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प्रियंका गांधी का करिश्मा क्या बदल पाएगा 30 साल से UP में लगातार नीचे गिरते कांग्रेस के ग्राफ का आंकड़ा


डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी. यूपी की सियासत में कांग्रेस पिछले 30 साल से नीचे की ओर ही गई है। तीन दशक से उसे न कोई ऐसा दमदार नेता मिला जो पार्टी की नैया का खेवनहार बन सके। हालांकि इन 30 सालों में कांग्रेस कई बार केंद्र की सत्ता पर काबिज हुई। यहां तक कि यह वो दौर है जिसमें राजीव गांधी भी रहे। लेकिन वह भी कुछ खास नहीं कर सके। 1984 में आखिरी बार कांग्रेस ने रिकार्ड सीटें जीती थीं। लेकिन राजनीतिक विश्लेषक उसका श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को देते हैं। अब 2019 में एक बार फिर से कांग्रेस अपनी खोई जमीन की तलाश में है। इसी के तहत तुरुप का पत्ता के रूप में इंदिरा गांधी की पौत्री प्रियंका गांधी को मैदान में उतारा गया है। उम्मीद की जा रही है कि दादी के नक्शे कदम पर चलने वाली प्रियंका कांग्रेस के गिरते ग्राफ में सुधार करेंगी।

काफी आजमाए हाथ

बता दें कि इन 30 सालों में कांग्रेस ने अपने को फिर से प्रदेश की राजनीति की मुख्य धारा में वापसी के काफी प्रयास किए। क्षेत्रीय दलों से गठबंधन भी किया। इसमें कभी बसपा के साथ दोस्ती की तो कभी सपा के साथ। लेकिन इससे उसका नुकसान ही हुआ। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो बसपा से गठबंधन के बाद कांग्रेस का परंपरागत दलित वोटबैंक भी उसके हाथ से खिसक गया। इन्हीं 30 सालों में यूपी में मंडल-कमंडल का दौर भी आया, रामजन्म भूमि विवाद भी हुआ, अयोध्या में विवादित ढांचा गिराया गया। इन सबका लाभ परोक्ष या अपरोक्ष रूप से भाजपा को मिला। कांग्रेस पर अल्पसंख्यक तुष्टीकरण का आरोप भी लगा। नतीजा यह कि उसका परंपरागत ब्राह्मण वोटबैंक भी भाजपा की ओर शिफ्ट हो गया। 2014 में तो रही सही कसर भी पूरी हो गई जब कांग्रेस महज मां-बेटे यानी सोनिया गांधी और राहुल गांधी की जीत तक ही सिमट कर रह गई। राहुल गांधी भी भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी से महज एक लाख मतों से ही जीत पाए।

आंकड़े बताते हैं कि कभी 53 प्रतिशत के इर्द-गिर्द वोट पाने वाली कांग्रेस को यूपी में 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में 07 फीसदी वोट के भी लाले पड़ गए। 1951 के लोकसभा सभा चुनाव में इस पार्टी ने प्रदेश की 86 सीटों में से 81 सीटें जीत ली थी। तब इसका सबसे अधिक 52.99 वोट प्रतिशत था लेकिन उसके बाद 1984 के लोकसभा चुनाव को छोड़कर कांग्रेस का ग्राफ नीचे ही गिरता चला गया। 1984 में कांग्रेस ने 51.03 प्रतिशत मत हासिल कर 85 में से 83 सीटें जीत ली लेकिन 1991 के बाद पार्टी की जो दशा खराब हुई कि 1998 के चुनाव तक पार्टी दहाई की संख्या भी नहीं छी पाई। 1999 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को बमुश्किल 10 सीटें हासिल हुई। हालांकि 2009 में 21 सीटों पर सफलता हासिल हुई।

1980 सबसे बेहतरीन साल

पार्टी ने वर्ष 1980 में विधान सभा चुनाव में 424 में से 309 सीटें और 1985 में 425 में से 269 सीटें जीत लीं। वोट प्रतिशत भी 39.25 फीसदी तक पहुंच गया लेकिन इसके बाद कांग्रेस की हालत फिर से खराब होना शुरू हो गई। '90 के दशक के बाद इस पार्टी के लिए दो विधान सभा चुनाव ऐसे भी आए जिसमें पार्टी के करीब 85 प्रतिशत उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई थी। वोट प्रतिशत भी 8 प्रतिशत के करीब पहुंच गया।

2017 विधानसभा परिणाम सबसे निराशाजनक

2017 के विधानसभा चुनाव इसने सबसे खराब प्रदर्शन करते हुए मात्र 6.25 प्रतिशत वोट हासिल किए। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री व राजीव गांधी जैसे दिग्गज प्रधानमंत्री देने वाली कांग्रेस प्रदेश में फिर से खोया जनाधार पाने के लिए जद्दोजहद में लगी है।

यूपी लोकसभा चुनाव : कांग्रेस की स्थिति 1951 से 2014

क्रम- चुनाव वर्ष-उम्मीदवारों की संख्या- विजयी-प्रतिशत

1. 1951 86 81 52.99

2. 1957 86 70 46.29

3. 1962 86 62 38.02

4. 1967 85 47 33.44

5. 1971 85 73 48.54

6. 1977 85 00 24.09

7. 1980 85 51 35.09

8. 1984 85 83 51.03

9. 1989 85 15 31.77

10. 1991 85 05 18.02

11. 1996 85 05 08.14

12. 1998 85 00 06.02

13. 1999 85 10 14.72

14. 2004 80 09 12.04

15. 2009 80 21 27.42

16. 2014 80 02 7.53

2009 और 2014 में पूर्वांचल में विभिन्न दलों की स्थिति

पार्टी- 2009- 2014
भाजपा-09-23
अपना दल-00-02
सपा-09-01
कांग्रेस-04-00
बसपा-04-00

पूर्वांचल की संसदीय सीटें
वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, मछली शहर, भदोही, मिर्जापुर, फतेहपुर, फूलपुर, इलाहाबाद, प्रतापगढ़, बलिया, सलेमपुर, लालगंज, घोसी, आजमगढ़, संत कबीर नगर, बस्ती, अम्बेडकर नगर, महराजगंज, डुमरियागंज, बहराईच, बांसगांव, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर।

 

बनारस में छात्रों से मिलतीं प्रियंका

समझौते से दूरी

ऐसे में कांग्रेस ने 2019 के इस चुनाव में यूपी में अब तक एकाध छोटे दलों को छोड़ किसी बड़े क्षेत्रीय दल से गठबंधन नहीं किया है। दावा किया जा रहा है कि पार्टी अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी। हालांकि सोमवार की शाम तक इस पर अंतिम मुहर लगनी है कि यूपी में कांग्रेस किसी के साथ गठबंधन करेगी या नहीं। वैसे कांग्रेस के पुराने दिग्गजों का भी यही मानना है कि पार्टी को किसी से गठबंधन नहीं करना चाहिए। यही मांग करते-करते पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे मणिशंकर पांडेय ने पार्टी छोड़ दी थी।

 

काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद प्रियंका गांंधी

प्रियंका से उम्मीदें

इन सभी समीकरणों के बीच कांग्रेस ने इस बार प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में उतारा। सक्रिय राजनीति में दाखिल होते ही प्रियंका अपने चिरपरिचित अंदाज में प्रतिद्वंद्वियों पर लगातार हमलावर है। इसके लिए उन्होंने इस अल्प काल में ही काफी कुछ जमीनी काम भी कर लिया। अपने पहले ही पूर्वांचल दौरे में वह यूपी के अनुदेशकों से मिलीं, शिक्षा मित्रों से मुलाकात की। मल्लाह समुदाय की पीड़ा सुनी तो सफाईकर्मियों के दुःख को भी समझा। महिलाओं से मिलीं तो छात्र नेताओं से भी मिल कर उनकी पीड़ा को समझा। इन सभी समुदायों से मिल कर वो लगातार यूपी सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को प्रियंका से काफी उम्मीदें भी हैं।

 


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अखिलेश यादव के आजमगढ़ से प्रत्याशी बनने से शिवपाल को मिला बड़ा मौका, सपा के लिए बज सकती है खतरे की घंटी


