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साफ-सुथरा खानपान बनता है टायफॉइड से दूरी


दूषित खानपान से होने वाली एक खतरनाक संक्रामक बीमारी है टायफॉइड। यह सेलमोनैला टाइफी नाम के बैक्टीरिया से होती है।आइए जानते हैं इसके लक्षण के बारे में -

तेज बुखार:
टायफॉइड के बैक्टीरिया शरीर में जाने के बाद अपनी संख्या को बढ़ाते हैं। ऐसे में शरीर उन्हें नष्ट करने के लिए तापमान बढ़ा लेता है। इससे पीड़ित को बुखार महसूस होता है। पहले ठंड लगती है फिर तापमान बढ़ना शुरू होता है। ये तापमान 103-104 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच जाता है। शरीर का तापमान बढऩे से पाचन संंबंधी एंजाइम्स निष्क्रिय होने लगते हैं।

सिरदर्द:
ऐसे में पीड़ित को दिनभर बुखार चढ़ने के साथ-साथ तेज सिरदर्द की शिकायत होती है।

लिवर का आकार बढ़ना :
करीबन एक हफ्ता टायफॉइड रहने के बाद लिवर का आकार बढ़ जाता है। यह खासतौर पर बच्चों में देखने को मिलता है। इस बीमारी में सीने और पेट पर लाल चकते दिखाई देने लगते हैं।

दस्त:
टायफॉइड के अधिकतर मरीजों को दस्त और उल्टी की शिकायत होती है। अक्सर इसे आंत की समस्या समझा जाता है। लेकिन इसकी पहचान है स्टूल का रंग गहरा होना। खून की शिकायत व उल्टी भी हो सकती है।

पेटदर्द:
दस्त और उल्टी के साथ पेट में ऐंठन व दर्द की समस्या हो जाती है। पेट में रोगाणुओं के कारण काफी दर्द हो सकता है। इससे कई बार पेट में सूजन भी आ जाती है।

सावधानी:
बचाव के लिए साफ-सुथरा खानपान लें। मरीज हैं तो बिना मिर्च-मसाले वाला भोजन करें और डॉक्टर की सलाह से दवाएं लें।


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...एक बार फिर इस वजह से सुर्खियों में हैं दीपिका पादुकोण


जयपुर। दीपिका पादुकोण पहले अपनी शादी को लेकर चर्चा में रही। वही अपनी आने वाली फिल्म 'छपाक' को लेकर सुर्खियों में हैं, जिसमें दीपिका का पहला लुक दर्शकों के सामने आ चुका है।

फिल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण जल्द फिल्म 'छपाक' में नजर आएंगी। यह फिल्म एसिड सर्वाइवर की कहानी पर आधारित है। इस फि ल्म में दीपिका पादुकोण एक ऐसी लड़की की भूमिका निभा रही हैं, जिसके चेहरे पर तेजाब से हमला कर दिया गया था। दीपिका पादुकोण की ये भूमिका लक्ष्मी अग्रवाल नामक पीडि़त महिला पर आधारित है। इस फि ल्म से दीपिका का लुक सामने आ गया है।

फिल्म की शूटिंग दिल्ली में हो रही है। इस फिल्म में दीपिका पादुकोण मालती नामक महिला की भूमिका निभाने वाली हैं, जिसके जीवन में अनगिनत संघर्षों के बाद भी वह उनसे लडऩा जारी रखती है। इस फिल्म के माध्यम से दीपिका पादुकोण के बैनर के ए एंटरटेनमेंट की भी शुरुआत हो रही है। फॉक्स स्टार स्टूडियो के ए एंटरटेनमेंट और मृग फिल्म मिलकर इस फिल्म को बना रहे हैं। यह फिल्म 10 जनवरी 2020 को रिलीज होगी।

गौरतलब है कि दीपिका पादुकोण जल्द मेघना गुलजार द्वारा को-प्रोड्यूस की जा रही फिल्म 'छपाक' में अभिनय करती नजर आएंगी। दीपिका इस फिल्म को प्रोड्यूस भी कर रही हैं। इस फिल्म के जरिए दीपिका पहली फिल्म प्रोड्यूस करने जा रही हैं।

फिल्म की तैयारी के लिए दीपिका पादुकोण ने लक्ष्मी अग्रवाल से जुड़ी ऑनलाइन उपलब्ध सभी दस्तावेजों की और मीडिया की खबरों की विस्तार से पढ़ाई की है। इसके अलावा उन्होंने लक्ष्मी अग्रवाल से व्यक्तिगत तौर पर बातें की हैं। जिसके चलते उन्हें उनसे जुड़ी कई महत्वपूर्ण चीजें पढऩे और देखने को मिली है। ऐसी चीजें भी उनके सामने लक्ष्मी अग्रवाल में रखी हैं, जो अभी तक मीडिया या सार्वजनिक जीवन में उपलब्ध नहीं है।


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लोकसभा चुनाव 2019: नागौर सीट बनी भाजपा की गलफांस, ये खुलकर विरोध में


जयपुर। भाजपा ने जिन सीटों पर विवाद के चलते प्रत्याशी की घोषणा रोकी थी, उन पर घमासान बढ़ गया है। सबसे ज्यादा घमासान नागौर सीट पर है। केन्द्रीय मंत्री सीआर चौधरी को नागौर से प्रत्याशी नहीं बनाने को लेकर जिले के छोटे से बड़े कार्यकर्ता जयपुर पहुंच गए और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे समेत तमाम नेताओं से मिलकर विरोध जताया। सबसे बड़ी बात यह है कि विरोध करने वाले नेताओं में नागौर जिले के दो बड़े जाट नेता भी शामिल हैं। विरोध करने वालों में जाट, राजपूत, ब्राह्मण, वैश्य, एससी समेत सभी जातियों के नेता शामिल हो गए हैं।

जयपुर में देर रात तक भाजपा के बड़े नेताओं की 9 सीटों को लेकर चर्चा हुई, लेकिन नागौर और राजसमंद पर प्रत्याशी चयन को लेकर आखिर तक कोई राय नहीं बन पाई। अब नागौर और राजसमंद समेत सभी 9 सीटों पर चर्चा के लिए अमित शाह ने प्रदेश के नेताओं को दिल्ली बुलाया है। नागौर और राजसमंद के मामले में अंतिम फैसला अब अमित शाह ही लेंगे। सूत्रों के मुताबिक नागौर सीट को लेकर प्रदेश चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर की कई नेताओं सेे बात हुई है।

जावड़ेकर की राजस्थान संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ चार घंटे हुई एक बैठक में भी नागौर सीट पर विवाद को लेकर मंथन हुआ है। जावड़ेकर ने संघ के पदाधिकारियों से कई सीटों को लेकर चर्चा की, लेकिन मुख्य चर्चा नागौर सीट को लेकर ही रही।

राठौड़ को मनाने की कोशिशें
चूरू में वर्तमान सांसद राहुल कस्वां के विरोध को थामने के लिए उप नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ को मनाने की कोशिशें जारी हैं। रविवार को प्रदेश के कुछ नेता जमीनी हकीकत जानने के लिए चूरू गए थे, वहां के भाजपा से जुड़े जनप्रतिनिधियों और संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि राजेन्द्र राठौड़ को मनाना जरूरी है।

देर शाम जारी हो सकती एक और सूची
पार्टी सूत्रों के मुताबिक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सोमवार दोपहर विभिन्न राज्यों की कोर कमेटियों की बैठक लेंगे। राजस्थान की कोर कमेटी को भी दिल्ली बुलाया है। प्रदेश से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर, प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी, संगठन महामंत्री चन्द्रशेखर समेत कुछ अन्य नेता शाह के साथ बैठक करेंगे। 9 में से जिन सीटों पर सहमति बन जाएगी, उन सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा सोमवार को हो सकती है।

देर रात प्रत्याशियों को लेकर मंथन
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के आवास पर रविवार देर रात 9 लोकसभा सीटों के प्रत्याशियों को लेकर मंथन चला। इस बैठक में मुख्य जोर नागौर, चूरू, अलवर, भरतपुर, करौली—धौलपुर सीटों को लेकर रहा। प्रत्याशी चयन का काम अंतिम चरण में है और पैनल तैयार कर अमित शाह को भेजा जाएगा। शाह की ओर से कराए सर्वे के नामों और पैनल में भेजे नामों का मिलान कर प्रत्याशी की घोषणा की जाएगी।

