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एपल ने लॉन्च की सब्सक्रिप्शन बेस्ड वीडियो सर्विस एपल टीवी प्लस, एड फ्री एक्सपीरियंस और एपल ओरिजनल शो है खासियत


गैजेट डेस्क.एपल के शो टाइम इवेंट में सोमवार रात को एपल टीवी प्लस सर्विस लॉन्च की गई। इवेंट के आमत्रंण पत्र भेजे जाने के समय से ही कयास लगाए जा रहे थे कि एपल नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम वीडियो की तर्ज पर खुद की टीवी और वीडियो स्ट्रीमिंग सर्विस शुरू करने जा रही है।स्टीव जॉब्स थिएटर में सर्विस लॉन्च करने के लिए टिम कुक के साथ ओपरा विनफ्रे मौजूद रहीं।

एपल टीवी प्लस सब्सक्रिप्शन बेस्ड वीडियो सर्विस है, जिसमें यूजर को सिर्फ एपल ओरिजनल शो देखने को मिलेंगे। नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम की तरह ओरिजनल्स के अलावा अन्य लोकप्रिय शो और फिल्में एपल की इस सर्विस में नहीं होगी। एपल टीवी प्लस को एपल टीवी के पहले से मौजूद ऐप के साथ ही जोड़ा गया है। सर्विस को मई में शुरू किया जाएगा।

  1. एपल टीवी प्लस सर्विस सब्सक्रिप्शन बेस्ड वीडियो सर्विस है। जिसमें एपल ओरिजनल कंटेट देखने को मिलेगा। इसे मई 2019 से शुरू किया जाएगा।इसे एपल के पहले से उपलब्ध एपल टीवी ऐप में ही जोड़ा जाएगा। सर्विस में एपल ओरिजनल्स के अलावा एपल के पार्टनर्स जैसे एचबीओ के शो और फिल्में भी उपलब्ध होंगी।

  2. एपल ने अपनी सर्विस के लिए टीवी और सिनेमा इंडस्ट्री के कई बड़े नामों से हाथ मिलाया है। जिनमें ओपरा विनफ्रे और स्टीवन स्पिलबर्ग भी शामिल हैं। एपल टीवी प्लस सर्विस को 100 से ज्यादा देशों में लॉन्च किया जाएगा। यह सर्विस एड फ्री होगी। कंपनी ने अभी सर्विस की फीस के बारे में जानकारी नहीं दी है।

  3. एपल अपनी इस सर्विस के साथ एपल टीवी चैनल्स की सुविधा भी शुरू करने वाला है। इसके अंतर्गत एमटीवी हिट्स, एचबीओ, सिनेमैक्स जैसे 20 से ज्यादा चैनल्स एपल टीवी प्लस के अंदर ही मिलेंगे। यूजर को अलग अलग चैनल्स के लिए अलग-अलग ऐप पर नहीं जाना होगा।

  4. एपल टीवी ऐप पर यह सर्विस मई 2019 से शुरू होगी। एपल टीवी ऐप आईफोन, आईपैड, आईपॉड टच और एपल टीवी सेट टॉप बॉक्स पर एक्सेस किया जा सकता है। कंपनी ने कहा है कि एपल टीवी प्लस सर्विस के शुरू होने के साथ ही एपल टीवी ऐप आईमैक पर भी एक्सेस किया जा सकेगा। इसी के साथ आने वाले समय में यह ऐप रोकू और अमेजन फायर टीवी पर भी उपलब्ध होगा।



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      apple launched its subscription based video service called apple tv plus in show time event

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एंड्रॉयड डिवाइस में मौजूद प्री-इंस्टाल ऐप तक पहुंच रही हैं सारी पर्सनल इंफॉर्मेशन


गैजेट डेस्क. नए एंड्रॉयड मोबाइल डिवाइस में मौजूद प्री-इंस्टॉल ऐप और प्रोग्राम यूजर्स की पर्सनल इंफॉर्मेंशन तक पहुंचने में काफी हद तक कामयाब होतीहै, जिनपर ज्यादातर यूजर्स काध्यान ही नहीं जाता। इसका खुलासाआईएमडीईए नेटवर्क इंस्टीट्यूट और स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी के द्वारा की गई स्टडी में हुआ, जिसमें2,748 एंड्रॉयड डिवाइसयूजर्स शामिल थे।

  1. स्टडी में इस बात की जानकारी नहीं दी गई कि यूरोपियन संघ का जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन लॉ, एंडॉयड डिवाइस की प्री-इंस्टॉल ऐप पर कितनी और किस हद तक निगरानी रखता है।

  2. एंड्रॉयड का ओपन सोर्स नेचर होने की वजह से स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी इसके ऑपरेटिंग सिस्टम को अपने अनुसार कस्टमाइज करती है। कंपनियां यूजर को फोन देने से पहले ही इसके ओएस में अलग अलग तरह की ऐप जोड़ देती है।

  3. स्टडी में पाया गया कि डिवाइस में पहले से मौजूद ऐप यूजर की पर्सनल इंफॉर्मेशन तक पहुंचने के लिए यूजर से अनुरोध करतीहै और पर्सनल डिटेल तक पहुंच जाती है जहां,गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड की गई ऐप नहीं पहुंच पाती। यह यूजर की प्राइवेसी और सिक्योरिटी के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं है।

  4. स्टडी में पाया गया कि गूगल भी प्री-इंस्टॉल ऐप की सिक्योरिटी चेक करने के लिए कोई कठोर कदम नहीं उठाता है, जो वह प्ले स्टोर वर्जन ऐप के लिए करता है। अक्सर देखा गया है कि प्री-इंस्टॉल ऐप को अनइंस्टॉल भी नहीं किया जा सकता।

  5. स्टडी के सह-लेखकजुआनने बताया कि पारदर्शिता और नियमों की कमी के कारण इन ऐप की कोई निगरानी नहीं करता।

  6. इसपर गूगल ने सफाई पेश करते हुए कहा कि हम अपने सभी मैनुफैक्चर को एक खास टूल प्रदान करते हैं, जिससे वह यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उनका सॉफ्टवेयर गूगल की गोपनियता और सुरक्षा मानकों पर खरा उतरता है या नहीं।

  7. गूगल के एक प्रवक्ता का कहना है कि हम सहयोगियों को

    प्री-इंस्टॉल ऐप की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट नीति प्रदान करते हैं और नियमित रूप से संभावित खतरें के बारे में पहले ही जानकारी दे देते हैं। हालांकि अब पहले से इंस्टॉल ऐप की जांच को बढ़ा दिया गया है।



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      users have limited control over personal information connected by pre installed app

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रूसी सेना ने बनाई फ्लाइंग एके 47, ऊंचाई से दुश्मन का सफाया करेगी


  • ड्रोन गन 300 मीटर की दूरी तक लक्ष्य भेदने में सक्षम है और स्टैंडर्ड एके 47 की तरह एक मिनट में 600 राउंड फायर कर सकती है। दो प्रोपेलर की मदद से उड़ान भरेगी।
  • ड्रोन गन को रशियन आर्म्स मेकर अल्माज़ आंटे में डिजाइन किया है। फरवरी 2018 में इसका पेटेंट फाइल कराया गया था। यह काफी हल्के मेटल से बनी है।


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russian invents flying ak47 by strapping guns to drone

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एपल ने लॉन्च किया टाइटेनियम से बना बिना किसी नंबर वाला दुनिया का सबसे पतला कार्ड


गैजेट डेस्क.कैलिफोर्निया स्थित स्टीव जॉब्स थिएटर में एपल ने अपने शो टाइम इवेंट में सोमवार को एपल टीवी, एपल न्यूज और वीडियो स्ट्रीमिंग के साथ ही एपल क्रेडिट कार्ड भी लॉन्च किया।कंपनी ने अपनी वॉलेट सर्विस एपल पे को और बेहतर करते हुए इसके साथ एपल क्रेडिट कार्ड को जोड़ा है। कंपनी क्रेडिट कार्ड के सॉफ्टवेयर वर्जन के साथ ही फिजिकल वर्जन भी दे रही है। एपल वॉलेट के जरिए दुनियाभर में कहीं भी कार्ड लेस ट्रांजेक्शन किया जा सकता है। वहीं जिस जगह पर एपल पे या एपल वॉलेट एक्सेप्ट नहीं किया जाता वहां एपल के फिजिकल क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी कार्ड यूज करने पर कैशबैक भी ऑफर कर रही है।

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एपल पे और एपल कार्ड के जरिए कंपनी ने इस साल करीब 10 अरब ट्रांजेक्शन का लक्ष्य रखा है। एपल कार्ड के लिए कंपनी ने गोल्डमैन सैक्स के साथ साझेदारी की है। कार्ड को ग्लोबल पेमेंट नेटवर्क के रूप में रखा जाएगा, जिससे इसे दुनिया में कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

एपल कार्ड का सॉफ्टवेयर वर्जन एपल के वॉलेट एप में जोड़ा गया है। इसका मतलब यह कि यूजर्स अपने फोन से ही सॉफ्टवेयर कार्ड को एक्सेस और यूज कर सकेंगे।

  1. फिजिकल कार्ड टाइटेनियम का बना है। यह दुनिया का सबसे पतला और हल्का क्रेडिट कार्ड है। कार्ड पर सिर्फ ग्राहक का नाम लिखा होगा। इसमें कोई कार्ड नंबर, सीवीवी नंबर या एक्सपायरी डेट नहीं होगी। सामान्य कार्ड की तरह ग्राहक को इसमें हस्ताक्षर भी नहीं करने होंगे।

  2. एपल के सॉफ्टवेयर क्रेडिट कार्ड को एपल वॉलेट में जोड़ा गया है।वॉलेट पर फ्री साइन अप करने के साथ ही यूजर एपल कार्ड का इस्तेमाल करना शुरू कर सकता है।एपल सॉफ्टवेयर कार्ड को सिर्फ आईफोन की मदद से दुनिया में कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

  3. एपल कार्ड में यूजर को अपने ट्रांजेक्शन, ड्यू अमाउंट और बची हुई लिमिट दिखाई देगी। वहीं ट्रांजेक्शन अलग-अलग कैटेगरी जैसे फूड, यूटिलिटी आदि के हिसाब से दिखाई देंगे। एपल कार्ड से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए यूजर को 24*7 बिल्ट इन सपोर्ट मिलेगा।

  4. एपल कार्ड में यूजर को बेहतर अनुभव देने के लिए एपल मैप फीचर की मदद भी ली गई है। वॉलेट में ट्रांजेक्शन के साथ ही यूजर मैप पर देख सकेगा कि ट्रांजेक्शन किस लोकेशन पर किया गया है।

  5. एपल कार्ड से ट्रांजेक्शन करने पर हर दिन यूजर को खर्च किए गए अमाउंट का 2% कैशबैक मिलेगा। वहीं एपल सर्विस, एपल रीटेल स्टोर या एपल वेब स्टोर में खर्च करने पर यूजर को 3% कैशबैक मिलेगा।

  6. एपल क्रेडिट कार्ड के साथ कोई इंटरनेशनल फीस, लेट फीस या किसी भी तरह की साइन अप फीस नहीं लगेगी। एपल पे यूजर्स के लिए कार्ड पूरी तरह मुफ्त होगा।



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      apple launches its new apple software and credit card in show time event

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रशियन आर्मी ने बनाई फ्लाइंग एके 47, हवा में उड़ान भरकर करेगी दुश्मन का सफाया


गैजेट डेस्क. रोबोट टैंक बनाने के बाद रूस की आर्मी अब उड़ने वाली एके 47 बना रही है, जो हवा में उड़ान भरेगी और दुश्मनों का सफाया करेगी। दो प्रोपेलर की मदद से उड़ान भरने वाला यह ड्रोन गन 300 मीटर की दूरी तक लक्ष्य भेदने में सक्षम है जो स्टैंडर्ड एके 47 की तरह एक मिनट में 600 राउंड फायर करने में सक्षम है। हाल ही वीडियो सामने आया था जिसमें रशियन आर्मी को एआई बेस्ड रोबोट टैंक और ड्रोन का परीक्षण करते देखा गया था।

  1. ड्रोन गन को रशियन आर्म्स मेकर अल्माज़ आंटे में डिजाइन किया है। फरवरी 2018 में इसका पेटेंट फाइल करायागया था।

  2. तस्वीरों में देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि फ्लाइंग एके 47 को दो प्रोपेलर की मदद से उड़ाया जाएगा, हालांकि अभी इस बात की पुष्टी नहीं हो पाई है कि यह रिमोट से कंट्रोल किया जाएगा या यह एआई तकनीक पर आधारित होगी।

  3. इसके व्हीकल को हवा में दो स्टेबलाइजर की मदद से कंट्रोल किया जाएगा। वहीं आइकॉनिक गन एके 47 को हल्के मेटलफ्रेम में फिट किया जाएगा।

  4. यह फ्लाइंग एके 47 स्टैंडर्ड एके 47 राइफल की तरह ही एक मिनट में 600 राउंड फायर करने में सक्षमहै। यह 300 मीटर की दूरी तक दुश्मनों का सफाया कर सकती है,हालांकि फ्लाइंग गन की मैग्जीन में सिर्फ 30 राउंड ही है।

  5. यह काफी हल्के मेटल से बनी है। हवा का दवाब तेज होने पर या तूफान की स्थिति में इसे कंट्रोल करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

  6. एके 47 को खासतौर परछोटे टार्गेट को भेदने के लिय इस्तेमाल कियाजाताहै। फ्लाइंग एके 47 को एक अनुभवी व्यक्ति ही चला सकता है जो छोटे टार्गेट पर सटिक निशाना लगा सके।

  7. युद्धस्थल में फ्लाइंग एके 47 कोकाफी मुश्किलों को सामना करना पड़ेगा क्योंकि इसे हवा में रिलोड नहीं किया जा सकता, 30 राउंड फायर करने के बाद इसे वापस जमीन पर लैंड करनाहोगा।

  8. रशियन आर्मी ने पिछले साल भी कई ड्रोन से पर्दा उठाया था। जिसमें एक अंडरवाटर गिज्मों भी शामिल था, जिसे खासतौर पर मिलिट्री डाइवर्स के लिए तैयार किया गया था। इसमें भी राइफल अटैच थी।



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      russian invents flying ak47 by strapping guns to drone
      russian invents flying ak47 by strapping guns to drone
      russian invents flying ak47 by strapping guns to drone
      russian invents flying ak47 by strapping guns to drone

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एयरटेल ने घटाईं कॉल रेट, बांग्लादेश 2.99 रु. और नेपाल के लिए 7.99 रु. प्रति मिनट हुईं


नई दिल्‍ली. भारती एयरटेल ने आज बांग्‍लादेश और नेपाल के लिये नयी आइएसडी कॉल रेट्स की घोषणा की है।अब ग्राहक बांग्लादेश में 2.99 रुपए और नेपाल में 7.99 रुपए प्रति मिनट की दर सेकॉल कर सकेंगे। पहले बांग्लादेश में कॉल करने की दर 12 रुपए प्रति मिनट और नेपाल में कॉल करने की दर 13 रुपए प्रति मिनट थी।

  1. बांग्‍लादेश के लिए अब कॉल की कीमत सिर्फ 2.99 रुपए प्रति मिनट होगी, जोकि पहले 12 रुपए प्रति मिनट थी। इस तरह कॉल दरों को 75% कम कर दिया गया है। इसी तरह अब नेपाल में कॉल करने के लिये 7.99 रुपए प्रति मिनट की दर से चार्ज देना होगा। यह नई कॉल दर पहले की 13 रुपए की कॉल से लगभग 40% कम है।

  2. नए आइएसडी कॉल दरें, जोकि फिलहाल एयरटेल के प्रीपेड मोबाइल यूजर्सके लिए उपलब्‍ध हैं, इंडस्‍ट्री में सबसे किफायती हैं और बांग्‍लादेश एवं नेपाल में कॉल करने के लिए अतिरिक्‍त आइएसडी पैकभी नहीं खरीदना पड़ेगा।एयरटेल मोबाइल ग्राहक अब अपने रेगुलर रिचर्ज पैक्‍स एवं बंडल्‍स के साथ सबसे प्रतिस्‍पर्धी आइएसडी टैरिफका फायदा ले सकते हैं।

  3. भारती एयरटेल केसीओओ अजय पुरी ने कहा, एयरटेल की नई कॉलिंग दरें, टैरिफ्स को आसान बनायेंगे और इन पड़ोसी देशों में कॉल करने के लिये स्‍पेशल आइएसडी पैक्‍स की जरूरत को समाप्‍त करेंगे। एयरटेल रिटेल और बिजनेस ग्राहकों को दरों में हुई इस कटौती का भरपूर लाभ मिलेगा।



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      airtel customers can call in bangladesh and nepal with new call rates

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मोटो G7 और मोटोरोला वन लॉन्च


  • मोटरोला ने सोमवार को भारत में अपने मिड रेंड स्मार्टफोन मोटो G7 को लॉन्च कर दिया है। इस स्मार्टफोन की कीमत 16,999 रुपए है।
  • इसके साथ ही मोटोरोला वन भी लॉन्च किया गया। इसकी कीमत 13,999 रुपए है। कंपनी दोनों स्मार्टफोन पर जियो कैशबैक ऑफर दे रही है।


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Moto G7 and Motorola One India Launch today, knoe features, price, specifications and battery power

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मोटो G7 और मोटोरोला वन लॉन्च, 4 जीबी रैम और ड्युअल रियर कैमरे से लैस, कीमत 13,999 रुपए से शुरू


गैजेट डेस्क. मोटरोला ने सोमवार को भारत में अपने मिड रेंड स्मार्टफोन मोटो G7 को लॉन्च कर दिया है। इस स्मार्टफोन की कीमत 16,999 रुपए है। पिछले महीने ही कंपनी ने ब्राजील में मोटो G7 सीरीज लॉन्च की है जिसमें मोटो G7, मोटो G7 प्लस, मोटो G7 पावर और मोटो G7 प्ले शामिल है। कंपनी ने इसके साथ ही मोटोरोला वन भी लॉन्च किया है, जिसकी कीमत 13,999 रुपए है।