वाराणसी. लोकसभा चुनाव 2019 में आजमगढ़ सीट पर दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने पिता मुलायम सिंह यादव की संसदीय सीट आजमगढ़ से चुनाव लड़ कर बड़ा संदेश देने की योजना बनायी है। समाजवादी की परम्परागत सीट पर बीजेपी की राह कभी आसान नहीं थी। वर्ष 2014 में नरेन्द्र मोदी की सुनामी के बाद भी बीजेपी ने इस से चुनाव हार गयी थी। बड़ा सवाल है कि पूर्वांचल साधने के लिए अखिलेश यादव ने इतना बड़ा दांव क्यों खेला है।
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अखिलेश यादव व मायावती ने यूपी की सभी लोकसभा सीटों के लिए गठबंधन किया है। बसपा ने पश्चिमी यूपी की अधिक सीट पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं जबकि सपा के पास पूर्वी यूपी की अधिक सीट आयी है। अखिलेश यादव ने आजमगढ़ से चुनाव लडऩे का ऐलान कर दिया बात को साबित करने का प्रयास किया है कि पूर्वी यूपी में सपा को किसी भी हाल में कमजोर होने नहीं दिया जायेगा। शिवपाल यादव के पार्टी छोडऩे से सपा को जो झटका लगा है उसे दूर करने के लिए अखिलेश यादव ने खुद ही कमान कस ली। मुलायम सिंह यादव ने आजमगढ़ से चुनाव जीत कर यह संदेश दिया था कि पश्चिम की तरह भी पूर्वी यूपी में सपा की ताकत कम नहीं है। लेकिन अब समीकरण बदल रहा है। पूर्वी यूपी को मजबूत करने के लिए अखिलेश यादव चुनाव लड़ रहे हैं ऐसे में शिवपाल यादव पश्चिम यूपी में सपा को कमजोर करके अखिलेश यादव को झटका दे सकते हैं।
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पश्चिम यूपी में है शिवपाल यादव की ताकत
पश्चिम यूपी में ही शिवपाल यादव की मुख्य ताकत है। अखिलेश यादव ने जब से पूर्वी यूपी पर अपना ध्यान केन्द्रीत किया है तभी से शिवपाल यादव को सपा को कमजोर करने का बड़ा मौका मिला है। पश्चिम यूपी मे बसपा को अधिक सीट मिलने से सपा के कुछ नेताओं में नाराजगी है ऐसे में शिवपाल यादव अब रणनीति साधने में जुट गये हैं। सपा व बसपा ने लोकसभा चुनाव 2019 में पीएम नरेन्द्र मोदी व अमित शाह की जोड़ी को पटखनी देने के लिए गठबंधन किया है जबकि कांग्रेस भी बीजेपी को हराने के लिए चुनाव मैदान में प्रत्याशी उतार रही है ऐसे में शिवपाल यादव की सक्रियता से किसी भी पार्टी का खेल बिगड़ व बन सकता है। सपा से अगल होने के बाद जिस तरह से शिवपाल यादव ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी को प्रदेश में खड़ा करने का प्रयास किया है उससे सबसे अधिक परेशानी सपा की बढ़ सकती है।
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आजमगढ़ में शिवपाल ने दिखायी है सबसे अधिक सक्रियता
शिवपाल यादव ने आजमगढ़ में सबसे अधिक सक्रियता दिखायी है। बलराम यादव के करीबी रहे राम प्यारे यादव को सपा से तोड़ कर शिवपाल यादव ने अपने साथ किया था। इसके बाद कई अन्य सपा नेताओं ने भी शिवपाल यादव के खिलाफ नरम रूख अपनाना शुरू कर दिया था। इसके बाद से ही अखिलेश यादव ने आजमगढ़ से चुनाव लडऩे का निर्णय किया। अखिलेश यादव के पूर्वी यूपी में सक्रिय होते ही शिवपाल यादव पश्चिम में अपनी ताकत बढ़ाने में जुट जायेंगे। यदि शिवपाल यादव को इसमे सफलता मिल जाती है तो सपा के लिए खतरे की घंटी बजना तय है।
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कांग्रेस ने जारी की लोकसभा चुनाव के लिए स्टार प्रचारकों की सूची, सिद्धू भी शामिल


वाराणसी. कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए अपने स्टार प्रचारकों की सूची रविवार को जारी कर दी। इस सूच में 40 दिग्गजों को शामिल किया गया है। इन स्टार प्रचारकों में पंजाब के विवादित मंत्री और पूर्व टेस्ट क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू को भी शामिल किया गया है।

लोकसभा चुनाव के पहले दो चरणों में होने वाले मतदान के लिए यूपी के रण को प्रभावी बनाने के लिए जारी स्टार प्रचारकों की सूची में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी, यूपीए चेयर पर्सन सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह, महासचिव व पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर, विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू को शामिल किया गया है।

इसके अलावा राजस्थान के सीएम अशोक गहलौत, मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ, पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित के अलावा पंजाब के चर्चित मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू को भी शामिल किया गया है। इनके अलावा मल्लिकार्जुन खडगे, पीएल पुनिया, मीरा कुमार,

अन्य स्टार प्रचारक हैं

मोहसिना किदवई, गुलाम नबी आजाद, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, हरीश रावत, सचिन पायलट, अशोक तंवर, तेजस्वि यादव, मो अजहरुद्दीन, प्रमोद तिवारी, आरपीएन सिंह, जितिन प्रसाद, प्रदीप जैन आदित्य, राजीव शुक्ला, राजाराम पाल, इमरान मसूद, विश्वेंद्र सिंह, नदीम जावेद, हार्दिक पटेल, कुमारी शैलजा, तमरध्वज साहू, अवतार सिंह बंधाना, दीपेंद्र सिंह हुड्डा और मीम अफजल।

Congress  <a href=list of star campaigners " src="https://new-img.patrika.com/upload/2019/03/24/list_of_star_campaigners_4325157-m.png">

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बनारस से उठी सवर्ण आयोग के गठन और 13 पॉइंट रोस्टर बहाली की मांग, चेताया नहीं बनी बात तो चुनाव में दिखाएंगे ताकत


वाराणसी. सवर्ण आयोग का गठन, 13 प्वाइंट रोस्टर बहाली और एससी/एसटी अध्यादेश वापसी की मांग के समर्थन में बनारस से शुरू नोटा अभियान को धार मिलती दिखने लगी है। इसी के तहत रविवार को बनारस में नोटा समर्थकों की बड़ी जुटान हुई। नोटा समर्थकों ने लोकसभा चुनाव में अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए राजनैतिक दलों को सवर्ण वोटों की ताकत दिखाने का एलान किया। कहा कि अगर दलित और पिछड़े वोटों के दबाव में केंद्र सरकार और अन्य राजनैतिक दल सवर्ण हितों पर कुठाराघात करेंगे तो सवर्ण भी अपनी ताकत का एहसास करा देंगे।

नहीं हुई एससी-एसटी एक्ट अध्यादेश की वापसी तो दिखाएंगे सवर्ण वोटों की ताकत
वाराणसी के गोलघर कचहरी स्थित एक महाविद्यालय में हुई पूर्वांचल के नोटा समर्थकों की यह जुटान। इस दौरान नोटा के समर्थन में बनारस,लखनऊ,अमेठी और अयोध्या में प्रदर्शन के साथ नोटा के प्रचार में 15 दिन की यात्रा निकालने का प्रस्ताव पारित किया गया। समर्थकों ने कहा कि सवर्ण आयोग के गठन,एससी-एसटी एक्ट अध्यादेश की समाप्ति और 13 पॉइंट रोस्टर की बहाली तक यह अभियान जारी रहेगा। नोटा समर्थकों ने यह भी कहा कि नोटा अभियान किसी दल विशेष के विरुद्ध नहीं बल्कि सार्थक राजनीति और वास्तविक लोकतंत्र बहाली का आंदोलन है। |

केंद्र सरकार की सवर्ण,किसान,कारीगर,युवा और व्यापारी विरोधी नीतियों के प्रति जताई नाराजगी
केंद्र सरकार की सवर्ण, किसान, कारीगर, युवा और व्यापारी विरोधी नीतियों से नाराज नोटा अभियान के समर्थक रविवार को भारी संख्या में यहां एक महाविद्यालय में जुटे। पूर्वांचल के लगभग 15 जिलों के साथ बिहार और मध्य प्रदेश के भी नोटा समर्थक इस जुटान में शामिल हुए। सभा में नोटा अभिया के औचित्य के साथ,आगामी चुनाव में नोटा के प्रचार-प्रसार के कार्यक्रमों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए कि नोटा केवल भाजपा के विरुद्ध है, कहा कि नोटा अभियान से केवल भाजपा ही डरी हुई है इससे साफ पता चलता है कि भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र की एनडीए सरकार ने सवर्ण, किसान, कारीगर, व्यापारी और युवा हितों के विरुद्ध काम किया है। वक्ताओं ने कहा की यह किसी दाल के विरुद्ध नहीं बल्कि सार्थक राजनीती और वास्तविक लोकतंत्र की बहाली का आंदोलन है।

केंद्र सरकार ने दलित वोटों के दबाव में

नोटा अभियान के मुद्दों को स्पष्ट करते हुए वक्ताओं ने कहा कि हमारे मुद्दे स्पष्ट हैं। केंद्र सरकार ने दलित वोटों के दबाव में एससी-एसटी एक्ट पर अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया, विश्वविद्यालयों-महाविद्यालयों में अध्यापकों की भर्ती और प्रमोशन के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अध्यादेश लेकर सवर्णों के पेट पर लात मरने का काम किया है। वक्ताओं ने कहा कि अनुसूचित जाति-जनजाति,पिछड़ा और महिला आयोग की तरह देश में सवर्ण आयोग का भी गठन होना चाहिए। जीएसटी और नोटबंदी को सरकार ने अपना ऐतिहासिक फैसला बताया था लेकिन अब वह इन मुद्दों पर वोट मांगने से भाग रही है क्योंकि वास्तव में इनसे व्यापारियों और उपभोक्ताओं का नुकसान हुआ है। विश्वनाथ कॉरिडोर का मुद्दा भी देशभर में नोटा अभियान का मुद्दा होगा।

