉर्गन द्वारा परिकल्पित इस ऐतिहासिक भवन में स्थापित अमेरिका की चीनी ऐतिहासिक संस्था केवल 5 डॉलर के शुल्क के बदले सैन फ्रांसिस्को के बाहर की संस्कृति एवं इतिहास में चीनी-अमेरिकी योगदानों की अनमोल जानकारी देती है और अगर आप किसी सप्ताहांत के दौरान वहां रुकते हैं तो आपको एक वैवाहिक चाय उत्सव भी देखने को मिलेगा। पूर्व-सलाहः अमेरिका की चीनी ऐतिहासिक संस्था केवल संग्रहालय की ही नहीं बल्कि आस-पड़ोस की सैर भी करवाती है।

चाइनाटाउन की पतंग-दुकान
ग्रांट एवेन्यू सभी प्रकार की जड़ी-बूटियों और सस्ते गहनों की दुकानों से सजा है, लेकिन चाइनाटाउन की पतंग-दुकान वहां से थोड़ा हटके है। इस रंगबिरंगी ऐतिहासिक दुकान में उत्सवी छटा वाली कई तरह की पतंगें, फेंग शुई वस्तुएं और सजावटी सामान मिलते हैं। बिल्कुल, ड्रेगन पतंगों और हाथ से बनी अनमोल वस्तुओं के लिए यह सबसे बढ़िया दुकान है, लेकिन आपको यहां आईपैड के आवरण और अनूठी वस्तुएं भी मिल जाएंगी। और ये रात में 8:30 बजे तक खुली रहती हैं, इसलिए आप देर से भी वहां जा सकते हैं।

गोल्डन गेट फॉर्चून कुकी कारखाना
इस ऐतिहासिक बेकरी में हाथ से बनी सितारा कुकीज़ एक छोटी-सी खुली रसोई में बनाई जाती हैं और इन्हें बनते हुए निःशुल्क देखा जा सकता है। कुकी का यह कारखाना चाइनाटाउन में एक छोटी एवं संकरी गली में स्थित है, जहां आसपास कोई पार्किंग नहीं है। इनके पकने से अंदर बड़ी ही भीनी-भीनी खुशबू आती है। यह इतनी छोटी जगह है कि 10 से ज्यादा लोग अंदर फंस से जाते हैं। पर्यटन गतिविधियों से जुड़े यहां के स्थानीय लोग भी गोल्डन गेट फॉर्चून कुकी कंपनी की तारीफ करते नहीं थकते, जो सन् 1962 से कुकीज़ का उत्पादन कर रही है। एक बार ज़रूर जाएं और यह देखकर अपनी जिज्ञासा शांत करें कि आटा सख्त होने से पहले वे किस तरह से सितारा कुकीज़ तैयार करते हैं।

आर एण्ड जी लाउंज
यह प्रसिद्ध कैंटोनीज़ भोजनालय एक बुनियादी तलघर में बनाया गया है और ऊपर के रूम अधिक सामान्य हैं। चूंकि चाइनाटाउन के कुछ विशाल बैंकेट हॉल बंद हो गए, इसलिए 225 सीटों वाला यह तीन-मंज़िला लाउंज अस्तित्व में आया, जो भूखे-प्यासे लोगों को लिची मार्टिनी और नमक-मिर्च से सराबोर केकड़े परोसता है। आर एण्ड जी लाउंज छोटा, पर व्यवस्थित है, जहां विस्तृत, परंपरागत व्यंजनों को सर्वाधिक अमेरिकी रंग में रंगी पसंदों से संतुलित करते हुए परोसा जाता है।
 
लि पो कॉकटेल लाउंज
एक प्राचीन कवि के नाम पर बना यह 77 वर्ष पुराना कुंड है, जो अपनी चीनी कॉकटेल माई ताई और गोलाकार बार के पीछे स्वर्ण बुद्धा के लिए प्रसिद्ध है। जी हां, यह पूर्वी तड़क-भड़क से सराबोर है, लेकिन एक ऐसी संस्था है जो सैन फ्रांसिस्को के शीर्ष धनियों में शुमार है।

यूएत ली
यह देर रात तक खुला रहने वाला कैंटोनीज़ सीफूड रेस्तरां है (सप्ताह में पांच रातों में सुबह 3 बजे तक खुला रहता है), जिसे चाइनाटाउन की रात की राजधानी माना जाता है। दिनभर अधेड़ उम्र के लोगों के जमघट के बाद, यहां क्लब के बच्चे आकर जमा होते हैं और फिर रात में जागने के शौकीन यहां पर व्यंजनों का लुत्फ उठाते हैं। व्यंजनों पर हरीभरी सजावट उन्हें और भी पौष्टिक बना देती है। इसलिए, सैन फ्रांसिस्को के जगप्रसिद्ध चाइनाटाउन में ज़रूर रुकें और अपनी जिज्ञासु इच्छाएं लज़ीज व्यंजनों के स्वाद तथा अद्भुत नज़ारों का आनंद लेते हुए पूरी करें।


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अगर बच्चों के साथ कर रहे हैं यात्रा तो इन बातों का ध्यान रखें


बच्चों के साथ ट्रैवल करना आसान नहीं होता। बच्चों के साथ घूमने जाने के लिए आपको जरूरत से ज्यादा सामान पैक करना पड़ता है, हर तरह की इमर्जेंसी सिचुएशन व जरुरतों के लिए भी तैयार रहना पड़ता है। बच्चे के साथ सफर करते वक्त इन खास टिप्स का ध्यान रखें...

1. बच्चे के साथ सफर के दौरान एक्सट्रा कपड़े, डायपर और दवाईयां रखना ना भूलें क्योंकि आप नहीं जानतीं की कब उनकी अचानक जरूरत पड़ जाएं।

2. हमेशा अपने साथ इमर्जेंसी कॉन्टैक्ट की लिस्ट तैयार रखें ताकि जरूरत पडऩे पर आप उनका इस्तेमाल कर सकें।

3. नए वातावरण में घुलने मिलने में बच्चों का थोड़ा समय लगता है। जैसे ही आप अपने डेस्टिनेशन पर पहुंचे तुरंत अपना सामान अनपैक करें और बच्चों के खिलौने, कपड़े वगैरह निकालकर उनके सामने रख दें ताकि उन्हें सामान्य महसूस हो।  

4. अपने बच्चे के फेवरिट खिलौने और किताबें रखना ना भूलें। ऐसा करने से ना सिर्फ बच्चे बोर हो जाएंगे। उन्हें चिड़चिड़ापन भी महसूस होगा।

5. सिर्फ मां को ही बच्चों का ध्यान नहीं रखना है। पिता के साथ ही घर के दूसरे सदस्यों के पास भी बच्चे को छोड़े ताकि आपको भी रिलैक्स होने का थोड़ा समय मिल जाए और बच्चे भी कुछ अलग करने का आनंद उठा सकें।

6. ज्यादातर बच्चे खाने के मामले में बहुत परेशान करते हैं। लिहाजा बच्चे का पसंदीदा स्नैक पैक करना ना भूलें ताकि उसे अगर बाहर का खाना पसंद ना आए तो आपके कुछ ऑप्शन हो।