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  1. मोटो G7 सीरीज में आने वाले मोटो G7 पावर को कंपनी भारत में पहले ही लॉन्च कर चुकी है। मोटो G7 स्मार्ट फोन की सबसे खास बात है इसकी 6.24 इंच का फुल एचडी प्लस डिस्प्ले और क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 632 प्रोसेसर। वहीं मोटोरोला वन में 5.9 इंच की डिस्प्ले मिलता है , जो स्नैपड्रैगन 652 प्रोसेसर से लैस है।

  2. दो कलर ऑप्शन सिरेमिक ब्लैक और क्लियर व्हाइट में उपलब्ध मोटो G7 और मोटोरोला वन की बिक्री आज से शुरू हो गई है। जिसे मोटो हब स्टोर्स, ऑशोराइज्ड रिटेल आउटलेट और फ्लिपकार्ट से खरीदा जा सकता है।

  3. दोनों स्मार्टफोन के साथ 2,200 रुपए का जियोकैशबैक ऑफर मिल रहा है। हालांकि यह ऑफर जियो के 198 रुपए और 299 रुपए के रिचार्ज पर ही उपलब्ध है।

  4. स्पेसिफिकेशन मोटो G7 मोटोरोला वन
    डिस्प्ले 6.24 इंच का फुल-एचडी+ 5.9 इंच का एचडी+
    प्रोसेसर 1.8GHz,ऑक्टा-कोर क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 632 क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 625
    ओएस एंड्रॉयड 9.0 पाई एंड्रायड 8.1 ओरियो
    रैम 4 जीबी 4 जीबी
    स्टोरेज 64 जीबी (एस्कपेंडेबल 512 जीबी तक) 64 जीबी (एस्कपेंडेबल 256 जीबी तक)
    बैटरी 3000mAh 3000mAh
    फ्रंट कैमरा 8 मेगापिक्सल 8 मेगापिक्सल
    रियर कैमरा 12 मेगापिक्सल+ 5 मेगापिक्सल 13 मेगापिक्सल+ 2 मेगापिक्सल
    कनेक्टिविटी 4G VoLTE, ब्लूटूथ वर्जन 4.2, वाई-फाई 802.11 ए/बी/जी/एन, जीपीएस/ ए-जीपीएस, 3.5mm हेडफोन जैक, यूएसबी टाइप-सी -
    डायमेंशन(l*b*w) 157x75.3x8 एमएम -
    वजन 172 ग्राम -



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      Moto G7 and Motorola One India Launch today, knoe features, price, specifications and battery power

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सैनिकों की जगह रोबोट लड़ेंगे युद्ध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार हो रही नई सेना


गैजेट डेस्क.आने वाले समय में जंग के मैदानमें सैनिकोंकी जगह रोबोट लड़तेदिखाई देंगे। रूस ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। हाल ही में जारी हुएएक वीडियो मेंजिसमें रशिया आर्मी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड ड्रायवरलेस टैंक और रिमोट कंट्रोल्ड ड्रोन की टेस्टिंग करते हुए देखा गयाहै।

  1. रशियन आर्मी के इस वीडियो को Kremlin ने जारी किया है। जिसमें रशिया की लेटेस्ट ड्रोन टेक्नोलॉजी को देखा जा सकता है। साथ ही इसमें एआई कंट्रोल्ड ड्राइवरलेस टैंक भी है, जो सैनिक की राइफल के अनुसार अपना निशाना साध रहा है।

  2. रशियन एडवांस्ड रिसर्च फाउंडेशन (एआरएफ) का कहना है कि हमारा लक्ष्य एक ऐसी रोबोट आर्मी को तैयार करना है, जो पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस तकनीक पर आधारित हो। फिलहाल ड्रोन को रिमोट कंट्रोल से नियंत्रित किया जा रहा है लेकिन भविष्य में इसे फुली ऑटोनोमस बनाया जाएगा।

  3. विश्व के शक्तिशाली देश बड़े स्तर पर ऑटोनोमस और रिमोट कंट्रोल्ड व्हीकल को बनाने पर काम कर रहे हैं। इसका सीधा सा मतलब यह है कि भविष्य के मिलिट्री हार्डवेयर बिना किसी इंसानी हस्तक्षेप के दुश्मनों को ढूंढकर उन्हें मार गिराएंगे।

  4. पिछले महीने ही ब्रिटिश आर्मी ने दावा किया कि वो 200 मिनी ड्रोन बनाने पर काम कर रही है जो आकार में इंसानों के हाथ से भी छोटा है। यह युद्धस्थल पर आसमान में तैनात रहकर सैनिकों को खतरें की चेकावनी देगा।

  5. दिखने में यह मिनी ड्रोन काली मक्खी की तरह होगा जो मुश्किल हालातों में भी आसानी से काम करेगा जहां फिलहाल सैनिकों को तैनात होना पड़ता है। डिफेंस मिनिस्ट्री रोबोटिक सिस्टम पर लगभग 600 करोड़ रुपए का निवेश कर रही है।

  6. पिछले महीने आयोजित हुए एक इवेंट में जमा हुए दुनियाभर से आए वैज्ञानिकों ने शिरकत की। यहां एक्सपर्ट्स ने दावा किया है यह जानवेला रोबोट्स मानवजाति के लिए खतरा है। इन्हें जल्द से जल्द बैन करना चाहिए।



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      russian army claims that it has bulit an army of killer robot
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5 साल से डिवाइस की जासूसी कर रहा था छुपा हुआ बग, डेटा चोरी करने में करता था हैकर्स की मदद


गैजेट डेस्क.एंड्राइड ऑपरेटिंग सिस्टम के 2 बिलियन से ज्यादा यूजर्स होने के कारण कई बार सुरक्षा संबंधी व्यवस्था दुरुस्त रखना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। समय समय पर कई बग्स सामने आते रहते हैं, और कंपनी इन्हें जल्दी ही ठीक भी कर लेती है। लेकिन हाल ही में एक ऐसे बग का पता चला है जो साल 2013 से एंड्राइड डिवाइसेज को इंफेक्ट कर रहा था। यह बग करीब 5 साल तक हैकर्स को डिवाइस से यूजर का डेटा एक्सेस करने में मदद करता रहा। सिक्योरिटी रिसर्चर सर्जी टोशिन ने हाल ही में इस बग का पता लगाया है।

सर्जी टोशिन का कहना है कि इस बग के जरिए हैकर्स यूजर्स के डिवाइस से डेटा चुराने के अलावा अकाउंट भी हैक कर सकते थे। यह बग गूगल के ओपन सोर्स प्रोजेक्ट क्रोमियम में तैयार हुआ था, जो पहले गूगल क्रोम को इंफेक्ट किया। और उसके बाद बाकी ब्राउजर्स के साथ भी कनेक्ट हो गया। यह बग एंड्राइड मोबाइल पर गूगल क्रोम और क्रोमियम द्वारा बनाए गए अन्य ब्राउजर्स का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को नुकसान पहुंचा रहा था।

ब्राउजर अपडेट कर रहेंसुरक्षित
बग 5 साल तक यूजर्स के डिवाइसेज को इंफेक्ट करता रहा। लेकिन अब बग की जानकारी सामने आने के बाद एंड्राइड 7 और उसके ऊपर वाले वर्जन में बग का फिक्स दिया जा रहा है। क्रोम अपडेट के अंतर्गत यह फिक्स एंड्राइड 7 और उसके ऊपर वाले वर्जन के यूजर्स को मिलेगा।
जबकि एंड्राइड 7 से पुराने वर्जन वाले यूजर्स को गूगल प्लेस्टोर से अपना क्रोम ब्राउजर प्लेस्टोर से अपडेट करना होगा।



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android bug allowed hackers to spy on users for over five years

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स्वास्थ्य सेवाओं में एआई सिस्टम के दुरुपयोग का खतरा बढ़ा


केड मेट्ज, क्रेग स्मिथ
अमेरिकी शोधकर्ताओं ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए धांधली की आशंका जताई है। जर्नल साइंस में प्रकाशित एक पेपर के अनुसार डिजिटल डेटा का उपयोग कर एआई के व्यवहार में जोड़-तोड़ संभव है। उदाहरण के लिए फेफड़े के स्कैन में कुछ पिक्सल बदलकर एआई सिस्टम को बीमारी पहचानने या न देखने के मामले में बेवकूफ बना सकते हैं।


हार्वर्ड मेडिकल कॉलेज, एमआईटी में शोधकर्ता सेमुअल फिनलेसन ने अपनी रिसर्च में आगाह किया है ज्यादा पैसा वसूल करने के लिए डॉक्टरों, अस्पतालों और अन्य संगठनों द्वारा बिलिंग या अन्य इंश्योरेंस सॉफ्टवेयर में एआई के माध्यम से बदलाव संभव है। शोधकर्ताओं ने बताया, किसी इमेज में कुछ पिक्सल बदलकर त्वचा के साधारण जख्म को कैंसर प्रभावित बता सकते हैं। कंप्यूटर फीडिंग में मरीज की गलत जानकारी भेजकर एआई की डायग्नोसिस बदलना संभव है। कमर दर्द, शराब की लत की भी वास्तविक से हटकर अलग डायग्नोसिस बताई जा सकती है।


पेपर में एआई सिस्टम के बचाव तंत्र पर हमलों (एडवर्सेरिअल अटैक) की बढ़ती आशंका पर चिंता जताई गई है। ये हमले चेहरा पहचानने की सेवाओं, ड्राइवरलैस कारों, आइरिस स्कैन और फिंगर प्रिंट पर हो सकते हैं। ये एआई सिस्टम के बुनियादी ढांचे पर प्रहार करते हैं। मशीन लर्निंग अपने खुद के व्यवहार के बारे में अप्रत्याशित नतीजे दे सकती है। 2016 में कार्नेगी मेलॉन की टीम साबित कर चुकी है कि फेस रिकग्नीशन सिस्टम को धोखा दे सकते हैंै। पिछले वर्ष टंडन इंजीनियरिंग स्कूल ने ऐसे वर्चुअल फिंगर प्रिंट बनाए जो फिंगर प्रिंट रीडर्स को 22% बार मूर्ख बना सकते हैं।



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Arthritic intelligence increase the risk of health abuse in health services

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83 साल की महिला प्रोग्रामिंग सीखकर एप बना रहीं, 2 साल पहले वीडियो गेम भी बना चुकी हैं


गैजेट डेस्क. सीखने और सिखाने की उम्र नहीं होती। जापान की मसाका वाकामिया ने 60 साल की उम्र में पहला कंप्यूटर खरीदा। अब वह 83 साल की उम्र में मोबाइल एप बना रही हैं। वाकामिया के मुताबिक यह ऐप उन लोगों के लिए उपयोगी होगा, जो जापानी भाषा पढ़ना-लिखना जानते हैं, लेकिन अंग्रेजी नहीं समझ पाते।

वाकामिया ने दो साल पहले एक मोबाइल गेम भी बनाया था। वह कहती हैं, 'मैं अकेले रहती हूं। इसलिए मेरा पूरा फोकस प्रोग्रामिंग पर है। आज इंटरनेट पर ज्यादातर चीजें अंग्रेजी में हैं। हमारी पीढ़ी के लोग अंग्रेजी ठीक से नहीं समझ पाते। मैं चाहती हूं कि सभी बुजुर्ग टेक्नोलॉजी का फायदा उठाएं। वे टेक्नोलॉजी के जरिए नए-नए लोगों से जुड़ सकते हैं। इससे उनका अकेलापन दूर होगा।

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वे अपने हुनर को सामने ला सकते हैं। जिंदगी की सुबह और शाम दोनों ही खुशी के साथ जीने के लिए है।' दरअसल जापान को 'सुपर एज्ड नेशन' कहा जाता है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक यहां हर चार में से एक व्यक्ति 65 साल से अधिक उम्र का है।

वाकामिया ने अपने घर में कंप्यूटर सेंटर भी खोल रखा है। वह यहां अपनी उम्र के लोगों को कंप्यूटर सिखाती हैं। वाकामिया कहती हैं, 'मैं तब बहुत खुश हुई, जब लोगों, खासकर नई पीढ़ी ने मेरे विचारों का गर्मजोशी से स्वागत किया। मैं हमेशा क्रिएटिव रहना चाहती हूं। यह भी चाहती हूं कि आज के बच्चे भी क्रिएटिव रहें।'

साल 2017 में एपल के सीईओ टिम से मिलीं
वाकामिया ने 2017 में सैन फ्रांसिस्को में एपल के सीईओ टिम कुक से मुलाकात की थी। उन्होंने एपल पर भाषाई दिक्कतों के बारे में टिम कुक को सलाह भी दी थी। वह संयुक्त राष्ट्र में भाषण भी दे चुकी हैं।

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meet japans oldest app maker women makes mobile app in the age of 83

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रेडमी गो की सेकंड सेल शुरू, ब्लू और ब्लैक कलर ऑप्शन में उपलब्ध


गैजेट डेस्क. श्याओमी के सबसे सस्ते स्मार्टफोन रेडमी गो की दूसरी सेल शुरू हो गई है। इसे फ्लिपकार्ट और एमआई डॉट कॉम से खरीदा जा सकता है। श्याओमी का यह पहला स्मार्टफोन है जो एंड्रॉयड गो ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है। फोन की कीमत 4,499 रुपए है।

इस स्मार्टफोन में 3000mAh की बैटरी, 5 इंच का एचडी डिस्प्ले है। साथ ही फोन में 1 जीबी रैम और 8 जीबी का स्टोरेज है, जिसे 128 जीबी तक बढ़ाया जा सकता है। यूजर को अनलिमिटेड स्टोरेज का ऑप्शन भी मिलता है, जो इस सेगमेंट में पहली बार किसी स्मार्टफोन में देखने को मिलता है। इसका गूगल असिस्टेंट फीचर 20 से ज्यादा क्षेत्रीय भाषा को स्पोर्ट करता है।

  1. रेडमी गो श्याओमी का पहला स्मार्टफोन है जो एंड्रॉयड गो एडिशन पर बेस्ड है। कंपनी का दावा है कि ऑपरेटिंग सिस्टम का यह वर्जन एक जीबी या उससे कम रैम वाले फोन को स्मूथ परफॉर्मेंस देता है।

  2. एंड्रॉयड गो का बेहतर एक्सपीरियंस देने के लिए कंपनी ने यूट्यूब का लो वर्जन यूट्यूब-गो फोन में दिया है जो फास्ट तो ही है साथ ही डेटा की खपत भी कम करता है। फोन में गूगल मैप, जीमेल और गूगल असिस्टेंट के भी गो वर्जन मौजूद है।

  3. फोन में 5 इंच का एचडी डिस्प्ले है। यह स्नैपड्रैगन 425 चिपसेटपर बेस्ड है। यह 1 जीबी रैम के साथ 8 जीबी और 16 जीबी स्टोरेज के वैरिएंट्स में उपलब्ध होगा। फोन में अनलिमिटेड फोटो स्टोरेज का ऑप्शन भी मिलता है जो इससेगमेंट में पहली बार किसी फोन दिया गया है।

  4. फोन मेंएलईडी फ्लैश के साथ8 मेगापिक्सल का रियरकैमरा मिलता है, जिसमें 11 तरह के फिल्टर मोड सिलेक्ट करने का ऑप्शन भी है।

  5. फोन फुल एचडी रिकॉर्डिंग को सपोर्ट करता है। फोन में 5 मेगापिक्सल फ्रंटकैमरा है। जिसमें वीडियो और सेल्फी के लिए एचडी रिकॉर्डिंग का ऑप्शन भी मिलता है।

  6. डिस्प्ले 5 इंच एचडी
    रिजोल्यूशन 720x1280 पिक्सल
    पिक्सल डेंसिटी 296ppi
    प्रोसेसर क्वाड-कोर स्नैपड्रैगन 425 SoC
    फ्रंट कैमरा 5 मेगापिक्सल सेंसर
    रियर कैमरा 8 मेगापिक्सल सेंसर
    रैम 1 जीबी
    स्टोरेज 8 जीबी/16 जीबी
    सिम ड्युअल सिम (नैनो)
    ओएस एंड्रॉयड 8.1 ओरियो (गो एडिशन)
    कनेक्टिविटी 4G LTE, वाईफाई 280.11, ब्लूटूथ v4.1, जीपीएस, माइक्रो यूएसबी
    डायमेंशन(l*b*h) 140.4x70.1x8.35 एमएम
    बैटरी 3,000mAh
    कीमत 4,499 रुपए


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      Redmi Go to Go on Sale for First Time, know features, price, specifications and camera features
      Redmi Go to Go on Sale for First Time, know features, price, specifications and camera features

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आज रात नई वीडियो स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन टीवी सर्विस लॉन्च कर सकता है एपल, इवेंट की लाइव स्ट्रीमिंग शुरू


गैजेट डेस्क.टेक कंपनी एपल 25 मार्च को स्टीव जॉब्स थिएटर (क्यूपरटीनो, कैलिफोर्निया) में शो टाइम इवेंट आयोजित कर रही है। इवेंट भारतीय समयानुसार रात 10 बजकर 30 मिनट से शुरू होगा। कंपनी इस इवेंट में अपनी वीडियो स्ट्रीमिंग सर्विस लॉन्च कर सकती है।

  1. एपल केमेगाइवेंट को एपल की ऑफिशियल वेबसाइट पर लाइव देखा जा सकता है। वेबसाइट पर लाइव स्ट्रीमिंग एक दिन पहले ही शुरू कर दी गई थी। फिलहाल लाइव स्ट्रीम में खाली थिएटर दिखाई दे रहा है। इवेंट को एपल इवेंट्स एप पर भी लाइव देखा जा सकता है। एप पर लाइव स्ट्रीमिंग शो शुरू होने के 10 मिनट पहले शुरू होगी। अगर आप लाइव इवेंट नहीं देख पा रहे हैं, तो एपल के यूट्यूब चैनल पर भी इवेंट वीडियो अपलोड कर दिया जाएगा।

  2. कंपनी ने मीडिया को जारी किए आमंत्रण में इवेंट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी थी। आमंत्रण पत्र में इवेंट के बारे में एपल ने बस एक लाइन 'इट्स शो टाइम' लिखा था।कंपनी बीते हफ्तेएपल एयरपॉड्स, आईपॉड एयर, आईपॉड मिनी और आईमैक जैसे प्रोडक्ट्स पहले हीलॉन्च कर चुकी है। इसलिए माना जा रहा है कि यह एपल का पहला ऐसा इवेंट होगा जिसमें किसी हार्डवेयर की जगह सर्विसेज पर फोकस किया जाएगा।