ये प्रस्ताव हुए पारित

-15 दिवसीय यात्रा निकालेगी

-बनारस, लखनऊ, अमेठी और अयोध्या में होगी रैली

इन जिलों के प्रतिनिधियों ने लिया भाग
जुटान में लखनऊ, बाराबंकी, अयोध्या, आंबेडकर नगर आज़मगढ़, गाज़ीपुर, देवरिया, जौनपुर, भदोही, मिर्ज़ापुर, सोनभद्र, बनारस, चित्रकूट, रीवां से आये सवर्ण सेना,राष्ट्रिय स्वाभिमान मंच और धरोहर बचाओ समिति काशी के लोग शामिल हुए |

इन्होंने किया संबोधित

सभा में डॉ गिरजानंद चौबे, राजनाथ तिवारी, प्रदीप राय, गौरव ओम, अनिल केशरी, विनयशंकर राय मुन्ना, गौरव सिंह, साकेत शुक्ला, ब्रह्मानंद उपाध्याय, कृष्णकुमार शर्मा, विश्वनाथ कुंवर, संतोष बिहारी, ओम प्रकाश सिंह, शुभम, रामउजागिर यादव, डॉ वीरेंदर यादव, अनुभव पांडेय, ओम मिश्रा, प्रिंस राय, रामहित यादव, कन्हैया मिश्रा और सचिन तिवारी, रूपेश पांडेय सहित लगभग 200 लोग उपस्थित थे।

 

Workshop of UP Nota Campaign

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बनारस के कृषि वैज्ञानिकों का यह अजूबा कमाल, एक ही पौधे में आलू-टमाटर दोंनो


वाराणसी. जिले के कृषि वैज्ञानिकों ने अनोखा रिसर्च किया है। यह शोध दुनिया में अजूबा है। क्रांतिकारी शोध है जिसके तहत एक ही पौधे में दो तरह की सब्जी उगाई जा रही है। यही हीं महज दो महीने में ही सब्जी बिकने काबिल हो जा रही है। यह शोध सब्जी किसानों के लिए काफी मददगार है। इससे उन्हें ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी होगी और दो महीने में ही वह अपने उत्पाद को बाजार में बेंच कर मुनाफा भी कमा सकते हैं।

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, जक्खिनी (शंहशाहपुर) वाराणसी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ अनन्त बहादुर एवं उनकी टीम ने देश में पहली बार आलू के पौध पर टमाटर की पौध लगाने में सफलता हासिल की है। इसे ग्राफ्टिंग तकनीक से तैयार किया गया है जिसे पोमैटो या टोमटाटो भी कहा जाता है। इस नई तकनीक के माध्यम से आलू की नर्सरी पौध पर टमाटर की उन्नतशील किस्में बुवाई के एक महीने के अंदर ग्राफ्ट की जाती है जिन्हे देखभाल के बाद लगभग 20दिन बाद खेत या गमले में रोपित किया जाता है। रोपाई के दो माह बाद टमाटर की तुड़ाई शुरू हो जाती है जबकि आलू की खुदाई टमाटर के पौध के सूखते समय किया जाता है।

संस्थान में किए गये अध्ययन से पता चला कि प्रत्येक पोमैटो पौध से लगभग 1.5 किलो टमाटर एवं 500-600 ग्राम आलू की पैदावार होती है। यदि इन पौधों को खेत में मेड़ बनाकर लगाया जाय तथा टमाटर को सहारा दिया जाय तो और अधिक उत्पादन होने की उम्मीद है। पोमैटो को शहरी आबादी में घर की बालकनी में या बड़े गमलों में असानी से उगाया जा सकता है।

कोट

ग्राफ्टिंग तकनीक के माध्यम से बैंगन की पौध पर टमाटर लगाकर जड़-जनित बीमारियों के अलावा टमाटर की पौध को अधिक जल एवं सूखा से भी बचाने की तकनीक संस्थान द्वारा विकसित की गई है ।- डॉ. जगदीश सिंह, निदेशक,भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान

potato and tomato in a plant

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आयुष्मान कार्ड धारक का दर्द, बलिया से बीएचयू तक आपरेशन करने से कतरा रहे डॉक्टर


वाराणसी. केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना को जिस गर्मजोशी से लॉंच किया गया। जिस तरह से उसका प्रचार प्रसार किया गया, अब वह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र सहित पूर्वांचल भर के अस्पतालों में इस योजना का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। कारण जो भी हो लेकिन मरीज परेशान हैं।

बता दें कि अभी कुछ दिनों पहले ही योजना के तहत मुफ्त दवा वितरण का भुगतान न होने पर बीएचयू परिसर स्थित दवा दुकानदार ने दवा देने से इंकार किया था। वह खबर पत्रिका ने ही ब्रेक की थी। उसके 24 घंटे के भीतर ही मामला लसटाने के लिए अस्पताल प्रशासन हरकत में आ गया। वह मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि एक नया मामला सामने आ गया। इसके तहत बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के हड्डी रोग विशेषज्ञ ने आयुष्मान भारत योजना का कार्ड देख कर ऑपरेशन करने से इंकार कर दिया। यह मामला अब तूल पकड़ने लगा है।

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जानकारी के मुताबिक बलिया निवासी दिनेश गौड़ 01 मार्च को सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए। उनका दाहिना पांव फ्रैक्चर हो गया था। बलिया के जिला अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ संतोष चौधरी ने 18 दिनों तक उनका इलाज किया। लेकिन आराम न मिला तो डॉ संतोष ने दिनेश की पत्नी नीतू को ऑपरेशन की सलाह दी। इस बीच किसी परिचित की सलाह पर नीतू ने आयुष्मान कार्ड बनवा लिया। आरोप है कि जब डॉक्टर को आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी होने की जानकारी हुई, उन्होंने डॉयबिटिजी के उच्च स्तर पर होने का हवाला देते हुए ऑपरेशन से इंकार कर दिया। डॉक्टर ने दिनेश को बीएचयू रेफर कर दिया।

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दिशने की पत्नी उन्हे लेकर 20 मार्च को बीएचयू ट्रामा सेंटर पहुंचीं। यहां प्रो. जीएन खरे की ओपीडी में गईं। पत्नी नीतू का आरोप है कि यहां भी ऑपरेशन की बात चली, लेकिन जैसे ही आयुष्मान भारत के लाभार्थी होने का जिक्र हुआ, मरीज को सिर्फ प्लास्टर लगाकर छोड़ दिया गया।

नीतू का कहना है कि परिवार पूरी तरह दिनेश पर ही निर्भरहै। बलिया से लेकर यहां तक आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी हमें इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।

शुगर लेवल काफी बढ़ा हुआ था। भर्ती करने के बाद से ही हम इसे नीचे लाने की कोशिश कर रहे थे, ताकि ऑपरेशन किया जा सके। लेकिन शुगर लेवल नीचे नहीं आने के कारण ही दिनेश को बीएचयू रेफर किया गया।- डा. संतोष चौधरी, (हड्डी रोग विशेषज्ञ-जिला अस्पताल, बलिया)।

ओपीडी में बहुत से मरीज आते हैं। यदि मरीज को प्लास्टर लगाया गया है, तो ठीक ही किया गया। बिना ऑपरेशन के 99 फीसद हड्डियां केवल प्लास्टर से ही जुड़ जाती हैं। यह हड्डियों को जोडऩे का सबसे सस्ता और सुरक्षित तरीका है। - प्रो. जीएन खरे (हड्डी रोग विशेषज्ञ-ट्रामा सेंटर, बीएचयू)।


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समाजवादी पार्टी ने जारी की 40 लोगों की नई लिस्ट, पूर्वांचल के इस दिग्गज नेता को दी अहम जिम्मेवारी


वाराणसी. सपा ने लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए अपने स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है । 40 लोगों की इस लिस्ट में अखिलेश यादव के अलावा कई दिग्गज नेताओं का नाम है । इस लिस्ट में जहां मुलायम सिंह यादव का नाम नहीं है, वहीं जया बच्चन को लिस्ट में जगह दी गई है । बलिया के बांसडीह से विधायक रामगोविंद चौधरी को भी स्टार प्रचारक बनाया गया है। रामगोविंद चौधरी आठ बार विधायक रह चुके हैं ।

 

 

 

 

Sp star campaigner List

 

