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मैं बिहार नहीं भी आता तो काम चलता, पर आपका प्यार मुझे बार-बार लाता है-पीएम मोदी


(पालीगंज,पटना): मौजूदा लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण के लिए अंतिम चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जनता से मार्मिक अपील की। उन्होंने कहा कि मैं बिहार नहीं भी आता, तो काम चल जाता। बिहार को संभालने की ताक़त मेरी टीम में भरपूर है, लेकिन आपके आशीर्वाद और प्यार का मैं कायल हूं। आपने हर पल मेरा साथ दिया। इसके लिए सिर झुकाकर आपको प्रणाम करता हूं। आप हमें सुनिश्चित करें कि जीत भरपूर और दिव्य हो रही है।


प्रधानमंत्री ने कहा कि चौथे और पांचवे चरण के चुनाव के बाद ही तय हो गया कि मोदी सरकार एक बार फिर मजबूती के साथ सत्ता में लौट रही है। एक कार्यकर्ता के रूप में आपका आशीर्वाद लेने आपके बीच आया हूं। प्रधानमंत्री रहते हुए इस चुनाव की यह आखिरी सभा है। मैं फिर प्रधानमंत्री के नाते आपके बीच सेवा भाव से विकास की गंगा लेकर आता रहूंगा।


यदुवंशियों ने समाज के लिए दी कुर्बानी

मोदी ने कहा कि दो दशक से मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री रहते हुए काम करने का अनुभव है। मैं गुजरात का हूं, जो सुदर्शनधारी मक्खन खाने वाले नीति के ज्ञाता कान्हा की धरती है। पवित्र द्वारिका भूमि यदुवंश की गौरवशाली भूमि है। यदुवंशियों ने समाज और मानवता के लिए बहुत किया, बहुत कुर्बानियां दीं। फिर बिहार में यदुवंश के नाम पर कुछ लोग भ्रम फैलाकर ज़मीन हड़पने और भ्रष्टाचार करने में लिप्त रहे। ऐसा करके इन लोगों ने कान्हा के गौरव को कलंकित किया है।


जनता जनार्दन ईश्वर का स्वरूप

मोदी ने कहा कि जनता जनार्दन में ईश्वर का स्वरूप होता है। मैंने जनता के आशीर्वाद को ईश्वर का प्रसाद माना। प्रसाद की पवित्रता भी मुझे संस्कार में मिली है। मोदी ने कहा कि महामिलावटी लोगों ने सत्ता को लालची नज़रों से देखा। अपने परिवार को फायदे कैसे मिले महामिलावटी और महाभ्रष्ट लोगों ने सिर्फ यही तलाशने और लूटने का काम किया। ये हमेशा अपने परिवार को फायदे पहुंचा कर अहंकारी हो गए। गरीबों की परेशानी भुला दी। मोदी ने लालू यादव पर तंज कसते हुए इशारों में कहा कि गरीबों की परवाह छोड़ उनकी सैंकड़ों एकड़ जमीन हड़प ली। ऐसे लोग अब ज़मीन से कट गए हैं। इनकी आंखें हमेशा चोरी का माल खोजती रहती हैं। पता लगते ही ये इन्हें हड़प लेते है। इन्होंने अपनी जाति की भी परवाह नहीं की। इनके साथ भी विश्वासघात किया।

 

130 करोड़ जनता के आशीर्वाद से वापस आ रहे हैं

मोदी यहीं नहीं रुके, कहा इन्हें पार्टी में भी जाति का दूसरा कोई नेता नहीं मिला। अपने परिवार से ही नेता चुनवाया। जिस जाति ने इन्हें अरबों-खरबों का मालिक बनाया, उसे भी धोखा दिया। देश-समाज को क्या इन्होंने अपनी जाति को भी कुछ नहीं दिया। जाति के नौजवानों के कंधों पर बंदूक रख दी और उन्हें गलत रास्ते पर धकेल दिया। मोदी ने कहा कि अब इस सदी का नौजवान इनके झांसे में आने वाला नहीं है। पीएम ने कहा कि विरोधियों का बस दो ही मुद्दा है। मोदी की छवि खराब करो, मोदी को सत्ता से हटाओ। इन्हें पता नहीं है कि देश की 130 करोड़ जनता के आशीर्वाद से मोदी फिर सत्ता में लौटकर देश की सेवा करने जा रहा है।


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पीएम मोदी ने कहा,'बिहार में विपक्ष का सूपड़ा साफ'


(पटना,बक्सर,सासाराम): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बनारस से सटे बिहार के बक्सर और सासाराम में विपक्ष पर जमकर बरसते हुए कहा कि देश अब कांग्रेस से तौबा कर चुका है। कांग्रेस ने सत्ता में रहते पाकिस्तान के आतंकवाद का मुंहतोड़ जवाब नहीं दिया। इसलिए देश उसे कह रहा है,अब बहुत हुआ।


प्रधानमंत्री ने सासाराम में कहा कि बिहार में विपक्ष का सूपड़ा पूरी तरह साफ हो चुका है। हारा हुआ विपक्ष मुझे सिर्फ गालियां दे रहा है। मोदी ने कहा, 'कांग्रेस ने बाबा साहेब अंबेडकर का नाम भी इतिहास से मिटाने की कोशिश की। कांग्रेस ने बाबू जगजीवन राम को भी अपमानित किया। उन्होंने देश का खूब नुकसान किया। ऐसी कांग्रेस के साथ लोकनायक जयप्रकाश नारायण की विरासत संभालने वाले लोग गलबहियां डालकर चल रहे हैं। ये वोट के लिए समाज को बांटने का काम कर रहे हैं।'


मोदी ने कहा कि जनता ने इन्हें पूरी तरह सबक सिखा दिया है। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस का परिचय कराते हुए कहा, बस तीन शब्दों में इनका परिचय मिल जाता है-जो हुआ सो हुआ। इनके शासन में घोटाला हुआ सो हुआ। भ्रष्टाचार हुआ सो हुआ। इसलिए देश इन्हें कह रहा है,अब बहुत हुआ।


मोदी ने कहा कि देश पर शासन करने वालों का हिसाब लीजिए। उन लोगों ने देश के गरीबों के लिए कितना किया और अपने परिवार के लिए कितना किया। उन्होंने परिवार और रिश्तेदारों के लिए अकूत संपत्ति बनाई और देश में खूब घोटाले भ्रष्टाचार किया। जबकि मैंने लंबे समय तक गुजरात का मुख्यमंत्री रहने के बाद आपके आशीर्वाद से पांच सालों तक देश की सत्ता संभाली।उन्होंने कहा,मेरी संपत्ति खुली किताब है।


पीएम ने कहा,ये महामिलावटी लोग समाज के विभाजन पर वोट बटोरते हैं इसलिए बिहार समेत पूर्वोत्तर भारत में विकास की रोशनी नहीं पहुंचने दी। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में तरक्की होगी, तभी देश का संपूर्ण विकास हो पाएगा। उन्होंने कहा, इसीलिए पांच वर्षों के दौरान बिहार समेत पूर्वोत्तर राज्यों के विकास पर अधिक जोर दिया गया।


प्रधानमंत्री ने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए बताया कि किस तरह बिहार की तरक्की के लिए अनेक योजनाऐं शुरु की गयीं। मोदी ने कहा कि छह चरणों के चुनाव में विरोधी पूरी तरह पस्त हो चुके हैं। इसलिए इनका गुस्सा सातवें आसमान पर है। ये लोग मोदी को सिर्फ गालियां देने में लगे हुए हैं। कहा कि ये लोग एक मजबूर और खिचड़ी सरकार के चक्कर में थे। देश को लूटने का लाइसेंस चाहते थे। लेकिन इस चौकीदार ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबेरे वायुसेना के हवाई अड्डे बिहटा पहुंचे और यहां से हेलिकॉप्टर से बक्सर के लिए प्रस्थान कर गये। बक्सर में केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। अंतिम चरण में सासाराम में मीरा कुमार, आरा में आरके सिंह, पटना साहिब में रविशंकर प्रसाद और पाटलिपुत्र में रामकृपाल यादव की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र के पालीगंज में बुद्धवार की सुबह दस बजे चुनावी सभा को संबोधित करने फिर बिहार आएंगे।


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जदयू नेता ने कहा-एनडीए को सरकार बनानी है तो नीतीश को पीएम बनाना होगा, मची खलबली


(पटना): जदयू के एक नेता गुलाम रसूल बलियावी ने यह कहकर खलबली मचा डाली है कि एनडीए को यदि केंद्र में सरकार बनानी है तो नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री बनाना होगा। बलियावी ने यह भी कह डाला कि चुनाव में नरेंद्र मोदी के नाम पर नहीं नीतीश कुमार के चेहरे पर वोट मिल रहे हैं। बलियावी का यह बयान उस वक्त आया है जब मध्य और उत्तर बिहार की सोलह सीटों पर दो चरणों में चुनाव होने अभी बाकी हैं। इसमें केंद्र सरकार के पांच मंत्रियों के भाग्य का फैसला होना बाकी है।


बलिया वी ने एक निजी चैनल को दिए इंटर्व्यू में यहां तक कह डाला कि चुनाव नतीजों के बाद एनडीए को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने जा रहा है। बलियावी ने कहा कि एनडीए सत्ता में तभी आ सकती है जब नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री बनाया जाएगा।


बलिया वी के इस बयान पर भाजपा ने तुरंत पलटवार किया। युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक नितिन नवीन ने कहा कि नीतीश कुमार समेत सभी एनडीए नेता नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट मांग रहे हैं। पूरे बिहार में जनता नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट कर रही है। ऐसे में जदयू नेता का यह बयान हास्यास्पद है। नवीन ने कहा कि इस तरह का बयान किसी बाहरी के बहकावे में दिया गया लगता है।


विधायक प्रेमरंजन पटेल ने कहा कि वोट तो नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने के नाम पर मिल रहा है। किसका चेहरा कैसा है, यह कोई नहीं देख रहा। पटेल ने कहा कि बलिया वी का यह बयान निश्चित रूप से उनका निजी बयान है। इसका नीतीश कुमार से कोई वास्ता नहीं है। बता दें कि बलियावी लंबे समय तक लोक जन शक्ति पार्टी में रहे हैं। रामविलास पासवान एक समय में उन्हें हर सभा में लेकर जाते रहे हैं। बाद में वह जदयू में शामिल हो गए।


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राबड़ी देवी ने जदयू और भाजपा को नाली के कीड़े बताकर उबाल दी सियासत,पहले भी दे चुकी है ऐसे बयान