  3. पिछले साल अक्टूबर में खबर आई थी एपल 2019 की पहली छमाही में स्ट्रीमिंग सर्विस पेश कर सकती है। तब एपल ने अपने कंटेंट पार्टनर्स को अप्रैल के मध्य की लॉन्चिंग के लिए तैयार रहने को कहा था। इसलिए भी यह कयास तेज हो गए हैं कि 25 मार्च को होने वाले इवेंट में इस बारे में बड़ी घोषणा हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक एपल इस इवेंट में अपनी स्ट्रीमिंग सर्विस के बारे में बताएगी।

  4. एपल ने काफी पहले यह संकेत दिया था कि वह वीडियो सर्विस लाने की योजना बना रही है। कंपनी ने कहा था कि वह अपने कंटेंट तैयार करने पर 2 अरब डॉलर (करीब 14 हजार करोड़ रुपए) खर्च करेगी। इसके लिए ओप्रा विनफ्रे जैसी कई स्टार को साइन करने की बात भी चल रही थी। साथ ही सीबीएस कॉर्प, वायकॉम, लायन गेट्स इंटरटेनमेंट के कंटेंट भी इसके प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सकते हैं।

  5. एपल टीवी सर्विस को पूरी दुनिया में लॉन्च किया जाएगा। यह कदम नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम वीडियो को चुनौती देने के लिए उठाया जा रहा है। जनवरी में पहली बार दुनियाभर में आईफोन की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई थी। तब से एपल के निवेशक रेवेन्यू बढ़ाने के लिए टेलीविजन सर्विस पर फोकस कर रहे हैं।



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      Apple March 25 event- How to watch and what to expect

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सड़क से गुजरते ही चार्ज हो जाएगी कार, वायरलेस चार्जिंग सिस्टम वाला दुनिया का पहला शहर होगा ओस्लो


नई दिल्ली. भारत समेत विश्व के कई देश प्रदूषण के चलते इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रहे हैं। लेकिन इस क्षेत्र में यूरोप के छोटे से देश नॉर्वे ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। नॉर्वे सरकार की कोशिशों के चलते देश की राजधानी ओस्लो दुनिया का पहला ऐसा शहर बनने जा रहा है, जहां वायरलेस चार्जिंग सिस्टम के जरिए इलेक्ट्रिक टैक्सी को चार्ज किया जा सकता है।

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साल 2018 में खरीदी गई 46,143 नई इलेक्ट्रिक कार

नॉर्वे को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए वहां की सरकार ने एक प्रोजेक्ट तैयार किया है, जो काफी कामयाब रहा है। ऐसे में भारत समेत दुनिया के अन्य देश इस मामले में नॉर्वे से सीख ले सकते हैं, कि कैसे नॉर्वे ने इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को दुरुस्त किया और लोगों में इलेक्ट्रिक कार खरीदने को बढ़ावा देने के लिए टैक्स और अन्य छूट मुहैया कराई। नॉर्वे सरकार की कोशिशों का ही नतीजा है कि 34 करोड़ जनसंख्या वाले देश में साल 2018 में 46,143 नई इलेक्ट्रिक कार खरीदी गई।

नॉर्वे दुनिया में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक कार की ओनरशिप वाला देश

इलेक्ट्रिक कार के मामले में नॉर्वे ने यूरोपिय कंट्री जर्मनी और फ्रांस को पीछे छोड़ दिया है। यूरोपियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के मुताबिक पिछले साल जर्मनी में 36, 216 और फ्रांस में 31, 095 कार खरीदी गई। नॉर्वे के पब्लिक चार्जिंग नेटवर्क के हेड Gudbrann Hampel ने कहा कि नॉर्वे दुनिया में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक कार की ओनरशिप वाला देश है। इसकी एक वजह रोड टोल, पार्किंग, चार्जिंग प्वाइंट में डिस्काउंट दिया जाना एक बड़ी वजह है। पिछले साल नॉर्वे में बिकने वाली 3 कारों में से एक इलेक्ट्रिक कार बिकी।

सरकार की तरफ से मिली ये छूट

  • नॉर्वे सरकार ने इलेक्ट्रिक कार खरीदने वालों नागरिको को पार्किंग चार्ज में छूट दी
  • नॉर्वे सरकार ने रोड टोल को इलेक्ट्रिक कार के लिए मुफ्त किया।
  • नॉर्वे की सरकार की तरफ से इलेक्ट्रिक व्हीकल डीजल और पेट्रोल कारों के मुकाबले टैक्स में छूट दिया।
  • इलेक्ट्रिक कार को लेकर बनने वाली सरकार की नीतियों पर पुराने फ्यूल मॉडल वाली कार लॉबी को पर हावी नहीं होने दिया।
  • चार्जिंग सिस्टम को ऐसा बनाया गया, जिससे इलेक्ट्रिक कार को चार्ज करने में कम समय लगे।
  • प्रोजेक्ट के तहत नॉर्वे के ओस्लो शहर की सड़कों पर इंडक्शन टेक्नोलॉजी के साथ चार्जिंग प्लेट को इंस्टॉल किया गया है, जहां इलेक्ट्रिक कार को चार्ज किया जा सकता है।
  • नॉर्वे सरकार ने साल 2023 तक सभी टैक्सी को जीरो इमीशन नॉर्म्स के तहत बनाने का लक्ष्य तय किया गया है, जबकि 2025 तक सभी नई कार को जीरो इमीशन नॉर्म्स के दायरे में लाया जाएगा। नॉर्वे के अलावा ब्रिटेन, फ्रांस जैसे देश इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए साल 2049 तक की डेडलाइन तक की है।
  • नॉर्न ने इलेक्ट्रिक वाहनों की राह की सबसे बड़ी बाधा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को माना है। इसकी वजह से टैक्सी चालकों को लंबी लाइन में लगकर काफी वक्त के लिए इंतजार करना पड़ता है।


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oslo is the world first city who offer wireless charging syatem for e cars

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एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स आज अपने अंतरिक्ष यान हॉपर का परीक्षण करेगी


गैजेट डेस्क. एलनमस्क की कंपनी स्पेसएक्स सोमवार को अंतरिक्ष यान हॉपर के प्रोटोटाइप का पहला परीक्षण करेगी। इसमें यान को जमीन से कुछ फुट ऊपर उठाकर इसकी कार्यप्रणाली को देखा जाएगा। पहले इस यान का परीक्षण पिछले हफ्ते होना था। लेकिन खराब मौसम के कारण इसे टाल दिया गया था।


स्टारशिप हॉपर दो चरणों वाला यान है। इसमें एक बूस्टर और एक शिप है। स्पेसएक्स इसे अपने फॉल्कन 9, फॉल्कन हेवी और ड्रैगन अंतरिक्ष यान की जगह लेने के लिए विकसित कर रही है। इसे पृथ्वी की कक्षा के साथ ही चंद्रमा और मंगल की कक्षा में सेवाएं देने के लिए डिजाइन किया गया है। हॉपर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकने वाला यान है। यह मनुष्य और सामान को मंगल पर ले जाने में सक्षम होगा।

क्या होता है हॉप टेस्ट

  • स्पेसएक्स स्टापशिप प्रोटोटाइप जिसे स्टारहॉपर नाम भी दिया गया है, पर कई तरह के टेस्ट किए जाएंगे। इन टेस्टों में यह देखा जाएगा कि इसका सिस्टम सही से काम कर रहा है या नहीं।
  • सबसे पहले हॉप टेस्ट किया जाएगा, जो सामन्यता एक शार्ट स्टेटिक फायर टेस्ट है। इस टेस्ट के दौरान स्टारहॉपर में लगे सिंगल रैप्टर इंजन से आग निलकती है।
  • हालांकि इस टेस्ट के दौरान इसे जमीन से कुछ ऊंचाई तक ही ले जाया जाएगा। इस टेस्ट में ग्राउंड सिस्टस टेस्टिंग के साथ ही इसके भार उठाने की क्षमता को भी परखा जाएगा।


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elonmusk starhopper prototype first testing held today
elonmusk starhopper prototype first testing held today

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Review: दमदार साउंड, मल्टी कनेक्टिविटी, यूजर के लिए ये है बेस्ट स्पीकर


गैजेट डेस्क: टेक्नोलॉजी का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसके चलते कई छोटे दिखने वाले गैजेट्स भी बड़ा काम कर देते हैं। आज हम आपको एक ऐसे गैजेट के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपको पहली ही नजर में इम्प्रैस कर सकता है। इसका नाम है बोस (BOSE) ब्लूटूथ साउंडलिंक मिनी स्पीकर। इसके नाम में मिनी जरूर है, लेकिन क्वालिटी में ये किसी बड़े स्पीकर के बराबर है। हमने इस स्पीकर के सभी फीचर्स टेस्ट किए और इसने सभी में बेहतर परफॉर्म किया।

सबसे पहले आपको बताते हैं कि बोस ब्लूटूथ साउंडलिंक मिनी में क्या है खास। तो, इसमें ब्लूटूथ कनेक्टिविटी के साथ, NFC (नियर फील्ड कम्युनिकेशन), FM रेडियो, TF कार्ड, पेन ड्राइव, कॉलिंग मोड, AUX आउटपुट जैसे मल्टी फीचर्स मौजूद हैं। ये सभी फीचर्स कैसे काम करते हैं और हमने इन्हें कितने स्टार दिए, एक-एक कर जानते हैं, लेकिन उससे पहले देखते हैं इसकी खूबियां और खामियां।

खूबियां खामियां
पोर्टेबल, लेकिन दमदार साउंड क्वालिटी पोर्टेबल, लेकिन पॉकेट में कैरी नहीं कर सकते
सभी मोड के लिए वॉइस इंसट्रक्शन ज्यादा बासमें आवाज फटती है
सभी फीचर्स की कंट्रोल Key ऑडिया आउटपुट जैक नहीं
हेवी बॉडी, जाली और बेहतर ग्रिप कलर ऑप्शन कम।

डिजाइन और बॉडी :

बोस ब्लूटूथ साउंडलिंक मिनी की खूबियां आपको इसकी खामियों को नजरअंदाज करने पर मजबूर कर देंगी। कंपनी ने इस स्पीकर को बेहद खूबसूरत लुक दिया है। जिसके चलते ये मॉडल आपको पहली ही नजर में पसंद आ जाएगा। ये ब्लैक और सिल्वर कलर कॉम्बिनेशन में आता है। इसकी बॉडी चारों तरफ से ब्लैक है, वहीं सामने की जाली और ऊपर दी गई कंट्रोल प्लेट सिल्वर कलर की है। इसके साथ, इसमें जो रबर स्टैंड दिया गया है वो भी सिल्वर है। इसमें इस्तेमाल की गई प्लास्टिक काफी हेवी है। यानी कभी आपके हाथ से छूट जाता है, तो टूटने का खतरा कम होगा। इसके साथ, स्पीकर के सामने की तरफ जो जाली है वो भी हेवी मटेरियल की है। बैक की तरफ डॉटेड बॉडी है, जिसके चलते इसमें स्क्रैच नहीं लगते।

डिजाइन और बॉडी के लिए इसे 5 में से 4 स्टार मिलते हैं।

आगे की स्लाइड्स पर जानिए बोस ब्लूटूथ साउंडलिंक मिनी के हार्डवेयर और फीचर्स के बारे में...



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Review: Bose Portable Bluetooth SoundLink Mini Speaker
Review: Bose Portable Bluetooth SoundLink Mini Speaker
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Review: Bose Portable Bluetooth SoundLink Mini Speaker

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चार्जर, कीबोर्ड जैसे उपकरण भी कर सकते हैं लैपटॉप को हैक


गैजेट डेस्क. कुछ साल पहले आयकर विभाग के एक रिटायर्ड अधिकारी ने एक इंटरव्यू के दौरान क्लाउड कंप्यूटिंग व मोबाइल सिक्योरिटी पर कुछ 'भोलीभाली' बातें कही थीं, जैसे यह कि क्लाउड कंप्यूटिंग तभी सफल होती है जब आसमान में अच्छे बादल हों। उन्होंने एक टिप्पणी यह भी की थी कि अमेरिका में जब किसी का मोबाइल फोन खराब हो जाता है तो कुछ लोग अच्छी-खासी कीमत देकर उसे खरीदने के लिए तैयार हो जाते हैं। भले ही आप अपने मोबाइल फोन से सिम, एसडी कार्ड आदि निकाल भी लें, उसे कई बार रिसेट भी कर दें तब भी ये लोग उसके लिए काफी पैसा देने को तैयार हो जाते हैं। इसके पीछे इन सज्जन ने तर्क यह दिया था कि मोबाइल फोन का डेटा असल में बैटरी में चला जाता है और उसे खरीदने वाले बैटरी से डेटा निकालकर उसका दुरुपयोग कर लेते हैं।

यह बयान मजेदार था और अविश्वसनीय भी। रिटायर्ड अधिकारी की आईटी की समझ वास्तव में बहुत ज्यादा सीमित थी, यह साफ था। लेकिन उन्होंने बैटरी वाली जो बात एक तुक्के के रूप में कही थी, वह अब तीर में तब्दील हो गई है। पश्चिमी देशों में हुए कुछ अध्ययनों ने सतर्क किया है कि आप अपने मोबाइल फोन, लैपटॉप आदि के साथ जिन दूसरे उपकरणों (पेरिफेरल्स) को कनेक्ट करते हैं, उनका इस्तेमाल आपके डेटा की चोरी और मोबाइल-लैपटॉप को हाईजैक करने के लिए किया जा सकता है। इन पेरिफेरल्स में बैटरी तो नहीं, लेकिन लैपटॉप चार्जर, मोबाइल चार्जर, प्रोजेक्टर, की-बोर्ड, माउस, मॉनिटर, ग्राफिक कार्ड, नेटवर्क कार्ड, डॉकिंग स्टेशन या ऐसी ही दूसरी चीजें भी हो सकती हैं। यह डरा देने वाली कल्पना है क्योंकि पेन ड्राइव से लेकर मॉनिटर तक का इस्तेमाल तो हम रोजाना ही करते हैं।

  1. इंग्लैंड के कैंब्रिज विश्वविद्यालय और अमेरिका के राइस विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की टीम ने पाया है कि इन उपकरणों के जरिए आपके लैपटॉप या डेस्कटॉप को कुछ सेकंड के भीतर हाईजैक किया जा सकता है। हाईजैक का मतलब यह कि आपकी गोपनीय फाइलें चुटकियों में सात समंदर पार भेजी जा सकती हैं।

  2. जिन उपकरणों पर यह अध्ययन किया गया, उनमें थंडरबोल्ट पोर्ट का इस्तेमाल किया गया था। थंडरबोल्ट, जिसका ताजातरीन संस्करण थंडरबोल्ट 3 है, यूएसबी पोर्ट की ही तरह काम करता है जिसका इस्तेमाल हम अरसे से अपने कंप्यूटरों और दूसरे उपकरणों में करते आए हैं। लेकिन यह यूएसबी 3 की तुलना में बहुत ज्यादा स्पीड से डेटा ट्रांसफर करने में सक्षम है।

  3. जहां यूएसबी 3 पोर्ट के जरिए 5 जीबी डेटा प्रति सेकंड की रफ्तार से डेटा ट्रांसफर किया जा सकता है, वहीं थंडरबोल्ट 3 में इसकी रफ़्तार 40 जीबी प्रति सेकंड तक है। इतना ही नहीं, आप एक ही थंडरबोल्ट पोर्ट के साथ डॉकिंग पोर्ट जोड़कर बहुत सारे उपकरणों को लैपटॉप से जोड़ सकते हैं, जैसे बाहरी हार्ड डिस्क, प्रोजेक्टर, की-बोर्ड आदि। ये सौ वॉट तक बिजली ट्रांसमिट करने की क्षमता रखते हैं, इसलिए इनका इस्तेमाल चार्जरों में भी किया जाता है।

  4. मोबाइल फोन को फास्ट चार्ज करने में इनकी उपयोगिता असंदिग्ध है। थंडरबोल्ट को इंटेल ने विकसित किया था और एप्पल ने अपने मैकबुक प्रो लैपटॉप में इसके शुरुआती संस्करण को अपनाया था। अब यह दूसरे मोबाइल और लैपटॉप निर्माताओं के बीच भी बहुत लोकप्रिय हो चला है।

  5. जिन लैपटॉप्स में थंडरबोल्ड 3 पोर्ट मौजूद था, वे सब के सब हाईजैकिंग के खतरे में पाए गए, फिर भले ही वे मैकिन्टोश कंप्यूटर हों, लिनक्स आधारित लैपटॉप हों या फिर विंडोज़ आधारित उपकरण। उन्होंने अपनी जांच के लिए थंडरक्लैप नामक एक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जो यूएसबी केबल के जरिए किसी भी उपकरण के साथ जोड़ा जा सकता है और फिर यह उनमें चल रही अनुचित गतिविधियों की खबर दे सकता है।

  6. ऐसा पाया गया कि थंडरबोल्ट पोर्ट के जरिए कनेक्ट किए गए लैपटॉप चार्जर, प्रोजेक्टर आदि उपकरणों को इस तरह से प्रोग्राम किया जा सकता है कि वे अपना काम तो सही ढंग से करते रहें लेकिन साथ ही साथ लैपटॉप या मोबाइल फोन से सूचनाएं चुराने में भी जुट जाएं। इतना ही नहीं, वे आपके उपकरण में वायरस, स्पाईवेयर, रूटकिट्स और रेंसमवेयर जैसे दूसरे मैलवेयर को भी घुसा सकते हैं। चूंकि ये उपकण अपने काम में बखूबी जुटे होते हैं, इसलिए लैपटॉप के यूज़र को किसी गलत हरकत का शक नहीं होता।

  7. यूजर को शक इसलिएभी नहीं होता क्योंकि कौन सोच सकता है कि इस बार हैकर इंटरनेट के कनेक्शन या वायरस-स्पाईवेयर जैसे मैलवेयर के रूप में नहीं बल्कि आपके मोबाइल चार्जर के रूप में आ धमकेगा!लेकिन यह अकल्पनीय कल्पना एक हकीकत है। आप पूछेंगे कि क्या ऐसे में कंप्यूटर में मौजूद सिक्योरिटी सिस्टम सतर्क नहीं हो जाएंगे?