कौन हैं रामगोविंद चौधरी 

राम गोविंद चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी और पहली बार वह 1977 में चिलकहर विधानसभा सीट से जीतकर आए थे। आपातकाल में राम गोविंद चौधरी जेल भी गए थे। 1977 में राम गोविंद चौधरी, राजेंद्र चौधरी और राजनाथ सिंह पहली बार चुनकर आए थे। वह चंद्रशेखर और जयप्रकाश नारायण के साथ काम कर चुके हैं । उन्होंने जेपी आंदोलन में अपनी भूमिका दी और छात्रों के लिए वह इस आंदोलन में कूद गए। 1975 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 19 महीने तक उन्हें जेल में रहना पड़ा। राम गोविन्द चौधरी 2017 से उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं । वह अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री तथा बाल विकास व पोषण मंत्री रह चुके हैं।

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ये हैं सपा के स्टार प्रचारक
अखिलेश यादव के अलावा रामगोपाल यादव, आजम खान, जया बच्चन, डिंपल यादव, राजेंद्र चौधरी, रामगोविंद चौधरी, अहमद हसन, जावेद अली खां, विशम्भर प्रसाद निषाद, सुरेंद्र नागर, तेज प्रताप यादव, नरेश उत्तम पटेल, मौलाना यासीन अली उस्मानी, मनोज पारस, महबूब अली और शाहिद मंजूर को भी स्टार प्रचारकों की लिस्ट में रखा गया है ।


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प्रतापगढ़ सीट से शिवपाल यादव इस नेता पर लगा सकते है दांव


प्रतापगढ़. लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद सभी पार्टियां प्रत्याशियों की घोषणा में जुट गई हैं। बीते साल शिवपाल यादव ने भी सपा से अलग होकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बनाकर प्रदेश की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। प्रसपा ने लोकसभा चुनाव को लेकर अब तक 31 प्रत्याशियों की सूची जारी कर चुकी है। वहीं दूसरीओर प्रतापगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने को लेकर पार्टी द्वारा मांगे गए आवेदन के बाद, पार्टी सूत्रों की माने तो इस सीट से चुनाव लड़ने के लिए रानीगंज निवासी पूर्व विधायक जय सिंह ने आवेदन किया है। जय सिंह दिसम्बर माह में कांग्रेस छोड़कर प्रसपा में शामिल हुए है। माना जा रहा है कि प्रसपा जय सिंह को प्रतापगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा सकती है।

 

कौन है जय सिंह


जय सिंह यादव मूल रूप से इलाहाबाद-प्रतापगढ़ बॉडर के पास स्थित गांव मल्हूपुर के निवासी है। यह गांव प्रतापगढ़ की रानीगंज तहसील में आता है। सन 1989 में जय सिंह कांग्रेस पार्टी से रानीगंज(बीरापुर) विधायक चुने गए। बकौल जय सिंह वह छात्र राजनीति से जुड़े रहे। सन 1968 में सीएमपी डिग्री कालेज में उपाध्यक्ष और 1972 में सीएमपी डिग्री कालेज में ही अध्यक्ष रहे। जय सिंह ने बताया कि 1974 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ा लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। उन्होंने बताया कि 1980 में लोकदल पार्टी से प्रतापगढ़ सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था। तब उन्होंने दूसरे नंबर पर पोल किया था। तब राजा अजीत सिंह को चुनाव में जीत मिली थी।

 

बता दें कि प्रतापगढ़ लोकसभा सीट से कांग्रेस ने रत्ना सिंह को उतारा है। तो वही राजा भैया की पार्टी जनसत्ता से अक्षय प्रताप सिहं चुनाव लड़ सकते है। अन्य पार्टीयों ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले है।


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PM मोदी के खिलाफ विपक्ष से आया ये नाम तो बौखलाई BJP- RSS


वाराणसी. इस बार के लोकसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। घोषित कर दिया है कि बनारस से दोबारा नरेंद्र मोदी ही चुनाव लड़ेंगे। लेकिन अभी तक विपक्ष की ओर से इस मुद्दे पर चुप्पी है। न समाजवादी पार्टी ने अपना पत्ता खोला है न कांग्रेस ने। ऐसे में बीजेपी और आरएसएस के लोगों में बेचैनी बढ़ गई है। लगातार सोशल मीडिया पर टिप्पणियां की जा रही हैं। कोई एक नाम लेकर उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि खंगाली जा रही है। उनके खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास किया जाने लगा है। ऐसे में बीजेपी और आरएसएस के लोगों के माध्यम से जिनके खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है उन्होंने पत्रिका से बातचीत में कहा कि, '' ये बात कुछ पच नहीं रही, एक तरफ कहा जा रहा है कि अबकी रिकार्ड मतों से जीत होगी, तो फिर इतनी बेचैनी क्यों?" कहीं कोई डर तो नहीं सता रहा भाजपा और आरएसएस को?

अपने पत्ते खोलने के बाद से बीजेपी और आरएसएस के लोग लगातार यह प्रचारित करने में जुट गए हैं कि कांग्रेस का प्रत्याशी कौन होगा। उन्होंने नाम तक खोल दिया है और यहां तक बताने में जुट गए हैं कि कांग्रेस हाईकमान अपने संभावित प्रत्याशी से संपर्क किया था, संभावित प्रत्याशी ने एक सप्ताह की मोहलत मांगी है, कहा है कि विचार विमर्श करके बताएंगे। इतना ही नहीं उनके कुटुंब के बारे में तरह-तरह की बातें उड़ाई जाने लगी हैं सोशल मीडिया पर। ऐसे में जब पत्रिका ने सोशल मीडिया पर भाजपा और आरएसएस के द्वारा चलाए जा दावों के बाबत पूछा तो उन संभावित उम्मीदवार (बकौल भाजपा/आरएसएस) का जवाब था कि, मैं तो निहायत साधारण आदमी हूं, मैं क्या मुकाबला कर पाऊंगा प्रधानमंत्री से। लेकिन भाजपा और आरएसएस के लोग क्यों परेशान हैं। वह भी मुझ जैसे साधारण आदमी से। ये तो उन लोगो ने अचानक से मेरा कद बढ़ा दिया है। ये बात मुझे नहीं समझ आ रही है। उन्हें किस बात का डर है।

 

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संभावित प्रत्याशी ने यहां तक कहा कि मुझे तो नहीं पता पर इतना जरूर कहूंगा कि भाजपा और आरएसएस के लोगों का कांग्रेस हाईकमान के संपर्क में होना भाजपा-आरएसएस नेतृत्व के लिए चिंता की बात जरूर है। उन्होंने कहा कि यह बड़ा मजेदार है कि भाजपा ने तो चुनाव अधिसूचना जारी होते ही सारे पत्ते खोल दिए हैं, वहीं कांग्रेस और सपा ने अभी तक चुप्पी साध रखी है, लगता है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी में पसरा सन्नाटा भी नियोजित है। ये बड़ी चाल हो सकती है ताकि चुनाव आते आते विपक्षी को थका दिया जाए। उन्हें साइकोलॉजिकल ट्रॉमा में पहुंचा दिया जाए।

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यहां बता दें कि भाजपा और आरएसएस के लोग सोशल मीडिया पर जिसे कांग्रेस का संभावित उम्मीदवार बताया जा रहा है, उनका नाम सबसे पहले पत्रिका ने ही चलाया था। तब पत्रिका ने उन्हें साझा विपक्ष का उम्मीदवार बताया था। हालांकि उसके बाद से गंगा में काफी पानी बह गया। सपा-बसपा गठबंधन से कांग्रेस अलग हो चुकी है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का भी गठबंधन नहीं हो रहा है। जैसा इन सारे दलों द्वारा बताया जा रहा है। ऐसे में साझा उम्मीदवारी की बात पर फिलहाल तो विराम ही लगा है। लेकिन कांग्रेस खेमे से यह बात जरूर बताई जा रही है कि अगर बनारस से प्रियंका गांधी चुनाव नहीं लड़तीं तो वह उम्मीदवार ही कांग्रेस के प्रत्याशी हो सकते हैं जिनके बारे में भाजपा और आरएसएस के लोग सोशल मीडिया पर दावा कर उनके कुनबे का पोस्टमार्टम करने लगे हैं। वह और कोई नहीं सकट मोचन मंदिर के महंत और आईआईटी बीएचयू के इलेक्ट्रानिक्स विभाग के अध्यक्ष प्रो विश्वंभर नाथ मिश्र है।

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कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक यह सही है कि प्रो मिश्र के नाम पर पार्टी गंभीरता से विचार कर रही है। साथ ही सपा के साथ भी अंदर-अंदर बात चल रही है। जैसे ही सपा-बसपा गठबंधन इस नाम पर राजी हो जाते हैं वैसे ही प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर दी जाएगी। सूत्रों ने बताया कि प्रियंका गांधी के अयोध्या दौरे से लौटने के बाद नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रत्याशी का चयन हो जाएगा। हालांकि प्रो मिश्र का कहना है कि कांग्रेस के पास डॉ राजेश मिश्र और अजय राय जैसे प्रत्याशी हैं, उनमें काफी दमखम है।

 


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चैत्र नवरात्रि की सप्तमी पर जलती चिताओं के बीच रातभर नाचती हैं नगरवधुएं, जानिए क्या है पूरा सच