(पटना): पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जल्लाद बताया है। उन्होंने आगे और भी अपशब्द कहते हुए जदयू-भाजपा को नाली के कीड़े क़रार दिया। इसके साथ ही बिहार में सियासत सिरे से गरमा गई है। राबड़ी देवी से पत्रकारों ने पूछा कि प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री को दुर्योधन की संज्ञा दी है। इतना कहते ही वह फूट पड़ीं। कहा कि प्रियंका गांधी ने कम ही कहा।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो जल्लाद हैं। वह यहीं नहीं रुकीं और कहा कि जिसकी सरकार सेना के अफसरों का अपहरण करवाए, जो पत्रकार की हत्या करवा दे वह तो जल्लाद है। उन्होंने जदयू-भाजपा को नाली के कीड़े क़रार दिया।


पहले इन पर साधा था निशाना और कही थी यह बात

राबड़ी देवी ने कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी देश का विकास करने का वादा कर सत्ता में आए थे पर देश का विनाश कर डाला। बता दें कि राबड़ी देवी पहले भी राजनीतिक विराधियों पर गालियों और अपशब्दों से सीधा हमला करने के लिए चर्चित रही हैं। 2009 में वह ललन सिंह को नीतीश कुमार का 'साला' बताकर खूब सुर्खियों में रहीं। इससे पूर्व वह राज्यपाल सुंदर सिंह भंडारी को लंगड़ा भंडारी बोलकर चर्चाओं में घिर चुकी हैं। राबड़ी देवी के इस वक्तव्य पर सियासत गरमा गई है।

 

बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने दिया जवाब

प्रदेश भाजपाध्यक्ष नित्यानंद राय ने कहा कि राबड़ी देवी प्रधानमंत्री को अपशब्द बोलकर अपना परिचय दे रही हैं ममता बनर्जी सरीखे नेताओं ने भी अपनी भड़ास निकाली है। राय ने कहा, जनता ऐसों को सिरे से आउट कर रही है। मतदाताओं ने इन्हें खारिज कर दिया है। इसलिए ये अपनी खिसियाहट निकाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को देश की जनता सबक सिखाने जा रही है। वहीं जदयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा कि राबड़ी देवी को देश के प्रधानमंत्री के बारे में ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। वह इस प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। उन्हें इस तरह की भाषा में प्रधानमंत्री पर कीचड़ उछालना कतई शोभा नहीं देता।

 


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Exclusive Interview...एनडीए पहले से अधिक सीटों पर जीत रहा है, केंद्र में फिर बनेगी नरेंद्र मोदी सरकार-भूपेन्द्र यादव


(पटना,प्रियरंजन भारती): भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और बिहार के राष्ट्रीय प्रभारी राज्यसभा सांसद भूपेंद्र यादव कहते हैं कि केंद्र में पहले से काफी अधिक सीटें जीतकर नरेंद्र मोदी की सरकार वापस आ रही है। गठबंधन में नीतीश को भरोसेमंद और अच्छे नेता मानने वाले भूपेंद्र यादव लगातार पटना में ही कैंपकर रहे हैं। इस दौरान पत्रिका के विशेष संवाददाता प्रियरंजन भारती ने उनसे खास बातचीत की। पेश हैं इसके कुछ अंश:


प्रश्नः क्या फिर से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनेगी या कांग्रेस समेत अन्य दलों की?
उत्तरः नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने पिछले पांच सालों में विश्व में भारत भारत का मान बढ़ाया। सफल नीतियों, दूरदृष्टि, सुशासन, योजनाओं का सफल संचालन आदि के कारण सरकार की स्वीकार्यता और भाजपा व एनडीए की लोकप्रियता बढ़ी।इन सबके कारण हम पहले से ज्यादा सीटें जीतकर पुनः सत्ता में लौट रहे हैं। नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व को जनता ने भरोसा दिया है। मोदी जी जनता के भरोसे और विश्वास के कारण और मजबूती के साथ फिर प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं।

 

प्रश्नः विपक्ष का आरोप है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने वादे पूरे नहीं किए। इसलिए भाजपा गठबंधन बुरी तरह हार रहा है। सच क्या है?

उत्तरः विपक्ष के आरोप निराधार और निरर्थक हैं। उनकी ही विश्वसनीयता खत्म हो गई है। जिस प्रकार कांग्रेस ने भ्रम फैलाया और झूठे नारों के साथ गलत प्रचार किया उससे उसकी विश्वसनीयता खत्म हो गई। कांग्रेस नेतृतव को अपनी भूल स्वीकार करते हुए माफी मांगनी पड़ गई है। ऐसा तथ्यों को तोड़मरोड़कर जनता के बीच गलत प्रचार और व्याख्या से हुआ है। जनता में विश्वसनीयता खत्म हो जिने के बाद अब बचा क्या। जनता बड़ी उम्मीद से भाजपा और नरेंद्र मोदी की ओर देख रही है।

प्रश्नः लेकिन राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकारें सत्ता से बाहर हो गईं।फिर विश्वसनीयता बढ़ी कहां?

उत्तरः ऐसा नहीं है। पांच वर्षों के कार्यकाल में हमें बड़ी सफलताएं मिलीं। पहले हमारी सरकारें राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, गोवा में थीं। हमारी सरकारें बढ़ीं। यूपी, हरियाणा, नगालैंड, असम आदि कई राज्यों में हमारी सरकारें बनीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व के कारण यह सफलता मिल पाई है।


प्रश्नः बिहार में भाजपा ने अपनी परंपरागत सीटें सहयोगियों को दे दीं। इससे निराशा जनक माहौल बनने और सहयोगी दलों के उम्मीदवारों के बढ़िया प्रदर्शन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या कहेंगे?

उत्तर: सहयोगी दल पूरी तरह एकजुट होकर काम कर रहे हैं। गठबंधन की राजनीतिक विवशताएं भी होती हैं और सहयोगियों को साथ देना होता है। साथी दलों को ज़रूरत के हिसाब से सीटें दी गईं। आप जैसा कह रहे वैसा कुछ भी नहीं है। तीनों दलों का सुदृढ़ राजनीतिक आधार है। इसका भरपूर लाभ मिल रहा है और हम सभी बिहार की सारी सीटें जीतने की स्थिति में हैं।

प्रश्नः नीतीश कुमार की दोस्ती को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं। भाजपा का साथ छोड़ने में देर नहीं करने को लेकर नीतीश कुमार कितने भरोसेमंद साबित होंगे?

उत्तरः नीतीश जी एक सफल और अच्छी सूझबूझ वाले नेता हैं। अराजकता और कुशासन के खिलाफ सफल लड़ाई लड़ने के लिए जाने जाते हैं। जनता के बीच सब तरह से भरोसेमंद साबित हुए हैं। बिहार में आगे भी हमारा साथ इसी तरह चलते रहेगा। दोनों सहयोगी दलों को मिलाकर अच्छे परिणाम आ रहे हैं। इस समय जो परिस्थितियां हैं इसमें हम सभी मिलकर यहां चालीस सीटें जीतने जा रहे हैं।

प्रश्नः गठबंधन के कारण भाजपा पीछे तो नहीं जा रही? कई तरह की बातें कही जा रहीं कि भाजपा अकेले चुनाव लड़ती तो बेहतर परिणाम लेकर आती?

उत्तरः बिहार में हमें गठबंधन की आवश्यकता है। आने वाले समय में भी हम गठबंधन के साथ ही चुनाव लड़ेंगे। गठबंधन के धर्म आगे भी निभाते रहेंगे।

प्रश्नः बिहार में कास्ट लाइन पर वोटिंग का पैटर्न आखिर नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से भी क्यों नहीं टूट पा रहा?

उत्तरः समाज के सभी वर्गों का ख्याल रखना पड़ता है। आगे बढ़ने के लिए सभी सामाजिक समीकरणों और सरोकारों को साधना होता है। एक लंबे समय से चली आ रही परिस्थितियों में सामाजिक परिवेश भी संदर्भ रखता है। महिलाओं और युवाओं की तरह पुरुषों में भी नरेंद्र मोदी जी के प्रति उत्साह का भाव सभी जगह है।

प्रश्नः नरेंद्र मोदी सरकार ने लोगों से किए कई वादे पूरे नहीं किए। फिर कैसे लोग भरोसा कर रहे हैं?

उत्तरः नरेंद्र मोदी जी ने कहा कि यह पांच वर्षों का कार्यकाल परिश्रम कार्यकाल रहा है। आगे का कार्यकाल परिणामों का कार्यकाल होगा। भाजपा ने संकल्प पत्र में 75 वादे किए हैं। वो सभी पूरे होंगे।ये सभी बहुत महत्वपूर्ण हैं।

प्रश्नः राजस्थान में कितनी सीटें जीत रही भाजपा?
उत्तरः पार्टी की जिम्मेदारी के कारण अलग—अलग प्रदेशों में काम करता हूं। मोदी जी के लिए सभी एकमत हैं। राजस्थान में अच्छी संख्या में सीटें लेकर आएंगे। इस बार भाजपा को पश्चिम बंगाल उड़ीसा और दक्षिणी राज्यों में भी शानदार सफलता मिल रही है।


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बिहार में एनडीए की जीत के लिए भाजपा लगाएगी अधिक जोर, स्टार प्रचारकों के साथ ही अमित शाह भी प्रचार में बहाएंगे पसीना


(पटना): लोकसभा चुनावों में बिहार के अंदर कांटे की टक्कर चल रही है। केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा मोदी मुद्दे पर हो रहे चुनाव में एनडीए गठबंधन के सहयोगी दलों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। चार चरणों में अभी तक भाजपा कोटे की महज़ पांच सीटों पर ही चुनाव हुए हैं। शेष बारह पर चुनाव होने बाकी हैं। ऐसे में सहयोगी दलों की सीटें तीखे मुकाबले में फंसी रहने के चलते पार्टी आने वाले शेष तीन चरणों में और अधिक जोर लगाएगी। कई स्टार प्रचारक और उतारे जाएंगे। इस बीच भाजपाध्यक्ष अमित शाह कई दिनों तक कैंप कर खूब चुनावी सभाएं और रोड शो करने वाले हैं।


एनडीए ने सीट शेयरिंग में छह सीटें लोजपा को देकर जदयू के साथ सत्रह-सत्रह का गठबंधन बनाया हुआ है। इनमें जिन 19 सीटों पर अब तक मतदान हुए उनमें भाजपा की मात्र पांच सीटें ही हैं। भाजपा इनमें बेहतर प्रदर्शन करने से उत्साहित तो है पर सहयोगी दलों खासकर लोजपा के प्रदर्शन से परेशान है। लोजपा के जमुई, नवादा,खगड़िया और समस्तीपुर में प्रदर्शन से भाजपा में चिंताएं बढ़ी हैं। वैशाली और हाजीपुर जैसी दो सीटों पर रामविलास पासवान की पार्टी के प्रत्याशियों के प्रति क्षेत्रीय मतदाताओं में आकर्षण की कमी से भाजपा की चिंताएं और बढ़ती जा रही हैं।