  8. असल में ग्राफिक कार्ड, नेटवर्क कार्ड आदि के पास सीधे मेमरी को एक्सेस करने की क्षमता होती है जिसे डायरेक्ट मेमरी एक्सेस (डीएमए) कहा जाता है। मतलब यह कि वे कंप्यूटर की रैम से लेकर हार्ड डिस्क तक को एक्सेस कर सकते हैं। ऐसे हालात में यूजर को कंप्यूटर में सुरक्षा इंतजाम(एंटी-वायरस, एंटी-स्पाइवेयर, फायरवॉल आदि)चाक-चौबंद रखना चाहिए और जब भी कोई नया उपकरण इस्तेमाल करें तो किसी असामान्य गतिविधि पर नज़रें गड़ाए रखिए।



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      peripherals can hack laptop and mobile- tech advice by tech expert balendu sharma dadhich

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बंद होने वाला है माइक्रोसॉफ्ट विंडोज 7, यूजर्स को नोटिफिकेशन भेजकर दे रहे हैं जानकारी


गैजेट डेस्क.माइक्रोसॉफ्ट ऑपरेटिंग सिस्टम विंडोज 7 को बंद करने जा रही है। हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज 7 के यूजर्स को नोटिफिकेशन भेजना शुरू किया है, जिसमें कहा गया है कि कंपनी अब विंडोज 7 ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए अपडेट उपलब्ध नहीं कराएगी। कंपनी चाहती है कि यूजर विंडोज 7 से विंडोज 10 पर अपग्रेड करें। हालांकि नोटिफिकेशन में विंडोज 10 के बारे में कुछ भी नहीं लिखा, लेकिन नोटिफिकेशन के नीचे लर्न मोर पर क्लिक करने पर यूजर विंडोज 7 की वेबसाइट पर पहुंचता है जहां यूजर को अपना पीसी अपग्रेड करने की सलाह दी गई है।

10 साल पहले लॉन्च हुआ था विंडोज 7

कंपनी ने 22 जुलाई 2009 को विंडोज 7 रिलीज किया था। इस महीने की शुरुआत में ही कंपनी ने इसे बंद करने का नोटिफिकेशन देने का फैसला कर लिया था।कंपनी द्वारा दी जा रही नोटिफिकेशन विंडोज अपडेट की नोटिफिकेशन की तरह नजर आती है। जिसमें लिखा है, '10 साल की सेवा के बाद 14 जनवरी 2020 को वो आखिरी दिन होगा जब कंपनी विंडोज 7 वाले कंप्यूटर्स के लिए सिक्योरिटी अपडेट उपलब्ध कराएगी। हम जानते हैं कि बदलाव काफी मुश्किल हो सकता है इसलिए हम आपको पहले ही जानकारी दे रहे हैं ताकि आप अपना डेटा और फाइल्स बैक अप कर सकें।'


विंडोज 10 को प्रमोट करने में मिलेगी मदद

यूजर्स के लिए नया अपडेट विंडोज अपडेट ऑप्शन में उपलब्ध होगा। अगर यूजर ने ऑटोमैटिक अपडेट का ऑप्शन चुना हुआ है, तो अपडेट खुद ही डाउनलोड और इंस्टॉल हो जाएगा। यदि यूजर बार-बार नोटिफिकेशन नहीं पाना चाहते तो उन्हें 'डू नॉट रिमाइंड अगेन' का ऑप्शन चुनना होगा।मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विंडोज 10 माइक्रोसॉफ्ट के 1 बिलियन इंस्टॉल के लक्ष्य तक पहुंचने की कोशिश में है। विंडोज 7 को बंद करने से कंपनी विंडोज 10 को बेहतर तरीके से प्रमोट कर पाएगी। विंडोज 10 फिलहाल 800 मिलियन डिवाइस पर इस्तेमाल किया जा रहा है।



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Microsoft will be ending support for windows 7 users started notifying

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फेक न्यूज पर लगाम लगाने की तैयारी में वॉट्सऐप


  • वॉट्सऐप अपने बीटा वर्जन पर नए फीचर्स की टेस्टिंग कर रहा है। इससे यूजर्स को पता चल सकेगा कि कोई मैसेज कितनी बार फॉरवर्ड किया गया है।
  • इसके साथ ही वॉट्सऐप रिवर्स इमेज सर्च फीचर भी देने वाला है, इससे ऐप में ही इमेज को सर्च कर उसके फेक होने की जानकारी मिल सकेगी।


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whatsapp testing new features forward count and in app search on beta version

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लगातार बढ़ रहा दायरा, घर बैठे आभासी माहौल में पाएं सुकून


गैजेट डेस्क.अगर आप भी सोचते हैं कि ध्यान करना कठिन है या ध्यान करने के लिए आपको माहौल नहीं मिलता तो फिर आपके पास किसी मेडिटेशन गुरु के अलावा टेक्नोलॉजी की शरण में आने का विकल्प भी है। वर्चुअल रिएलिटी (वीआर) के जमाने में अपने कमरे में बैठे-बैठे भी समुद्र किनारे ध्यान लगाना संभव है। आपसुनकर हैरान हो सकते हैं,लेकिन यह संभव है। वीआरडिवाइसेस यूजर को वास्तविकता से दूर किसी अलग दुनिया ले जाती हैं। इसके लिए कुछ ऐेप भी उपलब्ध हैं।

वर्चुअल मेडिटेशन के फायदे

वीआर मेडिटेशन से ध्यान को ज्यादा आसानी से अपने रोजमर्रा की आदत में शामिल किया जा सकता है। इसके लिए विशेष रूप से बनाए गए ऐप्स के छोटे-छोटे सेशन मेडिटेशन को रोचक बनाते हैं। वीआर मेडिटेशन में जगह का कोई बंधन नहीं है, आप किसी भी जगह पर ध्यान कर सकते हैं। इसे इस्तेमाल करने वालों का मानना है किइस तरह ध्यान करना काफी शांतिप्रद है। इसमें आसपास के माहौल से परेशानी भी नहीं होती क्योंकि साधक एक आभासी दुनिया में चला जाता है।

अध्ययन सेप्रमाणित हुई स्वीकार्यता

स्पेन में जून 2016 में हुई तीसरी इंटरनेशनल मीटिंग ऑफ माइंडफुलनेस में वीआर मेडिटेशन को लेकर विशेषज्ञों ने एक अध्ययन किया। इसमें 21 से 69 साल की उम्र के 44 प्रतिभागियों को शामिल किया गया। सभी प्रतिभागियों को वर्चुअल रिएलिटी से मेडिटेशन करवाया गया। इसके बाद उन्हें अपने अनुभवों को 1 से 10 अंकों के स्केल पर रेटिंग देने के लिए कहा गया। फीडबैक में 70 फीसदी प्रतिभागियों ने बताया कि इस तरह के आभासी मेडिटेशन से उन्हें अच्छा महसूस हो रहा है और उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। किसी भी प्रतिभागी ने मेडिटेशन को शून्य अंक नहीं दिया। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे दूसरे लोगों को इसे करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे तो 74 फीसदी लोगों ने हां में जवाब दिया।

वर्चुअल एकाग्रता और ध्यान

मशहूर किताब "क्योर" में विशेषज्ञ लेखक जो मर्चेंट ने वर्चुअल रिअलिटी और ध्यान की अवस्था पर गहराई से अध्ययन अनुभव लिखे हैं। उनके अनुसार इस तरह का ध्यान आत्मबलबढ़ाता है। मर्चेंट कहते हैं किहमारे मस्तिष्क में एकाग्रता को लेकर एक नियत क्षमता होती है। ऐसे में अगर आपको कुछ ऐसा अनुभव हो जिसमें एकाग्रता का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाए तो इसका फायदा यह होता है कि आप बाकी चीजों से दूर हट जाते हैं। यानी, आपके पास ध्यान की जितनी क्षमता होती है, वह एक दिशा में एकाग्र हो जाती है।

जरूरी डिवाइस और ऐप्स
इसके लिए आपको सिर्फ एक वीआर डिवाइस चाहिए होगी। गूगल एप स्टोर पर वर्चुअल रिएलिटी मेडिटेशन के लिए सैकड़ों एप्स उपलब्ध है। कुछ के लिए यूजर को पैसा चुकाना होगा, वहीं कुछएप स्टोर पर मुफ्त मेंउपलब्ध हैं। भारत में ब्रह्मकुमारीवर्ल्ड स्प्रिचुअल युनिवर्सिटी द्वारा वर्चुअल रिएलिटी का उपयोग करके राजयोग और ध्यानकरना सिखाया जाता है। ब्रह्मकुमारी के यूट्यूब चैनल परवीआर वीडियोज भी उपलब्ध हैं।

  1. आई मेडिटेशन ऐप मेडिटेशन मेडिटेशन की शुरुआत करने के लिए काफी अच्छा ऐप है। इस एप में यूजर को 6 अलग-अलग गाइडेड मेडिटेशन ऑप्शन मिलते हैं। इस ऐप की मदद से यूजर बीच पर या पहाड़ों के बीच वर्चुअली मेडिटेट कर सकता है। अगर आपके पास वीआर डिवाइस नहीं भी है तब भी मोबाइल स्क्रीन पर इस ऐप को एक्सपीरियंस किया जा सकता है।

  2. माइंडजेंस स्लीप वीआर मेडिटेशन ऐप उन लोगों के लिए हैं जो मेडिटेशन के जरिए नींद बेहतर करना चाहते हैं। इस ऐप का इस्तेमाल सोने से पहले करके गहरी और सुकूनभरी नींद पाई जा सकती है। प्ले स्टोर पर यह ऐप 75 रुपए में खरीदा जा सकता है।

  3. कैलेडोरियम वीआर ऐप गूगल कार्डबोर्ड के साथ कम्पेटिबल है। इस ऐप में यूजर को एबस्ट्रैक्ट इमेजेस दिखाई देती है। ऐप में लाइटनिंग, मॉर्निंग, फॉल, वॉटर, पिंक और कैथेड्रल नाम की 6 यूनीक थीम है। इन्हें इस तरह सेट किया गया है कि यूजर को हर बार एक नया लैंडस्केप दिखाई देता है।

  4. प्ले स्टोर पर फ्री में उपलब्ध इस ऐप में ग्रहों और तारों की दुनिया दिखाई देती है। यह ऐप गूगल कार्डबोर्ड के साथ कम्पेटिबल है। गाइडिंग मेडिटेशन के साथ सुकून देने वाला म्यूजिक होता है। गाइडिंग स्टार एप में पृथ्वी, टूटते तारें, ग्रह और ब्रह्माण्ड जैसे सीन होते हैं। जिन्हें देखकर लगता है कि यूजर अंतरिक्ष में ही मेडिटेशन कर रहा हो।

  5. रिलैक्स वीआर मेडिटेशन ऐप में रिलेक्सिंग म्यूजिक के साथ नैचुरल थीम्स है। 360 डिग्री व्यू के साथ यूजर जंगलों के बीच, झरने पर या बादलों के बीच मेडिटेशन कर सकता है। इस ऐप के विजुअल काफी अच्छे है जो यूजर को काफी अच्छा एक्सपीरियंस देते हैं। यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर 200 रुपए में उपलब्ध है।



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      virtual reality meditation is the new technology hack for tech geeks
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वर्चुअल मेडिटेशन का दायरा बढ़ रहा, घर बैठे आभासी माहौल में पाएं सुकून


  • अगर आप भी सोचते हैं कि ध्यान करना कठिन है या ध्यान करने के लिए आपको माहौल नहीं मिलता तो फिर आपके पास किसी मेडिटेशन गुरु के अलावा टेक्नोलॉजी की शरण में आने का विकल्प भी है।
  • वर्चुअल रिएलिटी (वीआर) के जमाने में अपने कमरे में बैठे-बैठे भी समुद्र किनारे ध्यान लगाना संभव है। आप सुनकर हैरान हो सकते हैं, लेकिन यह वीआर डिवाइसेस से संभव है।


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हमें खोज चुके हैं एलियंस और चुपके से हम पर नजर भी रखे हुए हैं


गैजेट डेस्क.ब्रह्मांड मेंएलियंस हैं या नहीं यह प्रश्न इंसानों के लिएहमेशा से ही रहस्यमयीरहा है, कई बार एलियंस और उड़न तश्तरी को देखने का दावा भी किया गयालेकिन इसेमात्र भ्रम मानकर नकार दिया गया, लेकिन हाल ही में कईवैज्ञानिकों ने यह दावा किया है कि एलियंस ने सिर्फ हमें पहले ही खोज चुके हैंबल्कि चिड़िया घर (गैलेक्टिक जू) में बंद किसी जानवर की तरह इंसानों पर नजर रखे हुए हैं।

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  1. दुनियाभर के वैज्ञानिक इस हफ्ते पेरिस में हुई एमईटीआई इंटरनेशनल मीटिंग में पहुंचें। जहां इस बात पर डिस्कशन किया गया कि सालों से चली आ रही रिसर्च और पृथ्वी के बाहरजीवन होने के तमामसाक्ष्य मिलने के बाद भी हम एलियंस से संपर्क करने में कामयाब क्योंनहीं हो पाए।

  2. कुछ वैज्ञानिकों काकहना है कि चालाक एलियंस जानबूझकर अपने आप को इंसानों से दूर रखना चाहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि सच्चाई जानने के बाद इंसानों का उनके जीवन में दखल बढ़ सकता है।

  3. एमईटीआई इंटरनेशनल मीटिंग में पहुंचे कुछ रिसर्चर्स का कहना है कि एलियंस ने हमें काफी पहले खोज निकाला है, और किसी 'गैलेक्टिक जू' की तरह इंसानों की हर गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं वो भीबिना अपनी पहचान बताएं, क्योंकि वह पृथ्वी की संस्कृति में कोई उथल पुथल नहीं करना चाहते।

  4. फोर्ब्स के मुताबिक विभिन्न विषयों से जुड़े वैज्ञानिकपेरिस में हर दूसरे साल होने वाली एमईटीआई (मैसेजिंग एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस) मीटिंग में पिछले 69 सालों सेइकट्ठा होते हैं, जो सन् 1950 के अनसुलझेसवाल 'फर्मी पैराडॉक्स' का उत्तर जानने का प्रयास करते हैं।

  5. इसे खुद को दिलासा देने वाली सोच कहीं जा सकती है क्योंकि कई लोगों को मानना है कि कोई तो है जो ब्रह्मांड से हमारी हर गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं, जो इसका आभास भीइंसानों को नहीं होने दे रहा।

  6. फोर्ब्स के अनुसार, ऐसा आभास होता है कि एलियंस अपने आप को इंसानों से जानबूझकर अलग रखने की कोशिश में लगे हैं क्योंकि उन्हें ऐसा लगता है कि उनके बारे में जानना इंसानों के लिए घातक साबित हो सकता है।हालांकि रिसर्चर्स ने कहना है कि एलियंस का पता लगाने के लिए हमें अपनी अप्रोच को और बेहतर करने की जरूरत होगी।



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      aliens have found human first without us realizing

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धूम्रपान करने वाले स्कूली छात्रों की संख्या सालभर में 38% बढ़ी, खतरे बताने के लिए अमेरिका ने बनाया डराने वाला वीडियो गेम


गैजेट डेस्क. अमेरिकी एफडीए (फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन)ने स्कूली छात्रों और किशोरों के लिए हॉरर वीडियो गेम 'वन लीव्स' बनाया है। दरअसल अमेरिका में 2018 में धूम्रपान करने वाले स्कूली छात्रों की संख्या में 38% बढ़ोतरी हुई है। सीडीसी की रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल जाने वाले 12-17 साल के हर चार में से तीन किशोरों को इसकी लत पड़ चुकी है।


किशोरों को धूम्रपान के खतरे बताने के लिए एफडीए ने यह पीसी व एक्सबॉक्स गेम बनाया है। इसे बिल्कुल मुफ्त रखा गया है। गेम की शुरुआत से गेमर्स को एक डरावनी कहानी से रूबरू करवाया जाता है, इसमें धूम्रपान से होने वाली बीमारियों और मौत तक के बारे में बताते हैं। चार प्लेयर वाले इस गेम में तीन प्लेयर नहीं बच पाते। उनके फेफड़े पूरी तरह खराब हो जाते हैं। 'वन लीव्स' नाम रखने के पीछे तर्क यह है कि धूम्रपान शुरू करने वाले 4 किशोरों में से एक ही इसे छोड़ पाएगा, बाकी 3 कभी नहीं रुकेंगे। गेम में आगे बढ़ने पर गेमर्स को ऐसी चुनौती दी जाती है, जो स्मोकर्स को भी झेलनी पड़ती हैं। अंत में एक ही प्लेयर बचकर आता है क्योंकि वह स्मोकिंग छोड़ने में सफल रहता है। इसे भूल-भुलैया की तरह बनाया गया है, जिसमें यह आखिर तक पता नहीं चलता कि कौन बाहर निकल पाएगा।


एफडीए का मानना है कि जागरूकता वाले अभियानों का असर किशोरों पर खासा नहीं पड़ता, इसलिए उन्हें वीडियो गेम के जरिए सजग करने की कोशिश की गई है। यह उपाय निश्चित रूप से कारगर साबित होगा।

सालभर में धूम्रपान करने वाले युवाओं की संख्या 15 लाख बढ़ गई
अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन(सीडीसी) के मुताबिक ई-सिगरेट के चलन से युवाओं को सबसे ज्यादा आकर्षित किया है। 2017 की तुलना में 2018 में ऐसे किशोरों की संख्या में 15 लाख की बढ़ोतरी हुई। 2018 अंत तक करीब 49 लाख किशोरों को तंबाकू उत्पादों की लत लग चुकी थी।



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american FDA made a horror game for school student with smoking habit

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फेक न्यूज पर लगाम लगाने की तैयारी में व्हाट्सएप, पता चलेगा कितनी बार फॉरवर्ड हुआ मैसेज


गैजेट डेस्क.व्हाट्सएप एक नए फीचर पर काम कर रहा है जिसके जरिए पता चल सकेगा कि कोई मैसेज कितनी बार फॉरवर्ड किया गया है। इससे फेक न्यूज को पहचानना आसान होगा। बताया जा रहा है कि व्हाट्सएप एप में ही रिवर्स इमेज सर्च फीचर भी देने वाला है, इसके जरिए यूजर किसी भी इमेज को एप में ही सर्च करके उसके सही या फेक होने के बारे में सुनिश्चित हो सकेगा।