वाराणसी. काशी में सती के वियोग में भगवान शिव ने कभी तांडव किया था। उस समय यहां सती के कान की मणि गिरी थी। जहां वह मणि गिरी उस जगह का नाम मणिकर्णिका घाट पड़ गया। तबसे लेकर आज तक चैत्र नवरात्री की सप्तमी को नगरवधुएं इस जगह पर रात भर डांस करती हैं और उनके पांव के घुंघरू यहां टूट कर बिखरते हैं। आज के दिन नगरवधुएं पैसों के लिए मांग नहीं करती, बल्कि महाशमशान पर अपना जलवा बिखेरने के लिए नगरवधुओं मे बकायदा होड़ मची रहती है।

 

12 अप्रैल को नगर वधुएं फिर करेंगी नृत्य
हर बार की तरफ इस बार चैत्र नवरात्र की सप्तमी 12 अप्रैल को पड़ रही है। जिसमें दूर-दूर से आई नगरवधुएं अपने मोक्ष के लिए मणिकर्णिका घाट पर नृत्य करेंगी। इन्हें ना तो यहां जबरन लाया जाता है ना ही इन्हें इन्हे पैसों के दम पर बुलाया जाता है। ये खुद यहां डांस के लिए आती हैं। ताकि अगले जन्म में इन्हें नगरवधू का कलंक नहीं झेलना पड़ेगा।

 

नवरात्रि की सप्तमी तिथि को बाबा महाश्मशान का मनाया जाता है श्रृंगारोत्सव
नवरात्रि की सप्तमी तिथि को बाबा महाशमशान का वार्षिक श्रृंगारोत्सव मनाया जाता है। इस दौरान सुबह-सवेरे बाबा की भव्य आरती के बाद शाम ढलते-ढलते नगर वधुएं पहले स्वरंजली प्रस्तुत करती हैं, इसके बाद शुरू होता है धधकती चिताओं के बीच घुंघरुओं की झंकार का सिलसिला। ‘जिंदगी’ और ‘मौत’ का एक साथ एक ही मुक्ताकाशीय मंच पर प्रदर्शन किसी को भी आश्चर्य से भर सकता है।

 

ये है मान्यता
मान्यता है कि इस महानिशा को महा शमशान पर नृत्य करने वाली नगरवधुओं को उनके अगले जन्म में इज्जत भरी जिंदगी जीने का सौभाग्य प्राप्त होता है। तवायफें यहां पूरी रात फिल्मी गीतों पर ठुमके लगाती हैं और भगवान शिव से प्रार्थना करती हैं कि अगले जन्म में उन्हें इस तरह का काम नहीं करना पड़े।

 

351 साल पुरानी है यह परम्परा
351 साल पुरानी एक पराम्‍परा है जिसमें वैश्‍याएं पूरी रात यहां जलती चिताओ के पास नाचती है और थिरकती है। साल में एक बार एक साथ चिता और महफिल दोनों का ही गवाह बनता है काशी का मणिकर्णिका घाट। चैत्र नवरात्रि अष्टमी को सजती है इस घाट पर मस्ती में सराबोर एक चौंका देने वाली महफ़िल। एक ऐसी महफ़िल जो जितना डराती है उससे कहीं ज्यादा हैरान करती है।

राजा मान सिंह से जुड़ा है इस महफिल का इतिहास
कहते हैं महा शमशान मे सजने वाली नगरवधुओं की इस महफिल का इतिहास राजा मानसिंह से जुड़ा हुआ है। शहंशाह अकबर के समय में राजा मान सिंह ने 16वीं शताब्दी में इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। निर्माण के बाद वहां भजन-कीर्तन होना था पर श्मशान होने की वजह से यहां कोई भी ख्यातिबद्ध कलाकर आने को राजी नहीं हुआ। सभी ने आने से इनकार कर दिया। बाद में नगर वधुओं ने यहां अपनी कार्यक्रम करने की इच्छा जाहिर की और राजा ने उनके इस आमंत्रण को स्वीकार कर लिया। तब से नगर वधुओं के नृत्य की परम्परा शुरू हुई। शिव को समर्पित गणिकाओं की यह भाव पूर्ण नृत्यांजली मोक्ष की कामना से युक्त होती है।

 

Nagar vadhu
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जानिए कौन है राजा मान सिंह
मान्यता है कि राजा मान सिंह ने राजस्थान के कारीगरों से काशी का नवनिर्माण कराया है। इतिहासकार मानते हैं कि अकबर के इस सेनापति ने बनारस में एक हजार से ज्यादा मंदिर और घाट बनवाये , मानसिंह के बनवाये घाटों में सबसे प्रसिद्द मानमंदिर घाट है इसे राजा मानसिंह ने बनवाया था। बाद में जयसिंह ने इसमें वेधशाला बनवाई । बनारस में अनुश्रुति है कि राजा मानसिंह ने एक दिन में एक हजार मंदिर बनवाने का निश्चय किया ,फिर क्या था उनके सहयोगियों ने ढेर सारे पत्थर लाये और उन पर मंदिरों के नक़्शे खोद दिए इस तरह राजा मानसिंह का प्रण पूरा हुआ।


अम्बर के राजा मानसिंह और बनारस का नाता आज भी पूरे शहर में नजर आता है। मानसिंह के वक्त की सबसे प्रसिद्द घटना विश्वनाथ मंदिर की पुनः रचना की है,अकबर ने पुनर्निर्माण का काम मानसिंह को सौंपा था। लेकिन जब मानसिंह ने विश्वनाथ मंदिर का निर्माण करवाना शुरू किया तो तो हिन्दुओं ने उनका विरोध करना शुरू कर दिया। गौरतलब है कि हुसैन शाह शर्की (1447-1458) और सिकंदर लोधी (1489-1517) के शासन काल के दौरान एक बार फिर इस मंदिर को नष्ट कर दिया गया था। हिन्दू रूढ़िवादियों का कहना था कि मानसिंह ने अपनी बहन जोधाबाई का विवाह मुग़लों के परिवार में किया है वो इस मंदिर का निर्माण नहीं करवा सकते ,जब मानसिंह ने यह सुना तो निर्माण कार्य रुकवा दिया । लेकिन बाद में मानसिंह के साथी राजा टोडर मल ने अकबर द्वारा की गयी वित्त सहायता से एक बार फिर इस मंदिर का निर्माण करवाया।

देश के अलग-अलग स्थानों से आती हैं नगरवधुएं
यहां आने वाली कोई भी नगर वधु पैसा नहीं लेती बल्कि मन्नत का चढ़ावा अर्पित करके जाती है। कलकत्ता, बिहार, मऊ, दिल्ली, मुंबई समेत भारत के कई स्थानों से बीस से ऊपर नगरवधुएं यहां आती हैं।


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किशोर का शव गोमती नदी में प्रवाहित करने के दो दिन बाद परिजनों ने निकाला वापस


वाराणसी. उत्तर प्रदेश के वाराणसी में चौबेपुर खुर्द( मुरेरी) गांव में गुरुवार को होली खेलने के बाद नहाने जाते समय एक किशोर चंदन की करंट लगने से हुई मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। किशोर का शव गोमती नदी में प्रवाहित करने के बाद परिजनों ने दो दिन बाद शनिवार को शव मुआवजे के लिए नदी से वापस निकाला। पुलिस ने शव को पोस्टमार्ट के लिए भेज दिया।


मिली जानकारी के मुताबिक चौबेपुर खुर्द( मुरेरी) गांव निवासी चंदन(15) की मौत होली के दिन करंट लगने से हो गई थी। घटना उस वक्त की है जब किशोर होली खेलने के बाद नहाने जा रहा था। किशोर की मौत को हादसा मान परिजनों ने घटना के दिन उसके शव को गोमती में प्रवाहित कर दिया। वहीं घटना के दूसरे दिन मृतक के घर शोक संवेदना प्रकट करने पहुंचे सपा-बसपा कार्यकर्ताओं ने किशोर की मौत के मामले में बिजली विभाग को जिम्मेदार ठहराते हुए मुआवजा देने की मांग उठाई। उनका कहना था कि किशोर की मौत बिजली विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण हुई है। लिहाजा परिजनों को मुआवजा मिलना चाहिए। लेकिन, पुलिस शव न होने के कारण विधिक कार्रवाई से इंकार कर रही थी। ऐसे में पुलिस द्वारा कार्रवाई न होने से मुआवजा मिलता न देख परिजनों ने मृतक का शव गोमती नदी से वापस निकाला। पुलिस ने गोमती नदी से शव निकाले जाने के बाद, शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आगे की कार्रवाई पोस्टमार्ट रिपोर्ट आने के बाद की जाएगी।

 

 


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प्रियंका गांधी अब राम लला के दर्शन को जाएंगी अयोध्या