दूसरी ओर जदयू नेता नीतीश कुमार को लेकर गठबंधन का परिवेश भाजपा को सिहरा देने वाला है। 17-17 सीटों पर जदयू के साथ गठबंधन में भाजपा ने उदारता दिखाते हुए गया, गोपालगंज, बांका, भागलपुर, सीवान और कटिहार,पूर्णियां सरीखी सीटें जदयू की जिद पूरी करते हुए उसे सौंप तो दीं लेकिन इनमें से अधिकांश पर वह मुश्किलों में घिरी हुई है। नीतीश कुमार मन से या बेमन से जैसे भी भाजपा के साथ हों पर उनके रुख भी भाजपाइयों को बहुत उत्साहवर्धित नहीं कर पा रहा। भाजपा समर्थक खुलकर बोलने भी लगे हैं कि पार्टी यदि अकेले मैदान में उतरती तो बेहतर प्रदर्शन कर सकती थी। ताज़ा उदाहरण दरभंगा का है जहां एनडीए की सभा में प्रधानमंत्री मंच से भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारे लगवाते रहे और नीतीश कुमार बैठे रहे। लोगों के खड़े हो जाने के सबसे बाद वह खड़े होकर मजबूरी में हाथ उठाते नज़र आए।भाजपा के एक समर्थक के ट्वीट पर इसे लेकर अभी खूब चर्चाएं हो रही हैं। चार चरणों में जदयू ने भाजपा की अपनी कई परंपरागत सीटें लेकर प्रत्याशी उतारे पर वह महागठबंधन के तीखे मुकाबले में घिरी हुई है। ये सीटें हैं कटिहार,पूर्णियां, भागलपुर, बांका और किशनगंज।


इन सब के बीच भाजपा की चिंताएं बढ़ी हैं। आने वाले चरणों में लिहाज़ा भाजपा और दम दिखाने जा रही है। कई स्टार प्रचारकों को उतारा जा रहा है। भाजपाध्यक्ष अमित शाह खुद कई दिनों तक बिहार में कैंप कर सघन प्रचार अभियान चलाएंगे। वह छह मई को पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र के दानापुर में जनसभा करेंगे। रात में वह भाजपा नेताओं के साथ समीक्षा बैठक करेंगे। पांचवे चरण का मतदान संफन्न हो जाने के बाद वह एनडीए नेताओं के साथ विमर्श करेंगे। सात मई को शिह भाजपा कोटे की मोतिहारी, बेतिया और सीवान में चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे। इसके चार दिनों बाद पटना वापस आकर वह 11 मई को पटना में पहला रोड शो करेंगे।इसरोड शो का पाटलिपुत्र और पटना साहिब क्षेत्रों में व्यापक असर हो सकता है।दोनों सीटों पर पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद चुनाव लड़ रहे हैं।


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VIDEO: गधे पर बैठकर परचा भरने पहुंचे नेताजी, ऐसा करने के पीछे की वजह जानकर रह जाएंगे दंग


(जहानाबाद,पटना): चुनावी मौसम में जनता का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए नेता जी अलग—अलग तरीके अपना रहे है। जहानाबाद में भी एक नेताजी ने अपने नामांकन भरने के अलग अंदाज से जमकर सुर्खियां बटोरी। जिसने भी इनको देखा तो देखकर दंग रह गया। हम बात कर रहे जहानाबाद सीट पर परचा दाखिल करने वाले मणीभूषण शर्मा की जो गधे पर सवार होकर नामांकन भरने पहुंचे। खास बात यह है कि शर्मा गधे की सवारी करते समय बड़े खुश नजर आए और उनके समर्थक भी उनके पक्ष में नारे लगाते दिखाई दिए। उनका यह वीडियो जमकर वायरल हो रहा है।

 

यह भी देखे: 'मैं 'गधा' हूं, मूर्ख हूं' की तख्ती गले में डाल, नेताजी पहुंचे नामांकन भरने, देखें वीडियो

यह बताई वजह

मिली जानकारी के अनुसार मणीभूषण शर्मा ने सोमवार को परचा भरा। 44 वर्षीय मणीभूषण शर्मा जहानाबाद जिले के रघुनाथपुर गांव के रहने वाले है। निर्दलीय नामांकन दाखिल करने के बाद मणीभूषण शर्मा से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने मीडिया को बताया कि 'जनता को जागरूक करने के लिए उन्होंने यह तरीका अपनाया है। उनका कहना है कि राजनेता जनता को 'बेवकूफ' समझते है और काम करने के बजाए जनता को 'गधा' बनाते है। इसलिए जागरूकता फैलाने के लिए उन्होंने यह तरीका अपनाया है।'

 

बता दें कि जहानाबाद लोकसभा सीट पर लोकसभा चुनाव के अंतिम और सातवें चरण के तहत 19 मई को मतदान होगा। निर्वाचन आयोग से मिली जानकारी के अनुसार जहानाबाद सीट से अब तक 53 लोगों ने नामांकन दाखिल किया हैं। कितने लोग मैदान में रहेंगे यह थोड़े दिनों में साफ हो जाएगा। एनडीए की ओर से जेडीयू के चंद्रेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं महागठबंधन के प्रत्याशी के तौर पर आरजेडी के सुरेंद्र प्रसाद यादव मैदान में है। 2014 के चुनाव में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी—सेक्युलर के अरूण कुमार यहां से जीतकर संसद पहुंचे थे। खास बात यह है कि अरूण कुमार इस बार फिर चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे है।


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पटना साहिब और पाटलीपुत्र से स्पेशल रिपोर्ट...शत्रु का शत्रु हुआ पटना तो पाटलीपुत्र में पुराने प्रतिद्वंदियों में फिर सीधी टक्कर


(पटना,राजेश शर्मा): पटना स्टेशन पर उतरते ही बदले हुए माहौल का अहसास हो जाता है। हरेक रास्ते पर इतने ओवरब्रिज और पुल हो गए हैं कि अब पटना पुलों का शहर लगने लगा है। बड़े बड़े मॉल दिखाई देने लगे हैं। कई सारे नए होटल भी बन गए हैं। बाजारों में रौनक है। स्वच्छता अभियान का असर दिख रहा है। पटना की दीवारों को मधुबनी शैली की पेंटिंग से रंगा गया है। हालांकि सार्वजनिक वाहन व्यवस्था और यातायात के हालात लचर है। तेज हार्न के कारण स्टेशन के आसपास तो कुछ सुनाई देना भी मुश्किल हो जाता है। पूरे पटना जिले में एक ही मुद्दा सबसे बड़ा है और वह साफ पेयजल। चारों तरफ लोग यही शिकायत करते नजर आते हैं कि सांसद और सरकार दोनों ने ही साफ पानी को लेकर गंभीर नहीं है। नलों से सीवर के साथ मिलकर गंदला पानी आ रहा है। घूमते हुए मेरी मुलाकात अखबार के एक हाकर से हो जाती है नाम है अशोक कुमार सिन्हा। वो ठेठ बिहारी अंदाज में कहता है कि पटना साहिब में एक फिल्म स्टार है और दूसरा राजनीति का स्टार। फिल्मी स्टार को दो बार देख लिया लेकिन वो अपने सांसद फण्ड का भी उपयोग नहीं किया। पांच साल में वोट लेने आ जाता है लेकिन लोगों से मिलता नहीं है। शत्रुघ्न सिन्हा नेगेटिव राजनीति किए हैं और अब बिहार नेगेटिव राजनीति के पक्ष में नहीं है।


पटना स्टेशन के सामने हनुमानजी के मन्दिर के सामने जब ये चर्चा चल रही थी तो मन्दिर दर्शन करके लौट रहे आनंद कुमार झा भी शामिल हो जाते हैं। झा कहते हैं कि लालू की राजनीति का दौर अब समाप्त होने को है। कांग्रेस बिहार में ज्यादा मजबूत नहीं है और दो चार छोटे दल है लेकिन वो अपनी जाति तक ही सीमित है। नीतीश कुमार ने राजद से गठबंधन तोडक़र मोदी का साथ लिया तो बिहार की जनता को विकास मिला है। पटना ही नहीं पूरे बिहार में आपको मोदी के पक्ष और विपक्ष की ही बात सुनने को मिलेगी, इसके अलावा कुछ नहीं है।


चलते—चलते एक कोचिंग सेन्टर के पास खड़े लड़कियों के झुण्ड से पूछता हूं कि किसका माहौल है तो एक साथ कहती है मोदीजी ही हैं। ऐसा क्यों, जब ये पूछता हूं तो कहती है कि पहले अंधेरा होने से पहले घर पहुंचना होता था लेकिन अब ऐसा नहीं है। महिला सुरक्षा के प्रयास हुए हैं और मोदी ने देश की सुरक्षा का बड़ा काम किया है। गंगा किनारे जाकर देखता हूं तो गंगाजी की धारा कुछ बदली बदली सी दिखाई दी। पूछता हूं तो पता लगता है कि मरिन ड्राइव की तरह इस तट को विकसित किया जा रहा है। गुरू गोविन्दसिंहजी की जन्मस्थली पटना साहिब पहुंचता हू। पटना साहिब के दर्शन के बाद बाहर आकर पंजाब के आए एक सिक्ख परिवार से बात होती है। परिवार इस बात से अभिभूत था कि गुरूजी के जन्मस्थान पर 300 वें वर्ष के उपलक्ष में तीन सौ कमरों की सर्वसुविधा सम्पन्न एक सराय बनाई गई है और इसमें केन्द्र व राज्य की सरकार का योगदान है। पटना साहिब के पास ही नीतिन कुमार ने बताया कि मोदी से यहां किसी की कोई नाराजगी नहीं है। शत्रुघ्न सिन्हा के नकारात्मक होने के बाद भी पटनासाहिब में विकास हुआ है। सुरक्षा, सर्जिकल स्ट्राइक का लाभ भी मिलेगा लेकिन शराब बंदी के नकारात्मक प्रभावों के कारण वोट कटेगा।

 

राजनीति की दृष्टि से देखें तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं की अजीब सी स्थिति हो गई है। मैं ऐसी ही एक बैठक में पहुंचा तो एक कांग्रेस कार्यकर्ता रविनंदन झा ने कहा कि अभी तो यह ही स्पष्ट नहीं है, शत्रुघ्न सिन्हा चुनाव भी लड़ पाएंगे या नहीं। लखनऊ से सपा की प्रत्याशी अपनी धर्मपतनी के प्रचार के लिए चले गए। अब ऐसी स्थिति में असमंजस ही है। यह भी चर्चा है कि दिल्ली में आप के उम्मीदवार बनने के लिए भी सिन्हा प्रयास कर रहे हैं। इस कारण पटना साहिब में कांग्रेस का प्रचार विधिवत आरंभ नहीं हो पाया। कांग्रेस के कार्यकर्ता सिन्हा की उम्मीदवारी का विरोध भी कर रहे हैं। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि सिन्हा को लालू के परिवार का भी यहां पर सहयोग मिलेगा। यादव और मुसलमान और सरकार से नाराज मतदाताओं का वोट मिलेगा।


कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने नामांकन भरने से पहले ही अपने चुनाव कार्यालय खोलकर प्रचार शुरू कर दिया है। पहले उनकी उम्मीदवारी को लेकर आर के सिन्हा के समर्थक माहौल बना रहे थे। लेकिन अब माहौल शांत है। नाराज लोगों को मना लिया गया है। राज्यसभा से जाने के बावजूद उनका लोगों से सीधा सम्पर्क है। स्वभाव से कडक़ होने पर भी लोगों की मदद का भाव उन्हें विरोधियों से आगे कर दे रहा है। रविशंकर प्रसाद जनसम्पर्क और छोटी सभाओं तथा बैठकों में एक काम और कर रहे हैं। माला पहनने की बजाय प्रभावशाली और वृद्धों को अपने हाथ से माला पहनाते हैं। युवाओं से बात करते हैं। रविशंकर एक बात युवाओं से कहते हैं कि मोदीजी के अधूरे काम पूरे करने और बिहार को विकास के रास्ते पर ले जाना है। वो ये भी वादा करते हैं कि युवाओं को ज्यादा से ज्यादा रोजगार मिले, इसके भरपूर प्रयास होंगे।


पटनासाहिब के पूरे इलाके में घूमने पर एक बात स्पष्ट हो जाती है कि मतदाताओं की नाराजगी दूर करने के लिए शत्रुघ्न सिन्हा को ऐडी चोटी का जोर लगाना होगा क्योंकि अपने पराए सभी उनसे शत्रुओं जैसा व्यवहार कर रहे हैं जबकि रविशंकर प्रसाद को संसद पहुंचने की राह आसान लग रही है।

 

पाटलीपुत्र

 

ram kripal yadav

पटना की दूसरी लोकसभा सीट है पाटलीपुत्र। यहां पर राजद की मीसा और भाजपा के रामकृपाल यादव की सीधी टक्कर है। पूरे इलाके में सबसे बड़ा मुद्दा पानी ही है। पटना में साफ पानी की आपूर्ति नहीं होने के कारण लोगों में नाराजगी है। साथ ही शराबबंदी के कारण गरीबों के पकड़े जाने का मुद्दा है। सब्जी बेचने वाली रामजानकी देवी कहती है कि पुलिस ने अवैध शराब बेचने का झूंठा मुकदमा बना दिया। बहुत पैसा खर्चा हो गया फिर भी पुलिस से पीछा नहीं छूटा। आए दिन पुलिस अवैध शराब की तलाशी लेने आ जाती है। विकास की दृष्टि से देखा जाए तो अच्छी सडकें, फ्लाईओवर, गंगा पर पुलों की लम्बी कतारें हैं। रेल से यात्रा करने का आदी बिहारवासी अब बसों में भी यात्रा फोरलेन हाइवे और फ्लाईओवर के कारण ही कर पा रहे है। इसी के कारण उद्योग भी खुल रहे हैं। व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ी है।


दानापुर रोड़ पर चाय की स्टाल पर बात करते हैं तो चाय वाला रंजन कुमार कहता है कि विकास खूब हुआ है। रोजगार मिला है। खाते में योजनाओं के पैसे भी आ रहे हैं। सबसे बड़ी बात ये हैं कि मोदीजी के हाथों में देश सुरक्षित लग रहा है। इस बीच एक अधेड़ वय का आदमी सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर कहता है कि सुने ही है कितना मरा, सरकार ने बताया नहीं। मारा है कि नहीं मारा है ये भी नहीं पता। उसके ये कहते ही एकसाथ कई लोग एकसाथ जोर जोर से बोलने लगते है, एई बुडबक, का बात करता है। फिर लोग कहते है कि राजद का वोटर है ऐसे इ न बोलेगा लेकिन आप तय मानिये कि यहां कोई भाजपा या एनडीए के प्रत्याशी का नाम भी कोई नहीं पूछेगा। सब लोग मोदीजी को एक बार फिर प्रधानमंत्री की कुरसी पर बैठाना चाहता है। सारे बिहार में यही हवा है। मैं आगे बढ़ जाता हूं। जब मैं लोगों में प्रत्याशियों के बारे में सवाल करता हूं तो कहते हैं कि रामकृपाल यादव बढिय़ा आदमी है। बहुत काम किये हैं। क्षेत्र में लोगों से सम्पर्क में रहते हैं। काम करने वाले सांसद की छवि है। रामकृपाल यादव ने दलबल के साथ नामांकन भरा है। यादव के समर्थक कहते हैं कि रामकृपाल को छत्तीसों कौम का वोट मिलेगा। मोदी के नाम पर अबकि बार जीतने का रेकार्ड बनाएंगे।


वहीं दूसरी और राजद कार्यकर्ता रामकृपाल यादव का नाम लेते ही भडक़ते हैं। कोई उसे गद्दार कहता है कि तो कोई कुछ ओर। लालू यादव की सबसे बड़ी बेटी मीसा यहां से राजद की प्रत्याशी है। पिछली बार भी रामकृपाल यादव के हाथों हार गई थी। लालू यादव का परिवार रामकृपाल की बात सामने आते ही उसे गलियाने लगता है। यही बात रामकृपाल के पक्ष में चली जाती है क्योंकि वो जवाब देने की बजाय चुप रहते हैं।


राजद में लालू परिवार में अभी वर्चस्व का संघर्ष छिड़ा हुआ है। मीसा और तेजस्वी के बीच मनमुटाव की भी खबरें आ रही है। मीसा के साथ राबड़ी और तेजप्रताप है। नामांकन के दौरान भी ये तीनों मीसा के साथ आए थे लेकिन तेजस्वी नदारद थे। कहा ये गया कि तेजस्वी राजद के दूसरे प्रत्याशियों के प्रचार में व्यस्त होने के कारण नहीं आए हैं। तेजप्रताप ने तेजस्वी के समर्थक प्रत्याशियों के खिलाफ लालू राबडी विचार मंच के नाम से अपने समर्थकों से नामांकन भरवा दिए और प्रचार भी कर रहे हैं। क्षेत्र के लोगों को कहना है कि वैसे भी लालू का दौर अब समाप्त हो गया है। परिवार में छिड़ा यादवी संघर्ष राजद को पूर्ण विराम की और ले जाएगा।


पाटलीपुत्र सीट पर मीसा और रामकृपाल दोनों का ही कड़ा मुकाबला है। मीसा ने यादव वोटों को टूटने नहीं दिया और मुस्लिम वोट पूरी तरह मिल जाते हैं तो रामकृपाल यादव को पसीने छूट सकते हैं वहीं मोदी वोटों की लहर रामकृपाल यादव को चुनावी वैतरणी पार करा सकती है।


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चौथे चरण के लोकसभा चुनाव में छह दलों के इन दिग्गज नेताओं की किस्मत दांव पर


(पटना): लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में बिहार की पांच लोकसभा सीटों पर राजनीतिक दलों के दिग्गजों की किस्मत दांव पर लगी है। पहले, दूसरे और तीसरे दौर की कुल चौदह लोकसभा सीटों से अलग अगले चरण के चुनाव की विशेष अहमीयत इसलिए है कि इस दौर में कई दलों के दिग्गज नेताओं के भाग्य की आजमाइश होनी है।


भाजपा, जदयू, आरजेडी, रालोसपा, कांग्रेस, सीपीआई और लोजपा के लिए इस दौर का चुनाव बेहद खास है। इस चरण में कुल 66 प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय, रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, जदयू के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्य के मौजूदा जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, भाजपा के बड़े हिंदूवादी चेहरा और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, कांग्रेस के दलित चेहरा अशोक राम और सीपीआई के युवा नेता कन्हैया कुमार के चुनाव मैदान में होने से दूर तक सबकी निगाहें टिकी हैं। आरजेडी के शीर्ष नेताओं में अहम अब्दुल बारी सिद्दीकी और रामविलास पासवान के भाई रामचंद्र पासवान को लेकर भी जनता को इसी दौर में फैसला करना है।


इस दौर में दरभंगा, उजियारपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय और मुंगेर लोकसभा क्षेत्रों में 29 अप्रैल को मतदान होगा। मोदी मुद्दे पर हो रहे चुनाव में उम्मीदवार जी जान से अपनी जीत सुनिश्चित करने में लगे हुए हैं। दरभंगा में पार्टी की अंदरूनी जंग के बीच ही आरजेडी ने अपने स्टार प्रचारक अब्दुल बारी सिद्दीकी को उम्मीदवार बनाया। कांग्रेस में शामिल हुए कीर्ति आजाद के लिए सीट छोड़ने पर आरजेडी कतई तैयार नहीं हुई। इनके खिलाफ पूर्व सांसद और मंत्री एम एम फातमी ने बगावत कर बसपा के चुनाव चिन्ह पर उम्मीदवारी ठोंक दी। हालांकि बाद में अन्य संगठनों के समझाने पर उन्होंने नाम वापस भी ले लिए। पर आरजेडी का दामन सिरे से छोड़ दिया। पिछले चुनाव में सिद्दीकी मधुबनी में हुकुमदेव नारायण यादव के मुकाबले दूसरे नंबर पर रहे थे। मुस्लिम, यादव, मैथिली ब्राह्मण और मल्लाह जातियों की बहुलता वाले इस क्षेत्र में भाजपा ने अपने एक सधे कार्यकर्ता गोपालजी ठाकुर को पहली बार मैदान में उतारा है। इनके पक्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी रैली करने पहुंच रहे हैं। मुकाबला कितना रोचक है, इसका आकलन इसी बात से किया जा सकता है कि स्टार प्रचारक होने के बावजूद अब्दुल बारी सिद्दीकी क्षेत्र छोड़ बाहर नहीं निकल पा रहे।


उजियारपुर में भाजपा के निवर्तमान सांसद और प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय से रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की सीधी टक्कर है। कुशवाहा पहले एनडीए में थे पर इस बार महागठबंधन का हिस्सा बनकर भाजपा से लोहा ले रहे हैं। अब जदयू का साथ भी भाजपा को मिल रहा है। कुशवाहा के एनडीए से बाहर आने के मुद्दे पर उनकी कुशवाहा जाति के लोग ही सिरे से खफा हैं जिसका परिणाम उन्हें चुनाव में झेलना पड़ेगा। इस सीट पर सीपीएम के अजय राय भी चुनाव मैदान में ताल ठोंक रहे हैं।