ये खुलकर विरोध में
पूर्व विधायक हरीश कुमावत, मनोहर सिंह, युनूस खान, मान सिंह किनसरिया, विजय सिंह चौधरी, श्रीराम भींचर, मंजू बाघ्मार, गजेन्द्र सिंह खींवसर, वर्तमान नागौर देहात जिला अध्यक्ष ओम प्रकाश मोदी, रामचन्द्र उत्ता, पालिका अध्यक्ष संगीता पारीक, ग्यारसी देवी।


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राज्यपाल कल्याण सिंह का 'विवादित' बयान, बोले- 'मोदी ही अगले प्रधानमंत्री बनने चाहिए'


जयपुर।

राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह एक बार फिर अपने विवादित बयान की वजह से सुर्ख़ियों में हैं। एक ताज़ा बयान में कल्याण सिंह ने कहा है कि हम चाहते हैं की मोदी जी एक बार फिर से देश के प्रधानमंत्री बने। संवैधानिक पद पर रहते हुए सिंह के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में विवाद गहरा गया है।

 

ये बोले कल्याण सिंह
दरअसल, राज्यपाल कल्याण सिंह का ये बयान उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान 23 मार्च को दिया गया है। इसका वीडियो एक समाचार एजेंसी ने सोमवार को जारी किया है जिसके बाद मामला प्रकाश में आया है।

 

सिंह ने मीडिया को एक सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ''हम सभी लोग भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता हैं। इस नाते से हम जरूर चाहेंगे कि भारतीय जनता पार्टी विजयी हो। हम चाहेंगे कि एक बार फिर से केंद्र में मोदी जी ही प्रधानमंत्री बनें। मोदी जी का प्रधानमंत्री बनना देश के लिए आवश्यक है। समाज के लिए आवश्यक है। आपकी भावनाओं को देखते हुए इससे ज्यादा और कुछ नहीं कहना चाहता।''

 

गौरतलब है कि कल्याण सिंह पहले भी अपने बयानों और प्रतिक्रियाओं को लेकर विवादों में रहे हैं। इस बार लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इस तरह की उनकी प्रतिक्रिया ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है कर दिया है।

 

दरअसल, शनिवार को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में प्रत्याशी चयन को लेकर विवाद चल रहा है। नाराज कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल के सामने प्रत्याशी सांसद सतीश गौतम को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। काफी देर बाद भी नारेबाजी बंद नहीं होने पर कल्याण सिंह आवास के बाहर निकल आये और हाथ हिलाते हुए विरोध-प्रदर्शन समाप्त करने की अपील की।

 

इसके बाद उन्होंने कहा कि हम सभी लोग भाजपा के कार्यकर्ता हैं। इस नाते से हम जरूर चाहेंगे कि भाजपा विजयी हो और केन्द्र में नरेन्द्र मोदी ही प्रधानमंत्री बनें। उनका प्रधानमंत्री बनना देश व समाज के लिए आवश्यक है। हम पार्टी के कार्यकर्ता हैं। पार्टी ने जो निर्णय कर दिया, उसका सम्मान करें और स्वीकार करें।


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Motivational Story : अभिनेत्री नहीं, सैन्य अधिकारी बन देश की सेवा करना चाहती थीं नंदा


बॉलीवुड में अपनी दिलकश अदाओं से अभिनेत्री नंदा ने लगभग तीन दर्शक तक दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, लेकिन बहुत कम लोगो को पता होगा कि वह फिल्म अभिनेत्री न बनकर सेना में काम करना चाहती थीं। मुंबई में 8 जनवरी, 1939 को जन्मी नंदा के घर में फिल्म का माहौल था। उनके पिता मास्टर विनायक मराठी रंगमंच के जाने माने हास्य कलाकार थे। इसके अलावा उन्होंने कई फिल्मों का निर्माण भी किया था। उनके पिता चाहते थे कि नंदा फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेत्री बने, लेकिन इसके बावजूद नंदा की अभिनय में कोई दिलचस्पी नहीं थी। नंदा महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस से काफी प्रभावित थीं और उनकी ही तरह सेना से जुड़कर देश की रक्षा करता चाहती थीं।

एक दिन का वाकया है कि जब नंदा पढ़ाई में व्यस्त थीं, तब उनकी मां ने उनसे कहा, तुम्हें अपने बाल कटवाने होंगे क्योंकि तुम्हारे पापा चाहते हैं कि तुम उनकी फिल्म में लड़के का किरदार निभाओ। मां की इस बात को सुनकर नंदा को काफी गुस्सा आया। पहले तो उन्होंने बाल कटवाने के लिए साफ तौर से मना कर दिया, लेकिन मां के समझाने पर वह इस बात के लिए तैयार हो गईं। फिल्म के निर्माण के दौरान नंदा के सर से पिता का साया उठ गया। इसके साथ ही फिल्म भी अधूरी रह गई। धीरे-धीरे परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने लगी।

उनके घर की स्थित इतनी खराब हो गई कि उन्हें अपना बंगला और कार बेचने के लिए विवश होना पड़ा। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण नंदा ने बाल कलाकार फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया। बतौर बाल कलाकार उन्होंने मंदिर (1948), जग्गू (1952), शंकराचार्य (1954), अंगारे (1954) जैसी फिल्मों मे काम किया। वर्ष 1956 में अपने चाचा वी शांताराम की फिल्म 'तूफान और दीया' से नंदा ने बतौर अभिनेत्री अपने सिने करियर की शुरुआत की। हालांकि, फिल्म की असफलता के कारण वह कुछ खास पहचान नहीं बना पाई। फिल्म दीया और तूफान की असफलता के बाद उन्होंने राम-लक्ष्मण, लक्ष्मी, दुल्हन, जरा बचके, साक्षी गोपाल, चांद मेरे आजा, पहली रात जैसी बी और सी ग्रेड वाली फिल्मों में बतौर अभिनेत्री काम किया, लेकिन इन फिल्मों से उन्हें कोई खास फायदा नहीं पहुंचा।

उनकी किस्मत का सितारा निर्माता एल वी प्रसाद की वर्ष 1959 में प्रदर्शित फिल्म 'छोटी बहन' से चमका। इस फिल्म में भाई-बहन के प्यार भरे अटूट रिश्ते को रूपहले परदे पर दिखाया गया था। इस फिल्म में बलराज साहनी ने बड़े भाई और नन्दा ने छोटी बहन की भूमिका निभाई थी। शैलेन्द्र का लिखा और लता मंगेशकर द्वारा गाया फिल्म का एक गीत 'भइया मेरे राखी के बंधन को निभाना' बेहद लोकप्रिय हुआ था। रक्षा बंधन के गीतों में इस गीत का विशिष्ट स्थान आज भी बरकरार है। फिल्म की सफलता के बाद नंदा कुछ हद तक फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गई।

फिल्म 'छोटी बहन' की सफलता के बाद उनको कई अच्छी फिल्मों के प्रस्ताव मिलने शुरू हो गए। देवानंद की फिल्म काला बाजार और हमदोनों, बी.आर. चोपड़ा की फिल्म 'कानून' खास तौर पर उल्लेखनीय है। फिल्म काला बाजार जिसमें नंदा ने एक छोटी सी, लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वही सुपरहिट फिल्म हमदोनों में उन्होंने देवानंद के साथ बतौर अभिनेत्री काम किया। वर्ष 1965 उनके सिने करियर के लिए अहम वर्ष साबित हुआ। इस वर्ष उनकी 'जब जब फूल खिले' प्रदर्शित हुई। बेहतरीन गीत-संगीत और अभिनय से सजी इस फिल्म की जबरदस्त कामयाबी ने अभिनेता शशि कपूर और गीतकार आनंद बख्शी और संगीतकार कल्याण जी. आनंद जी को शोहरत की बुंलदियां पर पहुंचाने के साथ ही नंदा को भी 'स्टार' के रूप में स्थापित कर दिया।