वाराणसी. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी लोकसभा चुनाव प्रचार के तहत प्रयाग, विंध्यवासिनी धाम और काशी विश्वनाथ के दर्शन-पूजन के बाद अब जाएंगी अयोध्या। लंबे अरसे बाद गांधी परिवार को कोई नेता राम लला के दर्शन के लिए पहुंच रहा है। वह ऐसे समय जब पूरे देश में चुनावी लहर के साथ राम मंदिर निर्माण का मुद्दा गर्म है। ऐसे में प्रियंका के अयोध्या दौरे को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है।

सूत्रों के मुताबिक प्रियंका गांधी के अयोध्या दौरे की जमीन काशी में ही तैयार हुई। कहा जा रहा है कि एक बड़े धर्मगुरु के आदेश पर वह अयोध्या जा रही हैं। प्रियंका उन धर्म गुरु से मिल कर आशीर्वाद भी लेना चाहती थीं काशी में लेकिन चुनावी माहौल के चलते ऐसा संभव नहीं हो पाया। लेकिन धर्म गुरु को जो संदेश मिला उसे शिरोधार्य करते हुए उन्होंने अयोध्या का दौरा बना डाला। सूत्रों के अनुसार प्रियंका 26 मार्च को अयोध्या जा सकती हैं।

यही नहीं प्रियंका ने जहां अपने राजनीतिक दौरे की शुरूआत गंगा यात्रा से की। वहीं अब दूसरे चरण में वह ट्रेन से यात्रा करने जा रही हैं। ट्रेन में आम यात्रियों से मुखातिब होंगी। उनके विचार जानेंगी। इसका ऐलान उन्होंने पूर्वांचल की गंगा यात्रा के दौरान जनता के नाम लिखे खुले पत्र में कर दिया था। उसके बाद बनारस में जब वह कार्यकर्ताओं को संबोधित करने पहुंचीं तो जिला अध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा ने सवाल किया था कि हम सभी जानना चाहते हैं कि गंगा यात्रा का मकसद क्या था? इस पर प्रियंका ने अपनी बात दोहराते हुए कहा था कि वह नांव ही नहीं ट्रेन और बस से भी यात्रा करेंगी। इसी कड़ी में अब वह दिल्ली से कानपुर तक ट्रेन यात्रा करने जा रही हैं। इसका खाका लगभग तैयार कर लिया गया है।

ट्रेन यात्रा के दौरान प्रियंका रास्ते में पड़ने वाले सभी पार्टी के लिए प्रचार भी करेंगी। इस दौरान वह फैजाबाद से उन्नाव तक की यात्रा भी करेंगी। इसी दौरान वह अयोध्या जाएंगी और राम लला के दर्शन करेंगी।


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CM योगी काशी में 26 को फूंकेंगे चुनावी शंख, शुरु हुई तैयारी


वाराणसी. सीएम योगी आदित्यनाथ 26 मार्च को वाराणसी आ रहे है। मुख्यमंत्री नदेसर स्थित कटिंग मेमोरियल में आयोजित विजय संकल्प सभा के जरिए पूर्वंचल में भारतीय जनता पार्टी के चुनाव अभियान का शंखनाद करेंगे। सीएम मोदी के आगमन और लोकसभा चुनाव को लेकर वाराणसी में पार्टी के कार्यकर्ताओं ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

 

बता दें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एकबार फिर वाराणसी से ही लोकसभा चुनाव लड़ेगें। पीएम मोदी के वाराणसी से चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद वाराणसी आ रहे सीएम योगी के इस दौरे को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीएम विजय संकल्प सभा के जरिए पूर्वंचल में भारतीय जनता पार्टी के चुनाव अभियान का शंखनाद करेंगे। सीएम के साथ कैबिनेट मंत्री आशुतोष टण्डन भी होगें। विजय संकल्प सभा के संबंध में भाजपा महानगर के पदाधिकारियों. मण्डल अध्यक्षों की क्षेत्रीय कार्यालय गुलाब बाग में बैठक हुई।


बैठक में मौजूद पदाधिकारियों के संबोधित करते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी लक्ष्मण आचार्य ने कहा, " मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 26 मार्च को बनारस से लोकसभा चुनाव का शंखनाद करेंगे। उन्होंने कहा कि पीएम के संसदीय क्षेत्र से निकली यह आवाज पूर्वांचल के अंतिम छोर तक पहुंचानी है।" प्रदेश उपाध्यक्ष ने सीएम की सभा में ज्यादा से ज्यादा लोगों के पहुंचाने का आह्वान किया।


बैठक में राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, विधायक रविंद्र जायसवाल, महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरी, जिला अध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा, दयाशंकर मिश्र दयालु, आशा गुप्ता, कुसुम सिंह पटेल आदि मौजूद रहे।


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सपा ने जारी की प्रत्याशियों की एक और सूची, अखिलेश यादव इस सीट से लड़ेंगे चुनाव


वाराणसी. लोकसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने रविवार को एक और लिस्ट जारी की। समाजवादी पार्टी की इस लिस्ट में रामपुर और आजमगढ़ लोकसभा सीट से प्रत्याशी का ऐलान कर दिया गया है। रामपुर लोकसभा सीट से सपा के दिग्गज नेता आजम खान, जबकि आजमगढ़ लोकसभा सीट से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव चुनाव लड़ेंगे। अखिलेश यादव को आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की कई दिनों से चर्चा चल रही थी। इन चर्चाओं पर पार्टी ने आखिरकार मुहर लगा दी है।


बतादें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बाद भी सपा ने इस सीट पर चुनाव जीता था और इस सीट से मुलायम सिंह यादव ने भाजपा के बाहुबली नेता रामाकांत यादव को मात दी थी।


आजमगढ़ लोकसभा सीट यादव और मुस्लिमबाहुल सीट है। इस सीट पर यादव और मुस्लिम हार और जीत तय करते हैं। अखिलेश यादव ने इस सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा कर पूर्वांचल में इस वोट बैंक को साधने की कोशिश की है।

 


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इस राशि के जातक पर आज बनी रहेगी भगवान सूर्य की कृपा, इन्हें होगा धन लाभ


मेष राशिफल: आज का दिन इस राशि के जातक के लिए शुभ होगा। आज सफलता की प्राप्ति होगी। धन लाभ का भी योग बन रहा है। आज के दिन आप किसी नए व्यवसाय के बारे में योजना बना सकते हैं। दाम्पत्य जीवन में तनाव की स्थिति बनेगी अत: संयम से काम लें।
शुभ रंग-पीला

वृष राशि: आज वृष राशि वालों को अचानक धन की प्राप्ति हो सकती है। स्टूडेंट्स अपने करियर में सफलता से प्रसन्न रहेंगे। जीवन साथी का सहयोग प्राप्त होगा। लव लाइफ शानदार रहेगी। नेत्र विकार से कष्ट संभव रहेगा। हनुमान जी के मंदिर में कपूर जलाएं।
शुभ रंग- हरा रंग शुभ है।

मिथुन राशि: व्यवसाय से सम्बद्ध जातकों को सफलता की प्राप्ति होगी। कई दिनों से लंबित कार्य पूर्ण होगा। लव लाइफ शानदार रहेगी। जॉब में उन्नति होगी। दाम्पत्य जीवन में खुशहाली रहेगी। गाय को गुड़ खिलाना पुण्य दायी है। विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें।
शुभ रंग- हरा रंग समृद्धि कारक है।

कर्क राशि: आज घर के कार्यों में व्यस्त रहेंगे। धार्मिक कार्यों में रुचि रहेगी। मीडिया और आईटी के जातक सफलता की प्राप्ति करेंगे। आज का दिन सफल और भाग्यवृद्धि कारक है। लव लाइफ अच्छी रहेगी। स्वास्थ्य से सुख मिलेगा।
शुभ रंग- सफेद रंग शुभ है।

सिंह राशि: आई टी फील्ड में आपके कार्यों से आपके अधिकारी प्रसन्न रहेंगे। छात्रों को नवीन अवसरों की प्राप्ति होगी । लव लाइफ में थोड़ा तनाव रहेगा। बहते जल में उड़द प्रवाहित करें। वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा।
शुभ रंग: लाल आज का शुभ रंग है।


कन्या राशि: मन प्रसन्न रहेगा। संतान को सफलता की प्राप्ति होगी। आईटी और फिल्म फील्ड के जातक अपने काम में उन्नति करेंगे। छात्रों के प्रगति के मार्ग में आने वाली बाधाएं खत्म होंगी। धन के आगमन के रास्ते बनेंगे। आज आपकी लव लाइफ अच्छी रहेगी। हेल्थ बेहतर रहेगा।
शुभ रंग-हरा रंग शुभ है।

तुला राशि: आज अपने कार्यों में संघर्ष करना होगा। धन का व्यय होगा। छात्र अपनी प्रगति से खुश रहेंगे। स्वास्थ्य सुख में परेशानी हो सकती है। बहते जल में नारियल प्रवाहित करें। सूक्त का पाठ करें।
शुभ रंग- हरा रंग शुभ है।