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मॉनसून के मौसम में करें केरल की सैर


केरल आम दिनों में जितना खूबसूरत दिखता है, मॉनसून के सीजन में उसकी प्राकृतिक खूबसूरत कई गुणा बढ़ जाती है। बारिश के मौसम में केरल में चारों तरफ हरियाली, बैकवॉटर्स, ठंडी हवा और बादलों से ढका सूर्यास्त रहता है जो इसे रोमांस का सीजन बना देता है। ऐसे में अगर आप मॉनसून के सीजन में कहीं घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं तो केरल जाएं-

जुलाई से सितंबर के बीच केरल में वॉटर स्पोर्ट्स का सीजन रहता है। इस दौरान अलप्पुजा के बैकवॉटर्स में स्नेक बोट रेस का आयोजन होता है। इनमें सबसे फेमस है नेहरू ट्रोफी बोट रेस जिसका आयोजन हर साल अगस्त के दूसरे सप्ताह में होता है। इन रेस का सबसे बड़ा आकर्षण होता इसकी बोट्स जो करीब 30 मीटर लंबी और सांप की आकृति की होती हैं।

मॉनसून के सीजन में ही यहां 10 दिनों तक फसलों का त्योहार ओनम मनाया जाता है। इस दौरान केले के पत्तों पर बेहद टेस्टी वेजिटेरिअन खाना सर्व किया जाता है। आप चाहें तो किसी लोकल रेस्तरां में जाकर भी इस खाने का लुत्फ उठा सकते हैं। 

केरल में एक से बढ़कर एक स्पा और वेलनेस सेंटर्स हैं। ऐसे में अपनी सभी समस्याएं और स्ट्रेस भूलने के लिए आप इन वेलनेस सेंटर्स का प्रयोग कर सकते हैं। आयुर्वेद में भी इस बात का जिक्र है कि मॉनसून का ठंडा और सुहावना मौसम शरीर के कायाकल्प के लिए उपयुक्त है। आप इन वेलनेस सेंटर्स में बुकिंग करवा कर स्पा, ऑयल बेस्ड थेरपी, योग और बैलेंस डायट का फायदा उठा सकते हैं जिससे आपका तन और मन दोनों ताजगी का अनुभव करेंगे।

केरल के वयनाड स्थित खूबसूरत पहाड़, प्लांटेशन, रेनफॉरेस्ट और वॉटरफॉल किसी का भी दिल जीत सकते हैं। खासतौर पर बारिश के मौसम में तो इस जगह की खूबसूरती देखते ही बनती है। साथ ही वयनाड का टूरिज्म डिपार्टमेंट भी हर साल जुलाई में वार्षिक मॉनसून कार्निवल का आयोजन करता है जिसमें गांव की सैर, रेन ट्रेक और लोकल स्पोर्ट्स जैसे मड फुटबॉल और तीरंदाजी शामिल है।

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यात्रा के दौरान थकान को रखें कुछ इस तरह दूर


अक्सर सफर हमें थका देता है। इस थकान से बचना जरूरी है वर्ना आप जिस काम से गए हैं उसके लिए आपके पास पर्याप्त ऊर्जा ही नहीं रहेगी। 

खानपान : यात्रा के दौरान मांस, वसायुक्तव तले-भुने भोजन से परहेज करें क्योंकि ये एसिडिटी बढ़ाते हंै। सफर में तरल पदार्थ अधिक लें। इसके लिए आप फलों या सब्जियों का जूस भी पी सकते हंै।

सीधे बैठें : हमारा शरीर तीन तरीकों से आराम पाता है। मांसपेशी को मिला आराम, शारीरिक अंगों को आराम और अस्थितंत्र यानी ढांचे को आराम। जब हम झुककर या टेक लगाकर बैठते हैं तो मांसपेशियां रिलेक्स होती हैं,  लेकिन संपूर्ण ढांचा और अंग तनाव में आने लगते हैं। अगर प्रयास करें तो रीढ़ की हड्डी को सीधे रखकर भी मांसपेशियों को तनावमुक्त रखा जा सकता है। ध्यान रखें कि शरीर के आंतरिक अंग लचीले ऊत्तकों यानी टिश्यू से जुड़े हुए हैं। झुककर या टेक लगाकर बैठने से इन अंगों की कार्यक्षमता घट जाती है।

सूर्य की ऊर्जा : अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान जेटलैग से सबसे ज्यादा थकान होती है। जैटलैग यानी जिस टाइमजोन में आप गए हैं, उसे लेकर आपकी भौतिक व ऊर्जा प्रणाली में भ्रम। इससे बचने के लिए सफर से कुछ दिन पहले ही खुद को उस समयानुसार ढालने का प्रयास करें और दिन में कम से कम 20 मिनट की धूप लें।

यह भी करें
नाड़ी शुद्धि सरल योग प्रक्रिया है। इसमें सांसों का इस्तेमाल किया जाता है। जो ऊर्जा प्रणाली में जरूरी संतुलन बनाने में मदद करती है। इसे अपनाकर भी यात्रा के दौरान होने वाली थकान को कम किया जा सकता है।

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अगर घूमने जा रहे हैं तो रखें इन बातों का ध्यान, होगा फायदा


किसी जगह पर महज घूमना ही काफी नहीं होता, अगर आप कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं तो याद रखिए की समझदारी से घूमने की प्लानिंग करें। हम आपको कुछ बातें बता रहे हैं जो आपकी यात्रा को सरल और आसान बना देगी।  

1- अगर आप कहीं घुमने जा रहे हैं तो इससे जुड़े कुछ जरूरी एप्स सब डाउनलोड कर लें। कुछ विमानतल पर फोन चार्जिंग बूथ (आजकल पावर बैंक ले जाने की अनुमति नहीं है), एटीएम और कॉफी शॉप का पता देते हैं। व्यस्तता के इस दौर में एप के जरिए ली गई जानकारी बहुत काम आती है। 

2- समूह में यात्रा पर जा रहे हैं तो पहले ही मोटे तौर पर किसके हिस्से कितना व्यय आएगा, इसकी गणना कर लें। घूमते समय पाई-पाई का हिसाब करना समय नष्ट करता है और मन भी खराब होते हैं।

3- ग्रुप में किसी गंतव्य पर कोई भी गतिविधि में भाग लेने वाले हों, तो उसके शुल्क को कोई पहले ही इकट्‌ठा कर ले, तो बेहतर है। वहां पहुंचकर कई बार कोई भागीदारी रद्द कर देता है, तो कोई पैसे बाद में चुकाने का कह कर दूसरों से शेयर करने का अनुरोध करके सबके असमंजस को डाल देता है। 

4- कई होटल अपने मेहमानों को पैकेज डील का प्रस्ताव देते हैं। उस समय डील को विस्तार से समझ लें। नवविवाहितों या युवा जोड़े को होटल रोमांटिक डील देते हैं, जिसमें फूल, चॉकलेट, शैम्पेन और कुकीज शामिल होती हैं। इनके लिए आप अतिरिक्त दाम चुकाना चाहेंगे या नहीं, यह तय करके ही डील लें।