समस्तीपुर में दोनों ही उम्मीदवार वे ही हैं जो पिछले लोकसभा चुनाव में आमने सामने थे। पिछले 2014 के चुनाव में महज़ 6872 वोट के अंतर से हारे कांग्रेस के अशोक राम इस दफा लोजपा उम्मीदवार और रामविलास पासवान के भाई रामचंद्र पासवान से हार का बदला लेने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहते। एनडीए भी पासवान की जीत के लिए शिद्दत से लगा हुआ है।


बेगूसराय की चुनावी जंग भी राष्ट्रीय महत्व की हो गई है। सीपीआई के युवा लीडर कन्हैया कुमार के चुनाव मैदान में पहली बार उतर आने से राष्ट्रीय स्तर की फिल्मी हस्तियां और सेक्यूलर-वामपंथी नेता प्रचार में आने लगे हैं। आरजेडी ने छात्र आंदोलन के नेता तनवीर हसन को उम्मीदवार बनाया है। जबकि भाजपा के फायरब्रांड नेता गिरिराज सिंह प्रधानमंत्री मोदी और विकास के नाम पर ताल ठोंक रहे हैं। लड़ाई रोचक और आरपार की ठनी है। इसमें हारजीत का फैसला अंततः गिरिराज और तनवीर हसन के बीच ही सिमट जाने वाला दिखता है।


मुंगेर में बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी और एनडीए उम्मीदवार ललन सिंह के बीच निर्णायक लड़ाई है। ललन सिंह बिहार सरकार के मौजूदा जल संसाधन मंत्री और नीतीश कुमार के बेहद ही भरोसे के नेता हैं। इनके लिए प्रचार में एनडीए ने पूरी ताकत झोंक दी है। इधर अनंत सिंह अपनी ओर से पूरा जोर लगाए हुए हैं। चौथे चरण के मतदान के साथ ही सभी दिग्गजों का भविष्य ईवीएम में कैद हो जाएगा। प्रचार का शोर थमने तक सभी पूरी जोर आजमाइश में जुटे हुए हैं।


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बिहार की तीन सभाओं में राहुल गांधी और महागठबंधन पर बरसे अमित शाह,बोले-राहुल बाबा आप क्या कोई भी गांधी नहीं हटा सकेगा AFSPA


(पटना,प्रियरंजन भारती): भाजपाध्यक्ष अमित शाह ने आज बिहार में तीन चुनावी सभाओं को संबोधित किया। उजियारपुर, मुंगेर और बेगूसराय में हुई सभाओं में शाह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सेमत महागठबंधन पर हमलावर दिखाई दिए। शाह ने कहा कि राहुल बाबा, आपसे जीते जी afspa देश से कभी नहीं हटने वाला। आप क्या आपके बाद भी कोई गांधी इसे नहीं हटा पाएगा। आपको जीवन में लालू यादव का साथ लेकर आतंकवादियों से इलू इलू करना है तो शौक से करते रहिए।


उजियारपुर की चुनावी सभा में अमित शाह ने शाह ने पुलवामा हमले के बाद सेना को फ्री हैंड देने के फैसले और एयरस्ट्राइक जैसे मुद्यों को भुनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यह नरेंद्र मोदी की सरकार है। पाकिस्तानी आतंकवादियों ने बम गिराया तो हम उसका बदला लेंगे। सरकार ने देश को सुरक्षित करने का काम किया है। एक समय पाकिस्तानी आतंकी देश के सैनिकों का सिर काटकर ले जाते थे और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह चुप रह जाते थे। उन्होंने कहा कि भी अब पुलवामा में भारतीत्व सैनिकों को पाकिस्तानी आतंकवादियों ने मारा तो सरकार ने सैनिकों को बदले की कार्रवाई की पूरी छूट दे दी। पुलवामा हमले के बाद दिखा दिया कि हमें दुश्मनों को जवाब देना अच्छी तरह आता है। प्रधानमंत्री ने ठान लिया कि आतंकवादियों को उन्हीं की भाषा में जवाब देंगे तो तो सेना ने आतंकियों के छक्के छुड़ा दिये। अब भारत जवानों के खून का बदला लेने इजरायल और अमरीका की सूची में शामिल हो गया है। उन्होंने कहा कि जिस दिन सर्जिकल स्ट्राइक हुआ उस दिन सभी सरपरस्तों के चेहरों की हवाइयां उड़ने लग गई।महामिलावटी लोगों में खलबली मच गई। राहुल बाबा समेत सभी एयरस्ट्राइक के सबूत मांगने लग गये। कहने लगे,पाकिस्तान से बातचीत होनी चाहिए। उन्होंने जनता से पूछा, हम आतंकवादियों से बात करें कि उन्हें उनके घरों में घुसकर मारें? सभी ने एक स्वर में आतंकियों को मार गिराने का समर्थन किया।

 

महागठबंधन में पीएम को लेकर कसा तंज

अमित शाह ने कहा,यह न्यू इंडिया है। भारत आतंकियों को उन्हीं की भाषा में जवाब देना जानता है। उन्होंने कहा कि महागठबंधन चुनाव लड़ने चला है। एक कार्यकर्ता के मैसेज की चर्चा करते हुए भाजपाध्यक्ष ने कहा, सोमवार को मायावती बनेंगी प्रधानमंत्री, मंगलवार को अखिलेश यादव, बुद्धवार को लालू यादव, गुरुवार को देवगौड़ा, शुक्रवार को चंद्रबाबू और शनिवार को छुट्टी।ऐसी सरकार देश का भला करेगी क्या?सभी ने एकसाथ कहा,कभी नहीं।

 

कांग्रेस के साथ लालू—राबड़ी निशाने पर

मुंगेर की सभा में शाह ने युवाओं को जिगर का टुकड़ा बताया। कहा कि देश में पूरब-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण सभी तरफ मोदी ही मोदी सुनाई दे रहा है। चार माह में यह मेरी 255 वीं सभा है।55 साल कांग्रेस ने देश में राज किया। 15 साल बिहार में लालू-राबड़ी का जंगल राज रहा। आज भी लोग जंगलराज को याद कर सिहर उठते हैं। उन्होंने देश में मोदी सरकार के विकास कार्यों की चर्चा करते हुए कहा कि सात करोड़ गरीब महिलाओं को गैस कनेक्शन दिए गये। हर घर में बिजली आ गई। बीमारी के लिए पांचलाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा मिल गई। उन्होंने कहा कि बिहार में अभी विकास कार्यों की बहार है।राज्य सरकार ने सवा सौ करोड़ के पैकेज मांगे थे। आज एक लाख दस हजार करोड़ के काम शुरु हो चुके हैं। राहुल बाबा बताएं कि कांग्रेस की सरकारों ने 55 सालों में बिहार के लिए क्या किया? पांच सालों में बिहार को एक लाख 33ह जार करोड़ की जगह 6 लाख 6 हजार करोड़ दिए गये। उन्होंने कहा आने वाले पांच सालों में बिहार विकसित राज्यों की श्रृंखला में शामिल हो जाएगा। भाजपाध्यक्ष उजियारपुर, मुंगेर और बेगूसराय में सभाओं को संबोधित करने के बाद पटना से बनारस के लिए प्रस्थान कर गये।


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इलेक्शन 2019 स्पेशल...तीसरे चरण में राजनीतिक दलों के बीच बाजी झटकने की होड़


(पटना): तीसरे चरण में उत्तर बिहार की जिन पांच लोकसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, उनमें से अधिकांश पर सीधा मुकाबला है। बस शरद यादव की सीट मधेपुरा और पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन की सीट सुपौल में महागठबंधन की अंदरूनी लडा़ई चुनावी मुकाबले को बहुकोणीय और दिलचस्प बना रही है।

 

मधेपुरा

इस सीट से शरद यादव महागठबंधन के बड़े दल आरजेडी उम्मीदवार के नाते चुनाव के मुख्य आकर्षण हैं। इनका मुकाबला जदयू के दिनेश चंद्र यादव और जन अधिकार पार्टी के राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव से है। पप्पू यादव आरजेडी के यहां से निवर्तमान सांसद हैं और वह कांग्रेस या आरजेडी उम्मीदवार के बतौर चाहकर भी मैदान में नहीं उतर पाए। लालू यादव के नहीं चाहने से ही पप्पू पैदल हुए। हालांकि वह घर-घर जाकर वोट देने की कारगर अपील कर रहे और इसका असर भी हुआ। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शरद यादव से बाजी झटकने के मिशन को साधने के लिए दस दिनों से मधेपुरा में ही कैंप करते आ रहे हैं। उन्होंने यहां रहकर ही चुनाव अभियान चलाया और जदयू प्रत्याशी दिनेश चंद्र यादव समेत आसपास के क्षेत्रों में एनडीए प्रत्याशियों की जीत के लिए सशक्त अभियान चलाया। पप्पू यादव से लालू परिवार की खुन्नस उन्हें महागठबंधन उम्मीदवार बनने से रोक गई और अब वह हर हाल में शरद की लुटिया डुबोने पर तुले हैं।

 

सुपौल

मधेपुरा की जंग का असर सुपौल पर भी सीधा पड़ रहा है। यहां की निवर्तमान कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन फिर महागठबंधन उम्मीदवार बनकर मैदान में हैं। राहुल गांधी पक्ष में चुनावी रैली भी कर गए। पर महागठबंधन की किचकिच यहां रंजीत रंजन के गले का फांस बनी हुई है। लालू यादव और पप्पू यादव की लडा़ई का असर यहां मैदान में साफ दिख रहा है। यानी शरद-पप्पू की लड़ाई का रिटर्न गिफ्ट रंजीत रंजन को झेलना पड़ रहा है। आरजेडी के जिला महासचिव और पूर्व विधायक दिनेश प्रसाद यादव निर्दलीय मैदान में उतरकर कांग्रेस की हालत बिगाड़ने के खेल में जुटे हैं। इन्हें आरजेडी नेतृत्व का भरपूर समर्थन प्राप्त है। आरजेडी के जिलाध्यक्ष और विधायक यदुवंश यादव ने भी कांग्रेस के खिलाफ पूरी ताकत झोंक दी है। ऐसे में जदयू उम्मीदवार दिलेश्वर कामत को प्रत्यक्ष लाभ मिलता दिख रहा है। यानी महागठबंधन की आपसी खींचतान में दोनों ही सीटों मधेपुरा और सुपौल में एनडीए को बढ़त मिलने के स्पष्ट हालात बन गए दिखते हैं।

 