वर्ष 1965 में ही नंदा की एक और सुपरहिट फिल्म गुमनाम भी प्रदर्शित हुई। मनोज कुमार और नंदा की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में रहस्य और रोमांस के ताने-बाने से बुनी मधुर गीत-संगीत और ध्वनि के कल्पनामय इस्तेमाल किया गया था। वर्ष 1969 में नंदा के सिने करियर की एक और सुपरहिट फिल्म 'इत्तेफाक' प्रदर्शित हुई। दिलचस्प बात है कि राजेश खन्ना और नंदा की जोड़ी वाली संस्पेंस थ्रिलर इस फिल्म में कोई गीत नहीं था। इसके बावजूद फिल्म को दर्शकों ने काफी पसंद किया और उसे सुपरहिट बना दिया।

वर्ष 1982 में नंदा ने फिल्म 'आहिस्ता आहिस्ता' से बतौर चरित्र अभिनेत्री फिल्म इंडस्ट्री में एक बार फिर से वापसी की। इसके बाद उन्होंने राजकपूर की फिल्म 'प्रेमरोग' और 'मजदूर' जैसी फिल्मों में अभिनय किया। दिलचस्प बात है इन तीनों फिल्मों मे नंदा ने फिल्म अभिनेत्री पदमिनी कोल्हापुरे की मां का किरदार निभाया था। वर्ष 1992 में नंदा ने निर्माता-निर्देशक मनमोहन देसाई के साथ परिणय सूत्र में बंध गई, लेकिन वर्ष 1994 में मनमोहन देसाई की असमय मृत्यु से नंदा को गहरा सदमा पहुंचा। दिलकश अदाओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने वाली नंदा 25 मार्च 2014 को इस दुनिया को अलविदा कह गईं।


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जयपुर में धोनी को पीछे छोड़ सकते हैं क्रिस गेल, छू सकते हैं ये आंकड़ा


जयपुर. वेस्टइंडीज के तूफानी बल्लेबाज क्रिस गेल आईपीएल में एक बार फिर अपना जलवा दिखाने को तैयार हैं। गेल की टीम किंग्स इलेवन पंजाब का पहला मुकाबला सोमवार को जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में मेजबान राजस्थान रॉयल्स से होना है। दोनों ही टीमें लीग में जीत से आगाज करना चाहेंगी।

यह मैच गेल के लिए बेहद अहम हो सकता है क्योंकि उन्हें आईपीएल में 4000 रन का आंकड़ा छूने के लिए महज 6 रन की दरकार है। यहां राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ 6 रन पूरे करते ही गेल आईपीएल में 4000 रन का आंकड़ा छूने वाले 9वें बल्लेबाज बन जाएंगें।

इतना ही नहीं गेल अगर यहां 23 रन बना लेते हैं तो वह चेन्नई सुपरकिंग्स के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी को भी पीछे छोड़ देंगे। धोनी ने अब तक आईपीएल में खेले 176 मैचों में 4016 रन बनाए हैं, वहीं गेल ने 112 मैचों में 3994 रन बनाए हैं। धोनी आईपीएल में सर्वाधिक रन बनाने के मामले में आठवें नम्बर पर हैं, जबकि गेल नौंवें। आईपीएल में सर्वाधिक रन बनाने का रिकॉर्ड चेन्नई के सुरेश रैना के नाम है, जिन्होंने अब तक 177 मैचों में 5004 रन बनाए हैं।

वैसे गेल आईपीएल में सर्वाधिक सिक्स लगाने के मामले में शीर्ष पर हैं। उन्होंने अब तक खेलीं 111 पारियों में 292 सिक्स लगाए हैं। उनके पीछे एबी डीविलियर्स हैं, जिन्होंने 142 मैचों में 186 सिक्सर लगाए हैं। गेल को आईपीएल में 300 सिक्स पूरे करने के लिए 8 सिक्स की ओर दरकार है।


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आवश्यक योग्यता नहीं होने पर एम्स की प्रोफेसर बर्खास्त


अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने एक चिकित्सक के पास अपेक्षित योग्यता नहीं होने पर उसे सहायक प्रोफेसर पद से हटा दिया। एम्स ने ऐसा दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा इस संदर्भ में दिए गए आदेश के मद्देनजर किया। एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र में कहा गया है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद कनिका जैन की अस्पताल प्रशासन के सहायक प्रोफेसर पद पर नियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त होती है।

बीते साल सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेशन ट्रिब्यूनल (सीएटी) के चेयरमैन न्यायमूर्ति एल.नरसिम्हा रेड्डी की अध्यक्षता वाली पीठ व इसकी प्रशासनिक सदस्य आराधना जोहरी ने राय दी थी कि जैन की डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) की डिग्री पद के लिए पर्याप्त योग्यता नहीं रखती। ट्रिब्यूनल ने इसके बाद उनकी नियुक्ति को रद्द कर दिया और कहा कि उन्हें मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) द्वारा मान्यता प्राप्त अस्पताल में एक साल और रहने की जरूरत है।

सीएटी ने कहा था कि नियमों के अनुसार चार सालों के प्रशिक्षण में एक साल एमसीआई के मान्यता प्राप्त अस्पताल में होना चाहिए। ट्रिब्यूनल का फैसला तीन चिकित्सकों की याचिका पर आया है, जिन्होंने एम्स में अस्पताल प्रशासन के सहायक प्रोफेसर पद के लिए आवेदन किया था। उन्होंने जैन की नियुक्ति को अपेक्षित योग्यता नहीं होने के आधार पर चुनौती दी थी। जैन ने अपने बचाव में दावा किया था कि उनकी डीएनबी डिग्री, एमडी डिग्री के समतुल्य है और इसलिए वह पद के योग्य हैं।


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... तो कल राहुल गांधी की मौजूदगी में ये 'ऐलान' कर चौंकाएगी कांग्रेस! भाजपा के 'मिशन-25' को लगेगा झटका!


जयपुर/नई दिल्ली।

लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) के मद्देनज़र राजस्थान में मंगलवार को कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी (Congress President Rahul Gandhi) के दौरे के दौरान चौंकाने वाली बात देखने को मिल सकती है। सूत्रों की मानें तो राहुल के दौरे में ही प्रदेश कांग्रेस कुछ निर्दलीय विधायकों को पार्टी में शामिल कर सकती है। माना जा रहा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता निर्दलीय विधायकों के सम्पर्क में हैं और संभावना है कि राहुल की मौजूदगी में ही ज़्यादातर निर्दलीय विधायकों को कांग्रेस में शामिल करने की औपचारिक घोषणा की जा सकती है।

 

दरअसल, कांग्रेस ने राजस्थान विधानसभा में पार्टी से बगावत कर निर्दलीय जीतकर विधानसभा पहुंचने वाले विधायकों को साथ लाने की रणनीति तैयार की थी। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं को इस सिलसिले में ज़िम्मेदारियाँ भी दी गईं थीं, जिसके बाद उन्होंने ऐसे निर्दलीयों से संपर्क भी साधा था। अब बताया जा रहा है कि 26 मार्च मंगलवार को प्रस्तावित राहुल गांधी के दौरे के दौरान इसका औपचारिक ऐलान किया जा सकता है।

 

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में इस पर विस्‍तार से चर्चा की गई है। सूत्रों की मानें तो इस महत्वपूर्ण बैठक में सहमति बनी कि निर्दलीय विधायकों को पार्टी में शामिल कराया जा सकता है।

 

इसलिए कर रहे निर्दलीयों को पार्टी में शामिल
पार्टी के एक वरिष्‍ठ नेता के मुता‍बिक अगर कांग्रेस के मौजूदा मंत्री या विधायक लोकसभा चुनाव जीतते हैं तो राज्‍य सरकार पर खतरा मंडरा सकता है। ऐसे में निर्दलीय विधायकों के साथ आ जाने से बहुमत का खतरा टल जाएगा। वर्तमान में राज्‍य विधानसभा में कांग्रेस के 100 विधायक हैं और एक सीट वाली राष्‍ट्रीय लोकदल के विधायक सरकार में शामिल हैं।

 

सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में निर्दलीय विधायकों को साथ लाने का फॉर्मूला रखा गया है। इसमें गहलोत ने तर्क दिया है कि इससे बड़े चेहरों को लोकसभा में उतारने से प्रदेश सरकार पर किसी प्रकार का संकट नहीं आएगा व पार्टी को जालौर सिरोही, जयपुर ग्रामीण, अलवर, सीकर, अजमेर, पाली, टोंक - सवाईमाधोपुर, बांसवाड़ा - डूंगरपुर सीट पर मजबूती मिलेगी।

 