5- अगर समुद्री तट पर हों और डील में स्कूबा डायविंग या स्नॉर्कलिंग की सुविधा हो, तो ले लेना बेहतर होगा, क्योंकि डील में सारे उपकरण और प्रशिक्षण शामिल हो सकता है। आप खुद इन सुविधाओं को जुटाने जाएंगे, तो शायद महंगा भी पड़े और परेशानी भी हो।

6- समूह में आने वाले चेक-इन के समय ही अगर किसी का जन्मदिन या शादी की सालगिरह पडऩे वाली हो, तो बता दें। कई होटल इन लोगों के लिए जश्न का आयोजन की नि:शुल्क व्यवस्था करते हैं। कुछ छूट भी दे देते हैं।

7- होटल में चेक-इन करते समय ही सारी सु‌विधाओं के बारे में पता कर लें। किन सुविधाओं के लिए अतिरिक्त पैसे देने होंगे, जैसे यह जानना महत्वपूर्ण होता है कि चेक-आउट टाइम क्या है। नाश्ता, दोपहर या रात का भोजन में से क्या कॉम्पलीमेंट्री है, आदि। इनके समय को लेकर भी सचेत रहना ठीक होगा। 

8- बहुत बड़े समूह में जाने से शायद दाम कम लगें, लेकिन बहुत सारी बातें सुनाई नहीं देतीं या समझ में ही नहीं आतीं। निजी गाइड आपकी सुविधा का ध्यान भी रखेगा और जरुरत पडऩे पर क्या नहीं छोडऩा चाहिए जैसी बहुमूल्य राय भी दे सकेगा।

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नहीं है कैश, ट्रिप कैंसिल करने की जरूरत नहीं, बस ये तीन टिप्स अपनाएं


नोटबंदी के चलते इन दिनों कैश की किल्लत हर किसी को परेशान कर रही है। ऐसे में जिन लोगों ने पहले से ही ट्रिप प्लान किए हुए थे, उनमें से ज्यादातर लोग ट्रिप्स कैंसिल कर रहे हैं। अगर आप भी निराश होकर ट्रिप कैंसिल करने की सोच रहे हैं तो पहले ये खबर पढ़ लें। इसके बाद आप अपना ट्रिप एंजॉय कर सकेंगे, क्योंकि उसे कैंसिल करने की जरूरत ही नहीं होगीं। ट्रिप पर जाने से पहले ये तीन काम जरूर कर लीजिए -

पैकेज बुक करें

अगर आप कोई ट्रिप प्लान कर रहे हैं तो ऐसा पैकेज बुक करें जिसमें रहने के साथ साथ खाने-पीने और लोकल ट्रांसपोर्ट का खर्च शामिल हो। फिर इन पैकेजे का पेमेंट ऑनलाइन या कार्ड से कर दें। ऐसे में आपकी कैश की जरूरत कम हो जाएगी और आपको अपना ट्रिप कैसिंल करने की नौबत नहीं आएगी।

लोकल ट्रैवल

आप जिस भी शहर में जा रहे हैं कोशिश करें कि आस-पास के इलाकों में सैर-सपाटे  पर निकलने के लिए निजी कंपनियो की कैब सर्विस बुक करें। यात्रा के अंत में मोबाइल वॉलेट या कार्ड से पेमेंट करें।

बिना कैश न निकलें

भले ही आपको ज्यादा कैश की ज़रूरत न पड़े, लेकिन हम यही सलाह देंगे कि ट्रिप पर निकलने से पहले कुछ कैश, खासकर, छोटे मूल्य के नोट हमेश साथ रखें , क्योंकि कभी भी कुछ भी हो सकता है। हो सकता है कि आपको पानी की बोतल ही खरीदनी पड़े और दुकानदार के पास स्वाइप मशीन नहीं हो, तब क्या करेंगे आप?

इन सबके अलावा होटल से निकलने से पहले इस बात की जानकारी जरूर इकट्ठा कर लें कि किन शॉपिंग प्वॉइंट्स और रेस्त्रां में प्लास्टिक मनी एक्सेप्ट की जाती है। इससे आपको दिनभर का शेड्यूल बेहतर तरीके से प्लान करने का मौका मिलेगा।

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ट्रेवल के दौरान भी रखें फिटनेस का ख्याल, आजमाएं ये टिप्स


जो लोग फिटनेस के लिए क्रेजी होते हैं, वे चाहे घर रहें या बाहर, इसे बनाए रखना चाहते हैं। अक्सर ऐसा होता है कि घर पर तो आप एक फिक्स रुटीन को फॉलो करते हैं, लेकिन जैसे ही आप छुट्टी पर कहीं घूमने निकलते हैं, आपका सारा शेड्यूल ही बिगड़ जाता है। ऐसे में न खाने पीने पर कंट्रोल रहता है और न ही व्यायाम के लिए समय मिलता है। हालांकि अगर आप चाहें तो ट्रिप पर भी आप फ्रेश और स्वस्थ रह सकते हैं। यहां हैं महत्वपूर्ण टिप्स -

- अपने स्‍नैक्‍स खुद ही पैक करके लेकर जाएं। स्मार्ट और पोर्टेबल गुड्स पैक करें, जैसे दोबारा इस्तेमाल के योग्य कंटेनर्स, ड्राई फ्रूट्स, काबुली चने, बादाम, पीनट बटर, ऐसे फ्रूट्स जिन्‍हें आप त्यादा देर तक ट्रैवल करते समय रख पाए जैसे सेब और केले।

-  ट्रिप में फ्रेश और स्‍वस्‍थ रहना चाहते हैं, तो पानी अधिक पिएं। सफर के दौरान हमेशा पैक्ड पानी का ही इस्‍तेमाल करें।

- अगर आप ट्रैवल कर रहे हैं, तो ग्रोसरी शॉप पर जाना आपके लिए एक अच्‍छा सांस्कृतिक अनुभव साबित हो सकता है। अगर आप ग्रोसरी स्टोर से ही खाना खरीद रहे हैं तो इससे आपकी बहुत सारी कैलोरी सेव होगी और पैसे भी।

- बस, टैक्‍सी या ट्रेन से ट्रेवल कर रहे हैं तो अपने साथ सैनिटाइजर ले जाना न भूलें। दरअसल ये हाथ में मौजूद इंफेक्‍शन को हटाने में मदद करता है, जिससे सफर के दौरान होने वाली बीमारी से बचा जा सकता है।

- सफर के दौरान किसी पोल या किसी पट्टी के सहारे खड़े होने से बेहतर है कि आप बैठकर आरामदायक सफर का लुत्‍फ उठाएं। अगर आप पोल के सहारे खड़े हो भी रहे हों तो अपने फेस को पोल से दूर रखें।

- सफर के दौरान अधिक तला हुआ या फिर चटपटा खाना खाने से बचें। ये आपके पेट को नुकसान पहुंचा सकते हैं। खाना हमेशा ऐसी जगह से खाएं जहां पर साफ-सफाई का पूरा ध्‍यान रखा गया हो।

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रोड ट्रिप का मजा लेना है तो ग्रुप में करें ट्रेवल