वृश्चिक राशि: आई टी तथा बैंकिंग के लोग अपने करियर को आज नया मोड़ देंगे। धन का आगमन हो सकता है। लव लाइफ अच्छी रहेगी। दाम्पत्य जीवन में जीवन साथी को महत्व दें। स्वास्थ्य को लेकर प्रसन्न रहेंग। हनुमानचालीसा का पाठ करें।
शुभ रंग- सफेद रंग शुभ है।

धनु राशि: आईटी और बैंकिंग फील्ड के जातकों के लिए कई नवीन अवसर उपलब्ध रहेंगे। शिक्षा में प्रगति होगी। लव लाइफ अच्छी रहनी चाहिए। आज आपकी हेल्थ अच्छी रहेगी। बहते जल में कोयला प्रवाहित करें।
शुभ रंग-पीला रंग शुभ है।

मकर राशि: आज परिश्रम करना होगा। बैंकिंग और आई टी फील्ड के जातक अपने टारगेट को प्राप्त करेंगे। छात्र सफल रहेंगे। लव पार्टनर को शिकायत का अवसर नहीं देंगे। दाम्पत्य जीवन सुखी रहेगा। हेल्थ अच्छी रहेगी। हनुमान जी के मन्दिर जाएं।
शुभ रंग- नीला रंग शुभ है।

कुंभ राशि: जॉब चेंज के अवसर बन सकते हैं। दाम्पत्य जीवन में किसी बात को लेकर तनाव हो सकता है। लव लाइफ सुखी रहेगी। स्वास्थ्य सुख अच्छा रहना चाहिए। गरीबों में अन्न का दान करें। हनुमान जी का ध्यान करते रहें।
शुभ रंग- हरा शुभ रंग है।

मीन राशि: आज आईटी और फिल्म से सम्बद्ध जातक सफल रहेंगे। लव लाइफ में विवाह की बात रखने का शानदार समय है। हेल्थ अच्छी रहेगी। बहते जल में तांबा प्रवाहित करें। विष्णु जी का ध्यान करते रहें। गरीबों में अन्न का दान करें।
शुभ रंग- सफेद रंग समृद्धि कारक है।


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EXCLUSIVE-आतंकवादियों के सामने फौलाद बन खड़े रहेंगे पुलिसकर्मी, तैयार हो रही स्पेशल क्यूआरटी


वाराणसी. आतंकवादियों के सामने फौलाद बन कर पुलिसकर्मी खड़े रहेंगे। ऐसी किसी अप्रिय स्थिति में सबसे पहले स्पेशल क्यूआरटी पहुंचेगी और अत्याधुनिक हथियारों के साथ मुकाबला करेगी। इस टीम में यूपी पुलिस के कांस्टेबल व उपनिरीक्षक होंगे। CRPF की ट्रेनिंग ने इन पुलिसकर्मियों को बेहद खास बना दिया है।




बनारस में प्रवासी सम्मेलन के लिए पुलिसकर्मियों को खास ट्रेनिंग दी गयी थी। ब्लेजर पहने इन पुलिसकर्मियों ने अपनी भूमिका के साथ न्याय किया था। पीएम नरेन्द्र मोदी से लेकर अन्य वीवीआईपी लोगों के मूवमेंट के समय तुरंत तैनाती व भीड़ को अपने अच्छे व्यवहार से नियंत्रित करने में सफलता पायी थी। पुलिसकर्मियों का व्यवहार आम जनता के प्रति इतना अच्छा था कि सभी ने इनकी सराहना की थी। इसी तर्ज पर अन्य पुलिसकर्मियों को अब सीआरपीएफ से खास ट्रेनिंग दी जा रही है। सीआरपीएफ से एके-47, इंसास, एमपी-5 जैसे अत्याधुनिक हथियार चलाने की ट्रेनिंग मिल रही है। साथ ही किसी बड़ी घटना के समय कैसे स्थिति को नियंत्रित किया जाता है इसकी ट्रेनिंग मिल रही है। अगले माह जब इनकी ट्रेनिंग पूरी हो जायेगी तो एडीजी जोन व सीआरपीएफ के कमांडेंट के सामने डेमो रखा जायेगा। इसके बाद स्पेशल क्यूआरटी की तैनाती का रास्ता साफ हो जायेगा।

सीआरपीएफ के अनुभव से बन रहे फौलाद
कश्मीर में आतंकियों से लौहा लेना हो या फिर नक्सलियों से। सीआरपीएफ सभी जगहों पर अपनी ड्यूटी करती है। सीआरपीएफ के पास खास अनुभव है जिसका फायदा स्थानीय पुलिस को मिल रहा है। सीआरपीएफ के अनुभव से ही इन पुलिसकर्मियों को फौलाद बनाया जा रहा है। पुलिसकर्मियों को भर्ती के समय ट्रेनिंग तो दी जाती है लेकिन ट्रेनिंग इतने अधिक पुलिसकर्मी होते हैं कि वह अत्याधुनिक हथियारों को चलाने व विशेष परिस्थितियों का मुकाबला करने में अक्षम होते हैं ऐसे में स्पेशल क्यूआरटी (क्विक रिस्पांस टीम) की खास ट्रेनिंग उन्हें सबसे अलग बना देगी। शुरूआती दौर में इनका नाम स्पेशल क्यूआरटी रखा गया है बाद में नाम बदला भी जा सकता है।

120 कांस्टेबल व चार उपनिरीक्षक है टीम में, 20 महिला पुलिसकर्मी भी शामिल
स्पेशल क्यूआरटी में 120 कांस्टेबल व 20 उपनिरीक्षक है। इसमे 20 महिला पुलिसकर्मी भी शामिल है। स्पेशल क्यूआरटी को खास ट्रेनिंग से पुलिस विभाग को बड़ा फायदा मिलेगा। दुर्भाग्य से कोई बड़ा आतंकी हमला हो जाता है और एनएसजी के पहुंचने में वक्त लगता है तो उतने देर में स्पेशल क्यूआरटी ही आतंकियों से मोर्चा लेने में सक्षम होगी। इसी सोच के साथ नयी टीम को तैयार किया गया है।

IPS Dr Anil Kumar
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दंगा होने पर सक्रिय हो जायेगी टीम, पुलिस की पास नहीं होगी संसाधन की कमी
स्पेशल क्यूआरटी टीम का प्रयोग दंगे के समय भी किया जा सकेगा। अभी तक दंगा होने पर स्थानीय पुलिस के बाद आरएएफ की तैनाती होती है। इनके बीच की कड़ी स्पेशल क्यूआरटी को बनाने की तैयारी की गयी है, जिससे किसी प्रकार की भी स्थिति को नियंत्रित कर आम लोगों को बड़ी राहत दी जा सके।

जानिए क्या कहा अधिकारी ने
ट्रेनी आईपीएस व कैंट सीओ डा.अनिल कुमार ने बताया कि प्रवासी सम्मेलन के समय इन पुलिसकर्मियों ने सफलता के साथ काम किया था। इसके बाद एसएसपी आनंद कुलकर्णी की पहल के बाद ही स्पेशल क्यूआरटी टीम तैयार की जा रही है। वीवीआईपी मूवमेंट से लेकर, भीड़ को नियंत्रित करना, बड़े आयोजनों में इनकी भूमिका अलग होगी। टीम को रिजर्व रखा जायेगा। खास मौके पर ही तैनाती की जायेगी।

 


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एससी एसटी एक्ट अध्यादेश व 13 पॉइंट रोस्टर समाप्त करने का बनारस में होगा विरोध, जुटेंगे देश भर के लोग


वाराणसी. केंद्र सरकार की गलत नीतियों के विरोध में नोटा अभियान के समर्थकों की जुटान रविवार को बनारस में होने जा रही है। जुटान में केंद्र सरकार की सवर्ण, पिछड़ा, व्यापारी और गरीब विरोधी नीतियों पर चर्चा कर नोटा अभियान को प्रभावशाली ढंग से चलाने की योजना बनाई जाएगी। यह जानकारी सवर्ण सेना के राष्ट्रीय संयोजक पं गौरव ओम और राष्ट्रीय स्वाभिमान मंच के प्रदीप राय ने दी है।

जानकारी के मुताबिक जुटान में पूर्वी उत्तर प्रदेश के लगभग एक दर्जन जिलों से 200 प्रतिनिधि शामिल होंगे। नोटा समर्थकों का मानना है कि एससी/ एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए अध्यादेश लाना देश के पिछड़ा और सवर्ण समाज के साथ विश्वासघात है। विश्वविद्यालयों-महाविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती और प्रमोशन के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद अध्यादेश लाकर 13 पॉइंट रोस्टर प्रणाली रद्द कर के सवर्ण समाज के युवाओं के पेट पर लात मारने का काम किया है। जुटान में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के सवाल पर भी चर्चा कर कॉरिडोर से प्रभावित लोगों को नोटा अभियान से जोड़ा जाएगा।

जुटान में प्रदेश के लखनऊ, बाराबंकी, अयोध्या,अम्बेडकर नगर, आज़मगढ़, जौनपुर,बनारस,भदोही,मिर्ज़ापुर, सोनभद्र,चंदौली और गाजीपुर के प्रतिनिधि भागीदारी करेंगे। जुटान कचहरी स्थित वाराणसी गर्ल्स डिग्री कॉलेज में होगी।