झंझारपुर

झंझारपुर बाढ़ से प्रभावित रहने वाला मिथिलांचल का अहम इलाका है। यहां इस बार भाजपा के वीरेंद्र चौधरी की बजाय जदयू के रामप्रीत मंडल मैदान में हैं और मुकाबले में आरजेडी के विधायक रहे गुलाब यादव महागठबंधन उम्मीदवार हैं। लड़ाई इन्हीं दो पाटों के बीच है। कुशवाहा, मैथिली ब्राम्हण और यादव बहुल इस क्षेत्र में कुशवाहा समाज के मतदाता उपेंद्र कुशवाहा के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बनाने की बात करते मिले। शंभुआड़ बाजार में और कन्हौली में राष्ट्रवाद की बातें करते हुए युवा वोटर यही कहते मिले कि दिल्ली की गद्दी पर जो बैठे हैं, उन्हें फिर से वहीं बैठा देना है। मतदाता बता रहे कि प्रत्याशी बेशक मजबूत न हो, पर उन्हें देश की रक्षा और सम्मान के लिए वोट करना है। जगन्नाथ मिश्र के क्षेत्र झंझारपुर में इस बार और कोई दूसरा मुद्दा है ही नहीं। लोग केवल देश के नाम पर वोट करने का जज्बा ज़ाहिर करते देखे गए। ऐसे में तय है कि लडा़ई आरपार की ठनी है और यहां भी कि फैसला राष्ट्रीयता के नाम पर ही होना है।

 

अररिया

इस सीट पर भाजपा का उम्मीदवार है और मुकाबले में महागठबंधन की ओर से आरजेडी उम्मीदवार है। अररिया से सांसद रहे तसलीमुद्दीन के निधन के बाद यहां हुए उपचुनाव में उनके पुत्र सरफराज अहमद दोबारा चुनकर आए। आरजेडी ने उन्हें फिर से मैदान में उतारा है। अररिया में हिंदू मुस्लिम ध्रुवीकरण बड़ी ही आक्रामक तरीके से हुआ करता है। बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे की गर्माहट और और राष्ट्रवाद की धमक यहां गोलबंदी को आक्रामक बनाती है। ऐसे में आरपार की लड़ाई भाजपा के प्रदीप सिंह और आरजेडी के सरफराज के बीच ही ठनी है।

 

खगड़िया

खगड़िया में एनडीए का मुस्लिम उम्मीदवार महागठबंधन के आगे ताल ठोंक रहा। लोग दंग हैं कि जिस जमात के लोग कभी निर्णायक होते रहे उनकी भाषा भी बदली है। मुख्य संघर्ष यहां लोकजन शक्ति पार्टी के निवर्तमान सांसद और एनडीए उम्मीदवार चौधरी महमूद अली कैसर और महागठबंधन के उम्मीदवार विकासशील इंसान पार्टी के अध्यक्ष मुकेश साहनी के बीच है। साहनी पहली बार यहां से चुनाव में उतरे हैं। एनडीए उम्मीदवार कैसर आक्रामक तरीके से मुस्लिम मतदाताओं में अपनी पैठ बनाते नज़र आ रहे हैं। जातियों से ऊपर उठकर यहां भी देश बचाने का मुद्दा चुनाव को अलग रंग में रंग गया है।


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नरेंद्र मोदी परिवार के सभी सदस्यों को खड़ा करके गोली मार दें: राबड़ी देवी


(पटना): बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने कहा कि यदि उनके परिवार से भाजपा को इतनी ही एलर्जी है, तो सबको खड़ा कर के गोली मार दे़। राबड़ी देवी शनिवार को रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागृह में बंद राजद सुप्रिमो लालू प्रसाद यादव से किसी के भी मिलने पर पाबंदी लगाने के बाद अपने गुस्से का इजहार कर रही थी़। राबड़ी देवी की इस प्रतिक्रिया से राजद के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष गौतम सागर राणा ने झारखंड के गढ़वा जिले में पत्रकारों को मोबाईल पर वीडियो कांन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रू-ब-रू कराया़।

 

 

झारखंड प्रदेश राजद अध्यक्ष गौतम सागर राणा शनिवार को महागठबंधन प्रत्याशी घूरन राम के पक्ष में चुनाव प्रचार के लिये गढ़वा जिले पहुंचे। गौतम सागर राणा पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे, तभी राबड़ी देवी का कॉल उनके मोबाईल पर आया़। इसके बाद उन्होंने राबड़ी देवी से कहा कि वे पत्रकारों के समक्ष हैं, आप पत्रकारों से अपनी बात सीधे कह दीजिये।


राबड़ी देवी ने फोने पर ही पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि जेल मैनुअल के अनुसार सप्ताह में तीन लोगों के लालू प्रसाद से मिलने का प्रावधान शनिवार को किया गया है अब यह संवैधानिक अधिकार भी उनसे छीन लिया गया है। उन्होंने कहा कि कारा प्रशासन की ओर से एक सादे कागज में कारा के बाहर चिपका दिया गया है कि लालू प्रसाद से कोई नहीं मिल सकता है। यह किसके हस्ताक्षर से जारी किया गया है, इसका जिक्र उसमें नहीं किया गया है़। उन्होंने कहा है कि सरकार मानसिक रूप से दिवालिया हो गई है। इतना किसी को परेशान नहीं किया जाता है, दबाव नहीं दिया जाता है। नरेंद्र मोदी हों या झारखंड सरकार यदि इतना ही है तो सबको खड़ा कर के गोली मार दे। उन्होंने कहा कि हत्या के मामले में आरोपी रहे अमित शाह को कुछ नहीं हुआ है उन्होंने कहा कि आखिर लालू यादव ने क्या किया है उन्होंने गरीबों को जगाने का काम किया है। 5 से 6 मिनट के इस वीडियो कांन्फ्रेंसिंग में एक स्वर से राबड़ी देवी ने केंद्र सरकार एवं भाजपा सरकार की आलोचना की़ उन्होंने कहा कि यही मौका है कि ऐसी सरकार को जनता भगाने का काम करे।


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सुशील मोदी ने लालू यादव पर लगाए यह गंभीर आरोप, पिता के बचाव में आए तेजस्वी दिया क़रारा जवाब


(पटना): भाजपा नेता और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मोदी ने कहा कि लालू यादव ने प्रेम गुप्ता को अरूण जेटली के पास भेजकर सीबीआई से बचाने की गुहार लगाई थी। बकौल सुशील मोदी, लालू ने गुहार लगाई और कहा था कि सीबीआई से बचा लें तो नीतीश कुमार की सरकार को समर्थन वापस लेकर फौरन गिरा देंगे।

 

मोदी ने कहा कि अरूण जेटली ने प्रस्ताव ठुकराते हुए गुप्ता को बैरंग वापस कर दिया था। सुशील मोदी के दावे का जदयू ने खुलकर समर्थन किया है। बता दें कि नीतीश कुमार के एनडीए में वापस आने के साथ ही यह बात बखूबी चर्चा में रही कि प्रेम गुप्ता और जेटली के बीच बातचीत के दस्तावेज को भाजपा ने जदयू नेताओं के समक्ष रखा तभी नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ आ जाने की जल्दबाजी की।

 

सुशील मोदी के दावे का तेजस्वी यादव ने क़रारा जवाब दिया है। उन्होंने ट्वीट कर मोदी को मानसिक दिवालिया क़रार दिया। कहा कि सृजन चोर झूठ के भंडार हैं। लालू जी पर झूठे आरोप लगा रहे हैं जिन्होंने संघ और भाजपा को नाको चने चबवा डाले।


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दूसरा चरण सिर पर, महागठबंधन में समन्वय के अभाव के चलते प्रचार हुआ सुस्त


(पटना): मतदान का एक दौर समाप्त होकर दूसरे दौर का प्रचार खत्म हो जाने के बाद भी महागठबंधन के घटक दलों में समन्वय नहीं बन पा रहा है। महागठबंधन में समन्वय समिति बनाए जाने का काम भी लटका हुआ है। इसके चलते आपसी तालमेल की कमी साफ दिखने लगी है।


समन्वय समिति का गठन चुनाव प्रचार शुरु होने से पहले ही कर लेने की योजना बनी तो थी लेकिन अब तक इसे लेकर कोई पहल ही नहीं हुई। समन्वय नहीं बन पाने की वज़ह से विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव उपेंद्र कुशवाहा के उजियारपुर में नमांकन के दौरान नहीं पहुंच पाए। वे मांग के बावजूद सभी जगह उपलब्ध नहीं हो पा रहे। राहुल गांधी की गया में आयोजित सभा में भी तेजस्वी नहीं पहुंच सके। लालू यादव की गैरहाजिरी में तेजस्वी की मुस्लिम यादव वोटों के जनाधार को जोड़े रखने की मांग ज्यादा है।


कांग्रेस नेताओं और महागठबंधन के दूसरे दलों में भी तालमेल का अभाव दिख रहा है। कांग्रेस में राहुल गांधी के अलावा सिर्फ शत्रुघ्न सिन्हा की मांग हो रही है। पर वह सभी रैलियों में नहीं जा सकते। आरजेडी में दूसरे नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी हैं जिनकी व्यापक मांग है पर वह दरभंगा से खुद चुनाव लड़ रहे और वहां से निकल नहीं पा रहे हैं। कुशवाहा की वैसी कोई जबर्दस्त मांग तो नहीं पर वह उपलब्ध हो जा रहे हैं। महागठबंधन में प्रचार के लिए सभी दलों का अपना हेलीकॉप्टर उपलब्ध है। बस जीतन राम मांझी के पास हेलीकॉप्टर नहीं है। वह विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी और दूसरे नेताओं के साथ ही घूमते रह रहे हैं। मुकेश सहनी का हेलीकॉप्टर सभी सहयोगी दलों के नेताओं की सवारी के लिए उपलब्ध है।

 

कांग्रेस नेता शकील अहमद की बगावत के बाद महागठबंधन में अभी चुप्पी छाई है। हालांकि उन्हें पार्टी आलाकमान का समर्थन हासिल है। इसी तरह आरजेडी में अली अशरफ फातमी की नाराजगी विस्फोटक होती दिख रही है। वह दरभंगा से टिकट चाहते थे पर वह मधुबनी भी नहीं ले पाए। वह सपा बसपा से किसी सीट पर टिकट की बाट जोह रहे हैं। लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव की बगावत भी महागठबंधन में भारी पड़ रही है। वह जहानाबाद, शिवहर,हाजीपुर और बेतिया समेत पांच सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने के बाद और भी तल्ख तेवर में नज़र आने लगे हैं।

 


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लालू यादव की खल रही कमी, चुनावी मंचों पर नहीं सुने जा रहे भोजपुरी बोल


(पटना): चारा घोटाले में सजा काट रहे आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट ने राहत नहीं दी और वह चुनाव में जेल से बाहर आने से रह गए। पच्चीस वर्षों में यह पहला मौका है जब लालू चुनाव के दौरान सीन में रहते हुए प्रत्यक्ष रूप से मौजूद नहीं हैं। बिहार के चुनावी मंचों पर भी उनकी कमी खल रही है।

 