वो कहते हैं ना एक से भले दो, ट्रिप्स के मामले में ये फंडा बहुत सटीक बैठता है। अगर आप रोड ट्रिप करने का मन बना रहे हैं तो बेहतर होगा कि अपने दोस्तों की टोली को साथ ले जाएं। ग्रुप में रोड ट्रिप का मजा ही कुछ और है। यहां पढ़ें ग्रुप ट्रेवल के फायदे -

ज्‍यादा है बेहतर

ट्रेवल के दौरान पेट खराब होना, रास्‍ता भटक जाना आम बात है। ऐसे में जब भी आप ग्रूप के साथ ट्रेवल करेंगे तब आप ज़्यादा सुरक्षित रहेंगे। ग्रुप में ट्रेवल करने पर मुसीबत या कोई समस्‍या होने पर आपकी मदद करने के लिए कोई न कोई तो आपको मिल ही जाएगा।

सेविंग्स

ट्रेवल के दौरान आपकी जेब पर बोझ पड़ना आम बात है। पर अगर आप एक ग्रुप में ट्रेवल कर रहे हैं तो आप अपने ग्रूप के साथ ट्रिप पर लगने वाली लागत को भी बांट सकते हैं, इससे आप कम पैसे में ही एक बेहतरीन ट्रिप का लाभ ले सकते हैं।

बारी-बारी करें ड्राइव

अगर आप ग्रूप में ट्रेवल कर रहे है तो चाहे आप किसी भी ट्रांसपोर्ट में सफर कर रहे हों बस, कार या फिर ट्रेन, आपका ट्रेवल प्रोग्राम अच्‍छा से मैनेज्‍ड होगा। ऐसे में ज़रूरी नहीं है कि पूरे रास्‍ते आप ही ड्राइव करें। जनाब आराम से बैठिए और दूसरों को भी ड्राइविंग का मज़ा लेने दीजिए और आप हसीन वादियों को मजा लीजिए।

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अपने ट्रेवल को सेफ और स्मार्ट बनाना चाहते हैं तो आजमाएं ये टिप्स


नई दिल्ली। ट्रेवल जितना सेफ हो उतना खुशनुमा लगता है और इसे सेफ बनाने के लिए आपको स्मार्ट होना पड़ेगा। नई जगह पर जा कर उसे एक्सप्लोर करने पर बहुत कुछ नया सीखने को मिलता है, लेकिन अगर कुछ तैयारियां ट्रिप शुरू होने से पहले ही कर ली जाएं तो यह एक्स्पीरियंस बेहद खूबसूरत हो सकता है। यहां पढ़ें इसके लिए कुछ अहम टिप्स -

छोटा लगेज

हम जहां भी जाते हैं वहां शॉपिंग जरूर करते हैं और अपनी यादगार के तौर पर कुछ न कुछ जरूर ले के आते हैं इसलिए अच्छा होगा कि आप अपने घर से कम सामान ले कर निकलें जिससे अगर आप शॉपिंग थोड़ी ज्यादा भी कर लें तो आपको अपने सामान को लेकर किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

स्मार्ट पैकिंग

अपनी पैकिंग करते समय इस बात का ध्यान राखें कि कभी भी अपने साथ ऐसे कपड़े न ले कर जाएं जो बहुत ही हलके रंग के हो और आसानी से गंदे हो जाएं, इससे आप बार-बार कपड़े धोने की समस्या से बच पाएंगे। इसके अलावा अपने साथ कुछ ऐसे कपड़े भी रख लें जिसे आप मिक्स एंड मैच कर के पहन पाएं। इससे आप बिना किसी मेहनत के स्टाइलिश लग पाएंगे और आपको ज्यादा कपड़े कैरी करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। फुटवेयर्स का चुनाव भी इस प्रकार करें जिसे आप हर ड्रेस के साथ पहन पाएं और जो आरामदायक भी हों।

होटल पहले से बुक करें

कई बार ऐसा होता है कि हम नई जगह जाते हैं और हमें होटल मिलने में परेशानी होती है इससे बचने के लिए होटल की प्री बुकिंग करा लें। आप अगर चाहें तो किसी अच्छे टूर पैकेज का लाभ भी उठा सकते हैं। इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि आप जिस भी होटल में ठहर रहे हैं उसकी जानकारी अपने अपने करीबी लोगों को जरूर दें। यह सुरक्षा की दृष्टि से बहुत जरूरी है।

पैसे

यात्रा के दौरान इस बात का ख्याल रखें कि कभी भी बहुत ज्यादा कैश या फिर कीमती सामान लेकर यात्रा न करें और आप अपने कार्डस ( डेविड, क्रेडिट) भी संभाल कर रखें। इसके अलावा इस बात का भी पूरा ध्यान रखें कि अपने साथ किसी भी तरह की कोई ज्यूलरी या कीमती सामान न रखें।

दवाइयां

कई बार ऐसा होता है कि दूसरी जगह जाने से थकान, मौसम या फिर खान-पान में बदलाव होने से बदहजमी, लूजमोशन, सर्दी - बुखार जैसी समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे में अच्छा होगा कि आप डॉक्टर की सलाह ले कर कुछ दवाइयां अपने पास सावधानी के तौर पर पहले ही रख लें।

सावधानी

जहां भी आप जा रहे हों वहां की अधिक से अधिक जानकारी अपने पास रखने की कोशिश करें ताकि आप किसी भी प्रकार की ठगी से बचे रहें। लड़कियों के लिए यह आवश्यक है कि वो सुरक्षा के लिए जागरूक तो रहे ही साथ ही वो अपने साथ पेपर स्प्रे भी कैरी कर सकती हैं।

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हर ट्रेवलर को जरूर पता होने चाहिए सुखद ट्रिप के लिए ये टिप्स


क्या आप भी कहीं घूमने जा रहे हैं। घूमने जाने के लिए जितना इम्पॉटेंट है डेस्टिनेशन डिसाइड करना, उतना ही जरूरी है उस डेस्टिनेशन के हिसाब से पैकिंग करना। कुछ लोग जिस दिन ट्रेवल करते हैं उसी दिन सुबह पैकिंग करते हैं, यह गलत है, क्योंकि उस समय आप इतनी जल्दी में होते हैं कि कई जरूरी चीजें पैक करना भूल जाते हैं इसका नतीजा यह होता है कि या तो आपको वह सामाना नया खरीदना पड़ता है, या फिर उस सामान के लिए परेशान होना पड़ता है।  यहां पढ़ें कुछ इम्पॉटेंट टिप्स जिन्हें अपना कर आप अपनी यात्रा को सुखद और मंगलमय बना सकते हैं।

- पैकिंग करते समय कपड़ों को फोल्ड करने की बजाए रोल करके पैक करें। ऐसा करने से आपके बैग में ये कम स्पेस लेंगे और आप छोटे बैग में ज्यादा सामान पैक कर पाएंगे। इसके अलावा कपड़ों पर सिलवटें भी नहीं पड़तीं।

- अगर बैग में आप कुछ ऐसा सामान रख रहे हैं जो लीक होकर आपके कपड़ों को खराब कर सकता है तो इन बोटल्‍स का मुंह सील कर दें।