व्हाट्सएप ने फेक न्यूज पर लगाम लगाने के लिए पिछले साल फॉरवर्ड लेबल लॉन्च किया था। कंपनी अब इसी फीचर को और ज्यादा अपडेट करने पर काम कर रही है। फिलहालव्हाट्सएप इस फीचर को एंड्राइड के बीटा वर्जन पर टेस्ट कर रही है। अभी यह फीचर यूजर्स के लिए स्टेबल वर्जन पर उपलब्ध नहीं है।

एप में ही मिलेगा रिवर्स इमेज टूल
व्हाट्सएप में किसी भी तस्वीर के साथ कोई भी मैसेज जोड़कर उसे लोगों के साथ शेयर करके फेक न्यूज फैलाई जाती है। कई यूजर ऐसी फेक न्यूज को सच भी समझ लेते है। व्हाट्सएप के इन एप इमेज सर्च टूल से एप के अंदर ही किसी भी फोटो को सर्च किया जा सकता है। गूगल रिवर्स इमेज टूल एप में ही इनबिल्ट होने से यूजर को एप से बाहर नहीं जाना होगा।

एप का फॉरवर्ड टूल मैसेज के इन्फो सेक्शन में होगा। इस जगह पर यूजर देख सकते हैं कि उनका मैसेज किस समय डिलिवर हुआ, और उसे किस समय पढ़ा गया। इसी सेक्शन में यह नया फीचर जुड़ेगा, जो बताएगा कि आपका भेजा गया मैसेज आगे फॉरवर्ड किया गया है या नहीं। साथ ही यहां पर यह जानकारी भी मिलेगी कि मैसेज कितनी बार फॉरवर्ड किया गया है।

लग जाएगा फ्रीक्वेन्टली फॉरवर्डेड लेबल
किसी मैसेज को 4 बार से ज्यादा फॉरवर्ड किए जाने पर मैसेज के ऊपर फ्रीक्वेन्टली फॉरवर्डेड लेबल लगा नजर आएगा। इससे पता चलेगा कि इस मैसेज को बार बार फॉरवर्ड किया जा रहा है। हाल ही में यह जानकारी भी सामने आई थी कि व्हाट्सएप इन एप ब्राउजर पर भी काम कर रहा है, इसके जरिए यूजर्स किसी भी वेब पेज को व्हाट्सएप के अंदर ही ओपन कर सकेंगे।



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5 हजार से कम कीमत में एंट्री लेवल कस्टमर्स के लिए बेस्ट च्वाइस, कैमरे से करना होगा समझौता


गैजेट डेस्क. शाओमी ने इसी हफ्ते की 19 मार्चको अपना "रेडमी गो" स्मार्टफोन लॉन्च किया है। इस फोन का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी कीमत है। यह शाओमी का सबसे सस्ता फोन भी बताया जा रहा है और केवल 4,499 रुपए में काफी-कुछ समेटे हुए है। यह खासतौरसे उनके लिए है जो फीचर फोन से पहले "स्मार्टफोन" पर शिफ्ट हो रहे हैं। अगर आपके पास पहले से स्मार्टफोन है, तो आप इससे कभी पटरी नहीं बैठा पाएंगे। आपकी उम्मीद बढ़ी हुई होंगी और फिर इससे निराश ही होंगे।

यह है फोन के स्पेसिफिकेशंस

डिस्प्ले 5 इंच एचडी
रिजोल्यूशन 720x1280 पिक्सल
पिक्सल डेंसिटी 296ppi
प्रोसेसर क्वाड-कोर स्नैपड्रैगन 425 SoC
फ्रंट कैमरा 5 मेगापिक्सल सेंसर
रियर कैमरा 8 मेगापिक्सल सेंसर
रैम 1 जीबी
स्टोरेज 8 जीबी/16 जीबी
सिम ड्युअल सिम (नैनो)
ओएस एंड्रॉयड 8.1 ओरियो (गो एडिशन)
कनेक्टिविटी 4G LTE, वाईफाई 280.11, ब्लूटूथ v4.1, जीपीएस, माइक्रो यूएसबी
डायमेंशन(l*b*h) 140.4x70.1x8.35 एमएम
बैटरी 3,000mAh
कीमत 4,499 रुपए
  1. इसमें पांच इंच का एचडी डिस्प्ले है। ठीक-ठाक डिजाइन है। 3000एमएएच बैट्री दी है। क्वालकॉम स्नैपड्रेगन 425 प्रोसेसर है। आगे-पीछे कैमरे भी हैं।

  2. यह फोन 20 से ज्यादा भाषाओं को सपोर्ट कर सकता है। इसमें गूगल असिस्टेंट से हिंदी और अंग्रेजी में बात की जा सकती है।

  3. यह काफी हल्का भी है और स्लीक भी। आकार ऐसा है जो हाथों में आसानी से फिट हो जाता है।

  4. यह गूगल के एंड्रॉयड गो प्रोग्राम पर चलता है जो "ओरियो" पर आधारित है।

  5. एंड्रॉयड "पाई" की कोई गुंजाइश नहीं है। एप के लाइट वर्जन दिए गए हैं, जो कम डेटा और मेमोरी का उपयोग करते हैं।

  6. रिअर पैनल पर 8एमपी का कैमरा और सेल्फी के लिए 5 एमपी का कैमरा दिया गया है।

  7. फोटो के रिजल्ट ज्यादा खुश नहीं करेंगे क्योंकि यह थोड़े फीके लगते हैं, शार्पनेस कम है और शोख रंग नहीं दिखते हैं। हालांकि कम रोशनी में खींची गई तस्वीरें ठीक हैं।

  8. स्क्रीन डिस्प्ले भी ठीक है और नाइट डिस्प्ले मोड भी दिया गया है। मजबूती के लिहाज से भी यह ठीक है और गोरिल्ला ग्लास से स्क्रीन सुरक्षित बनी रहती है।

  9. यूं तो यह प्लास्टिक से बना है फिर भी सख्त महसूस होता है। ग्लॉसी फिनिश के दौर में यहां मैट फिनिश मिल रही है।

  10. यह फोन दिखने में नए जमाने का भले ही नहीं लगता, लेकिन कहीं से सस्ता भी नजर नहीं आता है। वैसे देखा जाए तो यह काफी तेज फोन है। इसमें एप्स तेजी से डाउनलोड होती हैं और फटाफट खुल भी जाती हैं।



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      Xiaomi Redmi Go is the company cheapest smartphonephone in india, know features, price, specifications and all you need

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32 मेगापिक्सल पॉप-अप कैमरे वाला वीवो V15 लॉन्च


  • वीवो ने नए स्मार्टफोन वीवो V15 की कीमत 23,990 रुपए रखी है। यह तीन कलर ऑप्शन फ्रोजन ब्लैक, ग्लैमर रेड और रॉयल ब्लू कलर में उपलब्ध है।
  • इसकी बिक्री 25 मार्च से शुरू होगी। कंपनी रिलायंस जियो के ग्राहकों को तीन टीबी तक का डेटा फ्री दे रही है। कुछ समय पहले ही कंपनी ने वीवो V15 प्रो भारत में लॉन्च किया था।


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vivo v15 with 32 megapixel popup selfie camera launched

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32 मेगापिक्सल पॉप-अप कैमरे वाला वीवो V15 लॉन्च, 25 मार्च से बिक्री शुरू


गैजेट डेस्क. चीनी स्मार्टफोन कंपनी ने वीवो ने अपना नया स्मार्टफोन वीवो V15 को भारत में लॉन्च कर दिया है। फोन की कीमत 23,990 रुपए है। यह तीन कलर ऑप्शन फ्रोजन ब्लैक, ग्लैमर रेड और रॉयल ब्लू कलर में उपलब्ध है, जिसकी बिक्री 25 मार्च से शुरू होगी। कुछ समय पहले ही कंपनी ने वीवो V15 प्रो भारत में लॉन्च किया था।

  1. वीवो का नया स्मार्टफोन V15 स्क्रीन साइज, ट्रिपल कैमरा सेटअप, बैटरी साइज और डायमेंशन के मामले में वीवो V15 प्रो से काफी अलग है। वीवोV15 प्रो की कीमत 28,990 रुपए है।

  2. वीवो V15 की भारत में कीमत 23,990 रुपए है। यह स्मार्टफोन फ्रोजन ब्लैक, ग्लैमर रेड और रॉयल ब्लू कलर ऑप्शन में उपलब्ध है।भारत में यह फोन सिर्फ 6 जीबी रैम और 64 जीबी स्टोरेज वैरिएंट में उपलब्ध कराया गया है।

  3. भारत में फोन की बिक्री 25 मार्च से शुरू होगी, जो एक अप्रैल से ग्राहकों तक पहुंचना शुरू हो जाएगा। फोन को वीवो इंडिया ई-स्टोर, अमेजन डॉट इन, फ्लिपकार्ट, पेटीएम मॉल, टाटा CLiQ से खरीदा जा सकेगा।

    • लॉन्चिंग ऑफर के तहत वीवो अपने ग्राहकों को वन टाइम स्क्रीनरिप्लेसमेंट, 15 महीनोंतक नो ईएमआई कॉस्ट, 2 हजार रुपए का एक्सट्रा एक्सचेंज बेनिफिट्स, एक हजार रुपए का लॉयलिटी बेनिफिट्स।
    • रिलायंस जियो अपने ग्राहकों को 10 हजार रुपए तक के ऑफर दे रही है, जिसमें 3 टीबी तक का फ्री डेटा और जियो वीवो क्रिकेट ऑफर दे रही है।
    • कई बैंक भी ग्राहकों को ऑफर दे रही है, जैसे एसबीआईअपने ग्राहकों को क्रेडिट या डेबिट कार्ड से पेमेंट करने पर 5% तक की छूट दे रही है।
  4. डिस्प्ले 6.53 इंच फुल एचडी+
    रेजोल्यूशन 10801*2340 पिक्सल, इनलेस फुल व्यू विद गोरिल्ला ग्लास 5 प्रोटेक्शन
    प्रोसेसर ऑक्टा कोर, मीडिया टेक हीलियो P70 SoC
    रैम 6 जीबी
    स्टोरेज 64 जीबी (एक्सपेंडेबल 256 जीबी तक)
    फ्रंट कैमरा 32 मेगापिक्सल पॉप अप सेल्फी कैमरा
    रियर कैमरा 12MP प्राइमरी, 8MP सेकेंडरी, 5MP तीसरा
    सिक्योरिटी बैक पैनल फिंगलप्रिंट सेंसर
    बैटरी 4000 mAh
    कनेक्टिविटी ब्लूटूथ v5.0, 4G VoLTE, माइक्रो यूएसबी, जीपीएस, 3.5एमएम हेडफोन जैक
    ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉयड 9.0 पाई
    सेंसर एक्सीलेरोमीटर, एंबियंट लाइट, डिजिटल कंपास, गायरोस्कोप, प्रॉक्सिमिटी
    डायमेंशन(L*B*H) 161.97x75.93x8.54 एमएम


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      vivo v15 with 32 megapixel popup selfie camera launched, know features, price and specification

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माइक्रोसॉफ्ट ने नया स्टोरेज डिवाइस बनाया, डिजिटल इंफॉर्मेशन को डीएनए के रूप में सेव करता है


गैजेट डेस्क. लंबे समय तक डेटा को सुरक्षित रखनाहमेशा से ही चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है, लेकिन दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने ऐसा स्टोरेज डिवाइस तैयार कर लिया है जो डेटा को डीएनए के रूप में स्टोर करेगा। यह डिवाइस एक खास सॉफ्टवेयर की मदद से किसी भी डिजिटल डेटा को डीएनए में कन्वर्ट कर स्टोर करेगा, जिसे यूजर अपनी आवश्यकता अनुसार देख सकेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रक्रिया से 70 सालों से डेटा को सुरक्षित रखा जा सकता है।

  1. यह फुली ऑटोमेटेड सिस्टम से डेटा को डीएनए के रूप में स्टोर करेगा जिसे आसानी से दोबारा पढ़ा जा सकता है। इसे टेक्नोलॉजी के मदद से रिसर्च लैब को कमर्शियल डेटा सेंटर के रूप में बदला जा सकता है।

  2. इस सिस्टम को यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के साथ पार्टनरशिप कर तैयार किया गया है। इसमें 'हैलो' शब्द को डीएनए के रूप में स्टोर किया गया, जिसे 21 घंटे बाद दोबारा डिजिटल डेटा के रूप में कन्वर्ट कर पढ़ा गया।

  3. माइक्रोसॉफ्ट के प्रिंसिपल रिसर्चर कारिन स्ट्रास ने बताया कि हम इस सिस्टम का जल्द से जल्द प्रोडक्शन करना चाहते हैं, जिससे यह उन लोगों के काम आ सके जो क्लाउड स्टोरेज सर्विस पर निर्भर है। इसमें बिट को डेटा सेंटर भेजकर स्टोर किया जा सकेगा और अपनी सुविधा अनुसार देखा जा सकेगा।

  4. रिसर्चर ने कहा कि हमने इस तकनीक के माध्यम से अभी तक एक जीबी तक का डेटा स्टोर किया है, जिसमें बिल्लियों की तस्वीरें, पॉप वीडियो और रिकॉर्डिंग शामिल है, जिसे बिना किसी परेशानी के दोबारा पढ़ा जा सकता है।

  5. यह ऑटोमेटेड डीएनए स्टोरेज सिस्टम एक विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से 0 और 1 डिजिटल डेटा को As, Ts, Cs और Gs में कन्वर्ट करता है और इसे डीएनए ब्लॉक में बदल देता है।

  6. इसके बाद इसे बेहद सस्ते लैब इक्विपमेंट का इस्तेमाल कर लिक्विड और केमिकल से बने डीएनए ब्लॉक को स्टोरेज वेसल में रखा जाता है।

  7. जब भी सिस्टम को इस इंफोर्मेशन को दोबारा पढ़ना हो तो फिर से केमिकल का इस्तेमाल कर डीएनए को माइक्रोफ्लूडिक पंप से इसे सिस्टम में भेजा जाता है जो डीएनए को पढ़ता है और कंप्यूटर लैंग्वेजमें कन्वर्ट करता है।

  8. इस पूरी प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए डीएनए मॉलिक्यूल को लैब में बनाया जाता है जिसमें सूचना स्टोर की जाती है। यह किसी इंसान या जानवर का डीएनए नहीं है। इसे सिस्टम में भेजने से पहले इंक्रिप्टेड किया जाता है।

  9. कंपनी अब ऐसे सिस्टम को बनाने पर काम कर रही है जो डीएनए को डिजिटल फॉर्मेट में कन्वर्ट किए बिना पढ़ सके।

  10. पहले सूचनाओं को छोटे से जगह में कलेक्ट करने का सबसे अच्छा और सबसे सस्ता तरीका मैग्नेटिक टेप (Floppy)था, जो सूचनाओं को 30 साल तक रख सकता है। वहीं डीएनए स्टोरेज तकनीक की मदद से हम डेटा को लगभग 70 साल से ज्यादा समय तक सुरक्षित रख सकते हैं।



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      Microsoft new device to store digital information as DNA

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2 अप्रैल से बंद हो जाएगी गूगल प्लस और 'इनबॉक्स बाय जीमेल' सर्विस, जीमेल ऐप में मिलेंगे इसके सारे फीचर्स


गैजेट डेस्क. सर्च इंजन कंपनी गूगल साल 2014 में शुरू हुई इनबॉक्स बाय गूगल सर्विस को 2 मार्च को पूरी तरह से बंद करने जा रही है। हालांकि कंपनी ने इसे बंद करने का ऐलान पहले से कर दिया था लेकिन तारीख नहीं बताई थी। इसी दिन गूगल प्लस को भी बंद किया जाएगा। हाल ही में कंपनी ने इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप अलो को भी बंद किया है।

कंपनी ने इसके यूजर्स को नोटिफिकेशन के द्वारा इस सर्विस को बंद करने की जानकारी दी, साथ ही यह भी बताया कि इस सर्विस के सारे बेहतरीन फीचर्स अब जीमेल ऐप में उपलब्ध है।

2014 में हुई थीइनबॉक्स बाय जीमेल की शुरुआत

  • साल 2014 में कंपनी ने अपनी इनबॉक्स बाय जीमेल सर्विस की शुरुआत की थी, जिसमें कई सारे एडवांस्ड फीचर्स दिए गए थे। समय के साथ कंपनी ने इस ऐप के स्टैंडर्ड फीचर जीमेल ऐप और वेब में भी देना शुरू कर दिए। जिसके बाद इनबॉक्स बाय जीमेल को इस्तेमाल करने वाले यूजर्स की संख्या लगातार घटने लगी, शायद यहीं वजह है कि कंपनी ने इसे बंद करने का फैसला ले लिया है।
  • कुछ महीने पहले ही कंपनी ने इसके बचे हुए फीचर जो पहले सिर्फ इनबॉक्स में थे को जीमेल की स्टैंडर्ड ऐप में देना शुरू कर दिए। हालांकि अब भी कई ऐसे फीचर्स है जो इनबॉक्स नाम से गूगल की इस ऐप में ही है और इन्हें गूगल ने जीमेल ऐप में उपलब्ध नहीं कराया है।
  • सितंबर 2018 में कंपनी ने एक पोस्ट के जरिए कहा था कि 'चार साल में हमने ईमेल को बेहतर करने के बारे में लगातार कोशिश की है और हमने पॉपुलर इन्बॉक्स एक्सपीरिएंस को जीमेल में इंटीग्रेट किया है। अब हम पूरी तरह से जीमेल ऐप को बेहतर बनाने पर फोकस कर रहे हैं और इसलिए इन्बॉक्स को गुडबाय कहना होगा।'


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Inbox By Google and google plus services to be officially shut down at 2 april

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नए एयरपॉड लॉन्च; कीमत 14,990 रुपए से शुरू


  • एपल ने बुधवार को सेकंड जनरेशन आईपॉड लॉन्च किया। साथ में एपल वॉच के नए कलर बैंड को भी पेश किया, जो स्प्रिंग सीजन से इंस्पायर्ड है।
  • स्टैंडर्ड चार्जिंग केस और नए वायरलेस चार्जिंग केस ऑप्शन में उपलब्ध एपल के नए एयरपॉड की शुरुआती कीमत 14,990 रुपए है।