सीएम गहलोत ने भी साधा संपर्क
जानकारी के अनुसार सीएम अशोक गहलोत ने भी कुछ निर्दलीय विधायकों से हाल ही में मुलाकात की है। लोकसभा का टिकट पाने की आस लगाए कांग्रेस के बागियों के अलावा कुछ भाजपा के बागी विधायक भी कांग्रेस नेताओं के सम्पर्क में है।

 

इन निर्दलीयों के संपर्क में कांग्रेस
प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे ने भी जयपुर दौरे के दौरान निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा, सुखबीर सिंह जोजावर, राजकुमार गौड, बलजीत यादव, रामकेश मीणा, महादेव सिंह खंडेला, आलोक बेनीवाल, लक्ष्मण सिंह, बाबूलाल नागर और रमीला खाडिय़ा से मुलाकात की थी। हालांकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट इस फैसले के पक्ष में नहीं बताए जा रहे है। मीडिया के सामने भी पायलट निर्दलीयों की घर वापसी को पूरी तरह से नकार चुके है।


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18 के बजाय अब केवल 9 महीने में होगा एमडीआर टीबी मरीजों का इलाज


विकास जैन/जयपुर. टीबी की गंभीर स्थिति एमडीआर टीबी से पीडि़त मरीजों को अब उपचार में करीब आधा ही समय लगेगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन की नई गाइडलाइन के अनुसार अल्पकालीन ड्रग रेजिस्टेंस थैरेपी अब दीर्घकालिक ड्रग रेजिस्टेंस थैरेपी से अधिक कारगर है। अल्पकालीन थैरेपी की शुरुआत में 4 माह तक सैकंड लाइन 4 दवाइयां और दूसरे चरण में 5 माह तक 4 दवाइयां दी जाएंगी। शॉर्टर थैरेपी 90 प्रतिशत, जबकि दीर्घकालिक थैरेपी 78 प्रतिशत मरीजों में असरकारी पाई गई। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ नरेन्द्र खिप्पल के अनुसार प्रारंभिक टीबी के इलाज में पहले इस्तेमाल किए जाने वाले इंजेक्शन की अब आवश्यकता नहीं है। माना गया है कि इससे साइड इफेक्ट कम होंगे। राजस्थान में यह इलाज शुरू हो चुका है।

यह है एमडीआर टीबी
टीबी फैलाने वाला अति सुक्ष्म जीवाणु माइक्रोबैक्टेरियम ट्यूबरक्यूलाई साधारण बीमारियों से प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ले तो उसे एमडीआर टीबी कहते हैं। इसका इलाज 24 महीनों तक सैकंड लाइन दवा से होता है। यदि टीबी का जीवाणु सैकंड लाइन दवा से भी प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ले तो उसे एक्सडीआर टीबी कहा जाता है। संस्थान के डॉ. जीएस राजावत का कहना है टीबी का पूरा उपचार इस समय मौजूद है। पूरी दुनिया के एक चौथाई मरीज भारत में है।

दो तीन-महीने में आती थी रिपोर्ट
डॉ. खिप्पल के अनुसार पहले एमडीआर टीबी जांच के लिए कल्चरल सेंसेटिविटी की रिपोर्ट दो से तीन महीने में आती थी। जिसके कारण मरीज के उपचार में देरी होती थी। इसका इलाज भी 18 से 24 महीनों तक चलता था। अब एमडीआर टीबी की जांच व इलाज दोनों आसान होंगे।


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राजस्थान भाजपा की दूसरी सूची आज होगी जारी! इन सीटों पर चौंका सकते हैं नाम


जयपुर।

भाजपा पार्टी सूत्रों के मुताबिक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) सोमवार दोपहर विभिन्न राज्यों की कोर कमेटियों की बैठक लेंगे। राजस्थान की कोर कमेटी को भी दिल्ली बुलाया है। प्रदेश से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर, प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी, संगठन महामंत्री चन्द्रशेखर समेत कुछ अन्य नेता शाह के साथ बैठक करेंगे। 9 में से जिन सीटों पर सहमति बन जाएगी, उन सीटों पर प्रत्याशियों (BJP Candidate Second List in Rajasthan 2019) की घोषणा सोमवार को हो सकती है।

 

देर रात प्रत्याशियों को लेकर मंथन (Lok Sabha Election 2019)
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के आवास पर रविवार देर रात 9 लोकसभा सीटों के प्रत्याशियों को लेकर मंथन चला। इस बैठक में मुख्य जोर नागौर, चूरू, अलवर, भरतपुर, करौली—धौलपुर सीटों को लेकर रहा। प्रत्याशी चयन का काम अंतिम चरण में है और पैनल तैयार कर अमित शाह को भेजा जाएगा। शाह की ओर से कराए सर्वे के नामों और पैनल में भेजे नामों का मिलान कर प्रत्याशी की घोषणा की जाएगी।

 

इन सीटों पर संभावित उम्मीदवारों को लेकर विवाद
भाजपा ने जिन सीटों पर विवाद के चलते प्रत्याशी की घोषणा रोकी थी, उन पर घमासान बढ़ता जा रहा है। सबसे ज्यादा घमासान नागौर सीट पर है। केन्द्रीय मंत्री सीआर चौधरी को नागौर से प्रत्याशी नहीं बनाने को लेकर जिले के छोटे से बड़े कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया। विरोध करने वाले नेताओं में नागौर जिले के दो बड़े जाट नेताओं सहित राजपूत, ब्राह्मण, वैश्य, एससी समेत सभी जातियों के नेता शामिल हो गए हैं। वहीं चूरू सीट से मौजूदा सांसद राहुल कस्वां के नाम पर पार्टी के दिग्गज नेता पूर्व मंत्री राजेन्द्र राठौड़ की असहमति बनी हुई है। राजसमंद सीट से मौजूदा सांसद हरिओम सिंह ने चुनाव लडऩे से मना कर दिया है। जिसके बाद पूर्व विधायक दीया कुमारी के नाम पर पार्टी के कई बड़े नेता लॉबिंग कर रहे हैं। वहीं करौली-धौलपुर सीट पर वर्तमान सांसद मनोज राजोरिया का विरोध लगातार जारी है। ऐसे में इन सीटों पर प्रत्याशियों के नामों को लेकर बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।


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ऐसे थे जयपुर के चौकीदार, खजाने की रक्षा में बेटे का सिर भी किया था कलम


जयपुर. चौकीदार शब्द को लेकर आज राजनीति में खलबली मची हुई है। चुनाव से पहले यह शब्द कुछ ज्यादा ही गूंज रहा है। आज के जमाने में चौकीदार हर जगह हैं, लेकिन बीते कल में तत्कालीन ढूंढाड़ राज्य के चौकीदारों की बहादुरी की चर्चा आज भी होती है। हमारे स्तंभाकार जितेंद्र सिंह शेखावत ने की जयपुर की चौकीदारी प्रथा की पड़ताल-

जयपुर के ढूंढाड़ राज्य की प्रजा के जान-माल और सरकारी खजानों की सुरक्षा का जिम्मा ईमानदार और वफादार चौकीदारों के पास था। ढूंढाड़ व शेखावाटी सहित करीब डेढ़ हजार गांवों व कस्बों में माकूल चौकीदारी व्यवस्था रही। सन् 1940 में इस व्यवस्था में सुधार करने के लिए बनी कमेटी ने यहां सुदृड़ चौकीदारी प्रबंधन को राजपूताना की दूसरी रियासतों से बेहतर बताया।

मीणा जाति के इतिहासविद् रावत सारस्वत ने मीणा जाति को वफादार, ईमानदार और अतिविश्वस्त बताया और लिखा कि जयगढ़, नाहरगढ़ आदि के गुप्त खजानों की रक्षा का काम मीणा जाति के पास रहा। सारस्वत ने लिखा कि जयपुर क्षेत्र के मीणा जमींदार कहलाते हैं। इसके विपरीत चौकीदार कहलाने वाले कुछ मीणा शेखावाटी व जयपुर के हैं। कछवाहा राजपूतों ने ढूंढाड़ का मीणा शासन छीना, तब मीणा राजाओं के बीच सालों तक खूनी संघर्ष का दौर चला।