- आपकी यात्रा भले ही लम्‍बी हो पर कम से कम कपड़े पैक करें. ऐसे कपड़े लेकर जाएं जो जल्‍दी ड्राई हो सकें। इन्‍हें रात में धोकर सुबह तक सुखाया जा सकता है। नायलॉन, पॉलिएस्टर, रेयॉन और कॉटन-पॉलिएस्टर फेब्रिक ऐसे में आपके लिए मददगार साबित हो सकते हैं।

- अपने इर्म्‍पोटेंट डॉक्‍यूमेंट्स की स्‍कैन की हुई कॉपी को इलेक्‍ट्रॉनिक फॉर्म में रखें। इनकी एक कॉपी खुद को भी मेल भी कर लें।

- अपने साथ ले जाने वाले कैश को बैग में अलग- अलग हिस्‍सों में बांटकर रखें। ताकि अगर एक जगह से पैसे चोरी भी जाएं तो दूसरी जगह के पैसों का इस्‍तेमाल किया जा सके।

- अपने साथ बहुत सारे प्‍लास्टिक बैग और न्‍यूजपेपर्स रखें। याद रहे इनकी उपयोगिता का कोई अंत नहीं है।

- एयरर्पोट पर नई पानी की बॉटल खरीदने की बजाए खाली पानी की बॉटल को अपने साथ लेकर जाएं। खाली बॉटल को फेंकने की बजाए इन्‍हें इस्‍तेमाल करें।

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कम बजट में ऐसे ज्यादा दिन घूमें विदेश में


नई दिल्ली। ट्रिप प्लान करने से पहले हम सब ही अपने बजट को देखते हैं और बजट के हिसाब से ही ट्रिप कितने दिन का होगा यह तय किया जाता है। खासकर जब विदेश घूमने जाने की बात हो तो बजट ज्यादा मायने रखता है। हालांकि यहां हम आपको कुछ ऐसी टिप्स बता रहे हैं जिनकी मदद से आपक कम बजट में भी ज्यादा दिनों तक विदेश ट्रिप का मजा ले सकेंगे।

- विमान की टिकट खरीदने में समझदारी दिखा कर आप काफी पैसा बचा सकते हैं। कभी भी वीकएंड पर यात्रा न करें, वीकएंड की टिकट्स ज्यादा महंगी होती हैं।
- कम पैसे और ज्यादा समय होने पर उड़ानें सीधे गंतव्य की नहीं लें। इस तरह से आप बीच में रुककर अन्य स्थलों की भी यात्रा कर सकते हैं।
- एक ही जगह की यात्रा के लिए अलग अलग एयरलाइंस की कीमतों में भी अंतर होता है। इस पर भी रिसर्च कर लें।
- हवाईअड्डे के विकल्प का चुनाव भी आपका पैसा बचा सकता है, कई बार नजदीकी हवाईअड्डे के बजाए थोड़ी दूरी के हवाईअड्डे से जाने से भी कम पैसे खर्च होने की संभावना रहती है।
- इसके अलावा यात्रा के दौरान विमान से खाना खरीदने की बजाए घर से खाने पीने का सामान ले जाएं।
- घर से निकलने से पहले अपने सामान का वजन जरूर कर लें और अनावश्यक चीजों को हटा दें, जसिसे आपको कम फीस देनी पड़े।
- होटल की बजाए कमरा लेकर रुकना ज्यादा सस्ता है। कई साइटों जैसे एयरएएनबी आदि वाजिब कीमत पर कमरा उपलब्ध करवाती हैं।
- यात्रा के दौरान स्थानीय व्यंजनों का लुत्फ जरूर लें। यह सस्तो भी होते हैं और आपको देसी जायका भी मिलता है।
- विदेशी मुद्रा विनिमय के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखकर बचत की जा सकती है। विदेश में धन निकालना महंगा पड़ सकता है। हालांकि डेबिट कार्ड का प्रयोग क्रेडिट कार्ड की अपेक्षा सस्ता पड़ता है, लेकिन इस बात को लेकर सावधान रहें कि अधिकतर बैंक पैसा निकालने पर ज्यादा कमीशन वसूलते हैं। हवाईअड्डे पर पहुंचने से पहले ही विदशी मुद्रा का विनिमय कर लें, जो आपको सस्ता पड़ेगा।

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प्लेन में सफर करने से लगता है डर, तो ध्यान रखें यह बातें


घूमना और नई जगह देखना हम सबको पसंद होता है, लेकिन घूमने के लिए ट्रेवल करने के हर जरिये में से एक तरीका हम में से बहुत लोगों को पसंद नहीं होगा। "हवाइ यात्रा" हम में से बहुत लोग हैं जिन्हें हवाई यात्रा करना पसंद नहीं होगा। कई लोगों के लिए तो हवाई यात्रा करना किसी परेशानी से कम नहीं होगा। 

हवाई यात्रा से डर लगने के कारण बहुत सारे हो सकते हैं। "क्लौस्ट्रफोबिया" यानी उंचाई से डर। कई लोगों को प्लेन में बैठते ही यह डर लगना शुरू हो जाता है कि प्लेन अपना बेलेंस खो देगा और क्रेश हो जाएगा और इस सोच को वह चाहकर भी अपने आप से दूर नहीं कर सकते, चाहे फिर वह कितने ही आंकड़े देख लें कि प्लेन का सफर ड्राइव से भी सेफ होता है। कुछ लोगों को प्लेन में आतंकी गतिविधी का डर लगता है कि कहीं प्लेन हाइजेक नहीं हो जाए। 

कोई फर्क नहीं पड़ता की आपको किस कारण से डर लगता है, आप चाहें तो यात्रा का दूसरा तरीका अपना सकते हैं लेकिन यदि आप चाहते हैं कि आपका लाइफ स्टाइल वैसा ही रहे तो आप हवाइ यात्रा के दोरान अपने डर से दूर रहने के लिए ध्यान में रखीए यह टिप्स।

यात्रा से पहले जानकारी लें
प्लेन का इंजन यदि काम करना बंद कर दे तब भी प्लेन लेंड होने जितना तक तो उड़ ही सकता है, यदि इतनी हद तक आपको यह बात पता है तो आपको हवाइ यात्रा से कम डर लगेगा। आप इंटरनेट पर यह भी पढ़ सकते हैं कि प्लेन आसमान में कैसे उड़ता है से लेकर यदि उसमें कोई खराबी हो जाए त ोक्या एक्शन होते हैं भी पढ़ सकते हैं। 

अपने आपको प्लेन से परिचित बनाएं
यह ान लेना की प्लेन कैसा दिखता है, आपको प्लेन से थोड़ा परिचित बना देगी।

बीच की सीट चुनें
वैसे तो सबको खिड़की वाली सीट पर बैठकर यात्रा करना पसंद होता है, लेकिन यदि आपको प्लेन यात्रा से डर लगता है और उंचाई से डरते हैं तो आपको अंदर कोर्नर वाली सीट लेनी चाहिए जिससे आपको प्लेन कितनी उंचाई पर है नहीं दिखेगा।

पॉजिटिव सोचें
प्लेन में बैठे बैठे अच्छी बातों को सोचें। प्लेन में बैठने से लेकर यात्रा स्थल तक पहुंचने तक बुरे ख्याल आना स्वाभाविक है लेकिन बेहतर है आप अपने प्लान्स के बारे में सोचें कि आप वहां पहुंचकर क्या करने वाले हैं।