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apple launched new AirPods

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नए एयरपॉड लॉन्च; कीमत 14,990 रुपए से शुरू, साथ में पेश किए कलरफुल वॉच बैंड्स


गैजेट डेस्क. आईपैड मिनी और आईपैड एयर के लॉन्चिंग के बाद एपल ने बुधवार को सेकंड जनरेशन आईपॉड को लॉन्च कर दिया है। स्टैंडर्ड चार्जिंग केस और नए वायरलेस चार्जिंग केस ऑप्शन में उपलब्ध एपल के नए एयरपॉड की शुरुआती कीमत 14,990 रुपए है। कंपनी ने साथ में एपल वॉच के नए कलर बैंड को भी पेश किया है, जो स्प्रिंग सीजन से इंस्पायर्ड है।

  1. एपल एयरपॉड स्टैंडर्ड चार्जिंग केस कीकीमत 14,990 रुपए है जबकि वायरलेस चार्जिंग केस की कीमत 18,990 रुपए है। इन्हें एपल के ऑथोराइज्ड सेंटर से बुक किया जा सकता है।

  2. नए एयरपॉडएपल एच1 चिप पर बेस्डहै, जिसे खासतौर पर हेडफोन में इस्तेमाल किया जाता है। इन एयरपॉड सेएपल के असिस्टेंस फीचर 'हे सिरी' को भी एक्सेस कर सकतेहैं।

  3. इस नए एयरपॉड से बिना हाथों के इस्तेमाल किए गाने बदलना, कॉल करना, वॉल्यूम कंट्रोल करना और डायरेक्शन पता करने जैसे कामों को किया जा सकेगा।

  4. कंपनी का दावा है कि यह दुनिया के सबसे बेहतर इयरफोन है जो ज्यादा टॉक टाइम, फास्ट कनेक्शन, हैंड्स फ्री 'हे सिरी' और नए वायरलेस बैटरी केस की सुविधा देते हैं।

  5. एपल के नए वॉच बैंड कई नए ऑप्शन में उपलब्ध है जिसमें स्पोर्ट बैंड्स, स्पोर्टलूप, नाइकी+ और हरमीस कलर एडिशनमें लॉन्च कियागया है।

  6. कलरफुल स्पोर्ट बैंड और स्पोर्ट लूप की कीमत 3,900 रुपए से शुरू होती है। जोब्लू, पपाया, स्पीयरमिंट जैसे कलर ऑप्शन में उपलब्ध है।

  7. नए प्रीमियम मॉडर्न बकल एंड लैदर लूप बैंड में कॉर्नफ्लोवर, सनसेट जैसे कलरऑप्शन मिलेंगे। इन नए कलरफुल वॉच बैंड की बिक्री भारत में अगले महीने से शुरू हो जाएगी।

  8. कंपनी ने एपल XS और XS मैक्स स्मार्टफोन के लिए नए सिलिकॉन और लैदर केसेस को भी पेश किया है। सिलिकॉन केस की कीमत 3,500 रुपए से जबकि लैदर केस की कीमत 4,500 रुपए से शुरू होती है।



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      apple launches new airpods at price 15 thousand rupees including new Apple Watch bands

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सबसे सस्ते रेडमी गो की बिक्री शुरू


  • श्याओमी के सबसे सस्ते स्मार्टफोन रेडमी गो की बिक्री भारत में शुरू हो गई है। इसे फ्लिपकार्ट और एमआई डॉट कॉम से खरीदा जा सकता है।
  • श्याओमी का यह पहला स्मार्टफोन है जो एंड्रॉयड गो ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है। फोन की कीमत 4,499 रुपए है।


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Redmi Go to Go on Sale for First Time, know features, price, specifications and camera features

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पांच कैमरों वाला दुनिया का पहला स्मार्टफोन, एंड्रॉयड पाई पर करता है काम


गैजेट डेस्क. पिछले महीने बार्सिलोना में आयोजित मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस में एचएमडी ग्लोबल ने नोकिया 9 प्योरव्यू स्मार्टफोन से पर्दा उठाया था। तीन मोनोक्रोम और दो आरजीबी सेंसर वालायह दुनिया का पहला फोन जो पांच कैमरों से लैस है। QHD POLED डिस्प्ले से लैस इस फोन में 128 जीबी का स्टोरेजमिलता है। कंपनी जल्द ही इस फोन कोभारत में लॉन्च करेगी।

  1. कंपनी ने ग्लोबल मार्केट के लिए नोकिया 9 प्योरव्यू की कीमत 48,300 रुपए तय की है। फोन मिडनाइट ब्लू कलर ऑप्शन में है,जो फिलहालचुनिंदा जगहों पर ही बिक्री के लिए उपलब्ध है।

  2. भारत में इस फ्लैगशिप फोन की कीमत इसकी लॉन्चिंग के साथ ही सामने आ पाएगी। हालांकि, ग्लोबल मार्केट में फोन की कीमत देखकर उम्मीद की जा रही है कि भारत में इसकी कीमत 45 हजार से 50 हजार रुपए तक हो सकती है।

  3. फोन की सबसे खास बात इसमें मौजूद पेंटा लैंस कैमरा सेटअप है। कंपनी ने फोटोग्राफी का बेहतर एक्सपीरियंस देने के लिए इस कैमरे को क्वालकॉम और गूगल के साथ मिलकर तैयार किया है।

  4. पांच रियर कैमरा सेटअप से लैस इस फोन में तीन कैमरे मोनोक्रोम सेंसर पर काम करते हैं जबकि दो कैमरे RGB सेंसर पर काम करते हैं। वहीं सेल्फी के लिए 20 मेगापिक्सल का कैमरा है।

  5. डिस्प्ले 5.99 इंच क्वाड एचडी + POLED
    रेजोल्यूशन 1440*2960 पिक्सल
    प्रोसेसर ऑक्टाकोर क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 845 SoC
    रैम 6 जीबी
    स्टोरेज 128 जीबी इनबिल्ट
    फ्रंट कैमरा 20 मेगापिक्सल
    रियर कैमरा तीन 12 मेगापिक्सल मोनोक्रोम सेंसर + दो 12 मेगापिक्सल RGB सेंसर
    कनेक्टिविटी 4G LTE,वाईफाई 802.11, ब्लूटूथ v5.0, जीपीएस, एनएफसी, यूएसबी टाइप-सी
    बैटरी 3320mAh
    चार्जिंग टाइप वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट



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      world first penta lens camera phone Nokia 9 PureView soon to be launched in india

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ग्रीन सिग्नल मिल जाए तो 20 दिन में भारत में 5जी ले आएंगे


गैजेट डेस्क.हुवावे कंपनी नेदावा कियाहै कि वे भारत में 5जी सर्विस लाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अगर अनुमति दी जाए तो वे 20 दिन के अंदर भारत में 5जी सर्विस शुरू कर सकते हैं। 5G नेक्ट जनरेशन टेक्नोलॉजी है जो 4G LTE नेटवर्क की तुलना में 10 से 100 गुना तक तेज डाउनलोड स्पीड प्रदान करती है।

हुवावे इंडिया के सीईओ जे शेन इंडिया मोबाइल कॉनक्लेव में शामिल हुए। कॉनक्लेव में जे शेन ने कहा, 'हम भारतीय बाजार के लिए प्रतिबद्ध है। हमें भारतीय बाजार में 5जी सर्विस तेज और सुरक्षित तरीके से लाने के लिए सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ काम करने में खुशी होगी।' शेन ने बताया कि सरकार के द्वारा भारत को डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने की कोशिशों से भारत में डिजिटलाइजेशन को तेजी से अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'पिछले कुछ सालों में मार्केट में लगभग हर नई तकनीक और उत्पाद हुवावे द्वारा दिया गया है।'

टेलीकॉम इंडस्ट्री पर 7.80 लाख करोड़ का कर्ज

  • भारत मेंटेलीकॉम इंडस्ट्री पर अभी 7.80 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है, इसलिए कंपनियों की हालत ऐसी नहीं है कि वे 5जी कनेक्विटी के मकसद से बुनियादी ढांचा खड़ा करने के लिए निवेश कर सकें।
  • इसके अलावा कंपनियां 5जी स्पेक्ट्रम की महंगी कीमतें भी नहीं चुका सकतीं। इस वजह से कंपनियों ने हाल ही में टेलीकॉम डिपार्टमेंट से 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी 2020 से पहले नहीं करने का अनुरोध भी किया है।
  • मोबाइल ऑपरेटर एसोसिएशन का कहना है कि टेलीकॉम इंडस्ट्री नाजुक दौर से गुजर रही है, ऐसे में 5जी में बड़ा निवेश करना मुश्किल है।

बुनियादी ढांचा खड़ा करने में भी समस्या

  • 5जी कनेक्टिविटी के लिए 80% मोबाइल टॉवरों को नेक्स्ट जनरेशन ऑप्टिकल फाइबर से लैस करने की जरूरत होती है। भारत में अभी ऐसे सिर्फ 15% टॉवर ही हैं। टेलीकॉम इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों और एक्सपर्ट्स ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि देश में टॉवरों और ऑप्टिकल फाइबर की कमी के चलते 4जी सर्विस भी सही तरीके से शुरू नहीं हो पाई है, ऐसे में 5जी में समय लगना तय है।
  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 5जी का इस्तेमाल कई जगहों पर होना है। जैसे- स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में औरइंटरनेट ऑफ थिंग्स में। ऐसे में अगर 5जी कनेक्टिविटी इस साल या अगले साल तक आ भी जाती है तो भी भारत में इसे शुरू होने में वक्त लगेगा। भारत में 2020 तक ही 5जी स्मार्टफोन्स आने की उम्मीद है।

तिब्बत में लगाए तीन 5जी स्टेशन

हुवावे ने मार्च की शुरुआत में ही तिब्बत में तीन 5जी स्टेशन इंस्टॉल किए हैं। हुवावे अमेरिका और अन्य देशों से अपने 5G परीक्षणों का विरोध झेल रहा है।ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इन तीनों बेस स्टेशनों को स्थापित करने में हुवावे के उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इन स्टेशनों कोविरोध के बावजूद चीन के अलग अलग हिस्सों में लगाया गया है।


4जी सर्विसेस के मामले में भारत 65वें स्थान पर
इंटरनेट स्पीड पर नजर रखने वाली ग्लोबल फर्म ऊकला की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 4जी सर्विसेस में 15% का सुधार हुआ है, लेकिन दुनिया के मुकाबले देश बहुत पीछे है। 4जी सर्विसेस की ग्लोबल रैंक में भारत 65वें स्थान पर है। ट्राय के टेली डेन्सिटी आंकड़ों के मुताबिक, अभी भी देश में करीब 35% हिस्सा 4जी कवरेज से बाहर है। सिस्को कंपनी के मुताबिक, पूरे देश में 90% टेली डेंसिटी के लिए अभी दो साल का समय और लगेगा।



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huawei says they can test 5G in 20 days  after govt nod
huawei says they can test 5G in 20 days  after govt nod

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समुद्र के पानी से बनाया जा सकेगा हाइड्रोजन फ्यूल, शहरों में बिजली और कारों में होगा इस्तेमाल


गैजेट डेस्क.स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने समुद्र के पानी से हाइड्रोजन ईधन बनाने का तरीका विकसित किया है। नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में छपी रिपोर्ट के अनुसार बिजली का उपयोग करके समुद्र के पानी से ऑक्सीजन और हाइड्रोजन को अलग-अलग किया जा सकता है। इस ईधन का इस्तेमाल शहरों में बिजली पहुंचाने और कारों को ऊर्जा देने में किया जा सकेगा।

खारे पानी के इस्तेमाल से बचेगा खर्च

पानी से ऑक्सीजन और हाइड्रोजन अलग करके पारंपरिक ईधन के स्थान पर इस्तेमाल हो सकने वाला हाइड्रोजन ईधन पहले से बनाया जा रहा है। लेकिन इस काम में शुद्ध पानी की जरूरत होती है, जो अपने आप में काफी कीमती होता है। रिसर्चर्स का कहना है कि पूरे शहर को रोशन करने और कारों को पॉवर देने के लिए हाइड्रोजन ईधन इस्तेमाल करना अब तकसंभव नहीं था, क्योंकि इसके लिए बहुत ज्यादा मात्रा में शुद्ध पानी की जरूरत होगी। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चरएच डाई, युन कुआंग और माइकल केनी ने बतायाकि कैलिफोर्निया मेंहमारी जरूरतों जितना शुद्ध पानी मिलना भी थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन नई रिसर्च में बताए तरीकेसे समुद्र के खारे पानी को ईधन में बदला जा सकेगा।

प्रकृति के लिए बेहतर विकल्प

हाइड्रोजन ईधन का इस्तेमाल प्रकृति के लिए भी अच्छा है क्योंकि यहकॉर्बन डाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं करता। हाइड्रोजन ईधन को जलाने से सिर्फ पानी उत्सर्जित होता है, जो जलवायु परिवर्तन की समस्याओं को बढ़ाने में सहयोग नहीं देता। जबकि पारंपरिक ईधन से कॉर्बन डाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन होता है जो प्रकृति के लिए हानिकारक होता है।

  1. बिजली की मदद से पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़ने की प्रक्रिया को इलेक्ट्रोलिसिस कहा जाता है। यह एक आसान और पुराना तरीका है। पानी में रखे दो इलेक्ट्रोड्स से एक पॉवर सोर्स को जोड़ा जाता है। जब पॉवर ऑन की जाती है, तो हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के नेगेटिव सिरे(कैथोड) से बाहर निकलती है जबकि ऑक्सीजन इलेक्ट्रोड के पॉजिटिव सिरे(एनोड) से बाहर आती है।

  2. इस प्रक्रिया में समुद्र का पानी इस्तेमाल करने पर पानी में मौजूद नेगेटिव आयन वाला क्लोराइड इलेक्ट्रोड के पॉजिटिव सिरे को खराब कर सकता है। स्टैनफोर्ड के रिसर्चर्स ने इस समस्या के समाधान के लिए इलेक्ट्रोड के पॉजिटिव सिरे(एनोड) पर नेगेटिवआयन की परत चढा दी, जिससे एनोड के खराब होने की प्रक्रिया काफी हद तक धीमी हो जाती है।

  3. नेगेटिव आयन की परत के बिना एनोड खारे पानी में सिर्फ 12 घंटे काम कर सकता है। लेकिन परत चढ़ाने के बाद इसे एक हजार घंटे तक इस्तेमाल किया जा सकता है।

    टीम ने सोलर एनर्जी से चलने वाला सिस्टम भी तैयार किया है, जिसमें बिजली की जगह सोलर एनर्जी का उपयोग करके हाइड्रोजन ईधन बनाया जा सकेगा।

  4. इस प्रक्रिया से निकलने वाली हाइड्रोजन का इस्तेमाल ईधन के लिए किया जा सकता है। वहीं इससे निकलने वाली ऑक्सीजन सांस लेने योग्य होती है, इसलिए इसका इस्तेमाल भी ऑक्सीजन टैंक्स बनाने में किया जा सकता है। यह सिस्टम गोताखोरों की कार्यप्रणाली को भी आसान कर सकता है।



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      Researchers unveil new method to create hydrogen fuel using seawater

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भारत में खुला RealMe का पहला सर्विस सेंटर, एक घंटे में निपटाए जाएंगे 95% रिपेयरिंग केस


गैजेट डेस्क. चीनी स्मार्टफोन कंपनी रियलमी भारत में तेजी से बिजनेस को बढ़ाने की ओर काम कर रही है। मंगलवार को कंपनी ने अपना पहला एक्सक्लूसिव सर्विस सेंटर और स्टोर दिल्ली में शुरू किया है। रियलमी के इस एक्सक्लूसिव सर्विस सेंटर पर न सिर्फ मोबाइल खरीदा और रिपेयर किया जाएगा बल्कि यहां ग्राहकों को कंपनी के लेटेस्ट प्रोडक्ट्स के लाइव डेमो भी देखने को मिलेंगे।

  1. ओप्पो के सब ब्रांड के तौर पर जानी जाने वाली रियलमी इस साल दिल्ली में लगभग 25 से 30 एक्सक्लूसिव सर्विस सेंटर खोलेगी। कंपनी देशभर में 400 सर्विस सेंटर खोलेगी खासतौर पर छोटे शहरों में।

  2. कंपनी का दावा है कि इन एक्सक्लूसिव सर्विस सेंटर से हम ग्राहकों को सबसे तेज सर्विस देना चाहते हैं, जहां 95 प्रतिशत से ज्यादा रिपेयरिंग मामलों को एक घंटे से भी कम समय में निपटाया जाएगा।

  3. एक्सक्लूसिव सर्विस सेंटर शुरू करने का उद्देश्य ग्राहकों के बीच रियलमी को एक विश्वसनीय ब्रांड के रूप में स्थापित करना है। जो यूजर और ब्रांड के बीच एक ब्रिज के तरह काम करेगा।

  4. फिलहाल भारतीय बाजार में मंहगे और सस्ते स्मार्टफोन में श्याओमी सबसे आगे हैं, जो रियलमी के लिए सबसे बड़ा कॉम्पिटीटर है। हाल ही में श्याओमी से मुकाबला करने के लिए रियलमी 3 को लॉन्च किया, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया। रियलमी 3 के दो सेल में 3.2 लाख यूनिट बिक चुके हैं।

  5. रियलमी 3 के बाद कंपनी रियलमी 3 प्रो को अप्रैल में लॉन्च करने वाली है। जिसकी कीमत 15 से 20 हजार रुपए के बीच होगी। कंपनी का कहना है की इस फ्लैगशिप स्मार्टफोन में 48 मेगापिक्सल का कैमरा होगा।



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      realme opens its first service centre in india, know what is special in its exclusive service centre

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रेडमी नोट 7 और नोट 7 प्रो की बिक्री शुरू, 9,999 रुपए है शुरुआती कीमत