आमेर के राजा कुंतल व बाद में भारमल ने राजनीतिक मित्रता का सूत्रपात करते हुए बारह गावों के मीणों को जयगढ़, नाहरगढ़ आदि अकूत खजानों का प्रभारी नियुक्त कर जागीरदार बनाया। सन् 1924 में चौकीदारी विभाग को किलेजात बक्षीखाना विभाग में शामिल कर दिया गया। मीणा इतिहास में लक्ष्मीनारायण झरवाल ने लिखा कि नाहरगढ़ किले के मीणा सरदार ने खजाने की मामूली जानकारी लीक होने पर अपने बेटे का सिर कलम कर दिया था। आजादी के बाद तक जयगढ़ आदि खजानों की चाबी मीणा सरदारों के पास रही।

गहनें यों ही छोड़कर चले जाते थे
इतिहासकार हनुमान शर्मा ने लिखा कि मीणा प्रजा व सरकारी धन के असली रक्षक रहे। ये पर्वतों की खोह में रहते हैं। ये पहरायत या चौकायत के रूप में रहकर जनधन की रक्षा करते हैं। बड़ी चौपड़ पर तख्तों पर बैठ सोना-चांदी का कारोबार करने वाले अपना सोना चांदी घर ले जाने के बजाय विश्वसनीय चौकीदारों के भरोसे वहीं छोड़कर घर चले जाते।

बहादुरी के किस्से आज भी मशहूर
सातों मुख्य प्रवेश द्वारों के साथ सुरक्षा का काम भी इनके पास रहा। बिज निवासी हीदा तो जयसिंह द्वितीय के कहने पर कांचीपुरम से वरदराज विष्णु की मूर्ति को जयपुर ले आया। विद्वानों ने अश्वमेध यज्ञ के लिए इस मूर्ति को महाराजा से मांगा था। मूर्ति लाने पर बहादुरी से खुश हो जयसिंह ने सूरजपोल परकोटे के एक रास्ते का नाम हीदा की मोरी रखा। माधोसिंह के विश्वस्त रघुनाथ ने रामसागर की शिकार ओदी पर बिना हथियार के एक शेर से मुकाबला कर मार दिया था।


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जेडीए की अनदेखी से बिगड़ी जयपुर की छोटी काशी की दशा


जयपुर. कहीं कचरे-गन्दगी के ढेर, कहीं लावारिस जानवर। कहीं ऊबड़-खाबड़ सड़क, कहीं अधूरा पड़ा निर्माण कार्य। कहीं अदूरदर्शिता से किए गए निर्माण की 'ठोकरÓ तो कहीं कीचड़। यह हाल है शहर से 20 किलोमीटर दूर 'जयपुर की छोटी काशीÓ नाम से मशहूर धार्मिक नगरी गोनेर का। दावा था कि गोनेर को डिजीटल नगरी बनाएंगे, लेकिन जेडीए ने उलटे कदम-कदम पर मुसीबतें खड़ी कर दी हैं।

गोनेर में भगवान लक्ष्मी-जगदीश के दर्शन करने रोजाना सैकड़ों और धार्मिक अवसरों पर हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी के मद्देनजर जेडीए ने 2 साल पहले 3.26 करोड़ रुपए लागत से विकास कार्यांे की प्रक्रिया शुरू की थी। गांव में मुख्य मार्गों पर सीसी रोड निर्माण का कार्य भी इसमें शामिल था। जेडीए ने इनमें से कुछ सड़कें तो बनाईं लेकिन बाद में काम बंद कर दिया। कार्यादेश जारी होने और 2 साल बीतने के बाद भी जेडीए जगदीश चौक में टाइल्स का लगाने का कार्य तक नहीं करा पाया है। कई माह से काम बंद होने के कारण गोनेर वासियों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं।

2 वर्ष बाद भी काम अधूरा
3.26 करोड़ लागत के विकास कार्य हुए थे स्वीकृत
2 वर्ष पूर्व जारी हुआ कार्यादेश मगर काम अब तक अधूरा
20 मीटर तक चहुंओर लगनी हैं चौक में इंटरलॉकिंग टाइल्स

ये कार्य अधूरे
- गली-मौहल्लों में सड़कें अधूरी
- सुलभ शौचालय पर जेडीए ने लगा रखा है ताला
- मोक्षधाम का साइट प्लान बाकी
- कई रोड लाइटें बंद
- टेलीमेडिसिन सेन्टर कमरे में बंद
- कैमरे हैं मगर रिकॉर्डिंग नहीं होती
- डिजिटल लर्निंग सेन्टर अब तक नहीं हुआ चालू

जिम्मेदार बोले
- निर्माण कार्य सप्ताहभर में शुरू करा दिया जाएगा।
राजकुमार गोयल, ठेकेदार
- जेडीए अधिकारियों को बताया लेकिन निर्माण कार्य अब तक अधूरे पड़े हैं। सीएम को ज्ञापन देंगे।
अरुण जैन सेठी, उपसरपंच, गोनेर

जल्दी पूरे कराएंगे अधूरे काम
डिजीटल करने का प्रोजेक्ट सिस्को का था। वह सीएसआर के तहत यह काम कर रहा था। अधूरे काम जल्दी पूरे कराए जाएंगे।
सुरेश मीणा, अधीक्षण अभियंता (विद्युत), जेडीए


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सड़कों पर वाहन चालकों पर होने वाले चालान से आखिर क्यों परेशान हैं प्रदेश की अदालतें


शैलेन्द्र अग्रवाल/जयपुर. वाहन चालकों को सड़क पर निकलते ही चालान का डर सताता है, वहीं प्रदेश की अदालतें चालानों के अम्बार से परेशान हैं। प्रकरणों के इस अम्बार को कम करने के लिए 31 दिसम्बर 17 तक के मामले समाप्त कराने के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने पहल की है लेकिन आचार संहिता के कारण प्रस्ताव गृह विभाग में ही अटका हुआ है। प्रदेशभर में वाहन चालान मामलों की पांच अदालत हैं, जिनमें से चार जयपुर में हैं। इनमें से तीन न्यायालय अकेले जयपुर महानगर जिला न्यायालय के अधीन हैं। इन तीनों न्यायालयों में 40 से 45 हजार मामले लम्बित हैं और एक-एक न्यायालय में 12 से 15 हजार मामले हैं। अदालतों की परेशानी यह है कि इन प्रकरणों से जुड़े चालान में पुलिस आधे-अधूरे नाम पते भरती है, जिससे समन ही जारी नहीं हो पा रहे हैं।

उधर, इन अदालतों में फाइलों का अंबार लग गया है। न केवल विचाराधीन फाइलें इनमें कागजों के पहाड़ की तरह नजर आती हैं, बल्कि निस्तारित फाइलें भी बस्तों में बंधी पड़ी हैं। निस्तारित फाइलों को रखने की जिला न्यायालय परिसर में फिलहाल जगह नहीं होने से कर्मचारियों के बैठने के कमरे घिरे हुए हैं। फाइलों के ढेर से न्यायिक अधिकारियों के चेम्बर भी नहीं बच पाए हैं। जज की डायस के दोनों ओर से फाइलों के पहाड़ से खडे हो गए हैं।

चाहिए 64 कर्मचारी, उपलब्ध 6 ही
एक न्यायालय में औसतन एक लिपिक के पास 500 से 700 फाइल होनी चाहिए, लेकिन हकीकत यह है कि एक न्यायालय में 5 से 6 लिपिक हैं और वे ही 12 से 15 हजार फाइलों को संभाल रहे हैं।

6 माह बाद प्रसंज्ञान का अधिकार नहीं
विशेषज्ञों के अनुसार कानून कहता है कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान होने के बाद कोर्ट 6 माह में ही प्रसंज्ञान ले सकती है, उसके बाद कोर्ट को प्रसंज्ञान लेने का अधिकार नहीं है।

फैसले से पहले ही उड़ जाती है स्याही
पुलिस और परिवहन विभाग ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान के सिस्टम को ऑनलाइन करने के लिए मशीनों के जरिए चालान काटे जा रहे हैं, लेकिन उनकी स्थिति यह है कि मशीन से निकलने वाले चालान के प्रिंट से कुछ ही दिन बाद स्याही उड़ जाती है या फीकी नजर आने लगती है। इससे पता चलना ही मुश्किल है कि चालान शराब पीकर वाहन चलाने का है या लाल बत्ती क्रॉस करने का है या पीछे वाली सवारी के हेलमेट नहीं लगाने का है।