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शुरू हुई समर "हॉलिडे प्लानिंग", तो ध्यान रखें ये बातें


गर्मियों की छुटि्टयों में फैमिली के साथ ट्रिप पर जाना किसे पसंद नहीं है। ऎसे में लोगों ने अभी से हॉलिडे ट्रैवलिंग की प्लानिंग शुरू कर दी है। एक ट्रैवल पोर्टल की मानें, तो इस समर सीजन हॉलिडे ट्रिप पिछले साल की तुलना में बड़ा होगा। लोग ज्यादा दिन की प्लानिंग के साथ अपना मनपसंद डेस्टिनेशन प्रिफर कर रहे हैं। पोर्टल की ओर हुए सर्वे में यह सामने आया है कि लोग अपने हॉलिडे ट्रिप को यादगार बनाना चाहते हैं, इसलिए वे ज्यादा दिन का प्लान बना कर चल रहे हैं।

होटल में करेंगे स्टे
सर्वे के अनुसार 69 प्रतिशत लोगों का यह मानना था कि वे अपने हॉलिडे ट्रिप के दौरान रिलेटिव्स की बजाय होटल में रहना पसंद करेंगे। महज 11.3 प्रतिशत लोगों ने ट्रैवलिंग के दौरान अपने परिजनों के यहां रूकने की बात कही। ऎसे में यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि रिलेटिव्स के रूकने का ट्रेंड पहले की बजाय कम होता जा रहा है। लोग ट्रैवलिंग के दौरान दिल खोलकर खर्च करने का प्लान बना रहे हैं।

तीन या चार हॉलिडे
रिलेटिव्स के यहां न रूकने का कारण साल में तीन या चार हॉलिडे भी हो सकता है। अब सिर्फ समर में ही नहीं, बल्कि साल में तीन या चार हॉलिडे प्लान किए जाने लगे हैं। ऎसे में हर रिलेटिव्स के रूकना कम होता जा रहा है। टूरिस्ट अपनी सुविधा और पसंद के अनुसार ट्रैवलिंग को एंजॉय करते हैं। 

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कर रहें हैं Travel planning तो लीजिए "पैकेज डिस्काउंट"


समर की छुटि्यां लगते ही अगर आप कहीं घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं तो कुछ बातों का जरूर ध्यान रखें, जैसे कई ट्रैवल एजेंसी और वेबसाइट पर देश विदेश के सैर सपाटे वाली जगहों पर जाने के लिए कई तरह के पैकेज होती हैं। जिससे आपके बजट के अंदर आप अपनी मनपसंद जगह घूम सकते हैं।

गोल्डन ट्राएंगल
अगर आप नॉर्थ की ओर घूमना चाहते हैं तो आपके लिए गोल्डन ट्राएंगल सबसे अच्छा होगा जिसमें आगरा, दिल्ली और जयपुर शामिल हैं। टूरिस्ट्स के लिहाज से पिंकसिटी काफी किफायती है, यह लोगों के पैकेज में आसानी से आ जाता है।

होटल पैकेज
ट्रैवल के साथ आप जिस जगह घूमने जा रहे हैं वहां रूकने की भी व्यवस्ता अच्छी होनी चाहिए जिससे आप कम बजट में अच्छे से अच्छे होटल में स्टे कर सकते हैं।

कॉम्बो पैकेज

कॉम्बो पैकेज में आप किसी भी ट्रैवल एजेंसी वेबसाइट से टैवल, फूड, स्टे जैसी सुविधाओं का एक साथ पैकेज ले सकते हैं जिससे आपको कम पैसे में वहीं सुविधाए मिल जाएंगी जो आप अनजान जगह में जाकर ढूंढ कर परेशान होंगे।

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प्लेन में सफर से डरते हैं तो ध्यान रखें यह टिप्स


घूमना और नई जगह देखना हम सबको पसंद होता है, लेकिन घूमने के लिए ट्रेवल करने के हर जरिये में से एक तरीका हम में से बहुत लोगों को पसंद नहीं होगा। "हवाइ यात्रा" हम में से बहुत लोग हैं जिन्हें हवाई यात्रा करना पसंद नहीं होगा। कई लोगों के लिए तो हवाई यात्रा करना किसी परेशानी से कम नहीं होगा।

हवाई यात्रा से डर लगने के कारण बहुत सारे हो सकते हैं। "क्लौस्ट्रफोबिया" यानी उंचाई से डर। कई लोगों को प्लेन में बैठते ही यह डर लगना शुरू हो जाता है कि प्लेन अपना बेलेंस खो देगा और क्रेश हो जाएगा और इस सोच को वह चाहकर भी अपने आप से दूर नहीं कर सकते, चाहे फिर वह कितने ही आंकड़े देख लें कि प्लेन का सफर ड्राइव से भी सेफ होता है। कुछ लोगों को प्लेन में आतंकी गतिविधी का डर लगता है कि कहीं प्लेन हाइजेक नहीं हो जाए।

कोई फर्क नहीं पड़ता की आपको किस कारण से डर लगता है, आप चाहें तो यात्रा का दूसरा तरीका अपना सकते हैं लेकिन यदि आप चाहते हैं कि आपका लाइफ स्टाइल वैसा ही रहे तो आप हवाइ यात्रा के दोरान अपने डर से दूर रहने के लिए ध्यान में रखीए यह टिप्स।

यात्रा से पहले जानकारी लें
प्लेन का इंजन यदि काम करना बंद कर दे तब भी प्लेन लेंड होने जितना तक तो उड़ ही सकता है, यदि इतनी हद तक आपको यह बात पता है तो आपको हवाइ यात्रा से कम डर लगेगा। आप इंटरनेट पर यह भी पढ़ सकते हैं कि प्लेन आसमान में कैसे उड़ता है से लेकर यदि उसमें कोई खराबी हो जाए त ोक्या एक्शन होते हैं भी पढ़ सकते हैं।

अपने आपको प्लेन से परिचित बनाएं
यह ान लेना की प्लेन कैसा दिखता है, आपको प्लेन से थोड़ा परिचित बना देगी।

बीच की सीट चुनें
वैसे तो सबको खिड़की वाली सीट पर बैठकर यात्रा करना पसंद होता है, लेकिन यदि आपको प्लेन यात्रा से डर लगता है और उंचाई से डरते हैं तो आपको अंदर कोर्नर वाली सीट लेनी चाहिए जिससे आपको प्लेन कितनी उंचाई पर है नहीं दिखेगा।

पॉजिटिव सोचें
प्लेन में बैठे बैठे अच्छी बातों को सोचें। प्लेन में बैठने से लेकर यात्रा स्थल तक पहुंचने तक बुरे ख्याल आना स्वाभाविक है लेकिन बेहतर है आप अपने प्लान्स के बारे में सोचें कि आप वहां पहुंचकर क्या करने वाले हैं।

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सास-ससुर के साथ सफल वेकेशन प्लान करने की टिप्स