लालू यादव नब्बे के दशक में राजनीति में आए और पिछड़ों व दलितों की आवाज़ बनकर उभरते चले गए। अपनी खास गंवई शैली में बोल बोलकर लालू ने लोगों को आकर्षित करना शुरु कर दिया। लालकृष्ण आडवाणी की राम रथयात्रा को रोककर लालू मुस्लिम जनमानस के और करीब हो गए। मुस्लिम—यादव और अन्य दलित—पिछड़ों के चहेते बनते गए। लालू यादव ने पंद्रह वर्षों तक सत्ता में धाक बनाए रखी।

 

हर चुनाव में लालू अपनी खास गंवई शैली में लोगों से चुटीले संवाद करने के लिए चर्चित होते गए। भोजपुरी में इनके संवाद सुनकर लोग मजे ले लेकर लालू के मुरीद हो गए। मंचों से इनके खास बोल-ऐ बुड़बक..ऐ ..हाला मत करो..'जैसे संबोधन सुनने के लिए बेशुमार भीड़ इकट्ठ होती रही। अपने खास अंदाज़ के लिए मशहूर लालू यादव ने चुनावों को दो दशक से अधिक समय से प्रभावित किए रखा है। एनडीए के आगे पराजय के बाद भी लालू शैली का पराभव नहीं हो पाया। नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षाओं ने फिर लालू के साथ महागठबंधन बनाकर बाजी पलट दी। 2014के लोकसभा और 2015 के विधानसभा चुनावों में लालू यादव जमानत पर बाहर आए फिर अपनी शैली में चुनाव को प्रभावित कर वोटों की बरसात करा डाली। महागठबंधन की सरकार बनी और उनके दोनों पुत्र भी राजनीति में प्रवेश कर गए। यह और बात है कि छोटे पुत्र तेजस्वी ने अपनी योग्यता के अनुरूप लालू यादव के उत्तराधिकारी बनकर उभरे और बड़े तेजप्रताप दूसरे कारणों से चर्चा में बने रह रहे।


लालू यादव ने जेल में रहकर इस चुनाव में महागठबंधन की सीट शेयरिंग को अंजाम दिया और उन्हीं की गाइडलाइंस से तेजस्वी बखूबी अपना मिशन साध रहे हैं लेकिन उनकी गैरमौजूदगी का अहसास सभी को है। लालू के अनुपस्थित रहने से महागठबंधन का चुनाव प्रचार भी सशक्त नहीं हो पा रहा और दूसरे दलों के नेता भी सिरे से सूत्र में सजे नहीं जान पड़ रहे। उनकी पत्नी राबड़ी देवी कहती हैं, लालू जी चुनाव में रहते तो और बात होती। उनकी कमी खल रही है।हालांकि जैसा वह कह रहे हैं, वही सब हो रहा है पर उनकी कमी खटक रही है। लालू यादव ने रिम्स में रहते हुए पत्नी को भावुक पत्र भी लिखा। जवाब में राबड़ी भी भावुक हुईं लेकिन भावुकता के बहाव से बच निकलते हुए आखिर उन्होंने मिशन साधने का मोर्चा संभाल लिया।


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इलेक्शन 2019 स्पेशल...दूसरे दौर की जंग में जदयू-कांग्रेस की नाक की लड़ाई


(पटना): मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए दूसरे चरण की पांच सीटों का चुनाव खासा महत्वपूर्ण हो गया है। इसलिए भी कि इन सभी सीटों पर जदयू के ही उम्मीदवार ताल ठोक रहे हैं। पिछले चुनाव में भाजपा की विफलता के बाद जदयू ने सीमांचल की ये सीटें अपने हिस्से मांग लीं। पार्टी ने प्रचार में पूरी ताक़त झोक रखी थी। मुख्यमंत्री ने भी इन क्षेत्रों में लगातार चुनावी सभाएं कीं। सोमवार शाम प्रचार का दौर समाप्त होने के साथ ही जीत के जातीय समीकरणों को पक्ष में करने की पार्टियों ने जुगत भिड़ाने शुरु कर दिए।


सभी पांच सीटों पर मुकाबला रोचक है। इनमें कांग्रेस की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। कटिहार, किशनगंज और पूर्णियां में कांग्रेस के ही उम्मीदवार है। कांग्रेस ने कटिहार में तारिक अनवर, पूर्णियां में उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह और किशनगंज में मोहम्मद जा़वेद को उम्मीदवार बनाकर मैदान में लड़ाई के लिए उतारा है।


पूर्णियां जदयू की सीटिंग सीट है, जहां जदयू के संतोष कुशवाहा की टक्कर पुराने ही उम्मीदवार उदय उर्फ पप्पू सिंह से रही है, पर सिंह ने इस बार पार्टी बदल ली और कांग्रेस से मैदान में उतर गए हैं। वह पिछली बार भाजपा के बैनर तले लड़े थे। दूसरे चरण में जदयू का चार सीटिंग सांसदों से ही मुकाबला हो रहा है। किशनगंज में असुदुद्दीन ओवैसी की पार्टी मजलिसे इत्तेहादुल मुसलमीन(एम आई एम) ने आरजेडी के कोचाधवन से पूर्व विधायक अख्तरुल ईमान को उम्मीदवार बनाया है, जो आरजेडी छोड़ 2014 में जदयू में आए और अभी एमआइएम के उम्मीदवार के बतौर मैदान में डटे हैं। सत्तर फीसदी मुस्लिम मतदाताओं के इस क्षेत्र में चुनाव मैदान में उतरकर ओवैसी सैयद शहाबुद्दीन और अशरारूल हक़ जैसे मुस्लिम नेताओं के निधन के बाद हुए स्थान को भरने की कोशिश में हैं। हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने उनके प्रत्याशी को नज़रअंदाज़ कर दिया था। जदयू के महमूद अशरफ के मुकाबिल कांग्रेस डॉ जावेद को हर तरह से दुरुस्त कर संसद पहुंचाने की तैयारी में खपी हुई है।


कटिहार में चार बार सांसद रह चुके तारिक अनवर इस बार कांग्रेस से मैदान मारने की जंग जदयू से ही लड़ रहे हैं। जदयू ने भाजपा से उसकी यह परंपरागत सीट ले ली और दुलालचंद गोस्वामी पर दांव लगा दिया जो भाजपा की सदस्यता छोड़ जदयू में आए और इस बार विधानसभा चुनाव भी हार गए। गोस्वामी नीतीश के चहेतों में एक पर भाजपा के संघी काडर भी हैं। यादव, मुस्लिम और भूमिहार, वैश्य बहुल इस क्षेत्र में भाजपा का काडर सीट शेयरिंग में जदयू के हाथ लग जाने से उदासीन भी कम नहीं हैं। इसका असर कम करने की कोशिशें भाजपा भरपूर करने में जुटी है।


बांका में आरजेडी के सिटिंग एमपी जयप्रकाश नारायण यादव को जदयू के गिरिधारी यादव और भाजपा से बगावत कर मैदान में निर्दलीय ही उतरी दिवंगत नेता दिग्विजय सिंह की पत्नी पुतुल कुमारी का सामना करना पड़ रहा है। पुतुल कुमारी चुनावी जंग को तिकोनी बनाने में कामयाब हुई हैं। पुतुल कुमारी का टिकट तय था पर जदयू ने यह सीट भाजपा से झटक ली। अब अग्निपरीक्षा में कौन सोने की माफिक खरा होकर निकल पाता है, यह मतदान के बाद ही सामने आ सकेगा। अग्निपरीक्षा इस बात की भी है कि सीमांचल के इन मुस्लिम यादव बहुल क्षेत्रों में जदयू किस हद तक कामयाबी का परचम लहरा पाता है। जदयू के लालसे की आग में भाजपा ने सीमांचल की राहें सहज़ करने की जुगत तो लगा ली, अब देखना यही बाकी है कि एनडीए सीमांचल में कितनी धाक और धमक दिखा पाता है।

 


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इलेक्शन स्पेशल...मात्र तीन सीटों-सारण, मधेपुरा और पाटिलिपुत्र से तय होगा लालू यादव का सियासी इक़बाल


(पटना): राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी लालू यादव की सियासत इस दिनों हो रहे चुनाव में उनके इक़बाल के दांव पर लगे होने से खूब चर्चा में है। लालू यादव खुद तो जेल में हैं, पर उनके उत्तराधिकारी के बतौर पुत्र तेजस्वी यादव धुंआधार दौड़ लगा रहे। पूरे सूबे में एनडीए और महागठबंधन में ही सीधी लड़ाई के वातावरण बने हैं, पर इनमें खास तौर से तीन सीटों की लड़ाई लालू यादव की पहचान और प्रतिष्ठा से जुड़ गई है। ये तीन सीटें हैं सारण, मधेपुरा और पाटलिपुत्र। लड़ाई में खुद न रहते हुए भी लालू तीनों सीटों पर अपनी साख, धाक और नाक बचाने की जंग में फंसे हैं। मधेपुरा में शरद यादव हैं, जिनसे बड़े अंतराल के बाद निकटता बनी है। सारण में समधी चंद्रिका राय और पाटलिपुत्र में बड़ी बेटी मीसा भारती। तीनों ही सीटों पर लालू यादव की अपनी यादव जाति के सियासी प्रतिनिधित्व का भी बड़ा सवाल है।

 

मधेपुरा

मधेपुरा एक ऐसी सीट है, जहां 1999 के चुनाव में लालू पहली बार शरद यादव से मात खा गए थे। लालू यादव का यह दावा खोखला साबित हो गया था कि वह यादवों के असली नेता हैं लेकिन वक्त की नज़ाकत देखिए कि वही शरद यादव आज लालू यादव की छतरी की छाया में मधेपुरा से पनाह मांग रहे हैं। पिछली बार आरजेडी से पप्पू यादव ने शरद को पछाड़ दिया और इस बार पप्पू खुद आरजेडी से अलग होकर लड़ाई को तिकोना बनाने में लगे हैं।

 

सारण

सारण में समधी चंद्रिका राय के बहाने लालू यादव का अस्तित्व दांव पर है। वह बड़े बेटे तेजप्रताप यादव की पत्नी ऐश्वर्या राय के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय के पुत्र हैं। दारोगा राय की सारण क्षेत्र में एक खास पहचान रही है। एक जमाने में जब लालू राजनीति में क़दम रख रहे थे तब दारोगा राय ने इन्हें आगे बढा़ने में बड़ी मदद की थी। उस रिश्ते को लालू परिवार ने तेजप्रताप की शादी कर अहमियत दी। यह और बात है कि तेज के रवैये ने इन रिश्तों में थोड़ी खटास भी भरी। पिछला चुनाव राबड़ी देवी लड़ीं और भाजपा के राजीव प्रताप रूड़ी से 40948 वोटों से हार गईं। लालू यादव राजपूत बहुल इस क्षेत्र से चार बार सांसद रहे हैं।

 