2 साल बाद वापस लिए जाते हैं मामले
अब तक दो साल बाद इस तरह के प्रकरणों को वापस लिया जाता रहा है। बताया जाता है कि लम्बित प्रकरणों के बोझ से दबी अदालतों की स्थिति को देखते हुए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने मुकदमों की संख्या में कमी लाने की पहल की है। इसके लिए 31 दिसम्बर 17 से पहले के लम्बित प्रकरणों को वापस लेने के लिए पुलिस को प्रस्ताव भेजा गया है।

परिवहन अधिकारी बनाते हैं दबाव
मार्च होने के कारण परिवहन अधिकारियों को बकाया राशि की अधिक से अधिक वसूली करने के लिए टार्गेट मिले हुए हैं। पुलिस को भी अधिक से अधिक चालान करने के लिए टार्गेट मिले हुए हैं। इस कारण परिवहन अधिकारी तो पहले पुराना बकाया जमा कराने के लिए दवाब बनाते हैं, जबकि कानून कहता है कि पुराने चालान के मामले में कोर्ट भी 6 माह बाद प्रसंज्ञान नहीं ले सकता।

पुलिस राजकार्य में व्यस्त
कोर्ट की एक परेशानी यह भी है कि चालान के मामले में समन की तामील पुलिस को करानी होती है, लेकिन पुलिस कभी वीआइपी मूवमेंट, तो कभी आइपीएल मैच के आयोजन या अन्य किसी कार्य में व्यस्त होने का तर्क देती है। इन कार्यों का हवाला देकर कोर्ट से समय ले लेती है। कोर्ट भी पुलिसकर्मी की व्यस्तता देखकर केस में अगली तारीख दे देती है।


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Lok Sabha Election 2019 : वैभव गहलोत के लोकसभा चुनाव लड़ने को लेकर CM गहलोत पर BJP नेता ने साधा निशाना


जयपुर।

लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Chunav 2019) का बिगुल बजते ही पार्टियां अलर्ट मोड़ में आ गई हैं। बीजेपी ने जहां राजस्थान में 16 नामों के प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की वहीं कांग्रेस ने रविवार को अपने 40 स्टार प्रचारकों की सूची (Congress Star Campaigners List) भी लांच कर दी है। इस दौरान कांग्रेस ने राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot), डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Deputy CM Sachin Pilot) और विश्वेन्द्र सिंह को जिम्मेदारी दी है। इसी के साथ पार्टियों में इन दिनों जमकर बयानबाजी का दौर भी देखा जा रहा है।

 

हाल ही में राजस्थान सरकार में पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़ (Rajendra Rathore) ने सीएम अशोक गहलोत पर निशाना साधा और कहा कि गहलोत जोरों-शोरों से अपने पुत्र वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot Contest Lok Sabha Election 2019) की लोकसभा चुनाव लड़ाने के लिए लांचिंग करने में लगे हैं, लेकिन अभी तक किस सीट से पुत्र चुनाव लड़ेगा यह भी तय नहीं कर पाए हैं। वे अभी तक भ्रम की स्थिति में हैं कि वैभव को लड़ाना है या नहीं। ऐसे में अंदाजा लगा सकते हैं कि राजस्थान का नेतृत्व पुर्णत: असमंजस की स्थिति में हैं।

 

READ : कांग्रेस ने जारी की स्टार प्रचारकों की सूची, CM गहलोत, डिप्टी CM पायलट समेत इन 40 दिग्गजों को मिली जिम्मेदारी

 

साथ ही सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को बने हुए तीन माह ही हुए हैं, लेकिन अभी से ही राज्य में अपराधियों के हौंसले बुलंद है। सरकार की आर्थिक स्थिति डगमगा गई है। चुनावों में जनता सरकार के खिलाफ वोट कर कांग्रेस को सबक सिखाएगी। वहीं विधानसभा चुनावों में हार क्यों हुई इसके बारे में कहा कि वो चुनाव अलग मुद्दों पर था, लेकिन इस बार के चुनाव में जनता मोदी सरकार के विकास कार्यों के आधार पर भाजपा को वोट करेगी।

 

राठौड़ ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता आधारित एवं सिद्धांतों पर चलने वाली पार्टी है। किसी नेता के कहने पर टिकटों का वितरण नहीं होता है। इसके लिए एक पैनल मिलकर उम्मीदवार के नाम का चयन करता है,लेकिन कांग्रेस पार्टी टुकड़ों में बंटी हुई पार्टी है। जहां टिकट को लेकर पैनल की बैठक में दिग्गज नेता नाम तो तय कर लेते हैं, लेकिन आखिर में टिकट वितरण का फैसला एक परिवार मिलकर करता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार भी मोदी के नेतृत्व में उनकी पार्टी राजस्थान की सभी लोकसभा सीटों पर चुनाव जीतेगी।


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लोकसभा की इस सीट के लिए कांग्रेस में बवाल! इस समाज के उम्मीदवारों ने खोला विरोध का मोर्चा


जयपुर।

भाजपा की ओर से जयपुर सीट (Jaipur Lok Sabha Seat) पर सांसद रामचरण बोहरा (Ramcharan bohra) को ही टिकट दिए जाने से कांग्रेस में तय किए जा चुके नामों के अलावा दूसरे विकल्पों पर भी मंथन चल रहा है। ऐसे में जयपुर सीट से टिकट मांग रहे ब्राह्मण नेताओं ने लामबंद होकर विरोध शुरू कर दिया है। जयपुर सीट (Lok Sabha Election 2019) के उम्मीदवार अब तक अलग-अलग धड़ों में बंटे नजर आ रहे थे, लेकिन किसी दूसरे समाज के उम्मीदवार की चर्चाओं के बाद सभी ब्राह्मण उम्मीदवार एक साथ होकर विरोध में आ गए हैं।

 

जयपुर शहर के सभी ब्राह्मण नेताओं ने प्रदेश प्रभारी अविनाश पाण्डे को ज्ञापन सौंपा है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट और प्रदेश प्रभारी सचिव विवेक बंसल से मुलाकात कर ब्राह्मण उम्मीदवार के अलावा अन्य किसी को टिकट देने पर कांग्रेस को बड़े खतरे की चेतावनी दी है। इसमें कहा गया है कि यदि वैश्य या राजपूत को टिकट दिया गया तो शहर में कांग्रेस कमजोर होगी।

 

वहीं दूसरी ओर... कांग्रेस ने जयपुर बुलाए 42 हजार शक्ति कार्यकर्ता
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी मंगलवार को प्रदेश के चुनावी दौरे पर आ रहे हैं। उनकी सूरतगढ़ और बूंदी की जनसभाओं और जयपुर में शक्ति कार्यकर्ताओं के कार्यक्रमों की तैयारियों को लेकर रविवार को प्रदेश कांग्रेस के नेता तैयारियों में जुटे रहे। जयपुर के रामलीला मैदान में होने वाले शक्ति कार्यकर्ताओं के कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेने के लिए सचिन पायलट, विवेक बंसल और प्रदेश के कई मंत्री पहुंचे। बूंदी और सूरतगढ़ की तैयारियों को लेकर भी पदाधिकारियों से फीडबैक लिया गया। सोमवार को पायलट बूंदी व सूरतगढ़ जा सकते हैं।


कार्यक्रम में प्रदेश में तैयार किए गए करीब 42 हजार बूथ कार्यकर्ताओं को बुलाया गया है। विधानसभाओं में शक्ति कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देकर घर-घर कांग्रेस ऐप के जरिए प्रचार-प्रसार करने के लिए कहा गया था। 3 विधानसभाओं में कार्यक्रम नहीं हो सके थे। कार्यक्रम में प्रशिक्षण देने वाले करीब 101 ट्रेनर के साथ ही प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारी, जिलाध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्षों को आमंत्रित किया गया है। गांधी उन टॉप टेन कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित करेंगे, जिन्होंने कांग्रेस के घर-घर-ऐप को लेकर प्रचार-प्रसार में सबसे अच्छा काम किया है।सूत्रों के मुताबिक पार्टी की ओर से जयपुर के कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय व शक्ति के जरिए संदेश देकर करीब 45 हजार को आमंत्रित किया गया है।


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भारत की ताकत से घबराया पाक खरीदेगा चीनी ड्रोन