सास-ससुर के साथ क्वालिटी वक्त बिताने और रिश्ते को मजबूत क रने के लिए उनके साथ किसी वेकेशन पर अच्छा आइडिया है। लेकिन एक शातिपूर्ण वेकेशन वह भी सास-ससूर के साथ, क्या यह असल में सच हो सकता है। चाहे वह वेकेशन आप सब की सहमती से प्लान हुआ हो या आपकी इच्छा के बगैर इसे सफल बनाना चेलेंज ही रहेगा। जानिए कुछ टिप्स जो आपके सास-ससूर के साथ प्लान किये गए वेके शन को किसी खूबसुरत सपने जैसा बना देगा।

उद्देश्य को पहचानें
आपके सास-ससूर के साथ वेकेशन पर जाने के पीछे कोइ तो उद्देश्ट जरूर होगा। हो सकता है आप उनके साथ एक क्वालिटी टाइम स्पेन्ड करना चाहते हों या आप चाहते हों कि आपके बच्चे अपने दादा-दादी से घूलें मिलें या केवल यह भी हो सकता है कि आप उन्हें कहीं चेन्ज या रिलेक्स होने के लिए बाहर लेकर जा रहे हैं। एक बार जब आप यह पता कर लेंगे तो आप अपनी यात्रा को अच्छी तरह से प्लान कर सकते हैं।

प्लान बनाते समय उनसे बात करें
आप जब प्लान बना रहे हैं तो ध्यान रखें कि आप अपने सास-ससुर से बात जरूर करें। हो सकता है आप कोई हिल स्टेशन प्लान करें और आपकी सास को उंचाई से डर लगता हो या उस मौसम में उनकी तबीयत खराब हो जाती हो। जब आप ट्रेवल प्लान कर रही हैं तब ही इस बारे में उनसे बात करें ताकि बाद में कोई परेशानी नहीं हो।

फाइनेंस के बारे में बात करें
होटल, खाना, ट्रावेल किराया बहुत ही बेसिक खर्चे हैं, इसके अलावा भी बहुत से ऎसे खर्चे होते हैं जो ट्रावेल में अपनी जेब से ही जाते हैं। इन सब बातों को पहले ही डिसकस कर लें।

सकारात्मक रहें
यदि आप अपने सास-ससुर के साथ कंफर्टेबल नहीं हैं और जाने के एक हफ्ते पहले ही कुछ अनबन हुई है तो आपके वेकेशन पर भी इसक ा असर जरूर आएगा। इन सारी नेगेटिव बातों को दूर करें और यह सोच लें कि आप इन सब परेशानियों को दूर कर देंगी और यह वेकेशन आपका सबके साथ यादगार वेकेशन होगा। हमेशा आशावादी रहें और अपने आप को यह बताती रहें कि यह ट्रेवल अच्छा होगा।

बेक अप प्लान करें
ट्रेवल के पहले बेक अप भी प्लान करें। हो सकता है आपके सास- ससुर कहीं जाने के मुड में ही नहीं हो और आपको बोल दें कि वे कहीं नहीं जाना चाहते, इस बात के लिए पहले से ही तैयार रहें।

शांत रहें और समाधान निकालें
ऎसा कई बार होगा जब चिजें प्लान किये अनसार नहीं होंगी ऎसे में आप बिना आपना आप खोए आप उस परेशानी का समाधान निकालें। यह ध्यान रखें की आपने इस वेकेशन को प्लान करने के लिए बहुत महेनत की है।

पर्सनल समय दें
यह ध्यान रखें की आप अपने पूरे दिन के शेडयुल में से कुछ वक्त अपने और अपने पति के लिए निकालें और यह बात अपने सास-ससुर को भी बताएं कि यह आपका वेकेशन ट्रीप है और हर वक्त आप उनक े साथ नहीं रह सकतीं।

स्पेशल बनाएं

आप वेकेशन के दौरान बहुत अच्छी तरह से बात कर रही हैं और सब को हेंडल कर रही हैं, यह तो एक बात हुई, लेकिन क्या यह बात अच्छी नही होगी की आपके सास-ससुर को यह वेकेशन हमेशा याद रहे और उन्हें अहसास हो की आपने इस वेकेशन को प्लान करने के लिए बहुत महेनत की है। ट्रीप के दौरान कुछ सरप्राइज प्लान करें जो उनके और आपके दोनों के लिए यादगार बन जाए।

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होटल में सेफ्टी के लिए ध्यान रखें यह बातें


आपके घर में आपका दिल रहता है लेकिन होटल वह जगह है जहां आप दिल नहीं तो कम से कम अपना सिर तो रखते ही हैं। इसे लिखने का मचलब आपको डराना बिल्कुल भी नहीं है लेकिन बाहर जाने के बाद जहां घूमने के बाद थक कर आप अपने होटल आते हैं, और हर ट्रेवल करने वाले के लिए जरूरी है कि उसे थोड़ी बहुत सावधानियां पता हो, इससे सफर का आनंद और भी बढ़ जाता है। तो इस बार ट्रेवल की जगह पर होटल में सेफ्टी के लिए ध्यान रखें यह बातें।

खिड़की पर नहीं लेटें
2011 में इंग्लेंड के हिंकली शहर के एक होटल से 2 साल की एक बच्ची खिड़की से गिर गई, हालांकी बाद में खबर आई की वह बच गई लेकिन उसेबहुत बुरी हालत में अस्पताल पहुंचाया गया। उसी हफ्ते में ऑस्टिन के एक होटल को भी बंद होना पड़ा था क्युंकि होटल की बाल्कनी का ग्लास पेनल टूट गया। विदेश में ऎसे कई हादसे हो चुके हैं और होते हैं। और इंडिया में तो इस बात का और भी ज्यादा खतरा होता है कि कब क्या हो जाए। बहरहाल कुछ हो या नहीं हो हमारी सावधानी हमारे हाथों में है। कई बार लेटे लेटे ही ध्यान नहीं रहे या यदि लड़की अकेली होटल के कमरे में है और होटेल के कमरे से बाहर दिखता है तो यह भी रिस्की हो सकता है।

होटल के ग्लास में पानी नहीं पीयें
बाहर जाने का मतलब है बाहर का पानी नहीं पीकर मिनरल वॉटर लेना। होटल में ग्लास हर रोज साफ हों यह जरूरी नहीं ऎसे में कई ç कटाणुं ग्लास पर लगे होते हैं बहेतर है आप उसमें पानी नहीं पीएं बल्की होटल में रखे हुए पानी के थर्मस से बी पानी नहीं पीएं। कितना ही बड़ा होटल क्युं नहीं हो आप होटल में पानी की बॉटल ऑर्डर कर सकते हैं। यदि आपको ग्लास का इस्तेमाल करना ही है तो अपने साबुन से धोकर उसका इस्तेमाल करें।

रिव्यु पढ़ना और लिखना नहीं भुलें
किसी होटल को फाइनल करने से पहले रिव्यु जरूर पढ़े यह आपको होटल की स्थिती के बारे में बताएगा। यदि आप किसी 10 में से 4 रिव्यु भी नेगेटिव पढ़ते हैं तो उस होटल में बुकींग नहीं करें।