गैजेट डेस्क. 28 फरवरी को लॉन्च हुए रेडमी नोट 7 और नोट 7 प्रो की बिक्री भारत में शुरू हो चुकी है। इसे फ्लिपकार्ट, एमआई डॉट कॉम और एमआई होम स्टोर से खरीदा जा सकेगा। रेडमी नोट 7 प्रो की कीमत 13,999 रुपए है जबकि नोट 7 की कीमत 9,999 रुपए है। भारत से पहले इसे चीन ने लॉन्च किया गया था।

एयरटेल और जियो दे रही है ऑफर

रेडमी के दोनों ही स्मार्टफोन पर एयरटेल 1120 जीबी डेटा के साथ अनलिमिटेड कॉलिंग का ऑफर दे रही है, साथ हीएयरटेल थैक्स बेनिफिट के साथ एयरटेल टीवीप्रीमियम का फ्री एक्सेस, ऐप एडवाइजर, स्पैम ब्लॉक एंड कॉन्टैक्ट बैकअप कीसुविधा भी मिलेगी। रिलायंस जियो अपने ग्राहकों को 198 रुपए या उससे ज्यादा के रिचार्ज पर डबल डेटा ऑफर कर रही है।

यह है दोनों स्मार्टफोन के स्पेसिफिकेशन

फीचर/मॉडल रेडमी नोट 7 रेडमी नोट 7 प्रो
डिस्प्ले 6.3 इंच फुल एचडी+ 6.3 इंच फुल एचडी+
रिजॉल्यूशन 1080 x 2340 पिक्सल 1080 x 2340 पिक्सल
रियर कैमरा 48+5 मेगापिक्सल 12+2 मेगापिक्सल
फ्रंट कैमरा 13 मेगापिक्सल 13 मेगापिक्सल
प्रोसेसर ऑक्टा कोरस्नैपड्रैगन 675 ऑक्टा कोर स्नैपड्रैगन 660 एआईई
रैम 4जीबी/6जीबी 3जीबी/4जीबी
इंटरनल स्टोरेज 64जीबी/128जीबी 32जीबी/64जीबी
बैटरी 4,000mAh 4,000mAh
ओएस एंड्रॉयड 9.0 पर बेस्डMIUI 10 एंड्रॉयड 9.0 पर बेस्डMIUI 10
सिक्योरिटी फिंगरप्रिंट सेंसर, फेस अनलॉक फिंगरप्रिंट सेंसर, फेस अनलॉक


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Redmi Note 7 Pro and Redmi Note 7 Sale starts in India Today, know features, price and specifications

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राजनीति से जुड़ी पोस्ट हुईं सबसे ज्यादा शेयर, गर्भपात वाली पोस्ट पर हुए सबसे ज्यादा 10 लाख कमेंट


गैजेट डेस्क.बातचीत को बेहतर और ज्यादा अर्थपूर्ण बनाने के लिएफेसबुक ने पिछले साल प्लेटफॉर्म के न्यूज फीड में बदलाव किया था। लेकिन एक साल में ही इस बदलाव का उलटा असर हुआ है। सोशल मीडिया एगेंजमेंट ट्रैकिंग फर्म न्यूजव्हिप की एक स्टडी में यह जानकारी सामने आई है।

फेसबुक ने जनवरी, 2018 में घोषणा की थी कि वे प्लेटफॉर्म की न्यूज फीड एल्गोरिदम में कुछ बड़े बदलाव कर रहे हैं। जिसके बाद से न्यूज फीड में मीडिया संस्थानों और व्यापारों से जुड़ी पोस्ट्स से पहले परिवार और दोस्तों की पोस्ट्स को जगह मिलेगी।स्टडी में दावा किया गया है कि इस बदलाव के बाद से यूजर्स ने साइट पर पहले से ज्यादागुस्सैल प्रतिक्रिया (एंग्री रिएक्शन)दिया है।

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एल्गोरिदम में बदलाव किए हुए अभी सिर्फ एक साल हुआ है। स्टडी के दौरान रिसर्चर्स ने देखा कि फेसबुक पर इस बदलाव के बाद से किस तरह का कंटेट शेयर किया गया और उस कंटेट पर कैसे रिएक्शन आए। इसके बाद उन्होंने इसकी तुलना पिछले सालों से की।

बदलाव की घोषणा करते समय फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा था, 'हम आशा करते हैं कि हमारे बदलावों से यूजर्स को निजी पल देखने को मिलेंगे, जिससे हम एक दूसरे के साथ ज्यादा जुड़ सकेंगे। हम लोगों से ज्यादा जुड़ाव महसूस कर पाएंगे और हमारे जीवन का अकेलापन कम होगा। यह हमारी खुशी और सेहत पर काफी अच्छा प्रभाव डालेगा।' लेकिन स्टडी में देखा गया कि फेसबुक पर डर, बांटने वाली राजनीतिक पोस्ट्स और गुस्से से भरीपोस्टज्यादा शेयर की गई।

राजनीतिक पोस्टसबसे ज्यादा शेयर

न्यूजव्हिप ने अपनी स्टडी में सबसे ज्यादा शेयर किए गए विषयों को लिस्ट किया है। स्टडी के अनुसार हर 100 पोस्ट्स में से सबसे ज्यादा 36 पोस्ट राजनीतिक होती है। वहीं अर्थशास्त्र की सबसे कम 6 पोस्ट होती है। सॉफ्ट सब्जेक्ट से जुड़ी पोस्ट की संख्या 100 में से केवल 17 होती हैं।

लिस्ट में शामिल अन्य विषयों में हार्ड/जनरल विषय की 8 पोस्ट, विज्ञान की 10 और मौत से संबंधित 11 पोस्ट शेयर की गई। स्टडी के अनुसार यूजर्स ने राजनीतिक स्टोरी पर ज्यादा एंग्री रिएक्शन दिए।

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गर्भपात से संबंधित पोस्ट परसबसे ज्यादा कमेंट
बीते एक वर्षकी सबसे ज्यादा कमेंट वाली पोस्ट सीबीएन.कॉम की थी जिसे 10 लाख से ज्यादा कमेंट मिले थे। इसका विषय न्यूयॉर्क में गर्भपात को लीगल करने से जुड़ा था। साल की सबसे ज्यादा शेयर की गई खबर का विषय मानव तस्करी से जुड़ा था। प्लेटफॉर्म पर बहुत ज्यादा शेयर किया गया एक विषय 'मोमो गेम' था, जो डर की भावना को बढ़ारहा था। स्टडी में देखा गया कि सबसे ज्यादा शेयर या कमेंट की गई स्टोरी यूजर्स को गुस्सा दिलाने या बांटनेवाली थी।



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study says Facebook users have become angrier and more divided since last year's major changes in newsfeed

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इंसानों की नकल करता है यह रोबोट, 10 किलोमीटर दूर हो तो भी 5जी नेटवर्क से होता है कंट्रोल


गैजेट डेस्क. आगजनी की घटना हो या मेडिकल इमरजेंसी, 10 किलोमीटर दूर बैठकर भी इन पर काबू पाया जा सकेगा। जापान की दो कंपनी टोयोटा और एनटीटी डोकोमो ने मिलकर T-HR3 रोबोट तैयार किया है, जो हूबहू इंसानों की नकल करता है। हाल ही में कंपनी ने इसकी टेस्टिंग पूरी की जिसमें कंट्रोलर मशीन और रोबोट को वायरलेस 5जी नेटवर्क से जोड़ा गया। रोबोट को कंट्रोल करने के लिए एक खास कुर्सीनुमा माशीन बनाई गई है, जिसमें बैठकर रोबोट को कमांड दी जाती है।

  1. रोबोट और कंट्रोलर को वायरलेस 5जी नेटवर्क से जोड़ा गया। जिनकी बीच की दूरी 10 किलोमीटर रखी गई थी।

  2. टोयोटा ने कहना है कि इस तकनीक का इस्तेमाल हेल्थ केयर असिस्टेंट के तौर पर किया जा सकता है, साथ घर के कामों में भी इसका इस्तेमाल हो सकता है।

  3. इसे कंट्रोल करने के लिए इसके ऑपरेटर को कुर्सीनुमा मशीन पर बैठना होता है जिसमें वियरेबल हैंड, आर्म्स और फूट है। इसमें हेड माउंटेड डिस्प्ले भी है, जिसे ऑपरेटर को पहनना होता है।

  4. पावर को कंट्रोल करने के लिए इसमें टॉर्क सर्वो मॉड्यूल्स का इस्तेमाल किया गया है। इसमें मौजूद मास्टर मैन्युवरिंग सिस्टम से रोबोट की पूरी बॉडी इंसानों जैसी हरकत करती है।

  5. इस वायरलेस टेस्ट को 5जी नेटवर्क से पूरा किया गया, हालांकि इसके अलावा सारे कंट्रोल्स में वायरलेस कनेक्शन का इस्तेमाल किया गया।

  6. रोबोट का बैलेंस कंट्रोल करने के लिए इसमें खास तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जिससे यह किसी चीज से टकराने पर गिरता नहीं है।

  7. T-HR3 रोबोट 1540 एमएम ऊंचा है, जबकि इसका वजन सिर्फ 75 किलो है। इंसानो की तरह व्यवहार करने वाले इस रोबोट में दो एक्सल है और 10 ऊंगलियां है जिससे यह समान को पड़कता है।



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      toyota thr3 humanoid robot controlled by 5g connections

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दोनों एंड्रॉयड गो पर बेस्ड; पर फीचर्स के मामले में बेहतरीन है श्याओमी का नया फोन


गैजेट डेस्क. श्याओमी ने मंगलवार को भारत में अपने अबतक के सबसे सस्ते स्मार्टफोन रेडमी गो को लॉन्च कर दिया है। एंड्रॉयड 8.1 ओरियो (गो एडिशन) पर बेस्ड कंपनी का यह पहला स्मार्टफोन है, जिसकी कीमत 4,499 रुपए है। कीमत और फीचर्स के मामले में रेडमी गो का मुकाबला भारतीय बाजार में लंबे समय से मौजूद नोकिया 1 से होगा। फीचर्स के मामले में दोनों स्मार्टफोन एक जैसे ही है।

नोकिया 1 ने मार्च 2018 में भारतीय बाजार में एंट्री की थी, यानी यह लगभग एक साल से बाजार में अपनी पैठ बनाए हुए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि दोनों ही स्मार्टफोन फर्स्ट टाइम एंड्रॉयड यूजर्स को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। तो आइए देखते हैं दोनों स्मार्टफोन में क्या है खास...

दोनों स्मार्टफोन के स्पेसिफिकेशंस

स्पेसिफिकेशन रेडमी गो नोकिया 1
डिस्प्ले 5 इंच एचडी 4.5 इंच FWVGA
रेजोल्यूशन 720x1280 पिक्सल 480x854 पिक्सल
प्रोसेसर क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 425 क्वाड-कोर मीडियाटेक MT6737M
सिम ड्युअल नैनो सिम ड्युअल नैनो सिम
रैम 1 जीबी 1 जीबी
स्टोरेज 8 जीबी/16 जीबी 8 जीबी
प्राइमरी कैमरा 8 मेगापिक्सल 5 मेगापिक्सल
सेकेंडरी कैमरा 5 मेगापिक्सल 2 मेगापिक्सल
एक्सपेंडेबल मेमोरी 128 जीबी तक 128 जीबी तक
ओएस एंड्रॉयड 8.1 ओरियो (गो एडिशन) एंड्रॉयड 8.1 ओरियो (गो एडिशन)
कनेक्टिविटी 4G VoLTE, वाईफाई 802.11, ब्लूटूथ v4.1, जीपीएस 4G VoLTE,वाईफाई 802.11, ब्लूटूथ v4.2, जीपीएस
बैटरी 3,000mAh 2,150mAh
स्टैंडबाय टाइम 10 दिन 15 दिन
कलर ब्लू और ब्लैक अजुर एंड ग्रे, यलो एंड पिंक
वजन 137 ग्राम -
डायमेंशन(L*B*H) 140.4x70.1x8.35एमएम 133.6x67.78x9.5एमएम
कीमत 4,499 रुपए 4,390 रुपए



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Redmi Go is much more better than Nokia 1, know features price and specifications

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एंड्रॉयड गो वाला 5 इंच का सबसे सस्ता रेडमी गो स्मार्टफोन लॉन्च, कीमत 4499 रुपए


गैजेट डेस्क. चीनी कंपनी श्याओमी ने भारत मेंगो सीरीज का पहला स्मार्टफोन मंगलवार को लॉन्च किया। यह कंपनी का अबतक का सबसे सस्ता स्मार्टफोन है, जिसकी कीमत सिर्फ4,499रुपए है। यहफोनओरियो ऑपरेटिंग सिस्टम बेस्ड है और इसका गूगल असिस्टेंट फीचर हिंदी के साथ 20से अधिक क्षेत्रीय भाषाओंको स्पोर्ट करता है।रेडमी गो को फिलीपींस और यूरोप में लॉन्च किया जा चुका है। फिलीपींस में इसकी कीमत 5,200 रुपए औरयूरोप में6,500 रुपए थी।

  1. रेडमी गो श्याओमी का पहला स्मार्टफोन है जो एंड्रॉयड गो एडिशन पर बेस्ड है। कंपनी का दावा है कि ऑपरेटिंग सिस्टम का यह वर्जन एक जीबी या उससे कम रैम वाले फोन को स्मूथ परफॉर्मेंस देता है।

  2. भारत में इसकी सेल 22 मार्च से शुरू होगी, जिसे श्याओमी की ऑफिशियल साइट, एमआई होम स्टोर और फ्लिपकार्ट से खरीदा जा सकेगा।

  3. एंड्रॉयड गो का बेहतर एक्सपीरियंस देने के लिए कंपनी ने यूट्यूब का लो वर्जन यूट्यूब-गो फोन में दिया है जो फास्ट तो ही है साथ ही डेटा की खपत भी कम करता है। फोन में गूगल मैप, जीमेल और गूगल असिस्टेंट के भी गो वर्जन मौजूद है।

  4. फोन में 5 इंच का एचडी डिस्प्ले है। यह स्नैपड्रैगन 425 चिपसेटपर बेस्ड है। यह 1 जीबी रैम के साथ 8 जीबी और 16 जीबी स्टोरेज के वैरिएंट्स में उपलब्ध होगा।

  5. फोन मेंएलईडी फ्लैश के साथ8 मेगापिक्सल का रियरकैमरा मिलता है, जिसमें 11 तरह के फिल्टर मोड सिलेक्ट करने का ऑप्शन भी है।

  6. फोन फुल एचडी रिकॉर्डिंग को सपोर्ट करता है। फोन में 5 मेगापिक्सल फ्रंटकैमरा है। जिसमें वीडियो और सेल्फी के लिए एचडी रिकॉर्डिंग का ऑप्शन भी मिलता है।

  7. डिस्प्ले 5 इंच एचडी
    रिजोल्यूशन 720x1280 पिक्सल
    पिक्सल डेंसिटी 296ppi
    प्रोसेसर क्वाड-कोर स्नैपड्रैगन 425 SoC
    फ्रंट कैमरा 5 मेगापिक्सल सेंसर
    रियर कैमरा 8 मेगापिक्सल सेंसर
    रैम 1 जीबी
    स्टोरेज 8 जीबी/16 जीबी
    सिम ड्युअल सिम (नैनो)
    ओएस एंड्रॉयड 8.1 ओरियो (गो एडिशन)
    कनेक्टिविटी 4G LTE, वाईफाई 280.11, ब्लूटूथ v4.1, जीपीएस, माइक्रो यूएसबी
    डायमेंशन(l*b*h) 140.4x70.1x8.35 एमएम
    बैटरी 3,000mAh
    कीमत 4,499 रुपए



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      Redmi Go Launched in India, know features, price and specifications and camera
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6 कंपनियों के ढाई करोड़ यूजर्स का डेटा हैक, डार्क वेब पर पर्सनल इंफॉर्मेशन बेच रहा सीरियल हैकर


गैजेट डेस्क. डार्क वेब पर 6 बड़ी कंपनियों के करीब ढाई करोड़ यूजर्स का पर्सनल डेटा बेचा जा रहा है। एक सीरियल हैकर ने इस डेटा को हैक किया था और वो अब इसे डार्क वेब पर बेच रहा है। डेटा की कीमत 3 लाख रुपए से ज्यादा है। इसमें अकाउंट होल्डर का नाम, ईमेल और पासवर्ड जैसी महत्वपूर्ण जानकारीशामिल है।

लीक हुआ डेटागेम डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म गेम सलाद, ब्राजिलियन बुक स्टोर एसटेंट वर्चुअल, ऑनलाइन टास्क मैनेजर और शेड्यूलिंग एप कॉबिक और लाइफबेयर के अलावा इंडोनेशिया की ई कॉमर्स कंपनी बुकालापाक और इंडोनेशिया की स्टूडेंट करियर साइट यूथमैन्युअल कंपनी के यूजर्स काहै। गेमसलाद एक गेम डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म है, जिसके 75 से ज्यादा गेम्स एपल एप स्टोर के टॉप 100 में जगह बना चुके हैं। लीक डाटा कंपनियों में से गेमसलाद, कॉबिक और लाइफबेयर को भारतीय भी इस्तेमाल करते हैं। हालांकि यह भारत में ज्यादा प्रचलित नहीं है।

सीरियल हैकर नोस्टिक प्लेयर नाम से जाना जाता है। इस हैकर ने पिछले महीने भी 16 कंपनियों के 61 करोड़ से ज्यादा यूजर्स का डेटा इसी तरह डार्क वेब पर उपलब्ध करवाया था। जिसमें ट्रेवल बुकिंग साइट इक्सिगो और वीडियो स्ट्रीमिंग साइट यूनाओ का डेटा शामिल था।

हैकर नोस्टिक प्लेयर ने जेडनेट से बात करते हुए कहा, 'मुझे यह देखकर दुख होता है कि कोई भी सीखना नहीं चाहता। 2019 में भी सुरक्षा का ऐसा स्तर देखकर मुझे गुस्सा आता है।'


चेक करें कहीं आपकी डिटेल तो नहीं हुई लीक
अगर आप चेक करना चाहते हैं कि आपका डेटा लीक हुआ है या नहीं तो आप haveibeenpwned.com पर जाकर भी चेक कर सकते हैं। इस वेबसाइट पर जाकर आपको अपनी ईमेल आईडी डालनी होगी। यदि वेबसाइट बताती है कि आपका डेटा चोरी हुआ है, तो आपको पासवर्ड बदल लेना चाहिए।