पाटलिपुत्र

पाटलिपुत्र में लालू यादव पिछले चुनाव में अपनों ही से गच्चा खा गए थे। बड़ी बेटी मीसा भारती मैदान में उतरीं, तो भरोसे के रहे रामकृपाल यादव ने भाजपा का दामन पकड़ मैदान में ताल ठोंक दी। मीसा 40322 वोटों से हार गईं। 2009 में लालू अपने राजनीतिक गुरु रंजन यादव से पराजित हो गए थे। इस बार फिर आर पार की लड़ाई है। मीसा की टक्कर फिर रामकृपाल से होनी है। महत्वपूर्ण यह है कि वामदलों का कोई उम्मीदवार लड़ाई में यदि नहीं टिका, तो फिर आमने-सामने की भिड़ंत होगी।


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बिहार:बीजेपी समेत विभिन्न दलों के स्टार प्रचारकों के सर पर मंडरा रहा आतंकी साया,रैलियों में विशेष सुरक्षा के निर्देश


(पटना,प्रियरंजन भारती): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई केंद्रीय मंत्री और विभिन्न दलों के स्टार प्रचारक अभी इंडियन मुजाहिद्दीन सहित अन्य आतंकी संगठनों के निशाने पर हैं। आईजी सुरक्षा ने खतरों की बाबत सभी जिलों के पुलिस को रैलियों में विशेष सुरक्षा देने के निर्देश जारी किए हैं।


सभी जिलों के एसपी को दस विंदुओं पर सुरक्षा व्यवस्था कायम करने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक जुलाई 2013 में महाबोधि मंदिर और नरेंद्र मोदी की पटना गांधी मैदान रैली में सीरियल बम ब्लास्ट करने वाले आतंकी अभी तक एटीएस की पकड़ से बाहर हैं।इन्हीं आतंकियों ने दलाई लामा के रहते भर में महाबोधि मंदिर परिसर के मुख्यद्वार परबम प्लांट किए थे। ये आतंकी अपने अन्य साथियों के साथ चुनावी रैलियों में बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं।


खुफिया सूत्रों ने पुलिस मुख्यालय को सतर्क किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई केंद्रीय मंत्रियों और कई दलों के स्टार प्रचारक इन फरार आतंकियों के निशाने पर हैं। ये विभिन्न रैलियों में बड़ी वारदात को अंजाम तक पहुंचाने में लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसी पंद्रह अप्रैल को भागलपुर में चुनावी रैली को संबोधित करने आने वाले हैं। इसे लेकर पुलिस और सुरक्षा बलों ने अभी से चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था बनानी शुरु कर दी है।


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चुनाव के ऐन वक्त किताब के इर्द-गिर्द घूमने लगी बिहार की राजनीति: किताब लालू की, जिक्र नीतीश का, जवाब पीके का


(पटना,प्रियरंजन भारती): आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव के इस दावे पर चुनाव के ऐन वक्त में सियासी बवाल मच उठा है कि नीतीश कुमार भाजपा का साथ छोड़ महागठबंधन में लौटना चाहते पर मैंने साफ मना कर दिया। लालू यादव के इस दावे को खारिज करते हुए प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर जवाब दिया है।


लालू यादव ने कहा है कि नीतीश कुमार भाजपा के साथ एनडीए में जाने के छह महीनों बाद ही महागठबंधन में लौट आना चाहते थे। पर मैंने साफ मना कर दिया क्योंकि नीतीश कुमार से मेरा विश्वास उठ चुका है। पत्रकार नलिन वर्मा के साथ लिखी अपनी बायोग्राफी 'गोपालगंज टू रायसीना, माई पॉलिटिकल जर्नी' में लालू यादव ने आगे लिखा कि अपने विश्वासपात्र प्रशांत किशोर को दूत बनाकर नीतीश ने मेरे पास पांच बार भेजा। हर बार प्रशांत किशोर नीतीश कुमार को महागठबंधन में वापस करने पर लालू को राजी करने की कोशिश करते रहे। यह किताब अभी प्रकाशन में है।


लालू यादव ने लिखा,'पीके यह जताने की कोशिश कर रहे थे कि यदि मैं जदयू को लिखित समर्थन दे दूं तो वह भापजा से गठबंधन तोड़कर दोबारा महागठबंधन में शामिल हो जाएंगे।हालांकि नीतीश को लेकर मेरे मन में कोई कड़वाहट नहीं है पर मेरा विश्वास उनसे पूरी तरह उठ चुका है। लालू यादव ने आगे लिखा है,'हालांकि मुझे नहीं पता है कि यदि मैं पीके का प्रस्ताव स्वीकार कर लेता तो महागठबंधन को 2015 में वोट करने वालों और देश भर में भाजपा के खिलाफ एकजुट हुए दलों की क्या प्रतिक्रिया होती।'


लालू यादव के इस दावे पर पीके ने पहले तो चुप्पी साधे रखी पर बाद में ट्वीट कर उसका जवाब दिया। ट्विटर हैंडलर पर उन्होंने लिखा कि लालू यादव का यह दावा बेबुनियाद है। ये फिजूल की बातें हैं। हां,जदयू ज्वाइन करने के पूर्व मैंने लालू यादव से मुलाकात की लेकिन ऐसी कोई बात नहीं की। अगर पूछा जाए कि क्या बात हुई तो इससे शर्मिंदगी होगी।'

 

लालू यादव के दावे को सरासर झूठ बताते हुए जदयू नेता केसी त्यागी ने भी बयान दिए। उन्होंने कहा कि 2017 में आरजेडी से अलग होने के बाद नीतीश कुमार ने कभी लालू यादव के साथ जाने की इच्छा नहीं जताई। लालू यादव के बयान को भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने भी सरासर झूठ क़रार दिया है।


लालू यादव के इस दावे को पीके बेशक खारिज कर दें लेकिन सियासी हलके में उनकी गतिविधियां कई बातों को पुष्ट कर देने वाली साबित हो चुकी हैं। हाल के घटनाक्रम ही इस बात के प्रत्यक्ष गवाह हैं। कुछ ही दिनों पूर्व उन्होंने उद्धव ठाकरे और वाईआरएस से मिलकर नीतीश को एनडीए में नेता बनाने और गैरभाजपा तथा गैरकांग्रेसी दलों का समर्थन जुटाने के प्रस्ताव पर बातचीत की थी। जदयू में शामिल होने के बाद बिहार में कई मौकों पर उन्होंने बड़बोले बयान दिए जिनमें यह भी था कि आरजेडी से अलग होने के बाद जदयू को फिर से जनादेश लेना चाहिए था। उनके इस वक्तव्य से दूसरे जदयू नेताओं ने उनके खिलाफ मुहिम छेड़ दी जिसमें उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बना सकता हूं तो युवाओं को भी विधायक और एमपी बनवा सकता हूं। पीके के खिलाफ पार्टी में मुहिम छिड़ी तो अंततः नीतीश कुमार ने उनसे दो घंटे मुलाकात कर उन्हें फिलहाल मुहिम से अलग कर दिया और वह पिताजी के इलाज के बहाने बिहार से बाहर निकल गए।


पीके को लेकर चाहे जो भी सियासत हो और नीतीश कुमार की भाजपा के साथ रहने की चाहे जो भी मजबूरियां रही हों पर यह तो अनेक उदाहरणों से पुष्ट होता दिखता है कि भाजपा के साथ बेमन से हुए जदयू के गठबंधन में पीके एक खास मिशन के तहत जदयू में वरिष्ठ पद पर लाए गये लगते हैं।


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VIDEO: औरंगाबाद सीट से कांग्रेस के पूर्व सांसद निखिल कुमार को टिकट नहीं मिलने से नाराज कार्यकर्ताओं ने जमकर काटा बवाल


(पटना,औरंगाबाद): कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने आज पटना स्थित पार्टी कार्यालय पर जमकर बवाल काटा। इस घटना का वीडियो सामने आया है। जिसमें दिखाई दे रहा है कि कैसे प्रदेश प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल की उपस्थिति में पार्टी कार्यकर्ता लडाई पर उतारू हो गए। बवाल मचा रहे सभी कार्यकर्ता औरंगाबाद सीट से कांग्रेस के पूर्व सांसद निखिल कुमार को दोबारा उम्मीदवार न बनाए जाने से नाराज है। बिहार महागठबंधन के सीट शेयरिंग फार्मूले के तहत कांग्रेस की यह सीट जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) की झोली में डाली गई है। 'हम' की ओर से उपेंद्र प्रसाद को उम्मीदवार बनाया गया है।

 

 

 

मिली जानकारी के अनुसार बिहार कांग्रेस के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल के साथ ही प्रदेश नेतृत्व के शीर्ष नेता पार्टी कार्यालय में पार्टी की प्रचार समिति की बैठक में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे थे। पूर्व सांसद निखिल कुमार के समर्थक यहां पहले से ही मौजूद थे। इन कार्यकर्ताओं ने नेताओं को यह कहते हुए मीटिंग में जाने से रोका कि 'किस बात की मीटिंग।' ऐसा कहते हुए कार्यकर्ता वीडियो में साफ दिखाई दे सकते है। निखिल कुमार के समर्थकों ने शीर्ष नेताओं का रास्ता रोका तो माहौल गरमा गया। बवाल कर रहे कार्यकर्ताओं ने प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल के साथ धक्का—मुक्की भी की। वहां मौजूद बाकी नेताओं ने गोहिल के चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाकर उनका बचाव किया। खुद निखिल कुमार ने कार्यकर्ताओं को शांत कराने की कोशिश लेकिन वह नाकाम रहे। इस घटना को लेकर प्रदेश कांग्रेस की कोई भी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

 

 

बता दें कि लोकसभा चुनाव के मद्येनजर बिहार महागठबंधन में सीट का बंटवारा पहले ही तय किया जा चुका है। सीट शेयरिंग के तहत आरजेडी को 20, कांग्रेस को 9, रालोसपा को 5, हम को 3 और मुकेश सहनी की वीआईपी को तीन सीटें दी गई है। हम को गया, औरंगाबाद और नालंदा सीटें दी गई है। जीतन राम मांझी खुद गया सीट से चुनावी मैदान में है। औरंगाबाद से उपेंद्र प्रसाद और नीतीश कुमार के गृहक्षेत्र नालंदा से अशोक चंद्रवंशी को प्रत्याशी बनाया गया है।


औरंगाबाद सीट बनी कलह की वजह

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता निखिल कुमार ने औरंगाबाद सीट से 2004 में कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लडा था। निखिल कुमार को चुनाव में विजय हासिल हुई। इसके बाद हुए जदयू के सुशील कुमार सिंह यहां से चुने गए। सुशील कुमार सिंह ने 2014 में बीजेपी के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ा और विजयी रहे।


यहां पर क्लिक करे और देखे बिहार महागठबंधन में किसको मिली कौनसी सीट


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