रूम नंबर शेयर नहीं करें
खास कर अकेली महिलाएं जब ट्रेवल कर रही हैं और होटल में अके ले रहने वाली हैं तो इसे जरूर ध्यान में रखें। यदि आपके होटल में जाते ही रिसेप्शन वाला तेज आवाज में आपको अपका रूम नंबर और चाबी देता है तो उससे कमरा बदलने के लिए कह दें। ध्यान रखें होटल में आस पास कोई भी खड़ा हो उसे भई आपका रूम नंबर नहीं पता होना चाहिए।

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कश्मीर के ट्रेवल को खुबसूरत बनाने के लिए यह है टिप्स


कश्मीर को भारत का स्वर्ग माना जाता है, और यदि आप कश्मीर की सैर करेंगे तो आप खुद भी मान जाएंगे की कश्मीर सच में ही स्वर्ग है। कश्मीर की खुबसूरती इस की हवाओं में इसके पानी में और यहां की हर चीज में मिलती है, शायद इसलिए ही कश्मीर हमेशा से आतंकियों के घेरे में घिरा रहता है। कितनी ही फिल्में और डोक्युमेंट्री कश्मीर की सुंदरता को दिखाती है और इसलिए कश्मीर घूमने के लिए हर सैलानी की पहली पसंद होता है। लगभग हर भारतीय कश्मीर की सैर एक बार तो क रता ही है और यदि आपने नहीं की है तो जल्द ही इस बार की गरमी की छुट्टीयां अपने परिवार के साथ कश्मीर के लिए प्लान करें।

वैसे तो कश्मीर जाने के लिए जम्मू ही सबसे नजदिकी रेल्वे स्टेशन और एयरपोर्ट है और लगभग हर बड़े शहर से जुड़ा हुआ है। यदि आप दिल्ली को मिड-वे मानकर चलें तो ट्रेन से जम्मू पहुचना लगभग 10 घंटे की बात है और प्लेन से 1 ट्रांसिट के बाद 6 घंटे। यहां आपको कनेक्टेड 2 फ्लाइट बदलनी पड़ती हैं इसलिए इसका समय ज्यादा है। जम्मू के बाद आपका असली ट्रेवल शुरू होता है। श्रीनगर, सोनमर्ग, गुल मर्ग, पहलगाम, पटनीटॉप, यह कुछ कश्मीर की चुनींदा घूमने की जगह हैं। सोनमर्ग और गुलमर्ग में सितम्बर से फरवरी तक आप बर्फ का मजा भी ले सकते हैं। और यहां पर स्कींग का मजा ही कुछ और है।

यह तो हुई ट्रेवल और घूमने की बात लेकिन घूमने के दौरान बहुत सी बाते हैं जिसका आपको खयान रखना जरूरी है। वैसे तो अपने गर से बाहर निकलते ही सावधानी रखने की जरूरत होती है लेकिन कश्मीर के ट्रेवल के दौरान यह सावधानियां आपकी जरूरत बन जाती है। आपका हर वक्त चोकन्ना और समझदार रहना जरूरी है।

यह तो हम सब ही जानते हैं कि कश्मीर हमेशा किसी न किसी परेशानी से घिरा रहता है। कश्मीर का माहौल साधारण नहीं होता ऎसे में यदि आप अपनी यात्रा का प्लान बनाते हैं तो कोई बुराई नहीं है लेकिन जरूरी हैं कुछ सावधानियां। देश के जवान आपकी सुरक्षा के लिए हर जगह पर तैनात हैं और आप अपनी यात्रा को मजेदार बना सकते हैं।

सबसे पहली सलाह तो कश्मीर ट्रेवल के लिए यह होगी की चाहे आप किसी भी मौसम में जाएं सर्दी के कपड़े साथ में रख ही लें। कश्मीर का मौसम कभी भी करवट बदल सकता है।

कश्मीर क्युंकि देश का एक हिस्सा है और उसके नियम कानुन भी भारते के कानुनों से अलग हैं तो जरूरी है कि आप पहले इस बारे में सही जानकारी लेकर जाएं।

कश्मीर में आपकी और आपके सामान की किसी जगह पर जांच होना आम बात है आपको चाहिए कि आप इस जांच में पूरी तरह से सहयोग करें। पूरी यात्रा के दौरान अपने दिमाग को ठंडा रखें और किसी बी झगड़े में पड़ने से बचें। यहां पर केस होने पर आपको बड़ी परेशानी उठानी पड़ सकती है।

ट्रेवल के दौरान जब आप एक जगह से दूसरी जगह रोड़ से ट्रेवल करते हैं तो हो सकता है आपको यह भी दिख जाए की कोइ ड्राइवर या राह चलता भी किसी छोटी सी गलती पर सेना के जवानों या पुलिस की मार का शिकार हो रहा है। आप बी इस बात का ध्यान रखें की आपका ड्राइवर सही हो और कश्मीर के रोड़ और ट्रेवल नियमों का जानकार हो।

होटल और ट्रेवल का पेकेज लेना ज्यादा बहेतर है। आप यदि खुद ट्रेवल प्लान कर रहें हैं तो बुराई नहीं है लेकिन ट्रेवल प्लानर या टुर प्लानर उस जगह से सही तरह से वाकिफ है तो आप ज्यादा अच्छी तरह घूम पाएंगे।

कश्मीर के किसी भी हिस्से में हड़ताल होना आम बात है और यह कितने भी दिन चल सकती है। हड़ताल के दौरान मार्केट बंद रहते हैं। खाने पीने के लिए भी कुछ मिल जाए जरूरी नहीं इसलिए होटल वही देखें जहां होटल का अपना रेस्टोरेंट हो ताकि आपको खाना तो मिल ही जाएं।

यात्रा के दौरान अपना व्यवहार सबसे ठीक रखें लेकिन किसी से भी दोस्ती नहीं बढ़ ाएं। आपका सफर जब गुलमर्ग या सोनमर्ग की तरफ होगा तो बर्फ के मजे लेने के लिए आपको पहाड़ पर जाना पड़ेगा और वहां के लिए आपको पिठ्ठु लेने पडेंगे। पिठ्ठु की किमत के लिए आपको बहुत बार्गेनिंग करनी पड़ेगी। एक पिठ्ठु लगभग 600 तक में पुरा एरिया कवर करता है जबकी पिठ्ठु वाले इसकी किमत 1800 से 2000 भी बता सकते हैं।

कश्मीर का श्रीनगर समुद्र तट से लगभग 1600 मिटर उपर है और बाकी की जगह आगे जाते जाते और उपर हो जाती हैं। कश्मीर के यदि हाई पोइंट की बात करें तो 2743 मिटर तक उपर जाकर सोनमर्ग है। जाहिर है इन सभी जगहों पर जाने के लिए आपको उपर की तरफ ट्रेवल करना पड़ेगा। यदि आपको या आपके परिवार वालों को उंचाई से परेशानी होती है तो उन्हें खिड़की की तरफ नहीं बिठाएं और उनके लिए चुरन की गोलियां और डॉक्टर की बताइ हुइ दवाइ साथ लेकर चलें।

हर यात्रा में अपना आई डी कार्ड जरूरी होता है लेकिन कश्मीर की यात्रा के दौरान इसकी विशेष जरूरत पड़ सकती है। परिवार के हर सदस्य का आइ डी कार्ड साथ में अवश्य रख लें।

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