जोधपुर. पिछले एक महीने में ड्रोन या यूएवी (अनमैन्ड एरियल व्हीकल) से भारतीय सेना की गतिविधियों की टोह लेने में मात खाने से परेशान पाकिस्तान अब हथियारबंद चीनी यूसीएवी (अनमेन्ड कॉम्बेट एरियल व्हीकल) खरीदने जा रहा है। इन्हें नियंत्रण रेखा के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात किया जाएगा।
पाकिस्तान के पास मिलिट्री सैटेलाइट नहीं है। उसके पास भारतीय सेना की रियल टाइम पोजिशन प्राप्त करने का एकमात्र सहारा यूएवी है। लेकिन पिछले महीने में भारतीय सेना ने उसके एक दर्जन से अधिक यूएवी मार गिराए हैं। अकेले ११ यूएवी श्रीगंगानगर में नीचे गिराए जा चुके हैं और पाक को भारतीय सुरक्षा बलों की तैयारियों के बारे में कोई खास जानकारी भी हासिल नहीं हो सकी है। परेशान पाक यूसीएवी प्रकार के ड्रोन खरीदने की तैयारी में फिराक में है ताकि भारतीय सेना की एंटी एयरक्राफ्ट गन का जवाब दे सके।

एडवांस चीनी ड्रोन करते हैं हमला

पाकिस्तान चीन से करीब ४८ सीएच (काई हंग)-४ और सीएच-५ प्रकार के यूसीएवी यानी ड्रोन खरीदेगा। सीएच-४ ड्रोन ४०० किलोग्राम तक विस्फोटक लेकर उड़ता है और करीब ४० घण्टे तक आसमान में रह सकता है। इसकी रेंज पांच हजार किलोमीटर है। वहीं सीएच-५ अत्याधुनिक एडवांस ड्रोन है जो १००० किलो विस्फोटक के साथ ६० घण्टे हवा में रह सकता है। ये दोनों १७ हजार फीट ऊंचाई से हमला कर सकते हैं। सीएच-५ के पंख की लम्बाई ही २१ मीटर है जो ३ टन वजन के साथ उड़ता है। इसमें एक १६ मिसाइल आ सकती है तो वह हवा से सतह में फायरिंग कर सकता है।

जेएफ-१७ पर लगाएगा राडार
पाक ने शनिवार को अपने गणतंत्र दिवस के मौके पर सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया। पाक व चीन के संयुक्त रूप से तैयार जेएफ-१७ लड़ाकू विमान ने विभिन्न मैनुवर दिखाए। अब पाक जेएफ-१७ पर राडार लगाने जा रहा है ताकि वह अपनी सीमा से ही भारत की गतिविधियों पर नजर रख सके। भारतीय वायुसेना के पास पहले से ही नेत्र प्रणाली मौजूद है।


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इस किशोरी के समर्थन में कूद पड़े 100 से अधिक देशों के बच्चे


जयपुर.

आपने बच्चों को खेलकूद, सिनेमा और मस्ती के लिए स्कूल बंक करने तो देखा और सुना होगा, लेकिन धरती की चिंता को लेकर पहली बार पूरी दुनिया के बच्चे स्कूलों से बाहर निकले हैं। 100 से अधिक देशों में 1700 से अधिक स्थानों पर बच्चों को विश्वव्यापी प्रदर्शन इतनी छोटी बात भी नहीं। ये एक ऐसी चिंता है, जो पर्यावरणविद और वैज्ञानिकों के दायरे से निकलकर बच्चों के जेहन में कूदी है। धीरे-धीरे ये विचार आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। इस पूरे मिशन की सूत्रधार स्वीडन की १६ वर्षीय किशोरी ग्रेटा थनबर्ग है, जिसने धरती के बदल रहे मिजाज पर पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। अगस्त 2018 में ग्रेटा थनबर्ग ने स्वीडिश संसद के बाहर जलवायु के लिए एक स्कूल हड़ताल शुरू की थी, जो अब पूरे विश्व में फैल चुकी है। अब इससे पूरी दुनिया के लाखों स्कूली बच्चे जुड़ चुके हैं। इस आंदोलन को अब फ्राइडे फॉर फ्यूचर कहा जाता है। ग्रेटा ने कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों को संदेश भेजकर इस पर गंभीर कदम उठाने की मांग की है।

हमने सिर्फ दोहन किया, खतरों को बुलाया
ग्रेटा का कहना है कि हमने कुदरत के खजाने का अपने स्वार्थ के लिए सिर्फ दोहन किया है, पर्यावरण बचाने के उपाय कुछ नहीं किए। कार्बन उत्सर्जन, समुद्रों में कचरा, जंगलों की कटाई जैसे आत्मघाती कृत्यों से जलवायु बदल रही है। हालात बदतर होते जा रहे हैं। तापमान बढऩे से बर्फ पिघल रही है, जिससे समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है। खेत बंजर होने लगे हैं।

और जलवायु संरक्षण का चेहरा बन गई गे्रटा
दिसंबर 2018 में पौलेंड में हुई क्लाइमेट चेंज कॉन्फ्रेंस में अपने धारदार भाषण के बाद ग्रेटा जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई का बड़ा चेहरा बनकर उभरी थी। विश्व के पर्यावरणविदों और राजनेताओं ने ट्वीट किया कि यह छोटी बच्ची ‘बड़ों’ को उनकी जिम्मेदारी का अहसास करवा रही है। ग्रेटा ने ट्विटर पर 'अस्पेर्गेर सिंड्रोम' के साथ पर्यावरण कार्यकर्ता के रूप में खुद की पहचान बताई है।
13 साल की अलेक्जेंड्रिया तीन माह से सर्दी, बर्फ और बारिश के बीच हर शुक्रवार दे रही है धरना
जलवायु परिवर्तन पर दुनिया का ध्यान खींचने वाली दूसरी किशोरी हैं मैनहट्टन की 13 वर्षीय अलेक्जेंड्रिया विलसनोर, जो ग्रेटा से प्रेरित होकर धरती बचाने मुहिम से जुड़ी हैं। अलेक्जेंड्रिया तीन महीने से सर्दी, बर्फ और बारिश के बीच हर शुक्रवार संयुक्त राष्ट्र संघ कार्यालय के बाहर स्कूल स्ट्राइल फॉर क्लाइमेट की तख्ती लेकर बेंच पर बैठ जाती हैं। अलेक्जेंड्रिया कहती हैं भविष्य के लिए ये दुनिया को जगाने का प्रयास कर रही हैं।

ग्रेटा की चिंता इसलिए
0.74 डिग्री तापमान बढ़ा है पूरी दुनिया का पिछले 100 सालों में
100 साल में 4 फीसदी तक कार्बन उत्सर्जन रोकने पर पूरी दुनिया में चिंता।
14 डिग्री है इस वक्त पृथ्वी का औसत तापमान
1.5 डिग्री सेल्सियस तक तापमान वृद्धि रोकने के लिए 2015 में पेरिस जलवायु समझौते में 195 देशों ने हस्ताक्षर किए। कार्बन उत्सर्जन में कमी पर सहमति जताई। बाद में अमरीकी राष्ट्रपति ने खुद को समझौते से अलग किया।


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कांग्रेस ने जारी की स्टार प्रचारकों की सूची, CM गहलोत, डिप्टी CM पायलट समेत इन 40 दिग्गजों को मिली जिम्मेदारी


जयपुर।

लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) के लिए राजस्थान में जहां कांग्रेस के प्रत्याशियों की पहली सूची का इंतजार हो रहा है वहीं कांग्रेस ने स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है। चुनावी तैयारी में जुटी कांग्रेस ने रविवार को 40 स्टार प्रचारकों की सूची (Congress Star Campaigners List) जारी कर दी है। कांग्रेस की स्टार प्रचारकों की सूची में सोनिया गांधी, अध्यक्ष राहुल गांधी (Congress President Rahul Gandhi), महासचिव प्रियंका गांधी ( Congress General Secretary Priyanka Gandhi) को मुख्य प्रचारक के तौर पर होंगे।

 

साथ ही अलग-अलग राज्यों के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्रियों को भी स्टार प्रचारकों में शामिल किया है। सूची में सबसे ऊपर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम है वहीं पांचवे नंबर पर प्रियंका गांधी का नाम शामिल है।

 