क्या होता है डार्क वेब?
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट के मुताबिक इंटरनेट का 96% डार्क वेब है और हम जो इंटरनेट देखते हैं वो सिर्फ 4% है।डार्क वेब पर इंटरनेट के आम ब्राउजर पर नहीं खुलते और इन्हें सिर्फ TOR ब्राउजर पर ही खोला जा सकता है और इन्हें ट्रैक करना काफी मुश्किल होता है। डार्क वेब का इस्तेमाल ज्यादातर आपराधिक गतिविधियों के लिए ही किया जाता है। यहां पर हैकिंग सर्विस की तरह होती है, मतलब पैसे देकर किसी की भी हैकिंग करवाई जा सकती है।



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serial hacker is selling 26 million user's data on dark web

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श्याओमी का रेडमी गो लॉन्च; कीमत 4,499 रुपए


  • रेडमी गो एंड्रॉयड ओरियो ऑपरेटिंग सिस्टम बेस्ड है। इसका गूगल असिस्टेंट फीचर हिंदी के साथ 20 से अधिक क्षेत्रीय भाषा स्पोर्ट करता है।
  • यह श्याओमी का सबसे सस्ता फोन है। भारत में इसकी सेल 22 मार्च से शुरू होगी। इसे एमआई होम स्टोर और फ्लिपकार्ट से खरीदा जा सकेगा।


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Xiaomi launches its first android Go phone Redmi go

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आज भारत में लॉन्च होगा रेडमी गो, हिंदी में होगा गूगल असिस्टेंट फीचर


गैजेट डेस्क. चीनी स्मार्टफोन कंपनी श्याओमी भारत में अपनी नई गो सीरीज फोन को लॉन्च करने वाली है। कंपनी ने सबसे पहले रेडमी गो फिलीपींस में लॉन्च किया था। अब कंपनी इसे भारत में लॉन्च करने जा रही है जिसे दिल्ली में हो रहे इवेंट में लॉन्च किया जाएगा।

रेडमी गो के हाइलाइट्स

  • रेडमी गो में 5 इंच की एचडी डिस्प्ले, क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 425 SoC प्रोसेसर, 1 जीबी रैम और 332 जीबी स्टोरेज मिलेगा।
  • एंड्रॉयड ओरियो पर चलने वाले इसे फोन में गूगल असिस्टेंट फीचर मिलेगा जो हिंदी भाषा में होगा।

ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर हो रही फोन की कैपेंनिंग

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Redmi Go Set to Launch in India Today, know features, price and specifications

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पहली बार 3000 किमी दूर बैठे डॉक्टर ने 5जी नेटवर्क की मदद से दिमाग की सफल सर्जरी की


गैजेट डेस्क. चीन में एक डॉक्टर ने 3,000 किलोमीटर दूर बैठकर पर्किंसन से ग्रस्त मरीज के दिमाग की सर्जरी की। रोबोट की मदद से की गई इस सर्जरी में 5जी मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। चीनी मीडिया का दावा है कि दुनिया में इस तरह से पहली बार सर्जरी हुई है।

  1. मरीज बीजिंग के एक हॉस्पिटल में भर्ती था। वहीं, सर्जरी करने वाले डॉक्टर लिंग झिपेई करीब 3,000 किमी दूर हेनान प्रांत के सान्या शहर में मौजूद थे। डॉक्टर झिपेई ने सान्या से ही रोबोट और मशीनों को नियंत्रित किया। एक मोबाइल एप की मदद से उन्होंने यह सर्जरी पूरी की।

  2. इस मामले में 5जी नेटवर्क की अहम भूमिका रही, क्योंकि इंटरनेट की सही स्पीड होने से ही रियल टाइम ऑपरेशन संभव हो सका।

  3. पीपुल लिबरेशन आर्मी में सर्जन डॉ. झिपेई ने बताया कि 5जी टेक्नोलॉजी ने 4जी में आने वाली वीडियो लैग और रिमोट कंट्रोल डिले जैसी मुश्किलों को दूर कर दिया। इससे दिमाग में इंप्लांट आसानी से हो सका। सर्जरी के बाद मरीज ने कहा कि उसे अच्छा महसूस हो रहा है।

  4. यह सर्जरी शनिवार को करीब 3 घंटे तक चली। इस दौरान मरीज के दिमाग में इलेक्ट्रोड लगाए गए। डॉ. झिपेई के मुताबिक इस टेक्नोलॉजी से दूर-दराज के इलाकों में जाए बिना आसानी से सर्जरी की जा सकेगी। वहीं मरीजों को भी बड़े शहरों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

  5. पर्किंसन रोग दिमाग की नर्व को नुकसान पहुंचने पर होता है। दिमाग से जाने वाले सिग्नल अनियंत्रित हो जाते हैं। इससे मांसपेशियों में कठोरता और झटके भी आते हैं। दुनियाभर में 1 करोड़ से ज्यादा लोग इस समस्या से ग्रस्त हैं। दिमाग में प्रत्यारोपण के बाद मरीज अपनी गतिविधियों को नियंत्रित कर सकता है, इसके साथ ही मांसपेशियों का कामकाज भी सामान्य हो जाता है।

  6. डॉ. झिपेई ने उम्मीद जताई कि 5जी टेक्नोलॉजी की मदद से जल्द ही हम दूर स्थित कई सारे हॉस्पिटलों में ऑपरेशन कर सकेंगे। इससे मरीजों को स्थानीय हॉस्पिटलों में ही बेहतर इलाज मिल सकेगा।



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      World first remote brain surgery via 5G network done in China

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25 मार्च के इवेंट से पहले एपल ने लॉन्च किए आईपैड एयर और आईपैड मिनी, कीमत 36 हजार से शुरू


गैजेट डेस्क.टेक कंपनी एपल ने सोमवार को अपने दो प्रोडक्ट आईपैड एयर और आईपैड मिनी रिवील किए हैं।एपल का वेबस्टोर रविवार शाम से ऑफलाइन था, जिससे किसी नए प्रोडक्ट की लॉन्चिंग का अंदाजा लगाया जा रहा था।

कंपनी ने 10.5 इंच का आईपैड एयर और 7.9 इंच का आईपैड मिनी अपनी वेबसाइट पर रिवील किया है। कंपनी की तरफ से कोई रिलीज डेट नहीं बताई गई है।हालांकिकहा जा रहा है कि यह प्रोडक्ट्स अगले हफ्ते से एपल स्टोर्स में उपलब्ध होंगे।

25 मार्च को कंपनी का एक मीडिया इवेंट होने वाला है। इवेंट के बारे में कंपनी ने कोई भी जानकारी पब्लिक नहीं की है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस इवेंट में कंपनी वीडियो स्ट्रीमिंग सर्विस लॉन्च कर सकती है।

क्या है खास

  • आईपैड एयर और मिनीई सिम को सपोर्ट करते हैं।ई सिम सेदुनिया के किसी भी कोने में वायरलेस डेटा प्लानएक्सेस किये जा सकते हैं।
  • आईपैड एयर और मिनीमें ए12 बायोनिक चिप और न्यूरल इंजन काइस्तेमाल किया गया है।
  • आईपैड एयर स्मार्ट कीबोर्ड को सपोर्ट करते हैं।स्मार्ट कीबोर्ड को जरूरत के हिसाब से खोलकर इस्तेमाल किया जा सकता है, जरूरत ना होने पर यह फोल्ड होकर बैक कवर का काम करता है।
  • आईपैड एयर और मिनी एपल पेंसिल को सपोर्ट करते हैं।


दोनों के स्पेसिफिकेशन

फीचर आईपैड एयर आईपैड मिनी
स्क्रीन साइज 10.5 इंच रेटिना डिस्प्ले 7.9 इंचरेटिना डिस्प्ले
फ्रंट कैमरा 7मेगापिक्सल 7 मेगापिक्सल
बैक कैमरा 8 मेगापिक्सल 8 मेगापिक्सल
प्रोसेसर ए12 बायोनिक, न्यूरल इंजन ए12 बायोनिक,न्यूरल इंजन
बैटरी लाइफ 10 घंटे (सिंगल चार्ज) 10 घंटे (सिंगल चार्ज)
स्टोरेज 64/256 जीबी 64/256 जीबी
कलर स्पेस ग्रे, सिल्वर और गोल्ड स्पेस ग्रे, सिल्वर और गोल्ड
वजन 456 ग्राम 300 ग्राम
मोटाई 6.1 मिमी 6.1 मिमी
कनेक्टिविटी वाई-फाई, 4जी LTE वाई-फाई, 4जी LTE
कीमत(वाईफाई मॉडल) $499 (34,300 रुपए लगभग) $399 (27,400 रुपए लगभग)
कीमत(वाईफाई+सेल्युलर) $699 (48,000 रुपए लगभग) $529 (36,300 रुपए लगभग)


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apple launches ipod air and ipod mini ahead of 25th march event
apple launches ipod air and ipod mini ahead of 25th march event
apple launches ipod air and ipod mini ahead of 25th march event

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चुनावों में फेक न्यूज से बचने के लिए साथ आए व्हाट्सएप और नैसकॉम, भारत में डिजिटल साक्षरता बढ़ाने के लिए करेंगे काम


गैजेट डेस्क.आम चुनाव के दौरान फर्जी खबरों से बचने के लिए व्हाट्सएप और नैसकॉम फाउंडेशन साथ आए हैं। दोनो मिलकर भारत में डिजिटल साक्षरता बढ़ाने के लिए ट्रेनिंग देंगे। इस कैपेंनके तहत व्हाट्सएप और नैसकॉम फाउंडेशन मिलकर एक लाख से ज्यादा भारतीयों को फर्जी खबरों को पहचानने की ट्रेनिंग और व्हाट्सएप पर सुरक्षित रहने की जानकारी देंगे।


फर्जी खबरों को पहचानने और रिपोर्ट करने की देंगे ट्रेनिंग

ट्रेनिंग के लिए एक विशेष पाठ्यक्रम तय किया गया है, इसे व्हाट्सएप और नैसकॉम ने मिलकर तैयार किया है। पाठ्यक्रम को कई क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्धकरवायाजाएगा। इसमें ऐसे उपयोगी टूल्स की जानकारी दी जाएगी, जिनकी मदद से यूजर्स फॉरवर्ड किए गए मैसेज को वेरिफाईकर सकेंगे। इनकी मदद सेयूजर्ससंदिग्ध कंटेट को फैक्ट चेकर्स और लॉ एनफोर्समेंट एजेंसी को रिपोर्ट भी कर सकेंगे।

ईच वन, टीच थ्री

ट्रेनिंग नैसकॉम फाउंडेशन के स्वयंसेवकों द्वारा दी जाएगी। कोई भी व्यक्तिनैसकॉम की ऑफिशियल साइट पर जाकर एक फॉर्म भरकर स्वयंसेवक बन सकता है।स्वयंसेवकों के लिए 'ईच वन टीच थ्री' कैपेंन लॉन्च किया गया है। जिसके तहत हर व्यक्ति जो इस ट्रेनिंग का हिस्सा बनता है, वो इसमें सीखे गए सबकों को तीन अन्य लोगों तक पहुंचाएगा। इस तरह ईच वन टीच थ्री कैपेंन के जरिए एक नेटवर्क चेन बनाकर जरूरी जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सकेगा।

स्वयंसेवक ट्रेनिंग केसबकों को सोशल मीडिया पर भी शेयर करेंगे, ताकि फर्जी मैसेजससे बचाव की जानकारी सभी लोगों तक पहुंच सके। कंपनी की पहली ट्रेनिंग 27 मार्च को दिल्ली में होगी। जिसके बाद देश भर में अलग-अलग स्थानों पर ट्रेनिंग वर्कशॉप और कॉलेजों में रोड शो जैसी एक्टिविटी आयोजित की जाएगी।



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whatsapp and nasscom join hands to impart digital literacy in india
whatsapp and nasscom join hands to impart digital literacy in india

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न्यूजीलैंड की बड़ी कंपनियों ने फेसबुक और गूगल को विज्ञापन न देने का लिया फैसला


गैजेट डेस्क. न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में दो मस्जिदों में हुई गोलीबारी की घटना का वीडियो कई घंटों तक फेसबुक पर रहा। फेसबुक ने वीडियो को हटाने मेंदेरी की जिससे नाराजन्यूजीलैंड की कई बड़ी कंपनियों ने फेसबुक और गूगल से विज्ञापन न देने कामन बना लिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिकएएसबी बैंक, लोटो NZ, बर्गर किंग, स्पार्क जैसी बड़ी कंपनियां इस फैसले में शामिल है हालांकि अभी यह पुष्टि नहीं हो पाई है इन कंपनियों ने कितने समय के लिएडिजिटल विज्ञापन देना बंद किया है।

क्या है मामला...

  • न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में अल-नूर और लिनवुड मस्जिद में शुक्रवार (15 मार्च) को गोलीबारी हुई थी, जिसमें 49 लोगों की मौत हो गई थी। प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न ने इसे आतंकी हमला बताया। 29 साल में न्यूजीलैंड में यह पहला मौका था, जब इस तरह की मास शूटिंग हुई।
  • हमलावर ने GoProकैमारे का इस्तेमाल कर घटना की लाइवस्ट्रीमिंग फेसबुक पर की थी। मस्जिदोंमें की गई फायरिंग का वीडियो लगभग 17 मिनट का है, जो घटना के बाद भी कई घंटों तक फेसबुक पर रहा। डेटा मोडरेटर की बात करने वाली फेसबुक कंपनी ने इस पर काफी देरी से कार्यवाही की।

24 घंटेमें हटाए 15 लाख वीडियो

फेसबुक पर गोलीबारी का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर दुनियाभर में काफीवायरल हुआ। मामलें को तूल पकड़ता देख कंपनी ने वीडियो हटाने का काम शुरू किया। जिस लेकरकंपनी ने सफाई दी कि वह24 घंटे के भीतर 15 लाख से ज्यादावीडियो को फेसबुक प्लेटफार्म से डिलीट कर चुकी है।



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new zealand firms to pull ads from facebook and google

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फेसबुक को पहले से थी कैंब्रिज एनालिटिका के डेटा चोरी करने की जानकारी


गैजेट डेस्क.सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के खिलाफ एक और खुलासा हुआ है। कंपनी अभी तक यह कहती रही थी कि ब्रिटिश कंसल्टेंसी फर्म कैंब्रिज एनालिटिका द्वारा डेटा चोरी की उसे कोई जानकारी नहीं थी। लेकिन नए खुलासे के मुताबिक फेसबुक को इसका पता था। यही नहीं कैंब्रिज एनालिटिका और फेसबुक के अधिकारियों के बीच मीटिंग भी हुई थी। अमेरिकी रेगुलेटर्स ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है।

ट्रंप के पक्ष में माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल हुआ था यूजर्स का डेटा

ब्रिटिश अखबार ऑब्जर्वर के मुताबिक फेसबुक के बोर्ड मेंबर मार्क आंद्रेसीन और कैंब्रिज एनालिटिका के अधिकारी क्रिस्टोफर वाइली के बीच मीटिंग हुई थी। आंद्रेसीन का सिलिकॉन वैली में काफी रुतबा है। वह मार्क जकरबर्ग के करीबी माने जाते हैं। वह फेसबुक के शुरुआती निवेशकों में हैं। वाइली बाद में व्हिसलब्लोअर बन गया और खुलासा किया कि कैंब्रिज एनालिटिका फेसबुक से डेटा ले रही थी। वाइली और आंद्रेसीन की बैठक में मौजूद रहने वाले सूत्रों ने बताया कि इसमें इस बात पर चर्चा हुई की कैंब्रिज एनालिटिका फेसबुक से डेटा लेकर क्या कर रही है। आंद्रेसीन और वाइली की मुलाकात 2016 में हुई थी। उन्हीं दिनों कैंब्रिज एनालिटिका ने अमेरिका के राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप के लिए प्रचार का काम शुरू किया था। आरोप है कि कैंब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक के 8.7 करोड़ यूजर का डाटा चोरी किया था। इसका इस्तेमाल ट्रंप के पक्ष में माहौल बनाने के लिए किया गया।

ब्रिटेन में लगा सिर्फ 4.5 करोड़ का जुर्माना
कोलंबिया के अटार्नी जनरल कार्ल रेसिंग ने दिसंबर 2018 में पहली बार कैंब्रिज एनालिटिका मामले में फेसबुक के खिलाफ याचिका दायर की थी। उनका आरोप था कि फेसबुक ने करोड़ों यूजर्स का डेटा राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म कैंब्रिज को दिया। अभी अमेरिकी रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन, फेडरल ट्रेड कमीशन और न्याय मंत्रालय फेसबुक के खिलाफ जांच कर रहे हैं। कैंब्रिज एनालिटिका ने ब्रिटेन के नागरिकों का भी डाटा चुराया था। वहां फेसबुक पर 5 लाख पाउंड (4.5 करोड़ रुपए) का जुर्माना लगाया गया है। ब्रिटेन का डेटा रेगुलेटर अधिकतम इतना जुर्माना ही लगा सकता है। पिछले हफ्ते न्यू टाइम्स ने खुलासा किया था कि विभिन्न कंपनियों के साथ डेटा शेयर करने की डील के आरोप में फेसबुक के खिलाफ अमेरिका में आपराधिक जांच हो सकती है।

चुनाव में डेटा के दुरुपयोग के बादअमेरिका में 1.5 करोड़ यूजर्स कम हुए

अमेरिका में 2017 में पहली बार राष्ट्रपति चुनाव में फेसबुक के दुरुपयोग का खुलासा हुआ था। तब से वहां इसके यूजर्स की संख्या 1.5 करोड़ कम हो चुकी है। खास कर 12 से 34 आयु वर्ग के लोगों में इसकी लोकप्रियता घटी है।

आतंकी हमला लाइव दिखाने के विरोध में एयर एशिया के सीईओ ने छोड़ा फेसबुक

न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में पिछले हफ्ते दो मस्जिदों में जो आतंकवादी हमला हुआ, उसे आतंकी ने फेसबुक पर लाइव दिखाया था। एयर एशिया ग्रुप के संस्थापक सीईओ टोनी फर्नांडीज ने इसके विरोध पर फेसबुक से हटने का फैसला किया है। यहां उनके 6.7 लाख फॉलोअर थे।



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