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सपा को एक और बड़ा झटका, भाजपा के कद्दावर नेता मोती सिंह को हराने वाले राम सिंह पटेल ने छोड़ी पार्टी


प्रतापगढ़. कांग्रेस ने एक दिन पहले ही सपा को झटका देते हुए पूर्व सांसद बालकुमार पटेल को न सिर्फ पार्टी में शामिल कराया बल्कि बांदा लोकसभा सीट से उम्मीदवार भी बना दिया। उसके बाद सपा को एक और झटका तब लगा जब उसके एक और नेता ने पार्टी को अलविदा कह दिया और कांग्रेस के हो गए। अब सपा से जाने वाले नेता हैं रामकुमार सिंह पटेल। ये पट्टी विधानसभा सीट से 2012 में समाजवादी पार्टी से विधायक थे। इनकी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन्होने 2012 में भाजपा के बड़े नेता और पूर्व मंत्री मोती सिंह को चुनाव हरा दिया था। हालांकि 2017 में राम सिंह चुनाव हार गए। इन्हे भाजपा उम्मीदवार के हाथों कम वोटों से हार का सामना करना पड़ा था।

प्रियंका गांधी की सक्रिय राजनीतिक में एंट्री के बाद पार्टी में लगातार विपक्षी पार्टियों के शामिल होने का सिलसिला तेजी से चल रहा है। कांग्रेस विपक्षी पार्टियों से नाराज नेताओं को अपने खेमे में शामिल करने से गुरेज नहीं कर रही है। कांग्रेस में सपा और बसपा के नेता भी शामिल हो रहे हैं। कांग्रेस को पता है कि लगातार पांच सालों से पार्टी का साथ छोड़ रहे नेताओं के इस दौर में उसे मजबूती के लिए नेताओं की बड़ी जमात चाहिए ताकि संगठन कमजोर न रहे। ऐसे में दूसरे दलों के नेताओं को लाकर कांग्रेस अपने कुनबे को बढ़ाने में जुटी है।

सपा के साथ ही भाजपा के लिए भी झटका है कांग्रेस का दाव

लगातार पटेल नेताओं को कांग्रेस के खेमे से जुड़ना सपा के लिए ही नहीं बल्कि भाजपा के लिए भी किसी झटके से कम नहीं है। जहां पटेल मतदाताओं को साधने के लिए सपा ने नरेश उत्तमन पटेल को प्रदेश अध्यक्ष का पद दिया है तो वहीं अपना दल एस से गठबंधन कर भाजपा भी इस वोट बैंक को अपने पास ही रखना चाहती है। लेकिन पहले अपना दल कृष्णा पटेल गुट के साथ कांग्रेस ने गठबंधन किया। फिर पूर्व सांसद बालकुमार पटेल को पार्टी में शामिल कराया और अब राम सिंह पटेल को साथ लाकर कांग्रेस सपा के साथ भाजपा को भी कमजोर करने में जुटी है।


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EXCLUSIVE-पुलिसकर्मियों के लिए तैयार हुआ अनोखा मेस, खाना हाइजेनिक होने के साथ तनाव कम करेगा माहौल


वाराणसी. पुलिस अधिकारियों को हाइटेक मेस की सुविधा मिल जाती है, लेकिन आम पुलिसवालों को ऐसी सहुलियत मिलने की बात कोई सोच नहीं सकता था लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। ट्रेनी आईपीएस व कैंट सीओ डा.अनिल कुमार ने बड़ी पहल करते हुए पुलिसकर्मियों के लिए आधुनिक व हाइजेनिक मेस तैयार कराया है जिसका अगले सप्ताह उद्घाटन किया जायेगा। युवा आईपीएस की सोच अन्य लोगों के लिए नजीर बन सकती है।




पुलिसकर्मियों की लंबी ड्यूटी व रहने का खराब माहौल तनाव के लिए जिम्मेदार होता है। ड्यूटी से थके पुलिसकर्मी जब मेस में खाना खाने जाते हैं तो वहां का माहौल भी थाने जैसा रहता है। हाथ से बनाये हुए खाने में सफाई व्यवस्था अच्छी नहीं रहती है जिसका असर खाने की गुणवत्ता पर पड़ता है लेकिन अब यह सारी चीजे बीते दिनों की होने वाली है। पुलिस लाइन में खास मेस तैयार किया जा रहा है। जहां पर हाइजेनिक ढंग से खाना बनाने के लिए मशीने लगायी जा रह है। मेस का वातारावरण भी बेहद अरामदायक लगेगा। किसी फाइव स्टार होटल की तरह वहां की साज-सज्जा की गयी है। माना जा रहा है कि देश में यह अपने तरह का अनोखा मेस होने जा रहा है। अगले सप्ताह इस मेस का उद्घाटन किया जायेगा। इसके बाद पुलिसकर्मियों को खास मेस व किचन की सुविधा मिलने लगेगी।

अपने तरह का खास व अनोखा होगा यह मेस
मेस की सीलिंग में कई स्पीकर लगाये गये हैं जहां पर हल्की आवाज में बजता हुआ संगीत पुलिसकर्मियों के तनाव को कम करने में सहयोग होगा। आटा गूथने से लेकर रोटी बनाने के लिए मशीन लगायी गयी है जिससे हाइजेनिक खाना तैयार होगा। दिन भर में 200 से अधिक पुलिसकर्मियों के लिए खाना बना सकेगा।

नये व पुराने गाने सुनने के साथ क्रिकेट वर्ल्ड कप का मजा लेने का मिला मौका
आधुनिक मेस में नये, पुराने गाने के साथ कबीर के दौहे भी सुनाये जायेंगे। मेस में ही 40 इंच की LED टीवी लगायी गयी है जिस पर पुलिसकर्मियों को वर्ल्ड कप क्रिकेट देखने का मौका मिलेगा। योजना के सफल होने पर अन्य जगहों पर इसे लागू कर पुलिसकर्मियों को अच्छी व्यवस्था दी जा सकती है।

IPS Dr Anil Kumar
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जानिए कैसे जमीन पर उतनी अनोखी सोच
युवा आईपीएस डा.अनिल कुमार ने पत्रिका को बताया कि एसएसपी आनंद कुलकर्णी की सोच को जमीन पर उतारा गया है। हम लोगों पुलिसकर्मियों को काम करने के लिए बेहतर माहौल देना चाहते हैं इसलिए सारी व्यवस्था की गयी है। ऐसा आलीशान मेस कही और नहीं है। अगले सप्ताह का इसका उद्घाटन आईजी रेंज के हाथों से कराने की योजना है। इसके बाद पुलिसकर्मियों को नया मेस मिल जायेगा।


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पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने पत्रकारिता करते समय राष्ट्र हित को सदैव रखा सर्वोपरि: प्रो अरुण कुमार भगत


वाराणसी. महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय के पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ के तत्वावधान में पंडित दीनदयाल का पत्रकारिता में योगदान विषय पर आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रो. अरुण कुमार भगत ने कहा " पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजनेता,अर्थ चिंतक, सामाजिक कार्यकर्ता, संगठनकर्ता, और श्रेष्ठ वक्ता के साथ- साथ श्रेष्ठ संचारक, लेखक,पत्रकार तथा संपादकों के भी संपादक थे। उनका मानना था कि पत्रकारिता करते समय राष्ट्र हित को सर्वोपरि मानना चाहिए।"

 

उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और स्वदेश के माध्यम से पत्रकारिता के क्षेत्र में जो मूल्य और मानदंड स्थापित किया, वह आज के पत्रकारों के लिए अनुकरणीय है। वे पांचजन्य में विचार वीथी और ऑर्गनाइजर में पॉलिटिकल डायरी नियमित लिखा करते थे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी मिशनरी भाव की पत्रकारिता के आग्रही थे। उन्होंने पत्रकारिता के सेवव्रती संस्कार को अपनाया।


प्रो अरुण कुमार भगत ने कहा कि वे सामाजिक सरोकार की पत्रकारिता के आग्रही थे। वे पांचजन्य और राष्ट्रधर्म के संपादकों को शालीन और सौम्य भाषा के प्रयोग करने की सलाह देते थे। उनका मानना था कि पत्रकारिता करते समय राष्ट्र हित को सर्वोपरि मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय पांचजन्य और राष्ट्रधर्म के लिए लेखन से लेकर कंपोजिंग,मशीन चलने तथा बंडल बांधने तक का काम स्वयं करते थे। वे समाचार के स्वरूप, उसकी भाषा, शीर्षक आदि लगाते समय विशेष रूप से सावधानी बरतने की सलाह देते थे। इस अवसर पर महामना मदनमोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक प्रो ओम प्रकाश सिंह, शोध पीठ के निदेशक दिवाकर लाल श्रीवास्तव, प्रो ए एन सिंह , डॉ राजेश, डॉ सूर्य नारायण सिंह डॉ शैलेन्द्र इत्यादि मौजूद रहे।


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