वहीं स्टार प्रचारक की सूची में राजस्थान से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Rajasthan CM Ashok Gehlot) का नाम ग्यारहवे नंबर पर और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट (Deputy CM Sachin Pilot) का नाम 19वें नंबर पर शमिल किया गया है। इसी के साथ राजस्थान सरकार में मंत्री विश्वेन्द्र सिंह (Congress Minister Vishvendra Singh) का नाम भी सूची में है। मंत्री विश्वेन्द्र सिंह का नाम सूची में 32वें नंबर रखा गया है।

 

ये हैं कांग्रेस के 40 स्टार प्रचारक

1. राहुल गांधी,
2. सोनिया गांधी,
3. मनमोहन सिंह,
4. मल्लिकार्जुन खड़गे,
5. ज्योतिरादित्य सिंधिया,
6. प्रियंका गांधी वाड्रा,
7. राज बब्बर,
8. अजय कुमार लल्लू,
9. मोहसिना किदवई,
10. गुलाम नबी आजाद,
11. अशोक गहलोत,
12. कैप्टन अमरिंदर सिंह,
13. कमलनाथ,
14. भूपेंद्र बघेल,
15. शीला दीक्षित,
16. भूपेंद्र सिंह हुड्डा,
17. मीरा कुमार,
18. हरीश रावत,
19. सचिन पायलट,
20. पीएल पुनिया,
21. नवजोत सिंह सिद्धू,
22. अशोक तंवर
23. तेजस्वी यादव,
24. मोहम्मद अजहरुद्दीन,
25. प्रमोद तिवारी,
26. आरपीएन सिंह,
27. जितिन प्रसाद,
28. प्रदीप जैन आदित्य,
29. राजीव शुक्ला,
30. राजाराम पाल,
31. इमरान मसूद,
32. विश्वेंद्र सिंह,
33. इमरान प्रतापगढ़ी,
34. नदीम जावेद,
35. हार्दिक पटेल,
36. कुं शैलजा,
37. ताम्रध्वज साहू,
38. अवतार सिंह भड़ाना,
39. दीपेंद्र सिंह हुड्डा,
40. मीम अफजल के नाम स्टार प्रचारक की सूची में शामिल किए गए हैं।


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संसद पर साइबर हमले से ऐसे बचा ऑस्ट्रेलिया


जयपुर.

हाल ही में ऑस्ट्रेलियाई संसद के महत्वपूर्ण डाटा में सेंध का प्रयास होने के बाद पूरी दुनिया में खलबली मच गई। हैकिंग की सूचना मिलते ही यहां की साइबर सिक्योरिटी चौकन्ना हो गई और संसद और राजनीतिक दलों से जुड़े अहम दस्तावेज चोरी होने से बच गए। तत्काल ही ऑस्ट्रेलिया सभी राजनीतिज्ञों के पासवर्ड भी बदल दिए। साइबर ठगों के इस प्रयास के बाद एक बार फिर पूरी दुनिया में साइबर सुरक्षा संदेह के घेरे में आ गई, वह भी तब जब साइबर सुरक्षा पर पूरी दुनिया 8.55 लाख करोड़ रुपए खर्च करने जा रही है। भारत में भी साइबर सुरक्षा पर पिछले वर्ष की तुलना में 12.5 फीसदी खर्च बढऩे का अनुमान है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि पूरी दुनिया की सूचनाएं इस वक्त हैकर्स के निशाने पर है। सभी देश समय-समय पर इसके लिए अलर्ट जारी करने के साथ ही साइबर सुरक्षा पर जरूरी कदम भी उठा रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई संसद में हैकिंग की कोशिश को स्थानीय मीडिया चीन का हाथ मान रहा है। इनका कहना है कि आर्थिक और राजनीतिक लाभ के लिए सूचनाएं चुराने का चीन का पुराना इतिहास है। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मोरिसन का कहना है कि अभी हैकर्स के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं है, लेकिन ये किसी विदेशी एजेंसी का हाथ हो सकता है। इसके लिए जरूरी उपाय कर लिए गए हैं। 2008 के चुनाव में कथित तौर पर चीन ने ओबामा और रिपब्लिकन उम्मीदवार रहे जॉन मैक्केन के अभियान की जानकारी चुराई थी।

साइबर सुरक्षा पर पूरी दुनिया के अरबों खर्च
साइबर सुरक्षा पर पूरी दुनिया मोटी राशि खर्च कर रही है। शोध संस्था गार्टनर के मुताबिक 2018 में साइबर सिक्योरिटी पर दुनियाभर में 7.86 लाख करोड़ रुपए खर्च हुए, जो 2017 की तुलना में 12.4 फीसदी ज्यादा था। 2019 में ये खर्च 8.55 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। भारत में साइबर सिक्योरिटी पर पिछले वर्ष 1.17 लाख करोड़ रुपए खर्च हुए थे, जो इस वर्ष 12.5 फीसदी बढक़र 1.31 लाख करोड़ होने का अनुमान है।

अमरीका व फ्रांस हुए हैकिंग के शिकार
2016 के अमरीकी चुनाव में उस वक्त की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के डेटा लीक्स के मामले में डेमोके्रटिक सरकार की काफी फजीयत हुई थी। ऐसा माना जाता है रूसी हैकर्स द्वारा चुराई गई तमाम जानकारियों का रणनीतिक रूप से इस्तेमाल किया गया, जिसका उद्देश्य डोनाल्ड ट्रंप को जिताना था। साइबर थ्रेट एलियंस इन्फॉर्मेशन शेयरिंग ग्रुप के अध्यक्ष डेनियल का कहना है कि 2017 के चुनाव में फ्रांस के राष्ट्रपति भी हैकिंग का शिकार हो गए थे। ऑस्ट्रेलिया ने दूसरे देशों के मामलों से सबक लेकर सावधानी बरती।


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लगातार पीठ दर्द हाे सकता है स्पाइनल स्टेनोसिस का संकेत


आजकल पीठदर्द आम बात है। किशोर से लेकर वृद्ध तक किसी न किसी रूप में पीठदर्द से परेशान हैं। ऐसा ही एक दर्द स्पाइनल स्टेनोसिस है। इस रोग की वजह से हमारे शरीर की डिसक उभरने लगती है और ऊत्तक मोटे हो जाते हैं जिससे रीढ़ नलिका से जाने वाली नस सिकुडऩे लगती है व पीठ में दर्द होता है।

यह है समस्या
स्पाइनल स्टेनोसिस में हमारी रीढ़ की हड्डी में मौजूद खुले स्थान बंद होने लगते है जिससे स्पाइनल कॉर्ड और नसों पर दबाव पड़ता है। ज्यादातर मामलों में स्पाइन का सिकुड़ना, स्टेनोसिस होने के कारण ही होता है जिससे नर्व रूट दबने से पैरों में दर्द, थकान, अकड़न व झनझनाहट महसूस होने लगती है।

अचानक पीठदर्द
इसका इलाज मुश्किल हो सकता है क्योंकि इस तरह के लक्षण किसी अन्य कारण से भी हो सकते हैं। जिन लोगों को स्टेनोसिस हो यह जरूरी नहीं की उन्हें पहले कभी पीठ में दर्द हो या कभी किसी तरह की चोट लगी हो। स्पाइनल स्टेनोसिस में अचानक पीठदर्द होता है जो आराम करने पर चला जाता है। अगर रोग अधिक न बढ़ा हो तो सर्जरी से उपचार संभव है। इसके लिए जरूरी है कि शारीरिक रूप से सक्रिय रहा जाए क्योंकि इससे रोग जल्दी ठीक होता है। छोटे-छोटे बदलाव जैसे स्ट्रेट जैकेटेड कुर्सी की जगह झुकने वाली चेयर से अच्छे परिणाम मिलते हैं।

सर्जरी में सावधानी
एपिडरल इंजेक्शन से मरीजों को ठीक किया जा सकता है। जिन लोगों को सर्जरी करानी पड़ती है उनके जल्दी ठीक होने में भी यह इंजेक्शन मददगार होता है। जब सभी प्रयास विफल हो जाते हैं तो सर्जरी ही विकल्प होती है। हालांकि सर्जरी से पहले मरीज के शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखना जरूरी होता है। फिर डॉक्टर को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह क्षतिग्रस्त नब्ज को पहचानकर उसका उपचार करे। इलाज करते समय पूरी सावधानी बरती जानी चाहिए कि किसी और नस को नुकसान न पहुंचे।


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